धर्म एवं ज्योतिष
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
24 Feb, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- स्थिति नियंत्रण में रखें, अचानक दूसरों के कार्यों में सहयोग न करें अन्यथा हानि होगी।
वृष राशि :- मानसिक उदासीनता, असमंजस की स्थिति बनेगी, कार्य अवरोध तथा कार्य में ध्यान दें।
मिथुन राशि :- सफलता के साधन जुटायें, धन लाभ, आशानुकूल सफलता से प्रसन्नता अवश्य होगी।
कर्क राशि :- संघर्ष बना रहेगा, भावनायें मन को उद्विघ्न रखेंगी, ध्यान पूर्वक कार्य करें।
सिंह राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल होगा, बिगड़े हुये कार्य अवश्य ही बनेंगे, समय का ध्यान रखें।
कन्या राशि :- अर्थ-व्यवस्था में अनुकूलता, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, समय का लाभ अवश्य लें।
तुला राशि :- असमर्थता व असमंजस की स्थिति बनेगी, धन का व्यय अवश्य होगा।
वृश्चिक राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे।
धनु राशि :- सभी का समर्थन फलप्रद होगा, आर्थिक योजना में लाभ अवश्य होगा ध्यान दें।
मकर राशि :- सामाजिक कार्यों में प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि तथा क्रोध बढ़ेगा, धैर्य पूर्वक कार्य करें।
कुंभ राशि :- आवश्यकता के अनुरूप चिन्ता से मुक्त होंगे, परिश्रम से कार्य करने पर ही लाभ होगा।
मीन राशि :- किसी के अरोप से बचें, प्रत्येक कार्य में बाधा होगी, सावधानी से कार्य करें।
महाशिवरात्रि पर भीलवाड़ा का हरणी महादेव मंदिर में लगता है 3 दिवसीय मेला
23 Feb, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित महाशिवरात्रि का महा-त्योहार नजदीक आने को है और महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि यानी कि आगामी 26 फरवरी को मनाया जाएगा. भीलवाड़ा शहर के हरणी में महाशिव रात्रि पर हरणी महादेव में हर वर्ष की भांति लगने वाले मेले की तैयारियां शुरू कर दी है. नगर निगम द्वारा तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाएगा. जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन संध्या और कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा. भीलवाड़ा के हरणी महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि पर चार पहर की महा आरती की जाएगी.
नगर निगम महापौर राकेश पाठक ने कहा कि सामाजिक सरोकार और धार्मिक पर्यटक स्थल को बढ़ावा देने के लिए नगर निगम द्वारा हर वर्ष की भर्ती इस वर्ष भी महाशिवरात्रि के पर्व पर तीन दिवसीय भव्य मेले का आयोजन किया जा रहा है. तीन दिवसीय इस भव्य मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम भजन संध्या और कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा. कवि सम्मेलन में देश के ख्यात नाम कवि अपना काव्य का प्रदर्शन करेंगे
3 दिन मेले का आयोजन
आयुक्त हेमाराम चौधरी ने कहा कि महाशिवरात्रि को लेकर 3 दिन के मेले का हर साल आयोजन किया जाता है जिसमें कई आयोजन भी होते हैं. इसके तहत 26 तारीख को भजन संध्या कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा और 27 फरवरी को भजन संध्या आयोजित की जाएगी और समापन समारोह के दौरान कवि सम्मेलन का आयोजन 28 तारीख को आयोजित किया जाएगा.
हरणी महादेव के 4 पहर की होंगी महाआरती
हरणी महादेव मंदिर के ट्रस्टी मुकेश जाट ने कहा आने वाली 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के पर्व को लेकर मंदिर कमेटी द्वारा तैयारी जोरो पर की जा रही है और नगर निगम द्वारा तीन दिवसीय मेले का भी आयोजन किया जा रहा है. पंडितों द्वारा 4 प्रहर का जागरण औऱ पुजा अर्चना होंगी और इसके साथ ही महादेव के महाआरती की जाएगी. शिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ के दर्शनार्थियों के लिए महिलाओं और पुरूषों के लिए अलग अलग लाईन बनाई जाएगी. मेले में आने वाले मेलार्थियों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था भी की जाएगी. मंदिर ट्रस्ट की ओर से जो भी सुविधाएं मेले में की जाएगी उसकी तैयारियां शुरू कर दी है.
महादेव की पूजा की आसान विधि –
महाशिवरात्रि की पूजा के लिए, शिव भक्त भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग की पूजा करते हैं. पूजा के दौरान, भगवान शिव को जल, दूध, और फल चढ़ाए जाते हैं इसके अलावा, शिव भक्त भगवान शिव की आरती और मंत्रों का जाप करते हैं
महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर भूलकर से भी न चढ़ाएं ये फूल, नाराज हो जाएंगे शंकर
23 Feb, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. यह दिन शिव भक्तों के लिए बेहद खास होता है. इस साल महाशिवरात्रि 26 फरवरी को है. माना जाता है कि भोलेनाथ बहुत सरल हैं और एक लोटा जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं. वहीं, महादेव को कुछ फूल भी बहुत प्रिय हैं, लेकिन शास्त्रों में कुछ ऐसे फूल बताए गए हैं जो शिव शंकर को भूलकर भी नहीं चढ़ाने चाहिए.
