धर्म एवं ज्योतिष
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
16 Mar, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- व्यय, बाधा, स्वभाव में उद्विघ्नता, दु:ख तथा कष्टप्रद स्थिति बनेगी, धैर्य रखें।
वृष राशि :- योजनायें पूर्ण होंगी, धन का व्यय, व्यवसायिक लाभ होगा, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा।
मिथुन राशि :- किसी आरोप से बचें, कार्यगति मंद रहेगी, क्लेश व अशांति का वातावरण रहेगा।
कर्क राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, कार्यगति में सुधार होगा, चिन्ता कम होगी।
सिंह राशि :- मनोबल उत्सावर्धक होगा, कार्यगति में सुधार होगा, लाभ के अवसर प्राप्त होंगे।
कन्या राशि :- सामर्थ्य और धन अस्त-व्यस्त होगा, सतर्कता से कार्य अवश्य ही निपटा लें।
तुला राशि :- मान-प्रतिष्ठा, सुख के साधन बनेंगे, स्त्री वर्ग से सुख और शांति अवश्य होगी।
वृश्चिक राशि :- अग्नि, चोटादि का भय, व्यर्थ भ्रमण व धन का व्यय होगा, बनते कार्य रुकेंगे।
धनु राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति, मानसिक विभ्रम, विद्वेश तथा भय बना ही रहेगा।
मकर राशि :- विवादग्रस्त होने से बचिये, तनाव, अशांति, मानसिक क्लेश रहेगा।
कुंभ राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष, इष्ट मित्र सुखवर्धक अवश्य होगा।
मीन राशि :- भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति, दिन उत्साह से बीतेगा, मनोवृत्ति उत्तम बनेगी ध्यान दें।
घर के मुख्य द्वार की किस दिशा में बनाएं स्वास्तिक?
15 Mar, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में हर शुभ कार्य को करने से पहले स्वास्तिक का चिन्ह बनाया जाता है. शास्त्रों के अनुसार स्वास्तिक चिन्ह बेहद शुभ होता है, इसलिए लोग इसे अपने घर के मुख्य द्वार पर या घर के मंदिर में विशेषतौर पर बनाते हैं. इसके साथ ही जब कोई नया वाहन खरीदता है या फिर कोई नया कार्य शुरू करता है तो उसके शुभ फलों की प्राप्ति के लिए स्वास्तिक का चिन्ह्न बनाया जाता है.
बहुत कम लोग जानते हैं कि स्वास्तिक को बनाने का सही तरीका क्या है और इसे किस दिशा में बनाना चाहिए. इसके साथ ही कहा जाता है कि जिस घर में द्वार पर यह चिन्ह होते हैं, वहां सदैव देवी-देवताओं का वास रहता है और नकारात्मकता दूर रहती है. तो आइए जानते हैं
स्वास्तिक बनाते समय कुछ विशेष बातों का रखें ध्यान
हल्दी व सिंदूर से बनाएं स्वास्तिक
स्वास्तिक कई वस्तुओं से बनाया जा सकता है, लेकिन वास्तु के नियमों के अनुसार माना जाए तो हल्दी और सिंदूर से स्वास्तिक बनाना शुभ होता है. इससे घर में वास्तुदोष दूर हो जाते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है.
इस दिशा में बनाएं स्वास्तिक
शास्त्रों के अनुसार, स्वास्तिक चिन्ह बनाने की शुभ दिशा उत्तर-पूर्व दिशा मानी जाती है. अगर इस दिशा में स्वास्तिक चिन्ह्र बनाया जाए तो बहुत शुभ व लाभकारी माना जाता है. इसके साथ ही स्वास्तिक को अगर आप मंदिर के मुख्य द्वार पर बना सकते हैं, साथ ही घर के प्रवेश द्वार पर ही इसे बनाना चाहिए. ऐसा करने से देवी मां की कृपा बनी रहती है.
घर के मुख्य द्वार व मंदिर में बनाएं स्वास्तिक
स्वास्तिक का चिन्ह घर के मुख्य द्वार पर और मंदिर में बनाने से वास्तु संबंधी दोष दूर होते हैं. स्वास्तिक बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि उसकी लंबाई चार अंगुली लंबी और चौड़ी होनी चाहिए. बता दें कि मंदिर में जब हम हल्दी से स्वास्तिक बनाते हैं तो इससे घर में सकारात्मकता बनी रहती है और मां लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है.
होली खेलने के तुरंत बाद करें चंद्र ग्रहण के ये उपाय, चंडाल समेत कई दोषों से मिलेगी मुक्ति और होगा धन लाभ
15 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
होली पर साल का पहला चंद्र ग्रहण लगा था, हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दिया लेकिन इसका प्रभाव मनुष्य, जीव-जंतु सभी पर पड़ता है और प्रकति में बदलाव देखने को मिलते हैं. कुंडली में चंद्रमा की स्थिति अनुकूल ना होने से चंद्र ग्रहण के दिन चंडाल दोष लगने की संभावना बढ़ जाती है इसलिए ग्रहण के खत्म होने के बाद भी कुछ लोगों को सावधानी से रहने की सलाह दी जाती है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होली खेलने के बाद चंडाल योग और ग्रहण के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए कुछ विशेष उपाय अवश्य करने चाहिए. ऐसा करने से सभी तरह के दोषों से मुक्ति मिलती है और कुंडली में चंद्रमा की स्थिति अनुकूल रहती है.
