धर्म एवं ज्योतिष
चैत्र अमावस्या के दिन करें इन चीजों का दान, पितृ होंगे प्रसन्न, देंगे मनचाहा आशीर्वाद
22 Mar, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
धार्मिक दृष्टिकोण से हर अमावस्या तिथि महत्वपूर्ण मानी जाती है. लेकिन चैत्र मास की अमावस्या अपने आप में एक विशेष दिन है. बता दें कि चैत्र मास की अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या के नाम से जाना जाता है. पंचांग के अनुसार इस साल यह तिथि 29 मार्च को पड़ेगी. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस अमावस्या पर यदि कुछ उपाय किए जाएं तो जातक को पितृ दोष सहित कई परेशानियों से छुटकारा मिलता है.
दरअसल, हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि खासकर पितरों को समर्पित होती है. इसलिए इस तिथि पर सामान्यतः सभी लोग अपने पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पितृ तर्पण, दान आदि करते हैं. वहीं ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक चैत्र मास में पड़ने वाली अमावस्या पर वह पितृ देव को प्रसन्न करने के लिए कुछ विशेष उपाय किये जाएं तो भी आपको कई लाभ प्राप्त हो सकते हैं. इन उपायों को करने से पितृ दोष का निवारण होता है और पितृ प्रसन्न होकर परिवार को आशीर्वाद प्रदान करते हैं. तो आईए जानते हैं पंडित रमाकांत मिश्रा के अनुसार जानते हैं चैत्र अमवास्या तिथि के दिन कौन-कौन से उपाय करने से आपको लाभ मिल सकता है.
चैत्र अमावस्या के दिन करें ये उपाय
पीपल के पेड़ का करें पूजन
कहा जाता है कि पीपल के वृक्ष में पितृ का वास होता है. अमावस्या पर इस वृक्ष की पूजा करने से पितृ बहुत प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा बरसाते हैं. पीपल की पूजा करने से परिवार में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है.
दान करें ये वस्तुएं
अगर आप पितृ दोष से छुटकारा पाना चाहते हैं तो कुछ वस्तुओं का दान जरूर करें. पितृ को प्रसन्न करने के लिए व्यक्ति को भूतड़ी अमावस्या पर मंदिर में काले तिल का दान करना चाहिए. इस दिन आप अपने सामर्थ्य के अनुसार गरीबों को भी दान दे सकते हैं ऐसा करने से आपके पितृ मोक्ष को प्राप्त होते हैं.
पवित्र नदियों में करें स्नान
चैत्र मास की भूतड़ी अमावस्या पर व्यक्ति को पवित्र तीर्थों की नदियों में स्नान करना चाहिए. यदि ऐसा संभव न हो तो निवास में आस-पास बने किसी कुआं बावड़ी के जल से भी स्नान कर सकते है. इस उपाय को करने से पितृ दोष का प्रभाव कम होता है और पितृ देव प्रसन्न होते हैं.
पितरों से मांगे क्षमा
चैत्र अमावस्या पर घर की दक्षिण दिशा में घी का दीपक जलाएं.बतादें कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दक्षिण दिशा पितृ देव और मृत्यु के देवता यमराज को समर्पित होती है. इस दिशा में दीपक लगाने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
22 Mar, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- क्लेश व अशांति, परिश्रम करने पर भी आरोप-क्रोध होगा, रुके कार्य का ध्यान रखें।
वृष राशि :- अधिकारियों का मेल-मिलाप फलप्रद रहे, कार्य-कुशलता से संतोष होगा, ध्यान रखें।
मिथुन राशि :- कार्यकुशलता से संतोष व बेचैनी, कुछ सफलता के साधन अवश्य होंगे, ध्यान रखें।
कर्क राशि :- कार्यकुशलता से संतोष, परेशानी व चिन्ताजनक स्थिति बने, कार्य अवरोध, विवाद होगा।
सिंह राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास, भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति तथा कार्यगति व्यर्थ बन जायेगी।
कन्या राशि :- आर्थिक योजना पूर्ण हो, समय पर सोचे कार्य अवश्य ही बनेंगे, समय का ध्यान रखें।
तुला राशि :- सामर्थ्य होते हुए भी कार्य विफलत्व बना रहेगा, कार्य की प्राप्ति होगी।
वृश्चिक राशि :- कुटुम्ब की समस्याओं से क्लेश तथा धन-हानि होगी, मानसिक बेचैनी।
धनु राशि :- आरोप, क्लेश तथा अशांति से बचियेगा, भावपूर्ण वार्ता अवश्य ही बनेगी।
मकर राशि :- योजनाएं फलीभूत होंं, सफलता के साधन जुटायें, लाभ अवश्य ही होगा।
कुंभ राशि :- परिश्रम करने पर सफलता न मिले, कार्य में विरोध बाधायें बनेंगी।
मीन राशि :- धन लाभ, सफलता का हर्ष, प्रभुत्व वृद्धि तथा सामाजिक कार्य बने जायेंगे।
इस दिन घर पर न जलाएं चूल्हा, मां शीतला देवी की बरसेगी कृपा, यह है पूजन का विशेष समय
21 Mar, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शीतला अष्टमी का पर्व इस बार 21 मार्च को विशेष संयोग के साथ मनाया जाएगा. हिंदू धर्म का यह पर्व हर साल धार्मिक तिथि के अनुसार, होली के बाद आने वाली सप्तमी और अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. इस विशेष पर्व को ऋतु परिवर्तन होने का संकेत भी माना जाता है. इस पर्व वाले दिन मां शीतला की विधि विधान से ना केवल आराधना की जाती है बल्कि उन्हें बासी पकवानों का प्रसाद भी चढ़ाया जाता है. मान्यता ऐसी है कि शीतला अष्टमी वाले दिन मां शीतला बासी पकवानों से ही जल्दी प्रसन्न होती है.
