धर्म एवं ज्योतिष
ग्रहों का जीवन के साथ ही व्यवहार पर भी पड़ता है प्रभाव
27 Feb, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्रहों का व्यक्ति के जीवन के साथ-साथ व्यवहार पर भी सीधा प्रभाव पड़ता है। हमारा व्यवहार हमारे ग्रहों की स्थितियों से संबंध रखता है या हमारे व्यवहार से हमारे ग्रहों की स्थितियां प्रभावित होती हैं। अच्छा या बुरा व्यवहार सीधा हमारे ग्रहों को प्रभावित करता है। ग्रहों के कारण हमारे भाग्य पर भी इसका असर पड़ता है। कभी-कभी हमारे व्यवहार से हमारी किस्मत पूरी बदल सकती है।
वाणी-
वाणी का संबंध हमारे पारिवारिक जीवन और आर्थिक समृद्धि से होता है।
ख़राब वाणी से हमें जीवन में आर्थिक नुक्सान उठाना पड़ता है।
कभी-कभी आकस्मिक दुर्घटनाएं घट जाती हैं।
कभी-कभी कम उम्र में ही बड़ी बीमारी हो जाती है।
वाणी को अच्छा रखने के लिए सूर्य को जल देना लाभकारी होता है।
गायत्री मंत्र के जाप से भी शीघ्र फायदा होता है।
आचरण-कर्म
हमारे आचरण और कर्मों का संबंध हमारे रोजगार से है।
अगर कर्म और आचरण शुद्ध न हों तो रोजगार में समस्या होती है।
व्यक्ति जीवन भर भटकता रहता है।
साथ ही कभी भी स्थिर नहीं हो पाता।
आचरण जैसे-जैसे सुधरने लगता है, वैसे-वैसे रोजगार की समस्या दूर होती जाती है।
आचरण की शुद्धि के लिए प्रातः और सायंकाल ध्यान करें।
इसमें भी शिव जी की उपासना से अद्भुत लाभ होता है।
जिम्मेदारियों की अवहेलना
जिम्मेदारियों से हमारे जीवन की बाधाओं का संबंध होता है।
जो लोग अपनी जिम्मेदारियां ठीक से नहीं उठाते हैं उन्हें जीवन में बड़े संकटों, जैसे मुक़दमे और कर्ज का सामना करना पड़ता है।
व्यक्ति फिर अपनी समस्याओं में ही उलझ कर रह जाता है।
अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में कोताही न करें।
एकादशी का व्रत रखने से यह भाव बेहतर होता है।
साथ ही पौधों में जल देने से भी लाभ होता है।
सहायता न करना-
अगर सक्षम होने के बावजूद आप किसी की सहायता नहीं करते हैं तो आपको जीवन में मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
कभी न कभी आप जीवन में अकेलेपन के शिकार हो सकते हैं।
जितना लोगों की सहायता करेंगे, उतना ही आपको ईश्वर की कृपा का अनुभव होगा।
आप कभी भी मन से कमजोर नहीं होंगे।
दिन भर में कुछ समय ईमानदारी से ईश्वर के लिए जरूर निकालें।
इससे करुणा भाव प्रबल होगा, भाग्य चमक उठेगा।
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
27 Feb, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- किसी आरोप से बचें, मानसिक पीड़ा तथा प्रतिष्ठा में आंच आने की स्थिति बनेगी।
वृष राशि :- सतर्कता से कार्य करें, पराक्रम तथा मनोबल उत्साहवर्धक होगा, समय का ध्यान रखें।
मिथुन राशि :- कहीं विवादग्रस्त होने से बचें अन्यथा कार्य में निराशा तथा धन हानि होगी।
कर्क राशि :- मान-प्रतिष्ठा तथा प्रभुत्व वृद्धि, कार्य कुशलता से संतोष अवश्य ही होगा, समय का ध्यान रखें।
सिंह राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल रहेगा, रुके कार्य रूपरेखा बनाकर समय पर निपटा लें।
कन्या राशि :- सामाजिक कार्यों में प्रतिष्ठा-प्रभुत्व वृद्धि तथा आर्थिक कार्य योजना सफल होगी।
तुला राशि :- कहीं विवादग्रस्त होने से बचें, समय की अनुकूलता रहेगी, समय पर कार्य करें।
वृश्चिक राशि :- समय अनुकूल नहीं विशेष कार्य स्थगित रखें, कार्य अवरोध से बचकर चलें।
धनु राशि :- स्वभाव में क्रोध व अवेश से हानि होगी, समय स्थिति का लाभ अवश्य लें।
मकर राशि :- मानसिक उद्विघ्नता हानिप्रद रहेगी, समय स्थिति का ध्यान रखकर कार्य करें।
कुंभ राशि :- स्वभाव में क्रोध व आवेश हानिप्रद, समय को समझकर काम बना लें।
मीन राशि :- अर्थ व्यवस्था से सुख-समृद्धि के साधन जुटाकर कार्य बनाने का प्रयास करें।
बुंदेलखंड का अनोखा शिव मंदिर... सिर्फ एक खास नक्षत्र में होता था निर्माण कार्य, बनाने में लगे थे 21 साल
26 Feb, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान शिव की आराधना के महापर्व महाशिवरात्रि की धूम सभी मंदिरों में पूरे उत्साह के साथ देखने को मिल रही हैं. झांसी के राजकीय इंटर कॉलेज के पास स्थित प्राचीनतम सिद्धेश्वर मंदिर की महिमा भी अपरंपार है. भगवान शिव का यह मंदिर न सिर्फ झांसी बल्कि पूरे बुंदेलखंड में फेमस है. मान्यता है कि अगर आपके घर में क्लेश और अशांति है तो बस एक बार इस मंदिर में आकर परिक्रमा कर लीजिए और आपकी सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी. महाशिवरात्रि के दिन इस मंदिर में विशेष पूजा होती है. रात 12 बजे भस्म आरती से शुरू हुआ कार्यक्रम दिन भर चलता रहेगा. महाशिवरात्रि के दिन ही इस मंदिर का स्थापना दिवस भी मनाया जाता है.
