धर्म एवं ज्योतिष
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
19 Mar, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कुटुम्ब की चिन्ताएं मन व्यग्र रखे, किसी के कष्ट के कारण हानि अवश्य होगी|
वृष राशि :- भाग्य का सितारा साथ देगा, बिगड़े हुए कार्य अवश्य ही बन जायेंगे, ध्यान दें|
मिथुन राशि :- इष्ट मित्र से तनाव क्लेश व अशांति तथा कार्य व्यवसाय में बाधा होगी|
कर्क राशि :- दैनिक कार्यगति अनुकूल, परिश्रम अधिक करना पड़ेगा, फल कम मिलेगा|
सिंह राशि :- योजनाएं फलीभूत हो, सुख के साधन बनें, तनाव क्लेश व अशांति से बचे|
कन्या राशि :- बड़े-बड़े लोगों से मेल मिलाप एवं समस्याएं सुधरे, सुख के कार्य अवश्य हो|
तुला राशि :- साधन सम्पन्नता के योग बने तथा कुटुम्ब में क्लेश हानि अवश्य होगा|
वृश्चिक राशि :- असमंजस बना रहे, प्रभुत्व वृद्धि तथा कार्यगति अनुकूल अवश्य हो|
धनु राशि :- असमर्थता का वातावरण क्लेश युक्त रखे, अवरोध विवाद से बचकर चले|
मकर राशि :- धन लाभ आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा तथा बिगड़े कार्य बन जायेंगे|
कुंभ राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, बड़े बड़े लोगों से मेल मिलाप अवश्य होगा|
मीन राशि :- मनोवृत्ति संवेदनशील हो धन और शक्ति नष्ट हो, मानसिक व्यग्रता से बचे|
मां भगवती भैंसा से करेंगी प्रस्थान, बन रहा दशमी सोम योग, हो सकता है शोक कारक
18 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वर्ष में दो नवरात्र ऐसा होता है जो काफी धूमधाम से मनाया जाता है जिसमें से एक चैती नवरात्रा भी है. जो इस वर्ष चैती नवरात्रा 30 मार्च 2025 को प्रारंभ होगी. आंगल्य तिथि के आधार पर और चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से सनातनियों का नव वर्ष भी प्रारंभ होता है. जो आज के दिन से ही नए साल की शुरुआत होगी 2082 विक्रम संवत में प्रवेश करेंगे. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से सनातनियों का नव वर्ष प्रारंभ होता है जो 2082 विक्रम संवत में प्रवेश करेंगे.
इस पर विस्तृत जानकारी देते हुए कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर ज्योतिष विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कुणाल कुमार झा बताते हैं कि चैती नवरात्र दिनांक 30 मार्च 2025 से प्रारंभ होगी. आंगल्य तिथि के आधार पर . सनातन धर्म में अनादि काल से विक्रम संवत चला रहा है उसी दिन से विक्रम संवत् प्रारंभ होगा. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हम सनातनियों का नव वर्ष प्रारंभ होता है जो हम लोग 2082 विक्रम संवत में प्रवेश करेंगे. एवं यह वसंतीय नवरात्र उसी दिन से प्रारंभ होती है. हाथी पर भगवती का आगमन होगा.
हाथी पर आने का जो फलाफल है उसमें वृष्टि कारक योग
यह रविवार प्रतिपदा होने के कारण रविवार को भगवती का आगमन होने के कारण हाथी पर भगवती का आगमन होगा. हाथी पर आने का जो फलाफल है उसमें वृष्टि कारक योग बनता है. वहीं गमन दशमी सोम होने के कारण भैंस पर करेगी जो शोक कारक है.
खासकर के इसमें गज पूजा 3 अप्रैल को होगा, पत्रिका प्रवेश 4 अप्रैल को होगा, महरात्रि निशा पूजा 5 अप्रैल को होगा और उसी दिन महा अष्टमी व्रत भी है. 6 अप्रैल को महानवमी व्रत है, 7 अप्रैल को अपराजिता पूजा है उसी दिन भगवती का विसर्जन होगा और जयंती धारण करेंगे और व्रत का पारण भी करेंगे. इस नवरात्र में आदि जगदंबा की पूजा खोर्चों उपचार से करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी.
मंदिर में ये चीजें दान करने से मिलती है हर परेशानी से मुक्ति! खुल जाता है किस्मत का ताला
18 Mar, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में दान का बहुत महत्व बताया गया है. खासकर अगर कोई व्यक्ति मंदिर में कुछ विशेष चीजों का दान करता है, तो उसके जीवन के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं. व्यक्ति को जन्म-जन्मांतर का पुण्य प्राप्त होता है, उसके पिछले जन्मों के कर्मों से मिलने वाला दुख भी नष्ट हो जाता है, और जीवन में खुशहाली आती है और ऐसे व्यक्ति को कभी धन की भी कमी नहीं रहती है. इतना ही नहीं, दान करने से मोक्ष की प्राप्ति भी होती है.
मंदिर में इन चीजों का करें दान
मूर्ति दान: मंदिर में भगवान की मूर्ति दान करना बेहद शुभ माना जाता है. जब-जब उस मूर्ति की पूजा होगी, उसका फल दानदाता को मिलता रहेगा. मूर्ति की सेवा, स्नान, और अभिषेक से लगातार पुण्य की प्राप्ति होती है.
पूजा के बर्तन: तांबे या पीतल के लोटे, थाली, दीपक जैसी चीजों का दान करने से भी अनंत पुण्य मिलता है. जब-जब इन बर्तनों का उपयोग भगवान की पूजा में होगा, उतनी बार दानदाता को फल प्राप्त होगा और उसके जीवन में कभी धन की कमी नहीं रहती है.
शिवलिंग की स्थापना: अगर आप मंदिर में शिवलिंग स्थापित करवाते हैं तो ये बेहद शुभ होगा. जितनी बार उस शिवलिंग का अभिषेक होगा उतनी बार आपके पाप कटेंगे. इससे आपके जीवन में कोई परेशानी और बाधा नहीं आएगी.