शीत ऋतु के अंत का प्रतीक है यह पर्व
कि शीतला अष्टमी का पर्व हर साल होली के बाद आने वाली सप्तमी-अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. वह कहते हैं कि यह पर्व ऋतु परिवर्तन का संकेत है. इस पर्व के दिन से ही शीत ऋतु का अंत होता है और गर्मी की ऋतु का आगमन होता है. जिससे छोटे बच्चों में चेचक और त्वचा पर होने वाले चर्म रोगों का खतरा बढ़ जाता है. इन्हीं सभी खतरों और बीमारियों से बचाव के लिए शीतला अष्टमी के दिन मां शीतला का पूजन किया जाता है.
विशेष संयोग में मनाई जाएगी 21 मार्च को शीतलाष्टमी
इस साल शीतला अष्टमी 21 मार्च को मनाई जाएगी. पं. धीरज शर्मा के अनुसार-होली के बाद आने वाली सप्तमी तिथि इस बार रात को 2:24 पर आरंभ होगी. 21 मार्च के दिन 4:24 तक रहेंगी. इस बार शीतला अष्टमी एक विशेष संयोग के साथ मनाई जाएगी. पं. धीरज शर्मा के अनुसार इस वर्ष शीतला अष्टमी शुक्रवार के दिन आई है. जो कि अपने आप में बेहद खास है क्योंकि शुक्रवार का दिन ठंडा होता है. और शीतला माता का भी पूजन ठंडा वार को ही किया जाता है. इसलिए इस साल के शीतला अष्टमी के पर्व शुक्रवार के दिन होने के कारण इस पर्व का महत्व इस बार और भी बढ़ने वाला है.
इन पकवानों के प्रसाद से खुश होंगी मां शीतला
पं.धीरज शर्मा का कहना है कि शीतला माता को खुश करने के लिए भक्तों को इस बार 20 मार्च की रात को ही कुछ विशेष ठंडे पकवान बनाने चाहिए. शीतला अष्टमी के पर्व पर शीतला माता सबसे ज्यादा दही, ठंडे मीठे चावल और गुड़ के मीठे चावल, मीठी रोट से सबसे ज्यादा प्रसन्न होती है इसलिए इन पकवानों को शीतला अष्टमी के पूजन में प्रसादी के लिए जरूर शामिल करें.
यें है पूजन का शुभ मुहूर्त
21 मार्च, शीतला अष्टमी के दिन पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 6:24 से लेकर शाम को 6:30 तक रहेगा. पंडित धीरज शर्मा का कहना है कि संभव हो सके तो इस दिन कोई भी व्यक्ति घर का चूल्हा नहीं जलाएं और जो पकवान एक दिन पूर्व शीतला माता के पूजन के लिए बनाए हैं उन्हीं ठंडे पकवानों का इस दिन सेवन करें. उनका कहना है कि ऐसा करने से मां शीतल की कृपा परिवार पर हमेशा बनी रहती है. साथ ही इस पर्व वाले दिन स्कंद पुराण में वर्णित शीतला अष्टक का पाठ भी करना चाहिए.
अगर आर्थिक तंगी से हैं परेशान? बासी रोटी का करें ये उपाय, बन जाएंगे बिगड़े हुए काम!
21 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुराने समय से ही बासी रोटी को विशेष महत्व दिया गया है. हमारे पूर्वज इसे न केवल भोजन के रूप में देखते थे, बल्कि एक ऐसा उपाय भी मानते थे, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आ सकती है. शास्त्रों और ज्योतिष में बासी रोटी से जुड़े कई रहस्य बताए गए हैं, जिनका पालन करने से घर में बरकत बनी रहती है और आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है. अगर कोई व्यक्ति गरीबी, आर्थिक तंगी, या ग्रह दोषों से परेशान है, तो बासी रोटी के कुछ खास उपाय उसकी किस्मत चमका सकते हैं.
गाय को बासी रोटी खिलाने का महत्व
हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है. रोज सुबह पहली बासी रोटी पर गुड़ लगाकर गाय को खिलाए, तो घर में धन की कभी कमी नहीं होती. यह उपाय विशेष रूप से उन लोगों के लिए कारगर है जिनकी कुंडली में राहु, केतु या शनि का दोष होता है.
शनि को ऐसे करें प्रसन्न
किसी व्यक्ति पर शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती चल रही हो तो उसे अमावस्या या शनिवार को बासी रोटी और खीर गाय को खिलानी चाहिए. इससे शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती से आपको राहत मिल सकती है.