इस उपाय से वातावरण होगा पवित्र
चंद्र ग्रहण के बाद तुरंत घर की साफ सफाई करनी चाहिए और पूरे घर में गंगाजल से छिड़काव भी करना चाहिए. साथ कपूर व सुंगधित धूपबत्ती अवश्य जलानी चाहिए. दरअसल ग्रहण का प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है इसलिए घर की साफ सफाई और कपूर व धूपबत्ती जलाने से वातावरण पवित्र हो जाता है और चंडाल दोष भी दूर हो जाता है.
इस उपाय से दोष होंगे दूर
चंद्र ग्रहण के बाद घर के सभी सदस्य स्नान करें. अगर संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें अन्यथा स्नान के जल में गंगाजल मिला लें. ऐसा करने से ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव दूर होता है और चंद्रमा की स्थिति भी कुंडली में मजबूत होती है, जिससे मन शांत रहता है और हर अधूरे कार्य पूरे होते हैं.
इस उपाय से मिलेगा समाधान
चंद्र ग्रहण के बाद ईश्वर का ध्यान करें और शिवालय में जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें. साथ ही हनुमानजी की पूजा अर्चना करें और सुंदरकांड का पाठ करें. ऐसा करने से चंद्र ग्रहण का अशुभ प्रभाव दूर होता है और सभी समस्याओं का समाधान भी मिलता है.
इस उपाय से होगा फायदा
चंद्र ग्रहण के बाद दान करना बेहद उत्तम माना गया है. दान करने के लिए चंद्रमा से संबंधित चीजें जैसे – कपूर, दही, घी, शक्कर, दूध, सफेद कपड़ा आदि का दान करना चाहिए. साथ ही शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए काले तिल और सरसों का दान भी करना चाहिए. ऐसा करने से सभी दोष दूर होते हैं और नौकरी व कारोबार में फायदा मिलता है.
इस उपाय से मनोकामना होगी पूरी
पूजा, जप-तप व दान करने के बाद गाय माता की सेवा करनी चाहिए. सनातन धर्म में गौ पूजन का विशेष महत्व बताया गया है. गाय माता में 33 कोटी देवी देवता का वास होता है इसलिए गाय की सेवा और जलपान कराने से सभी देवी देवताओं का आशीर्वाद मिलता है और मनोकामना भी पूरी होती है.
देवी यमुना कैसे बनीं भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी? बेहद दिलचस्प है ये कहानी
15 Mar, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यमुना नदी भारत की पांचवीं सबसे लंबी नदी है जो उत्तराखंड के उत्तरकाशी के यमुनोत्री से निकलती है. इस पवित्र नदी को यमी और कालिंदी जैसे नामों से भी जाना जाता है. वो सूर्यदेव की पुत्री हैं और मृत्यु के देवता यमराज और न्यायधीश शनिदेव की बहन भी हैं. पौराणिक कहानियों में यमुना को एक देवी माना गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यमुना कैसे श्रीकृष्ण की पत्नी बनीं?
पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार देवी यमुना भगवान विष्णु से अगाध प्रेम करती थीं. उन्होंने कई जन्मों तक भगवान विष्णु को पाने के लिए कठोर तपस्या की. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि द्वापर युग में कृष्ण अवतार में वे उन्हें प्राप्त कर लेंगी. जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ तो उनके पिता वासुदेव उन्हें यमुना नदी पार करके गोकुल ले जा रहे थे. उस समय यमुना नदी उफान पर थीं लेकिन जैसे ही कृष्ण के चरण टोकरी से बाहर निकले यमुना ने उन्हें स्पर्श कर लिया. कृष्ण के चरण स्पर्श करते ही यमुना का वेग शांत हो गया.
एक अन्य कथा के अनुसार एक बार कृष्ण और अर्जुन वन में घूम रहे थे. कृष्ण को प्यास लगी तो वे पानी की तलाश में आगे बढ़े. उन्हें एक सुंदर स्त्री भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए दिखाई दीं. कृष्ण ने उनसे परिचय पूछा तो उन्होंने बताया कि वे विष्णु जी को प्राप्त करना चाहती हैं. देवी यमुना ने कहा कि अब द्वापर युग आ गया है और उन्हें अब भी विष्णु जी वर के रूप में नहीं मिले तो वे सदा यहीं तपस्या करती रहेंगी.
यह सुनकर कृष्ण ने यमुना को अपना परिचय दिया और उनसे विवाह कर लिया. विवाह के बाद कृष्ण ने देवी यमुना को पूजनीय होने का वरदान दिया. उन्होंने कहा, “हे यमुने! तुम्हारी तपस्या संपूर्ण मानवजाति के लिए एक प्रेरणा है. मेरे भक्त निश्चित रूप से तुम्हारी कृपा भी पाएंगे.” कृष्ण से विवाह करने के बाद देवी यमुना फिर से अपनी धारा में समा गईं.
