धर्म एवं ज्योतिष
आज का पंचांग : आज बन रहा है सबसे शुभ 'अभिजीत मुहूर्त', जानें किस समय शुरू करें नया काम ताकि मिले पक्की सफलता
10 Feb, 2026 07:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Aaj Ka Panchang 10 February 2026 (10 फरवरी 2026 का पंचांग): वैदिक पंचांग के अनुसार आज फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि सुबह 7 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। वहीं उसके बाद नवमी तिथि आरंभ हो जाएगी। साथ ही आज मंगलवार का दिन है। इसके साथ ही चंद्रमा वृश्चिक राशि और सूर्य मकर राशि में स्थित रहेंगे। आइए जानते हैं शुभ मुहूर्तों में ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त और गोधूलि मुहूर्त और अशुभ मुहूर्तों में राहुकाल, यमगण्ड सहित 10 फरवरी का संपूर्ण पंचांग….
सूर्य और चंद्रमा का समय
सूर्योदय – 7:07 AM
सूर्यास्त – 6:02 PM
चन्द्रोदय – Feb 10 1:19 AM
चन्द्रास्त – Feb 11 12:27 PM
विक्रम संवत – 2082, कालयुक्त
शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
पूर्णिमांत – फाल्गुन
अमांत – माघ
आज की तिथि
कृष्ण पक्ष अष्टमी – Feb 09 05:01 AM – Feb 10 07:27 AM
कृष्ण पक्ष नवमी – Feb 10 07:27 AM – Feb 11 09:59 AM
आज का नक्षत्र
विशाखा – Feb 09 05:02 AM – Feb 10 07:55 AM
अनुराधा – Feb 10 07:55 AM – Feb 11 10:52 AM
आज का करण
कौलव – Feb 09 06:13 PM – Feb 10 07:27 AM
तैतिल – Feb 10 07:27 AM – Feb 10 08:43 PM
गर – Feb 10 08:43 PM – Feb 11 09:59 AM
आज का योग
ध्रुव – Feb 10 12:51 AM – Feb 11 01:42 AM
व्याघात – Feb 11 01:42 AM – Feb 12 02:29 AM
आज का वार
मंगलवार
त्यौहार और व्रत
श्री रामदास नवमी
अशुभ काल
राहुकाल – 3:19 PM – 4:41 PM
यम गण्ड – 9:51 AM – 11:13 AM
कुलिक – 12:35 PM – 1:57 PM
दुर्मुहूर्त – 09:18 AM – 10:02 AM, 11:16 PM – 12:08 AM
वर्ज्यम् – 12:25 PM – 02:13 PM
शुभ काल
अभिजीत मुहूर्त – 12:13 PM – 12:56 PM
अमृत काल – 11:11 PM – 12:59 AM
ब्रह्म मुहूर्त – 05:30 AM – 06:18 AM
AAJ KA Rashifal : आज आसमान में बन रहा है दुर्लभ 'राजयोग', इन 4 राशियों की बंद किस्मत का खुलेगा ताला
10 Feb, 2026 07:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: आज मंगलवार, 10 फरवरी 2026 को कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पूरे दिन प्रभावी रहेगी. ज्योतिष की दुनिया में आज की तिथि को संयम, मानसिक परिपक्वता और भावनात्मक द्वंद्व को साफ करने का दिन माना जाता है. आज के दिन एकदम से चमत्कार के दिन नहीं है बल्कि अंदर की सही तैयारी करने का दिन है.
आज चंद्रमा वृश्चिक राशि में गोचर कर रहा है, जिससे भावनाएं गहन, तीव्र और कभी-कभी संदेह से भरी हो सकती हैं. आपके पुराने अनुभव आपको फिर से याद आ सकते हैं, जिससे आपको शक्ति मिलेगी और आप अंदर से और भी ज्यादा मजबूत बनेंगे. हालांकि कोई भी फैसला लेना आपके लिए मुसीबत खड़ा कर सकता है.
मेष
आज आत्मनियंत्रण की कड़ी परीक्षा का दिन है. टाली हुई जिम्मेदारियां और भावनात्मक मुद्दे सामने आ सकते हैं. किसी से भी बात करते वक्त अपने शब्दों का चयन सावधानी से करें.
वृषभ
आज का दिन रिश्तों और साझेदारी पर फोकस रहने वाला है. जीवनसाथी या बिजनेस पार्टनर से जुड़े गंभीर विषय उभर सकते हैं. लंबे समय की अस्पष्टता दूर करने का समय है.
मिथुन
कार्यभार और अनुशासन की मांग बढ़ेगी. छोटी जिम्मेदारियां भी भारी लग सकती हैं. एक समय में एक काम पर ध्यान दें, मल्टी-टास्किंग से बचें.
कर्क
भावनात्मक गहराई और रचनात्मकता बढ़ेगी. प्रेम, संतान या सृजनात्मक कार्यों में रुचि रहेगी. अष्टमी तिथि भावनाओं को संभालने और अनावश्यक को छोड़ने की शिक्षा देती है.
सिंह
परिवार और घरेलू मामलों को प्राथमिकता मिलेगी. पुराने मतभेद उभर सकते हैं. भावनात्मक सुरक्षा आज सबसे जरूरी है. संपत्ति या वाहन से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी न करें.
कन्या
संवाद, योजना और स्पष्टता का दिन. बातचीत या लेखन में अच्छा प्रदर्शन हो सकता है. महत्वपूर्ण विचार या प्रस्ताव को प्रभावी ढंग से रखें.
तुला
धन, वाणी और आत्म-संतुलन पर ध्यान. बोले गए शब्दों का लंबा असर रह सकता है, इसलिए संयम रखें. मेहनत का मूल्य न मिलने का अहसास अस्थायी है.
वृश्चिक
आज के दिन आपकी भावनाएं तीव्र होंगी. आत्म-निरीक्षण का बिल्कुल परफेक्ट समय है. मानसिक दबाव को नियंत्रित करें और आवेग में कोई भी फैसला न लें.
धनु
आज आपके लिए एकांत और आंतरिक तैयारी का दिन है. पुरानी स्मृतियां परेशान कर सकती हैं, उन्हें छोड़ने की कोशिश करें.
मकर
लक्ष्य और नेटवर्किंग में लाभ. ध्रुव योग विशेष अनुकूल. आज की योजनाएं भविष्य का मजबूत आधार बन सकती हैं.
कुंभ
आज करियर और प्रतिष्ठा पर फोकस करने का दिन है. अपेक्षाओं का दबाव रहेगा, लेकिन संतुलन बनाए रखें.
मीन
आध्यात्मिक सोच और नए दृष्टिकोण का दिन. पुराने विश्वासों पर पुनर्विचार करें. सीखने और मार्गदर्शन की भावना प्रबल रहेगी.
क्या बच्चे जन्म से पहले ही सीख सकते हैं पौराणिक ज्ञान? जानें गर्भ संस्कार का महत्व और उससे जुड़े फायदे
10 Feb, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कभी दादी-नानी की कहानियों में सुना था कि मां जो सोचती है, जो सुनती है, उसका असर बच्चे पर पड़ता है. अब वही बात एक बार फिर सुर्खियों में है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विश्वविद्यालयों में ‘गर्भ संस्कार’ पढ़ाने और सरकारी अस्पतालों में ‘गर्भ संस्कार कक्ष’ बनाने की घोषणा की है. बस, इसी के साथ महाभारत के अभिमन्यु और महाज्ञानी अष्टावक्र की कहानियां फिर चर्चा में आ गई हैं. सवाल सिर्फ आस्था का नहीं, जिज्ञासा का भी है-क्या सच में गर्भ में पल रहा बच्चा सीख सकता है? सनातन परंपरा में इसे पहला संस्कार माना गया है, जिसका मकसद मां को शांत, सकारात्मक माहौल देना और आने वाली संतान के अच्छे गुणों की कामना करना बताया जाता है. इन दावों के पीछे जो पौराणिक कथाएं हैं, वे रोचक भी हैं और सोचने पर मजबूर भी करती हैं.
