धर्म एवं ज्योतिष
राशिफल : शुक्रवार को मकर राशि की लॉटरी! निवेश और करियर में मिलने वाली है बड़ी खुशखबरी
30 Jan, 2026 07:24 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष- 30 जनवरी, 2026 शुक्रवार को चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा तीसरे भाव में होगा. आज आपको नए काम करने की प्रेरणा मिलेगी. हालांकि आपके विचारों में स्थिरता का अभाव रहने से कुछ मामलों में उलझन का अनुभव होगा. नौकरी या व्यवसाय में प्रतियोगिता का वातावरण रहेगा. किसी छोटी यात्रा के संयोग दिख रहे हैं. भाई- बंधुओं के साथ मेल-जोल बना रहेगा. इससे लाभ भी होगा. आज वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए.
वृषभ- 30 जनवरी, 2026 शुक्रवार को चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा दूसरे भाव में होगा. आज आपको मन को स्थिर बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए. मनोदशा कमजोर रहेगी. समझौतावादी प्रवृत्ति रखने से आपको नुकसान नहीं होगा. आज संभव हो, तो प्रवास टालें। कलाकारों एवं सलाहकारों के लिए दिन बहुत अनुकूल है. किसी नए काम की शुरुआत आज दोपहर के बाद बिल्कुल ना करें. गृहस्थजीवन में जीवनसाथी के साथ कोई मतभेद हो सकता है. कार्यस्थल पर भी अधीनस्थों का विशेष सहयोग नहीं मिलने से परेशान हो सकते हैं.
मिथुन- 30 जनवरी, 2026 शुक्रवार को चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा पहले भाव में होगा. आज के दिन की शुरुआत तन और मन की ताजगी से होगी. दोस्तों तथा परिवार के लोगों के साथ मनपसंद खाना खाने का अवसर मिल सकता है. कहीं बाहर जाने की योजना बनेगी. आर्थिक लाभ के योग हैं. मन में किसी भी प्रकार की नकारात्मक भावना को प्रवेश न करने दें. सभी स्थिति में मन को काबू में रखें. प्रेम जीवन में आगे बढ़ने की जल्दबाजी नहीं करें. आज जरूरी ना हो तो यात्रा ना करें.
कर्क- 30 जनवरी, 2026 शुक्रवार को चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा बारहवें भाव में होगा. परिवार में मनमुटाव के अवसर आएंगे, इसलिए मानसिक बेचैनी रहेगी. मन में दुविधा का अनुभव होगा, इसलिए महत्वपूर्ण निर्णय टालना हितकर है. किसी के साथ गलतफहमी या वाद-विवाद होने की संभावना है. स्वास्थ्य सम्बंधी लापरवाही से नुकसान हो सकता है. कोर्ट कचहरी के मामलों में संभलकर काम लेना पड़ेगा. मान हानि या धन हानि होने की आशंका रहेगी. ज्यादातर समय मौन रहें.
सिंह- 30 जनवरी, 2026 शुक्रवार को चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा ग्यारहवें भाव में होगा. आज का दिन आपके लिए लाभदायक साबित होगा, परंतु मन किसी बात को लेकर उलझन में रहेगा. मित्रों से मुलाकात और लाभ होगा. बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे. घर में मांगलिक काम होंगे. व्यापार में वृद्धि होगी. नौकरीपेशा लोगों की आय में वृद्धि होगी. बाहर जाने का कार्यक्रम होगा. आप समय पर आज सभी काम कर पाने की स्थिति में रहेंगे. हालांकि नकारात्मक विचारों से आपको दूर रहना होगा.
कन्या- 30 जनवरी, 2026 शुक्रवार को चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा दसवें भाव में होगा. आज नए काम की योजना बनेगी. व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए आज का दिन लाभ प्रदान करने वाला होगा. अधिकारियों की कृपादृष्टि रहेगी, जिससे पदोन्नति के अवसर मिलेंगे. व्यापार में आर्थिक लाभ हो सकता है. आज किसी निवेश को लेकर भी आप योजना बना सकते हैं. पिता से लाभ होगा. स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. पारिवारिक वातावरण खुशनुमा रहेगा. जीवनसाथी के साथ भी अच्छा वक्त बीतेगा. किसी ऑफिशियल काम से बाहर जाना हो सकता है.
तुला- 30 जनवरी, 2026 शुक्रवार को चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा नवें भाव में होगा. बुद्धिजीवियों या साहित्य प्रेमियों के साथ मुलाकात से आपके ज्ञान में बढ़ोतरी होगी. अच्छा समय व्यतीत करेंगे. नए काम का आरंभ कर सकेंगे. लंबी दूरी की यात्रा पर जाना हो सकता है. विदेश से जुड़े व्यापार करने वालों के लिए समय अच्छा रहेगा. विदेश में बसने वाले मित्रों या स्नेहीजनों के समाचार मिलेंगे. स्वास्थ्य थोड़ा नरम-गरम रहेगा. संतान की समस्याओं से चिंता उत्पन्न होगी.
वृश्चिक- 30 जनवरी, 2026 शुक्रवार को चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा आठवें भाव में होगा. अभी समय शांतिपूर्वक व्यतीत करना लाभदायी होगा. अपने क्रोध को काबू में रखें. अनैतिक कार्यों से दूर रहें. नए संबंध बनाने से पहले सोचें. धन खर्च ज्यादा होने से आर्थिक परेशानी का अनुभव होगा. आपका काम समय से पूरा नहीं होगा. खाने पीने का ध्यान रखें. शारीरिक और मानसिक अस्वस्थता रहेगी. योग, ध्यान और आध्यात्मिकता से मन को शांति मिलेगी.
धनु- 30 जनवरी, 2026 शुक्रवार को चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा सातवें भाव में होगा. आज खुशी, आनंद और शांति प्राप्त कर सकेंगे. अच्छे वस्त्र, मित्रों के साथ घूमना- फिरना और स्वादिष्ट भोजन आपको दिनभर उत्साहित रखेंगे. किसी नए व्यक्ति की ओर आप आकर्षित होंगे और नए लोगों से मिलकर रोमांच का अनुभव करेंगे. सार्वजनिक जीवन में आप प्रतिष्ठा और सम्मान प्राप्त कर सकेंगे. आपको अच्छा दांपत्य सुख भी प्राप्त होगा. नौकरीपेशा लोगों को कोई नया रुचिकर काम मिल सकता है. विद्यार्थियों के लिए अच्छा समय है.
