महाराष्ट्र
राजनीतिक घमासान तेज, राउत ने बागी सांसदों को लेकर दिया विवादित बयान
20 Jun, 2026 02:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र के सियासी समर में शिवसेना के दोनों धड़ों (उद्धव ठाकरे गुट और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट) के मध्य जारी शह और मात का खेल एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। शनिवार, 20 जून को शिवसेना (यूबीटी) के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया पर एक बेहद सांकेतिक और तीखा पोस्ट साझा कर अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को कटघरे में खड़ा किया। राउत ने अपने आधिकारिक हैंडल पर एक तस्वीर पोस्ट की, जिस पर लिखा था कि "कुछ लोग कभी वफादार नहीं होते", और इसके साथ उन्होंने बड़े अक्षरों में "जय महाराष्ट्र!" का उद्घोष भी लिखा। हालांकि इस पोस्ट में किसी नेता या दल का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं था, लेकिन सूबे के राजनैतिक गलियारों में इसे साफ तौर पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके सहयोगी बागियों के खिलाफ एक बड़ा सीधा हमला माना जा रहा है।
स्थापना दिवस पर जुबानी जंग और शेर-कुत्ते वाले बयान पर बवाल
संजय राउत का यह तीखा पलटवार ठीक उस समय सामने आया है, जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक भव्य रैली में उद्धव ठाकरे गुट को आड़े हाथों लिया था। मुख्यमंत्री शिंदे ने चार वर्ष पूर्व तत्कालीन अविभाजित शिवसेना में किए गए अपने ऐतिहासिक विद्रोह का पुरजोर बचाव करते हुए मंच से हुंकार भरी कि प्रदेश की जनता ने हालिया चुनावों में उनके इस फैसले पर अपनी मुहर लगाकर इसे पूरी तरह सही साबित कर दिया है। यूबीटी गुट के शीर्ष नेताओं द्वारा लगातार की जा रही आलोचनाओं पर बेहद कड़ा प्रहार करते हुए सीएम शिंदे ने मर्यादाओं को लांघते हुए यहां तक कह डाला कि "कुत्ते हमेशा झुंड में आकर भौंकते हैं, लेकिन शेर हमेशा अकेला ही आता है।"
यूबीटी गुट में दोबारा सेंधमारी की अटकलें और 6 सांसदों की सदस्यता पर संकट
इस भीषण जुबानी जंग के बीच महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के भीतर एक और बड़ी संभावित टूट की सुगबुगाहट ने सियासी पारे को और गरमा दिया है। दरअसल, शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) चंद्रकांत रघुवंशी ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे खेमे के कम से कम 6 लोकसभा सांसद इस समय मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के निरंतर संपर्क में हैं और उन्होंने शिंदे के नेतृत्व पर अपना पूर्ण विश्वास जताया है। इस दावे पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने स्पष्ट किया कि हाल ही में लोकसभा सत्र के दौरान सदन से नदारद रहने वाले उन 6 सांसदों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में 'कारण बताओ नोटिस' थमा दिया गया है। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि नियमों और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के दिशानिर्देशों के तहत इन सभी बागी सांसदों की लोकसभा सदस्यता को समाप्त करने की विधिक प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।
पद छोड़ने को तैयार उद्धव ठाकरे और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमले का आरोप
इससे पूर्व, शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भारतीय जनता पार्टी और शिंदे गुट पर तीखा हमला बोला था। ठाकरे ने बेहद भावुक और आक्रामक अंदाज में कहा कि यदि उनके ऊपर विरोधियों द्वारा लगाए गए गद्दारी या अन्य कोई भी आरोप निष्पक्षता से सही साबित हो जाते हैं, तो वह राजनीति और अपने पद से तत्काल त्यागपत्र देने को तैयार हैं, लेकिन वह बाल ठाकरे द्वारा खड़ी की गई मूल शिवसेना को किसी भी कीमत पर 'चोरों और लुटेरों' के हाथों में नहीं सौंपेंगे। केंद्र सरकार और राज्य की वर्तमान महायुति सरकार को घेरते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों के दम पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को पूरी तरह पंगु बनाने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। दोनों गुटों के इन तल्ख तेवरों से यह साफ है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की यह सियासी जंग और ज्यादा आक्रामक रूप अख्तियार करने वाली है।
महाराष्ट्र के रत्नागिरी में दर्दनाक हादसा, 5 पर्यटकों के डूबने से मचा हड़कंप
20 Jun, 2026 01:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रत्नागिरी। महाराष्ट्र के तटीय कोंकण अंचल में स्थित रत्नागिरी जनपद से आज सुबह एक बेहद दुखद और बड़ा हादसा सामने आया है, जहां समुद्र की लहरों में पांच सैलानियों के डूबने की खबर है। बताया जा रहा है कि गणपतिपुले तट पर सैर-सपाटे के लिए २१ सदस्यों का एक दल आया हुआ था। इसी समूह में से छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के रहने वाले पांच पर्यटक आज सुबह करीब ११ बजे समंदर की तेज लहरों की चपेट में आ गए। शुरुआती जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, समुद्र की गहराई और उसकी उफनती लहरों की तीव्रता का सही-सही अनुमान न मिल पाने की वजह से यह भयानक दुर्घटना घटित हुई।
किनारे पर मौजूद स्थानीय लोगों ने तीन जिंदगियों को सुरक्षित बाहर निकाला
जिस समय यह दर्दनाक वाकया पेश आया, उस वक्त गणपतिपुले बीच पर भारी संख्या में अन्य लोग भी मौजूद थे। सैलानियों को लहरों के बीच जिंदगी और मौत से जूझता देख किनारे पर खड़े स्थानीय निवासी और नाविक तुरंत सहायता के लिए पानी में कूद पड़े। स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बेहद सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई करते हुए डूब रहे कुल आठ व्यक्तियों में से तीन को सकुशल पानी से बाहर खींच लिया। हालांकि, कड़े प्रयासों के बाद भी बाकी के पांच पर्यटकों का कोई सुराग नहीं मिल सका और वे गहरे पानी में बह गए।
प्रशासनिक अमला मौके पर मुस्तैद और युद्धस्तर पर खोज अभियान जारी
हादसे की भयावहता को देखते हुए वहां उपस्थित लोगों ने फौरन क्षेत्रीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को मामले की जानकारी दी। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस बल और विशेषज्ञ गोताखोरों का बचाव दल बिना वक्त गंवाए घटना स्थल पर पहुंच गया। समंदर की अगाध गहराइयों में लापता हुए पांचों सैलानियों को ढूंढने के लिए प्रशासन द्वारा युद्धस्तर पर संयुक्त खोजी अभियान (सर्च ऑपरेशन) चलाया जा रहा है। अत्याधुनिक नावों और लाइफ जैकेट्स की मदद से बचावकर्मी लगातार तटीय इलाकों और गहरे पानी में उनकी तलाश कर रहे हैं।
गणपतिपुले पर्यटन क्षेत्र में पसरा सन्नाटा और विस्तृत विवरण का इंतजार
वीकेंड पर हुई इस आकस्मिक और ह्रदयविदारक घटना के बाद से पूरे गणपतिपुले टूरिस्ट स्पॉट पर आने वाले अन्य सैलानियों और स्थानीय दुकानदारों के बीच हड़कंप मच गया है। चारों तरफ चीख-पुकार और अफरा-तफरी के बाद अब वहां सन्नाटा पसरा हुआ है। लापता हुए पर्यटकों के परिजनों को इस बात की सूचना दे दी गई है, जिससे उनके घरों में कोहराम मच गया है। पुलिस प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और लापता लोगों के संबंध में अभी और अधिक विस्तृत आधिकारिक विवरण आने की प्रतीक्षा की जा रही है।