क्या है गर्भ संस्कार का विचार?
सीधी भाषा में समझें तो गर्भ संस्कार उस सोच पर टिका है कि गर्भवती महिला का खान-पान, व्यवहार, माहौल, संगीत, पढ़ी-सुनी बातें-सब बच्चे पर असर डालते हैं. गांवों में आज भी बुजुर्ग कहते मिल जाएंगे, “गर्भ में गुस्सा मत करो, बच्चा चिड़चिड़ा होगा” या “अच्छी बातें सुनो, बच्चा समझदार बनेगा.” यही लोकमान्यता धर्मग्रंथों में संस्कार के रूप में दिखती है.
परंपरा बनाम आधुनिक नजरिया
आधुनिक विज्ञान मां के तनाव, पोषण और भावनात्मक स्थिति का असर बच्चे पर मानता है. हालांकि, पौराणिक कथाओं जैसा ‘गर्भ में ज्ञान सुन लेना’ विज्ञान का विषय नहीं, आस्था का हिस्सा है, लेकिन इन कहानियों ने सदियों से लोगों की सोच को आकार दिया है.
अभिमन्यु: अधूरी सीखी विद्या
महाभारत का यह प्रसंग सबसे ज्यादा सुनाया जाता है. अर्जुन अपनी गर्भवती पत्नी सुभद्रा को चक्रव्यूह तोड़ने की रणनीति समझा रहे थे. कहा जाता है कि गर्भ में पल रहे अभिमन्यु यह सब सुन रहे थे. उन्होंने चक्रव्यूह में घुसने की विधि तो सुन ली, लेकिन बाहर निकलने का तरीका पूरी तरह नहीं सुन पाए-क्योंकि सुभद्रा सो गई थीं.
युद्ध में दिखा असर
कुरुक्षेत्र के युद्ध में यही बात सच होती दिखी. अभिमन्यु चक्रव्यूह तो तोड़ देते हैं, पर बाहर निकलने की पूरी जानकारी न होने के कारण घिर जाते हैं. यह कहानी अक्सर इस उदाहरण के रूप में सुनाई जाती है कि गर्भ में भी सीख संभव है, पर अधूरा ज्ञान खतरनाक हो सकता है.
अष्टावक्र: गर्भ से ही विद्वान?
दूसरी कहानी अष्टावक्र की है, जो अपने ज्ञान के लिए जाने जाते हैं. मान्यता है कि उनके पिता कहोड़ वेद पढ़ाते थे और मां सुजाता गर्भावस्था में वह सब सुनती थीं. गर्भ में ही अष्टावक्र ने वेदों का ज्ञान पा लिया.
पिता को ही टोक दिया
कहानी कहती है कि एक दिन उन्होंने गर्भ से ही पिता के उच्चारण में गलती बता दी. पिता नाराज हुए और श्राप दे दिया कि बच्चा आठ जगह से टेढ़ा जन्म लेगा. इसी कारण उनका नाम पड़ा-अष्टावक्र. शरीर टेढ़ा था, लेकिन बुद्धि तेज. बाद में उन्होंने शास्त्रार्थ में विद्वानों को हराया और ‘अष्टावक्र गीता’ जैसा ज्ञान दिया.
क्यों फिर चर्चा में हैं ये कथाएं?
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद ये कहानियां सिर्फ धार्मिक मंचों पर नहीं, सोशल मीडिया और कॉलेज बहसों में भी घूम रही हैं. कुछ लोग इसे संस्कृति से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ सवाल उठा रहे हैं कि इसे पढ़ाई का हिस्सा कैसे बनाया जाएगा.
आम लोगों की दिलचस्पी
दिलचस्प बात यह है कि शहरों में प्रेग्नेंसी के दौरान म्यूजिक थेरेपी, योग, मेडिटेशन जैसी चीजें पहले से लोकप्रिय हैं. कई मां-बाप मानते हैं कि पॉजिटिव माहौल से फर्क पड़ता है. ऐसे में गर्भ संस्कार की चर्चा लोगों को नई नहीं लगती, बस भाषा और संदर्भ अलग हैं.
कहानी, आस्था और सोच
इन कथाओं को ऐतिहासिक घटना मानें या प्रतीकात्मक कहानी, एक बात साफ है-ये समाज को यह संदेश देती हैं कि बच्चे का निर्माण जन्म से पहले ही शुरू मान लिया गया था. मां का मानसिक संतुलन, शांत माहौल, अच्छे विचार-इन सबको अहम माना गया. आज जब यह विषय नीति स्तर तक पहुंचा है, तो बहस होना तय है. लेकिन अभिमन्यु और अष्टावक्र की कहानियां एक बार फिर लोगों को यह सोचने पर जरूर मजबूर कर रही हैं कि परंपरा में कही गई बातों को आधुनिक नजर से कैसे समझा जाए.
बाबा महाकाल से भी पुराना है उज्जैन का यह मंदिर, अपने ही वृद्ध स्वरूप में मौजूद, पहला शिवलिंग प्रकट होने की मान्यता
10 Feb, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व शिव-भक्ति, तप, त्याग और आत्मचिंतन का प्रतीक माना जाता है. भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और रात्रि भर शिव मंत्रों का जाप, ध्यान और भजन-कीर्तन करते हैं. महाशिवरात्रि के मौके पर आज हम आपको बाबा महाकाल से भी पुराने इस मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है उज्जैन की धार्मिक यात्रा...
महाशिवरात्रि का पर्व आने में अब बस कुछ ही दिन बचे हैं, फरवरी की 15 तारीख को यह पर्व मनाया जाएगा. महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो भगवान शिव की आराधना को समर्पित है. फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व शिव-भक्ति, तप, त्याग और आत्मचिंतन का प्रतीक माना जाता है. महाशिवरात्रि के मौके पर देशभर में कई धार्मिक पर्व मनाए जाते हैं, वहीं उज्जैन के महाकाल ज्योतिर्लिंग में भी यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है. उज्जैन का महाकाल मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जो भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध दक्षिणमुखी और स्वयंभू मंदिर है. महाकाल मंदिर शिप्रा नदी के तट पर स्थित है, जहां जाने से समय भी बदल जाता है. साथ ही इस धार्मिक शहर में बाबा महाकाल के वृद्ध स्वरुप में मौजूद हैं. महाशिवरात्रि के मौके पर जानते हैं बाबा महाकाल का वृद्ध स्वरूप के बारे में...
माना जाता है कि महाकाल के दर्शन मात्र से जीवन में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलता है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि महाकाल मंदिर में मुख्य गर्भगृह में मौजूद शिवलिंग से भी पुराना शिवलिंग मंदिर में मौजूद है, जिसके दर्शन के बिना महाकाल की दर्शन यात्रा अधूरी मानी जाती है. उज्जैन के महाकाल मंदिर में कई प्राचीन मंदिर स्थापित हैं, जिनकी अपनी-अपनी मान्यता है. कुछ मंदिर का निर्माण नए सिरे से किया गया है लेकिन कुछ मंदिर की जड़े प्राचीन काल से जुड़ी हैं.
मंदिर परिसर में महाकाल के दर्शन से पहले वृद्धकालेश्वर महादेव का मंदिर बना है, जिसे मुख्य मंदिर से भी प्राचीन बताया जाता है. मंदिर के गर्भगृह में बाबा महाकाल के प्रतिरूप में शिवलिंग मौजूद हैं और उनका शृंगार प्रतिदिन बाबा महाकाल की तरह ही होता हैं.
