धर्म एवं ज्योतिष
नंदी के बिना शिवलिंग को माना जाता है अधूरा
20 Feb, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान शिव के किसी भी मंदिर में शिवलिंग के आसपास एक नंदी बैल जरूर होता है क्योंा नंदी के बिना शिवलिंग को अधूरा माना जाता है। इस बारे में पुराणों की एक कथा में कहा गया है शिलाद नाम के ऋषि थे जिन्होंाने लम्बेा समय तक शिव की तपस्या की थी। जिसके बाद भगवान शिव ने उनकी तपस्याद से खुश होकर शिलाद को नंदी के रूप में पुत्र दिया था।
शिलाद ऋषि एक आश्रम में रहते थे। उनका पुत्र भी उन्हींक के आश्रम में ज्ञान प्राप्ती करता था। एक समय की बात है शिलाद ऋषि के आश्रम में मित्र और वरुण नामक दो संत आए थे। जिनकी सेवा का जिम्माि शिलाद ऋषि ने अपने पुत्र नंदी को सौंपा। नंदी ने पूरी श्रद्धा से दोनों संतों की सेवा की। संत जब आश्रम से जाने लगे तो उन्होंसने शिलाद ऋषि को दीर्घायु होने का आर्शिवाद दिया पर नंदी को नहीं।
इस बात से शिलाद ऋषि परेशान हो गए। अपनी परेशानी को उन्हों्ने संतों के आगे रखने की सोची और संतों से बात का कारण पूछा। तब संत पहले तो सोच में पड़ गए। पर थोड़ी देर बाद उन्हों।ने कहा, नंदी अल्पायु है। यह सुनकर मानों शिलाद ऋषि के पैरों तले जमीन खिसक गई। शिलाद ऋषि काफी परेशान रहने लगे।
एक दिन पिता की चिंता को देखते हुए नंदी ने उनसे पूछा, ‘क्या बात है, आप इतना परेशान क्योंो हैं पिताजी।’ शिलाद ऋषि ने कहा संतों ने कहा है कि तुम अल्पायु हो। इसीलिए मेरा मन बहुत चिंतित है। नंदी ने जब पिता की परेशानी का कारण सुना तो वह बहुत जोर से हंसने लगा और बोला, ‘भगवान शिव ने मुझे आपको दिया है। ऐसे में मेरी रक्षा करना भी उनकी ही जिम्मेयदारी है, इसलिए आप परेशान न हों।’
नंदी पिता को शांत करके भगवान शिव की तपस्या करने लगे। दिनरात तप करने के बाद नंदी को भगवान शिव ने दर्शन दिए। शिवजी ने कहा, ‘क्याक इच्छास है तुम्हा।री वत्स’. नंदी ने कहा, मैं ताउम्र सिर्फ आपके सानिध्य में ही रहना चाहता हूं।नंदी से खुश होकर शिवजी ने नंदी को गले लगा लिया। शिवजी ने नंदी को बैल का चेहरा दिया और उन्हें अपने वाहन, अपना मित्र, अपने गणों में सबसे उत्तनम रूप में स्वीकार कर लिया।इसके बाद ही शिवजी के मंदिर के बाद से नंदी के बैल रूप को स्थाकपित किया जाने लगा
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
20 Feb, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- स्वभाव में खिन्नता, मानसिक बेचैनी, शारीरिक असमर्थता बनी रहेगी।
वृष राशि :- बड़े-बड़े लोगों से मेल-मिलाप होगा, स्त्री वर्ग से हर्ष रहेगा, समय का ध्यान रखें।
मिथुन राशि :- कुटुम्ब की समस्यायें सुलझें, बिगड़े कार्य बनेंगे तथा हर्ष अवश्य ही होगा।
कर्क राशि :- कार्य कुशलता से हर्ष, सामाजिक कार्य में वृद्धि, प्रभुत्व वृद्धि होगी।
सिंह राशि :- आशानुकूल सफलता मिलेगी, मानसिक विभ्रम से अवश्य बचें।
कन्या राशि :- मानसिक शिथिलता से बेचैनी, अर्थ-व्यवस्था अनुकूल होगी, व्यर्थ व्यय होगा।
तुला राशि :- कार्य कुशलता से संतोष होगा, आर्थिक लाभ होगा, कार्य योजना फलीभूत होगी।
वृश्चिक राशि :- आकस्मिक विभ्रम व बेचैनी, चिन्तायें परेशान करेंगी, धैर्य से काम लें।
धनु राशि :- आशानुकूल सफलता मिलेगी, मानसिक विभ्रम से परेशानी, लाभ होगा।
मकर राशि :- योजनायें फलीभूत होंगी, शुभ समाचार हर्षयुक्त रखेगा, विशेष कार्य बनेंगे।
कुंभ राशि :- मानसिक व्यग्रता, विघटनकारी तत्व परेशान करेंगे, रुके कार्य अवश्य ही बनेंगे।
मीन राशि :- मनोवृत्ति संवेदनशील रहेगी, आकस्मिक धन लाभ से संतोष होगा।
हाथों की रेखा से जानें किस्मत में संतान सुख है या नहीं? घर में कब गूंजेगी किलकारी?
