धर्म एवं ज्योतिष
राशिफल: रविवार को मीन राशि को सताएगा अनचाहा भय, संभलकर रहें
1 Feb, 2026 07:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष- आज चंद्रमा की स्थिति 01 फरवरी, 2026 रविवार के दिन कर्क राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा चौथे भाव में होगा. आज आप काफी संवेदनशील रहेंगे. इस कारण लोगों का छोटा मजाक भी आपको बुरा लग सकता है. आज आपको मां के स्वास्थ्य की चिंता होगी. मकान या जमीन के दस्तावेजी काम आज ना करें. मानसिक व्यग्रता को दूर करने के लिए आध्यात्मिकता और योग का सहारा लें. नदी, तालाब या समुद्र आदि के पास जाने बचें. विद्यार्थियों के लिए समय मध्यम है. नौकरीपेशा लोग भी आज धैर्य से केवल अपना काम पूरा करें.
वृषभ- आज चंद्रमा की स्थिति 01 फरवरी, 2026 रविवार के दिन कर्क राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा तीसरे भाव में होगा. आज आप किसी बात को लेकर इमोशनल रहेंगे. इससे आपका मन द्रवित हो उठेगा. दोपहर के बाद स्थिति में बदलाव होगा. आपकी कोई पुरानी चिंता दूर होगी. इस कारण आप का मन खुश रहेगा. आप कल्पना शक्ति से रचनात्मक काम कर सकेंगे. परिजनों या दोस्तों के साथ अच्छा भोजन करने का अवसर मिलेगा. कोई आकस्मिक यात्रा हो सकती है. आर्थिक मामलों में आपको परेशानी नहीं आएगी. आय और व्यय में बैलेंस बना रहेगा.
मिथुन- आज चंद्रमा की स्थिति 01 फरवरी, 2026 रविवार के दिन कर्क राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा दूसरे भाव में होगा. शुरुआती परेशानी के बाद आपके निर्धारित काम आसानी से पूरे होंगे. इससे आपको काफी प्रसन्नता होगी. सही आर्थिक योजनाओं के कारण आपकी कई परेशानियां कम होने लगेंगी. नौकरी और व्यवसाय में सहयोगियों का सहयोग मिलेगा, इससे माहौल अच्छा रहेगा. मित्रों तथा प्रियजनों के साथ की गई मुलाकात आपकी खुशी को बढ़ा देगी. परिवार में शांति और आनंद का माहौल रहेगा.
कर्क- आज चंद्रमा की स्थिति 01 फरवरी, 2026 रविवार के दिन कर्क राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा पहले भाव में होगा. आपके दोस्तों, परिजनों तथा परिवार के साथ आपका दिन काफी बेहतर रहेगा. उनकी ओर से मिले उपहार आपके हर्ष को दोगुना कर देंगे. बाहर घूमने का कार्यक्रम बनेगा. स्वादिष्ट भोजन करने का अवसर मिलेगा. शुभ समाचार मिलेंगे. आर्थिक लाभ भी होगा. जीवनसाथी के साथ अच्छा समय गुजरेगा. आज शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से आप आनंद का अनुभव करेंगे. विद्यार्थियों के लिए भी आज का दिन उत्तम है.
सिंह- आज चंद्रमा की स्थिति 01 फरवरी, 2026 रविवार के दिन कर्क राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा बारहवें भाव में होगा. आज आपके लिए कोर्ट-कचहरी के मामलों से दूर रहना हितकर होगा. मन में बेचैनी रहेगी. विभिन्न चिंताएं सताएंगी. शारीरिक स्वास्थ्य खराब हो सकता है. अपनी वाणी और व्यवहार पर संयम रखें, अन्यथा किसी के साथ विवाद हो सकता है. आज आप काफी भावुक रहेंगे. खर्च की मात्रा अधिक रहेगी. गलतफहमी के कारण नुकसान हो सकता है.
कन्या- आज चंद्रमा की स्थिति 01 फरवरी, 2026 रविवार के दिन कर्क राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा ग्यारहवें भाव में होगा. आज आपको विविध क्षेत्रों में यश, कीर्ति और लाभ मिलेगा. धन की बेहतर आवक होगी. परिजनों तथा मित्रों के साथ आपका दिन आनंद से गुजरेगा. कहीं घूमने जा सकते हैं. पत्नी और बच्चों के साथ समय बीता सकेंगे. दांपत्यजीवन में आनंद प्राप्त होगा. संतान के समाचार मिलेंगे. प्रिय व्यक्ति के साथ मुलाकात होने की संभावना है. कार्यक्षेत्र में कोई नया टारगेट आपको मिल सकता है.
तुला- आज चंद्रमा की स्थिति 01 फरवरी, 2026 रविवार के दिन कर्क राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा दसवें भाव में होगा. आज का दिन शुभफलदायी है. आपके घर तथा कार्यालय में अनुकूल वातावरण रहेगा. नौकरीपेशा लोगों के लिए पदोन्नति के अवसर मिलेंगे. पारिवारिक जीवन में हर्षोल्लास का वातावरण रहेगा. गृहस्थ जीवन में प्रेम बना रहेगा. अधिकारियों से प्रोत्साहन मिलेगा. माता से लाभ होगा. उत्तम वैवाहिक सुख की प्राप्ति होगी. सहकर्मियों का साथ मिलेगा. स्वास्थ्य की दृष्टि से समय अच्छा है.
वृश्चिक- आज चंद्रमा की स्थिति 01 फरवरी, 2026 रविवार के दिन कर्क राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा नवें भाव में होगा. आपका आज का दिन प्रतिकूलताओं एवं अनुकूलताओं से भरा होगा. लेखन और साहित्य से जुड़े काम कर सकेंगे. हालांकि व्यवसायिक स्थल पर प्रतिकूल परिस्थिति रहेगी. आज व्यापार को बढ़ाने संबंधी कोई विशेष काम ना करें. परिजनों का रवैया नकारात्मक रहेगा. विरोधियों के साथ वाद-विवाद ना करें. संतान से मतभेद हो सकते हैं. यात्रा की संभावना है. किसी अनावश्यक जगह पर धन खर्च होने से आप चिंता में रह सकते है.
धनु- आज चंद्रमा की स्थिति 01 फरवरी, 2026 रविवार के दिन कर्क राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा आठवें भाव में होगा. आज आपको वाणी और क्रोध पर नियंत्रण रखना होगा. अन्यथा किसी से विवाद हो सकता है. सर्दी और कफ के कारण आपका स्वास्थ्य कमजोर रहेगा. मानसिक चिंता का अनुभव करेंगे. धन खर्च में बढ़ेगा. नियम विरोधी काम तथा अनैतिक काम से आपके सम्मान को ठेस पहुंच सकती है, इसका ध्यान रखें. जीवनसाथी के साथ मतभेद हो सकता है. विद्यार्थियों के लिए समय कम लाभ का है.
मकर- आज चंद्रमा की स्थिति 01 फरवरी, 2026 रविवार के दिन कर्क राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा सातवें भाव में होगा. दैनिक कामों के अलावा आप अपना आज का समय मनोरंजन तथा मिलने-जुलने में व्यतीत करेंगे. स्वादिष्ट भोजन प्राप्त होगा और दोस्तों के साथ घूमने जाएंगे. मित्रों संग अच्छा समय गुजरेगा. धन लाभ के योग हैं. व्यापार में वृद्धि होगी. भागीदारी से लाभ होगा. दलाली, कमिशन या ब्याज मिलने से आर्थिक लाभ होगा. सार्वजनिक जीवन में मान-सम्मान बढ़ेगा. काम में सफलता मिलेगी.