पीपल, बरगद या बेलपत्र का पेड़ लगाना: अगर आप मंदिर में ये पेड़ लगाते हैं तो भी बेहद अच्छा रहेगा. इन पेड़ों के पत्तों का उपयोग पूजा में होता है जिससे बार-बार पुण्य की प्राप्ति होती है.
मंदिर का निर्माण: अगर मंदिर का निर्माण हो रहा है तो आप टाइल्स, सीमेंट या अन्य सामग्री दान कर सकते हैं. इससे भी आपको अनंत पुण्य मिलेगा.
पानी का प्याऊ: आप अगर मंदिर में प्याऊ लगवाते हैं तो ये भी बेहद पुण्य का कार्य होगा. क्योंकि इस पानी का उपयोग पूजा, अभिषेक में होगा. साथ ही इससे किसी प्यासे को जल मिलेगा.
तेल और घी का दान: दीपक जलाने के लिए तेल या घी दान करने से भगवान की कृपा प्राप्त होती है.
भंडारे के लिए अनाज: भंडारे के लिए चावल, गेहूं या अन्य अनाज दान करना भी बहुत बड़ा पुण्य माना जाता है. इससे लाखों लोगों का पेट भरता है और इसका फल आपको जन्म-जन्मांतर तक मिलता है.
भगवान को भोग का सामान: भगवान को अर्पित किए जाने वाले फल, मिठाई, पंचामृत आदि का दान भी अत्यंत शुभ होता है. जब-जब भगवान को भोग लगेगा, तब-तब आपको उसका पुण्य मिलेगा.
दीपक दान: जब-जब दीपक जलाया जाएगा, उतनी बार दानकर्ता को आशीर्वाद मिलेगा.
दुनिया का अनोखा मंदिर जहां जीवित हैं भगवान! जानें क्या है इसके पीछे का रहस्य
18 Mar, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत देश अपनी समृद्ध संस्कृति और प्राचीन मंदिरों के लिए जाना जाता है. यहां कई ऐसे मंदिर हैं जो अपनी अनोखी विशेषताओं के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं. ऐसा ही एक अनोखा मंदिर है नरसिंह मंदिर. मल्लुरु नरसिम्हा स्वामी मंदिर, जिसे हेमाचल नरसिम्हा स्वामी मंदिर भी कहा जाता है, तेलंगाना के वारंगल जिले के मंगपेट मंडल के मल्लुर में स्थित एक पवित्र स्थान है. यह मंदिर अपनी जीवित प्रतिमा के कारण दुनियाभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है. मंदिर तक पहुंचने का सफर अपने आप में एक खास अनुभव है. भक्तों को करीब 120-150 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं.
मंदिर हरी-भरी प्राकृतिक सुंदरता से घिरा हुआ है और पहाड़ियों की शांति इसे आध्यात्मिक साधकों के लिए एक पसंदीदा स्थान बनाती है. यहां लोग ध्यान लगाने और शांति से प्रार्थना करने आते हैं. भक्त इन सीढ़ियों को चढ़कर भगवान नरसिम्हा स्वामी का आशीर्वाद पाने के लिए यहां आते हैं.
नरसिंह मंदिर कहां स्थित है?
नरसिंह मंदिर तेलंगाना राज्य के वारंगल जिले के मल्लूर नामक गांव में स्थित है. इस मंदिर में भगवान नरसिंह की एक 10 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित है. इस प्रतिमा को जीवित माना जाता है और यही इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है. मंदिर 6वीं शताब्दी से पहले का है और इसका इतिहास 4776 साल पुराना है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऋषि अगस्त्य ने इस पहाड़ी का नाम हेमचला रखा है.
क्या है इस मंदिर का रहस्य?
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का मानना है कि इस मंदिर में स्थापित भगवान नरसिंह की प्रतिमा में दिव्य ऊर्जा का वास है. इस प्रतिमा की आंखें, मुखमंडल और त्वचा एक जीवित व्यक्ति की तरह प्रतीत होती है. प्रतिमा की त्वचा इंसानी त्वचा जैसी मुलायम है और अगर इसे दबाया जाए तो त्वचा पर गड्ढा बन जाता है. यही कारण है कि इस मंदिर को दुनिया का अनोखा मंदिर माना जाता है.
मंदिर की वास्तुकला
यह मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण है. यह मंदिर दक्षिण भारतीय शैली में बना है. इसका मुख्य द्वार गोपुरम नामक एक भव्य संरचना है जो देखते ही बनती है. मंदिर की दीवारों पर देवी-देवताओं की सुंदर मूर्तियां और पौराणिक कथाओं की नक्काशी है जो मंदिर को और भी खूबसूरत बनाती हैं.
मंदिर में उत्सव
मल्लूर नरसिंह स्वामी मंदिर में ब्रह्मोत्सवम उत्सव के दौरान भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. हर साल आयोजित होने वाले इस उत्सव में भगवान नरसिंह की मूर्ति को एक भव्य शोभायात्रा में ले जाया जाता है. इस दौरान देशभर से आए श्रद्धालु मंदिर में उमड़ पड़ते हैं और इस दिव्य उत्सव का हिस्सा बनते हैं. यह मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं है, बल्कि एक अद्वितीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र भी है जहां भक्त भगवान नरसिंह की उपस्थिति को साक्षात अनुभव करते हैं.
क्या है इस मंदिर का रहस्य?
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का मानना है कि इस मंदिर में स्थापित भगवान नरसिंह की प्रतिमा में दिव्य ऊर्जा का वास है. इस प्रतिमा की आंखें, मुखमंडल और त्वचा एक जीवित व्यक्ति की तरह प्रतीत होती है. प्रतिमा की त्वचा इंसानी त्वचा जैसी मुलायम है और अगर इसे दबाया जाए तो त्वचा पर गड्ढा बन जाता है. यही कारण है कि इस मंदिर को दुनिया का अनोखा मंदिर माना जाता है.
