धर्म एवं ज्योतिष
मई में पितरों को प्रसन्न करने का दिन, पितृ पक्ष समान मिलेगा फल, जानें क्या करना है?
14 May, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैदिक पंचांग के अनुसार हिंदू धर्म में अश्विन मास में होने वाले पितृपक्ष का विशेष महत्व बताया गया है. पितृपक्ष के दिनों में नाराज पितरों को मनाने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए अनेक प्रकार के अनुष्ठान, पूजा-पा, हवन, दान आदि किए जाते हैं. अपने पितरों को प्रसन्न करने के लिए पितृपक्ष के दिन बेहद ही खास बताए गए हैं. सालभर में कुछ तिथि ऐसी आती हैं, जिस दिन पितरों के निमित्त कोई भी कार्य करने पर लाभ की प्राप्ति होती है. ज्येष्ठ मास में पितृ कार्येषु अमावस्या के दिन यदि पितरों के निमित्त धार्मिक कार्य किया जाएं, तो साधकों को विशेष लाभ की प्राप्ति होने की मान्यता है.
इस बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए उत्तराखंड के हरिद्वार के ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री लोकल 18 को बताते हैं कि पितरों की शांति के लिए पितृपक्ष बेहद ही खास होते हैं. इन दिनों में नाराज पितरों को मनाने और प्रेत योनि में भटक रहे पितरों को मोक्ष देने के लिए धार्मिक अनुष्ठान करने का महत्व होता है. साल में सभी अमावस्या पर भी पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करने का महत्व है. ऐसे ही ज्येष्ठ मास में पितरों को मोक्ष देने और प्रसन्न करने के लिए खास दिन का आगमन होता है. साल 2025 में 26 मई को ज्येष्ठ मास की चतुर्दशी को पितृ कार्येषु अमावस्या मनाई जाएगी, जो पितरों के लिए बेहद ही खास तिथि है.
पितृ पक्ष के समान ही मिलेगा फल
उन्होंने कहा कि साल 2025 में चतुर्दशी विद्धा अमावस्या है, जिस कारण पितृ कार्येषु अमावस्या यानी 26 मई के दिन पितृ संबंधी कार्य अनुष्ठान, पिंडदान, तर्पण, पितरों को जलांजलि, तिलांजलि, दान आदि देने पर प्रेत योनि में भटक रहे पितरों को शांति मिलेगी और मोक्ष की प्राप्ति भी हो जाएगी. इस दिन पितरों से संबंधित धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ, हवन, यज्ञ, दान आदि करने पर आश्विन मास में होने वाले पितृ पक्ष के समान ही फल की प्राप्ति होने की धार्मिक मान्यता है.
जय जय जय गणपति गणराजू… हर बुधवार करें गणेश चालीसा का पाठ
14 May, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा अर्चना करने से सभी कष्ट व दूख दूर होते हैं. भगवान गणेश को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है क्योंकि भगवान गणेश सभी तरह के विघ्नों को भी दूर करते हैं. गणेश चालीसा का हर रोज पाठ करने से ज्ञान, बल, साहस, बुद्धि, भाग्य में वृद्धि होती है. साथ ही कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति भी मजबूत होती है. आइए गणेश चालीसा का पाठ करते हैं…
श्री गणेश चालीसा
दोहा
जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥
चौपाई
जय जय जय गणपति गणराजू।
मंगल भरण करण शुभः काजू॥
जै गजबदन सदन सुखदाता।
विश्व विनायका बुद्धि विधाता॥
वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना।
तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥
राजत मणि मुक्तन उर माला।
स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।
मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥
सुन्दर पीताम्बर तन साजित।
चरण पादुका मुनि मन राजित॥
धनि शिव सुवन षडानन भ्राता।
गौरी लालन विश्व-विख्याता॥
ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे।
मुषक वाहन सोहत द्वारे॥
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी।
अति शुची पावन मंगलकारी॥
एक समय गिरिराज कुमारी।
पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।
तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा॥
अतिथि जानी के गौरी सुखारी।
बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥
अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा।
मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला।
बिना गर्भ धारण यहि काला॥
गणनायक गुण ज्ञान निधाना।
पूजित प्रथम रूप भगवाना॥
अस कही अन्तर्धान रूप हवै।
पालना पर बालक स्वरूप हवै॥
बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना।
लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना॥
सकल मगन, सुखमंगल गावहिं।
नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥
शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं।
सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥
लखि अति आनन्द मंगल साजा।
देखन भी आये शनि राजा॥20॥
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।
बालक, देखन चाहत नाहीं॥
गिरिजा कछु मन भेद बढायो।
उत्सव मोर, न शनि तुही भायो॥
कहत लगे शनि, मन सकुचाई।
का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥
नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ।
शनि सों बालक देखन कहयऊ॥
पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा।
बालक सिर उड़ि गयो अकाशा॥
गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी।
सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी॥
हाहाकार मच्यौ कैलाशा।
शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा॥
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो।
काटी चक्र सो गज सिर लाये॥
बालक के धड़ ऊपर धारयो।
प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।
प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे॥
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।
पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥
चले षडानन, भरमि भुलाई।
रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई॥
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।
तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥
धनि गणेश कही शिव हिये हरषे।
नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।
शेष सहसमुख सके न गाई॥
मैं मतिहीन मलीन दुखारी।
करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी॥
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।
जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥
अब प्रभु दया दीना पर कीजै।
अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥
दोहा
श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान।
नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान॥
सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।
पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश॥
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
14 May, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- ईष्ट मित्रों से ईष्या रहेगी, सुख का कार्य होगा, व्यवसाय गति उत्तम होवेगी।
वृष राशि :- अचानक शुभ समाचार प्राप्त होगा, धन की प्राप्ति होगी, संवेदनशील होंगे।
मिथुन राशि :- क्रोध से अशांति-तनाव, झगड़े से बचें, अर्थ-व्यवस्था कुछ अनुकूल ही बनेगी।
कर्क राशि :- कार्य-कुशलता से सहयोग, स्त्री से हर्ष तथा भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी।
सिंह राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक हो, कुटुम्ब की समस्याऐं अवश्य ही सुलझ जाएंगी।
कन्या राशि :- व्यर्थ व्यय, असमंजस और अस्थिरता का वातावरण हीन भावना करे।
तुला राशि :- अधिकारियों का समर्थन विफल हो, कार्य-व्यवसाय गति अनुकूल हो।
वृश्चिक राशि :- समय की अनुकूलता से लाभांवित हों, कार्य-कुशलता से अनुकूलता बनेगी।
धनु राशि :- व्यवसाय गति उत्तम, भाग्य साथ देगा, बिगड़े कार्य सुधर जाऐंगे।
मकर राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास, स्वास्थ्य नरम रहे, स्थिति में सुधार होगा।
कुंभ राशि :- स्त्री शरीर सुख, मानसिक बेचैनी से बचिये, कार्यगति अनुकूल अवश्य बने।
मीन राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, बिगड़े कार्य अवश्य ही बने।
अपमान का करारा जवाब कैसे दें? सामने वाली की बोलती हो जाए बंद, जानें आचार्य चाणक्य की खास नीतियां
13 May, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आचार्य चाणक्य एक महान विद्वान थे. उन्हें राजनीति, धर्म, समाज, अर्थशास्त्र की गहरी समझ थी. उन्होंने नीतिशास्त्र की रचना की, उनकी नीतियां आज भी हमारे लिए बेहद उपयोगी हैं. उनकी बातें हमें जीवन में सफलता प्राप्त करने और परेशानियों से बचने का रास्ता दिखाती हैं. आज के इस दौर में भी चाणक्य की नीतियां उतनी ही प्रासंगिक हैं. अक्सर देखा जाता है कि कई लोग अपमान के घूंट पीते रहते हैं और चुप रहते हैं, लेकिन क्या वाकई यह समझदारी है? चाणक्य नीति ने बताया है कि अपमान करने वालों को कैसे जवाब देना चाहिए.
चुप्पी को कमजोरी समझने लगते हैं लोग
आचार्य चाणक्य कहते हैं, अगर कोई व्यक्ति एक बार अपमान सहता है, तो वह समझदार कहलाता है. अगर दो बार सहता है, तो वह महान कहलाता है, लेकिन जो बार-बार अपमान सहता है, वह मूर्ख कहलाता है. आचार्य चाणक्य के अनुसार इंसान के जीवन में सम्मान की कीमत मृत्यु से भी अधिक होती है. कई लोग अपमान सहकर चुप रहते हैं, लेकिन बार-बार अपमान सहना सही नहीं है. अपमान का घूंट जहर से भी ज्यादा कड़वा होता है.अगर कोई व्यक्ति लगातार आपका अपमान कर रहा है, तो उसे उसी समय करारा जवाब देना चाहिए, वरना लोग आपकी चुप्पी को कमजोरी समझने लगते हैं.
अपमान का सबसे बड़ा बदला है सफलता
आचार्य चाणक्य के अनुसार, खुद को इतना सफल बनाओ कि जो लोग आज आपको अपमानित करते हैं, कल आपकी प्रशंसा करने पर मजबूर हो जाएं. इससे उन्हें एक दिन खुद अपनी गलती का एहसास होगा.
मधुर व्यवहार से भी दें जवाब
गुस्से में आकर जवाब देने की बजाय, शांत और मधुर व्यवहार अपनाएं. इससे सामने वाला अपनी गलती खुद महसूस करेगा. अगली बार वह ऐसा करने से पहले जरूर सोचेगा.
अपमान करने वाले स्वयं दुखी होते हैं
जो लोग दूसरों का अपमान करते हैं, वे स्वयं भी जीवन में दुख और असफलता झेलते हैं. ऐसे लोगों से दूरी बनाना ही उचित है.
अपमान को चुनौती समझें
अपमान को दिल से न लगाएं, बल्कि इसे अपनी प्रेरणा बनाएं और खुद को इतना मजबूत बनाएं कि वही लोग आपकी सफलता को सलाम करें.
ध्यान रखें ये जरूरी बातें
1. अपनी ऊर्जा को अपमान का जवाब देने में व्यर्थ न करें, उसे अपने लक्ष्य को पाने में लगाएं.
