धर्म एवं ज्योतिष
श्राद्ध से तर्पण तक, तिल के बिना क्यों अधूरा माना जाता है हिंदू धर्म का हर शुभ कार्य
17 Feb, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिल को हमारी हिंदू संस्कृति और धर्म में पवित्र स्थान प्राप्त है. हिंदू धर्म में हवन, दान और पितृ कर्म में इसका उपयोग अनिवार्य माना गया है. मकर संक्रांति, अमावस्या और पितृ पक्ष जैसे विशेष अवसरों पर तिल का महत्व और भी बढ़ जाता है. शास्त्रों के अनुसार तिल का दान न केवल पापों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि यह जीवन में शुभता और सुख-समृद्धि का संचार भी करता है.
पंडित राजेंद्र जोशी बताते हैं कि गरुड़ पुराण में तिल की उत्पत्ति का स्पष्ट उल्लेख मिलता है. कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने हिरण्याक्ष का वध करने के लिए वराह अवतार धारण किया, तब वे अत्यंत क्रोधित हुए. उस समय उनके दिव्य शरीर से जो पसीना निकला, वही धरती पर तिल के रूप में प्रकट हुआ. चूंकि इसकी उत्पत्ति स्वयं भगवान के शरीर से हुई है, इसलिए इसे दिव्य और पवित्र माना जाता है. भगवान का यह क्रोध भी सृष्टि के कल्याण और अधर्म के नाश के लिए था.
क्रोध पर नियंत्रण की अनमोल सीख
पंडित राजेंद्र जोशी का कहना है कि भगवान का क्रोध हमेशा धर्म की रक्षा के लिए होता है, लेकिन मनुष्य का क्रोध उसकी बुद्धि को नष्ट कर देता है. इस कथा से हमें यह संदेश मिलता है कि हमें अपने क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए. जिस तरह भगवान के क्रोध से भी ‘तिल’ जैसी कल्याणकारी वस्तु का जन्म हुआ, वैसे ही मनुष्य को अपनी ऊर्जा का उपयोग सृजनात्मक कार्यों में करना चाहिए न कि विनाश में.
पितृ शांति और श्राद्ध कर्म में तिल की महत्त्वता
श्राद्ध और पितृ कर्म में तिल के बिना तर्पण संभव नहीं माना जाता. ऐसी मान्यता है कि तिल और जल मिलाकर अर्पित करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे प्रसन्न होकर वंशजों को आशीर्वाद देते हैं. पूर्वजों की संतुष्टि और घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए हर शुभ कार्य में तिल का उपयोग करने की परंपरा युगों से चली आ रही है.
स्वास्थ्य का खजाना भी है तिल
धार्मिक महत्व के अलावा तिल पोषण का भी भंडार है. इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है. सर्दियों के मौसम में तिल का सेवन शरीर को अंदर से गर्म रखता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. तिल का तेल मालिश के लिए भी श्रेष्ठ माना गया है, जो त्वचा को पोषण देने के साथ-साथ हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है.
स्कंद षष्ठी कब है? सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी पूजा, जानें तारीख, मुहूर्त और महत्व
17 Feb, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
स्कंद षष्ठी का व्रत फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को है. इस दिन व्रत रखकर देवताओं के सेनापति और शिव-गौरी पुत्र भगवान कार्तिकेय की पूजा करते हैं. इस बार स्कंद षष्ठी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग बन रहे हैं. स्कंद षष्ठी की पूजा सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी. आइए जानते हैं कि स्कंद षष्ठी व्रत की तारीख, पूजा मुहूर्त और महत्व क्या है?
स्कंद षष्ठी की तारीख
पंचांग के अनुसार, इस बार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि का प्रारंभ 22 फरवरी को सुबह में 11 बजकर 9 मिनट पर होगा. यह तिथि 23 फरवरी को सुबह 9 बजकर 9 मिनट तक रहेगी. ऐसे में पूजा समय के आधार पर स्कंद षष्ठी का व्रत 22 फरवरी मंगलवार को रखा जाएगा.
फरवरी का स्कंद षष्ठी व्रत 4 शुभ योग में है. व्रत के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह में 06 बजकर 53 मिनट से प्रारंभ होगा और शाम को 05 बजकर 54 मिनट तक रहेगा. उसके बाद रवि योग बनेगा. रवि योग उस दिन शाम में 5 बजकर 54 मिनट से बनेगा और 23 फरवरी को सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगा.
षष्ठी के दिन शुक्ल योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 01 बजकर 09 मिनट तक है. उसके बाद से ब्रह्म योग बनेगा, जो अगले दिन सुबह तक है. व्रत के दिन अश्विनी नक्षत्र सुबह से लेकर शाम 05:54 पी एम तक है, उसके बाद से भरणी नक्षत्र है.
स्कंद षष्ठी मुहूर्त
जो लोग स्कंद षष्ठी का व्रत रखेंगे, वे पूजा सुबह में या दोपहर में कर सकते हैं. इस बार स्कंद षष्ठी व्रत की पूजा दिन में अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त में 11 बजकर 09 ए एम से दोपहर 12 बजकर 35 पी एम तक है.
इस दिन का ब्रह्म मुहूर्त 05:12 ए एम से 06:03 ए एम तक है, वहीं अभिजित मुहूर्त यानि दिन का शुभ समय दोपहर में 12:12 पी एम से लेकर 12:57 पी एम तक है. वहीं निशिता मुहूर्त देर रात 12:09 ए एम से लेकर 12:59 ए एम तक है.
स्कंद षष्ठी का महत्व
स्कंद षष्ठी का व्रत रोगों से मुक्ति के लिए किया जाता है. भगवान कार्तिकेय के आशीर्वाद से उत्तम सेहत प्राप्त होती है. संतान, सुख, समृद्धि आदि की प्राप्ति के लिए भी स्कंद षष्ठी का व्रत रखा जाता है.
23 फरवरी से लगेगा होलाष्टक, 9 दिन तक बंद रहेंगे शादी-विवाह
17 Feb, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शादी विवाह सात जन्मों का बंधन होता है. इसके लिए शुभ लग्न का होना काफी जरूरी है. फरवरी में फिलहाल शादी विवाह के धूम धड़ाके का दौर जारी है. लेकिन, जल्द ही इस पर ब्रेक लगने वाली है. दरसअल, सनातन धर्म में रंगों के त्योहार होली से पहले होलाष्टक पड़ता है. शास्त्रों में होलाष्टक के आठ दिनों को शुभ नहीं माना जाता है. यही वजह है की इन आठ दिनों तक शादी विवाह जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है.
फाल्गुल शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से पूर्णिमा तक के समय को होलाष्टक कहा जाता है. पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष के अष्टमी तिथि की शुरुआत 23 फरवरी से होगी, जो 3 मार्च तक रहेगा. ऐसे में इस बार होलाष्टक 8 नहीं बल्कि 9 दिनों का होगा. इन नौ दिनों के बाद मार्च में फिर शादी विवाह और मांगलिक कार्यो की शुरुआत हो जाएगी.
