धर्म एवं ज्योतिष
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
11 May, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कुटुम्ब में तनाव, क्लेश व अशांति, व्यर्थ का व्यय तथा प्रतिष्ठा हानि होगी।
वृष राशि :- इष्ट मित्र से सुख, अधिकारियों से मेल-मिलाप, समय लाभप्रद बना ही रहेगा।
मिथुन राशि :- अर्थ व्यवस्था अनुकूल हो, सफलता के साधन जुटायें तथा कार्य अवश्य ही बनेंगे।
कर्क राशि :- मनोवृत्ति उदार बनाये रखें, तनाव व क्लेश से हानि की संभावना बनी रहेगी।
fिसंह राशि :- समय नष्ट न करें, व्यवसायिक गति रहे, असमंजस की स्थिति से बच कर चलें।
कन्या राशि :- आर्थिक योजना सफल हो, व्यवसायिक क्षमता अवश्य अनुकूल बनी रहेगी।
तुला राशि :- धन का व्यय, परिश्रम से हानि, मानसिक उद्विघ्नता से आप दूर चलें।
वृश्चिक राशि :- स्त्री कार्य से क्लेश व हानि, विघटनकारी तत्व आप को परेशान कर सकते हैं।
धनु राशि :- कुटुम्ब की समस्या सुलझे तथा धन का व्यय होगा, व्यर्थ भ्रमण आवश्य ही होगा।
मकर राशि :- अर्थ व्यवस्था छिन्न-भिन्न रहे, छोटे कार्य व्यय से कार्यगति मंद हो सकती है।
कुंभ राशि :- दैनिक कार्यगति में सुधार होगा, चिन्ताऐं कम होंगी, सफलता के साधन जुटाएंगे।
मीन राशि :- मनोबल उत्साह वर्धक होवे तथा कार्यगति अनुकूल अवश्य ही बन जाएगी।
पैरों की उंगलियां खोलती हैं आपके राज, इस उम्र के बाद चमक जाती है ऐसे लोगों की किस्मत!
10 May, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शरीर के हर अंग का अपना एक अलग संकेत होता है. सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार, इन संकेतों के माध्यम से व्यक्ति के स्वभाव, व्यवहार और भविष्य के बारे में जाना जा सकता है. आपने अक्सर हाथों की रेखाओं, अंगूठे के आकार और हथेली की बनावट के संकेतों के बार में जरूर सुना होगा. लेकिन आज हम बात करेंगे पैरों की उंगलियों के बारे में. जी हां, पैरों की उंगलियों और अंगूठे के आकार से भी किसी के स्वभाव और उसके बारे में कई चीजों का पता लगाया जा सकता है. इस बारे में विस्तार से बता रहे हैं
शांत और संतुलित स्वभाव वाले लोग
यदि आपके पैरों का अंगूठा सबसे बड़ा है और बाकी उंगलियां लगभग एक जैसी लंबाई की हैं, तो ऐसे लोग आमतौर पर बेहद शांत, सरल, और संवेदनशील स्वभाव के होते हैं. ये किसी भी विवाद से बचते हैं और निर्णय लेने में समय लेते हैं. इन्हें अक्सर गलत समझा जाता है कि इनकी निर्णय लेने की शक्ति कमज़ोर है, जबकि वास्तव में ये सोच-समझकर फैसला लेने में विश्वास रखते हैं. प्यार में ये बेहद वफादार और गंभीर होते हैं.
डोमिनेटिंग और आत्मविश्वासी लोग
अगर आपके पैरों का अंगूठा सबसे बड़ा है और बाकी उंगलियां क्रमशः घटती लंबाई में हैं, तो ऐसे लोग आत्मविश्वासी, मुखर और कभी-कभी जिद्दी स्वभाव के होते हैं. इन्हें अपने फैसलों पर पूरा भरोसा होता है और जीवन में हर अनुभव से कुछ सीखने की चाह रखते हैं. हालांकि, इनका डोमिनेटिंग स्वभाव कई बार रिश्तों में चुनौती बन जाता है.
जिम्मेदार और मेहनती लोग
अगर आपके पैरों का अंगूठा, दूसरी और तीसरी उंगलियों के बराबर है और बाकी दो उंगलियां छोटी हैं, तो ऐसे लोग जिम्मेदार, मेहनती और परिवार के लिए समर्पित होते हैं. दूसरों की मदद करना, खुद की गलतियों की ज़िम्मेदारी लेना और हमेशा पॉज़िटिव सोचना इनकी खासियत होती है. ये लोग रिश्तों को निभाने में विश्वास करते हैं और काफी भरोसेमंद होते हैं.
मेहनत से अलग पहचान बनाते हैं
अगर आपके पैरों की दूसरी उंगली अंगूठे से बड़ी है और उसके बाद की उंगलियां क्रमशः छोटी हैं, तो ऐसे लोग अपनी मेहनत से किस्मत बदलने वाले होते हैं. बचपन से ही जिम्मेदारियां निभाते हैं और ज्यादातर काम खुद ही करते हैं. इन्हें नई चीज़ें सीखने और कुछ अलग करने का शौक होता है. हालांकि इनकी सफलता अक्सर 28 या 30 की उम्र के बाद ही आती है, लेकिन जब आती है तो धमाकेदार होती है. ये समाज और दुनिया में मेहनत से अलग पहचान बनाते हैं.