मकर- 30 जनवरी, 2026 शुक्रवार को चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा छठे भाव में होगा. आज आपके व्यापार में खूब सफलता मिलेगी, परंतु कानूनी मामलों में सावधानी बरतें. व्यापार को लेकर बनाई योजनाएं सफलतापूर्वक संपन्न होंगी. किसी के साथ पैसों का लेन-देन सफलतापूर्वक पूरा होगा. देश-विदेश में व्यवसाय करने वालों को फायदा होगा. घर में परिजनों के साथ आनंदपूर्वक समय गुजरेगा. धन लाभ के योग हैं. काम में यश मिलेगा. विरोधियों को पराजित कर सकेंगे.
कुंभ- 30 जनवरी, 2026 शुक्रवार को चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा पांचवें भाव में होगा. आज आप संतान और अपने स्वास्थ्य के संबंध में चिंतित रहेंगे. अपच, पेट-दर्द से परेशानी होगी. विचारों में तेजी से परिवर्तन के कारण मानसिक स्थिरता नहीं रहेगी. आज नए कामों की शुरुआत करना आपके हित में नहीं है. यात्रा में कठिनाई आएंगी, संभव हो तो इसे स्थगित रखना उचित होगा. कार्यस्थल पर आज आपका मन काम में नहीं लगेगा. आज आप ज्यादातर समय आराम करना पसंद करेंगे.
मीन- 30 जनवरी, 2026 शुक्रवार को चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा चौथे भाव में होगा. शारीरिक और मानसिक भय रहेगा. परिजनों के साथ वाद-विवाद होगा. मां के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी. अनचाही घटनाओं से आपके उत्साह में कमी आ सकती है. नींद नहीं आने से परेशान रहेंगे. धन और कीर्ति की हानि होगी. पानी वाली जगहों से दूर रहें. स्थायी संपत्ति को लेकर किए आपके प्रयासों में कमी आ सकती है. परिजनों के साथ शाम का समय आनंद में गुजरेगा. आप किसी वस्तु की खरीदारी के लिए भी जा सकते हैं.
फरवरी माह में महाशिवरात्रि सहित पड़ रहे ये पर्व
30 Jan, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फरवरी माह में महाशिवरात्रि, विजया एकादशी जैसे बड़ त्यौहारों के साथ ही होलाष्टक की भी शुरुआत होगी।।
फरवरी 2026 दिन रविवार को माघ पूर्णिमा स्नान, गुरु रविदास जयंती और ललिता जयंती है. जो आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहेगा।
2 फरवरी 2026 दिन सोमवार को फाल्गुन मास का आरंभ होगा। यह महीना आत्म-शुद्धि, रंगोत्सव और नकारात्मकता को समाप्त करने का संदेश देता है।
5 फरवरी 2026 दिन गुरुवार को द्विजप्रिय संकष्टी (फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी) है. यह दिन भगवान गणेश को समर्पित है, इस दिन व्रत रखने पर जीवन से सभी कष्ट दूर होता है.
7 फरवरी 2026 दिन शनिवार है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की माता यशोदा की जयंती मनाई जाती है। मातृत्व, वात्सल्य और भक्ति का यह विशेष पर्व माना जाता है।
8 फरवरी 2026 दिन रविवार है। भानु सप्तमी सूर्यदेव की उपासना का श्रेष्ठ दिन है, जिससे आरोग्य और तेज की प्राप्ति होती है। इसी दिन शबरी जयंती भी है, जो भगवान राम की अनन्य भक्त शबरी के त्याग और भक्ति का स्मरण कराती है।
9 फरवरी सोमवार को जानकी जयंती, मासिक कालाष्टमी और मासिक जन्माष्टमी है। इस दिन मासिक कालाष्टमी व मासिक जन्माष्टमी का भी संयोग बन रहा है, जो विशेष फलदायी है।
13 फरवरी 2026 दिन शुक्रवार को विजया एकादशी है, इसी दिन सूर्य मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। एकादशी व्रत और कुंभ संक्रांति पर गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है.
14 फरवरी 2026 दिन शनिवार है। शनि त्रयोदशी और शनि प्रदोष व्रत से शनि दोष और कष्टों में कमी आती है
15 फरवरी 2026 दिन रविवार को महाशिवरात्रि भगवान शिव की उपासना का महापर्व है, जो मोक्षदायी माना जाता है। इस दिन मासिक शिवरात्रि का भी संयोग अत्यंत शुभ है.
17 फरवरी 2026 दिन मंगलवार को सूर्य ग्रहण के साथ फाल्गुन अमावस्या है। इस दिन पितृ तर्पण और दान का विशेष महत्व है। इसी दिन द्वापर युग दिवस भी मनाया जाता है।
18 फरवरी 2026 दिन बुधवार को चंद्र दर्शन और फुलेरा दूज है। इस दिन राधा-कृष्ण को फूल अर्पित कर विशेष पूजा की जाती है।
19 फरवरी 2026 दिन गुरुवार को स्वामी रामकृष्ण परमहंस की जयंती है. यह आत्मज्ञान, भक्ति और साधना का प्रेरणादायक पर्व है।
21 फरवरी 2026 दिन शनिवार को ढुण्ढिराज चतुर्थी है। विघ्न नाश और कार्य सिद्धि के लिए इस दिन व्रत रखकर भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है।
22 फरवरी 2026 दिन रविवार को स्कन्द षष्ठी है. स्कन्द षष्ठी भगवान कार्तिकेय की उपासना का पर्व है। इस दिन व्रत रखने पर साहस, शक्ति और रोगों से मुक्ति मिलती है।
24 फरवरी 2026 दिन मंगलवार को होलाष्टक आरंभ होगा। होलाष्टक के साथ होली के आठ दिवसीय नियम शुरू हो जाते हैं, इस अवधि में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं.
27 फरवरी 2026 दिन शुक्रवार को आमलकी एकादशी है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। विष्णु भक्ति के लिए यह एकादशी अत्यंत श्रेष्ठ है.
