धर्म एवं ज्योतिष
भगवान कृष्ण के कई नाम, लेकिन पहला कौन सा था? जानिए जन्म से जुड़ा रहस्य
28 Jan, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कृष्ण भगवान को दुनिया भर में उनके अद्भुत व्यक्तित्व, गीता में दिए गए उपदेश और बाल लीलाओं के लिए जाना जाता है. वे भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं और भक्तों के दिलों में विशेष स्थान रखते हैं. हर कोई जानना चाहता है कि उनके जीवन की शुरुआत कैसे हुई और उनका पहला नाम क्या था. कृष्ण का जीवन कई रहस्यों और अद्भुत घटनाओं से भरा हुआ है. उनका जन्म मथुरा में वासुदेव और देवकी के घर हुआ. किंवदंतियों के अनुसार, उनके जन्म के समय देवकी और वासुदेव को जेल में बंद कर दिया गया था क्योंकि उनका भाई कंस भविष्यवाणी से डर रहा था कि देवकी का आठवां पुत्र उसे मार देगा. ऐसे में कृष्ण का जन्म और उनका नाम सिर्फ एक कहानी नहीं बल्कि विश्वास, भक्ति और आदर्शों का प्रतीक बन गया. उनका पहला नाम, जिसे उनके परिवार ने रखा, कृष्ण के जीवन की गूढ़ता और उनके दिव्य स्वरूप की झलक देता है.
कृष्ण भगवान का पहला नाम
कृष्ण भगवान का जन्म जब मथुरा में हुआ, तब उनके माता-पिता ने उन्हें “कृष्ण” नाम दिया, लेकिन जन्म के कुछ ही समय बाद, उनके पिता वासुदेव उन्हें यशोदा और नंद के घर गोकुल में छिपा ले गए. वहां उनके पालन-पोषण के लिए उन्हें अलग नाम भी दिया गया. गोकुल में उन्हें “गोविंद” और कभी-कभी “मुरारी” कहा जाता था. हालांकि, जन्म के समय माता-पिता का रखा हुआ पहला नाम “कृष्ण” ही आधिकारिक और सबसे प्रसिद्ध नाम बन गया. कृष्ण नाम का अर्थ होता है “काला या गहरा रंग”, क्योंकि उनकी त्वचा का वर्ण गहरा था. यह नाम उनकी दिव्यता और आकर्षण को भी दर्शाता है. भारतीय संस्कृति में नाम का महत्व बहुत बड़ा होता है और कृष्ण नाम उनके अद्भुत व्यक्तित्व और लीलाओं की पहचान बन गया.
जन्म और बचपन की खास बातें
कृष्ण का जन्म अष्टमी की रात को हुआ, और उनके जीवन में कई चमत्कारिक घटनाएं हुईं. जैसे ही उन्होंने जन्म लिया, जेल की बेड़ियां अपने आप खुल गईं और गार्ड्स बेहोश हो गए. वासुदेव ने रात के अंधेरे में कृष्ण को यशोदा और नंद के घर गोकुल में ले जाकर रखा. गोकुल में कृष्ण की लीलाएं बहुत प्रसिद्ध हैं. वह माखन चोरी करने, गोपियों के साथ खेलने और बछड़ों के साथ समय बिताने के लिए जाने जाते थे. उनके बचपन के नाम गोविंद और मुरारी भी इन लीलाओं में जुड़ गए. लेकिन भगवान कृष्ण का असली और सबसे पहला नाम “कृष्ण” ही माना जाता है.
नाम का महत्व और भक्ति में प्रभाव
कृष्ण का नाम सिर्फ पहचान का साधन नहीं है. यह नाम भक्तों के लिए भक्ति और प्रेम का प्रतीक है. भक्ति की प्राचीन कथाओं में भी कृष्ण के नाम का उच्चारण और जाप करने से घर में सुख, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा आने की बात कही गई है. कृष्ण की लीलाएं, उनके खेल, गायब होने वाले माखन की कहानियां और उनके दोस्तों के साथ संबंध सब कुछ उनके नाम से जुड़ा हुआ है. उनके जीवन में पहला नाम और उसके बाद दिए गए प्यारे नाम जैसे गोविंद, मुरारी, श्याम आदि उनके व्यक्तित्व के अलग पहलुओं को दर्शाते हैं.
कृष्ण भगवान का पहला नाम “कृष्ण” ही था, और यही नाम उनके जन्म से जुड़ी दिव्यता और अद्भुत शक्तियों का प्रतीक बन गया. उनके अन्य नाम जैसे गोविंद और मुरारी सिर्फ उनके बचपन की लीलाओं से जुड़े हैं. कृष्ण भगवान के जीवन और उनके नाम में छिपा संदेश आज भी भक्तों को भक्ति, प्रेम और नैतिकता की राह दिखाता है.
हर शाम तुलसी माता की आरती करने से घटती है चिंता, बढ़ती है खुशियों और शांति की लहर
28 Jan, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय घरों में तुलसी का पौधा सिर्फ एक पौधा नहीं माना जाता, बल्कि इसे मां लक्ष्मी का रूप समझा जाता है. सुबह-शाम तुलसी के पास दिया जलाना, जल चढ़ाना और आरती करना कई लोगों की रोज की आदत होती है. माना जाता है कि तुलसी के सामने की गई प्रार्थना सीधे भगवान तक पहुंचती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है. खासकर शाम की तुलसी आरती का अलग ही महत्व है. दिनभर की भागदौड़ और तनाव के बाद जब घर में दीपक की लौ जलती है और तुलसी माता की आरती गूंजती है, तो माहौल अपने आप शांत और पवित्र सा लगने लगता है. तुलसी आरती के बोल बहुत सरल होते हैं, जिन्हें कोई भी आसानी से याद कर सकता है. इन शब्दों में भक्ति, भरोसा और अपनापन झलकता है. ये आरती सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि मन को सुकून देने और घर की ऊर्जा को अच्छा बनाए रखने का तरीका है. जो लोग रोज तुलसी आरती गाते हैं, वे कहते हैं कि इससे मन के डर कम होते हैं और घर में खुशी का माहौल रहता है.
तुलसी माता की प्रसिद्ध आरती
जय जय तुलसी माता आरती के बोल
जय जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता।
सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता।।
मैय्या जय तुलसी माता।। (1)
सब योगों से ऊपर, सब रोगों से ऊपर।
रज से रक्ष करके, सबकी भव त्राता।
मैय्या जय तुलसी माता।। (2)
बटु पुत्री है श्यामा, सूर बल्ली है ग्राम्या।
विष्णुप्रिय जो नर तुमको सेवे, सो नर तर जाता।
मैय्या जय तुलसी माता।। (3)
हरि के शीश विराजत, त्रिभुवन से हो वंदित।
पतित जनों की तारिणी, तुम हो विख्याता।
मैय्या जय तुलसी माता।। (4)
लेकर जन्म विजन में, आई दिव्य भवन में।
मानव लोक तुम्हीं से, सुख-संपति पाता।
मैय्या जय तुलसी माता।। (5)
हरि को तुम अति प्यारी, श्याम वर्ण सुकुमारी।
प्रेम अजब है उनका, तुमसे कैसा नाता।
हमारी विपद हरो तुम, कृपा करो माता।
मैय्या जय तुलसी माता।। (6)
जय जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता।
सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता।।
मैय्या जय तुलसी माता।। (7)
आरती का अंत शांति मंत्र से करें:
ॐ शांति शांति शांति॥
तुलसी आरती का मतलब क्या है
इस आरती में तुलसी माता की महिमा बताई गई है. उन्हें भगवान विष्णु की प्रिय कहा गया है. “हरि की पटरानी” कहने का मतलब है कि तुलसी माता को बहुत ऊंचा स्थान दिया गया है. आरती के बोल बताते हैं कि जिसने भी सच्चे मन से तुलसी की पूजा की, उसे मनचाहा सुख मिला. इन शब्दों में एक भरोसा छुपा है -अगर मन साफ हो और भक्ति सच्ची हो, तो जीवन की परेशानियां हल्की लगने लगती हैं. ये आरती हमें याद दिलाती है कि भगवान से जुड़ाव दिखावे से नहीं, भावना से होता है.