वृद्धकालेश्वर महादेव और बाबा महाकाल में फर्क कर पाना बहुत मुश्किल है क्योंकि शिवलिंग का आकार और रूप दोनों एक जैसे हैं. कहा जाता है कि वृद्धकालेश्वर महादेव, बाबा महाकाल के वृद्ध स्वरुप हैं और उनसे भी ज्यादा प्राचीन हैं. उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन का पुण्य तभी पूरा मिलता है, जब महाकालेश्वर के 'वृद्ध' स्वरूप के दर्शन ना हो जाए. इसलिए भक्त महाकाल के दर्शन के बाद बाबा वृद्धकालेश्वर के दर्शन जरूर करते हैं.
माना यह भी जाता है कि बाबा वृद्धकालेश्वर, महाकाल से भी पुराने हैं और उनसे पहले धरती पर प्रकट हुए थे. हालांकि आक्रमणकारियों की वजह से शिवलिंग और मंदिर दोनों को खंडित करने की कोशिश की गई लेकिन आज भी बाबा वृद्धकालेश्वर अपनी जगह पर स्थापित हैं और भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण कर रहे हैं. मंदिर की हालत थोड़ी जर्जर है जिसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि मंदिर आक्रमणकारियों का शिकार हुआ था लेकिन साथ ही समय-समय पर मंदिर का रखरखाव भी होता रहता है.
महाशिवरात्रि 2026 पर क्या भोग चढ़ाएं? जानिए वो चीजें जो भगवान शिव को हैं अति प्रिय, मिलेगा आशीर्वाद
10 Feb, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहारों में से एक महाशिवरात्रि हर साल करोड़ों भक्तों को भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति की अनुभूति कराता है, लेकिन इस बार का महाशिवरात्रि 2026 कुछ अलग ही उमंग लेकर आया है-क्योंकि श्रद्धालु सिर्फ व्रत रखने या पूजा तक सीमित नहीं रहना चाहते, वे चाहते हैं कि भोलेनाथ की कृपा उनके घर व जीवन पर सदैव बनी रहे. और इसके लिए शिव भक्त यह भी जानना चाहते हैं कि कौन-कौन से भोग भगवान शिव को लगाए जाएं, ताकि उनका आशीर्वाद सीधे मिल सके. इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी को है, और कई लोग आज से ही तैयारी में जुट गए हैं. मंदिरों में सजावट शुरू हो चुकी है, भक्तजन भगवान शिव के मंत्र का जाप कर रहे हैं, और अपने घरों में भी विशेष पूजा की तैयारी जोरों पर है.
पर जैसे ही यह पर्व करीब आता है, सबसे बड़ा सवाल यही उठता है – क्या चीजें भगवान शिव के भोग में लगानी चाहिए, जिससे जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामना की पूर्ति हो सके? इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
महाशिवरात्रि 2026: भोग की परंपरा का महत्व
भगवान शिव को भोग लगाना हिंदू परंपरा में सदियों से चला आ रहा है. यही नहीं, कई जनमानस और पौराणिक कथाएं बताती हैं कि भोलेनाथ भोग स्वीकार करते समय भक्त की नीयत, शुद्ध मन और सच्चे भक्ति भाव को देखते हैं.
भोग लगाना क्यों जरूरी?
भोग लगाने से सिर्फ भगवान को प्रसन्न नहीं किया जाता, बल्कि यह एक प्रतीक है आपके मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि का. भक्त यह मानते हैं कि भगवान शिव को भोग अर्पित करने से जीवन में आने वाली उलझनों का समाधान मिलता है.
महाशिवरात्रि 2026 के प्रमुख भोग
1. पंचामृत भोग
पंचामृत को शिव भोग में सर्वोपरि माना गया है. यह दूध, दही, घी, शहद और चीनी/शक्कर का मिश्रण होता है. भक्त मानते हैं कि पंचामृत से शिव का अभिषेक करने से न केवल स्वास्थ्य में सुधार होता है, बल्कि मनोकामना भी पूर्ण होती है. वास्तविक जीवन के उदाहरणों में ऐसे भक्त हैं, जिन्होंने कठिन समय में पंचामृत की भेंट के बाद परीक्षा में सफलता पाई.
2. गुड़ और दूध का भोग
कुछ क्षेत्रों में शिव को गुड़ और दूध का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है. यह भोग सरल है, घर पर आसानी से तैयार हो जाता है, और इसे लगाना भी उतना ही शुभ माना जाता है. कई बुजुर्गों की कहानियाँ हैं कि इस भोग से परिवार में शांति बनी रहती है.
3. भांग और धतूरा का भोग
यह भोग विशेष रूप से उत्तर भारत के कई मंदिरों में प्रसिद्ध है. भांग और धतूरा शिव के प्रिय पत्तों में से हैं. इस भोग को भगवान शिव को अर्पित करने से भक्तों को शत्रुसम्मुख विजय और अवसाद से मुक्ति का अनुभव मिलता है-ऐसा मान्यता है.
4. खीर और फल का भोग
खीर को भी शिव भोग में अत्यंत शुभ माना जाता है. इसमें चावल, दूध और गुड़/शक्कर को पकाया जाता है और ऊपर से सूखा मेवा डाला जाता है. खीर को शिव को अर्पित करने के बाद घर-परिवार में समृद्धि और सौहार्द्य के लिए देवताओं का आशीर्वाद मिलता है.
5. बेर और मौल(फल)
कुछ परंपराओं में बेर को शिव प्रिय फल माना जाता है. सांग्रहिक मान्यताओं के अनुसार, बेर शिव के सरल और भोले रूप का प्रतीक है. इसे अर्पित करने से जीवन में नयी उम्मीदें जागती हैं.
भोग की सरल विधि – घर पर कैसे बनाएं
भोग तैयार करना मुश्किल नहीं है. पंचामृत के लिए बस पांच चीजों को मिलाकर हल्की सी मनोकामना भाव से तैयार कर लें. खीर बनाने में दूध को उबाल कर चावल डालें और ढक कर गाढ़ा होने तक पकाएं. ऊपर से मेवा डालें और भगवान को अर्पित करें.
भक्तों की कहानियां
भोलेनाथ के भोग के पीछे कई दिलचस्प कहानियां भी हैं. जैसे उज्जैन के एक भक्त ने बताया कि उन्होंने पिछले साल खीर का भोग लगाया और उनके कारोबार में अचानक वृद्धि हुई. एक दूसरी भक्त कहती हैं कि पंचामृत भोग से उनके परिवार में लड़ाई-झगड़े कम हुए.
महाशिवरात्रि सिर्फ व्रत या पूजा का नाम नहीं है, बल्कि यह एक विश्वास है, भक्ति है, और भोलेनाथ से सीधे जुड़ने का अवसर है. सही भोग और शुभ विधि से भगवान शिव को अर्पित करने पर भक्तों को जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अनुभव होता है.
पहाड़ों में हर शुभ काम से पहले देवताओं के स्वागत के लिए लगाए जाते हैं ये खास पत्ते, जो नेगेटिव एनर्जी को रखते हैं दूर
10 Feb, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में आज भी सदियों पुरानी परंपराएं जीवित हैं, जो हमें प्रकृति और ईश्वर से जोड़ती हैं. यहां किसी भी शुभ कार्य या गृह प्रवेश के दौरान घर के मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण (वंदनवार) लगाना अनिवार्य माना जाता है. पंडित हेम चन्द्र पाठक के अनुसार, ये पत्ते केवल सजावट नहीं बल्कि एक सुरक्षा कवच हैं, जो घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखकर सुख-समृद्धि लाते हैं. जानिए क्यों यहां आम के पत्तों के बिना हर मांगलिक कार्य अधूरा माना जाता है और इसे लगाने के सही नियम क्या हैं.
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों खासकर बागेश्वर और आसपास के इलाकों में देवताओं के स्वागत के लिए घर के द्वार पर विशेष पत्ते लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. इसमें आम के पत्तों का सबसे अधिक उपयोग होता है. जब भी कोई शुभ कार्य, पूजा, यज्ञ या गृह प्रवेश होता है, तो द्वार पर आम के पत्तों का तोरण बांधा जाता है. इसे देव आमंत्रण का प्रतीक माना जाता है. कहा जाता है कि हरे पत्ते जीवन, समृद्धि और ताजगी का संदेश देते हैं. यह परंपरा केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ाव का संकेत मानी जाती है.
