धर्म एवं ज्योतिष
मोहिनी एकादशी पर क्या करें दान, क्या चढ़ाएं भोग? राशि अनुसार करें ये उपाय, मिलेगी लक्ष्मी-नारायण की कृपा सालभर
4 May, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिन्दू धर्म में साल के 24 एकादशी व्रत होते हैं. हर माह में 2 बार एकादशी व्रत होता है. मान्यता है कि एकादशी तिथि पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है. वहीं, वैशाख मास को माघ और कर्तिक मास की तरह पवित्र माना गया है. ऐसे में वैशाख मास की एकादशी का खास महत्व होता है. कुछ ही दिनों बाद 8 मई को मोहिनी एकादशी आने वाली है. इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा विशेष फलदायक होती है.उज्जैन के आचार्य के अनुसार इस दिन किया गया राशि अनुसार उपाय से सालभर लक्ष्मी-नारायण की कृपा बनी रहेगी.
मेष – मोहिनी एकादशी के दिन इस राशि के जातको को भगवान विष्णु को लाल रंग का फूल अर्पित करें.
वृषभ – मोहिनी एकादशी के दिन इस राशि के जातको को हरि विष्णु भगवान को सफेद चीजों का भोग लगाए. इससे सुख-समृद्धि मिलती है.
मिथुन – मोहिनी एकादशी के दिन इस राशि के जातक को हरे रंग के वस्त्र भगवान विष्णु को अर्पित करें. तो साल भर विष्णु भगवान हर कार्य मे विजय प्रदान करेंगे.
कर्क – मोहिनी एकादशी के दिन इस राशि के जातको को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को खीर का भोग अर्पित करें.
सिंह – मोहिनी एकादशी के दिन इस राशि के जातको को पीले रंग का वस्त्र भगवान विष्णु को अर्पित करें और खुद भी पहनें.
कन्या – मोहिनी एकादशी के दिन इस राशि के जातको को सफेद मिठाई और केसर अर्पित भगवान को करे, इससे आर्थिक तंगी दूर होती है.
तुला – मोहिनी एकादशी के दिन इस राशि के जातको को सफेद चीजों का दान करें, इससे वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है.
वृश्चिक – मोहिनी एकादशी के दिन इस राशि के जातको को गुड़ का दान करना चाहिए, इससे नौकरी-व्यापार में तरक्की मिलती है.
धनु – मोहिनी एकादशी के दिन इस राशि के जातको को पीले वस्त्र और पीले चंदन का भगवान को भोग लगाना चाहिए. साथ ही पीले फल का भी दान करें.
मकर – मोहिनी एकादशी के दिन इस राशि के जातको को हरि विष्णु भगवान को दही और इलायची का भोग अर्पित करें.
कुंभ – मोहिनी एकादशी के दिन इस राशि के जातकों को पीपल के पेड़ के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाएं. तो साल भर लक्ष्मी नारायण की कृपा बनी रहेगी.
मीन – मोहिनी एकादशी के दिन इस राशि के जातको को गरीबों की सेवा करें और मिश्री का भोग लगाएं.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
4 May, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- लेनदेन के मामले में हानि होगी, स्त्री शरीर कष्ट, मानसिक बेचैनी रहेगी, ध्यान दें।
वृष राशि :- कुछ खिन्नता, नवीन योजना फलप्रद हो, स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास अवश्य बने।
मिथुन राशि :- कार्यकुशलता से सुख, वृद्धि के साधन अवश्य बनेंगे, इष्ट मित्र वर्ग से सुख।
कर्क राशि :- सोचे हुए कार्य बनेंगे, योजनाएँ फलीभूत होंगी, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे।
सिंह राशि :- आशानुकूल सफलता के साधन प्राप्त होंगे, कुछ चिन्ताऐं कम हों, अर्थ-व्यवस्था अनुकूल होगी।
कन्या राशि :- व्यवसाय कुशलता से संतोष हो, अर्थ-व्यवस्था अनुकूल हो तथा कुटुम्ब में शांति बने।
तुला राशि :- अन्यास दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप करने से हानि, समय विशेष का ध्यान दें।
वृश्चिक राशि :- प्रभुत्व वृद्धि, कार्य कुशलता से संतोष होगा, धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा।
धनु राशि :- सोचे हुए कार्य होंगे, योजनाऐं फलीभूत होंगी, इष्ट मित्र सुखवर्धक हों, नवीन कार्य हों।
मकर राशि :- भाग्य का सितारा साथ देगा, बिगड़े कार्य अवश्य बनेंगे, कार्य में ध्यान दें।
कुंभ राशि :- दैनिक कार्यगति में सुधार तथा अधिकारी वर्ग समर्थन करे, इष्ट मित्र सहयोग करेंगे।
मीन राशि :- किसी पर विश्वास करने से धोखा, चिन्ता, व्यग्रता, धन का लाभ व व्यय होगा।
मई में 12 सर्वार्थ सिद्धि योग, 13 रवि योग, 11 दिन भद्रा, करना है नया काम, तो देख लें महीने भर के शुभ मुहूर्त
3 May, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंग्रेजी कैलेंडर का 5वां माह मई चल रहा है. आज मई का दूसरा दिन यानि 2 मई है. यदि आपको मई में कोई शुभ कार्य करना है या नए काम की शुरूआत करना चाहते हैं तो आप जान लें कि मई में 12 दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, 13 दिन रवि योग, 2 दिन द्विपुष्कर और 1 दिन त्रिपुष्कर योग बन रहे हैं. सर्वार्थ सिद्धि योग किसी भी काम को करने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है, वहीं द्विपुष्कर और त्रिपुष्कर योग, कार्य के फल को दो गुना और तीन गुना करने में मदद करता है. हालांकि मई में 11 दिन भद्रा भी है. यदि पाताल या स्वर्ग की भद्रा है तो इसमें कार्य करने की मनाही नहीं है, धरती की भद्रा में शुभ कार्य वर्जित हैं. दृक पंचांग से जानते हैं मई 2025 के शुभ मुहूर्त.