पहले पीड़िता से ली गई इजाजत, फिर POCSO आरोपी को मिली जमानत; वजह बना NEET UG री-एग्जाम
19 Jun, 2026 01:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महानगर की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोपी 18 वर्षीय युवक को नीट (NEET) की दोबारा आयोजित होने वाली परीक्षा में बैठने के लिए चार दिनों की अंतरिम जमानत मंजूर की है। अदालत ने आरोपी छात्र को 18 जून से 21 जून तक के लिए 50,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर सशर्त राहत दी है। विशेष न्यायाधीश एस आर शर्मा ने यह आदेश जारी करने से पहले पीड़िता की सहमति ली और आरोपी पर यह कड़ी शर्त लगाई कि वह इस अवधि के दौरान पीड़िता या उसके परिवार के किसी भी सदस्य से किसी भी माध्यम से संपर्क साधने का प्रयास नहीं करेगा।
नीट परीक्षा में शामिल होने और साक्ष्य के साथ सरेंडर करने का आदेश
अदालती आदेश के अनुसार, आरोपी युवक को मेडिकल प्रवेश परीक्षा के अगले दिन यानी 22 जून को दोपहर 2 बजे से पहले हर हाल में संबंधित जांच अधिकारी के समक्ष आत्मसमर्पण (सरेंडर) करना होगा। आरोपी ने अदालत को वचन दिया है कि वह 21 जून को होने वाली पुनः परीक्षा में अनिवार्य रूप से उपस्थित होगा। इसके अलावा, सरेंडर करते समय उसे जांच अधिकारी को परीक्षा में शामिल होने के पुख्ता प्रमाण और दस्तावेज भी सौंपने होंगे ताकि उसकी उपस्थिति सत्यापित की जा सके।
सुधारात्मक न्याय प्रणाली और मानसिक दबाव को आधार बनाकर मिली राहत
आरोपी की ओर से पैरवी करते हुए वकील कपिल विश्वास जोडगे ने दलील दी थी कि हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली का मूल उद्देश्य कैदियों में सुधार लाना और उन्हें बेहतर भविष्य का मौका देना है। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपी को अपने जीवन की दिशा सुधारने के लिए इस महत्वपूर्ण परीक्षा में बैठने का अवसर मिलना चाहिए। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि परीक्षा की अंतिम तैयारियों के लिए छात्र को एकाग्रता की आवश्यकता है, और पुलिस कस्टडी या एस्कॉर्ट के साए में पढ़ाई करने से उस पर अत्यधिक मानसिक दबाव बनेगा जो उसके करियर को प्रभावित कर सकता है।
सरकारी वकील का कड़ा विरोध और आरोपी पर लगे संगीन आरोप
दूसरी ओर, विशेष लोक अभियोजक (पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) चैत्राली पंशिकर ने युवक पर लगे आरोपों की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए इस अस्थायी जमानत याचिका का पुरजोर विरोध किया था। उन्होंने मांग रखी थी कि आरोपी को केवल परीक्षा के दिन ही कड़ी पुलिस सुरक्षा (एस्कॉर्ट) के बीच परीक्षा केंद्र जाने की अनुमति दी जानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने अभियोजन पक्ष की चिंताओं को दूर करने के लिए कड़े प्रतिबंध लगाते हुए चार दिन की राहत को ही उचित माना। उल्लेखनीय है कि नवी मुंबई की तलोजा सेंट्रल जेल में बंद इस युवक पर नाबालिग से ज्यादती के मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो), 2012 के तहत गंभीर केस दर्ज है।
मुंबई की रफ्तार पर ब्रेक! BEST कर्मचारियों की हड़ताल से यात्रियों की बढ़ी परेशानी
19 Jun, 2026 01:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी में 'बेस्ट' (बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट) के कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर गुरुवार रात से अनिश्चितकालीन चक्का जाम शुरू कर दिया है। यह आंदोलन बेस्ट के 12 प्रमुख कर्मचारी संगठनों के साझा मंच 'संयुक्त कामगार कृती समिति' के नेतृत्व में किया जा रहा है। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रशासन को अल्टीमेटम दिए जाने के बावजूद तय समय सीमा में उनकी जायज मांगों पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, जिसके चलते उन्हें विवश होकर इस बड़े आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा। इस विरोध प्रदर्शन के कारण शुक्रवार सुबह से ही मुंबई की लाइफलाइन मानी जाने वाली बेस्ट बसें सड़कों से पूरी तरह गायब रहीं, जिससे लाखों यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
बजट का विलय और सातवें वेतन आयोग समेत प्रमुख मांगें
आंदोलनकारी कर्मचारियों की मुख्य मांगों में 'बेस्ट' के वार्षिक वित्तीय बजट को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के मुख्य बजट के साथ जोड़ना शामिल है ताकि संस्थान को स्थायी वित्तीय सुरक्षा मिल सके। इसके साथ ही कर्मचारी 2016 से 2026 की अवधि के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को तत्काल लागू करने, सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों के बकाया कानूनी भुगतानों को एकमुश्त देने और मासिक वेतन व पेंशन लाभों में सम्मानजनक वृद्धि की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों ने जनहित का हवाला देते हुए यह भी मांग रखी है कि बेस्ट के बेड़े में खुद के स्वामित्व वाली बसों की संख्या को बढ़ाकर कम से कम 6,000 किया जाए ताकि यात्रियों को बेहतर और सुलभ परिवहन सेवा मिल सके।
सख्त कानूनी प्रावधान 'मेस्मा' लागू और बिजली ठप करने की चेतावनी
इस औचक हड़ताल के कारण उत्पन्न हुए परिवहन संकट से निपटने के लिए राज्य प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल प्रभाव से महाराष्ट्र अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (MESMA) लागू कर दिया है। इसके अंतर्गत बेस्ट के किसी भी कर्मचारी के हड़ताल पर जाने या सामूहिक छुट्टी लेने को पूरी तरह प्रतिबंधित करते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। मुंबई पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने साफ किया है कि मेस्मा (2023) के तहत यह हड़ताल पूरी तरह गैरकानूनी है, इसलिए प्रदर्शनकारी कानून-व्यवस्था को हाथ में न लें। दूसरी ओर, कर्मचारी यूनियनों ने भी तीखे तेवर अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी बातें नहीं मानीं, तो वे बसों के चक्के जाम रखने के साथ-साथ दक्षिण मुंबई की बिजली आपूर्ति को भी ठप कर देंगे।
यात्रियों की भारी परेशानी और मुंबई परिवहन की वर्तमान स्थिति
लोकल ट्रेनों के बाद बेस्ट को मुंबई महानगर की दूसरी सबसे बड़ी सार्वजनिक जीवन रेखा माना जाता है, जो प्रतिदिन लगभग 25 लाख यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती है और दक्षिण मुंबई के 10 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली सप्लाई देती है। वर्तमान में बेस्ट के बेड़े में करीब 2,700 बसें शामिल हैं, लेकिन चिंताजनक बात यह है कि इनमें से केवल 243 बसें ही बेस्ट की अपनी हैं, जबकि बाकी सभी बसें निजी ठेकेदारों के माध्यम से वेट-लीज मॉडल पर चलाई जा रही हैं। परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस गतिरोध को बातचीत के जरिए तुरंत नहीं सुलझाया गया, तो आने वाले दिनों में मुंबई वासियों की रोजमर्रा की जिंदगी और दफ्तर आने-जाने वाले कामकाजी लोगों की मुश्किलें काफी ज्यादा बढ़ सकती हैं।
शिवसेना UBT में टूट पर बड़ा दावा, सांसद बोले- आदित्य ठाकरे बने वजह?
