धर्म एवं ज्योतिष
भोलेनाथ के इस मंदिर की अनोखी कहानी, जहां मन्नत पूरी होने पर भक्त चढ़ाते हैं झाड़ू-बैंगन, क्या है मान्यता
13 Feb, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में ऐसा शिव मंदिर है, जहां मनोकामना पूर्ण होने के बाद झाड़ू चढ़ाई जाती है. खीरी जिले में महाभारत कालीन कई ऐतिहासिक और पौराणिक शिव मंदिर हैं. मोहम्मदी से बरवर रोड पर प्राचीन पालन नाथ शिव मंदिर है. भगवान शिव की शिवलिंग की स्थापना महाभारत कालीन में की गई थी.
यह शिव मंदिर पालगांव में बना होने के कारण इसका नाम पालन नाथ मंदिर पड़ गया. यह एक ऐसा शिव मंदिर है, जहां मानी गई हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है. ऐसे में मनोकामना पूर्ण होने के बाद शिव भक्त यहां झाड़ू और बैंगन चढ़ाते हैं. काफी दूर-दूर से लोग भगवान भोलेनाथ की आराधना करने के लिए आते हैं. यहां सावन में सबसे अधिक भीड़ होती है.
क्या है मंदिर की कहानी?
मंदिर में स्थापित शिवलिंग महाभारत कालीन की है. कौरवों से जुए में हारने के बाद पांडवों को 12 वर्ष का वनवास और 1 वर्ष का अज्ञातवास भोगना पड़ा था. पांडवों ने अपना अज्ञातवास राजा विराट के राज्य में बिताया था. आज का बड़खर गांव महाभारत काल में राजा विराट के साम्राज्य का हिस्सा था. इसका नाम विराटनगर था, जो अब बड़खर हो गया.
सोमवार के दिन लगती है भारी भीड़
मंदिर परिसर में काफी वर्षों पूर्व एक समी का पेड़ लगा हुआ था, जो अब कट चुका है. इस पर पांडव अपने अस्त्र-शस्त्र रखते थे. मंदिर में काफी दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मुराद पूरी होने पर यहां दर्शन करने के लिए आते हैं. सोमवार को भी काफी दूर-दूर से लोग भगवान शिव की पूजा करने के लिए आते हैं.
वहीं महाशिवरात्रि को लेकर भी काफी दूर-दूर से लोग यहां रुद्राभिषेक करने के लिए आते हैं. मंदिर के महंत ने जानकारी देते हुए बताया कि जब कोई पशु बीमार हो जाता है, तो लोग यहां मंदिर में ताक पर नमक रख देते हैं. अगले दिन बीमार पड़े जानवर को नमक खिलाने से पशु ठीक हो जाता है.
घर के अंदर एक साथ कितनी मूर्तियां रखनी चाहिए, अगर ज्यादा है तो जान लें ये नियम, वरना उठानी पड़ेगी हानि
13 Feb, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
घर का छोटा सा मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि भावनाओं, आस्था और पारिवारिक संस्कारों का केंद्र होता है. कई लोग भक्ति भाव में अलग-अलग अवसरों पर नई मूर्तियां या चित्र स्थापित कर लेते हैं. धीरे-धीरे मंदिर भरने लगता है और फिर एक सवाल मन में उठता है क्या घर के मंदिर में देवी-देवताओं की एक से ज्यादा मूर्तियां या चित्र रखने चाहिए? अगर हां, तो कितनी संख्या सही मानी जाती है?
घर के मंदिर में मूर्तियों की संख्या क्यों है महत्वपूर्ण? धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, घर का मंदिर मंदिर जैसा ही पवित्र होना चाहिए, लेकिन उसे अत्यधिक भरा हुआ नहीं रखना चाहिए. ज्यादा मूर्तियां होने से पूजा का केंद्र बिखर सकता है. आस्था में संख्या से ज्यादा भाव महत्वपूर्ण है, फिर भी कुछ पारंपरिक मान्यताएं हैं जिन्हें लोग मानते आए हैं. अक्सर देखा गया है कि लोग यात्रा से लौटते समय या किसी व्रत-त्योहार पर नई मूर्ति ले आते हैं. भावना अच्छी होती है, लेकिन संख्या बढ़ने पर नियमित पूजा करना मुश्किल हो जाता है. यही कारण है कि विद्वान सीमित और संतुलित संख्या की सलाह देते हैं.
देवी-देवताओं के अनुसार क्या हो संख्या? भगवान गणेश भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है, इसलिए लगभग हर घर में उनकी प्रतिमा मिलती है. धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, गणेश जी की मूर्तियां विषम संख्या जैसे 1, 3, 5 या 7 में रखना शुभ माना जाता है. हालांकि एक ही मूर्ति भी पर्याप्त है, यदि श्रद्धा से पूजा की जाए. कई घरों में अलग-अलग आकार की गणेश प्रतिमाएं होती हैं, लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि वे अत्यधिक न हों.
शिवलिंग घर के मंदिर में शिवलिंग स्थापित करने को लेकर विशेष सावधानी बताई जाती है. मान्यता है कि घर में रखा शिवलिंग अंगूठे के आकार से बड़ा नहीं होना चाहिए. बड़े शिवलिंग की पूजा-विधि विस्तृत होती है, जिसे नियमित रूप से निभाना हर किसी के लिए संभव नहीं होता. साथ ही, घर में एक से अधिक शिवलिंग नहीं रखने चाहिए. शिवलिंग को जल से भरे पात्र में स्थापित करना शुभ माना जाता है.