चंद्रग्रहण का भी असर
पंडित सुभाष पांडेय ने बताया कि आम तौर पर होलिका दहन के साथ होलाष्टक भी समाप्त हो जाता है. लेकिन, इस बार होलिका दहन 2 मार्च को होगा. क्योंकि 3 मार्च को चंद्रग्रहण लग रहा है. इस दिन शाम तक पूर्णिमा तिथि है. ऐसे में होलाष्टक 3 मार्च तक रहेगा.
भूलकर भी न करें ये काम
होलाष्टक के दिनों में नए बिजनेस या नए काम के श्री गणेश से भी बचना चाहिए. इसके साथ ही, इस समय में नए घर की रजिस्ट्री या उसके निर्माण का काम भी नहीं शुरू कराना चाहिए. शास्त्रों में इसकी भी मनाही है. वहीं, इस समय में शादी, मुंडन, पूजा अनुष्ठान, इंगेजमेंट, गृह प्रवेश जैसे शुभ कामों से बचना चाहिए.
प्रहलाद और होलिका से जुड़ी है कहानी
होलाष्टक से जुड़ी कथा भगवान विष्णु के ओम भक्त प्रहलाद और उनकी बुआ होलिका से जुड़ी हुई है. धार्मिक कथाओं के अनुसार, होलाष्टक के इन आठ दिनों में ही प्रहलाद के पिता हिरणकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को कई यातनाएं दी थी और अंतिम दिन हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठने को कहा जिसमें होलिका तो जल गई लेकिन, प्रहलाद सुरक्षित बच गए. इसी कारण इन आठ दिनों को शास्त्रों में अच्छा नहीं माना जाता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (17 फ़रवरी 2026)
17 Feb, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- धन का व्यय संभव, तनाव पूर्ण वातावरण से बचें, रुके कार्य बन जायेंगे।
वृष राशि :- चिन्तायें कम होंगी, सफलता के साधन जुटायें तथा शुभ समाचार मिलेगा।
मिथुन राशि :- चिन्ताओं का समय पर निराकरण करें, शुभ समाचार मिलेगा, समय का ध्यान रखें।
कर्क राशि :- सोचे कार्य परिश्रम से समय पर पूर्ण होंगे, व्यवसायिक गति मंद रहेगी।
सिंह राशि :- सामाजिक मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी, कार्य कुशलता से संतोष होगा, समय का ध्यान अवश्य रखें।
कन्या राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद रहेगा, कार्य कुशलता से संतोष अवश्य होगा।
तुला राशि :- दैनिक व्यवसायिक गति उत्तम तथा व्यवसायिक चिन्तायें कम अवश्य होंगी।
वृश्चिक राशि :- कार्यगति में सुधार होगा, असमंजस का वातावरण रहेगा, धैर्य पूर्वक कार्य करें।
धनु राशि :- स्थिति पर नियंत्रण रखकर कार्य करें, मानसिक उद्विघ्नता रहेगी, धैर्य रखें।
मकर राशि :- मानसिक खिन्नता एवं स्वभाव में अशांति, उद्विघ्नता अवश्य बनेगी।
कुंभ राशि :- योजनायें फलीभूत होंगी, विघटनकारी तत्व परेशान अवश्य ही करेंगे।
मीन राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक रहेगा तथा कार्य कुशलता से संतोष होगा।
पंचांग: सोमवार को बन रहा है विशेष संयोग, शिव साधना से दूर होंगे सभी संकट; जानें पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त
16 Feb, 2026 07:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचांग : आज 16 फरवरी, 2026 सोमवार, के दिन फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि है. इस तिथि पर भगवान रुद्र शासन करते हैं. साधना करने, शिव पूजा और समस्याओं पर काबू पाने की योजना बनाने के लिए ये एक अच्छा दिन है. लेकिन, विवाह या शुभ समारोह इस दिन नहीं करना चाहिए. आज सवार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है.
16 फरवरी का पंचांग
विक्रम संवत : 2082
मास : फाल्गुन
पक्ष : कृष्ण पक्ष चतुर्दशी
दिन : सोमवार
तिथि : कृष्ण पक्ष चतुर्दशी
योग : वरियान
नक्षत्र : श्रवण
करण : शकुनी
चंद्र राशि : मकर
सूर्य राशि : कुंभ राशि
सूर्योदय : सुबह 07:00 बजे
सूर्यास्त : शाम 06:11 बजे
चंद्रोदय : सुबह 6.50 जे (17 फरवरी)
चंद्रास्त : शाम 05.09 बजे
राहुकाल : 08:23 से 09:47
यमगंड : 11:11 से 12:35
अस्थायी प्रकृति के कार्यों के लिए उपयुक्त है नक्षत्र
आज के दिन चंद्रमा मकर राशि और श्रवण नक्षत्र में रहेंगे. यह नक्षत्र मकर राशि में 10 डिग्री से लेकर 23:20 तक फैला हुआ है. इसके देवता हरि हैं और इस नक्षत्र पर चंद्रमा का शासन है. यह गतिशील तारा है, जिसमें यात्रा करने, वाहन चलाने, बागवानी करने, जुलूस में जाने, दोस्तों से मिलने, खरीदारी करने और अस्थायी प्रकृति के किसी भी तरह के कार्य किए जा सकते हैं.
आज के दिन का वर्जित समय
आज के दिन 08:23 से 09:47 बजे तक राहुकाल रहेगा. ऐसे में कोई शुभ कार्य करना हो, तो इस अवधि से परहेज करना ही अच्छा रहेगा. इसी तरह यमगंड, गुलिक, दुमुहूर्त और वर्ज्यम से भी परहेज करना चाहिए.
राशिफल: इन 3 राशियों के लिए खुलेंगे सफलता के द्वार, मेष राशि वालों को मिलेगा बड़ा सरप्राइज
16 Feb, 2026 07:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष- चंद्रमा आज 16 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मकर राशि में है. यह आपकी राशि से दसवें भाव में होगा. आज आपके किसी काम या प्रोजेक्ट में सरकार से लाभ होगा. ऑफिस में महत्वपूर्ण मुद्दों पर अधिकारियों से विचार-विमर्श करेंगे. ऑफिस के कामकाज के लिए बाहर जाना होगा. कार्यभार बढ़ेगा. पारिवारिक मामले में गहरी रुचि लेकर सदस्यों के साथ बातचीत करेंगे. गृह सजावट में भी रुचि रखेंगे. माता के साथ अधिक निकटता का अनुभव करेंगे. जीवनसाथी के साथ भी चल रहा कोई मतभेद दूर होगा. प्रेम जीवन संतुष्टि से भरा रहेगा.
वृषभ- चंद्रमा आज 16 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मकर राशि में है. यह आपकी राशि से नवें भाव में होगा. आज आप विदेश में बसनेवाले मित्रों या स्नेहीजनों के अच्छे समाचार पाकर आनंद अनुभव कर सकेंगे. जो लोग विदेश जाना चाहते हैं, वे तैयारी शुरू कर सकते हैं. प्रवास या धार्मिक स्थान पर जाने का योग है. ऑफिस में काम की अधिकता रहेगी. इस कारण आप थोड़े चिड़चिड़े रह सकते हैं. व्यवसाय के लिए दिन एकदम सामान्य है. स्वास्थ्य उत्तम रहेगा. दोपहर के बाद मानसिक स्थिति में परिवर्तन आएगा और आप सकारात्मक दृष्टिकोण रखेंगे.