19 Jun, 2026 01:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र के प्रमुख विपक्षी दल शिवसेना (यूबीटी) में सांसदों के एक बड़े धड़े की बगावत ने राज्य की सियासत में जबरदस्त भूचाल ला दिया है। विद्रोह करने वाले सांसदों ने शुरुआत में यह अंदेशा जताया था कि उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर सकते हैं, जिससे वे असहज थे। वहीं, अब असंतुष्ट नेताओं की तरफ से एक और नया दावा सामने आया है कि सांसदों में दल के भीतर बढ़ते परिवारवाद को लेकर भी गहरा असंतोष था। बागी गुट का आरोप है कि उद्धव ठाकरे पुत्र मोह में सिर्फ आदित्य ठाकरे को ही हर जगह आगे बढ़ाने में लगे रहते हैं, जबकि पार्टी के अन्य योग्य और कर्मठ नेताओं की अनदेखी की जाती है।
आदित्य ठाकरे की योग्यता और युवा नेतृत्व का जोरदार बचाव
विद्रोही सांसदों के इन तीखे आरोपों पर उद्धव गुट की ओर से अब कड़ा पलटवार किया गया है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ लोकसभा सांसद अनिल देसाई ने एक विशेष बातचीत में आदित्य ठाकरे का पुरजोर बचाव करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आदित्य ठाकरे बेहद प्रतिभावान, उच्च शिक्षित और सूझबूझ वाले नेता हैं। वे भली-भांति जानते हैं कि आज की नई पीढ़ी के साथ किस तरह का संवाद और जुड़ाव स्थापित करना है। देसाई ने स्पष्ट किया कि उन्हें सिर्फ इसलिए नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में नहीं लाया गया कि वे पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र हैं, बल्कि वे अपनी खुद की राजनैतिक काबिलियत के दम पर इस मुकाम तक पहुंचे हैं।
वंशवाद के मुद्दे पर विपक्षी दलों की कार्यप्रणाली पर दागे सवाल
पार्टी के भीतर परिवारवाद के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अनिल देसाई ने भारतीय राजनीति के वर्तमान परिदृश्य पर भी तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि निष्पक्षता से देखा जाए, तो देश के लगभग सभी राजनीतिक दलों में इस तरह की स्थिति दिखाई देगी। उन्होंने सवाल उठाया कि वर्तमान में देश में ऐसा कौन सा राजनैतिक संगठन है, जिसके शीर्ष नेतृत्व ने अपने बेटों, बेटियों या भतीजों को राजनीति में आगे बढ़ाने का काम नहीं किया है। इसलिए केवल एक ही दल को इस विषय पर निशाना बनाना पूरी तरह से अतार्किक और अनुचित है।
पार्टी छोड़ने का बहाना ढूंढ रहे बागी सांसदों पर तीखा तंज
सांसद अनिल देसाई से जब दोबारा पूछा गया कि क्या वाकई आदित्य को आगे बढ़ाने में उनके परिवार की कोई भूमिका नहीं है? तो उन्होंने पलटकर सवाल किया कि क्या उद्धव ठाकरे का बेटा होना कोई गुनाह या गलत बात है? उन्होंने बगावत करने वाले नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग निजी स्वार्थ, प्रलोभन या लालच के वशीभूत होकर संगठन को धोखा देते हैं, वे अपनी इस दगाबाजी को सही ठहराने के लिए अक्सर इसी तरह के मनगढ़ंत बहाने बनाते हैं। मूल पार्टी को छोड़ने के लिए जनता के सामने कोई न कोई मनगढ़ंत वजह तो पेश करनी ही पड़ती है, इसीलिए परिवारवाद का यह झूठा राग अलापा जा रहा है।
महाराष्ट्र की राजनीति में गरमाया माहौल, बागी सांसद को दी गई चेतावनी
18 Jun, 2026 02:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यवतमाल। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सड़कों पर आने लगी है। पार्टी के एक स्थानीय पदाधिकारी ने बुधवार को यवतमाल-वाशिम संसदीय क्षेत्र से नवनिर्वाचित लोकसभा सदस्य संजय देशमुख को खुलेआम एक बेहद तीखी और गंभीर चेतावनी दे डाली है। पदाधिकारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि सांसद संजय देशमुख ने अपने पद से त्यागपत्र दिए बिना दल-बदल करने या राजनीतिक निष्ठा बदलने का प्रयास किया, तो उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र की सीमा में कदम रखने की भूल नहीं करनी चाहिए। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक हलकों में ऐसी अफवाहें और अटकलें तेज हैं कि उद्धव ठाकरे गुट के कई सांसद पाला बदलकर सत्ताधारी खेमे में जा सकते हैं, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं का आक्रोश भड़क उठा है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल और वाहन फूंकने की धमकी
इस पूरे विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे एक वीडियो क्लिप से हुई, जिसमें शिवसेना (यूबीटी) के स्थानीय नेता विजय शेंडगे सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में शेंडगे ने सीधे तौर पर सांसद संजय देशमुख को आगाह करते हुए कहा कि अगर उन्होंने संसद सदस्यता से इस्तीफा दिए बिना मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट का दामन थामा, तो उन्हें वाशिम जिले में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में चेतावनी दी कि यदि वे बिना त्यागपत्र दिए यहां आए, तो शिव सैनिक चुप नहीं बैठेंगे और उनके वाहनों को आग के हवाले कर दिया जाएगा।
शिवसैनिकों के संघर्ष और कार्यकर्ताओं के साथ धोखे का आरोप
विजय शेंडगे ने अपने बयान की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि सांसद महोदय को एकनाथ शिंदे गुट की नीतियां पसंद आ रही हैं और वे वहां जाना चाहते हैं, तो वे पूरी खुशी के साथ जा सकते हैं, लेकिन नैतिक आधार पर उन्हें सबसे पहले अपने लोकसभा पद का परित्याग करना होगा। उन्होंने तर्क दिया कि संजय देशमुख को देश की संसद में भेजने के लिए उन आम शिवसैनिकों ने दिन-रात एक करके पसीना बहाया था, जो एकनाथ शिंदे गुट के आधिकारिक उम्मीदवार के विरुद्ध चुनावी मैदान में डटे हुए थे। कार्यकर्ताओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर उन्हें जीत दिलाई थी, ऐसे में यदि वे अब पाला बदलकर कार्यकर्ताओं के संघर्ष के साथ विश्वासघात करते हैं, तो उन्हें इसके बेहद गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।
नेता द्वारा चेतावनी की पुष्टि और इस्तीफे की मांग पर अड़े कार्यकर्ता
बाद में जब स्थानीय स्तर पर विजय शेंडगे से इस विषय में संपर्क साधा गया, तो उन्होंने पूरी मुखरता के साथ इस बात की पुष्टि की कि सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया वह वीडियो उन्हीं का है और वे अपने बयान पर पूरी तरह कायम हैं। उन्होंने साफ किया कि यह केवल एक वीडियो संदेश नहीं बल्कि समूचे क्षेत्र के वफादार शिवसैनिकों की अंतरात्मा की आवाज है जो किसी भी स्तर पर गद्दारी बर्दाश्त नहीं करेंगे। शेंडगे ने दोहराया कि लोकतंत्र में पाला बदलने की स्वतंत्रता सबको है, परंतु जनता के मतों का सौदा करके और बिना इस्तीफा दिए स्वार्थ की राजनीति करने वाले नेताओं को अब जनता और कार्यकर्ताओं के भारी विरोध का सामना करना ही पड़ेगा।