2. समय सबका हिसाब करता है. धैर्य रखें, सफलता अवश्य मिलेगी.
3. सम्मान सबसे बड़ा धन है, इसे कभी खोने न दें.
4. खुद की कीमत समझें, तभी लोग भी आपकी कद्र करेंगे.
5. हमेशा संयम और विवेक से काम लें, यही चाणक्य नीति का सार है.
महाभारत: वो सुंदरी जिसने बाबा पर डोरे डाले और पोते अर्जुन पर भी, किससे रचाई थी शादी
13 May, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाभारत में एक सुंदरी थी, जो उम्र की सीमा से बंधी नहीं थी. वह सदाबहार जवां, हसीं और बला की खूबसूरत थी. बड़े बड़े ऋषि उसे देखकर डोल जाते थे. उसका दिल जबरदस्त तरीके से अर्जुन पर आया. यही सुंदरी महान धनुर्धर अर्जुन के बाबा के महल में भी उन्हें रिझाने जा पहुंची थी. मजे की बात ये भी है कि इसी सुंदरी ने पांडवों – कौरवों के वंश में एक राजा से शादी भी की थी. एक बेटा भी पैदा किया था.
आप सोच रहे होंगे कि ये सुंदरी कौन थी, जो पीढ़ियां गुजरने के बाद भी ना केवल हसीं और जवां बनी रही बल्कि जिसकी कातिल अदाएं हर दौर में बिजलियां गिराती थीं. जब वह नृत्य करती थी तो लोग मुग्ध होकर देखते रह जाते थे. बड़े बड़े राजा और देवता उसके प्रेम में पागल थे लेकिन उसने सबके प्रेम निवेदन को खारिज कर दिया.
स्वर्ग की सभा में जब अप्सराएं नृत्य करतीं, तो उनमें सबसे अनूठी थी नह. उसके सौंदर्य की तुलना चंद्रमा की शीतलता और सूरज की तेजस्विता से की जाती थी. उसकी चाल, आंखों की मादकता, उसकी मुस्कान से देवता क्या हर कोई मोहित हो जाता था.
जिन पर मोहित हुई, उन्होंने ठुकराया
उसने कभी नहीं सोचा कि महाभारत के जिन दो दिग्गजों पर वह मोहित हो गई है, वो उसको ठुकरा देंगे. एक बार वह गुस्से में पागल होकर अर्जुन को श्राप भी दे डाला. हालांकि फिर इस शाप को उसने हल्का किया. अब क्या आप अंदाज लगा पा रहे हैं कि वो सुंदरी कौन है. कौन थे अर्जुन के वो बाबा, जिनके प्यार में भी वह पागल हो गई थी.
घर में पितरों की एक से अधिक तस्वीर तो नहीं लगी? तुरंत करें ये काम, वरना झेल नहीं पाएंगे नुकसान!
13 May, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वास्तु शास्त्र में कई ऐसी चीजों का उल्लेख है, जो हमारे जीवन में सकारात्मक और नकारात्मक बदलाव ला सकती है. इसी तरह, वास्तु में यह भी बताया गया कि घर में किस जगह कौनसी तस्वीर लगानी चाहिए. देवी-देवताओं की तस्वीर के साथ बहुत से लोग अपने पूर्वजों की तस्वीर भी घर में लगा लेते हैं. लेकिन, ये गलती आप न करें. जानें पूर्वजों की तस्वीर कहां लगाएं?
उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज ने बताया कि वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में पितरों की एक से अधिक तस्वीर भूलकर भी नहीं लगानी चाहिए. मृत पूर्वजों की एक से अधिक तस्वीर लगाने से घर में नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ सकता है और घर में शुभ की जगह अशुभ परिणाम देखने को मिलते हैं. किस दिशा में पूर्वजों की तस्वीर लगाना शुभ होता है और कौन सी जगह अशुभ.
पूर्वजों की तस्वीर लगाने की सही दिशा क्या है?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, पितरों की तस्वीर लगाने के लिए दक्षिण दिशा सबसे सही मानी गई है. दक्षिण दिशा में पितरों की तस्वीर लगाने से उनका मुख उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए. दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है. इस दिशा में यदि पितरों की तस्वीर लगाई जाती है तो घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
यहां भूलकर भी न लगाएं पितरों की फोटो
शास्त्रों के अनुसार, पितरों की तस्वीर भूलकर भी ड्राइंग रूम या बेडरूम में नहीं लगानी चाहिए. ऐसा करने से घर के सदस्यों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ने लगता है, जिसकी वजह से परिवार में कई तरह की बीमारियां पैर पसारने लगती हैं.