इस तरह देवी यमुना की अटूट भक्ति और तपस्या के कारण उन्हें श्रीकृष्ण की पत्नी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. उनकी कहानी हमें यह प्रेरणा देती है कि सच्ची भक्ति और लगन से कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
15 Mar, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कार्य व्यवसाय में विचलित होंगे, स्त्री शरीर कष्ट, मानसिक बेचैनी बनेगी।
वृष राशि :- आकस्मिक बेचैनी, स्वभाव में खिन्नता, थकावट, असमंजस व अस्थिरता की स्थिति बनेगी।
मिथुन राशि :- अकारण बेचैनी, शरीर कष्ट, चोट-चपेट व कष्टप्रद स्थिति बनेगी, धैर्य रखें।
कर्क राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता से लाभ होगा, बिगड़े कार्य बनेंगे ध्यान दें।
सिंह राशि :- मन में बेचैनी, धन लाभ, आशानुकूल सफलता से लाभ होगा, समय का ध्यान रखें।
कन्या राशि :- अर्थलाभ कुटुम्ब की समस्यायें अवश्य ही सुलझेंगी, स्त्री कार्य से हर्ष होगा।
तुला राशि :- विरोधी परेशान करेंगे, प्रतिष्ठा पर आंच आने का भय सावधान रहें, मानसिक तनाव।
वृश्चिक राशि :- कार्यवृत्ति में सुधार, प्रगति की ओर बढ़ेंगे, मित्रों के सहयोग से कार्य होंगे।
धनु राशि :- अधिकारियों से तनाव व क्लेश, मान-प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे, रुके कार्य बनेंगे।
मकर राशि :- चिन्तायें कम होंगी, सफलता के साधन जुटायें, कार्य अवश्य ही होंगे।
कुंभ राशि :- आर्थिक परेशानी हो सकती है, कार्यवृत्ति में सुधार होगा, समय का ध्यान रखें।
मीन राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, आर्थिक योजना पूर्ण होगी, समय पर कार्य करें।
घर में नहीं टिक रहा पैसा, इस अचूक उपाय से कहीं नहीं जाएंगी लक्ष्मी!
14 Mar, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में पैसा कमाना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है उसे बचाना. कई बार ऐसा होता है कि हम खूब मेहनत करते हैं, पैसा भी कमाते हैं लेकिन वो टिकता नहीं. आता है और तुरंत खर्च हो जाता है. अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो चिंता न करें. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं, जिनसे आप अपनी आर्थिक स्थिति को सुधार सकते हैं और पैसे की बचत कर सकते हैं.
कुछ मुख्य कारण जिनकी वजह से पैसा नहीं टिकता
गलत वास्तु: ज्योतिषाचार्य अंशुल त्रिपाठी के अनुसार घर का वास्तु अगर सही नहीं है तो नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, जिससे आर्थिक परेशानियां आती हैं.
ग्रहों की दशा: ग्रहों की दशा भी आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है.
पैसा रोकने के कुछ अचूक उपाय
घर की सफाई: मां लक्ष्मी का वास वहीं होता है जहां साफ़-सफाई होती है. इसलिए घर को हमेशा साफ़ रखें, खासकर उत्तर-पूर्व दिशा को.
तुलसी की पूजा: रोज़ाना तुलसी के पौधे पर जल चढ़ाएं और शाम को दीपक जलाएं. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और धन की वृद्धि होती है.
सूर्य को जल: सुबह सूर्य को जल अर्पित करें. इससे रुके हुए धन की प्राप्ति होती है.
नमक का उपाय: घर के उत्तर-पूर्व दिशा में एक बर्तन में नमक रखें. इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.
झाड़ू का सम्मान: झाड़ू को लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. इसे हमेशा छुपा कर रखें और पैर न लगाएं.
दान करें: अपनी कमाई का कुछ हिस्सा दान करें. इससे पुण्य मिलता है और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है.
गुरुवार का व्रत: भगवान विष्णु को समर्पित गुरुवार का व्रत रखने से भी धन की प्राप्ति होती है.
कपूर का उपाय: शुक्रवार के दिन कपूर जलाकर उसका काजल बना लें और उससे एक भोजपत्र पर उस व्यक्ति का नाम लिखें, जिससे आपको पैसा लेना है. इससे रुका हुआ धन वापस आने की संभावना होती है.
सपने में देखा घोड़ा या कर रहे थे घुड़सवारी? जानें क्या ये शुभ संकेत है या आने वाली मुसीबत का इशारा?
14 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिल्ली: सनातन धर्म में स्वप्न शास्त्र नाम का भी एक शास्त्र है और ऐसा माना जाता है कि कुछ सपने इंसान के लिए शुभ माने जाते हैं तो वहीं कुछ सपनों का अशुभ प्रभाव भी पड़ता है. आप में से बहुत सारे लोगों ने कभी ना कभी सपने में घोड़ा देखा होगा. जब आपने घोड़ा देखा होगा तो आपके मन में भी यह सवाल होगा इस सपने का मतलब क्या है? इसका आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा? क्या इससे आपके जीवन में पॉजिटिव इंपैक्ट पड़ेगा या नेगेटिव इंपैक्ट पड़ेगा तो चलिए जानते हैं कि अगर अपने सपने में घोड़ा देखा है तो इसका क्या मतलब होता है…
गौरतलब है कि स्वप्न शास्त्र के अनुसार मनुष्य के जीवन में सपने का बेहद महत्व होता है. जब भी कोई इंसान कोई सपना देखता है तो उसके अंदर यह उत्सुकता होती है कि उसने जो सपना देखा है वह शुभ है या अशुभ है. अगर आपने सपने में घोड़ा देखा है तो स्वप्न शास्त्र के मुताबिक यह शुभ माना जाता है. बता दें कि सपने में घोड़ा देखना अच्छा होता है और इससे इंसान के मान-सम्मान में वृद्धि होती है और साथ ही साथ समाज में भी उसका दर्जा ऊंचा होता है.