जलगांव MLC चुनाव में सियासी ड्रामा, अंतिम क्षणों में महायुती को मिली बढ़त
18 Jun, 2026 02:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जलगांव। महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय कोटे की विधान परिषद सीट पर चुनाव के ठीक पहले एक अभूतपूर्व और बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। मतदान प्रक्रिया शुरू होने से महज कुछ ही घंटे पूर्व इस सीट से डटे निर्दलीय प्रत्याशी अनिल चौधरी ने अचानक चुनावी रण से हटने और अपना नाम वापस लेने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। उनके इस अप्रत्याशित कदम से राज्य की राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। अनिल चौधरी के इस तरह मैदान छोड़ने के बाद अब इस सीट से सत्ताधारी महायुति गठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवार नंदकिशोर महाजन की एकतरफा जीत पूरी तरह से तय मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आह्वान पर पीछे हटने का निर्णय
चुनावी समर से हटने की वजहों का खुलासा करते हुए निर्दलीय उम्मीदवार अनिल चौधरी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह कदम मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए उठाया है। उन्होंने बताया कि फैसले से ठीक पहले उनकी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और प्रहार जनशक्ति पार्टी के प्रमुख बच्चू कडू के साथ एक विशेष बैठक हुई थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री का स्वयं उनके पास फोन आया। अनिल चौधरी के अनुसार, शीर्ष नेतृत्व ने उनसे गठबंधन धर्म की मर्यादा बनाए रखने और महायुति प्रत्याशी नंदकिशोर महाजन के साथ पुराने मैत्रीपूर्ण संबंधों का हवाला देते हुए नाम वापस लेने का विशेष आग्रह किया था, जिसे स्वीकार करते हुए उन्होंने मैदान छोड़ दिया। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि वे और उनके समर्थक जल्द ही आधिकारिक तौर पर शिवसेना के शिंदे गुट में शामिल हो जाएंगे।
वरिष्ठ नेता से आशीर्वाद न मिलने की टीस और अपनों की बेरुखी
नाम वापसी के बाद अनिल चौधरी के बयानों में अपनों की बेरुखी का दर्द भी साफ तौर पर छलक कर सामने आया। उन्होंने कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन का जिक्र करते हुए कहा कि वे लंबे समय से उनके बेहद करीबी रहे हैं और उन्हें हमेशा अपने बड़े भाई की तरह मानते आए हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यदि इस चुनाव में गिरीश महाजन ने एक बड़े भाई और राजनीतिक संरक्षक के तौर पर उन्हें अपना पूरा आशीर्वाद दिया होता, तो आज वे निश्चित रूप से विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) बनकर सदन में पहुंच चुके होते, परंतु ऐसा न होने के कारण और गठबंधन के व्यापक हितों को देखते हुए उन्हें शीर्ष नेताओं की बात मानकर पीछे हटना पड़ा।
महाराष्ट्र की 11 सीटों पर मतदान का गणित और निर्विरोध निर्वाचित चेहरे
इस पूरे सियासी ड्रामे के बीच महाराष्ट्र विधान परिषद की 11 महत्वपूर्ण सीटों पर गुरुवार को मतदान की प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी रही, जिनमें जलगांव के अलावा सोलापुर, सांगली-सतारा, नांदेड़, नागपुर, भंडारा-गोंडिया, नासिक, अमरावती, धाराशिव-लातूर-बीड, परभणी-हिंगोली और छत्रपति संभाजीनगर-जालना शामिल हैं। गौरतलब है कि इस चुनावी प्रक्रिया के दौरान राज्य की 6 सीटों पर विभिन्न दलों के आपसी समीकरणों के चलते महायुति गठबंधन के उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा चुके हैं। इन निर्विरोध विजेताओं में ठाणे से शिवसेना के रवींद्र फाटक, यवतमाल से शिवसेना के दुष्यंत चतुर्वेदी, रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग से राकांपा (NCP) के अनिकेत तटकरे, पुणे से राकांपा के विक्रम काकडे, वर्धा-गढ़चिरौली-चंद्रपुर से भाजपा के अरुण लखानी और अहिल्यानगर से भाजपा की प्राजक्ता तनपुरे शामिल हैं।
'कुछ देर में पता चल जाएगी बागियों की संख्या', शिवसेना UBT की आपात बैठक शुरू
18 Jun, 2026 11:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है, जहां उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के बगावती रुख अख्तियार करने की खबरें सामने आ रही हैं। इस अचानक पैदा हुए सियासी संकट के बाद पार्टी आलाकमान पूरी तरह डैमेज कंट्रोल में जुट गया है। स्थिति को संभालने और बागी रुख अपनाने वाले सांसदों की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए नेतृत्व ने एक सख्त तीन लाइन का व्हिप जारी किया है और सभी सांसदों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस बैठक में उपस्थित होने और न आने वाले सांसदों के आधार पर ही यह तय होगा कि जमीनी स्तर पर पार्टी को कितना बड़ा झटका लगा है।
बैठक से नदारद रहने वाले सांसदों की सदस्यता पर खतरा
पार्टी के भीतर मचे इस घमासान के बीच वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली स्थित संसद भवन के कार्यालय में सुबह 11:00 बजे एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया है। नेतृत्व ने दोटूक लहजे में चेतावनी दी है कि वे बैठक में कुछ समय तक ही सांसदों की प्रतीक्षा करेंगे और इसके बाद अनुपस्थित रहने वालों पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यदि संसदीय बोर्ड की इस बैठक में संशय के दायरे में चल रहे 6 सांसद शामिल नहीं होते हैं, तो दल-बदल कानून के तहत उनकी संसद सदस्यता को अमान्य और अपात्र घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी।
महायुति पर सांसदों के अपहरण और लोकतंत्र से खिलवाड़ का आरोप
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख रणनीतिकारों ने सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों द्वारा शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों को जबरन डरा-धमकाकर या प्रलोभन देकर हाईजैक करने का प्रयास किया जा रहा है। नेताओं ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र, देश के नियम-कायदों और संविधान के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है, जहां दिन-रात मेहनत करके जीत दर्ज करने वाले जनप्रतिनिधियों को किडनैप किया जा रहा है। इसी सिलसिले में उन्होंने प्रधानमंत्री के विदेश दौरों का जिक्र करते हुए उन पर भी तंज कसा कि उन्हें देश के भीतर चल रही इस अस्थिरता पर ध्यान देना चाहिए।
बाला साहेब के नाम और असली शिवसेना की दुहाई
