धर्म एवं ज्योतिष
ये 4 बातें अपने खास को भी न बताएं, वरना सबसे बड़ा दुश्मन बना लेंगे आप, मुश्किल में पड़ सकती है जिंदगी
24 Sep, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर इंसान की ज़िंदगी में कुछ बातें ऐसी होती हैं, जो अगर दूसरों को बता दी जाएं, तो वो आपके खिलाफ ही इस्तेमाल होने लगती हैं. कई बार हम चाहकर भी किसी को मना नहीं कर पाते और अपनी पर्सनल बातें शेयर कर बैठते हैं, लेकिन बाद में जब वही बातें हमारे खिलाफ चलती हैं, तब पछतावा होता है, अगर आप भी अपनी इज़्ज़त, शांति और रिश्तों को बचाकर रखना चाहते हैं, तो इन चार बातों को कभी किसी के साथ न बांटें- चाहे वो कितना भी करीबी क्यों न हो, ये बातें छोटी लग सकती हैं लेकिन इनका असर बहुत गहरा होता है. चलिए जानते हैं
1. दान-पुण्य और भलाई का काम
आपने अगर किसी की मदद की है, किसी भूखे को खाना खिलाया है, मंदिर में दान दिया है या किसी गरीब की फीस भर दी है – तो इसे प्रचार का ज़रिया मत बनाइए. जो मदद गिनवाई जाए, वो एहसान बन जाती है. सच्चा दान वही है, जो बिना दिखावे के किया जाए. कहा भी गया है कि एक हाथ से दान करो तो दूसरे हाथ को भी खबर न हो. लोगों को बताने से न तो आपका पुण्य बढ़ेगा और न ही इज्जत. उल्टा लोग सोचते हैं कि आप घमंड कर रहे हैं या दिखावा कर रहे हैं.
2. अपनी कमाई यानी इनकम
आजकल सोशल मीडिया हो या दोस्तों की महफिल, लोग अपनी कमाई की डींगे हांकते हैं- “अब तो लाखों कमा रहा हूं”, “मेरी सैलरी इतनी हो गई” वगैरह वगैरह, लेकिन ये आदत आपको नुकसान भी पहुंचा सकती है. कुछ लोग जलने लगते हैं, कुछ नज़रें लगाने लगते हैं और कुछ फायदा उठाने की सोचने लगते हैं. यहां तक कि अपने परिवार में भी इनकम की जानकारी बहुत सोच-समझकर बांटना चाहिए. हर किसी को ये बताने की ज़रूरत नहीं है कि आपकी जेब में क्या चल रहा है.
3. अपनी कमजोरी या डर
हर इंसान के अंदर कुछ न कुछ डर या कमजोरियां होती हैं – किसी को रिजेक्शन का डर होता है, किसी को अकेलेपन का, किसी को आर्थिक तंगी का या फिर खुद पर भरोसा न होने का, लेकिन इन बातों को किसी के साथ शेयर करते वक्त दस बार सोचें. दुनिया बहुत चालाक है, लोग आपकी इन्हीं कमजोरियों का फायदा उठाकर आपको दबाने की कोशिश करेंगे. कुछ लोग ताने देंगे, कुछ लोग मजाक उड़ाएंगे. इसलिए अपनी कमजोरी को खुद तक सीमित रखें और उससे लड़ना सीखें, न कि उसे सबको बताना.
4. अपने पुराने रिश्ते या अफेयर
कई लोग अपने नए पार्टनर या दोस्तों के सामने अपने बीते हुए रिश्तों की कहानी सुनाने लगते हैं – “पहले वो मेरी लाइफ में था/थी…”, “हम दोनों बहुत करीब थे…”, “वो मुझे छोड़ गया…” वगैरह. इससे न सिर्फ सामने वाले का भरोसा डगमगाता है, बल्कि कभी झगड़े की हालत में वही बातें तानों और इल्ज़ामों में बदल जाती हैं. अपने भूतकाल को जितना छुपाकर रखेंगे, उतना ही आपका वर्तमान शांत रहेगा. पुराने रिश्ते की बातें हमेशा सीक्रेट रखें.
नवरात्र में करें इस मंत्र का जाप, मिलेगा सौभाग्य, खत्म होगी विपत्ति
24 Sep, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शारदीय नवरात्रि चल रही है दुर्गा मंदिरों में माता रानी की पूजा आराधना चल रही है. नवरात्रि का आज दूसरा दिन है और आज के दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा आराधना का विधान है .ऐसी स्थिति में 9 दिनों तक माता रानी अपने भक्तों के बीच में भी रहेगी 9 दिनों तक विधि विधान पूर्वक पूजा आराधना करके व्रत करने से माता दुर्गा की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है. ऐसी स्थिति में नवरात्रि के दौरान अगर आप दुर्गा चालीसा के साथ मां दुर्गा के बीज मंत्र का जाप करते हैं.इससे कई गुना फल की भी प्राप्ति होती है .नवरात्र के समय खासकर श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करना चाहिए .धार्मिक मान्यता के अनुसार अगर आप दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं. उसके मंत्र का जाप करते हैं तो जीवन में सुख शांति और शक्ति की अनुभूति भी प्राप्त होती है.
अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि साल में चार बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. जिसमें एक शारदीय नवरात्रि दूसरा चैत्र नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि होती है. नवरात्रि के नौ दिनों तक माता रानी की पूजा आराधना किया जाता है.लेकिन इस बार शारदीय नवरात्रि 10 दिनों तक है ऐसी स्थिति में मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से जीवन की सभी विपत्तियों से मुक्ति मिलती है साथ ही सौभाग्य की भी प्राप्ति होती है.