इस मंदिर के निर्माण के पीछे की कहानी भी दिलचस्प है. साल 1928 में जेल में बंद स्वतंत्रता सेनानी पंडित रघुनाथ विनायक धुलेकर के स्वप्न में शिवलिंग स्थापना का दृश्य आया था. इसके कुछ समय बाद ही पितांबरा पीठ के स्वामीजी झांसी आए और शहर से कुछ दूरी पर स्थित जंगल में ध्यान लगाकर बैठ गए. लोगों ने इनके बारे में जेल से छूटे रघुनाथ धूलेकर को बताया. धुलेकर ने अपने स्वप्न के बारे में स्वामीजी को बताया तो उन्होंने उसी जंगल में एक गड्ढा खोदने का आदेश दिया. गड्ढा खोदने पर एक शिवलिंग और नंदी की मूर्ति प्राप्त हुई. उसी स्थान पर आज यह मंदिर स्थित है. यह मूर्ति पुष्य नक्षत्र में प्राप्त हुई थी. इसी को ध्यान में रखते हुए हर महीने के पुष्य नक्षत्र में ही यहां निर्माण कार्य चलता था. आखिरकार 21 वर्ष बाद इस मंदिर का निर्माण पूरा हुआ.
शिवरात्रि पर भव्य आयोजन
शिवरात्रि के अवसर पर रात 12 बजे मंदिर में भस्म आरती की जाएगी. इसके बाद श्रद्धालु कांवड़ लेकर ओरछा जायेंगे और वहां से जल भरकर लायेंगे. इसी जल से भगवान शिव का अभिषेक किया जायेगा. शाम को 3 क्विंटल दूध से अभिषेक किया जायेगा और उसके बाद शिव बारात निकाली जाएगी.
महाशिवरात्रि पर शंकर भगवान को भांग, धतूरा और बेलपत्र क्यों चढ़ाते हैं? इसके पीछे जुड़ी है ये पौराणिक कथा
26 Feb, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देशभर में महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा. महाशिवरात्रि के दिन शिव भक्त भोले भंडारी और मां पार्वती की पूजा-अराधान करते हैं. व्रत रखते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संसार को सर्वनाश से बचाने के लिए भोलेनाथ ने विष पी लिया था. तब इस जहर के असर को कम करने के लिए देवताओं ने उनके सिर पर भांग, बेलपत्र और धतूरा रख दिया. ऐसा करते ही जहर का असर कम होने लगा. तब जाकर शिव जी को शीतलता प्राप्त हुई. इस घटना के बाद से ही शिव जी को भांग, बेलपत्र, धतूरा चढ़ाया जाने लगा. सावन का सोमवार हो या फिर महाशिवरात्रि ये तीनों चीजें जरूर अर्पित की जाती हैं.
क्या है पौराणिक कथा?
भगवान शिव को भांग, धतूरा, आक और बेलपत्र अर्पित करने के पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है. शिव महापुराण के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया, तो उसमें से पहले हलाहल विष निकला. यह विष इतना जहरीला था कि इसकी गर्मी से पूरी सृष्टि जलने लगी थी. देवता और असुर इस विष से भयभीत हो गए और इसका नाश करने का कोई उपाय नहीं दिखा. तब भगवान शिव ने समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए इस विष का पान कर लिया. हालांकि, उन्होंने इसे अपने कंठ में ही रोक लिया, जिससे उनका कंठ नीला हो गया. इस वजह से ही भोलेनाथ नीलकंठ कहलाए. जहर के असर को शरीर में संतुलित करने के लिए शिव जी को ठंडी चीजें पसंद आईं. इन ठंडी चीजों में शामिल थीं भांग, धतूरा, आक और बेलपत्र. दरअसल, इन सभी चीजों का स्वभाव शीतल होता है. इसी कारण शिवलिंग पर इन्हें अर्पित किया जाता है.
भगवान शिव को भांग और धतूरा चढ़ाने के पीछे एक और गहरा अर्थ छिपा है. ये दोनों वस्तुएं नशीली और जहरीली मानी जाती हैं. इन्हें शिव को चढ़ाने का अर्थ ये है कि हमें अपने जीवन की सारी नकारात्मकता, बुरी आदतें और कड़वाहट को शिव को समर्पित कर देना चाहिए. इसका प्रतीकात्मक अर्थ ये है कि लोगों को अपनी सभी बुरी भावनाओं और नकारात्मक विचारों का त्याग कर अपने जीवन को शुद्ध और शांत बनाना चाहिए. भांग और धतूरा शिव के प्रति हमारी समर्पण भावना और बुराइयों से मुक्ति का संकेत देते हैं.
क्या होता है निशित काल और क्यों सर्वश्रेष्ठ माना जाता है महाशिवरात्रि के दिन इस काल में पूजा करना?
