महाराष्ट्र
मंगेतर से 2004 कॉल्स, 238 घंटे की बातचीत... जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
27 Jun, 2026 10:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे: महाराष्ट्र की सबसे चर्चित मर्डर मिस्ट्री—'केतन अग्रवाल हत्याकांड'—में हर बीतते दिन के साथ ऐसे खुलासे हो रहे हैं जो किसी बॉलीवुड सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म को भी पीछे छोड़ दें। रियल एस्टेट कारोबारी केतन की हत्या के आरोप में उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसका प्रेमी चेतन चौधरी इस वक्त पुलिस की गिरफ्त में हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने अब उस 'क्रिकेट कनेक्शन' और उन डिजिटल सबूतों की कड़ियों को जोड़ लिया है, जिन्होंने इस रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात की पटकथा लिखी थी। आइए परत-दर-परत समझते हैं कि कैसे एक क्रिकेट मैच से शुरू हुआ यह सिलसिला लोहगढ़ किले में खूनी अंजाम तक जा पहुंचा।
क्रिकेट ग्राउंड से हुई थी 'कातिल इश्क' की शुरुआत
पुलिस तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि 19 साल की सिया गोयल और मुख्य आरोपी चेतन चौधरी पहली बार कहां और कैसे मिले थे। जांच के मुताबिक, सिया की मुलाकात चेतन से उसके सगे भाई साहिल गोयल के जरिए हुई थी। साहिल और चेतन अक्सर एक साथ क्रिकेट खेला करते थे।
सिया कई बार अपने भाई का मैच देखने ग्राउंड पर जाया करती थी, जहां उसकी नजरें पहली बार चेतन से मिलीं। इसके बाद साल 2025 में एक दोस्त की दिवाली पार्टी के दौरान दोनों की दोबारा मुलाकात हुई, जिसके बाद दोस्ती धीरे-धीरे प्यार और फिर एक खतरनाक सनक में बदल गई।
6 महीने, 2004 कॉल्स और 238 घंटे की बातचीत!
जब पुलिस की साइबर सेल ने दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकाला, तो अधिकारी भी सन्न रह गए।
कॉल काउंट: इस साल जनवरी से लेकर अब तक दोनों के बीच 2,004 बार फोन पर बात हुई।
समय: दोनों ने कुल मिलाकर 238 घंटे फोन पर गुजारे।
इस बेतहाशा बातचीत से साफ है कि दोनों किस कदर एक-दूसरे के संपर्क में थे। इसी सिलसिले में पुणे पुलिस ने सिया के भाई साहिल गोयल को थाने बुलाकर शुक्रवार को करीब 10 घंटे तक मैराथन पूछताछ की। पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या साहिल को अपनी बहन और दोस्त के इस अफेयर की भनक पहले से थी या नहीं।
मर्डर से 24 घंटे पहले कैफे में बना 'डेथ प्लान'
केतन अग्रवाल की हत्या 18 जून को लोहगढ़ किले की पहाड़ियों में की गई थी। लेकिन इस खौफनाक वारदात से ठीक एक दिन पहले यानी 17 जून को पुणे के लुल्लानगर इलाके के एक नामचीन कैफे में एक 'सीक्रेट मीटिंग' हुई थी।
सिया और चेतन दोपहर 4:30 से 5:30 बजे तक, करीब एक घंटे तक उस कैफे में आमने-सामने बैठे थे। पुलिस को पुख्ता अंदेशा है कि इसी 60 मिनट की मुलाकात के दौरान केतन को रास्ते से हटाने का फाइनल ब्लूप्रिंट तैयार किया गया था। पुलिस अब उस कैफे के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को अपने कब्जे में लेकर सबूत खंगाल रही है।
सबूत मिटाने की शातिर चाल: रिसाइकल बिन तक किया साफ
केतन को मौत के घाट उतारने के बाद दोनों ने कानून की आंखों में धूल झोंकने की पूरी कोशिश की। वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद सिया और चेतन ने अपने मोबाइल से सारे व्हाट्सएप चैट्स, इंस्टाग्राम मैसेजेस और कॉल लॉग्स डिलीट कर दिए।
शातिरपंती की हद तो तब हो गई जब उन्होंने पकड़े जाने के डर से फोन के 'रिसाइकल बिन' और 'ट्रैश फोल्डर' को भी पूरी तरह क्लियर कर दिया ताकि पुलिस डेटा रिकवर न कर सके। हालांकि, कातिल चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून से नहीं बच सकता। फिलहाल फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की एक स्पेशल टीम इन डिलीटेड चैट्स को रिकवर करने में जुट गई है, जिसके आते ही इस हत्याकांड का हर एक राज पूरी तरह बेनकाब हो जाएगा।
'मैंने 1 करोड़ रुपये और चांदी की ईंट दान की थी', संजय राउत ने मांगा जवाब