19 Feb, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शादी के बाद हर जोड़ा अपनी खुशहाल दांपत्य जीवन की कामना करता है और उनमें से कई दंपत्ति संतान सुख की चाहत रखते हैं. यह सुख पाना हर दंपत्ति का सपना होता है, लेकिन संतान कब होगी और वह कैसी होगी, इस बारे में अनगिनत सवाल होते हैं. क्या आप भी इसी चिंता में हैं? तो, चिंता की कोई बात नहीं. आपकी हथेली में छिपी हुई कुछ रेखाएं इस सवाल का समाधान दे सकती हैं.
हस्तरेखा में संतान सुख का संकेत
हस्तरेखा शास्त्र एक प्राचीन और गहरा विज्ञान है जो मनुष्य के जीवन की कई घटनाओं का पूर्वानुमान करने में सक्षम है. खासकर जब बात संतान की होती है, तो हथेली की विशेष रेखाओं से इसके संकेत मिल सकते हैं. हथेली में कुछ महत्वपूर्ण स्थान होते हैं, जैसे बुध पर्वत और शुक्र पर्वत, जो इस विषय से जुड़े होते हैं.
बुध पर्वत और संतान रेखा
हथेली में सबसे छोटी उंगली के नीचे जो स्थान होता है, उसे बुध पर्वत कहा जाता है. इस पर्वत के पास कुछ खड़ी रेखाएं होती हैं जो संतान सुख का संकेत देती हैं. ये रेखाएं संतान के जन्म और उनके जीवन से जुड़े कुछ प्रमुख पहलुओं का संकेत करती हैं. जो लोग जिनकी हथेली में यह रेखाएं साफ दिखती हैं, उन्हें संतान सुख प्राप्त होने की संभावना अधिक होती है.
शुक्र पर्वत और संतान रेखा
इसके अलावा, अंगूठे के नीचे स्थित शुक्र पर्वत के पास भी छोटी रेखाएं होती हैं, जो संतान के बारे में जानकारी देती हैं. इन रेखाओं का मिलाजुला प्रभाव यह दर्शाता है कि संतान सुख के बारे में जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में क्या संकेत हैं. अगर शुक्र पर्वत पर साफ और मजबूत रेखाएं हैं, तो यह संतान सुख की प्राप्ति की संभावना को दर्शाता है.
महाशिवरात्रि और शिवरात्रि में क्या है अंतर जानें, क्यों मनाया जाता है यह पर्व
19 Feb, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाशिवरात्रि का पर्व इस बार 26 फरवरी दिन बुधवार को है, हर वर्ष यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. वहीं शिवरात्रि हर मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है. यूं तो भगवान शिव की पूजा अर्चना करने के लिए हर दिन बेहद पवित्र माना जाता है लेकिन सावन मास, सोमवार का दिन, शिवरात्रि और महाशिवरात्रि का अपना विशेष महत्व है. महाशिवरात्रि और शिवरात्रि का पर्व दोनों ही भगवान शिव को समर्पित हैं, महाशिवरात्रि का पर्व सालभर में एक बार मनाया जाता है तो शिवरात्रि का हर माह पड़ती है. आइए जानते हैं आखिर महाशिवरात्रि और शिवरात्रि में क्या है अंतर…
शिवरात्रि
हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, इसलिए मासिक शिवरात्रि भी कहते हैं. ऐसे सालभर में 12 शिवरात्रि पड़ती हैं. पंचांग के अनुसार, सावन में आने वाली चतुर्दशी तिथि को बड़ी शिवरात्रि भी माना जाता है क्योंकि इस दिन भगवान शिव ने हलाहल विष को कंठ में धारण किया था. इस तरह सभी शिवरात्रि के अलावा सावन शिवरात्रि का अपना महत्व है. शिवरात्रि का पर्व हमको यह बोध कराता है कि हम सभी शिव के अंश और एक दिन उनमें ही मिल जाना है.
महाशिवरात्रि
महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह भी हुआ था. इसलिए इस पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. इस तरह महाशिवरात्रि का पर्व साल में एक बार और शिवरात्रि का पर्व हर महीने मनाया जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की रात्रि को भगवान शिव लाखों सूर्य के समान प्रभाव वाले लिंग के रूप में प्रकट हुए थे. महाशिवरात्रि के पर्व को हिंदू धर्म में सबसे बड़ा पर्व माना जाता है और इस व्रत के करने से साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है.
शिव और शक्ति का दिन है महाशिवरात्रि
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है. महाशिवरात्रि की रात्रि के चारों प्रहरों में भगवान शिव की पूजा का विधान है. इस दिन उपवास और रात्रि जागरण का विशेष महत्व है. यह दिन शिव और शक्ति के मिलन की रात है और इस रात भगवान शिव अपने भक्तों को विशेष आशीर्वाद भी देते हैं और उनकी सभी मनोकामनाओं का पूरी करते हैं. भोलेनाथ के भक्त इस दिन को उपवास और श्रद्धाभाव के साथ मनाते हैं और अपने आराध्य देव शिवजी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूरे परिवार के साथ शिव पूजन करते हैं. महाशिवरात्रि को सूर्यदेव पूरी तरह उत्तरायण में आ चुके होते हैं और ऋतु परिवर्तन इस दिन से शुरू हो जाता है.