26 Feb, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में धार्मिक अनुष्ठानों सहित हर विशेष पर्व, त्योहार पर भगवान की पूजा या अभिषेक आदि के लिए शुभ मुहूर्त या फिर उत्तम समय को चयनित किया जाता है. क्योंकि शुभ मुहूर्त व पवित्र समय में की गई पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है और मनोकामनाओं को भी सिद्ध किया जा सकता है. ऐसे में फिलहाल देशभर में महाशिवरात्रि की धूम मची हुई है. हर तरफ हर हर महादेव के जयकारों की गूंज है. वहीं शिवालयों में भी भगवान शिव की महाशिवरात्रि के दिन विशेष पूजा अर्चना की तैयारियां हो चुकी हैं.
महाशिवरात्रि की तैयारियों के बीच महादेव के भक्तों में शिव पूजन के लिए शुभ मुहूर्त के बारे में सर्चिंग चालू है. महाशिवरात्रि के दिन प्रातः भगवान शिव का पूजन करने के के साथ रात्रि में जागरण करके चारों प्रहर पूजा करने का विधान माना गया है. जिसमें से निशित काल को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. लेकिन कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर निशित काल क्या होता है और क्यों इस काल में पूजा करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है? तो आइए इस बारे में भोपाल के ज्योतिषाचार्य डॉ अरविंद पचौरी से विस्तार से जानते हैं महाशिवरात्रि के दिन निशित काल में पूजा का महत्व.
क्या होता है निशित काल?
शास्त्रों के अनुसार, निशित काल उस समय को कहा जाता है जब रात्रि अपने मध्य में होती है. निशित काल की अवधि एक घंटे से भी कम होती है. पंचांग के अनुसार इसे रात का आठवां मुहूर्त कहा जाता है जो कि ज्योतिषीय गणनाओं के बाद निर्धारित किया जाता है. इस काल में पूजा करने पर शांत वातावरण में सभी शक्तियां आपकी साधना से शीघ्र प्रसन्न होती हैं.
महाशिवरात्रि के दिन निशित काल में पूजा का महत्व क्यों?
महाशिवरात्रि के दिन निशित काल में पूजा करने का महत्व माना गया है. क्योंकि मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव पृथ्वी पर शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे, वह निशितकाल का ही समय था. यही कारण है कि भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए निशितकाल को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. खासकर शिवलिंग पूजन के लिए निशितकाल अच्छा समय माना जाता है. बता दें कि शिव मंदिरों में भी शिवलिंग पूजा, अनुष्ठान लगभग इसी समय किया जाता है. इसके अलावा यह दिन भगवान शिव के विवाह का दिन है इसलिए महाशिवरात्रि के दिन रात्रि के समय जागकर चारों प्रहर की पूजा करने का भी विधान माना गया है.
महाशिवरात्रि चार प्रहर पूजा मुहूर्त
महाशिवरात्रि का व्रत 26 फरवरी दिन बुधवार को किया जाएगा. वैदिक पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि 26 फरवरी, सुबह 11 बजकर 11 मिनट पर प्रारंभ होगी व 27 फरवरी, सुबह 8 बजकर 57 मिनट पर इसका समापन होगा.
निशित काल पूजा मुहूर्त – रात 12 बजकर 8 मिनट से रात 12 बजकर 58 मिनट तक, इसकी कुल अवधि 50 मिनट रहेगी.
चार प्रहर की पूजा का समय
1- रात्रि प्रथम प्रहर पूजा का समय: शाम 6 बजकर 19 मिनट से रात्रि 9 बजकर 26 मिनट के बीच
2- रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा का समय: रात्रि 9 बजकर 26 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 34 मिनट के बीच (27 फरवरी)
3- रात्रि तृतीय प्रहर पूजा का समय: मध्यरात्रि 12 बजकर 34 मिनट से मध्यरात्रि 3 बजकर 41 मिनट के बीच (27 फरवरी)
4- रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा का समय: सुबह तड़के 3 बजकर 41 मिनट से सुबह 6 बजकर 48 मिनट के बीच (27 फरवरी)
रहस्यमयी है बिलासपुर का यह महादेव मंदिर, पाताल लोक में समा जाता है शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल
26 Feb, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
छत्तीसगढ़ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां के प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है. शिवरात्रि के पावन अवसर पर शिव भक्त भगवान भोलेनाथ के मंदिरों में जलाभिषेक कर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं. लेकिन, क्या आपने कभी किसी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है, जहां शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल रहस्यमयी रूप से अदृश्य हो जाता है?
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मल्हार में स्थित पातालेश्वर (केदारेश्वर) महादेव मंदिर एक ऐसा ही अद्भुत स्थान है. यह मंदिर अपनी रहस्यमयी मान्यताओं के लिए जाना जाता है, जिससे श्रद्धालु और शोधकर्ता दोनों ही आकर्षित होते हैं.
शिवलिंग पर चढ़ाया जल कहां जाता है?
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल कहीं नजर नहीं आता है बल्कि वह सीधे पाताल लोक में समा जाता है. इसको लेकर कई धार्मिक और वैज्ञानिक धारणाएं प्रचलित हैं, लेकिन इसका रहस्य आज भी अनसुलझा है.
ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल है मल्हार
मल्हार, जो बिलासपुर शहर से लगभग 32 किलोमीटर दूर स्थित है, ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. यह स्थान कई प्राचीन मंदिरों, मूर्तियों और ऐतिहासिक संरचनाओं का घर है, जो इसकी समृद्ध संस्कृति और वास्तुकला की झलक दिखाते हैं.
कल्चुरी काल में हुआ था निर्माण
पातालेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण कल्चुरी काल (10वीं से 13वीं सदी) में हुआ था. इसे सोमराज नामक ब्राह्मण ने करवाया था. यह मंदिर ना केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि स्थापत्य कला का भी उत्कृष्ट उदाहरण है.