26 Jun, 2026 04:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अयोध्या: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान की चोरी का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। इस संवेदनशील प्रकरण में 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' की शिकायत पर पुलिस ने आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। वहीं दूसरी ओर, इस विवाद के बीच राम मंदिर को दान में मिले सोने-चांदी के आभूषणों की सुरक्षा को लेकर भी तीखे सवाल उठने लगे हैं। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मंदिर ट्रस्ट पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया है कि शिवसेना द्वारा दान की गई 4 किलो चांदी की ईंट गायब है।
शिवसेना का बड़ा हमला: "उद्धव ठाकरे ने दी थी 4 किलो चांदी की ईंट, सालों बाद भी नहीं मिली रसीद"
सांसद संजय राउत ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट साझा करते हुए मंदिर प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा, "अयोध्या में प्रभु श्री राम के मंदिर निर्माण के लिए शिवसेना की ओर से भेंट की गई 4 किलो चांदी की ईंट के गायब होने की बातें सामने आ रही हैं, जो बेहद चिंताजनक है।" राउत ने आगे कहा कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने हजारों शिवसैनिकों और पूज्य संतों की गरिमामयी उपस्थिति में खुले दिल से 1 करोड़ रुपये की नकद राशि और एक पवित्र चांदी की ईंट समर्पित की थी। लेकिन विडंबना देखिए कि इतने साल बीत जाने के बाद भी ट्रस्ट की तरफ से इसकी कोई आधिकारिक रसीद या विवरण नहीं दिया गया है। उन्होंने मांग की है कि यह कीमती ईंट कहां है, इसकी पूरी पारदर्शिता के साथ जांच होनी चाहिए।
ट्रस्ट की तहरीर पर 8 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज, SIT की रिपोर्ट के बाद एक्शन
चढ़ावा चोरी के इस बड़े मामले में कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत (तहरीर) के आधार पर अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि थाने में आठ लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा पंजीकृत किया गया है। पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव और मनीष कुमार यादव को आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा कुछ अज्ञात लोगों के नाम भी शामिल हैं। विशेष जांच दल (SIT) द्वारा सरकार को सौंपी गई शुरुआती रिपोर्ट में की गई सख्त सिफारिशों के बाद इन आरोपियों को पुलिस हिरासत में ले लिया गया है और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है।
सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश पर गठित हुई थी एसआईटी, बोले- दोषी बख्शे नहीं जाएंगे
राम मंदिर जैसे आस्था के बड़े केंद्र में दान राशि और चढ़ावे में हेराफेरी की भनक लगते ही मंदिर ट्रस्ट ने राज्य सरकार से एक उच्च स्तरीय और विशेष जांच की मांग की थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत संज्ञान लिया और इस पूरे घपले के पर्दाफाश के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मंजूरी दी थी।
मुख्यमंत्री कार्यालय का आधिकारिक बयान: राज्य सरकार द्वारा जारी सूचना के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोटूक शब्दों में कहा है कि इस पूरे प्रकरण में एसआईटी की जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, जिससे 'दूध का दूध और पानी का पानी' साफ हो जाएगा। प्रभु राम के दरबार में ऐसी धांधली करने वाले किसी भी दोषी को कतई बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ ऐसी कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी जो मिसाल बनेगी।
फिलहाल, पुलिस और एसआईटी की टीमें पकड़े गए आरोपियों के बैंक खातों, मंदिर के सीसीटीवी कैमरों और दान के रिकॉर्ड खंगालने में जुटी हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह चोरी कब से चल रही थी और इसमें कितने लाख या करोड़ रुपये का गबन हुआ है।
मंगेतर हत्याकांड में नया खुलासा, आरोपी सिया ने पुलिस को गिनाईं हत्या की वजहें