बड़े मंगल पर घर लाएं ये 4 चीजें, बजरंगबली की कृपा से बन जाएंगे बिगड़े काम, हर मुराद होगी
13 May, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर साल ज्येष्ठ माह में आने वाले सभी मंगलवारों को खास महत्व है. इन्हें बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है. यह दिन भगवान हनुमान को प्रसन्न करने का खास समय होता है. इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, पूजा करते हैं और जरूरतमंदों को भोजन कराते हैं. मान्यता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से बड़े मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा करता है, उसकी परेशानियां कम होती हैं और जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता खुलता है. बड़े मंगल का त्योहार उत्तर भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन कई शहरों में जगह-जगह भंडारे का आयोजन होता है. मंदिरों में भीड़ उमड़ती है. साल 2025 में बड़ा मंगल और भी खास होने वाला है क्योंकि इस साल कुल 5 बड़े मंगल आएंगे. इस दिन कुछ खास चीजें घर लाने से सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
क्यों होता है बड़े मंगल का पर्व खास?
धार्मिक मान्यता है अनुसार, हनुमान जी की पहली मुलाकात भगवान श्रीराम से ज्येष्ठ माह के मंगलवार को हुई थी. इसलिए यह दिन विशेष माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि इस दिन अगर कुछ खास चीजें घर लाकर पूजा में उपयोग की जाएं, तो हनुमान जी की कृपा से बिगड़े काम भी बन सकते हैं.
आइए जानते हैं कि वे कौन सी चीजें हैं जो बड़े मंगल के दिन घर लाने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकता है.
नारंगी सिंदूर
हनुमान जी को नारंगी रंग बहुत प्रिय है. बड़े मंगल के दिन ताजा नारंगी सिंदूर लाकर उसे हनुमान जी को अर्पित करें. इस सिंदूर को उनके मुकुट या चरणों में लगाएं. ऐसा करने से जीवन में साहस, आत्मबल और ऊर्जा का संचार होता है. जीवन में आ रही सभी बाधाएं दूर होती हैं.
गदा और केसरिया रंग का झंडा
हनुमान जी की पहचान उनकी गदा और केसरिया ध्वज से जुड़ी है. बड़े मंगल के दिन आप एक छोटी गदा या केसरिया झंडा अपने घर में लाएं और उसे छत पर लगाएं. यह प्रतीक होता है विजय और सुरक्षा का. इससे नकारात्मक असर कम होता है और घर का वातावरण शांत रहता है. परिवार में खुशहाली बनी रहती है.
केसर का भी उपयोग करें
केसर को शुभता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. बड़े मंगल के दिन केसर खरीदें और पूजा में केसर का उपयोग करें. ऐसा करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है और काम में तरक्की मिलती है.
इस दिन लाल रंग के कपड़े खरीदें
हनुमान जी को लाल रंग बेहद प्रिय है. इस दिन आप लाल रंग की वस्तुएं या कपड़े खरीदकर घर ला सकते हैं. चाहें तो पूजा में नया लाल वस्त्र चढ़ाएं या खुद पहनें. इससे मनोबल बढ़ता है और कार्यों में सफलता मिलती है. इससे कुंडली में अगर आपका मंगल कमजोर है तो वह मजूबत होता है.
साल 2025 के बड़े मंगल इन तारीख में हैं
1. 13 मई 2025
2. 20 मई 2025
3. 27 मई 2025
4. 3 जून 2025
5. 10 जून 2025
इन सभी दिनों पर विशेष पूजा करना, व्रत रखना और किसी एक वस्तु का दान करना बहुत शुभ माना गया है. अगर आप ऐसा करते हैं तो इससे बजरंगबली की विशेष कृपा आप पर और आपके परिवार पर बरसती है.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
13 May, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- भाग्य का सितारा साथ देगा, बिगड़े कार्य बनेंगे, कार्य योजना अवश्य बनेगी।
वृष राशि :- नवीन कार्य योजना सफल हो, संवेदनशील होने से बचिये, समय पर ध्यान दें।
मिथुन राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष, कुछ चिन्ता, व्यवसायिक अवरोध, कष्ट अवश्य होगा।
कर्क राशि :- व्यग्रता, मन में उद्विघ्नता एवं कार्यगति अनुकूल बनी ही रहेगी।
सिंह राशि :- साधन सम्पन्नता के योग बनेंगे, दैनिक व्यवसाय गति अनुकूल बनी ही रहेगी।
कन्या राशि :- विरोधी परेशान करें, व्यर्थ धन का व्यय, असमंजस व अस्थिति बनी ही रहेगी।
तुला राशि :- कार्य व्यवसाय में बाधा तथा तनाव-क्लेश से आप बचने का प्रयास करें।
वृश्चिक राशि :- चिन्ता बनी ही रहेगी, कुटुम्ब की समस्याओं को समझदारी से सुलझाएं।
धनु राशि :- बिगड़े हुए कार्य बनेंगे, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, सहयोग मिलेगा।
मकर राशि :- परिश्रम विफल हो, चिन्ता व यात्रा, व्यग्रता तथा स्वास्थ्य नरम होगा।
कुंभ राशि :- स्वास्थ्य नरम रहेगा एवं कहीं तनावपूर्ण स्थिति कष्टप्रद होगी। ध्यान दें।
मीन राशि :- दूसरों के कार्यों में समय तथा धन नष्ट न करें, समय स्थिति का ध्यान रखें।
जेठ महीने में तुलसी पौधा सूख जाए तो क्या करें? जान लें ये पूजा विधि, लक्ष्मी प्रसन्न होंकर भर देंगी घर!