मंदिर की वास्तुकला
यह मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण है. यह मंदिर दक्षिण भारतीय शैली में बना है. इसका मुख्य द्वार गोपुरम नामक एक भव्य संरचना है जो देखते ही बनती है. मंदिर की दीवारों पर देवी-देवताओं की सुंदर मूर्तियां और पौराणिक कथाओं की नक्काशी है जो मंदिर को और भी खूबसूरत बनाती हैं.
मंदिर में उत्सव
मल्लूर नरसिंह स्वामी मंदिर में ब्रह्मोत्सवम उत्सव के दौरान भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. हर साल आयोजित होने वाले इस उत्सव में भगवान नरसिंह की मूर्ति को एक भव्य शोभायात्रा में ले जाया जाता है. इस दौरान देशभर से आए श्रद्धालु मंदिर में उमड़ पड़ते हैं और इस दिव्य उत्सव का हिस्सा बनते हैं. यह मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं है, बल्कि एक अद्वितीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र भी है जहां भक्त भगवान नरसिंह की उपस्थिति को साक्षात अनुभव करते हैं.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
18 Mar, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- अपने व्यय पर नियंत्रण रखे, चिन्ता भ्रमण तथा अशांति से बचें, कष्ट होगा|
वृष राशि :- कोई शुभ समाचार हर्षप्रद रखे, थकावट, बेचैनी तथा धन अच्छा व्यय होगा|
मिथुन राशि :- कोई कुटुम्ब से तनाव क्लेश व अशांति तथा मानसिक विभ्रम अवश्य होगा|
कर्क राशि :- अशुद्ध गोचर रहने से विशेष कार्य स्थिगित रखे तथा व्यय अनायास होगा|
सिंह राशि :- स्त्री वर्ग से कष्ट व चिंता, व्यय, व्यवसाय तथा कार्य उत्तम बन जाएगा|
कन्या राशि :- अधिकारियों के तनाव तथा क्लेश से बचिए दैनिक कार्यगति से बाधा होगी|
तुला राशि :- अशुद्ध गोचर रहने से विशेष कार्य स्थिगित रखे, अग्नि चोट आदि का भय|
वृश्चिक राशि :- अशुद्ध गोचर रहने से विशेष कार्य में बाधा होगी, बने कार्य बिगड़ जायेंगे|
धनु राशि :- व्यवसाय में बेचैनी तथा तनाव बनेगा, परिश्रम विफल होगा, शांत रहे|
मकर राशि :- चोट कष्ट आदि का भय अशुद्ध गोचर होने से कार्य की हानि होगी|
कुंभ राशि :- स्त्री वर्ग संतान से तनाव क्लेश व अशांति तथा मानसिक विभ्रम होगा|
मीन राशि :- समय ठीक नहीं, विशेष कार्य स्थिगित रखे तथा अनायास विभ्रम से अवश्य बचे|
खुल गया बड़ा राज! जवानी में संघर्ष, बुढ़ापे में अमीरी, जानिए क्यों देर से होता है शनि प्रधान जातकों का भाग्य उदय?
17 Mar, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कई बार ऐसा देखा जाता है कि कुछ लोगों का भाग्य उदय 35 साल या फिर 40 साल में होता है. पहले 20, 25 से 30 साल में काफी स्ट्रगल करते हैं और कुछ लोगों को लगता है यह जिंदगी में कुछ नहीं कर सकते, लेकिन 35 साल के बाद जबरदस्त करियर में या फिर बिजनेस में सफलता पाते हैं. दरअसल, ज्योतिष आचार्य बताते हैं, ऐसा तब होता है, जब वह जातक शनि प्रधान होता है.
अगर, शनि भाग्य स्थान यानी नवे घर में बैठे हुए हैं, तो ऐसे व्यक्ति का भाग्य 35 साल के बाद ही उदय होगा. पहले 25 साल, तो उसको स्ट्रगल करना ही पड़ेगा. उसको सफलता नहीं मिलेगी. यह निश्चित है. क्योंकि, शनि धीमी चाल से चलते हैं और स्ट्रगल करवाते हैं, लेकिन जब 35 के बाद जब देना शुरू करते हैं, तो वह स्टेबिलिटी देते हैं, कभी खत्म नहीं होता.
35 के बाद ऐसा भाग्य कि अगले पीढ़ी तक भोगते हैं सुख
मरते दम तक वह इंसान सक्सेस का साथ सकता है और अपने आगे पीढ़ी के लिए भी चीजें छोड़कर जाता है. इसीलिए किसी व्यक्ति को देखकर कभी भी जज नहीं करना चाहिए की और तुम तो जवानी में कुछ कर ही नहीं पा रहे हो. किस्मत का पलट दे की कहना मुश्किल होता है.
उन्होंने आगे बताया, दरसल शनि धीमी चलते हैं.ऐसे में व्यक्ति को जीरो से उठाते हैं.जैसे एक बच्चा नर्सरी से लेकर पीएचडी तक का सफर तय करता है.जिसमें उसे समय लगता है शनि का देने का तरीका भी बिल्कुल ऐसा ही है.अगर आपकी कुंडली में शनि प्रधान है, हाईएस्ट डिग्री पर है या फिर शनि अच्छे घर में अपने ही राशि में बैठे हुए हैं तो ऐसी स्थिति बनती है.
मरते तक धन की नहीं होगी कमी
ज्योतिष आचार्य बताते हैं, ऐसे व्यक्ति का भले लेट से उदय होता है, लेकिन जिंदगी में कभी उतार-चढ़ाव फाइनेंस में उतना नहीं होता, धीरे-धीरे बच्चों की तरह आगे बढ़ते चले जाते है और बुढ़ापा में मजे से अच्छे धन का मजा भी लेता है. ऐसा नहीं कि आज करोड़पति है, तो कल ₹1 भी हाथ में ना रहे. एक स्टेबिलिटी रहती व कंसिस्टेंसी रहती है, देखा जाए तो यह अच्छी चीज है.
31 या 33 नहीं, बल्कि 32 बाण ही क्यों मारे भगवान राम ने रावण को? क्या है इसके पीछे का रहस्य?