26 Jun, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे: महाराष्ट्र के मशहूर लोहगढ़ किले में पुणे के युवा कारोबारी केतन अग्रवाल की सनसनीखेज हत्या के मामले में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस कस्टडी में मुख्य आरोपी और केतन की मंगेतर सिया गोयल ने पूछताछ के दौरान एक ऐसा राज उगला है, जिसने तफ्तीश कर रही टीम को भी हैरत में डाल दिया है। सिया ने कबूल किया है कि केतन के सिर पर बाल नहीं थे और वह विग लगाता था, साथ ही वह थोड़ा हकलाता भी था। सिया को केतन की ये बातें बिल्कुल पसंद नहीं थीं और वह इस शादी से किसी भी कीमत पर पीछे हटना चाहती थी, जिसके चलते उसने अपने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर मंगेतर को रास्ते से हटाने का खौफनाक प्लान तैयार किया।
शादी तोड़ने के बजाय हत्या का रास्ता लगा आसान, सीसीटीवी न होने का उठाया फायदा
पूछताछ में जब पुलिस ने सिया से पूछा कि उसने शादी से साफ इनकार क्यों नहीं किया, तो उसने बताया कि वह ऐसा करके अपने परिवार वालों को ठेस नहीं पहुँचाना चाहती थी। उसे परिवार को समझाने के बजाय केतन की हत्या करने का रास्ता ज्यादा आसान लगा। सिया ने लोहगढ़ किले के उस ट्रेकिंग रूट को इसीलिए चुना क्योंकि वहाँ कोई सीसीटीवी (CCTV) कैमरा नहीं लगा था। उसका प्लान था कि वह केतन को पहाड़ी से नीचे धक्का दे देगी, जिससे यह पूरा मामला एक हादसा (ट्रेकिंग के दौरान पैर फिसलना) नजर आए और किसी को उस पर शक भी न हो।
सलाखों के पीछे अकेली पड़ी कातिल मंगेतर, मायके से कोई मिलने तक नहीं आया
लोनावाला ग्रामीण पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद से सिया गोयल से मिलने या उसकी सुध लेने अब तक पुलिस थाने कोई नहीं पहुँचा है। सिया के परिवार में उसके माता-पिता और एक भाई हैं, लेकिन इस शर्मनाक वारदात के बाद परिजनों ने उससे पूरी तरह दूरी बना ली है। वहीं दूसरी ओर, इस हत्याकांड के सह-आरोपी और सिया के प्रेमी चेतन चौधरी के पिता अपने बेटे का अपडेट लेने के लिए पुलिस स्टेशन पहुंचे थे।
भाई से पुलिस की पूछताछ, डमी बॉडी के जरिए रीक्रिएट किया जाएगा क्राइम सीन
मामले की गहराई से जांच के लिए लोनावाला ग्रामीण पुलिस ने अब सिया गोयल के भाई को थाने बुलाकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या सिया ने कभी घर में इस शादी को लेकर कोई आपत्ति जताई थी या नहीं।
क्राइम सीन रीक्रिएशन: चूंकि इस मामले में अधिकतर सबूत परिस्थितिजन्य (Circumstantial) हैं, इसलिए पुणे ग्रामीण पुलिस जल्द ही लोहगढ़ किले पर मर्डर सीन को रीक्रिएट करने जा रही है। इसके लिए एक डमी बॉडी (पुतले) का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे यह सटीक पता लगाया जा सके कि आरोपियों की पोजीशन क्या थी और केतन को किस एंगल से नीचे फेंका गया था।
'अगर मेरी बेटी गुनहगार है तो उसे भी मत बख्शना', सिया गोयल के पिता का बयान
26 Jun, 2026 06:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में कारोबारी केतन अग्रवाल की संदिग्ध मौत के मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। इस बीच, मुख्य आरोपी सिया गोयल के पिता प्रवीण गोयल का एक बड़ा और भावुक बयान सामने आया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि इस खौफनाक वारदात में जो भी दोषी हो—चाहे उनकी खुद की बेटी ही क्यों न हो—उसे सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।
"केतन मुझे अपने बेटे जैसा प्यारा था"
प्रवीण गोयल ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "यह बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली घटना है। हमें तो आज भी इस बात पर यकीन नहीं हो रहा है। अग्रवाल परिवार ने अपना लड़का खोया है, लेकिन केतन से मुझे उनके परिवार से भी ज्यादा प्यार था। इतने कम समय में उससे ऐसा लगाव हो गया था कि मैं उसे अपना बेटा समझने लगा था। आज हमने एक बेहद होनहार और अच्छा लड़का खो दिया है, जिसका हमें जिंदगी भर दुख रहेगा।"
बेटी के लिए भी मांगी मौत की सजा
