धर्म एवं ज्योतिष
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
9 Jan, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कुटुम्ब में अशांति, क्लेश व अशांति, धन का व्यर्थ व्यय होगा, पीड़ा अवश्य होगी।
वृष राशि :- इष्ट मित्रों से सुख, अधिकारियों से मेल-मिलाप होगा तथा व्यापार में लाभप्रद स्थिति रहेगी।
मिथुन राशि :- अर्थ व्यवस्था अनुकूल होगी, सफलता के साधन जुटायेंगे, रुके कार्य बन जायेंगे।
कर्क राशि :- मनोवृत्ति उदार बनाये रखें, तनाव, क्लेश व अशांति की स्थिति बनेगी ध्यान रखें।
सिंह राशि :- समय नष्ट होगा, व्यवसायिक गति मंद होगी, असमंजस की स्थिति से बचिये।
कन्या राशि :- आर्थिक योजना सफल होगी, व्यवसायिक क्षमता अनुकूल होगी।
तुला राशि :- धन का व्यय, आलस्य से हानि संभव है, कार्य अवश्य बनेंगे ध्यान दें।
वृश्चिक राशि :- स्त्री वर्ग से क्लेश व अशांति तथा विघटनकारी तत्व परेशान अवश्य करेंगे।
धनु राशि :- कुटुम्ब की समस्यायें सुलझेंगी, धन का व्यर्थ व्यय होगा, व्यर्थ भ्रमण होगा।
मकर राशिः- अर्थ-व्यवस्था छिन्न-भिन्न होगी, कार्य व्यवसाय गति मध्यम होगी।
कुंभ राशि :- दैनिक कार्यगति में सुधार, चिन्तायें कम होंगी तथा सफलता अवश्य मिलेगी।
मीन राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा, कार्यगति अनुकूल बनी रहेगी ध्यान दें।
इस दिन हर घर में होगी प्रभु राम की आरती, हर घर में विराजमान होंगे बालक राम
8 Jan, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान राम लला के भव्य मंदिर में विराजमान होने को 1 साल पूरा होने जा रहा है, जिसे राम मंदिर ट्रस्ट प्रतिष्ठा द्वादशी के रूप में मनाने जा रहा है, लेकिन भगवान राम की प्रतिष्ठा के वार्षिक उत्सव में नगर वासियों का भी उत्साह देखने को मिलेगा भगवान राम के बहु प्रतीक्षित मंदिर में विराजमान होने का उत्सव मनाया जाएगा.
हर घर में होगी पूजा-आरती
यह उत्सव अयोध्या के हर एक घर हर एक गली में होगा फिर चाहे वह मठ मंदिर हो या ग्रहस्थ आश्रम भगवान राम लला 500 वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्या में अपने जन्म स्थान पर बने भव्य महल में विराजमान हुए. आज वह सुखद दिन है कि 1 वर्ष पूरा होने को है. इस कार्यक्रम को बहुत ही भव्यता के साथ मनाया जाएगा. 11 जनवरी को हर घर में प्रभु राम की आरती और प्रभु राम की पूजा आराधना होगी.
राम लला के स्थापित होने के पूरे होंगे 1 साल
देश और दुनिया भगवान राम के भव्य महल में विराजमान होने की साक्षी हो चुकी है. खुद प्रधानमंत्री ने राम लला को उनके महल में विराजमान अपने हाथों से कराया था, लेकिन इस 1 वर्ष में देश भर के राम भक्तों ने राम लला के दरबार में हाजिरी लगाई. शायद यही वजह है कि अयोध्या विश्व के मानचित्र पर पर्यटन के लिहाज से तो स्थापित हो चुका है.
जानें अयोध्या में मठ मंदिरों की संख्या
ऐसे में रामराज की परिकल्पना भी साकार होती दिख रही है. अब 1 वर्ष होने जा रहा है. ऐसे में अयोध्या में लगभग 10000 मठ मंदिर हैं. मंदिर और मूर्तियों के शहर में भगवान के जन्म स्थान पर बने भव्य महल में विराजमान होने का वार्षिक उत्सव तो मनाया ही जाएगा, लेकिन अयोध्या के ग्रहस्थ भी प्रतिष्ठा द्वादशी को पूरे भव्यता के साथ मनाई जाएगी.
पीएम मोदी ने किया था स्थापित
जहां ठीक दोपहर 12:20 यानी कि वह समय जब 22 जनवरी 2024 को भगवान राम लला अपने भव्य महल में प्रधानमंत्री के हाथ से विराजमान हुए थे. उस समय भगवान की आरती हर घर में होगी. जिस तरह से भगवान राम वनवास के बाद अयोध्या आए थे. अयोध्या वासियों ने दीप जला करके उनका स्वागत किया था. कुछ वैसा ही नजर कलयुग के इस प्रतिष्ठा द्वादशी के मौके पर होगा. हर घर में दीपक जलाकर खुशियां मनाई जाएगी.
