धर्म एवं ज्योतिष
शिरणी से लाई प्रतिमा, कोटा में बना भव्य साईं धाम, 50 साल पुरानी श्रद्धा की मिसाल
15 Feb, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गढ़ पैलेस स्थित शहर में साईं बाबा का एक ऐसा मंदिर है, जिसकी नींव एक छोटी सी प्रतिमा और अटूट श्रद्धा पर रखी गई थी. इस मंदिर की स्थापना की कहानी करीब पांच दशक पुरानी है. मंदिर से जुड़े चंद्र प्रकाश जेठी बताते हैं कि उनके पिताजी स्वर्गीय श्री बालू राम जेठी भारतीय सेना में कार्यरत थे. उनकी पोस्टिंग पुणे में थी और वर्ष 1978 में वे वहीं से सेवानिवृत्त हुए.
रिटायरमेंट के बाद वे अपने साथियों के साथ शिरडी दर्शन के लिए गए. उस समय शिरडी आज जितना विकसित नहीं था, बल्कि एक छोटा सा गांव हुआ करता था. वहीं से वे साईं बाबा की एक छोटी प्रतिमा अपने साथ कोटा ले आए. कोटा लौटने के बाद उन्होंने अपने घर के पास ही बाबा की प्रतिमा स्थापित की और प्रतिदिन श्रद्धा से दो अगरबत्ती जलाकर पूजा अर्चना शुरू कर दी.
धीरे धीरे बढ़ी आस्था
शुरुआत में यह एक साधारण पूजा स्थल था, लेकिन धीरे धीरे आसपास के लोग भी वहां आने लगे. आस्था का यह छोटा सा दीपक धीरे धीरे प्रकाश की तरह फैलने लगा. बढ़ती श्रद्धा को देखते हुए एक और छोटी प्रतिमा स्थापित की गई और नियमित रूप से पूजा पाठ का क्रम जारी रहा.
चमत्कार की घटना से बढ़ी मान्यता
मंदिर से जुड़ी एक घटना ने यहां की मान्यता को और मजबूत कर दिया. बताया जाता है कि अंदरगढ़ क्षेत्र में घूमने आए एक परिवार का बच्चा अचानक गुम हो गया. काफी तलाश के बाद भी जब बच्चा नहीं मिला तो किसी ने उन्हें साईं बाबा के मंदिर में प्रार्थना करने की सलाह दी. परिवार ने बाबा से विनती की और कुछ ही समय बाद बच्चा सुरक्षित मिल गया. इस घटना से प्रभावित होकर परिवार ने मंदिर निर्माण के लिए 3200 रुपए की दक्षिणा दी. इसी राशि से यहां एक छोटे मंदिर के निर्माण की शुरुआत हुई
भव्य मंदिर का स्वरूप
समय के साथ श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई. भक्तों की आस्था और सहयोग से मंदिर का विस्तार होता गया. साधारण पूजा स्थल से शुरू हुआ यह स्थान अब एक भव्य मंदिर का रूप ले चुका है. वर्ष 2002 में यहां साईं बाबा की बड़ी प्रतिमा स्थापित की गई, जिससे मंदिर की भव्यता और बढ़ गई.
लाइव आरती की विशेषता
आज यह मंदिर कोटा का पहला ऐसा साईं बाबा मंदिर माना जाता है, जहां लाइव आरती का प्रसारण भी किया जाता है. प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (15 फ़रवरी 2026)
15 Feb, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- समय विफल होगा, कार्यगति में बाधा, चिन्ता बनेगी, व्यर्थ भ्रमण होगा।
वृष राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल होगा, बिगड़े कार्य अवश्य ही बनेंगे ध्यान अवश्य दें।
मिथुन राशि :- इष्ट मित्रों से सुख, अधिकारियों के मेल-मिलाप से रुके कार्य बन जायेंगे।
कर्क राशि :- भाग्य प्रबल होगा, बिगड़े तथा रुके कार्य समय पर बना लें, धैर्य पूर्वक कार्य करें।
सिंह राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, कुटुम्ब की समस्यायें सुलझेंगी, स्त्री से हर्ष होगा।
कन्या राशि :- भावनायें संवेदनशील रहेंगी, कुटुम्ब की समस्यायें सुलझें, स्त्री से हर्ष होगा।
तुला राशि :- समय अनुकूल नहीं स्वास्थ्य नरम रहेगा, किसी धारणा में समय नष्ट होगा।
वृश्चिक राशि :- स्त्री शरीर कष्ट, मानसिक उद्विघ्नता, स्वभाव में असमर्थता अवश्य रहेगी।
धनु राशि :- आशानुकूल सफलता, स्थिति में सुधार तथा व्यवसायिक गति उत्तम होगी।
मकर राशि :- धन का व्यर्थ व्यय होगा, मानसिक उद्विघ्नता से हानि की संभवना होगी।
कुंभ राशि :- इष्ट मित्र सहयोगी होंगे, कार्य बनेंगे तथा कार्यगति अनुकूल अवश्य होगी।
मीन राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल होगा, बिगड़े कार्य अवश्य ही बन जायेंगे ध्यान रखें।
Maha Shivratri 2026: इस शिवरात्रि आजमाएं कुछ नया, मिनटों में बनाएं ये टेस्टी और क्रिस्पी स्टफ्ड चीला
14 Feb, 2026 03:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Kuttu Sabudana Cheela Recipe: कल यानी 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का पवित्र त्योहार है. यह दिन देवों के देव महादेव को समर्पित है. इस दिन व्रत रखने से सारे कष्ट दूर होते हैं और भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है. अगर आप भी कल व्रत रहने वाले हैं और यह सोच रहे हैं कि इस शिवरात्रि व्रत के लिए कौन सा फूड बेस्ट रहेगा, तो हम आपको एक खास डिश के बारे में बताने वाले हैं.
दरअसल, इस साल की महाशिवरात्रि व्रत पर आप कुछ नया ट्राई कर सकते हैं, इसके लिए ‘कुट्टू-साबूदाना स्टफ्ड चीला’ बेस्ट ऑप्शन है. यह बाहर से क्रिस्पी दिखाई देता है और इसके अंदर इस्तेमाल होने वाली आलू-साबूदाने की मसालेदार स्टफिंग आपके स्वाद को कई गुना तक बढ़ा देगी. ऐसे में आइए जानते हैं कि इसको कैसे तैयार किया जाता है.
कुट्टू चीला बनाने के लिए क्या सामग्री चाहिए?
कुट्टू का आटा: 1 कप लें.
सेंधा नमक: अपने स्वादानुसार मिलाएं.
हरी मिर्च और अदरक का पेस्ट: 1 चम्मच इस्तेमाल करें.
घोल बनाने के लिए पानी रखें.
फिर इसके बाद सेकने के लिए घी या मूंगफली का तेल लें.
स्टफिंग के लिए क्या चीज लें?
कम से कम दो-तीन उबले हुए आलू लें.
फिर आधा कप साबूदाना लें, ध्यान रखें कि साबूदाना कम से कम दो घंटे तक भिगोया हुआ हो.
फिर दो चम्मच भुनी हुई मूंगफली लें.
इसके बाद बारीक कटा हुआ हरा धनिया लें.
मिलाने के लिए आधा चम्मच काली मिर्च पाउडर और आधा चम्मच जीरा रखें.
कुट्टू-साबूदाना चीला मिनटों में कैसे बनाएं?