पंडित हेम चन्द्र पाठक के अनुसार आम के पत्ते नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाले माने जाते है. धार्मिक मान्यता कहती है कि हरे और ताजे पत्तों में सकारात्मक कंपन होते हैं, जो वातावरण को शुद्ध रखने में मदद करते हैं. जब इन्हें घर के मुख्य द्वार पर लगाया जाता है, तो यह बाहर से आने वाली अशुभ शक्तियों और नकारात्मक प्रभावों को रोकने का कार्य करते हैं. पहाड़ में लोग आज भी किसी भी मांगलिक कार्य से पहले पत्तों का तोरण लगाना नहीं भूलते है. इसे आध्यात्मिक सुरक्षा कवच की तरह देखा जाता है.
गृह प्रवेश के समय आम के पत्तों का उपयोग विशेष रूप से जरूरी माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार नया घर केवल ईट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि ऊर्जा का केंद्र होता है. ऐसे में प्रवेश से पहले द्वार पर आम के पत्तों का तोरण बांधने से शुभ ऊर्जा का प्रवेश होता है. पंडित हेम चन्द्र पाठक बताते हैं कि आम का वृक्ष देवप्रिय माना गया है. इसके पत्ते मंगल कार्यों में अनिवार्य माने गए हैं. गृह प्रवेश के समय कलश में भी आम के पत्ते रखे जाते हैं. यह सुख, शांति और धन-धान्य की वृद्धि का प्रतीक है.
आम के पत्तों का तोरण बांधते समय कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी है. पत्ते हमेशा ताजे और हरे होने चाहिए. सूखे या फटे पत्तों का उपयोग नहीं करना है. पत्तों की संख्या विषम रखी जाती है, जैसे 5, 7 या 9। इन्हें धागे या मौली में बांधकर मुख्य द्वार के ऊपर लगाया जाता है. पत्तों का मुख नीचे की ओर होना शुभ माना जाता है. पंडित पाठक के अनुसार तोरण बांधते समय मन में शुभ संकल्प और देव स्मरण करना चाहिए. यह केवल सजावट नहीं बल्कि एक धार्मिक प्रक्रिया मानी जाती है.
हिंदू पूजा पद्धति में कलश स्थापना का विशेष महत्व है. इसमें आम के पत्तों का प्रयोग जरूरी माना जाता है. कलश में जल भरकर उसके मुख पर आम के पत्ते रखे जाते हैं. ऊपर नारियल स्थापित किया जाता है. यह व्यवस्था पंचतत्व और जीवन ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है. पहाड़ में होने वाली पूजा, हवन और व्रत अनुष्ठानों में यह विधि आम है. पंडित हेम चन्द्र पाठक के अनुसार आम के पत्ते देवताओं को प्रिय हैं. इनके बिना कलश अधूरा माना जाता है. यह व्यवस्था घर में सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना के साथ की जाती है.
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ आम के पत्तों के उपयोग को कुछ लोग वैज्ञानिक दृष्टि से भी उपयोगी मानते हैं. हरे पत्ते वातावरण में ताजगी का अहसास कराते हैं. प्राकृतिक सजावट का काम करते हैं. पुराने समय में जब कृत्रिम सजावटी सामग्री उपलब्ध नहीं थी, तब लोग प्राकृतिक चीजों का ही उपयोग करते थे. आम के पत्ते लंबे समय तक ताजे बने रहते हैं, इसलिए तोरण के लिए उपयुक्त माने गए. ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी पर्यावरण अनुकूल सजावट को प्राथमिकता दी जाती है. इस तरह यह परंपरा प्रकृति संरक्षण के संदेश से भी जुड़ी हुई है.
आम के पत्तों का उपयोग केवल गृह प्रवेश में ही नहीं, बल्कि कई अन्य शुभ अवसरों पर भी किया जाता है. जैसे नामकरण संस्कार, विवाह, यज्ञ, व्रत, त्योहार और देव पूजा के समय द्वार सजाने की परंपरा है. पहाड़ में देवी-देवताओं की पूजा के दौरान मंदिर और घर दोनों स्थानों पर पत्तों का तोरण लगाया जाता है. इसे शुभ सूचना और मंगल कार्य की पहचान भी माना जाता है. गांवों में आज भी जब किसी घर में बड़ा धार्मिक आयोजन होता है, तो सबसे पहले द्वार सजाया जाता है. यह संकेत होता है कि घर में पवित्र कार्य चल रहा है.
पंडित हेम चन्द्र पाठक के अनुसार आम के पत्तों के उपयोग में कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं. कभी भी सूखे, पीले या गिरे हुए पत्ते उपयोग में नहीं लाने चाहिए. पूजा के बाद पुराने पत्तों को अपवित्र स्थान पर नहीं फेंकना चाहिए, बल्कि पेड़ की जड़ या साफ स्थान पर रखना उचित माना गया है. तोरण को बहुत लंबे समय तक सड़ने की स्थिति में नहीं छोड़ना चाहिए, समय पर बदल देना चाहिए. प्लास्टिक के कृत्रिम पत्तों की जगह असली पत्तों का उपयोग करना ज्यादा शुभ माना गया है. नियम और श्रद्धा के साथ किया गया. यह छोटा सा कार्य भी बड़ा मंगल फल देने वाला माना जाता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (10 फ़रवरी 2026)
10 Feb, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा, कार्यगति में सुधार, शुभ समाचार अवश्य ही मिलेगा।
वृष राशि :- कुछ बाधायें कष्टप्रद रखें, स्त्री शरीर कष्ट, कारोबारी बाधा, धैर्य पूर्वक कार्य करें।
मिथुन राशि :- कार्य कुशलता से संतोष, परिश्रम सफल होगा, स्त्री वर्ग से सुख अवश्य होगा।
कर्क राशि :- कुटुम्ब की समस्यायें सुलझेंगी तथा सुख-शांति में समय बीतेगा, समय का ध्यान रखें।
सिंह राशि :- परिश्रम से समय पर कार्य पूर्ण होंगे, व्यवसायिक क्षमता अवश्य ही बढ़ेगी।
कन्या राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास, आशानुकूल सफलता का हर्ष, बिगड़े कार्य बनाने का प्रयास अवश्य करें।
तुला राशि :- योजनायें पूर्ण होंगी, सफलतापूवर्क कार्य पूर्ण कर लेंगे, रुके कार्य पर ध्यान अवश्य दें।
वृश्चिक राशि :- कार्यगति उत्तम, चिन्ता कम होगी, प्रभुत्व एवं प्रतिष्ठा अवश्य ही बढ़ेगी।
धनु राशि :- आशानुकूल सफलता का हर्ष, कार्यगति उत्तम होगी, भावनायें संवदेनशील होंगी।
मकर राशि :- अधिकारी वर्ग के तनाव से क्लेश व अशांति, रुके कार्य बन ही जायेंगे ध्यान दें।
कुंभ राशि :- मनोबल बनाये रखें किन्तु हाथ में कुछ न लगे तथा नया कार्य अवश्य ही होगा।
मीन राशि :- दैनिक कार्यगति उत्तम होगी, कुटुम्ब में सुख, समय उत्तम बनेगा ध्यान अवश्य दें।
पंचांग: कालाष्टमी और जन्माष्टमी की जुगलबंदी! जानें राहुकाल का समय और पूजा की सबसे सटीक विधि
9 Feb, 2026 07:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचांग : आज 09 फरवरी, 2026 सोमवार, के दिन फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि है. इस तिथि पर भगवान शिव के एक स्वरूप कालभैरव का अधिकार है, जिन्हें समय का देवता भी कहा जाता है. यह तिथि किसी भी तरह के शुभ कार्यों, नई बातचीत और मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए अच्छी नहीं है. आज कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भी है.