अपनी बेटी के इस अपराध में शामिल होने की बात पर दुखी पिता ने कहा, "एक पिता के तौर पर मैं समझ सकता हूँ कि अग्रवाल परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा है। मेरी पीड़ा यही है कि जिसने भी इस घिनौनी साजिश को अंजाम दिया है, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिले। हमारा केतन जिस तरह किले से नीचे गिराया गया, इस हत्या के आरोपियों को भी—चाहे वह मेरी सगी बेटी ही क्यों न हो—उसी किले से नीचे धक्का दे देना चाहिए।"
शादी को लेकर खुश थी सिया, अफेयर की नहीं थी जानकारी
प्रवीण गोयल ने बताया कि दोनों परिवारों के बीच सालों से अच्छे और संस्कारी संबंध हैं। उन्होंने कहा, "जब से दोनों का रिश्ता तय हुआ था, सिया हमेशा खुश रहती थी। वह अक्सर कहती थी कि केतन बहुत अच्छा है और उसे बहुत प्यार करने वाले सास-ससुर और ननद मिले हैं। हमें दोनों की शादी से बहुत उम्मीदें थीं।"
जब उनसे सिया और चेतन के प्रेम संबंधों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "हमें इस बारे में दूर-दूर तक कोई जानकारी नहीं थी। सिया एक साधारण 19 साल की लड़की है, वह ऐसा खौफनाक कदम उठा सकती है, यह सोचना भी नामुमकिन था। मैंने कभी उस चेतन का चेहरा तक नहीं देखा और न ही कभी उसका नाम सुना था।"
छिपाई गई बातों पर जताई निराशा
केतन के परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों (कि लड़की के परिवार को सब पता था) पर सफाई देते हुए प्रवीण गोयल ने कहा, "अगर हमें ज़रा भी भनक होती, तो हम खुद उन्हें सचेत कर देते। आज शायद यह काला दिन देखने को नहीं मिलता।" उन्होंने आगे कहा कि अगर सिया ने केतन को अपने अफेयर के बारे में पहले बताया था, तो केतन को भी यह बात अपने परिवार से साझा करनी चाहिए थी ताकि समय रहते इस रिश्ते को रोका जा सकता और एक मासूम की जान बच जाती। फिलहाल पुलिस इस मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है।
महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल, पार्टी टूट की खबरों पर शरद पवार का जवाब
25 Jun, 2026 05:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में मचे घमासान और लगातार जारी उठापटक के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) के मुखिया शरद पवार ने अपनी पार्टी में फूट की तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है। शिवसेना (यूबीटी) में हुई बड़ी टूट के बाद से ही मीडिया और सियासी हल्कों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि अब शरद पवार के गुट में भी बगावत हो सकती है। इन सभी अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए एनसीपी प्रमुख ने साफ कहा, "पार्टी में टूट की ये सभी चर्चाएं पूरी तरह से बेबुनियाद और बेमतलब हैं। हमारा एक भी विधायक या सांसद पार्टी छोड़कर कहीं नहीं जा रहा है।" इससे पहले पार्टी प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने भी स्पष्ट किया था कि हमारे सभी 8 सांसद और 10 विधायक शरद पवार के नेतृत्व में पूरी तरह एकजुट हैं और विपक्ष द्वारा उन्हें जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है।
एमवीए (MVA) की बैठक से 23 विधायक नदारद; शरद पवार और जयंत पाटिल के न पहुंचने से खड़े हुए सवाल
महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के बीच महाविकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन की आंतरिक कलह भी अब खुलकर सामने आने लगी है। सत्र के दौरान विपक्षी रणनीति तय करने के लिए महाविकास अघाड़ी के सहयोगी दलों की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में कुल 60 विधायकों में से केवल 37 विधायक ही पहुंचे, जबकि 23 विधायक गायब रहे। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि खुद शरद पवार और वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल (निजी कारणों का हवाला देकर) इस बैठक में शामिल नहीं हुए। इतनी बड़ी संख्या में शीर्ष नेताओं और विधायकों की अनुपस्थिति ने गठबंधन के भीतर एक बार फिर बड़ी दरार और टूट के आसारों को हवा दे दी है।
उद्धव ठाकरे का सहयोगियों से तीखा सवाल: 'हम केवल दिखाने के लिए साथ हैं या वाकई में एकजुट हैं?'