माता दुर्गा मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा घर-घर में होती है. लेकिन धर्म विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि माता के तीन चित्र या प्रतिमाएं एक साथ न रखें. तीन की संख्या से बचते हुए एक, दो या तीन से अधिक संख्या रखी जा सकती है, पर संतुलन जरूरी है. कई बार लोग नवरात्रि में नई तस्वीर लगा देते हैं, पर पुरानी हटाना भूल जाते हैं यहीं सावधानी की जरूरत है.
बजरंग बली हनुमान जी की मूर्ति के बारे में मान्यता है कि घर में उनकी बैठी हुई मुद्रा वाली प्रतिमा रखना शुभ होता है. यह रूप शांति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है. खड़े या युद्ध मुद्रा वाले चित्र मंदिरों के लिए उपयुक्त माने जाते हैं, जबकि घर के लिए शांत स्वरूप बेहतर बताया गया है.
राम दरबार और शिव परिवार राम-जानकी और शिव परिवार का चित्र घर में सामूहिकता और पारिवारिक एकता का संदेश देता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इनका चित्र या प्रतिमा घर के मंदिर में अवश्य होनी चाहिए. यह परिवार में प्रेम और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत करता है.
मंदिर की दिशा और व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी सिर्फ मूर्तियों की संख्या ही नहीं, बल्कि मंदिर की दिशा भी अहम मानी गई है. वास्तु के अनुसार, घर का मंदिर उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में होना चाहिए. मंदिर का मुख पूर्व की ओर हो तो बेहतर माना जाता है.
मंदिर को कभी भी शयनकक्ष, बाथरूम या सीढ़ियों के नीचे नहीं रखना चाहिए. यह नकारात्मक ऊर्जा का कारण बन सकता है. मंदिर के आसपास साफ-सफाई और सादगी बनाए रखना जरूरी है.
रुक जाता है शिव-शक्ति का गठबंधन, उतारा जाता है पंचशुल! महाशिवरात्रि से पहले बैद्यनाथ धाम में अनोखी परंपरा
13 Feb, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथधाम देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक अत्यंत पवित्र तीर्थ है. मान्यता है कि यहां स्वयं भगवान शिव और माता पार्वती विराजमान रहते हैं. यही कारण है कि इस धाम की महिमा और परंपराएं अन्य ज्योतिर्लिंगों से कुछ अलग और विशेष मानी जाती हैं. यहां की कई परंपराएं ऐसी हैं जो शायद ही किसी अन्य ज्योतिर्लिंग में देखने को मिलें. जैसे गठबंधन, थापा और पंचशूल की अनोखी परंपरा. बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर की एक खास बात यह है कि यहां केवल मुख्य मंदिर ही नहीं, बल्कि कुल 22 मंदिर स्थापित हैं. इन सभी मंदिरों के शिखर पर त्रिशूल की जगह पंचशूल विराजमान है. आम तौर पर शिव मंदिरों में त्रिशूल देखने को मिलता है, लेकिन देवघर में पंचशूल की परंपरा सदियों से चली आ रही है, जो इसे विश्व में अद्वितीय बनाती है.
कल उतारा जाएगा शिखर पर लगे पंचशूल को
पंचशूल को साल में केवल एक बार ही मंदिर के शिखर से उतारा जाता है. महाशिवरात्रि से दो दिन पहले यह विशेष अनुष्ठान किया जाता है. इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी को है, इसलिए 13 फरवरी को पंचशूल उतारा जाएगा. इससे पहले अन्य मंदिरों के पंचशूल भी उतारकर मंदिर कार्यालय में सुरक्षित रखे जा चुके हैं. निर्धारित समय पर मंदिर के भंडारी द्वारा बाबा बैद्यनाथ और माता पार्वती मंदिर के पंचशूल को विधिपूर्वक उतारा जाएगा. पंचशूल उतरने के बाद मंदिर प्रांगण में एक विशेष आयोजन होता है. जिसमें बाबा और माता पार्वती के पंचशूल का मिलन कराया जाता है. इस पवित्र दृश्य को देखने और पंचशूल का स्पर्श करने के लिए हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्र होते हैं. मान्यता है कि पंचशूल का स्पर्श करने से विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है.
पंचशूल उतरने के साथ ही रुक जायेगी गठबंधन की परम्परा
पंचशूल उतारने के साथ ही बाबा और पार्वती मंदिर का गठबंधन भी कुछ समय के लिए रोक दिया जाता है. जब महाशिवरात्रि के दिन पुनः विधिवत पूजा-अर्चना के बाद पंचशूल को शिखर पर स्थापित किया जाता है. तभी गठबंधन की परंपरा दोबारा शुरू होती है. इस क्रम में सबसे पहले सरदार पांडा द्वारा गठबंधन अर्पित किया जाता है. यह परंपरा वर्षों से निरंतर निभाई जा रही है.