देश का इकलौता सूर्य प्रधान मंदिर, जहां मकर संक्रांति पर उमड़ता श्रद्धालुओं का जमावड़ा, मिलती नौ ग्रहों की कृपा
8 Jan, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार नए साल में मकर संक्रांति का यह पर्व हिंदू धर्म का पहला त्यौहार माना जाता है. वही, ज्योतिष शास्त्र में भी मकर संक्रांति का विशेष महत्व है. इस दिन सूर्य देव उत्तरायण हो जाते है. इस खास मौके सूर्यदेव सहित नवग्रह की कृपा पाने के लिए मध्य प्रदेश के खरगोन में मौजूद देश के इकलौते सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर में पूरे प्रदेश से भक्त दर्शन, पूजन के लिए पहुंचते है. माना जाता है कि, मकर संक्रांति के दिन यहां भगवान सूर्य के दर्शन से पूरे साल नवग्रह की कृपा मिलती है.
दरअसल, खरगोन शहर में कुंदा नदी के तट पर करीब 300 वर्ष प्राचीन सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर है. जो ज्योतिष शास्त्र के पूर्ण पैरामीटर और गणित ज्ञान के हिसाब से बना देश का एकमात्र मंदिर कहलाता है. जिस प्रकार मानव जीवन सात दिन, 12 राशियों, 12 महीनों और नौ ग्रहों पर आधारित है. उसी प्रकार इस मंदिर की संरचना हुई है. सूर्य प्रधान मंदिर होने से मकर संक्रांति पर नवग्रह की कृपा पाने के लिए लाखों श्रद्धालु आते है.
मकर संक्रांति पर दर्शन का अधिक महत्व
यह मंदिर देश का इकलौता नवग्रह मंदिर है. शेष शनि मंदिर है. यहां गर्भगृह में स्वयं भगवान सूर्यदेव नौ ग्रहों के साथ विराजमान है. सूर्य उपासना के महापर्व मकर संक्रांति के दिन उदयमान सूर्य एवं गर्भगृह में विराजित सूर्य देव के दर्शन और पूजन का यहां खास महत्व रहता है. इस दिन पूजन करने से साल भर नवग्रह की कृपा मिलती है. इस वजह से जिस भी गृह संबंधित समस्या होती है, उस ग्रह सम्बंधित दान पोटली अर्पित करने से तुरंत फल की प्राप्ति होती है. पूरे
दक्षिण भारतीय शैली में बना है मंदिर
बता दें कि, नवग्रह मंदिर के गर्भगृह में ग्रहों की अधिष्ठात्री मां बगलामुखी भी स्थापित होने से पीताम्बरी ग्रह शांति पीठ भी कहलाता है. जबकि ब्रह्मांड की दो महाशक्तियां भी यहां स्थापित है. सभी नौ ग्रह एवं अन्य मूर्तियां और मंदिर की संरचना दक्षिण भारतीय शैली की है. गर्भगृह में सूर्य की मूर्ति बीच में है. सामने शनि, दाईं ओर गुरु, बाई ओर मंगल ग्रह की मूर्ति है. सभी ग्रह अपने-अपने वाहन, ग्रह मंडल, ग्रह यंत्र, ग्रह रत्न और अस्त्र शस्त्र के साथ स्थापित है.
इस बार महाकुंभ में अनूठी पहल, 2 माह कन्याएं करेंगी गंगा आरती, शंखनाद व पूजा करेंगी महिलाएं
8 Jan, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तीर्थनगरी प्रयागराज में इस साल महाकुंभ का आयोजन होने वाला है. महाकुंभ का यह धार्मिक आयोजन 13 जनवरी 2025 से शुरु हो जाएगा. इसके लिए भव्य रुप से तैयारियां की गई है. साधु-संतों की अगवानी का कार्यक्रम शुरु हो चुका है. जहां इस बार प्रयागराज महाकुंभ दिव्य, भव्य, सुरक्षित, डिजिटल, स्वच्छ और ग्रीन होगा, तो वहीं दूसरी तरफ यह नारी सशक्तिकरण की भी अनूठी मिसाल भी बनेगा.
दरअसल, प्रयागराज में संगम किनारे प्रतिदिन होने वाली जय त्रिवेणी जय प्रयागराज आरती समिति की तरफ से इस बार महाकुंभ के दो महीनों में कन्याएं गंगा आरती संपन्न कराएंगी. इसके साथ ही इस बार पूजा, डमरू और शंखनाद महिलाओं द्वारा किया जाएगा. वहीं प्लेटफार्म पर चढ़कर आरती के पात्र को हाथ में लेकर सभी रस्में भी अदा करेंगी.
‘जय त्रिवेणी जय प्रयागराज आरती समिति’ की पहल
पूरी दुनिया में यह पहला ऐसा मौका होगा, जब की बड़े पैमाने पर ऐसी पहल की जाएगी और बड़े पैमाने पर नियमित होने वाली आरती को कन्या संपन्न करेगी. इससे दुनिया को एक विशेष संदेश भी मिलेगा.
