धर्म एवं ज्योतिष
होली पर इस बार चंद्र ग्रहण के साथ भद्रा का भी साया, इन 4 राशि वाले रहें सावधान, हो सकता है भयंकर नुकसान
5 Mar, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
होली हिंदू धर्म का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है और बच्चे, बुजुर्ग सभी इस पर्व का बेसब्री से इंतजार करते हैं. होली का पर्व दो दिन मनाया जाता है, पहले दिन होलिका दहन किया जाता है और दूसरे दिन रंगो वाली होली खेलसी जाती है. लेकिन इस बार होलिका दहन पर भद्रा तो रंगों वाली होली पर चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होली पर चंद्र ग्रहण और भद्रा की वजह से कुछ राशियों को समस्या का सामना करना पड़ सकता है. साथ ही इन राशियों को बेहद सावधानी से रहने की भी जरूरत है क्योंकि ग्रहण और भद्रा जीवन के हर क्षेत्र पर प्रभाव डालेंगे. ऐसी स्थिति में आइए जानते हैं किन किन राशियों को सावधान रहने की आवश्यकता है…
कब है होली 2025?
होलिका दहन इस बार 13 मार्च को है, हालांकि इस दिन भद्रा का भी साया माना जा रहा है. भद्रा सुबह 10 बजकर 35 मिनट से रात 11 बजकर 26 तक रहेगी. इसके बाद होलिदा दहन किया जा सकेगा.
रंगो वाली होली 14 मार्च को खेली जाएगी और इस दिन साल 2025 का पहला चंद्र ग्रहण भी लगने जा रहा है.
मिथुन राशि वालों पर चंद्र ग्रहण का साया
होली पर लगने वाले चंद्र ग्रहण से मिथुन राशि वालों को बेहद सावधानी से रहने की आवश्यकता है क्योंकि ग्रहण के प्रभाव से धन, संपत्ति और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. परिवार में परेशानियां लगी रहेंगी और किसी सदस्य से वाद-विवाद या मतभेद होने की भी आशंका बन रही है. नौकरी पेशा जातकों की बात करें तो अधिकारियों के साथ कामकाज को लेकर समस्या से जूझना पड़ सकता है. ग्रहण के प्रभाव की वजह से आपके खर्चे बढ़ सकते हैं, जिसकी वजह से आर्थिक हानि का सामना करना पड़ सकता है.
वृश्चिक राशि वालों पर चंद्र ग्रहण का साया
होली पर लगने वाले चंद्र ग्रहण की वजह से वृश्चिक राशि वालों को लाभ से ज्यादा हानि का सामना करना पड़ सकता है. अगर आप नया बिजनस शुरू या फिर निवेश करना चाहते हैं तो कुछ समय के लिए रुक जाएं अन्यथा हानि की आशंका बन रही है. लव लाइफ वालों के बीच आपसी तालमेल में कमी आने की वजह से पार्टनर के साथ इमोशनल बहसबाजी हो सकती है लेकिन ध्यान रखें जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय ना लें. इस दौरान अपने और परिवार के सदस्यों की सेहत का ध्यान रखें और कोई भी समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह अवश्य लें.
मकर राशि वालों पर चंद्र ग्रहण का साया
होली पर चंद्र ग्रहण का साया होने की वजह से मकर राशि वालों को करियर के क्षेत्र में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. कार्यक्षेत्र में अधिकारियों और सहकर्मियों के बीच तालमेल में कमी आ सकती है, जिसकी वजह से कई समस्याएं आएंगी और आपके काम का कम ही क्रेडिट मिलेगा. साथ ही व्यापारियों को भी बिजनस में प्रतिद्वंदियों के साथ परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. इस अवधि में आप उतना पैसा कमाने में नाकाम रह सकते हैं, जितना आने सोचा था और यह आपके लिए मानसिक तनाव का कारण बन सकता है.
मीन राशि वालों पर चंद्र ग्रहण का साया
साल का पहला चंद्र ग्रहण आपकी ही राशि में लगने वाला है, ऐसे में मीन राशि वालों को ज्यादा सावधान रहने की आवश्यकता है. अगर आप किसी अच्छे काम की आस लगाए हुए हैं तो आप निराश हो सकते हैं. धन कमाने के मामले में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, फिर भी आप असमर्थ हो सकते हैं और धन की बचत भी मुश्किल कर पाएंगे. ग्रहण की वजह से धन हानि होने की प्रबल आशंका बन रही है इसलिए धन से जुड़े मामलों में योजना बनाकर चलने में ही फायदा है. नौकरी करने वालों की बात करें तो आप पर काम का बोझ बड़ सकता है, जिसकी वजह से कामकाज को लेकर असंतुष्ट महसूस कर सकते हैं.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
5 Mar, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- प्रत्येक कार्य में बाधा, विलम्ब कष्टप्रद होगा, तथा रुकावट व बेचैनी अवश्य होगी।
वृष राशि :- कुटुम्ब की समस्याओं में समय बीतेगा, धन का व्यय, समय नष्ट न होने देवें।
मिथुन राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास, प्रेम संबंध विफल हो, रुके कार्य अवश्य हो जायेंगे।
कर्क राशि :- आर्थिक योजना पूर्ण होगी, भाग्य का सितारा प्रबल रहे, कार्य अधिक होंगे।
सिंह राशि :- साधन सम्पन्न के योग बनेंगे, दैनिक व्यवसाय गति उत्तम अवश्य ही होगी।
कन्या राशि :- मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि के योग बनेंगे, योजना फलप्रद अवश्य ही होगी।
तुला राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक ही होगा, कार्यगति में सुधार होगा तथा विरोधी पराजित होंगे।
वृश्चिक राशि :- लेन-देन के मामलें में हानि, विरोधी तत्वों से परेशानी होगी, ध्यान रखें।
धनु राशि :- दैनिक सफलता के साधन सम्पन्न हों, स्वभाव में क्रोध व हानि होगी।
मकर राशि :- दैनिक सम्पन्नता के साधन बने किन्तु विरोधी तत्वों से परेशानी बनें।
कुंभ राशि :- बिगड़े हुये कार्य बनेंगे, योजनायें पूर्ण होगे तथा रुके कार्य बन ही जायेंगे।
मीन राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष चिन्तायें कम होंगी, विशेष कार्य स्थगित अवश्य रखें।
होली में एक दूसरे को क्यों लगाते हैं रंग? कब से हुई इसकी शुरुआत?