प्रदोष व्रत के दिन इस स्तोत्र के पाठ से मिलेगा हजारों गुना लाभ, विद्या-धन-बल और ज्ञान का वरदान देंगे भोलेनाथ!
10 May, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू कैलेंडर के अनुसार प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है. साल में आने वाले कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में कुल 24 प्रदोष व्रत का आगमन मानव कल्याण के लिए होता है. प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा-पाठ, आराधना, स्तोत्र आदि का पाठ करने पर साधकों को कई चमत्कारी लाभ मिलते हैं. शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन यदि श्रद्धा और भक्तिभाव से पवित्र मन और हृदय से भोलेनाथ के रुद्राष्टक, पशुपत्येष्टक, शिव महिम्न, शिव तांडव आदि स्तोत्र का पाठ किया जाए, तो हजारों गुना लाभ प्राप्त होता है. प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में ही भगवान शिव की आराधना करने का विधान होता है लेकिन भगवान शिव के कुछ स्तोत्र ऐसे भी हैं, जिनका ब्रह्म मुहूर्त, दोपहर और प्रदोष काल के समय पाठ करने पर कई गुना लाभ मिलता है.
प्रदोष व्रत के दिन स्तोत्र का पाठ करने की ज्यादा जानकारी देते हुए हरिद्वार के विद्वान ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री लोकल 18 को बताते हैं कि प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि में करने का विधान होता है. इस दिन भगवान शिव की आराधना करने पर संपूर्ण लाभ प्राप्त होता है. प्रदोष व्रत के दिन हजारों गुना लाभ प्राप्त करने के लिए चारों वेदों के ज्ञाता राजा रावण द्वारा रचित शिव तांडव स्तोत्र का पाठ प्रदोष व्रत के दिन करने पर सबसे अधिक लाभ की प्राप्ति होती है. इस साल ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत 24 मई को विधि विधान से करने और तीन समय शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने पर विद्या, धन, बल, ज्ञान आदि सुखों की प्राप्ति मिलने की धार्मिक मान्यता है.
‘ॐ नमः शिवाय’ का मन ही मन करें जाप
वह आगे बताते हैं कि ब्रह्म मुहूर्त में उठकर दैनिक नित्यकर्म व स्नान आदि के बाद शिवलिंग का गंगाजल, दूध, शहद, दही, तिल आदि से अभिषेक और पूजा-पाठ करने पर व्रत का संकल्प करें. पूरे दिन व्रत रखकर भगवान शिव के मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का मन ही मन जाप करते रहें. इस दिन शिव तांडव स्तोत्र का पाठ ब्रह्म मुहूर्त में करें. इसके बाद दोपहर और प्रदोष काल यानी सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद वाले समय में भी शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने पर विद्या, धन, बल, ज्ञान, आरोग्यता आदि सभी की प्राप्ति होने की धार्मिक मान्यता है.
रातों-रात में भूतों ने किया इस मंदिर का निर्माण, इतिहास जानकर दंग रह जाएंगे आप, 1 बच्चे ने खोला था राज
10 May, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत में कई मंदिर अपनी खूबसूरती और रहस्यों के लिए जाने जाते हैं. ऐसा ही एक मंदिर है काकनमठ, जो मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित है. कहा जाता है कि यह मंदिर एक ही रात में भूतों और अलौकिक शक्तियों ने बनाया था. इसकी अनोखी बनावट और कहानी लोगों को हैरान कर देती है. यह मध्य प्रदेश राज्य के मुरैना जिले के सिहोनिया गांव में स्थित है, जो रहस्यमयी और अद्भुत स्थापत्य कला का उदाहरण है. 11वीं शताब्दी में निर्मित यह शिव मंदिर न केवल अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसके निर्माण से जुड़ी एक लोककथा इसे और भी रहस्यमय बनाती है.
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, काकनमठ मंदिर का निर्माण कच्छपघात वंश के एक राजा ने भगवान शिव की भक्ति में करवाया था. राजा ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वह इस मंदिर का निर्माण स्वयं करें. भगवान शिव ने राजा के सपने में आकर कहा कि वह इस मंदिर का निर्माण एक ही रात में कर देंगे, लेकिन शर्त यह है कि कोई भी मानव इस निर्माण प्रक्रिया को नहीं देखेगा.
TOI में छपी रिपोर्ट के अनुसार, राजा ने पूरे गांव को आदेश दिया कि उस रात कोई भी अपने घर से बाहर नहीं निकले. रात में मंदिर निर्माण की आवाजें सुनाई दीं, लेकिन किसी ने बाहर झांकने की हिम्मत नहीं की. हालांकि, एक जिज्ञासु बालक ने खिड़की से बाहर झांक लिया, जिससे निर्माण कार्य कर रहे अलौकिक प्राणी अदृश्य हो गए और मंदिर अधूरा रह गया.
