धर्म एवं ज्योतिष
केदारनाथ धाम के इस दिन खुल जाएंगे कपाट, द्वार बंद होने पर कहां चले जाते हैं भगवान भोले?
28 Mar, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेश के लोगों में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और देखते ही देखते लाखों की संख्या में लोगों ने पंजीकरण करा लिया. चारों धाम- गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा कुछ महीनों के लिए श्रद्धालुओं के लिए खुलती है. ऐसे में सवाल उठता है कि केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद भगवान शिव कहां चले जाते हैं.
कब खुलेंगे बाबा के कपाट
गढ़वाल हिमालय की मनमोहक पहाड़ियों में बसा केदारनाथ मंदिर 6 महीने तक बंद रहने के बाद अब 2 मई को फिर से खुलने वाला है. यह मंदिर, सबसे पवित्र हिंदू तीर्थ स्थलों में से एक है, जो चार धाम यात्रा का हिस्सा है. हर साल हजारों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होने आते हैं. केदारनाथ उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में 11,968 फीट की ऊंचाई पर स्थित है.
यह मंदिर साल में अप्रैल-मई से अक्टूबर-नवंबर के बीच लगभग 6 से 7 महीने तीर्थयात्रियों के लिए खुला रहता है और सीजन के दौरान सालाना लगभग 20 लाख तीर्थयात्री यहां आते हैं. अगर आप भी लंबे समय से केदारनाथ धाम जाने की योजना बना रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों के बारे में जान लीजिए.
12 ज्योतिर्लिंगों में से एक धाम
बता दें, 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ चारधाम और पंच केदार का एक हिस्सा है. यहां पर भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं. बता दें कि पिछले साल केदारनाथ मंदिर के कपाट 10 मई को खोले गए थे और जैसे ही कपाट खुले लाखों भक्त बाबा के दर्शन के लिए पहुंच गए. भीड़ इतनी ज्यादा थी कि कई लोग दर्शन भी नहीं कर पाए और उन्हें वापस लौटना पड़ा. ऐसे में अब इस साल लोग बाबा के दर्शन कर सकते हैं.
कपाट बंद होने के बाद कहां मिलते हैं बाबा भोलेनाथ
केदारनाथ के कपाट हर साल सर्दियों में बंद कर दिए जाते हैं. केदारनाथ मंदिर हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित है, जहां सर्दियों के समय भारी बर्फबारी होती है. बर्फबारी के चलते वहां जाने वाले सारे रास्ते बंद हो जाते हैं और उस इलाके में रहना बहुत मुश्किल हो जाता है.इसलिए सर्दियों की शुरुआत से पहले हर साल मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. जब कपाट बंद होते हैं तो भक्त अगले साल के खुलने का इंतजार करते हैं. हालांकि, कपाट बंद होने के बाद भगवान शिव उखीमठ में विराजते हैं. उखीमठ को पंचकेदार में एक खास स्थान माना जाता है और शीतकाल में भगवान केदारनाथ की डोली यहीं लाई जाती है.
मिल गया सबसे चमत्कारी मंदिर! नवरात्रि में होता है यहां विशेष पूजा, जानें छत्तीसगढ़ के काली माई मंदिर के बारे में
28 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शहर के भरकापारा स्थित सिद्ध पीठ मां काली माई का मंदिर काफी प्राचीन है. यह मंदिर 100 साल से भी ज्यादा पुराना है. इस मंदिर में माता काली विराजमान हैं. भक्तों का मानना है यहां मां हर मनोकामना पूर्ण करती हैं. दोनों नवरात्रि पर्व पर भारी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और ज्योति कलश की स्थापना की जाती है.
आपको बता दें, राजनांदगांव ऐतिहासिक शहर है. राजा महाराजाओं के जमाने से ही यहां कई मंदिर और ऐतिहासिक स्थान हैं, वहीं शहर के भरकापारा स्थित सिद्ध पीठ मां काली माई मंदिर की अपनी एक अलग मान्यता है. यहां मां काली की विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है और दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त यहां आते हैं. यह मंदिर 100 साल से भी अधिक पुराना है. यहां मां काली के दर्शन मात्र से ही मनोकामना पूर्ण होती है. मंदिर में विधि विधान से पूजा अर्चना कर प्रदेश के पहले मंडई मेला की शुरुआत होती है, जो हर साल लगता है. ऐसी मान्यता है, कि मां काली के आशीर्वाद से ही इस मंडई की शुरुआत होती है, जिसके बाद पूरे छत्तीसगढ़ में मंडई मेला का आयोजन होता है.
भक्त ने दी जानकारी
वही मंदिर को लेकर स्थानीय नागरिक व भक्त संजय शर्मा ने लोकल 18 को बताया, कि यह प्राचीन सिद्ध पीठ मां काली माई मंदिर है. शहर के शीतला मंदिर के बाद दूसरा मंदिर यह है, जहां दोनों नवरात्रि पर विशेष ज्योति कलश की स्थापना की जाती है, जो 500 से साढ़े 500 तक होते हैं. वे आगे बताते हैं, कि हम बचपन से ही इस सिद्ध पीठ मंदिर में आ रहे हैं. यहां सभी भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है. विदेशों से भी ज्योति कलश यहां बिठाया जाता है. आगे वे बताते हैं, कि दोनों नवरात्र पर्व पर जो भक्त डोंगरगढ़ पदयात्रा में जाते हैं वह भक्त यहां जरूर आते हैं. वहीं विशाल रूप से ज्योति कलश यात्रा यहां से निकलती है जो, कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों से निकलती है. इसके साथ ही चुनरी यात्रा भी यहां से निकाली जाती है. वे बताते हैं, मां काली की मंडई यहां हर साल होती है जो छत्तीसगढ़ में प्रथम मंडई के रूप में मानी जाती है.
