धर्म एवं ज्योतिष
होली के दिन लड्डू गोपाल को लगाएं इन चीजों का भोग, बरसेगी विशेष कृपा
12 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप लड्डू गोपाल लगभग हर घर में विराजमान रहते हैं. कई लोग उन्हें भगवान के रूप में पूजते हैं तो कई उन्हें बेटा मानकर उनकी सेवा करते हैं. हालांकि भाव जो भी हो भगवान तो अपने भक्त पर कृपा बरसाते हैं, वे अपने भक्तों के साथ प्रेम व आनंद के साथ रहते हैं. वहीं आपको बता दें कि प्रतिदिन लड्डू गोपाल को स्नान, श्रृंगार, रात्रि विश्राम से लेकर दिन में अलग-अलग भोग भी अर्पित करते हैं. वहीं कई भक्त तो घर में लड्डू गोपाल को मौसम, दिन व त्योहार के अनुसार भी भोग लगाते हैं.
जी हां, लड्डू गोपाल को जो चीजें पसंद है, वे उसी प्रकार को सात्विक भोग बनाकर उन्हें अर्पित करते हैं. जिस प्रकार एक मां अपने बच्चे की पसंद का ख्याल रखती है, उसी प्रकार लड्डू गोपाल की भी छोटी बड़ी चीजों का ख्याल रखकर उन्हें भोग अर्पित किया जाता है. ऐसे में कई लोगों का सवाल होता है कि होली का त्योहार पास है और हम लड्डू गोपाल को उस दिन क्या विशेष भोग लगाएं. तो आइए इस बारे में हम जानते हैं भगवताचार्य पंडित राघवेंद्र शास्त्री से कि हमें होली के दिन विशेष भोग में लड्डू गोपाल को क्या आर्पित करना चाहिए.
चंद्रकला या गुजिया
होली के पर्व पर गुजिया तो लगभग घर में बनाई जाती है. तो अगर आपने घर पर गुजिया बनाई है तो ऐसे में आप घर पर लड्डू गोपाल को गुजिया का भोग भी लगा सकते हैं. हालांकि, कई कृष्ण मंदिरों में होली के पर्व पर गोपाल जी को चंद्रकला का भोग लगाया जाता है. तो ऐसे में आप इस दिन चंद्रकला या गुजिया दोनों में से किसी भी चीज का भोग लगा सकते हैं.
मीठा दही या दही से बना कोई व्यंजन
लड्डू गोपाल को फाल्गुन के महीने में दही या उससे बनी चीजों का भोग लगाया जाता है. वहीं, होली के त्योहार पर भी हम उन्हें दही से कोई व्यंजन बनाकर भोग लगाएं या अगर हम कोई व्यंजन बनाने में समर्थ नहीं हैं तो उन्हें दही में चीनी मिलकर मीठे दही का भोग लगा सकते हैं. माना जाता है कि लड्डू गोपाल को मीठे दही का भोग लगाने से पारिवारिक रिश्तों में मधुरता आती है.
जलेबी या मालपुआ
लड्डू गोपाल को होली के दिन जलेबी या मालपुए का भोग भी लगाया जा सकता है. माना जाता है कि इस दिन लड्डू गोपाल को जलेबी या मालपुए का भोग अर्पित करने से घर में खुशियां बनी रहती है और उनके आशीर्वाद से सुख-समृद्धि बनी रहती है.
जब वनवास पर थे श्री राम... तो इस जगह रुके थे 4 महीने...यहां माता सीता ने बनाया था भोजन!
12 Mar, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
त्रेतायुग में भगवान राम ने छत्तीसगढ़ के हरचौका में 4 महीने बिताए थे. बताया जाता है, कि भगवान राम मवई नदी के तट पर रुके थे. मान्यताओं के अनुसार वनवास के दौरान भगवान राम का पहला पड़ाव छत्तीसगढ़ ही था और यहीं पर माता सीता ने अपने हाथों से भोजन बनाया और भगवान राम और लक्ष्मण के साथ उसे ग्रहण किया. इसलिए इस स्थान को "सीता की रसोई" के नाम से भी जाना जाता है.
छत्तीसगढ़ को भगवान राम का ननिहाल माना जाता है, क्योंकि मान्यता है, कि माता कौशल्या का जन्म यहीं हुआ था. इस ऐतिहासिक महत्व के कारण यह प्रदेश प्रभु श्री राम से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है. हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि भगवान राम ने अपने 14 सालों के वनवास के दौरान छत्तीसगढ़ के भरतपुर विकासखंड स्थित ग्राम हरचौका में चार महीने बिताए थे. वनवास काल में श्री राम के यहां रुकने के कारण सीतामढ़ी हरचौका पूरे भारत में प्रसिद्ध है.
त्रेतायुग में जब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण अयोध्या से वनवास के लिए निकले, तो उन्होंने भारत के कई वन क्षेत्रों में समय बिताया. इसी यात्रा के दौरान वे छत्तीसगढ़ पहुंचे और भरतपुर नगर पंचायत के हरचौका में मवई नदी के तट पर रुके. ऐसा माना जाता है कि उन्होंने वनवास के लगभग चार महीने यहीं बिताए थे.