पार्टी के शीर्ष प्रवक्ताओं ने दावा किया है कि उन्हें पूरी तरह से जानकारी है कि कौन से सांसद दिल्ली पहुंचे हैं और कौन से गायब हैं। विरोधियों को ललकारते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी को विभाजित करने का सपना देख रहे हैं, वे कभी कामयाब नहीं होंगे क्योंकि संगठन की नींव बाला साहेब ठाकरे के विचारों पर टिकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां बाला साहेब का नाम और विचार हैं, वहीं वास्तविक शिवसेना अस्तित्व में है और किसी अन्य धड़े के पास खुद को असली साबित करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, चाहे वे कितना भी प्रयास क्यों न कर लें।
अखबार में खाद्य सामग्री बेचने वालों पर शिकंजा, FDA ने वसूला भारी जुर्माना
17 Jun, 2026 12:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महानगर में खाने-पीने की चीजों को पैक करने और ग्राहकों को बेचने के लिए समाचार पत्रों (अखबार) का धड़ल्ले से उपयोग करने वाले दुकानदारों के खिलाफ खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने एक बड़ा अभियान छेड़ दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि वड़ा पाव, भजिया, समोसा या किसी भी अन्य खाद्य पदार्थ को अखबार के पन्नों में लपेट कर परोसना सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ है और यह गंभीर बीमारियां पैदा कर सकता है। इसी खतरे को भांपते हुए बृहन्मुंबई क्षेत्र में 5 जून से 16 जून 2026 के मध्य एक विशेष जांच और धरपकड़ मुहिम चलाई गई। एफडीए के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा खाद्य सामग्रियों की पैकिंग अथवा उन्हें सीधे रखने के लिए अखबारों के इस्तेमाल पर पहले ही कानूनी पाबंदी लगाई जा चुकी है। दरअसल, अखबार की छपाई में प्रयुक्त होने वाली स्याही में बेहद जहरीले रसायन, कृत्रिम रंग, सीसा (लेड) और कई हानिकारक भारी धातुएं पाई जाती हैं, जो भोजन के संपर्क में आते ही उसमें घुल जाती हैं। साथ ही, छपने से लेकर बंटने तक अखबार कई अस्वच्छ हाथों और जगहों से गुजरते हैं, जिससे उनमें खतरनाक बैक्टीरिया और सूक्ष्मजीव पनप जाते हैं।
आधे से ज्यादा दुकानों में नियमों का उल्लंघन और कानूनी कार्रवाई
इस विशेष जांच अभियान के दौरान एफडीए की टीमों ने मुंबई के अलग-अलग इलाकों में संचालित कुल 55 खाद्य प्रतिष्ठानों और स्टालों पर औचक छापेमारी की। इस सघन चेकिंग के दौरान एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया, जहां 26 दुकानों और ठेलों पर खाद्य पदार्थों को पैक करने या बेचने के लिए धड़ल्ले से पुराने अखबारों का इस्तेमाल किया जा रहा था। नियमों की ऐसी सरेआम धज्जियां उड़ाने वाले इन सभी 26 दुकानदारों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत तत्काल विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
उल्लंघनकर्ताओं से वसूला गया लाखों रुपये का भारी-भरकम जुर्माना
प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, पकड़े गए इन 26 नियमों के उल्लंघन के मामलों में से 17 मामलों की कानूनी प्रक्रिया को पूरा करते हुए उनका ऑन-द-स्पॉट निपटारा कर दिया गया है। इन मामलों में शामिल दोषी खाद्य व्यवसायियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन ने कुल 11 लाख 51 हजार रुपये का भारी-भरकम समझौता जुर्माना लगाया और उसे मौके पर ही वसूला गया। वहीं, बचे हुए अन्य मामलों में भी कानून के दायरे में आगे की सख्त दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
तैलीय भोजन और स्याही का जानलेवा गठजोड़ तथा सख्त हिदायत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अधिकारियों ने विस्तार से समझाते हुए कहा कि जब समोसे या भजिया जैसे गर्म और अत्यधिक तैलीय (ऑयली) पकवानों को अखबार में रखा जाता है, तो तेल के कारण उसकी जहरीली स्याही तुरंत पिघलकर भोजन का हिस्सा बन जाती है। इस दूषित भोजन का लगातार सेवन करने से मानव शरीर में कैंसर और पेट से जुड़ी कई लाइलाज और गंभीर बीमारियां पनपने लगती हैं। इसी को देखते हुए सभी छोटे-बड़े खाद्य व्यवसायियों को तुरंत प्रभाव से अखबारों का उपयोग बंद करने और केवल स्वीकृत फूड-ग्रेड सामग्री का ही इस्तेमाल करने की कड़ी हिदायत दी गई है। यह पूरा अभियान वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के कुशल दिशा-निर्देशन में खाद्य सुरक्षा निरीक्षकों की विशेष टीम द्वारा पूरा किया गया, जिन्होंने स्पष्ट संदेश दिया है कि आने वाले दिनों में भी ऐसे औचक निरीक्षण लगातार जारी रहेंगे और कोताही बरतने वालों के लाइसेंस तक रद्द किए जा सकते हैं।
बागी सांसदों को लेकर सियासी घमासान, BJP ने आरोपों पर दी सफाई
17 Jun, 2026 12:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के भीतर मची अंदरूनी हलचल के बीच अब एक नया और बेहद सनसनीखेज मोड़ आ गया है। पार्टी के कद्दावर नेता और राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने अपनी ही पार्टी के सांसदों पर पाला बदलने के लिए भारी-भरकम रकम लेने का एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है, जिससे सूबे की सियासत गरमा गई है। राउत के इस तीखे बयान पर तुरंत पलटवार करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। बावनकुले ने साफ शब्दों में कहा कि बिना किसी पुख्ता आधार के इस तरह के मनगढ़ंत आरोप लगाना पूरी तरह से अनुचित और गलत परंपरा है।
पैसे के दम पर बदनाम करने के बजाय आत्ममंथन की सलाह
भाजपा नेता बावनकुले ने उद्धव गुट को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए सांसदों और विधायकों के चरित्र पर इस तरह के लांछन लगाना किसी भी दृष्टिकोण से ठीक नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि जब भी कोई राजनेता या जनप्रतिनिधि अपना वैचारिक रास्ता बदलता है या किसी अन्य दल में शामिल होता है, तो उसके पीछे कई तरह की राजनीतिक और क्षेत्रीय वजहें हो सकती हैं। केवल धनबल या आर्थिक लेन-देन के आधार पर अपने ही पुराने साथियों को सरेआम बदनाम करना पूरी तरह गलत है। बावनकुले ने नसीहत देते हुए कहा कि आरोपों की राजनीति करने के बजाय उद्धव ठाकरे और उनके रणनीतिकारों को इस बात की गहराई से समीक्षा करनी चाहिए कि आखिर ऐसी क्या वास्तविक वजहें हैं, जिसके चलते उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले विधायक और सांसद एक-एक कर उन्हें मझधार में छोड़कर जा रहे हैं।
करोड़ों रुपये के लेन-देन और चार्टर्ड विमानों का सनसनीखेज दावा