बैठक में विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की इस बेरुखी पर शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे ने बैठक के दौरान सहयोगियों को आड़े हाथों लेते हुए तीखा सवाल दागा। उन्होंने कहा, "हम बाहर तो महाविकास अघाड़ी के रूप में एक साथ होने का बड़ा दावा करते हैं, लेकिन क्या जमीनी हकीकत में हम वाकई एकजुट हैं?" ठाकरे ने सभी दलों को सचेत करते हुए कहा कि यदि आगामी चुनावों में मजबूती से लड़ना है, तो हमें आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होकर ही काम करना होगा। इसके साथ ही उन्होंने मानसून सत्र के दौरान सदन के भीतर जनता से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष को एक सुर में सरकार को घेरने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
इमरजेंसी पढ़ाने के फैसले पर कांग्रेस का विरोध, कहा- इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा
25 Jun, 2026 03:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने एक बड़ा बदलाव करते हुए पहली बार कक्षा 9वीं की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में वर्ष 1975 से 1977 के बीच देश में रहे आपातकाल (Emergency) पर एक विशेष खंड (सेक्शन) शामिल किया है। इस नए अध्याय में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आई "सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक" के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके साथ ही पाठ्यक्रम में नागरिकों के मौलिक अधिकारों के निलंबन, प्रेस पर लगाई गई सेंसरशिप और तत्कालीन जयप्रकाश नारायण (JP) आंदोलन का भी विस्तृत उल्लेख किया गया है।
इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने की हो रही कोशिश, बच्चों को गुमराह कर रही सरकार: विजय वडेट्टीवार
एनसीईआरटी द्वारा उठाए गए इस कदम पर अब राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो गई है। महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक विजय वडेट्टीवार ने इस नए पाठ्यक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार और शिक्षा विभाग को आड़े हाथों लिया है। वडेट्टीवार ने मीडिया से औपचारिक बातचीत में आरोप लगाया, "यह स्कूली बच्चों को इतिहास के नाम पर गलत बातें सिखाने की कोशिश है। इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करना, अफवाहें फैलाना और नई पीढ़ी को गलत दिशा में ले जाना ही इस कदम का मुख्य उद्देश्य है।" उन्होंने तर्क दिया कि उस समय देश में जो विषम परिस्थितियां थीं, उनके मद्देनजर आपातकाल की आधिकारिक घोषणा नियमानुसार की गई थी, इसे किसी गुप्त एजेंडे के तहत लागू नहीं किया गया था।
आज देश में चल रहा है 'अघोषित आपातकाल'; कांग्रेस नेता का भाजपा सरकार पर तीखा तंज
कांग्रेस विधायक ने मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य की तुलना करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा, "हमारे दृष्टिकोण से, देश में आज जो हालात हैं, वह 'अघोषित आपातकाल' जैसे हैं। आज कोई भी व्यक्ति वर्तमान सरकार की नीतियों के खिलाफ खुलकर अपनी आवाज बुलंद नहीं कर सकता और न ही खुलकर बात कर सकता है। यह स्थिति वर्तमान दौर की सबसे बड़ी कड़वी सच्चाई है।"
एआई (AI) और तकनीक के दौर में आज की पीढ़ी बहुत स्मार्ट, खुद करेगी तथ्यों की जांच
अपने बयान के अंत में विजय वडेट्टीवार ने आज की युवा पीढ़ी और स्कूली बच्चों की समझदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे बहुत होशियार और जागरूक हैं। उनके पास केवल स्कूल की किताबें ही नहीं, बल्कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट और सूचनाओं के कई अन्य आधुनिक स्रोत मौजूद हैं। कांग्रेस नेता ने भरोसा जताया कि नई पीढ़ी को किताबों के जरिए जो कुछ भी परोसा जाएगा, वे उसे बिना सोचे-समझे सच नहीं मानेंगे, बल्कि खुद डिजिटल माध्यमों से तथ्यों की गहराई से जांच-पड़ताल (फैक्ट चेक) करेंगे।
मासूम से दरिंदगी के दोषी का बेखौफ रवैया, अदालत ने मांगा सजा पर जवाब
25 Jun, 2026 02:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे। महाराष्ट्र के पुणे जिले के भोर तालुका अंतर्गत नसरपुर में हुई चार वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी नृशंस हत्या के मामले में पुणे डिस्ट्रिक्ट सेशंस कोर्ट ने गुरुवार (25 जून) को ऐतिहासिक तेजी दिखाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। राज्य के न्यायिक इतिहास में यह संभवतः सबसे तेज गति से चलने वाला मुकदमा बन गया है, जिसमें घटना के मात्र ढाई महीने के भीतर विशेष न्यायाधीश एस.आर. सालुंखे की अदालत ने फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने आरोपी भीमराव कांबले को दोषी पाया है, जिसके खिलाफ दर्ज धाराओं में से दो में मृत्युदंड (फांसी) और अन्य में आजीवन कारावास का प्रावधान है। अदालत दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद जल्द ही सजा की अवधि का निर्धारण करेगी।