तुलसी आरती करने का सही समय
ज्यादातर लोग तुलसी आरती सुबह सूरज निकलने के बाद और शाम को सूरज ढलने के समय करते हैं. शाम की आरती ज्यादा खास मानी जाती है, क्योंकि उस समय घर में दीपक जलाकर तुलसी माता के पास घी या तेल का दिया रखा जाता है. इससे घर का माहौल शांत होता है और नकारात्मकता दूर रहने की मान्यता है. रविवार छोड़कर रोज तुलसी पर जल चढ़ाया जाता है. आरती के समय अगर पूरा परिवार साथ खड़ा हो जाए, तो घर में अपनापन और बढ़ जाता है.
तुलसी आरती से मिलने वाले फायदे
-मन को शांति मिलती है
-घर का माहौल हल्का और खुशहाल रहता है
-डर और बेचैनी कम महसूस होती है
-घर में बरकत बनी रहती है
-पूजा करने की आदत से मन एकाग्र होता है
कई लोग मानते हैं कि तुलसी माता की कृपा से रिश्तों में मिठास आती है और घर में झगड़े कम होते हैं.
आरती करते समय किन बातों का ध्यान रखें
तुलसी के पास साफ जगह होनी चाहिए. वहां जूते-चप्पल न ले जाएं. आरती से पहले हाथ-मुंह धो लें. तुलसी को छूने से पहले मन में सम्मान का भाव रखें. सूखे पत्ते खुद गिरें तो अलग बात है, हरे पत्ते बिना जरूरत न तोड़ें.
आरती के समय मन इधर-उधर न भटके, कोशिश करें कि पूरा ध्यान आरती के शब्दों पर रहे. इससे भक्ति का असर ज्यादा महसूस होता है.
रामायण में कितने कांड हैं? बाल कांड से उत्तर कांड तक भगवान राम की पूरी जीवन यात्रा
28 Jan, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रामायण सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि जीवन के सही और गलत के बीच की लड़ाई का पाठ है. हर उम्र के लोग इसे पढ़कर या सुनकर सीखते हैं कि धर्म और सच्चाई का पालन करना कितना जरूरी है. इस ग्रंथ में भगवान राम, माता सीता, भाई लक्ष्मण और उनके मित्र हनुमान की यात्रा को दर्शाया गया है, जो हमें न केवल भक्ति का अनुभव कराती है, बल्कि हमें नैतिक मूल्यों और साहस की भी शिक्षा देती है. रामायण में सात कांड हैं, और हर कांड में अलग-अलग परिस्थितियों और घटनाओं का वर्णन है. बाल्यकाल से लेकर राज्याभिषेक तक की पूरी कहानी इसमें शामिल है. ये कांड हमें सिखाते हैं कि कैसे जीवन में चुनौतियों का सामना धैर्य, बुद्धि और धर्म के मार्ग पर चलते हुए किया जा सकता है. रामायण सिर्फ बच्चों के लिए नहीं, बल्कि हर उम्र के व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत है, और यह आज भी हमारे समाज में आदर्श जीवन जीने की राह दिखाता है.
रामायण के सात कांड
1. बाल कांड
यह कांड भगवान राम के जन्म और उनके बचपन की कहानी बताता है. इसमें उनके माता-पिता, गुरु और बाल लीलाओं का वर्णन है. यह हमें सिखाता है कि बचपन से ही अच्छे संस्कार और शिक्षा का महत्व कितना जरूरी है.
2. अयोध्या कांड
इसमें राम के राज्याभिषेक की तैयारी और रावण की साजिश से प्रभावित होकर राम का वनवास बताया गया है. यह कांड हमें सिखाता है कि जीवन में कठिनाइयों का सामना धैर्य और शांति से करना चाहिए.
3. अरण्य कांड
राम, सीता और लक्ष्मण का वनवास और रावण द्वारा सीता का हरण इसमें दर्शाया गया है. यह हमें यह सिखाता है कि बुराई हमेशा किसी न किसी रूप में आती है, लेकिन सत्य और धर्म की शक्ति से उसका सामना किया जा सकता है.
4. किष्किंधा कांड
राम और हनुमान की मित्रता, सुग्रीव से मित्रता और रावण की तलाश का वर्णन इस कांड में है. यह कांड यह बताता है कि सही साथी और दोस्त जीवन में कितने जरूरी हैं.
5. सुंदर कांड
हनुमान की लंका यात्रा और माता सीता से मिलने की कहानी इसमें है. यह कांड हमें साहस, निडरता और अपने लक्ष्य को पाने की प्रेरणा देता है.
6. युद्ध कांड
राम और रावण के बीच का युद्ध, युद्ध में रणनीति और धर्म के पालन का महत्व इस कांड में बताया गया है. यह हमें यह सिखाता है कि कठिनाइयों में भी सच्चाई के रास्ते पर चलना जरूरी है.
7. उत्तर कांड
राम का राज्याभिषेक, उनके जीवन के अंतिम चरण और समाज में उनके आदर्श जीवन का वर्णन इसमें है. यह कांड हमें यह दिखाता है कि जीवन के हर चरण में संतुलन, न्याय और धर्म का पालन करना जरूरी है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (28 जनवरी 2026)
28 Jan, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- मन में अशांति, किसी परेशान से बचिए, कुटुम्ब की समस्याओं में समय बीतेगा।
वृष राशि :- संवेदनशील होने से बचिएगा नहीं तो अपने किए पर पछताना पड़ेगा, ध्यान दें।
मिथुन राशि :- मानसिक कार्य में सफलता से संतोष, धन लाभ बिगड़े हुए कार्य अवश्य बनेंगे।
कर्क राशि :- विरोधी वर्ग का समर्थन फलप्रद हो तथा शुभ कार्यों के योग अवश्य बनेंगे।
सिंह राशि :- व्यवसायिक क्षमता अनुकूल रहे, स्थिति पूर्ण नियंत्रण पर बनी रहेगी, ध्यान दें।
कन्या राशि :- सामाजिक कार्यों में प्रभुत्व वृद्धि होगी, धन लाभ आशानुकूल सफलता का हर्ष हो।
तुला राशि :- अधिकारी वर्ग से समर्थन फलप्रद रहे तथा कार्य अवश्य ही बनेंगे।
वृश्चिक राशि :- धन लाभ, कार्यकुशलता से संतोष, पराक्रम एवं समृद्धि के योग बनेंगे।
धनु राशि :- स्त्री शरीर चिन्ता, विवाद ग्रस्त होने से बचिए, कार्य बनने के योग बनेंगे।
मकर राशि :- मनोबल उत्साह वर्धक हो, दैनिक कार्य गति में सफलता मिलेगी।
कुंभ राशि :- कार्य व्यवसाय में उत्तेजना, धन का व्यय एवं शांति निष्फल होगी।
मीन राशि :- समृद्धि के साधन जुटाए, इष्ट मित्र सुख वर्धक हो।
अद्भुत संयोग: दुर्गाष्टमी पर पितृों को खुश करने का मौका, जानें सोमवार की पूजा का विशेष फल और शुभ मुहूर्त
26 Jan, 2026 07:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचांग : आज 26 जनवरी, 2026 सोमवार, के दिन माघ महीने की शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि है. इस तिथि पर माता दुर्गा का शासन है. इस दिन पितृ पूजा की जा सकती है, लेकिन अधिकांश कार्यों के लिए अशुभ तिथि मानी जाती है. आज मासिक दुर्गाष्टमी है.