कुंभ- आज चंद्रमा की स्थिति 01 फरवरी, 2026 रविवार के दिन कर्क राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा छठे भाव में होगा. वर्तमान समय में आपको कई कामों में सफलता मिलेगी. यश और कीर्ति प्राप्त होगी. आज आपके स्वभाव में ज्यादा भावुकता रहेगी. महिलाओं को मायके से कोई अच्छे समाचार मिलेंगे. घर में खुशी का माहौल होगा. व्यापार में भी आपको साथियों का साथ और सहयोग मिल सकेगा. आज भागीदारी के काम से आपको लाभ होगा. तन और मन से आप खुशी का अनुभव करेंगे. परिवार का माहौल सुख और शांति भरा रहेगा.
मीन- आज चंद्रमा की स्थिति 01 फरवरी, 2026 रविवार के दिन कर्क राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा पांचवें भाव में होगा. आज आपकी कल्पनाशक्ति पूरे निखार पर होगी. आज का दिन साहित्य सृजन के लिए उत्तम है. विद्यार्थी अच्छा प्रदर्शन कर सकेंगे. आपके स्वभाव में भावुकता और कामुकता अधिक रहेगी. पेट दर्द की संभावना है. मन में भय रहेगा. मानसिक संतुलन बनाए रखें. प्रेम संबंधों के लिए आज का दिन अनुकूल है. कार्यस्थल पर आपका काम अधूरा रह सकता है.
क्या आप जानते हैं भगवान राम के कौन गुरु थे?
1 Feb, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जीवन और उनके महान चरित्र के निर्माण में उनके गुरुओं का विशेष योगदान रहा है. वैसे तो श्री राम ने अपने जीवन में कई ऋषियों से ज्ञान प्राप्त किया, लेकिन उनके मुख्य रूप से दो प्रमुख गुरु माने जाते हैं महर्षि वशिष्ठ और महर्षि विश्वामित्र. इन दोनों गुरुओं का भगवान राम के जीवन में एक खास और बहुत महत्वपूर्ण स्थान था…
1. कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ (आध्यात्मिक और राजधर्म के गुरु)
महर्षि वशिष्ठ अयोध्या के रघुवंश के कुलगुरु थे. राजा दशरथ के चारों पुत्रों राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का नामकरण और प्रारंभिक शिक्षा वशिष्ठ जी के आश्रम में ही संपन्न हुई थी.
वेद-वेदांग की शिक्षा: वशिष्ठ जी ने श्री राम को वेदों, उपनिषदों, राजनीति और शास्त्रों का गूढ़ ज्ञान दिया.
योग वशिष्ठ: जब युवावस्था में श्री राम के मन में वैराग्य उत्पन्न हुआ और वे संसार की नश्वरता को लेकर चिंतित हुए, तब गुरु वशिष्ठ ने उन्हें जो उपदेश दिया, वह आज ‘योग वशिष्ठ’ के नाम से प्रसिद्ध है. यह ग्रंथ अध्यात्म का सर्वोच्च शिखर माना जाता है.
राजधर्म: उन्होंने ही राम को एक आदर्श राजा (रामराज्य) के कर्तव्यों के बारे में सिखाया.
2. महर्षि विश्वामित्र (अस्त्र-शस्त्र और कर्म के गुरु)
महर्षि विश्वामित्र श्री राम के जीवन में तब आए जब उन्हें अपनी असुरक्षा और यज्ञों की रक्षा के लिए एक योद्धा की आवश्यकता थी.
दिव्य अस्त्रों का ज्ञान: विश्वामित्र जी राम और लक्ष्मण को अपने साथ वन ले गए. वहां उन्होंने राम को ‘बला’ और ‘अतिबला’ नाम की विद्याएं सिखाईं, जिससे उन्हें कभी थकान या भूख-प्यास नहीं लगती थी। उन्होंने राम को कई दिव्य और संहारक अस्त्र प्रदान किए.
ताड़का और सुबाहु वध: विश्वामित्र के मार्गदर्शन में ही श्री राम ने अपने प्रथम युद्ध कौशल का परिचय देते हुए ताड़का और सुबाहु जैसे राक्षसों का वध किया.
अहिल्या उद्धार और सीता स्वयंवर: महर्षि विश्वामित्र ही राम को जनकपुर ले गए थे, जहाँ राम ने उनके आदेश पर शिव धनुष तोड़ा और माता सीता से विवाह किया.
गुरु-शिष्य परंपरा का आदर्श
श्री राम ने हमेशा अपने गुरुओं के प्रति अगाध श्रद्धा दिखाई। चाहे वह वशिष्ठ जी के चरणों की सेवा हो या विश्वामित्र के आदेश पर वन जाना, राम ने सिद्ध किया कि एक महान शिष्य वही है जो गुरु की आज्ञा को सर्वोपरि माने.
अन्य गुरु और मार्गदर्शक
वनवास के दौरान भी श्री राम ने कई ऋषियों से मार्गदर्शन प्राप्त किया-
महर्षि भारद्वाज: जिन्होंने उन्हें चित्रकूट में निवास करने की सलाह दी.
महर्षि अगस्त्य: जिन्होंने राम को रावण वध के लिए ‘अमोघ अस्त्र’ और ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का ज्ञान दिया.
15 फरवरी को महाशिवरात्रि, बाबा महाकाल मंदिर में 6 फरवरी से 9 दिवसीय उत्सव होगा शुरू, जानें किस दिन कौन सा कार्यक्रम
1 Feb, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाशिवरात्रि का पर्व हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. इस बार यह शुभ तिथि 15 फरवरी दिन रविवार को है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था. इस शुभ अवसर पर उज्जैन के महाकाल मंदिर में 9 दिवसीय उत्सव होता है और इस बार यह उत्सव 6 फरवरी से शुरू होगा.
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है और इस बार यह शुभ तिथि 15 फरवरी दिन रविवार को है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था. इस दिन भक्त व्रत रखकर विधि विधान के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करते हैं. महाशिवरात्रि के मौके पर सभी शिव मंदिरों को सजाया जाता है और कई धार्मिक कार्यक्रम किए जाते हैं. अब चूंकि महाशिवरात्रि में कुछ ही दिन का समय बचा है और शिव-पार्वती के विवाह के इस त्योहार को लेकर उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर में तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं.
महाकाल मंदिर की दीवारों से लेकर शिखर पर रंग-रोगन किया जा रहा है. इसी के साथ 6 फरवरी से मंदिर में 9 दिनों तक चलने वाले उत्सव की शुरुआत होगी, जिसमें बाबा भक्तों को नौ अलग-अलग रूपों में दर्शन देंगे. महाशिवरात्रि के लिए मंदिर में की जा रही तैयारियों पर महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि इस बार महाशिवरात्रि का त्योहार 15 फरवरी को मनाया जाएगा. कुछ जगह तिथि को लेकर थोड़ा भ्रम है, लेकिन 15 फरवरी को ही शिवरात्रि उज्जैन में मनाई जाएगी.
बाबा महाकाल की नगरी में महाशिवरात्रि का सेलिब्रेशन 9 दिन तक चलता है, जो 6 फरवरी से शुरू होगा और 15 फरवरी तक चलेगा, जिसमें रोजाना भगवान का रुद्राभिषेक, 24 घंटे निराकार रूप में दर्शन और जलधारी, रात के समय स्नान और वस्त्र धारण का कार्यक्रम रहेगा. साथ ही अलग-अलग नौ विग्रहों की स्थापना और पूजा की जाएगी. ये नौ दिन भगवान की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों जैसी होती है. भक्तों के लिए मंदिर भी खुले रहेंगे और भक्त बाबा महाकाल पर जलधारी अर्पित कर पाएंगे.