कला और विशेषताएं
काकनमठ मंदिर की वास्तुकला अद्वितीय है. यह पूरी तरह से पत्थरों से निर्मित है, और इसमें किसी भी प्रकार का सीमेंट या चूना नहीं लगाया गया है. मंदिर की दीवारें और स्तंभ इतनी मजबूती से जुड़े हैं कि यह आज भी मजबूती से खड़ा है. मंदिर का ऊपरी हिस्सा अधूरा है, जो उस रात के अधूरे निर्माण की कहानी को दर्शाता है. काकनमठ मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह भारतीय स्थापत्य कला और लोककथाओं का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह मंदिर आज भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. मंदिर की रहस्यमयी कथा और अद्भुत निर्माण इसे भारत के सबसे रहस्यमय मंदिरों में से एक बनाते हैं.
क्या कलावा पहनने की भी होती है सीमा? जानिए ज्यादा समय तक पहनने के नुकसान, क्यों समय पर उतारना होता है जरूरी?
10 May, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिन्दू धर्म में कलावा यानी रक्षा सूत्र का खास महत्व है. पूजा पाठ के बाद जब पंडित हमारे हाथ में यह रंग बिरंगा धागा बांधते हैं, तो हम इसे शुभ मानकर लंबे समय तक हाथ में बांधे रखते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस धागे को कब तक पहनना चाहिए? क्या इसे महीनों तक हाथ में रखना सही है? अगर नहीं, तो क्यों? दरअसल, कलावा सिर्फ एक धागा नहीं होता. इसमें बहुत सारी ऊर्जा जुड़ी होती है. इसे बांधते समय मंत्र पढ़े जाते हैं और आस्था के साथ इसे हाथ में बांधा जाता है. यही वजह है कि इसे सही तरीके से पहनना और सही समय पर उतारना बहुत ज़रूरी माना गया है.
कलावा को क्यों माना जाता है खास
कलावा को भगवान विष्णु, शिव और ब्रह्मा से जोड़ा गया है. साथ ही इसमें मां लक्ष्मी, पार्वती और सरस्वती का भी वास माना जाता है. जब यह धागा हाथ में बांधा जाता है, तो माना जाता है कि यह व्यक्ति को बुरी नज़र से, बीमारी से और नकारात्मक सोच से बचाता है. लेकिन समय बीतने के साथ इस धागे का असर कम होने लगता है.
कब तक पहनना चाहिए कलावा?
ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, कलावा को सिर्फ 21 दिन तक ही पहनना चाहिए. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि 21 दिन के बाद अक्सर इसका रंग उड़ने लगता है या धागे टूटने लगते हैं. जब कलावा कमजोर हो जाए या उसका रंग उतर जाए, तो उसका असर भी खत्म होने लगता है. ऐसे में इसे पहनना अशुभ माना जाता है.
पुराना कलावा क्या कर दें?
अगर आप 21 दिन के बाद कलावा उतार रहे हैं, तो उसे कहीं भी न फेंकें. न ही उसे मंदिर में रखें या किसी पेड़ पर लटकाएं. माना जाता है कि पुराना कलावा नकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है. इसलिए सबसे अच्छा तरीका है कि आप उसे मिट्टी में दबा दें. इससे उस धागे के साथ जुड़ी नकारात्मक ऊर्जा भी धरती में समा जाती है.
क्या होता है अगर पुराना कलावा न हटाएं?
अगर कोई व्यक्ति बहुत समय तक एक ही कलावा पहनता है, तो उसे इसका उल्टा असर देखने को मिल सकता है. शास्त्रों के अनुसार, ऐसा करने से ग्रहों का संतुलन बिगड़ सकता है और जीवन में रुकावटें आने लगती हैं. कई बार बिना वजह तनाव, बीमारी और घर में अशांति का कारण भी यही हो सकता है.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
10 May, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- सामाजिक कार्यों में प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि, कार्य कुशलता से संतोष होगा।
वृष राशि :- व्यर्थ थकावट, बेचैनी, मानसिक विभ्रम, धन का व्यय होगा, भ्रमणशीलता होगी।
मिथुन राशि :- विशेष कार्य स्थिगित रखें, सामाजिक कार्यों में प्रभुत्व वृद्धि होगी, कार्य करें।
कर्क राशि :- इष्ट मित्रों से सुख, समय ऐश्वर्य-विलास व उत्साह में बीतेगा तथा सुख होगा।
fिसंह राशि :- सामाजिक कार्यों में समय बीते, प्रतिष्ठा, समय पर सोचे कार्य पूर्ण होंगे, ध्यान दें।
कन्या राशि :- दूसरों के कार्यों में समय शांति नष्ट न करें, व्यावसायिक क्षमता में बाधा होगी।
तुला राशि :- अनायास विभ्रम, मानसिक बेचैनी, स्वभाव नरम-गरम रहेगा, हर्ष से कुशलता की संभावना।
वृश्चिक राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष, कुशलता से संतोष हो, तनाव व क्लेश से बचें।
धनु राशि :- तनाव व क्लेश, अशांति, मानसिक बेचैनी, उद्विघ्नता, कार्य-योजनाऐं बनी रहेंगी, व्यवसाय हो।
मकर राशि :- योजनाएँ फलीभूत हों, मित्रों से परेशानी, चिन्ता होगी, मानसिक विभ्रम हो सकता है।
कुंभ राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक हों, व्यवसाय गति अनुकूल, चिन्ता कम होगी।
मीन राशि :- किसी अपने का कार्य बनाने से संतोष, दैनिक अनुकूलता बनी रहेगी, ध्यान दें।
घर से निकलने से पहले मीठा खाना शुभ या अंधविश्वास? जानिए इसके पीछे छिपे शुभ संकेत और ज्योतिषीय कारण
9 May, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत में रोज़मर्रा की जिंदगी से जुड़ी कई परंपराएं हैं, जिनका सीधा संबंध हमारे विश्वास, भावनाओं और पुराने अनुभवों से होता है. इन्हीं में से एक है घर से बाहर जाते समय कुछ मीठा खाना. बहुत से लोग मानते हैं कि इससे दिन अच्छा जाता है और काम में सफलता मिलती है. लेकिन कुछ लोगों को यह उलझन भी होती है कि क्या यह सिर्फ एक रिवाज है या इसके पीछे कोई ठोस वजह भी है. चलिए जानते हैं
मीठा खाना क्यों माना जाता है शुभ?