सबसे पहले पैन में घी गर्म करके जीरा चटकाएं, फिर साबूदाना डालकर 2 मिनट भून लें. अब इसमें मैश किए हुए आलू, मूंगफली, सेंधा नमक, काली मिर्च और धनिया मिलाकर 2-3 मिनट पकाएं. आपकी स्टफिंग तैयार है.
एक बर्तन में कुट्टू का आटा लें और पानी मिलाकर डोसे जैसा मध्यम गाढ़ा घोल तैयार कर लें. अब इसमें अदरक-मिर्च का पेस्ट और सेंधा नमक डालकर अच्छी तरह फेंटें ताकि घोल बिल्कुल चिकना रहे और गुठलियां न बनें.
नॉन-स्टिक तवे पर घी लगाकर उसे मध्यम आंच पर गरम करें. अब एक बड़ा चम्मच बैटर तवे पर फैलाएं और किनारों पर थोड़ा घी डालें ताकि चीला अच्छी तरह कुरकुरा सिक सके.
जब चीला सुनहरा और क्रिस्पी हो जाए, तो उसे पलटकर दूसरी तरफ से भी सेक लें. अब चीले के बीच में तैयार स्टफिंग रखें और इसे सावधानी से रोल कर लें या आधा मोड़ दें.
इसे गरमा-गरम दही या व्रत वाली हरी चटनी के साथ परोसें. साबूदाने की स्टफिंग के कारण इसे खाकर आपको लंबे समय तक भूख नहीं लगेगी और शरीर में भरपूर एनर्जी बनी रहेगी.
Mahashivratri 2026: शिवलिंग में विराजमान है पूरा शिव परिवार... जानिए कौन-कौन हैं विराजमान
14 Feb, 2026 01:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रविवार, 14 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में यह केवल भगवान शिव की उपासना का दिन नहीं है, बल्कि शिव परिवार की एक साथ पूजा और साधना का पर्व भी माना जाता है। शिवजी की पूजा कभी अकेले नहीं होती; इसे शिव पंचायत और पूरे शिव परिवार के साथ किया जाता है। शिव पंचायत में पांच देवता शामिल होते हैं, जबकि शिव परिवार में माता पार्वती, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय और अन्य गण प्रमुख रूप से जुड़े होते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग में ही शिव परिवार समाया हुआ है। शिवलिंग का ऊपरी बेलनाकार भाग भगवान शिव का प्रतीक होता है। चारों ओर जलधारी माता पार्वती का प्रतीक माना जाता है। जलधारी के दाईं ओर गणेश और बाईं ओर कार्तिकेय विराजमान माने जाते हैं। शिवलिंग की बीच वाली धारा पर माता अशोकसुंदरी का वास होता है। ऊपर से गिरती जलधारा भगवान शिव की जटाओं से निकलती गंगा और मस्तक पर विराजमान चंद्रमा का प्रतीक मानी जाती है। शिवलिंग पर नाग गण वासुकि, नंदी और माता पार्वती अपने वाहन सिंह के साथ उपस्थित रहते हैं।
शिवलिंग के तीन मुख्य भाग हैं—निचला भाग ब्रह्मा, मध्य भाग विष्णु और ऊपरी बेलनाकार भाग शिव का प्रतीक है। महाशिवरात्रि के दिन भक्त जब जल, दूध या बेलपत्र अर्पित करते हैं, तो यह केवल शिव के लिए नहीं बल्कि पूरे शिव परिवार के लिए होता है। यही वजह है कि इस दिन की गई पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है और घर में सुख-शांति लाने वाला माना जाता है।
पंचांग : आज की प्रदोष तिथि पर शुक्र का अधिकार है, जानें क्यों आज किया गया दान देता है 100 गुना फल
14 Feb, 2026 07:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचांग : आज 14 फरवरी, 2026 शनिवार, के दिन फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि है. इस तिथि पर शुभ ग्रह शुक्र का अधिकार है. यह दिन दान देने के लिए अच्छा माना जाता है. इस दिन शुभ कार्यों की योजना बनाई जानी चाहिए. आज विजया एकादशी का पारण है. आज शनि त्रयोदशी और शनि प्रदोष व्रत भी है.
14 फरवरी का पंचांग
विक्रम संवत : 2082
मास : फाल्गुन
पक्ष : कृष्ण पक्ष द्वादशी
दिन : शनिवार
तिथि : कृष्ण पक्ष द्वादशी
योग : सिद्धि
नक्षत्र : पूर्वाषाढ़ा
करण : तैतिल
चंद्र राशि : धनु
सूर्य राशि : कुंभ
सूर्योदय : सुबह 07:01 बजे
सूर्यास्त : शाम 06:09 बजे
चंद्रोदय : सुबह 05.36 बजे (15 फरवरी)
चंद्रास्त : दोपहर 03.08 बजे
राहुकाल : 09:48 से 11:12
यमगंड : 13:59 से 15:22
आज का नक्षत्र
आज के दिन चंद्रमा धनु राशि और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा. यह नक्षत्र धनु राशि में 13:20 से लेकर 26:40 तक फैला है. इसके शासक ग्रह शुक्र है और देवता वरुण है. पूर्वाषाढ़ का मतलब होता है, विजय से पूर्व. इस नक्षत्र में किसी भी बड़े काम की तैयारी करना अच्छा रहता है. इस नक्षत्र में माता लक्ष्मी की पूजा करना शुभ रहता है.
आज के दिन का वर्जित समय
आज के दिन 09:48 से 11:12 बजे तक राहुकाल रहेगा. ऐसे में कोई शुभ कार्य करना हो, तो इस अवधि से परहेज करना ही अच्छा रहेगा. इसी तरह यमगंड, गुलिक, दुमुहूर्त और वर्ज्यम से भी परहेज करना चाहिए.
राशिफल : सप्ताह के आखिरी दिन इन 3 राशियों पर होगी धनवर्षा, क्या आपकी राशि है इसमें?
14 Feb, 2026 07:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष- आज चंद्रमा की स्थिति 14 फरवरी, 2026 शनिवार के दिन धनु राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा नवें भाव में होगा. आज आपको अपने गुस्से पर काबू रखने की जरूरत है. आपका क्रोध किसी भी काम या संबंध को बिगाड़ने का कारण बन सकता है. स्फूर्ति का अभाव रहेगा. मानसिक अस्वस्थता की स्थिति में मन कोई काम करने के लिए प्रेरित नहीं होगा. धार्मिक या मांगलिक कार्य में शामिल होंगे. तीर्थ यात्रा पर जाना हो सकता है. नौकरी या व्यवसाय के स्थान या घर पर किसी से मनमुटाव होगा.
वृषभ- आज चंद्रमा की स्थिति 14 फरवरी, 2026 शनिवार के दिन धनु राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा आठवें भाव में होगा. काम में विलंब से सफलता मिलेगी. शारीरिक अस्वस्थता के कारण आप हताशा की भावना का अनुभव करेंगे. अत्यधिक काम के बोझ से थकान और मानसिक बेचैनी रहेगी. प्रवास में विघ्न आने की आशंका बनी रहेगी. आपको नए काम आरंभ नहीं करने की सलाह दी जाती है. खान-पान का ध्यान रखें. योग और ध्यान से आप मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं. प्रेम जीवन में अपने प्रिय से किसी बात पर मतभेद ना हो, इसका ध्यान रखें.