आस्था और श्रद्धा का केंद्र है मंदिर
यह मंदिर शिवभक्तों के लिए गहरी आस्था का केंद्र है. विशेष रूप से सावन और महाशिवरात्रि के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. भक्त यहां आकर जलाभिषेक करते हैं और भोलेनाथ से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. पातालेश्वर महादेव मंदिर ना केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह रहस्यमयी घटनाओं और ऐतिहासिक धरोहरों का संगम भी है. यहां आने वाले श्रद्धालु इसकी अनोखी विशेषताओं को देखकर अचंभित रह जाते हैं. अगर आप छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों को करीब से देखना चाहते हैं, तो यह मंदिर आपके लिए एक अद्भुत.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
26 Feb, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- व्यवसाय मंद रहेगा, कुछ चिंताएं संभव होगी, मनोबल बढ़ा ही रहेगा।
वृष राशि :- धन तथा व्यवसाय की चिंता बनी रहेगी तथा किसी आरोप से बचकर चले|
मिथुन राशि :- स्त्री से कष्ट व चिंता, व्यवसाय में आरोप तथा धन की वृद्धि अवश्य ही होगी।
कर्क राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद रहे, मान प्रतिष्ठा में वृद्धि तथा मानसिक शांति मिलेगी।
सिंह राशि :- स्वभाव में क्लेश व अशांति, अधिकारियों के आरोप से बचकर अवश्य चले अन्यथा हानि होगी।
कन्या राशि :- परिश्रम से कार्य सफल होंगे, आपकी कठोर मेहनत पर आपकी कार्ययोजना सफल होगी।
तुला राशि :- भोग ऐश्वर्य की प्राप्ति, कार्य गति उत्तम, सफलता के कार्य आप अवश्य ही जुटायेंगे।
वृश्चिक राशि :- आपके रुके कार्य पूर्ण, मनोबल उत्साहवर्धक होगा, वृथा क्लेश व अशांति से बचे।
धनु राशि :- झूठे आस्वसनों से बचकर चलें, असमंजस की स्थिति तथा तनाव पूर्ण वातावरण से बचेंगे।
मकर राशि :- दूसरों के कार्यो में वृथा समय नष्ट न करें, तनाव व शारीरिक कष्ट अवश्य ही होगा।
कुंभ राशि :- योजनाओं से लाभ, बिगड़े हुए कार्य अवश्य ही बनेंगे, योजना के कार्य पूर्ण होंगे।
मीन राशि :- कार्य सिद्ध सामान्य, आर्थिक योजना पूर्ण होगी, तथा मन का संतोष बना ही रहेगा।
हिमालय की गोद में छुपा ये मंदिर, जहां शिव परिवार एक ही मूर्ति में विराजमान!
25 Feb, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देवों के देव कहे जाने वाले महादेव हिमालय के कई क्षेत्रों में विराजमान है. ऐसे में नग्गर में स्थित है गौरी शंकर मंदिर जहां महादेव अपने पूरे परिवार के साथ विराजमान है. इस मंदिर को ग्रामीणों द्वारा शिवद्वाला के नाम से भी जाना जाता है.पांडु शैली में बने इस मंदिर में की एक और खासियत है कि यहां महादेव शिवलिंग रूप में नहीं बल्कि मूर्ति रूप में विराजमान है.
नग्गर के गौरी शंकर मंदिर में एक ही मूर्ति में पूरा शिवपरिवार विराजमान है. मंदिर के कारदार डिंपी नेगी ने बताया कि यहां एक ही पत्थर से ये मूर्ति बनी हुई है, जिसमें नंदी पर शिव पार्वती है सही ही गणेश और कार्तिकेय भी मौजूद है. स्थानीय लोगों की अटूट आस्था महादेव से जुड़ी हुई है.
पांडवों ने किया था निर्माण
इस मंदिर का निर्माण ग्यारहवीं या बारहवीं शताब्दी में हुआ है. ऐसे में मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान जब पांडव इस क्षेत्र में आए यह और उसी दौरान इस मंदिर का भी निर्माण पांडवों के द्वारा किया गया था. मंदिर के कारदार डिंपी नेगी ने बताया कि मंदिर में शिवरात्रि के दिन विशेष आयोजन किया जाता है. ऐसे में यहां भंडारे का भी आयोजन होता है. शिवरात्रि के दिन ग्रामीण यहां महादेव की पूजा अर्चना करने आते है.
आगरा के ताजमहल की तरह होती है मंदिर की सफाई
मंदिर के कारदार डिंपी नेगी ने बताया कि मंदिर की सफाई के लिए आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट के द्वारा हर 10 साल के बाद मंदिर के रख रखाव के लिए केमिकल का छिड़काव किया जाता है. ऐसी में मंदिर की दीवारों पर लगे शिवाल को भी हटाया जाता है. ऐसे में इस पुरानी धरोहर को आज भी साफ सुथरा रखा गया है.
इस मंदिर में आधी रात को आते हैं हजारों सांप, बड़े से बड़े रोग से भी मिलती है मुक्ति ! जानें क्या है इसके पीछे का रहस्य
25 Feb, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में बांगरमऊ के पास स्थित बोधेश्वर महादेव मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है. इस मंदिर का इतिहास और उससे जुड़ी कथा बहुत ही रोचक और प्रेरणादायक है. इस मंदिर में असाध्य रोगों से पीड़ित श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. यही नहीं मंदिर की महिमा इतनी है कि दूर-दूर से भक्त यहां शिव के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं. कहा जाता है कि यहां आधी रात को दर्जनों सांप शिवलिंग को स्पर्श करने आते हैं, लेकिन किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते. भक्तों का मानना है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है.