26 जनवरी का पंचांग
विक्रम संवत : 2082
मास : माघ
पक्ष : शुक्ल पक्ष अष्टमी
दिन : सोमवार
तिथि : शुक्ल पक्ष अष्टमी
योग : साध्य
नक्षत्र : अश्विनी
करण : विष्टि
चंद्र राशि : मेष
सूर्य राशि : मकर
सूर्योदय : सुबह 07:13 बजे
सूर्यास्त : शाम 05:54 बजे
चंद्रोदय : सुबह 11.31 बजे
चंद्रास्त : देर रात 01.30 बजे (27 जनवरी)
राहुकाल : 08:33 से 09:53
यमगंड : 11:13 से 12:34
व्यापार शुरू करने के लिए अच्छा है नक्षत्र
आज के दिन चंद्रमा मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र में रहेंगे. नक्षत्र गणना में अश्विनी पहला नक्षत्र है. इसका विस्तार मेष राशि में 0 से 13.2 डिग्री तक होता है. इसके देवता अश्विनी कुमार हैं, जो जुड़वा देवता हैं और देवताओं के चिकित्सक के रूप में प्रसिद्ध हैं. इसके स्वामी ग्रह केतु हैं. यह नक्षत्र यात्रा करने, हीलिंग, ज्वैलरी बनाने, अध्ययन की शुरुआत, वाहन खरीदने/बेचने के लिए अच्छा माना जाता है. नक्षत्र का वर्ण हल्का और तेज होता है. खेल, सजावट और ललित कला, व्यापार, खरीदारी, शारीरिक व्यायाम, गहने पहनने और निर्माण या व्यापार शुरू करने, शिक्षा और शिक्षण, दवाएं लेने, ऋण देने और लेने, धार्मिक गतिविधियों, विलासिता की वस्तुओं का आनंद लेने आदि कार्य इस नक्षत्र में किए जा सकते हैं.
आज के दिन का वर्जित समय
आज के दिन 08:33 से 09:53 बजे तक राहुकाल रहेगा. ऐसे में कोई शुभ कार्य करना हो, तो इस अवधि से परहेज करना ही अच्छा रहेगा. इसी तरह यमगंड, गुलिक, दुमुहूर्त और वर्ज्यम् से भी परहेज करना चाहिए.
सावधान! कन्या राशि वाले सोमवार को न करें यह एक गलती, वरना हाथ से निकल जाएगा तरक्की का बड़ा मौका
26 Jan, 2026 07:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष- 26 जनवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए पहले भाव में होगा. आज जो भी काम करेंगे, उसमें उत्साह बना रहेगा. शारीरिक और मानसिक रूप से ताजगी और बनी रहेगी. परिवार में सुख और शांति बनी रहेगी. मित्रों और स्वजनों के साथ खुशी के पल गुजार सकेंगे. मां से आपको लाभ प्राप्त हो सकता है. यात्रा की संभावना है. आर्थिक लाभ, स्वादिष्ट भोजन और उपहार मिलने से आपका दिन अच्छा रहेगा. विद्यार्थियों को सीनियर्स की मदद मिलेगी. इससे आप कठिन विषयों की पढ़ाई भी आसानी से पूरी कर सकेंगे.
वृषभ- 26 जनवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए बारहवें भाव में होगा. आज कोई भी निर्णय लेने से पहले सावधान रहने की आवश्यकता है. किसी के साथ भी गलतफहमी हो सकती है. शारीरिक अस्वस्थता आपके मन को उदास कर देगी. परिवार में मतभेद और मनमुटाव हो सकता है. आपको परिश्रम के अनुसार फल नहीं मिलने से आप निराशा का अनुभव करेंगे. धन खर्च अधिक हो सकता है. आय और व्यय में बैलेंस नहीं रहेगा. व्यापारियों के लिए दिन सामान्य रहेगा.
मिथुन- 26 जनवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए ग्यारहवें भाव में होगा. आज आर्थिक और सामाजिक रूप से आप समृद्ध रहेंगे. कुंटुंबजनों से मिलने का दिन है. आपके मान-सम्मान में वृद्धि होगी. मित्रों से लाभ होगा और उनके पीछे धन खर्च भी होगा. रमणीय स्थल पर प्रवास होने से आपका दिन आनंददायक बन जाएगा. योग्य जीवनसाथी की खोज के लिए आज का दिन बहुत अच्छा है. परिजनों के साथ आपका मेल-जोल बना रहेगा और वैवाहिक जीवन में अधिक निकटता रहेगी.
कर्क- 26 जनवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए दसवें भाव में होगा. घर की साज-सजावट पर विशेष ध्यान देंगे. नए घरेलू सामान खरीदने की संभावना है. व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों को लाभ तथा पदोन्नति मिल सकती है. पारिवारिक सुख-शांति बनी रहेगी. सरकारी लाभ होगा. आपकी मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. आर्थिक लाभ होगा. आज सभी काम सफलतापूर्वक पूरे हो सकेंगे. जीवनसाथी के साथ प्रेमपूर्ण संबंध बने रहेंगे. विद्यार्थियों को भी लाभ होने की संभावना है.
सिंह- 26 जनवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए नवें भाव में होगा. सुस्ती के चलते काम की गति धीमी होगी. पेट की तकलीफ परेशान करेगी. काम में विरोधी बाधा डाल सकते हैं. आज ऑफिस में अधिकारियों से थोड़ी दूरी रखना बेहतर होगा. व्यापार में प्रतिद्वंदियों से आपको नुकसान हो सकता है. स्वभाव की उग्रता को नियंत्रण में रखना होगा. धर्म और आध्यात्मिकता के कारण मानसिक शांति प्राप्त कर सकेंगे. दोपहर के बाद स्थिति में परिवर्तन आ सकता है.
कन्या- 26 जनवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए आठवें भाव में होगा. नए काम को शुरू करने के लिए आज का दिन अच्छा नहीं है. बाहर के खाने से परहेज करें अन्यथा तबीयत खराब हो सकती है. गुस्से को काबू करने के लिए ज्यादातर समय मौन ही रहें. खर्च में वृद्धि होगी. विरोधियों से सावधान रहें. पानी और आग का डर बना रहेगा. गैर कानूनी या अनैतिक काम से मुसीबत में फंस सकते हैं. आज का दिन आप धैर्य और समझदारी से गुजारें. जल्दबाजी से आपको नुकसान हो सकता है.
तुला- 26 जनवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए सातवें भाव में होगा. आज का दिन मौज-मस्ती, मनोरंजन, रोमांस में गुजरेगा. आपको कई जगह विशेष सम्मान मिलेगा. पार्टनरशिप के काम से आपको लाभ होगा. नए वस्त्रों की खरीदी सकते हैं. वाहन सुख का अच्छी तरह आनंद ले सकेंगे. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. मित्रों के साथ आनंददायक प्रवास होगा. भाग्य आपका साथ देगा. नया और रुचिकर काम मिल सकता है, इससे आप उत्साहित बने रहेंगे.