जब भी किसी ज़रूरी काम पर निकलना हो, तो घर के बड़े बुज़ुर्ग अक्सर कहते हैं ‘थोड़ा सा दही शक्कर खा लो’ या ‘कुछ मीठा खाकर जाओ.’ इसके पीछे यह मान्यता है कि मीठे स्वाद से मन खुश होता है और सोच में ताज़गी आती है. मीठा खाने से जुबान पर मिठास आती है, जिससे बातचीत में नरमी बनी रहती है और मन शांत रहता है.
यही नहीं, जब कोई इंसान अच्छे मूड में होता है, तो वह ज्यादा आत्मविश्वास से भरा होता है और किसी भी काम को अच्छी तरह कर पाता है. यही वजह है कि घर से निकलते समय मीठा खाना एक तरह से अच्छा संकेत माना जाता है.
क्या अकेले मीठा खाना काफी है?
कुछ मान्यताओं के अनुसार, सिर्फ मीठा खाना ही नहीं, उसके साथ पानी पीना भी ज़रूरी होता है. कहा जाता है कि यह मिलकर शुभ फल देते हैं. पानी शरीर को ठंडक देता है और मन को संतुलन में रखता है. जब आप बाहर गर्मी या तनाव में निकलते हैं, तो पानी शरीर को तरोताज़ा रखता है और मन को शांत करता है. इसलिए कहा जाता है कि मीठे के साथ थोड़ा पानी पी लेना और भी बेहतर होता है.
ज्योतिष में क्या है इसका मतलब?
ज्योतिष की भाषा में देखें तो मीठा और जल दोनों ही कुछ खास ग्रहों से जुड़े होते हैं. जैसे चंद्रमा मन और शांति से जुड़ा होता है, वहीं बृहस्पति मिठास और शुभता का प्रतीक होता है. शुक्र को भी सुंदरता और स्वाद का ग्रह माना गया है.
ऐसा कहा जाता है कि जब इंसान कुछ मीठा खाता है, तो वह बृहस्पति और शुक्र दोनों को मजबूत करता है. वहीं पानी पीने से चंद्रमा शांत होता है और राहु जैसे ग्रहों का असर कम होता है. कई बार यह भी कहा जाता है कि मीठा और जल दोनों मिलकर मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच को बढ़ाते हैं.
जयपुर के आराध्य गोविंददेव जी करेंगे नौका विहार, गर्भगृह में प्रवाहित की जाएगी सुगंधित जल धारा, लगाए जाएंगे भोग
9 May, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जयपुर. राजधानी जयपुर के आराध्य गोविंददेवजी ज्येष्ठ माह की शुरुआत के साथ ही जल विहार करेंगे. इस दिन से मंदिरों में जलविहार की झांकियां सजना भी शुरू हो जाएगी. गोविंददेवजी मंदिर और गोपीनाथजी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में ठाकुरजी के जेष्ठाभिषेक शुरू होगा. मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी ने बताया कि गोविंददेवजी मंदिर में 12 मई को जलयात्रा उत्सव के साथ जलविहार की झांकियों की शुरुआत होगी. ठाकुरजी दोपहर 12.30 से 12:45 बजे तक 15 मिनट जलविहार करेंगे. मंदिर में 11 जून को ज्येष्ठाभिषेक तक जलयात्रा उत्सव मनाया जाएगा.
12 मई से 11 जून तक जलयात्रा उत्सव होगा
मंदिर महंत ने बताया कि गोविंददेवजी मंदिर में 12 मई से 11 जून तक जलयात्रा उत्सव मनाया जाएगा. दोपहर 12:30 से 12:45 बजे तक मंदिर के गर्भगृह में सुगंधित जल की धारा प्रवाहित करता चांदी का फव्वारा चलेगा. इस दौरान ठाकुरजी सफेद धोती और दुपट्टा धारण किए हुए रहेंगे. जल विहार झांकी 15 मिनट के लिए खुली रहेगी. झांकी के बाद ठाकुरजी को पांच प्रहार के फलों और हलवे-पूड़ी का भोग लगेगा. इसके अलावा मंदिर में 12 मई के बाद 18 मई, 12 मई, 23 मई अपरा एकादशी पर, 26 मई, 27 मई, 28 मई व 31 मई और 5 जून, 7 जून निर्जला एकादशी, 10 जून और 11 जून को जल विहार झांकियां सजाई जाएगी. इनमें निर्जला एकादशी पर 7 जून और 11 जून को जेष्ठाभिषेक दोपहर 12:30 बजे से 1:00 तक जबकि बाकी दिन दोपहर 12.30 से 12:45 तक जलविहार की झांकी सजेगी.