क्या महत्व है पंचशूल का
कहा जाता है कि पंचशूल पांच तत्वों पृथ्वी (छिति), जल, अग्नि (पावक), आकाश (गगन) और वायु (समीर) का प्रतीक है. यह सृष्टि के आधारभूत तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है. साथ ही इसे एक दिव्य सुरक्षा कवच भी माना जाता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि पंचशूल की कृपा से मंदिर परिसर सुरक्षित रहता है. यहां किसी प्रकार की बड़ी प्राकृतिक आपदा नहीं आती है. आस्था, परंपरा और अनोखी मान्यताओं से जुड़ा बाबा बैद्यनाथधाम सचमुच श्रद्धा का अद्भुत केंद्र है, जहां हर वर्ष महाशिवरात्रि पर भक्ति और विश्वास का अनोखा संगम देखने को मिलता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (13 फ़रवरी 2026)
13 Feb, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- बेचैनी, उद्विघ्नता से बचिये, सोचे कार्य समय पर पूर्ण होंगे, समय स्थिति का ध्यान अवश्य रखें।
वृष राशि :- सफलता के साधन जुटायें, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि अवश्य होगी, कार्य पर ध्यान दें।
मिथुन राशि :- चिन्तायें कम होंगी, सफलता के साधन जुटायें, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि होगी।
कर्क राशि :- धन का व्यर्थ व्यय, समय व शक्ति नष्ट होगी तथा कार्य विघटन अवश्य होगा।
सिंह राशि :- भोग-ऐश्वर्य में समय बीतेगा, विरोधियों से व्यर्थ टकराव होगा, समय का ध्यान रखें।
कन्या राशि :- धन व समय नष्ट होगा, क्लशे व अशांति बनेगी तथा यात्रा से कष्ट होगा।
तुला राशि :- परिश्रम से सफलता के साधन अवश्य जुटायें, कार्यगति में बाधा बनेगी ध्यान दें।
वृश्चिक राशि :- चोटादि से बचिये, क्लेश व अशांति से बचिये, कष्ट अवश्य होगा।
धनु राशि :- भाग्य का सितारा बुलन्द होगा, मेहनत कर रुके कार्य बना लें अन्यथा हानि होगी।
मकर राशि :- परिश्रम विफल होगा, चिन्ता व यात्रा, व्यवधान तथा समस्या का निदान अवश्य ढूंढ लें।
कुंभ राशि :- आकस्मिक घटना से चोटादि का भय होगा, रुके कार्य अवश्य बना लें।
मीन राशि :- अधिकारियों से कष्ट, मित्र सहायक होंगे, समय स्थिति का ध्यान रखकर कार्य करें।
महाशिवरात्रि पर करें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा
12 Feb, 2026 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पूरे देश में महाशिवरात्रि का त्यौहार बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के मौके पर देश के अलग-अलग हिस्सों में भव्य शिव बारात भी निकाली जाती है। यही वो पावन दिन है जब महादेव का विवाह माता पार्वती के साथ संपन्न हुआ था। महाशिवरात्रि के दिन शिव-गौरी की पूजा करने से सुखी दांपत्य जीवन और समृद्धि-संपन्नता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही महाशिवरात्रि का व्रत कर भोलेनाथ और मां पार्वती की पूजा करने से कुंवारी कन्याओं को सुयोग्य और मनचाहा जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। हर साल माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन महाशिवरात्रि का त्यौहार मनाया जाता है। इस बार यह पावन तिथि 15 फरवरी को पड़ रही है।
इस दिन शाम 5:04 से अगले दिन सुबह 5:23 तक भद्रा का योग रहेगा, लेकिन ज्योतिषियों के अनुसार इस बार भद्रा पाताल लोक में है, इसलिए इसका असर पृथ्वी पर नहीं पड़ेगा। इसका मतलब भक्त निश्चिंत होकर पूजा कर सकते हैं।
यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के साथ हमें तन से स्वस्थ और मन से निर्मल बने रहने का संदेश देता है। शिवपुराण में महाशिवरात्रि का महत्व बताते हुए कहा गया है कि जो प्राणी इस दिन सच्चे मन से शिवजी की आराधना करता है, वह वर्ष भर किए उपवासों से कई गुणा पुण्य की प्राप्ति कर लेता है।
पूजा में कपूर होता है अहम
12 Feb, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में पूजा में कपूर बहुत जरुरी होता है। पूजा के बाद आरती में कपूर का उपयोग किया जाता है। कपूर के बिना आरती अधूरी मानी जाती है। कपूर जलाने से नकारात्मकता सकारात्मक ऊर्जा में बदल जाती है। कपूर का उपयोग बीमारियों के इलाज में भी किया जाता है। इसलिए धर्मग्रंथों के साथ आयुर्वेद में भी कपूर के बारे में खासतौर से बताया गया है। ज्योतिषीय और वास्तु उपायों में भी कपूर का उपयोग महत्वपूर्ण रूप से किया जाता है। भारतीय पूजा पद्धति वैज्ञानिक नजरिये से भी महत्वपूर्ण है। कपूर के बारे में वैज्ञानिक शोधों के आधार पर भी कहा जाता है कि इसकी सुगंध से जीवाणु, विषाणु आदि बीमारी फैलाने वाले जीव खत्म हो जाते हैं। यह वातावरण को शुद्ध करता है जिससे बीमारी होने खतरा कम हो जाता है। घर में कपूर जलाने से हानिकारक बैक्टीरिया खत्म होते हैं।
बाहर हो जाती है दूषित वायु