9 फरवरी का पंचांग
विक्रम संवत : 2082
मास : फाल्गुन
पक्ष : कृष्ण पक्ष अष्टमी
दिन : सोमवार
तिथि : कृष्ण पक्ष अष्टमी
योग : वृद्धि
नक्षत्र : विशाखा
करण : बलव
चंद्र राशि : तुला
सूर्य राशि : मकर
सूर्योदय : सुबह 07:05 बजे
सूर्यास्त : शाम 06:05 बजे
चंद्रोदय : देर रात 01.19 बजे (10 फरवरी)
चंद्रास्त : सुबह 11.07 बजे
राहुकाल : 08:28 से 09:50
यमगंड : 11:13 से 12:35
दैनिक महत्व की गतिविधियों के लिए उपयुक्त है नक्षत्र
आज के दिन चंद्रमा तुला राशि और विशाखा नक्षत्र में रहेंगे. यह नक्षत्र 20 डिग्री तुला से 3:20 डिग्री वृश्चिक राशि तक फैला हुआ है. इसके शासक ग्रह बृहस्पति और देवता सतराग्नि हैं, जिसे इन्द्राग्नि भी कहा जाता है. यह मिश्रित प्रकृति का नक्षत्र है. नियमित कर्तव्यों के पालन के लिए, किसी की पेशेवर जिम्मेदारियों को सौंपने के लिए, घरेलू काम और दिन-प्रतिदिन के महत्व की किसी भी गतिविधि के लिए ये उपयुक्त नक्षत्र है.
आज के दिन का वर्जित समय
आज के दिन 08:28 से 09:50 बजे तक राहुकाल रहेगा. ऐसे में कोई शुभ कार्य करना हो, तो इस अवधि से परहेज करना ही अच्छा रहेगा. इसी तरह यमगंड, गुलिक, दुमुहूर्त और वर्ज्यम से भी परहेज करना चाहिए.
राशिफल : सोमवार को हाथ लगेगा 'कुबेर का खजाना' या होगी बड़ी धन हानि? जानें सितारों का चौंकाने वाला इशारा
9 Feb, 2026 07:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष- 09 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन तुला राशि का चंद्रमा आज आपके लिए सातवें भाव में होगा. आज आप समाज और आम लोगों से बहुत सम्मान प्राप्त कर सकेंगे. साथ ही आपको आर्थिक लाभ भी हो सकता है. परिवार और वैवाहिक जीवन सुख और संतोष से भरपूर रहेगा. वाहन सुख प्राप्त कर सकेंगे. प्रियजनों के साथ प्रेम के पल गुजार सकेंगे. दोपहर के बाद आपके विचार अधिक उग्र बनेंगे और आप दूसरों पर हावी होने की कोशिश करेंगे. आप बौद्धिक कार्यक्रम में भाग ले सकेंगे, परंतु अभी आपको सरल व्यवहार अपनाना आवश्यक है. व्यापारी अपने व्यापार में लाभ प्राप्त कर सकेंगे.
वृषभ- 09 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन तुला राशि का चंद्रमा आज आपके लिए छठे भाव में होगा. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा बना रहेगा. आप अपना काम समय पर पूरा कर सकेंगे. आपको आर्थिक लाभ होगा. अस्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य में सुधार होगा. ननिहाल पक्ष से अच्छा समाचार मिलेगा. ऑफिस में सहकर्मी आपकी मदद करेंगे. अधूरे काम पूरे होंगे. व्यापारियों के लिए दिन सामान्य है. ज्यादा लाभ के लालच में ना आएं. दोपहर के बाद परिजनों के लिए समय अच्छा रहेगा.
मिथुन- 09 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन तुला राशि का चंद्रमा आज आपके लिए पांचवें भाव में होगा. आज का दिन मध्यम फलदायी है. नए काम का आरंभ ना करें. बौद्धिक चर्चाओं के लिए आज का दिन शुभ नहीं है. संतान संबंधी चिंता आपको बनी रहेगी. दोपहर के बाद घर का वातावरण सुख और शांतिवाला रहेगा. आज मन से आप खुश रहने वाले हैं. शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार होगा. व्यापार में सहयोगियों का पूरा साथ मिलेगा. आर्थिक रूप से लाभ होगा। काम में यश प्राप्त होगा. आज बाहर जाने और अनावश्यक यात्रा करने से आपको बचना चाहिए.
कर्क- 09 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन तुला राशि का चंद्रमा आज आपके लिए चौथे भाव में होगा. सुबह किसी बात की चिंता से आप थोड़े उदास रहेंगे. इस कारण शारीरिक रूप से आप अस्वस्थता का अनुभव करेंगे. प्रवास के लिए आज का दिन अनुकूल नहीं है. जमीन और वाहनों से जुड़ी समस्या आपको हो सकती है. दोपहर के बाद आप सुख और शांति का अनुभव करेंगे. मित्रों का साथ मिलेगा. शारीरिक ताजगी का अनुभव होगा. आज किसी बात को लेकर कुछ ज्यादा ही सोच-विचार करेंगे. लोगों से मिलना-जुलना होगा. आज कोई उपहार भी आपको मिल सकता है.
सिंह- 09 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन तुला राशि का चंद्रमा आज आपके लिए तीसरे भाव में होगा. व्यवसाय को बढ़ाने के लिए आज आप प्रयास शुरू कर सकते हैं. व्यापार में भागीदारी के काम से लाभ प्राप्त होगा. धन प्राप्ति का प्रबल योग है. ब्याज, दलाली आदि से इनकम में वृद्धि होने की संभावना है. आय होने से आर्थिक कष्ट दूर हो जाएगा. अच्छे वस्त्र और अच्छे खान-पान से मन खुश रहेगा. छोटे प्रवास या पर्यटन का योग है. मित्रों के साथ मुलाकात आनंददायी रहेगी.
कन्या- 09 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन तुला राशि का चंद्रमा आज आपके लिए दूसरे भाव में होगा. वस्त्र या आभूषण की खरीदी आपके लिए रोमांचक और आनंददायी रहेगी. कला के प्रति आप की रुचि बढ़ेगी. व्यापार में कोई कठिन काम बन जाने से आपके मन में उल्लास छाया रहेगा. नौकरीपेशा लोगों के लिए भी समय अनुकूल रहेगा. विरोधियों पर विजय प्राप्त होगी. आज जीवनसाथी के साथ आपके संबंध और मजबूत बनेंगे. प्रेम जीवन के लिए आज का दिन सकारात्मक है. विद्यार्थी स्पोर्ट्स या कला-साहित्य में अच्छा प्रदर्शन कर सकेंगे.
तुला- 09 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन तुला राशि का चंद्रमा आज आपके लिए पहले भाव में होगा. आज का दिन आपके लिए मध्यम फलदायी रहेगा. स्थायी संपत्ति के मामले में आपको बेहद ध्यान रखना होगा. माता के स्वास्थ्य की चिंता रह सकती है. परिवार में तकरार न हो, इसका ध्यान रखें. दोपहर के बाद आप स्वस्थ अनुभव करेंगे. आप में एनर्जी बनी रहेगी, इससे समय पर आप काम पूरा कर पाने की स्थिति में होंगे. आज आप अपना टारगेट पूरा कर पाएंगे. विद्यार्थियों के लिए समय अनुकूल है.
वृश्चिक- 09 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन तुला राशि का चंद्रमा आज आपके लिए बारहवें भाव में होगा. आज का दिन व्यापार के लिए अनुकूल है. गृहस्थजीवन में उलझे हुए प्रश्नों का निराकरण हो सकेगा. स्थायी संपत्ति से जुड़े काम में आपको सफलता मिल सकती है. भाई-बहनों के साथ संबंधों में प्रेम बना रहेगा. दोपहर के बाद काम में प्रतिकूलताओं में वृद्धि होगी. शारीरिक और मानसिक रूप से चिंता का अनुभव होगा. सामाजिक क्षेत्र में अपयश प्राप्त होगा. परिजनों के साथ मतभेद रह सकता है. धन हानि का योग हैं.