एक माह में 12 दिन करेंगे नौका विहार
गोविंददेवजी मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी ने बताया कि जयपुर के आराध्य देव गोविंददेव जीएक माह में 12 दिन ठाकुरजी नौका विहार करेंगे. यह दिन मंदिर में पर्व की तरह ही मनाया जाएगा. आपको बता दें कि गोविंद देव जी मंदिर में विशेष आयोजनों पर भक्तों की बाहरी भीड़ रहती है. ऐसे में अनुमान है कि ठाकुर जी के नौका विहार उत्सव में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे.
ज्येष्ठ माह कब से शुरू हो रहा है? जानें व्रत और पूजा के नियम
9 May, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू कैलेंडर के तीसरे महीने ज्येष्ठ माह का प्रारंभ वैशाख पूर्णिमा के समापन के बाद होता है. ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा तिथि को ज्येष्ठ माह का पहला दिन होता है. विष्णु पुराण के अनुसार, ज्येष्ठ माह में भगवान विष्णु के अवतार भगवान त्रिविक्रम की पूजा करते हैं. भगवान त्रिविक्रम श्रीहरि विष्णु के वामन अवतार हैं, जिन्होंने असुर राजा बलि को मुक्ति प्रदान की थी. जो व्यक्ति ज्येष्ठ माह में भगवान त्रिविक्रम की पूजा करता है, उसे दुश्मनों पर विजय प्राप्त होती है, उसके पाप मिटते हैं और अश्वमेध यज्ञ कराने के समान ही पुण्य की प्राप्ति होती है. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से जानते हैं कि ज्येष्ठ माह कब से शुरू है? ज्येष्ठ माह में व्रत और पूजा का नियम क्या है?
ज्येष्ठ माह का प्रारंभ 2025
दृक पंचांग के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 12 मई दिन सोमवार को रात 10 बजकर 25 मिनट से शुरू होगी. इस तिथि का समापन 13 मई दिन मंगलवार को देर रात 12 बजकर 35 मिनट पर होगा. उदयातिथि के आधार पर ज्येष्ठ माह का शुभारंभ 13 मई से है. उस दिन ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा होगी.
वरीयान योग और विशाखा नक्षत्र में ज्येष्ठ माह की शुरूआत
इस साल ज्येष्ठ माह की शुरूआत वरीयान योग और विशाखा नक्षत्र में है. 13 मई को वरीयान योग प्रात:काल से लेकर 05:53 ए एम तक है, उसके बाद से परिघ योग है. वहीं विशाखा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 09:09 ए एम तक है. उसके बाद अनुराधा नक्षत्र है.
1. ज्येष्ठ माह में भगवान विष्णु, उनके वामन अवतार, शनि देव और हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है. निर्जला एकादशी और बड़ा मंगलवार का व्रत ज्येष्ठ में ही आता है. निर्जला एकादशी में बिना अन्न और जल के व्रत करके पूरे साल के 24 एकादशी व्रतों का पुण्य पा सकते हैं.
2. ज्येष्ठ महीने में जल का दान करने का महत्व है. जो व्यक्ति जल का दान करना है, उसे पुण्य की प्राप्ति होती है. ज्येष्ठ में आप जो भी व्रत करें, उसके बाद जल का दान अवश्य करें.
3. ज्येष्ठ माह में मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बड़े मंगलवार का व्रत रखकर हनुमान जी की पूजा करें. उनके प्रिय भोग अर्पित करें. भंडारे का आयोजन करें.
4. ज्येष्ठ में गंगा दशहरा का पावन पर्व मनाया जाता है. इस दिन गंगा नदी में स्नान के बाद दान करने से पाप मिटते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है. मां गंगा ने धरती पर अवतरित होकर राजा सगर के 60 हजार पुत्रों को मोक्ष प्रदान किया था.
5. ज्येष्ठ महीने में पशु-पक्षियों, राहगीरों को पानी पिलाना चाहिए. उनके लिए अपने घन के बाहर पीने के पानी की व्यवस्था करानी चाहिए. विष्णु कृपा से जीवन में सुख और शांति आती है.
6. ज्येष्ठ अमावस्या के अवसर पर सुहागन महिलाओं को वट सावित्री का व्रत रखना चाहिए. इससे उनको अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होगा.