मिथुन- आज चंद्रमा की स्थिति 14 फरवरी, 2026 शनिवार के दिन धनु राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा सातवें भाव में होगा. आज का दिन आनंद-प्रमोद में गुजरेगा. शारीरिक और मानसिक रूप से आप खुशी का अनुभव करेंगे. मित्रों और परिजनों के साथ प्रवास या पर्यटन स्थल पर घूमने-फिरने का आनंद उठा सकेंगे. स्वादिष्ट भोजन का स्वाद ले सकेंगे. नए वस्त्रों की खरीदी भी होगी. वाहन सुख भी मिलेगा. आपके मान-सम्मान और लोकप्रियता में भी वृद्धि होने के संकेत हैं.
कर्क- आज चंद्रमा की स्थिति 14 फरवरी, 2026 शनिवार के दिन धनु राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा छठे भाव में होगा. आज आपको सफलता और आनंद की प्राप्ति होगी. घरेलू वातावरण सुख और शांतिवाला होगा. नौकरी में लाभ हो सकता है. विरोधियों को परास्त कर सकेंगे. आपके काम की कद्र होगी. मित्रों संग आनंद के पल बिताएंगे. जीवनसाथी से आपके विचार मिलेंगे. आप घर की जरूरत पर पैसा खर्च कर सकते हैं. प्रेम जीवन में संतुष्टि रहेगी. अपने प्रिय के साथ समय बिताना आपको अच्छा लगेगा.
सिंह- आज चंद्रमा की स्थिति 14 फरवरी, 2026 शनिवार के दिन धनु राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा पांचवें भाव में होगा. आज रचनात्मक और कला संबंधी काम के लिए दिन श्रेष्ठ है. आप लेखन, फोटोग्राफी, संगीत या नृत्य में रुचि ले सकते हैं. नौकरीपेशा लोगों को आज कोई नया काम मिल सकता है. व्यापार में भागीदार के साथ आपके संबंध मजबूत होंगे. विद्यार्थी पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पाएंगे. स्नेहीजनों और मित्रों के साथ मुलाकात होगी. शारीरिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा. मानसिक एकाग्रता के लिए अपने गुस्से पर संयम रखें.
कन्या- आज चंद्रमा की स्थिति 14 फरवरी, 2026 शनिवार के दिन धनु राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा चौथे भाव में होगा. आज आपको विरोध का सामना करने के लिए तैयार रहना पड़ेगा. शारीरिक स्वास्थ्य कमजोर रहेगा. मन पर चिंता का बोझ रहने से मानसिक बेचैनी का अनुभव होगा. परिवार के सदस्यों संग विवाद हो सकता है. माता के स्वास्थ्य के संबंध में चिंता होगी. पढ़ाई के लिए अनुकूल समय नहीं है. स्थायी संपत्ति, वाहन से संबंधित समस्याएं हो सकती है. अनावश्यक रूप से कहीं धन खर्च हो सकता है.
तुला- आज चंद्रमा की स्थिति 14 फरवरी, 2026 शनिवार के दिन धनु राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा तीसरे भाव में होगा. आप का दिन शुभ फलदायी होगा. परिजनों और भाई-बंधुओं के साथ अच्छे संबंध रहेंगे. जीवनसाथी के साथ घर की समस्या पर चर्चा होगी. किसी छोटे धार्मिक स्थल पर जाने का सफल आयोजन होगा. धन लाभ के योग हैं. विदेश से अच्छे समाचार मिलेंगे. यात्रा का आयोजन होगा. नए काम के लिए दिन शुभ है. शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगे. पूंजी निवेशकों के लिए दिन अच्छा है. आज का दिन भाग्यवृद्धि का है. आप समय पर सभी काम कर पाएंगे.
वृश्चिक- आज चंद्रमा की स्थिति 14 फरवरी, 2026 शनिवार के दिन धनु राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा दूसरे भाव में होगा. परिवार में सुख-शांति रहेगी. सगे-संबंधियों और मित्रों से मिलन होगा. स्वादिष्ट भोजन मिलेगा. धार्मिक काम में धन खर्च होगा. आभूषणों तथा सुगंधित पदार्थों की खरीदारी होगी. वाणी से अन्य लोगों को मोहित कर सकेंगे. धन लाभ होगा. कुटुंबजनों के साथ सुखद चर्चा होगी. विद्यार्थियों को निश्चितरूप से सफलता मिलेगी. आज किसी नए काम की शुरुआत भी हो सकती है.
धनु- आज चंद्रमा की स्थिति 14 फरवरी, 2026 शनिवार के दिन धनु राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा पहले भाव में होगा. आज व्यापारियों को विशेष लाभ होगा. विदेश से जुड़े व्यापार में लाभ मिलेगा. घर पर कोई मांगलिक काम हो सकता है. स्नेहीजनों और मित्रों का मिलन आनंदित करेगा. आर्थिक लाभ होगा. जीवनसाथी से सुख और आनंद मिलेगा. समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी. सुरुचिपूर्ण भोजन मिलेगा. स्वास्थ्य अच्छा बना रहेगा. इस कारण कार्यस्थल पर आपके काम समय पर पूरे होंगे. विद्यार्थियों के लिए समय अच्छा रहेगा. अपनी पढ़ाई पर फोकस कर सकेंगे.
मकर- आज चंद्रमा की स्थिति 14 फरवरी, 2026 शनिवार के दिन धनु राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा बारहवें भाव में होगा. आज धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों में रुचि रहने से व्यस्तता रहेगी तथा इसके पीछे खर्च भी होगा. कोर्ट-कचहरी से संबंधित काम सामने आएंगे. व्यावसायिक काम में बाधा होगी. परिजनों के साथ विवाद हो सकता है. शारीरिक स्फूर्ति तथा मानसिक प्रसन्नता में कमी का अनुभव होगा. परिश्रम के अनुसार फल नहीं मिलने से निराशा का भी अनुभव होगा. हालांकि दोपहर के बाद आपकी मानसिक स्थिति में परिवर्तन होगा.
कुंभ- आज चंद्रमा की स्थिति 14 फरवरी, 2026 शनिवार के दिन धनु राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा ग्यारहवें भाव में होगा. आज आप नए काम की शुरुआत या उसकी योजना बना सकेंगे. नौकरी या व्यवसाय में लाभ की प्राप्ति होगी. मित्र आपकी प्रगति में सहायक होंगे. आर्थिक लाभ की दृष्टि से आज का दिन बहुत अच्छा रहेगा. रमणीय स्थलों पर जाने का मौका मिलेगा. समाज में ख्याति बढ़ेगी. संतान की प्रगति होगी. पत्नी तथा पुत्र से शुभ समाचार मिलेगा. अविवाहितों के रिश्ते की कहीं बात चल सकती है.
मीन- आज चंद्रमा की स्थिति 14 फरवरी, 2026 शनिवार के दिन धनु राशि में है. आपकी राशि से चंद्रमा दसवें भाव में होगा. आपका दिन अत्यंत शुभ फलदायी है. आज आपके सभी कामों में सफलता मिलेगी. अधिकारियों की कृपादृष्टि के कारण प्रसन्नता भरा दिन रहेगा. व्यापारियों को व्यापार में वृद्धि तथा सफलता मिलेगी. पिता तथा बड़े-बुजुर्गों से लाभ होगा. कुटुंब में आनंद का वातावरण बना रहेगा. आरोग्य अच्छा रहेगा. सरकार से लाभ होगा. मान-सम्मान में वृद्धि होगी. पदोन्नति के योग हैं. सांसारिक जीवन आनंदमयी रहेगा.