वृद्धि योग में गणेश पूजा, सफलता में होगी बढ़ोत्तरी, देखें मुहूर्त, भद्राकाल, दिशाशूल, राहुकाल
19 Feb, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बुधवार को वृद्धि योग में गणेश जी की पूजा करने से सफलता में बढ़ोत्तरी होगी. इस दिन रवि योग भी बन रहा है. बुधवार को फाल्गुन कृष्ण षष्ठी तिथि, स्वाति नक्षत्र, वृद्धि योग, वणिज करण, उत्तर का दिशाशूल और तुला राशि का चंद्रमा है. वृद्धि योग में आप जो भी कार्य करते हैं, उसके फल में वृद्धि होती है. बुधवार को सुबह में गणेश जी की पूजा विधि विधान से करें. गणेश जी की कृपा से आपके जीवन में शुभता, सफलता, ज्ञान, बुद्धि आदि का प्राप्ति होगी. गणेश जी की पूजा में उनको सिंदूर, दूर्वा और मोदक जरूर चढ़ाते हैं. पूजा के समय बुधवार व्रत की कथा पढ़ें, इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होगा. पूजा के दौरान गणेश चालीसा, आरती, गणेश मंत्र का जाप आदि कर सकते हैं.
बुधवार को रवि योग में पूजा पाठ करना अच्छा होगा. इस योग में सभी प्रकार के दोषों को दूर करने की क्षमता होती है क्योंकि इसमें सूर्य देव का प्रभाव अधिक होता है. जिनकी कुंडली में बुध दोष है या बुध की स्थिति कमजोर है तो आपको गणेश जी की पूजा के साथ हरे रंग की वस्तुओं का दान करना चाहिए. इसमें आप हरा वस्त्र, हरे फल, हरी मूंग, हरा चारा आदि दान कर सकते हैं. बुध को मजबूत करने के लिए उसके बीज मंत्र का जाप कर सकते हैं. पंचांग से जानते हैं बुधवार का मुहूर्त, सूर्योदय, चंद्रोदय, चौघड़िया समय, भद्रा काल, राहुकाल, दिशाशूल आदि.
आज का पंचांग, 19 फरवरी 2025
आज की तिथि- षष्ठी – 07:32 ए एम तक, उसके बाद सप्तमी
आज का नक्षत्र- स्वाति – 10:40 ए एम तक, फिर विशाखा
आज का करण- वणिज – 07:32 ए एम तक, विष्टि – 08:47 पी एम तक, उसके बाद बव
आज का योग- वृद्धि – 10:48 ए एम तक, फिर ध्रुव
आज का पक्ष- कृष्ण
आज का दिन- बुधवार
चंद्र राशि- तुला – 06:49 ए एम, फरवरी 20 तक, फिर वृश्चिक
सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्रोदय-चंद्रास्त का समय
सूर्योदय- 06:56 ए एम
सूर्यास्त- 06:14 पी एम
चन्द्रोदय- 12:22 ए एम, फरवरी 20
चन्द्रास्त- 10:20 ए एम
आज के मुहूर्त और योग
रवि योग 06:56 ए एम से 10:40 ए एम, 12:34 पी एम से 06:55 ए एम, फरवरी 20
ब्रह्म मुहूर्त: 05:14 ए एम से 06:05 ए एम
अभिजीत मुहूर्त: कोई नहीं
विजय मुहूर्त: 02:28 पी एम से 03:13 पी एम
अमृत काल: 03:40 ए एम, फरवरी 20 से 05:27 ए एम, फरवरी 20
दिन का शुभ चौघड़िया मुहूर्त
लाभ-उन्नति: 06:56 ए एम से 08:21 ए एम
अमृत-सर्वोत्तम: 08:21 ए एम से 09:46 ए एम
शुभ-उत्तम: 11:10 ए एम से 12:35 पी एम
चर-सामान्य: 03:25 पी एम से 04:49 पी एम
लाभ-उन्नति: 04:49 पी एम से 06:14 पी एम
रात का शुभ चौघड़िया मुहूर्त
शुभ-उत्तम: 07:49 पी एम से 09:24 पी एम
अमृत-सर्वोत्तम: 09:24 पी एम से 11:00 पी एम
चर-सामान्य: 11:00 पी एम से 12:35 ए एम, फरवरी 20
लाभ-उन्नति: 03:45 ए एम से 05:20 ए एम, फरवरी 20
अशुभ समय
राहुकाल- 12:35 पी एम से 02:00 पी एम
गुलिक काल- 11:10 ए एम से 12:35 पी एम
यमगण्ड- 08:21 ए एम से 09:46 ए एम
दुर्मुहूर्त- 12:12 पी एम से 12:58 पी एम
भद्रा- 07:32 ए एम से 08:47 पी एम
भद्रा वास स्थान- पाताल लोक
शाम के समय किसी को भी ना दें ये 6 चीजें, महालक्ष्मी होंगी नाराज और बढ़ेंगी परेशानियां
19 Feb, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दान पुण्य करने को शास्त्रों में मोक्ष का द्वारा माना गया है लेकिन अगर दान गलत समय पर किया जाए तो यह आपके लिए परेशानी भी खड़ी कर सकता है. ज्योतिष शास्त्र में सुख-शांति और समृद्ध जीवन के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, इन नियमों का पालन करने से महालक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और हर तरह की परेशानी दूर रहती है. ज्योतिष के इन नियमों से एक नियम यह भी है कि शाम के समय कुछ चीजों का दान भूलकर भी ना करें और अगर ये चीजें पड़ोसी भी मांगने आएं तो देने से साफ मना कर दें क्योंकि इसका सीधा प्रभाव आपकी आर्थिक स्थिति पर पड़ता है. आइए जानते हैं कि शाम के समय कौन सी चीजें नहीं देनी चाहिए…
शाम के समय ना दें ये चीजें
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शाम के समय भूलकर भी किसी को दूध-दही नहीं देना चाहिए क्योंकि दूध-दही का संबंध भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ शुक्र ग्रह से भी है इसलिए शाम के समय किसी को भी दूध दही नहीं देना चाहिए. अगर पड़ोसी भी आपसे दूध या दही मांगने आए तो उनको देने से साफ मना कर दें, ऐसा करने से घर की बरकत चली जाती है.