रोटी पर सरसों का तेल लगाकर कुत्ते को खिलाएं
कोई व्यक्ति शत्रु बाधा, कोर्ट-कचहरी के मामलों या बुरी नजर से परेशान है, तो उसे रोज रात की बची हुई रोटी पर सरसों का तेल लगाकर काले कुत्ते को खिलानी चाहिए. यह उपाय शनिदेव को प्रसन्न करता है और बुरी शक्तियों से बचाता है.
राहु-केतु और शनि दोष दूर करने के उपाय
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु-केतु का दोष है, जिससे बार-बार असफलता मिल रही है, नौकरी में दिक्कत आ रही है या मानसिक तनाव बना रहता है, तो उसे रोज सुबह बासी रोटी को जल में प्रवाहित करना चाहिए. ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और भाग्य का साथ मिलना शुरू हो जाता है.
घर में नकारात्मक ऊर्जा दूर करती है
वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि घर में बार-बार झगड़े होते हैं, तो रात की बची हुई पहली रोटी को गाय को खिलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और आपसी प्रेम बढ़ता है.
कर्ज मुक्ति के लिए बासी रोटी का उपाय
अगर कोई व्यक्ति कर्ज से परेशान है और लाख कोशिशों के बाद भी उसे राहत नहीं मिल रही, तो शनिवार के दिन बासी रोटी को पास की किसी नदी या बहते पानी में डालने से धीरे-धीरे आर्थिक संकट खत्म होने लगता है.
इस राशि के जातकों को शनि के प्रभाव से मिलेंगी खुशियां ही खुशियां! करियर होगा बुलंदी पर
21 Mar, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
29 मार्च 2025 शनिवार के दिन न्याय के देवता शनि का गोचर मीन राशि में होने जा रहा है. वृषभ राशि की जातकों के लिए यह गोचर लाभ भाव में होने जा रहा है.यहां गोचर से व्यक्ति के जीवन में व्यापक परिवर्तन आएंगे
शनि गोचर का प्रभाव : मीन राशि में शनि देव का गोचर वृषभ राशि के जातकों के लिए किसी राजयोग से कम नहीं है.इन जातकों के लिये शनि देव खुशियां लेकर आये हैं.सीधे कहें तो इस राशि के जातकों के लिये यह गोचर शुभ है.
आर्थिक/करियर : वृषभ राशि के जातकों के लिए एकादश भाव में शनि देव का गोचर उनका लाभ देने आया है. बहुप्रतीक्षित इच्छा इस गोचर के साथ पूरी हो जाएगी. किसी मित्र अथवा अधीनस्थ के सहयोग से व्यावसायिक लाभ होगा. आय के अन्य स्रोत भी बनेंगे.करियर में भी आप बुलंदी को छुएंगे. कार्यस्थल पर आपको पूर्ण सहयोग औऱ सम्मान प्राप्त होगा.
पारिवारिक/लव लाइफ : शनि देव के मीन राशि में इस गोचर से सप्तम दृष्टि पंचम भाव पर पड़ेगी. जो लोग काफी समय से संतान प्राप्ति के लिए उपाय आदि कर रहे हैं ऐसे लोगों को संतान से संबंधित खुशखबरी प्राप्त होगी. प्रेमी प्रेमिकाओं के लिए भी यह समय सुखद रहने वाला है. इनके बीच मधुर संबंध बनेंगे और प्यार परवान चढ़ेगा.जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता से घर में माहौल खुशनुमा रहेगा.
स्वाथ्य : शनि देव के गोचर से उनकी दशम दृष्टि वृषभ राशि के अष्टम भाव पर पड़ रही है. इस दृष्टि से इस राशि के जातकों को कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा. पैरों में दर्द. कमर और कमर के नीचे के हिस्सों में नसों का जकड़ना आदि समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.स्वास्थ्य का ध्यान रखें और समय समय पर शनिदेव की पूजा और उपाय करते रहें.
उपाय : वृषभ राशि के जातक शनिदेव के इस महागोचर का लाभ लेने के लिये शनिवार को हनुमान जी की पूजा करें, पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और शनि मंत्र का जप करें.
चैत्र अमावस्या को क्यों कहते हैं भूतड़ी अमावस्या? इस दिन कुछ विशेष उपायों से दूर होगी प्रेत-बाधा सहित कई परेशानियां
21 Mar, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में हर माह की पूर्णिमा तिथि और अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है. जहां पूर्णिमा पर चारों ओर छाई चांदनी सकारात्मकता को दर्शाती है वहीं अमावस्या की काली रात नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है. वैसे तो हर मास में आने वाली अमावस्या तिथि अपने आप में विशेष होती है. लेकिन आपको बता दें कि चैत्र माह में पड़ने वाली अमावस्या बेहद खास होने के साथ ही बेहद खतरनाक भी मानी जाती है.
दरअसल, चैत्र माह में पड़ने वाली अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में इस अमावस्या को बहुत खास माना जाता है. मान्यता है कि भूतड़ी अमावस्या विशेष रूप से नकारात्मक शक्तियों से बचाव और आत्मिक शांति प्राप्त करने वाली मानी जाती है. इस दिन पूजा पाठ करने व कुछ विशेष उपाय करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता ऊर्जा का संचार होता है. आइए पंडित रमाकांत मिश्रा के अनुसार जानते हैं भूतड़ी अमावस्या का महत्व, उपाय और कब पड़ रही है यह अमावस्या.