स्थानीय मान्यता के अनुसार, वनवास के दौरान भगवान राम का पहला पड़ाव छत्तीसगढ़ ही था. यहीं पर माता सीता ने अपने हाथों से भोजन बनाया और भगवान राम और लक्ष्मण के साथ उसे ग्रहण किया. इसलिए इस स्थान को "सीता की रसोई" के नाम से भी जाना जाता है.
सीतामढ़ी हरचौका की एक प्रमुख विशेषता, यहां स्थित एक प्राचीन गुफा है. इस गुफा में कुल 17 कक्ष हैं, जिन्हें सीता माता की रसोई कहा जाता है. इस गुफा के भीतर 12 शिवलिंग स्थापित हैं, जिनकी पूजा भगवान राम ने स्वयं अपने वनवास के दौरान की थी, ऐसा माना जाता है.
सीता माता की रसोई वाला यह स्थान मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित है. मवई नदी का एक तट मध्य प्रदेश में और दूसरा तट छत्तीसगढ़ में आता है. स्थानीय लोग मवई नदी के जल को गंगाजल के समान पवित्र मानते हैं, क्योंकि मान्यता है कि माता सीता ने इस नदी में स्नान किया था, जिससे इसका जल गंगा की तरह पवित्र हो गया.
शोधकर्ताओं के अनुसार, राम वनगमन पथ के 248 महत्वपूर्ण स्थलों में से सीतामढ़ी हरचौका भी एक है. यह छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां सरकार द्वारा राम वनगमन पर्यटन मार्ग विकसित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है. यह क्षेत्र न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित होने की अपार संभावनाएं रखता है.
घर में छुपाकर रख दें होलिका की राख, आपसे थर-थर कांपेंगे भूत प्रेत, कई बीमारियों का भी निपटारा तय
12 Mar, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
छतरपुर जिले में होलिका दहन के समय गोबर के उपले (कंडे) जलाना एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जो शुभ और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी है. होलिका दहन में गोबर के उपले जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है. बता दें, होलिका दहन के कुछ दिन पहले से गोबर के बल्ले बनने शुरू हो जाते हैं.
गोबर के उपले जलाने का महत्व
82 वर्षीय प्रेमा बाई बताती हैं कि परंपरा के अनुसार, छोटे-छोटे गोबर के उपले (गुलरियां) या बल्ले बनाकर उन्हें सूखाया जाता है और फिर एक रस्सी में पिरोकर माला बनाई जाती है. गोबर के बल्ले बनने के बाद इसकी 7 मालाएं बनाई जाती हैं. जिसमें 1 माला बड़ी होलिका दहन में जला दी जाती है. इसके बाद 6 मालाएं घर लाई जाती हैं. जिसमें से 5 मालाएं घर में जलने वाली होलिका दहन में डाल दी जाती हैं. बची हुई एक माला को घर के द्वार पर टांग ली जाती है.
बल्ले की माला बदलने की है परंपरा
प्रेमा बाई बताती हैं कि अभी जो घर के द्वार पर गोबर के बल्ले की माला टंगी है. इसको होलिका दहन में जला दिया जाता है. साथ ही बल्लों की एक माला की अदला-बदली की जाती है.
बल्लों की राख को मानते हैं पवित्र
प्रेमा बाई बताती हैं कि बड़ी होलिका दहन की राख को घर के किसी गुप्त स्थान पर रखा जाता है. जिसे बहुत पवित्र माना जाता है. इसे भूत-प्रेत जैसी बाधाओं से बचाने के लिए घर में रखा जाता है. साथ ही राख को बीमार व्यक्ति के माथे पर लगाया जाता है.
पर्यावरण संरक्षण का संदेश
गोबर के उपले पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद होते हैं, क्योंकि इन्हें जलाने से निकलने वाला धुआं, पर्यावरण में मौजूद कई प्रकार के जीवाणु और कीटाणु नष्ट कर देता है.
ऐसे बनाए जाते हैं उपले(कंडे)
गाय के गोबर के छोटे-छोटे गोले बनाकर, उनमें बीच से छेद करके धूप में सुखाया जाता है. इन गोलों को माला की तरह बनाकर, होलिका की अग्नि में जलाया जाता है.