वृश्चिक- 26 जनवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए छठे भाव में होगा. पारिवारिक शांति का माहौल आपके तन-मन को स्वस्थ रखेगा. निर्धारित काम में सफलता मिलेगी. नौकरी में साथी कर्मचारियों का सहयोग मिलेगा. इस कारण आप अपना टारगेट आसानी से पूरा कर लेंगे. विरोधियों और शत्रुओं की चाल निष्फल होगी. ननिहाल पक्ष की ओर से लाभ होगा. अचानक किसी काम में धन खर्च हो सकता है. आज निवेश को लेकर भी आप कोई योजना बना सकते हैं. बीमार व्यक्तियों के स्वास्थ्य में सुधार होता हुआ प्रतीत होगा.
धनु- 26 जनवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए पांचवें भाव में होगा. आज का दिन मिश्रित फलदायी है. आज आपको पेट संबंधी समस्या हो सकती है. संतान के स्वास्थ्य और उनकी पढ़ाई के संबंध में चिंता से मन दु:खी रहेगा. काम में सफलता नहीं मिलने से क्रोध की भावना अधिक रहेगी. हालांकि प्रेम संबंधों के लिए उचित समय है. प्रिय व्यक्ति के साथ रोमांचक क्षणों का आनंद उठा सकेंगे. किसी नए व्यक्ति से मुलाकात सुखद रहेगी. साहित्य और लेखन के क्षेत्र में रुचि रहेगी. बातचीत तथा बौद्धिक चर्चाओं से दूर रहना आज अच्छा रहेगा.
मकर- 26 जनवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए चौथे भाव में होगा. आज आपकी मनःस्थिति और स्वास्थ्य कुछ अच्छा नहीं रहेगा. परिवार में क्लेशमय वातावरण से मन खिन्न रहेगा. शरीर में ताजगी एवं प्रफुल्लता का अभाव रहेगा. अपनों से मनमुटाव का प्रसंग हो सकता है. सीने में दर्द हो सकता है. नींद का अभाव रहेगा. मानहानि होने की आशंका है. महिला मित्रों से बातचीत में संभलकर रहें. मानसिक आवेग और प्रतिकूलताओं में वृद्धि से आपका दिन चिंता में गुजरेगा.
कुंभ- 26 जनवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए तीसरे भाव में होगा. आज आपके मन से चिंता का भार कम हो जाएगा और आप मानसिक रूप से खुशी का अनुभव करेंगे. शारीरिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा. पारिवारिक वातावरण आनंदित रहेगा. कार्यस्थल पर अपना टारगेट पूरा कर पाने की स्थिति में रहेंगे. विशेष कर भाई-बहनों के साथ संबंधों में मधुरता का अनुभव करेंगे. किसी छोटी यात्रा पर जाना हो सकता है. विद्यार्थियों के लिए आज का समय अच्छा है.
मीन- 26 जनवरी, 2026 सोमवार के दिन मेष राशि का चंद्रमा आज आपके लिए दूसरे भाव में होगा. आज वाणी पर संयम नहीं रखने से लड़ाई-झगड़े की आशंका बनी रहेगी. खर्च पर भी नियंत्रण रखें. धन सम्बंधित लेन-देन में भी सावधानी की आवश्यकता है. शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है. परिजनों से मनमुटाव हो सकता है. खान-पान में भी संयम बरतें. कार्यस्थल पर आपका मन नहीं लगेगा. आज काम ज्यादा होने से आप थकान भी महसूस करेंगे. कार्यस्थल पर धैर्य और प्रेम से बातचीत करें.
झारखंड के बासुकीनाथ मंदिर में अनोखे कचहरी का क्या है रहस्य? यहां जानें इसके इतिहास के बारे में!
26 Jan, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
झारखंड के दुमका जिले में स्थित बासुकीनाथ मंदिर न केवल एक प्राचीन धार्मिक स्थल है, बल्कि यह लाखों शिव भक्तों की आस्था का अटूट केंद्र भी है. देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर से लगभग 42 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर का इतिहास और महत्व अनूठा है. आइए जानते हैं
बासुकीनाथ मंदिर का इतिहास
बासुकीनाथ मंदिर के इतिहास को लेकर दो प्रमुख कथाएं प्रचलित हैं. पहली कथा के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण ‘बासु’ नामक एक व्यक्ति ने किया था, जो एक साधारण ग्रामीण था. कहा जाता है कि जमीन की खुदाई के दौरान बासु को एक शिवलिंग मिला था, जिसकी स्थापना वहां की गई। इसी कारण इस स्थान का नाम ‘बासुकीनाथ’ पड़ा.
दूसरी और अधिक प्रसिद्ध कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था, तब मंदराचल पर्वत को मथनी और नागराज ‘वासुकी’ को रस्सी (नेति) बनाया गया था. मंथन के दौरान नागराज वासुकी को जो पीड़ा हुई, उससे मुक्ति पाने के लिए उन्होंने इसी स्थान पर भगवान शिव की घोर तपस्या की थी। महादेव ने प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए और नागराज के नाम पर ही यहां ‘बासुकीनाथ’ के रूप में प्रतिष्ठित हुए.
बैद्यनाथ धाम के साथ संबंध
बासुकीनाथ की महिमा बाबा बैद्यनाथ (देवघर) के साथ अटूट रूप से जुड़ी हुई है. शिव भक्तों के बीच एक कहावत प्रसिद्ध है— “देवघर का कचहरी, बासुकीनाथ का दीवानी.” इसका अर्थ है कि श्रद्धालु देवघर में अपनी अर्जी लगाते हैं और बासुकीनाथ आकर उनकी सुनवाई पूरी होती है. माना जाता है कि जब तक कोई भक्त देवघर में जल चढ़ाने के बाद बासुकीनाथ आकर दर्शन नहीं करता, तब तक उसकी यात्रा और पूजा सफल नहीं मानी जाती.\
मंदिर की वास्तुकला
बासुकीनाथ का मुख्य मंदिर बहुत भव्य और पारंपरिक स्थापत्य शैली में बना है. मुख्य मंदिर के अलावा यहां कई अन्य देवी-देवताओं के छोटे मंदिर भी हैं. सावन के महीने (श्रावण मास) में यहां श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता है. सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर आने वाले ‘कांवरिये’ देवघर के बाद नंगे पैर चलकर यहाँ पहुंचते हैं और महादेव का अभिषेक करते हैं.
बासुकीनाथ मंदिर के पास ही एक सरोवर है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसमें स्नान करने से शरीर और मन की अशुद्धियां दूर हो जाती हैं.
हनुमान जी का वो धाम जहां नियम, पूजा और विश्वास सब कुछ है अलग, जानिए इतिहास
26 Jan, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राजस्थान अपनी रेत, किलों और लोक संस्कृति के साथ-साथ धार्मिक स्थलों के लिए भी जाना जाता है. इन्हीं में से एक बहुत प्रसिद्ध धार्मिक स्थान है मेहंदीपुर बालाजी मंदिर. यह मंदिर हनुमान जी को समर्पित है और इसे बालाजी के नाम से जाना जाता है. यह मंदिर दौसा जिले में स्थित है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं. खास बात यह है कि यह मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अलग मान्यताओं और परंपराओं के कारण भी जाना जाता है. लोगों का विश्वास है कि यहां आने से नकारात्मक शक्तियों, डर और मानसिक परेशानियों से राहत मिलती है. देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर यहां पहुंचते हैं. मंदिर का माहौल, भक्तों की आस्था और वहां होने वाली विशेष पूजा इस स्थान को और भी खास बना देती है. समय के साथ यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं रहा, बल्कि लोगों की आस्था और विश्वास का केंद्र बन गया है.