क्या है इस सिद्धपीठ काली माई मंदिर की मान्यता
मां काली के इस मंदिर में विधि विधान से पूजा अर्चना भक्तों द्वारा की जाती है, जो भी भक्त यहां पहुंचते हैं, उनकी मनोकामना पूर्ण होती है. मंदिर को भव्य रूप में बनाया गया है. दोनों नवरात्रि पर्व पर विशेष ज्योति कलश की स्थापना होती है, इसके साथ ही विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है. प्रत्येक दिन विशेष श्रृंगार और पूजा अर्चना मां काली की जाती है. वहीं दूर-दूर से भक्त यहां पहुंचते हैं और माता के दर्शन करते हैं.
सूर्य और चंद्र ग्रहण आखिर क्यों लगता है? बेहद रोचक है राहु-केतु से जुड़ी यह कहानी
28 Mar, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साल का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च 2025 को लगेगा. यह आंशिक सूर्य ग्रहण होगा. होली के दिन 14 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगा था. ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना ही नहीं बल्कि ज्योतिष और पौराणिक कथाओं से भी जुड़ा हुआ है. राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा से बदला लेने के लिए उन्हें समय-समय पर ग्रस लेते हैं, जिससे सूर्य और चंद्र ग्रहण की घटना होती है.
समुद्र मंथन और अमृत कलश की कथा
जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया तो उसमें से 14 रत्न निकले. इनमें अमृत कलश भी था जिसे पाकर देवता और असुर आपस में लड़ने लगे. इन वस्तुओं को देवताओं और असुरों में बांटने का प्रस्ताव रखा गया. लेकिन असुरों की एक ही इच्छा थी केवल अमृत प्राप्त करना. अन्य कोई भी वस्तु उन्हें उपयोगी नहीं लग रही थी. देवता जानते थे कि अगर असुर अमृत प्राप्त कर लेते हैं तो वे अमर हो जाएंगे और फिर देवता उनसे कभी विजय प्राप्त नहीं कर पाएंगे.
मोहिनी अवतार और अमृत वितरण
इस विवाद को सुलझाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया. मोहिनी के सौंदर्य से मोहित होकर असुर शांत हो गए और उन्होंने अमृत वितरण का कार्य मोहिनी को सौंप दिया. मोहिनी ने कहा-“मैं अपनी इच्छा से अमृत का वितरण करूंगी. अगर तुम मेरी इस शर्त को स्वीकार करते हो तो मैं अमृत बांट सकती हूं.” असुर मोहिनी की बातों में आ गए और उन्होंने अमृत से भरा कलश उसके हाथों में सौंप दिया.
राहु और केतु का जन्म
अगले दिन मोहिनी के आदेशानुसार असुर और देवता अमृत पान के लिए पंक्ति में बैठ गए. मोहिनी अवतार में श्री हरि ने पहले देवताओं को अमृत पान कराना शुरू किया और असुरों को छल से वंचित कर दिया. जब मोहिनी देवताओं को अमृत पिला रही थी,तभी एक असुर, स्वर्भानु को इस छल पर संदेह हुआ. वह देवता का रूप धारण करके उनकी पंक्ति में बैठ गया और अमृत पान करने लगा. देवताओं की पंक्ति में बैठे सूर्य और चंद्रमा ने उसे पहचान लिया और भगवान विष्णु को इसकी जानकारी दी.
इस कारण लगता है सूर्य और चंद्र ग्रहण
इससे क्रोधित होकर,मोहिनी अवतार में श्री हरि विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से स्वर्भानु का सिर धड़ से अलग कर दिया. लेकिन चूंकि उसने अमृत पान कर लिया था इसलिए वह अमर हो चुका था. इसके बाद स्वर्भानु का सिर राहु बन गया. उसका धड़ केतु बन गया. इसी कारण राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा को अपना शत्रु मानते हैं और पूर्णिमा और अमावस्या के दिन ग्रहण लगाते हैं.
क्या 2025 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
29 मार्च 2025 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. 21 सितंबर 2025 का सूर्य ग्रहण भी भारत में नहीं दिखेगा. हालांकि, लोग इसे ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए देख सकते हैं.
सूर्य ग्रहण से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं
भारत में सूर्य ग्रहण को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं प्रचलित हैं. माना जाता है कि ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, इसलिए कई लोग विशेष सावधानियां बरतते हैं.
खाने-पीने से बचना: ग्रहण के दौरान भोजन और पानी ग्रहण नहीं करने की परंपरा है, क्योंकि इसे अशुद्ध माना जाता है.
मंत्र जाप करना: इस दौरान गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है.
स्नान करना: ग्रहण से पहले और बाद में स्नान करना पवित्र माना जाता है.
गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानियां: ऐसा माना जाता है कि गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर के अंदर रहना चाहिए और तेज चीजों (चाकू, कैंची आदि) का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
29 मार्च को साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानें किस मूलांक पर क्या होगा असर, कैसे करें उपाय
28 Mar, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्य ग्रहण एक साधारण खगोलीय घटना है. जब पृथ्वी और सूर्य के बीच में चंद्रमा आ जाता है तो इस अवस्था में सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक नहीं पहुंचती है जिसकी वजह से सूर्य ग्रहण हो जाता है. ज्योतिष शास्त्र में तीन प्रकार के ग्रहण का वर्णन मिलता है. 29 मार्च 2025 को इस साल का पहला सूर्य ग्रहण होगा यह सूर्य ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण होगा. यह ग्रहण भारत के समय अनुसार दोपहर में 2:20 से शुरू होगा हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. इस ग्रहण का सूतक काल भी भारत में मान्य नहीं होगा. लेकिन इस ग्रहण का देश और दुनिया के प्रत्येक व्यक्ति पर असर पड़ेगा.