गौशाला में ले जाकर पत्थर से कुचला था सिर; सीसीटीवी फुटेज ने खोली कातिल की पोल
यह दिल दहला देने वाला मामला 1 मई (महाराष्ट्र दिवस) का है, जब गर्मी की छुट्टियां मनाने अपनी नानी के घर आई एक चार साल की मासूम बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। तभी पड़ोस में रहने वाले 65 वर्षीय भीमराव कांबले ने बच्ची को बहला-फुलाकर एक गौशाला में ले जाकर उसके साथ दरिंदगी की। पकड़े जाने के डर से उसने मासूम के सिर पर भारी पत्थर मारकर उसकी हत्या कर दी और शव को गोबर के ढेर में छुपा दिया। दोपहर बाद जब परिजनों ने बच्ची की तलाश शुरू की, तो उसका शव बरामद हुआ। इलाके में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों को खंगालने पर आरोपी बच्ची का हाथ पकड़कर गौशाला की तरफ ले जाता हुआ साफ दिखाई दिया, जो अदालत में सबसे बड़ा सबूत बना।
कोर्ट में भी आरोपी को नहीं रहा कोई पछतावा, अभियोजन पक्ष ने की फांसी की मांग
सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में बेहद तीखी बहस देखने को मिली। विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) एडवोकेट मिलिंद पवार ने मीडिया को बताया कि पूरे ट्रायल के दौरान दोषी कांबले के चेहरे पर जरा सा भी पछतावा या अफसोस नजर नहीं आया। जब न्यायाधीश ने उसे कटघरे में खड़ा कर पूछा कि इस अपराध के लिए उसे क्या सजा दी जानी चाहिए, तो वह झूठी कहानियां गढ़ने लगा और खुद को बेकसूर बताने लगा। अभियोजन पक्ष ने इसे 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) मामला बताते हुए दोषी को फांसी की सजा देने की पुरजोर मांग की है। सरकारी वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि आरोपी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और इस घिनौने कृत्य के कारण उसका खुद का परिवार भी उसके बचाव में नहीं आया।
बचाव पक्ष ने उम्र का दिया हवाला; पूर्व में भी दो मामलों में बच निकला था आरोपी
दूसरी तरफ, दोषी के वकील ने कोर्ट से रहम की अपील करते हुए दलील दी कि घटनाक्रम की कुछ कड़ियां पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी की उम्र 65 वर्ष है, इसलिए उसकी वृद्ध अवस्था को ध्यान में रखते हुए फांसी के बजाय आजीवन कारावास की सजा दी जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि इस दरिंदे का यह तीसरा अपराध है, इससे पहले भी वह दो गंभीर मामलों में सबूतों के अभाव के कारण कानून के शिकंजे से बच निकला था। घटना के वक्त आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़कर पहले उसकी जमकर धुनाई की थी और फिर पुलिस के हवाले किया था। अब पूरे राज्य की नजरें कोर्ट द्वारा सुनाई जाने वाली अंतिम सजा पर टिकी हुई हैं।
हत्याकांड के आरोपी तक पहुंची पुलिस, पिता से पूछताछ में मिली जानकारी
24 Jun, 2026 06:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। मायानगरी की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन में सफर के दौरान हुए एक खौफनाक हत्याकांड के आरोपी को रेलवे पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की विशेष टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी को कुर्ला इलाके से धर दबोचा। इस सनसनीखेज वारदात को सुलझाने और कातिल तक पहुँचने के लिए रेलवे पुलिस ने अलग-अलग 6 टीमों का गठन किया था। पकड़े गए आरोपी की पहचान 30 वर्षीय रोशन सुवर्णा के रूप में हुई है। पुलिस ने जब आरोपी के पिता को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, तब जाकर आरोपी की सटीक लोकेशन का पता चला और उसे गिरफ्तार किया जा सका।
लोकल का दरवाजा बंद करने को लेकर शुरू हुआ था विवाद
यह खौफनाक वारदात कांदिवली और बोरीवली स्टेशनों के बीच की है। बताया जा रहा है कि उस समय तेज बरसात हो रही थी, जिसके चलते लोकल ट्रेन का दरवाजा बंद करने की बात को लेकर यात्रियों के बीच आपस में कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते यह मामूली सी बहस खूनी संघर्ष में बदल गई। आरोपी रोशन सुवर्णा ने तैश में आकर अपने पास रखा चाकू निकाला और मयंक नाम के सह-यात्री पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। चाकू लगने से मयंक लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा। वारदात को अंजाम देने के बाद, जैसे ही ट्रेन की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई, आरोपी कूदकर मौके से रफूचक्कर हो गया।