कब पड़ रही है भूतड़ी अमावस्या
इस साल भूतड़ी अमावस्या 28 मार्च को शाम 7 बजकर 55 मिनट से 29 मार्च शाम 4 बजकर 27 मिनट तक रहेगी. चूंकि वैदिक पंचांग में उदया तिथि मान्य होती है, इसलिए 29 मार्च को ही इस अमावस्या की मान्यता होगी.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भूतड़ी अमावस्या पर नकारात्मक शक्तियां प्रबल हो जाती हैं. इस दौरान काली रात में काली शक्तियां अपनी अधूरी इच्छाओं को पूरा करने के लिए शरीर की तलाश करती है और मनुष्य की रूह को काबू में करने का प्रयत्न करती हैं. इसी कारण से चैत्र माह में पड़ने वाली अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या के नाम से जाना जाता है.
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भूतड़ी अमावस्या पर क्या करें
हनुमान चालीसा का करें पाठ
चैत्र अमावस्या के दिन देवी-देवताओं की पूजा के साथ-साथ हनुमान चालीसा का पाठ करना बहुत उत्तम फलदायी माना जाता है. इस दिन विशेष रूप से हनुमान जी की पूजा करने पर शुभ फलों की प्राप्ति होती है. खासकर इससे भूत-प्रेत जैसी नकारात्मक ऊर्जाएं समाप्त होती है.
पितृरो के लिए पूजा
अमावस्या तिथि पितृ पूजा के लिए बहुत ही मत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दिन अपने पितरों के लिए तर्पण करना व श्राद्धकर्म करना उत्तम माना जाता है. इससे घर में सुख शांति बनी रहती है और कार्य में आ रही सभी बाधाएं भी दूर होती है.
नदी में स्नान करना
भूतड़ी अमावस्या पर नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है. नदी के पवित्र जल में स्नान कर व्यक्ति का मन शांत होता है और नकारात्मक ऊर्जाएं दूर रहती हैं. इस दिन आप शिवलिंग का अभिषेक कर ॐ नमः शिवाय का जप भी कर सकते हैं.
नवग्रह पूजा करें
चैत्र अमावस्या पर नव ग्रह पूजन करना बेहद लाभकारी होता है. आप अपने श्रद्धा के अनुसार किसी जानकर पंडित को घर में बुलाकर भी नवग्रह पूजन करवा सकते हैं.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
21 Mar, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- मानसिक बेचैनी, दुर्घटना ग्रस्त होन से बचें, अधिकारियों से तनाव होगा।
वृष राशि :- योजनाएं फलीभूत हों, सफलता के साधन जुटायें, विशेष लाभ होगा।
मिथुन राशि :- अचानक उपद्रव कष्टप्रद हो, विशेष कार्य स्थिगित रखें, कार्य अवरोध होगा।
कर्क राशि :- परिश्रम से कुछ सफलता मिले, कार्य-व्यवस्था की विशेष चिन्ता बनी ही रहेगी।
सिंह राशि :- किसी अपवाद व दुर्घटना से बचें, व्यवसायिक क्षमता में बाधा अवश्य होगी।
कन्या राशि :- व्यवसायिक गति उत्तम, चिन्ताएं कम होंगी, आपका विरोध होगा।
तुला राशि :- मानसिक बेचैनी, उद्विघ्नता के योग बनेंगे, कुटुम्ब में क्लेश-क्रोध बनेगा।
वृश्चिक राशि :- सामर्थ्य वृद्धि के साथ तनाव-झगड़े किन्तु आप सम्मानित होगा, मित्र सहयोगी रहेंगे।
धनु राशि :- कुटुम्ब की समस्याएं कष्टप्रद होंगी तथा व्यर्थ धन का व्यय, अपवाद होगा।
मकर राशि :- योजनाएं फलीभूत हो, सफलता के साधन जुटांये, रुके कार्य बन जायेंगे।
कुंभ राशि :- स्वभाव में खिन्नता, मानसिक बेचैनी तथा बने हुए कार्य में विलम्ब होगा।
मीन राशि :- तनाव व क्लेश, अशांति बनेगी, परिश्रम विफल होगा, कार्यगति मंद होगी।
चैत्र माह की अमावस्या रहेगी विशेष
20 Mar, 2025 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में अमावस्या तिथि बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस माह चैत्र माह की अमावस्या तिथि 28 मार्च को रात 7:55 बजे से शुरू होकर 29 मार्च को शाम 4:27 बजे समाप्त होगी। सनातन धर्म में अमावस्या तिथि बेहद खास मानी जाती है। इस बार शनिवार के दिन अमावस्या होने की वजह से इसे शनि अमावस्या कहा जाता है!