रोग से मुक्ति के लिए करे इस मंत्र का जाप
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा
रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां
त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।
विपत्ति नाश के लिए करे इस मंत्र का जप
करोतु सा न: शुभहेतुरीश्वरी
शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापद:।
सौभाग्य की प्राप्ति के लिए करे इस मंत्र जप
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।
कल्याण प्राप्ति के लिए करे इस मंत्र का जप
सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोस्तु ते।।
शक्ति प्राप्त करने के लिए करे इस मंत्र का जप
सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि।
गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोस्तु ते।।
इसके अलावा अगर आप इन मंत्र का जाप कर रहे हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि मां दुर्गा के मंत्रों का जाप लाल चंदन की माला से करना उत्तम माना जाता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 24 सितम्बर 2025)
24 Sep, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष- शत्रुओं का साथ मिलेगा, शत्रु कार्यों में प्रगति होगी।
वृष- मित्रों का सहयोग, भाग्य की उन्नति प्रयत्नों से मेल मिलाप अवश्य होगा।
मिथुन- मित्रों का सहयोग मिलेगा, भाग्य की उन्नति पारिवारिक उत्तरदायित्व की प्राप्ति होगी।
कर्क- स्त्री संतान सुख मिलेगा, नौकरी वालों की पदोन्नति, वर्ग योग बनेगा भाग्योदय हो।
सिंह- पत्नी के स्वास्थ की चिन्ता, भोग से धन की हानि का योग अवश्य ही होगा।
कन्या- कार्य व्यवसाय में अर्थ लाभ अवश्य ही होगा, आलस्य की स्थिति बनेंगी, ध्यान दें।
तुला- आर्थिक सामाजिक राजनैतिक विकास लाभ, स्त्री पक्ष आदि से सुख अवश्य होगा।
वृश्चिक- पत्नी संतान का सुख, आकस्मिक धन का लाभ, किन्तु विवाद निपटा अवश्य लें।
धनु- पुरानी समस्याओं का समाधान होगा, अच्छे लोगों से सहयोग होगा।
मकर- इष्ट मित्रों से इच्छानुकूल की प्राप्ति होगी, दाम्पत्य जीवन सुखी रहेगा।
कुंभ- विरोध की स्थिति बनेगी, गृह कलह से मन अप्रसन्न रहेगा, समय का ध्यान दें।
मीन- व्यर्थ विवाद होने का भय, सामान्य व्यवहार का वातावण अवश्य ही होगा, ध्यान दें।
नवरात्रि के 9 दिन और 9 शक्तियां, हर दिन का है खास महत्व, देते हैं जीवन से जुड़े ये बड़े संदेश
23 Sep, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शारदीय नवरात्रि 2025 की शुरआत हो चुकी है और नवरात्रि के नौ दिन देवी दुर्गा के नौ रूपों की उपासना के लिए माने गए हैं. नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ रूपों की उपासना से जीवन में साहस, स्वास्थ्य, समृद्धि और शांति आती है. यह समय ग्रह दोष निवारण और आध्यात्मिक उन्नति के लिए विशेष माना गया है. प्रत्येक देवी जीवन के एक विशेष आयाम को दर्शाती हैं और साधक को अलग-अलग आशीर्वाद प्रदान करती हैं. मार्कण्डेय पुराण, दुर्गा सप्तशती और देवी भागवत पुराण में इन रूपों की महिमा का बखान है. आइए जानते हैं मां दुर्गा की इन 9 शक्तियों के बारे में…
मां शैलपुत्री
पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित है और ये आत्मबल के साथ ही स्थिरता का प्रतीक हैं. घोड़े पर सवार पर्वतराज हिमालय की पुत्री के हाथ में त्रिशूल और कमल विद्यमान है. प्रतिपदा यानी नवरात्र का पहला दिन और किसी भी यात्रा की शुरुआत आत्मबल यानी खुद पर विश्वास के साथ होती है. नौ दिन का ये पर्व भी तो यात्रा ही है.
मां ब्रह्मचारिणी
दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी का है, जो संयम और साधना की शक्ति मानी जाती हैं. हाथ में जप माला और कमंडल, तपस्विनी स्वरूप मां की आराधना का सहज संदेश धैर्य और अनुशासन है, ऐसे गुण जिनसे जीवन में धीरज का संचार होता है.
मां चंद्रघंटा
तीसरा दिन भय हारिणी योद्धा मां चंद्रघंटा का है, जिनके मस्तक पर अर्धचंद्र है और जो दस भुजाओं से संपन्न हैं. शक्ति, साहस, सुरक्षा और आत्मरक्षा है. संदेश सिर्फ एक है कि जीवन डर से नहीं हिम्मत से जिया जाता है.
मां कूष्मांडा
चौथा दिन, सृजन की देवी के नाम से विख्यात मां कूष्मांडा का है. ‘कू’ का मतलब होता है छोटा, ‘ऊष्मा’ का मतलब है ऊर्जा, और “अंडा” का मतलब है ब्रह्मांड. यह वह अवतार है जिसमें मां ने इस दुनिया को रचा है. ये स्वरूप एक नए जीवन की रचना करने वाला है. मां कूष्मांडा के हाथों में एक मटका है, जिसे सृजन का प्रतीक माना जाता है. मटके को अक्सर गर्भ के रूप में देखा जाता है, जिसमें एक नया जीवन पलता है. इस अवतार से हमें सबक मिलता है कि जीवन में नए सृजन के लिए हमें अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाना चाहिए.
मां स्कंदमाता
पांचवां दिन मां स्कंदमाता का है. भगवान कार्तिकेय की माता, गोद में बाल रूप स्कंद लिए हुए देवी मातृत्व और करुणा का प्रतीक हैं. इनकी आराधना से सिर्फ एक संदेश मिलता है कि प्यार, ममता और सेवा किसी भी मनुष्य की बड़ी शक्तियां हैं.
मां कात्यायनी
छठा दिन न्याय की देवी मां कात्यायनी को समर्पित है. सिंह पर सवार, चार भुजा और युद्ध मुद्रा इस अवतार की पहचान है. साहस,न्याय और शक्ति का प्रतीक मां अन्याय के खिलाफ बेखौफ डटे रहने की सीख देती हैं.
मां कालरात्रि
सातवां दिवस मां कालरात्रि का है. जो अंधकार में प्रकाशोन्मुख होने के लिए प्रेरित करती हैं. खुले बाल, अंधेरे के समान काले रंग और विकराल मुखी काली शुभकारी हैं. मां अज्ञान, डर और बुराई का विनाश करने वाली मानी जाती हैं.
मां महागौरी
आठवां दिन, मां महागौरी शांति और सौंदर्य की मूरत हैं. अत्यंत दौर वर्ण, सफेद वस्त्र और बैल पर सवार हैं. ये शुद्धता, करुणा और आत्मशांति की प्रतीक हैं.
मां सिद्धिदात्री
नौवां दिवस मां सिद्धिदात्री को समर्पित है, जिनकी चार भुजाएं हैं. कमल पर विराजमान रहने वाली देवी सभी सिद्धियों की दात्री हैं. संदेश देती हैं कि जब समर्पण पूर्ण हो तो सफलता अपने आप आती है.