शाम के समय ना लगाएं झाड़ू
शाम के समय किसी को भी घर की झाड़ू नहीं देना चाहिए क्योंकि झाड़ू का संबंध माता लक्ष्मी से माना जाता है. अगर आप किसी को घर की झाड़ू देते हैं तो इसका मतलब है कि आप अपने घर की लक्ष्मी को किसी और को दे रहे हैं. साथ ही यह भी ध्यान रखें कि शाम के समय किसी को भी घर में झाड़ू भी नहीं लगानी चाहिए. ऐसा करने से घर का धन बाहर चला जाता है और माता लक्ष्मी भी नाराज हो जाती हैं.
शाम के समय ना करें लेन-देन
शाम के समय हमेशा ध्यान रखें कि घर के मेन गेट हमेशा खोलकर रखना चाहिए और धन का लेन देन करने से बचना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शाम के समय माता लक्ष्मी घर-घर आती हैं लेकिन आप किसी को धन देते हैं तो यह धन देना माता लक्ष्मी को विदा करने समान भी माना जाता है. इसलिए भूलकर भी शाम के समय धन का लेन देन करने से बचना चाहिए.
ऐसा करने से तरक्की में आती है बाधा
शाम के समय भूलकर भी किसी को नमक और सुई नहीं देनी चाहिए. ये घर की महत्वपूर्ण चीजें हैं इसलिए ध्यान रखें कि शाम के समय ये चीजें किसी को ना दें. शाम के समय किसी को नमक और सुई देने से दोनों के बीच विवाद बढ़ने की आशंका बनी रहती है और घर के सदस्यों की तरक्की नहीं हो पाती. साथ ही ध्यान रखना चाहिए कि शाम के समय ना सोएं, यह भी आपकी तरक्की में बाधक बन सकता है.
ऐसा करने से गुरु ग्रह होते हैं कमजोर
गुरुवार की शाम को भूलकर भी किसी को हल्दी नहीं देनी चाहिए क्योंकि हल्दी का संबंध देवताओं के गुरु बृहस्पति से है. गुरु ग्रह भाग्य, धन, वैभव, वैवाहिक जीवन आदि के कारक ग्रह हैं और शाम के समय हल्दी देने से कुंडली में गुरु की स्थिति कमजोर होती है और धन व वैभव में भी कमी आ जाती है. कुंडली में अगर गुरु की स्थिति मजबूत होती है तो जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं होती.
ऐसा करना माना जाता है अशुभ
शाम के समय भूलकर भी किसी को प्याज और लहसुन नहीं देना चाहिए, ऐसा करना अशुभ माना जाता है. क्योंकि प्याज और लहसुन का संबंध केतु ग्रह से होता है और केतु का संबंध ऊपरी ताकत और जादू टोने से माना जाता है. इसलिए भूलकर भी शाम के समय किसी को भी चाहें वह कितना भी प्रिय हो, उनको प्याज और लहसुन नहीं देना चाहिए.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
19 Feb, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा तथा कार्यवृत्ति में सुधार होगा।
वृष राशि :- कार्य योजना पूर्ण होगी, रुके कार्य निपटा लेवें, कार्य योजना से लाभ अवश्य होगा।
मिथुन राशि :- कुटुम्ब की समस्यायें सुलझेंगी, बिगड़े हुये कार्य अवश्य ही बनेंगे ध्यान दें।
कर्क राशि :- समय की अनुकूलता से लाभांवित होंगे तथा कार्य कुशलता से हर्ष अवश्य होगा।
सिंह राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, बिगड़े कार्य बनेंगे।
कन्या राशि :- अर्थ व्यवस्था अनुकूल होने पर भी धन लाभ की संभावना नहीं है, दु:ख होगा।
तुला राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा तथा कार्य कुशलता से लाभ होगा।
वृश्चिक राशि :- कार्य कुशलता अनुकूल रहेगी, धन का व्यय संभव है, समय का ध्यान रखें।
धनु राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, चिन्ता कम अवश्य होगी।
मकर राशि :- आशानुकूल सफलता से संतोष होगा तथा चिन्ता में कमी, धैर्य से काम लें।
कुंभ राशि :- विरोधियों के आक्षेप से हानि होगी, मानसिक व्यग्रता अवश्य ही बनेगी।
मीन राशि :- मनोवृत्ति संवेदनशील बनेगी, कार्य-व्यवसाय गति अनुकूल बनेगी।
अच्छे लीडर और बुद्धिमान होते हैं पहले, दूसरे पहर में जन्मे जातक, हर क्षेत्र में पाते हैं सफलता, लेकिन यहां झेलनी पड़ती है परेशानी!