धनु- 09 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन तुला राशि का चंद्रमा आज आपके लिए ग्यारहवें भाव में होगा. आप रोमांस के सुखद पलों का आनंद उठा सकेंगे. आज का दिन आर्थिक, सामाजिक और परिवार से जुड़े कामों के लिए अच्छा है. पारिवारिक जीवन में सुख और शांति का वातावरण बना रहेगा. मित्रों से लाभ होगा और यात्रा की संभावना भी है. आय के नए सोर्स बढ़ेंगे. व्यापार में वृद्धि और लाभ हो सकेगा. अविवाहितों का रिश्ता पक्का हो सकता है. शुभ प्रसंग में जाने का कार्यक्रम बनेगा. स्वादिष्ट भोजन का आनंद ले सकेंगे. स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना पड़ेगा.
मकर- 09 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन तुला राशि का चंद्रमा आज आपके लिए दसवें भाव में होगा. व्यवसाय के क्षेत्र में धन, मान तथा प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. व्यापार के लिए भागदौड़ और वसूली के लिए यात्रा करेंगे. इसमें लाभ होने की संभावना रहेगी. सरकार, मित्र तथा संबंधियों से लाभ होगा. गृहस्थ जीवन में आनंद का अनुभव होगा. परिवार में लंबे समय से चल रहा विवाद दूर हो सकेगा. संतान की प्रगति आप में संतोष की भावना का अहसास कराएगी. आज आपकी आय और व्यय में बैलेंस नहीं रहेगा. आप परिवार की जरूरत पर धन खर्च कर सकते हैं. किसी नए आभूषण की भी खरीदारी कर सकते हैं.
कुंभ- 09 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन तुला राशि का चंद्रमा आज आपके लिए नवें भाव में होगा. धार्मिक और सामाजिक काम के पीछे धन खर्च होगा. सम्बंधियों और मित्रों के साथ विवाद हो सकता है. वाहन चलाने या नया कोई इलाज शुरू करने में आपको सावधानी रखना होगी. दोपहर के बाद प्रत्येक काम सरलतापूर्वक संपन्न होंगे. दफ्तर में आप का प्रभाव बढ़ता हुआ दिखेगा. अधिकारी आपके काम से खुश रहेंगे. मानसिक शांति छाई रहेगी. परिजनों के साथ समय सुखपूर्वक गुजरेगा.
मीन- 09 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन तुला राशि का चंद्रमा आज आपके लिए आठवें भाव में होगा. आकस्मिक धन लाभ के योग हैं. व्यापारीवर्ग को रुके हुए पैसे मिलेंगे. आज आपको शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक परिश्रम करना पड़ेगा. स्वास्थ्य का ध्यान रखें. खर्च अधिक रहेगा. नियम विरुद्ध काम मुसीबत में डाल सकते हैं. आध्यात्मिक विचार और व्यवहार आपको कुमार्ग पर जाने से रोकेंगे. दोपहर के बाद स्थिति में परिवर्तन होगा. आपकी सकारात्मक सोच आपको सही काम करने के लिए प्रेरित करेगी.
राजस्थान में बसा वृंदावन का जुड़वा, मिठड़ी गांव का भादी पीठ जहां मिलती है अद्भुत शांति
9 Feb, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राजस्थान के डीडवाना–कुचामन क्षेत्र में स्थित मिठड़ी गांव एक ऐसा स्थान है, जहां कदम रखते ही मन को शांति और दिल को सुकून मिलता है. इसी गांव में स्थित है श्री भादी पीठ मिठड़ी उप-वृंदावन धाम, जो भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और चमत्कारी मंदिर है. यह धाम श्रद्धालुओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं माना जाता है. भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित यह मंदिर न केवल स्थानीय लोगों, बल्कि दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए भी विशेष आकर्षण रखता है. शांत वातावरण और गहरी भक्ति भावना के कारण यहां आने वाला हर भक्त कुछ पल के लिए दुनिया की भागदौड़ भूल जाता है.
इस धाम को लोग प्रेम से उप-वृंदावन कहते हैं, क्योंकि यहां का माहौल और आस्था वृंदावन की याद दिलाती है. जन्माष्टमी, एकादशी और अन्य कृष्ण पर्वों पर मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं. भजन-कीर्तन और आरती के दौरान पूरा परिसर कृष्ण भक्ति में डूब जाता है. यही कारण है कि यह मंदिर वृंदावन का जुड़वा धार्मिक स्थल प्रतीत होता है.
चमकती मिट्टी है मंदिर की सबसे बड़ी खासियत
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां की अद्भुत मिट्टी है. कहा जाता है कि यह मिट्टी वृंदावन से लाई गई थी और इसी कारण यह दिन हो या रात, हमेशा चमकती रहती है. भक्त इस मिट्टी को अत्यंत पवित्र मानते हैं और इसे भगवान श्रीकृष्ण की कृपा का प्रतीक समझते हैं. इसी अनोखी विशेषता के चलते इस धाम को उप-वृंदावन के नाम से जाना जाता है.
शांति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव
मंदिर परिसर में पहुंचते ही ऐसा महसूस होता है मानो मन की सारी थकान अपने आप दूर हो गई हो. चारों ओर फैली शांति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा हर आने वाले को भीतर तक छू जाती है. श्रद्धालु पूरे विश्वास के साथ भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में अपनी मनोकामनाएं रखते हैं और मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर प्रार्थना अवश्य पूरी होती है. भजन-कीर्तन, आरती और जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठता है और ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं श्रीकृष्ण यहां विराजमान हों.
श्रद्धा और विश्वास का अनूठा संगम
मिठड़ी गांव का यह मंदिर श्रद्धा, चमत्कार और भक्ति का अनूठा संगम है. दिन-रात चमकती पावन मिट्टी और भगवान श्रीकृष्ण की उपासना इसे एक विशेष और दिव्य स्थान बनाती है. यही कारण है कि यह धाम आज श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बन चुका है और इसकी महिमा लगातार दूर-दूर तक फैलती जा रही है. गहरी श्रद्धा और अटूट विश्वास इस स्थान को बेहद खास बनाते हैं, इसलिए जो एक बार यहां आता है, वह बार-बार आने की इच्छा जरूर करता है.
15 फरवरी को महाशिवरात्रि का व्रत, 300 साल बाद शुभ संयोग! जानें चार प्रहर का पूजा मुहूर्त और निशिथ काल का समय
9 Feb, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हर वर्ष महाशिवरात्रि का व्रत किया जाता है और इस बार यह शुभ तिथि 15 फरवरी दिन रविवार को है. महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक बहुत बड़ा और खास पर्व है, जिसे शिव भक्त हर साल बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव पहली बार निराकार स्वरूप से साकार रूप में प्रकट हुए थे और इसी दिन भगवान शिव का माता पार्वती से विवाह हुआ था अर्थात शिव और शक्ति का मिलन इसी रात हुआ था. इस बार महाशिवरात्रि पर 300 साल बाद 8 योग का शुभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व बढ़ गया है. आइए जानते हैं महाशिवरात्रि पूजा का महत्व, पूजा मुहूर्त और शिव-पार्वती पूजन विधि…
महाशिवरात्रि का महत्व
पुराणों के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात को भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था, जो सृष्टि, संरक्षण और विनाश का प्रतीक है. इस रात को शिव भक्त पूरी रात जागरण करते हैं और शिव के भजन-कीर्तन में लीन रहते हैं. महाशिवरात्रि का पर्व ना केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम भी माना जाता है. इस दिन ध्यान और साधना करने से व्यक्ति को मन की शांति और आध्यात्मिक बल मिलता है. इस दिन विशेष तौर पर शिव पूजन, रात्रि जागरण, मंत्र जप, व्रत और चार प्रहर की पूजा करने का बड़ा महत्व है. कहा जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन की गई भक्ति और उपासना से भक्तों को जीवन में सुख, समृद्धि और सभी प्रकार के लाभ मिलते हैं.