ये 9 दिन हमें बताते हैं कि हर इंसान के अंदर शक्ति है, बस उसे जगाने की जरूरत है. हर देवी का रूप, रंग और संदेश हमारे जीवन के किसी न किसी पहलू से जुड़ा है – आत्मबल, प्रेम, साहस, सेवा, न्याय और शांति.
कमजोर सूर्य और बुध को करें मजबूत, अपनाएं तांबे और हरी मूंग से जुड़े ये असरदार ज्योतिष उपाय
23 Sep, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हमारे घरों में तांबे के बर्तन आमतौर पर पूजा-पाठ या फिर किसी खास मौके पर इस्तेमाल होते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि तांबे के बर्तन में पानी रखना और पीना सिर्फ सेहत के लिए ही नहीं, बल्कि ग्रह-नक्षत्रों को सही करने में भी मदद करता है. ज्योतिष में तांबे को बहुत शुभ माना गया है और इसका सीधा संबंध सूर्य और बुध ग्रह से जुड़ा होता है. कहा जाता है कि अगर कोई इंसान नियमित रूप से तांबे के बर्तन का सही तरीके से उपयोग करे तो उसकी किस्मत में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं. यही वजह है कि पुराने समय से लोग इस धातु को इतना महत्व देते आए हैं.
तांबे के बर्तन में पानी रखने का महत्व
तांबे के लोटे या गिलास में रात को पानी भरकर रखना और सुबह उठकर उसका सेवन करना बहुत फायदेमंद माना जाता है. इससे शरीर के कई रोग दूर होते हैं और मानसिक शांति भी मिलती है, लेकिन ज्योतिष के हिसाब से देखा जाए तो यह उपाय सूर्य ग्रह को मजबूत करता है. जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर होता है, उन्हें अक्सर आत्मविश्वास की कमी, काम में रुकावट और थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे में रोज सुबह तांबे के बर्तन का पानी पीना धीरे-धीरे इन समस्याओं को कम करता है.
हरी मूंग की दाल और तांबे का लोटा
अगर आप अपनी किस्मत को और ज्यादा मजबूत बनाना चाहते हैं तो एक खास उपाय किया जा सकता है. तांबे के लोटे में थोड़ी-सी हरी मूंग की दाल डालकर उसे घर में पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में रखना शुभ माना जाता है. इस पर तांबे का ही ढक्कन लगाना जरूरी है. माना जाता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और सूर्य-बुध दोनों ग्रह मजबूत होते हैं. खासकर जिन लोगों के काम बार-बार बिगड़ जाते हैं या घर में अनचाही परेशानी रहती है, उन्हें यह उपाय जरूर करना चाहिए.
क्यों है ये उपाय खास
हरी मूंग की दाल को हमेशा से शांति और संतुलन का प्रतीक माना गया है. वहीं तांबा ऊर्जा को सोखकर उसे सकारात्मक रूप में बदल देता है. जब दोनों का मेल होता है तो यह जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है. यह उपाय करने से दिमाग शांत रहता है, गुस्सा कम होता है और निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है. साथ ही, घर में सुख-समृद्धि का माहौल भी बढ़ता है.
किस दिशा में रखें तांबे का लोटा
जब भी आप यह उपाय करें, तो ध्यान रखें कि तांबे का लोटा पूर्व दिशा में ही रखा जाए. ज्योतिष में पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है और यह सूर्य की दिशा भी है. यही वजह है कि इस दिशा में तांबे का बर्तन रखने से असर जल्दी दिखता है.
किन लोगों को करना चाहिए ये उपाय
1. जिनकी कुंडली में सूर्य या बुध कमजोर है.
2. जिन्हें आत्मविश्वास की कमी महसूस होती है.
3. जिनके काम पूरे होने में बार-बार रुकावट आती है.
4. जिनके घर में तनाव या मनमुटाव ज्यादा रहता है.
द्वितीया तिथि पर द्विपुष्कर योग में मां ब्रह्मचारिणी और हनुमानजी की पूजा, जाने महत्व और राहुकाल का समय
23 Sep, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि पर मंगलवार को द्विपुष्कर योग का निर्माण हो रहा है. इस दिन मां दुर्गा की दूसरी शक्ति ब्रह्मचारिणी और मंगलवार की वजह से रामभक्त हनुमानजी की पूजा अर्चना की जाएगी. मां ब्रह्मचारिणी विद्या, ज्ञान और तपस्या की देवी मानी जाती हैं. माता का का नाम ही ब्रह्मचर्य से जुड़ा है, जो जीवन में संयम और अनुशासन का संदेश देता है. उनकी पूजा करने से मानसिक संतुलन, धैर्य और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है. वहीं हनुमानजी संकट और भय से रक्षा करते हैं. पूजा अर्चना करने से भय, अशांति और मानसिक तनाव कम होता है. आइए जानते हैं शुभ योग में मां और हनुमानजी की पूजा का महत्व…
अभिजीत और राहुकाल का समय
द्रिक पंचांग के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर दोपहर के 12 बजकर 37 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय दोपहर के 3 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर 4 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. इस दिन सूर्य कन्या राशि में रहेंगे. वहीं, चंद्रमा सुबह के 2 बजकर 56 मिनट से शुरू होकर 24 सितंबर तक कन्या राशि में रहेंगे. इसके बाद तुला राशि में गोचर करेंगे.
मंगलवार 2025 शुभ योग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, द्विपुष्कर योग (रविवार, मंगलवार या शनिवार) को चंद्र तिथि (द्वितीया, सप्तमी या द्वादशी) और नक्षत्र (चित्रा, स्वाति, या धनिष्ठा) के एक विशिष्ट संयोग से बनता है. इस योग में किए गए किसी भी शुभ कार्य का फल दोगुना प्राप्त होता है. इसलिए, द्विपुष्कर योग में शुभ कार्यों की शुरुआत करना लाभकारी होता है. द्विपुष्कर के साथ ही इस दिन ब्रह्म योग, इंद्र योग, सूर्य बुध ग्रह की युति से बुधादित्य योग और गजकेसरी योग भी बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है.