घोड़े की फोटो देखना
वही स्वप्न शास्त्र के मुताबिक सपने में घोड़े की फोटो देखना ही बेहद शुभ माना गया है. अगर आप सपने में घुड़सवारी कर रहे हैं तो इसका मतलब यह है कि आप जो भी कार्य करेंगे उसमें आपको सफलता प्राप्त होगी. यह सपना तरक्की की ओर इशारा करता है.
घोड़े को दौड़ते हुए देखना
अगर अपने सपने में घोड़े को दौड़ते हुए देखा है तो यह सपना भी अच्छा माना जाता है. इस सपने का मतलब यह होता है कि आप जल्दी किसी यात्रा पर जा सकते हैं या किसी यात्रा की प्लानिंग कर सकते हैं.
घोड़े को उड़ते हुए देखना
अगर अपने सपने में पंख वाले घोड़े को उड़ते हुए देखा है तो यह सपना भी शुभ माना जाता है और यह इशारा कि आपके घर में शुभ और मांगलिक कार्य होने वाला है.
बीमार या घायल घोड़े को देखना
अगर अपने सपने में किसी बीमार या घायल घोड़े को देखा है तो यह सपना इस बात का संकेत देता है कि आपको सतर्क रहने की जरूरत है. ऐसा माना जाता है कि आप हेल्थ संबंधी परेशानियों का सामना कर सकते हैं. इसलिए आपको अपनी हेल्थ को लेकर सावधान रहने की जरूरत है.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
14 Mar, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कार्य व्यवसाय में विचलित होंगे, स्त्री शरीर कष्ट, मानसिक बेचैनी बनेगी।
वृष राशि :- आकस्मिक बेचैनी, स्वभाव में खिन्नता, थकावट, असमंजस व अस्थिरता की स्थिति बनेगी।
मिथुन राशि :- अकारण बेचैनी, शरीर कष्ट, चोट-चपेट व कष्टप्रद स्थिति बनेगी, धैर्य रखें।
कर्क राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता से लाभ होगा, बिगड़े कार्य बनेंगे ध्यान दें।
सिंह राशि :- मन में बेचैनी, धन लाभ, आशानुकूल सफलता से लाभ होगा, समय का ध्यान रखें।
कन्या राशि :- अर्थलाभ कुटुम्ब की समस्यायें अवश्य ही सुलझेंगी, स्त्री कार्य से हर्ष होगा।
तुला राशि :- विरोधी परेशान करेंगे, प्रतिष्ठा पर आंच आने का भय सावधान रहें, मानसिक तनाव।
वृश्चिक राशि :- कार्यवृत्ति में सुधार, प्रगति की ओर बढ़ेंगे, मित्रों के सहयोग से कार्य होंगे।
धनु राशि :- अधिकारियों से तनाव व क्लेश, मान-प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे, रुके कार्य बनेंगे।
मकर राशि :- चिन्तायें कम होंगी, सफलता के साधन जुटायें, कार्य अवश्य ही होंगे।
कुंभ राशि :- आर्थिक परेशानी हो सकती है, कार्यवृत्ति में सुधार होगा, समय का ध्यान रखें।
मीन राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, आर्थिक योजना पूर्ण होगी, समय पर कार्य करें।
होली को लेकर नई दुल्हन के लिए क्या हैं नियम
13 Mar, 2025 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
होली हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो खुशियों, रंगों और भाईचारे का प्रतीक है। इस दिन का इंतजार सभी लोग को रहता है। हिंदू धर्म में सभी त्यौहारों से जुड़ी बहुत सी मान्यताएं और परंपराएं होती। इसी तरह होली की एक मान्यता नई-नवेली दुल्हन से भी जुड़ी हुई है। हिंदु मान्यता के अनुसार, शादी के बाद नई दुल्हन की पहली होली अपने ससुराल में नहीं मानना चाहिए, बल्कि अपने मायके में ही मनानी चाहिए। ऐसा क्यों किया जाता हैं, हम आपकों इस रिपोर्ट में दे रहे जानकारी।
होली या होलिका दहन के समय सास-बहू का साथ में रहना सही नहीं माना जाता है। बताया जाता हैं कि नई दुल्हन को हमेशा अपनी पहली होली अपने मायका में बनाना चाहिए। मान्यता के अनुसार जब सास -बहू साथ में होलिका दहन देखती हैं या होली के दिन साथ में रंग खेलती है, तब घर में लड़ाई झगड़े की शुरुआत होती है। इससे घर का माहौल बहुत खराब हो सकता है और घर में हमेशा अशांति रहती है।
जब नई दुल्हन अपने मायका होली मनाती है, तब पति भी उनके साथ उनके घरवालों को होली की शुभकामनाएं देने जाता है। जिसके कारण पति पत्नी के बीच और प्यार बढ़ जाता हैं और सबके साथ रिश्ते भी मजबूत होते है।
कुछ लोगों का मानना है कि जब नई दुल्हन अपनी पहली होली अपने घर मनाने जाती है, तब उनकी संतान बहुत सुंदर और सुशील होती है। जो उनके भविष्य के लिए बहुत अच्छा है।