28 फरवरी 2026 दिन शनिवार को नृसिंह द्वादशी है। यह दिन भगवान विष्णु के उग्र अवतार श्री नृसिंह भगवान को समर्पित है।
धार्मिक अनुष्ठानों में पत्नी इस कारण बैठती है बाईं ओर
30 Jan, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में विवाह के समय पत्नी को पति के वाम अंग यानी बाईं ओर बैठने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक अनुष्ठानों में भी इसी परंपरा का पालन किया जाता है। हालांकि, इसे केवल धार्मिक नियम मानना पर्याप्त नहीं होगा, क्योंकि इसके पीछे गहरी वैज्ञानिक और ज्योतिषीय अवधारणाएं भी छिपी हैं। पत्नी को वामंगी कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है—बाईं ओर स्थित होने वाली। यही नियम पति-पत्नी के शयन के समय भी लागू होता है, जहां पत्नी को पति के बाईं ओर सोने की सलाह दी जाती है।
ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमारे शरीर में दो प्रमुख नाड़ियां होती हैं—सूर्य नाड़ी और चंद्र नाड़ी। सूर्य नाड़ी, जिसे पिंगला नाड़ी भी कहा जाता है, शरीर के दाहिनी ओर स्थित होती है और यह ऊर्जा, उत्साह, और निर्णय लेने की क्षमता को नियंत्रित करती है। वहीं, चंद्र नाड़ी, जिसे ईड़ा नाड़ी कहते हैं, शरीर के बाईं ओर होती है और यह शीतलता, सौम्यता तथा मानसिक शांति प्रदान करती है।
जब पति-पत्नी एक साथ सोते हैं और पत्नी पति के बाईं ओर होती है, तो यह दोनों की ऊर्जा संतुलित करता है। पति की सूर्य नाड़ी उसकी निर्णय क्षमता और आत्मविश्वास को बढ़ाती है, जबकि पत्नी की चंद्र नाड़ी से शीतलता और मानसिक शांति बनी रहती है। इससे रिश्ते में मधुरता आती है और नकारात्मक ऊर्जा कम होती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस स्थिति से पारिवारिक जीवन में सामंजस्य बना रहता है, तनाव कम होता है और आपसी समझ बढ़ती है।
चंद्र नाड़ी की सक्रियता शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानी जाती है। यह मन को शांत रखती है, तनाव को कम करती है, पाचन तंत्र को सुधारती है और हृदय की गति को संतुलित रखती है। यदि पति-पत्नी सोने की सही दिशा का पालन नहीं करते हैं, तो ऊर्जा असंतुलित हो सकती है, जिससे अनावश्यक तनाव और मानसिक अस्थिरता उत्पन्न होने की संभावना रहती है।
इस प्रकार, सनातन धर्म में स्थापित यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है। पति-पत्नी के बीच प्रेम, सामंजस्य और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए वास्तु और ज्योतिष शास्त्र में सुझाई गई यह सोने की स्थिति अत्यंत लाभकारी मानी गई है।
सनातन धर्म में हर दिन किसी न किसी भगवान को है समर्पित
30 Jan, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में सप्ताह के सारे दिन किसी न किसी भगवान को समर्पित हैं। जिस तरह से सोमवार का दिन भगवान शिवजी का और मंगलवार का दिन हनुमान जी का है। उसी तरह से बुधवार को भगवान गणेश की पूजा की जाती है और उनके लिए व्रत रखा जाता है। ज्योतिषियों के मुताबिक व्रत रखने से भगवान खुश होते हैं। आज हम आपके लिए लाए हैं बुधवार के व्रत की कथा। व्रत रखने वाले लोगों को इस दिन यह कथा सुननी होती है।
प्राचीन काल की बात है एक व्यक्ति अपनी पत्नी को लेने के लिए ससुराल गया। कुछ दिन अपने ससुराल में रुकने के बाद व्यक्ति ने अपने सास-ससुर से अपनी पत्नी को विदा करने को कहा लेकिन सास-ससुर ने कहा कि आज बुधवार है और इस दिन हम गमन नहीं करते हैं। लेकिन व्यक्ति ने उनकी बात को मानने से साफ इनकार कर दिया। आखिरकार लड़की के माता-पिता को अपने दामाद की बात माननी पड़ी और अपनी बेटी को साथ भेज दिया। रास्ते में जंगल था, जहां उसकी पत्नी को प्यास लग गई। पति ने अपना रथ रोका और जंगल से पानी लाने के लिए चला गया। थोड़ी देर बाद जब वो वापस अपनी पत्नी के पास लौटा तो देखकर हैरान हो गया कि बिल्कुल उसी के जैसा व्यक्ति उसकी पत्नी के पास रथ में बैठा था।
ये देखकर उसे गुस्सा आ गया और कहा कि कौन है तू और मेरी पत्नी के पास क्यों बैठा है। लेकिन दूसरे व्यक्ति को जवाब सुनकर वो हैरान रह गया। व्यक्ति ने कहा कि मैं अपनी पत्नी के पास बैठा हूं। मैं इसे अभी अपने ससुराल से लेकर आया हूं। अब दोनों व्यक्ति झगड़ा करने लगे। इस झगड़े को देखकर राज्य के सिपाहियों ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
यह सब देखकर व्यक्ति बहुत निराश हुआ और कहा कि हे भगवान, ये कैसा इंसाफ है, जो सच्चा है वो झूठा बन गया है और जो झूठा है वो सच्चा बन गया है। ये कहते है कि फिर इसके बाद आकाशवाणी हुई कि ‘हे मूर्ख आज बुधवार है और इस दिन गमन नहीं करते हैं। तूने किसी की बात नहीं मानी और इस दिन पत्नी को ले आया।’ ये बात सुनकर उसे समझ में आया की उसने गलती कर दी। इसके बाद उसने बुधदेव से प्रार्थना की कि उसे क्षमा कर दे।
इसके बाद दोनों पति-पत्नि नियमानुसार भगवान बुध की पूजा करने लग गए। ज्योतिषियों के मुताबिक जो व्यक्ति इस कथा को याद रखता उसे बुधवार को किसी यात्रा का दोष नहीं लगता है और उसे सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। बुधवार के दिन अगर कोई व्यक्ति किसी नए काम की शुरुआत करता है तो उसे भी शुभ माना जाता है।
सपने में घोड़ा दिखना सफलता का देता है संकेत
30 Jan, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने केवल रात की कल्पनाएं नहीं होते, बल्कि ये व्यक्ति के भविष्य से जुड़े संकेत भी देते हैं। कई बार हमें सपनों में विभिन्न जीव-जंतु दिखाई देते हैं, जिनका अर्थ समझना आसान नहीं होता। हालांकि, ज्योतिष और स्वप्न शास्त्र के माध्यम से इन संकेतों की व्याख्या की जा सकती है। ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार के अनुसार, कुछ खास जीवों के सपने भविष्य में होने वाली घटनाओं का संकेत देते हैं।
यदि कोई व्यक्ति सपने में घोड़ा देखता है, तो यह सफलता और उन्नति का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से दौड़ता हुआ घोड़ा देखने का अर्थ होता है कि व्यक्ति अपने करियर में तेजी से प्रगति करेगा। वहीं, सफेद घोड़ा देखने से करियर में नए अवसर प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाती है। यह सपना सकारात्मक बदलाव और उज्जवल भविष्य की ओर इशारा करता है।