12 May, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में तुलसी का बेहद खास महत्व है. तुलसी को साक्षात माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है. मान्यता है कि जो जातक तुलसी की पूजा करते हैं, उनके घर में कभी पैसों की कमी नहीं होती. साथ ही घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है. हालांकि, माह के अनुसार तुलसी पूजा का विधान भी बदलता है. वैशाख माह खत्म होने को है और इसी के बाद ज्येष्ठ माह की शुरुआत होगी. इस महीने में भीषण गर्मी के कारण तुलसी सूख जाती हैं. ऐसे में उनके पूजन का विधान भी बदल जाता है. देवघर के आचार्य ने बताया कि जेठ में तुलसी पूजन से कैसे लक्ष्मी की कृपा पाई जा सकती है.
देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुद्गल ज्योतिष केंद्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने लोकल 18 को बताया कि 12 मई को वैशाख पूर्णिमा है. इसके साथ ही 13 मई से जेठ महीने की शुरुआत होने जा रही है. हिंदू पंचांग के अनुसार, जेठ सबसे बड़ा महीना है. इस महीने में गंगा दशहरा, वट सावित्री व्रत और बड़ा मंगला जैसे प्रमुख व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं. वहीं, जेठ महीने में तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व है. क्योंकि, इस महीने में तुलसी का पेड़ सूख जाता है. उस सूखे पेड़ की जड़ से कुछ खास उपाय कर सकते हैं. इससे माता लक्ष्मी बेहद प्रसन्न होंगी और घर में हमेशा धन की वर्षा करेंगी.
जेठ माह में ऐसे करें पूजा
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि जेठ महीने में हर रोज तुलसी के पौधे में जल अर्पण अवश्य करना चाहिए. उस जल में दूध मिला लें. लाल चुनरी अवश्य अर्पण करें. साथ ही, हर संध्या का दीपक तुलसी पेड़ के नीचे जरूर जलाएं. इससे माता लक्ष्मी बेहद प्रसन्न होती हैं. घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. वहीं, जेठ महीने में अगर तुलसी के पेड़ सूख जाते हैं तो उसकी जड़ को एक पीले कपड़े में बांधकर अपने घर के मुख्य द्वार पर लटका दें. इससे हमेशा घर में लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी.
स्नान के बाद लड्डू गोपाल का जल ऐसे करें उपयोग, प्रेमानंद जी महाराज ने बताए भक्ति से जुड़े उपयोग के नियम
12 May, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान श्रीकृष्ण के बालरूप लड्डू गोपाल की पूजा घर-घर में होती है. भक्तगण उन्हें बच्चे की तरह मानते हैं उन्हें जगाते हैं, नहलाते हैं, वस्त्र पहनाते हैं, भोजन कराते हैं और फिर सुलाते हैं. यह भाव, यह अपनापन, भक्ति का ऐसा स्वरूप है जो भक्त और भगवान के बीच विशेष संबंध बना देता है. लड्डू गोपाल की सेवा करते समय हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है, खासकर उनके स्नान के बाद बचे हुए जल के संबंध में.
स्नान कराने के बाद इस तरह करे जल का उपयोग
प्रेमानंद जी महाराज ने अपने एक सत्संग में इस विषय पर बहुत ही सरल और स्पष्ट मार्गदर्शन दिया है. जब किसी भक्त ने उनसे पूछा कि लड्डू गोपाल को स्नान कराने के बाद उस जल का क्या किया जाए, तो उन्होंने दो विकल्प सुझाए या तो उसे स्वयं पी लिया जाए या फिर तुलसी के पौधे में डाल दिया जाए. यह केवल परंपरा या रिवाज नहीं, बल्कि भाव का विषय है. भगवान के शरीर को स्पर्श करने वाला जल अब केवल पानी नहीं रह जाता, वह एक पवित्र द्रव्य बन जाता है. ऐसे में उसका सम्मानपूर्वक उपयोग करना ही भक्त का धर्म है.
जल को सही स्थान पर डाले
अगर घर में तुलसी का पौधा नहीं है तो यह जल किसी भी ऐसे स्थान पर नहीं डालना चाहिए जहां लोगों के पैर पड़ें. आप चाहें तो इसे एक पात्र में एकत्र कर लें और बाद में किसी पवित्र नदी जैसे गंगा या यमुना में अर्पित करें. अगर नदी तक जाना संभव न हो तो किसी सुरक्षित, शांत स्थान पर भूमि में एक गड्ढा खोदकर उसमें डाल सकते हैं.
प्रेमानंद जी महाराज ने यह भी बताया कि लड्डू गोपाल की सेवा में उपयोग किए जाने वाले फूलों का भी विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए. रोजाना जो फूल अर्पित किए जाते हैं, उन्हें कचरे में फेंकना अनुचित है. इन्हें भी किसी पेड़-पौधे के पास या नदी किनारे भूमि में दबा देना चाहिए. सिर्फ जल या फूल ही नहीं, भगवान के वस्त्र भी सावधानी से धोए जाने चाहिए. इन्हें किसी आम कपड़े की तरह नहीं बल्कि श्रद्धा के साथ साफ कर सुरक्षित रखना चाहिए.