पूजा या हवन करते समय जब हम कपूर जलाते हैं, तो उससे निकलने वाला धुआं आसपास की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है। कपूर जलाने से आसपास की हवा साफ होने लगती है। खराब हवा घर से बाहर हो जाती है और वातावरण शुद्ध हो जाता है। सुबह-शाम कपूर जलाने से बाहरी नकारात्मक ऊर्जा घर में नहीं आ पाती है। कपूर जलाने से हवा में ऑक्सीजन की मात्रा भी बढ़ सकती है। प्रदूषित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बीमारियों से बचने के लिए कपूर जलाना चाहिए। वास्तु दोष दूर करने में भी कपूर का अच्छा असर होता है। घर के जिस कमरे में शुद्ध वायु आने-जाने के लिए खिड़की, रोशनदान आदि न हों वहां कांच के बर्तन में कपूर रखने से शुद्ध वायु का संचार होता है।
दीपक को न रखें जमीन पर
12 Feb, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जगत में सभी लोग धन और वैभव चाहते हैं और इसके लिए जी जान से प्रयास करते हैं। उनके हर प्रयास के पीछे असली लक्ष्य सुख शान्ति और अपने परिवार की खुशहाली और तरक्की होती है पर लेकिन कई बार आपने देखा होगा की सब प्रयास करने के बाद हम धन सम्पदा तो कमा लेते है पर घर की शान्ति और अमन बिगड़ जाता है। ऐसी क्या गलतियां हैं जो भूलवश हम करते रहते है और जिनके कारण हमारे सुखी जीवन पर ग्रहण लगा रहता है।
दीपक हमारे घर में प्रतिदिन जलाया जाता है। दीपक का प्रयोग हम भगवान् की पूजा के लिए करते है। कभी गलती से भी दीपक को ज़मीन पर नहीं रखना चाहिए।
शिवलिंग की पूजा हम प्रतिदिन करते है ,पर क्या आप जानते है कभी शिवलिंग ज़मीन पर नहीं रखना चाहिए। कई लोग मंदिर साफ़ करते समय कई बार शिवलिंग ज़मीन पर रखते है। ऐसा कभी न करे। शालिग्राम की पूजा तो सभी करते है। पर ज्योतिष एक बात हमेशा ध्यान में रखे कि कभी भी शालिग्राम को ज़मीन पर न रखे। इससे आप के घर कि आर्थिक स्थिति ख़राब हो सकती है।जनेऊ को बहुत पवित्र माना गया है। इसलिए इसे कभी ज़मीन पर नहीं रखना चाहिए। न ही फेकना चाहिए। अगर आप का जनेऊ ख़राब है तो उसे पेड़ की टहनी से बाँध दे या पेड़ की जड़ में डाल दे। शंख का प्रयोग हर रोज पूजा पाठ में किया जाता है। इसलिए कभी भी शंख को ज़मीन पर नहीं रखना चाहिए। शंख बजाने के बाद हमेशा उसे धोकर रखना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार भोजन की थाली को भी कभी जमीन पर नहीं रखना चाहिए ऐसा करना भी दुर्भाग्य की वजह बन जाता है।
वैजयंती माला का प्रयोग करते थे देवता
12 Feb, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
धर्म में सफल होने के लिए पूजा पाठ और हवन के साथ ही कई अन्य उपाय भी है। धर्म शास्त्रों के अनुसार वैजयंती माला- एक ऐसी माला जो सभी कार्यों में विजय दिला सकती है। इसका प्रयोग भगवान श्री कृष्ण माता दुर्गा, काली और दूसरे कई देवता करते थे। रत्न के जानकार मानते हैं कि अगर इस माला को सही विधि-विधान के साथ प्राण प्रतिष्ठित करके धारण किया जाए तो इसके परिणाम आपको तत्काल मिल सकते हैं। कोई भी ऐसा कार्य नहीं है जो जिसमें रुकावट आएगी।
वैजयंती माला को धारण करने वाला इंद्र के समान सारे वस्त्रों को जीतने वाला बन जाता है और श्री कृष्ण के समान सभी को मोहित करने वाला बन जाता है और महर्षि नारद के समान विद्वान बन जाता है। इस सिद्ध माला को धारण करने वाला हर जगह विजय प्राप्त करता है। उसके सर्व कार्य अपने आप बनते चले जाते हैं । यदि किसी काम में लंबे समय से बाधा आ रही है तो वह काम आसानी से बन जाता है। यह माला शत्रुओं का नाश भी करती है। वैजयंती माला को सिद्ध करने के लिए इसी विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। पूरा फल पाने के लिए जरूरी है कि माला सही विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा के बाद ही पहनी चाहिए।
सड़क पर नोट या सिक्का पड़ा हुआ मिलना होता है शुभ
12 Feb, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आम तौर पर कई बार ऐसा होता है कि चलते-चलते रास्ते में बहुत सी चीज़े मिलती है । कई बार रास्ते में पैसे गिरे हुए मिल जाते है या कई बार सिक्के तो ऐसे में ज्यादातर लोग इन्हें बिना कुछ सोचे तुरंत उठा कर अपने पास रख लेते है या कुछ लोग इन्हें जरूरतमंदों को दान कर देते हैं या मंदिर में चढ़ा देते हैं। इनके अलावा भी कई चीज़े होती है जैसे फूल, मोर पंख, अनाज जो कई बार रास्ते में नीचे गिरे हुए मिलती है। वास्तु शास्त्र की मानें तो ऐसा देखा जाता है कि सड़क पर गिरी हुई ये चीज़े आपके आने वाले जीवन में बदलाव का कोई संकेत हो सकती है। कई चीज़े ऐसी होती है जिनका रास्ते पर मिलना शुभ होता है। लेकिन आखिर कौन सी है ये चीज़े और क्या है इनका मतलब। तो आइए जानते हैं कि ऐसी ही कुछ चीज़ों के बारे में-
सबसे पहली चीज की बात करें तो अगर रास्ते में चलते वक्त अचानक से कोई नोट या सिक्का पड़ा हुआ दिखें तो इसे बहुत शुभ माना जाता है। इसका मतलब होता है कि जल्द ही कोई धन से संबंधित लाभ हो सकता है। साथ ही ऐसा भी माना जाता है कि अगर किसी काम के लिए जाते समय रास्ते में सिक्का या नोट मिले तो इसका मतलब ये होता है कि आपको उस काम में सफलता ज़रूर मिलेगी या अगर किसी वजह से कोई काम अटका हुआ था या अधूरा था तो वो भी पूरा हो जाएगा।