भगवान विष्णु ने मानी शिव के सामने हार उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज ने बताया कि शिव पुराण के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु और ब्रह्मा के बीच विवाद हुआ कि इनमें से सर्वश्रेष्ठ कौन है. विवाद इतना बढ़ गया कि बात भगवान शिव तक पहुंची, तब भोलेनाथ ने एक शिवलिंग की उत्पत्ति की और कहा कि जो इसका आदि और अंत खोज लेगा, वह सर्वश्रेष्ठ कहलाएगा. ऐसे में भगवान विष्णु ऊपर की ओर और ब्रह्मा जी नीचे की ओर बढ़ने लगे. बहुत खोजने के बाद जब भगवान विष्णु को शिवलिंग का अंत नहीं मिला, तो उन्होंने हार मान ली और भगवान शिव के आगे अपनी भूल स्वीकार की.
भगवान ब्रह्मा ने शिव से बोला झूठ
भगवान विष्णु के हार मानने के बाद ब्रह्मा जी शिव शंकर के पास पहुंचे. लाख कोशिशों के बाद भी ब्रह्मा जी को इस ज्योतिर्लिंग का अंत नहीं मिला, तो रास्ते में उन्हें केतकी का फूल मिला. ब्रह्मा जी ने उसे बहला-फुसलाकर झूठ बोलने के लिए मना लिया.
शिव शंकर ने दिया केतकी के फूल को श्राप
इसके बाद ब्रह्मा जी के कहने पर केतकी भगवान शिव शंकर के पास ब्रह्मा जी के साथ पहुंची. ब्रह्मा जी ने भगवान शिव से कहा कि उन्होंने अंत ढूंढ लिया है और इसका सबूत यह केतकी का फूल है. भगवान शिव को पता था कि वे झूठ बोल रहे हैं. केतकी के फूल के झूठ बोलने के बाद भगवान शिव ने क्रोधित होकर ब्रह्मा का पांचवां सिर काट दिया और केतकी के फूल को श्राप दिया कि उसका इस्तेमाल उनकी किसी भी पूजा में नहीं किया जाएगा, इसलिए भगवान शिव की पूजा में केतकी का फूल वर्जित है.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
23 Feb, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- आशानुकूल सफलता का हर्ष, कार्यवृत्ति में सुधार तथा कार्य में ध्यान दें।
वृष राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, दैनिक कार्यगति अनुकूल बनेगी ध्यान दें।
मिथुन राशि :- इष्ट मित्र से हर्ष, दैनिक कार्यगति में सुधार, समय का ध्यान रखें।
कर्क राशि :- विशेष परिवर्तन स्थिगित रखें, प्रयास करने पर थोड़ी सफलता मिलेगी।
सिंह राशि :- सामाजिक कार्य में हर्ष-उल्लास, स्त्री वर्ग से सुख, भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी।
कन्या राशि :- आशानुकूल सफलता से हर्ष, कार्यवृत्ति में सुधार की मनोवृत्ति होगी।
तुला राशि :- अशुद्ध गोचर रहने से उत्साहहीनता बनेगी, असमर्थता से असमंजस का वातावरण बनेगा।
वृश्चिक राशि :- इष्ट मित्रों से लाभ, बिगड़े कार्य बनेंगे, भाग्य प्रबल होगा, कार्य बनेंगे।
धनु राशि :- मनोवृत्ति संवेदनशील रहेगी, हर्ष-उल्लास का वातावरण रहेगा।
मकर राशि :- विशेष कार्य बिगड़ेंगे तथा किसी विवाद व झगड़े से बचें, कार्य करें।
कुंभ राशि :- अकारण ही मन उदासीन बना रहेगा, चिंता होगी, सफलता के साधन बनेंगे।
मीन राशि :- दैनिक कार्यगति अनुकूल, चिन्ता में कमी, धन प्राप्ति के साधन बनेंगे।
न धन की कमी-ना ही दरिद्रता का वास... एकादशी के दिन कर लें ये उपाय; घर में आएगी समृद्धि
22 Feb, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साल भर में कुल 24 बार एकादशी का व्रत रखा जाता है. यानी कि हर महीने में दो एकादशी मनाई जाती है. हिंदू धर्म में एकादशी का महत्व बेहद खास होता है. अगर आप एकादशी के दिन व्रत रखते हैं और माता लक्ष्मी की पूजा अराधना करते हैं तो घर में कभी भी धन-धन की कमी नहीं होगी ना ही दरिद्रता वास करेगी. वही फाल्गुन मां की पहली एकादशी विजया एकादशी है. विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष विधि विधान के साथ पूजा आराधना करनी चाहिए. लेकिन एकादशी के दिन कुछ नियमों का पालन करना भी बेहद जरूरी हो जाता है अन्यथा माता लक्ष्मी रुष्ट भी हो सकती हैं. किन नियमों का पालन करना चाहिए जानते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य से?