मूलांक 1 : मूलांक 1 के जातकों के लिए यह सूर्य ग्रहण कैरियर, व्यवसाय, फाइनेंस और दांपत्य जीवन में दिक्कत है लेकर आ सकता है.दाम्पत्य जीवन में जीवनसाथी के साथ विवाद एवं स्वास्थ्य समस्या बन सकती है.
उपाय : ग्रहण काल में सफाई कर्मियों को गेहूं का दान करें.
मूलांक 2 : सूर्य ग्रहण के पक्ष करियर और मैरिड लाइफ में बहुत अच्छा समय मिलने की संभावना है. नए लोगों से रिश्ते बनेंगे और नया व्यापार, नौकरी और प्रोजेक्ट मिलने की संभावनाएं होगी.
उपाय : ग्रहण काल के पश्चात मंदिर अथवा गरीबों में चावल और चीनी का दान करें.
मूलांक 3 : सूर्य ग्रहण के दौरान मूलांक 3 के जातकों के लिए आर्थिक मुश्किलें आ सकती है. व्यवसाय एवं कार्य स्थल पर लोगों के साथ अनबन होगी. लवमेट अथवा जीवनसाथी के साथ भी तनाव होने की संभावना है.
उपाय : ग्रहण काल के दौरान एकांतवास में भगवान विष्णु का ध्यान करके ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप करें.
मूलांक 4 : मूलांक 4 के लोगों के लिए यह सूर्य ग्रहण खुशियां लेकर आएगा. व्यवसाय अथवा नौकरी में नये प्रोजेक्ट एवं डील मिलने की संभावना है. कुंवारे लोगों के लिए इस ग्रहण के पश्चात नए रिश्ते आ सकते हैं. जीवनसाथी के साथ संबंध मधुर होंगे.
उपाय : सूर्य ग्रहण के पश्चात स्नान आदि से निव्रत होकर पक्षियों को दाना डालें.
मूलांक 5 : इस साल का पहला सूर्य ग्रहण मूलांक 5 के लोगों के जीवन में कैरियर व्यापार के लिहाज से तरक्की लेकर आएगा. नई व्यापार की शुरुआत करने वाले लोगों के लिए अच्छा समय आने वाला है. मुलाकात के जातकों की प्रगति होगी एवं धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव की ओर जीवन अग्रसर होगा.
उपाय : ग्रहण कल के पश्चात हरी सब्जी एवं मूंग दाल का दान करें अथवा किसी गाय को खिलाएं.
मूलांक 6 : मूलांक 6 के जातकों के जीवन में सूर्य ग्रहण के पश्चात खुशियां आएगी. विवाहित लोगों के जीवन में प्रेम भरा जाएगा और अविवाहित लोगों को नए रिश्ते मिलेंगे. करियर एवं व्यापार में आप लोगों को बड़ी सफलता प्राप्त होगी.
उपाय : ग्रहण काल में गायत्री मंत्र का जाप करें साथ ही ग्रहण के पश्चात मंदिर में देसी घी का दान करें.
मूलांक 7 : सूर्य ग्रहण के दौरान के साथ के जातकों के जीवन में खुशियां आएंगी. व्यवसाय एवं नौकरी आदि में विशेष सफलता प्राप्त होने की उम्मीद है. पूर्व से चली आ रही स्वास्थ्य समस्याओं में लाभ मिलेगा. दांपत्य जीवन सुखमय होगा.
उपाय : मूलांक 7 के जातक ग्रहण काल के बाद कबूतर और पक्षियों को दाना डालें एवं गणेश द्वादशनाम स्त्रोत का पाठ करें.
मूलांक 8 : मुलाकात के जातकों के जीवन में सूर्य ग्रहण के पश्चात कुछ सकारात्मक बदलाव आएंगे. नई नौकरी अथवा प्रमोशन के योग बन रहे हैं. व्यवसाय में विशेष लाभ की स्थिति बनेगी.
उपाय : काले तिल अथवा साबुत उड़द का दान ग्रहण कल के पश्चात करें. गरीबों में नीले रंग के वस्त्र बाटें.
मूलांक 9 : मूलांकनों के जातकों के लिए सूर्य ग्रहण काफी नकारात्मक परिणाम देने वाला रह सकता है. इन्हें कई तरीके की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना भी करना पड़ेगा. दैनिक जीवन और वैवाहिक जीवन में भी तनाव की स्थिति बनेगी.