मई 2025 के शुभ मुहूर्त, योग और भद्रा काल
2 मई 2025, शुक्रवार के शुभ मुहूर्त और योग
सर्वार्थ सिद्धि योग: 01:04 पी एम से 05:39 ए एम, मई 03
रवि योग 01:04 पी एम से 05:39 ए एम, मई 03
अभिजीत मुहूर्त: 11:52 ए एम से 12:45 पी एम
भद्रा: 07:18 ए एम से 07:21 पी एम, धरती पर
3 मई 2025, शनिवार के शुभ मुहूर्त और योग
त्रिपुष्कर योग: 07:51 ए एम से 12:34 पी एम
रवि योग: 05:39 ए एम से 12:34 पी एम
अभिजीत मुहूर्त: 11:52 ए एम से 12:45 पी एम
4 मई 2025, रविवार के शुभ मुहूर्त और योग
रवि पुष्य योग: 05:38 ए एम से 12:53 पी एम
सर्वार्थ सिद्धि योग: 05:38 ए एम से 12:53 पी एम
अभिजीत मुहूर्त: 11:51 ए एम से 12:45 पी एम
भद्रा: 07:18 ए एम से 07:21 पी एम, धरती पर
5 मई 2025, सोमवार के शुभ मुहूर्त और योग
वृद्धि योग: सुबह से 12:20 ए एम, मई 06 तक
रवि योग: 02:01 पी एम से 05:36 ए एम, मई 06
अभिजीत मुहूर्त: 11:51 ए एम से 12:45 पी एम
6 मई 2025, मंगलवार के शुभ मुहूर्त और योग
रवि योग: पूरे दिन
अभिजीत मुहूर्त: 11:51 ए एम से 12:45 पी एम
7 मई 2025, बुधवार के शुभ मुहूर्त और योग
रवि योग: 05:36 ए एम से 06:17 पी एम
अभिजीत मुहूर्त: कोई नहीं
भद्रा: 11:21 पी एम से 05:35 ए एम, मई 08, धरती पर – 11:21 पी एम से 12:57 ए एम, मई 08 तक
8 मई 2025, गुरुवार के शुभ मुहूर्त और योग
अभिजीत मुहूर्त: 11:51 ए एम से 12:45 पी एम
भद्रा: 05:35 ए एम से 12:29 पी एम, पाताल में वास
9 मई 2025, शुक्रवार के शुभ मुहूर्त और योग
रवि योग: 12:09 ए एम, मई 10 से 05:33 ए एम, मई 10
अभिजीत मुहूर्त: 11:51 ए एम से 12:45 पी एम
10 मई 2025, शनिवार के शुभ मुहूर्त और योग
सिद्धि योग: सुबह से 04:01 ए एम, मई 11 तक
रवि योग: 05:33 ए एम से 03:15 ए एम, मई 11
सर्वार्थ सिद्धि योग: 03:15 ए एम, मई 11 से 05:33 ए एम, मई 11
अभिजीत मुहूर्त: 11:51 ए एम से 12:45 पी एम
11 मई 2025, रविवार के शुभ मुहूर्त और योग
रवि योग: 01:27 पी एम से 05:32 ए एम, मई 12
अभिजीत मुहूर्त: 11:51 ए एम से 12:45 पी एम
भद्रा: 08:01 पी एम से 05:32 ए एम, मई 12, पाताल में वास
12 मई 2025, सोमवार के शुभ मुहूर्त और योग
रवि योग 05:32 ए एम से 06:17 ए एम
अभिजीत मुहूर्त: 11:51 ए एम से 12:45 पी एम
भद्रा: 05:32 ए एम से 09:14 ए एम, पाताल में वास
13 मई 2025, मंगलवार के शुभ मुहूर्त और योग
अभिजीत मुहूर्त: 11:51 ए एम से 12:45 पी एम
14 मई 2025, बुधवार के शुभ मुहूर्त और योग
परिघ योग: 06:34 ए एम तक, उसके बाद शिव योग
सर्वार्थ सिद्धि योग: 05:31 ए एम से 11:47 ए एम
अमृत सिद्धि योग: 05:31 ए एम से 11:47 ए एम
अभिजीत मुहूर्त: कोई नहीं
15 मई 2025, गुरुवार के शुभ मुहूर्त और योग
शिव योग: 07:02 ए एम तक, उसके बाद सिद्ध
अभिजीत मुहूर्त: 11:50 ए एम से 12:45 पी एम
भद्रा: 03:18 पी एम से 04:02 ए एम, मई 16, पाताल की
16 मई 2025, शुक्रवार के शुभ मुहूर्त और योग
सिद्ध योग: 07:15 ए एम तक, उसके बाद साध्य योग
अभिजीत मुहूर्त: 11:50 ए एम से 12:45 पी एम
17 मई 2025, शनिवार के शुभ मुहूर्त और योग
साध्य योग: 07:09 ए एम तक, फिर शुभ योग
अभिजीत मुहूर्त: 11:50 ए एम से 12:45 पी एम
18 मई 2025, रविवार के शुभ मुहूर्त और योग
शुभ योग: 06:43 ए एम तक, फिर शुक्ल
सर्वार्थ सिद्धि योग: 05:29 ए एम से 06:52 पी एम
रवि योग: 06:52 पी एम से 05:28 ए एम, मई 19
अभिजीत मुहूर्त: 11:50 ए एम से 12:45 पी एम
19 मई 2025, सोमवार के शुभ मुहूर्त और योग
शुक्ल योग: 05:53 ए एम तक, फिर ब्रह्म – 04:36 ए एम, मई 20 तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: 05:28 ए एम से 07:29 पी एम
रवि योग: 05:28 ए एम से 07:29 पी एम
भद्रा: 06:11 ए एम से 06:05 पी एम, पाताल की
20 मई 2025, मंगलवार के शुभ मुहूर्त और योग
इंद्र योग: 02:50 ए एम, मई 21 तक
द्विपुष्कर योग: 05:28 ए एम से 05:51 ए एम
21 मई 2025, बुधवार के शुभ मुहूर्त और योग
अभिजीत मुहूर्त: कोई नहीं
22 मई 2025, गुरुवार के शुभ मुहूर्त और योग
अभिजीत मुहूर्त: 11:51 ए एम से 12:45 पी एम
भद्रा: 02:21 पी एम से 01:12 ए एम, मई 23, धरती की
23 मई 2025, शुक्रवार के शुभ मुहूर्त और योग
प्रीति योग: 06:37 पी एम तक, उसके बाद आयुष्मान्
सर्वार्थ सिद्धि योग: 04:02 पी एम से 05:26 ए एम, मई 24
अमृत सिद्धि योग: 04:02 पी एम से 05:26 ए एम, मई 24
अभिजीत मुहूर्त: 11:51 ए एम से 12:45 पी एम
24 मई 2025, शनिवार के शुभ मुहूर्त और योग
आयुष्मान् योग: 03:01 पी एम तक, फिर सौभाग्य
अभिजीत मुहूर्त: 11:51 ए एम से 12:46 पी एम
25 मई 2025, रविवार के शुभ मुहूर्त और योग
सौभाग्य योग: 11:07 ए एम तक, फिर शोभन
सर्वार्थ सिद्धि योग: 05:26 ए एम से 11:12 ए एम
अभिजीत मुहूर्त: 11:51 ए एम से 12:46 पी एम
भद्रा: 03:51 पी एम से 02:01 ए एम, मई 26, स्वर्ग की
26 मई 2025, सोमवार के शुभ मुहूर्त और योग
शोभन योग: 07:02 ए एम तक
अभिजीत मुहूर्त: 11:51 ए एम से 12:46 पी एम
नहीं जलता अंतिम संस्कार के बाद शरीर का ये हिस्सा, जानें इसका रहस्य? क्या करते हैं उन अंगों का?