17 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में महाकाव्य रामायण हर घर में पढ़ी जाती है. जिसमें भगवान राम के जीवन का हर एक पहलू विस्तार से वर्णित है. रामायण का एक प्रसंग न सिर्फ रावण के वध का चित्रण करता है, बल्कि यह जीवन के गहरे रहस्यों को भी उजागर करता है. भगवान राम की तरफ से रावण को मारे गए 32 बाणों का उद्देश्य सिर्फ उसकी मृत्यु नहीं था, बल्कि एक सिखाने की प्रक्रिया थी.
ये 32 बाण रावण के भीतर के अवगुणों का नाश कर उसके आत्मा के शुद्धिकरण का मार्ग बनाते हैं. इस रहस्य को समझना हमारे जीवन को एक नई दिशा दे सकता है, जहां हम अपने भीतर के दोषों का सामना कर उन्हें दूर करने का प्रयास करें. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
रावण, लंका का सम्राट, सिर्फ एक महान ज्ञानी और भक्त ही नहीं था, बल्कि वह अहंकार और अभिमान से भी ग्रस्त था. उसने भगवान शिव की भक्ति से अपनी शक्तियों का अर्जन किया था, लेकिन अपने इस ज्ञान और शक्ति का प्रयोग अधर्म के मार्ग पर किया. रामायण में रावण को एक अत्यंत शक्तिशाली और ज्ञानी पात्र के रूप में चित्रित किया गया है, जिसने देवताओं और महर्षियों से भी युद्ध किए थे. लेकिन रावण का अहंकार उसकी शक्ति और ज्ञान पर हावी हो गया था, जिसके कारण उसका पतन निश्चित था.
शास्त्रों में बताया गया है कि रावण के भीतर 32 प्रमुख गुण थे, लेकिन इनमें से कुछ अवगुणों के कारण वह अधर्म की राह पर बढ़ गया था. इस अहंकार और पाप के प्रभाव को नष्ट करने के लिए भगवान राम ने रावण को 32 बाण मारे थे. प्रत्येक बाण का उद्देश्य रावण के उन गुणों को नष्ट करना था, जो उसकी मृत्यु का कारण बन सकते थे.
32 बाणों का रहस्य
यह 32 बाण एक गूढ़ प्रतीक हैं, जो रावण के भीतर छिपे हुए गुणों और अवगुणों को दर्शाते हैं. इन बाणों के जरिए भगवान राम ने रावण के पापों और अहंकार को समाप्त किया, ताकि अंततः वह अपने कर्मों का परिणाम भुगत सके. प्रत्येक बाण रावण के किसी एक अवगुण को नष्ट करता था और उसकी मृत्यु का मार्ग प्रशस्त करता था. यह सिर्फ युद्ध की एक शारीरिक क्रिया नहीं थी, बल्कि एक आध्यात्मिक प्रक्रिया थी, जिसमें भगवान राम ने रावण के भीतर के विकारों को समाप्त किया.
भगवान राम का उद्देश्य
रामायण के अनुसार, भगवान राम का उद्देश्य सिर्फ रावण का वध नहीं था, बल्कि वह चाहते थे कि रावण के पापों और अवगुणों का नाश हो और वह अपने कर्मों का फल प्राप्त करें. रावण को 32 बाणों से मारा गया, ताकि उसके भीतर के 32 गुणों और अवगुणों का संतुलन समाप्त हो सके. यह घटना हमें यह सिखाती है कि हम अपने भीतर के दोषों को पहचानें और उन्हें सुधारने का प्रयास करें, ताकि हम जीवन में सही मार्ग पर चल सकें.
25 या 26 कब है संवत की आखिरी पापमोचनी एकादशी, जानें पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व
17 Mar, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पापमोचिनी एकादशी का व्रत किया जाता है. इस बार यह शुभ तिथि 25 मार्च दिन मंगलवार को है. यह एकादशी चैत्र नवरात्रि से पहले आती है और इस संवत की आखिरी एकादशी भी है. भगवान विष्णु को समर्पित इस एकादशी का अर्थ है समस्त पापों को नाश करने वाली एकादशी. अर्थात पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मृत्यु के बाद मनुष्य को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है. इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत रूप से पूजा अर्चना करने पर सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
पापमोचनी एकादशी का महत्व
पापमोचनी एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने के बाद गीता या विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से कई जन्मों के पाप से मुक्ति मिल जाती है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है. इस दिन चक्र, शंख और गदाधारी भगवान विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है और पूर्वजों की आत्मा को शांति भी मिलती है. धार्मिक मान्यता है कि जितना पुण्य हजारों वर्षों की तपस्या से मिलता है, उतना ही फल सच्चे मन से पापमोचनी एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु की पूजा से मिलता है. इस दिन सुबह-शाम नारायण कवच का पाठ करना बहुत उत्तम माना गया है.
पापमोचनी एकादशी व्रत कब है?
एकादशी तिथि का प्रारंभ – 25 मार्च, सुबह 5 बजकर 5 मिनट से
एकादशी तिथि का समापन – 26 मार्च, सुबह 3 बजकर 45 मिनट तक
एकादशी तिथि का पारण – 26 मार्च, सुबह 8 बजकर 50 मिनट से पहले
उदिया तिथि को मानते हुए पापमोचनी एकादशी का व्रत 25 मार्च दिन मंगलवार को किया जाएगा.
पापमोचनी एकादशी पूजा मुहूर्त व शुभ योग
पापमोचनी एकादशी के दिन सुबह से शुभ योग बन रहे हैं, इन शुभ योग में भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं. इस दिन सुबह से शिव योग बनेगा, जो दोपहर 2 बजकर 53 मिनट तक रहेगा, इसके बाद सिद्ध योग शुरू हो जाएगा. साथ ही इस दिन द्विपुष्कर योग, लक्ष्मी नारायण योग, मालव्य राजयोग भी बन रहा है.
पापमोचनी एकादशी व्रत पूजन विधि
– पापमोचनी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान व ध्यान से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प भी लें.