मिथुन- चंद्रमा आज 16 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मकर राशि में है. यह आपकी राशि से आठवें भाव में होगा. आपको स्वभाव की उग्रता पर अंकुश रखना चाहिए. गलत विचार रखने से नुकसान हो सकता है. अधिक खर्च होने से आपको आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा. घर में परिजनों के साथ तथा ऑफिस के लोगों के साथ मतभेद होने से आप खिन्नता का अनुभव करेंगे. जो व्यक्ति बीमार है, किसी नई उपचार पद्धति या ऑपरेशन के बारे में आज विचार नहीं करना चाहिए. आप धार्मिक प्रवृत्तियों से शांति प्राप्त कर सकेंगे. व्यवसाय के लिए दिन सामान्य है. किसी बड़े निवेश से आपको बचना चाहिए.
कर्क- चंद्रमा आज 16 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मकर राशि में है. यह आपकी राशि से सातवें भाव में होगा. आज का दिन सामाजिक और व्यावसायिक क्षेत्र में आपके लिए लाभदायक साबित होगा. मौज-शौक के साधन, उत्तम आभूषण और वाहन की खरीदारी करेंगे. मनोरंजन में समय गुजरेगा. किसी नए व्यक्ति के साथ रोमांचित मुलाकात से सुख का अनुभव होगा. दांपत्यजीवन में प्रेम की अनुभूति होगी. प्रेम जीवन में भी आप सकारात्मक बने रहेंगे. व्यवसाय में भागीदारी से लाभ होगा. कार्यस्थल पर आपका काम समय पर पूरा होने से मन में उत्साह रहेगा. कहीं बाहर जाना हो सकता है. स्वास्थ्य की दृष्टि से समय अच्छा है.
सिंह- चंद्रमा आज 16 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मकर राशि में है. यह आपकी राशि से छठे भाव में होगा. आपको मन में उदासीनता और भय का अनुभव होगा. हालांकि घर में सुख- शांति बनी रहेगी. आपकी दिनचर्या अस्त-व्यस्त होगी. परिश्रम करने में आप पीछे नहीं रहेंगे, परंतु उच्च अधिकारियों के साथ अधिक विवाद या चर्चा में नहीं पड़ें. ऑफिस में टारगेट पूरा करने में दिक्कत हो सकती है. व्यापार बढ़ाने की किसी योजना पर अभी काम नहीं करें. आपको धैर्य के साथ दिन गुजारना चाहिए. स्वास्थ्य की दृष्टि से दिन मध्यम फलदायी है. खान-पान में लापरवाही से बचें.
कन्या- चंद्रमा आज 16 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मकर राशि में है. यह आपकी राशि से पांचवें भाव में होगा. आज आपको चिंता और भय परेशान करेगा. पेट सम्बंधी तकलीफ हो सकती है. विद्यार्थी पढ़ाई में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाएंगे. अचानक कोई बड़ा खर्च आने की आशंका बनी रहेगी. कार्यस्थल पर आपके काम करने की गति धीमी होगी. आज आप किसी बौद्धिक चर्चा में भाग ले सकते हैं. प्रिय व्यक्ति के साथ मिलना होगा. आप किसी के प्रति आकर्षण अनुभव करेंगे. शेयर बाजार में निवेश से बचें.
तुला- चंद्रमा आज 16 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मकर राशि में है. यह आपकी राशि से चौथे भाव में होगा. आज आपको सावधान रहने की जरूरत है. लगातार सोचने के कारण आपकी मानसिक स्थिति कमजोर रहेगी. घर में माता और स्त्रीवर्ग की चिंता हो सकती है. आज यात्रा करने से बचना आपके हित में होगा. भोजन और नींद समय पर नहीं मिलने के कारण अस्वस्थता का अनुभव करेंगे. पैतृक संपत्ति के विषय में सावधानीपूर्वक आगे बढ़ना चाहिए. सरकारी काम में लापरवाही ना करें. व्यवसाय में अतिरिक्त मेहनत करना होगी.
वृश्चिक- चंद्रमा आज 16 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मकर राशि में है. यह आपकी राशि से तीसरे भाव में होगा. आज पूरे दिन आप प्रसन्न रहेंगे. किसी नए काम की शुरुआत कर पाएंगे. अधिकारियों के साथ किसी महत्वपूर्ण मामले पर चर्चा होगी. ऑफिस में कोई नया काम भी शुरू हो सकता है. साथियों से सुख एवं आनंद की प्राप्ति होगी. मित्रों और स्वजनों से भेंट हो सकती है. किसी भी काम में आज आपको सफलता मिलेगी. आर्थिक लाभ एवं भाग्यवृद्धि के योग हैं. भाई-बहनों से लाभ होगा. विरोधियों पर विजय मिलेगी. छोटी यात्रा की संभावना है.
धनु- चंद्रमा आज 16 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मकर राशि में है. यह आपकी राशि से दूसरे भाव में होगा. आपका आज का दिन मिश्रित फलदायी होगा. पारिवारिक सदस्यों के साथ मतभेद या मनमुटाव होने की संभावना है. अपने प्रिय के विचारों को महत्व नहीं देने के कारण संबंधों में खिंचाव महूसस कर सकते हैं. आज आपका मनोबल दृढ़ नहीं होने के कारण निर्णय लेने में तकलीफ होगी. नौकरीपेशा लोगों को केवल अपने काम पर ध्यान देना चाहिए. व्यवसाय में आज आपको कोई महत्त्वपूर्ण निर्णय नहीं लेना चाहिए. गलत जगह खर्च करके या अत्यधिक काम के कारण मन में बेचैनी का अनुभव होगा. वित्तीय मोर्चे पर आज का दिन बहुत सामान्य है. स्वास्थ्य की अनदेखी ना करें.
मकर- चंद्रमा आज 16 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मकर राशि में है. यह आपकी राशि से पहले भाव में होगा. आज आपका दिन भक्तिमय रहेगा. पूजा-पाठ में समय व्यतीत करेंगे. आपके सभी काम अच्छी तरह पूरे होंगे. मित्रों और सगे-सम्बंधियों से आपको उपहार मिल सकता है. आपका तन-मन आनंद और उत्साह से भरपूर रहेगा. नौकरी व्यवसाय में आप प्रगति और सफलता प्राप्त कर सकेंगे. आज कार्यस्थल पर आप अपना काम पूरा करके अधिकारियों की प्रशंसा का पात्र बनेंगे. वैवाहिक जीवन सुखी रहेगा. जीवनसाथी के साथ चल रहा पुराना विवाद दूर हो सकेगा. स्वास्थ्य की दृष्टि से समय अच्छा है.