7. ज्येष्ठ अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है क्योंकि इस तिथि को सूर्य पुत्र शनि देव का जन्म हुआ था. साढ़ेसाती और ढैय्या के दुष्प्रभाव से बचने के लिए शनि देव की पूजा करें. शनि जयंती पर व्रत रखकर शनि की वस्तुओं का दान करें.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
9 May, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कार्य कुशलता से संतोष, स्त्री शरीर कष्ट, कुछ बाधायें चिन्तामय रखेंगी।
वृष राशि :- मान-प्रतिष्ठा में प्रमुख वृद्धि होगी, कार्य कुशलता से संतोष होगा, रुके हुए कार्य बनेंगे।
मिथुन राशि :- क्रोध से अशांति तथा झगड़े से बचें, क्रोध से कार्य अवरोध होगा एवं हानि होगी।
कर्क राशि :- कार्य-व्यवसाय में सुधार हो, कार्य कुशलता से संतोष होगा, हानि होगी।
सिंह राशि :- व्यवसाय गति अनुकूल हो, तनाव व क्लेश से अशांति, व्यर्थ व्यय होगा, ध्यान दें।
कन्या राशि :- योजनाऐं फलीभूत हों, अधिकारियों के तनाव से बचें, सतर्क रहकर कार्य करें।
तुला राशि :- विशेष कार्य स्थिगित रखें एवं कुटुम्ब की चिन्ता करें, विशेष रूप से ध्यान दें।
वृश्चिक राशि :- विशेष कार्य स्थिगित एवं लेन-देन के मामले में हानि होगी, कार्य होवेंगे।
धनु राशि :- मानसिक बेचैनी, उद्विघ्नता एवं असमर्थता का वातावरण बना ही रहेगा।
मकर राशि :- क्रोध, अशांति से बचिये, मानसिक भ्रम तथा व्यवस्था नष्ट हो सकती है।
कुंभ राशि :- नवीन योजनाएं फलप्रद हों, कार्यकुशलता से संतोष होगा, ध्यान दें।
मीन राशि :- इष्ट मित्र से तनाव-क्लेश व अशांति से हानि, मनोबल बना रहेगा।
हाथ की रेखाएं और हथेली के आकार से पता चलता है कैसा होगा जीवन
8 May, 2025 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर व्यक्ति के मन में अपना भविष्य जानने की इच्छा रहती है। हस्तरेखा शास्त्र एक ऐसा विज्ञान है जो व्यक्ति के भूत, भविष्य व वर्तमान की जानकारी देता है। हर व्यक्ति के हाथ की हथेली की बनावट व आकार अलग-अलग होता है। इसके साथ ही हाथ की रेखाएं भी अलग-अलग होती हैं। हस्तरेखा शास्त्र के जानकारों के अनुसार, व्यक्ति की हाथ की रेखाएं और हथेली के आकार को देखकर उसका भविष्य व स्वभाव का पता लगाया जा सकता है।
कठोर हथेली के जातक- हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की हथेली कठोर होती है, उन्हें जीवन में ज्यादा मेहनत व संघर्षों का सामना करना पड़ता है। ऐसे लोगों को दिन-रात एक करने के बाद ही भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। लेकिन ये लोग हमेशा अपनी ईमानदारी का परिचय देते हैं।
छोटी हथेली के जातक- हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की हथेली छोटी होती है, ऐसे लोग दिल के साफ होते हैं। ऐसे लोग क्रिएटिव कार्यों में रूचि रखते हैं। ये चीजों को जानने की इच्छा रखते हैं। कहते हैं कि इन लोगों का जीवन सुखमय बीतता है।
बड़ी हथेली के जातक- हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की हथेली का आकार बड़ा होता है, वे अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह से निभाते हैं। ये धर्म-कर्म के कार्यों में रुचि रखते है। इन्हें जीवन में मनचाही सफलता प्राप्त होती है।
कोमल हथेली के लोग- हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की हथेलियां कोमल होती हैं, वे भाग्यशाली माने गए हैं। इन लोगों को जीवन में अपार सफलता प्राप्त होती है। कहते हैं कि इन लोगों को धन संबंधी परेशानियों का कम सामना करना पड़ता है।
समस्याओं का समाधान बताते हैं यंत्र
8 May, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिन्दू धर्म के अनेक ग्रंथों में कई तरह के चक्रों और यंत्रों के बारे में विस्तार से उल्लेख किया गया है। जिनमें राम शलाका प्रश्नावली, हनुमान प्रश्नावली चक्र, नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र, श्रीगणेश प्रश्नावली चक्र आदि प्रमुख हैं। कहते हैं इन चक्रों और यंत्रों की सहायता से लोग अपने मन में उठ रहे सवालों, जीवन में आने वाली कठिनाइयों आदि का समाधान पा सकते हैं। इन चक्रों और यंत्रों की सहायता लेकर केवल आम आदमी ही नहीं बल्कि ज्योतिष और पुरोहित लोग भी सटीक भविष्यवाणियां तक कर देते हैं।
श्री राम शलाका प्रश्नावली