उपाय : सूर्य ग्रहण काल में सुंदरकांड का पाठ करें एवं हनुमान जी को मीठा पान अर्पित करें.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
28 Mar, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास, अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा, मनोनुकूल कार्य बना लेवें।
वृष राशि :- योजनाएं फलीभूत हों, शुभ समाचार संभव बनेंगे, रुके कार्य बन ही जाएंगे।
मिथुन राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष, बिगड़े कार्य अवश्य ही बनेंगे।
कर्क राशि :- कार्य-व्यवस्था की चिन्ता बनी ही रहेगी, प्रयास करने से लाभ होगा।
सिंह राशि :- भोग-एश्वर्य की प्राप्ति होगी, कार्यगति उत्तम, सुख के साधन अवश्य बनेंगे।
कन्या राशि :- अर्थिक योजना पूर्ण हो, समय पर सोचे कार्य पूर्ण होंगे, रुके कार्य बन ही जायेंगे।
तुला राशि :- पारिवारिक बाधायें परेशान करेंगी, विरोधी तत्व कष्टप्रद रखें, ध्यान रखें।
वृश्चिक राशि :- मानसिक बेचैनी, उद्विघ्नता से बचें तथा समय से लाभांवित होंगे।
धनु राशि :- कुटुम्ब की समस्याऐं कष्टप्रद हों तथा व्यर्थ भ्रमण में व्यय होगा।
मकर राशि :- योजनऐं फलीभूत हो, सफलता के साधन जुटायें तथा कार्य बनें, ध्यान रखें।
कुंभ राशि :- स्वभाव में खिन्नता, मानसिक बेचैनी तथा मानसिक कष्ट के साथ शरीर पीड़ा।
मीन राशि :- तनाव-क्लेश व अशांति बनेगी, परिश्रम विफल होंगे, कार्यगति मंद हो।
06 अप्रैल को मनायी जाएगी रामनवमी
27 Mar, 2025 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में रामनवमी का पर्व विशेष महित्व रखता है। राम नवमी हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनायी जाती है। ये दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और विशेष रूप से भगवान श्रीराम की पूजा की जाती है। राम नवमी का पर्व भारतीय संस्कृति और परंपरा में काफी विशेष स्थान रखता है। इसे भगवान श्रीराम की मर्यादा, वीरता, और धर्म के प्रति उनकी निष्ठा का प्रतीक माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान श्रीराम की पूजा करने के साथ-साथ उनके आदर्शों को अपनाने का प्रयास करते हैं।
मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीराम की पूजा करने से भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है, साथ ही जीवन के तमाम संकट समाप्त होते हैं। साथ ही, इस दिन विशेष रूप से मां दुर्गा के नौवें रूप सिद्धिदात्री की भी पूजा की जाती है, जो सुख-समृद्धि और सभी बाधाओं से मुक्ति प्रदान करने वाली मानी जाती हैं। राम नवमी का पर्व में श्रद्धा और भक्ति से मनाया जाता है। यह पर्व धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं इस बार राम नवमी की सही तिथि, पूजा मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में।
नवमी तिथि आरंभ: 05 अप्रैल 2025, शनिवार, सायं 07:26 मिनट पर
नवमी तिथि समाप्त: 06 अप्रैल 2025, रविवार, सायं 07:22 मिनट पर
उदया तिथि के अनुसार राम नवमी का पर्व 06 अप्रैल 2025 को मनाया जाएगा।
शुभ मुहूर्त 2025
पूजा का शुभ समय: 06 अप्रैल 2025, प्रातः 11:08 मिनट से दोपहर 01:39 मिनट तक
मध्याह्न मुहूर्त - प्रातः 11:07 से दोपहर 13:39 तक
किस प्रकार करें पूजा की तैयारी
राम नवमी के दिन सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वयं को शुद्ध करें।
इसके बाद व्रत का संकल्प लें और भगवान श्रीराम की पूजा करने का मन बनाएं। व्रत का पालन करते समय पूरे दिन सत्य बोलने और उत्तम आचरण का ध्यान रखें।
पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करके वहां एक चौकी रखें और उस पर पीले रंग का वस्त्र बिछाएं।
फिर उस पर भगवान श्रीराम, माता सीता, भाई लक्ष्मण और श्री हनुमान की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान श्रीराम की पूजा के लिए यह चौकी विशेष रूप से शुभ मानी जाती है।
अब, भगवान श्रीराम का ध्यान करते हुए उनका आह्वान करें।
भगवान राम को अपने घर में आमंत्रित करते हुए उनके चरणों में श्रद्धा अर्पित करें।
इसके बाद पंचोपचार पूजा करें जिसमें फूल, चंदन, दीपक, नैवेद्य (प्रसाद) और अर्पण किया जाता है।
अब राम स्त्रोत और राम चालीसा का पाठ करें। राम स्त्रोत का पाठ करने से भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है। राम चालीसा का पाठ विशेष रूप से शक्ति और सौभाग्य को बढ़ाने वाला माना जाता है। पूजा के अंत में भगवान श्रीराम की आरती करें और उनका धन्यवाद अर्पित करें। अंत में प्रसाद का वितरण करें ।
गणेश जी को इसलिए चढ़ाई जाती है दूर्वा
27 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान गणेश को कई चीज़ें अर्पित भी की जाती हैं जिसमें से एक दूर्वा भी है। कहा जाता है कि बिना दूर्वा के भगवान गणेश की पूजा पूरी नहीं होती है। आइए जानते हैं क्यों गणपति को दूर्वा चढ़ाना इतना महत्वपूर्ण है।
दूर्वा चढ़ाते समय बोलें ये मंत्र
ॐ गणाधिपाय नमः ,ॐ उमापुत्राय नमः ,ॐ विघ्ननाशनाय नमः ,ॐ विनायकाय नमः
ॐ ईशपुत्राय नमः ,ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः ,ॐ एकदन्ताय नमः ,ॐ इभवक्त्राय नमः
ॐ मूषकवाहनाय नमः ,ॐ कुमारगुरवे नमः
कथा