रुद्राक्ष क्या है? कैसे हुई इसकी उत्पत्ति, धारण करने से पहले जानें असली और नकली रुद्राक्ष परखने का सरल तरीका
14 Feb, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सुबह मंदिर की घंटियों के बीच जब किसी के गले में भूरी-सी मनकों की माला दिखती है, तो अक्सर मन में एक ही सवाल आता है-ये रुद्राक्ष आखिर है क्या और इसे भगवान शिव के आंसू क्यों कहा जाता है? कई लोग इसे सिर्फ आस्था से जोड़ते हैं, तो कुछ इसे ऊर्जा और मन की शांति का साधन मानते हैं. दिलचस्प बात ये है कि रुद्राक्ष की कहानी सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक पुरानी मान्यता, प्रकृति से जुड़ा सच और इंसानी अनुभवों का मिला-जुला संसार है. गांव से लेकर बड़े शहरों तक, योग करने वालों से लेकर ऑफिस जाने वाले लोगों तक, रुद्राक्ष आज एक आध्यात्मिक पहचान बन चुका है. पर इसकी असली जड़ क्या है, और शिव के आंसुओं वाली बात कहां से आई-यही समझना दिलचस्प है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
रुद्राक्ष क्या होता है?
रुद्राक्ष असल में एक पेड़ का बीज है, जो ज़्यादातर नेपाल, भारत और इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों में पाया जाता है. इस पेड़ का नाम Elaeocarpus ganitrus है, लेकिन आम लोग इसे रुद्राक्ष के पेड़ के नाम से जानते हैं. जब इसका फल सूखता है, तो अंदर से कठोर बीज निकलता है, जिसकी सतह पर प्राकृतिक धारियां या खांचे होते हैं. इन्हीं खांचों को “मुख” कहा जाता है जैसे 1 मुखी, 5 मुखी, 7 मुखी रुद्राक्ष वगैरह. दिलचस्प बात ये है कि ये कोई इंसान द्वारा तराशा हुआ मनका नहीं, बल्कि प्रकृति की बनाई बनावट है. यही वजह है कि लोग इसे खास और पवित्र मानते हैं.
शिव के आंसुओं की कहानी कहां से आई?
तप और करुणा से जुड़ी मान्यता
कहानी के मुताबिक, भगवान शिव ने बहुत समय तक गहरा ध्यान लगाया. जब उन्होंने आंखें खोलीं, तो दुनिया के दुख देखकर उनकी आंखों से आंसू गिर पड़े. जहां-जहां वो आंसू धरती पर गिरे, वहां रुद्राक्ष के पेड़ उग आए. इसी वजह से “रुद्र” यानी शिव और “अक्ष” यानी आंसू-मिलकर बना नाम “रुद्राक्ष”. ये कहानी लोगों के मन में एक भाव पैदा करती है कि ये सिर्फ बीज नहीं, बल्कि करुणा और संरक्षण का प्रतीक है. इसीलिए कई लोग इसे गले में पहनते समय सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव महसूस करते हैं.
प्रतीक के रूप में रुद्राक्ष
धार्मिक मान्यता से अलग देखें तो भी ये कहानी एक गहरी बात कहती है-रुद्राक्ष दुख हरने, मन शांत करने और अंदर की घबराहट कम करने का प्रतीक बन गया. शायद यही वजह है कि तनाव भरी जिंदगी में लोग इसे पहनकर एक मानसिक सहारा महसूस करते हैं.
लोग रुद्राक्ष क्यों पहनते हैं?
मन की शांति और फोकस
योग और ध्यान करने वाले लोग मानते हैं कि रुद्राक्ष पहनने से ध्यान में स्थिरता आती है. कई लोगों का अनुभव है कि गुस्सा थोड़ा कम होता है, नींद बेहतर आती है और दिमाग कम भटकता है. भले ये वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह साबित न हो, पर व्यक्तिगत अनुभवों ने इसकी लोकप्रियता बढ़ाई है.
रोजमर्रा की जिंदगी में भरोसा
आपने देखा होगा-किसी ऑटो ड्राइवर के गले में, किसी बिज़नेसमैन की कलाई में, या किसी बुजुर्ग के हाथ में रुद्राक्ष की माला. हर किसी की अपनी वजह होती है-किसी को सुरक्षा का एहसास, किसी को किस्मत का सहारा, तो किसी को बस भगवान शिव से जुड़ाव.
असली और नकली का फर्क
पहचान कैसे करें?
आज बाजार में प्लास्टिक या नकली मनकों को भी रुद्राक्ष बताकर बेचा जाता है. असली रुद्राक्ष आमतौर पर पानी में डूब जाता है, उसकी सतह पर प्राकृतिक रेखाएं होती हैं, और हर मनका थोड़ा अलग दिखता है. लेकिन सिर्फ ये टेस्ट काफी नहीं-विश्वसनीय जगह से लेना बेहतर माना जाता है.
आस्था, प्रकृति और इंसान का रिश्ता
रुद्राक्ष की कहानी सिर्फ धर्म नहीं, बल्कि इंसान और प्रकृति के रिश्ते की भी कहानी है. एक पेड़ का बीज, जिसे लोगों ने भावना, विश्वास और अनुभवों से जोड़कर पवित्र बना दिया. चाहे आप इसे चमत्कार मानें या मन का सहारा-ये साफ है कि रुद्राक्ष ने लोगों को मानसिक ताकत देने का काम किया है. अंत में, रुद्राक्ष सिर्फ गले की माला नहीं, बल्कि एक एहसास है-कि मुश्किल वक्त में भी कोई शक्ति साथ है.
क्या सच में पाताल तक जाती हैं इस मंदिर की सीढ़ियां? विश्वकर्मा की अधूरी रचना या चमत्कार? जानें सोफा मंदिर का अनसुलझा रहस्य
14 Feb, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाशिवरात्रि आते ही देशभर के शिव मंदिरों में भीड़ उमड़ने लगती है, लेकिन कुछ जगहें ऐसी होती हैं जिनका नाम सुनते ही जिज्ञासा और श्रद्धा दोनों साथ जागते हैं. बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित सोफा मंदिर भी ऐसी ही एक रहस्यमयी जगह है, जहां लोग सिर्फ दर्शन के लिए नहीं, बल्कि एक अनोखी मान्यता को महसूस करने आते हैं. कहा जाता है कि इस मंदिर में धरती के भीतर जाती सीढ़ियां पाताल लोक की ओर ले जाती हैं, जबकि कुछ लोग इसे स्वर्ग मार्ग भी कहते हैं. आस्था, कहानी और प्रकृति-तीनों का ऐसा मेल कम ही देखने को मिलता है. महाशिवरात्रि के मौके पर यहां का माहौल कुछ अलग ही हो जाता है, जब दूर-दराज से आए भक्त घंटों लाइन में खड़े होकर महादेव के दर्शन करते हैं.
जंगलों के बीच बसा अनोखा शिव धाम
सोफा मंदिर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के मंगुराहा रेंज के पास, पंडई नदी के किनारे बसा है. यहां पहुंचते ही सबसे पहले जो चीज ध्यान खींचती है, वो है आसपास की हरियाली और गहरा सन्नाटा, जिसे सिर्फ पक्षियों की आवाज तोड़ती है. गौनाहा प्रखंड के दोमाठ गांव में स्थित यह मंदिर भारत-नेपाल सीमा के बेहद करीब है, इसलिए नेपाल से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां आते हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक, पहले यहां तक पहुंचना आसान नहीं था. कच्चे रास्ते, जंगल और नदी पार करनी पड़ती थी. अब सड़क बेहतर हुई है, फिर भी यहां का माहौल शहरों से बिल्कुल अलग है. शायद यही वजह है कि लोग इसे सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, मन को सुकून देने वाली जगह भी मानते हैं.