300 साल बाद ऐसा संयोग
काशी के ज्योतिषियों का दावा है कि करीब 300 साल बाद महाशिवरात्रि पर 8 योग का शुभ योग बन रहा है. 15 फरवरी को सूर्य, बुध और शुक्र का त्रिग्रही योग बन रहा है. इसके अलावा इस दिन श्रवण नक्षत्र भी है जो भगवान शिव को अतिप्रिय माना जाता है. इसके अलावा व्यतिपात, वरियान, ध्रुव और राज योग का भी महासंयोग है. जो इस दिन को और भी खास बनाता है.
महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026
द्रिक पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 4 मिनट से शुरू होगी और 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी. इसका मतलब यह है कि मुख्य रूप से महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी, लेकिन तिथि रात और अगले दिन तक चलने के कारण पूजा का समय भी ज्यादा रहेगा. पारण का समय 16 फरवरी की सुबह 6 बजकर 33 मिनट से दोपहर 3 बजकर 10 मिनट तक रहेगा.
चार प्रहर की पूजा का मुहूर्त
महाशिवरात्रि पर चार पहर का पूजा मुहूर्त बेहद खास माना जाता है. पहला प्रहर 15 फरवरी की शाम 6 बजकर 11 मिनट से रात 9 बजकर 23 मिनट तक रहेगा. दूसरा प्रहर 15 फरवरी की रात 9 बजकर 23 मिनट से 16 फरवरी की रात 12 बजकर 35 मिनट तक होगा. तीसरा प्रहर 16 फरवरी की रात 12 बजकर 35 मिनट से सुबह 3 बजकर 47 मिनट तक रहेगा और चौथा प्रहर 16 फरवरी को सुबह 3 बजकर 47 मिनट से 6 बजकर 59 मिनट तक रहेगा. वहीं, निशिथ काल का पूजा समय 16 फरवरी की रात 12 बजकर 9 मिनट से लेकर 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा, जिसे सबसे शुभ माना जाता है.
महाशिवरात्रि पूजा विधि
महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करना और उसके ऊपर केसर मिलाकर जल अर्पित करना विशेष लाभदायक माना गया है. शिवजी को बेलपत्र, भांग, धतूरा, फल, मिठाई आदि अर्पित करना चाहिए. इसके बाद मंत्रों का जप जैसे ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ नमो भगवते रुद्राय’ करना भी इस दिन का विशेष महत्व है. घी के दीपक से भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें. साथ ही शिव पुराण का पाठ और रात्रि जागरण करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है. भक्त इस दिन रातभर दीप जलाकर रखें और चंदन का तिलक करें.
स्नान से लेकर घर की पूजा तक, हर जगह गंगाजल क्यों है जरूरी? जानें इसे रखने का सही दिन, सही विधि और सही दिशा
9 Feb, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत में अगर किसी नदी को मां कहा गया है, तो वह सिर्फ पानी की धारा नहीं, आस्था की बहती हुई पहचान है. गंगा बचपन में घर के मंदिर में रखी छोटी-सी बोतल से लेकर अंतिम संस्कार तक, गंगाजल हर मोड़ पर हमारे साथ रहता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर गंगाजल को इतना पवित्र क्यों माना जाता है? क्यों कहा जाता है कि इसका एक छींटा भी माहौल बदल देता है? सिर्फ धार्मिक वजहें ही नहीं, बल्कि परंपराएं, अनुभव और कुछ व्यावहारिक कारण भी इसके पीछे हैं. गंगा में स्नान करने से लेकर उसके जल को घर लाने और रखने तक, शास्त्रों में कई नियम बताए गए हैं, जिन्हें आज भी लोग मानते हैं. आइए जानते हैं गंगाजल की महत्ता और उससे जुड़े जरूरी नियम, आसान और साफ शब्दों में.
सनातन परंपरा में गंगाजल का महत्व
हिंदू धर्म में गंगा को ‘पतितपावनी’ कहा गया है. मान्यता है कि गंगा का उद्गम भगवान विष्णु के चरणों से हुआ और शिव की जटाओं से निकलकर वह धरती पर आईं. इसी वजह से गंगाजल को चरणामृत के समान पवित्र माना जाता है. कहा जाता है कि गंगा दर्शन मात्र से मन हल्का होता है. कई लोग बताते हैं कि गंगा तट पर बैठते ही एक अलग तरह की शांति महसूस होती है, जो शायद शब्दों में नहीं समा पाती.
विष्णु का चरणामृत क्यों कहलाता है गंगाजल
धार्मिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु के अंगूठे से निकला जल गंगा बना. यही कारण है कि गंगाजल को अमृत समान माना गया है. मान्यता है कि इसके सेवन या स्पर्श से जीवन के दोष कम होते हैं और व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता. राजा भगीरथ द्वारा गंगा को पृथ्वी पर लाने की कथा भी यही बताती है कि गंगाजल सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पीढ़ियों के उद्धार का माध्यम माना गया
गंगाजल कब भरना माना जाता है शुभ
शुभ तिथियां और दिन
वैसे तो गंगाजल किसी भी दिन लिया जा सकता है, लेकिन कुछ तिथियां इसे और ज्यादा पुण्यकारी मानती हैं. जैसे- अमावस्या, पूर्णिमा, एकादशी, संक्रांति, गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा.
सोमवार, महाशिवरात्रि और कुंभ जैसे पर्वों पर गंगाजल भरना विशेष फलदायी माना जाता है.
ब्रह्म मुहूर्त का महत्व
परंपरा कहती है कि सुबह ब्रह्म मुहूर्त में गंगाजल भरना सबसे अच्छा होता है. इस समय वातावरण शांत होता है और जल में आध्यात्मिक ऊर्जा अधिक मानी जाती है.
घर में गंगाजल कहां और कैसे रखें
गंगाजल को घर की उत्तर दिशा में किसी साफ और पवित्र स्थान पर रखना शुभ माना जाता है. आमतौर पर लोग इसे पूजा घर में रखते हैं. पात्र की बात करें तो पीतल, तांबा या कांसे का बर्तन सबसे उपयुक्त माना गया है. प्लास्टिक की बोतल में लंबे समय तक गंगाजल रखना सही नहीं माना जाता, अगर मजबूरी में प्लास्टिक में लाया गया हो, तो घर पहुंचते ही धातु के पात्र में डाल देना चाहिए.
गंगाजल से जुड़ी आम लेकिन जरूरी सावधानियां
न करें ये गलतियां
गंगाजल लाने से पहले घर और गंगा तट पर स्नान करना जरूरी माना गया है. बिना स्नान या अशुद्ध अवस्था में गंगाजल भरने से परहेज करना चाहिए. गंगाजल को कभी भी अंधेरी, गंदी या अपवित्र जगह पर न रखें. इसे छूते समय भी साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि मान्यता है कि श्रद्धा और नियम दोनों साथ चलते हैं.
आज के समय में गंगाजल का स्थान
आज भले ही जीवन तेज हो गया हो, लेकिन गंगाजल की अहमियत कम नहीं हुई. शादी-ब्याह, गृह प्रवेश या पूजा-पाठ-हर जगह इसकी मौजूदगी बताती है कि आस्था आज भी हमारी दिनचर्या का हिस्सा है. यह सिर्फ विश्वास नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चला आ रहा अनुभव है.