4 Mar, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साल भर में होने वाले सभी विशेष पर्वों में होली का पर्व बेहद ही खास और महत्वपूर्ण होता है. इस त्यौहार को भाईचारे का प्रतीक माना गया है. इस दिन लोग अपनी पुरानी दुश्मनी भुलाकर एक दूसरे को गले लगाते हैं. होली पर एक दूसरे को रंग लगाकर भाईचारे का यह त्यौहार हर्षो उल्लास और खुशियों के साथ मनाया जाता है. इस दिन लोग एक दूसरे को रंग लगाते हैं. प्राचीन समय में प्राकृतिक रंगों से होली खेली जाती थी, लेकिन बदलते वक्त के साथ केमिकल आदि से यह त्यौहार मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन होलिका नामक राक्षसी अपने कर्मों के कारण आग में जल गई थी. इसलिए हर साल फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होली का पर्व मनाया जाता है. इस त्यौहार को लेकर लोगों के मन में यही सवाल उठता है कि बुराई पर अच्छाई के जीत के इस त्यौहार पर रंगों का प्रचलन कैसे शुरू हुआ?
होली पर रंगों का प्रचलन कैसे शुरू हुआ इस सवाल का जवाब देते हुए हरिद्वार के पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि होली का पर्व हिंदू धर्म में होने वाले विशेष पर्वों में से एक है. यह त्यौहार भाईचारे का प्रतीक और बुराई पर अच्छाई का त्यौहार है. इस दिन लोग एक दूसरे को रंग लगाकर त्यौहार मनाते हैं. इस दिन होलिका नामक राक्षसी का पुतला बनाकर जलाया जाता है और एक दूसरे को रंग लगाकर त्यौहार मनाया जाता है. होली के दिन पुरानी दुश्मनी मतभेद आदि सभी भुलाकर लोग भाईचारे के साथ मिलते हैं और इस त्यौहार को मानते हैं.
धार्मिक ग्रंथो के अनुसार विष्णु भगवान के संपूर्ण कलाओं से संपन्न अवतार श्री कृष्ण का रंग काला था और राधा का रंग गोरा था. इस पर जब श्री कृष्ण ने अपनी माता यशोदा को कहा कि मेरा रंग काला है और राधा का रंग गोरा तो उस पर माता यशोदा ने कृष्ण को कहा कि जो रंग तुम्हारा है वही रंग तुम राधा को भी लगा दो, तो वह भी तुम्हारे जैसी ही हो जाएगी. यह पूरा प्रकरण फाल्गुन मास में ही हुआ था और इसी के कारण होली पर रंगों का प्रचलन शुरू हुआ. प्राचीन समय में प्राकृतिक रंगों से होली खेली जाते थी लेकिन वर्तमान समय में केमिकल आदि से होली खेली जाती है जो त्वचा के लिए बेहद ही हानिकारक होते हैं.
इस दिन महिलाएं नहीं रख सकती रोजा, होती है सख्त मनाही, क्या है वजह?
4 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लाम धर्म में रमजान का महीना बहुत ही पाक महीना माना जाता है. पूरे महीने रोजे रखे जाते हैं और खुदा की इबादत की जाती है. भारत में 02 मार्च से रमजान का पवित्र महीना शुरू हो गया है. इस्लाम धर्म में रमजान के महीने को बहुत ही पवित्र और खास माना जाता है. रमजान के पूरे महीने में मुस्लिम धर्म के लोग खुदा की इबादत करते हैं और रोजा रखते हैं.
मिलता है 70 गुना अधिक सवाब
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, रमजान साल का नौवां महीना होता है. रमजान के पूरे महीने में लोग हर दिन रोजा रखते हैं और इस्लामी कैलेंडर के दसवें महीने शव्वाल का चांद दिखाई देने पर शव्वाल की पहली तारीख को खुदा का शुक्रिया अदा करते हुए ईद-उल-फितर यानी ईद का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं. वहीं, रमजान के इस पवित्र महीने में अच्छा काम करने से 70 गुना अधिक सवाब मिलता है.