आरती समिति के सदस्य ने दी जानकारी, इतने सालों के बाद प्रयागराज की पावन नगरी में इस एक बार फिर महाकुंभ का आयोजन होने जा रहा है. इस अवसर पर एक अनोखी पहल के माध्यम से नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और महिलाओं व पुरुषों के बीच समानता का भाव स्थापित करने के उद्देश्य से इस बार दुनिया को एक संदेश देना चाहते हैं.
भगवान विष्णु के 5 मंत्र, हरेंगे कष्ट
भगवान विष्णु के 5 मंत्र, हरेंगे कष्ट
महिला बटुकों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
महाकुंभ की तैयारियों संगम नगरी में गंगा आरती को लेकर खास तैयारी की जा रही है. महाकुंभ की तैयारियों में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और अन्य राज्यों से महिला बटुकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, उन्हें गंगा आरती के विशेष मंत्र और पूजा विधियों का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे कि वे गंगा आरती में पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ भाग लें.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
8 Jan, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- धन का व्यय संभव है, तनावपूर्ण वातावरण से बचियेगा तथा स्वास्थ्य का ध्यान अवश्य रखें।
वृष राशि :- अधिकारियों के समर्थन से सफलता के साधन जुटायें, कार्यकुशलता से संतोष होगा।
मिथुन राशि :- चिन्ताएं कम हों, सफलता के साधन जुटायें तथा शुभ समाचार अवश्य ही मिलेगा।
कर्क राशि :- बड़े-बड़े लोगों से मेल-मिलाप होगा तथा सुख-समृद्धि के साधन अवश्य ही बनायें।
सिंह राशि :- स्त्री-वर्ग से हर्ष-उल्लास होगा, भोग-एश्वर्य की प्राप्ति होगी, कार्यगति उत्तम होगी।
कन्या राशि :- प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे, संघर्ष से अधिकार प्राप्त करें, भाग्य आपका साथ देगा।
तुला राशि :- कुटुम्ब और धन की चिन्ता बनी रहेगी, सोचे हुये कार्य परिश्रम से अवश्य ही बनेंगे।
वृश्चिक राशि :- प्रत्येक कार्य में बाधायें क्लेश-युक्त रखें, स्थिति सामर्र्थ के योग अवश्य ही बनेंगे।
धनु राशि :- भावनायें विक्षुब्ध रखें, दैनिक कार्यगति मंद रहे, परिश्रम से कार्य अवश्य ही बनेंगे।
मकर राशि :- तनाव-क्लेश, अशांति, धन का व्यय, मानसिक खिन्नता अवश्य ही बनेगी।
कुंभ राशि :- कार्यकुशलता से संतोष, व्यवसायिक समृद्धि के साधन अवश्य ही जुटायें।
मीन राशि :- कुटुम्ब के कार्यों में समय बीतेगा तथा हर्षप्रद समाचार प्राप्त होगा, मित्र मिलन होगा।
पांडव पत्नी द्रौपदी में थे ये 3 अवगुण, स्वयं युधिष्ठिर ने बताए थे अपने भाइयों को,
7 Jan, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाभारत में माता कुंती और गांधारी के बाद द्रौपदी ही ऐसी स्त्री थीं. जिसका जिक्र आज भी महाभारत का नाम लेते समय किया जाता है. द्रौपदी को सबसे सुंदर स्त्रियों में से एक माना जाता था, वे ना सिर्फ सुंदर थी बल्कि साबसी, बुद्धिमानी के साथ-साथ हाजिरजवाब भी थीं. लेकिन क्या आपको पता है कि द्रौपदी में भले ही ये सभी गुण थे, लेकिन 3 बड़े अवगुण भी थे.
जी हां, द्रौपदी के इन 3 अवगुणों के बारे में युधिष्ठिर ने अपने भाईयों को बताए थे. उन्होंने ये अवगुण तब बताए जब पांचों भाई अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ स्वर्ग जाने के लिए निकले थे. हमेशा सत्य व धर्म के मार्ग चलने वाले युधिष्ठिर को आज भी धर्मराज कहा जाता है, वे पांडवों में सबसे बड़े भाई थे. कि आखिर द्रौपदी में वे कौन से 3 अवगुण थे जो कि युधिष्ठिर ने अन्य पांडवों को बताए थे.
द्रौपदी के अवगुणों को युधिष्ठिर ने कब बताया
महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद जब पांडव व द्रौपदी सशरीर स्वर्ग की कठिन यात्रा कर रहे थे तो इस यात्रा में जैसे ही पांडव बद्रीनाथ पहुंचे तो वहां से आगे का रास्ता द्रौपदी के लिए कष्टकारी हो गया और वह कुछ दूर चलते ही मूर्छित होकर गिर पड़ी. तभी युधिष्ठिर ने बताया कि उनमें कौन से दुर्गुण थे, जिनकी वजह से वह स्वर्ग यात्रा पूरी नहीं कर पाईं.
द्रौपदी का पहला अवगुण बताते हुए युधिष्ठिर ने कहा कि द्रौपदी को अपने रुपवती और बुद्धिमती होने का बहुत अहंकार था. वहीं किसी भी चीज का अहंकार इंसान को दुर्गुणी बनता है.