बालाजी मंदिर का इतिहास
मेहंदीपुर बालाजी मंदिर का इतिहास लगभग हजार साल पुराना माना जाता है. लोक कथाओं के अनुसार, इस स्थान पर हनुमान जी स्वयं प्रकट हुए थे. कहा जाता है कि पहले यहां घना जंगल हुआ करता था और आसपास बहुत कम लोग रहते थे. एक स्थानीय व्यक्ति को हनुमान जी के दर्शन हुए और उनके निर्देश पर इस स्थान पर पूजा शुरू हुई. धीरे-धीरे यह स्थान प्रसिद्ध होता गया और मंदिर का निर्माण हुआ.
मंदिर के इतिहास में कई राजाओं और भक्तों का योगदान रहा है. समय के साथ मंदिर का विस्तार किया गया और आज यह एक भव्य धार्मिक स्थल बन चुका है. हालांकि मंदिर की बनावट बहुत साधारण है, लेकिन यहां आने वाले भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती गई.
मंदिर की खास मान्यताएं
बालाजी मंदिर अपनी विशेष मान्यताओं के लिए पूरे भारत में जाना जाता है. लोगों का विश्वास है कि यहां भूत-प्रेत, बुरी नजर और मानसिक परेशानियों से पीड़ित लोगों को राहत मिलती है. यहां होने वाली पूजा और अरजी बहुत प्रसिद्ध है. मंगलवार और शनिवार को यहां सबसे ज्यादा भीड़ रहती है. भक्त यहां नारियल, लड्डू और प्रसाद चढ़ाते हैं. मंदिर में कुछ नियम भी हैं, जिनका पालन भक्त पूरी श्रद्धा से करते हैं. यहां की पूजा पद्धति दूसरे मंदिरों से थोड़ी अलग मानी जाती है.
बालाजी मंदिर का धार्मिक और सामाजिक महत्व
यह मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है. यह स्थान लोगों को उम्मीद और विश्वास देता है. यहां आने वाले लोग मानसिक शांति महसूस करते हैं. आसपास के क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में भी इस मंदिर का बड़ा योगदान है. होटल, धर्मशाला और दुकानों से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है. मेहंदीपुर बालाजी मंदिर आज भी लोगों के जीवन में विश्वास और आस्था का प्रतीक बना हुआ है.
नंदी के किस कान में कहनी चाहिए मनोकामना, शिव वाहन से ही क्यों कहते हैं विश?
26 Jan, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान शिव के मंदिरों में पूजा-अर्चना करने के बाद कई श्रद्धालु शिवलिंग के सामने बैठे नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना कहते हैं. देश के लगभग हर शिव मंदिर में यह दृश्य आम है कि भक्त नंदी के पास जाकर धीरे से उनके कान में अपनी इच्छा व्यक्त करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मनोकामना नंदी के कान में ही क्यों कही जाती है, सीधे भगवान शिव से क्यों नहीं? साथ ही, यह भी सवाल उठता है कि नंदी के किस कान में अपनी मनोकामना कहनी चाहिए क्योंकि बहुत से लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है. साथ ही अपनी मनोकामना कहने का नियमों के साथ सही तरीका भी जानें…
भगवान शिव के वाहन नंदी महाराज कौन हैं?
भगवान शिव के वाहन नंदी महाराज को नंदिकेश्वर या नंदी देव के नाम से जाना जाता है. हिंदू धर्म में, नंदी को शिवजी का वाहन और उनका सबसे प्रिय भक्त माना जाता है. सभी शिव मंदिरों में, नंदी की मूर्ति गर्भगृह की ओर शिवलिंग की ओर मुख करके बैठी हुई मुद्रा में स्थापित की जाती है. नंदी शिव की ध्यान साधना में लीन रहने का प्रतीक हैं. उन्हें कैलाश का रक्षक और शिव का द्वारपाल माना जाता है.
नंदी महाराज का विशेष स्थान क्यों?
नंदी महाराज को भगवान शिव का परम भक्त, वाहन और गण माना गया है. शास्त्रों के अनुसार नंदी महाराज ना केवल शिव के द्वारपाल हैं बल्कि उनके सबसे विश्वासपात्र भी हैं. पुराणों में वर्णन मिलता है कि भगवान शिव कोई भी बात नंदी की उपस्थिति के बिना नहीं सुनते. यही कारण है कि नंदी महाराज को शिवजी और भक्त के बीच संदेशवाहक माना गया है. मान्यता है कि जो बात नंदी महाराज तक पहुंचती है, वह बिना किसी बाधा के सीधे भगवान शिव तक पहुंच जाती है. इसलिए भक्त अपनी मनोकामना नंदी के माध्यम से शिव तक पहुंचाने की परंपरा निभाते हैं.
नंदी के कान में ही क्यों कही जाती है मनोकामना?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नंदी को गोपनीयता और विश्वास का प्रतीक माना जाता है, यही कारण है कि मनोकामना धीरे और कान में कहने की परंपरा है. इसके पीछे एक भावनात्मक पक्ष भी है, नंदी महाराज सदा ध्यानमग्न अवस्था में शिवजी की ओर देखते रहते हैं. जब भक्त उनके कान में अपनी इच्छा कहता है तो यह माना जाता है कि नंदी महाराज उसी क्षण शिवजी का ध्यान उस मनोकामना की ओर आकर्षित कर देते हैं.
किस कान में कहें मनोकामना?
यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है कि नंदी के किस कान में मनोकामना कहनी चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नंदी के दाहिने कान यानी राइट हैंड साइड की तरफ के कान में मनोकामना कहना सबसे शुभ माना जाता है. दाहिना कान धर्म, सकारात्मक ऊर्जा और देव कृपा से जुड़ा माना गया है. कुछ शास्त्रों में उल्लेख है कि दाहिना कान शिव तत्व का वाहक है. हालांकि कुछ स्थानों पर स्थानीय परंपराओं के अनुसार बाएं कान में भी मनोकामना कहने की प्रथा मिलती है, लेकिन शास्त्रीय मान्यता दाहिने कान को ही प्राथमिकता देती है.
नंदी महाराज से मनोकामना कहने के नियम
नंदी महाराज के कान में मनोकामना कहने के भी कुछ नियम बताए गए हैं. बिना शिव दर्शन किए सीधे नंदी के पास जाना उचित नहीं माना जाता. कई मंदिरों में नंदी को छूना वर्जित होता है। दूरी बनाए रखते हुए झुककर मनोकामना कहें. शास्त्रों में कहा गया है कि नंदी केवल धर्म और कल्याण से जुड़ी इच्छाएं ही शिव तक पहुंचाते हैं. जब इच्छा पूर्ण हो जाए, तो शिव और नंदी का आभार व्यक्त करना आवश्यक माना गया है. नदीं महाराज के कान में मनोकामना कहने से पहले ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करना चाहिए और फिर मनोकामना कहनी चाहिए. मनोकामना कहते समय अपने दोनों हाथों से अपने होठों को ढक लेना चाहिए ताकि कोई और उसे सुन ना सकें.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (26 जनवरी 2026)
26 Jan, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- मानप्रतिष्ठा बाल बाल बचे, कार्य व्यवसाय गति उत्तम, स्त्री वर्ग से क्लेश होगा।
वृष राशि :- धन प्राप्ति के योग बनेंगे, नवीन मैत्री व मंत्रणा प्राप्त होगी, ध्यान अवश्य रखें।
मिथुन राशि :- इष्ट मित्र वर्ग सहायक रहे, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि होवे तथा कार्य बनेंगे।
कर्क राशि :- सामाजिक मान प्रतिष्ठा, कार्य कुशलता, संतोषजनक रहे, कार्य बनने लगेगे।
सिंह राशि :- परिश्रम से समय पर सोचे कार्य पूर्ण होंगे तथा व्यवसाय गति उत्तम होगी।
कन्या राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद रहे, कार्यकुशलता से संतोष होगा, कार्य बनें।
तुला राशि :- दैनिक व्यवसाय गति उत्तम तथा व्यवसायिक चिन्ताएं कम अवश्य होगी।
वृश्चिक राशि :- कार्य वृत्ति में सुधार होगा, असमंजस तथा सफलता न मिलें कार्य अवरोध होगा।
धनु राशि :- स्थिति अनियंत्रित रहे तथा नियंत्रण करना आवश्यक होगा, कलह से बचें।
मकर राशि :- मानसिक खिन्नता एवं स्वभाव में मानसिक उद्विघ्नता रहे।
कुंभ राशि :- योजनाएं फलीभूत हो, विघटनकारी तत्व आय को परेशान अवश्य करेगा।
मीन राशि :- मनोबल उत्साह वर्धक हो, कार्य कुशलता से संतोष हो।
भानु सप्तमी आज: सर्वार्थ सिद्धि योग में करें ये छोटा सा काम, हर मनोकामना होगी पूरी
25 Jan, 2026 07:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचांग : आज 25 जनवरी, 2026 रविवार, के दिन माघ महीने की शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि है. इस तिथि पर भगवान सूर्य का शासन है. सभी तरह के शुभ काम के साथ विवाह आदि कार्यों के लिए यह तिथि अच्छी मानी जाती है. आज भानु सप्तमी और रथ सप्तमी भी है. आज सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग भी बन रहा है.