क्या कहते है देवघर के ज्योतिषाचार्य :
फाल्गुन माह की पहली एकादशी यानी विजया एकादशी का व्रत 24 फरवरी को रखा जाएगा. एकादशी के दिन अगर भक्त व्रत रखकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा आराधना करते हैं तो उन्हें हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी साथ ही शत्रु पर भी विजय प्राप्त कर सकेंगे. रोग बीमारी से भी मुक्ति मिलेगी और जीवन में सुख समृद्धि की वृद्धि होगी लेकिन कुछ ऐसी चीज हैं जो एकादशी के दिन बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए.
एकादशी के दिन किन गलतियों से बचना चाहिए:
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि हिंदू धर्म में बेहद नियम विधि के साथ कोई पूजा पाठ करना चाहिए. अभी उस पूजा का उत्तम फल की प्राप्ति होती है.
तुलसी को स्पर्श ना करे :
वही एकादशी के दिन भूलकर भी तुलसी को स्पर्श ना करें और ना ही तुलसी को जल चढ़ाएं. क्योंकि तुलसी माता लक्ष्मी का ही प्रतीक माना जाता है. ऐसा करने से माता लक्ष्मी रुष्ट हो सकती हैं.
चावल का सेवन ना करे :
एकादशी के दिन चावल का सेवन बिलकुल भी नहीं करना चाहिए.एकादशी के दिन चावल का सेवन करना अशुभ माना जाता है.
काले कपड़े ना पहनने :
एकादशी तिथि के दिन काले, नीले या गहरे कपड़े पहन कर पूजा पाठ बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए. इस दिन लाल या पीला वस्त्र पहन कर ही पूजा पाठ करें शुभ माना जाता है.
जलाभिषेक करते समय इन मंत्रों का करें जाप, भोलेनाथ की जल्द मिलेगी कृपा, पूरे होंगे सारे काम
22 Feb, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान शिव जिन्हें महादेव, भोलेनाथ और नीलकंठ जैसे नामों से भी जाना जाता है, हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं. वे त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) में संहारक के रूप में पूजे जाते हैं. शिव भक्तों के लिए जलाभिषेक एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है जिसमें शिवलिंग पर जल अर्पित किया जाता है. माना जाता है कि जलाभिषेक से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.
पंडित अनंत झा बताते हैं जलाभिषेक के समय कुछ विशेष मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है. इनमें से दो प्रभावशाली मंत्र इस प्रकार हैं.
ॐ नमः शिवाय: यह शिव का पंचाक्षरी मंत्र है और सबसे प्रसिद्ध मंत्रों में से एक है. इसका अर्थ है “मैं शिव को नमन करता हूं”. इस मंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती है और आत्मा शुद्ध होती है.
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥: यह महामृत्युंजय मंत्र है जो मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाला माना जाता है. इसका जाप करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और आयु में वृद्धि होती है.
इन मंत्रों के जाप के साथ-साथ जलाभिषेक करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक है क्योंकि कुछ गलतियों से भगवान शिव नाराज हो सकते हैं.
गलत दिशा में मुख: जलाभिषेक करते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाभिषेक नहीं करना चाहिए.
अशुद्ध जल का प्रयोग: जलाभिषेक के लिए हमेशा स्वच्छ और पवित्र जल का ही प्रयोग करना चाहिए. गंदा या अशुद्ध जल अर्पित करने से भगवान शिव अप्रसन्न हो सकते हैं.
गलत तरीके से जल अर्पित करना: शिवलिंग पर जल धीरे-धीरे और धारा के रूप में अर्पित करना चाहिए. जल को छिड़कना या फेंकना उचित नहीं माना जाता है.
मन में बुरे विचार: जलाभिषेक करते समय मन में किसी भी प्रकार के बुरे विचार नहीं लाने चाहिए. पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव से ही जलाभिषेक करना चाहिए.
महाशिवरात्रि पर भद्रा का काला साया, कब और कैसे करें पूजा? यहां मिलेगी व्रत से जुड़ी हर जानकारी
22 Feb, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर साल महाशिवरात्रि का पर्व महादेव और माता पार्वती के विवाह की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है. इसे शिव-पार्वती के मिलन का दिन भी कहा जाता है. मान्यता है कि इस तिथि पर शंकर जी और देवी पार्वती की पूजा करने से वह प्रसन्न होते हैं और सभी कष्टों का निवारण करते हैं. वहीं महिलाएं वैवाहिक जीवन सुखमय के लिए महाशिवरात्रि पर निर्जला उपवास रखती हैं. पंचांग के अनुसार इस साल महाशिवरात्रि 26 फरवरी 2025 को मनाई जाएगी. हालांकि इस बार महाशिवरात्रि पर भद्रा का साया बना हुआ है.