3 May, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मृत्यु के बाद क्या होता है, ये सवाल हर किसी के मन में कभी न कभी जरूर आता है. जब किसी की मृत्यु होती है, तो हिंदू धर्म में दाह संस्कार की परंपरा निभाई जाती है. माना जाता है कि यह प्रक्रिया आत्मा की अगली यात्रा की शुरुआत होती है. चिता की आग में शरीर जलकर राख हो जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरीर का एक हिस्सा ऐसा भी होता है जो आग में भी नहीं जलता? यह एक ऐसा रहस्य है जो बहुत कम लोगों को मालूम है.
अक्सर यह समझा जाता है कि आग सब कुछ जला सकती है. लेकिन इंसानी शरीर की बात करें तो यह पूरी तरह सही नहीं है. दाह संस्कार के दौरान शरीर के कुछ हिस्से ऐसे होते हैं जो चिता की तेज आग में भी नहीं जलते. यह बात सुनकर थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन यह पूरी तरह सच है.
कौन सा हिस्सा नहीं जलता है?
मानव शरीर के हड्डी और दांत ऐसे अंग हैं जो दाह संस्कार के बाद भी पूरी तरह नहीं जलते. खासतौर पर रीढ़ की हड्डी के सबसे निचले सिरे पर मौजूद एक हिस्सा जिसे ‘अस्थि’ या ‘नाल’ कहा जाता है वह आग में नहीं जलता. इसके साथ साथ दांतों का ऊपरी कवर, जिसे इनेमल कहा जाता है, वह भी काफी मजबूत होता है और आम तापमान में नहीं जलता. चिता की आग में सबसे पहले शरीर का मांस जलता है, फिर धीरे धीरे हड्डियां. लेकिन हड्डियों को पूरी तरह जलने में बहुत अधिक तापमान लगता है, जो सामान्य चिता में नहीं मिल पाता.
इसका क्या होता है बाद में?
यही कारण है कि दाह संस्कार के बाद जो राख बचती है, उसमें हड्डियों के छोटे छोटे टुकड़े मिलते हैं. यही टुकड़े मृतक के परिजन गंगा नदी में प्रवाहित करते हैं. इसे ‘अस्थि विसर्जन’ कहा जाता है. यह एक धार्मिक प्रक्रिया है जिसका पालन हर हिंदू परिवार करता है.
धातु और अन्य चीजें भी नहीं जलतीं
अगर मृतक ने शरीर पर कोई धातु की चीज पहनी हो जैसे अंगूठी, चेन या ब्रेसलेट, तो वे भी दाह संस्कार के बाद बची रहती हैं. इन्हें बाद में राख से अलग किया जाता है. कई बार शरीर में लगी कोई मशीन या कृत्रिम अंग (जैसे हिप रिप्लेसमेंट या पेसमेकर) भी आग में नहीं जलते. इन चीजों को पहचानने और निकालने के लिए चुंबक या अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है.
आखिर क्यों होता है ऐसा?
हड्डियों और धातु की संरचना बहुत मजबूत होती है. इन्हें जलाने के लिए बहुत अधिक गर्मी की जरूरत होती है, जो सामान्य चिता में नहीं मिलती. यही वजह है कि शरीर के बाकी हिस्से भले ही जल जाएं, लेकिन ये चीजें सुरक्षित बची रहती हैं.
कान छिदवाने को कहते हैं कर्ण वेध संस्कार, 16 संस्कारों में है खास, फायदे जान रह जाएंगे हैरान!
3 May, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आजकल फैशन और दिखावे के चलते लोग कान छिदवा लेते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को यह पता होता है कि शास्त्रों के अनुसार कान छिदवाने का क्या महत्व है और इसका सही तरीका क्या है. सनातन धर्म में कान छिदवाना एक संस्कार है, जिसे ‘कर्ण वेध संस्कार’ कहा जाता है. ये 16 संस्कारों में से एक है. ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्री अंशुल त्रिपाठी से जानते हैं कान किन लोगों को छिदवाना चाहिए और इसके क्या लाभ हैं. लाल किताब के अनुसार, केतु को कान और बृहस्पति को सोना माना गया है. इसलिए जब कान छिदवाकर उसमें सोना डाला जाता है, तो बृहस्पति और केतु का मेल होता है. कान छिदवाने के कई लाभ होते हैं.
किन लोगों को यह उपाय करना चाहिए?