माना जाता है कि होली पर जलाए गए गोबर के बल्ले घर की हर समस्या का समाधान करते हैं. होलिका दहन के समय इसे जलाने से परिवार की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि बढ़ती है.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
12 Mar, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- विशेष कार्य स्थगित रखें, अचानक घटना का योग बन सकता है सावधान रहें।
वृष राशि :- सफलता के साधन जुटायें, अन्यथा आरोप व क्लेश संभव है।
मिथुन राशि :- अधिकारियों से मेल-मिलाप स्थगित रखें, क्लेश व अशांति का वातावरण बनेगा।
कर्क राशि :- विरोधी प्रबल होंगे, परेशानी से बचिये, जल्दबाजी से कार्य में हानि हो सकती है।
सिंह राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल होगा, मान-प्रतिष्ठा, सुख के साधनों में वृद्धि होगी।
कन्या राशि :- कुटुम्ब की समस्यायें सुलझेंगी, धन का व्यय होगा, सुख में वृद्धि होगी।
तुला राशि :- संतान से सुख एवं सम्पन्नता के योग बनेंगे, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
वृश्चिक राशि :- कार्य-कुशलता से संतोष, बिगड़े कार्य बनेंगे, इष्ट मित्रों से परेशानी होगी।
धनु राशि :- कार्य-व्यवसाय उत्तम, किराना-कपड़ा व्यवसाय अवश्य ही बढ़ेगा।
मकर राशि :- स्त्री कष्ट, समय और धन नष्ट होगा, स्वभाव में बेचैनी अवश्य बनेगी।
कुंभ राशि :- षड़यंत्र व कष्टप्रद स्थिति सामने आयेगी, कुटुम्ब के लोग पीड़ा पहुंचायेंगे।
मीन राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, व्यवसाय की चिन्ता होगी।
ना जाने इस गांव में कैसा खौफ? होली के दिन घर में छुप जाते हैं लोग, गांव के एक शख्स ने खोले सारे राज
11 Mar, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
खरहरी और धमनागुड़ी दोनों ही गांव की आबादी लगभग तीन हजार है. ऐसा नहीं है कि इस गांव में लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं. गांव की बड़ी आबादी हाई स्कूल पास है. नौजवान लड़के-लड़कियां कॉलेज भी पढ़ने जाते हैं.
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में खरहरी और धमनागुड़ी नाम के दो गांव ऐसे हैं, जहां पिछले 200 सालों से होली का त्योहार नहीं मनाया जाता है. इन गांवों में होली के दिन सन्नाटा पसरा रहता है और लोग अपने घरों में दुबके रहते हैं. इसकी वजह एक अजीबोगरीब खौफ है, जो इन गांवों के लोगों के दिलों में बसा हुआ है.
ग्रामीणों का मानना है कि अगर किसी बाहरी शख्स ने उन्हें होली के दिन रंग या गुलाल लगा दिया, तो उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. उनका कहना है कि होली जलाने और रंग गुलाल खेलने से गांव पर दैविय प्रकोप आ सकता है. इसी आशंका के चलते इन दोनों गांवों में होली के मौके पर वीरानी छाई रहती है.
खरहरी और धमनागुड़ी दोनों ही गांव की आबादी लगभग तीन हजार है. ऐसा नहीं है कि इस गांव में लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं. गांव की बड़ी आबादी हाई स्कूल पास है. नौजवान लड़के-लड़कियां कॉलेज भी पढ़ने जाते हैं, लेकिन वे घर के बड़े-बुजुर्गों के निर्देशों का उल्लंघन नहीं करते हैं.
गांव के बुजुर्ग इस बात की पुष्टि करते हैं कि पीढ़ी दर पीढ़ी वे ये देखते आए हैं कि गांव में ना तो होलिका दहन होता है और ना ही कोई ग्रामीण रंग गुलाल खेलने की हिम्मत करता है.
छत्तीसगढ़ अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉक्टर दिनेश मिश्रा इसे बकवास बताते हैं. उनके मुताबिक, 200 साल पहले की कोई घटना मान्यता बन गई होगी, लेकिन यह सुनी-सुनाई घटना होगी. इसका कोई परीक्षण और प्रमाण स्पष्ट नहीं है. उनके मुताबिक, यह अंधविश्वास के अलावा कुछ और नहीं है.
यह अंधविश्वास इन गांवों के लोगों के जीवन का एक हिस्सा बन गया है और वे सदियों से इसका पालन करते आ रहे हैं. होली का त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन इन गांवों में डर और आशंका का माहौल बना रहता है.
बृहस्पति को मजबूत करने के लिए करें ये विशेष उपाय, खोलें किस्मत के द्वार
11 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को गुरु का स्थान प्राप्त है. यह ज्ञान, बुद्धि, समृद्धि, भाग्य और धार्मिकता का कारक ग्रह माना जाता है. कुंडली में बृहस्पति की कमजोर स्थिति व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार की समस्याओं का कारण बन सकती है. गुरु के कमजोर होने के लक्षण और उसे मजबूत करने के उपाय.
बृहस्पति कमजोर होने के लक्षण:
शिक्षा और करियर में बाधाएं आना.
आर्थिक परेशानियाँ और धन की कमी.
वैवाहिक जीवन में समस्याएं
स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां, विशेषकर पेट और लीवर से संबंधित.
भाग्य का साथ न मिलना और कार्यों में असफलता.
मानसिक तनाव और निराशा.
धार्मिक कार्यों में रुचि कम होना.
बृहस्पति को मजबूत करने के उपाय:
बृहस्पति को मजबूत करने के लिए कई उपाय बताए गए हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं-
गुरुवार का व्रत: गुरुवार का व्रत रखना बृहस्पति को प्रसन्न करने का एक सरल और प्रभावी उपाय है. इस दिन पीले वस्त्र धारण करें, केले के पेड़ की पूजा करें और विष्णु भगवान की आराधना करें.
दान: गुरुवार के दिन पीली वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है. आप चने की दाल, हल्दी, पीले वस्त्र, सोना, पुस्तकें आदि दान कर सकते हैं.
रत्न: पुखराज बृहस्पति का रत्न है. ज्योतिषीय सलाह के अनुसार पुखराज धारण करने से बृहस्पति की स्थिति मजबूत होती है. इसके अलावा सुनेला या सोनल उपरत्न भी धारण किया जा सकता है.