महाशिवरात्रि पर भद्रा काल का समय: पंचांग के अनुसार 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी. इस दिन प्रातः 11 बजकर 08 मिनट से रात्रि 10 बजकर 5 मिनट तक भद्रा का साया बना रहेगा. शास्त्रों के अनुसार शिव कालों के काल महाकाल हैं इसलिए भद्रा का उनकी पूजा पर कोई प्रभाव नहीं होगा और पूरे दिन भोलेनाथ की पूजा की जा सकती है.
महाशिवरात्रि शुभ योग: 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि के दिन श्रवण नक्षत्र बन रहा है जो शाम 5 बजकर 08 मिनट तक रहेगा. इस दौरान परिध योग का संयोग भी रहेगा.
चार प्रहर की पूजा का समय: महाशिवरात्रि में चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व होता है. इन चारों प्रहर में भगवान शिव की अलग-अलग रूप में पूजा की जाती है.
प्रथम प्रहर: शाम 06:29 से रात 09 बजकर 34 मिनट तक.
द्वितीय प्रहर: रात 09:34 से 27 फरवरी सुबह 12 बजकर 39 मिनट तक
तृतीय प्रहर: 27 फरवरी को रात 12:39 से सुबह 03 बजकर 45 मिनट तक
चतुर्थ प्रहर: 27 फरवरी को सुबह 03:45 से 06 बजकर 50 मिनट तक
शिव पूजा का निशिता काल मुहूर्त: 26 फरवरी 2025 मध्यरात्रि 12:09 बजे से 12:59 बजे तक. निशिता काल पूजा की कुल अवधि 50 मिनट.
महाशिवरात्रि व्रत पारण समय: ज्योतिषियों के अनुसार महाशिवरात्रि व्रत पारण का समय 27 फरवरी को प्रातः 06 बजकर 48 मिनट से 08:54 मिनट तक है.
चार प्रहर की पूजा में मंत्र जाप
प्रथम प्रहर का मंत्र: ‘ह्रीं ईशानाय नमः’
दूसरे प्रहर मंत्र: ‘ह्रीं अघोराय नम:’
तीसरे प्रहर मंत्र: ‘ह्रीं वामदेवाय नमः’
चौथे प्रहर मंत्र: ‘ह्रीं सद्योजाताय नमः
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
22 Feb, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास एवं कार्य कुशलता से निश्चय ही संतोष होगा।
वृष राशि :- योजनायें फलीभूत होंगी तथा स्वभाव में बेचैनी, कष्टप्रद स्थिति बनेगी।
मिथुन राशि :- कार्यक्षमता अनुकूल, कार्यवृत्ति में सुधार होगा तथा संघर्ष बना रहेगा।
कर्क राशि :- आर्थिक हानि, योजना बनकर बिगड़े, कार्य-व्यवसाय रुक कर बनेंगे।
सिंह राशि :- झगड़े के कारण व्यय होगा तथा आप आरोपित होने से बचिये।
कन्या राशि :- कार्य कुशलता से संतोष, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, ध्यान से कार्य करें।
तुला राशि :- योजनायें फलीभूत होंगी, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, समय का ध्यान अवश्य रखें।
वृश्चिक राशि :- मानसिक विभ्रम से हानि, समय स्थिति को ध्यान में रखते हुये कार्य अवश्य बना लें।
धनु राशि :- मानसिक विभ्रम, उपद्रव, असमंजस की स्थिति बनेगी तथा कार्य रुकेंगे।
मकर राशि :- दैनिक कार्यगति में सुधार, आर्थिक योजना अवश्य ही सुधरेगी ध्यान दें।
कुंभ राशि :- चिन्तायें कम होंगी, कुटुम्ब के कार्य में समय बीतेगा, कार्य अवरोध होगा।
मीन राशि :- स्त्री वर्ग से सुख-भोग, ऐश्वर्य की प्राप्ति, दैनिक कार्यगति अनुकूल होगी।
पापों का होता है नाश! हिमाचल की इस मंदिर की महिमा है बहुत खास, दर्शन करते ही पूरी होती है मनोकामना
21 Feb, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जिला कांगड़ा में ऐसे कई स्थल, जहां लोगों की धार्मिक आस्था उसी में जुड़ी है. उसी में से एक है कांगड़ा में मां जयंती का मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है. पंचभीष्म मेलों में दूर-दूर से लोग माता के दर्शन करने आते हैं. इस दौरान माता के जयकारों से सारा क्षेत्र गूंज उठता है. इन मेलों के दौरान पांच दीये मां के दरबार में पांच दिन तक अखंड जलाए जाते हैं. कांगड़ा के साथ लगती पहाड़ी पर स्थित जयंती माता का मंदिर काफी प्राचीन है.