नई दुल्हन को पहली होली अपने मायका में इसलिए भी खेलनी चाहिए क्योंकि,वे अपने ससुराल में सास-ससुर और रिश्तेदार के साथ होली खेलने में थोड़ा झिझकती है। जिसके कारण वह होली नहीं खेल पाती है। इसलिए वह अपनी पहली होली अपने परिवार में खेलना पसंद करती है।
होलिका दहन पर किये गये उपायों से होती है जीवन की बाधाएं दूर
13 Mar, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में होली के त्योहार का विशेष महत्व है। होली का पर्व फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि होली पर किए गए उपाय जल्द सिद्ध हो जाते हैं। इससे जातक को जल्दी फल की प्राप्ति होती है। ज्योतिष शास्त्र में भी बताया गया है कि होली के दिन कुछ छोटे-छोटे उपाय करने से व्यक्ति के जीवन में खुशियां आती हैं।
होलिका दहन के समय अपने घर की नजर उतारकर शरीर पर उबटन लगाएं। फिर इसको होलिका में जलाने से नकारात्मक उर्जा दूर होती है। वहीं घर, दुकान, कार्यालय की नज़र उतार कर होलिका की आग में जलाने से लाभ मिलता है।
वहीं अगर आप कर्ज या फिर किसी तरह के अज्ञात भय के परेशान हैं, तो होलिका दहन के दिन नरसिंह स्त्रोत का पाठ करें। यह लाभकारी होगा। रात के समय होलिका में नारियल दहन करें। इस उपाय को करने नौकरी में आने वाली बाधाएं दूर हो जाएंगी।
अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से किसी बीमारी से परेशान है, तो होलिका दहन के बाद बची हुई राख को मरीज के सोने वाली जगह पर छिड़ने से जल्द लाभ मिलेगा। किसी भी कार्य में सफलता पाने के लिए होलिका दहन में पानी वाला नारियल और सुपारी अर्पित करें। इससे आपके कार्य सफलतापूर्वक होने लगेंगे। अगर आप अनावश्यक खर्चों से परेशान हो गए हैं, तो होलिका दहन के दूसरे दिन होलिका की राख को लाल रंग के रूमाल बांध दें। फिर इस रुमाल को अपने घर के धन स्थान पर रख दें। इस उपाय को करने से अनावश्यक खर्च रुक जाएंगे। इसके अलावा होलिका दहन के दिन शिवलिंग पर गोमती चक्र अर्पित करने से व्यापार में लाभ प्राप्त होता है।
होली में राशि के अनुसार करें रंगों का प्रयोग
13 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में होली को रंगों का पर्व माना जाता है जो जीवन मंश उत्साह का संचार करता है। मान्यता है कि रंग भी राशि से जुड़े होते हैं। ऐसे में होली में अगर हर कोई व्यक्ति अपनी राशि के अनुसार रंग का प्रयोग करता है तो वह उसे लिए अधिक लाभदायक रहता है। इससे पता चलता है कि कि कौन सा रंग उनके जीवन में खुशियों को लायेगा। राशि के अनुसार रंग के प्रयोग से जीवन में सकारात्मक रुख बनता है। ज्योतिष शास्त के अनुसार ऐसे में जातकों को अपनी अपनी राषियों के अनुरुप रंग का प्रयोग करना चाहिये।
रंग: लाल
मेष राशि के लोग साहसी और उत्साही होते हैं। होली में लाल रंग आपके लिए शुभ रहेगा। यह रंग आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और आपके कार्यक्षेत्र में सफलता की नई ऊंचाइयां छूने में मदद करेगा। लाल रंग आपके जीवन में ऊर्जा और जोश भरने का काम करेगा, जिससे आपके रिश्ते भी मजबूत होंगे।
वृषभ
रंग: हरा
वृषभ राशि के लोग शांत, स्थिर और प्रेमपूर्ण होते हैं। हरे रंग का प्रभाव आपके जीवन में शांति और समृद्धि लेकर आएगा। यह रंग आपको मानसिक संतुलन देगा और आपकी वित्तीय स्थिति को भी मजबूत बनाएगा। हरा रंग आपके जीवन में प्रगति और संतोष का संचार करेगा।
मिथुन
रंग: पीला
मिथुन राशि के लोग परिवर्तनशील और जिज्ञासु होते हैं। पीला रंग आपके लिए उत्तम रहेगा क्योंकि यह आपके जीवन में नई संभावनाओं और अवसरों का रास्ता खोलेगा। यह रंग आपके मानसिक स्पष्टता को बढ़ाएगा और आपकी रचनात्मकता को जागृत करेगा। पीला रंग आपके जीवन में सकारात्मक विचारों और नई शुरुआत को आकर्षित करेगा।
कर्क
रंग: सफेद
कर्क राशि के लोग भावनात्मक और परिवारिक होते हैं। सफेद रंग आपके लिए बहुत शुभ रहेगा क्योंकि यह शांति, सफाई और प्यार का प्रतीक है। सफेद रंग आपके जीवन में शांति और स्थिरता लाएगा। यह रंग आपके रिश्तों में सामंजस्य और प्यार को बढ़ाएगा।
सिंह
रंग: सुनहरा
सिंह राशि के लोग आत्मविश्वासी और शाही होते हैं। सुनहरा रंग आपके लिए अत्यंत शुभ रहेगा, क्योंकि यह सफलता, संपत्ति और सम्मान का प्रतीक है। यह रंग आपके जीवन में सफलता और प्रसन्नता लाएगा और आपको जीवन के हर क्षेत्र में चमकने का अवसर मिलेगा।