कैसे स्थापित हुआ शिवलिंग
कहा जाता है कि बहुत समय पहले नेवल नामक राज्य के एक राजा थे जो भगवान शिव के परम भक्त थे. एक रात उन्हें स्वप्न में भगवान शिव ने दर्शन दिए और उन्हें पंचमुखी शिवलिंग, नंदी और नवग्रह स्थापित करने का आदेश दिया. राजा ने अगले ही दिन भगवान शिव के आदेश का पालन करते हुए पंचमुखी शिवलिंग, नंदी और नवग्रह का निर्माण शुरू करवाया. जब यह कार्य पूरा हो गया तो राजा ने इन सभी को रथ में रखकर अपनी राजधानी की ओर प्रस्थान किया.
ऐसे हुआ मंदिर का निर्माण
जैसे ही रथ राजधानी में प्रवेश करने लगा अचानक वह जमीन में धंसने लगा. राजा और उनके सैनिक बहुत कोशिश करने के बाद भी रथ को निकालने में असफल रहे. तब राजा को समझ में आया कि भगवान शिव की यही इच्छा है कि इन सभी की स्थापना इसी स्थान पर की जाए. उन्होंने तत्काल ही उस स्थान पर पंचमुखी शिवलिंग, नंदी और नवग्रह की स्थापना करवा दी और वहां एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया.
भगवान शिव ने स्वयं राजा को इस कार्य का बोध कराया था इसलिए इस मंदिर का नाम बोधेश्वर महादेव मंदिर रखा गया. इस मंदिर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग के पत्थर के बारे में कहा जाता है कि यह पत्थर दुर्लभ है और 400 साल पहले विलुप्त हो चुका है. अब धरती पर यह पत्थर नहीं मिलते हैं. वहीं नंदी और नवग्रह में जो पत्थर लगे हैं उन पर पाषाण काल की पच्चीकारी की गई है जो अपने आप में अद्भुत है.
बोधेश्वर महादेव मंदिर में हर साल हजारों भक्त भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं. यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि इस मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है.
दर्जनों सांप करते हैं शिवलिंग को स्पर्श
इस मंदिर से जुड़ी एक और अद्भुत कथा है. यहां आधी रात में दर्जनों सांप शिवलिंग को स्पर्श करने आते हैं. बताया जाता है कि पंचमुखी शिवलिंग को स्पर्श करने के बाद सांप वापस जंगल में लौट जाते हैं. हैरानी की बात यह है कि इतने सांपों के आने के बाद भी किसी स्थानीय नागरिक को कोई क्षति नहीं पहुंची है. यह घटना अपने आप में एक रहस्य है जिसे देखकर हर कोई चकित रह जाता है.
असाध्य रोग होते हैं दूर
बोधेश्वर महादेव मंदिर न केवल अपनी रहस्यमयी घटनाओं के लिए प्रसिद्ध है बल्कि यह असाध्य रोगों से पीड़ित श्रद्धालुओं के लिए भी आशा की किरण है. यहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी बीमारियों से मुक्ति पाने की कामना लेकर आते हैं. मंदिर के पुजारी बताते हैं कि भोलेनाथ की कृपा से कई लोगों की मुरादें पूरी हुई हैं और उन्हें रोगों से मुक्ति मिली है.
बेहद चमत्कारी है पीली सरसों, इन आसान उपायों की मदद से दूर होगी हर परेशानी
25 Feb, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हमारे जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियां आती हैं जब हमें ऐसा लगता है कि कोई नकारात्मक शक्ति या बाधा हमारे सुख-समृद्धि में रुकावट डाल रही है. इसका प्रभाव न केवल हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है बल्कि व्यापार, नौकरी और व्यक्तिगत जीवन पर भी महसूस किया जाता है. कई बार बिना किसी कारण के ही जीवन में असफलता और बाधाएं आती हैं, जिनका समाधान समझ नहीं आता. ऐसे में पीली सरसों से जुड़े कुछ सरल और प्रभावी उपाय अपनाकर इन समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है. इन आसान और सरल उपाय के बारे में बता रहे हैं
नजरदोष और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव
अगर आपको ऐसा लगता है कि आपके घर के सदस्यों को बार-बार नजर लग रही है, सेहत खराब हो रही है या मानसिक तनाव बढ़ रहा है, तो पीली सरसों का यह उपाय करें:
1. एक छोटी चुटकी पीली सरसों लें.
2. उसमें थोड़ा सा कपूर मिलाएं और सरसों के तेल की कुछ बूंदें डालें.
3. इस मिश्रण को अपने दाहिने हाथ में लेकर सात बार अपने सिर के ऊपर घड़ी की उल्टी दिशा में घुमाएं.
4. इसके बाद इसे किसी प्लेट में रखकर जला दें.
5. ऐसा करने से तुरंत राहत महसूस होगी और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होगी.
व्यापार और धन संबंधित बाधाओं के लिए
व्यापार ठीक से नहीं चल रहा हो और अचानक घाटा हो रहा है या दुकान में ग्राहकों की संख्या कम हो गई है, तो यह उपाय करें:
1. रात को अपनी दुकान, ऑफिस या फैक्ट्री के चारों कोनों में एक-एक चुटकी पीली सरसों डालें.