कुंभ- चंद्रमा आज 16 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मकर राशि में है. यह आपकी राशि से बारहवें भाव में होगा. आपको आज किसी का पक्ष नहीं लेना चाहिए, अन्यथा आप पर पक्षपाती होने का आरोप लग सकता है. किसी के साथ पैसे के लेन-देन नहीं करने की सलाह दी जाती है. खर्च बढ़ सकता है. स्वजनों के साथ मनमुटाव हो सकता है. आज किसी का भला करने के चक्कर में स्वयं किसी कठिनाई में पड़ सकते हैं. क्रोध को अंकुश में रखना पड़ेगा अन्यथा अपमानित होने की भी संभावना है. प्रेम जीवन में सकारात्मक व्यवहार आपको अपने प्रिय के करीब लेकर आएगा.
मीन- चंद्रमा आज 16 फरवरी, 2026 सोमवार के दिन मकर राशि में है. यह आपकी राशि से ग्यारहवें भाव में होगा. आज आप किसी समारोह में भाग ले सकेंगे. मित्रों और स्वजनों से मिलकर आपको खुशी होगी. किसी रमणीय स्थान पर जाने की भी संभावना है. कोई अच्छा समाचार मिल सकता है. पत्नी और संतान से भी लाभ हो सकता है. अचानक आर्थिक लाभ हो सकता है. आज का दिन खरीदारी करने के लिए उत्तम है. व्यापारियों के लिए आज का दिन लाभप्रद है. हालांकि निवेश को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं करें.
क्या आप जानते हैं “न-म-शि-वा-य” का असली मतलब? हर श्लोक में छिपा शिव का संदेश जानें अर्थ और पूरा स्तोत्र
16 Feb, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कभी मंदिर में घंटियों की धुन के बीच, कभी घर के शांत कोने में-“नमः शिवाय” का जप सुनते ही मन अपने-आप ठहर सा जाता है. यही पांच अक्षर, जिन्हें शिवभक्त “पंचाक्षर मंत्र” कहते हैं, भारत की आध्यात्मिक परंपरा का बेहद जीवंत हिस्सा हैं. इस मंत्र की महिमा को शब्दों में पिरोता है पंचाक्षर स्तोत्रम, जिसे परंपरा में आदि शंकराचार्य की रचना माना जाता है. इस स्तोत्र में भगवान शिव के स्वरूप, गुण और तत्वज्ञान को पांच श्लोकों में समेटा गया है-हर श्लोक “नमः शिवाय” के एक अक्षर से जुड़ा है. दिलचस्प बात यह है कि यह स्तोत्र सिर्फ पूजा का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन को देखने का एक नजरिया भी देता है-सादगी, करुणा, वैराग्य और आंतरिक शांति की याद दिलाता हुआ.
पंचाक्षर स्तोत्रम क्या है?
पंचाक्षर स्तोत्रम पांच मुख्य श्लोकों का स्तुति-गीत है, जिसमें “न-म-शि-वा-य” इन पांच अक्षरों के जरिए शिव के पांच रूपों और गुणों की वंदना की जाती है. हर श्लोक में शिव के अलग प्रतीक-जैसे भस्म, गंगा, नाग, चंद्र और त्रिनेत्र-का उल्लेख है.
संपूर्ण पंचाक्षर स्तोत्रम (मूल पाठ)
1.
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय.
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय
तस्मै नकाराय नमः शिवाय॥
2.
मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय
नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय.
मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय
तस्मै मकाराय नमः शिवाय॥
3.
शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्दसूर्याय
दक्षाध्वरनाशकाय.
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय
तस्मै शिकाराय नमः शिवाय॥
4.
वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्यमुनीन्द्र
देवार्चितशेखराय.
चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय
तस्मै वकाराय नमः शिवाय॥
5.
यज्ञस्वरूपाय जटाधराय
पिनाकहस्ताय सनातनाय.
दिव्याय देवाय दिगम्बराय
तस्मै यकाराय नमः शिवाय॥
प्रत्येक श्लोक का सरल अर्थ
1. “न” अक्षर का अर्थ
इस श्लोक में शिव के वैराग्य और सादगी के रूप का वर्णन है-नागों का हार, शरीर पर भस्म, वस्त्रहीन (दिगंबर) और शाश्वत अस्तित्व. संदेश साफ है: बाहरी आडंबर नहीं, भीतर की पवित्रता ही असली पहचान है.
2. “म” अक्षर का अर्थ
यहां शिव के सौम्य और करुणामय रूप को दिखाया गया है-गंगा जल और चंदन से अलंकृत, नंदी और गणों के स्वामी, पुष्पों से पूजित. यह श्लोक बताता है कि शिव भक्तों के बीच सहज और सुलभ देव हैं.
3. “शि” अक्षर का अर्थ
इस श्लोक में शिव के रक्षक रूप की स्तुति है-दक्ष यज्ञ का विनाश करने वाले, नीलकंठ, और वृषभ ध्वजधारी. जीवन में अन्याय और अहंकार के विरुद्ध खड़े होने का संकेत मिलता है.
4. “वा” अक्षर का अर्थ
यहां शिव को ऋषियों और देवताओं द्वारा पूजित, सूर्य-चंद्र-अग्नि जैसे तेजस्वी नेत्रों वाले बताया गया है. अर्थ यह कि शिव ज्ञान, प्रकाश और चेतना के परम स्रोत हैं.
5. “य” अक्षर का अर्थ
अंतिम श्लोक शिव को यज्ञस्वरूप, जटाधारी, पिनाकधारी और सनातन देव के रूप में नमन करता है. संदेश: शिव ही सृष्टि की शुरुआत और अंत दोनों हैं-शाश्वत और सर्वव्यापी.
पंचाक्षर मंत्र का आध्यात्मिक संदेश
“नमः शिवाय” को पंचतत्वों-पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश-का प्रतीक माना जाता है. यानी यह मंत्र सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि प्रकृति और चेतना के संतुलन का भाव भी है. जब लोग रोजमर्रा की भागदौड़ में यह मंत्र जपते हैं, तो उन्हें स्थिरता और आत्मविश्वास का अनुभव होता है-मानो भीतर कोई शांत लय चल रही हो.
आज के जीवन में प्रासंगिकता
दिलचस्प है कि हजारों साल पुराना यह स्तोत्र आज भी लोगों के जीवन से जुड़ा है. योग और ध्यान में इसका जप मानसिक तनाव कम करने में सहायक माना जाता है. कई लोग सुबह की शुरुआत इसी मंत्र से करते हैं-एक छोटे से विराम की तरह, जो दिनभर की भागदौड़ से पहले मन को संतुलित कर देता है.
पंचाक्षर स्तोत्रम सिर्फ पांच श्लोकों का भजन नहीं, बल्कि जीवन को देखने का एक सरल दर्शन है-सादगी, संतुलन और आत्मबोध का. हर अक्षर, हर प्रतीक हमें भीतर झांकने का निमंत्रण देता है. शायद यही कारण है कि “नमः शिवाय” सदियों से लोगों के होंठों और दिलों में बसा है.
क्या आप जानते हैं, भगवान शिव के सर्प का क्या नाम है, और उसका आकार क्या है?