खाटूश्याम जी मंदिर की महिमा, चिट्ठी भेजकर पूरी होती हैं मन्नतें
12 May, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विश्व प्रसिद्ध खाटूश्याम जी मंदिर की महिमा दिनो दिन बढ़ती जा रही है. यहां बाबा श्याम के दरबार में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और हरियाणा सहित देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं. यहां आने वाले लाखों श्रद्धालु बाबा श्याम के दरबार में मन्नतें मांगने आते हैं. इन्होंने हारे का सहारा कहा है. खाटूश्याम जी मंदिर एक अनूठी परंपरा है.
जिसमें भक्त चिट्ठी लिखकर बाबा तक अपनी मनोकामनाएं पहुंच जाते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से बाबा श्याम भक्तों की मन्नत जरूर पूरी करते हैं. खाटूश्याम जी मंदिर में प्रसाद के साथ भक्तों के लिए चिट्ठी रखने के पात्र भी बनाए हुए हैं. जिसमें भक्त चिट्ठी रखकर बाबा श्याम तक अपनी मनोकामनाएं पहुंच सकते हो.
क्या है चिट्ठी भेजने की विधि
बाबा श्याम के भजन गाकर चंद्रप्रकाश ने बताया बाबा श्याम तक छुट्टी पहुंचने से पहले एक विधि का पालन होता है जिसमें पहले भक्त सफेद या पीले कागज पर अपनी मनोकामना साफ-साफ लिखी जाती है. चिट्ठी में केवल मूल इच्छा ही लिखी जाती है. इसके बाद मंदिर जाने से पहले या किसी हाथ से पहुंचाने से पहले रात को इसे घर के मंदिर में रख दे. इसके बाद चिट्ठी को खाटूश्याम मंदिर में जाकर पत्र बॉक्स में डाल दे या पुजारियों को सौंप दे. चिट्ठी देने के बाद भक्त प्रसाद अर्पित करते हैं और आरती में शामिल होते हैं.
क्या होता है चिट्ठी भेजने के बाद
बाबा श्याम के भजन गाकर चंद्रप्रकाश ने बताया कि मान्यता है कि बाबा श्याम हर भक्त की चिट्ठी पढ़ते हैं उनकी मनोकामना पूरी करते हैं. कई भक्तों का दावा है कि उनकी समस्याए चमत्कारिक ढंग से हल हो गई है. कुछ भक्त मन्नत पूरी होने पर मंदिर में छत्र या श्याम निशान भी चढ़ाते हैं. यहीं, कारण है कि खाटूश्याम जी मंदिर में पद यात्रियों की संख्या सबसे अधिक रहती है. ऐसे में अगर आपकी भी कोई समस्या है या इच्छा है जो पूरी नहीं हो रही है तो आप खाटूश्याम जी मंदिर में जा सकते हैं या अपनी चिट्ठी भेज सकते हैं.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
12 May, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- बचैनी, उद्विघ्नता से बचिये, समय पर सोचे कार्य अवश्य ही बन जायेंगे।
वृष राशि :-चिन्ताऐं कम हों, सफलता के साधन जुटायें, अचानक लाभ के योग अवश्य ही बनें।
मिथुन राशि :- सफलता के साधन जुटायें, व्यवसायिक क्षमता मेंं वृद्धि अवश्य ही होगी।
कर्क राशि :- व्यर्थ धन का व्यय, समय व शांति नष्ट होवे, विघटनकारी तत्व परेशान करें।
fिसंह राशि :- भोग-ऐश्वर्य में वृद्धि, स्वास्थ्य नरम रहे, विद्यार्थी जीवन आपके लिये परेशानी का हो।
कन्या राशि :- समय व धन नष्ट हो, क्लेश व अशांति, यात्रा से कष्ट व चिन्ता अवश्य बने।
तुला राशि :- परिश्रम से सफलता के साधन अवश्य जुटायें, कार्य बाधा, कार्य अवश्य हो।
वृश्चिक राशि :- चोटादि से बचिये, भाग्य का सितारा बड़ा ही प्रबल होगा।
धनु राशि :- क्लेश व अशांति से बचिये, मानसिक उद्विघ्नता होगी, समय का ध्यान दें।
मकर राशि :- परिश्रम विफल हो, चिन्ता व यात्रा, व्याग्रता, स्वास्थ्य नरम रहे।
कुंभ राशि :- आकस्मिक घटना से चोटादि का भय होगा, समय का ध्यान रखें।
मीन राशि :- अधिकारियों से कष्ट, इष्ट मित्र सहायक न होवे, समय का साथ होगा।
बुढ़वा मंगल को हनुमान जी के सामने करें ये एक उपाय, कर्ज से मिलेगी मुक्ति, मनोकामना भी होगी पूरी!