मां ब्रह्मचारिणी पूजा का महत्व
मां ब्रह्मचारिणी दूसरे दिन की माता हैं और यह देवी नवदुर्गा का स्वरूप हैं. मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-आराधना करने से मानसिक संतुलन, धैर्य और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है. मां ब्रह्मचारिणी विद्या, ज्ञान और तपस्या की देवी मानी जाती हैं. जैसा कि माता के नाम से ही जानकारी मिल रही है, मां
हनुमानजी की पूजा का महत्व
इसी के साथ ही मंगलवार का दिन भी है, जो रामभक्त हनुमान और मंगल ग्रह को समर्पित है. स्कंद पुराण में उल्लेखित है कि बजरंगबली का जन्म भी मंगलवार को हुआ था. रामभक्त हनुमान को मंगल ग्रह के नियंत्रक के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के कष्ट, भय और चिंताएं दूर हो जाती हैं. साथ ही, मंगल ग्रह से संबंधित बाधाएं भी समाप्त होती हैं.
मंगलवार हनुमानजी की पूजा विधि
इस दिन विधि-विधान से पूजा करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य कर्म-स्नान आदि करने के बाद पूजा स्थल को साफ करें. फिर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और पूजा की सामग्री रखें और उस पर अंजनी पुत्र की प्रतिमा स्थापित करें. इसके बाद, सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और प्रसाद चढ़ाएं. हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ कर बजरंगबली की आरती करें. इसके बाद आरती का आचमन कर आसन को प्रणाम करके प्रसाद ग्रहण करें. शाम को भी हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि लाल रंग मंगल ग्रह का प्रतीक है. इस दिन लाल कपड़े पहनना और लाल रंग के फल, फूल और मिठाइयां अर्पित करना शुभ माना जाता है. इस पावन दिन पर हनुमान जी की आराधना कर जीवन में सुख-समृद्धि और शांति की कामना करें.
नवरात्रि में नहीं सोतीं उज्जैन की ये देवी, 9 रात नहीं होती शयन आरती, राजा विक्रामादित्य को बनाया था सम्राट!
23 Sep, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देशभर में नवरात्रि का पावन पर्व आज से शुरू हो गया है. महाकाल की नगरी उज्जैन में भी यह पर्व बड़े ही धूमधाम और आस्था के साथ मनाया जा रहा है. सुबह से ही देवी मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं. इसी कड़ी में उज्जैन का प्रसिद्ध हरसिद्धि माता मंदिर भी भक्तों से खचाखच भरा हुआ है. शास्त्रों में इस मंदिर का विशेष महत्व है. मान्यता है कि यहीं से राजा विक्रमादित्य सम्राट बने थे. यही कारण है कि यह मंदिर तंत्र क्रिया और सिद्धि साधना का भी विशेष केंद्र है.
जानकारों के अनुसार, जब माता सती के अंग विभिन्न स्थानों पर गिरे थे, तब उनकी दाहिनी कोहनी उज्जैन की शिप्रा नदी किनारे गिरी थी. तभी से भगवान शिव ने यहां शक्तिपीठ की स्थापना की और यह स्थान हरसिद्धि माता के नाम से प्रसिद्ध हुआ. मंदिर के समीप ही लगभग 200 मीटर की दूरी पर भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग महाकाल रूप में विराजमान है. यहां माता हरसिद्धि की प्रतिमा के बीच देवी महालक्ष्मी और महासरस्वती विराजित हैं. साथ ही यहां यंत्र भी प्रतिष्ठित है, जिसके कारण यह स्थान तांत्रिक परंपरा में सिद्धपीठ के रूप में मान्यता प्राप्त है.
श्री यंत्र की सिद्धि मिली…
हरसिद्धि मंदिर का संबंध राजा विक्रमादित्य से भी जुड़ा हुआ है. स्कंद पुराण में उल्लेख है कि देवी ने प्रचंड राक्षस नामक दैत्य का वध किया था, तभी से वह हरसिद्धि नाम से जानी गईं. लोक परंपरा के अनुसार माता हरसिद्धि विक्रमादित्य की कुलदेवी भी थीं. कहते हैं कि विक्रमादित्य ने यहां देवी को प्रसन्न किया और यहीं से उन्हें श्री यंत्र की सिद्धि प्राप्त हुई. इसी बल पर उन्होंने पूरे देश पर शासन किया और न्यायप्रिय राजा कहलाए.
51 फीट ऊंचा दीप स्तंभ
मंदिर परिसर में स्थापित 51 फीट ऊंचे दीप स्तंभ भी विशेष आकर्षण का केंद्र हैं. इनमें एक बार में 1100 दीप प्रज्वलित किए जाते हैं, जिसके लिए 60 लीटर तेल और करीब 4 किलो रुई की आवश्यकता होती है. भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर दीपमाला प्रज्वलित कराते हैं. खास बात यह है कि दीप जलाने के लिए कई बार लंबी वेटिंग भी लग जाती है.
9 माता शयन नहीं करतीं…
नवरात्रि के नौ दिनों में हरसिद्धि मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. माता को अनार के दाने, शहद और अदरक का भोग लगाया जाता है. मान्यता है कि इन नौ दिनों में माता शयन नहीं करतीं, इसलिए इस अवधि में शयन आरती नहीं होती. नवरात्रि का पर्व यहां भक्तों के लिए आस्था और दिव्यता का अद्भुत संगम बन जाता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 23 सितम्बर 2025)
23 Sep, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष- व्यावसायिक क्षमता में वृद्धि, किसी शुभ समाचार के मिलने का योग बन जायेगा।
वृष- आकस्मिक बेचैनी, स्वभाव में खिन्नता, थकावट असमंजस की स्थिति बन जायेगी।
मिथुन- बेचैनी से स्वभाव में खिन्नता, मन भ्रमित, मान प्रतिष्ठा में अपमान कमी हो।
कर्क- दैनिक कार्य वृद्धि में सुधार, योजनाएं फलीभूत होगी, कार्य बनेंगे, ध्यान रखे।
सिंह- विसंगतिमेष- व्यावसायिक क्षमता में वृद्धि, किसी शुभ समाचार के मिलने का योग बन जायेगा।
वृष- आकस्मिक बेचैनी, स्वभाव में खिन्नता, थकावट असमंजस की स्थिति बन जायेगी।
मिथुन- बेचैनी से स्वभाव में खिन्नता, मन भ्रमित, मान प्रतिष्ठा में अपमान कमी हो।
कर्क- दैनिक कार्य वृद्धि में सुधार, योजनाएं फलीभूत होगी, कार्य बनेंगे, ध्यान रखे।