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में केतु मंद स्थिति में है, तो कान छिदवाना लाभदायक होता है. क्योंकि यह उपाय बृहस्पति के सहयोग से केतु को मज़बूती प्रदान करता है. अगर आपके जीवन में निम्न समस्याएं बार-बार आ रही हैं तो समझ लीजिए केतु कमजोर है.
रीढ़ की हड्डी या कमर में दर्द
घुटनों या पैरों में तकलीफ
यात्रा करने पर उद्देश्य की पूर्ति न होना
यौन शक्ति मौजूद हो लेकिन स्पर्म काउंट कम होना
पुरानी बीमारियां जैसे ब्लड प्रेशर, शुगर, थायरॉइड
यूरिन, किडनी या संतान से संबंधित समस्याएं
ऐसी स्थिति में आप कान छिदवाने का उपाय कर सकते हैं.
अब बात करते हैं कान छिदवाने के सही तरीकों की जो लाल किताब में बताए गए हैं.
सुनार से कराएं – सुनार भी बृहस्पति से संबंधित माना जाता है.
सोने की ठोस तार का प्रयोग करें – जब आप कान छिदवाते हैं, तो उसमें सोने की ठोस तार डालनी चाहिए.
बहुत से लोग बालियां पहन लेते हैं जिनमें पाइप या खोखली धातु होती है – ये बुद्ध ग्रह से संबंधित मानी जाती हैं. अब अगर आपने बुद्ध, बृहस्पति और केतु – इन तीनों का मेल कान में बना दिया, तो उपाय का मूल उद्देश्य नष्ट हो जाएगा. क्योंकि यहां उद्देश्य केवल केतु को बृहस्पति की मदद देना है, न कि किसी और ग्रह को सक्रिय करना.
कुछ लोग कान में चांदी पहन लेते हैं जो कि बहुत बड़ी गलती होती है. चांदी चंद्र ग्रह से संबंधित होती है, जबकि कान केतु से जुड़े होते हैं. अब अगर आपने चंद्र और केतु को साथ कर दिया, तो ये नकारात्मक प्रभाव डालता है. लाल किताब में चंद्र को दूध और केतु को खटाई कहा गया है – इनका मिलन अशुभ माना गया है.
ऐसी स्थिति में हो सकते हैं ये नकारात्मक प्रभाव
धन की हानि, ब्याज बढ़ना, संतान से कष्ट, जोड़ों, टांगों या रीढ़ की समस्याएं, माता की सेहत पर बुरा प्रभाव.
आर्टिफिशियल ज्वेलरी न पहनें – अगर राहु, बृहस्पति और केतु तीनों एक साथ सक्रिय हो जाएं, तो उपाय का लाभ नहीं मिलेगा बल्कि नुकसान भी हो सकता है.
किस कान में छिदवाना चाहिए?
लाल किताब के अनुसार, यह उपाय बाएं कान यानी लेफ्ट ईयर में किया जाता है. हालांकि चाहें तो दोनों कान भी छिदवा सकते हैं. इन उपायों का पालन कर आप केतु की कमजोर स्थिति को सुधार सकते हैं और जीवन में कई समस्याओं से मुक्ति पा सकते हैं. संक्रमण से बचाने के लिए हल्दी और नारियल के तेल का मिश्रण कान के छेद पर लगाया जाता है, जब तक कि वह पूरी तरह से ठीक न हो जाए.
जहरीले सांप और बिच्छू से भी ज्यादा खतरनाक होते हैं ऐसे 5 लोग, तुरंत बना लें दूरी, नहीं तो होगा नुकसान
3 May, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आचार्य चाणक्य भारत के पहले बड़े अर्थशास्त्री और नीति शास्त्र के ज्ञाता थे. उन्हीं की कूटनीति और समझदारी से मौर्य वंश मजबूत और सफल बना. एक मामूली लड़के चंद्रगुप्त मौर्य को उन्होंने अपनी सफल नीतियों के दम पर मगध का राजा बना दिया. आचार्य चाणक्य सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्हें समाज के हर पहलू की गहरी और बारीकि से समझ थी. उन्होंने अपनी नीति शास्त्र में राजनीति, अर्थशास्त्र, और कूटनीति के साथ-साथ जिंदगी के तमाम व्यावहारिक पहलुओं पर भी लिखा है. आज के दौर में भी उनकी बातें और नीतियां काफी काम की साबित होती हैं.
आचार्य चाणक्य के अनुसार कुछ लोग दुश्मन, जहरीले सांप और बिच्छू से भी ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं. ऐसे लोगों को पहचान कर उनसे दूरी बनाकर रखना ही समझदारी है. आइए जानते हैं वो कौन लोग हैं जिनसे तुरंत दूरी बना लेनी चाहिए.
चालाक और लालची लोग
चाणक्य नीति कहती है कि इंसान को हमेशा जलन रखने वाले और स्वार्थी लोगों से दूर रहना चाहिए. मुश्किल समय में भी इनसे मदद नहीं मांगनी चाहिए, क्योंकि ये लोग लालच और ईर्ष्या के चक्कर में आपका नुकसान कर सकते हैं. ऐसे लोग आपकी सफलता से जलते हैं और आपको गिराने की कोशिश करते हैं.
घमंडी और मतलबी लोग
चाणक्य के अनुसार, घमंडी और स्वार्थी लोगों पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए. ऐसे लोग सामने से हमला नहीं करते, बल्कि पीठ पीछे वार करते हैं. ये आपकी दोस्ती का हमेशा इस्तेमाल करते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर धोखा देने से भी पीछे नहीं हटते. इनका मकसद सिर्फ अपना फायदा होता है, दूसरों की भावनाओं की इन्हें कोई परवाह नहीं होती.
हद से ज्यादा मजाक करने वाले लोग
जो लोग जरुरत से ज्यादा मजाक करते हैं, ऐसे लोगों से भी दूर रहना चाहिए, क्योंकि ये अपने नंबर बनाने के लिए दूसरों के सामने कभी भी आपको नीचे गिरा सकते हैं और किसी के सामने भी आपका अपमान कर सकते हैं. ऐसे लोग मदद भलें ही न करें लेकिन आपकी मजबूरी का खूब मजाक बनाते हैं. इसलिए इनसे दूरी बना लेनी चाहिए.