देवशिल्पी विश्वकर्मा से जुड़ी कथा
अधूरी संरचना, पूरी आस्था
इस मंदिर से जुड़ी सबसे मशहूर कथा भगवान विश्वकर्मा की है. मान्यता है कि उन्होंने एक ही रात में इस मंदिर का निर्माण शुरू किया था, लेकिन सूर्योदय से पहले काम पूरा नहीं हो सका. इसी कारण मंदिर की बनावट कुछ जगह अधूरी-सी दिखती है. पत्थरों की बनावट और पुरानी शैली को देखकर कई लोग मानते हैं कि यह बहुत प्राचीन स्थल है. मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यहां की अधूरी दीवारें और संरचना ही इसकी पहचान हैं. लोग इसे किसी कमी के रूप में नहीं, बल्कि चमत्कार की निशानी के तौर पर देखते हैं.
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पाताल या स्वर्ग मार्ग?
मंदिर के अंदर सबसे ज्यादा चर्चा उन सीढ़ियों की होती है, जो जमीन के भीतर उतरती हैं. ये सीढ़ियां कुछ दूरी बाद अंधेरे में खत्म हो जाती हैं. कोई साफ जवाब नहीं कि ये कहां तक जाती थीं, लेकिन मान्यता है कि यह रास्ता किसी दूसरे लोक तक पहुंचता है. कुछ बुजुर्ग इसे पाताल लोक का रास्ता कहते हैं, तो कुछ इसे स्वर्ग मार्ग मानते हैं. महाशिवरात्रि पर कई श्रद्धालु इन सीढ़ियों तक जाकर हाथ जोड़ते हैं, माथा टेकते हैं और मन की मुराद मांगते हैं. गांव की एक महिला बताती हैं कि उनकी मनोकामना पूरी होने के बाद से वह हर साल यहां जरूर आती हैं. ऐसे कई किस्से यहां सुनने को मिल जाते हैं, जो आस्था को और गहरा कर देते हैं.
पर्यटन और आस्था का संगम
सोफा मंदिर सिर्फ धार्मिक कारणों से ही खास नहीं है. पास में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व होने से यहां आने वाले पर्यटक जंगल सफारी का भी मजा लेते हैं. बाघ, हिरण, जंगली सुअर और कई तरह के पक्षी इस इलाके को और दिलचस्प बनाते हैं. नदी किनारे बैठकर लोग घंटों समय बिताते हैं. हालांकि, यह इलाका वन क्षेत्र में आता है, इसलिए वन विभाग के नियमों का पालन जरूरी है. सफारी के लिए पहले अनुमति लेनी होती है. स्थानीय प्रशासन भी यहां सुविधाएं बढ़ाने में लगा है, ताकि बाहर से आने वालों को दिक्कत न हो.
महाशिवरात्रि पर विशेष महत्व
महाशिवरात्रि के दिन यहां मेले जैसा दृश्य होता है. भजन, घंटियां, फूल और प्रसाद की खुशबू-पूरा माहौल भक्ति में डूब जाता है. लोग मानते हैं कि इस दिन यहां दर्शन करने से खास फल मिलता है. सुबह से रात तक श्रद्धालुओं का आना जारी रहता है.
सोफा मंदिर आस्था, रहस्य और प्रकृति का ऐसा संगम है, जो इसे बाकी मंदिरों से अलग पहचान देता है. चाहे आप इसे पाताल मार्ग मानें या सिर्फ एक प्राचीन धरोहर, यहां आकर मन जरूर ठहर जाता है.
क्या सच में टल सकती है अकाल मृत्यु? जानिए महामृत्युंजय मंत्र की दिव्य महिमा, अर्थ सहित
14 Feb, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सुबह के सन्नाटे में जब मंदिर की घंटी बजती है और “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे…” की ध्वनि हवा में घुलती है, तो मन अनायास ही ठहर जाता है. आपने भी कभी न कभी यह मंत्र सुना होगा किसी बीमार परिजन के लिए, किसी संकट की घड़ी में, या फिर सावन के महीने में शिवालयों में गूंजते हुए. सवाल वही पुराना है, लेकिन आज भी उतना ही जिज्ञासु क्या सच में महामृत्युंजय मंत्र अकाल मृत्यु को टाल सकता है? या इसकी शक्ति कुछ और है, जो हमें भीतर से बदल देती है? आस्था, परंपरा और अनुभवों के बीच यह मंत्र सदियों से लोगों का सहारा बना हुआ है.
महामृत्युंजय मंत्र की उत्पत्ति और धार्मिक आधार
महामृत्युंजय मंत्र का उल्लेख प्राचीन वैदिक ग्रंथों में मिलता है. इसे भगवान शिव का अत्यंत शक्तिशाली मंत्र माना जाता है. मान्यता है कि ऋषि मार्कंडेय ने इसी मंत्र के प्रभाव से मृत्यु पर विजय पाई थी. यही कारण है कि इसे “मृत्यु को जीतने वाला मंत्र” कहा जाता है.
“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्.
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”
मंत्र का अर्थ क्या कहता है?
इस मंत्र में भगवान शिव से प्रार्थना की जाती है कि जैसे पका हुआ फल बेल से सहज ही अलग हो जाता है, वैसे ही हमें मृत्यु और भय के बंधन से मुक्त करें. यहाँ “अकाल मृत्यु” केवल शारीरिक अंत नहीं, बल्कि जीवन में आने वाले बड़े संकटों, मानसिक तनाव और भय का प्रतीक भी माना जाता है.
क्या वास्तव में टल सकती है अकाल मृत्यु?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और नियमपूर्वक जप करने से व्यक्ति को सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. कई परिवारों में जब कोई गंभीर रूप से बीमार होता है, तो सामूहिक रूप से इस मंत्र का जाप किया जाता है. लोग मानते हैं कि इससे रोगी को मानसिक शक्ति मिलती है और वातावरण में सकारात्मक बदलाव आता है.
हालांकि विज्ञान इसे सीधे तौर पर “मृत्यु टालने” से नहीं जोड़ता, लेकिन मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि मंत्र जाप से तनाव कम होता है, हृदयगति संतुलित होती है और मन में स्थिरता आती है. यही स्थिरता कई बार मुश्किल परिस्थितियों से लड़ने की ताकत बन जाती है.
आस्था बनाम तर्क
यह कहना शायद अतिशयोक्ति होगा कि मंत्र केवल चमत्कार करता है. लेकिन यह भी सच है कि आस्था व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाती है. कई लोगों के अनुभव बताते हैं कि नियमित जाप से उन्हें मानसिक शांति और आत्मविश्वास मिला.
अंततः, महामृत्युंजय मंत्र केवल मृत्यु से मुक्ति की कामना नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और निडर बनाने की साधना है. शायद यही इसकी असली शक्ति है भीतर के भय को हराकर जीवन को नए भरोसे के साथ जीने की प्रेरणा देना.
भगवान खुश, भक्त फिट...ये घास चमत्कारी, गणेश जी की प्रिय, सेहत के लिए वरदान
14 Feb, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गणेश जी की पूजा में दूब घास की खास जगह है. लगभग हर गणेश पूजा में आप देखेंगे कि दूब जरूर चढ़ाई जाती है. इसके पीछे धार्मिक मान्यता जुड़ी है. कहा जाता है कि एक बार गणेश जी को भयंकर गर्मी और पीड़ा होने लगी. तब ऋषियों ने उनके माथे पर ठंडी दूब घास चढ़ाई, जिससे उन्हें तुरंत शांति मिली. तभी से दूब घास को गणेश जी का प्रिय प्रसाद माना जाने लगा. धार्मिक मान्यता है कि अगर सच्चे मन से गणेश जी को दूब चढ़ाई जाए, तो जीवन के विघ्न दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है. इसी वजह से लोग हर बुधवार या खास अवसरों पर गणेश जी को दूब अर्पित करते हैं.