महिलाएं इन दिनों नहीं रख सकती रोजा
अगर कोई महिला रमजान के महीने में रोजा रख रही है और उसे पीरियड्स हो जाते हैं, तो वह रोजा नहीं रख सकती. साथ ही, उस महिला को रोजे की कजा अदा करनी होगी. रमजान खत्म होने के बाद उन महिलाओं को अपने छूटे हुए रोजे पूरे करने होंगे और अगर वे ऐसा नहीं करेंगी, तो वे शरीयत के हिसाब से गुनहगार ठहरेंगी.
इस महीने में करें नेक काम
मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना कारी इसहाक गोरा ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि रमजान मुसलमानों के लिए बहुत ही पवित्र महीना है. इसकी फजीलत कुरान और हदीसों में बताई गई है. रमजान इसलिए भी बहुत पवित्र महीना माना जाता है क्योंकि इस महीने में किए गए नेक काम का सवाब 70 गुना बढ़ा दिया जाता है.
महिलाएं रखें इसका ख्याल
रमजान महीने में हर दिन रोजे रखे जाते हैं और हर मुसलमान पर, जो बालिग और समझदार हो, उन पर रोजा फर्ज होता है. साथ ही, रोजा छोड़ने वाला गुनहगार होता है. वहीं, महिलाओं पर भी रोजा फर्ज है, लेकिन वे शरीयत के अनुसार उस दौरान रोजा नहीं रख सकतीं जब उन्हें पीरियड्स हो रहे हों. पीरियड्स के समय महिलाओं की नमाज माफ होती है.
खेले मसाने में होली दिगंबर... मृत्य जश्न, भय भक्ति में तब्दील हो जाता है मणिकर्णिका के महाश्मशान में
4 Mar, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बनारस, जहां मृत्यु भी एक उत्सव है, वहां की होली भला आम होली जैसी कैसे हो सकती है? यहां रंगों की जगह चिता की राख उड़ती है, गुलाल की जगह भस्म लगता है और उल्लास में गूंजती हैं तांत्रिक मंत्रों की ध्वनियां. इसे कहते हैं "मसान की होली", जो महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर खेली जाती है.ये केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि शिव की अलौकिक लीला का हिस्सा है, जहां मृत्यु का भय मिट जाता है और आत्मा मोक्ष की ओर बढ़ती है. इसी कड़ी में आइए जानते हैं इस रहस्यमयी और अनोखी होली के 8 दिलचस्प पहलू.
मसान की होली (Masan Holi 2025 Varanasi) काशी के महाश्मशान (मणिकर्णिका घाट) पर खेली जाती है, जहां चिताएं दिन-रात जलती रहती हैं.इसे मृत्यु से जुड़े भय को दूर करने का प्रतीक माना जाता है. इस साल मसान होली 11 मार्च को मनाई जाएगी.
मान्यता है कि काशी में स्वयं महादेव संन्यासियों और औघड़ों के साथ होली खेलते हैं.यहां महाकाल को रंगों की नहीं, बल्कि चिता भस्म की होली पसंद है. आम लोग इसमें शामिल नहीं हो सकते क्योंकि ये सिर्फ तांत्रिक परंपराओं को मानने वाले साधुओं के लिए होती है. बिना तांत्रिक दीक्षा के इसमें शामिल होना अनुष्ठान के नियमों के विरुद्ध माना जाता है.
लोककथाओं के अनुसार, इस होली में अदृश्य शक्तियां, भूत-प्रेत और शिव के गण भी शामिल होते हैं.यहां लोग निडर होकर उल्लास और भक्ति के साथ इस अनोखी होली को मनाते हैं.
रंगों की जगह चिता भस्म का प्रयोग किया जाता है.इसे जीवन-मृत्यु के चक्र को स्वीकारने का प्रतीक माना जाता है, जिससे व्यक्ति मृत्यु का भय त्यागकर जीवन को खुले दिल से जी सके.
इस होली में विशेष रूप से तांत्रिक, अघोरी और नागा साधु हिस्सा लेते हैं, जो मृत्यु को मोक्ष का द्वार मानते हैं.वे शिव की भक्ति में लीन होकर चिता भस्म से खुद को रंगते हैं.
इस खास योग में पड़ रहा है प्रदोष व्रत, इस दिन पूजा से खत्म होंगी सभी बाधाएं, आएगी खुशहाली!
4 Mar, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साल भर में त्योहारों का आगमन मानव कल्याण के लिए होता है. कुछ तिथि बेहद ही शुभ और लाभदायक होती हैं. कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनों में प्रदोष व्रत का आगमन सुख समृद्धि और सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए होता है. प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है. प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना, पूजा पाठ, स्तोत्र आदि का पाठ करना बेहद शुभ होता है.
ज्योतिष शास्त्र में कुछ योग बेहद महत्वपूर्ण और लाभ प्रदान करने वाले बताए गए हैं. इन योगों का समय-समय पर आगमन होता रहता है. अगर इन योगों का आगमन किसी वृत्त के दौरान हो तो उसमें की गई पूजा पाठ, मंत्रों का जाप, स्तोत्र आदि का पाठ करने पर विशेष लाभ मिलता है.