ऊंट को भी स्वप्न शास्त्र में शुभ माना गया है। यदि किसी व्यक्ति को सपने में ऊंट दिखाई देता है, तो यह संकेत करता है कि उसे जल्द ही आर्थिक सफलता मिलेगी। ऊंट धैर्य और परिश्रम का प्रतीक है, इसलिए इस सपने का अर्थ है कि कड़ी मेहनत के बाद व्यक्ति को धन और सफलता का लाभ मिलेगा। व्यापार और निवेश से जुड़े लोगों के लिए यह सपना अत्यधिक शुभ माना जाता है।
इसके विपरीत, सपने में चीटियां देखना शुभ संकेत नहीं माना जाता। यदि कोई व्यक्ति सपने में बहुत सारी चीटियां देखता है, तो यह उसके जीवन में कठिनाइयों और परेशानियों के आने की चेतावनी हो सकती है। यह सपना बताता है कि व्यक्ति को अपने कार्यों में अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए और आने वाली समस्याओं के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।
सपने में सफेद उल्लू देखना अत्यंत शुभ संकेत माना जाता है। सफेद उल्लू का संबंध बुद्धिमत्ता और समृद्धि से होता है। यदि किसी व्यक्ति को यह सपना आता है, तो इसका अर्थ है कि उसे किसी प्रभावशाली व्यक्ति का मार्गदर्शन मिलेगा, जिससे उसके जीवन में आर्थिक प्रगति होगी। यह सपना सफलता के नए अवसरों के आगमन का संकेत भी देता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपनों में दिखने वाले जीवों के संकेतों को समझकर व्यक्ति अपने भविष्य की संभावनाओं का पूर्वानुमान लगा सकता है और उचित दिशा में कार्य करके अपने जीवन को बेहतर बना सकता है।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (30 जनवरी 2026)
30 Jan, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कार्यकुशलता से संतोष तथा मनोबल उत्साह वर्धक अवश्य बना ही रहेगा।
वृष राशि :- स्वभाव में खिन्नता होने से हीन भावना से बचिएगा, अव्यवस्था कार्य मंद होगा।
मिथुन राशि :- अशांति तथा विषमता से बचिए तथा झगड़ा होने की संभावना बनेगी, ध्यान रखे।
कर्क राशि :- स्त्री वर्ग से भोग ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी, रुके कार्य अवश्य ही बनेंगे।
सिंह राशि :- आलोचनाओं से बचिए कार्यकुशलता से संतोष होगा।
कन्या राशि :- धीमी गति से सुधार अपेक्षित है, तथा सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
तुला राशि :- स्त्रीवर्ग से हर्ष, उल्लास, गुप्त शत्रुओं से चिन्ता तथा कुटुम्ब को समस्या बनें।
वृश्चिक राशि :- योजना फलीभूत हो तथा इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे।
धनु राशि :- कुटुम्ब की समस्या कष्टप्रद हो तथा व्यर्थ धन का व्यय अवश्य होगा।
मकर राशि :- कुटुम्ब में सुख, मान, प्रतिष्ठा बढ़े, बड़े-बड़े लीगों से मेल मिलाप होगा।
कुंभ राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल, दैनिक गति मंद तथा बिगड़े कार्य अवश्य ही बनेंगे।
मीन राशि :- कार्य व्यवसाय में अनुकूलता बनेगी, समृद्धि के साधन अवश्य जुटाएंगे, ध्यान रखें।
February Born Personality: फरवरी में जन्मे लोगों का स्वभाव, खूबियां और कमियां
29 Jan, 2026 06:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
February Born Personality: हिंदू धर्म और अंकशास्त्र में जन्म तिथि के साथ-साथ जन्म का महीना भी व्यक्ति की सोच और जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। न्यूमेरोलॉजी के अनुसार, किसी इंसान की जन्मतिथि के अंकों का योग उसका मूलांक बनाता है, जबकि जन्म का महीना उसकी पर्सनैलिटी को दिशा देता है। इसी आधार पर February Born Personality को काफी खास माना जाता है।
फरवरी में जन्मे लोग कैसे होते हैं?
शास्त्रों के अनुसार, फरवरी में जन्मे लोगों पर शनि, बुध और गुरु ग्रह का प्रभाव रहता है। यही कारण है कि ये लोग हालात के अनुसार खुद को जल्दी ढाल लेते हैं। बदलती परिस्थितियों को समझने और उनसे निपटने की इनमें गजब की क्षमता होती है।
इनकी बातचीत करने की शैली प्रभावशाली होती है, जिससे ये आसानी से लोगों का दिल जीत लेते हैं। February Born Personality वाले लोग रचनात्मक सोच के धनी होते हैं और नए विचारों के साथ आगे बढ़ना इन्हें पसंद होता है। इनकी पर्सनैलिटी में एक अलग ही आकर्षण होता है, जो इन्हें भीड़ से अलग बनाता है।
खूबियां जो बनाती हैं इन्हें खास
फरवरी में जन्मे लोग मुश्किल से मुश्किल समय में भी हार नहीं मानते। साहस और धैर्य इनकी सबसे बड़ी ताकत होती है। जरूरत पड़ने पर ये दूसरों की मदद करने से कभी पीछे नहीं हटते। करियर की बात करें तो पेंटिंग, टीचिंग, राइटिंग और क्रिएटिव फील्ड में ये अच्छा नाम कमा सकते हैं। वैवाहिक जीवन भी सामान्यतः संतुलित और सुखद रहता है।
फरवरी में जन्मे लोगों की कमियां
हर खूबी के साथ कुछ कमियां भी होती हैं। February Born Personality में ईगो की समस्या थोड़ी अधिक देखी जाती है। यही कारण है कि कई बार ये अपने ही बने काम बिगाड़ लेते हैं। रिश्तों में गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं और ये लोग अपने दिल की बातें आसानी से किसी से साझा नहीं करते।
Ravidas Jayanti 2026 : आखिर क्यों खास है इस बार की 649वीं जयंती? जानें शुभ मुहूर्त और भक्ति का पूरा महत्व
29 Jan, 2026 06:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Ravidas Jayanti 2026 इस बार श्रद्धा और भक्ति के साथ रविवार, 1 फरवरी को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पावन पर्व हर साल माघ माह की पूर्णिमा तिथि को आता है। यह दिन भक्ति आंदोलन के महान संत और समाज सुधारक गुरु रविदास जी की स्मृति में समर्पित होता है, जिनकी शिक्षाएं आज भी समाज को समानता और मानवता का संदेश देती हैं।
रविदास जयंती 2026: तिथि और शुभ समय
साल 2026 में Ravidas Jayanti 2026 की पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी को सुबह 05:52 बजे शुरू होगी और 2 फरवरी को तड़के 03:38 बजे समाप्त होगी। इसी दिन देशभर में संत रविदास जी की 649वीं जयंती मनाई जाएगी।
कौन थे संत गुरु रविदास?