कहते हैं कि प्रचीन काल में अनलासुर नामक एक असुर था जिसकी वजह से स्वर्ग और धरती के सभी लोग परेशान थे। वह इतना खतरनाक था कि ऋषि-मुनियों सहित आम लोगों को भी जिंदा निगल जाता था। इस असुर से हताश होकर देवराज इंद्र सहित सभी देवी-देवता और ऋषि-मुनि के साथ महादेव से प्रार्थना करने पहुंचे। सभी ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे इस असुर का वध करें। शिवजी ने सभी देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों की प्रार्थना सुनकर उन्हें बताया कि अनलासुर का अंत केवल गणपति ही कर सकते हैं।
पेट में होने लगी थी जलन
कथा के अनुसार जब गणेश ने अनलासुर को निगला तो उनके पेट में बहुत जलन होने लगी। कई प्रकार के उपाय किए गए, लेकिन गणेशजी के पेट की जलन शांत ही नहीं हो रही थी। तब कश्यप ऋषि को एक युक्ति सूझी। उन्होंने दूर्वा की 21 गठान बनाकर श्रीगणेश को खाने के लिए दी। जब गणेशजी ने दूर्वा खाई तो उनके पेट की जलन शांत हो गई। तभी से भगवान श्रीगणेश जी को दूर्वा अर्पित करने की परंपरा शुरु हुई।
गुड़ी पड़वा 30 मार्च को चैत्र नवरात्रि की शुरुआत के साथ मनाया जाएगा
27 Mar, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू नव वर्ष की शुरुआत गुड़ी पड़वा से होती है। ये सांस्कृतिक और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर एक विशेष दिन है। हर साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का सूरज कुछ अलग होता है। जैसे उसकी किरणों में कोई नई उम्मीद, नई शुरुआत और नवचेतना समाई होती है। यही है गुड़ी पड़वा, हिंदू नववर्ष की पहली सुबह, जो सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि जीवन में शुभता के प्रवेश की तरह है।
गुड़ी पड़वा न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी बेहद खास पर्व है। ब्रह्मा जी ने इसी दिन सृष्टि की रचना की थी, इसलिए यह दिन नए आरंभ का प्रतीक बन चुका है। इस बार गुड़ी पड़वा 30 मार्च को चैत्र नवरात्रि की शुरुआत के साथ मनाया जाएगा, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
तीन परंपराएं जो इस पर्व पर नजर आती हैं।
गुड़ी की पूजा
गुड़ी यानी एक डंडे पर उल्टा रखा गया लोटा, जिस पर चेहरे की आकृति उकेरी जाती है और रेशमी वस्त्र लपेटा जाता है। यह प्रतीक है विजय, समृद्धि और संरचना का। खासतौर पर महाराष्ट्रीय परंपरा में इसका विशेष स्थान ह।. इसे घर के मुख्य द्वार या छत पर फहराया जाता है, मानो कह रहा हो—”अब नया आरंभ हो चुका है।”
नीम और मिश्री का सेवन
इस दिन नीम की कोमल पत्तियां और मिश्री खाना न केवल परंपरा है, बल्कि मौसम परिवर्तन के इस काल में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का उपाय भी। ”
पकवान, खासतौर पर पूरन पोली
मीठे का स्वाद हर शुभ अवसर पर ज़रूरी होता है। गुड़ी पड़वा पर पूरन पोली सबसे जरुरी है। चने की दाल और गुड़ से बनी यह पारंपरिक रोटी केवल स्वाद नहीं, बल्कि ऊर्जा और पाचन के लिहाज़ से भी अद्भुत है
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
27 Mar, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास, अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा, मनोनुकूल कार्य बना लेवें।
वृष राशि :- योजनाएं फलीभूत हों, शुभ समाचार संभव बनेंगे, रुके कार्य बन ही जाएंगे।
मिथुन राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष, बिगड़े कार्य अवश्य ही बनेंगे।
कर्क राशि :- कार्य-व्यवस्था की चिन्ता बनी ही रहेगी, प्रयास करने से लाभ होगा।
सिंह राशि :- भोग-एश्वर्य की प्राप्ति होगी, कार्यगति उत्तम, सुख के साधन अवश्य बनेंगे।
कन्या राशि :- अर्थिक योजना पूर्ण हो, समय पर सोचे कार्य पूर्ण होंगे, रुके कार्य बन ही जायेंगे।
तुला राशि :- पारिवारिक बाधायें परेशान करेंगी, विरोधी तत्व कष्टप्रद रखें, ध्यान रखेंं।
वृश्चिक राशि :- मानसिक बेचैनी, उद्विघ्नता से बचें तथा समय से लाभांवित होंगे।
धनु राशि :- कुटुम्ब की समस्याऐं कष्टप्रद हों तथा व्यर्थ भ्रमण में व्यय होगा।
मकर राशि :- योजनऐं फलीभूत हो, सफलता के साधन जुटायें तथा कार्य बनें, ध्यान रखें।
कुंभ राशि :- स्वभाव में खिन्नता, मानसिक बेचैनी तथा मानसिक कष्ट के साथ शरीर पीड़ा।
मीन राशि :- तनाव-क्लेश व अशांति बनेगी, परिश्रम विफल होंगे, कार्यगति मंद हो।
आर्थिक तंगी से हैं परेशान? चैत्र माह में करें तुलसी के ये खास उपाय; धन लाभ के खुलेंगे सारे मार्ग, हो जाएंगे मालामाल!
26 Mar, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू कैलेंडर में चैत्र माह का बहुत खास महत्व होता है. हिंदू धर्म में चैत्र का महीना नए साल के रूप में मनाया जाता है यानी चैत्र माह हिंदू कैलेंडर का पहला महीना होता है. इस माह से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत हो जाती है. यह महीना होली के बाद शुरू हो जाता है. इस बार चैत्र माह 15 मार्च से शुरू हो गया है और इसका समापन 12 अप्रैल को होगा.
ज्योतिष के अनुसार, चैत्र माह में सूर्य अपनी उच्च राशि यानी मेष में प्रवेश करता है. चैत्र का महीना भक्ति और संयम का माना गया है, जिसमें सेहत संबंधी बदलाव भी बहुत होते हैं. साथ ही इस अवधि में तुलसी की पूजा-अर्चना द्वारा आप जीवन में काफी अच्छे परिणाम प्राप्त कर सकते हैं. तो चलिए जानते हैं
जरूर करे चैत्र माह मे यह तुलसी के उपाय
वैवाहिक जीवन: चैत्र माह में तुलसी की पूजा करने के साथा मां तुलसी को सोलाह श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करना चाहिए. कुछ समय बाद इन सभी वस्तुओं को किसी सुहागिन महिलाओं को दान करें. मान्यता है कि ऐसा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. साथ ही वैवाहिक जीवन में खुशियां बनी रहती है.