18 Feb, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जन्म के समय का व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है और यह असर व्यक्ति की कुंडली के ग्रह, नक्षत्र और अन्य ज्योतिषीय कारकों के आधार पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है. जन्म के समय के ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति के व्यक्तित्व, स्वभाव और भविष्य को निर्धारित करता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जन्म के समय की ग्रह स्थिति से यह पता चलता है कि व्यक्ति का जीवन कैसा होगा और वह किस दिशा में अग्रसर होगा. इस विषय में विस्तार से जानेंगे भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से उन व्यक्तियों के बारे में जो सुबह के समय जन्म लेते हैं, उनके जीवन के बारे में ज्योतिष के दृष्टिकोण से.
सुबह जन्मे व्यक्तियों का व्यक्तित्व और जीवन
ज्योतिष शास्त्र में यह माना जाता है कि सूर्योदय का समय एक विशेष महत्व रखता है. यह समय दिन के पहले प्रहर का होता है, जो आम तौर पर सुबह 6 बजे से 9 बजे के बीच माना जाता है. इस समय जन्म लेने वाले व्यक्तियों का जीवन खासतौर पर उन्नति से भरा होता है. हालांकि, प्रारंभिक जीवन में इनका स्वास्थ्य थोड़ा कमजोर रह सकता है, लेकिन समय के साथ ये लोग जल्दी सुधार कर अपने जीवन में सफलताओं के नए मुकाम पर पहुंचते हैं.
प्रथम प्रहर में जन्मे जातक
प्रथम प्रहर, जो सूर्योदय के बाद से लेकर सुबह 9 बजे तक का समय है, विशेष रूप से शुभ माना जाता है. इस समय जन्मे व्यक्ति का दिमाग तेज और सत्य के प्रति गहरी निष्ठा रखने वाला होता है. ये लोग किसी भी कार्य में दृढ़ निश्चय और आत्मविश्वास के साथ सफलता प्राप्त करते हैं. यह समय शुभ होने के कारण इनके जीवन में जीवन के बाद के सालों में सुख-समृद्धि और यश की प्राप्ति होती है. हालांकि, इनकी शुरुआत में स्वास्थ्य संबंधी कुछ समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन जल्द ही ये समस्याओं से बाहर निकलकर अपनी मंजिल को प्राप्त करते हैं.
रामायण-महाभारत काल के वो अस्त्र जिससे छूटते थे असुरों के पसीने
18 Feb, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय इतिहास में दो महाकाव्य हैं, रामायण और महाभारत. दोनों ही ग्रंथों में अनेक शूरवीर योद्धाओं का वर्णन है जिन्होंने अपने पराक्रम से तीनों लोकों को प्रभावित किया. इन योद्धाओं के पास अद्भुत अस्त्र-शस्त्र थे जिनमें से कुछ तो इतने शक्तिशाली थे कि उनकी टंकार मात्र से ही तीनों लोक कांप उठते थे. ऐसा ही एक धनुष था “गांडीव”. यह अर्जुन का धनुष था जो इतना शक्तिशाली था कि उसकी टंकार से शत्रुओं के हृदय में भय उत्पन्न हो जाता था.
अर्जुन को किसने दिया था गांडीव
गांडीव को स्वयं ब्रह्मा ने अर्जुन को प्रदान किया था और यह इतना शक्तिशाली था कि इसे धारण करने वाले योद्धा को कोई भी पराजित नहीं कर सकता था. गांडीव की शक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महाभारत के युद्ध में अर्जुन ने इसी धनुष से कौरवों की विशाल सेना का संहार किया था. गांडीव की टंकार से ही कौरवों के रथों के पहिए टूट गए थे और उनके हाथियों के चिंघाड़ बंद हो गए थे.
भगवान शिव का धनुष
गांडीव के अलावा एक और धनुष था जिसकी टंकार से तीनों लोक कांप उठते थे. इस धनुष का नाम था “पिनाक”. यह भगवान शिव का धनुष था और यह इतना शक्तिशाली था कि इसकी टंकार से ही पृथ्वी कांप उठती थी.
पिनाक को भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध करने के लिए धारण किया था. त्रिपुरासुर एक ऐसा राक्षस था जिसने अपनी शक्ति से तीनों लोकों को त्रस्त कर दिया था. भगवान शिव ने पिनाक की टंकार से ही त्रिपुरासुर के तीनों नगरों को ध्वस्त कर दिया था.
भगवान राम का धनुष
रामायण में भी एक ऐसे धनुष का वर्णन है जिसकी टंकार से तीनों लोक कांप उठते थे. इस धनुष का नाम था “कोदंड”. यह भगवान राम का धनुष था और यह इतना शक्तिशाली था कि इसकी टंकार से ही राक्षसों के हृदय में भय उत्पन्न हो जाता था.
कोदंड को भगवान राम ने रावण का वध करने के लिए धारण किया था. रावण एक ऐसा राक्षस था जिसने अपनी शक्ति से तीनों लोकों को त्रस्त कर दिया था. भगवान राम ने कोदंड की टंकार से ही रावण की लंका को ध्वस्त कर दिया था.