– इसके बाद चौकी पर भगवान विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप की मूर्ति या तस्वीर रखकर, हर जगह गंगाजल से छिड़काव करें और पंचामृत से अभिषेक करें.
– अभिषेक के बाद भगवान विष्णु को रोली, अक्षत का तिलक लगाएं और तुलसी, पीले फूल, फल, धूप, दीप और नैवेघ अर्पित करें.
– भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जलाएं और भोग लगाकर आरती करें.
– भगवान विष्णु के मंत्रों के जप करें और फिर पापमोचनी एकादशी व्रत और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें.
– दिनभर उपवास रखें और शाम के समय भी भगवान विष्णु की आरती करें और रात के समय जागरण करें.
– अगले दिन ब्राह्मण भोज कराएं और दान-दक्षिणा दें.
पापमोचनी एकादशी के दिन क्या ना करें
– पापमोचनी एकादशी के दिन तामसिक भोजन का सेवन ना करें और हर तरह के नशे से दूर रहें.
– एकादशी के दिन किसी को भी नुकसान ना पहुंचाना चाहिए. ना ही झूठ बोलना और ना ही किसी को धोखा देना चाहिए.
– एकादशी के दिन क्रोध ना करें और शांत रहकर ईश्वर का घ्यान करें.
बासोड़ा पर करें 5 सटीक उपाय, होगा संतान का भग्योदय! बनी रहेगी मां शीतला की कृपा!
17 Mar, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शीतला अष्टमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे बसोड़ा भी कहा जाता है. यह पर्व खासकर माताएं अपने बच्चों की भलाई और उनके उज्जवल भविष्य की कामना के लिए रखती हैं. शीतला अष्टमी होली के आठ दिन बाद, चैत्र माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है. इस दिन माता शीतला की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है. इस दिन विशेष पूजा और उपाय करने से संतान के जीवन में सुख-समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य और अपार सफलता मिलती है.
शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी
हिंदू पंचांग के अनुसार शीतला सप्तमी 2025 में 21 मार्च, को मनाई जा रही है. ये सुबह 2 बजकर 45 मिनट से लेकर 4 बजकर 23 मिनट तक होगा. वहीं, शीतला अष्टमी 22 मार्च, को मनाई जा रही है. जो सुबह 4:23 से लेकर 23 मार्च, सुबह 5:23 बजे तक रहेगा.
शीतला अष्टमी के उपाय
शीतला अष्टमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे बसोड़ा भी कहा जाता है. यह पर्व खासकर माताएं अपने बच्चों की भलाई और उनके उज्जवल भविष्य की कामना के लिए रखती हैं. शीतला अष्टमी होली के आठ दिन बाद, चैत्र माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है. इस दिन माता शीतला की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है. इस दिन विशेष पूजा और उपाय करने से संतान के जीवन में सुख-समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य और अपार सफलता मिलती है. इस बार शीतला अष्टमी कब रखी जा रही इस दिन क्या उपाय करें आइए जानते हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से.
शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी
हिंदू पंचांग के अनुसार शीतला सप्तमी 2025 में 21 मार्च, को मनाई जा रही है. ये सुबह 2 बजकर 45 मिनट से लेकर 4 बजकर 23 मिनट तक होगा. वहीं, शीतला अष्टमी 22 मार्च, को मनाई जा रही है. जो सुबह 4:23 से लेकर 23 मार्च, सुबह 5:23 बजे तक रहेगा.
शीतला अष्टमी के उपाय
2. लाल रंग की वस्तुएं अर्पित करें
माता शीतला को इस दिन लाल रंग की वस्तुएं अर्पित करें. आप उन्हें लाल रंग के फूल, वस्त्र, श्रृंगार सामग्री आदि अर्पित कर सकते हैं. इससे घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है. लाल रंग को शुभ और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए यह विशेष रूप से शीतला अष्टमी के दिन किया जाता है.
3. बासी भोग का महत्व
शीतला अष्टमी के दिन बासी भोजन को माता शीतला को अर्पित करना एक महत्वपूर्ण उपाय है. इस भोजन को अर्पित करने के बाद, उसी भोजन को गाय को भी खिलाना चाहिए. गाय को भोजन कराना और गौ सेवा करना संतान के लिए बहुत लाभकारी होता है. अगर संभव हो तो गौशाला में संतान के नाम से दान भी करें. इस उपाय से संतान के सभी दुख समाप्त होते हैं और उनका जीवन सुखमय बनता है.
4. मंत्र जाप करें
माता शीतला की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए शीतला अष्टमी के दिन मंत्र जाप करें. यह मंत्र है:
“शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता. शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नमः.”
इस मंत्र का जाप करने से संतान का भविष्य उज्जवल होता है और उसके जीवन की सभी कठिनाइयां दूर होती हैं. साथ ही संतान को अच्छे स्वास्थ्य और सफलता का आशीर्वाद मिलता है.