मंत्र जाप: बृहस्पति के बीज मंत्र “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः” का जाप करने से बृहस्पति की कृपा प्राप्त होती है. इस मंत्र का 108 बार या एक माला जाप करना चाहिए.
केले के पेड़ की सेवा: गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करना और जल चढ़ाना भी बृहस्पति को प्रसन्न करता है.
अन्य उपाय: माथे पर चंदन या हल्दी का तिलक लगाना, पीले वस्त्र धारण करना, सोने के आभूषण पहनना, और नियमित रूप से मंदिर में हल्दी का दान करना भी बृहस्पति को मजबूत करने में सहायक होते हैं.
31 मार्च या 01 अप्रैल...! कब शुरू हो रहा चैत छठ? जानें संतान प्राप्ति के लिए क्या करें उपाय
11 Mar, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साल भर में कुल दो बार छठ महापर्व मनाया जाता है. एक चैत्र के महीने में दूसरा कार्तिक के महीने में. छठ पूजातो वैसे पूरे देश भर में मनाया जाता है, लेकिन विशेष कर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और बंगाल में इस पर्व को पुरे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है. सभी पर्व त्यौहार में छठ पूजा ही एक ऐसा पर्व है, जिसे महापर्व के रूप मे मनाया जाता है. छठ महापर्व में प्रत्यक्ष रूप से भगवान सूर्य की आराधना की जाती है. छठ पूजा में शुद्धता का बेहद खास ध्यान रखा जाता है,
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य?
चैती छठ मेें माता षष्ठी और भगवान सूर्य देव की आराधना की जाती है. चैती छठ के दौरान शुद्धता का भी बेहद खास ख्याल रखा जाता है. छठ पूजा पुरे चार दिनों तक चलता है. नहाय खाय के साथ पूजा आरम्भ होता है. दूसरे दिन खरना का प्रसाद ग्रहण करना चाहिए, तीसरा दिन डूबते सूर्य को अर्घ दिया जाता है और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ देने के साथ ही पर्व का समापन हो जाता है.
कब से शुरु हो रही है चैती छठ?
ज्योतिषाचार्य बताते है चेती छठ पूजा का आरम्भ 01 अप्रैल नहाय खाय के साथ हो रहा है और 02 अप्रैल खरना का प्रसाद और 03 अप्रैल डूबते सूर्य को अर्घ और 04अप्रैल उगते सूर्य को अर्घ के साथ हीं इस महापर्व का समापन हो जाएगा.
चैती छठ का है खास महत्व
ज्योतिषाचार्य बताते है की छठ महापर्व के दौरान जो व्रती है. वह 36 घंटे बिना अन्न जल ग्रहण किये उपवास पर रहती हैं. इसके साथ ही छठ पूजा के दौरान अगर व्रत रखकर पुरे शुद्ध मन से भगवान सूर्य को अपनी मनोकामना लिए अर्घ प्रदान करें, तो बड़े से बड़े रोग, दोष, कष्ट के साथ हीं सभी मनोकामना पूर्ण होती है. इसके साथ हीं निःसंतान दम्पति अगर व्रत रखकर भगवान सूर्य और माता षष्ठी की आराधना करें, तो उनको संतान की भी जल्द प्राप्ति होती है.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
11 Mar, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कार्य-कुशलता से संतोष तथा मनोबल उत्सावर्धक होगा, कार्य का ध्यान रखें।
वृष राशि :- स्वभाव में खिन्नता होने से हीन भावना से बचिये अन्यथा झगड़ा होगा।
मिथुन राशि :- अशांति तथा विलासिता से बचिये तथा विवाद होने की संभावना है सावधान रहें।
कर्क राशि :- स्त्री वर्ग से भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी, रुके कार्यों से परेशानी होगी, धैर्य रखें।
सिंह राशि :- आलोचनाओं से बचिये, कार्य-कुशलता से संतोष होगा, समय का ध्यान रखें।
कन्या राशि :- धीमी गति में सुधार अपेक्षित होगा तथा सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
तुला राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास, शत्रु वर्ग से चिन्ता होगी, कुटुम्ब की समस्यायें खत्म होंगी।
वृश्चिक राशि :- योजना फलीभूत होगी तथा इष्ट मित्र सुखवर्धक होगा, कार्य अवरोध होगा।
धनु राशि :- मित्रों से सहयोग मिलेगा, रुके कार्य बनेंगे, अधिकारियों का सहयोग मिलेगा।
मकर राशि :- कुटुम्ब में सुख, मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी, बड़े-बड़े लोगों से मेल-मिलाप होगा।
कुंभ राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल होगा, दैनिक गति मंद तथा बिगड़े कार्य अवश्य बनेंगे।
मीन राशि :- कार्य व्यवस्था में अनुकूलता बनेगी, समृद्धि के साधन अवश्य बनेंगे।
चमत्कार या विश्वास! शनिदेव को क्यों चढ़ाया जाता है तेल? रहस्य जान हो जाएंगे हैरान
10 Mar, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शनि देव की पूजा विशेष रूप से शनिवार के दिन की जाती है, क्योंकि यह दिन शनि देव को समर्पित माना जाता है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, शनि देव की कृपा पाने के लिए श्रद्धालु विधि-विधान से उनकी पूजा करते हैं. पूजा में काले तिल, तेल, गुड़, लोहे की वस्तुएं, नीले या काले फूल, और दीपक अर्पित किए जाते हैं. भक्त प्रातः स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण कर शनि देव के मंदिर जाते हैं और तेल चढ़ाकर, धूप-दीप जलाकर, शनि चालीसा का पाठ करते हैं. साथ ही, जरूरतमंदों को दान देना भी अत्यंत शुभ माना जाता है.