यह तीनों धनुष- गांडीव, पिनाक और कोदंड भारतीय इतिहास के सबसे शक्तिशाली धनुषों में से एक थे. इनकी टंकार मात्र से ही तीनों लोक कांप उठते थे और इनके धारक योद्धाओं ने अपने पराक्रम से इतिहास में अपना नाम अमर कर दिया.
शनिदेव साल 2025 के अंत तक इन 5 राशिवालों पर रहेंगे मेहरबान! कर्मफलदाता की कृपा से हर काम होगा आसान, देखें अपनी राशि
18 Feb, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साल 2025 शुरू हुए लगभग 2 माह बीतने वाले हैं. इस साल कई प्रमुख ग्रहों की चाल में बदलाव होगा. अगले माह यानी मार्च 2025 में शनिदेव राशि परिवर्तन करेंगे. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि किसी एक राशि में करीब ढाई वर्ष तक रहते हैं फिर दूसरी राशि में गोचर करते हैं. इसलिए शनिदेव को सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह माना गया है. इसलिए इसका शनि का शुभ-अशुभ प्रभाव भी किसी राशि पर अधिक दिनों तक रहता है. वैसे तो शनि को क्रूर ग्रह माना गया है, लेकिन इस साल 2025 के अंत तक कर्मफलदाता, न्यायाधीश और दंडाधिकारी शनिदेव कुछ राशि के जातकों पर जमकर कृपा बरसाएंगे. इन
शनिदेव कब करेंगे राशि परिवर्तन
सभी नौ ग्रहों की अलग-अलग राशियां होती हैं. यदि शनि ग्रह की बात करें तो वह 29 मार्च 2025 को शनि गुरु की राशि मीन में प्रवेश कर जाएंगे. यहां पर वे 3 जून 2027 तक रहेंगे. शनि के ढाई वर्षों बाद राशि परिवर्तन से कुछ राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती खत्म होगी तो कुछ पर साढे़साती शुरू होगी.
इन राशिवालों पर कृपा बरसाएंगे शनिदेव
कर्क: शनि और शुक्र कर्क राशि के आठवें घर में युति करते हैं. इससे इन राशि वाले लोगों की आर्थिक स्थिति में अचानक वृद्धि होगी. लंबे समय से लंबित कार्य सफलतापूर्वक पूरे होंगे. उन्हें पेशेवर तौर पर कई अच्छे परिणाम मिलेंगे.
तुला: इस राशि शनि देव की सबसे प्रिय राशियों में से एक मानी जाती है और यह शनि ग्रह की उच्च राशि होती है. इस राशि के लोगों पर शनि देव हमेशा मेहरबान रहते हैं. अगर कुंडली में शनि सही जगह पर हो, तो ये लोगों को खूब तरक्की देते हैं.
धनु: इस राशि के स्वामी बृहस्पति हैं और शनि देव और बृहस्पति के बीच दोस्ती का रिश्ता है. इसलिए धनु वालों पर शनि देव हमेशा कृपा बरसाते हैं. जब शनि की साढ़ेसाती चलती है, तब भी धनु राशि वालों को नुकसान की जगह फायदा होता.
मकर: मकर राशि भी शनिदेव की प्रिय राशि मानी जाती है. इस राशि के जातकों पर शनिदेव हमेशा अपनी कृपा बरसाते हैं. कहा जाता है कि शनि की पूजा करने से मकर राशि वालों की सारी परेशानियां दूर होती हैं.
कुंभ: कुंभ राशि भी शनि देव की प्रिय राशि है. इस राशि के लोग अक्सर धनवान और खुशहाल होते हैं. शनि देव इन पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं. कुंभ राशि के लोगों को कभी धन की कमी नहीं होती, और इनके काम भी आसानी से पूरे हो जाते हैं.
भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए महाशिवरात्रि पर व्रत रखने से पहले जान लें ये कुछ नियम, हर मनोकामना होगी पूरी
18 Feb, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाशिवरात्रि का व्रत भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है. यह व्रत फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 26 फरवरी को मनाया जा रहा है. इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और व्रत रखा जाता है. महाशिवरात्रि का व्रत रखने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. पंडित अशोक शास्त्री इस व्रत के कुछ नियम बता रहे हैं.
महाशिवरात्रि व्रत के नियम
महाशिवरात्रि का व्रत रखने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है.
व्रत रखने वाले व्यक्ति को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए.
स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए.
व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए.
भगवान शिव को जल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र आदि अर्पित करने चाहिए.
व्रत के दिन अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए.
फलाहार या फिर केवल दूध का सेवन किया जा सकता है.
व्रत के दिन क्रोध, लोभ, मोह आदि विकारों से दूर रहना चाहिए.
व्रत के दिन भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए और उनके मंत्रों का जाप करना चाहिए.
महाशिवरात्रि व्रत का महत्व
महाशिवरात्रि का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे पुण्य की प्राप्ति होती है. इस व्रत को करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और वह भगवान शिव का प्रिय बनता है.
महाशिवरात्रि व्रत की पूजा विधि
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन भगवान शिव को जल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र आदि अर्पित किए जाते हैं. भगवान शिव को धूप, दीप, नैवेद्य आदि भी अर्पित किए जाते हैं. भगवान शिव के मंत्रों का जाप भी किया जाता है.