16 Feb, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान शिव के गले में जो सर्प शोभा पाता है, उसका नाम है “वासुकि” (Vasuki) है. वासुकि सिर्फ साधारण सर्प नहीं, बल्कि नागों के राजा माने जाते हैं. शिवपुराण और महाभारत में इनका गौरवपूर्ण वर्णन मिलता है.
1. वासुकि का नाम और उसका महत्व
वासुकि को नागराज कहा गया है.
ये कश्यप ऋषि और कद्रू के पुत्र हैं.
शेषनाग इनके बड़े भाई तथा मनसा नागिनी इनकी बहन हैं.
शिव आइकॉनोग्राफी में वासुकि को हमेशा शिव के गले में लिपटा हुआ दिखाया जाता है.
यह स्थिति दर्शाती है कि वासुकि शिव के अत्यंत प्रिय और उनकी शक्ति के प्रतीक हैं.
2. वासुकि का आकार कैसा है?
वासुकि को अधिकांश ग्रंथों में बहु‑फन (बहु‑सिर वाला) बताया गया है.
कई वर्णनों में वे तीन घेरों के रूप में शिव के गले में लिपटे हैं.
यह भूत, वर्तमान और भविष्य यानी तीन कालों का प्रतीक माना जाता है.
99Pandit के अनुसार, वासुकि अत्यंत विशाल नाग हैं, जिनके कई रूप बताए गए, पाताल लोक में नागों के राजा के रूप में
वरुण देव के महल में रहने वाले रूप में
और कैलाश में शिव के साथ रहने वाले रूप में
3. शिव के साथ वासुकि क्यों रहते हैं?
समुद्र मंथन के समय देवताओं और असुरों ने वासुकि को रस्सी की तरह उपयोग किया था.
उनके फन से हलाहल विष निकला, जिसे शिव ने पीकर संसार को विनाश से बचाया.
इस घटना के बाद वासुकि ने शिव के प्रति अपनी भक्ति प्रकट की और शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें अपने गले में स्थान दिया.
जो उनका अभूषण भी है और संरक्षक‑रूप भी.
वासुकि शिव की निडरता, शक्ति, और मृत्यु पर विजय का प्रतीक माने जाते हैं.
4. वासुकि का आध्यात्मिक अर्थ
वासुकि को कुंडलिनी शक्ति का प्रतीक भी कहा जाता है.
वह ऊर्जा जो रीढ़ की हड्डी के मूल से उठकर सहस्रार तक जाती है.
शिव के गले में स्थित वासुकि दिखाते हैं, कि शिव ने कुंडलिनी को पूर्ण रूप से जाग्रत और नियंत्रित कर लिया है.
भगवान शिव के गले में लिपटा सर्प वासुकि नाग है.
बहु‑फन वाला, शक्तिशाली नागराज, जिसके सिर पर नागमणि है और जिसका शरीर शिव के गले में तीन घेर बनाता है।
वह शिव की शक्ति, समय‑नियंत्रण, निर्भयता और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है.
इस्लाम के 5 फर्ज में शामिल रोजा, जानिए किन कामों से रखना है तौबा
16 Feb, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रमजान का महीना शुरू होते ही माहौल बदल जाता है. मस्जिदों में रौनक बढ़ जाती है, घरों में इफ्तार की तैयारियां होने लगती हैं और दिलों में एक अजीब सी सुकूनभरी हलचल महसूस होती है. लेकिन क्या रोजा सिर्फ सुबह से शाम तक भूखे-प्यासे रहने का नाम है? बहुत से लोग इसे केवल उपवास समझ लेते हैं, जबकि हकीकत इससे कहीं गहरी है. रमजान आत्म-संयम, आत्म-चिंतन और खुद को बेहतर इंसान बनाने का महीना है.
इस्लाम के पांच फर्ज़ों में से एक रोजा, दरअसल इंसान को उसके भीतर झांकने का मौका देता है. यह सिर्फ शरीर की भूख पर काबू नहीं, बल्कि नीयत, नजर, लफ्ज़ और व्यवहार की भी परीक्षा है. इसलिए रोजा रखने वाले हर शख्स के लिए यह समझना जरूरी है कि किन बातों से तौबा करना इस पवित्र महीने की असल रूह है.
इस्लाम के पांच स्तंभों में रोजा की अहमियत इस्लाम की बुनियाद पांच स्तंभों पर टिकी है कलिमा, नमाज, रोजा, जकात और हज. इनमें रोजा तीसरा अहम स्तंभ माना गया है. रमजान के महीने में हर बालिग और सेहतमंद मुसलमान पर रोजा रखना फर्ज़ है.
कुरान में रोजे को तक़वा यानी परहेज़गारी हासिल करने का जरिया बताया गया है. जब कोई इंसान दिनभर भूखा-प्यासा रहता है, तो उसे उन लोगों का दर्द समझ में आता है जो रोज भूख से जूझते हैं. यही वजह है कि रमजान में जकात और सदका देने पर भी खास जोर दिया जाता है. आज के दौर में, जब जिंदगी भागदौड़ से भरी है, रोजा इंसान को रुककर सोचने का मौका देता है. यह खुद से पूछने का वक्त है क्या हम सिर्फ पेट के लिए जी रहे हैं या रूह के लिए भी कुछ कर रहे हैं?
रोजा का असली मतलब: सिर्फ भूख नहीं, बरताव भी अक्सर बच्चों को समझाया जाता है कि रोजा मतलब दिनभर कुछ न खाना-पीना. लेकिन बड़ों के लिए रोजा इससे कहीं आगे की चीज है.
आंख, कान और जुबान का भी रोजा रोजा केवल पेट का नहीं, बल्कि आंख, कान और जुबान का भी होता है. यानी बुरी चीजें न देखना, गलत बातें न सुनना और किसी के बारे में गलत न बोलना. जरा सोचिए, अगर कोई शख्स दिनभर भूखा रहे लेकिन शाम को किसी की बुराई करे, झूठ बोले या किसी का दिल दुखाए तो क्या रोजा मुकम्मल हुआ? इस्लामी शिक्षाओं के मुताबिक, ऐसे रोजे की रूह कमज़ोर पड़ जाती है.
झूठ, ग़ीबत और बदजुबानी से दूरी रमजान में झूठ बोलना, पीठ पीछे बुराई करना (ग़ीबत), झूठी गवाही देना या झूठी कसम खाना सख्त नापसंद किया गया है. रोजेदार से उम्मीद की जाती है कि वह अपने लफ्ज़ों पर खास ध्यान दे. आज सोशल मीडिया के दौर में यह और भी जरूरी हो गया है. फॉरवर्ड करने से पहले सोचें क्या यह खबर सही है? क्या इससे किसी की बदनामी तो नहीं होगी? डिजिटल दुनिया में भी जुबान की जिम्मेदारी कम नहीं होती.
बुरी नीयत और शारीरिक संबंध से परहेज रोजा के दौरान सूर्योदय से सूर्यास्त तक शारीरिक संबंध बनाना मना है. साथ ही, बुरी नीयत या गलत सोच से भी बचने की हिदायत दी गई है. रोजा आत्म-संयम का अभ्यास है जिसमें इंसान अपने जज्बातों और इच्छाओं पर काबू करना सीखता है. यह एक तरह से खुद के साथ किया गया वादा है कि इस महीने हम अपने व्यवहार को बेहतर बनाएंगे.