इससे पहले, संजय राउत ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचाने वाला दावा करते हुए कहा था कि उनके पास पुख्ता खुफिया जानकारियां मौजूद हैं कि पाला बदलने के इच्छुक सांसदों को 15-15 करोड़ रुपये की भारी रकम पहुंचाई गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बड़ी सौदेबाजी के मुकम्मल होने के बाद ही संबंधित सांसदों को नांदेड़ और पुणे सहित तीन अलग-अलग ठिकानों से विशेष चार्टर्ड विमानों (निजी विमानों) के जरिए दिल्ली रवाना किया गया। राउत ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि पार्टी इस संभावित बगावत से डरने वाली नहीं है और संगठन की मजबूती के लिए हर विधिक कदम उठाया जा रहा है।
संसदीय दल की बैठक, व्हिप जारी और लोकसभा अध्यक्ष को पत्र
शिवसेना (यूबीटी) के भीतर मचे इस घमासान के बीच पार्टी नेतृत्व ने अपने बचे हुए कुनबे को एकजुट रखने के लिए कानूनी और तकनीकी मोर्चे पर भी घेराबंदी शुरू कर दी है। संजय राउत ने आधिकारिक रूप से जानकारी दी कि पार्टी की ओर से आगामी संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक के लिए एक कड़ा 'व्हिप' (आधिकारिक निर्देश) जारी कर दिया गया है, जिसका उल्लंघन करने पर सांसदों की सदस्यता खतरे में पड़ सकती है। इसके साथ ही, वरिष्ठ पार्टी नेता अरविंद सावंत ने दिल्ली में मोर्चा संभालते हुए इस पूरे मामले और दल-बदल की आशंकाओं को लेकर लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को एक औपचारिक पत्र भी सौंप दिया है, ताकि बगावत करने वाले सांसदों के खिलाफ समय रहते सख्त कानूनी कदम उठाए जा सकें।
सियासी हलचल के बीच उद्धव कैंप को राहत, सांसद ने बगावत की अटकलों पर दिया जवाब
17 Jun, 2026 12:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) में एक बार फिर बड़ी टूट की अटकलें तेज हो गई हैं, जहां उनके 6 सांसदों के पाला बदलने की आशंका जताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि देर रात देश की राजधानी पहुंचे ये सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम सकते हैं। इसी गहमा-गहमी के बीच, उपमुख्यमंत्री के सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे कुछ जनप्रतिनिधियों को एक निजी विमान से लेकर दिल्ली पहुंचे हैं, जहां खुद मुख्यमंत्री भी डेरा डाले हुए हैं। इस संभावित बागी सूची में नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा था, लेकिन अब उनके एक ताजा बयान ने उद्धव खेमे को बहुत बड़ी राहत दी है। वाजे ने मीडिया से रूबरू होते हुए साफ लफ्जों में कहा है कि उनका दिल्ली दौरा किसी राजनीतिक दल-बदल के लिए नहीं, बल्कि एक पूर्व निर्धारित समिति की बैठक में शामिल होने के लिए हुआ है और उन्हें सांसदों के पाला बदलने जैसी किसी भी गतिविधि की कोई जानकारी नहीं है।
उद्धव ठाकरे के प्रति वफादारी का दावा और अफवाहों का खंडन
सांसद राजाभाऊ वाजे ने अपने रुख को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए दो टूक शब्दों में कहा है कि वह उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं और भविष्य में भी उनके साथ ही बने रहेंगे। उन्होंने किसी भी अन्य राजनीतिक गुट से बातचीत की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनका किसी से कोई संपर्क नहीं हुआ है और न ही उन्हें मुख्यमंत्री या उनके किसी प्रतिनिधि का कोई फोन आया है। उन्होंने साफ किया कि वह संगठन या नेतृत्व से बिल्कुल भी नाराज नहीं हैं। उनके इस बयान के बाद शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर अफवाहों पर विराम लगाने की कोशिश की। राउत ने लिखा कि नासिक के सांसद केवल इंडस्ट्री कमेटी की बैठक का हिस्सा बनने दिल्ली गए हैं, जबकि मीडिया में इसे गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।
हिंगोली और धाराशिव के सांसदों को लेकर स्थिति स्पष्ट
बगावत की इन खबरों के बीच हिंगोली से सांसद नागेश अष्टेकर ने भी सामने आकर इन चर्चाओं को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। उन्होंने जानकारी दी है कि वह दिल्ली गए ही नहीं हैं, बल्कि अपने गृह क्षेत्र हिंगोली में ही मौजूद हैं। दूसरी तरफ, धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर को लेकर भी अटकलों का बाजार गर्म है और चर्चा है कि वह इस कथित 'ऑपरेशन' का हिस्सा हो सकते हैं और फिलहाल पुणे में हैं, हालांकि गोवर्धन वाडी स्थित उनके आवास पर पूरी तरह शांति का माहौल देखा गया। गौरतलब है कि ओमराजे निंबालकर को ठाकरे परिवार का बेहद वफादार माना जाता है और उन्होंने हालिया चुनाव में अपनी निकटतम प्रतिद्वंदी अर्चना पाटील को साढ़े तीन लाख से अधिक मतों के भारी अंतर से शिकस्त देकर सूबे में सबसे बड़ी जीत दर्ज करने का गौरव हासिल किया था।
पर्दे के पीछे की राजनीतिक हलचल और सातवें सांसद की अटकलें
पिछले कुछ दिनों से सियासी गलियारों में यह कयास लगातार लगाए जा रहे हैं कि उद्धव गुट के सात सांसद टूटकर शिंदे खेमे में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। इसी सिलसिले में मंगलवार की रात 6 सांसदों के दिल्ली पहुंचने की खबर आई, जिसके बाद राजनीतिक सरगर्मियां सातवें आसमान पर पहुंच गईं। अब राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस बात की गहराई से पड़ताल की जा रही है कि क्या वाकई कोई अंदरूनी असंतोष है या फिर यह केवल विपक्षी खेमे को मानसिक दबाव में लाने की एक रणनीति है। फिलहाल सभी की नजरें दिल्ली में डेरा डाले शिंदे गुट के नेताओं और मुंबई में उद्धव ठाकरे के अगले कदमों पर टिकी हुई हैं।
ऑपरेशन टाइगर के बीच निरुपम का हमला, बोले- पार्टी तेजी से कमजोर हो रही
16 Jun, 2026 02:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में इन दिनों 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर कयासों का बाजार बेहद गर्म है। इन तमाम चर्चाओं के बीच शिवसेना नेता संजय निरुपम ने उद्धव ठाकरे गुट (यूबीटी) पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया है कि यह संगठन अब पूरी तरह बिखर रहा है और इसके भीतर नेताओं का असंतोष चरम पर पहुंच चुका है। उन्होंने विरोधियों द्वारा लगाए जा रहे 'ऑपरेशन टाइगर' जैसे किसी भी गुप्त अभियान के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। निरुपम ने तंज कसते हुए कहा कि इस शब्दावली का आविष्कार पूरी तरह मीडिया ने किया है और सत्तापक्ष का इससे कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि उबाठा (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नामक पार्टी का अस्तित्व अब धीरे-धीरे समाप्ति की ओर है और उनके खुद के विधायकों व सांसदों का अपनी शीर्ष लीडरशिप से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है।