कन्या
रंग: नीला
कन्या राशि के लोग व्यावहारिक और शांति पसंद होते हैं। नीला रंग आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा क्योंकि यह शांति, संतुलन और मानसिक शांति का प्रतीक है। नीला रंग आपके जीवन में खुशी और मानसिक संतुलन लाएगा। यह रंग आपके रिश्तों में भी स्थिरता और सुख बढ़ाएगा।
तुला
रंग: गुलाबी
तुला राशि के लोग सौम्य और संतुलित होते हैं। गुलाबी रंग आपके लिए खुशियों और प्रेम का प्रतीक है। यह रंग आपके जीवन में प्यार और खुशी लाएगा। गुलाबी रंग आपके रिश्तों में ताजगी और रोमांस का संचार करेगा, साथ ही आपके भीतर खुशी और संतुलन बनाए रखेगा।
वृश्चिक
रंग: बैगनी
वृश्चिक राशि के लोग शक्तिशाली और रहस्यमय होते हैं। बैगनी रंग आपके लिए अत्यंत शुभ रहेगा क्योंकि यह रंग आपकी शक्ति, आकर्षण और आत्मविश्वास को बढ़ाता है। यह रंग आपके जीवन में नयापन और ऊर्जा लेकर आएगा, जिससे आप नए अवसरों का सामना बेहतर तरीके से कर सकेंगे।
धनु
रंग: नारंगी
धनु राशि के लोग स्वतंत्रता पसंद और रोमांचक होते हैं। नारंगी रंग आपके लिए बेहतरीन रहेगा क्योंकि यह ऊर्जा, उत्साह और साहस का प्रतीक है। नारंगी रंग आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएगा और आपकी कार्यक्षमता को बढ़ाएगा। यह रंग आपके भीतर नई ऊर्जा का संचार करेगा और आपकी यात्रा को सफलता की ओर ले जाएगा।
मकर
रंग: भूरा
मकर राशि के लोग मेहनती और व्यवस्थित होते हैं। भूरा रंग आपके लिए उत्तम रहेगा क्योंकि यह स्थिरता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। यह रंग आपके जीवन में मानसिक और वित्तीय संतुलन लाएगा। भूरा रंग आपके कार्य क्षेत्र में सफलता और आपकी मेहनत का फल देगा।
कुंभ
रंग: आसमानी नीला
कुंभ राशि के लोग स्वतंत्र विचारों वाले और सामाजिक होते हैं। आसमानी नीला रंग आपके जीवन में शांति और सृजनात्मकता लाएगा। यह रंग आपके कार्यक्षेत्र में नई और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देगा। आसमानी नीला रंग आपके व्यक्तित्व में सुधार लाएगा और आपको नए अवसरों का सामना करने में मदद करेगा।
मीन
रंग: हरा और नीला मिश्रित
मीन राशि के लोग संवेदनशील और सपने देखने वाले होते हैं। हरे और नीले रंगों का मिश्रण आपके लिए अत्यंत शुभ रहेगा, क्योंकि यह रंग आपके जीवन में मानसिक शांति और संतुलन लाएगा। यह रंग आपके रिश्तों में सौहार्द और समझ को बढ़ाएगा, साथ ही आपको अपने सपनों की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।
होली के बाद इन राशियों के जातकों के जीवन में आयेगा बदलाव
13 Mar, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिवार का दिन ‘न्याय के देवता’ शनिदेव की आराधना के लिए समर्पित है। कहा जाता है भगवान शनि की पूजा-आराधना करने से हर मनोकामना पूरी भी होती है! ज्योतिष शास्त्र के अनुसार करियर में सफलता पाने के लिए शनिदेव की पूजा करने की सलाह दी जाती है! ज्योतिष गणना के अनुसार फिलहाल शनिदेव कुंभ राशि में विराजमान है और साल मार्च-2025 के महीने में मीन राशि में गोचर करेंगे! जिसका प्रभाव 12 राशि के जातकों पर सकारात्मक और नकारात्मक तौर पर देखने को मिलेगा!
‘न्याय के देवता’ शनि अभी कुंभ राशि में विराजमान है और शनिदेव 29 मार्च को रात 11. 01 बजे कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में गोचर करेंगे! मीन राशि में शनि के गोचर करने से कई राशि के जातकों की किस्मत बदल सकती है तो कई राशि को सावधान रहने की जरूरत है लेकिन 3 रशियां ऐसी हैं जिनकी किस्मत बदल सकती है! जिसमें कर्क, वृश्चिक और मकर राशि के जातक शामिल हैं। गौरतलब है कि 2025 में होली 14 मार्च को है!
कर्क राशि: कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय बहुत अच्छा रहने वाला है! इस दौरान जातकों को कईतरह से लाभ होगा, जीवन के सभी संकट दूर होंगे, राजकीय सुख प्राप्त होगा! मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी, धन लाभ के योग बनेंगे, रुके हुए सभी कार्य पूर्ण होंगे!