रावण के मामा का गांव, जहां पर हुआ था सुबाहुं का अंत, विकास की उपेक्षा का है शिकार
9 Feb, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बलिया: आइए आज हम आपको पौराणिक और ऐतिहासिक गांव की तरफ ले चलते हैं, जी हां कैमरा जैसे ही गांव की सीमा में प्रवेश करता है, सबसे पहले दूर तक फैली हरियाली, लहलहाते खेत, शांत वातावरण और मिट्टी की सौंधी खुशबू पर नजर पड़ती है, जो सब कुछ मन को सुकून दे रहा था. यही वो गांव था, जहां पौराणिक इतिहास और वर्तमान एक-दूसरे से टकराते नजर आ रहे थे. यह गांव राम और रावण के कहानी को मानो जीवंत कर रहा था और कुछ बोल रहा था.
रामायण काल से जोड़कर देखा जाता है यह गांव
आपको बताते चलें कि यह जनपद बलिया के चितबड़ागांव थाना क्षेत्र अंतर्गत सुजायत गांव हैं, जिसे रामायण काल से जोड़कर देखा जाता है. स्थानीय बुजुर्गों (गामा और मुखराम) ने कहा कि, मान्यताओं के अनुसार, यहीं पर रावण का मामा सुबाहूं, जो त्रिजटा और सुंद का पुत्र था, रहा करता था. कैमरा आगे बढ़ता है और एक प्राचीन टीले पर ठहरता है. यह टीला न केवल मिट्टी का ढेर है, बल्कि हजारों साल पुराने इतिहास का गवाह भी है.
कहते हैं कि, सुबहूं के नाम पर ही इस गांव का नाम सुजायत पड़ा है. पुरातात्विक दृष्टिकोण से भी यह स्थान महत्वपूर्ण माना जाता है. प्रख्यात इतिहासकार डॉ. शिवकुमार सिंह कौशिकेय के मुताबिक, पुरातत्व विभाग द्वारा यहां खुदाई कराई गई थी, जिसमें कई प्राचीन अवशेष मिले थे, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक प्रामाणिकता की ओर संकेत करते हैं. यही पर भगवान राम में सुबाहु का वध किया था. बलिया में भगवान राम, लक्ष्मण और विश्वामित्र आए थे, जिसको लेकर बलिया में एक पुरानी कहावत बड़ी फेमस है, जो इस प्रकार है भोर भरवली भए उजियारा, बक्सर जाए ताड़का मारा.
विकास की उपेक्षा है यह गांव
गांव से कुछ दूरी पर, जहां कभी सुबहूं का भाई मारीच रहा करता था. उसी के नाम पर बसा गांव मरिचि, आज लगभग इतिहास के पन्नों में ही सिमट कर रह गया है. उसका भौतिक अस्तित्व अब मुश्किल से दिखाई देता है. वापस सुजायत में लौटते ही दृश्य बदल जाता है. ओवरफ्लो होती नालियां, टूटी सड़कें, झुग्गी-झोपड़ियां और बुनियादी सुविधाओं की कमी कही न कही आधुनिक भारत की एक कड़वी सच्चाई को भी उजागर करता है. इतना समृद्ध इतिहास रखने वाला यह गांव आज विकास से कोसों दूर खड़ा है.
इतिहास बनकर रह गया है यह गांव
यह डॉक्यूमेंट्री न केवल एक गांव की कहानी है, बल्कि उस विरासत की आवाज़ है, जिसे समय के साथ भुलाया जा रहा है. सवाल वहीं पुराना है कि, क्या इतिहास केवल किताबों में सिमट कर रह जाएगा या कभी उसे उसका हक भी मिलेगा? हालांकि, यही गांव अपने आप में ऐतिहासिक है. यहां के लोगों का कहना है कि, यह पौराणिक टीला अब जंगल झाड़ में तब्दील हो रहा है, इसको बचाने की जरूरत
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (09 फ़रवरी 2026)
9 Feb, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- साधन संपन्नता के योग फलप्रद हों, धार्मिक योजना अवश्य सफल होगी, ध्यान रखेंगे।
वृष राशि :- अपने किये पर पछताना पड़ेगा, मानसिक बेचैनी, क्लेश तथा अशांति बनेगी।
मिथुन राशि :- सफलता के साधन जुटायें, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि होगी, समस्या सुलझेगी।
कर्क राशि :- अनेक कार्य में सफलता मिलेगी, स्त्री से सुख, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे।
सिंह राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास होवेगा, भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी, कार्य गति उत्तम हो।
कन्या राशि :- धन प्राप्त हो, आशानुकूल सफलता में वृद्धि होवे, बिगड़े कार्य योजना बनेंगे।
तुला राशि :- आशानुकूल सफलता का हर्ष, बिगड़े कार्य अवश्य ही बनेंगे, कार्य योजना सफल हो।
वृश्चिक राशि :- दैनिक समृद्धि के साधन बनेंगे, अधिकारियों से कार्य योजना से लाभ हो।
धनु राशि :- कार्य योजना पूर्ण हो, बड़े लोगों से मेल मिलाप होगा, कार्य अवरोध से बचें।
मकर राशि :- कार्य कुशलता से संतोष, स्थिति में सुधार तथा चिंता अवश्य कम होगी।
कुंभ राशि :- आर्थिक योजना पूर्ण अवश्य ही होगी, शरीर कष्ट, मानसिक बेचैनी बढ़ेगी।
मीन राशि :- दैनिक कार्य में बाधा, चिन्ता, उद्विघ्नता से बचें, धन का व्यय होगा।
Mahashivratri 2026: कब है महाशिवरात्रि, 15 या 16 फरवरी? जानिए सही तिथि और शुभ मुहूर्त
8 Feb, 2026 01:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का पर्व शिव और शक्ति के पावन मिलन का प्रतीक माना जाता है और इसे हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में यह पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा. इस दिन शिवभक्त व्रत रखकर, रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण के साथ भगवान शिव की आराधना करेंगे. इस बार महाशिवरात्रि पर कई विशेष योगों का संयोग भी बन रहा है, जिनमें लक्ष्मी नारायण योग, अमृत योग, शुक्रादित्य योग और श्रवण नक्षत्र प्रमुख हैं. इन शुभ संयोगों के कारण पर्व का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है.
कब मनाई जाएगी महाशिवरात्रि?
हिंदू पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि का आरंभ 15 फरवरी की शाम 3 बजकर 50 मिनट पर होगा और इसका समापन 16 फरवरी की शाम 4 बजकर 25 मिनट पर होगा. उदया तिथि के आधार पर महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को ही रखा जाएगा. व्रत का पारण 16 फरवरी 2026 को किया जाएगा.
महाशिवरात्रि शुभ मुहूर्त
महाशिवरात्रि के दिन विशेष पूजा का मुहूर्त शाम 3 बजकर 54 मिनट से रात 12 बजकर 12 मिनट तक रहेगा, जो लगभग आठ घंटे का समय होगा. शास्त्रों में निशीथ काल की पूजा को अत्यंत फलदायी माना गया है. इस दिन निशीथ काल का समय रात 12 बजकर 9 मिनट से 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा, जिसे शिव आराधना के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है.
महाशिवरात्रि का दिन इन राशियों के लिए होगा शुभ
इस महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन प्रभावी रहेगा. साथ ही सूर्य और शुक्र की कुंभ राशि में युति से शुक्रादित्य योग का निर्माण होगा, जो कई राशियों के लिए लाभकारी माना जा रहा है.
मेष राशि वालों को नौकरी और व्यवसाय में प्रगति, आर्थिक मजबूती और विवाह के योग मिल सकते हैं.
कन्या राशि के जातकों को संतान संबंधी चिंताओं से राहत, संपत्ति और वाहन का सुख तथा स्वास्थ्य में सुधार के संकेत हैं.
कुंभ राशि के लोगों को व्यापार में विस्तार, दांपत्य जीवन में सुख, विद्यार्थियों को सफलता और नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठों का सहयोग मिल सकता है, साथ ही आय के नए स्रोत भी बन सकते हैं.
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