सिंह- विसंगति से हानि, आशानुकूल सफलता से हर्ष, बिगड़े काम बन ही जायेंगे।
कन्या- स्त्रीवर्ग से हर्ष उल्लास, सामाजिक कार्यों में मान प्रतिष्ठा नवीन होवेगी, ध्यान दें।
तुला- मान प्रतिष्ठा पर आंच आने का डर, विवाद ग्रस्त होने से बचिएं, ध्यान रखे।
वृश्चिक- सामाजिक कार्यों में प्रभुत्व वृद्धि, संवृद्धि संवर्धन के योग बनेंगे, कार्य करें।
धनु- शुभ समाचार से संतोष, दैनिक कार्य गति अनुकूल, मनोकामना पूर्ण होगी, ध्यान दें।
मकर- विघटनकारी तत्व परेशान करेंगे, अचानक यात्रा के प्रसंग अवश्य ही बनेगें।
कुंभ- स्वभाव में खिन्नता, मानसिक बेचैनी, परिश्रम से व्यवसाय अनुकूल बनेगा।
मीन- समृद्धि के साधन जुटायें, अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होवेगा, कार्य बनेंगे। से हानि, आशानुकूल सफलता से हर्ष, बिगड़े काम बन ही जायेंगे।
कन्या- स्त्रीवर्ग से हर्ष उल्लास, सामाजिक कार्यों में मान प्रतिष्ठा नवीन होवेगी, ध्यान दें।
तुला- मान प्रतिष्ठा पर आंच आने का डर, विवाद ग्रस्त होने से बचिएं, ध्यान रखे।
वृश्चिक- सामाजिक कार्यों में प्रभुत्व वृद्धि, संवृद्धि संवर्धन के योग बनेंगे, कार्य करें।
धनु- शुभ समाचार से संतोष, दैनिक कार्य गति अनुकूल, मनोकामना पूर्ण होगी, ध्यान दें।
मकर- विघटनकारी तत्व परेशान करेंगे, अचानक यात्रा के प्रसंग अवश्य ही बनेगें।
कुंभ- स्वभाव में खिन्नता, मानसिक बेचैनी, परिश्रम से व्यवसाय अनुकूल बनेगा।
मीन- समृद्धि के साधन जुटायें, अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होवेगा, कार्य बनेंगे।
नवरात्रि के बाद जली बाती, नारियल, फूल और कलश का करें ये पवित्र उपयोग
22 Sep, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नवरात्रि का पर्व पूरे भारत में बड़े उत्साह और श्रद्धा से मनाया जाता है. शारदीय नवरात्रि खास तौर पर मां दुर्गा की साधना के लिए बहुत शुभ मानी जाती है. इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा करते हैं और उन्हें फूल, नारियल, चुनरी, वस्त्र और दीपक आदि अर्पित करते हैं, लेकिन जब नवरात्रि खत्म होती है तो ज्यादातर लोगों के मन में एक सवाल उठता है कि आखिर पूजा में चढ़ाई गई चीजों का क्या करना चाहिए? क्या इन्हें ऐसे ही फेंक देना सही है या इसके लिए कुछ खास नियम बताए गए हैं? इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि नवरात्रि पूजा के बाद जली हुई बाती, नारियल, फूल, कलश, चुनरी और कपड़े का सही तरीका क्या है.
1. देवी पूजा के लिए जलाई हुई बाती का क्या करें?
नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा की पूजा में जो बाती जलाई जाती है, उसे कभी भी कचरे में नहीं फेंकना चाहिए. चाहे वह आधी जली हो या पूरी, सभी बातियों को इकट्ठा करके पवित्र स्थान पर रख लें. नवरात्रि के आखिरी दिन इसमें कपूर, लौंग और थोड़ा सा घी डालकर दोबारा जलाएं. इसे घर में घुमाने से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और सकारात्मकता बढ़ती है. बाद में बची हुई राख को पौधे वाले गमले में डाल दें. मान्यता है कि यह भभूत नजर दोष से बचाती है.
2. माता को चढ़ाए गए फूलों का क्या करें?
फूलों में देवी की ऊर्जा मानी जाती है. इन्हें कहीं भी फेंकने की बजाय प्रसाद मानकर अपने धन स्थान या पूजा घर में रखें. बाकी फूलों को गमले या पौधे में डाल दें ताकि वह खाद के रूप में काम आ सके. यह तरीका पर्यावरण के लिए भी अच्छा माना जाता है.
3. नवरात्रि पूजा के कलश का क्या करें?
पूजा के बाद कलश का जल परिवार और घर में छिड़कें. यह घर में शुभ ऊर्जा का प्रसार करता है. बचा हुआ जल पौधों में डाल दें. कलश में रखे सिक्कों को लाल कपड़े में बांधकर धन स्थान पर रखें. इसे देवी का आशीर्वाद माना जाता है.
4. नारियल का क्या करें?
मां दुर्गा की पूजा में चढ़ाया गया नारियल बहुत पवित्र माना जाता है. इसे परिवार के सभी सदस्यों और मित्रों में प्रसाद के रूप में बांट दें, अगर नारियल सूख गया हो तो नदी या समुद्र में प्रवाहित कर दें, अगर नारियल फोड़ने पर खराब निकल जाए तो इसे भूमि में दबा दें. मान्यता है कि ऐसा नारियल आपके कष्टों को अपने ऊपर ले लेता है.
5. चुनरी का क्या करें?
मंदिर में या पूजा में मिली चुनरी में मां का आशीर्वाद माना जाता है. इसे अपने घर के पवित्र स्थान, धन स्थान या वाहन पर बांध सकते हैं. पूजा-पाठ करते समय इसे सिर पर भी रख सकते हैं, अगर इसका उपयोग न हो पाए तो इसे मंदिर में या किसी श्रद्धालु को सम्मानपूर्वक दें.
6. माता की चौकी और कपड़े का क्या करें?
पूजा के बाद चौकी और वस्त्रों को साफ करके सुरक्षित रखें और आगे आने वाले अनुष्ठानों में उपयोग करें, अगर जरूरत न हो तो मंदिर में दान कर सकते हैं या किसी जरूरतमंद को दे सकते हैं.
जयपुर के इस मंदिर में होते हैं माता वैष्णोदेवी के दर्शन, नवरात्रि में भक्तों की उमड़ती है भीड़, रोप-वे से राह हुआ आसान
22 Sep, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नवरात्रि पर्व की शुरुआत होने वाली है और इस दौरान भक्त माता दुर्गा के मंदिरों में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. जयपुर के विभिन्न इलाकों में मां दुर्गा के कई प्राचीन मंदिर हैं, जहां माता अलग-अलग रूपों में विराजमान हैं. इनमें से एक प्रमुख मंदिर है आमेर रोड पर अरावली पर्वतमाला की गुजर घाटी की चोटी पर स्थित वैष्णोदेवी मंदिर. यह मंदिर जम्मू-कश्मीर के वैष्णोदेवी मंदिर की अनुकृति है, जहां मां वैष्णोदेवी के दर्शन भक्तों को उसी रूप में प्राप्त होते हैं.