दूसरा अवगुण बताते हुए युधिष्ठिर ने कहा कि, द्रौपदी अपने अपने सभी पतियों से समान रुप से प्रेम नहीं किया था. वे अर्जुन से बेहद प्रेम करती थीं. किसी एक के प्रति झुकाव होना समान ना रहना भी एक अवगुण है.
तीसरा अवगुण उनका हठी होना बताया, इसी कारण उन्होंने दुर्योधन से बदला लेने की सौगंध खाई और फिर महाभारत का युद्ध हुआ जिसमें करोड़ों लोगों की हत्या हुई.
गलती से भी इन 4 लोगों को न करें परेशान, क्रोधित हो सकते हैं कर्मफलदाता शनिदेव, झेलना पड़ेगा भारी नुकसान!
7 Jan, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है. शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित होता है. ऐसी मान्यता है कि शनिवार के दिन शनि देव की विधि विधान से पूजा करने पर शुभ फल की प्राप्ति होती है. शनि देव के नाराज होने पर व्यक्ति कई तरह की परेशानियों से घिर जाता है. यही वजह है कि अमूमन लोग ऐसे प्रयास करते हैं कि शनि देव क्रोध होने की बजाय उनके ऊपर अपनी कृपा बनाएं रखें, लेकिन कई बार जाने अनजाने में व्यक्ति से ऐसे कार्य हो जाते हैं जिसे शनिदेव नाराज हो जाते हैं. जैसा कि शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है ऐसे में किसी भी पीड़ित को परेशान करना सहित ऐसे कई कार्य हैं जिससे शनि देव क्रोधित हो जाते हैं और इससे व्यक्ति को बड़ा नुकसान झेलना पड़ता है.
इन लोगों को सताना पड़ा सकता है भारी
दुर्बल, कमजोर, महिला और नौकर को सताने वाले लोगों पर शनि देव क्रोधित होते हैं. ऐसे लोगों को न्याय के देवता शनि देव दंड देते हैं. ऐसे कमजोर लोगों को कभी सताना नहीं चाहिए. बल्कि इनकी मदद करना चाहिए. इनका सहारा बनने वाले लोगों पर शनिदेव की विशेष कृपा बनी रहती है.
छल कपट करने वालों से भी नाराज रहते हैं शनि देव
दूसरों के साथ छल-कपट और धोखा-धड़ी करने वालों पर भी शनि देव की बुरी दृष्टि होती है. ऐसा करने वालों को शनि देव छोड़ते नहीं है और उनके कर्मों की सजा तुरंत देते हैं.
दूसरों की बुराई करने वालों से क्रोधित रहते है शनि देव
इसके अलावा पीठ पीछे दूसरों की बुराई करने वाले और झूठ बोलने वालों लोगों पर भी शनि देव नाराज रहते हैं. ऐसे लोग चाहकर भी उन्नति नहीं कर पाते हैं. शनि देव ऐसे लोगों को उनके काम के अनुसार दंड देते हैं. ऐसे लोग आर्थिक नुकसान और परिवारिक कलह से परेशान रहते हैं.
पशु-पक्षियों को न करें परेशान
पशु-पक्षियों को परेशान करने वालों पर भी शनि देव क्रोधित होते हैं. पशु पक्षियों पर अत्याचार करने वालों को शनि देव कभी माफ नहीं करते हैं. ऐसे लोग इसी जीवन में शनि देव की बुरी दृष्टि के शिकार बने रहते हैं.
हर मनोकामना होगी पूरी, शनि प्रदोष व्रत कथा पढ़ने के हैं अनेक लाभ, जानें कब पड़ रहा ये व्रत?
7 Jan, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में शनि प्रदोष व्रत का खास महत्व है. शनिवार के दिन पड़ने की वजह से इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस दिन भक्त भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करते हैं. इस बार शनि प्रदोष व्रत 11 जनवरी 2025 को पड़ रहा है. शनि प्रदोष व्रत के प्रभाव से सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन में सुख-शान्ति और समृद्धि में वृद्धि होती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत मंगलकारी और मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना जाता है. प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा के बाद व्रत कथा पढ़ी जाती है जिससे मनुष्य का कल्याण होता है.
शनि प्रदोष व्रत की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में तीन मित्र रहते थे – राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र. राजकुमार और ब्राह्मण कुमार विवाहित थे. धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था, लेकिन गौना शेष था. एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे. ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा- ‘नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है.’ धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरन्त ही अपनी पत्नी को लाने का निश्चय कर लिया. तब धनिक पुत्र के माता-पिता ने समझाया कि अभी शनि देवता डूबे हुए हैं. ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं माना जाता लेकिन धनिक पुत्र ने एक नहीं सुनी और ससुराल पहुंच गया. ससुराल में भी उसे मनाने की कोशिश की गई लेकिन वो ज़िद पर अड़ा रहा और कन्या के माता पिता को उनकी विदाई करनी पड़ी. विदाई के बाद पति-पत्नी शहर से निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई.