2. अगली सुबह इसे इकट्ठा करें और किसी व्यस्त सड़क पर फेंक दें ताकि गाड़ियों के नीचे आकर यह नष्ट हो जाए.
3. इससे व्यापार में बाधाएं दूर होंगी और उन्नति के मार्ग खुलेंगे.
घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए
घर में अगर बार-बार झगड़े हो रहे हैं, कलह का माहौल बना रहता है, तो आप ये उपाय कर सकते हैं:
1. घर के मुख्य द्वार पर थोड़ा सा पीली सरसों का छिड़काव करें.
2. हफ्ते में एक बार, खासकर शनिवार को, सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
3. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी और अशांति समाप्त होगी.
सुरक्षा के लिए
आपको ऐसा लगता है कि कोई व्यक्ति आपके खिलाफ षड्यंत्र कर रहा है तो यह उपाय करें.
1. शाम के समय एक चुटकी पीली सरसों लेकर उसे जमीन पर रखकर अपने पैरों से दबा दें.
2. इस दौरान प्रार्थना करें कि आपके जीवन से परेशानियां दूर हो जाएं.
4. यह उपाय घर के बाहर करना अधिक प्रभावी रहेगा.
अचानक आने वाली परेशानियों से बचाव के लिए
आप जो भी काम करने जाते हैं उसमें रुकावट आ जाती है, तो यह उपाय करें.
1. रोज़ सुबह थोड़ी सी पीली सरसों लेकर अपने हाथ में रखें.
2. इसे कपूर के साथ मिलाकर जलाएं और राख को घर के बाहर फेंक दें.
3. यह उपाय सात दिनों तक करें. इससे अनचाही रुकावटें दूर होंगी.
पीली सरसों एक साधारण सी वस्तु है, लेकिन इसके उपाय अत्यंत प्रभावी माने जाते हैं. इन्हें अपनाकर आप अपने जीवन की कई समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं. ध्यान रखें कि ये उपाय पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक किए जाएं ताकि इनका पूरा लाभ मिल सके. यदि आप लगातार परेशानियों का सामना कर रहे हैं, तो पीली सरसों के इन उपायों को अपनाकर अपने जीवन को सुख-समृद्धि की ओर ले जाएं.
इस तरह हुआ था भगवान शिव का जन्म, जानिए महादेव के अवतरित होने की ये अद्भुत कथा
25 Feb, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का दिन है. हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है. भगवान शिव, जिन्हें भोलेनाथ, शिवशंभू, महादेव आदि नामों से जाना जाता है, इस सृष्टि के संहारकर्ता हैं. लेकिन, उनकी उत्पत्ति कैसे हुई, यह एक रहस्य है.
शिव का प्रादुर्भाव: एक अद्भुत कहानी
भगवान शिव का जन्म नहीं हुआ है, वे स्वयंभू हैं. फिर भी, पुराणों में उनकी उत्पत्ति का वर्णन मिलता है. विष्णु पुराण के अनुसार, ब्रह्मा भगवान विष्णु की नाभि कमल से उत्पन्न हुए, जबकि शिव भगवान विष्णु के माथे के तेज से प्रकट हुए. श्रीमद् भागवत के अनुसार, एक बार जब भगवान विष्णु और ब्रह्मा अहंकार में डूबकर स्वयं को श्रेष्ठ बताने लगे, तब एक जलते हुए खंभे से भगवान शिव प्रकट हुए.
ब्रह्मा के पुत्र रूप में शिव
विष्णु पुराण में वर्णित शिव के जन्म की कहानी शायद भगवान शिव का एकमात्र बाल रूप वर्णन है. इसके अनुसार, ब्रह्मा को एक बच्चे की आवश्यकता थी. उन्होंने इसके लिए तपस्या की. तब अचानक उनकी गोद में रोते हुए बालक शिव प्रकट हुए. ब्रह्मा ने बच्चे से रोने का कारण पूछा, तो उन्होंने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया कि उनका कोई नाम नहीं है, इसलिए वह रो रहे हैं. तब ब्रह्मा ने शिव का नाम ‘रूद्र’ रखा, जिसका अर्थ होता है ‘रोने वाला’. शिव तब भी चुप नहीं हुए. इसलिए ब्रह्मा ने उन्हें दूसरा नाम दिया, पर शिव को नाम पसंद नहीं आया और वे फिर भी चुप नहीं हुए. इस तरह शिव को चुप कराने के लिए ब्रह्मा ने 8 नाम दिए, और शिव 8 नामों (रूद्र, शर्व, भाव, उग्र, भीम, पशुपति, ईशान और महादेव) से जाने गए.
शिव के जन्म का रहस्य
शिव के इस प्रकार ब्रह्मा पुत्र के रूप में जन्म लेने के पीछे भी विष्णु पुराण की एक पौराणिक कथा है. इसके अनुसार, जब धरती, आकाश, पाताल समेत पूरा ब्रह्माण्ड जलमग्न था, तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) के सिवा कोई भी देव या प्राणी नहीं था. तब केवल विष्णु ही जल सतह पर अपने शेषनाग पर लेटे नजर आ रहे थे. तब उनकी नाभि से कमल नाल पर ब्रह्मा जी प्रकट हुए. ब्रह्मा-विष्णु जब सृष्टि के संबंध में बातें कर रहे थे, तो शिव जी प्रकट हुए. ब्रह्मा ने उन्हें पहचानने से इंकार कर दिया. तब शिव के रूठ जाने के भय से भगवान विष्णु ने दिव्य दृष्टि प्रदान कर ब्रह्मा को शिव की याद दिलाई.