11 May, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने में आने वाले सभी मंगलवारों को विशेष महत्व दिया जाता है. इन्हें बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है. इस समय में भगवान हनुमान की खास पूजा की जाती है. मान्यता है कि इन दिनों में भक्त हनुमान जी की वृद्ध अवस्था (बुजुर्ग रूप) की पूजा करते हैं. हनुमान जी को भगवान राम के सबसे बड़े भक्त के रूप में पूजा जाता है. आप कर्ज से परेशान हैं, धन संबंधित कोई परेशानी है या फिर आप कोई ऐसा कार्य करना चाहते हैं जिसमें आपको लंबे समय से सफलता नहीं मिल रही है, तो आप बड़ा मंगल के दिन इस उपाय को कर सकते हैं. ज्योतिषाचार्य अंशुल त्रिपाठी के अनुसार, मंगल और शनि के बुरे प्रभाव भी हनुमान जी की पूजा से शांत हो सकते हैं. बुढ़वा मंगल को की गई पूजा और विशेष उपाय से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
बड़ा मंगल 2025 उपाय
बड़ा मंगलवार के दिन आप राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें. आप घर के किसी नजदीक वाले हनुमान मंदिर में जाएं. वहां पहले भगवान राम और उसके बाद हनुमान की पूजा करें. मंदिर में बैठकर भगवान राम का मन में स्मरण करें और फिर राम रक्षा स्तोत्र का पाठ प्रारंभ करें. राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से काम में आ रही सभी बाधाएं दूर होती है और बिगड़े हुए सभी काम बन जाते हैं. बड़ा मंगल के दिन राम रक्षा स्तोत्र का पाठ सुनना भी लाभयादक होता है.
राम रक्षा स्तोत्र पाठ
विनियोग
अस्य श्रीरामरक्षास्त्रोतमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः।
श्री सीतारामचंद्रो देवता।
अनुष्टुप छंदः। सीता शक्तिः।
श्रीमान हनुमान कीलकम।
श्री सीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्त्रोतजपे विनियोगः।
अथ ध्यानम्
ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपदमासनस्थं,
पीतं वासो वसानं नवकमल दल स्पर्धिनेत्रम् प्रसन्नम।
वामांकारूढ़ सीता मुखकमलमिलल्लोचनम्नी,
रदाभम् नानालंकारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलम् रामचंद्रम॥
राम रक्षा स्तोत्रम्
चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम्।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्॥1॥
ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम्।
जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितं॥2॥
सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तंचरान्तकम्।
स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम्॥3॥
रामरक्षां पठेत प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम्।
शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः॥4॥
कौसल्येयो दृशो पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुति।
घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः॥5॥
जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः।
स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः॥6॥
करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित।
मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः॥7॥
सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः।
उरु रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृताः॥8॥
जानुनी सेतुकृत पातु जंघे दशमुखांतकः।
पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामअखिलं वपुः॥9॥
एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृति पठेत।
स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्॥10॥
पातालभूतल व्योम चारिणश्छद्मचारिणः।
न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः॥11॥
रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन।
नरौ न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति॥12॥
जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्।
यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः॥13॥
वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत।
अव्याहताज्ञाः सर्वत्र लभते जयमंगलम्॥14॥
आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः।
तथा लिखितवान् प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः॥15॥
आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम्।
अभिरामस्त्रिलोकानां रामः श्रीमान स नः प्रभुः॥16॥
तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ।
पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ॥17॥
फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ।
पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ॥18॥
शरण्यौ सर्वसत्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम्।
रक्षःकुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ॥19॥
आत्तसज्जधनुषाविषुस्पृशा वक्ष याशुगनिषङ्गसङ्गिनौ।
रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रतः पथि सदैव गच्छताम॥20॥
सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा।
गच्छन् मनोरथान नश्च रामः पातु सलक्ष्मणः॥21॥
रामो दाशरथी शूरो लक्ष्मणानुचरो बली।
काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णः कौसल्येयो रघूत्तमः॥22॥
वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः पुराणपुरुषोत्तमः।
जानकीवल्लभः श्रीमानप्रमेयपराक्रमः॥23॥
इत्येतानि जपन नित्यं मद्भक्तः श्रद्धयान्वितः।
अश्वमेधाधिकं पुण्यं सम्प्राप्नोति न संशयः॥24॥
रामं दुर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम।
स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नरः॥25॥
रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरं,
काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम।
राजेन्द्रं सत्यसंधं दशरथतनयं श्यामलं शांतमूर्तिं,
वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम॥26॥
रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे।
रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥27॥
श्रीराम राम रघुनन्दनराम राम,
श्रीराम राम भरताग्रज राम राम।
श्रीराम राम रणकर्कश राम राम,
श्रीराम राम शरणं भव राम राम॥28॥
श्रीराम चन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि,
श्रीराम चंद्रचरणौ वचसा गृणामि।
श्रीराम चन्द्रचरणौ शिरसा नमामि,
श्रीराम चन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये॥29॥
माता रामो मत्पिता रामचंन्द्र:।
स्वामी रामो मत्सखा रामचंद्र:।
सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालु।
नान्यं जाने नैव जाने न जाने॥
दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च जनकात्मज।
पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम्॥31॥
लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथं।
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥32॥
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीराम दूतं शरणं प्रपद्ये॥33॥
वैशाख पूर्णिमा पर है विशेष संयोग, इस मंत्र का कर लें जाप, सिद्ध हो जाएंगे सारे अधूरे पड़े काम!