गुस्सैल और चिड़चिड़े लोग
चाणक्य ने गुस्से को इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन बताया है. उन्होंने कहा है कि गुस्सैल लोगों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि गुस्से में इंसान सही और गलत का फर्क भूल जाता है. ऐसे लोग अपने साथ-साथ दूसरों का भी नुकसान कर बैठते हैं.
नशे की लत वाले लोग
जिन लोगों को नशे की लत होती है, उन्हें न खुद की फिक्र होती है और न दूसरों की चिंता होती है. ऐसे लोग अपने नशे की लत को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, इसलिए ऐसे लोगों से हमेशा दूर रहना चाहिए. ऐसे लोगों से अपनी कोई सीक्रेट बात भी शेयर नहीं करनी चाहिए क्योंकि इनका भरोसा नहीं किया जा सकता है. कब ये उस बात का फायदा उठा लें या किसी से शेयर कर दें.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
3 May, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- उद्विघ्नता से बचिए, मानसिक बेचैनी, प्रत्येक काम में विलम्ब होगा।
वृष राशि :- आकस्मिक भ्रम, शारीरिक क्षमता में कमी, ध्यान दें।
मिथुन राशि :- योजनाएं फलीभूत हों, आकस्मिक चिंताऐं बनी रहेंगी, ध्यान दें।
कर्क राशि :- सोचे हुए कार्य बनेंगे, योजनाएँ फलीभूत होंगी, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे।
सिंह राशि :- आशानुकूल सफलता से हर्ष होगा, व्यवस्था तथा कुटुम्ब से निकटता।
कन्या राशि :- व्यवस्था, कुशलता से संतोष, अर्थ व्यवस्था अनुकूलता तथा कुटुम्ब सुख।
तुला राशि :- अनायास दूसरों के काम में हस्तक्षेप करने से हानि होगी, कष्टकारी समय, ध्यान दें।
वृश्चिक राशि :- समृद्धिवर्धक योग बनेंगे, अधिकारी वर्ग समर्थन करेगा, कार्य फलप्रद बनेंगे।
धनु राशि :- समय की अनुकूलता से आप लाभांवित हों, शुभ समाचार प्राप्त हों, कार्य बनेंगे।
मकर राशि :- स्त्री शरीर कष्ट, कुटुम्ब में सुख वर्धक योजनापूर्ण होंगी, ध्यान दें।
कुंभ राशि :- कष्ट, दुर्घटना से बचिये, कुटुम्ब की समस्या से परेशानी होगी।
मीन राशि :- स्थिति में सुधार होगा, कार्य-व्यवस्था में अनुकूलता, अधिकारी वर्ग से तनाव होगा।
भक्तों का इंतजार खत्म, चारधाम यात्रा शुरू, माता गंगोत्री को लगाएं ये भोग ! कष्टों से मिलेगी मुक्ति
2 May, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर बुधवार के दिन प्रातः 10:30 पर अभिजीत मुहूर्त में चार धाम यात्रा के दूसरे धाम गंगोत्री धाम के पट खोल दिए गए. अपनी खूबसूरती और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध गंगोत्री धाम के पट खोलना का लगभग 6 महीने से अधिक इंतजार करते हैं भक्त. चार धाम यात्रा शास्त्रों के मुताबिक क्लाकवाइज डायरेक्शन में पश्चिम से पूर्व की ओर की जाती है. इस यात्रा को यमुनोत्री धाम से शुरू करके गंगोत्री फिर केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ धाम के दर्शन करके समाप्त किया जाता है.
गंगोत्री धाम का महत्व : गंगोत्री धाम मां गंगा का उद्गम स्थल है. मां गंगा की पहली धार गंगोत्री से होकर ही गई है. गंगोत्री के पास गौमुख ग्लेशियर से निकलने वाली गंगा नदी को यहां भागीरथी नाम से भी जानते हैं. माना जाता है कि राजा भगीरथ ने यहां पर मां गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए जटिल तपस्या की थी. महाभारत काल में पांडवों ने अपनी परिजनों की मृत्यु का प्रायश्चित और पाप मुक्ति के लिए गंगोत्री धाम में ही देव यज्ञ का आयोजन किया था.गंगोत्री धाम को उत्तराखंड के चारधामों में प्रमुख माना जाता है.यह ऋषिकेश से लगभग 250किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.18वीं शताब्दी में इसका निर्माण गोरखा जनरल अमर सिंह थापा ने किया था.
गंगोत्री धाम में दर्शनीय स्थल : माता गंगोत्री के धाम में पास में ही गोमुख का ग्लेशियर है. यहां से ही गंगा नदी का जल पृथ्वी पर आता है, यह बहुत ही सुंदर और पवित्र स्थान है. इसके अलावा गंगोत्री में विश्वनाथ मंदिर भैरवनाथ मंदिर के दर्शन किए जा सकते हैं. गंगोत्री मंदिर के अलावा यहां गंगनानी नामक गर्म झरना है. जो अपने आप में एक बड़ा धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है.
मां गंगोत्री का भोग : यदि आप चार धाम यात्रा में गंगोत्री धाम जा रहे हैं तो आपको मां गंगा के लिए विशेष भोग का ध्यान रखना चाहिए. इस यात्रा के दौरान आप मां को उनके प्रिय तिल के लड्डू, बर्फी के अलावा गुड का भोग लगा सकते हैं. ऐसा करने से आपको आर्थिक तंगी से छुटकारा मिलेगा जीवन में सुख शांति और समृद्धि बनी रहेगी. मां गंगा के स्नान और दर्शन मात्र से व्यक्ति की सभी प्रकार के पाप कट जाते हैं.
खत्म होंगी विवाह संबंधी अड़चनें, प्रदोष के दिन कर लें शिव पुराण के इस खास स्त्रोत का जाप!
2 May, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैशाख का महीना धार्मिक अनुष्ठान व्रत आदि करने के लिए बेहद ही खास और विशेष फल देने वाला होता है. इस मास में कोई भी धार्मिक अनुष्ठान शास्त्रों में बताई गई विधि के अनुसार किया जाता है तो व्यक्ति को उसका संपूर्ण से अधिक अक्षय फल मिलता है. वैशाख मास जहां भगवान विष्णु को समर्पित बताया गया है तो वहीं भगवान शिव की आराधना के लिए भी खास है.