पुजारियों के अनुसार, यह स्थान वर्षों पहले प्रतापपुरी महाराज जैसे कई साधु-संतों की तपोस्थली रहा है. पहाड़ी पर बनी गुफा में माता स्वयं प्रकट हुई थीं. 2014 में मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार किया गया, और मां काली, मां सरस्वती और मां लक्ष्मी की पिंडी रूप में प्राण-प्रतिष्ठा की गई. 500 फीट की ऊंचाई पर घने जंगलों के बीच स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य का अनुपम संगम है, जो नवरात्रि के दौरान भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनता है.
मंदिर से जुड़ी है अनोखी मान्यताएं
प्राचीन मंदिरों की तरह इस मंदिर की भी अपनी विशेष मान्यता है. पुजारियों ने बताया कि जब मंदिर का निर्माण नहीं हुआ था, तब भक्तों को गुफा में घुटनों के बल रेंगकर माता के दर्शन करने पड़ते थे. अब मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद दर्शन सुगम हो गए हैं. माता वैष्णोदेवी यहां तीन रूपों मां काली, मां सरस्वती और मां लक्ष्मी के पिंडी स्वरूप में विराजमान हैं. मंदिर परिसर में आज भी साधु-संतों के प्राचीन धुणे और यज्ञ स्थल मौजूद हैं, जो इसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं.
रोप-वे से मंदिर पहुंचना हो गया आसान
पहले भक्तों को घने जंगलों और पथरीले रास्तों से होकर मंदिर तक पहुंचना पड़ता था, लेकिन अब रोप-वे की सुविधा शुरू होने से दर्शन आसान हो गए हैं. इस सुविधा ने भक्तों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की है. रोप-वे न केवल दर्शन के लिए सुविधाजनक है, बल्कि पर्यटकों को ऊंचाई से जंगल की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने का अवसर भी देता है. सुबह-शाम बड़ी संख्या में भक्त यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
भक्ति और पर्यटन का अनूठा संगम है यह धार्मिक स्थल
वैष्णोदेवी मंदिर के निकट खोले के हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर और अन्य छोटे-बड़े मंदिर भी हैं, जो एक ही स्थान पर विभिन्न धार्मिक और प्राकृतिक अनुभव प्रदान करते हैं. जयपुर घूमने आने वाले पर्यटक इस मंदिर और इसके आस-पास की प्राकृतिक सुंदरता को देखने के लिए विशेष रूप से आकर्षित होते हैं. नवरात्रि के दौरान यह मंदिर भक्ति और पर्यटन का अनूठा संगम बन जाता है.
नवरात्रि में कैसे तय होता है माता के आगमन और प्रस्थान की सवारी? जानिए इसके शुभ-अशुभ संकेत
22 Sep, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर से हो रही है 2 अक्टूबर को नवरात्रि का समापन होगा. नवरात्रि का पर्व भारतीय संस्कृति और आस्था का सबसे प्रमुख त्योहार है. नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है. इस महापर्व का एक विशेष रहस्य यह भी है कि हर वर्ष मां दुर्गा किस वाहन पर सवार होकर आती हैं और किस पर विदा लेती हैं. यह परंपरा केवल धार्मिक विश्वास नहीं, बल्कि ज्योतिषीय गणना और पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है. आइए जानते हैं किस तरह तय होता है कि माता का आगमन और प्रस्थान किस सवारी पर होता है और इसके शुभ अशुभ संकेत क्या हैं…
रविवार और सोमवार को हो आगमन तो
मां दुर्गा की सवारी का निर्धारण नवरात्रि आरंभ होने वाले दिन के आधार पर किया जाता है. अगर नवरात्रि का आरंभ सोमवार या रविवार को होता है, तो माता हाथी पर सवार होकर आती हैं. हाथी पर आगमन को बेहद शुभ माना जाता है क्योंकि यह समृद्धि, उन्नति और अच्छी वर्षा का संकेत देता है.
शनिवार और मंगलवार को हो आगमन तो
अगर नवरात्रि की शुरुआत शनिवार या मंगलवार को होती है, तो माता घोड़े पर सवार होकर आती हैं. घोड़े पर आगमन को अशांत परिस्थितियों, युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता या प्राकृतिक आपदाओं का सूचक माना जाता है.
गुरुवार और शुक्रवार को आगमन
गुरुवार और शुक्रवार को नवरात्रि शुरू होने पर माता पालकी पर आती हैं, जो घर-घर में सुख-शांति और धन-धान्य की वृद्धि का संकेत देता है.
बुधवार को हो आगमन तो
बुधवार को नवरात्रि का आरंभ होने पर मां दुर्गा नौका पर सवार होकर आती हैं. नाव पर आगमन अत्यंत शुभ माना गया है क्योंकि यह भक्तों की मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सकारात्मक परिणामों का संकेत देता है.
माता का आगमन ही नहीं प्रस्थान का भी महत्व
केवल आगमन ही नहीं, बल्कि माता के प्रस्थान की सवारी का भी विशेष महत्व है. विजयादशमी के दिन माता जिस दिन विदा लेती हैं, उसी दिन के आधार पर उनकी वापसी का वाहन निर्धारित होता है.
माता के प्रस्थान का मतलब
रविवार और सोमवार को माता का प्रस्थान भैंसे पर माना जाता है, जो दुख और रोग की वृद्धि का संकेत देता है. मंगलवार और शनिवार को मुर्गे पर विदाई मानी जाती है, जो अस्थिरता का प्रतीक है. बुधवार और शुक्रवार को हाथी पर वापसी को अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह भरपूर समृद्धि और खुशहाली लाता है. गुरुवार को अगर माता का प्रस्थान होता है, तो यह नर वाहन अर्थात पालकी पर होता है, जिसे संतुलित और मध्यम परिणाम देने वाला माना जाता है.