रमजान: बदलाव की शुरुआत हर साल रमजान आता है, लेकिन हर बार वह एक नया मौका लेकर आता है. कई लोग इसी महीने में धूम्रपान छोड़ने की कोशिश करते हैं, कुछ लोग गुस्से पर काबू पाना सीखते हैं, तो कुछ नमाज की पाबंदी शुरू करते हैं. असल मायनों में रोजा एक ट्रेनिंग है जो हमें सिखाती है कि अगर हम 30 दिन खुद को काबू में रख सकते हैं, तो आगे की जिंदगी में भी बेहतर इंसान बन सकते हैं.
तनाव, एंग्जायटी और गुस्से का इलाज है ‘ओम नमः शिवाय’? क्या सच में बदल रही है जिंदगी
16 Feb, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जब जिंदगी उलझनों में फंस जाती है, मन बार-बार हार मानने लगता है और हर दिशा बंद सी दिखती है, तब इंसान अक्सर किसी सहारे की तलाश करता है. कोई दोस्त, कोई गुरु, कोई विश्वास. ऐसे ही समय में कई लोग एक नाम का जिक्र करते हैं-“ओम नमः शिवाय”. यह सिर्फ धार्मिक आस्था की बात नहीं रह गई है, बल्कि अब लोग इसे मानसिक संतुलन, भावनात्मक मजबूती और जीवन की दिशा से जोड़कर देख रहे हैं. गांवों से लेकर शहरों तक, युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, शिव नाम के जाप को लेकर नई चर्चा है. क्या सच में एक मंत्र इंसान के मन और व्यवहार में बदलाव ला सकता है? लोगों के अनुभव और विशेषज्ञों की राय इस सवाल को दिलचस्प बना देते हैं. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
शिव नाम का बढ़ता चलन: आस्था से आगे का अनुभव
हाल के समय में सोशल मीडिया और आध्यात्मिक समुदायों में शिव मंत्र जाप की चर्चा तेजी से बढ़ी है. कई लोग बताते हैं कि रोज कुछ मिनट “ओम नमः शिवाय” जपने से उन्हें बेचैनी और गुस्से में कमी महसूस हुई. खास बात यह है कि इसे सिर्फ पूजा का हिस्सा नहीं, बल्कि एक मानसिक अभ्यास की तरह अपनाया जा रहा है. भोपाल की 28 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल नीतिका कहती हैं, “वर्क प्रेशर में मैं बहुत चिड़चिड़ी हो गई थी. किसी ने कहा सुबह 5 मिनट शिव नाम लो. पहले मजाक लगा, पर एक महीने में फर्क महसूस हुआ-मैं जल्दी शांत हो जाती हूं.” ऐसे अनुभवों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि मंत्र जाप का मन पर असर कितना वास्तविक है.
मंत्र और मन: विज्ञान क्या कहता है
ध्वनि और ब्रेन वेव्स का रिश्ता
मनोविज्ञान और न्यूरोसाइंस से जुड़े कई अध्ययन बताते हैं कि किसी ध्वनि या शब्द की लगातार पुनरावृत्ति मस्तिष्क की तरंगों को धीमा कर सकती है. इससे मन का तनाव स्तर कम होता है और ध्यान की स्थिति बनती है. विशेषज्ञों का कहना है कि “ओम” उच्चारण के दौरान लंबी श्वास-प्रश्वास प्रक्रिया अपने-आप सक्रिय होती है, जिससे नर्वस सिस्टम शांत होता है. यही कारण है कि कई ध्यान पद्धतियों में मंत्र जप शामिल है. इंदौर के मनोचिकित्सक डॉ. अमित जैन बताते हैं, “मंत्र जप को आप धार्मिक मानें या न मानें, यह एक प्रकार का फोकस्ड ब्रीदिंग और माइंडफुल रिपीटेशन है. इससे एंग्जायटी कम होने के प्रमाण मिले हैं.”
बदलता व्यवहार: लोग क्या महसूस कर रहे
शिव नाम जप से जुड़े लोगों के अनुभवों में कुछ समान बातें बार-बार सामने आती हैं-
-गुस्से पर नियंत्रण
-नकारात्मक सोच में कमी
-निर्णय लेने में स्पष्टता
-डर और असुरक्षा कम होना
खंडवा के व्यापारी राजेश तिवारी बताते हैं, “लॉकडाउन में कारोबार ठप हो गया था. हर सुबह 108 बार ओम नमः शिवाय जपने लगा. धीरे-धीरे मन स्थिर हुआ और नए काम की हिम्मत आई.” हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी भी देते हैं कि मंत्र को चमत्कारिक समाधान मानना ठीक नहीं. इसे मानसिक अनुशासन या आध्यात्मिक अभ्यास की तरह देखना ज्यादा व्यावहारिक है.
शिव की अवधारणा: सरलता और वैराग्य का प्रतीक
धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं में शिव को ऐसे देव के रूप में देखा गया है जो भौतिक वैभव से दूर रहते हैं. कैलाश, ध्यान, साधना-इन प्रतीकों को लोग जीवन की सादगी और संतुलन से जोड़ते हैं.
आध्यात्मिक लेखक मानते हैं कि शिव नाम का आकर्षण इसी वजह से है-यह किसी वैभव या इच्छा से नहीं, बल्कि भीतर की शांति से जुड़ा है. उज्जैन के आध्यात्मिक शोधकर्ता पंडित संजय व्यास कहते हैं, “शिव नाम लेने का भाव ही व्यक्ति को भीतर झुकाता है. यह अहंकार कम करने का मनोवैज्ञानिक असर भी डालता है.”