मान्यता है कि इस महीने में शिव के स्तोत्र आदि का पाठ खास दिन करने पर जीवन मरण के बंधन कट जाते हैं और भगवान शिव सभी मनोरथ पूर्ण कर देते हैं. वैशाख शुक्ल पक्ष के प्रदोष व्रत के दिन अगर शिव महापुराण में वर्णित एक खास स्तोत्र का पाठ विधि अनुसार किया जाए तो साधक को भगवान शिव की विशेष कृपा मिलती है.
विवाह की अड़चनें होती हैं खत्म!
इस बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए हरिद्वार के विद्वान पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं की वैशाख का महीना धार्मिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण होता है. इस मास में प्रदोष व्रत का आगमन दो बार होता है. प्रदोष तिथि भगवान शिव को समर्पित खास दिन है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त रूप से पूजा आराधना करने पर जहां शादी विवाह में आने वाली अड़चनें खत्म हो जाती हैं तो वही शिव महापुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथो में वर्णित भगवान शिव के चमत्कारी स्तोत्र ‘शिव महिम्न’ का पाठ करने से जन्म मरण के सभी बंधन कट जाते हैं. शास्त्रों में शिव महिम्न स्तोत्र का बहुत अधिक महत्व बताया गया है.
कब होगा व्रत
वैशाख शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत 9 मई को होगा. इस दिन शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ सुबह, दोपहर और प्रदोष काल यानी सायंकाल किया जाए तो साधक के जन्म मरण के सभी बंधन कटने के साथ ही मरणोपरांत शिवलोक की प्राप्ति होती है और डर पर विजय मिल जाती है. शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ सांयकाल (प्रदोष काल) यानी सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद करने से विशेष फल मिलता है.
इस दौरान भगवान शिव की पूजा आराधना, भगवान शिव का अभिषेक और इस स्तोत्र का पाठ वैशाख शुक्ल पक्ष प्रदोष व्रत 9 मई के दिन किया जाए तो साधक के जीवन में सुख समृद्धि, खुशहाली और धन का आगमन हो जाता है. ऐसे भक्तों पर भगवान शिव सदैव अपनी कृपा बनाए रखते हैं.
राम मंदिर में लगाए जा रहे सागवान के अद्भुत दरवाजे....1000 साल होगी उम्र...100 किलो सोने की चढ़ेगी परत
2 May, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में 500 साल के लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार प्रभु राम का मंदिर बनकर तैयार हो गया है, मंदिर के भूतल पर जहां प्रभु राम विराजमान हैं, तो प्रथम तल पर राम दरबार की स्थापना की जानी है, लेकिन प्रथम तल पर राम दरबार की स्थापना के पहले वहां पर दरवाजा लगाया जा रहा है और खास बात यह है, कि यह दरवाजा महाराष्ट्र के सागवान की लकड़ी से बनाया गया है. इस दरवाजे की उम्र करीब 1000 वर्ष होगी और इनमें सोने की परत चढ़ाई गई है.
100 किलो सोने की दरवाजों पर चढ़ेगी परत
आपको बता दें, इस दरवाजे पर पहले तामपत्र लगाया गया है, उसके बाद उस पर सोने का लेप चढ़ाया गया है .मिली जानकारी के अनुसार यह दरवाजा 12 फीट ऊंचा और 8 फीट चौड़ा है. वहीं राम मंदिर में कुल 46 दरवाजे लगेंगे. इनमें से 42 दरवाजों पर कुल 100 किलो सोने की परत चढ़ाई जाएगी. महाराष्ट्र से आई सागवान की लकड़ी से बने दरवाजों की आयु 1000 साल बताई जा रही है.
राम दरबार की होगी स्थापना
आपको बता दें, राम मंदिर में प्रथम तल पर दरवाजा लगने के बाद, यहां राम दरबार की स्थापना की जाएगी. जून के महीने से राम भक्त रामलला के दर्शन के साथ-साथ राम दरबार के भी दर्शन कर सकेंगे. बता दें, कि राम मंदिर को नगर शैली पर बनाया गया है मंदिर के सभी स्तंभ और दीवारों पर देवी देवताओं की प्रतिमा को उकेरा गया है.