संजय निरुपम ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि आगामी वर्ष 2029 तक यह पार्टी पूरी तरह इतिहास का हिस्सा बन जाएगी क्योंकि उद्धव ठाकरे के कमजोर नेतृत्व के कारण हर दिन लोग संगठन का साथ छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके जनप्रतिनिधि पार्टी में रहेंगे या जाएंगे, यह पूरी तरह उनका अंदरूनी मामला है, लेकिन इतना तय है कि इस डूबते जहाज से लोग एक-एक कर बाहर निकल जाएंगे।
मातोश्री की आपात बैठक और सांसदों की 'ऑनलाइन' दूरी
शिवसेना नेता ने हाल ही में हुई एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले दिनों मुंबई स्थित ठाकरे परिवार के आवास 'मातोश्री' में पार्टी सांसदों की एक अति-महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे खुद तो हमेशा फेसबुक लाइव के जरिए राजनीति करते आए हैं, लेकिन इस बार उनके सांसदों ने उनसे ही प्रेरणा ले ली। बैठक में व्यक्तिगत रूप से पहुंचने के बजाय उनके कई सांसद ऑनलाइन लाइव (वर्चुअली) जुड़ गए और मातोश्री जाने से परहेज किया। निरुपम के अनुसार, सांसदों और विधायकों के भीतर व्याप्त यह भारी असंतोष साफ इशारा करता है कि आने वाले दिनों में ये सभी नेता धीरे-धीरे पार्टी को अलविदा कह देंगे।
अहंकार और सुलभ न होना बना बगावत की वजह
उबाठा गुट में पनप रहे इस आंतरिक विद्रोह के पीछे संजय निरुपम ने तीन प्रमुख कारण गिनाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहला कारण तो यह है कि ठाकरे गुट के शीर्ष नेतृत्व के भीतर अत्यधिक अहंकार भरा हुआ है। दूसरा कारण, यह लीडरशिप अपने ही विधायकों और सांसदों के लिए आसानी से उपलब्ध (सुलभ) नहीं होती है, जिससे संवादहीनता की स्थिति बनी हुई है। तीसरी और सबसे बड़ी कमी यह है कि इस गुट के दोनों मुख्य मार्गदर्शक, यानी पिता (उद्धव ठाकरे) और पुत्र (आदित्य ठाकरे), अपने घर की सुख-सुविधाओं से बाहर निकलकर महाराष्ट्र के जमीनी दौरों पर जाने और कार्यकर्ताओं से मिलने की जहमत नहीं उठाते हैं।
बैठक से पांच सांसदों के गायब होने से मची खलबली
इस पूरे राजनैतिक विवाद का मुख्य कारण रविवार (14 जून) को मातोश्री में आयोजित सांसदों की वह आपात बैठक है, जिसमें कुल 9 सांसदों को आमंत्रित किया गया था, परंतु उनमें से 5 महत्वपूर्ण चेहरे नदारद रहे। इस अनुपस्थिति के बाद से ही सियासी हलकों में एक बार फिर बड़ी बगावत के सुर तेज हो गए हैं। ऐसी प्रबल चर्चाएं हैं कि उद्धव गुट के कई सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के निरंतर संपर्क में हैं और जल्द ही आधिकारिक तौर पर शिंदे खेमे का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, डैमेज कंट्रोल में जुटे ठाकरे गुट के वरिष्ठ नेता अरविंद सावंत का कहना है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और जो सांसद बैठक में नहीं आ सके, वे कुछ व्यक्तिगत आपातकालीन कारणों की वजह से वर्चुअली इस चर्चा का हिस्सा बने थे।
महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़, राउत के बयान से अटकलों को मिला जवाब
16 Jun, 2026 02:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने पार्टी के सांसदों के पाला बदलने की तमाम अफवाहों और अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संगठन के भीतर किसी भी प्रकार की आंतरिक कलह या संकट जैसी स्थिति नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में चुनौती देते हुए कहा कि यदि भविष्य में कोई वैचारिक या राजनैतिक संकट खड़ा भी होता है, तो हमारी लीडरशिप उससे पूरी मजबूती से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। उद्धव गुट के सांसदों द्वारा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे के मंत्रियों से मुलाकात किए जाने के विषय पर भी उन्होंने बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के विकास कार्यों या प्रशासनिक काम के सिलसिले में किसी मंत्री से भेंट करता है, तो इसे सियासी चश्मे से देखना पूरी तरह गलत है। अपनी बात को पुख्ता करने के लिए उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार सरकारी और विधायी कामकाज के सिलसिले में स्वयं उनकी भी प्रधानमंत्री से मुलाकातें होती रही हैं।
पार्टी को है संघर्ष का लंबा और पुराना अनुभव
राउत ने संगठन के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि शिवसेना ने अपने सफर में पहले भी कई तरह के बिखराव और बड़े अलगाव देखे हैं, लेकिन हर झटके के बाद हमारी पार्टी पहले से ज्यादा मजबूत होकर दोबारा उठ खड़ी हुई है। उन्होंने विरोधियों को याद दिलाया कि उनके संगठन के पास विपरीत परिस्थितियों से लड़ने और कड़ा संघर्ष करने का दशकों पुराना जमीनी अनुभव है। शिवसेना कोई नई नवेली संस्था नहीं है, बल्कि यह करीब 60 साल पुराना एक मजबूत बरगद का पेड़ है, जिसकी जड़ें जनता के बीच बेहद गहरी हैं।
लोग आते-जाते रहते हैं, कार्यकर्ताओं से है संगठन
प्रवक्ता ने दलबदलुओं पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता के लालच में लोग आते हैं और चले जाते हैं, इससे संगठन के मूल वजूद पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने साफ किया कि उनकी शिवसेना महज कुछ सांसदों, कॉर्पोरेटर्स या विधायकों के संख्याबल पर टिकी हुई पार्टी नहीं है, बल्कि यह देश और राज्य के कोने-कोने में फैले लाखों वफादार और निष्ठावान कार्यकर्ताओं के खून-पसीने से सींची गई एक मजबूत फौज है। जब तक जमीनी कार्यकर्ता साथ हैं, तब तक पार्टी का बाल भी बांका नहीं हो सकता।
विपक्ष की अफवाहों को किया पूरी तरह खारिज
राजनैतिक गलियारों में फैलाई जा रही टूट की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने इसे विरोधी खेमे का एक हताश प्रोपेगैंडा करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष जानबूझकर भ्रामक खबरें फैलाकर पार्टी के भीतर अविश्वास का माहौल पैदा करने की नाकाम कोशिश कर रहा है। शिवसेना (यूबीटी) पूरी तरह एकजुट है और आगामी चुनावों में अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरकर विरोधियों को करारा जवाब देने के लिए तैयार है।
नवी मुंबई कार्यक्रम से शिंदे का नाम हटने पर मचा बवाल, शिवसेना का विरोध