क्या सच में बदलती है जिंदगी
इस प्रश्न का जवाब सीधा “हां” या “नहीं” में नहीं दिया जा सकता, लेकिन यह साफ है कि नियमित मंत्र जप, ध्यान या प्रार्थना जैसी आदतें व्यक्ति के व्यवहार और भावनात्मक प्रतिक्रिया को प्रभावित करती हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर कोई व्यक्ति रोज कुछ समय शांत बैठकर एक शब्द या मंत्र पर ध्यान केंद्रित करता है, तो उसका मन व्यवस्थित होने लगता है. यह बदलाव धीरे-धीरे निर्णय, संबंध और जीवन दृष्टि पर असर डाल सकता है. यही वजह है कि आज कई लोग “ओम नमः शिवाय” को सिर्फ धार्मिक जप नहीं, बल्कि मानसिक स्थिरता की दिनचर्या की तरह अपना रहे हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (16 फ़रवरी 2026)
16 Feb, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- मान-प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे किन्तु व्यवसाय गति उत्तम अवश्य होगी।
वृष राशि :- धन प्राप्ति के योग बनेंगे, नवीन मैत्री मंत्रणा अवश्य ही प्राप्त होगी।
मिथुन राशि :- इष्ट मित्र सहायक रहेंगे, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि अवश्य होगी ध्यान दें।
कर्क राशि :- बड़े-बड़े लोगों से मेल-मिलाप होगा तथा सुख-समृद्धि के योग अवश्य बनेंगे।
सिंह राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास होगा, भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी, रुके कार्य बन जायेंगे।
कन्या राशि :- प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे, संघर्ष में अधिकारी भी साथ अवश्य ही देंगे ध्यान दें।
तुला राशि :- कुटुम्ब और धन की चिन्ता बनेगी, सोचे कार्य परिश्रम से पूर्ण होंगे, समय का ध्यान रखें।
वृश्चिक राशि :- प्रत्येक कार्य में बाधा क्लेश युक्त रखे, स्थिति सामर्थ्य योग्य अवश्य बनेगी।
धनु राशि :- भावनायें विक्षुब्ध होंगी, दैनिक कार्यगति मंद रहेगी, परिश्रम से कार्य बन जायेंगे।
मकर राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति, धन का व्यय होगा, मानसिक खिन्नता अवश्य ही बनेगी।
कुंभ राशि :- कार्य कुशलता से संतोष, व्यवसायिक समृद्धि के साधन जुटायें, स्थिति पर नियंत्रण रखें।
मीन राशि :- कुटुम्ब के कार्यों में उत्तम समय बीतेगा तथा हर्ष-उल्लास अवश्य ही बनेगा।
पंचांग : शिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग: इन 3 राशियों की खुलने वाली है लॉटरी, जानें अपनी राशि का हाल
15 Feb, 2026 07:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचांग : आज 15 फरवरी, 2026 रविवार, के दिन फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि है. इस तिथि पर नंदी का अधिकार है, जो भगवान शिव के वाहन हैं. पुराने पापों के प्रायश्चित के साथ योग करने और ध्यान करने के लिए ये सबसे अच्छा दिन है. आज महाशिवरात्रि हैं. आज सर्वार्थ योग भी बन रहा है.
15 फरवरी का पंचांग
विक्रम संवत : 2082
मास : फाल्गुन
पक्ष : कृष्ण पक्ष त्रयोदशी
दिन : रविवार
तिथि : कृष्ण पक्ष त्रयोदशी
योग : व्यतिपात
नक्षत्र : उत्तराषाढा
करण : वणिज
चंद्र राशि : मकर
सूर्य राशि : कुंभ
सूर्योदय : 07:00 बजे
सूर्यास्त : 06:10 बजे
चंद्रोदय :सुबह 6.15 बजे (16 फरवरी)
चंद्रास्त : शाम 04.08 बजे
राहुकाल : 16:46 से 18:10
यमगंड : 12:35 से 13:59
स्थायी सफलता वाले कार्य के लिए उपयुक्त है नक्षत्र
आज के दिन चंद्रमा मकर राशि और उत्तराषाढा नक्षत्र में रहेंगे. यह नक्षत्र धनु राशि में 26:40 से लेकर मकर राशि में 10:00 डिग्री तक फैला है. इसके शासक सूर्य हैं. यह स्थिर प्रकृति का नक्षत्र है, इसके देवता विश्वदेव हैं. कुआं खोदने, नींव या शहर बनाने, कर्मकांड, राज्याभिषेक, भूमि खरीदना, मेधावी कर्म, बीज बोना, देवताओं की पूजा, मंदिर का निर्माण, विवाह या स्थायी सफलता चाहने वाले कोई भी काम इस नक्षत्र में किए जा सकते हैं.
आज के दिन का वर्जित समय
आज के दिन 16:46 से 18:10 बजे तक राहुकाल रहेगा. ऐसे में कोई शुभ कार्य करना हो, तो इस अवधि से परहेज करना ही अच्छा रहेगा. इसी तरह यमगंड, गुलिक, दुमुहूर्त और वर्ज्यम से भी परहेज करना चाहिए.
शिवरात्रि पर भगवान शिव को बेलपत्र सीधा चढाएं या उल्टा, किससे होगी शुभ फल की प्राप्ति?
15 Feb, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान शिव पर बेलपत्र चढ़ाने का विधान बहुत प्राचीन है. माना जाता है कि यदि इसे सही विधि से चढ़ाया जाए तो शिवजी अत्यंत प्रसन्न होते हैं और व्रत‑पूजा का शुभ फल मिलता है. बेलपत्र सीधा चढ़ाना ही सही माना जाता है.
परंपरा के अनुसार बेलपत्र को हमेशा सीधा (ऊपर की ओर नसें दिखाई दें) रखकर चढ़ाया जाता है. इसके कुछ धार्मिक कारण हैं.
1. ऊपरी सतह ही “पूजा योग्य” मानी जाती है
बेलपत्र की तीन पत्तियां त्रिदेव/त्रिगुण/त्रिशक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं. ऊपरी सतह पर इन्हीं का पवित्र स्वरूप दर्शाया गया है.
2. उल्टा बेलपत्र चढ़ाना अशुभ माना जाता है
नीचे की ओर वाली सतह को “तामसिक” माना जाता है.
इसी कारण इसे उल्टा चढ़ाना उचित नहीं माना जाता, वरना पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता.
3. बेलपत्र चढ़ाते समय डंठल शिवलिंग की ओर न रखें
यह भी एक महत्वपूर्ण नियम है.
डंठल को नीचे की ओर रखें, ताकि पत्तियों का पवित्र भाग शिवलिंग पर ऊपर की ओर रहे.
बेलपत्र चढ़ाने के नियम
1. तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाएं
यह त्रिदेव–त्रिगुण–त्रिनेत्र का प्रतीक है.
2. पत्तों में किसी प्रकार का छेद न हो
छेद या कटा हुआ बेलपत्र चढ़ाना अशुभ माना जाता है.
3. स्नान के बाद स्वच्छ मन से चढ़ाएं
बेलपत्र को घर में सम्मानपूर्वक रखा जाए और पूजा से पहले धोकर चढ़ाया जाए.
4. बेलपत्र पर नाम लिखकर चढ़ाने की परंपरा
कई लोग बेलपत्र पर “ॐ”, “शिव”, “त्रिशूल” आदि लिखते हैं.
यह शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है.
बेलपत्र चढ़ाने से मिलने वाला फल
1. पापों का नाश
पुराणों में कहा गया है कि बेलपत्र चढ़ाने से सात जन्मों के पापों का क्षय होता है.
2. रोग‑दोषों से मुक्ति
शिव को ‘वैद्य’ भी कहा जाता है. बेलपत्र चढ़ाने से ग्रहदोष, नकारात्मकता और मानसिक तनाव दूर होते हैं.
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3. मनोकामना पूरी होती है
शिवरात्रि पर बेलपत्र चढ़ाने से धन, संतान, स्वास्थ्य और विवाह संबंधी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
4. भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं
शिव को प्रसन्न करना अत्यंत सरल माना जाता है. बेलपत्र उनका सबसे प्रिय पत्र है.
शिवरात्रि पर बेलपत्र हमेशा “सीधा” और “डंठल नीचे की ओर” रखकर चढ़ाएं.