इस बार कब होगा व्रत
इस की फाल्गुन शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत 11 मार्च, मंगलवार को होगा. प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है जिसमें भोलेनाथ की पूजा पाठ, पूजा अर्चना, मंत्रों का जाप, स्तोत्र आदि का पाठ करने पर सभी कामों में सफलता मिलेगी.
संयोग से इस बार प्रदोष व्रत सर्वार्थ सिद्धि योग में पड़ रहा है. प्रदोष व्रत के दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग होने से जातकों को इसका कई गुना लाभ मिलेगा. धार्मिक ग्रंथो के अनुसार प्रदोष व्रत में सर्वार्थ सिद्धि योग आने से इसका समय बेहद ही श्रेष्ठ और फलदाई है.
होंगी सभी मनोकामनाएं पूरी
वे आगे बताते हैं कि भगवान शिव की पूजा पाठ इस श्रेष्ठ समय सर्वार्थ सिद्धि योग में करने पर श्रद्धालुओं को सिद्धि मिलेगी और भगवान शिव सभी मनोकामनाएं पूर्ण करेंगे. साथ ही जीवन में चल रही सभी समस्याएं, बाधाएं खत्म हो जाएंगी. ज्योतिष शास्त्र में सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए कोई भी धार्मिक कार्य का करोड़ों गुना फल मिलने की धार्मिक मान्यता है.
अगर श्रद्धालु 11 मार्च को प्रदोष काल के समय भगवान शिव के शिव तांडव, शिव महिम्न, रुद्राष्टक, पशुपत्येष्टक आदि स्तोत्रों का पाठ करता है तो सभी कामों में सफलता, अकाल मृत्यु से मुक्ति, धन, संपत्ति वगैरह की प्राप्त होगी.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
4 Mar, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- प्रत्येक कार्य में बाधा, विलम्ब कष्टप्रद होगा, थकावट व बेचैनी बनेगी।
वृष राशि :- कुटुम्ब की समस्याओं में समय बीतेगा, धन का व्यय, चिन्ता बढ़ जायेगी।
मिथुन राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास, प्रेम-प्रसंग सफलता से कार्य अनुकूल अवश्य होंगे।
कर्क राशि :- आर्थिक योजना पूर्ण होगी, भाग्य का सितारा प्रबल होगा, रुके कार्य बनेंगे।
सिंह राशि :- भाग्य की प्रबलता का लाभ लें, रुके कार्य समय पर पूर्ण करने का प्रयास करें।
कन्या राशि :- मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि, नवीन योजना फलप्रद होगी, कार्य पर ध्यान दें।
तुला राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा, कार्यगति में सुधार होगा, विरोधी पराजित होंगे।
वृश्चिक राशि :- लेन-देन के कार्य में हानि होगी, विरोधी तत्वों से परेशानी अवश्य बनेगी।
धनु राशि :- दैनिक सफलता के साधन सम्पन्न होंगे, स्वाभाव में क्रोध व अशांति होगी।
मकर राशि :- दैनिक सम्पन्नता के साधन जुटायेंगे, आलस्य, प्रमाद से हानि होगी।
कुंभ राशि :- बिगड़े हुये कार्य बनेंगे, योजनायें फलीभूत होंगी, रुके कार्य बनेंगे।
मीन राशि :- स्त्री वर्ग से चिन्तायें कम होंगी, विशेष कार्य स्थगित रखें, समय का ध्यान रखें।
होली से पहले घर ले आएं ये 4 खास चीजें, घर से नकारात्मक ऊर्जा हमेशा के लिए होगी छूमंतर
3 Mar, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदु पंचांग के अनुसार होली का त्योहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. इस साल 14 मार्च, शुक्रवार को होली खेली जाएगी और होलिका दहन इसके एक दिन पहले यानी 13 मार्च, गुरुवार के दिन किया जाएगा. रंगों के त्योहार होली की जितनी पौराणिक मान्यता है उतना ही वास्तु शास्त्र में भी इसका बहुत अधिक महत्व माना जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर होली के पहले कुछ चीजें घर लाने से सालभर बरकत बनी रहती है और कभी भी धन-धान्य में कमी नहीं आती है.
वास्तुशास्त्र बताए गए कुछ विशेष चीजों को आप होलाष्टक से लेकर होली तक इन चीजों का घर लेकर आ सकते हैं. इससे ना सिर्फ आपका भाग्योदय होता है बल्कि आपके घर पर सदैव मां लक्ष्मी की कृपा भी बनी रहती है.
होली से पहले घर ले आएं ये चीजें
बांस का पौधा:
होली पर आप अपने घर में बैम्बू ट्री भी ला सकते हैं. वास्तु शास्त्र में बैम्बू ट्री या बांस के पौधे को सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि जिस घर में बांस के पौधे होते हैं वहां नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव नहीं होता और घर में सुख शांती बनी रहती है.
तोरण:
वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार पर तोरण लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. इसलिए होली पर्व से पहले अपने घर पर मुख्य द्वार पर तोरण लगाने से घर पर सकारात्मकता आती है और इस तोरण को शुभ दिन व त्योहार पर बांधने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में सदैव वास करती है.
चांदी का सिक्का:
होली पर आप चांदी का सिक्का भी घर में लेकर आ सकते हैं. इस चांदी के सिक्के की पूजा करें और फिर इसे लाल या पीले रंग के कपड़े में बांध दें. कपड़े में बंधे इस सिक्के को तिजोरी में रखने से आर्थिक परेशानी दूर होती है.