16 Jun, 2026 11:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नवी मुंबई। महाराष्ट्र के सियासी गलियारे में एक नया घमासान छिड़ गया है। यह ताजा विवाद सत्तारूढ़ गठबंधन के दो प्रमुख घटकों, भाजपा और शिवसेना के बीच एक सरकारी कार्यक्रम को लेकर पैदा हुआ है। दरअसल, नवी मुंबई नगर निगम द्वारा आयोजित एक समारोह के आधिकारिक निमंत्रण पत्रों से महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे का नाम नदारद मिलने पर बवाल खड़ा हो गया। इस बात से आक्रोशित शिवसेना कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया और वहां पहुंचे भाजपा नेता व वन मंत्री गणेश नाईक का घेराव कर दिया, जिससे आयोजन स्थल पर स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई। गौरतलब है कि गणेश नाईक को सियासी तौर पर शिंदे का धुर विरोधी माना जाता है।
यह पूरा विवाद सोमवार को उस वक्त गर्माया जब एक उच्च-स्तरीय सरकारी कार्यक्रम के निमंत्रण पत्रों में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का नाम गायब मिला। इस समारोह में गणेश नाईक नवी मुंबई महानगरपालिका की कई नवनिर्मित स्वास्थ्य सुविधाओं का लोकार्पण करने पहुंचे थे। निमंत्रण पत्र में राज्य के उपमुख्यमंत्री का नाम शामिल न होने की खबर फैलते ही शिवसेना गुट के माथे पर बल आ गए और वे भड़क उठे।
मूल निमंत्रण पत्र से नाम हटाने का आरोप
दिलचस्प बात यह है कि बांटे गए निमंत्रण पत्र में सांसद नरेश म्हस्के और स्वयं एकनाथ शिंदे के पुत्र श्रीकांत शिंदे का नाम तो अंकित था, लेकिन स्वयं उपमुख्यमंत्री का नाम गायब था। जैसे ही कार्यक्रम की शुरुआत हुई, बड़ी तादाद में शिंदे समर्थक वहां पहुंच गए और हंगामा शुरू कर दिया। शिवसेना नेता और ठाणे से लोकसभा सदस्य नरेश म्हस्के ने इस घटनाक्रम पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने सीधे तौर पर नाईक को आड़े हाथों लेते हुए दावा किया कि नगर निगम आयुक्त ने उन्हें स्वयं बताया था कि प्रशासन ने सरकारी प्रोटोकॉल के मुताबिक मूल रूप से सूची में शिंदे का नाम रखा था। म्हस्के का आरोप है कि बाद में गणेश नाईक और मेयर के कहने पर जानबूझकर एकनाथ शिंदे का नाम वहां से कटवा दिया गया।
सत्तारूढ़ दल की महिला विधायक का फूटा गुस्सा
इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे के बीच बीजेपी की अपनी ही विधायक मंदा म्हात्रे ने भी अपनी ही पार्टी के मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि संशोधित निमंत्रण पत्र में गलत तरीके से सारा श्रेय अकेले गणेश नाईक को देने की कोशिश की गई है। पत्र में भ्रामक रूप से यह दर्शाया गया कि इन परियोजनाओं के लिए पूरा वित्तीय सहयोग नाईक के मंत्रालयी कोटे से जारी हुआ है। म्हात्रे ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकारी स्तर पर काम ऐसा होना चाहिए जिससे जनप्रतिनिधियों का मान-सम्मान सुरक्षित रहे, लेकिन यहां ऐसा नहीं हो रहा है। उन्होंने दर्द बयां करते हुए कहा कि विधायक होने के बावजूद उन्हें ऐसे कार्यक्रमों में दरकिनार कर दिया जाता है और वे अब इस तानाशाही रवैये से तंग आ चुकी हैं।
काले झंडे और वॉक आउट से गरमाई सियासत
भाजपा विधायक मंदा म्हात्रे ने वन मंत्री गणेश नाईक के इस एकाधिकार का कड़ा विरोध करते हुए बीच में ही कार्यक्रम से वॉक आउट कर दिया। दूसरी तरफ, अपने नेता के इस तरह हुए अपमान से भड़के शिवसेना कार्यकर्ताओं ने नागरिक स्वास्थ्य केंद्र के उद्घाटन स्थल के ठीक बाहर मुख्य मार्ग को जाम कर दिया और वहां पहुंचे मुख्य अतिथि गणेश नाईक को काले झंडे दिखाए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ठाणे जिले के पालक मंत्री एकनाथ शिंदे के पक्ष में जोरदार नारेबाजी की और निगम प्रशासन के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
शरद पवार को NDA में आने का न्योता, रामदास अठावले बोले- 'अगर चाहें तो...'
15 Jun, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र के सियासी हलकों में इन दिनों विपक्षी दल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के कांग्रेस में विलय होने की अफवाहें तेजी से उड़ रही हैं। हाल ही में विपक्षी गठबंधन के प्रमुख नेताओं ने यह सुझाव दिया था कि देश में सत्तापक्ष के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा तैयार करने के लिए क्षेत्रीय दलों को कांग्रेस के साथ आ जाना चाहिए। इन तमाम कयासों के बीच केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI-A) के अध्यक्ष रामदास अठावले ने एक बड़ा और दिलचस्प बयान दिया है। अठावले ने वरिष्ठ राजनेता शरद पवार को नसीहत देते हुए कहा है कि उन्हें कांग्रेस के पाले में जाने के बजाय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बन जाना चाहिए।
कांग्रेस की घटती ताकत का दावा और एनडीए में आने का न्योता
रामदास अठावले ने कहा कि एक समय था जब उन्होंने खुद शरद पवार को अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में करने का सुझाव दिया था, लेकिन अब परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। उनके मुताबिक, मौजूदा दौर में कांग्रेस वैसी शक्तिशाली पार्टी नहीं रह गई है और अब उसमें पहले जैसा राजनीतिक दम नहीं बचा है। ऐसे में शरद पवार के लिए सबसे समझदारी भरा कदम यही होगा कि वह अपने राजनीतिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए एनडीए खेमे में शामिल होने का फैसला करें।
शरद पवार को आरपीआई में विलय करने का तंज और राउत का पुराना बयान
केंद्रीय मंत्री अठावले ने अपने चिरपरिचित अंदाज में चुटकी लेते हुए यह भी कह दिया कि यदि शरद पवार को भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा या नीतियों से कोई व्यक्तिगत परहेज है, तो उनके पास एक और विकल्प मौजूद है। वे चाहें तो अपनी पार्टी एनसीपी (एसपी) का विलय सीधे उनकी पार्टी आरपीआई (अठावले) में कर सकते हैं। गौरतलब है कि इससे पहले शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने ममता बनर्जी की टीएमसी और शरद पवार की पार्टी जैसे क्षेत्रीय संगठनों को कांग्रेस के साथ विलय करने की वकालत की थी ताकि केंद्र सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी की जा सके।
क्षेत्रीय दलों की भूमिका और महाराष्ट्र की भावी राजनीति पर असर
संजय राउत ने पहले यह उम्मीद जताई थी कि शरद पवार को इन सभी छोटे और प्रादेशिक दलों को कांग्रेस के झंडे तले एकजुट करने में एक मार्गदर्शक की भूमिका निभानी चाहिए। हालांकि, अठावले के इस नए बयान ने इस पूरे विमर्श को एक नया मोड़ दे दिया है। महाराष्ट्र की राजनीति के जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले इस तरह की बयानबाजी और विलय की अटकलें राज्य के राजनैतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे आने वाले दिनों में गठबंधन के स्वरूप में बदलाव भी देखने को मिल सकता है।
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