श्री राम शलाका प्रश्नावली का उल्लेख गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस में प्राप्त होता है। यह राम भक्ति पर आधारित है। इस प्रश्नावली का प्रयोग से लोग जीवन के अनेक प्रश्नों का जवाब पाते हैं। इस प्रश्नावली का प्रयोग के बारे कहा जाता है कि सबसे पहले भगवान श्रीराम का स्मरण करते हुए किसी सवाल को मन में अच्छी तरह सोच लिया जाता है।फिर शलाका चार्ट पर दिए गए किसी भी अक्षर पर आंख बंद कर उंगली रख दी जाती है। जिस अक्षर पर उंगली रखी जाती है, उसके अक्षर से प्रत्येक 9वें नम्बर के अक्षर को जोड़ कर एक चौपाई बनती है, जो प्रश्नकर्ता के प्रश्न का उत्तर होती है।
हनुमान प्रश्नावली चक्र
यह बात बहुत कम लोगों को पता है कि हनुमानजी एक उच्च कोटि के ज्योतिषी भी थे। इसका कारण शायद यह हो सकता है कि वे शिव के ग्यारहवें अंशावतार थे, जिनसे ज्योतिष विद्या की उत्पत्ति हुई मानी जाती है। कहते हैं, हनुमानजी ने ज्योतिष प्रश्नावली के 40 चक्र बनाए हैं। यहां भी प्रश्नकर्ता आंख मूंद कर चक्र के नाम पर उंगली रखता है। अगर उंगली किसी लाइन पर रखी गई होती है, तो दोबारा उंगली रखी जाती है। फिर नाम के अनुसार शुभ-अशुभ फल का निराकरण किया जाता है। कहते हैं। रामायण काल के परम दुर्लभ यंत्रों में हनुमान चक्र श्रेष्ठ यंत्रों का सिरमौर है।
नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र
अनेक लोग, विशेष देवी दुर्गा के परम भक्त, यह मानते हैं कि नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र एक चमत्कारिक चक्र है, जिसे के माध्यम से कोई भी अपने जीवन की समस्त परेशानियों और मन के सवालों का संतोषजनक हल आसानी से पा सकते हैं। इस चक्र के उपयोग की विधि के लिए पहले पांच बार ऊँ ऐं ह्लीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का जप करना पड़ता फिर एक बार या देवी सर्वभूतेषु मातृरुपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: मंत्र का जप कर, आंखें बंद करके सवाल पूछा जाता है और देवी दुर्गा का स्मरण करते हुए प्रश्नावली चक्र पर उंगली घुमाते हुए रोक दिया जाता है, जिस कोष्ठक उंगली होती है। उस कोष्ठक में लिखे अंक के अनुसार फलादेश को जाना जाता है।
श्रीगणेश प्रश्नावली चक्र
हिंदू मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश प्रथमपूज्य हैं। वे सभी मांगलिक कार्यों में सबसे पहले पूजे जाते हैं। उनकी पूजा के बिना कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। श्रीगणेश प्रश्नावली यंत्र के माध्यम से भी लोग अपने जीवन की सभी परेशानियों और सवालों के हल जानने की कोशिश करते हैं। जिसे भी अपने सवालों का जवाब या परेशानियों का हल जानना होता है, वे पहले पांच बार ऊँ नम: शिवाय: और फिर 11 बार ऊँ गं गणपतयै नम: मंत्र का जप करते हैं और फिर आंखें बंद करके अपना सवाल मन में रख भगवान गणेश का स्मरण करते हुए प्रश्नावली चक्र प्रश्नावली चक्र पर उंगली घुमाते हुए रोक देते हैं, जिस कोष्ठक उंगली होती है। उस कोष्ठक में लिखे अंक के अनुसार फलादेश को जाना जाता है।
शिव प्रश्नावली यंत्र
इस यंत्र में भगवान शिव के एक चित्र पर 1 से 7 तक अंक दिए गए होते हैं। श्रद्धालु अपनी आंख बंद करके पूरी आस्था और भक्ति के साथ शिवजी का ध्यान करते हैं और और मन ही मन ऊं नम: शिवाय: मंत्र का जाप कर उंगली को शिव यंत्र पर घुमाते हैं और फिर उंगली घुमाते हुए रोक देते हैं, जिस कोष्ठक उंगली होती है। उस कोष्ठक में लिखे अंक के अनुसार फलादेश को जाना जाता है। इन प्रश्नावलियों और यंत्रों के अलावा अनेक लोग साईं प्रश्नावली का उपयोग भी अपने मन में उठ रहे सवालों का जवाब पाने के लिए करते हैं।
तुलसी पूजन और गो सेवा से रहेंगे रोग दूर
8 May, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, बहुत सारे ऐसे उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर व्यक्ति सरल एवं सुलभ जीवन व्यतित कर सकता है। उन्हीं में से तुलसी पूजन और गो सेवा दो ऐसे शुभ कर्म हैं, जिस घर में प्रतिदिन होते हैं, वहां का द्वार रोग कभी नहीं खटखटाते और मिलते हैं ढेरों लाभ।
‘स्कंद पुराण’ के अनुसार जिस घर में तुलसी का बगीचा होता है (एवं प्रतिदिन पूजन होता है), उसमें यमदूत प्रवेश नहीं करते।’
‘पद्म पुराण’ में आता है कि ‘कलियुग में तुलसी का पूजन, कीर्तन, ध्यान, रोपण और धारण करने से वह पाप को जलाती है और स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदान करती है।’
‘पद्म पुराण’ के उत्तर खंड में आता है कि कैसा भी पापी, अपराधी व्यक्ति हो, तुलसी की सूखी लकडिय़ां उसके शव के ऊपर, पेट पर, मुंह पर थोड़ी-सी बिछा दें और तुलसी की लकड़ी से अग्नि शुरू करें तो उसकी दुर्गति से रक्षा होती है। यमदूत उसे नहीं ले जा सकते।
‘गरुड़ पुराण’ (धर्म कांड-प्रेत कल्प : 38.99) में आता है कि ‘तुलसी का पौधा लगाने, पालन करने, सींचने तथा ध्यान, स्पर्श और गुणगान करने से मनुष्यों के पूर्व जन्मार्जित पाप जल कर विनष्ट हो जाते हैं।’