धनबाद के सरायडेला क्षेत्र में स्थित शनि मंदिर भक्तों की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है. यह मंदिर लगभग 25 वर्ष पुराना है और इसकी मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है. यही कारण है कि हर शनिवार को इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. श्रद्धालु दूर-दूर से यहाँ शनि देव के दर्शन और पूजा के लिए आते हैं. मंदिर के पुजारी सुभाष भार्गव ने ‘लोकल 18’ से बातचीत में इस मंदिर की महिमा और विशेषताओं के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालु सरसों का तेल, काले तिल, लोहे की वस्तुएं, और अगरबत्ती चढ़ाते हैं. कहा जाता है कि शनि देव को तेल अर्पित करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं.
इस मंदिर में शनिवार को सुबह 4 बजे से लेकर रात के 10 बजे तक कंटिन्यु पूजा होती है. इस मंदिर के महत्व को समझाने के लिए पुजारी शुभाष भार्गव ने एक प्राचीन कथा भी सुनाई. कथा के अनुसार, जब बजरंगबली (हनुमान जी) ने शनि देव को उनके अहंकार के कारण मूर्छित कर दिया, तब शनि देव ने उनसे प्रार्थना की –
\”प्रभु! आपने मुझे मूर्छित कर दिया, अब मेरे शरीर की पीड़ा कैसे दूर होगी?\” तब हनुमान जी ने शनि देव को यह वरदान दिया –
\”जैसे-जैसे भक्त तुम्हें सरसों का तेल चढ़ाएंगे, वैसे-वैसे तुम्हारी सारी पीड़ा दूर हो जाएगी.” इसी कारण से शनि देव को तेल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है, और आज भी श्रद्धालु शनि देव को तेल अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
सरायडेला स्थित यह शनि मंदिर धनबाद और आसपास के क्षेत्रों में अत्यंत प्रसिद्ध है. यहाँ हर शनिवार को विशेष पूजा और हवन का आयोजन होता है. मंदिर में भक्तों की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि यहाँ मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है, जो भी व्यक्ति सच्चे मन से शनि देव की आराधना करता है और उनके बताए नियमों का पालन करता है, उसकी सभी परेशानियाँ दूर हो जाती हैं. इसलिए, यदि आप भी शनि देव की कृपा पाना चाहते हैं, तो श्रद्धा और विश्वास के साथ इस पवित्र मंदिर में दर्शन कर सकते हैं.
अद्भुत रत्न है 4 मुखी रुद्राक्ष, धारण करते ही होते हैं गजब के लाभ, एक्सपर्ट से जानें 7 तरह के फायदे
10 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रुद्राक्ष एक ऐसा दिव्य रत्न है, जो न सिर्फ धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके शारीरिक और मानसिक लाभ भी बहुत हैं. इनमें से एक विशेष प्रकार का रुद्राक्ष है, जिसे “चार मुखी रुद्राक्ष” कहा जाता है. इस रुद्राक्ष को भगवान ब्रह्मा का प्रतीक माना जाता है और यह विशेष रूप से ज्ञान, बुद्धि और आत्मविश्वास में वृद्धि करने के लिए जाना जाता है. अगर आपकी कुंडली में बुध ग्रह कमजोर है या कोई शारीरिक और मानसिक पीड़ा है, तो यह रुद्राक्ष आपके लिए एक अद्भुत उपचार का काम कर सकता है. इस रुद्राक्ष का इस्तेमाल कई समस्याओं के समाधान के रूप में किया जा सकता है और यह जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव डालता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
चार मुखी रुद्राक्ष को धारण करने के बाद इसके लाभों का अनुभव किया जा सकता है. यह न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक और बौद्धिक दृष्टिकोण से भी इसे धारण करने वालों के लिए कई तरह के फायदे होते हैं. आइए जानते हैं इसके कुछ प्रमुख लाभों के बारे में.
1. मानसिक और बौद्धिक लाभ
चार मुखी रुद्राक्ष का सबसे प्रमुख लाभ मानसिक और बौद्धिक दृष्टिकोण से होता है. यह व्यक्ति की बुद्धि और स्मरण शक्ति को तेज करता है. इसके अलावा, यह एकाग्रता और ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है, जिससे अध्ययन और काम में उत्तमता आती है.
2. विद्यार्थियों के लिए विशेष लाभ
चार मुखी रुद्राक्ष विद्यार्थियों के लिए बहुत लाभकारी होता है. जो विद्यार्थी पढ़ाई में कमजोर महसूस करते हैं, उनके लिए यह रुद्राक्ष एक वरदान साबित हो सकता है. शोधकर्ता, लेखक और विभिन्न प्रकार के विद्वान इस रुद्राक्ष का लाभ उठाकर अपने कार्यों में सुधार कर सकते हैं.