कछुआ:
कछुए को भगवत स्वरुप माना जाता है. माना जाता है कि अगर आप होली पर्व पर धातु से बना कछुआ घर में लाते हैं तो इससे मां लक्ष्मी की कृपा घर पर बनी रहती है. लेकिन ध्यान रखें कि कछुए की पीठ पर श्रीयंत्र या कुबेर यंत्र बना होना चाहिए.
हनुमान चालीसा के 11 पाठ करना ही क्यों शुभ? आंजन धाम के पुजारी ने बताई खास वजह
3 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मंगलवार और शनिवार का दिन प्रभु श्रीराम के सबसे प्रिय भक्त हनुमानजी को समर्पित होता है. इसलिए इन दोनों दिन हनुमानजी की विशेष पूजा की जाती है. हनुमान भक्त यूं तो रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, लेकिन बहुत से भक्त ऐसे भी हैं जो मंगलवार या शनिवार को हनुमान चालीसा के 11 पाठ करते हैं. झारखंड के गुमला में स्थित आंजन धाम को भगवान हनुमान की जन्मस्थली माना जाता है.
आंजन धाम हनुमानजी के बाल स्वरूप की दुर्लभ प्रतिमा के लिए भी जाना जाता है, यहां हनुमानजी अपने बाल स्वरूप में माता अंजनी की गोद में विराजमान हैं, जो हनुमानजी की अति दुर्लभ प्रतिमा है. यह स्थान धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि मान्यता के अनुसार इसी पहाड़ की गुफा में माता अंजनी ने भगवान हनुमान को जन्म दिया था, इसलिए इस गांव का नाम माता अंजनी के नाम पर आंजन धाम पड़ा.
हनुमान पूजा में दो दिन खास
आंजन धाम के पुजारी केदारनाथ पांडे ने बताया कि मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व है. ऐसा माना जाता है कि इन दो दिनों में सच्चे मन से पूजा करने पर बजरंगबली अपने भक्तों से प्रसन्न होते हैं. अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं और हनुमान जी अपने भक्तों की सभी संकटों को हरते हैं. सुख, शांति, समृद्धि प्रदान करते हैं.
इतनी बार करें चालीसा का पाठ
पुजारी जी ने बताया कि यदि आप भी हनुमानजी की कृपा पाना चाहते हैं तो कम से कम मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करें. फिर आरती करें. वहीं, आप हनुमान चालीसा का पाठ अपनी क्षमता के अनुसार 7, 11, 21, 51 या 101 बार कर सकते हैं.
इसलिए 11 बार पाठ करना शुभ
आगे बताया, मान्यता के अनुसार, हनुमान जी शिव जी के 11वें अवतार हैं. हनुमानजी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो कम से कम 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें. उसके बाद आरती करें तो निश्चित ही हनुमान जी आपसे प्रसन्न होंगे. आप और आपके परिवार पर कृपा बरसाएंगे. इसलिए 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करना बेहद शुभ माना गया है.
पाठ के समय न करें ये गलती
हनुमान चालीसा पाठ करते समय बीच में बातचीत न करें या किसी को कुछ न बोलें. हड़बड़ी में जल्दी-जल्दी पाठ न करें. पाठ करने वाले को तामसिक चीजों से दूर रहना चाहिए. काले वस्त्र पहनकर हनुमान चालीसा का पाठ या पूजा न करें. मन में गलत भाव न लाएं.
सपने में मल दिखने के होते हैं ये 5 संकेत, कोई मालामाल तो कोई होता है कंगाल, क्या कहता है स्वप्न शास्त्र?
3 Mar, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर व्यक्ति सोते समय गहरी नींद में जाने के बाद कई तरह के सपने देखता है. स्वप्न शास्त्र मानता है कि व्यक्तियों को आने वाला हर सपना उसके आने वाले भविष्य को लेकर कुछ न कुछ संकेत जरूर देता है. कुछ सपने बेहद सुखद होते हैं और कुछ सपने काफी डरावने भी होते हैं. स्वप्न शास्त्र में हर आने वाले अच्छे और बुरे सपने के महत्व और उसके संकेत के बारे में बताया गया है. कभी-कभी हम सपने में बहुत ही बुरी चीजें भी देख लेते हैं. परंतु स्वप्न शास्त्र के अनुसार कुछ बुरे सपनों का अर्थ बहुत सकारात्मक और अच्छा परिणाम देने वाला होता है. आज हमें भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा बता रहे हैं यदि सपने में आपको भी बुरी चीजें दिखाई दें तो इसका क्या अर्थ निकलता है.
1. यदि कोई व्यक्ति सपने में अपने आप को मल करते हुए देखता है तो स्वप्न शास्त्र मानता है कि यह उस व्यक्ति के लिए एक शुभ संकेत हो सकता है. ऐसा सपना आने का मतलब है कि आपको जल्द ही कहीं से धन प्राप्ति होने वाली है या फिर व्यापार के क्षेत्र में आपको काफी तरक्की मिलने वाली है.