दोनों को चोट लगी लेकिन फिर भी वो चलते रहे. कुछ दूर जाने पर उनका पाला डाकूओं से पड़ा. जो उनका धन लूटकर ले गए. दोनों घर पहूंचे. वहां धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया. उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने बताया कि वो तीन दिन में मर जाएगा. जब ब्राह्मण कुमार को यह खबर मिली तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचा और उसके माता पिता को शनि प्रदोष व्रत करने की सलाह दी और कहा कि इसे पत्नी सहित वापस ससुराल भेज दें. धनिक ने ब्राह्मण कुमार की बात मानी और ससुराल पहुंच गया जहां उसकी हालत ठीक होती गई. यानी शनि प्रदोष के माहात्म्य से सभी घोर कष्ट दूर हो गए.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
7 Jan, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- मान-प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे, कार्य-व्यवसाय गति उत्तम, स्त्री-वर्ग से क्लेश अवश्य होगा।
वृष राशि :- धन प्राप्ति के योग बनेंगे, नवीन मैत्री-मंत्रणा प्राप्त होगी, ध्यान अवश्य रखें।
मिथुन राशि :- इष्ट-मित्र सहायक रहें, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि होगी, कार्य अवश्य बनेंगे।
कर्क राशि :- सामाजिक कार्य में प्रतिष्ठा, कार्य-कुशलता से संतोष, रुके कार्य बनने लगेंगे।
सिंह राशि :- परिश्रम से समय पर सोचे कार्य पूर्ण होंगे तथा व्यवसाय गति उत्तम होगी।
कन्या राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद रहे, कार्यकुशलता से संतोष होगा।
तुला राशि :- दैनिक व्यवसाय गति उत्तम तथा व्यवसायिक चिन्ताएं कम अवश्य होंगी।
वृश्चिक राशि :- कार्यवृत्ति में सुधार होगा, असमंजस तथा सफलता न मिले, कार्य अवरोध होगा।
धनु राशि :- स्थिति अनियंत्रित रहे तथा नियंत्रण करने से सफलता मिले, ध्यान दें।
मकर राशि :- मानसिक खिन्नता, स्वभाव में उद्विघ्नता बनी रहेगी, ध्यान दें।
कुंभ राशि :- योजनाएं फलीभूत हों, विघटनकारी तत्व परेशान करेंगे, ध्यान दें।
मीन राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा, कार्य-कुशलता से संतोष तथा लाभ अवश्य होगा।
श्याम भक्तों के लिए बड़ी खबर, 19 घंटे बंद रहेंगे खाटूश्याम जी के कपाट,
6 Jan, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
खाटूश्याम जी से जुड़े भक्तों के लिए बड़ी अपडेट है. अगर आप विश्व प्रसिद्ध बाबा श्याम के दर्शन के लिए जा रहे हैं तो रुक जाइए. 19 घंटे के लिए बाबा श्याम के मंदिर के कपाट बंद रहेंगे. श्री श्याम मंदिर कमेटी खाटूश्याम जी ने पत्र जारी कर इसकी सूचना जारी की है. विशेष पूजा व तिलक के चलते खाटूश्यामजी के दर्शन बंद रहेंगे.
श्री श्याम मंदिर कमेटी के अध्यक्ष पृथ्वी सिंह चौहान ने बताया कि अमावस्या के बाद श्री श्याम प्रभु की विशेष पूजा होगी. जिसके चलते खाटूश्याम जी का मंदिर बंद रहेगा. 7 जनवरी को बाबा श्याम का विशेष तिलक श्रृंगार होगा. इसलिए 6 जनवरी रात 9:30 बजे मंदिर बंद होगा. इसके बाद अगले दिन 7 जनवरी 5 बजे मंगला आरती के समय आम भक्तों के लिए खुलेगा. श्री श्याम मंदिर कमेटी ने पत्र जारी कर सभी श्याम श्रद्धालुओं से मंदिर के कपाट खुलने के बाद श्याम के दर्शन के लिए आने का अनुरोध किया है.
श्याम वर्ण में भक्तों को दर्शन देंगे बाबा श्याम
बाबा श्याम पिछले 7 दिन से अपने मूल स्वरूप शालिग्राम में भक्तों को दर्शन दे रहे हैं. खाटूश्याम जी मंदिर के मुख्य पुजारी मोहनदास महाराज ने बताया कि काली अमावस्या के बाद बाबा श्याम का विशेष पूजा और श्रृंगार किया जाता है. बाबा के विशेष पूजा में 12 से 15 घंटे का समय लगता है. इसके अलावा श्याम के विशेष श्रंगार में भी करीबन 5 से 6 घंटे का समय लगता है. महाराज ने बताया कि महीने में 23 दिन लखदातार श्याम वर्ण (पीला रंग) में रहते हैं.