25 जनवरी का पंचांग
विक्रम संवत : 2082
मास : माघ
पक्ष : शुक्ल पक्ष सप्तमी
दिन : रविवार
तिथि : शुक्ल पक्ष सप्तमी
योग : सिद्धि
नक्षत्र : रेवती
करण : गर
चंद्र राशि : मीन
सूर्य राशि : मकर
सूर्योदय : सुबह 07:14 बजे
सूर्यास्त : शाम 05:53 बजे
चंद्रोदय : सुबह 10.54 बजे
चंद्रास्त : देर रात 12.23 बजे (26 जनवरी)
राहुकाल : 16:33 से 17:53
यमगंड : 12:33 से 13:53
व्यापारिक योजना बनाने के लिए उपयुक्त है नक्षत्र
आज के दिन चंद्रमा मीन राशि और रेवती नक्षत्र में रहेंगे. यह नक्षत्र मीन राशि में 16:40 डिग्री से लेकर 30 डिग्री तक फैला हुआ है. इसके शासक ग्रह बुध और देवता पूषा हैं. यह कोमल और सौम्य स्वभाव का नक्षत्र है. यह नक्षत्र आध्यात्मिक उन्नति के काम के साथ व्यापार की योजना बनाने के लिए उपयुक्त है.
आज के दिन का वर्जित समय
आज के दिन 16:33 से 17:53 बजे तक राहुकाल रहेगा. ऐसे में कोई शुभ कार्य करना हो, तो इस अवधि से परहेज करना ही अच्छा रहेगा. इसी तरह यमगंड, गुलिक, दुमुहूर्त और वर्ज्यम् से भी परहेज करना चाहिए.
सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन है 'गोल्डन चांस', नई शुरुआत से बदल जाएगी आपकी किस्मत
25 Jan, 2026 07:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष- चंद्रमा 25 जनवरी, 2026 रविवार के दिन मीन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा बारहवें भाव में होगा. आज आप वाणी पर संयम रखें. स्नेहीजनों के साथ किसी बात पर विवाद हो सकता है. आय की अपेक्षा व्यय अधिक रहेगा. किसी उलझन में दिन गुजरेगा. स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें. दोपहर के बाद का समय आपके लिए अनुकूल रहेगा. आप नए काम का आरंभ कर सकेंगे. दोस्तों के साथ मुलाकात होगी. किसी तरह का आर्थिक लाभ भी हो सकता है, हालांकि स्वास्थ्य को लेकर उतार-चढ़ाव बना रहेगा.
वृषभ- चंद्रमा 25 जनवरी, 2026 रविवार के दिन मीन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा ग्यारहवें भाव में होगा. आज का दिन लाभ का बना हुआ है. व्यापार में आपको लाभ होगा. संतान के साथ संबंध अच्छे बने रहेंगे. दोपहर के बाद मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें. किसी बात को लेकर ज्यादा इमोशनल ना हो. कन्फ्यूजन दूर होगा. कानूनी विषयों में आपको बहुत सावधानी रखने की सलाह दी जाती है. आज कोई नए दोस्त बनने से आपको खुशी मिलेगी. ये रिश्ते आगे आपकी मदद करेंगे.
मिथुन- चंद्रमा 25 जनवरी, 2026 रविवार के दिन मीन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा दसवें भाव में होगा. आज का आपका दिन लाभकारी है. पारिवारिक और प्रोफेशनल दोनों ही क्षेत्रों में आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. घर-परिवार में आनंद का वातावरण आपको खुश रखेगा. स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा. व्यापार में लाभ होगा. बहुत दिनों से अटके हुए सरकारी काम में सफलता मिलेगी. दोस्तों के साथ बाहर घूमने जाने का कार्यक्रम बन सकता है. विद्यार्थियों के लिए भी समय अच्छा है, हालांकि आज स्पोर्ट्स जैसी गतिविधि में आपकी रुचि ज्यादा होगी.
कर्क- चंद्रमा 25 जनवरी, 2026 रविवार के दिन मीन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा नवें भाव में होगा. आज के दिन बौद्धिक काम, नए सृजन और साहित्यिक गतिविधि में व्यस्त रहेंगे. नए काम की शुरुआत हो सकती है. धार्मिक यात्रा के योग बन रहे. व्यापार में लाभ होगा. आज आपको कार्यालय और व्यापार में थोड़ा संभलकर चलना होगा. स्वास्थ्य का ध्यान रखें. दोपहर के बाद पारिवारिक जीवन में हर्षोल्लास का वातावरण बना रहेगा. माता से लाभ होगा. उत्तम सुख की प्राप्ति हो सकती है.
सिंह- चंद्रमा 25 जनवरी, 2026 रविवार के दिन मीन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा आठवें भाव में होगा. आज कोई नया काम शुरू कर सकते हैं. पिता से आपको लाभ होगा. ज्योतिष और आध्यात्मिक विषय में आपकी रुचि बनी रहेगी. अपनी वाणी और व्यवहार को संयमित रखना आपके ही हित में रहेगा. आज व्यवसाय में आप कोई नया काम करेंगे. साथी कर्मचारियों का साथ मिलेगा. हालांकि स्वास्थ्य का ध्यान रखें. संतान की चिंता आपको हो सकती है. भाग्य का साथ मिला-जुला रहेगा. प्रेम जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए अभी इंतजार करने की जरूरत है.
कन्या- चंद्रमा 25 जनवरी, 2026 रविवार के दिन मीन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा सातवें भाव में होगा. सुबह का समय दोस्तों के साथ घूमने-फिरने, खान-पान एवं मनोरंजन में बीत सकता है. पार्टनरशिप के काम में ध्यान रखें. व्यापार में ज्यादा लाभ की उम्मीद नहीं करें. दोपहर के बाद आपको प्रतिकूलता का सामना करना पड़ सकता है. स्वास्थ्य के मामले में कमजोर रहेंगे. दवाई खरीदने या अस्पताल की फीस पर आकस्मिक खर्च हो सकता है. जीवनसाथी के साथ आपके मतभेद हो सकते हैं.