संत गुरु रविदास (1377–1527 ई.) भक्ति आंदोलन के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। उन्हें रैदास, रोहिदास और रुहिदास नामों से भी जाना जाता है। उन्होंने अपने भजनों और उपदेशों के माध्यम से जातिवाद, भेदभाव और सामाजिक असमानता का विरोध किया। ईश्वर भक्ति, समानता और मन की शुद्धि उनके विचारों का केंद्र रही। उनके कई पद सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में भी शामिल हैं, जो उनकी महानता को दर्शाता है।
जन्म और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इतिहासकारों के अनुसार गुरु रविदास का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था। उनके जन्म वर्ष को लेकर मतभेद हैं, लेकिन परंपरा के अनुसार उनका जन्म माघ पूर्णिमा को माना जाता है।
Ravidas Jayanti 2026 का महत्व
Ravidas Jayanti 2026 समानता, भाईचारे और सच्ची भक्ति के संदेश को आत्मसात करने का अवसर है। इस दिन कीर्तन, सत्संग और प्रार्थनाओं का आयोजन होता है। वाराणसी स्थित श्री गुरु रविदास जन्म स्थान पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह पर्व सिखाता है कि सच्ची भक्ति में किसी भी प्रकार के भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं है।
जया एकादशी पर बन रहा है अद्भुत संयोग, नियम निष्ठा करेंगे पूजन तो भगवान विष्णु होंगे प्रसन्न, जानें पूजा विधि!
29 Jan, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का खास महत्व है, लेकिन माघ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को सबसे शुभ माना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन पूरी श्रद्धा से भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसे न सिर्फ मानसिक शांति मिलती है, बल्कि वह गहरे से गहरे दुखों से भी मुक्त हो जाता है, जैसे कि भूत के रूप में दोबारा जन्म लेने से मुक्ति. इस साल, 2026 में, जया एकादशी बहुत ही शुभ होने वाली है, क्योंकि इस दिन एक या दो नहीं, बल्कि चार दुर्लभ और शक्तिशाली ग्रहों का संयोग बन रहा है. आइए जानते हैं इन अद्भुत संयोगों और जया एकादशी की पूजा विधि के बारे में विस्तार से…
बन रहे हैं ये अद्भुत संयोग-
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस साल की जया एकादशी में इंद्र योग, रवि योग, भद्रावास योग और शिवावास योग का एक दुर्लभ संयोग बन रहा है. इन शुभ योगों के दौरान की गई पूजा और दान-पुण्य से कई गुना लाभ मिलता है. स्व-निर्मित रवि योग को दुखों का नाश करने वाला माना जाता है, जबकि शिवावास योग सुख और समृद्धि देने वाला माना जाता है.
कब रखा जाएगा का व्रत?
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, एकादशी तिथि 28 जनवरी 2026 को शाम 4:34 बजे शुरू होगी और 29 जनवरी 2026 को सुबह 1:56 बजे समाप्त होगी। उदय तिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) के आधार पर, जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी 2026 को रखा जाएगा, जो बुधवार का दिन है.
एकादशी की पूजा विधि-
अगर आप अपने जीवन के दुखों और अनजाने पापों से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो इस तरह से पूजा करें. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले कपड़े पहनें. हाथों में पानी लेकर भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें.
-पीले कपड़े से ढके एक चबूतरे पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की मूर्तियां स्थापित करें.
-देवता को पीले फूल, पीले फल, चावल के दाने, धूप और दीपक अर्पित करें.
-भगवान विष्णु को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और चीनी का मिश्रण) से स्नान कराएं याद रखें कि प्रसाद में तुलसी का पत्ता ज़रूर शामिल करें, क्योंकि भगवान विष्णु तुलसी के बिना प्रसाद स्वीकार नहीं करते हैं.
-“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें और जया तृतीया व्रत कथा पढ़ें या सुनें.
क्या सच में रिश्तों की कड़वाहट दूर करता है शिवलिंग पर शहद? जानिए इसके चौंकाने वाले फायदे
29 Jan, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान शिव की पूजा में अलग-अलग चीजें चढ़ाने की परंपरा बहुत पुरानी है. कोई दूध चढ़ाता है, कोई जल, कोई बेलपत्र, तो कोई शहद भी अर्पित करता है. बहुत लोग ये काम आस्था से करते हैं, पर इसके पीछे कुछ गहरे संकेत और भाव भी छिपे होते हैं. शहद सिर्फ मीठा पदार्थ नहीं है, इसे पवित्र, शुद्ध और ऊर्जा से भरा माना जाता है. जब भक्त शिवलिंग पर शहद चढ़ाता है, तो वो सिर्फ एक पूजा क्रिया नहीं होती, बल्कि मन, सोच और जीवन में मिठास लाने की इच्छा भी होती है. मान्यता है कि शहद चढ़ाने से जीवन की कड़वाहट धीरे-धीरे कम होती है और रिश्तों में प्रेम बढ़ता है. जो लोग मानसिक तनाव, गुस्सा या बेचैनी से जूझ रहे होते हैं, उन्हें भी ये पूजा मन को हल्का करने में मदद करती है. शिव जी को भोलेनाथ कहा जाता है, यानी वो जल्दी प्रसन्न होते हैं. सच्चे मन से किया गया छोटा सा अर्पण भी बड़ा फल दे सकता है.
1. जीवन में मिठास लाने का संकेत
शहद का स्वाद मीठा होता है, इसलिए इसे सुख और प्रेम का प्रतीक माना जाता है. शिवलिंग पर शहद चढ़ाने का मतलब है कि भक्त अपने जीवन से कड़वाहट हटाकर मिठास चाहता है. जिन लोगों के रिश्तों में तनाव रहता है, उनके लिए ये पूजा खास मानी जाती है.
2. वाणी और व्यवहार में सुधार
कई लोग जल्दी गुस्सा हो जाते हैं या उनकी बातों से दूसरों को ठेस लग जाती है. शहद चढ़ाने की मान्यता ये बताती है कि इंसान की बोली भी शहद जैसी मीठी हो. जब इंसान इस भाव से पूजा करता है, तो धीरे-धीरे उसका स्वभाव भी बदलने लगता है.
3. मानसिक शांति का अनुभव
भगवान शिव ध्यान के देव माने जाते हैं. शहद चढ़ाते समय “ॐ नमः शिवाय” का जाप करने से मन शांत होता है. जो लोग बेचैनी, डर या तनाव से गुजर रहे हैं, उनके लिए ये पूजा मन को स्थिर करने का एक आसान तरीका बन सकती है.
4. सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह
माना जाता है कि शहद में प्राकृतिक ऊर्जा होती है. जब इसे शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है, तो आसपास का माहौल भी शांत और सकारात्मक महसूस होता है. घर में बार-बार झगड़े या नकारात्मक माहौल हो, तो ये पूजा वातावरण बदलने में मददगार मानी जाती है.
5. दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ाने की मान्यता
पति-पत्नी के बीच दूरी या मनमुटाव हो, तो शहद अर्पित करने की सलाह दी जाती है. इसका संकेत है कि जैसे शहद मीठा होता है, वैसे ही रिश्ता भी मधुर बने. कई लोग सोमवार के दिन ये पूजा करते हैं.
6. आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक
जब इंसान श्रद्धा से पूजा करता है, तो उसके अंदर भरोसा बढ़ता है. शहद चढ़ाने के साथ प्रार्थना करने से मन में हिम्मत आती है और डर कम होता है. ये मानसिक ताकत का एक रूप है.
7. आध्यात्मिक जुड़ाव गहरा होता है
शहद अर्पण सिर्फ बाहरी पूजा नहीं है, ये अंदर की भावना को भी दर्शाता है. जब इंसान सच्चे दिल से शिव जी को याद करता है, तो उसे एक अलग सुकून मिलता है. यही जुड़ाव धीरे-धीरे आत्मिक शांति देता है.
कैसे चढ़ाएं शहद
सुबह स्नान के बाद साफ मन से शिवलिंग पर थोड़ा शहद अर्पित करें. उसके बाद जल से हल्का अभिषेक कर लें. “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते रहें. ध्यान रहे कि मात्रा कम हो, सिर्फ भावना बड़ी होनी चाहिए.
ध्यान रखने वाली बातें
-शुद्ध शहद ही अर्पित करें.
-दिखावे से नहीं, सच्चे मन से पूजा करें.
-पूजा के बाद आसपास साफ रखें.
घर पर मकड़ी के लगे हैं जाले, तो हो जाएं सावधान, होता है अशुभ
29 Jan, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
घर के अंदर या बाहर अक्सर मकड़ी का जाला देखते होंगे. कई बार मन में यह सवाल आता है कि आखिर ये जाले क्यों लगते हैं? इसके नुकसान क्या है? वास्तुशास्त्र के अनुसार मकड़ी का जाला हमारी आर्थिक शक्ति को रोकता है, इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सकारात्मक ऊर्जा घर से चली जाती है. घर में आर्थिक तंगी, अवसरों का न मिलना व कलेश बढ़ जाता है. विंध्यधाम के ज्योतिषाचार्य ने मकड़ी के जाले के नुकसान को बताया है. कहा कि जाले दिखें तो साफ कर दें, वरना अवसर खत्म हो जाएंगे.
विंध्यधाम के ज्योतिषाचार्य अखिलेश अग्रहरि ने लोकल 18 से बताया कि पुराणों, शास्त्रों और धर्मग्रंथों के अनुसार घर में धूल जमा हो. जाले लगे हो. अंधेरा हो तो वहां पर लक्ष्मी का वास नहीं होता है. इसका उल्लेख गरुण पुराण व वास्तुग्रंथों में किया गया है. जिस घर में जाले व गंदगी हो तो वहां पर नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. मकड़ी का जाला मृत ऊर्जा का प्रतीक है. जब भी अपने घरों में ऊर्जा का प्रवाह रुकता है तो जाले आपके घर के कोने, दरवाजे व अन्य जगहों पर लग जाता है. इससे सकारात्मक ऊर्जा नहीं आ पाती है और घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. यह घर के सदस्यों को भी प्रभावित करता है.
अखिलेश अग्रहरि ने बताया कि घर के पूर्व, उत्तर व ईशान कोण को लक्ष्मी का स्थान माना जाता है. हर व्यक्ति इससे अनजान होता है. यह गंभीर वास्तु है. इससे आय का रुकना, मेहनत का फल न मिलना और घर आते ही पैसे का खर्च होने जैसे कई कारण हैं. ज्योतिष शास्त्र में मकड़ी का जाला राहू की जड़ता और केतु की उलझन से जुड़ा हुआ माना जाता है. इससे अचानक से आर्थिक समस्या उत्पन्न होना. उधार पैसे वापस न मिलना और कोर्ट कचहरी के चक्करों में फंसना आदि है. सबसे ज्यादा आर्थिक हानि होती है.घर में मकड़ी का जाल बनने से अवसर खत्म होते हैं. निर्णय प्रभावित होते हैं और काम पूरे नहीं होते हैं. इससे सकारात्मक ऊर्जा नहीं मिलती है और निर्णय क्षमता खत्म हो जाती है.
अखिलेश अग्रहरि ने बताया कि जाले का दूसरा नाम है उपेक्षा व अव्यवस्था. इसके रहने से असर हमारी ऊर्जा पर नजर आता है. मानसिक व शारीरिक स्वारथ्य पर भी असर डालता है, जो हमारे धन को प्रभावित करती है. शास्त्रों में लक्ष्मी को ऊर्जा, प्रकाश व गतिशीलता का प्रतीक माना जाता है. जहां पर यह तीनों चीजे नहीं आएगी तो लक्ष्मी का आगमन नहीं होगा. इसलिए अगर घर में जाले हो तो समय पर इसकी सफाई करते रहे. जालों को लंबे समय तक नहीं रहने दें. अन्यथा आर्थिक नुकसान हो सकता है.
क्या सच में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन से कटते हैं दुख? जानिए कहां-कहां स्थित हैं और क्या है इनका महत्व
29 Jan, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान शिव को सृष्टि का संहारक ही नहीं, बल्कि करुणा और कृपा का सागर भी माना जाता है. उनकी पूजा कई रूपों में होती है, लेकिन “ज्योतिर्लिंग” का स्थान सबसे खास माना जाता है. “ज्योति” मतलब प्रकाश और “लिंग” शिव का प्रतीक. यानी वह स्थान जहां शिव खुद दिव्य रोशनी के रूप में प्रकट हुए. मान्यता है कि इन जगहों पर शिव की मौजूदगी सबसे ज्यादा महसूस होती है. देश के अलग-अलग हिस्सों में फैले ये 12 ज्योतिर्लिंग सिर्फ मंदिर नहीं, बल्कि आस्था के बड़े केंद्र हैं जहां हर साल लाखों भक्त पहुंचते हैं. हर ज्योतिर्लिंग के पीछे एक कहानी है, जो शिव की महिमा, चमत्कार और भक्तों की सच्ची श्रद्धा को दिखाती है. कहा जाता है कि जो इंसान सच्चे मन से इन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करता है, उसके दुख हल्के होते हैं और मन को शांति मिलती है. ये धाम धर्म, इतिहास और रहस्य का सुंदर मेल हैं, जो हर भक्त को अंदर से जोड़ते हैं.