यहां लगते हैं पंचभीष्म मेले
जयंती माता मंदिर में हर वर्ष पंचभीष्म मेले लगते हैं. ये मेले हर साल कार्तिक मास की एकादशी से शुरू होते हैं. इस दौरान तुलसी को गमले में लगाकर उसे घर के भीतर रखा जाता है और चारों ओर केले के पत्र लगाकर दीपक जलाया जाता है. कांगड़ा किला के बिलकुल सामने 500 फुट की ऊंची पहाड़ी पर स्थित जयंती मां दुर्गा की छठी भुजा का एक रूप है. द्वापर युग में यह मंदिर यहां पर निर्मित हुआ था. जयंती मां, जहां जीत की प्रतीक हैं, तो वहीं पाप नाशिनी भी हैं.
पांडवों से जुड़ा है इतिहास
शक्तिपीठ माता बज्रेश्वरी देवी मंदिर से करीब छः किलोमीटर दूर पहाड़ी पर स्थित जयंती माता का मंदिर भक्तों के लिए महत्त्वपूर्ण आस्था स्थल है. कांगड़ा के आसपास के क्षेत्रों के साथ अन्य प्रदेशों के लोगों में भी जयंती माता के प्रति काफी आस्था है. बताया जाता है कि मंदिर के इतिहास से कांगड़ा का भी इतिहास जुड़ा है.पौराणिक कथाओं के अनुसार यहां पर पांडवों का भी वास कुछ समय तक रहा है. पंचभीष्म मेलों के दौरान इस क्षेत्र का नजारा ही कुछ और होता है. मंदिर में पांच दिनों तक चलने वाले इन मेलों में कांगड़ा ही नहीं, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों से भी लाखों की संख्या में लोग यहां पर मां के दर्शनों के लिए उमड़ते हैं.
बनाया जा रहा है मंदिर के लिए बेहतर रास्ता
बीते वक्त के साथ-साथ यहां पर बेहतर रास्ते का निर्माण भी करवाया गया है और अन्य सुविधाएं भी लोगों को उपलब्ध करवाई जाती हैं. कार्तिक मास की एकादशी में पंचभीष्म का पर्व विशेषकर महिलाओं के लिए खास है. महिलाएं पांच दिन तक व्रत रखती हैं और मात्र फलाहार पर ही निर्भर रहती हैं. तुलसी को गमले में लगाकर उसे घर के भीतर रखा जाता है और चारों ओर केले के पत्र लगाकर दीपक जलाया जाता है. उसके बाद पांचवें दिन पूजे हुए दीपक को बुझा दिया जाता है. इसी दीपक को पंचभीष्म के दिन सात साल तक जलाया जाता है.
क्या कहता है पौराणिक इतिहास
जयंती माता को पंच भीष्म के साथ-साथ मनोकामना पूर्ण करने वाली माता के नाम भी जाना जाता है. एक अन्य कथा के अनुसार जब इंद्र को राक्षस ने युद्ध में घेर लिया था तो तब मां जयंती ने मां चामुंडा का रूप धारण करके इंद्र की सहायता भी की थी. यह विख्यात है कि कोई पापी भी यहां पर जाता है, तो मां के दरबार की यात्रा करके उसके पाप नष्ट होते हैं.
महाशिवरात्रि पर 11 घंटे भद्रा का साया... कब और कैसी होगी भगवान शिव की पूजा?
21 Feb, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में फाल्गुन माह का विशेष महत्व है. इस महीने भगवान शंकर की पूजा आराधना करने का विधान है. धार्मिक मान्यता है कि फाल्गुन माह में भगवान शिव की उपासना करने से भाग्य में वृद्धि और जीवन में सुख समृद्धि आती है. वैदिक पंचांग के अनुसार हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था. ज्योतिष गणना के अनुसार इस साल महाशिवरात्रि पर भद्रा का साया भी रहेगा. भद्रा के दौरान पूजा, मुंडन संस्कार और गृह प्रवेश समेत शुभ अथवा मांगलिक कार्यों से परहेज करना चाहिए. ऐसी स्थिति में चलिए इस रिपोर्ट में जानते हैं कि महाशिवरात्रि पर भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा का क्या शुभ मुहूर्त है और कब भद्रा लग रहा है.
दरअसल, अयोध्या के ज्योतिषी पंडित कल्कि राम बताते हैं कि वैदिक पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 26 फरवरी को सुबह 11. 08 बजे से होगी और इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 27 फरवरी को सुबह 08. 54 पर होगा. ऐसे में 26 फरवरी को देशभर में महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार महाशिवरात्रि पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं. वहीं, इस बार महाशिवरात्रि पर 11 घंटे का भद्रा का साया रहेगा. गौरतलब है कि भद्रा के दौरान कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता.