5. व्रत का पालन
अगर आप शीतला अष्टमी का व्रत करते हैं, तो इसे पूरी श्रद्धा और निष्ठा से करें. इस दिन खास ध्यान रखें कि घर का वातावरण स्वच्छ और पवित्र रहे, ताकि देवी शीतला की कृपा बनी रहे. व्रत करने से संतान के जीवन में आने वाली समस्याएं खत्म होती हैं और जीवन में खुशियां आती हैं.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
17 Mar, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- व्यय बाधा, स्वभाव में उद्विघ्नता तथा दु:ख कष्ट अवश्य होगा, ध्यान रखे।
वृष राशि :- किसी आरोप से बचे, कार्यगति मंद रहेगी, क्लेश व अशांति अवश्य होगी|
मिथुन राशि :- योजनाएं पूर्ण होगी, धन का व्यवसायिक लाभ होगा, आशानुकूल सफलता से हर्ष होगा|
कर्क राशि :- इष्ट मित्र सुख वर्धक होंगे, कार्यगति में सुधार होगा तथा चिन्ताएं कम होगी|
सिंह राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा, कार्यगति में सुधान होगा, चिन्ताएं कम होगी|
कन्या राशि :- सामर्थ्य और धन अस्त व्यस्त हो, सतर्कता से कार्य अवश्य निपटा लेंगे|
तुला राशि :- मान प्रतिष्ठा सुख के साधन बने, स्त्री वर्ग से सुख और शांति बनेगी|
वृश्चिक राशि :- अग्नि चोट आदि का भय, व्यर्थ भ्रमण, धन का व्यय होगा, रुके कार्य बने|
धनु राशि :- तनाव क्लेश व अशांति, मानसिक विभ्रम व विद्वेग तथा भय बना ही रहेगा|
मकर राशि :- विवाद ग्रस्त होने से बचिए, तनाव क्लेश, मानसिक अशांति अवश्य बनेगी|
कुंभ राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता मिलेगी, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे|
मीन राशि :- भोग ऐश्वर्य की प्राप्ति, दिन उत्साह से बीते, मनोवृत्ति उत्तम बनेगी, ध्यान रखे|
फिर मनवाया विनीत कुमार ने अपनी प्रतिभा का लोहा
16 Mar, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । बालीवुड अभिनेता विनीत कुमार सिंह ने लक्ष्मण उतेकर की छावा और रीमा कागती की सुपरबॉयज़ ऑफ़ मालेगांव में लगातार दो हिट फिल्में दीं। इन दोनों फिल्मों में उनके किरदारों को दर्शकों ने खूब सराहा और उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा एक बार फिर मनवाया। छावा में विनीत ने कवि कलश की भूमिका निभाई, जो एक निडर योद्धा, महान कवि और छत्रपति संभाजी महाराज के सबसे करीबी मित्रों में से एक थे। वहीं, सुपरबॉयज़ ऑफ़ मालेगांव में उन्होंने फरोग़ नामक संघर्षरत लेखक का किरदार निभाया, जो अपने सपनों को साकार करने के लिए कड़ा संघर्ष करता है। अभिनय के मामले में विनीत ने हमेशा की तरह बेहतरीन प्रदर्शन किया और आलोचकों को कोई शिकायत का मौका नहीं दिया। उनकी इस सफलता को देखते हुए हाल ही में उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में उनके योगदान के लिए एक प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया।
इस सम्मान से अभिभूत विनीत ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए लिखा, मैं उन सभी का दिल से आभारी हूं, जिन्होंने मुझ पर विश्वास किया और मुझे नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया। यह पुरस्कार सिर्फ मेरी मेहनत का सम्मान नहीं है, बल्कि यह टीमवर्क और कम्युनिटी की ताकत का भी प्रमाण है। आपके संदेश हमेशा मेरे दिल को छू जाते हैं, जब आप कहते हैं कि मेरी सफलता आपको अपनी लगती है। और मैं आपको बताना चाहता हूं कि यह पुरस्कार मेरे लिए इतना खास इसलिए है क्योंकि यह आप सभी का है! आपकी दुआएं, प्रोत्साहन और समर्थन ही मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं।
उन्होंने आगे कहा कि उनकी यात्रा में परिवार, दोस्तों, मेंटर्स और सहयोगियों का साथ हमेशा एक मजबूत आधार रहा है। विनीत ने अपने प्रशंसकों को धन्यवाद देते हुए यह भी कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है, आगे और भी बड़ी उपलब्धियां उनका इंतजार कर रही हैं। बता दें कि साल 2025 अभिनेता विनीत कुमार सिंह के लिए बेहद खास साबित हुआ है। अपने प्रोजेक्ट्स में हमेशा वाइल्डकार्ड की तरह उभरने वाले विनीत इस बार भी आलोचकों और दर्शकों की तारीफें बटोरने में सफल रहे।
गरुड़ पुराण के अनुसार ये हैं 5 महापाप, जिनके कारण आत्मा को भी भोगना पड़ता है कष्ट
16 Mar, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म के कई प्रमुख ग्रंथों व शास्त्र हैं. जिनमें से एक गरुड़ पुराण को महापुराण कहा जाता है. गरुड़ पुराण में मनुष्य के जीवन, मृत्यु, पाप-पुण्य व धर्म के बारे में विस्तार से वर्णन मिलता है. इस पुराण में व्यक्ति को द्वारा जो पाप होते हैं उनके बारे में भी गहराई से बताया गया है.
दरअसल, गरुड़ पुराण के अनुसार व्यक्ति जो भी कर्म करता है उसका फल मरने के बाद उसकी आत्मा को भोगना पड़ता है. फिर चाहे व पुण्य कर्म हो या पाप कर्म. ऐसे में आपको बता दें कि गरुड़ पुराण में इस बात का जिक्र मिलता है कि जीवन में कुछ ऐसे पाप कर्म होते हैं जिनसे हमें बचकर रहना पड़ता है, नहीं तो हमें इसके कड़े परिणाम हमें भुगतने पड़ते हैं. ये हमारी आत्मा के लिए भी अत्यधिक हानिकारक बताए गये हैं.
ब्राह्मण हत्या
गरुड़ पुराण के अनुसार, ब्राह्मण हत्या का पाप सबसे बड़ा पाप माना गया है. माना जाता है कि ब्रह्मणों को विद्या और धर्म का प्रतीक माना जाता है. इसलिए इनकी हत्या करना करना आपके लिए बेहद कष्टकारी हो सकता है व आपकी आत्मा को भी इस पाप से कई कष्ट मिल सकता है.
गौ-हत्या
हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और ऐसे में गरुड़ पुराण में इस बात का स्पष्ट विवरण मिलता है कि गौ-हत्या महापाप होता है. अगर कोई व्यक्ति गौ-हत्या जैसे पाप का भागी बनता है तो उसे अत्यधिक दुखों का सामना करना पड़ सकता है और आत्मा को भी कई कष्ट मिलते हैं.
माता-पिता की अनादर
माता-पिता को भगवान का दर्जा दिया गया है. ऐसे में अगर हम अपने माता-पिता का अपमान करते हैं या फिर उनकी बातों की अव्हेलना करते हैं तो इससे बहुत बड़ा पाप माना जाता है. गरुड़ पुराण में इस पाप को बड़े पापों में शामिल किया गया है. इसलिए अपने माता-पिता का हमेशा सम्मान करना चाहिए.