शारदीय नवरात्रि 2025 हाथी पर माता का आगमन
वर्ष 2025 में पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर दिन सोमवार से आरंभ हो रही है. इसका अर्थ है कि मां दुर्गा इस बार हाथी पर सवार होकर आ रही हैं. यह संकेत है कि आने वाले वर्ष में भरपूर वर्षा, उर्वरता और समृद्धि का वातावरण रहेगा. यह मान्यता केवल लोक आस्था नहीं, बल्कि प्रकृति और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के परिवर्तन का द्योतक है. पौराणिक दृष्टि से देखा जाए तो मां दुर्गा का मुख्य वाहन शेर है, जो शक्ति, पराक्रम और साहस का प्रतीक है. लेकिन नवरात्रि के नौ दिनों में बदलती हुई सवारियां ब्रह्मांडीय चक्र और प्रकृति के विविध रूपों को दर्शाती हैं. यही कारण है कि भक्त माता की हर सवारी को शुभ संकेत और भविष्य का दर्पण मानते हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 22 सितम्बर 2025)
22 Sep, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष- तनाव व क्लेश से अशान्ति, मानसिक विभ्रम, किसी घटना के शिकार से बचें।
वृष- असमंजस की स्थिति क्लेशप्रद होगी, विरोधी तत्व परेशान करेंगे, ध्यान रखें।
मिथुन- समय की अनुकूलता से लाभान्वित होंगे, विरोधी तत्व परेशान अवश्य करेंगे।
कर्क- इष्ट मित्र सुख वर्धक होंगे, व्यावसायिक क्षमता अनुकूल बनी ही रहेगी, ध्यान दें।
सिंह- कुटुम्ब की समस्याएं सुलझेगी, स्त्री वर्ग से हर्ष उल्लास होगा, कार्य में ध्यान दें।
कन्या- अर्थलाभ कुटुम्ब की समस्याएं सुलझेगी, स्त्रीवर्ग से हर्ष उल्लास होगा।
तुला- विवाद ग्रस्त होने से बचे, अन्यथा संकट में फंस सकते हैं, ध्यान रखे।
वृश्चिक- अधिकारी वर्ग सहायक बनेंगे, कार्यवृत्ति में सुधार हो सफलता मिलेगी।
धनु- वृथा विवाद अनावश्यक, विभ्रम धन का व्यय, स्थिति कष्टप्रद बन जायेंगी।
मकर- योजनाएं फलीभूत होगी, कार्यकुशलता से संतोष समृद्धि के साधन जुटायें।
कुंभ- विरोधी तत्वों पर प्रबलता रहे, वृथा विभ्रम मानसिक बेचैनी बढ़ेगी।
मीन- समय पर सोचे हुए काम पूरे होंगे, किन्तु अधिक ढ़ीलापन से परेशानी बनेगी।
नवरात्रि में करनी है नवदुर्गा की पूजा, तो जपें 9 देवियों के 9 मंत्र, चमकेगी किस्मत
21 Sep, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर से लेकर 1 अक्टूबर को महानवमी तक चलेगी. शारदीय नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है. मां दुर्गा के 9 स्वरूपों में मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कूष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायिनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री हैं. यदि आपको नवदुर्गा की पूजा करनी है तो आपको 9 देवियों के 9 मंत्रों के बारे में जानना चाहिए. नवरात्रि में 9 देवियों के 9 मंत्रों का जाप करने से आपकी किस्मत बदल सकती हैं क्योंकि ऐसे लोगों को नवदुर्गा की कृपा प्राप्त होती है. नवदुर्गा के आशीर्वाद से जीवन में सुख, समृद्धि, संतान, धन, वैभव, शक्ति आदि की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं नवदुर्गा के 9 मंत्रों के बारे में.
नवरात्रि में दुर्गा के पूजा मंत्र
1. मां शैलपुत्री का बीज मंत्र: ह्रीं शिवायै नम:
शैलपुत्री स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
प्रार्थना मंत्र: वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
2. मां ब्रह्मचारिणी का बीज मंत्र: ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:
ब्रह्मचारिणी स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
प्रार्थना मंत्र: दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
3. मां चंद्रघंटा का बीज मंत्र: ऐं श्रीं शक्तयै नम:
चंद्रघंटा स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
प्रार्थना मंत्र: पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
4. मां कूष्मांडा का बीज मंत्र: ऐं ह्री देव्यै नम:
कूष्मांडा स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
प्रार्थना मंत्र: सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
5. मां स्कंदमाता का बीज मंत्र: ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:
स्कंदमाता स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
प्रार्थना मंत्र: सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
6. मां कात्यायनी का बीज मंत्र: क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:
कात्यायनी स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
प्रार्थना मंत्र: चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
7. मां कालरात्रि का बीज मंत्र: क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:
कालरात्रि स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
प्रार्थना मंत्र: एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा।
वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
8. मां महागौरी का बीज मंत्र: श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:
महागौरी स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां महागौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
प्रार्थना मंत्र: श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
9. मां सिद्धिदात्री का बीज मंत्र: ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:
सिद्धिदात्री स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
प्रार्थना मंत्र: सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, तो नवरात्रि के पहले दिन करें कौड़ियों से जुड़ा यह खास उपाय..सुख-समृद्धि से भर जाएगा घर
21 Sep, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नवरात्रि यानी नौ (9) रात्रि तक आदि शक्ति की पूजा अर्चना, आराधना करने का विधान धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है. इस दौरान शक्ति की देवी स्वर्ग लोक से धरती लोक पर अपने भक्तों का कल्याण करने के लिए आती है. हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व चार बार होता है जिसमें शक्ति की देवी की दो बार आराधना, व्रत प्रकट रूप से करने पर भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है, तो वहीं दो बार गुप्त रूप से देवी मां की आराधना करने पर सभी कार्यों में सिद्धि प्राप्त होने की मान्यता है. नवरात्रि के दिनों में सुख समृद्धि, धन प्राप्ति आदि के लिए कई उपाय किए जाते हैं लेकिन यदि कौड़ियों के कुछ विशेष उपाय किए जाएं तो अनेक चमत्कारी लाभ होते हैं. चलिए विस्तार से जानते हैं…
नवरात्रि में कौड़ियों से उपाय
नवरात्रि में कौड़ियों के उपाय की ज्यादा जानकारी देते हुए हरिद्वार के विद्वान ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि हिंदू धर्म में कौड़ियों का विशेष महत्व होता है. प्राचीन समय में कौड़ियों को धन का रूप में इस्तेमाल किया जाता था. कौड़ियां धन की देवी माता लक्ष्मी का प्रतीक मानी जाती है. नवरात्रि के दिनों में कौड़ियों के कुछ उपाय करने पर जीवन में धन का आगमन, आर्थिक तंगी से मुक्ति और कर्ज से छुटकारा मिल जाता है साथ ही अमोघ अक्षय फल की प्राप्ति होती हैं. वह बताते हैं कि यह उपाय केवल नवरात्रि के दिनों में ही किए जाते हैं.