तुला- चंद्रमा 25 जनवरी, 2026 रविवार के दिन मीन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा छठे भाव में होगा. आज दृढ़ मनोबल और आत्मविश्वास के साथ हर काम को आसानी से बना पाएंगे. गृहस्थ जीवन में सुख और शांति बनी रहेगी. शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा बना रहेगा. स्वभाव में उग्रता हो सकती है, इसलिए वाणी पर संयम रखें. दोपहर के बाद आप मनोरंजन की ओर ज्यादा बढ़ेंगे. मित्रों और स्नेहीजनों के साथ प्रवास या पर्यटन का योग है. कोई पुरानी चिंता दूर होने से मन को शांति मिलेगी.
वृश्चिक- चंद्रमा 25 जनवरी, 2026 रविवार के दिन मीन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा पांचवें भाव में होगा. मानसिक रूप से आपमें भावुकता अधिक रहेगी. किसी बात को लेकर ज्यादा विचलित ना हो. विद्यार्थी आज अभ्यास और करियर के मामले में सफलता प्राप्त कर सकेंगे. अपनी कल्पनाशक्ति से साहित्य-सृजन में आप नवीनता ला पाएंगे. घर के वातावरण में सुख-शांति बनी रहेगी. व्यवसाय में सफलता प्राप्त होगी. मित्रों का सहयोग भी आपको प्राप्त होगा. विरोधियों पर विजय मिलेगी.
धनु- चंद्रमा 25 जनवरी, 2026 रविवार के दिन मीन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा चौथे भाव में होगा. पारिवारिक शांति बनाए रखने के लिए निरर्थक वाद-विवाद ना करें. माता का स्वास्थ्य खराब रहेगा. धन और प्रतिष्ठा में हानि हो सकती है. दोपहर के बाद आपके स्वभाव में भावुकता बढ़ सकती है. आपकी रचनात्मकता में सकारात्मक वृद्धि होगी. विद्यार्थियों के लिए समय अनुकूल है. स्नेहीजनों के साथ घनिष्ठता बढ़ेगी. आप कार्यस्थल पर अपना काम समय पर पूरा कर पाने की स्थिति में होंगे.
मकर- चंद्रमा 25 जनवरी, 2026 रविवार के दिन मीन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा तीसरे भाव में होगा. आज कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेंगे. मित्रों और प्रियपात्र संग मुलाकात सुखद होगी. छोटी यात्रा कर सकते हैं. भाइयों के साथ संबंधों में निकटता रहेगी. दोपहर के बाद अरुचिकर घटनाओं से आपका मन अस्वस्थ रहेगा. शारीरिक रूप से आप दोपहर के बाद ताजगी नहीं रख पाएंगे. धन की हानि हो सकती है. स्थायी संपत्ति के दस्तावेज साइन करते समय सावधान रहें. माता के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी.
कुंभ- चंद्रमा 25 जनवरी, 2026 रविवार के दिन मीन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा दूसरे भाव में होगा. आज क्रोध और वाणी पर संयम बरतें. नकारात्मक विचार से आपका मन दु:खी हो सकता है. खान-पान में भी संयम बरतें. दोपहर के बाद आप वैचारिक स्थिरता के साथ सभी कार्यों को आसानी से पूरा कर पाएंगे. अपनी क्रिएटिविटी से काम को नए तरीके से कर पाएंगे. भाई-बहनों के साथ संबंध अच्छे बने रहेंगे. हालांकि आज दिनभर आप वाणी पर नियंत्रण ही रखें. स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही ना बरतें.
मीन- चंद्रमा 25 जनवरी, 2026 रविवार के दिन मीन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा पहले भाव में होगा. आज आपके घर में धार्मिक कार्य होंगे. परिवार में आनंद का वातावरण रहेगा. काम में सफलता मिलेगी. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें. नए काम के लिए दिन शुभ है. दोपहर के बाद आपके स्वभाव में क्रोध अधिक रहेगा. आपको वाणी और व्यवहार में संतुलन रखना होगा. बाहर खाने-पीने से बचें. नकारात्मक विचारों से दूर रहें. व्यापार बढ़ाने के लिए किसी मीटिंग में जाना हो सकता है.
शरीर के लिए अमृत से कम नहीं बाबा बागनाथ पर चढ़ी ये चीज, कई रोगों का रामबाण इलाज!
25 Jan, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बागेश्वर: उत्तराखंड के बागेश्वर का बाबा बागनाथ मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक परंपराओं के लिए पूरे प्रदेश में जाना जाता है. माघ महीने में मकर संक्रांति के बाद यहां भगवान शिव के शिवलिंग पर शुद्ध देसी घी का एक मोटा आवरण चढ़ाया जाता है, जिसे स्थानीय लोग “घी की गुफा” कहते हैं. यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है, बल्कि इसके औषधीय लाभ भी है.
मंदिर के पंडित हेम चन्द्र पाठक बताते हैं कि माघ माह की कड़ाके की ठंड में भगवान शिव शीत निद्रा में होते हैं और कठोर तपस्या में लीन रहते हैं. इसी कारण उन्हें ठंड से बचाने के लिए शिवलिंग को शुद्ध घी से ढका जाता है. समय के साथ यह घी शिवलिंग के चारों ओर जमकर गुफा का रूप ले लेता है, जिसे “घृत कमल” भी कहा जाता है. इस एक महीने की अवधि में शिवलिंग पर रहने से यह घी भगवान शिव की दिव्य ऊर्जा को ग्रहण कर लेता है.
श्रद्धालुओं को दिया जाता है प्रसाद
यह परंपरा सदियों पुरानी है. हर वर्ष मकर संक्रांति के बाद घी चढ़ाने की शुरुआत होती है और फाल्गुन महीने की शुरुआत यानि महाशिवरात्रि के आसपास इस घी की गुफा को विधि-विधान से हटाया जाता है. इसके बाद इस घी को मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में दिया जाता है. हालांकि यह प्रसाद सामान्य प्रसादों से बिल्कुल अलग होता है.
इसे न तो खाने के लिए दिया जाता है और न ही इससे दीपक जलाया जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस घी का उपयोग केवल शरीर पर लगाने के लिए किया जाता है. यह घी चर्म रोगों जैसे खुजली, दाद, फोड़े-फुंसी और त्वचा की अन्य समस्याओं में काफी लाभकारी होता है. प्रभावित स्थान पर इसे लगाने से रोग में राहत मिलती है.
इन समस्याओं का रामबाण इलाज
इसके अलावा सिर दर्द, माइग्रेन और सिर से जुड़ी अन्य परेशानियों में भी इस घी को रामबाण माना जाता है. श्रद्धालु इसे हल्के हाथों से सिर या शरीर पर लेप के रूप में लगाते हैं. बाबा बागनाथ मंदिर की यह परंपरा आज भी जीवांत है. जहां धर्म और पारंपरिक चिकित्सा की मान्यताएं एक साथ देखने को मिलती हैं. यदि आप भी इस घी को अपने घर लेकर जाना चाहते हैं, तो आप फाल्गुन महीने की शुरुआत में मंदिर समिति से संपर्क कर सकते हैं. मंदिर समिति के अध्यक्ष नंदन रावल के घर से प्राप्त कर सकते हैं.
मोती की अंगूठी पहनने से पहले जान लें, कब और कैसे करें धारण
25 Jan, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अक्सर आपने देखा होगा कि लोग अपने हाथों में कई प्रकार के रत्न धारण करते हैं. रत्न शास्त्र में ऐसे कई रत्न का जिक्र किया गया है, जिसके प्रभाव से लोगों को और उनसे संबंधित ग्रहों को जोड़कर देखा जाता है. शास्त्र में ऐसे रत्न का जिक्र है, जिनकी एनर्जी हमारी जिंदगी में पॉजिटिविटी भी ला सकती है. ऐसी स्थिति में आज हम आपको मोती रत्न के बारे में विस्तार से बताएंगे. हालांकि मोती रत्न कैसे धारण करना चाहिए, किस दिन धारण करना चाहिए और अगर आप भूलकर इस रत्न को धारण भी कर लिए हैं, तो इससे कैसे बचाव किया जाएगा, चलिए विस्तार से जानते हैं.