पंडित बलदेव दत्त भट्ट बताते हैं कि दूब घास सिर्फ आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है. इसका रस शरीर को ठंडक देता है, खून को साफ करने में मदद करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक हैं. त्वचा की समस्याओं और पेट से जुड़ी दिक्कतों में भी दूब का इस्तेमाल घरेलू नुस्खों में किया जाता है. सुबह-सुबह नंगे पैर दूब घास पर चलना भी बहुत लाभकारी है. इससे तनाव कम होता है, ब्लड प्रेशर संतुलित रहता है और नींद की समस्या में भी राहत मिलती है.
भक्तों के लिए वरदान
ओस से भीगी दूब पर चलने से मन को शांति मिलती है और दिनभर ताजगी बनी रहती है. पंडित बलदेव दत्त भट्ट बताते हैं कि दूब घास भगवान गणेश को बहुत प्रिय है. पूजा में इसे चढ़ाने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं और भक्तों के जीवन से विघ्न दूर करते हैं. इसे धार्मिक और आयुर्वेदिक दोनों दृष्टि से खास माना गया है. इस तरह छोटी-सी दिखने वाली दूब घास आस्था, सेहत और सौभाग्य तीनों का अनमोल वरदान है
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (14 फ़रवरी 2026)
14 Feb, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- बेचैनी उद्विघ्नता से बचियें, समय पर सोचे कार्य अवश्य ही होंगे।
वृष राशि :- चिन्तायें कम होंगी, सफलता के साधन जुटायें, तथा अचानक लाभ होगा।
मिथुन राशि :- सफलता के साधन जुटायें, व्यावसायिक क्षमता में वृद्धि अवश्य ही होगी।
कर्क राशि :- व्यर्थ धन का व्यय, समय व शक्ति नष्ट होवे, विघटनकारी तत्व परेशान करेंगे।
सिंह राशि :- भोग ऐश्वर्य से स्वास्थ्य नरम हो, विरोधी वर्ग परेशान अवश्य ही करेंगे।
कन्या राशि :- धन समय नष्ट हो, क्लेश अशांति यात्रा से कष्ट अवश्य ही होगा।
तुला राशि :- परिश्रम से सफलता के साधन अवश्य ही जुटाये कार्य बाधा से परेशानी होगी।
वृश्चिक राशि :- चोट आदि से बचिये, क्लेश व अशांति के रोग अवश्य ही बनेंगे, ध्यान रखें।
धनु राशि :- भाग्य का सितारा साथ देगा किन्तु मानसिक क्लेश व अशांति बनेगी।
मकर राशि :- परिश्रम विफल हो मानसिक उद्विघ्नता व्यय तथा यात्रा में कष्ट होगा।
कुंभ राशि :- आकस्मिक घटना से चोट आदि का भय होगा, कार्य का ध्यान अवश्य रखें।
मीन राशि :- अधिकारियों से कष्ट इष्ट मित्र सहायक होंगे, तनाव अवश्य ही बनेगा।
Surya Grahan 2026: कैसे देखें सूर्य ग्रहण? आसमान में नजर आएगा ‘रिंग ऑफ फायर’ का नजारा
13 Feb, 2026 11:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Surya Grahan 2026: साल 2026 में पहली बार फरवरी महीने में सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. इस बार वलयाकार सूर्य ग्रहण पड़ेगा, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है. हालांकि, यह सूर्य ग्रहण भारत, समेत दुनिया के कई देशों में नहीं दिखाई देगा. मुख्य रूप से वलयाकार सूर्य ग्रहण अंटार्कटिका में दिखाई देगा, जहां दो वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र हैं. यह सूर्य ग्रहण मंगलवार, 17 फरवरी की दोपहर 3 बजकर 26 मिनट से शुरू होगा, जो शाम 7 बजकर 57 मिनट तक चलेगा.
2026 के बाद अगला वलयाकार सूर्य ग्रहण फरवरी 2027 में ही दिखने की संभावना है. इस दौरान भी भारत में सूर्य ग्रहण नहीं दिखेगा. 17 फरवरी को दिखने वाले सूर्य ग्रहण को अमेरिकी स्पेस कंपनी NASA लाइवस्ट्रीमिंग के माध्यम से दिखा सकती है. ऐसे में जिन देशों में वलयाकार सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई दे रहा है. वे भी नासा के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर जाकर देख सकते हैं.
कब है 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण?
फरवरी के बाद साल का दूसरा सूर्य ग्रहण अगस्त 2026 में लगेगा, लेकिन यह भी भारत में दिखाई नहीं देगा. यह सूर्य ग्रहण पश्चिम एशिया, दक्षिण-पश्चिम एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका और अटलांटिक रीजन में दिखाई देगा. हिंदू कैंलेंडर के मुताबिक, सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन पड़ता है. अमावस्या के दिन सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में होते हैं.
कैसे देखें सूर्य ग्रहण?
सूर्य ग्रहण को बिना चश्मे या सोलर फिल्टर न देखें. कभी भी सीधे सूर्य की ओर नहीं देखना चाहिए. चाहे धूप का चश्मा ही क्यों न पहना हो या फिर फोटो नेगेटिव जैसी किसी काली सामग्री के माध्यम से देख रहे हों. क्योंकि ये फिल्टर आंखों को अवरक्त विकिरण से भी नहीं बचा पाते, जिसकी वजह से आंखों स्थायी नुकसान की संभावना बढ़ जाती है. इसके अलावा सूर्य ग्रहण को देखने को लिए कभी भी दूरबीन या टेलीस्कोप का उपयोग न करें जब तक कि उनमें कोई विशेष सौर फिल्टर न लगाया गया हो. इसलिए सूर्य ग्रहण को देखने से पहले सोलर फिल्टर या चश्मा जरूर लाएं.
पंचांग : आज विष्णु पूजा से मिलेगी हर कार्य में 'जीत', जानें वो एक गुप्त उपाय जो दिलाएगा शत्रुओं पर विजय
13 Feb, 2026 07:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचांग : आज 13 फरवरी, 2026 शुक्रवार, के दिन फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है. इस तिथि पर भगवान विष्णु का अधिकार है. नई ज्वेलरी खरीदने के साथ भगवान विष्णु की आराधना करने और उपवास करने के लिए यह दिन अच्छा माना जाता है. इस एकादशी को विजया एकादशी भी कहते हैं. आज कुंभ संक्रांति भी हो रही है.
13 फरवरी का पंचांग
विक्रम संवत : 2082
मास : फाल्गुन
पक्ष : कृष्ण पक्ष की एकादशी
दिन : शुक्रवार
तिथि : कृष्ण पक्ष की एकादशी
योग : वज्र
नक्षत्र : मूल
करण : बलव
चंद्र राशि : धनु
सूर्य राशि : कुंभ
सूर्योदय : सुबह 07:02 बजे
सूर्यास्त : शाम 06:09 बजे
चंद्रोदय : तड़के 04.53 बजे (14 फरवरी)
चंद्रास्त : दोपहर 002.10 बजे
राहुकाल : 11:12 से 12:35
यमगंड : 15:22 से 16:45
इस नक्षत्र में शुभ कार्य से बचें
आज के दिन चंद्रमा धनु राशि और मूल नक्षत्र में रहेंगे. यह नक्षत्र धनु राशि में 0 से लेकर 13:20 डिग्री तक फैला है. इसके देवता नैऋृति और शासक ग्रह केतु हैं. यह बिल्कुल भी शुभ नक्षत्र नहीं है. किसी भी तरह के शुभ कार्यों को इस नक्षत्र में टालना चाहिए. हालांकि, खंडहर तोड़ने का काम, अलगाव या तांत्रिक कार्य इस नक्षत्र में किए जा सकते हैं.