क्या है पूजा विधि
उपाय: पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि 5, 7, 9, 11, 21 कौड़ियां लेकर उन्हें गंगाजल से पवित्र करके हल्दी लगाकर उन्हें पूजा स्थल पर रखें. इसके बाद आदिशक्ति की पूजा अर्चना, आराधना, दुर्गा सप्तशती का पाठ और आरती करें देवी मां की पूजा पाठ करने के बाद सभी कौड़ियों को लाल वस्त्र में बांधकर अपने तकिए के नीचे रखकर सो जाएं. ऐसा करने से धन का आगमन होने के साथ कर्ज से मुक्ति भी मिल जाती है. यह उपाय केवल अष्टमी या नवमी तिथि को ही करने पर लाभ मिलता है.
उपाय: नवरात्रि के किसी भी दिन 7 9 या 11 पीले रंग की कौड़ियों को गंगाजल से पवित्र करके लाल रंग के वस्त्र में बांधकर अपने पूजा स्थल पर देवी की प्रतिमा के पास रखें. इसके बाद देवी मां की आराधना पूजा पाठ और देवी लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें. देवी मां की पूजा पाठ पूर्ण होने के बाद लाल रंग के वस्त्र में बंधी हुई कौड़ियों को अपनी तिजोरी या धन वाले स्थान पर रखने से जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस उपाय से अक्षय धन की प्राप्ति होती है. यदि पीले रंग की कौड़ियां ना हो तो सफेद कौड़ियों पर हल्दी लगाकर यह उपाय करने से उतना ही लाभ मिलता है.
घर से दूर होगी निगेटिव एनर्जी, खुलेगा पैसा आने का रास्ता और बृहस्पति की कृपा से बरसेगा धन
21 Sep, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जिंदगी में पैसा कमाना आसान नहीं है. हर इंसान मेहनत करता है लेकिन कई बार इतनी मेहनत के बावजूद आर्थिक हालात सही नहीं होते. कई बार काम बनने के बजाय बिगड़ जाते हैं और घर में परेशानियां लगातार बनी रहती हैं. ऐसे समय में लोग पूजा-पाठ, ज्योतिष और छोटे-छोटे टोटकों का सहारा लेते हैं. हमारे किचन में रखा जायफल सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लाने के लिए भी खास माना जाता है. प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, जायफल का सीधा संबंध बृहस्पति ग्रह से है और इसके सही उपाय करने पर घर में धन की बरसात हो सकती है.
जायफल और बृहस्पति का संबंध
जायफल को बृहस्पति ग्रह से जुड़ा माना जाता है, अगर किसी की कुंडली में बृहस्पति कमजोर है तो जिंदगी में कई तरह की रुकावटें आती हैं. ऐसे में गुरुवार के दिन जायफल पर हल्दी का तिलक लगाकर विष्णुजी को अर्पित करें. इससे बृहस्पति की स्थिति मजबूत होगी और जीवन की समस्याओं का हल मिलने लगेगा.
मन की शांति के लिए उपाय
अगर आपका मन हमेशा बेचैन रहता है या आपको बिना वजह चिंता रहती है तो जायफल के छोटे-छोटे टुकड़ों की माला बनाकर गले में पहनें. माना जाता है कि इससे मन शांत होता है और मानसिक तनाव खत्म होने लगता है. इस उपाय से नकारात्मक विचार दूर होते हैं और आत्मविश्वास बढ़ता है.
नकारात्मक ऊर्जा दूर करने का उपाय
घर में नकारात्मक ऊर्जा महसूस हो रही हो या काम बिगड़ रहे हों तो जायफल और कपूर को मिलाकर जलाएं. इसका धुआं पूरे घर में फैलाएं. इससे नकारात्मक शक्तियां दूर होंगी और सकारात्मक माहौल बनेगा. ऑफिस या वर्कप्लेस पर भी यह उपाय कारगर माना जाता है.
अच्छी नौकरी पाने का टोटका
आप नौकरी की तलाश में हैं या किसी इंटरव्यू में जा रहे हैं तो जायफल का पाउडर या तेल हल्का-सा माथे पर लगाएं. माना जाता है कि इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और सफलता मिलने के चांस ज्यादा होते हैं. इस उपाय से अच्छे अवसर मिलने और धनलाभ की भी संभावना रहती है.
सेहत के लिए जायफल का सेवन
जायफल का इस्तेमाल सिर्फ टोटकों में ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी किया जाता है. सीमित मात्रा में इसका सेवन करने से शरीर को ताकत मिलती है और मानसिक शांति भी बनी रहती है. हालांकि, किसी भी तरह का सेवन करने से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें ताकि कोई नुकसान न हो.
मंदिर से जुड़े उपाय
आप अपने घर में हमेशा सकारात्मकता बनाए रखना चाहते हैं तो जायफल को मंदिर में रखें. इससे घर का वातावरण पवित्र रहता है और बुरी शक्तियां नजदीक नहीं आतीं. यह उपाय सुरक्षा और शांति दोनों देता है.
गुडलक के लिए उपाय
आप बिजनेस में तरक्की चाहते हैं तो एक जायफल पर लाल धागा लपेटकर उसे वर्कप्लेस पर रखें. इसी तरह इसे घर की किसी पवित्र जगह पर रखने से भी गुडलक आता है. यह उपाय आपके काम में रुकावटें कम करता है और धन की आवक बढ़ाने में मदद करता है.
विश्व धरोहर दिवस पर रायपुर में सजी विरासत की अनोखी झलक, संरक्षण पर विशेषज्ञों का मंथन
बंदूक से विकास की ओर: सुकमा के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र की प्रेरक कहानी
उमरिया जिले की पूजा सिंह ने रची आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी
हमने सीवर सफाई के काम को चुनौती के रुप में स्वीकार किया है और हम बदलाव लाकर दिखाएंगे : ऊर्जा मंत्री तोमर
दिशा दर्शन भ्रमण आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर मिले दो प्रतिष्ठित पुरस्कार
राज्यमंत्री गौर का सख्त रुख: लापरवाही पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश
महतारी वंदन योजना से संवर रही पहाड़ी कोरवा परिवारों की तकदीर