‘मृत्यु के समय जो तुलसी-पत्ते सहित जल का पान करता है वह सपूर्ण पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक में जाता है।’ (ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खंड : 21.43)
‘जो दारिद्रय मिटाना व सुख-सपदा पाना चाहता है उसे शुद्ध भाव व भक्ति से तुलसी के पौधे की 108 परिक्रमा करनी चाहिए।’
ईशान कोण में तुलसी का पौधा लगाने से बरकत होती है।
व्रत रखने से मिलता है फल
8 May, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में सप्ताह के सारे दिन किसी न किसी भगवान को समर्पित हैं। जिस तरह से सोमवार का दिन भगवान शिवजी का और मंगलवार का दिन हनुमान जी का है। उसी तरह से बुधवार को भगवान गणेश की पूजा की जाती है और उनके लिए व्रत रखा जाता है। ज्योतिषियों के मुताबिक व्रत रखने से भगवान खुश होते हैं। आज हम आपके लिए लाए हैं बुधवार के व्रत की कथा। व्रत रखने वाले लोगों को इस दिन यह कथा सुननी होती है।
प्राचीन काल की बात है एक व्यक्ति अपनी पत्नी को लेने के लिए ससुराल गया। कुछ दिन अपने ससुराल में रुकने के बाद व्यक्ति ने अपने सास-ससुर से अपनी पत्नी को विदा करने को कहा लेकिन सास-ससुर ने कहा कि आज बुधवार है और इस दिन हम गमन नहीं करते हैं लेकिन व्यक्ति ने उनकी बात को मानने से साफ इनकार कर दिया। आखिरकार लड़की के माता-पिता को अपने दामाद की बात माननी पड़ी और अपनी बेटी को साथ भेज दिया। रास्ते में जंगल था, जहां उसकी पत्नी को प्यास लग गई। पति ने अपना रथ रोका और जंगल से पानी लाने के लिए चला गया। थोड़ी देर बाद जब वो वापस अपनी पत्नी के पास लौटा तो देखकर हैरान हो गया कि बिल्कुल उसी के जैसा व्यक्ति उसकी पत्नी के पास रथ में बैठा था।
ये देखकर उसे गुस्सा आ गया और कहा कि कौन है तू और मेरी पत्नी के पास क्यों बैठा है। लेकिन दूसरे व्यक्ति को जवाब सुनकर वो हैरान रह गया। व्यक्ति ने कहा कि मैं अपनी पत्नी के पास बैठा हूं। मैं इसे अभी अपने ससुराल से लेकर आया हूं। अब दोनों व्यक्ति झगड़ा करने लगे। इस झगड़े को देखकर राज्य के सिपाहियों ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
यह सब देखकर व्यक्ति बहुत निराश हुआ और कहा कि हे भगवान, ये कैसा इंसाफ है, जो सच्चा है वो झूठा बन गया है और जो झूठा है वो सच्चा बन गया है। ये कहते है कि फिर इसके बाद आकाशवाणी हुई कि ‘हे मूर्ख आज बुधवार है और इस दिन गमन नहीं करते हैं। तूने किसी की बात नहीं मानी और इस दिन पत्नी को ले आया।’ ये बात सुनकर उसे समझ में आया की उसने गलती कर दी। इसके बाद उसने बुधदेव से प्रार्थना की कि उसे क्षमा कर दे।
इसके बाद दोनों पति-पत्नि नियमानुसार भगवान बुध की पूजा करने लग गए। ज्योतिषियों के मुताबिक जो व्यक्ति इस कथा को याद रखता उसे बुधवार को किसी यात्रा का दोष नहीं लगता है और उसे सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। बुधवार के दिन अगर कोई व्यक्ति किसी नए काम की शुरुआत करता है तो उसे भी शुभ माना जाता है।
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
8 May, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- इष्ट मित्रों से सुख कार्य, व्यवसाय गति उत्तम तथा योजनाएँ बनेंगी, ध्यान दें।
वृष राशि :- अचानक शुभ समाचार व धन प्राप्ति के योग बनेंगे, संवेदनशील होने से बचिये।
मिथुन राशि :- क्रोध से अशांति, तनाव झगड़े से बचिये, अर्थ-व्यवस्था कुछ अनुकूल ही बनेगी।
कर्क राशि :- कार्य-कुशलता से सहयोग, स्त्री वर्ग से हर्ष, भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी।
सिंह राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक हों, कुटुम्ब की समस्याऐं अवश्य ही सुलझ जाएंगी, ध्यान दें।
कन्या राशि :- व्यर्थ व्यय, असमंजस और स्थिरता का वातावरण का सामना करना पड़ेगा।
तुला राशि :- अधिकारियों का समर्थन विफल हो तथा कार्य व्यवसाय गति अनुकूल बनेगी।
वृश्चिक राशि :- समय की अनुकूलता से लाभांवित हों, कार्य-कुशलता से अनुकूलता बनेगी।
धनु राशि :- व्यवसाय गति उत्तम, भाग्य साथ देवे, बिगड़े कार्य में सुधार अवश्य ही होगा।
मकर राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास, स्वास्थ्य नरम रहे, स्थिति में सुधार अवश्य ही होगा।
कुंभ राशि :- स्त्री शरीर से सुख, मानसिक बेचैनी से बचिए, कार्यगति अनुकूल बने।
मीन राशि :- धन-लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष, बिगड़े कार्य अवश्य ही बनेंगे।
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