महाशिवरात्रि व्रत के लाभ
महाशिवरात्रि का व्रत करने से व्यक्ति को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं. इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे पुण्य की प्राप्ति होती है. इस व्रत को करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और वह भगवान शिव का प्रिय बनता है.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
18 Feb, 2025 01:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कुटुम्ब की समस्यायें सुलझेंगी, अनावश्यक व्यय होगा, रुके कार्य बन जायेंगे।
वृष राशि :- दैनिक कार्यगति में सुधार होगा, सफलता के साधन जुटायें, कार्य व्यवसाय में लाभ होगा।
मिथुन राशि :- समय की अनुकूलता से लाभांवित होंगे, कार्यक्षेत्र में सफलता अवश्य मिलेगी।
कर्क राशि :- अशुद्ध गोचर रहने से विशेष कार्य स्थगित रखें, लेन-देन के मामले में हानि संभव है।
सिंह राशि :- सामाजिक कार्य में प्रभुत्व वृद्धि होगी, मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी तथा इष्ट मित्रों से लाभ होगा।
कन्या राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, बड़े-बड़े लोगों से मेल-मिलाप होगा।
तुला राशि :- परिश्रम से सफलता संभावित हैं तथा आश्वासन से कार्य में विलम्ब होगा ध्यान दें।
वृश्चिक राशि :- भाग्य का सितारा साथ देगा, समय अनुकूल है रुके कार्य बना ही लें।
धनु राशि :- समय विशेष अनुकूल है, भाग्य का सितारा साथ देगा, विशेष कार्य बन जायेंगे।
मकर राशि :- समय अनुकूल नहीं, समय के साथ कार्य करते रहें थोड़ा लाभ अवश्य होगा।
कुंभ राशि :- विशेष कार्य करेंगे, अपेक्षाकृत अनुकूल समय तथा व्यवसाय के कार्य होंगे।
मीन राशि :- मित्र वर्ग से हर्ष, कार्य-व्यवसाय में समृद्धि के साधन अवश्य ही बनेंगे ध्यान दें।
कब पड़ेगी फाल्गुन मास की अमावस्या? जानें शुभ मुहूर्त और तिथि
17 Feb, 2025 04:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फाल्गुन अमावस्या 2025: प्रत्येक माह की 15वीं तिथि को अमावस्या का पर्व मनाया जाता है, जिसे पितरों के तर्पण के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है, जिसके बाद पितरों का तर्पण करने के साथ-साथ दान भी किया जाता है। मान्यता है कि अमावस्या के दिन दान करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और पितर भी संतुष्ट होते हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से, इस दिन पितर धरती पर आते हैं, और यदि उनका विधिपूर्वक तर्पण किया जाए, तो उनकी आत्मा को शांति मिलती है। वर्तमान में हिंदी कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन का महीना चल रहा है, तो आइए जानते हैं कि फाल्गुन माह की अमावस्या कब आएगी।
फाल्गुन अमावस्या 2025 तिथि?
फाल्गुन अमावस्या 2025 की तिथि के अनुसार, वैदिक पंचांग में फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या 27 फरवरी को सुबह 8 बजकर 54 मिनट पर शुरू होगी और इसका अंत 28 फरवरी को सुबह 6 बजकर 14 मिनट पर होगा। इस प्रकार, उदयातिथि के अनुसार, फाल्गुन अमावस्या 27 फरवरी 2025 को मनाई जाएगी।
फाल्गुन अमावस्या 2025 का शुभ मुहूर्त
अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है, और यदि यह स्नान ब्रह्म मुहूर्त में किया जाए तो इसका फल और भी अधिक होता है। पंचांग के अनुसार, 27 फरवरी को सुबह 5 बजकर 8 मिनट से लेकर 5 बजकर 58 मिनट तक का समय ब्रह्म मुहूर्त के लिए निर्धारित है। फाल्गुन अमावस्या के अवसर पर स्नान के बाद दान करने की परंपरा है। दान के बाद विधिपूर्वक पूजा का आयोजन किया जाना चाहिए। पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से लेकर 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, जिसे अभिजित मुहूर्त माना जाता है। इसके अतिरिक्त, शाम को 6 बजकर 7 मिनट से लेकर 6 बजकर 42 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त भी रहेगा।
शिवरात्रि पर दिल्ली के इन मंदिरों में करें दर्शन, भगवान बरसाएंगे कृपा, बन जाएंगे सारे बिगड़े काम!
17 Feb, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महज अब कुछ ही दिन में शिवरात्रि का महापर्व आने वाला है, इसलिए आज हम आपको दिल्ली एनसीआर के कुछ ऐसे महादेव के मंदिर के बारे में बताएंगे जहां आप दर्शन के लिए जा सकते हैं. इस मंदिरों का इतिहास सालों पुराना है. मान्यता है कि यहां पूजा करने से जीवन की हर परेशानी दूर हो जाती है.
पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक में स्थित गौरी शंकर का मंदिर 800 साल पुराना है. यहां आपको एक अद्भुत शिवलिंग का दर्शन करने को मिलगा. इसके साथ ही इस मंदिर के बेसमेंट में आपको एक साथ 12 ज्योतिर्लिंगक का दर्शन करने को मिलेगा. तो अब दिल्ली में ही बैठे भोलेनाथ के सभी स्वरूप के दर्शन इस मंदिर में कर सकते हैं. तो शिवरात्रि के दिन यहां आप भोलेनाथ की पूजा करने जा सकते हैं.