आज के दिन का वर्जित समय
आज के दिन 11:12 से 12:35 बजे तक राहुकाल रहेगा. ऐसे में कोई शुभ कार्य करना हो, तो इस अवधि से परहेज करना ही अच्छा रहेगा. इसी तरह यमगंड, गुलिक, दुमुहूर्त और वर्ज्यम् से भी परहेज करना चाहिए.
राशिफल: आज शुक्र का साथ और रोमांस का जादू, जानें क्यों आज का शुक्रवार आपके लिए है साल का सबसे खास दिन
13 Feb, 2026 07:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष- चंद्रमा राशि बदलकर आज 13 फरवरी, 2026 शुक्रवार को धनु राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति नवें भाव में होगी. आज आपको क्रोध पर संयम बरतने की सलाह दी जाती है. क्रोध के कारण आपके काम और संबंधों के बिगड़ने की आशंका है. मानसिक रूप से व्यग्रता और बेचैनी रहेगी. परिजनों के साथ भी मतभेद हो सकता है. आज प्रेम जीवन में सकारात्मकता के लिए जरूरी है कि आप अपने प्रिय के विचारों को भी महत्व दें. स्वास्थ्य भी कुछ नरम-गरम रहेगा. किसी धार्मिक स्थल या मांगलिक कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं.
वृषभ- चंद्रमा राशि बदलकर आज 13 फरवरी, 2026 शुक्रवार को धनु राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति आठवें भाव में होगी. शारीरिक रूप से अस्वस्थ रहने तथा कार्य सफलता प्राप्त करने में विलंब होने से आपको निराशा हो सकती है. आज किसी नए काम का आरंभ ना करें. खान-पान में उचित अनुचित का ध्यान रखें. आज कार्यभार ज्यादा होने के कारण मन में किसी बात की शिथिलता रहेगी. यात्रा में भी विघ्न आ सकता है. योग, ध्यान और आध्यात्मिकता का सहारा लेकर मन की शांति पर ध्यान दें. जीवनसाथी के साथ मतभेद को दूर करने का प्रयास करेंगे.
मिथुन- चंद्रमा राशि बदलकर आज 13 फरवरी, 2026 शुक्रवार को धनु राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति सातवें भाव में होगी. स्फूर्ति और उत्साह से आज आपका दिन शुरू होगा. मित्रों तथा परिजनों के साथ बाहर घूमने जाएंगे तथा पार्टी का आयोजन होगा. मनोरंजन में आपकी रुचि रहेगी. आज आपको अच्छा वस्त्र, अच्छा भोजन और वाहन सुख प्राप्त होने की संभावना है. वैवाहिक जीवन में संबंध अधिक मधुर बनेंगे. आप नए मित्रों की ओर आकर्षित होंगे। प्रेम जीवन में संतुष्टि बनी रहेगी. कार्यस्थल पर अधिकारी आपके कार्य की प्रशंसा कर सकते हैं. स्वास्थ्य लाभ होगा.
कर्क- चंद्रमा राशि बदलकर आज 13 फरवरी, 2026 शुक्रवार को धनु राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति छठे भाव में होगी. आपका दिन अच्छी तरह से गुजरने वाला है. घर में शांति तथा आनंद का वातावरण रहेगा. सुखमय प्रसंग बनेंगे. आप जो भी काम करेंगे, उसमें यश प्राप्त होगा. आरोग्य अच्छा रहेगा. घर में परिजनों के साथ हर्षोल्लास में समय गुजरेगा. नौकरीपेशा लोगों को नौकरी में लाभ होगा. अधीनस्थ सहकर्मियों से लाभ होगा. मित्रों से हुई भेंट से मन प्रसन्न रहेगा. शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी.
सिंह- चंद्रमा राशि बदलकर आज 13 फरवरी, 2026 शुक्रवार को धनु राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति पांचवें भाव में होगी. आपको साहित्य में कुछ नवीन सृजन करने की प्रेरणा मिलेगी. विद्यार्थियों के लिए समय अनुकूल होने के कारण पढ़ाई में सफलता प्राप्त कर सकेंगे. प्रेम में सफलता मिलेगी. प्रिय व्यक्ति से मिलकर आपको खुशी का अनुभव होगा. महिला मित्रों की मदद प्राप्त कर सकेंगे. आपकी तंदुरुस्ती अच्छी रहेगी. आप धर्म और लोकहित के काम करेंगे. जीवनसाथी के साथ आपके संबंध मधुर बने रहेंगे. कोई पुराना विवाद दूर होने से मन को शांति मिलेगी.
कन्या- चंद्रमा राशि बदलकर आज 13 फरवरी, 2026 शुक्रवार को धनु राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति चौथे भाव में होगी. आज आपको थोड़ी प्रतिकूलताओं के लिए तैयार रहना पड़ेगा. स्वास्थ्य नरम रहेगा. मन चिंताओं से घिरा रहेगा. माता से विचारों का मतभेद होगा अथवा उनकी तबीयत खराब हो सकती है. स्वजनों के साथ उग्र वाद-विवाद होने से मनमुटाव रहेगा. स्वाभिमान भंग न हो उसका ख्याल रखें. मकान और वाहन आदि के क्रय-विक्रय के लिए समय अनुकूल नहीं है. विरोधियों से बचने के लिए जरूरी है कि आप अधिकारियों के साथ अपनी बातचीत जारी रखें.
तुला- चंद्रमा राशि बदलकर आज 13 फरवरी, 2026 शुक्रवार को धनु राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति तीसरे भाव में होगी. नए काम शुरू करने के लिए आज का दिन बहुत अच्छा है. आप अधिक भाग्यशाली बनेंगे और आपको आर्थिक लाभ होने की संभावना है. व्यापार बढ़ाने के लिए आपके किए गए काम का उचित परिणाम आपको मिलेगा. किसी सामाजिक समारोह में भाग लेने के लिए बाहर जाना पड़ेगा. आप किसी धार्मिक स्थान पर भी जा सकते हैं. विदेश से अच्छे समाचार प्राप्त कर सकेंगे. सहोदरों के साथ संबंध अच्छे बनेंगे. आपको शारीरिक और मानसिक स्वस्थता की अनुभूति होगी.
वृश्चिक चंद्रमा राशि बदलकर आज 13 फरवरी, 2026 शुक्रवार को धनु राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति दूसरे भाव में होगी. परिवार में संघर्ष या मनमुटाव होने की आशंका है, अतः ध्यान रखें. आपको अपनों के विचारों का भी सम्मान करना चाहिए. आपको नेगेटिविटी से दूर रहना चाहिए. आज कार्यस्थल पर आपका मन नहीं लगेगा. विद्यार्थियों के लिए समय अनुकूल नहीं है. गलत खर्च न हो इसका ध्यान रखें. तन-मन में बैचेनी रहेगी. सर्दी-बुखार से पीड़ित हो सकते हैं. आपको बाहर जाने से बचना चाहिए. हो सके तो आज आप आराम करें और ज्यादातर समय केवल अपने आप के साथ बिताएं.