इस शुभ अवसर पर गंगा समेत अन्य पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है और मां गंगा की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। इसके अलावा, अमावस्या तिथि पर पितरों के तर्पण के साथ ही पिंडदान भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या तिथि पर महादेव की पूजा से सभी तरह की परेशानियों से छुटकारा मिलता है, वहीं पूर्वजों का तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। शनि अमावस्या का खास महत्व और शुभ योग । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस शनि अमावस्या के दिन कई दुर्लभ योग बन रहे है। इस दिन ब्रह्मा और इंद्र योग का शुभ संयोग भी बन रहा है। इसके अलावा, दुर्लभ शिव वास योग का भी निर्माण हो रहा है, जिसमें गंगा स्नान कर भगवान शिव के साथ शनिदेव की पूजा-अर्चना करने से हर मनोकामना पूरी होगी और जीवन में सुखों का आगमन होगा।
सोना धारण करने से होता है गुरु मजबूत
20 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोना पहनना सभी को पसंद होता है पर इस कीमती धातु को पहनने के भी कई नियम होते हैं। ज्योतिष के रत्न शास्त्र में बताया गया है कि, सोना धारण करने से गुरु ग्रह को मजबूत किया जा सकता है। जातकों को कुंडली में ग्रहों की स्थिति और राशि के अनुसार रत्न को धारण करना चाहिए। सोने को पहनने के लिए कुछ नियम बताए गए हैं, जिन्हें पालन करना काफी जरुरी है अन्यथा नुकसान भी हो सकता है। सोने का सही विधि और सही तरीके से धारण करने से लाभ प्राप्त होता है। सोने के धारण से करने से धन-लाभ व संतान सुख की प्राप्ति होती है। आइए आपको बताते हैं सोने को कब और कैसे धारण करना आवश्य होता है। सोने का गुरु से संबंधित होने के कारण सोना को गुरुवार के दिन धारण करना शुभ माना जाता है। इसे पहनने से पहले शुद्ध करना जरुरी है। आप चाहे तो इसे अंगूठी या चेन के रुप में धारण से कर सकते हैं। सोने को शुद्धि करने के लिए आप गंगाजल, दूध और शहद से शुद्ध करें। फिर इसे आप भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित कर दें। विधि-विधान से पूजा करने के बाद अंगूठी और चेन को पहन सकते हैं। माना जाता है कि, रविवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार के दिन सोना धारण करना शुभ होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सोने का धारण मेष, कर्क, सिंह, धनु और मीन राशि के लोगों को धारण करना चाहिए। वहीं, मकर, मिथुन, कुंभ और वृषभ राशि के जातकों को सोना नहीं पहनना चाहिए। इसके साथ ही कुंडली में गुरु की स्थिति देखकर ही सोना का धारण करना चाहिए।
भगवान श्रीकृष्ण की हर लीला भक्तों के मन को है लुभाती
20 Mar, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भक्ति की परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाले भगवान हैं। योगेश्वर रूप में वे जीवन का दर्शन देते हैं तो बाल रूप में उनकी लीलाएं भक्तों के मन को लुभाती है।आज पूरब से लेकर पश्चिम तक हर कोई कान्हा की भक्ति से सराबोर है। चैतन्य महाप्रभु के भक्ति आन्दोलन के समय श्रीकृष्ण का जो महामंत्र प्रसिद्ध हुआ, वह तब से लेकर अब तक लगातार देश दुनिया में गूंज रहा है। आप भी मुरली मनोहर श्रीकृष्ण की कृपा पाने के लिए उनके मंत्र के जाप की शुरुआत कर सकते हैं।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण
कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे॥
१५वीं शताब्दी में चैतन्य महाप्रभु के भक्ति आन्दोलन के समय प्रसिद्ध हुए इस मंत्र को वैष्णव लोग महामन्त्र कहते हैं। इस्कान के संस्थापक के श्रील प्रभुपाद जी अनुसार इस महामंत्र का जप उसी प्रकार करना चाहिए जैसे एक शिशु अपनी माता का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए रोता है।
ॐ नमो भगवते श्री गोविन्दाय
भगवान श्रीकृष्ण के इस द्वादशाक्षर (12) मंत्र का जो भी साधक जाप करता है, उसे सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। प्रेम विवाह करने वाले अभिलाषा रखने वाले जातकों के लिए यह रामबाण साबित होता है।
कृं कृष्णाय नमः
यह पावन मंत्र स्वयं भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बताया गया है। इसके जप से जीवन से जुड़ी तमाम बाधाएं दूर होती हैं और घर-परिवार में सुख और समृद्धि का वास होता है।
ॐ श्री कृष्णाय शरणं मम्।
जीवन में आई विपदा से उबरने के लिए भगवान श्रीकृष्ण का यह बहुत ही सरल और प्रभावी मंत्र है। इस महामंत्र का जाप करने से भगवान श्रीकृष्ण बिल्कुल उसी तरह मदद को दौड़े आते हैं जिस तरह उन्होंने द्रौपदी की मदद की थी।
आदौ देवकी देव गर्भजननं, गोपी गृहे वद्र्धनम्।
माया पूज निकासु ताप हरणं गौवद्र्धनोधरणम्।।
कंसच्छेदनं कौरवादिहननं, कुंतीसुपाजालनम्।
एतद् श्रीमद्भागवतम् पुराण कथितं श्रीकृष्ण लीलामृतम्।।
अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्ण:दामोदरं वासुदेवं हरे।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकी नायकं रामचन्द्रं भजे।।
श्रद्धा और विश्वास के इस मंत्र का जाप करने से न सिर्फ तमाम संकटों से मुक्ति मिलती है, बल्कि सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। सुख, समृद्धि और शुभता बढ़ाने में यह महामंत्र काफी कारगर साबित होता है।
अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 1 ।।
वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम्
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 2 ।।
वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 3 ।।
गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम् ।
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 4 ।।
करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम् ।
वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 5 ।।
गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा ।
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 6 ।।
गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम् ।
दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 7 ।।
गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा ।
दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। 8 ।।
कन्हैया की स्तुति करने के लिए तमाम मंत्र हैं लेकिन यह मंत्र उनकी मधुर छवि का दर्शन कराती है। इस मंत्र की स्तुति में कान्हा की अत्यंत मनमोहक छवि उभर कर सामने आती है। साथ ही साथ योगेश्वर श्रीकृष्ण के सर्वव्यापी और विश्व के पालनकर्ता होने का भी भान होता है।
भगवान शिव हैं महायोगी
20 Mar, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान शिव की जिंदगी के हर पहलू से कुछ न कुछ सीखा जा सकता है लेकिन यहां हम कुछ उनसे जुड़ी कुछ ऐसी बातों का जिक्र कर रहे हैं। जिन्हें, कोई व्यक्ति अपनी जिंदगी में आत्मसात करते है तो उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है।रखें आत्म नियंत्रण : भगवान शिव शांत भी रहते हैं और विनाशकारी भी, लेकिन वह अपने ऊपर पूरा आत्मनियंत्रण रखते हैं। यदि कोई मनुष्य उनकी इस बात को आत्मसात करे तो जीवन में काफी आगे तक जा सकता है।
शांत रहें और अपना कार्य करते रहें : शिव को महायोगी कहा जाता है। वह घंटों और युगों तक ध्यान अवस्था में रहते हैं। और ध्यान में मानव कल्याण के लिए कार्य करते हैं। यदि कोई मनुष्य उनकी इसी सीख से शांत रहकर अपने कार्य को करते रहें तो सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है।
ध्यान रखें भौतिक सुख लंबे समय का साथी नहीं : शिव का स्वरूप भभूतधारी है। वह बाघ की खाल पहने हुए हैं। उनके हाथों में त्रिशूल है। वह भौतिक वस्तुओं से दूर रहते हैं। यदि कोई मनुष्य भौतिक जीवन की लालसा को त्याग कर अपने कर्म पर ध्यान दे तो वो न केवल सफल होगा बल्कि उसकी प्रशंसा चारो तरफ की जाती है।
नकारात्मकता से रहें दूर : भगवान शिव ने दुनिया बचाने के लिए समुद्र मंथन से निकले जहर को अपने कंठ में सुशोभित किया। इससे तमाम तरह की नकारात्मकता का अंत हुआ और दुनिया का सर्वनाश होने से बच गया। कहने का आशय यह है कि यदि हम भी अपने आस-पास मौजूद नकारात्मकता यानी बुराई का अंत करें तो सकारात्मक माहौल हमारे आस-पास हमेशा रहेगा।
इच्छाएं सीमित रखें : कहते हैं इच्छाओं का कभी अंत नहीं होता। यानी जो आपके पास है। उसमें ही हंसी-खुशी जिंदगी जीएं तो जीवन स्वर्ग की तरह हो जाएगा। भगवान शिव संन्यासियों की तरह जीवन जीते हैं। वह इच्छाओं से परे हैं। यदि कोई उनकी इन बातों को आत्मसात करे। तो सफलता उनके कदमों तले होगी
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
20 Mar, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- तनाव पूर्ण वातावरण से बचिये, स्त्री शरीर कष्ट, मानसिक बेचैनी अवश्य होगी।
वृष राशि :- अधिकारियों के समर्थन से सुख होगा, कार्यगति विशेष अनुकूल होगी, ध्यान दें।
मिथुन राशि :- भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति के बाद तनाव, क्लेश व अशांति अवश्य होगी, ध्यान दें।
कर्क राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा, भाग्य साथ दे, बिगड़े कार्य अवश्य बनेंगे।
सिंह राशि :- परिश्रम सफल हो, व्यवसाय गति मंद हो, आर्थिक योजना पूर्ण अवश्य होगी।
कन्या राशि :- कार्य-व्यवसाय गति मंद, व्यर्थ परिश्रम, कार्य में बाधा के योग अवश्य बनेंगे।
तुला राशि :- किसी दुर्घटना से बचें, चोट आदि का भय होगा, कार्य-व्यवसाय अनुकूर रहे।
वृश्चिक राशि :- कार्यगति अनुकूल रहे, लाभांवित कार्य योजना बनेगी, बाधा अवश्य होगी।
धनु राशि :- कुछ प्रतिष्ठा के साधन बनेंगे किन्तु हाथ में कुछ न लगे, कार्य अवरोध होगा।
मकर राशि :- अधिकारी वर्ग से तनाव, क्लेश व मानसिक अशांति, कार्य अवरोध होगा।
कुंभ राशि :- मनोबल बनाये रखें, योजनाएं पूर्ण हों, नया कार्य अवश्य प्रारंभ होगा।
मीन राशि :- दैनिक कार्यगति उत्तम, कुटुम्ब में सुख, समय उत्तम बनेगा ध्यान रखें।
नवरात्रि के 9 दिन घर के मेन गेट पर जलाएं ऐसा दीपक, प्रसन्न हो मां दुर्गा दूर कर देंगी कष्ट
19 Mar, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चैत्र नवरात्र इस साल 30 मार्च, 2025 से शुरू हो रहे हैं. इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है. इसलिए ये 9 दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित हैं. कहा जाता है कि इन दिनों मां स्वयं पृथ्वी लोक पर आ कर अपने भक्तों के कष्ट हरती हैं. ऐसे में मां के नौ स्वरूपों का बहुत ही विशेष रूप से पूजन किया जाता है. नवरात्रि के पहले ही दिन से मां की चौकी सजाई जाती है. हवन-कीर्तन किया जाता है तो वहीं कुछ भक्त नौ दिनों के लिए अखंड जोत भी प्रज्वलित करते हैं. दरअसल हमारे शास्त्रों में दीपक जलाने का विशेष महत्व बताया गया है. खासतौर से आटे से बने हुए दीपक को बहुत ही शुभ माना गया है. कहते हैं कि आटे का दीपक जलाने से घर में सुख शांति और समृद्धि का आगमन होता है. तो चलिए जानते हैं आटा का दीपक बनाने और लगाने का सही तरीका.