1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (गुजरात)
यह पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है. कथा के अनुसार चंद्रदेव ने यहां शिव की आराधना की थी. समुद्र किनारे बना यह मंदिर कई बार टूटा, फिर भी हर बार दोबारा खड़ा हुआ. यह आस्था की ताकत दिखाता है.
2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (आंध्र प्रदेश)
यह मंदिर पहाड़ों के बीच बसा है. मान्यता है कि शिव और माता पार्वती यहां अपने बेटे कार्तिकेय को मनाने आए थे. यहां का माहौल बहुत शांत लगता है.
3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (उज्जैन, मध्य प्रदेश)
यहां शिव “महाकाल” रूप में पूजे जाते हैं, यानी समय के भी स्वामी. यहां की भस्म आरती दुनियाभर में मशहूर है.
4. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (मध्य प्रदेश)
नर्मदा नदी के बीच बने द्वीप पर यह मंदिर है. ऊपर से देखने पर यह जगह “ॐ” जैसी दिखती है, इसलिए इसका नाम पड़ा.
5. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (उत्तराखंड)
हिमालय की गोद में बसा यह धाम सबसे कठिन यात्रा वाला है. ठंड और बर्फ के बीच भी भक्त यहां पहुंचते हैं.
6. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)
जंगलों के बीच बसा यह मंदिर प्रकृति के बहुत करीब है. कथा में बताया जाता है कि यहां शिव ने भीम नाम के राक्षस का अंत किया था.
7. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)
कहते हैं काशी शिव की प्रिय नगरी है. यहां मृत्यु भी मोक्ष का रास्ता मानी जाती है.
8. त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)
यहां से गोदावरी नदी निकलती है. मंदिर की बनावट बेहद सुंदर है और शिवलिंग में तीन मुख दिखते हैं.
9. वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग (झारखंड)
कथा है कि रावण ने यहां शिव की कठोर तपस्या की थी. यह जगह रोगों से राहत की आस्था से जुड़ी है.
10. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (गुजरात)
समुद्र किनारे स्थित यह मंदिर नागों से जुड़ी कथा के कारण प्रसिद्ध है.
11. रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग (तमिलनाडु)
मान्यता है कि लंका जाने से पहले श्रीराम ने यहां शिव की पूजा की थी. यह उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाला धाम है.
12. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)
यह आखिरी ज्योतिर्लिंग माना जाता है. यहां की कहानी एक सच्ची भक्त महिला से जुड़ी है, जिसकी भक्ति से शिव प्रसन्न हुए.
ज्योतिर्लिंगों का महत्व
ये सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि विश्वास का आधार हैं. हर धाम की अपनी ऊर्जा और कहानी है. लोग यहां मनोकामना लेकर आते हैं और सुकून लेकर लौटते हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (29 जनवरी 2026)
29 Jan, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- किसी आरोप से बचिए, मान प्रतिष्ठा प्रभुत्व वृद्धि में आंच आ सकती है।
वृष राशि :- कुछ बाधाएं कष्टप्रद हो, स्त्री शरीर कष्ट करोबार में बाधा होगी।
मिथुन राशि :- स्त्री वर्ग से कष्ट, चिन्ता व्यावसायिक कार्यों में आरोप से अवश्य ही बचेंगे।
कर्क राशि :- दैनिक व्यवसाय, गतिमंद रहे, असमर्थता का वातावरण बना ही रहेगा।
सिंह राशि :- व्यर्थ धन व्यय, दूसरों के कार्यो में हस्तक्षेप करने से हानि होगी।
कन्या राशि :- विशेष कार्य स्थिगित रखें, फिर भी सब कार्य सफलता पूर्वक चलेगा।
तुला राशि :- आशानुकूल सफलता से हर्ष, दैनिक व्यवसाय गति उत्तम बनी रहेगी।
वृश्चिक राशि :- अधिकारियों का मेल मिलाप फलप्रद, कार्य योजना की चिन्ता बनी रहेगी।
धनु राशि :- विशेष कार्य स्थिगित रखे, परिश्रम में सफलता कार्य व्यवसाय उत्तम हो।
मकर राशि :- मनोबल उत्साह वर्धक हो, कार्य गति में सुधार योजना अवश्य बनेगी।
कुंभ राशि :- कार्य क्षमता में बाधा, अचानक असमर्थता का वातावरण बना ही रहेगा।
मीन राशि :- अर्थ व्यवस्था में संतोष, सुख, धन, समृद्धि के साधन अवश्य जुटाए।
माघ मेले में कल्पवास के बाद लगतारा हो रहा शैय्या दान, आखिर क्यों कहा जाता है इसे पश्चाताप का दान
28 Jan, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
माघ मेला में कल्पवास का विशेष महत्व है. कल्पवास में संगम तट पर एक माह तक साधक सात्विक जीवन, गंगा स्नान, दान और भजन-कीर्तन करते हैं. मान्यता है कि कल्पवास करने से 100 वर्षों की तपस्या के बराबर पुण्य फल प्राप्त करता है. आइए जानते हैं माघ मेला में कल्पवास का महत्व...
माघ मेले में कल्पवास का विशेष महत्व होता है. भक्त सभी तरह के पापों से मुक्ति पाने और किसी गलती के पश्चाताप के लिए कल्पवास करते हैं. माना जाता है कि कल्पवास के साथ शैय्या दान (सेझिया दान) करना भी जरूरी है. अब संगम के तट पर माघ महीने में भक्त कल्पवास के बाद शैय्या दान कर रहे हैं, जिसमें घर की हर जरूरत में इस्तेमाल होने वाली बड़ी से बड़ी वस्तु दान की जाती है. कल्पवास का यह दान हजारों वर्षों से चलन में है. यह दान इसलिए किया जाता है ताकि व्यक्ति जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाए और परलोक में सुख मिले. आइए जानते हैं आखिर कल्पवास के बाद किए जाने वाला शैय्या दान को क्या कहा जाता है पश्चाताप का दान...
कल्पवास और शैय्या दान पर दंडी स्वामी महेशाश्रम महाराज ने बताया कि माघ मेले में भक्त कल्पवास करने आते हैं और जो भक्त 12 साल का कल्पवास करता है, उसे 12 साल पूरे होने के बाद शैय्या दान करना चाहिए. शैय्या दान को ग्रंथों में पश्चाताप का दान कहा गया है, जिसका उद्देश्य है पापों का नाश करना और पुरानी गलतियों की माफी है. अगर 12 साल का कल्पवास कर लिया जाए तो जन्म और मृत्यु के फेर से मुक्ति मिल जाती है और जातक मोक्ष को प्राप्त हो जाता है.