आर्थिक तंगी: आर्थिक तंगी और धन लाभ के लिए चैत्र माह में तुलसी की पूजा के दौरान कच्चा दूध अर्पित करें. साथ ही तुलसी जी के मंत्र और तुलसी नामाष्टक मंत्र का जाप करें. उसके बाद देसी घी का दीपकर जलाकर आरती करें. मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को आर्थिक तंगी से छुटकारा मिलता है और धन लाभ के मार्ग खुलते हैं.
घी का दीपक: चैत्र माह में गुरुवार के दिन सुबह स्नान कर मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें और तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं. मान्यता है कि ऐसा करने व्यक्ति को जीवन की से सभी दुख और संकटों से मुक्ति मिलती है. इसके अलावा मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है.
जरूर करे उन मंत्रो का जाप
देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः
नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।
तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।
29 मार्च को खुलेंगे भाग्य के द्वार, शनि अमावस्या पर करें ये खास उपाय!
26 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शनि अमावस्या हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है. इस दिन पितृ तर्पण और शनि देव की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का संचार होता है. पितृ दोष और शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए यह दिन विशेष रूप से अनुकूल माना जाता है. इस बार शनि अमावस्या 29 मार्च 2024 को पड़ रही है.
पितरों का आशीर्वाद पाने का खास दिन
शनि अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करने से उनके आशीर्वाद की प्राप्ति होती है.यह न केवल जीवन के संकटों से मुक्ति दिलाता है बल्कि परिवार में सुख-शांति और समृद्धि भी लाता है.
शनि अमावस्या पर पितरों की तर्पण विधि
इस दिन सुबह स्नान करने के बाद पवित्र मन से तर्पण प्रक्रिया शुरू करें. एक लोटे में जल, काले तिल, फूल डालें और उन्हें पितरों को अर्पित करें. तर्पण करते समय “ॐ पितृ देवा नमः” या “ॐ तिल नमः” मंत्र का जाप करें. इसके साथ ही पितृ चालीसा का पाठ भी अवश्य करें, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
शनि दोष दूर करने के लिए क्या करें?
शनि अमावस्या पर पीपल के पेड़ को जल चढ़ाना और उसके नीचे दीया जलाना बेहद शुभ माना जाता है. साथ ही, शनि देव को तेल अर्पित करना और गरीबों को काले तिल, वस्त्र और अन्न का दान करने से शनि के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं और आर्थिक तंगी भी दूर होती है.
हनुमान चालीसा, जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर
26 Mar, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हनुमान चालीसा का हर रोज पाठ करने से सभी रोग व कष्ट दूर होते हैं. साथ ही शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या के अशुभ प्रभाव में कमी भी आती है. इस पाठ को हर रोज पढ़ने से मन को शांति मिलती है और सभी तरह के भय दूर हो जाते हैं. साथ ही घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और नौकरी व कारोबार में अच्छी तरक्की होती है. हनुमान चालीसा का हर रोज पाठ करने से सभी ग्रह अनुकूल रहते हैं और नकारात्मकता दूर रहती है.
दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमन मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे। कांधे मूंज जनेउ साजे।।
शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन।।
बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना।।
जुग सहस्र जोजन पर भानु। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रच्छक काहू को डर ना।।
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरे सब पीरा। जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।।
और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै।।
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु संत के तुम रखवारे।। असुर निकन्दन राम दुलारे।।
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुह्मरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै।।
अंत काल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरिभक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
सङ्कट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बन्दि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।
नवरात्रि में मां को लौंग चढ़ाने से मिलते हैं कई लाभ? जानें किस मनोकामना के लिए कैसे करें अर्पित
26 Mar, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का बहुत अधिक महत्व माना जाता है. नवरात्रि के नौ दिनों में देवी मां दुर्गा की आराधना की जाती है. इसके साथ ही नवरात्रि में मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए भक्त व्रत भी करते हैं व कई उपाय भी करते हैं. मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त मां दुर्गा की सच्चे मन से आराधना करते हैं व उपाय करते हैं माता रानी उनकी हर मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं.
इसी बीच आपको बता दें कि नवरात्रि के दौरान माता रानी को भक्तजन लौंग चढ़ाते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि माता रानी को लौंग क्यों चढ़ाया जाता है और इसका क्या महत्व है? नवरात्रि में देवी मां को क्यों चढ़ाया जाता है लौंग और क्या होता है इसका फायदा और क्या लौंग के किन उपायों को करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं.
लौंग का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लौंग का प्रयोग करना शुभ होता है.मान्यता है कि लौंग के प्रभाव से नकारात्मक शक्तियों खत्म हो जाती हैं और सकारात्मकता बनी रहती है. लौंग का प्रयोग विशेष कर पूजा पाठ और हवन आदि क्रियाओं में किया जाता है.
मां दुर्गा को लौंग चढ़ाने के होंगे ये लाभ
– लौंग चढ़ाने से मां दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होती हैं. इसके प्रभाव से व्यक्ति को कभी पैसों की तंगी नहीं होती और सुख समृद्धि बढ़ती है.
– लौंग के प्रयोग से नकारात्मक शक्तियों दूर हो जाती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
– पूजा में लौंग का उपयोग करने से व्यक्ति का स्वास्थ्य ठीक रहता है और बीमारियां दूर होती हैं.