3. संचार और व्यक्तित्व विकास
इस रुद्राक्ष का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह आत्मविश्वास को बढ़ाता है और बोलने की शक्ति को अधिक प्रभावशाली बनाता है. जो लोग पब्लिक स्पीकिंग, शिक्षण, या नेतृत्व की भूमिका में होते हैं, उनके लिए यह रुद्राक्ष बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है. यह व्यक्ति की झिझक और डर को भी दूर करता है, जिससे वह अपने विचारों को बेझिजक तरीके से व्यक्त कर पाता है.
4. शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार
चार मुखी रुद्राक्ष सिर्फ मानसिक लाभ ही नहीं, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी होता है. यह विभिन्न मानसिक रोगों, ज्वर, मस्तिष्क और मुखर अंगों के विकारों, बवासीर, गर्दन संबंधी रोग, खसरा, यकृत और तंत्रिका अवसाद जैसी बीमारियों में भी लाभकारी माना जाता है.
5. रिश्तों में सुधार
इस रुद्राक्ष को धारण करने से व्यक्ति के रिश्तों में भी सुधार आता है. विशेष रूप से मित्रों, मामा-मामी, मौसा-मौसी, दत्तक पुत्र और परिवार के अन्य रिश्तों में सौहार्द्र बढ़ता है. यह रिश्तों में विश्वास और समझ को मजबूत करता है.
6. पेशेवर जीवन में फायदा
जो लोग पेशेवर जीवन में हैं, जैसे कि मुनीम, चार्टर्ड अकाउंटेंट, और व्यवसाय से जुड़े लोग, वे भी इस रुद्राक्ष के लाभ से अधिक फायदा प्राप्त कर सकते हैं. यह उनके कार्यक्षेत्र में सफलता पाने में मदद करता है और जीवन में संतुलन बनाए रखता है.
7. गले और श्वसन संबंधी समस्याओं में राहत
चार मुखी रुद्राक्ष गले, थायरॉइड और श्वसन संबंधी समस्याओं में भी राहत देने वाला माना जाता है. यह सिरदर्द, माइग्रेन और मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है, जिससे व्यक्ति मानसिक शांति और राहत महसूस करता है.
होली पर जरूर खरीदें ये 3 चीजें, कभी नहीं होगी धन की कमी, मां लक्ष्मी की बनी रहेगी कृपा!
10 Mar, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
होली का पर्व रंगों और खुशियों का प्रतीक है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है. पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है और इसके अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह दिन न केवल बुरी शक्तियों को दूर करने के लिए बल्कि धन, समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति के लिए भी शुभ माना जाता है. होली के दिन कुछ विशेष चीजों की खरीदारी करने से घर में मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और आर्थिक संकट कभी नहीं आता.
लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थित गृह स्थानम के ज्योतिषी अखिलेश पांडेय ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार ही नहीं, बल्कि धन, समृद्धि और सुख-शांति प्राप्त करने का भी उत्तम अवसर है. इस साल होली का त्योहार 14 मार्च, शुक्रवार को मनाया जाएगा. होली से एक दिन पहले होलिका दहन करने की परंपरा है यानी 13 मार्च को होलिका दहन होगा. इस दिन चांदी का सिक्का, चांदी का छल्ला और चांदी की बिछिया खरीदने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में धन की कभी भी कमी नहीं होती. यह सरल उपाय जीवन में खुशहाली और आर्थिक स्थिरता लाने में सहायक होता है. इसलिए, इस होली पर इन चीजों की खरीदारी जरूर करें और अपने जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का स्वागत करें.
इन तीन चीजों का महत्व और उनसे जुड़े लाभ:
1. चांदी का सिक्का:
चांदी का सिक्का खरीदना और उसकी विधिवत पूजा करना मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का एक श्रेष्ठ उपाय है. यह घर में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है और धन की वृद्धि करता है. होली के दिन चांदी का सिक्का खरीदकर उसे तिजोरी या पूजास्थल में रखने से घर में आर्थिक स्थिरता बनी रहती है.
2. चांदी का छल्ला:
चांदी का छल्ला पहनना मानसिक शांति और सकारात्मकता को बढ़ाता है. यह राहु-केतु के बुरे प्रभावों को कम करता है और व्यक्ति के भाग्य को मजबूत बनाता है. होली के दिन चांदी का छल्ला खरीदकर उसे धारण करने से धन और उन्नति के नए रास्ते खुलते हैं.
3. चांदी की बिछिया:
चांदी की बिछिया महिलाओं के लिए शुभ मानी जाती है. यह वैवाहिक सुख को बढ़ाने के साथ-साथ आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ करती है. होली के दिन चांदी की बिछिया खरीदकर पहनने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है.