अगर रास्ते में कहीं मोर पंख पड़ा हुआ दिखें या मिल जाए तो ऐसा माना जाता है कि ये सफलता और सौभाग्य की ओर इशारा करता है। मोर पंख को श्री कृष्ण का प्रिय माना जाता है इसलिए इसे मंदिर में रखना भी शुभ माना जाता है।
अगर किसी को सड़क या रास्ते पर जाते समय अचानक से कोई सफेद कौड़ी या गोमती चक्र पड़ा हुआ मिल जाए तो इसे बहुत ही शुभ माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इन दोनों चीजों का संबंध सीधे माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु से माना गया है, ऐसे में यदि ये दोनो चीज़े रास्ते में पड़ी हुई दिख जाए तो इसे धन और समृद्धि का संकेत माना जाता है।
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (12 फ़रवरी 2026)
12 Feb, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- व्यापार में बाधा, स्वभाव में खिन्नता तथा दु:ख, अपवाद, कष्ट अवश्य होगा।
वृष राशि :- किसी आरोप से बचें, कार्यगति मंद रहेगी, क्लेश व अशांति का वातावरण रहेगा।
मिथुन राशि :- कार्य योजना पूर्ण होगी, धन का लाभ होगा, आशानुकूल सफलता का हर्ष अवश्य होगा।
कर्क राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, कार्यगति में सुधार होगा, कार्य व्यवस्था बनी रहेगी।
सिंह राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा, कार्यगति में सुधार होगा, चिन्तायें अवश्य कम होंगी।
कन्या राशि :- मान-प्रतिष्ठा में व्यथा बनेगी, स्त्री से तथा स्त्री वर्ग से सुख-समृद्धि की स्थिति बनेगी।
तुला राशि :- अग्नि-चोटादि का भय, व्यर्थ भ्रमण, धन का व्यय, कार्य होगा, बने कार्य रुकेंगे।
वृश्चिक राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति, मान-प्रतिष्ठा, चिन्ता, उद्विघ्नता तथा भय बना ही रहेगा।
धनु राशि :- विवादग्रस्त होने से बचिये, तनाव, क्लेश से मानसिक अशांति का वातावरण बनेगा।
मकर राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, घर में सुख-शांति बनेगी।
कुंभ राशि :- भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी, समय उत्साहवर्धक होगा, मानसिक शांति रहेगी।
मीन राशि :- व्यवसाय में बाधा कारक स्थिति बनेगी, मन में उद्विघ्नता रहेगी, धन हानि होगी।
जिस बिल्ली को मानते हैं अपशकुन, उसी को इस कर्नाटक के गांव में देवी मानकर पूजते हैं लोग, जानें रहस्यमयी परंपरा के बारे में
11 Feb, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सुबह घर से निकलते वक्त अगर बिल्ली रास्ता काट दे तो कितने लोग ठिठक जाते हैं, है ना? कोई दो मिनट रुकता है, कोई दूसरा रास्ता ढूंढ लेता है. बचपन से सुनी बात दिमाग में घूमती रहती है कि बिल्ली दिखना ठीक नहीं. मगर क्या आपने कभी सोचा कि जिस जानवर को हम अपशकुन समझते हैं, कहीं वही किसी और जगह सौभाग्य का निशान हो? देश के एक कोने में ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है, जहां बिल्ली डर की नहीं, श्रद्धा की वजह है. यहां लोग बिल्लियों को भगाते नहीं, सिर झुकाकर प्रणाम करते हैं. कहानी सिर्फ आस्था की नहीं, इंसान और जानवर के रिश्ते की भी है, जो पुराने समय से चला आ रहा है और आज भी लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में जिंदा है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
जहां बिल्ली है गांव की रक्षक
कर्नाटक के एक छोटे से गांव मांड्या के बेक्कलाले में बिल्लियों को देवी का रूप माना जाता है. यहां मान्यता है कि सालों पहले गांव पर मुसीबत आई थी. उसी समय एक बिल्ली के रूप में देवी प्रकट हुईं और गांव को खतरे से बचाया. बुजुर्गों की जुबानी ये कहानी आज भी जिंदा है. लोग बताते हैं कि उनके पुरखों ने उस दिव्य रूप के दर्शन किए थे. तभी से गांव में बिल्ली को साधारण जानवर नहीं समझा जाता
मंदिरों और घरों में खास जगह
यहां कई घरों में बिल्ली को पहले खाना दिया जाता है, फिर परिवार खाता है. कुछ घरों में तो उनके लिए अलग कटोरी और सोने की जगह तय है. गांव के मंदिर में भी बिल्ली की प्रतीक मूर्ति रखी गई है, जहां त्योहारों पर पूजा होती है. साल में एक बार खास उत्सव मनाया जाता है, जो तीन-चार दिन चलता है. इस दौरान गांव में बाहर से लोग भी आते हैं.
नियम इतने सख्त कि कोई मजाक नहीं
इस गांव में बिल्ली को नुकसान पहुंचाना बड़ा अपराध माना जाता है, अगर कोई जानबूझकर बिल्ली को सताए, तो उसे सामाजिक सजा मिलती है. कई बार ऐसे लोगों को गांव छोड़ने तक को कहा गया है. अगर किसी को मरी हुई बिल्ली मिलती है, तो उसका सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाता है. यह सब सुनकर शहर में रहने वाले लोग हैरान हो सकते हैं, लेकिन यहां ये रोजमर्रा की बात है.