दरअसल मानव जीवन में रत्न शास्त्र का विशेष महत्व होता है. ग्रह नक्षत्र के आधार पर लोग अलग-अलग प्रकार के रत्न धारण करते हैं, जिसमें से एक मोती रत्न भी होता है. अगर आप मोती रत्न को धारण कर रहे हैं, तो धारण करने से पहले आपको उसके नियम का पालन करना होगा, तभी उसका पुण्य आपको प्राप्त होगा.
रत्न धारण करने के शुभ-अशुभ परिणाम
अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि मोती एक ऐसा रत्न है, जिसे सभी लोग धारण करते हैं. कई बार ऐसा देखा जाता है कि कुछ लोग शौक में रत्न धारण करते हैं, तो कुछ लोग अपनी आवश्यकता के अनुसार रत्न को धारण करते हैं .ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रत्न धारण करने से पहले किसी ज्योतिषी से परामर्श लेना चाहिए, क्योंकि हर रत्न का अपना एक अलग महत्व होता है. रत्न धारण करने के शुभ परिणाम भी होते हैं और अशुभ परिणाम भी होते हैं.
ज्योतिषी से परामर्श लेना जरूरी
उन्होंने कहा कि अगर आप मोती रत्न धारण करते हैं, तो यह रत्न चंद्रमा का होता है. मोती रत्न अत्यंत फलदाई और चमत्कारी माना जाता है. अगर व्यक्ति क्रोधी है, तो उसे चांदी के छल्ले में बीच वाली अंगुली में मोती का रत्न धारण करना चाहिए. मोती रत्न को हमेशा सोमवार के दिन धारण करना शुभ माना जाता है. वहीं अगर जो लोग इस रत्न को अज्ञानता के कारण धारण करते हैं, तो उन्हें चाहिए सबसे पहले ज्योतिषी से परामर्श लें. नियम अनुसार ही धारण करें, क्योंकि ज्योतिष शास्त्र में नियम के अनुसार अगर आप कोई रत्न धारण करते हैं, तो उसका शुभ परिणाम प्राप्त होता है, वरना व्यक्ति के जीवन में कई तरह की परेशानियां उत्पन्न होने लगती हैं.
मानव जीवन में अत्यंत लाभकारी
अगर आप भूलकर मोती का रत्न धारण कर लिए हैं, तो उसे रात के समय उतारकर रख देना चाहिए. फिर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए. रत्न पर धूप और दीप दिखाकर फिर उसको धारण करना चाहिए, तभी उसका शुभ परिणाम मिलता है. मोती का रत्न धारण करते हुए हमेशा सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए. यह मोती का रत्न मानव जीवन में अत्यंत लाभकारी भी माना जाता है.
जगत की अधिष्ठात्री देवी भुवनेश्वरी का जमशेदपुर में खास मंदिर, गुप्त नवरात्रि में विशेष पूजा, यहां का नजारा देखने लायक
25 Jan, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवती को समर्पित गुप्त नवरात्रि का पर्व चल रहा है और रविवार को गुप्त नवरात्रि के सातवें दिन की पूजा अर्चना की जाएगी. गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है. दस महाविद्याओं में एक हैं, मां भुवनेश्वरी. माता भुवनेश्वरी देवी को संपूर्ण ब्रह्मांड की स्वामिनी, सृष्टिकर्ता और मूल प्रकृति माना जाता है. मां आकाश तत्व का प्रतीक हैं और संपूर्ण सृष्टि का भरण-पोषण मां के आशीर्वाद से ही होता है. इन मां भुवनेश्वरी देवी का भारत की स्टील सिटी के रूप में मशहूर जमशेदपुर में माता का भव्य मंदिर है, जो ना केवल भव्य है बल्कि मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. आइए जानते हैं मां भुवनेश्वरी देवी के इस खास मंदिर के बारे में…
जगत की अधिष्ठात्री देवी मां भुवनेश्वरी
मां भुवनेश्वरी का यह मंदिर आध्यात्मिक आकर्षण का प्रमुख केंद्र है, जिन्हें जगत की अधिष्ठात्री देवी, संपूर्ण सृष्टि की रचनाकार और शक्ति, ऐश्वर्य, सौंदर्य और ज्ञान की देवी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब संसार में असुरों का अत्याचार बढ़ गया था, तब देवी-देवताओं ने भगवान शिव से सहायता मांगी. तब मां भुवनेश्वरी का प्राकट्य हुआ और उन्होंने भगवान शिव के साथ मिलकर दानवों का संहार किया.
माता की उपासना से हर सुख की प्राप्ति
पुराणों में उन्हें लौकिक महासागर और दस महाविद्याओं में से एक बताया गया है. उन्होंने राक्षस अंधका के खिलाफ भगवान शिव की सहायता की थी. मां दुर्गा ने भुवनेश्वरी रूप में अवतार लेकर असुरों का वध किया और संसार में संतुलन स्थापित किया. माता की उपासना से भक्तों को आध्यात्मिक बल, सुख-समृद्धि और शांति प्राप्त होती है. जमशेदपुर सुवर्णरेखा और खरकई नदियों के बीच बसा यह शहर नदियों के बीच की अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है. यहां का टेल्को भुवनेश्वरी मंदिर, जिसे श्री भुवनेश्वरी मंदिर भी कहते हैं, खरंगाझार मार्केट के पास एक छोटी पहाड़ी पर लगभग 500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है.
मंदिर में आठ खंभों वाला मंडप
मंदिर की स्थापना साल 1978 में स्वामी रंगराजन जी महाराज ने की थी. कथा के अनुसार, माता ने उन्हें सपने में आकर मंदिर निर्माण की बात कही थी. यह द्रविड़ वास्तुकला शैली में बना है, जिसमें पांच मंजिला राजगोपुरम 64 फीट ऊंचा है और पांच कलशों से सजा हुआ है. मंदिर में आठ खंभों वाला मंडप है, जहां प्रत्येक खंभा देवी के अलग-अलग रूपों का प्रतीक माना जाता है. बाहरी दीवारों पर सुंदर नक्काशी है, जो इसे देखने में और भी शानदार बनाती है. मंदिर में प्रवेश करने पर 32 फुट ऊंचा गर्भगृह दिखता है, जिसमें देवी की भव्य मूर्ति स्थापित है.
दक्षिण भारतीय शैली में दिन में तीन बार पूजा
यहां से जमशेदपुर शहर और आसपास की नदियों का मनोरम नजारा दिखता है. मंदिर के आसपास का माहौल शांत और दिव्य है, जिसमें घुमावदार नदी भी इसकी सुंदरता बढ़ाती है. पुजारी यहां दक्षिण भारतीय शैली में दिन में तीन बार पूजा करते हैं, और सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया जाता है. यह मंदिर शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र है. आम दिनों के साथ ही विशेष अवसरों पर भी यहां भव्य पूजा-अर्चना होती है.
मंदिर में विशेष पूजा अर्चना
श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मां भुवनेश्वरी की कृपा से परिवार में सुख-शांति, आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा बनी रहती है. नवरात्रि के दिनों में मंदिर में विशेष भजन-कीर्तन और हवन का आयोजन होता है, जहां दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं. भुवनेश्वरी मंदिर न केवल स्थानीय लोगों के विश्वास का केंद्र है, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षण है.
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