कौन है बाबा श्याम
हारे के सहारे बाबा श्याम को भगवान कृष्ण का अवतार माना जाता है. महाभारत युद्ध के दौरान भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों की तरफ से युद्ध में शामिल होने जा रहे थे. बर्बरीक के पास तीन ऐसी तीर थे, जो पूरे युद्ध को पलट सकते थे. इसी को लेकर भगवान कृष्ण ने ब्राह्मण का रूप में आए और उनसे शीश दान में मांग लिया. बर्बरीक ने भी बिना संकोच किया भगवान कृष्ण को अपना शीश दान में दे दिया. भगवान कृष्ण ने प्रसन्न होकर बर्बरीक को कहा कि बर्बरीक तुम्हें कलयुग में श्याम के नाम से पूजे जाओगे. तुम्हें लोग मेरे नाम से पुकारेंगे और तुम अपने भक्तों के हारे का सहारा बनोंगे.
कब मनाई जाएगी लोहड़ी? तारीख के साथ जानिए पौराणिक, धार्मिक महत्व और कहानी
6 Jan, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लोहड़ी का पर्व इस बार 13 जनवरी 2025 दिन सोमवार को मनाया जाएगा. उत्तर भारत के प्रमुख पर्वों में से एक लोहड़ी सिखों और पंजाबियों के लिए बेहद अहम होता है. यह पर्व हर साल जनवरी माह में उत्साहपूर्वक मनाया जाता है. इसको मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है. असल में लोहड़ी के पर्व को मुख्य रूप से नई फसल आने की खुशी में मनाया जाता है. माना जाता है कि इस दिन से ही ठंड का प्रकोप कम और रातें छोटी होने लगती हैं.
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, मकर संक्रांति पर जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायन होता तो उससे एक दिन पूर्व रात्रि में लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है. इस दिन आग का अलाव लगाया जाता है. इसके बाद चारों तरफ लोग एकत्र होते हैं और अग्नि में रेवड़ी, खील, गेहूं की बालियां और मूंगफली डालकर जीवन सुखी होने की कामना करते हैं.
लोहड़ी पर्व का धार्मिक महत्व : सिख समुदाय में लोहड़ी पर्व का बड़ा महत्व है. यह पर्व किसानों के लिए बेहद खास होता है. लोहड़ी के दिन सूर्यदेव और अग्नि देवता की पूजा का विधान है. इस दिन किसान अच्छी फसल की कामना करते हुए ईश्वर का आभार व्यक्त करते हैं. लोहड़ी के दिन ही किसान अपने फसल की कटाई शुरू करते हैं. इसी खुशी में लोहड़ी की अग्नि में रवि की फसल के तौर पर तिल, रेवड़ी, मूंगफली, गुड़ आदि चीजें अर्पित की जाती हैं. इसके साथ ही महिलाएं लोकगीत गाकर घर में सुख-समृद्धि की कामना करती हैं.
लोहड़ी पर्व से जुड़ी कहानी : लोहड़ी के पर्व पर दुल्ला भट्टी की कहानी को खास रूप से सुना जाता है. मान्यता के अनुसार मुगल काल में अकबर के शासन के दौरान दुल्ला भट्टी पंजाब में ही रहता है. कहा जाता है कि दुल्ला भट्टी ने पंजाब की लड़कियों की उस वक्त रक्षा की थी जब संदल बार में लड़कियों को अमीर सौदागरों को बेचा जा रहा था. वहीं एक दिन दुल्ला भट्टी ने इन्हीं अमीर सौदागरों से लड़कियों को छुड़वा कर उनकी शादी हिन्दू लड़कों से करवाई थी. तभी से दुल्ला भट्टी को नायक की उपाधि से सम्मानित किया जाने लगा और हर साल हर लोहड़ी पर ये कहानी सुनाई जाने लगी.
लोहड़ी पर्व की पौराणिक कथा : पौराणिक कथा के मुताबिक, प्रजापति दक्ष भगवान शिव और मां पार्वती के विवाह होने से खुश नहीं थे. एक बार प्रजापति दक्ष ने महायज्ञ करवाया. इस यज्ञ में प्रजापति दक्ष ने भगवान शिव और पुत्री सती को आमंत्रण नहीं दिया. तब मां सती ने भगवान शिव से पिता के यज्ञ में जाने की इच्छा जाहिर की. इस पर महादेव ने कहा कि आमंत्रण के बिना किसी के कार्यक्रम में जाना ठीक नहीं है. ऐसी स्थिति में वहां जाने से अपमान होता है. लेकिन मां सती के न मानने पर भोलेनाथ ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी. जब मां सती यज्ञ में शामिल होने पहुंचीं, तो वहां शिव जी को लेकर अपमानजनक शब्द सुनकर वे दुखी हुईं. तब मां सती अपने पिता के द्वारा करवाए गए यज्ञ कुंड में समा गई थीं. इसके बाद से ही प्रत्येक वर्ष मां सती की याद में लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है.
2025 में लोहड़ी किस दिन है?