किसी का शोषण करना
गरुड़ पुराण के अनुसार, अगर आप अपने फायदे के लिए किसी का शोषण करते हैं, या अनुचित तरीके से किसी की संपत्ति को हड़पते हैं या किसी के साथ दुष्कर्म करते हैं तो यह ना केवल आपके लिए बल्कि आपकी आत्मा के लिए भी काफी कष्टकारी हो सकता है. क्योंकि गरुड़ पुराण में इस महापाप माना जाता है.
धर्म के मार्ग से विचलित होना
व्यक्ति को हमेशा अपने जीवन में धर्म के मार्ग पर चलने की सलहा दी जाती है, क्योंकि जो व्यक्ति
अपने जीवन में धर्म मार्ग से भटक जाता है और नाना प्रकार के पाप कर्म में लीन हो जाता है उसका विनाश होना निश्चित हो जाता और वह गरुड़ पुराण में बताई गई सजा का पात्र भी बन जाता है. इसलिए हमेशा धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए.
खाटूश्याम मंदिर की मुख्य आरतियों का बदला समय, अब ये रहेगी टाइमिंग, इस वजह से हुआ परिवर्तन
16 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विश्व प्रसिद्ध खाटूश्याम जी मंदिर में एक दिन के अंदर पांच बार आरती होती है. सर्दी और गर्मी में समय के हिसाब से अलग-अलग समय पर बाबा श्याम की पांचों आरती होती है. अगर आप बाबा श्याम के दरबार में आने वाले हैं, तो आपको श्याम मंदिर की विशेष आरती का समय जरूर पता होना चाहिए. हर भक्त बाबा श्याम की आरती के समय बाबा के दर्शन करना चाहते हैं.
श्री श्याम मंदिर कमेटी ने बाबा श्याम की दो मुख्य आरतियों के समय में बदलाव किया है. जानकारी के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष से चैत्र कृष्ण पक्ष लगने के कारण बाबा श्याम की आरती के समय में परिवर्तन किया है.
आरती के समय में हुआ बदलाव
श्री श्याम मंदिर कमेटी ने बाबा श्याम की दो मुख्य आरतियों के समय में बदलाव कर दिया है. मंदिर कमेटी ने इसको लेकर सूचना जारी की है. जारी सूचना के अनुसार अब बाबा श्याम की श्रृंगार आरती सुबह 7:30 बजे होगी. इसी आरती के समय बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार किया जाता है और वे हर दिन नए अलौकिक रूप में नजर आते हैं. इसके अलावा बाबा श्याम की संध्या आरती के समय में भी बदलाव किया गया है, अब बाबा श्याम की संध्या आरती शाम 7:00 बजे होगी.
यह है पांचों आरती का समय
मंदिर कमेटी के अनुसार अब गर्मियों के समय बाबा श्याम की पहली मंगला आरती सुबह 4:30 बजे, दूसरी श्रृगांर आरती सुबह 7:30 बजे, तीसरी भोग आरती दोपहर 12:30 बजे, चौथी संध्या आरती शाम 7:00 बजे होगी. वहीं पांचवीं एवं अंतिम शयन आरती रात 10:00 बजे होगी. आपको बता दें कि खाटूश्याम जी का श्रृंगार और संध्या आरती सबसे महत्वपूर्ण होती है. इन दोनों आरती के समय ही सबसे ज्यादा खाटू श्याम जी मंदिर में भक्तों की भीड़ रहती है.
बाबा श्याम की आरती का महत्व
श्याम भक्तों के अनुसार आरती के समय बाबा श्याम के दर्शन करना बहुत शुभ माना जाता है. यह समय भक्तों के लिए विशेष रूप से पवित्र और आध्यात्मिक होता है, क्योंकि आरती के दौरान भगवान की पूजा और आराधना के साथ-साथ भक्तों की प्रार्थनाएं विशेष रूप से सुनने योग्य मानी जाती है. इस समय बाबा श्याम के दर्शन से आत्मिक शांति और आशीर्वाद प्राप्त होता है.
किस शर्त पर द्रौपदी को दांव पर लगा बैठे थे युधिष्ठिर, किस इच्छा को दुर्योधन ने सालों मन में दबाया
16 Mar, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाभारत की कथा में द्रौपदी का दांव पर लगना एक ऐसा घृणित कृत्य है जिसकी गूंज आज भी सुनाई देती है. यह घटना न केवल एक स्त्री का अपमान था, बल्कि न्याय और धर्म का भी हनन था. इस घटना के लिए कौरवों के साथ-साथ पांडवों को भी जिम्मेदार ठहराया जाता है, खासकर युधिष्ठिर को जिन्होंने द्रौपदी को दांव पर लगाया था. दुर्योधन जो पुरुष वर्चस्व और अहंकार का प्रतीक था, पांडवों से द्वेष रखता था. उसने युधिष्ठिर को चौसर के खेल के लिए आमंत्रित किया एक ऐसा खेल जो छल और कपट से भरा था. शकुनि जो अपने पासे के जादू के लिए कुख्यात था दुर्योधन का साथ दे रहा था. युधिष्ठिर खेल की अनैतिकता जानते हुए भी इसे युद्ध से बेहतर मानते हुए खेलने के लिए राजी हो गए.
द्रौपदी को दांव पर लगाना
खेल शुरू हुआ और युधिष्ठिर एक के बाद एक अपनी सारी सम्पत्ति हारते चले गए. अंत में उन्होंने खुद को भी दांव पर लगा दिया और हार गए जिससे वे कौरवों के दास बन गए. दुर्योधन की कुटिलता यहीं नहीं रुकी. उसने युधिष्ठिर को द्रौपदी को दांव पर लगाने के लिए उकसाया. एक ऐसी स्थिति में जब युधिष्ठिर स्वयं दास बन चुके थे उनके द्वारा द्रौपदी को दांव पर लगाना न केवल अनैतिक था बल्कि नियमों का भी उल्लंघन था.