वृश्चिक राशि: वृश्चिक राशि के जातकों पर हनुमान जी की विशेष कृपा रहेगी, सभी तरह का बिगड़ा काम बनेगा, करियर और कारोबार में नया आयाम मिलेगा, निवेश से लाभ होगा, परिवार में खुशियों का माहौल होगा, रुका हुआ धन वापस मिलेगा, शनिदेव की कृपा से नौकरी में प्रमोशन भी मिल सकता है!
मकर राशि: मकर राशि के जातकों को शनि की साढ़ेसाती से मुक्ति मिलेगी, साथ ही स्वास्थ्य संबंधी परेशानी दूर होगी, अटका हुआ धन प्राप्त होगा, मार्च के बाद बिगड़े काम बनेंगे, नए काम की शुरुआत करने के योग हैं, सभी बिगड़े कार्य बनेंगे। मां की सेहत का ख्याल रखें। निवेश से विशेष लाभ होगा।
इस तरह के भक्तों के पास रहते हैं भगवान
13 Mar, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
किसी भी वस्तु की चेतनता की पहचान इच्छा, क्रिया अथवा अनुभूति के होने से होती है। अगर किसी वस्तु में ये तीनों नहीं होते हैं, तो उसे जड़ वस्तु कहते हैं और इन तीनों के होने से उसे चेतन वस्तु कहते हैं। मनुष्य में इन तीनों गुणओं के होने से उसे चेतन कहते हैं। मनुष्य के मृत शरीर में इनके न होने से उसे अचेतन अथवा जड़ कहते हैं।
प्रश्न यह उठता है कि जो मनुष्य अभी-अभी इच्छा, क्रिया अथवा अनुभूति कर रहा था और चेतन कहला रहा था, वही मनुष्य इनके न रहने से मृत क्यों घोषित कर दिया गया जबकि वह सशरीर हमारे सामने पड़ा हुआ है? आमतौर पर एक डॉक्टर बोलेगा कि इस शरीर में प्राण नहीं हैं। शास्त्रीय भाषा में, जब तक मानव शरीर में आत्मा रहती है, उसमें चेतनता रहती है। उसमें इच्छा, क्रिया व अनुभूति रहती है। आत्मा के चले जाने से वही मानव शरीर इच्छा, क्रिया व अनुभूति रहित हो जाता है, जिसे आमतौर पर मृत कहा जाता है।
शास्त्रों के अनुसार स्वरूप से आत्मा सच्चिदानन्दमय होती है। सच्चिदानन्द अर्थात सत्+चित्+आनंद। संस्कृत में सत् का अर्थ होता है नित्य जीवन अर्थात् वह जीवन जिसमें मृत्यु नहीं है, चित् का अर्थ होता है ज्ञान जिसमें कुछ भी अज्ञान नहीं है और आनंद का अर्थ होता है नित्य सुख जिसमें दुःख का आभास मात्र नहीं है। यही कारण है कि कोई मनुष्य मरना नहीं चाहता, कोई मूर्ख नहीं कहलवाना चाहता और कोई भी किसी भी प्रकार का दुःख नहीं चाहता।
अब नित्य जीवन, नित्य आनंद, नित्य ज्ञान कहां से मिलेगा? जैसे सोना पाने के लिए सुनार के पास जाना पड़ता है, लोहा पाने के लिए लोहार के पास, इसी प्रकार नित्य जीवन-ज्ञान-आनंद पाने के लिए भगवान के पास जाना पड़ेगा क्योंकि एकमात्र वही हैं जिनके पास ये तीनों वस्तुएं असीम मात्रा में हैं। प्रश्न हो सकता है कि बताओ भगवान मिलेंगे कहां? ये भी एक बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है। कोई कहता है भगवान कण-कण में हैं, कोई कहता है कि भगवान मंदिर में हैं, कोई कहता है कि भगवान तो हृदय में हैं, कोई कहता है कि भगवान तो पर्वत की गुफा में, नदी में, प्रकृति में वगैरह।
वैसे जिस व्यक्ति के बारे में पता करना हो कि वह कहां रहता है, अगर वह स्वयं ही अपना पता बताए तो उससे बेहतर उत्तर कोई नहीं हो सकता। उक्त प्रश्न के उत्तर में भगवान कहते हैं कि मैं वहीं रहता हूं, जहां मेरा शुद्ध भक्त होता है। चूंकि हम सब के मूल में जो तीन इच्छाएं- नित्य जीवन, नित्य ज्ञान व नित्य आनंद हैं, वे केवल भगवान ही पूरी कर सकते हैं, कोई और नहीं। इसलिए हमें उन तक पहुंचने की चेष्टा तो करनी ही चाहिए।
भगवान स्वयं बता रहे हैं कि वह अपने शुद्ध भक्त के पास रहते हैं। अतः हमें ज्यादा नहीं सोचना चाहिए और तुरंत ऐसे भक्त की खोज करनी चाहिए जिसके पास जाने से, जिसकी बात मानने से हमें भगवद्प्राप्ति का मार्ग मिल जाए। साथ ही हमें यह सावधानी भी बरतनी चाहिए कि कहीं वह भगवद्-भक्त के वेश में ढोंगी न हो। स्कंद पुराण के अनुसार भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं कि कलियुग में ऐसे गुरु बहुत मिलेंगे जो शिष्य का सब कुछ हर लेते हैं, परंतु शिष्य का संताप हर कर उसे सद्माीर्ग पर ले आए ऐसा गुरु विरला ही मिलेगा।
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