2. सपने में यदि कोई व्यक्ति देखता है कि वह कहीं जा रहा है और उसका पैर किसी मल पर पड़ जाए. तो यह भी उसके लिए एक शुभ संकेत हो सकता है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार यह सपना आने वाले भविष्य में धन प्राप्ति की ओर संकेत करता है.
3. स्प्न शास्त्र के अनुसार यदि सपने में आपको अपने चारों तरफ मल दिखाई देता है तो यह आपके लिए एक सुखद सपना है. इस प्रकार का सपना आने का मतलब है कि भविष्य में आपकी किस्मत के दरवाजे खुलने वाले हैं और आप जल्द ही अमीर होने वाले हैं.
4. यदि कोई व्यक्ति सपने में अपने आप को मल साफ करते हुए देखता है तो यह उस व्यक्ति के लिए एक अशुभ संकेत होता है. इस सपने का अर्थ होता है कि आने वाले भविष्य में आपको आर्थिक तंगी झेलनी पड़ सकती है. इसके अलावा आपका अपने खर्चों से भी नियंत्रण हट सकता है.
5. स्वप्न शास्त्र के अनुसार यदि सपने में आप खुद को मल खाते हुए देखते हैं तो यह एक अशुभ सपना होता है. स्वप्न शास्त्र मानता है कि ऐसा सपना आने का मतलब है कि भविष्य में आपको काफी दिक्कतें झेलनी पड़ सकती है. आपको अपने कार्य क्षेत्र में भी तरह तरह की समस्याओं से जूझना पड़ सकता है.
मथुरा, वृंदावन समेत पूरे ब्रज में होली की धूम, जानें ब्रज में किस दिन मनाई जाएगी कौन सी होली
3 Mar, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कान्हा की नगरी ब्रज में होली का खास अंदाज देखने को मिलता है, जो पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. ब्रज में होली की शुरुआत बसंत पंचमी से हो जाती है, जो 40 दिन तक चलती है. बसंत पंचमी के दिन वृंदावन के ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में सुबह श्रृंगार आरती के बाद भगवान के गालों पर गुलाल लगया जाता है. इसके बाद प्रसाद के रूप में गुलाल भक्तों पर डाला जाता है और इसी के साथ ब्रज की होली का महोत्सव का शुभारंभ भी हो जाता है. ब्रज की होली में शामिल होने के लिए देश-विदेश से हजारों की संख्या में लोग ब्रज आते हैं और हर दिन होली का आनंद लेते हैं. अगर आप भी विश्व प्रसिद्ध होली का आनंद लेना चाहते हैं
पूरे विश्व में प्रसिद्ध है ब्रज की होली
साल 2025 में होलिका दहन 13 मार्च की रात को होगा और अगले दिन यानी 14 मार्च को रंगों वाली होली खेली जाएगी. हर वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है और उसके अगले दिन धुल्हेड़ी होगी. ब्रज में होली की शुरुआत बांके बिहारी मंदिर से होती है और समापन रंगनाथ मंदिर से होता है. अपनी अनूठी परंपरा को लेकर देश-दुनिया में विशेष पहचान रखने वाली होली का आनंद लेने के लिए देश से ही नहीं बल्कि सात समंदर पार से भी लोग इस उत्सव को देखने और शामिल होने के लिए आते हैं. ब्रज की होली में होली गीत, पद गयान की प्राचीन परंपरा है, जिसे समाज गायन भी कहा जाता है.
ब्रज में 40 दिन तक मनाया जाता है होलिका महोत्सव
ब्रज में होली का उत्सव आज से नहीं बल्कि द्वापर युग से मनाया जा रहा है. इस होली की शुरुआत बसंत पंचमी से हो जाती है और अगले 40 दिन तक होलिका महोत्सव मनाया जाता है. बसंत पंचमी के दिन होलिका दहन के स्थलों पर होली का ढांड़ा गाड़े जाने की परंपरा होती है. इसके बाद फाल्गुन पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन किया जाता है और रंगों की होली मनाई जाती है. होली पर एक दूसरे को गुलाल लगाकर गले मिलते हैं और होली की शुभकामनाएं देते हैं. आइए यहां जानते हैं साल 2025 में मथुरा, वृंदावन, गोकुल, बरसाना समेत पूरे ब्रज में किस दिन कौन सी होली मनाई जाएगी.
ब्रज में होली 2025 के मुख्य कार्यक्रम
3 फरवरी 2025 को बसंत पंचमी पर होली ध्वजारोहण
7 मार्च को नंदगांव और बरसाना में फाग आमंत्रण दिया जाएगा और शाम के समय लाडलीजी के मंदिर में लड्डूमार होली के उत्सव का आयोजित किया जाएगा.