– लौंग के प्रयोग से व्यक्ति बुरी नजर से बच सकता है और ऐसे व्यक्ति पर कभी बुरी शक्तियां प्रभाव नहीं करती हैं.
– जो व्यक्ति देवी मां को लोग चढ़ाता है उसकी सभी मनोकामनाएं मां पूरी करती हैं.एक लाल कपड़े में कुछ लौंग लपेट लें.
नवरात्रि में कर सकते हैं ये कारगर उपाय
– यदि आप अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करना चाहते हैं तो एक लाल कपड़े में 2 लौंग, 5 इलायची और 5 सुपारी बांधे और मां दुर्गा को अर्पित करें. इस उपाय को करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं.
– यदि आप नौकरी में उन्नति चाहते है तो लौंग का ये उपाय आपके लिए लाभकारी होगा.इसके लिए प्रतिदिन आपको लौंग का जोड़ा अपने सर से सात बार उतारकर मां के चरणों में अर्पित करना चाहिए.
– राहु केतु ग्रह क्रूर ग्रहों में आते हैं.यदि कुंडली में इनसे जुड़ी समस्या है तो शिवलिंग पर रोज लौंग का जोड़ा चढ़ाने से आपकी परेशानी खत्म हो सकती है.
– घर में सुख शांति बनाए रखने के लिए प्रतिदिन लौंग और कपूर जलाकर उसकी धूप घर के हर कोने में देना चाहिए.
21 दिन बाद सूर्य के मेष राशि में गोचर संग खत्म होगा खरमास, शुरू हो जाएंगे मांगलिक कार्य, 2 महीना खूब बजेगी शहनाई
25 Mar, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पिछले 1 महीने से सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लगा हुआ है. ऐसा इसलिए, क्योंकि खरमास का महीना जो चल रहा है. हिन्दू धर्म में पूरे खरमास में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य निषेध माने जाते हैं. हालांकि, आज से ठीक 21 दिन बाद खरमास का समापन हो रहा है. इस दिन सूर्य मेष राशि में गोचर करेंगे. ऐसा होने से शहनाई की मधुर ध्वनि फिजाओं में घुलने लगेगी. बैंड-बाजों के शोर के साथ वर यात्राएं सड़कों पर नजर आने लगेंगी. ज्योतिष आचार्यों की मानें तो, गुरु ग्रह के 23 मार्च से ही उदय होने से 14 अप्रैल से 9 जून तक विवाह के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त होंगे. अब सवाल है कि आखिर खरमास में क्यों नहीं होते मांगलिक कार्य? कब खत्म हो रहा खरमास महीना?
खरमास में क्यों नहीं होते मांगलिक कार्य
खरमास में मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं, क्योंकि इस दौरान सूर्य देव की ऊर्जा कमजोर मानी जाती है, जो शुभ कार्यों के लिए आवश्यक होती है. ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह को भाग्य के कारक में रूप जोड़कर देखा जाता है. ऐसे में अगर खरमास में शुभ और मांगलिक काम किए जाते हैं, तो उसका शुभ फल प्राप्त नहीं होता. इसी वजह से खरमास में शुभ और मांगलिक पर रोक लग जाती है.
2025 में खरमास कब से कब तक चलेगा
ज्योतिष आचार्यों की माने तो, खरमास का महीना पूरे एक महीने तक रहता है. इस बार खरमास 14 मार्च 2025 से शुरू हुआ था, जब सूर्य मीन राशि में गए थे और 13 अप्रैल 2025 को खरमास का समापन होगा. इसके बाद सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे.
14 अप्रैल से 9 जून तक विवाह का श्रेष्ठ मुहूर्त
14 अप्रैल से लेकर नौ जून तक विवाह के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त हैं. देवश्यानी एकादशी से 27 दिन पहले नौ जून को गुरु के अस्त होने के कारण इस बार पांच माह के लिए विवाह समारोह में विराम लग जाएगा. ज्योतिषाचार्य की मानें तो सनातन धर्म में कोई भी कार्य बिना शुभ मुहूर्त जाने नहीं किया जाता है.
6 जुलाई को देवशयनी एकादशी
6 जुलाई को देवशयनी एकादशी के बाद देव चार माह के लिए श्रीहरि क्षीरसागर में विश्राम करने चले जाते हैं. उसके पश्चात दो नवंबर को देवउठनी एकादशी पर फिर से विवाह आदि मांगलिक कार्य प्रारंभ होंगे.
साल 2025 में अप्रैल से दिसंबर तक विवाह मुहूर्त
अप्रैल के मुहूर्त: 14, 16, 18, 19, 20, 21, 25, 29 और 30 अप्रैल में कुल नौ शादी के मुहूर्त हैं.
मई के मुहूर्त: 1, 5, 6, 8, 10, 14, 15, 16, 17, 18, 22, 23, 24, 27 और 28 मई को विवाह के शुभ मुहूर्त हैं.
जून के मुहूर्त: 2, 4, 5, 7 और 8 जून को विवाह के शुभ मुहूर्त हैं.
नवंबर के मुहूर्त: 2, 3, 6, 8, 12, 13, 16, 17, 18, 21, 22, 23, 25 और 30 नवंबर को शादी के शुभ मुहूर्त हैं.
दिसंबर के मुहूर्त: 4, 5 और 6 दिसंबर को विवाह के शुभ मुहूर्त हैं.