कहा जाता है कि दुर्योधन द्रौपदी के प्रति गुप्त रूप से आकर्षित था लेकिन उसके स्वाभिमानी स्वभाव के कारण वह उसे प्राप्त नहीं कर सका था. इसलिए उसने इस अपमानजनक कृत्य के माध्यम से अपना बदला लेने का निर्णय लिया. युधिष्ठिर को एक झूठी आशा दी गई कि अगर वो द्रौपदी को दांव पर लगाते हैं और जीत जाते हैं तो उन्हें उनका राज्य और सिंहासन वापस मिल जाएगा और कौरव उनके दास बन जाएंगे. इस लालच में आकर युधिष्ठिर ने द्रौपदी को दांव पर लगा दिया.
इसके बाद जो हुआ वह इतिहास का एक काला अध्याय बन गया. द्रौपदी को भरी सभा में अपमानित किया गया, उनके वस्त्र हरण का प्रयास किया गया. इस घटना ने पांडवों को क्रोधित कर दिया और महाभारत के युद्ध की नींव रखी.
द्रौपदी का दांव पर लगना न केवल एक स्त्री का अपमान था, बल्कि यह उस समय के सामाजिक मूल्यों और न्याय व्यवस्था पर भी एक गहरा आघात था. यह घटना आज भी हमें अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और धर्म का पालन करने की प्रेरणा देती है. यह हमें यह भी याद दिलाता है कि लालच और अहंकार मनुष्य को किस हद तक अंधा बना सकता है.
चैत्र नवरात्रि से पहले शुक्र करेंगे बढ़ा खेल, इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत, व्यापार से नौकर तक मिलेगा आपार सफलता
16 Mar, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चैत्र नवरात्रि से पहले शुक्र का भयंकर उदय होने वाला है. इसके साथ ही 4 राशियों की किस्मत पूरी तरह बदल जाएगी, जिससे भयंकर लाभ मिलेगा.
चैत्र का महीना शुरू हो चुका है. चैत्र के महीने में ही चैत्र नवरात्रि का त्यौहार भी मनाया जाएगा. चैत्र नवरात्रि में माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा विधि विधान के साथ की जाती है. 30 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होने वाली है, लेकिन उससे पहले शुक्र के चाल में परिवर्तन होने वाला है.
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दैत्य के गुरु शुक्र सुख समृद्धि, धन, वैभव, प्रेम के कारक माने जाते हैं शुक्र. शुक्र की स्थिति में थोड़ा सा भी बदलाव होता है, तो 12 राशियों के ऊपर प्रभाव पड़ता है. किसी राशि के ऊपर सकारात्मक, तो किसी राशि के ऊपर ना प्रभाव पड़ता है.
शुक्र इस समय मीन राशि में विराजमान है. 17 मार्च को इसी राशि में अस्त हो जाएंगे. फिर 23 मार्च को इसी राशि में उदय भी होने वाले हैं.
शुक्र 23 मार्च को जब मीन राशि में उदय होंगे, तो चार राशियों के ऊपर बेहद सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, किस्मत बदल जाएगी. नौकरी बिजनेस में अपार सफलता प्राप्त होगी. वह चार राशि है वृषभ, कर्क, मकर और मीन.
जब शुक्र उदय होंगे, तो वृषभ राशि के ऊपर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. लम्बे समय से हर अटका हुआ कार्य पूर्ण होगा. करियर की बात करें, तो नई नौकरी के अवसर प्राप्त हो सकते हैं. व्यापार में भी आर्थिक मुनाफा होगा कोई नई बड़ी डील भी मिल सकती है.
जब शुक्र उदय होंगे तो कर्क राशि जातक के ऊपर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. भाग्य का पूरा साथ मिलेगा जिससे हर कार्य पूर्ण होगा. विदेश यात्रा का भी योग बन सकता है. आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.आय के नए-नए स्रोत बनेंगे. खर्च कम और इनकम ज्यादा होगा, जिससे बैंक बैलेंस में भी बढ़ोतरी होने वाली है.
जब शुक्र उदय होंगे तो मकर राशि जातक के ऊपर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. आत्मविश्वास में वृद्धि होगी. बौद्धिक क्षमता में भी तेजी से वृद्धि होगी. शेयर बाजार में अगर धन निवेश करेंगे तो दो गुना मुनाफा का योग बनेगा. प्रॉपर्टी, जमीन या वाहन इत्यादि खरीद सकते हैं या फिर खरीदने का मन बना सकते हैं. व्यापार में भी आपको कोई बड़ा मुनाफा मिल सकता है.
जब शुक्र उदय होंगे तो मीन राशि जातक के ऊपर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. जीवनसाथी के साथ अच्छे संबंध बनेंगे. रिश्तो में सुख शांति बनी रहेगी. व्यापार में भी मुनाफा मिलेगा. आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. पुराने जो भी कर्ज है वह समाप्त हो जाएगा.
माओवाद की समाप्ति के बाद अब बस्तर का सर्वांगीण विकास होगा: मंत्री राम विचार नेताम
अम्बिकापुर में विकास को नई रफ्तार
ड्रोन के साथ अपने हौसलों को उड़ान दे रही हैं सरूपी मीणा
अल्पविराम की अवधारणा जीवन और कार्य के संतुलन के लिये अत्यंत आवश्यक : अर्गल
चिन्हारी योजना से सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति
जल जीवन मिशन से संवरी बुलगा की तस्वीर, जीवंती बाई के घर तक पहुँचा शुद्ध पेयजल
नगरीय निकायों के कायाकल्प और वित्तीय सुदृढ़ीकरण के लिये दो दिवसीय "शहरी सुधार कार्यशाला" का हुआ समापन
संकल्प से समाधान अभियान’ से त्वरित, प्रभावी और पारदर्शी निराकरण हुआ सुनिश्चित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
यूरिया का प्रभावी विकल्प बन रही हरी खाद, जशपुर में 600 हेक्टेयर में प्रदर्शन