8 मार्च को बरसाने में रंगीली गली में लट्ठमार होली का उत्सव मनाया जाएगा
9 मार्च को नंदगांव में लट्ठमार होली का उत्सव मनाया जाएगा
10 मार्च को बांके बिहारी मंदिर में फूलों की होली खेली जाएगी
10 मार्च को कृष्ण जन्मभूमि पर हुरंगा आयोजित किया जाएगा
11 मार्च को गोकुल के रमणरेती और द्वारकाधीश मंदिर में होली खेली जाएगी
12 मार्च को वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में होली का उत्सव मनाया जाएगा
13 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा
14 मार्च को पूरे ब्रज में होली का उत्सव मनाया जाएगा
होली के बाद ब्रज में यहां होगा रंगोत्सव
15 मार्च को बलदेव के दाऊजी मंदिर में हुरंगा खेला जाएगा
16 मार्च को नंदगांव में हुरंगा खेला जाएगा
17 मार्च को जाव गांव में पारंपरिक हुरंगा खेला जाएगा
18 मार्च को मुखरई में चरकुला नृत्य का आयोजन किया जाएगा
22 मार्च को वृंदावन के रंगनाथ मंदिर में होली का उत्सव मनाया जाएगा और इसी के साथ 40 दिन तक चलने वाला होली महोत्सव का समापन हो जाएगा
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
3 Mar, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- विशेष कार्य स्थिगित रखें, लेन-देन के मामले में हानि तथा चिन्ता होगी।
वृष राशि :- विवादग्रस्त होने से बचें, क्लेश होगा, हानि होने की संभावना ध्यान दें।
मिथुन राशि :- व्यग्रता असमंजस में रखे, विषय व्यवस्था से बचने की चेष्ठा अवश्य करेंगे।
कर्क राशि :- स्त्री भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति तथा सुख-समृद्धि के साधन अवश्य बनेंगे।
सिंह राशि :- समय और धन नष्ट न हो, क्लशे व अशांति, विघटनकारी तत्व परेशान करेंगे।
कन्या राशि :- नवीन योजना फलप्रद होगी, भावनायें संवेदनशील बनी रहेंगी ध्यान दें।
तुला राशि :- धन के व्यर्थ व्यय से बचें, कार्य कुशलता से संतोष होगा, मनोबल बढ़ेगा।
वृश्चिक राशि :- भाग्य का सितारा साथ देगा, समय अनुकूल नहीं कार्य स्थिगित रखें।
धनु राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि होगी।
मकर राशि :- मान-प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे, कार्य कुशलता से संतोष होगा।
कुंभ राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे तथा भाग्य का सितारा प्रबल अवश्य होगा।
मीन राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा तथा कार्य कुशलता से संतोष बना रहेगा।
नकारात्मक ऊर्जा या नजर, हर संकट से बाहर निकाल देगा यह उपाय! चल पड़ेगा बंद व्यापार
2 Mar, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर व्यक्ति अपने जीवन में कठिनाइयां परेशानियां नजर दोष आदि से परेशान है उसे लगता है कि उसके ऊपर किसी ने कुछ कर दिया है जिसकी वजह से वह अपने जिगर जीवन में प्रगति नहीं कर पा रहा है उसके बनते हुए कार्य बिगड़ते जा रहे हैं. भूत प्रेत बढ़ाओ जादू टोना आदि की प्रभाव से अच्छे खासे लोगों के जीवन में दुख भरा जाता है ज्योतिष शास्त्र और शाबर ग्रंथों में इन वाधाओं से मुक्ति के लिए अनेक उपाय बताए गए हैं. जब भी हम पूजन आदि धार्मिक कार्य करते हैं वह आसुरी शक्तियां अवश्य अपना प्रभाव दिखाती है. इसलिये इन उपायों को करते समय हमें सावधानी रखनी चाहिए.
अशोक के वृक्ष के सात पत्ते मंदिर में रखकर पूजा करें. उनके सूखने पर फिर से नए पत्ते रखें एवं पुराने पत्तों को पीपल के पेड़ के नीचे रख दें. यह क्रिया नियमित रूप से करें घर पर भूत प्रेत, बाधा, नजर दोष आदि से छुटकारा मिल जाएगा.
एक कटोरी चावल का दान रोज करें और भगवान श्री गणेश को एक साबूत सुपारी रोज चढ़ाएं. यह क्रिया एक वर्ष तक करें. नजर दोष, भूत प्रेत बाधा आदि के कारण वाधित हो रहे कोई भी कार्य पूरे होना शुरू हो जाएंगे.
किसी भी टोना टोटका या किसी भी वाधा को काटने के लिये अपने बाएं हाथ में पीली सरसों या चावल लेकर दाहिने हाथ से ढक देना चाहिए. उसे अपनी रक्षा की कामना करते हुए सभी दिशाओं में गोल-गोल घूमाते हुए उछालते हुए फेंक देना चाहिए.
यदि आपको लगता है कि ऑफिस या व्यवसाय स्थल पर आपके लिए किसी ने बंधन कर दिया है.जिसकी वजह से आपकी नौकरी और व्यापार आदि में दिक्कत है आ रही है. आप इस बंधन को खोलने के लिए नियमित रूप से ऑफिस और व्यवसाय स्थल पर दीप जलाकर पूजा करें एवं एक मुट्ठी नमक पूजा स्थल से बार कर दरवाजे के बाहर फेंक दें. अपनी दुकान अथवा व्यवसाय स्थल पर शाम को नित्य रूप से नमक छिड़क कर झाड़ू से साफ कर दें. इसके अलावा यदि आप हिंदू है तो गूगल की धूप दें. यदि आप मुस्लिम है तो लोबान की धूप दें इससे आपकी समस्या खत्म हो जाएगी.