तीर्थ पुरोहित प्रयागराज विनय मिश्रा ने कहा कि कल्पवास तभी पूरा माना जाता है जब शैय्या दान किया जाता है. यह पापों से मुक्ति दिलाने का मार्ग है और हर साल भक्त माघ मेले में प्रयागराज आकर दान करते हैं. ये दान हर ब्राह्मण को लेने का अधिकार नहीं होता है. इसे कुल के पुरोहित ही ले सकते हैं, क्योंकि यह दान भी पापों का दान है. शैय्या दान में वो चीजें दी जाती हैं, जो सामान्य जन अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल करते हैं. पहले लोग 3, 5 और 12 साल का कल्पवास करते थे, लेकिन अब स्वास्थ्य को देखते हुए एक ही साल का करते हैं.
बता दें कि कल्पवास में किया गया शैय्या दान बहुत महत्वपूर्ण दान होता है, जिसे पौष माह के 11वें दिन से प्रारंभ होकर माघ माह के 12वें दिन तक किया जा सकता है. कल्पवास में भक्त संगम के तट पर देवताओं का पूजन और ध्यान करते हैं और फिर दान देखकर कल्पवास की प्रक्रिया को पूरा किया जाता है. शास्त्रों में कल्पवास की न्यूनतम अवधि एक दिन, तीन दिन, तीन महीने, छह महीने, 2 साल, 3 साल और 12 साल की भी होती है.
शैय्या दान दो तरह से किए जाते हैं. जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तब श्राद्ध कर्म के दौरान किए जाने वाला दान शैय्या दान केवल महापात्र लेते हैं. इस दान को तीर्थ पुरोहित स्वीकार नहीं करते हैं. वहीं जो लोग कल्पवास की अवधि पूरा करने के बाद शैय्या दान करते हैं, उसको तीर्थ के पुरोहित स्वीकार कर लेते हैं.
भगवान कृष्ण के कई नाम, लेकिन पहला कौन सा था? जानिए जन्म से जुड़ा रहस्य
28 Jan, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कृष्ण भगवान को दुनिया भर में उनके अद्भुत व्यक्तित्व, गीता में दिए गए उपदेश और बाल लीलाओं के लिए जाना जाता है. वे भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं और भक्तों के दिलों में विशेष स्थान रखते हैं. हर कोई जानना चाहता है कि उनके जीवन की शुरुआत कैसे हुई और उनका पहला नाम क्या था. कृष्ण का जीवन कई रहस्यों और अद्भुत घटनाओं से भरा हुआ है. उनका जन्म मथुरा में वासुदेव और देवकी के घर हुआ. किंवदंतियों के अनुसार, उनके जन्म के समय देवकी और वासुदेव को जेल में बंद कर दिया गया था क्योंकि उनका भाई कंस भविष्यवाणी से डर रहा था कि देवकी का आठवां पुत्र उसे मार देगा. ऐसे में कृष्ण का जन्म और उनका नाम सिर्फ एक कहानी नहीं बल्कि विश्वास, भक्ति और आदर्शों का प्रतीक बन गया. उनका पहला नाम, जिसे उनके परिवार ने रखा, कृष्ण के जीवन की गूढ़ता और उनके दिव्य स्वरूप की झलक देता है.
कृष्ण भगवान का पहला नाम
कृष्ण भगवान का जन्म जब मथुरा में हुआ, तब उनके माता-पिता ने उन्हें “कृष्ण” नाम दिया, लेकिन जन्म के कुछ ही समय बाद, उनके पिता वासुदेव उन्हें यशोदा और नंद के घर गोकुल में छिपा ले गए. वहां उनके पालन-पोषण के लिए उन्हें अलग नाम भी दिया गया. गोकुल में उन्हें “गोविंद” और कभी-कभी “मुरारी” कहा जाता था. हालांकि, जन्म के समय माता-पिता का रखा हुआ पहला नाम “कृष्ण” ही आधिकारिक और सबसे प्रसिद्ध नाम बन गया. कृष्ण नाम का अर्थ होता है “काला या गहरा रंग”, क्योंकि उनकी त्वचा का वर्ण गहरा था. यह नाम उनकी दिव्यता और आकर्षण को भी दर्शाता है. भारतीय संस्कृति में नाम का महत्व बहुत बड़ा होता है और कृष्ण नाम उनके अद्भुत व्यक्तित्व और लीलाओं की पहचान बन गया.
जन्म और बचपन की खास बातें
कृष्ण का जन्म अष्टमी की रात को हुआ, और उनके जीवन में कई चमत्कारिक घटनाएं हुईं. जैसे ही उन्होंने जन्म लिया, जेल की बेड़ियां अपने आप खुल गईं और गार्ड्स बेहोश हो गए. वासुदेव ने रात के अंधेरे में कृष्ण को यशोदा और नंद के घर गोकुल में ले जाकर रखा. गोकुल में कृष्ण की लीलाएं बहुत प्रसिद्ध हैं. वह माखन चोरी करने, गोपियों के साथ खेलने और बछड़ों के साथ समय बिताने के लिए जाने जाते थे. उनके बचपन के नाम गोविंद और मुरारी भी इन लीलाओं में जुड़ गए. लेकिन भगवान कृष्ण का असली और सबसे पहला नाम “कृष्ण” ही माना जाता है.
नाम का महत्व और भक्ति में प्रभाव
कृष्ण का नाम सिर्फ पहचान का साधन नहीं है. यह नाम भक्तों के लिए भक्ति और प्रेम का प्रतीक है. भक्ति की प्राचीन कथाओं में भी कृष्ण के नाम का उच्चारण और जाप करने से घर में सुख, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा आने की बात कही गई है. कृष्ण की लीलाएं, उनके खेल, गायब होने वाले माखन की कहानियां और उनके दोस्तों के साथ संबंध सब कुछ उनके नाम से जुड़ा हुआ है. उनके जीवन में पहला नाम और उसके बाद दिए गए प्यारे नाम जैसे गोविंद, मुरारी, श्याम आदि उनके व्यक्तित्व के अलग पहलुओं को दर्शाते हैं.
कृष्ण भगवान का पहला नाम “कृष्ण” ही था, और यही नाम उनके जन्म से जुड़ी दिव्यता और अद्भुत शक्तियों का प्रतीक बन गया. उनके अन्य नाम जैसे गोविंद और मुरारी सिर्फ उनके बचपन की लीलाओं से जुड़े हैं. कृष्ण भगवान के जीवन और उनके नाम में छिपा संदेश आज भी भक्तों को भक्ति, प्रेम और नैतिकता की राह दिखाता है.
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