पुजारी ने बताया कि पहले दिन बाबा का दुशाला ओढ़ाकर शृंगार होता है और फिर दूसरे दिन बाबा को शेषनाग धारण कराए जाते हैं. तीसरे दिन घटाघटा स्थापित किया जाता है, जो शिवलिंग के समान ही होता है. चौथे दिन प्रभु के छवि दर्शन होते हैं और पांचवें दिन बाबा को मन-महेश, उमा महेश, शिव तांडव और होलकर के रूप में सजाया जाता है.
15 फरवरी को होने वाली खास पूजा और अनुष्ठान पर पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि 15 फरवरी को जलधारी के साथ चारों पहर की पूजा और आरती होगी और रात के समय स्नान के साथ बाबा को दूल्हे के रूप में शृंगार कर सजाया जाएगा और रात को विशेष शृंगार पूजा होगी, जिसे सेहरा दर्शन भी कहा जाता है.
इस दौरान नौ दिनों तक मंदिर परिसर में भजन और कीर्तन का आयोजन होगा और भक्तों के आगमन के लिए तैयारियां की जा रही हैं क्योंकि महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में भीड़ बढ़ जाती है. मंदिर में हो रही तैयारी पर उन्होंने कहा कि गर्भगृह की सफाई, मंदिर के कुंड़ों की सफाई और रंग-रोगन का काम शुरू हो चुका है, जिसे 6 फरवरी तक खत्म करने की कोशिश रहेगी.
ये मां सरस्वती के 12 चमत्कारी नाम! हर रोज पाठ करने से मंदबुद्धि व्यक्ति भी बन सकता है बुद्धिमान!
1 Feb, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में ज्ञान, कला और संगीत की देवी, देवी सरस्वती की पूजा को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. बसंत पंचमी पर या हर दिन पढ़ाई शुरू करने से पहले उनके नामों का जाप करने से बुद्धि और ज्ञान जागृत होता है, ऐसा माना जाता है. शास्त्रों में देवी सरस्वती के बारह विशेष नामों का उल्लेख है, जिन्हें “द्वादश नाम” (बारह नाम) भी कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि इन नामों का नियमित रूप से जाप करने से मंदबुद्धि व्यक्ति भी बुद्धिमान बन सकता है और उसकी वाणी में मधुरता आती है…
ये हैं माता सरस्वती के 12 दिव्य नाम-
-प्रथमं भारती नाम: भारती का अर्थ है—”वाणी की अधिष्ठात्री.”
-द्वितीयं च सरस्वती: सरस्वती का अर्थ है—”ज्ञान का निरंतर बहता हुआ प्रवाह.”
-तृतीयं शारदा देवी: शारदा का अर्थ है—”सफेद रंग वाली और निर्मल बुद्धि देने वाली.”
-चतुर्थं हंसवाहिनी: हंस पर सवार होने के कारण उन्हें हंसवाहिनी कहा जाता है, जो विवेक (नीर-क्षीर विवेक) का प्रतीक है.
-पञ्चमं जगती ख्याता: पूरे जगत में विख्यात और संसार को ज्ञान देने वाली.
-षष्ठं वागीश्वरी तथा: वागीश्वरी का अर्थ है—”वाणी की ईश्वरी या स्वामिनी.”
-सप्तमं कुमुदी प्रोक्ता: कुमुदिनी के समान कोमल और प्रसन्न रहने वाली.
अष्टमं ब्रह्मचारिणी: ब्रह्म (परम सत्य) में लीन रहने वाली और तपस्या की प्रतिमूर्ति.
-नवमं बुद्धिदात्री च: बुद्धि और सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करने वाली.
-दशमं वरदायिनी: भक्तों को मनोवांछित वरदान देने वाली.
-एकादशं चन्द्रकान्ति: चंद्रमा के समान शीतल और कांतिमय चमक वाली.
-द्वादशं भुवनेश्वरी: पूरे ब्रह्मांड (तीनों लोकों) की रक्षा और संचालन करने वाली माता.
सरस्वती द्वादश नाम स्तोत्र का महत्व-
शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति प्रतिदिन सुबह उठकर या पढ़ाई शुरू करने से पहले इन 12 नामों का पाठ करता है, उसे ‘वाक-सिद्धि’ प्राप्त होती है. 2026 में विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगिता परीक्षाओं और मानसिक तनाव के बीच ये नाम एकाग्रता (Concentration) बढ़ाने का अचूक माध्यम हैं.
इन नामों के जाप के लाभ-
-स्मरण शक्ति: भूलने की बीमारी या याद न होने की समस्या दूर होती है.
-कला में निपुणता: संगीत, लेखन और गायन से जुड़े लोगों को सफलता मिलती है.
-वाणी दोष का निवारण: हकलाहट या स्पष्ट न बोल पाने वाले बच्चों के लिए इन नामों का जाप विशेष फलदायी है.
माघ का महीने क्यों इतना पवित्र? अमीर-गरीब सभी कर सकते हैं इन चीजों का दान, सुख-समृद्धि के लिए जरूरी
1 Feb, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
माघ का महीना हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र और शुभ माना जाता है. यह महीना आत्मशुद्धि, दान-पुण्य और अच्छे कर्मों के लिए खास होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ के महीने में देवता पृथ्वी पर आते हैं और मनुष्य के किए गए अच्छे कर्मों से प्रसन्न होते हैं. इसी कारण इस महीने स्नान, दान और पूजा-पाठ का विशेष महत्त्व बताया गया है. माघ महीने में सुबह जल्दी उठकर स्नान करना बहुत पुण्यकारी माना जाता है. खासकर अगर गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में स्नान किया जाए तो इसे और भी फलदायी माना जाता है. कहा जाता है कि माघ स्नान से पाप दूर होते हैं, मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. जो लोग नदी तक नहीं जा सकते, वे घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं.
भोजन कराना भी शुभ
इस महीने दान का भी विशेष महत्त्व है. शास्त्रों में कहा गया है कि माघ में किया गया दान कई गुना फल देता है. अन्न दान सबसे श्रेष्ठ माना गया है. इसके अलावा तिल दान, गुड़, कंबल, ऊनी कपड़े, जूते-चप्पल और जरूरतमंदों को भोजन कराना बहुत शुभ होता है. सर्दी के मौसम को देखते हुए गरीबों को कंबल या गर्म कपड़े देना खास पुण्य माना जाता है. ऐसे दान से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है.