पूजा के लिए ऐसे बनाएं आटा का दीया
नवरात्रि के लिए आटे का दीया बनाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. इसमें सबसे पहले आटे को गंगाजल मिले हुए पानी से गूंथ लें. आटा न ज्यादा मुलायम रखें ना ही बहुत सख्त. जब बिना हाथों में चिपके इसकी लोई आराम से बन जाए तब ये आटा बिल्कुल ठीक है. आटे में आप थोड़ी सी हल्दी भी मिला लें, ताकि आटे का रंग सफेद न लगे.
चैत्र नवरात्र इस साल 30 मार्च, 2025 से शुरू हो रहे हैं. इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है. इसलिए ये 9 दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित हैं. कहा जाता है कि इन दिनों मां स्वयं पृथ्वी लोक पर आ कर अपने भक्तों के कष्ट हरती हैं. ऐसे में मां के नौ स्वरूपों का बहुत ही विशेष रूप से पूजन किया जाता है. नवरात्रि के पहले ही दिन से मां की चौकी सजाई जाती है. हवन-कीर्तन किया जाता है तो वहीं कुछ भक्त नौ दिनों के लिए अखंड जोत भी प्रज्वलित करते हैं. दरअसल हमारे शास्त्रों में दीपक जलाने का विशेष महत्व बताया गया है. खासतौर से आटे से बने हुए दीपक को बहुत ही शुभ माना गया है. कहते हैं कि आटे का दीपक जलाने से घर में सुख शांति और समृद्धि का आगमन होता है. तो चलिए जानते हैं आटा का दीपक बनाने और लगाने का सही तरीका.
पूजा के लिए ऐसे बनाएं आटा का दीया
नवरात्रि के लिए आटे का दीया बनाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. इसमें सबसे पहले आटे को गंगाजल मिले हुए पानी से गूंथ लें. आटा न ज्यादा मुलायम रखें ना ही बहुत सख्त. जब बिना हाथों में चिपके इसकी लोई आराम से बन जाए तब ये आटा बिल्कुल ठीक है. आटे में आप थोड़ी सी हल्दी भी मिला लें, ताकि आटे का रंग सफेद न लगे.
मोरपंख के इस अनोखे प्रयोग से बदल जाएंगे आपके सितारे ! कुंडली में मौजूद सभी ग्रह हो जाएंगे उच्च
19 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मोर पंख को ज्योतिष शास्त्र में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने और नकारात्मक ऊर्जा को घर से बाहर निकालने के लिए जाना जाता है. मोरपंख का भारतीय संस्कृति में भी महत्वपूर्ण स्थान है. भगवान श्री कृष्ण स्वयं अपने मुकुट में मोरपंख को स्थान देते थे. मान्यता है कि मोर पंख वातावरण में सामंजस्य और संतुलन को बढ़ावा देकर घर के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ाता है. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में मोर पंख को बहुत शुभ माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र में और वास्तु शास्त्र में मोर पंख से संबंधित कई उपाय बताए गए हैं जिन्हें करने से व्यक्ति के जीवन में खुशहाली आ जाती है और सभी नौ ग्रहों के शुभ फल प्राप्त होने लगते हैं. चलिए समझते हैं कि मोर पंख का प्रयोग करके कैसे हम अपने सभी ग्रहों को सुधार सकते हैं.
केतु : घर के किसी भी हिस्से में मोर पंख को ऐसी जगह रखें. जहां धूप आती हो ऐसा करने से आपकी कुंडली में मौजूद केतु ग्रह शुभ फल देने लगते है.
Gemstone Benefits : इस दुर्लभ मोती को पहनते ही गुस्सा हो जाता है गायब! व्यावसायिक घाटा और अनहोनी से होगा बचाव, जानें और भी बातें
शुक्र : घर में दर्पण या ड्रेसिंग टेबल के सामने मोर पंख रखने से कुंडली में मौजूद शुक्र ग्रह उच्च परिणाम देने लगता है. इससे जीवन में भोग विलासिता बढ़ती है और वैवाहिक जीवन सुख में रहता है.
सूर्य : सोने की अंगूठी में मोर पंख धारण करने से व्यक्ति के जीवन में सूर्य ग्रह से संबंधित शुभ फल प्राप्त होने लगते हैं. सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों को यह उपाय अवश्य करना चाहिए.