अशुभ वाली धारणा पर सवाल
अक्सर लोग कहते हैं कि बिल्ली रास्ता काटे तो काम बिगड़ता है, लेकिन गांव के लोग इसे अलग नजर से देखते हैं. उनका मानना है कि बिल्ली किसी अनहोनी से पहले सतर्क कर देती है. जैसे कुत्ते भूकंप या खतरे से पहले बेचैन हो जाते हैं, वैसे ही बिल्लियां भी बदलाव महसूस कर लेती हैं. फर्क बस इतना है कि हमने कुत्तों को वफादार कहा और बिल्लियों को बदनाम कर दिया.
दुनिया में भी है बिल्ली का मान
सिर्फ इस गांव में नहीं, दुनिया के कई हिस्सों में बिल्ली को शुभ माना गया है. मिस्र की पुरानी सभ्यता में बिल्ली को पवित्र समझा जाता था. लोग मानते थे कि घर में बिल्ली हो तो नकारात्मक चीजें दूर रहती हैं. गांव के बुजुर्ग भी यही तर्क देते हैं कि बिल्ली घर को चूहों से बचाती है, अनाज सुरक्षित रखती है और कई कीड़े-मकोड़ों को दूर रखती है.
बदलती सोच की कहानी
आजकल गांव के युवा पढ़-लिखकर शहरों में जा रहे हैं, लेकिन अपनी इस परंपरा को नहीं भूलते. सोशल मीडिया पर भी इस गांव की चर्चा होने लगी है. कई लोग यहां घूमने सिर्फ इस अनोखी परंपरा को देखने आते हैं. गांव वाले इसे दिखावा नहीं, अपनी पहचान मानते हैं.
आखिर में बात सोच की है. जिसे हम डर से जोड़ते हैं, कोई और उसे विश्वास से जोड़ सकता है. बिल्ली शुभ है या अशुभ, ये बहस चलती रहेगी, लेकिन इस गांव में उसका दर्जा तय है -वह देवी है, रक्षक है.
राहु की महदशा से हैं परेशान, तो महाशिवरात्रि पर करें ये खास उपाय..महादेव का मिलेगा आशीर्वाद तो बदल जाएगी किस्मत
11 Feb, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में हर पर्व का विशेष महत्व होता है. हिंदू पंचांग के अनुसार 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शंकर की पूजा आराधना करने के साथ ही माता पार्वती की भी पूजा की जाती हैं. महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा आराधना करने से जीवन में समस्त पापों से मुक्ति मिलती है. साथ ही अशुद्ध स्थिति में ग्रह नक्षत्र का प्रभाव भी काम होता है. ऐसी स्थिति में अगर आप राहु की महादशा से परेशान हैं, तो फिर महाशिवरात्रि के दिन कुछ खास उपाय जरूर करना चाहिए तो चलिए जानते हैं.
महाशिवरात्रि का पर्व बेहद खास
सीताराम दास बताते हैं कि सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व बेहद खास होता है. वाराणसी और अयोध्या में इस दिन भोलेनाथ का बारात भी निकाला जाता है. इस दिन भोलेनाथ के शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से समस्त पापों से जहां मुक्ति मिलती है, तो वहीं अगर इस दिन कुछ खास उपाय किया जाए तो अशुभ ग्रहों की महादशा से बचा भी जा सकता है.
अगर आप राहु ग्रह की महादशा से परेशान चल रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में महाशिवरात्रि के दिन जल में दूर्वा डालकर भगवान शंकर के शिवलिंग पर जलाभिषेक करना चाहिए. ऐसा करने से राहु की महादशा शिव मुक्ति मिलती है. साथ ही भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है और सभी बिगड़ा काम बनने लगता है.
कैसे करें पूजा पाठ
महाशिवरात्रि के दिन राहु ग्रह से संबंधित चीजों का दान करना भी शुभ माना जाता है. अगर आप इस दिन जरूरतमंद लोगों को कंबल सरसों का तेल काला तिल नारियल नीला कपड़ा का दान करते हैं तो राहु की शुभ प्रभाव मिलने शुरू हो जाते हैं साथ ही मानसिक शांति की भी प्राप्ति होती है
महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ के शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के बाद 108 बार भोलेनाथ की अमोघ मंत्र , ओम नमः शिवाय, मंत्र का जाप करना चाहिए. ऐसा करने से राहु ग्रह की महादशा शांत होती है. साथ ही अगर आप इस दिन ,ओम राहवे नमः, मंत्र का जाप कर रहे हैं, तो राहु कुंडली में अनुकूल होने लगता है.
क्या है चेतना की चौथी अवस्था? जब मन विस्तृत भी हो और सजग भी! श्री रवि शंकर ने समझाया 'तुरीय अवस्था' का विज्ञान
11 Feb, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रेम केवल भावना नहीं है, वह मन, हृदय, शरीर और हमारे आसपास के वातावरण को शुद्ध करने वाली शक्ति है. कहा जाता है कि ईश्वर को यदि किसी की आकांक्षा है, तो वह है – प्रेम. ईश्वर के पास सब कुछ है, फिर भी वे प्रेम के लिए आकुल हैं. मौन, संतोष और परिपूर्णता की अवस्था प्रेम की पराकाष्ठा है. यही गहरा ध्यान है.
घृणा से स्वयं का नुकसान
जब हम किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचते हैं, जिससे हम प्रेम करते हैं, तो भीतर स्वतः ही एक सुखद अनुभूति जाग उठती है. मन हल्का हो जाता है, शरीर में सहजता आ जाती है. इसके विपरीत, जब हम किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचते हैं, जिसे हम नापसंद करते हैं, तो भीतर कुछ सिकुड़ता हुआ-सा महसूस होता है. जैसे पूरी प्रणाली तनाव में आ गई हो. यह अनुभव बताता है कि हमारे विचार केवल हमारे मन को ही नहीं बल्कि वे हमारे पूरे अस्तित्व को प्रभावित करते हैं.