क्या कहते हैं पंडित
कि माघ का महीना संयम और सेवा का प्रतीक है. इस समय किया गया स्नान और दान व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है. जो लोग माघ में श्रद्धा से अन्न, वस्त्र या तिल का दान करते हैं, उनके घर में कभी अभाव नहीं रहता. ये माघ का महीना भगवान विष्णु को समर्पित है. माघ का महीना हमें यह भी सिखाता है कि धर्म सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंदों की मदद करना भी सच्चा धर्म है. अगर हम इस महीने थोड़ा सा भी दान करें तो न केवल दूसरों का भला होता है, बल्कि हमारे जीवन में भी सुख और संतोष आता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (01 फ़रवरी 2026)
1 Feb, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कुटुम्ब में सामान्य क्लेश व अशांति, व्यर्थ धन का व्यय तथा पीड़ा होगी।
वृष राशि :- इष्ट मित्रों से सुख, अधिकारियों से मेल मिलाप लाभप्रद रहेगा, ध्यान रखें।
मिथुन राशि :- अर्थ व्यवस्था अनुकूल होगी, सफलता के साधन जुटाएं तथा कार्य बनेंगे।
कर्क राशि :- मनोवृत्ति उदार बनाए रखे, तनाव क्लेश से हानि संभव होगी, ध्यान रखे।
सिंह राशि :- समय नष्ट हो, व्यवसाय गति मंद, असंमजस की स्थिति से बचिएगा।
कन्या राशि :- आर्थिक योजना सफल हो, व्यवसायिक क्षमता अनुकूल बनी रहेगी, कार्य बनेंगे।
तुला राशि :- धन का व्यय, व्यर्थ परिश्रम से हानि संभव होवे, ध्यान रखें तथा कार्य अवश्य बनें।
वृश्चिक राशि :- स्त्री वर्ग से क्लेश व अशांति तथा विघटनकारी तत्व परेशान अवश्य करेंगे।
धनु राशि :- कुटुम्ब की समस्या सुलझे तथा धन का व्यय, व्यर्थ भ्रमण, कार्य अवरोध होगा।
मकर राशि :- अर्थ व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो, कार्य व्यवसाय गति मध्य बनी ही रहें।
कुंभ राशि :- दैनिक कार्यवृत्ति में सुधार, चिन्ताएं कम हो तथा सफलता अवश्य ही मिलेगी।
मीन राशि :- मनोबल उत्साह वर्धक हो, कार्यगति अनुकूल बनी रहे।
Shukra Uday 2026: फरवरी में गूंजेंगी शहनाइयां, जानिए शादी की सही तारीख और मुहूर्त
31 Jan, 2026 01:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Shukra Uday 2026: कल से साल 2026 का दूसरा महीना शुरू होने वाला है और यह कई मायनों में खास रहेगा. फरवरी 2026 की शुरुआत होते ही शुक्र ग्रह अपनी अस्त अवस्था को समाप्त कर मकर राशि में उदित हो जाएंगे. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जब तक शुक्र अस्त रहते हैं, तब तक शादी-ब्याह गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लगा रहता है. इसलिए, 1 फरवरी को शुक्र के उदय होते ही सभी शुभ और मांगलिक कार्यों के आयोजन के लिए द्वार पुनः खुल जाएंगे.
शुक्र ग्रह के उदय होने से क्या प्रभाव होता है?
ज्योतिष शास्त्र में शुक्र देव को भौतिक सुख, वैवाहिक आनंद और धन-संपत्ति का प्रतीक माना जाता है, यही कारण है कि उनके उदय होने पर ही शादी, सगाई, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है. इस साल फरवरी का महीना विशेष है क्योंकि इस समय शुक्र न केवल उदय होंगे, बल्कि कुंभ राशि में भी प्रवेश करेंगे, जिससे शुभ कार्यों के लिए कई शुभ योग बन रहे हैं.
फरवरी 2026 में विवाह के लिए कौन से हैं शुभ मुहूर्त?
ज्योतिषों के अनुसार, शादी के लिए ये दिन शुभ रहेंगे.
5 फरवरी 2026
6 फरवरी 2026
8 फरवरी 2026
10 फरवरी 2026
12 फरवरी 2026
14 फरवरी 2026
19 फरवरी 2026
20 फरवरी 2026
21 फरवरी 2026
24 फरवरी 2026
25 फरवरी 2026
26 फरवरी 2026
फरवरी में गृह प्रवेश के लिए शुभ तारीख कौन सी है?
6 फरवरी 2026
11 फरवरी 2026
19 फरवरी 2026
20 फरवरी 2026
21 फरवरी 2026
25 फरवरी 2026
26 फरवरी 2026.
मुंडन संस्कार के शुभ तिथियां क्या हैं?
यदि आप फरवरी महीने में मुंडन संस्कार की योजना बना रहे हैं, तो ज्योतिषीय दृष्टि से इस महीने कई उत्तम तिथि हैं. ये तिथियां अत्यंत शुभ और फलदायी मानी गई हैं.
6 फरवरी
7 फरवरी
11 फरवरी
12 फरवरी
21 फरवरी
22 फरवरी
किस वजह से मांगलिक कार्य रुके हुए थे?
ज्योतिष गणना के अनुसार, साल 2026 में बसंत पंचमी के समय शुक्र ग्रह अस्त थे, जिसके कारण विवाह और दूसरे मांगलिक कार्यों के शुभ संयोग नहीं बन सके. अब फरवरी महीने में शुक्र देव का उदय होने जा रहा है, जिससे सभी रुके हुए शुभ कार्य फिर से हर्षोल्लास के साथ संपन्न किए जा सकेंगे.
पंचांग: शनिवार को रवि योग का शुभ संयोग, भोलेनाथ का शासन
31 Jan, 2026 07:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचांग : आज 31 जनवरी, 2026 शनिवार, के दिन माघ महीने की शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि है. इस तिथि पर भगवान शिव और कामदेव का शासन है. नई किताबें लिखने, कर्मकांड और नृत्य के लिए अच्छा दिन माना जाता है. आज रवि योग भी बन रहा है.
31 जनवरी का पंचांग
विक्रम संवत : 2082
मास : माघ
पक्ष : शुक्ल पक्ष त्रयोदशी
दिन : शनिवार
तिथि : शुक्ल पक्ष त्रयोदशी
योग : विष्कुंभ
नक्षत्र : पुनर्वसु
करण : तैतिल
चंद्र राशि : मिथुन
सूर्य राशि : मकर
सूर्योदय : सुबह 07:11 बजे
सूर्यास्त : शाम 05:58 बजे
चंद्रोदय : शाम 04.16 बजे
चंद्रास्त : सुबह 0645 बजे (1 फरवरी)
राहुकाल : 09:53 से 11:14
यमगंड : 13:55 से 15:16
नया वाहन खरीदने के लिए अच्छा है नक्षत्र
आज के दिन चंद्रमा मिथुन राशि और पुनर्वसु नक्षत्र में रहेंगे. यह नक्षत्र मिथुन राशि में 20:00 से लेकर कर्क राशि के 3:20 तक फैला हुआ है. इसकी अधिष्ठात्री देवी अदिति हैं और इस नक्षत्र के स्वामी ग्रह बृहस्पति हैं. नया वाहन खरीदने या सर्विसिंग कराने के अलावा यात्रा और पूजा के लिए यह नक्षत्र अच्छा है. यह एक अस्थायी, तेज और गतिशील प्रकृति का तारा है। इस नक्षत्र में बागवानी करने, जुलूस में जाने, मित्रों से मिलने का कार्य भी किया जा सकता है.
आज के दिन का वर्जित समय
आज के दिन 09:53 से 11:14 बजे तक राहुकाल रहेगा. ऐसे में कोई शुभ कार्य करना हो, तो इस अवधि से परहेज करना ही अच्छा रहेगा. इसी तरह यमगंड, गुलिक, दुमुहूर्त और वर्ज्यम से भी परहेज करना चाहिए.
राशिफल : कुंभ राशि वालों के लिए शनिवार का विशेष उपाय...अशांत मन को शांत कर ऐसे पाएं करियर में बड़ी सफलता
31 Jan, 2026 07:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष- 31 जनवरी, 2026 शनिवार के दिन मिथुन राशि का चंद्रमा आज आपके लिए तीसरे भाव में होगा. मन अस्थिर रहेगा. दृढ़ निश्चयी नहीं होने से आप किसी भी तरह का कोई निर्णय लेने में असमर्थ रहेंगे. महत्वपूर्ण कार्य स्थगित रखने पड़ेंगे. नौकरी और व्यापार में विरोधियों का सामना करना पड़ेगा. नए काम की शुरुआत करने के लिए प्रेरित होंगे. समान विचारों के व्यक्तियों के साथ बौद्धिक या तार्किक बहस हो सकती है. किसी यात्रा पर जाने का कार्यक्रम बन सकता है. वाणी पर संयम रखने की सलाह दी जाती है. साहित्य लेखन के लिए दिन अनुकूल है.