चंद्र : अपने शयन कक्ष में एक पात्र में दूध भरकर उसमे मोर पंख डूबा कर रखने से चंद्र ग्रह उच्च परिणाम देने शुरू कर देते हैं. जिन जातकों को किसी भी प्रकार की मानसिक समस्या अथवा ओवरथिंकिंग की समस्या हो ऐसे लोगों को यह उपाय अवश्य करना चाहिए.
मंगल : मोर पंख को लाल कपड़े में लपेटकर रखने से जन्म कुंडली में मौजूद मंगल ग्रह शुभ फल देने लगता है. जिन जातकों को गुस्सा अधिक आता हो ऐसे लोगों को यह उपाय अवश्य करना चाहिए.
राहु : मोर पंख को नीले कपड़े में लपेटकर रखने से आपके जीवन में धन से संबंधित समस्याएं खत्म हो जाती हैं. इससे राहु ग्रह आपको शुभ फल देना शुरू कर देते हैं.
बृहस्पति : घर की पूजा स्थल में पीले फूल के साथ मोर पंख रखने से देवगुरु बृहस्पति शुभ फल देने लगते हैं इससे हमारे सौभाग्य में वृद्धि होती है. विवाह में आ रही रुकावटें भी दूर हो जाती है.
शनि : मोर पंख को सरसों के तेल में डूबा कर घर में रखने से शनि से संबंधित पीड़ाओं से छुटकारा मिलता है. साढ़ेसाती एवं ढैय्या, शनि दोष से मुक्ति के लिये यह बहुत कारगर उपाय है.
बुध : कॉपी, किताब या किसी भी धार्मिक पुस्तक में एक मोरपंख रखने से बुध ग्रह के शुभ फल प्राप्त होते हैं. इससे बच्चों की हकलाहट एवं त्वचा से संबंधित रोग, एलर्जी आदि सही होती है.
गणेश चालीसा, जय जय जय गणपति गणराजू , हर रोज पाठ करने से दूर होंगे सभी विघ्न
19 Mar, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान गणेश की पूजा अर्चना करने से सभी कष्ट व विघ्य दूर होते हैं और हर कार्य में उन्नति प्राप्त होती है. गणेश चालीसा का पाठ करने से सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. साथ ही सभी कार्यों में सफलता मिलती है और परिवार के सदस्यों पर गणेशजी का आशीर्वाद बना रहता है, जिससे घर में सुख-शांति बनी रहती है. गणेशजी अपने भक्तों को मुसीबतो को दूर रखते हैं, जिससे उनके सभी कार्य सफल होते हैं.
श्री गणेश चालीसा
दोहा
जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥
चौपाई
जय जय जय गणपति गणराजू।
मंगल भरण करण शुभः काजू॥
जै गजबदन सदन सुखदाता।
विश्व विनायका बुद्धि विधाता॥
वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना।
तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥
राजत मणि मुक्तन उर माला।
स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।
मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥
सुन्दर पीताम्बर तन साजित।
चरण पादुका मुनि मन राजित॥
धनि शिव सुवन षडानन भ्राता।
गौरी लालन विश्व-विख्याता॥
ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे।
मुषक वाहन सोहत द्वारे॥
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी।
अति शुची पावन मंगलकारी॥
एक समय गिरिराज कुमारी।
पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।
तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा॥
अतिथि जानी के गौरी सुखारी।
बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥
अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा।
मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला।
बिना गर्भ धारण यहि काला॥
गणनायक गुण ज्ञान निधाना।
पूजित प्रथम रूप भगवाना॥
अस कही अन्तर्धान रूप हवै।
पालना पर बालक स्वरूप हवै॥
बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना।
लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना॥
सकल मगन, सुखमंगल गावहिं।
नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥
शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं।
सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥
लखि अति आनन्द मंगल साजा।
देखन भी आये शनि राजा॥20॥
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।
बालक, देखन चाहत नाहीं॥
गिरिजा कछु मन भेद बढायो।
उत्सव मोर, न शनि तुही भायो॥
कहत लगे शनि, मन सकुचाई।
का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥
नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ।
शनि सों बालक देखन कहयऊ॥
पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा।
बालक सिर उड़ि गयो अकाशा॥
गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी।
सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी॥
हाहाकार मच्यौ कैलाशा।
शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा॥
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो।
काटी चक्र सो गज सिर लाये॥
बालक के धड़ ऊपर धारयो।
प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।
प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे॥
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।
पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥
चले षडानन, भरमि भुलाई।
रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई॥
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।
तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥
धनि गणेश कही शिव हिये हरषे।
नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।
शेष सहसमुख सके न गाई॥
मैं मतिहीन मलीन दुखारी।
करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी॥
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।
जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥
अब प्रभु दया दीना पर कीजै।
अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥
दोहा
श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान।
नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान॥
सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।
पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश॥
माओवाद की समाप्ति के बाद अब बस्तर का सर्वांगीण विकास होगा: मंत्री राम विचार नेताम
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यूरिया का प्रभावी विकल्प बन रही हरी खाद, जशपुर में 600 हेक्टेयर में प्रदर्शन