29 मार्च को सूर्य ग्रहण और शनि गोचर एक साथ, इस दिन जन्म लेने वाले बच्चों का क्या होगा भविष्य
25 Mar, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
29 मार्च को साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण मीन राशि में लग रहा है और इसी दिन मीन राशि में शनि देव का गोचर होने वाला है. साथ ही इसी दिन शनि अमावस्या भी है. किसी भी बच्चे का जन्म का दिन उसके भविष्य, व्यक्तित्व और स्वभाव से जुड़ी कई बातों को निर्धारित करता है. सप्ताह के सातों दिन जन्म लेने वाले बच्चे अलग अलग स्वभाव के होते हैं लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर कोई बच्चा सूर्य ग्रहण और शनि गोचर के समय होता है तो उसका भविष्य और स्वभाव आम बच्चों से अलग हो सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं 29 मार्च को जन्म लेने वाले बच्चों पर सूर्य ग्रहण और शनि गोचर का क्या प्रभाव पड़ेगा…
ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर होगा तय
अगर किसी बच्चे का जन्म 29 मार्च को होगा तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसका संपूर्ण जीवन खराब या अशुभ रहेगा. ग्रहण काल में जन्म लेने वाले बच्चे का नक्षत्र, लग्न, वार और समय भी देखा जाता है. संपूर्ण ग्रह-नक्षत्र की जानकारी के आधार पर ही बच्चे का भविष्य क्या होगा, इस बात की जानकारी मिलती है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ग्रहण के समय जन्म लेने वाले बच्चे पर इसका कोई असर नहीं होता लेकिन युवावस्था के समय ग्रहों का प्रभाव देखने को मिल सकता है.
राहु के गुण होते हैं मौजूद
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सूर्य ग्रहण और शनि गोचर के समय जन्म लेने वाले बच्चे पर इसका प्रभाव हमेशा बना रहता है. सूर्य ग्रहण के समय जन्म लेने वाले बच्चों पर राहु के गुण भी मौजूद होते हैं. साथ ही इस दिन अमावस्या भी है और अमावस्या तिथि पर कुंडली में सूर्य और चंद्रमा एक ही घर में मौजूद रहते हैं, जिससे इस दिन जन्म लेने वाले बच्चे में गजब की लीडरशिप क्वालिटी देखने को मिलेगी, ज्यादातर हर क्षेत्र में आगे रखते हैं. साथ ही ग्रहण के समय जन्म लेने वाले बच्चे धर्म कर्म के कार्यों में आगे रहते हैं और गर्भ से ही आध्यात्मिक योद्धा के रूप में कार्य करते हैं.
29 मार्च का मूलांक 2
29 मार्च का मूलांक 2 है और 2 के स्वामी चंद्र देव हैं. चंद्र देव भी इसी दिन मीन राशि में शनि के साथ मौजूद रहेंगे. इस वजह से इस दिन जन्म लेने वाले बच्चे का स्वभाव काफी चंचल होता है और काफी धैर्यवान भी होता है. किसी भी परिस्थिति में घबराते नहीं है और समझदारी से फैसले लेते हैं. इस मूलांक वाले लव लाइफ के मामले में काफी लकी रहते हैं. लेकिन ग्रहण की वजह से माता या पिता में से किसी एक का ही सुख उनको मिलेगा.
सूर्य ग्रहण का प्रभाव
सूर्य ग्रहण और शनि गोचर के समय जन्म लेने वाले बच्चों को जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है लेकिन बचपन में नहीं युवावस्था के दौरान. ज्योतिष की मानें तो ग्रहण काल में जन्म लेने वाले बच्चों में अधूरापन देखने को मिल सकता है. अगर पैसा होगा तो पारिवारिक सुख नहीं मिलेगा लेकिन अगर पारिवारिक सुख होगा तो धन संबंधित समस्या का सामना करना पड़ सकता है. लेकिन अगर ये समझदारी से आगे बढ़ते जाएं तो ये अपना भाग्य खुद ही बदलकर लिख सकते हैं.
सूर्य ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव और उपाय
सूर्य ग्रहण और शनि गोचर के समय जन्म लेने वाले बच्चों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है. साथ ही स्नायु और आंखें रोगग्रस्त हो सकती है. साथ ही विकलांगता की समस्या भी ग्रहण के समय जन्म लेने वाले बच्चों में देखने को मिल सकती है. हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण की बात करें तो सूर्य ग्रहण और शनि गोचर के समय जन्म लेने वाले बाकी दिन जन्म लेने वाले बच्चों की तरह सामान्य होते हैं. इस दिन जन्म लेने वाले बच्चों को वही परेशानी और लाभ मिल सकते हैं, जो अन्य दिन जन्म लेने वाले बच्चों को मिलते हैं. सूर्य ग्रहण और शनि गोचर के समय जन्म लेने वाले बच्चों पर युवावस्था के दौरान राहु और केतु से संबंधित चीजों का दान करवाते रहें.
माओवाद की समाप्ति के बाद अब बस्तर का सर्वांगीण विकास होगा: मंत्री राम विचार नेताम
अम्बिकापुर में विकास को नई रफ्तार
ड्रोन के साथ अपने हौसलों को उड़ान दे रही हैं सरूपी मीणा
अल्पविराम की अवधारणा जीवन और कार्य के संतुलन के लिये अत्यंत आवश्यक : अर्गल
चिन्हारी योजना से सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति
जल जीवन मिशन से संवरी बुलगा की तस्वीर, जीवंती बाई के घर तक पहुँचा शुद्ध पेयजल
नगरीय निकायों के कायाकल्प और वित्तीय सुदृढ़ीकरण के लिये दो दिवसीय "शहरी सुधार कार्यशाला" का हुआ समापन
संकल्प से समाधान अभियान’ से त्वरित, प्रभावी और पारदर्शी निराकरण हुआ सुनिश्चित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
यूरिया का प्रभावी विकल्प बन रही हरी खाद, जशपुर में 600 हेक्टेयर में प्रदर्शन