दिल्ली के निगमबोध घाट के पास नीली छतरी मंदिर स्थित है, जिसे पांडवों ने महाभारत काल में भगवान शिव को समर्पित करने के लिए यह मंदिर बनवाया था. आज भी यहां पूजा करने के लिए भक्तों की काफी भीड़ लगी रहती है.
राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस में स्थित शिव मंदिर दिल्ली की सबसे पुराने मंदिर में से एक है. शिव मंदिर का इतिहास उर्दू और हिंदी में लिखा है. वहीं इस मंदिर के दर्शन करने के लिए भी लोग दूर-दूर से आते हैं.
दिल्ली का मंगल महादेव बिड़ला कानन मंदिर में भगवान शिव की 100 फीट ऊंची मूर्ति स्थापित है. जिसे कांसे से बनाई गई हैं. मंदिर की सुंदरता को देखने और आध्यात्मिक वातावरण में शांति महसूस करने के लिए यहां भक्तों की रोजाना काफी भीड़ लगी रहती है. शिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए आप यहां जा सकते हैं.
300 साल में पहली बार भक्तों के बीच आएंगे ठाकुर जी, 19 से 25 फरवरी तक भव्य महोत्सव का आयोजन
17 Feb, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मध्य प्रदेश के खरगोन में इस साल एक ऐतिहासिक आयोजन होने वाला है, जिसका लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे है. यहां 300 साल में पहली बार भगवान गोपाललालजी (ठाकुरजी) भक्तों को दर्शन देने नगर भ्रमण करेंगे. खास बात ये है कि, इस भव्य शोभायात्रा में हाथी, घोड़े, ऊंट, विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे. संत-महात्मा बग्घियों और वाहनों में विराजमान होकर नगरवासियों को आशीर्वाद प्रदान करेंगे. यह महोत्सव सात दिन तक चलेगा, जिसमें हर दिन विशेष धार्मिक कार्यक्रम होंगे.
बता दें कि, जिला मुख्यालय से करीब 80 km दूर संतों की नगरी बड़वाह में भगवान गोपाललालजी के 300वें वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 19 से 25 फरवरी तक भव्य महोत्सव मनाया जाएगा. जिसको लेकर पूरे नगर को आकर्षक विद्युत सज्जा, ध्वज और बैनरों से सजाया जा रहा है. दरअसल, महंत नरहरिदास महाराज के शिष्य महंत हनुमदास महाराज के सान्निध्य में निकलने वाली शोभायात्रा में हाथी, घोड़े, ऊंट, 10 चलित झांकियां और तीन अन्य झांकियां शामिल रहेंगी.
अलग-अलग दिन होंगे विभिन्न अनुष्ठान
महंत हनुमानदास महाराज ने बताया कि, पहली बार भगवान गोपाललाल जी का नगर भ्रमण बड़वाह में होगा. स्थानीय नागेश्वर मंदिर परिसर में 7 दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान होंगे. हर दिन सुबह 8 से दोपहर 1 बजे तक वेदपाठी पंडितों द्वारा सहस्रार्चन महाभिषेक किया जाएगा. 19 फरवरी को ध्वजारोहण, कलश स्थापना और मंडल पूजन होगा. 20 फरवरी को 1100 लीटर दूध से महाअभिषेक, 21 फरवरी को 251 किलो फूलों और 22 फरवरी को 51 हजार तुलसी दल से सहस्रार्चन होगा. रोजाना रात 8 से 12 बजे तक प्रसिद्ध भजन कलाकारों द्वारा भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा.
भगवान को लगाएंगे छप्पन भोग
वहीं, 24 फरवरी को श्री गोपाल महायज्ञ होगा और भगवान को छप्पन भोग लगाया जाएगा. श्रद्धालुओं के लिए मंदिर भक्त मंडल द्वारा प्रतिदिन शाम 6 से रात 9 बजे तक भोजन प्रसादी की व्यवस्था भी की गई है. आखरी दिन 25 फरवरी को पूर्णाहुति और भव्य भंडारे के साथ महोत्सव का समापन होगा. गौरतलब है कि, आयोजक को लेकर नगर के प्रमुख मार्गों को रंग-बिरंगी लाइटों, ध्वज, पताका और बैनरों से सजाया जा रहा है.
नगरीय निकायों के कायाकल्प और वित्तीय सुदृढ़ीकरण के लिये दो दिवसीय "शहरी सुधार कार्यशाला" का हुआ समापन
संकल्प से समाधान अभियान’ से त्वरित, प्रभावी और पारदर्शी निराकरण हुआ सुनिश्चित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
यूरिया का प्रभावी विकल्प बन रही हरी खाद, जशपुर में 600 हेक्टेयर में प्रदर्शन
फॉरेस्ट ग्राउंड में बना बॉक्स क्रिकेट ग्राउंड युवाओं को खेल के प्रति प्रोत्साहित और अनुशासित कर रहा
माता-पिता के संस्कार और गुरूओं से प्राप्त ज्ञान के प्रति सदैव रहें कृतज्ञ : राज्यपाल पटेल
आदि शंकराचार्य का दर्शन भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक एकता का बना आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