घायल को बचाने के लिए रेलवे ने झोंकी ताकत
ट्रेन के भीतर खून-खराबा होने की खबर मिलते ही आरपीएफ (RPF) और जीआरपी (GRP) के सुरक्षाकर्मी तुरंत उस कोच में पहुँचे और गंभीर रूप से जख्मी मयंक को संभाला। आपातकालीन चिकित्सा टीम और स्ट्रेचर को तुरंत मौके पर बुलाया गया। घायल युवक को बिना वक्त गंवाए बोरीवली स्टेशन के इमरजेंसी मेडिकल रूम में ले जाया गया। वहां प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों की सलाह पर सुरक्षाकर्मियों की निगरानी में उसे इलाज के लिए कांदिवली के शताब्दी अस्पताल भेजा गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
जांच एजेंसियों को सौंपे गए सीसीटीवी फुटेज
इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद रेलवे प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया। देर रात करीब 1 बजे मुंबई सेंट्रल के एडीआरएम (ADRM) और वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त खुद हालात का जायजा लेने बोरीवली स्टेशन पहुँचे। पश्चिम रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक, घटना की जानकारी मिलते ही उनके इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया था। सुरक्षाबलों और मेडिकल स्टाफ ने मिलकर घायल को फौरन अस्पताल पहुँचाने का काम किया। साथ ही, पुलिस ने ट्रेन और स्टेशन पर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण सबूतों को कब्जे में लेकर जांच एजेंसियों के हवाले कर दिया है, जिससे आरोपी को सजा दिलाई जा सके।
विवाह निमंत्रण पत्र में दूल्हा-दुल्हन की उम्र का होगा खुलासा
24 Jun, 2026 03:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से खत्म करने के लिए राज्य सरकार एक बेहद कड़ा और अनोखा कदम उठाने की योजना बना रही है। सरकार अब राजस्थान मॉडल को अपनाने की तैयारी में है, जिसके तहत शादी के निमंत्रण पत्रों (विवाह पत्रिकाओं) पर होने वाले दूल्हा और दुल्हन की जन्मतिथि (Date of Birth) को प्रिंट कराना जरूरी किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने से विवाह के समय लड़के और लड़की की सही उम्र का पता लगाना बेहद आसान हो जाएगा, जिससे कम उम्र में होने वाली शादियों पर प्रभावी रूप से रोक लगाई जा सकेगी।
विधानसभा में हुआ बड़ा खुलासा
इस नए प्रस्ताव को लेकर विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक अतुल भातखलकर द्वारा उठाए गए एक सवाल के दौरान बड़ी जानकारी सामने आई। इसका जवाब देते हुए राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने सदन को बताया कि राजस्थान में इस नियम के लागू होने के बाद काफी सकारात्मक नतीजे देखने को मिले हैं। वहाँ इस पहल के जरिए बाल विवाह के मामलों में काफी गिरावट दर्ज की गई है। इसी सफल प्रयोग को आधार बनाकर अब महाराष्ट्र सरकार भी इसे राज्य में लागू करने पर गंभीरता से मंथन कर रही है।
बाल अधिकार आयोग ने दी मंजूरी
कैबिनेट मंत्री अदिति तटकरे ने यह भी स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की तरफ से भी सरकार को इस संबंध में एक औपचारिक सिफारिश भेजी जा चुकी है। आयोग ने अपने सुझाव में कहा है कि शादी के कार्ड पर जन्मतिथि दर्ज करना अनिवार्य होना चाहिए, ताकि विवाह समारोह से पहले ही वर-वधू की आयु का सही सत्यापन (Verification) किया जा सके।
प्रिंटिंग प्रेस और मैरिज गार्डन की भी तय होगी जिम्मेदारी
इस नए कानून के दायरे में सिर्फ वर-वधू का परिवार ही नहीं आएगा, बल्कि इसके नियम बेहद सख्त होंगे। प्रस्तावित ब्लूप्रिंट के अनुसार, शादी का कार्ड छापने वाले प्रिंटिंग प्रेस, विवाह स्थलों (मंगल कार्यालयों) और इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े अन्य संस्थानों की भी कानूनी जवाबदेही तय की जाएगी। यदि किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी कर नाबालिग की शादी कराई जाती है या गलत जानकारी छापी जाती है, तो जिम्मेदार पाए जाने वाले सभी पक्षों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन को निगरानी रखने में मिलेगी मदद