11 May, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महीने की एक तिथि ऐसी होती है जो बेहद शुभ और उत्तम मानी जाती है. वह है पूर्णिमा तिथि. पूर्णिमा की तिथि भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है. वैसे तो हर महीने पूर्णिमा आती है लेकिन वैशाख पूर्णिमा का महत्व विशेष होता है. इस तिथि को बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था.
बुद्ध या वैशाख पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान कर लक्ष्मी नारायण की पूजा करना और सतनारायण की कथा सुनना अत्यंत शुभ माना गया है. ऐसा करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है. इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा के दिन एक अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है जो इस दिन को और भी खास बना देता है.
इस बार कब है वैशाख पूर्णिमा और क्या है विशेष संयोग
देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुद्गल ज्योतिष केंद्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि इस साल वैशाख पूर्णिमा का व्रत 12 मई को रखा जाएगा. इस बार के पूर्णिमा पर भद्रा का साया भी रहेगा. सामान्यतः भद्रा को अशुभ माना जाता है और उसमें पूजा-पाठ वर्जित होता है. लेकिन इस बार का भद्रा पाताल लोक में रहेगा इसलिए यह शुभ माना जा रहा है.
कोई भी नया कार्य शुरू करने का शुभ समय
ज्योतिषाचार्य के अनुसार वैशाख पूर्णिमा के दिन कोई भी नया कार्य शुरू करने के लिए यह सबसे शुभ दिन रहेगा. पूजा-पाठ पर किसी प्रकार की मनाही नहीं होगी.
स्वाती नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि और वरियान योग
इस दिन स्वाती नक्षत्र रहेगा. साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग और वरियान योग भी बन रहा है. इन शुभ योगों के कारण इस दिन का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है.
हरिहर की पूजा से मिल सकता है दोगुना फल
ज्योतिषाचार्य के अनुसार पूर्णिमा का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है लेकिन इस वर्ष यह तिथि सोमवार को पड़ रही है, जो भगवान शिव को समर्पित है. इसलिए इस बार के वैशाख पूर्णिमा पर हरिहर यानी विष्णु और शिव दोनों की पूजा अवश्य करनी चाहिए. इस दिन हरिहर मंत्र का 108 बार जाप करें. इससे दोगुना फल प्राप्त होता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
इस व्रत से कट जाते हैं जाने-अनजाने किए गए पाप! खुश होते हैं विष्णु भगवान, मिलता है पितरों का आशीर्वाद!
11 May, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साल भर में होने वाली सभी एकादशी का अपना-अपना महत्व होता है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल भर में 24 एकादशी आती हैं. सभी एकादशी तिथि विष्णु भगवान को समर्पित होती हैं. इस दिन विष्णु भगवान की आराधना, पूजा पाठ, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, विष्णु भगवान के स्तोत्र आदि का पाठ करने पर चमत्कारी लाभ प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है.
ऐसे ही ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है. ज्येष्ठ मास में अपरा एकादशी का व्रत करने से जाने अनजाने में हुए अनेक पापों से मुक्ति मिल जाती है. साल 2025 में अपरा एकादशी का व्रत 23 मई शुक्रवार को किया जाएगा.
क्या है इस दिन का महत्व
अपरा एकादशी पर किन पापों से मुक्ति मिलती है इसकी ज्यादा जानकारी देते हुए हरिद्वार के विद्वान ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि साल भर में होने वाली 24 एकादशी में अपरा एकादशी का अपना महत्व है. ये एकादशी ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को होती है. हिंदू धर्म में स्थिति का विशेष महत्व होता है धार्मिक ग्रंथो के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत विधि विधान से करने पर जाने अनजाने में हुए कहीं पापों से मुक्ति मिल जाती है.व
मिलती है पापों से मुक्ति
वे आगे बताते हैं कि धार्मिक ग्रंथो के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत करने से जाने अनजाने में हुए गोहत्या का पाप, परस्त्रीगमन का पाप, झूठ बोलने का पाप, निंदा करना, झूठी गवाही देना आदि सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है. अपना एकादशी के दिन पापों से मुक्ति मोक्ष की प्राप्ति और जीवन में चल रही सभी आर्थिक मानसिक समस्याएं खत्म हो जाते हैं.
पितरों का आशीर्वाद मिलता है
वह आगे बताते हैं कि अपरा एकादशी का व्रत करने से जहां इन सभी पापों से मुक्ति मिलती है तो वही पितरों के लिए भी यह एकादशी बेहद ही खास और विशेष फल प्रदान करने वाली होती है. अगर पितृ प्रेत योनि में भटक रहे हों तो पितरों को उनके लोक जाने और मुक्ति दिलाने में अपरा एकादशी के दिन घर के बाहर आंगन में या तुलसी के पास चौहमुखी दीपक जलाने पर पितरों की शांति हो जाती है. यह उपाय अपरा एकादशी के दिन करने से पितृ प्रसन्न होकर अपने लोक चले जाते हैं और वंशजों पर आशीर्वाद बनाए रखते हैं.
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