उल्टा बेलपत्र न चढ़ाएं.
रामायण काल का रहस्यमयी मंदिर! कपिल मुनि के सामने प्रकट हुए थे महादेव, विद्यापति-जनक से जुड़ा अद्भुत इतिहास
15 Feb, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मिथिला की पावन धरती केवल कला के लिए ही नहीं, बल्कि अपने कतरे-कतरे में दबे आध्यात्मिक रहस्यों के लिए भी जानी जाती है. मधुबनी जिले के रहिका प्रखंड में स्थित कपिलेश्वर स्थान एक ऐसा ही दिव्य धाम है. जिसका इतिहास सतयुग और त्रेतायुग की कड़ियों को आपस में जोड़ता है. यहां स्थापित शिवलिंग को किसी मनुष्य ने स्थापित नहीं किया, बल्कि यह स्वयं धरती से अंकुरित हुए हैं.
कपिल मुनि और प्रकट शिवलिंग का रहस्य
पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर का नाम महान संत कपिल मुनि के नाम पर पड़ा. जब कपिल मुनि राजा जनक के निमंत्रण पर माता सीता और प्रभु श्रीराम के विवाह में शामिल होने जनकपुर जा रहे थे, तब उन्होंने रहिका के इसी घने जंगल में रात्रि विश्राम किया था. मध्यरात्रि में जब मुनि की आंख खुली, तो उन्होंने एक विस्मयकारी दृश्य देखा. एक काली गाय अपने थन से दूध की धार एक चमकते हुए काले पत्थर पर गिरा रही थी. जैसे ही मुनि पास पहुंचे, गाय ओझल हो गई. खुदाई करने पर वहां से एक तेजस्वी शिवलिंग प्रकट हुआ. कपिल मुनि ने वहां शिव की आराधना की. जिसके बाद इस स्थान का नाम कपिलेश्वर प्रसिद्ध हुआ.
राजा जनक के चतुष्कोण का रक्षक
मंदिर के पुजारी भगवान झा पांडा बताते हैं कि इस मंदिर के साथ कई पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हैं. माना जाता है कि राजा जनक के नेपाल स्थित जानकी भवन के चारों कोनों पर शिव मंदिर स्थित हैं. जिनमें से एक कोण पर यह कपिलेश्वर स्थान विराजमान है. कहा जाता है कि माता सीता की विदाई के बाद अयोध्या लौटते समय प्रभु श्रीराम ने भी यहां रात्रि विश्राम किया था, जिसे आज भी एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है.
महाकवि विद्यापति का जन्म और बाबा का आशीर्वाद
इस मंदिर का एक बड़ा इतिहास मैथिली कोकिल विद्यापति से भी जुड़ा है. मान्यता है कि विद्यापति के पिता गणपति ठाकुर को कोई संतान नहीं थी. वे बाबा बैद्यनाथ की शरण में गए, जहां भगवान शिव ने उन्हें स्वप्न में दर्शन देकर कहा कि वे अपने घर के समीप स्थित कपिलेश्वर बाबा की सेवा करें. बाबा के आशीर्वाद से ही महापंडित विद्यापति का जन्म हुआ. वही विद्यापति, जिनकी भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं महादेव उगना बनकर उनके घर नौकरी करने आए थे.
महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को आखिर क्यों चढ़ाएं जाती है ठंडाई?
15 Feb, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाशिवरात्रि पर शिव मंदिरों में उमड़ने वाली भीड़ और "हर हर महादेव" के नारों के बीच, एक चीज़ जो सबसे अलग दिखती है, वह है ठंडाई का भोग. भगवान शिव को ठंडाई चढ़ाने और भक्तों द्वारा इसे पीने के पीछे गहरे धार्मिक, वैज्ञानिक और पौराणिक कारण हैं.
महाशिवरात्रि भगवान शिव की पूजा, व्रत और प्रार्थना करने का त्योहार है. इस दिन, ठंडाई, जो दूध से बनी एक पारंपरिक ड्रिंक है, घर पर बनाई जाती है और उत्तर भारत के मंदिरों में प्रसाद के तौर पर चढ़ाई जाती है। इस ड्रिंक का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है. ठंडाई मेवों, बीजों, हल्के मसालों और दूध से बनाई जाती है. यह व्रत के दौरान शरीर को पूरी तरह से बैलेंस करती है और पवित्रता और शांति का प्रतीक है. ये ठंडाई भगवान शिव से गहराई से जुड़े हैं.
महाशिवरात्रि फरवरी में मनाई जाती है, जब सर्दी धीरे-धीरे कम होती है और शरीर मौसमी बदलावों के हिसाब से ढलने लगता है. बादाम, सौंफ, खरबूजे के बीज और दूध जैसी ठंडी चीज़ों से बनी ठंडाई, व्रत के दौरान शरीर में जमा गर्मी को ठंडा करने में मदद करती है.
पारंपरिक रूप से, ठंडाई उन भक्तों को एनर्जी देने के लिए बनाई जाती थी जो रात भर पूजा में डूबे रहते थे और शरीर को हाइड्रेटेड रखते थे. इसके आराम देने वाले गुण इस त्योहार की शांत और ध्यान वाली भावना को और बढ़ाते हैं, जिससे यह व्रत और आराम दोनों के लिए एक आदर्श ड्रिंक बन जाता है.
पौराणिक कथाओं के अनुसार, शिव कैलाश पर्वत, अर्धचंद्र और गंगा नदी जैसी ठंडी चीज़ों से जुड़े हैं. ठंडाई, ठंडी या रूम टेम्परेचर पर परोसी जाए, तो इसी ठंडक को दिखाती है. महाशिवरात्रि के दौरान इसे पीना भगवान के प्रति सम्मान दिखाने का एक तरीका माना जाता है, खासकर पूजा-पाठ और पूरी रात जागरण के दौरान.
भगवान शिव को अक्सर शांति, वैराग्य और अंदरूनी संतुलन से जोड़ा जाता है—ये ऐसे गुण हैं जो ठंडाई में पूरी तरह दिखते हैं.
चाय या दूसरी मीठी ड्रिंक्स के उलट, ठंडाई भारीपन महसूस कराए बिना पोषण देती है. यह एक रिफ्रेशिंग और पौष्टिक ड्रिंक है जो एनर्जी और हाइड्रेशन में मदद करती है, जिससे यह त्योहारों या व्रत के मौकों के लिए एकदम सही है.
महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को ठंडाई (भांग का मिश्रण) चढ़ाने का मुख्य कारण ज़हर पीने के बाद उन्हें ठंडक देना है. ऐसा माना जाता है कि समुद्र मंथन से निकले ज़हर को पीने से महादेव के शरीर में बहुत जलन हुई थी, और उन्हें शांत करने के लिए देवताओं ने ठंडा पानी (जैसे पानी, बेल के पत्ते, दूध) और ठंडाई चढ़ाई थी. Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह एक्सपर्ट्स से बातचीत पर आधारित है. यह सामान्य जानकारी है, पर्सनल सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए News-18 जिम्मेदार नहीं होगा.
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