वृषभ- 31 जनवरी, 2026 शनिवार के दिन मिथुन राशि का चंद्रमा आज आपके लिए दूसरे भाव में होगा. हाथ में आया हुआ अवसर कन्फ्यूजन के कारण आज आप गंवा सकते हैं और उसका लाभ नहीं ले पाएंगे. आज बहुत से विचार आपको परेशान करेंगे. जल्दबाजी में आपका काम बिगड़ सकता है. आज कोई भी नया काम शुरू करना आपके हित में नहीं है. वाद-विवाद या चर्चा में आप जिद्दी बने रहेंगे. इससे आप नुकसान में जा सकते हैं. भाई-बहनों में प्रेम बना रहेगा. हालांकि दोपहर के बाद का समय आपके लिए अच्छा है, लेकिन आज पूरे दिन किसी भी तरह के नए काम में हाथ नहीं डालें.
मिथुन- 31 जनवरी, 2026 शनिवार के दिन मिथुन राशि का चंद्रमा आज आपके लिए पहले भाव में होगा. आज का दिन ताजगी और स्फूर्ति से परिपूर्ण रहेगा. स्वादिष्ट भोजन, सुंदर वस्त्र और आभूषण मिलने से मन प्रसन्न रहेगा. स्वजनों के साथ आपका दिन खूब आनंद में गुजरेगा. दांपत्य जीवन में सुख-संतोष की भावना का अनुभव होगा. आर्थिक लाभ और आयोजनों के लिए दिन अनुकूल है. खर्च अधिक होगा, इसलिए उस पर संयम रखें. आपको नकारात्मक विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है.
कर्क- 31 जनवरी, 2026 शनिवार के दिन मिथुन राशि का चंद्रमा आज आपके लिए बारहवें भाव में होगा. आज आप मन में खिन्नता और भय का अनुभव करेंगे. परिवार में मतभेद होने से परिवार का वातावरण तनावपूर्ण रहेगा. मन में किसी बात की दुविधा रहेगी. आप मानसिक रूप से बेचैन रहेंगे. वाणी पर संयम रखें, अन्यथा मतभेद हो सकता है. अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें. आज अत्यधिक खर्च हो सकता है. मानहानि हो सकती है, अतः सावधान रहें. जल्दबाजी से आपको नुकसान हो सकता है. विद्यार्थियों को पढ़ाई में थोड़ी दिक्कत आ सकती है.
सिंह- 31 जनवरी, 2026 शनिवार के दिन मिथुन राशि का चंद्रमा आज आपके लिए ग्यारहवें भाव में होगा. आज अनिर्णय की स्थिति रह सकती है. आप मिले हुए मौकों का फायदा नहीं उठा सकेंगे. विचारों में ही आपका मन अटका रहेगा. दोस्तों और खासकर महिला मित्रों से आपको लाभ मिलेगा. व्यापार में फायदा होगा. संतान के संबंध में चिंता रह सकती है. अच्छा भोजन प्राप्त होगा. जीवनसाथी के साथ विचारों का तालमेल रखना मुश्किल होगा. स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा.
कन्या- 31 जनवरी, 2026 शनिवार के दिन मिथुन राशि का चंद्रमा आज आपके लिए दसवें भाव में होगा. अभी आप सफलतापूर्वक नए काम कर सकेंगे. व्यापारी वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए दिन लाभदायी है. उच्चाधिकारियों की कृपा दृष्टि से पदोन्नति की संभावना है. कार्यस्थल पर आपको कोई नया काम मिल सकता है. व्यापार में लाभ मिल सकता है. गृहस्थ जीवन में आनंद का माहौल रहेगा. परिवार में भी प्यार रहेगा. पिता से लाभ मिलने के संकेत हैं.
तुला- 31 जनवरी, 2026 शनिवार के दिन मिथुन राशि का चंद्रमा आज आपके लिए नवें भाव में होगा. आज कार्यस्थल पर आपको अधिकारियों की नाराजगी सहन करनी पड़ेगी. व्यवसाय में परेशानी खड़ी हो सकती है. संतान के प्रति चिंता होगी. यात्रा का आयोजन होगा. धार्मिक यात्रा के योग हैं. लेखन और साहित्य सृजन करेंगे. आज विरोधियों के साथ विवाद टालें. जीवनसाथी के विचारों का भी सम्मान करें, अन्यथा आपके बीच मतभेद हो सकता है. स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही आपको नुकसान में डाल सकती है.
वृश्चिक- 31 जनवरी, 2026 शनिवार के दिन मिथुन राशि का चंद्रमा आज आपके लिए आठवें भाव में होगा. आज अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें. कफ, सांस में तकलीफ या पेट दर्द की परेशानी हो सकती है. आज मानसिक रूप से अस्वस्थ रहेंगे. किसी बात की चिंता लगी रहेगी. क्रोध पर नियंत्रण रखना होगा. किसी भी अनैतिक और सरकार विरोधी काम से दूर रहें, अन्यथा आप मुसीबत में पड़ सकते हैं. पानी वाली जगह से दूर रहें. आज ज्यादा खर्च होने से आपको परेशानी हो सकती है. व्यापारियों को लाभ के लिए अतिरिक्त मेहनत करना होगी.
धनु- 31 जनवरी, 2026 शनिवार के दिन मिथुन राशि का चंद्रमा आज आपके लिए सातवें भाव में होगा. आज बौद्धिक और तार्किक विचारों से आप कठिन काम भी आसानी से बना पाएंगे. समाज में सम्मान मिलेगा. मित्रों के साथ मुलाकात होगी. उनके साथ घूमने- फिरने या मनोरंजन स्थल की यात्रा करने के योग हैं. अच्छे भोजन और सुंदर परिधान से आप का मन खुश रहेगा. स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. मित्रों का साथ अच्छा लगेगा. पार्टनरशिप के काम में आपको फायदा होगा.
मकर- 31 जनवरी, 2026 शनिवार के दिन मिथुन राशि का चंद्रमा आज आपके लिए छठे भाव में होगा. आज आपके व्यापार का विकास होगा. आर्थिक रूप से लाभदायक दिन होने से पैसे का लेन-देन सरल होगा. परिवार में सुख और शांति का माहौल रहेगा. सहकर्मियों तथा अधीनस्थ लोगों का सहयोग मिलेगा. ननिहाल पक्ष से अच्छे समाचार मिलेंगे. विरोधियों को पराजित करने में कामयाब होंगे. हालांकि कानूनी मामलों से थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है. परिजनों के साथ विवाद टालें.
कुंभ- 31 जनवरी, 2026 शनिवार के दिन मिथुन राशि का चंद्रमा आज आपके लिए पांचवें भाव में होगा. वैचारिक रूप से काफी चिंतित रहने के कारण कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लेना ही हितकर होगा. यात्रा में परेशानी हो सकती है. निर्धारित काम पूरा नहीं होने से आपको काफी निराशा होगी. मन अशांत रहेगा. पेट दर्द सताएगा. संतान की बीमारी या पढ़ाई के संबंध में चिंता रहेगी. कार्यस्थल पर आज आपको केवल अपना काम करना चाहिए. दूसरों की मदद के इंतजार में काम अधूरा रह सकता है. प्रेम जीवन में आगे बढ़ने की जल्दबाजी नहीं करें.