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, मकर संक्रांति से एक दिन पहले लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है. साल 2025 में 14 जनवरी को सुबह 9 बजकर 3 मिनट पर सूर्य देव मकर राशि में गोचर करेंगे, जिसके कारण 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा. उदयातिथि के आधार पर मकर संक्रांति से एक दिन पहले 13 जनवरी 2025, सोमवार को लोहड़ी मनाई जाएगी.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
6 Jan, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- मन में अशांति, किसी परेशानी से बचिये, कुटुम्ब की समस्या में समय बीतेगा।
वृष राशि :- संवेदनशील होने से बचिये नहीं तो अपने किये पर पछताना पड़ेगा, ध्यान रखें।
मिथुन राशि :- मानसिक कार्यों में सफलता से संतोष, धन लाभ, बिगड़े कार्य बनेंगे, ध्यान दें।
कर्क राशि :- विरोधी वर्ग का समर्थन फलप्रद हो तथा शुभ कार्यों के योग अवश्य ही बनेंगे।
सिंह राशि :- व्यवसायिक क्षमता अनुकूल रहे, स्थिति पूर्ण नियंत्रण में रहे, कार्य बनेंगे।
कन्या राशि :- सामाजिक कार्यों में प्रभुत्व वृद्धि होगी, धन लाभ तथा आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा।
तुला राशि :- अधिकारी वर्ग से समर्थन प्राप्त होगा तथा रुके कार्य अवश्य ही बनेंगे, ध्यान दें।
वृश्चिक राशि :- धन लाभ, कार्यकुशलता से संतोष, पराक्रम एवं समृद्धि के योग बनेंगे।
धनु राशि :- स्त्री-शरीर कष्ट, चिन्ता, विवादग्रस्त होने से बचिये, कार्य बनने के योग बनेंगे।
मकर राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा, दैनिक कार्यगति में सफलता अवश्य मिलेगी।
कुंभ राशि :- कार्य-व्यवसाय में उत्तेजना, धन का व्यय एवं शक्ति निष्फल अवश्य होगी।
मीन राशि :- समृद्धि के साधन जुटायें, इष्ट-मित्र सुखवर्धक होंगे, समय का ध्यान रखें।
गुरुवार के दिन नहीं खाना और पकाना चाहिए खिचड़ी! जीवन में पड़ सकता गहरा प्रभाव, जानें इसके पीछे के मुख्य कारण
5 Jan, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में हर दिन किसी ना किसी देवी-देवता को समर्पित होता है. वहीं गुरुवार का दिन विष्णु जी को समर्पित दिन होता है जो कि कई नियमों वाला दिन माना जाता है. इस दिन भक्त विष्णु जी की पूजा करते हैं व उनसे अपनी मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि गुरुवार के दिन भक्तों को कुछ गलतियां करने से बचना चाहिए. शास्त्रों में गुरुवार के दिन से जुड़े कई नियम बताए गए हैं, जिनका आज भी पालन किया जाता है.
कब है सकट चौथ 2025? देखें मुहूर्त
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गुरुवार के दिन ना करें ये काम
गुरुवार के दिन सिर धोना, बाल-दाढ़ी और नाखून कटवाना, कपड़े धोना, घर पर पोंछा लगाना, जाले साफ करना, मांसाहार भोजन करना आदि कामों को वर्जित माना जाता है. इसके साथ ही इस दिन खिचड़ी ना खाने की भी मान्यता है. हालांकि गुरुवार के दिन खिचड़ी ना खाने के लिए हमारे घर के बड़ों के मुंह से हमने कई बार सुना है, कि आज गुरुवार है खिचड़ी नहीं बनेगी. लेकिन इसके पीछे का क्या कारण है ये आज जानते हैं.
हमारे घर के बड़े-बुजुर्गों कि ये बातें हमें कुछ समय के लिए हमें मिथक लग सकती है. लेकिन शास्त्रों में इसके पीछे पुख्ता कारण और इससे होने वाले नुकसानों के बारे में बताया गया है. इसलिए कभी कभार घर के बड़ों की बातों को फॉलो करना हमारे लिए फायदेमंद हो सकता है. ये हमारे भविष्य में होने वाली अशुभ घटनाओं से भी बचाता है. तो आइए जानते हैं गुरुवार के दिन खिचड़ी क्यों नहीं खाना चाहिए.
पुत्रदा एकादशी के दिन भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां... वरना नहीं मिलेगा पूजा का फल!
5 Jan, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है. पौष महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है. पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने का विधान है. इस बार पौष माह में 10 जनवरी को पुत्रदा एकादशी है. हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार पुत्रदा एकादशी के दिन कुछ कार्यों करने की सख्त मनाही है, जिनको करने से साधक को जीवन में दुख और संकटों का सामना करना पड़ता है और भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं. साथ ही पूजा का पूरा फल भी प्राप्त नहीं होता है. तो चलिए हरिद्वार के ज्योतिषी से जानते हैं कि पुत्रदा एकादशी के दिन किन कार्यों को करने से बचना चाहिए.