ब्रह्मा को अपनी गलती का एहसास हुआ और शिव से क्षमा मांगते हुए उन्होंने उनसे अपने पुत्र रूप में पैदा होने का आशीर्वाद मांगा. शिव ने ब्रह्मा की प्रार्थना स्वीकार करते हुए उन्हें यह आशीर्वाद प्रदान किया. जब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना शुरू की, तो उन्हें एक बच्चे की जरूरत पड़ी और तब उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद ध्यान आया. अतः ब्रह्मा ने तपस्या की और बालक शिव बच्चे के रूप में उनकी गोद में प्रकट हुए.भगवान शिव की यह रहस्यमय गाथा हमें उनकी शक्ति और महिमा का बोध कराती है.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
25 Feb, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- व्यवसाय मंद रहेगा, कुछ चिंताएं संभव होगी, मनोबल उत्साह वर्धक रहेगा, ध्यान रखे।
वृष राशि :- धन का व्यय एवं चिंता बनेगी, किसी के अवरोध से मन दुखी अवश्य ही होगा|
मिथुन राशि :- स्त्री वर्ग से कष्ट, चिंता व्यावसायिक कार्यों में अवरोध अवश्य ही होगा।
कर्क राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद रहेगा, सामाजिक प्रतिष्ठा के योग अवश्य बनेंगे।
सिंह राशि :- स्वभाव में क्लेश व अशांति होगी, अधिकारियों के अवरोध से मन अशांत रहेगा।
कन्या राशि :- परिश्रम से कार्य सफल होंगे, आपकी कार्ययोजना मेहतन से सफल होंगे।
तुला राशि :- भोग ऐश्वर्य की प्राप्ति, कार्य गति मंद, सफलता के साधन अवश्य जुटायें।
वृश्चिक राशि :-किसी का कार्य बनने से मनोबल बढ़ेगा, तनाव व क्लेश से बचने का प्रयास अवश्य करें।
धनु राशि :- झूठे आरोप व क्लेश असमंजस युक्त रखे तथा सुख समृद्धि के साधन जुटाए।
मकर राशि :- दूसरों के कार्यो में वृथा समय नष्ट न करें, मानसिक बैचेनी, तनाव बनेगा।
कुंभ राशि :- धन लाभ होगा, बिगड़े हुए कार्य बनेंगे, आशानुकूल सफलता से हर्ष अवश्य ही होगा।
मीन राशि :- कार्यगति सामान्य, आर्थिक योजना फलीभूत होगी, तथा संतोष से कार्य बना लें।
घर के आंगन में लगा लें ये पौधा, पितृदोषों सहित शनि, केतु के अशुभ प्रभावों से मिलेगी मुक्ति
24 Feb, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमावस्या तिथि का हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व माना गया है. क्योंकि इस दिन दान-धर्म, पिंडदान व पितरों के निमित्त कई पुण्यकर्म किये जाते हैं जिससे की उनकी आत्मा को शांति मिले. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृदोषों से मुक्ति पाने के लिए अमावस्या तिथि श्रेष्ठ मानी जाती है. इस दिन किये गये हर छोटे-बड़े उपाय पितरों की शांति के लिए शुभ माने जाते हैं.
इसी के साथ ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, अगर अमावस्या तिथि के दिन घर के आंगन में एक छोटा से पौधे को लगा दिया जाए तो इससे ना सिर्फ पितृदोषों से मुक्ति मिलती है, साथ ही कुंडली में मौजूद खराब शनि, केतु के दोषों से भी राहत मिलती है. तो आइए ज्योतिषाचार्य व वास्तु सलाहकार डॉ अरविंद पचौरी से जानते हैं कौन सा है वो पौधा जो कि घर के आंगन में लगाने से पितृदोषों से राहत पाई जा सकती है.
पूजा-हवन में इस पेड़ का है विशेष महत्व
बता दें कि जिस चमत्कारी पेड़ की हम बात कर रहे हैं वह पेड़ नीम का पेड़ है. नीम के पेड़ के औषधीय गुणों के बारे में तो हर व्यक्ति जानता है, साथ ही आध्यात्मिक रुप से भी नीम का पेड़ काफी उपयोगी माना जाता है. हवन, पूजा-पाठ आदि में नीम की लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है. नीम का पेड़ की पत्तियों को धुआँ घर में करने पर नकारात्कत ऊर्जा समाप्त होती है.
ग्रहदोषों से दिलाता है राहत
ज्योतिषशास्त्र व वास्तुशास्त्र दोनों में ही नीम के पेड़ का महत्व बताया है. ज्योतिष के अनुसार, नीम के पेड़ के होने से घर में मौजूद राहु की दशा के साथ-साथ शनि की दशा में मिलने वाले कष्टों से रहात मिलती है और इसके पत्तों का जल निकालकर पानी में डालकर स्नान करने से कुंडली में केतु ग्रह शांत होता है.
पितृदोष से मुक्ति के लिए
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, अगर आपके कुंडली में पितृदोष है और आप इससे राहत पाना चाहते हैं तो अमावस्या तिथि के दिन या सामान्य किसी भी दिन घर के आंगन में नीम का पेड़ लगा लें. इससे आपको पितरों का आशीर्वाद मिलता है साथ ही नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और घर में सकारात्मकता का वास होता है.
लेकिन नीम का पेड़ लगाने से पहले एक बात का विशेष ध्यान रखें कि इसे घर की दक्षिण या उत्तर-पश्चिम कोने में लगाएं. इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और साथ ही पितरों का आशीर्वाद भी आप पर सदैव बना रहता है.