13 Mar, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति, मानसिक विभ्रम, घटना का शिकार होने से बचेंगे।
वृष राशि :- सफलता के साधन अवश्य जुटायेंगे, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, कार्य बनेंगे।
मिथुन राशि :- चिन्तायें कम होंगी, सफलत के साधन जुटायें, लाभ के कार्य बनेंगे।
कर्क राशि :- समय एवं शक्ति व्यर्थ जायेगी, मानसिक बेचैनी, क्लेश व अशांति अवश्य होगी।
सिंह राशि :- कार्य व्यवसाय में संतोष, स्त्री से तनाव, मानसिक बेचैनी अवश्य बनेगी, धैर्य रखें।
कन्या राशि :- समय अनुकूल नहीं विशेष कार्य स्थिगित रखें, लेन-देन के कार्य होंगे।
तुला राशि :- समृद्धि के साधन बनेंगे, कार्य कुशलता से संतोष होगा, रुके कार्य बनेंगे।
वृश्चिक राशि :- प्रबलता, प्रभुत्व वृद्धि, कार्य कुशलता से संतोष होगा, कार्य अवश्य ही बनेंगे।
धनु राशि :- व्यर्थ भ्रमण, धन का व्यय होगा, असमंजस एवं असमर्थता का वातावरण होगा।
मकर राशि :- अचानक यात्रा के प्रबल योग बनेंगे, योजनायें फलीभूत अवश्य होंगी।
कुंभ राशि :- बिगड़े कार्य बनेंगे, कार्य कुशलता से संतोष होगा, समृद्धि के साधन बनेंगे।
मीन राशि :- असमर्थता का वातावरण कष्टप्रद होगा, स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास होगा।
होलिका दहन की रात करें यह चमत्कारी टोटका, रातों-रात बन जाएंगे अमीर; बस कुछ चीजों का रखें ध्यान
12 Mar, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
होली सिर्फ रंगों का पर्व नहीं है. बल्कि तंत्र साधना, मंत्र सिद्धि या ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है. होलिका दहन की रात किए गए उपाय, टोन-टोटके, पूजा-पाठ का कई गुना अधिक और शीघ्र फल प्राप्त होता है. ज्योतिषियों की मानें तो जिन लोगों की कुंडली में अचानक धन प्राप्ति का योग बनता है, तो होलिका दहन की रात एक खास पूजा करके, उस गड़े हुए धन को प्राप्त कर सकते हैं. लेकिन, इससे पहले यह जानना जरूरी है कि कुंडली में अचानक धन प्राप्ति के योग बनते कब हैं?
जिन लोगों की कुंडली में अचानक धन प्राप्ति के योग बनते हैं, उन्हें निश्चित ही धन की प्राप्ति होती है. जबकि गड़े हुए धन के अगर योग कुंडली में बन रहे हैं, और जातक को लगता है या कहीं से पता चलता है कि उसके घर खेत या अन्य किसी स्थल पर धन गड़ा हुआ है, तो उसे पाने के लिए कुछ खास उपाय और पूजा की जरूरत होती है. और होलिका दहन की रात गड़ा हुआ धन पाने के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है.
कुंडली में कब बनते हैं धन प्राप्ति के योग
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि, जातक की कुंडली में दूसरे, तीसरे, नौवें और ग्यारवें भाव में यदि शुभ ग्रह बैठा हुआ है और उसी की महादशा चल रही है, साथ ही ग्रह का प्रत्यंतर भी चल रहा हो, तो धन प्राप्ति के प्रबल योग बनते हैं. इस साल 2025 में होलिका दहन (13 मार्च 2025) की रात उस स्थान पर खुदाई की जाए जहां धन होने की संभावना है तो जातक को वहां गड़ा हुआ धन प्राप्त होने की संभावना बनती है.
धन प्राप्त करने के लिए क्या करना होगा
गड़ा हुआ धन पाने के लिए खुदाई से पहले जातक को कुछ विशेष पूजा अर्चना भी करनी पड़ेगी. डॉ. बसंत सोनी के मुताबिक, जिस जगह खुदाई करनी है उस स्थान के देवता, उस क्षेत्र के खेड़ापति हनुमान को पहले खुश करना होगा. जिसके लिए जातक को संबंधित देवता के पसंदीदा व्यंजनों का भोग लगाना होगा और फिर लाभ के चौघड़िया में खुदाई करना चाहिए. ऐसा करने से धन प्राप्त करवाने में देवता मदद करेंगे.
इन बातों का विशेष ध्यान रखें
गड़ा हुआ धन पाने के लिए जातक द्वारा होलिका दहन की रात किए गए इस खास उपाय को करने के दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए. होलिका दहन की रात सिद्ध रात्रि मानी जाती है, इसलिए अनुभव न हो तो किसी अनुभवी पंडित या तंत्र-मंत्र विद्या से जुड़े हुए साधक के सानिध्य में ही इस कार्य करें. अकेले करने की कोशिश नहीं करें. अन्यथा इसका बुरा प्रभाव भी पड़ सकता है.
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