पूजा का शुभ मुहूर्त
महाशिवरात्रि पर भद्रा का साया 26 फरवरी को सुबह 11. 08 बजे से लेकर रात 10. 05 बजे तक रहेगा. महाशिवरात्रि के दिन चतुर्दशी तिथि आरंभ होने के साथ ही भद्रा का साया भी शुरू हो जाएगा. यानी महाशिवरात्रि पर करीब 11 घंटे तक भद्रा का साया रहेगा. शास्त्रों के अनुसार भद्रा के दौरान मांगलिक कार्य नहीं किए जाते. महाशिवरात्रि के दिन भद्रा का वास पाताल लोक में होगा. ऐसे में महाशिवरात्रि के दिन किसी भी समय महादेव की पूजा की जा सकती है लेकिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:19 से लेकर रात्रि 9:26 तक रहेगा.
क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि? हरिद्वार के ज्योतिषी ने बताया आंखें खोल देने वाला सच
21 Feb, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में साल भर धार्मिक पर्व होते रहते हैं. उन्हें विधि विधान से पूर्ण करने पर चमत्कारी लाभ होते हैं. हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि पर्व का खास महत्त्व है. महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ की पूजा अर्चना, स्तोत्र आदि के पाठ का विधान है. इस दिन भोले का अभिषेक करने से चमत्कारी लाभ होते हैं. महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को होता है. हरिद्वार के पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि महाशिवरात्रि का पर्व भोलेनाथ और माता पार्वती को समर्पित है. महाशिवरात्रि का सामान्य शब्दों में अर्थ महा शिव रात्रि है. भगवान शिव का पूजा-पाठ प्रदोष काल यानी रात्रि में किया जाता है. इस दिन भोलेनाथ के भक्त व्रत, पूजा और स्तोत्र आदि का पाठ करते हैं.
हजारों साल तपस्या
ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन ही भोलेनाथ और माता पार्वती का विवाह हुआ था. माता पार्वती ने भोलेनाथ को पति रूप में प्राप्त करने के लिए हजारों साल तक कठिन तपस्या की थी. फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन भोलेनाथ और पार्वती का विवाह हुआ था. इस पर्व के दिन भोलेनाथ और माता पार्वती के निमित्त व्रत पूजा पाठ करने का विशेष महत्त्व है
शिवलिंग से कनेक्शन
महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान भोले ने खुद को पहली बार शिवलिंग के रूप में प्रकट किया था. भक्तों की मनोकामना पूर्ण हो सके इसके लिए भोलेनाथ ने खुद को शिवलिंग के रूप में बदला था. महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर दूध, जल, शहद, तिल, जौ, बेलपत्र आदि से भोलेनाथ का अभिषेक करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं.
इसलिए करते हैं जलाभिषेक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन ही भोलेनाथ ने संपूर्ण सृष्टि का कल्याण करने के लिए समुद्र मंथन से निकाला कालकुट विष अपने कंठ में धारण किया था. कहा जाता है कि जब भोलेनाथ ने इस विष को पिया था तो उनका तापमान अधिक बढ़ गया था, जिसके बाद सभी देवताओं ने उन पर जल डाला था. इससे भोलेनाथ अत्यधिक प्रसन्न हुए थे. महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर जल, दूध आदि अर्पित करने से भोलेनाथ प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर देते हैं.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
21 Feb, 2025 02:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- इष्ट मित्रों से कार्य में बेचैनी व रुकावट होगी, असमर्थता का वातावरण रहेगा।
वृष राशि :- आशानुकूल सफलता से कार्य बनेंगे, रुके कार्य बनने के योग हैं ध्यान अवश्य दें।
मिथुन राशि :- परिश्रम से सफलता, कार्य बनेंगे, रुके कार्य एक-एक करके बनेंगे।
कर्क राशि :- कुटुम्ब की समस्यायें कुछ सुलझें, व्यवसायिक क्षमता अवश्य बढ़ेगी।
सिंह राशि :- विशेष कार्य स्थिगित रखें, किसी विवाद या झगड़े से निश्चय हानि होगी।
कन्या राशि :- सोचे कार्य परिश्रम से पूर्ण होंगे, समय स्थिति का ध्यान रखकर कार्य अवश्य करें।
तुला राशि :- आशानुकूल सफलता से हर्ष, दैनिक कार्य में सुधार होगा, धैर्यपूर्वक कार्य करें।
वृश्चिक राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति, मानसिक विभ्रम, उत्तेजना से बचने का प्रयास करें।
धनु राशि :- धन लाभ, बिगड़े हुये कार्य बनेंगे, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, समय का ध्यान रखें।