धनु- चंद्रमा राशि बदलकर आज 13 फरवरी, 2026 शुक्रवार को धनु राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति पहले भाव में होगी. आज किसी धार्मिक या सामाजिक काम से कहीं जाना पड़ सकता है. आप निर्धारित कामों को सहजता से पूरा कर सकेंगे. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के कारण ताजगी और प्रसन्नता रहेगी. परिवार में मांगलिक प्रसंग बनेंगे. स्वजनों के साथ हुई मुलाकात मन को प्रसन्न करेगी. सामाजिक रूप से आपकी मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. विद्यार्थियों के लिए समय बहुत अच्छा है, आज कठिन विषय की पढ़ाई को आसानी से पूरा कर सकेंगे.
मकर- चंद्रमा राशि बदलकर आज 13 फरवरी, 2026 शुक्रवार को धनु राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति बारहवें भाव में होगी. आपका दिन धार्मिक कामों में व्यस्त होगा. किसी सामाजिक काम में आपका धन खर्च होगा. परिजनों और सम्बंधियों के साथ बातचीत में ध्यान रखना पड़ेगा, अन्यथा आपकी वाणी से उनका मन दु:खी हो सकता है. आपको परिश्रम के अनुपात में परिणाम न मिलने से निराशा होगी. स्वास्थ्य का ध्यान रखना पड़ेगा. आज बाहर खाना या जाना आपके लिए आगे नुकसानदायक हो सकता है. आपके वैवाहिक जीवन में मतभेद खड़े हो सकते हैं. इससे आप परेशान रह सकते हैं.
कुंभ- चंद्रमा राशि बदलकर आज 13 फरवरी, 2026 शुक्रवार को धनु राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति ग्यारहवें भाव में होगी. आज किसी नए काम को शुरू कर सकेंगे. व्यवसाय में लाभ के साथ अतिरिक्त आय होगी. दोस्तों या खासकर बचपन के दोस्तों के साथ मुलाकात से खुशी महसूस होगी. समाज में आप ख्याति और प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकेंगे. पत्नी की ओर से आप सुख और संतोष का अनुभव करेंगे. अविवाहित जातकों का रिश्ता पक्का होने के योग हैं. तन-मन से आनंदित रहेंगे. पुराना जोड़ों का दर्द दूर हो सकता है. विद्यार्थियों की पढ़ाई में रुचि बनी रहेगी.
मीन- चंद्रमा राशि बदलकर आज 13 फरवरी, 2026 शुक्रवार को धनु राशि में होगा. आपके लिए चंद्रमा की स्थिति दसवें भाव में होगी. आपके सभी काम सरलता से पूरे होंगे. भाग्य आपके साथ है. व्यवसाय में पदोन्नति या वृद्धि हो सकती है. व्यापार में आपको लाभ होगा. पिता तथा बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त होगा. आर्थिक और पारिवारिक सुख प्राप्त कर सकेंगे. आज आप रोमांटिक बने रहेंगे. प्रेम जीवन में सफलता मिलेगी. सरकारी मामलों में भी लाभ प्राप्त कर सकेंगे. समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी और परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी. स्वास्थ्य की दृष्टि से आज आपका दिन अच्छा है.
किस दिन से लग रहा होलाष्टक? नोट कर लें तारीख, इस दौरान भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां, जानें होली की पौराणिक कथा
13 Feb, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फाल्गुन की हवा में जैसे ही हल्की-सी गुनगुनाहट घुलती है, मन अपने आप रंगों की तरफ भागने लगता है. गली-मोहल्लों में ढोलक की थाप की चर्चा शुरू हो जाती है और बाजारों में गुलाल की पहली खेप सजने लगती है. लेकिन होली के इस रंगीन उत्सव से ठीक पहले एक ऐसा समय आता है, जिसे सनातन परंपरा में बेहद महत्वपूर्ण माना गया है होलाष्टक. अक्सर लोग पूछते हैं, “इस साल होली कब है?” और साथ ही यह भी जानना चाहते हैं कि होलाष्टक कब से लग रहा है और किन कामों से बचना चाहिए. साल 2026 में होलाष्टक की शुरुआत कब होगी, होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या है और धुलैण्डी किस दिन मनाई जाएगी यहां जानिए पूरी जानकारी.
कब से लगेगा होलाष्टक 2026?
पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में होलाष्टक फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि, यानी 24 फरवरी 2026 से प्रारंभ होगा. यह अवधि फाल्गुन पूर्णिमा, यानी 03 मार्च 2026 तक रहेगी. इन्हीं आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है.
भूलकर भी न करें ये 4 काम
इन आठ दिनों के दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग पंचांग देखकर ही तिथि तय करते हैं. शहरों में भले रफ्तार तेज हो गई हो, लेकिन शादी-ब्याह की तारीख चुनते समय होलाष्टक का ध्यान रखा ही जाता है.
होलिका दहन और धुलैण्डी की तारीख
-होलाष्टक प्रारंभ: 24 फरवरी 2026
-होलाष्टक समाप्त: 03 मार्च 2026
-होलिका दहन: 03 मार्च 2026
-होलिका दहन का शुभ मुहूर्त (दिल्ली समयानुसार): सायं 06:08 से 08:35 बजे तक
-धुलैण्डी (रंग वाली होली): 04 मार्च 2026
03 मार्च की शाम को विधि-विधान से होलिका दहन किया जाएगा और अगले दिन 04 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी. यही वह दिन होता है जब “बुरा न मानो होली है” की हंसी हर चेहरे पर दिखती है.
Holashtak 2026 Start DateZoom
होलाष्टक का धार्मिक महत्व
होलाष्टक का संबंध भक्त प्रह्लाद और राजा हिरण्यकश्यप की पौराणिक कथा से जुड़ा है. मान्यता है कि होलिका दहन से पहले के आठ दिनों में हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को कई तरह की यातनाएं दी थीं. लेकिन भगवान विष्णु के प्रति अटूट भक्ति के कारण प्रह्लाद हर संकट से सुरक्षित निकलते रहे.
कथा के अनुसार, अंत में होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी, परंतु वरदान के बावजूद वह स्वयं जल गई और प्रह्लाद सुरक्षित रहे. यही घटना बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक बनी. इन आठ दिनों को उसी संघर्ष और परीक्षा की याद में अशुभ माना जाता है.
कई ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि इस अवधि में ग्रहों की स्थिति भी कुछ ऐसी होती है कि सकारात्मक कार्यों की शुरुआत टालना बेहतर माना जाता है. हालांकि, यह आस्था का विषय है और लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार इसका पालन करते हैं.
होलाष्टक में किन कामों की होती है मनाही?
परंपरागत मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के दौरान:
-विवाह और सगाई जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते
-गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करना टाला जाता है
-मुंडन और नामकरण संस्कार से बचा जाता है
कई परिवारों में नवविवाहित बेटी को इस समय मायके में रहने की सलाह दी जाती है. गांवों में आज भी बुजुर्ग इन नियमों का सख्ती से पालन करवाते हैं. हालांकि, आधुनिक जीवनशैली में कुछ लोग इन मान्यताओं को लचीले रूप में अपनाते हैं.
बदलते समय में होलाष्टक की प्रासंगिकता
शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों पर पुलिस कार्रवाई, CM हाउस के बाहर तनाव
बालाकोट-नोटबंदी पर राहुल का तंज, संसद में हंगामा