इसीलिए कहा गया है कि किसी से घृणा नहीं करनी चाहिए. यह सलाह नैतिकता के उपदेश से अधिक एक व्यावहारिक सत्य है. ऐसा नहीं है कि घृणा करने से हम दूसरे व्यक्ति को नुकसान पहुँचाते हैं, वास्तव में, घृणा का पहला और सबसे गहरा प्रभाव स्वयं हमारे ऊपर पड़ता है. जब हम किसी से घृणा करते हैं, तो हम अनजाने में ही उसके नकारात्मक गुणों को अपने भीतर ग्रहण करने लगते हैं.
राक्षसों ने कैसे पाई मुक्ति
पुराणों में एक प्रसिद्ध कथा आती है. भगवान विष्णु के धाम के द्वार पर खड़े रक्षकों ने कुछ संतों के साथ अपमानजनक व्यवहार किया. संतों ने यह प्रश्न उठाया कि यदि ईश्वर सभी के सेवक हैं, तो विष्णु स्वयं संतों के सेवक हुए. ऐसे में द्वारपालों के आचरण के लिए उन्हें प्रायश्चित करना होगा. उनके सामने दो विकल्प रखे गए, या तो द्वारपाल सौ जन्मों तक अच्छे व्यक्ति के रूप में जन्म लें, या केवल तीन जन्मों तक अत्यंत दुष्ट व्यक्ति के रूप में. उन्होंने तीन जन्मों तक ईश्वर के शत्रु बनकर जन्म लेना स्वीकार किया. वे राक्षस रूप में जन्मे और ईश्वर से तीव्र घृणा करते रहे. किंतु इसी घृणा के माध्यम से वे ईश्वर में पूरी तरह लीन हो गए और अंततः उन्हें मुक्ति प्राप्त हुई.
प्रेम स्वयं से आरंभ होता है
इस कथा का सार यही है कि जिस पर हमारा ध्यान टिकता है, उसी के गुण हमारे भीतर उतरने लगते हैं, चाहे वह प्रेम हो या घृणा. जब घृणा भी पूर्ण रूप से किसी एक दिशा में केंद्रित हो जाती है, तो वह अंततः उसी चेतना में विलीन हो जाती है. शास्त्र कहते हैं – किसी से घृणा मत करो, सबसे प्रेम करो.
लेकिन यह प्रेम किसी आदर्श वाक्य से शुरू नहीं होता, बल्कि स्वयं से आरंभ होता है. अपने भीतर प्रेम को अनुभव कीजिए. धीरे-धीरे आप पाएँगे कि लोगों के चेहरे, उनके रूप और पहचानें धूमिल होने लगती हैं और केवल प्रेम ही शेष रह जाता है.
दुखी होने पर चेतना सिकुड़ जाती
जब मन प्रेम या प्रसन्नता की अवस्था में होता है, तो चेतना का विस्तार होता है. और जब हम दुःखी होते हैं, तो चेतना सिकुड़ जाती है. मन का सिकुड़ना ही दुःख है और मन का विस्तार ही आनंद. लेकिन एक रोचक तथ्य यह है कि जब मन का विस्तार होता है, तो अक्सर सजगता कम हो जाती है. नींद में भी मन विस्तृत होता है, पर चेतना जाग्रत नहीं रहती. जब हम बहुत खुश होते हैं, तो मन हर जगह फैल जाता है, केंद्रित नहीं रहता. और जब हम दुःखी होते हैं, तो मन अत्यधिक केंद्रित तो होता है, लेकिन चेतना संकुचित हो जाती है. ऐसे में प्रश्न उठता है, क्या कोई ऐसी अवस्था है, जहां मन विस्तृत भी हो और सजग भी?
ध्यान से सजगता और एकाग्रता एक साथ
ध्यान इसी प्रश्न का उत्तर है. ध्यान वह विधि है, जिसके माध्यम से हम एक ही समय में सजग भी रहते हैं और केंद्रित भी. ध्यान से चेतना का विस्तार होता है. इसे शास्त्रों में चेतना की चौथी अवस्था कहा गया है – तुरीय अवस्था या शिव तत्त्व. विज्ञान भी इस अनुभव की पुष्टि करता है. मस्तिष्क में हर समय अरबों-खरबों न्यूरॉन सक्रिय रहते हैं, किंतु एक समय पर उनमें से कुछ ही क्रियाशील होते हैं. जब कुछ शांत होते हैं, तो दूसरे सक्रिय हो जाते हैं. यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है. इसी कारण नियमित ध्यान आवश्यक है ताकि मस्तिष्क की सभी कोशिकाएँ प्रशिक्षित और जागरूक हो सकें.
ध्यान से पूरा तंत्र पोषित
जिस प्रकार किसी शहर को तब पूर्ण साक्षर कहा जाता है, जब वहां का हर व्यक्ति पढ़ना-लिखना जानता हो, उसी तरह हमारा शरीर भी एक शहर है. आज कुछ कोशिकाएँ जागती हैं, कल कुछ और. ध्यान के माध्यम से हम धीरे-धीरे पूरे तंत्र को पोषित करते हैं. इसमें समय लगता है, लेकिन जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तब जीवन में परमानंद सहज रूप से प्रकट होने लगता है. अंततः, जब यह समझ जीवन में उतर आती है, तो प्रेम साधना बन जाता है और साधना ही जीवन.