चांदी की खरीदारी के अन्य लाभ:
चांदी शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. यह बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है. चांदी की वस्तुएं धारण करने से मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है.होली जैसे शुभ अवसर पर चांदी खरीदने से ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
गंगा की तरह पवित्र है इस तालाब का पानी, नहाने से ठीक हो जाते हैं कई रोग
10 Mar, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आधुनिकता की चकाचौंध में तालाबों का अस्तित्व खतरे में है, अतिक्रमण के चलते जल के प्रमुख स्रोत विलुप्ति की कगार पर हैं. लेकिन कोरबा जिले के पटियापाली गांव के ग्रामीणों ने अपने गांव के एक पुराने तालाब को सहेज कर रखा है. यह तालाब न केवल जल का स्रोत है, बल्कि ग्रामीणों की अटूट आस्था का केंद्र भी है.
ग्रामीण इसे ‘तरिया देवी’ के नाम से पुकारते हैं और मानते हैं कि इसमें सात देवियों का वास है. मान्यता है कि इस तालाब का पानी गंगा के समान पवित्र है और इसमें औषधीय गुण मौजूद हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इस तालाब में स्नान करने से त्वचा रोग और कई तरह की बीमारियां ठीक हो जाती हैं.
यह तालाब लगभग 100 से 120 साल पुराना है और इसे ‘बड़ा तालाब’ के नाम से जाना जाता है. पुराने समय में यह तालाब आसपास के कई गांवों के लिए ना सिर्फ निस्तारी, बल्कि पीने के पानी का भी एकमात्र स्रोत था.
आधुनिकता की चकाचौंध में तालाबों का अस्तित्व खतरे में है, अतिक्रमण के चलते जल के प्रमुख स्रोत विलुप्ति की कगार पर हैं. लेकिन कोरबा जिले के पटियापाली गांव के ग्रामीणों ने अपने गांव के एक पुराने तालाब को सहेज कर रखा है. यह तालाब न केवल जल का स्रोत है, बल्कि ग्रामीणों की अटूट आस्था का केंद्र भी है.
ग्रामीण इसे ‘तरिया देवी’ के नाम से पुकारते हैं और मानते हैं कि इसमें सात देवियों का वास है. मान्यता है कि इस तालाब का पानी गंगा के समान पवित्र है और इसमें औषधीय गुण मौजूद हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इस तालाब में स्नान करने से त्वचा रोग और कई तरह की बीमारियां ठीक हो जाती हैं.
यह तालाब लगभग 100 से 120 साल पुराना है और इसे ‘बड़ा तालाब’ के नाम से जाना जाता है. पुराने समय में यह तालाब आसपास के कई गांवों के लिए ना सिर्फ निस्तारी, बल्कि पीने के पानी का भी एकमात्र स्रोत था.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
10 Mar, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- किसी आरोप से बचिये, मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि के योग अवश्य ही बनेंगे।
वृष राशि :- कुछ बाधायें कष्टप्रद होंगी, स्त्री शरीर कष्ट होगा, समय का ध्यान रखें।
मिथुन राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष, चिन्ता, व्यवसाय कार्य में आरोप-प्रत्यारोप से बचिये।
कर्क राशि :- दैनिक व्यवसाय गति मंद रहेगी, असमर्थता का वातावरण बना ही रहेगा।
सिंह राशि :- धन का व्यर्थ व्यय होगा, दूसरों के कार्यों में हस्ताक्षेप न करें।
कन्या राशि :- विशेष कार्य स्थगित रखें फिर भी कार्य सफलता पूर्वक अवश्य होंगे।
तुला राशि :- आशानुकूल सफलता से हर्ष, दैनिक व्यवसाय गति उत्तम बनेगी।
वृश्चिक राशि :- अधिकारियों का मेल-मिलाप फलप्रद होगा तथा चिन्ता कम होगी।
धनु राशि :- विशेष कार्य स्थगित रखें, कार्यगति में सुधार होगा, कार्य योजना बनेगी।
मकर राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा, कार्यगति में सुधार होगा, कार्य पर ध्यान दें।
कुंभ राशि :- कार्य क्षमता में अचानक असमर्थता का वातावरण बनेगा, धैर्य पूर्वक आगे बढ़ें।
मीन राशि :- अर्थ व्यवस्था में सुख, संतोष, धन प्रप्ति व समृद्धि के योग बनेंगे।
जौ के इस कारगर उपाय से हो जाएंगे मालामाल! आजमाएं लाल किताब का ये अचूक नुस्खा
9 Mar, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव माना जाता है. अगर जीवन में परेशानियां, आर्थिक तंगी, स्वास्थ्य समस्याएं या अन्य बाधाएं आ रही हैं तो ग्रहों को शांत करने के कुछ उपाय किए जा सकते हैं. नियमित रूप से सही उपाय करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं. लाल किताब में कई ऐसे अचूक उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाने से धन, स्वास्थ्य और सफलता की बाधाएं दूर हो सकती हैं. यहां कुछ सरल और प्रभावी उपाय दिए जा रहे हैं, जो सभी ग्रहों को संतुलित कर सकते हैं. इन उपायों के बारे में बता रहे हैं ज्योतिषाचार्य धर्मेंद्र कुमार शर्मा.
रोज़ पक्षियों को दाना डालें
हर दिन पक्षियों को सात प्रकार के अनाज खिलाएं. यह राहु, केतु, शनि और बुध ग्रह के नकारात्मक प्रभाव को कम करता है और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है.