दरवाजों पर की गई है बेहतरीन नक्काशी
राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा की मानें, तो मंदिर की दीवारों और दरवाजों पर की गई खूबसूरत नक्काशी देखने के बाद बस आप निहारते रह जाएंगे. इतनी अद्भुत और अलौकिक नक्काशी की जा रही है. मंदिर का निर्माण लगभग पूर्ण होने की तरफ है. मंदिर के परकोटे में मूर्तियों को भी स्थापित कर दिया गया है. अब जल्द ही राम दरबार की स्थापना की जाएगी.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
2 May, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- साधन सम्पन्नता के योग फलप्रद हों, आर्थिक योजना अवश्य सफल हों।
वृष राशि :- अपने किए पर पछताना पड़ेगा, मानसिक बेचैनी, क्लेश तथा अशांति होगी।
मिथुन राशि :- सफलता के साधन प्राप्त हों, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि होगी, समय का ध्यान रखें।
कर्क राशि :- दैनिक कार्यों में सफलता, स्त्री से सुख, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे।
सिंह राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास होगा, ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी, ध्यान दें।
कन्या राशि :- धन प्राप्ति, आशानुकूल सफलता में वृद्धि, बिगड़ी कार्य योजना अवश्य बनेगी।
तुला राशि :- आशानुकूल सफलता का हर्ष, बिगड़े हुए कार्य अवश्य ही बनेंगे, कार्य होंगे।
वृश्चिक राशि :- दैनिक समृद्धि के साधन बनेंगे, अधिकारियों से कार्य योजना का लाभ होगा।
धनु राशि :- योजना पूर्ण होगी, बड़े-बड़े लोगों से मेल-मिलाप होगा, कार्य अवरोध बने।
मकर राशि :- कार्य कुशलता से संतोष, स्थिति में सुधार तथा चिन्ता कम होगी, ध्यान दें।
कुंभ राशि :- आर्थिक योजना पूर्ण होवे, शरीर कष्ट, मानसिक बेचैनी अवश्य होगी।
मीन राशि :- दैनिक कार्यों में बाधा, चिन्ता, उद्विघ्नता, धन का व्यय होगा।
शंखनाद से दूर होती है नकारात्मक उर्जा
1 May, 2025 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में शंख को शुभ और पवित्र माना जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों में शंख बजायी जाती है और इसके ज्योतिष में भी कई लाभ बताए गए हैं। बताया जाता है कि घर या मंदिर में जब शंखनाद किया जाता है, तो नकारात्मक ऊर्जा दूर होती हैं। शंखनाद से ही धार्मिक अनुष्ठानों की शुरूआत की जाती है। इसकी ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शंखनाद से वातावरण शुद्ध होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा और बृहस्पति से शंख का संबंध होता है, जोकि ज्ञान और शांति का कारक होता है। अगर किसी के घर में वास्तु दोष है या फिर नकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, तो शंखनाद से इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। रोजाना सुबह के समय शंखनाद करने घर में मौजूद नकारात्मक शक्तियां खत्म होती हैं और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।
धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक जगत के पालनहार भगवान विष्णु के हाथों में सुशोभित शंख को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। शंख को समृद्धि और सौभाग्य का भी प्रतीक माना जाता है। शंख बजाने से निकलने वाली ध्वनि घर में शुभता लाती है और वास्तु दोष को भी कम करती है। पूजा-पाठ के दौरान शंख बजाने से देवताओं की कृपा प्राप्त होती है और इसको नियमित रूप से बजाने पर स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। क्योंकि शंख श्वसन तंत्र को भी मजबूत बनाता है।
सनातन धर्म में शंख को विशेष स्थान प्राप्त है, ज्योतिष भी शंख को बेहद शुभ और शक्तिशाली माना जाता है। इसकी ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और वातावरण भी शुद्ध होता है। घर पर शंख बजाने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे ग्रह दोष शांत होते हैं।
नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा
धार्मिक दृष्टि से शंख बजाना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। बल्कि यह घर को सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने का भी प्रभावी उपाय है। शंख बजाने से जो ध्वनि से उत्पन्न कंपन वातावरण को शुद्ध करता है और नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है।
विशेष रूप से उन स्थानों पर शंख बजाना वहां पर लाभकारी होता है, जहां तनाव, कलह और नकारात्मकता बनी रहती है। इससे घर में सुख-शांति का वास होता है और मानसिक तनाव भी कम होता है। रोजाना सुबह शंख बजाने से देवताओं की कृपा प्राप्त होती है। इससे जातक के जीवन में शुभता और समृद्धि बनी रहती है।
धन और समृद्धि में होगी वृद्धि
शंख को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। शंख घर में रखने से और बजाने से आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। वहीं अगर आप नियमित रूप से पूजा-पाठ के समय शंखनाद करते हैं, तो इससे घर की आर्थिक स्थिति अच्छी बनी रहती है।
हथेली से जाने विवाह रेखा
1 May, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कई बार व्यक्ति का जीवन संघर्ष में बीत जाता है। लेकिन यह संघर्ष से भरी जिंदगी उस समय थोड़ा आसान लगती है, जब व्यक्ति को अपना मनपसंद जीवनसाथी मिल जाता है और वह आपकी उम्मीदों पर भी खरा उतरता है। खुशहाल वैवाहिक जीवन होने से व्यक्ति को कई मुश्किलें आसान लगने लगती हैं। क्योंकि जीवनसाथी के साथ आपका एक भावनात्मक सहयोग जुड़ा होता है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
बता दें कि हस्तरेखा शास्त्र के मुताबिक हथेली पर विवाह रेखा ऐसी होती हैं, जिनसे यह जाना जा सकता है कि आपका वैवाहिक जीवन कैसा होगा। हथेली पर बनी इस रेखा को देखकर आप यह जान सकते हैं कि प्यार और शादी के मामले में आप कितने लकी हैं।
विवाह और प्रेम रेखा
कनिष्ठा उंगली के नीचे मिलने वाली रेखाओं को प्रेम विवाह या फिर विवाह रेखा कहा जाता है। बता दें कि हाथ की सबसे छोटी उंगली को कनिष्ठा उंगली कहते हैं। यह रेखाएं व्यक्ति के प्रेम संबंधों और वैवाहिक जीवन के बारे में बताती हैं। कई बार हथेली पर एक से ज्यादा प्रेम रेखाएं पाई जाती हैं। अगर कनिष्ठा उंगली के पास एक से ज्यादा प्रेम रेखा या विवाह रेखा हैं, जो यह कई लव अफेयर्स या विवाह जीवन को दर्शाती हैं।