खरमास कब से लग रहा है? एक महीने तक नहीं होंगे शुभ कार्य, जानें कब होगा समापन
2 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
खरमास यानि कि अशुभ मास या महीना. खरमास के समय में कोई भी शुभ कार्य नहीं करते हैं क्योंकि इसमें सूर्य की प्रभाव कम हो जाता है. ज्योतिष गणना के अनुसार, सूर्य देव जब भी देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु और मीन में गोचर करते हैं तो उस समय खरमास लगता है. यह पूरे एक महीने चलता है. एक साल में 2 बार खरमास लगता है. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, एक खरमास मार्च से अप्रैल के बीच लगता है, तो दूसरा खरमास दिसंबर से जनवरी के बीच लगता है. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से जानते हैं कि मार्च 2025 में खरमास कब लग रहा है? खरमास का समापन कब होगा?
2025 में खरमास कब से है?
इस साल 2025 में खरमास का प्रारंभ मीन संक्रांति के दिन से होगा. पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 14 मार्च को शाम में 6 बजकर 59 मिनट पर मीन राशि में गोचर करेंगे. यह सूर्य की मीन संक्रांति होगी. सूर्य के मीन में प्रवेश करते ही खरमास का प्रारंभ हो जाएगा. इस आधार पर हम कह सकते हैं कि मार्च 2025 में खरमास 14 मार्च से लग रहा है. उस दिन होली भी है. होली से खरमास शुरू हो रहा है.
फाल्गुन पूर्णिमा पर खरमास
इस साल खरमास के पहले दिन फाल्गुन पूर्णिमा तिथि है. उस दिन पूर्णिमा का स्नान और दान होगा. लोगों के मन में सवाल होगा कि खरमास में शुभ कार्य नहीं करते हैं तो फिर स्नान, दान और पूजा पाठ कैसे होगा? आपको बता दें कि खरमास में स्नान, दान, पूजा पाठ आदि पर कोई रोक नहीं होता है.
खरमास कब खत्म होगा 2025?
14 मार्च को लगने वाला खरमास मेष संक्रांति के दिन खत्म होगा. सूर्य देव जब मीन राशि से निकलकर मेष राशि में गोचर करेंगे, उस समय सूर्य की मेष संक्रांति होगी. पंचांग के अनुसार, इस साल 14 अप्रैल 2025 को सूर्य देव मेष राशि में तड़के 03 बजकर 30 मिनट पर गोचर करेंगे, उस समय मेष संक्रांति होगी.
इस तरह से देखा जाए तो मार्च 2025 का खरमास 14 अप्रैल को खत्म होगा. खरमास के समापन दिन हिंदू कैलेंडर का दूसरा माह वैशाख शुरू होगा. उस दिन वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि होगी.
ये भी पढ़ें: पितृ दोष क्यों होता है? आपके ये 6 कर्म हैं जिम्मेदार, संतान को भी भोगना पड़ता है कष्ट
खरमास में क्या न करें?
1. खरमास के समय में विवाह, सगाई, मुंडन, उपनयन संस्कार आदि जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं.
2. खरमास के वक्त बेटी या बहू की विदाई नहीं की जाती है.
3. खरमास के समय में कोई भी नए काम की शुरूआत नहीं करते हैं. जैसे नया बिजनेस या नए मकान की शुरुआत नहीं करते हैं.
4. खरमास में गृह प्रवेश करना भी अशुभ माना जाता है.
5. पूरे खरमास में प्याज, लहसुन, मांस, मछली, शराब आदि जैसी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए.
अशुभ होलाष्टक भी देगा बरकत! होली के 8 दिन पहले मन से शुरू करें ये काम, फिर देखें
2 Mar, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मार्च की शुरुआत के साथ होली की तैयारियां भी घरों में शुरू हो गई हैं. इस पर्व का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है. लेकिन, होली से आठ दिन पहले होलाष्टक भी शुरू हो जाता है. होलाष्टक को अशुभ माना गया है. इन दिनों में कोई भी शुभ कार्य करने की मनाही है. इस बार होलाष्टक कब से शुरू होगा? कब खत्म होगा? और इस दौरान कौन से शुभ कार्य नहीं करने चाहिए? उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज ने बताया.
कब से लग रहा होलाष्टक
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार होलाष्टक की शुरुआत 7 मार्च से हो रही है. वहीं, इसका समापन होलिका दहन के एक दिन पहले यानी 13 मार्च 2025 को होगा. इसके अगले दिन यानी 14 मार्च को देशभर में होली का पर्व मनाया जाएगा.
होलाष्टक में ये काम न करें
मार्च की शुरुआत के साथ होली की तैयारियां भी घरों में शुरू हो गई हैं. इस पर्व का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है. लेकिन, होली से आठ दिन पहले होलाष्टक भी शुरू हो जाता है. होलाष्टक को अशुभ माना गया है. इन दिनों में कोई भी शुभ कार्य करने की मनाही है. इस बार होलाष्टक कब से शुरू होगा? कब खत्म होगा? और इस दौरान कौन से शुभ कार्य नहीं करने चाहिए? उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज ने बताया.
कब से लग रहा होलाष्टक
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार होलाष्टक की शुरुआत 7 मार्च से हो रही है. वहीं, इसका समापन होलिका दहन के एक दिन पहले यानी 13 मार्च 2025 को होगा. इसके अगले दिन यानी 14 मार्च को देशभर में होली का पर्व मनाया जाएगा.
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