सरसों के तेल का दान करें
शनिवार को सरसों के तेल का दान करें और पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं. इससे शनि और राहु ग्रह शांत होते हैं और जीवन में स्थिरता आती है.
चंद्रमा के लिए ठंडे जल का सेवन करें
चंद्रमा मन का कारक ग्रह होता है. रोज़ ठंडा जल पिएं और अपने घर में शांति बनाए रखें. इससे मानसिक तनाव कम होता है और धैर्य बना रहता है.
अखरोट और नारियल प्रवाहित करें
शनिवार को बहते जल में अखरोट या नारियल प्रवाहित करें. यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और सफलता के मार्ग खोलता है.
लाल किताब के अनुसार धन प्राप्ति का उपाय
रात को सोते समय पलंग के नीचे एक कटोरी में जौ रखें और सुबह उसे गरीबों में बांट दें. इससे आर्थिक संकट धीरे-धीरे समाप्त होगा. साथ ही परिवार में कभी धन की कमी नहीं रहेगी.
रोगों से मुक्ति के लिए उपाय
जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करे, तो नीम की कोपल, गुड़ और मसूर का सेवन करें. इससे पूरे वर्ष स्वास्थ्य अच्छा रहेगा.
पुरानी बीमारी से मुक्ति के लिए गोमती चक्र को चांदी के तार में बांधकर अपने तकिए के पास रखें.
दुर्भाग्य से बचने के लिए उपाय
अमावस्या के बाद आने वाले पहले मंगलवार को 400 ग्राम दूध से धोए हुए चावल बहते जल में प्रवाहित करें. नजर दोष से बचने के लिए मिर्ची से उतारा करें और जलती आग में डाल दें.
इन 4 मंदिरों में दर्शन के बिना अधूरे हैं कैंचीधाम के दर्शन ! आप भी जानें नीम करोली बाबा के चारधाम
9 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यदि आपको कैंची धाम जाना चाहते हैं, आपके ऊपर बाबा की कृपा बना रही है तो आप जरूर जाइये. लेकिन कैंची धाम जाने से पहले इस लेख के माध्यम से यह जानकारी अवश्य कर लीजिए कि कैंची धाम के अलावा उसके आसपास में कौन से अन्य स्थान है जिन्हें बाबा का धाम कहा जाता है. कैंची धाम के आसपास बाबा के चार धाम माने जाते हैं. यदि आप इन चार धाम की यात्रा एक बार में करते हैं तो निश्चित रूप से आपको नीम करोली बाबा की कृपा प्राप्त होगी.आइये विस्तार से इन चार धाम के बारे में जानते हैं.
बाबा में है अटूट विश्वास : कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है यह भारत के प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाता है. विश्व प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा ने इस आश्रम की स्थापना की थी. यह आश्रम देश और दुनिया में शांति और अध्यात्म का केंद्र बन गया है. कैंची धाम में इस आश्रम की स्थापना 1960 में हुई थी.इस मंदिर की स्थापना स्वयं बाबा के द्वारा की गयी थी. दुनियाभर के भक्तों के लिये यहां आकर मानसिक शांति मिलती है औऱ उनका भाग्योदय होता है. बाबा की भक्तों में बाबा की प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास भरा हुआ है. अपने साथ हर पल बाबा के होने का आशीर्वाद प्राप्त है. लोगों को एहसास होता है कि बाबा हर समय उनके करीब में मौजूद रहते हैं.
चार धाम के दर्शन के बिना यात्रा अधूरी : यदि आप कैंची धाम जाते हैं तो आपको बाबा की चार धाम के दर्शन करने चाहिए क्योंकि बिना चार धाम दर्शन किए आपकी यात्रा अधूरी मानी जाएगी. बाबा की चार धाम में सबसे पहले धाम कैंची धाम है. नीम करोली बाबा के दूसरे धाम के रूप में नैनीताल शहर के पास में स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर है. जय हनुमान जी का एक बहुत प्रसिद्ध मंदिर माना जाता है इसे नीम करोली बाबा ने बनवाया था. इस मंदिर की दूरी नैनीताल शहर से करीब 3 किलोमीटर पड़ती है. बाबा का तीसरा धाम है भूमियाधार आश्रम नैनीताल से लगभग 12 किलोमीटर भवाली ज्योलीकोट के रास्ते में भूमियाधार नामक जगह पर स्थित है.
पूज्य महाराज जी इस जगह पर आया करते थे. चार धाम का चौथा और महत्वपूर्ण केंद्र काकडी घाट आश्रम है. भवाली से अल्मोड़ा की ओर जाते समय काकडीघाट आश्रम पड़ता है. महान संत सोमवारी महाराज की तपोस्थली काकडी घाट बाबा के द्वारा यहां पर एक शिवलिंग की स्थापना की गई थी. नीम करोली बाबा की सोमवारी बाबा पर विशेष श्रद्धा थी. यदि आप कैंची धाम की यात्रा का प्लान बना रहे हैं तो निश्चित रूप से आपको नीम करोली बाबा के इन चार धाम की यात्रा जरूर करनी चाहिए इन चार धाम की यात्रा के बाद ही आपकी कैंची धाम की यात्रा सफल मानी जाएगी और आपको नीम करोली बाबा का विशेष आशीर्वाद भी प्राप्त होगा.
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