नीम की लकड़ी दिलाएगी शनि दशा से राहत
अगर आपके उपर शनि की महादशा चल रही है तो आप इस दौरान नीम की लकड़ी की माला बानकर पहन लें, इससे आपको लाभ प्राप्त होगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इससे शनि की महादशा के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है.
काशी विश्वनाथ मंदिर में 26 फरवरी को नहीं होगा शृंगार भोग और शयन आरती
24 Feb, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देशभर में मौजूद 12 ज्योतिर्लिंगों में महाशिवरात्रि का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. हर जगह विशेष पूजा-आरती का आयोजन किया जाता है, जिन्हें देखने व बाबा के दर्शन के सुबह से रात तक श्रृद्धालुओं का तांता लगा रहता है.
इसके साथ ही बता दें कि उत्तर प्रदेश के बनारस में मौजूद काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग में भी महाशिवरात्रि के दिन बाबा विश्वनाथ की चार प्रहर की विशेष आरती की जाएगी. लेकिन प्रतिदिन होने वाली सप्त ऋषि, श्रृंगार भोग और शयन आरती का आयोजन नहीं किया जाएगा.
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की ऑफिशियल वेबसाइट https://www.shrikashivishwanath.org/ पर इस बात की जानकारी दी गई है. वेबसाइट के अनुसार, 26 फरवरी, महाशिवरात्रि के दिन सप्त ऋषि, श्रृंगार भोग और शयन आरती नहीं की जाएगी. वहीं महाशिवरात्रि के दिन होने वाली आरती पूजा के नये शिड्यूल की जानकारी देते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने बताया कि परंपरा के मुताबिक महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ धाम में चार प्रहर की आरती होती रही है.
महाशिवरात्रि के दिन मंगला आरती का समय
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन पूजा शिड्यूल की चर्चा करते हुए बताया कि बाबा की मंगला आरती सुबह 2:15 बजे शुरू होगी और करीब 3 बजकर 15 मिनट पर संपन्न होगी और और फिर 3 बजकर 30 मिनट पर श्राद्धालुओं के दर्शन के लिए पट खोल दिये जाएंगे.
रात्रि में इस समय से शुरु होगी चार प्रहर की आरती
इसके बाद सुबह 11 बजकर 40 मिनट पर मध्याहन भोग आरती का आयोजन किया जाएगा. यह आरती 12 बजकर 20 मिनट तक संपन्न होगी. इसी क्रम में उन्होंने चारों प्रहर की आरती का भी शिड्यूल बताया. कहा कि रात्रि में 11 बजे से लेकर अगले दिन प्रातः 6.30 बजे तक चार पहर की आरती आयोजित की जाएगी. आगे उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि की रात्रि में मंदिर के कपाट बंद नहीं किये जाएंगे. अतः दर्शनार्थियों को दर्शन का मौका दिया जाएगा.
महाकुंभ से घर लाए जल का ऐसे रखें ध्यान अन्यथा बढ़ जाएंगे जीवन में कष्ट
24 Feb, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करोड़ों लोग देश विदेश से महाकुम्भ में अमृत स्नान करने आये हैं. धार्मिक मान्यताओं के आधार पर अमृत स्नान के बाद अपने घर गंगाजल और गंगारज लेकर गये हैं. घर में गंगाजल और रज रखने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं. वास्तु दोष से आराम मिलता है. घर में गंगाजल रखने से नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है.सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ जाता है. घर में खुशहाली आती है. तीर्थक्षेत्र से आने वाला जल घर में हर मांगलिक कार्य में काम आता है. घर,दुकान, फैक्ट्री आदि में पूजन के लिये भी गंगाजल की आवश्यकता होती है. गंगाजल को हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना गया है. यदि आप महाकुंभ से गंगाजल ले आये हैं तो उसको घर में रखने के लिये ये सावधानी भी ध्यान में रखें. इसकी शुद्धता और पवित्रता का ध्यान रखना परम आवश्यक है.
घर के जिस स्थान पर गंगाजल रखा गया है उसे स्थान पर मांस मदिरा का सेवन करने से ग्रह दोष लगता है. इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं.
प्लास्टिक की बोतल अथवा डिब्बे के अंदर गंगाजल रखना अशुद्ध माना जाता है. गंगाजल रखने के लिए तांबे के बर्तन अथवा पीतल या एल्युमिनियम के बर्तन को प्रयोग में लेना चाहिए.
यदि गंगाजल को आप चांदी के बर्तन में सहेज कर घर के अंदर मंदिर में रखते हैं तो इससे आपको मानसिक रूप से मजबूती मिलती है. जन्म कुंडली में चंद्रमा अच्छे परिणाम देने लगता है.मानसिक बीमारियों से छुटकारा मिलता है.
दैनिक रूप से घर के चारो तरफ गंगाजल छिड़काव करने से नजर दोष, वास्तु दोष एवं नकारात्मक शक्तियों से बचाव होता है.घर के मुख्य द्वार पर जल का छिड़काव करने से सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित होती है. इतना ही नहीं, घर की शुद्धि भी होती है.
गंगाजल को स्पर्श करने से पहले आपको अपनी शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए. मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को गंगाजल नहीं छूना चाहिए. मासिक धर्म के दौरान गंगाजल रखे कमरे में भी महिलाओं को नहीं जाना चाहिए.
गंगाजल का प्रयोग करने से पहले उसे प्रणाम करना चाहिए. यदि निकालते समय गंगाजल जमीन पर गिर जाये तो उसे हाथ से साफ करके मस्तक पर लगा लेना चाहिए.
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