मकर राशि :- विशेष कार्य बिगड़ेंगे, विवाद झगड़े का कारण बनेगा, विवादास्पद स्थिति से बचें।
कुंभ राशि :- कुटुम्ब के कार्य में समय बीतेगा, स्त्री वर्ग से तनाव अवश्य ही होगा।
मीन राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति, व्यर्थ विभ्रम, धन का व्यय तथा अवरोध होगा।
बिजली मीटर आग्नेय कोण में लगवाएं
20 Feb, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
घरों के बाहर गलत दिशा में बिजली मीटर जीवन में कई समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में किसी भी विद्युत उपकरण की दिशा बहुत महत्वपूर्ण होती है। यदि मीटर गलत दिशा में लगा हो तो इससे परिवार को आर्थिक परेशानियों, स्वास्थ्य समस्याओं और घरेलू कलह का सामना करना पड़ सकता है।
वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि घर के विद्युत उपकरणों को अग्नि तत्व की दिशाओं में रखना चाहिए। अग्नि तत्व की प्रमुख दिशाएं उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) और दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) मानी जाती हैं। उत्तर-पूर्व दिशा घर की समृद्धि और आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है, जबकि दक्षिण-पूर्व दिशा अग्नि तत्व से जुड़ी होती है और स्वास्थ्य तथा ऊर्जा संतुलन बनाए रखने में सहायक होती है। यदि विद्युत मीटर इन दिशाओं में लगा हो तो यह घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, जबकि गलत दिशा में लगे होने पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
यदि घर का विद्युत मीटर गलत दिशा में स्थापित किया गया है, तो परिवार को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आर्थिक तंगी, कर्ज बढ़ना, घरेलू अशांति और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा, कई बार घर के सदस्यों को मानसिक तनाव और अनिद्रा जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। वास्तु दोष के कारण घर में बार-बार बिजली की समस्याएं, फ्यूज उड़ना या मीटर में खराबी आना आम हो सकता है।
ऐसी स्थिति में यदि मीटर की दिशा बदलना संभव न हो, तो वास्तु उपायों द्वारा इसके नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण-पूर्व कोने में सरसों के तेल का दीपक जलाना लाभकारी होता है। इसके अलावा, मीटर के पास लाल कपड़ा बांधना, वहां तुलसी का पौधा लगाना या स्वस्तिक का चिन्ह अंकित करना भी प्रभावी उपाय हो सकते हैं। यदि मीटर को स्थानांतरित करना संभव हो, तो इसे आग्नेय कोण में लगवाना सबसे अच्छा होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में बिजली के उपकरणों को सही दिशा में रखना बहुत आवश्यक है। इससे न केवल आर्थिक और पारिवारिक स्थिति बेहतर बनी रहती है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।
सपने में घोड़ा दिखना सफलता का देता है संकेत
20 Feb, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने केवल रात की कल्पनाएं नहीं होते, बल्कि ये व्यक्ति के भविष्य से जुड़े संकेत भी देते हैं। कई बार हमें सपनों में विभिन्न जीव-जंतु दिखाई देते हैं, जिनका अर्थ समझना आसान नहीं होता। हालांकि, ज्योतिष और स्वप्न शास्त्र के माध्यम से इन संकेतों की व्याख्या की जा सकती है। ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार के अनुसार, कुछ खास जीवों के सपने भविष्य में होने वाली घटनाओं का संकेत देते हैं।
यदि कोई व्यक्ति सपने में घोड़ा देखता है, तो यह सफलता और उन्नति का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से दौड़ता हुआ घोड़ा देखने का अर्थ होता है कि व्यक्ति अपने करियर में तेजी से प्रगति करेगा। वहीं, सफेद घोड़ा देखने से करियर में नए अवसर प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाती है। यह सपना सकारात्मक बदलाव और उज्जवल भविष्य की ओर इशारा करता है।
ऊंट को भी स्वप्न शास्त्र में शुभ माना गया है। यदि किसी व्यक्ति को सपने में ऊंट दिखाई देता है, तो यह संकेत करता है कि उसे जल्द ही आर्थिक सफलता मिलेगी। ऊंट धैर्य और परिश्रम का प्रतीक है, इसलिए इस सपने का अर्थ है कि कड़ी मेहनत के बाद व्यक्ति को धन और सफलता का लाभ मिलेगा। व्यापार और निवेश से जुड़े लोगों के लिए यह सपना अत्यधिक शुभ माना जाता है।