मीन- 31 जनवरी, 2026 शनिवार के दिन मिथुन राशि का चंद्रमा आज आपके लिए चौथे भाव में होगा. आज ताजगी और स्फूर्ति का अभाव रहेगा. मां के स्वास्थ्य का ध्यान रखें. रिश्तेदारों तथा मित्रों के साथ वाद- विवाद हो सकता है. कई परेशानियां तथा विरोधी परिस्थितियों के कारण आपका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य खराब हो सकता है. किसी भी तरह के दस्तावेजी काम के प्रति सावधानी बरतें. मानहानि होने की आशंका रहेगी. कार्यस्थल पर आपको अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए.
रंगों के त्योहार पर चंद्र ग्रहण की छाया! होली या होलिका दहन कब लगेगा बड़ा ग्रहण?
31 Jan, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर साल आकाश में कुछ ऐसी घटनाएं होती हैं जो हम सबकी ध्यान खींचती हैं. इनमें से एक सबसे खास घटना है चंद्र ग्रहण. यह वो मौका होता है जब चांद, धरती की छाया में छिप जाता है और उसका रंग आसमान में अलग नजर आता है. कुछ लोगों को यह बहुत खास लगता है, कुछ लोग इसे डरावना कहते हैं, तो कुछ इसे शुभ भी मानते हैं, लेकिन चाहे कोई भी सोच रखता हो, एक बात तय है कि चंद्र ग्रहण देखना हर किसी को रोचक लगता है. साल 2026 में एक बड़ा चंद्र ग्रहण आने वाला है और खास बात यह है कि यह होलिका दहन या होली के आसपास ही होने वाला है. ऐसा शायद ही अक्सर होता है कि कोई खास ग्रहण और त्योहार एक साथ आएं. इसलिए ज्योतिषियों और खगोल विज्ञान को देखने वाले लोग इसे काफी दिलचस्प मान रहे हैं. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
चंद्र ग्रहण 2026 कब लगेगा?
साल 2026 में पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च, मंगलवार को लगने वाला है. यह वही दिन है जब भारत में होलिका दहन मनाया जाता है, जो होली त्योहार की शुरुआत की निशानी है.
-ग्रहण शुरू: दोपहर करीब 03:20 बजे
-ग्रहण का बीच वाला हिस्सा: शाम 05:04 बजे
-ग्रहण खत्म: शाम 06:47 बजे
इस समय चांद धीरे-धीरे धरती की छाया में ढलता जाएगा और कुछ समय बाद पूरी तरह ढका हुआ दिखेगा. यह पूर्ण चंद्र ग्रहण माना जा रहा है, जिस वजह से इसका नजारा थोड़ी देर के लिए अजब-सा लग सकता है.
क्या भारत में दिखेगा ये चंद्र ग्रहण?
हां, यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखेगा, लेकिन जहां-जहां इसका नजारा साफ नजर आएगा, वहां के हिसाब से थोड़ा फर्क होगा.
-पूरा चंद्र ग्रहण दिखेगा: असम, मेघालय, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में
-आंशिक रूप से दिखेगा: दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और भारत के बाकी हिस्सों में
इन शहरों में जैसे ही चंद्रमा आसमान में उठेगा, वह पहले से छाया में होगा. इसलिए लोग उसे पूरने होते देखा महसूस करेंगे. खासकर पूर्वोत्तर में लोग ब्लड मून जैसा रंग भी देख पाएंगे, जब चांद का रंग हल्का लाल-सा हो जाता है.
सूतक काल क्या है और कब शुरू होगा?
ज्योतिष मान्यताओं में चंद्र ग्रहण के दौरान एक समय माना जाता है जिसे सूतक काल कहते हैं. इसे ग्रहण शुरू होने से पहले कुछ समय पहले शुरू किया जाता है, ताकि उस समय घर-परिवार में कुछ नियमों का पालन किया जा सके.
-सूतक आरंभ: 3 मार्च 2026, सुबह 06:20 बजे
-सूतक समाप्त: शाम 06:47 बजे
इस दौरान लोग कुछ कामों को टालकर रखते हैं, जैसे कोई नए काम की शुरुआत करना या खाना-पीना बदलना. बहुत से लोग इसका पालन अपने रीति-रिवाज से करते हैं.
चंद्र ग्रहण देखने के आसान टिप्स
अगर तुम भी 3 मार्च को चंद्र ग्रहण देखना चाहते हो, तो ध्यान में रखो:
1. समय पर तैयार रहो: ग्रहण पहले शुरू होगा और धीरे-धीरे चांद ढकेगा.
2. खुला आकाश ढूंढो: कमरे से बाहर खुली जगह पर जाना बेहतर रहेगा.
3. ऑब्जरवेशन टूल्स: अगर पास दूरबीन या टेलिस्कोप हो, तो और अच्छा नजारा मिलेगा.
4. क्लियर स्काई हो तो: अगर आसमान साफ रहेगा, तो ग्रहण और रंग बेहतर दिखेगा
कौन हैं शिव के 11 रुद्र? जानिए इनके अद्भुत रूप, पूजा करने से पूरी होती है सभी मनोकामना!
31 Jan, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान शिव के 11 रुद्र (11 Rudras) अवतारों की कहानी बहुत दिलचस्प और रहस्यमय है। पुराणों के अनुसार, जब भी सृष्टि पर कोई संकट आया या अधर्म फैला, तो भगवान शिव ने अपने ही अंश से इन बारह रुद्रों को प्रकट किया। शिव पुराण के अनुसार, रुद्रों की उत्पत्ति ऋषि कश्यप की पत्नी सुरभि के गर्भ से हुई थी, जबकि कुछ परंपराएं उनकी उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा के क्रोध से मानती हैं. यहां भगवान शिव के इन शक्तिशाली 11 रुद्र अवतारों के नाम और महत्व का वर्णन दिया गया है…
भगवान शिव के 11 रुद्रों के नाम-
1. कपाली: ये पहले रुद्र हैं, जो शत्रुओं का नाश करने वाले और बाधाओं को दूर करने वाले माने जाते हैं.
2. पिंगल: इनका रूप अग्नि के समान तेजस्वी है। ये भक्तों के दुखों को जलाकर नष्ट कर देते हैं.
3. भीम: भीम रुद्र का स्वरूप अत्यंत विशाल और शक्तिशाली है। ये अन्याय के विरुद्ध न्याय की स्थापना करते हैं.
4. विरुपाक्ष: तीन नेत्रों वाले विरुपाक्ष रुद्र ज्ञान और अंतर्दृष्टि के स्वामी हैं.
5. विलोहित: इनका नाम इनके लाल रंग के कारण पड़ा। ये अग्नि और जीवन की ऊर्जा के प्रतीक हैं.
6. शास्ता: ये अनुशासन और धर्म के रक्षक हैं। इन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप माना जाता है.
7. अजपाद: ये आध्यात्मिक शांति और मोक्ष प्रदान करने वाले रुद्र हैं.
8. अहिर्बुध्न्य: ये गहरे ज्ञान और कुण्डलिनी शक्ति के स्वामी माने जाते हैं.
9. शम्भु: सुख और कल्याण प्रदान करने वाले महादेव के इस रूप को शम्भु कहा जाता है.
10. चण्ड: अधर्मियों और राक्षसों के संहार के लिए भगवान ने यह भयानक रूप धारण किया था.
11. भव: यह रुद्र अवतार सृष्टि के सृजन और निरंतरता का प्रतीक है.
11 रुद्रों की उत्पत्ति की कथा-
शिवपुराण के अनुसार, एक समय जब असुरों ने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया, तब ऋषि कश्यप ने भगवान शिव की कठिन तपस्या की. शिव जी ने प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया कि वे उनके पुत्र के रूप में जन्म लेंगे. इसके बाद कश्यप की पत्नी सुरभि के गर्भ से ग्यारह पुत्रों का जन्म हुआ, जो 11 रुद्र कहलाए. इन रुद्रों ने न केवल देवताओं की रक्षा की, बल्कि ब्रह्मांड के संतुलन को भी बनाए रखा.