कि पुत्रदा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है. इस व्रत को विधि विधान से ना किया जाए तो इसका प्रतिकूल फल प्राप्त होता है. वैदिक पंचांग के अनुसार पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 09 जनवरी को दोपहर 12. 22 मिनट पर होगी. वहीं समापन 10 जनवरी को सुबह 10. 19 बजे होगा. उदया तिथि के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत 10 जनवरी को मनाया जाएगा.
पुत्रदा एकादशी के दिन किसी का अपमान नहीं करना चाहिए.
पुत्रदा एकादशी के दिन तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए.
साधक को सुबह की पूजा करने के बाद दिन में सोना नहीं चाहिए.
हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन तुलसी में जल नहीं देना चाहिए. तुलसी माता एकादशी
का निर्जला व्रत रखती हैं.
पुत्रदा एकादशी के दिन बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए.
पुत्रदा एकादशी के दिन किसी पशु-पक्षी को परेशान न करें.
पुत्रदा एकादशी के दिन किसी के प्रति बुरा न सोचें.
यहां देख लें साल 2025 में शादी के लिए शुभ मुहूर्त, मई में सबसे अधिक...इन दो महीनों में एक भी नहीं
5 Jan, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साल 2025 शुरू हो गया है और अगर आप शादियों के सीजन का इंतजार कर रहे हैं तो इसकी शुरुआत 16 जनवरी से होगी और इसके बाद एक बार फिर शहनाई की धुन सुनाई देगी. फिलहाल मलमास के कारण शादी और विवाह समारोहों पर विराम लगा हुआ है. सूर्यदेव के मकर राशि में परिभ्रमण के बाद 16 जनवरी से एक बार फिर शहनाइयों की गूंज सुनाई देने लगेगी.
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार नए वर्ष में इस बार विवाह के लिए 75 दिन शुभ मुहूर्त हैं. जबकि मलमास व चातुर्मास को मिलाकर करीब 6 महीनों तक विवाह समारोह नहीं होंगे. वर्ष 2025 में सबसे ज्यादा विवाह के शुभ मुहूर्त मई महीने में हैं. जो करीब 16 शादी के शुभ मुहूर्त हैं जबकि दिसंबर में सबसे कम तीन विवाह मुहूर्त हैं. मलमास की समाप्ति के बाद सबसे पहले जनवरी के महीने में 10 दिन तक विवाह समारोह होंगे. और 16 तारीख के बाद से ही शादियों के सीजन की शुरुआत एक बार फिर हो जाएगी और शुभ मुहूर्त के अनुसार विवाह मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे.
सबसे ज्यादा शादियों के सुभ मुहूर्त
जनवरी में 10 दिन शादी कि लिए शुभ मुहूर्त हैं जबकि फरवरी में 14 दिन, मार्च में पांच दिन, अप्रैल में नौ दिन, मई में 16 दिन और जून में पांच दिन शादी-विवाह का अच्छा मुहूर्त है. इसके बाद जुलाई, अगस्त, सितंबर व अक्टूबर में विवाह का कोई मुहूर्त नहीं है. 4 महीने तक विराम लग जाएगा. क्योंकि इन महिनों में भगवान विष्णु शयन में चले जाएंगे और इसके बाद नवंबर में 13 दिन व दिसंबर में तीन दिन विवाह के शुभ मुहूर्त हैं.
दो महीने तक नहीं कोई मुहूर्त नहीं
फिलहाल सूर्य देव धनु राशि में हैं. इस वजह से 14 जनवरी को मकर संक्रमण तक मलमास रहेगा. सूर्य देव 14 मार्च को मीन राशि में गोचर करेंगे. अत: 14 मार्च से लेकर 14 अप्रैल तक खरमास रहेगा. दिसंबर के अंत में फिर 15 दिन मलमास के रहेंगे. इस तरह से वर्ष में करीब दो माह मलमास के चलते विवाह नहीं होंगे.
साल 2025 में विवाह सुभ मुहूर्त
वहीं अगर 2025 के विवाह और मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त की बात की जाए तो यह जनवरी महीने में 16, 17, 18, 19, 20, 21, 23, 24, 26 और 27 हैं जबकि फरवरी महीने में 2, 3, 6, 7, 12, 13, 14, 15, 16, 18, 19, 21, 23 और 25 तारीख को हैं वहीँ इसके बाद मार्च के माह में 1, 2, 6, 7 और 12 को हैं. और इसी प्रकार अप्रेल माह में 14, 16, 18, 19, 20, 21, 25, 29 और 30 तक हैं. मई माह की बात की जाए तो ब1, 5, 6, 8, 10, 14, 15, 16, 17, 18, 22, 23, 24, 27 और 28 तक हैं जो सबसे ज्यादा 16 सुभ मुहूर्त हैं इसके अलावा जून माह में 2, 4, 5, 7 और 8 जून तक हैं. और सबसे अंत मे नवंबर माह के 2, 3, 6, 8, 12, 13, 16, 17, 18, 21, 22, 23, 25 और 30 जबकि दिसंबर के महीने में 4, 5 और 6 दिसंबर तक हैं.
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