400 साल पुराने इस मंदिर नंदी के मुख से निकलती है जलधारा,
11 Feb, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हर वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है और इस बार यह शुभ तिथि 15 फरवरी को है. महाशिवरात्रि के मौके पर आज हम आपको शिवजी के ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां निरंतर जल की धारा बहती है. यह धारा कहां से आ रही है, आज तक किसी को नहीं पता. आइए महाशिवरात्रि के मौके पर जानते हैं भगवान शिव के इस मंदिर के बारे में...
15 फरवरी को देशभर में महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाने वाला है, हर वर्ष फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ दिन पर भगवान शिव निराकार स्वरूप से साकार स्वरूप में प्रकट हुए थे. इस शुभ दिन पर भक्त शिव मंदिर में दर्शन कर मनोकामना पूर्ति के लिए पूजा करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बेंगलुरू में एक ऐसा मंदिर है, जहां भगवान शिवलिंग पर निरंतर जल धारा बहती है. चौंकाने वाली बात ये है कि जल का स्त्रोत अज्ञात है. शोध करने आए वैज्ञानिक भी नहीं जानते हैं कि पानी कहां से आ रहा है.
बेंगलुरु के मल्लेश्वरम इलाके में भगवान शिव का प्राचीन काडु मल्लेश्वर मंदिर स्थापित है, जिसकी तुलना 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग से की जाती है. माना जाता है कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग मल्लिकार्जुन का स्वरूप है. मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी के दौरान मराठा राजा शिवाजी के भाई वेंकोजी ने कराया था. मंदिर पर मराठा और द्रविड़ शैली की नक्काशी और बनावट हर हिस्से में देखने को मिलती है. मंदिर को 400 साल पुराना बताया जाता है और इसी मंदिर के पास स्थित है श्री दक्षिणामुख नंदी तीर्थ कल्याणी क्षेत्र.
माना जाता है कि काडु मल्लेश्वर मंदिर का लाभ तभी मिलता है, जब दक्षिणामुख नंदी तीर्थ के दर्शन हो जाते हैं. दक्षिणामुख नंदी तीर्थ क्षेत्र में भक्तों को आंखों से चमत्कार और अपने भगवान के प्रति भक्त की आस्था देखने को मिलती है. मंदिर के प्रांगण में नंदी महाराज की प्राचीन पत्थर से बनी प्रतिमा मौजूद है, जिसके मुख से निरंतर साफ और ठंडे पानी की जलधारा निकलती रहती है, जो सीधे शिवलिंग पर गिरती है.
पानी कहां से आता है? मुख्य उद्गम पता लगाने के लिए वैज्ञानिक भी मंदिर का रुख कर चुके हैं, लेकिन किसी को नहीं पता कि पानी आता कहां से है. जलधारा सिर्फ नंदी महाराज के मुख से निकलती है और शिवलिंग का जलाभिषेक करती है. भक्त इसे भक्ति और चमत्कार मानते हैं. स्थानीय मान्यता है कि मंदिर में विराजमान शिवलिंग भक्तों की हर इच्छा को पूरी करते हैं. अगर भक्त अपने ईष्ट से सच्चे मन से कुछ भी मांगता है, वह पूरा हो जाता है.
महाशिवरात्रि और सावन के महीने में लाखों की भीड़ मंदिर पहुंचती है. महाशिवरात्रि के मौके पर मंदिर में 15 दिन का मूंगफली मेला भी लगता है. इतना ही नहीं, महाशिवरात्रि के मौके पर मंदिर को फूलों से सजाकर भगवान शिव की रथ यात्रा भी निकाली जाती है और विशेष अभिषेक भी होता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (11 फ़रवरी 2026)
11 Feb, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- तनाव पूर्ण वातावरण से बचिये, स्त्री शरीर कष्ट, मानसिक बेचैनी अवश्य बनेगी।
वृष राशि :- भोग-ऐश्वर्य प्राप्ति के बाद तनाव व क्लेश होगा, तनाव से बचकर चलें।
मिथुन राशि :- भोग-ऐश्वर्य, तनाव व क्लेश की स्थिति का वातावरण बनेगा, धैर्य पूर्वक कार्य करें।
कर्क राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा, भाग्य साथ देगा, बिगड़े कार्य अवश्य ही बनेंगे।
सिंह राशि :- परिश्रम सफल होगा, व्यवसायिक गति मंद होगी, आर्थिक योजना पूर्ण अवश्य ही होगी।
कन्या राशि :- कार्य व्यवसाय गति उत्तम, व्यर्थ परिश्रम तथा कार्यगति पर ध्यान अवश्य दें।
तुला राशि :- किसी दुर्घटना से बचें, चोट-चपेटादि कम हो, रुके कार्य-व्यवसाय अवश्य ही होंगे।
वृश्चिक राशि :- कार्यगति अनुकूल रहेगी, लाभांवित कार्य योजना बनेगी, बाधा आदि से बच कर चलें।
धनु राशि :- प्रतिष्ठा के साधन बनेंगे किन्तु लाभ की स्थिति कम, कार्य अवरोध होगा।
मकर राशि :- अधिकारी वर्ग से तनाव, क्लेश होगा, मानसिक अशांति, कार्य बनेंगे ध्यान दें।
कुंभ राशि :- मनोबल बनाये रखें, नया कार्य विचार होगा, समय स्थिति को ध्यान में रखकर कार्य अवश्य करें।
मीन राशि :- दैनिक कार्यगति उत्तम होगी, कुटुम्ब में सुख समय उत्तम बनेगा, समय का ध्यान रखें।
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