पूजा का फल और महत्व-
-ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि किसी जातक की कुंडली में कालसर्प दोष या शनि की साढ़ेसाती का बुरा प्रभाव हो, तो उसे ‘एकादश रुद्र’ (11 रुद्रों) की आराधना करनी चाहिए.
-रुद्राभिषेक: सावन के महीने या महाशिवरात्रि (2026 में 15 फरवरी) के दिन ग्यारह रुद्रों के नाम से अभिषेक करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है.
-हनुमान जी: यह भी माना जाता है कि हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्र के ही अवतार हैं, जो कलयुग में भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं.
कंधों पर कावड़ यात्रा उठाने से पहले क्यों लिया जाता है संकल्प, यहां जानिए पूरा नियम वरना चढ़ेगा सिर्फ पाप
31 Jan, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरिद्वार: हरिद्वार से शुरू होने वाली शारदीय कावड़ यात्रा में अब कुछ ही समय बाकी रह गया है. देश के अलग-अलग राज्यों से शिव भक्त हरिद्वार आते हैं और अपने कंधों पर गंगाजल उठाकर अपने गंतव्य को रवाना हो जाते हैं. भगवान शिव के निमित्त की जाने वाली कावड़ यात्रा, तलवार के धार पर चलने के बराबर होती है. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि यदि कावड़ यात्रा नियम अनुसार नहीं की जाती तो उसका विपरीत फल मिलता है और महादेव के क्रोध का सामना करना पड़ सकता है.
कावड़ यात्रा एक चलता फिरता मंदिर होता है. शारदीय कावड़ यात्रा फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होती है जिसे कंधों पर उठाने के नियम, शिव महापुराण, स्कंद पुराण आदि धार्मिक ग्रंथो में बताया गया हैं. चलिए विस्तार से समझते हैं कावड़ उठाने के नियम…
क्या है कावड़ उठाने के नियम
कावड़ यात्रा के नियम की ज्यादा जानकारी देते हुए पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि शिव पुराण और स्कंद पुराण आदि कई ग्रंथों में कावड़ उठाने के नियमों का उल्लेख किया गया है. कावड़ यात्रा शुरू करने से पूर्व पवित्र नदी गंगा आदि में स्नान करके साफ सुथरे वस्त्रों को धारण करें. स्नान करते हुए भोलेनाथ के मंत्रों जैसे “ॐ नमः शिवाय” या अन्य मंत्र का मन ही मन जाप करते रहें. वह बताते हैं कि कावड़ उठाने से पहले पतित पावनी मां गंगा की पूजा अर्चना और हाथ में पवित्र गंगाजल लेकर यात्रा का संकल्प करें. यदि बिना संकल्प के कावड़ यात्रा की जाती है, तो उसका कोई भी फल नहीं मिलता है.
क्यों खंडित हो जाती है कांवड
कावड़ यात्रा करते हुए कावड़ को एक कंधे से दूसरे कंधे पर सिर के ऊपर से ना लेकर जाएं. ऐसा करना करने से यात्रा को खंडित माना जाता है. साथ ही कावड़ को नीचे भूमि पर नहीं रखना चाहिए. इससे भी कावड़ खंडित हो जाती है. यदि कावड़ को एक कंधे से दूसरे कंधे पर रखना हो, तो आगे की तरफ से घूम कर रखें. साथ ही यदि कावड़ को रखना हो तो किसी साफ सुथरी जगह ऊंचे स्थान यानी स्टैंड पेड़ आदि पर ही रखें इससे कावड़ खंडित नहीं होती है और यात्रा का संपूर्ण फल मिलता है.
किन चीजों से बचें
वह बताते हैं कि कावड़, देवताओं के समान पवित्र होती है. कावड़ यात्रा करते हुए मन में पवित्रता और भोलेनाथ का ही ध्यान होना चाहिए. अपने मुंह से गाली गलौज, अपशब्द नहीं निकलना चाहिए. ऐसा करने से आपकी यात्रा अधूरी रहती है. वह आगे बताते हैं कि यात्रा के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना मद्यपान बीड़ी सिगरेट तंबाकू भांग या अन्य नशीली पदार्थ का सेवन वर्जित करें. ऐसा करने से भक्तों को कई लाख गुना पाप लगता है जो जन्मों जन्म तक नहीं उतरता. इस यात्रा के दौरान नशीले पदार्थ, मांस मदिरा आदि पूर्ण रूप से वर्जित करने पर ही यात्रा का संपूर्ण फल प्राप्त होता है.
गंगा स्नान के बाद राशि के अनुसार करें ये छोटा सा काम, बदल जाएगा जीवन और मिलेगा महादेव का आशीर्वाद
31 Jan, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान शिव को समर्पित माघ मास का वेदों शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है. माघ मास की पूर्णिमा पर भगवान शिव की ससुराल और कुंभ नगरी हरिद्वार में गंगा स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है, तो वहीं सभी ग्रहों की पीड़ा भी खत्म होने की मान्यता है. गंगा स्नान के साथ ही दान करने का विधान बताया गया जिससे अमोघ फल की प्राप्ति होती है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार दान करने का सबसे अधिक महत्व होता है.
भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए माघ पूर्णिमा को क्या दान करें और कैसे दान करें इसकी जानकारी देते हुए हरिद्वार के ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि वेदों पुराणों में दान करने का सबसे अधिक महत्व बताया गया है. माघ मास भगवान शिव को समर्पित होता है. यदि इस मास की पूर्णिमा पर अपनी राशि के अनुसार वस्त्र खाने पीने की वस्तुएं आदि गरीब और जरूरतमंदों को दान की जाए, तो भगवान शिव और माता पार्वती मोक्ष प्राप्ति का आशीर्वाद देते हैं और ग्रह संबंधित बाधा भी खत्म हो जाती है.
मेष और वृश्चिक राशि: पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि मेष और वृश्चिक राशि के जातकों को माघ पूर्णिमा के दिन लाल रंग के वस्त्र, लाल रंग की मिठाई, लाल रंग की वस्तुएं, रत्न आदि दान करने पर भगवान शिव की कृपा दोनों राशियों पर बनी रहेगी और जीवन में आने वाली सभी समस्याओं का कोई प्रभाव नहीं होगा.
वृषभ और तुला राशि: वह बताते हैं कि शुक्र ग्रह की इन दोनों राशियों के जातकों को माघ पूर्णिमा का स्नान हर की पौड़ी पर करने के बाद सफेद रंग की माला, सफेद रंग के वस्त्र, सफेद रंग की मिठाई, आटा, दूध, स्फटिक की माला, बर्फी आदि दान करने पर माघ मास और पूर्णिमा का संपूर्ण फल प्राप्त होगा.
मिथुन और कन्या राशि: वह बताते हैं कि बुध ग्रह के स्वामित्व की इन दोनों राशियों के जातकों को माघ पूर्णिमा के दिन स्नान आदि करने के बाद गाय को हरा चारा, गरीब और जरूरतमंदों को हरे रंग के वस्त्र, हरे रंग की मिठाई, स्कूल जाने वाली कन्याओं को पढ़ने की सामग्री, पेन, पेंसिल, स्कूल बैग आदि देने पर सभी ग्रहों का दुष्प्रभाव कम होगा और भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहेगी.