इस रेखा के कारण अधूरी रह जाती है प्रेम कहानी
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, हाथों की रेखाएं आपकी लाइफ के बारे में बहुत कुछ बता सकती है। अगर बुद्ध और मंगल पर्वत पर बहुत सी रेखाएं हैं, तो लव लाइफ में मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। यहां तक की ब्रेकअप की नौबत भी आ सकती है और ऐसी रेखा होने पर व्यक्ति को हमेशा प्रेम संबंधों में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीं जातक की प्रेम कहानी अधूरी रह जाती है।
ऐसे लोग जीते हैं खुशहाल शादीशुदा जीवन
जब विवाह रेखा सूर्य रेखा को छूती है, तो ऐसे लोगों का रिश्ता अमीर परिवार में होता है। वहीं यदि विवाह रेखा दो भागों में बंटी होती है, तो यह तलाक का संकेत देती है। विवाह रेखा सूर्य रेखा को छूने से व्यक्ति का रिश्ता संपन्न और समृद्ध परिवार में होता है।
टूटी-फूटी विवाह रेखा
हस्तरेखा शास्त्र के मुताबिक अगर विवाह रेखा टूटी-फूटी है, तो प्रेम संबंध या विवाह में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। टूटी-फूटी विवाह रेखा होने से जातक के प्रेम संबंध कई बार टूटते हैं। वहीं अगर हथेली पर विवाह रेखा साफ और गहरी होती है, तो जातक को वैवाहिक जीवन का भरपूर आनंद मिलता है।
धार्मिक अनुष्ठानों में पत्नी इस कारण बैठती है बाईं ओर
1 May, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में विवाह के समय पत्नी को पति के वाम अंग यानी बाईं ओर बैठने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक अनुष्ठानों में भी इसी परंपरा का पालन किया जाता है। हालांकि, इसे केवल धार्मिक नियम मानना पर्याप्त नहीं होगा, क्योंकि इसके पीछे गहरी वैज्ञानिक और ज्योतिषीय अवधारणाएं भी छिपी हैं। पत्नी को वामंगी कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है—बाईं ओर स्थित होने वाली। यही नियम पति-पत्नी के शयन के समय भी लागू होता है, जहां पत्नी को पति के बाईं ओर सोने की सलाह दी जाती है।
ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमारे शरीर में दो प्रमुख नाड़ियां होती हैं—सूर्य नाड़ी और चंद्र नाड़ी। सूर्य नाड़ी, जिसे पिंगला नाड़ी भी कहा जाता है, शरीर के दाहिनी ओर स्थित होती है और यह ऊर्जा, उत्साह, और निर्णय लेने की क्षमता को नियंत्रित करती है। वहीं, चंद्र नाड़ी, जिसे ईड़ा नाड़ी कहते हैं, शरीर के बाईं ओर होती है और यह शीतलता, सौम्यता तथा मानसिक शांति प्रदान करती है।
जब पति-पत्नी एक साथ सोते हैं और पत्नी पति के बाईं ओर होती है, तो यह दोनों की ऊर्जा संतुलित करता है। पति की सूर्य नाड़ी उसकी निर्णय क्षमता और आत्मविश्वास को बढ़ाती है, जबकि पत्नी की चंद्र नाड़ी से शीतलता और मानसिक शांति बनी रहती है। इससे रिश्ते में मधुरता आती है और नकारात्मक ऊर्जा कम होती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस स्थिति से पारिवारिक जीवन में सामंजस्य बना रहता है, तनाव कम होता है और आपसी समझ बढ़ती है।
चंद्र नाड़ी की सक्रियता शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानी जाती है। यह मन को शांत रखती है, तनाव को कम करती है, पाचन तंत्र को सुधारती है और हृदय की गति को संतुलित रखती है। यदि पति-पत्नी सोने की सही दिशा का पालन नहीं करते हैं, तो ऊर्जा असंतुलित हो सकती है, जिससे अनावश्यक तनाव और मानसिक अस्थिरता उत्पन्न होने की संभावना रहती है।
इस प्रकार, सनातन धर्म में स्थापित यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है। पति-पत्नी के बीच प्रेम, सामंजस्य और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए वास्तु और ज्योतिष शास्त्र में सुझाई गई यह सोने की स्थिति अत्यंत लाभकारी मानी गई है।
ग्रहों का जीवन के साथ ही व्यवहार पर भी पड़ता है प्रभाव
1 May, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्रहों का व्यक्ति के जीवन के साथ-साथ व्यवहार पर भी सीधा प्रभाव पड़ता है। हमारा व्यवहार हमारे ग्रहों की स्थितियों से संबंध रखता है या हमारे व्यवहार से हमारे ग्रहों की स्थितियां प्रभावित होती हैं। अच्छा या बुरा व्यवहार सीधा हमारे ग्रहों को प्रभावित करता है। ग्रहों के कारण हमारे भाग्य पर भी इसका असर पड़ता है। कभी-कभी हमारे व्यवहार से हमारी किस्मत पूरी बदल सकती है।
वाणी-
वाणी का संबंध हमारे पारिवारिक जीवन और आर्थिक समृद्धि से होता है।
ख़राब वाणी से हमें जीवन में आर्थिक नुक्सान उठाना पड़ता है।
कभी-कभी आकस्मिक दुर्घटनाएं घट जाती हैं।
कभी-कभी कम उम्र में ही बड़ी बीमारी हो जाती है।
वाणी को अच्छा रखने के लिए सूर्य को जल देना लाभकारी होता है।
गायत्री मंत्र के जाप से भी शीघ्र फायदा होता है।
आचरण-कर्म
हमारे आचरण और कर्मों का संबंध हमारे रोजगार से है।
अगर कर्म और आचरण शुद्ध न हों तो रोजगार में समस्या होती है।
व्यक्ति जीवन भर भटकता रहता है।
साथ ही कभी भी स्थिर नहीं हो पाता।
आचरण जैसे-जैसे सुधरने लगता है, वैसे-वैसे रोजगार की समस्या दूर होती जाती है।
आचरण की शुद्धि के लिए प्रातः और सायंकाल ध्यान करें।
इसमें भी शिव जी की उपासना से अद्भुत लाभ होता है।
जिम्मेदारियों की अवहेलना
जिम्मेदारियों से हमारे जीवन की बाधाओं का संबंध होता है।
जो लोग अपनी जिम्मेदारियां ठीक से नहीं उठाते हैं उन्हें जीवन में बड़े संकटों, जैसे मुक़दमे और कर्ज का सामना करना पड़ता है।
व्यक्ति फिर अपनी समस्याओं में ही उलझ कर रह जाता है।
अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में कोताही न करें।
एकादशी का व्रत रखने से यह भाव बेहतर होता है।
साथ ही पौधों में जल देने से भी लाभ होता है।
सहायता न करना-
अगर सक्षम होने के बावजूद आप किसी की सहायता नहीं करते हैं तो आपको जीवन में मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
कभी न कभी आप जीवन में अकेलेपन के शिकार हो सकते हैं।
जितना लोगों की सहायता करेंगे, उतना ही आपको ईश्वर की कृपा का अनुभव होगा।
आप कभी भी मन से कमजोर नहीं होंगे।
दिन भर में कुछ समय ईमानदारी से ईश्वर के लिए जरूर निकालें।
इससे करुणा भाव प्रबल होगा, भाग्य चमक उठेगा।
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