इसके विपरीत, सपने में चीटियां देखना शुभ संकेत नहीं माना जाता। यदि कोई व्यक्ति सपने में बहुत सारी चीटियां देखता है, तो यह उसके जीवन में कठिनाइयों और परेशानियों के आने की चेतावनी हो सकती है। यह सपना बताता है कि व्यक्ति को अपने कार्यों में अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए और आने वाली समस्याओं के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।
सपने में सफेद उल्लू देखना अत्यंत शुभ संकेत माना जाता है। सफेद उल्लू का संबंध बुद्धिमत्ता और समृद्धि से होता है। यदि किसी व्यक्ति को यह सपना आता है, तो इसका अर्थ है कि उसे किसी प्रभावशाली व्यक्ति का मार्गदर्शन मिलेगा, जिससे उसके जीवन में आर्थिक प्रगति होगी। यह सपना सफलता के नए अवसरों के आगमन का संकेत भी देता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपनों में दिखने वाले जीवों के संकेतों को समझकर व्यक्ति अपने भविष्य की संभावनाओं का पूर्वानुमान लगा सकता है और उचित दिशा में कार्य करके अपने जीवन को बेहतर बना सकता है।
इस तरह के भक्तों के पास रहते हैं भगवान
20 Feb, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
किसी भी वस्तु की चेतनता की पहचान इच्छा, क्रिया अथवा अनुभूति के होने से होती है। अगर किसी वस्तु में ये तीनों नहीं होते हैं, तो उसे जड़ वस्तु कहते हैं और इन तीनों के होने से उसे चेतन वस्तु कहते हैं। मनुष्य में इन तीनों गुणओं के होने से उसे चेतन कहते हैं। मनुष्य के मृत शरीर में इनके न होने से उसे अचेतन अथवा जड़ कहते हैं।
प्रश्न यह उठता है कि जो मनुष्य अभी-अभी इच्छा, क्रिया अथवा अनुभूति कर रहा था और चेतन कहला रहा था, वही मनुष्य इनके न रहने से मृत क्यों घोषित कर दिया गया जबकि वह सशरीर हमारे सामने पड़ा हुआ है? आमतौर पर एक डॉक्टर बोलेगा कि इस शरीर में प्राण नहीं हैं। शास्त्रीय भाषा में, जब तक मानव शरीर में आत्मा रहती है, उसमें चेतनता रहती है। उसमें इच्छा, क्रिया व अनुभूति रहती है। आत्मा के चले जाने से वही मानव शरीर इच्छा, क्रिया व अनुभूति रहित हो जाता है, जिसे आमतौर पर मृत कहा जाता है।
शास्त्रों के अनुसार स्वरूप से आत्मा सच्चिदानन्दमय होती है। सच्चिदानन्द अर्थात सत्+चित्+आनंद। संस्कृत में सत् का अर्थ होता है नित्य जीवन अर्थात् वह जीवन जिसमें मृत्यु नहीं है, चित् का अर्थ होता है ज्ञान जिसमें कुछ भी अज्ञान नहीं है और आनंद का अर्थ होता है नित्य सुख जिसमें दुःख का आभास मात्र नहीं है। यही कारण है कि कोई मनुष्य मरना नहीं चाहता, कोई मूर्ख नहीं कहलवाना चाहता और कोई भी किसी भी प्रकार का दुःख नहीं चाहता।
अब नित्य जीवन, नित्य आनंद, नित्य ज्ञान कहां से मिलेगा? जैसे सोना पाने के लिए सुनार के पास जाना पड़ता है, लोहा पाने के लिए लोहार के पास, इसी प्रकार नित्य जीवन-ज्ञान-आनंद पाने के लिए भगवान के पास जाना पड़ेगा क्योंकि एकमात्र वही हैं जिनके पास ये तीनों वस्तुएं असीम मात्रा में हैं। प्रश्न हो सकता है कि बताओ भगवान मिलेंगे कहां? ये भी एक बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है। कोई कहता है भगवान कण-कण में हैं, कोई कहता है कि भगवान मंदिर में हैं, कोई कहता है कि भगवान तो हृदय में हैं, कोई कहता है कि भगवान तो पर्वत की गुफा में, नदी में, प्रकृति में वगैरह।
वैसे जिस व्यक्ति के बारे में पता करना हो कि वह कहां रहता है, अगर वह स्वयं ही अपना पता बताए तो उससे बेहतर उत्तर कोई नहीं हो सकता। उक्त प्रश्न के उत्तर में भगवान कहते हैं कि मैं वहीं रहता हूं, जहां मेरा शुद्ध भक्त होता है। चूंकि हम सब के मूल में जो तीन इच्छाएं- नित्य जीवन, नित्य ज्ञान व नित्य आनंद हैं, वे केवल भगवान ही पूरी कर सकते हैं, कोई और नहीं। इसलिए हमें उन तक पहुंचने की चेष्टा तो करनी ही चाहिए।
भगवान स्वयं बता रहे हैं कि वह अपने शुद्ध भक्त के पास रहते हैं। अतः हमें ज्यादा नहीं सोचना चाहिए और तुरंत ऐसे भक्त की खोज करनी चाहिए जिसके पास जाने से, जिसकी बात मानने से हमें भगवद्प्राप्ति का मार्ग मिल जाए। साथ ही हमें यह सावधानी भी बरतनी चाहिए कि कहीं वह भगवद्-भक्त के वेश में ढोंगी न हो। स्कंद पुराण के अनुसार भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं कि कलियुग में ऐसे गुरु बहुत मिलेंगे जो शिष्य का सब कुछ हर लेते हैं, परंतु शिष्य का संताप हर कर उसे सद्माीर्ग पर ले आए ऐसा गुरु विरला ही मिलेगा।
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