कर्क राशि: ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं की चंद्रमा ग्रह के स्वामित्व की इस राशि के जातकों को माघ पूर्णिमा का स्नान आदि करने के बाद सफेद रंग से निर्मित वस्तुएं, सफेद रंग के वस्त्र, सफेद बर्फी, सफेद मिठाई, बुरा, चीनी, सफेद रंग के फल, चप्पल आदि दान करने पर माघ पूर्णिमा का संपूर्ण फल प्राप्त होगा और चंद्रमा की कृपा भी बनी रहेगी. माघ पूर्णिमा भगवान शिव को बेहद ही प्रिय है.
सिंह राशि: वह बताते हैं कि सूर्य ग्रह के स्वामित्व की सिंह राशि के जातकों को स्नान करते हुए सूर्य को जल देने गरीब जरूरतमंद असहाय लोगों को लाल रंग की वस्तुएं जैसे लाल रंग के फल चुकंदर, लीची, अमर, लाल रंग के वस्त्र, गेहूं, बाजरा, फूल, सब्जियां और जीवन में उपयोग होने वाले वस्तुएं देने पर सभी ग्रहों का अच्छा प्रभाव प्राप्त होगा.
धनु और मीन राशि: पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि गुरु बृहस्पति के स्वामित्व की इन दोनों राशियों के जातकों को पीले रंग की वस्तुएं दान करने पर लाभ मिलेगा. माघ पूर्णिमा के दिन गंगा में स्नान करने के बाद पीले रंग के वस्त्र, धार्मिक ग्रंथ, पीले रंग की माला, फल, सब्जियां और रोजाना उपयोग होने वाली वस्तुएं देने से सभी ग्रहों का दुष्प्रभाव खत्म होगा तो वही गुरु ग्रह कुंडली में मजबूत होकर बंद पड़े सभी रास्ते खोल देंगे. ऐसा करने से भगवान शिव की कृपा भी सदैव बनी रहेगी.
मकर और कुंभ राशि: वह आगे बताते हैं कि शनि ग्रह के स्वामित्व की मकर और कुंभ राशि के जातकों को माघ पूर्णिमा के दिन स्नान आदि करके गरीब और जरूरतमंद लोगों को डार्क रंग के वस्त्र, लोहे की वस्तुएं, लोहे से निर्मित वस्तुएं चप्पल जूते काला कंबल तिल उड़द की दाल आदि दान करने पर शनि ग्रह प्रसन्न होंगे और आरोग्यता का वरदान देंगे. माघ पूर्णिमा के दिन दान करने पर भगवान शिव की कृपा भी सदैव बनी रहेगी और जीवन में आने वाले कष्ट खत्म हो जाएंगे.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (31 जनवरी 2026)
31 Jan, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कुटुम्ब में सामान्य क्लेश व अशांति, व्यर्थ धन का व्यय तथा पीड़ा होगी।
वृष राशि :- इष्ट मित्रों से सुख, अधिकारियों से मेल मिलाप लाभप्रद रहेगा, ध्यान रखें।
मिथुन राशि :- अर्थ व्यवस्था अनुकूल होगी, सफलता के साधन जुटाएं तथा कार्य बनेंगे।
कर्क राशि :- मनोवृत्ति उदार बनाए रखे, तनाव क्लेश से हानि संभव होगी, ध्यान रखे।
सिंह राशि :- समय नष्ट हो, व्यवसाय गति मंद, असंमजस की स्थिति से बचिएगा।
कन्या राशि :- आर्थिक योजना सफल हो, व्यवसायिक क्षमता अनुकूल बनी रहेगी, कार्य बनेंगे।
तुला राशि :- धन का व्यय, व्यर्थ परिश्रम से हानि संभव होवे, ध्यान रखें तथा कार्य अवश्य बनें।
वृश्चिक राशि :- स्त्री वर्ग से क्लेश व अशांति तथा विघटनकारी तत्व परेशान अवश्य करेंगे।
धनु राशि :- कुटुम्ब की समस्या सुलझे तथा धन का व्यय, व्यर्थ भ्रमण, कार्य अवरोध होगा।
मकर राशि :- अर्थ व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो, कार्य व्यवसाय गति मध्य बनी ही रहें।
कुंभ राशि :- दैनिक कार्यवृत्ति में सुधार, चिन्ताएं कम हो तथा सफलता अवश्य ही मिलेगी।
मीन राशि :- मनोबल उत्साह वर्धक हो, कार्यगति अनुकूल बनी रहे।
आज का पंचांग: सालों बाद बना सर्वार्थ सिद्धि योग और प्रदोष का अद्भुत मेल, क्या आपकी किस्मत भी बदलने वाली है?
30 Jan, 2026 07:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचांग : आज 30 जनवरी, 2026 शुक्रवार, के दिन माघ महीने की शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि है. भगवान विष्णु के द्वारा इस तिथि का नियंत्रण होता है. नई योजना बनाने और रणनीति विकसित करने, धन दान और उपवास के लिए अच्छा दिन माना जाता है. आज जया एकादशी का पारण है. आज शुक्र प्रदोष व्रत है. सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है.
30 जनवरी का पंचांग
विक्रम संवत : 2082
मास : माघ
पक्ष : शुक्ल पक्ष द्वादशी
दिन : शुक्रवार
तिथि : शुक्ल पक्ष द्वादशी
योग : वैद्रुति
नक्षत्र : आर्द्रा
करण : बलव
चंद्र राशि : मिथुन
सूर्य राशि : मकर
सूर्योदय : सुबह 07:11 बजे
सूर्यास्त : शाम 05:57 बजे
चंद्रोदय : दोपहर 03.06 बजे
चंद्रास्त : सुबह 05.54 (31 जनवरी)
राहुकाल : 11:14 से 12:34
यमगंड : 15:16 से 16:37
इस नक्षत्र में यात्रा और खरीदारी से बचें
आज के दिन चंद्रमा मिथुन राशि और आर्द्रा नक्षत्र में रहेंगे. यह नक्षत्र मिथुन राशि में 6:40 से लेकर 20:00 डिग्री तक विस्तार है. इसके अधिष्ठाता देवता रुद्र हैं और इस नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहु हैं. दुश्मनों से लड़ने, विष संबंधी काम करने, आत्माओं का आह्वान करने, किसी कार्य से खुद को अलग करने या खंडहर गिराने के अलावा बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद पाने के लिए यह नक्षत्र अच्छा माना जाता है. हालांकि यात्रा और खरीदारी से इस नक्षत्र में बचना चाहिए.
आज के दिन का वर्जित समय
आज के दिन 11:14 से 12:34 बजे तक राहुकाल रहेगा. ऐसे में कोई शुभ कार्य करना हो, तो इस अवधि से परहेज करना ही अच्छा रहेगा. इसी तरह यमगंड, गुलिक, दुमुहूर्त और वर्ज्यम् से भी परहेज करना चाहिए.
चिन्हारी योजना से सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति
जल जीवन मिशन से संवरी बुलगा की तस्वीर, जीवंती बाई के घर तक पहुँचा शुद्ध पेयजल
नगरीय निकायों के कायाकल्प और वित्तीय सुदृढ़ीकरण के लिये दो दिवसीय "शहरी सुधार कार्यशाला" का हुआ समापन
संकल्प से समाधान अभियान’ से त्वरित, प्रभावी और पारदर्शी निराकरण हुआ सुनिश्चित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
यूरिया का प्रभावी विकल्प बन रही हरी खाद, जशपुर में 600 हेक्टेयर में प्रदर्शन
फॉरेस्ट ग्राउंड में बना बॉक्स क्रिकेट ग्राउंड युवाओं को खेल के प्रति प्रोत्साहित और अनुशासित कर रहा
माता-पिता के संस्कार और गुरूओं से प्राप्त ज्ञान के प्रति सदैव रहें कृतज्ञ : राज्यपाल पटेल
आदि शंकराचार्य का दर्शन भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक एकता का बना आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