सरकार का मुख्य उद्देश्य इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। अधिकारियों का मानना है कि निमंत्रण पत्र पर जन्मतिथि दर्ज होने से स्थानीय प्रशासन, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संबंधित विभागों को संदिग्ध मामलों की जानकारी समय रहते मिल जाएगी। इससे ऐन वक्त पर होने वाले बाल विवाहों को आसानी से रुकवाया जा सकेगा। सरकार इस अहम और दूरगामी प्रस्ताव पर बहुत जल्द ही अंतिम मुहर लगा सकती है।
'हिंदुत्व की राह पर आए सभी', उद्धव गुट के सांसदों पर नितेश राणे की प्रतिक्रिया
24 Jun, 2026 02:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। इस बड़े घटनाक्रम पर महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा (BJP) के कद्दावर नेता नितेश राणे ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पाला बदलने वाले सभी सांसदों के इस फैसले का पुरजोर स्वागत करते हुए कहा कि इन नेताओं ने आखिरकार 'हिंदुत्व' के सही मार्ग को चुना है। गौरतलब है कि उद्धव गुट के इन छह सांसदों ने एक दिन पहले ही औपचारिक रूप से शिंदे गुट का दामन थामा था।
इन बड़े चेहरों ने छोड़ा उद्धव ठाकरे का साथ
एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली मूल शिवसेना में शामिल होने वाले प्रमुख चेहरों में संजय उत्तमराव देशमुख, संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे, ओमप्रकाश भूपालसिंह निंबालकर, संजय दीना पाटिल और नागेश बापूराव पाटिल अष्टिकर के नाम शामिल हैं। इन दिग्गज नेताओं के अचानक पार्टी छोड़ने से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट को बहुत बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। इस टूट से उद्धव गुट के उस दावे को भी भारी नुकसान पहुँच रहा है जिसमें वे खुद को 'असली शिवसेना' बताते रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का पक्ष अब और मजबूत होता दिख रहा है।
उद्धव गुट की नीतियों पर साधा तीखा निशाना
मीडिया से बातचीत के दौरान भाजपा नेता नितेश राणे ने उद्धव ठाकरे की राजनीतिक नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। राणे ने विवादित बयान देते हुए कहा कि इन सांसदों को अब यह पूरी तरह से महसूस हो चुका था कि उद्धव ठाकरे की विचारधारा में कितना बदलाव आ चुका है, इसलिए उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी को छोड़कर राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की राह पर आगे बढ़ने का फैसला किया।
UCC पर दो टूक: 'देश में शरिया नहीं, संविधान चलेगा'
इस दौरान नितेश राणे ने देश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने का भी पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने विरोधियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "जो लोग बाबासाहेब के बनाए हमारे देश के संविधान का सम्मान करते हैं, वे यूसीसी का विरोध भला कैसे कर सकते हैं? क्योंकि संविधान में खुद इसका जिक्र है। यदि कोई हमारे संविधान को मानता है, तो उसे इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।"
राणे ने आगे सख्त लहजे में कहा, "जिन लोगों को देश के कानून से ऊपर शरिया कानून चाहिए, उन्हें ऐसे देशों का रुख कर लेना चाहिए जहाँ यह लागू है। भारत में शरिया कानून के लिए कोई जगह नहीं है; यहाँ सिर्फ हमारे संविधान में लिखी बातें ही लागू की जाएँगी।" भाजपा नेता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई बड़े राज्यों में समान नागरिक संहिता को लेकर बहस बेहद तेज हो चुकी है और कुछ राज्य इसे लागू भी कर चुके हैं।
ट्रेकिंग के दौरान रची गई साजिश, खाई में धकेलकर हत्या का आरोप
23 Jun, 2026 05:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे: मंगेतर ने ही रची थी मर्डर की साजिश, प्रेमी के साथ मिलकर बिजनेसमैन को किले से नीचे धकेला
महाराष्ट्र के रियल एस्टेट कारोबारी केतन विशाल अग्रवाल की मौत के मामले में पुलिस ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। शुरुआत में जिसे महज एक हादसा समझा जा रहा था, वह असल में सोची-समझी हत्या निकली। पुणे पुलिस ने इस सिलसिले में मृतक की मंगेतर और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने केतन को लोहागढ़ किले की गहरी खाई में धक्का देकर मौत के घाट उतारा।
तस्वीर लेते समय पैर फिसलने की गढ़ी गई थी झूठी कहानी
यह सनसनीखेज वारदात 18 जून को सामने आई थी। पुणे जिले के गहुंजे निवासी 26 वर्षीय केतन अग्रवाल का शव किले के पास करीब 400 फीट गहरी खाई से बरामद हुआ था। उस समय मंगेतर सिया गोयल ने लोनावाला ग्रामीण पुलिस को सूचना दी थी कि वे लोग दोस्तों के साथ ट्रैकिंग पर आए थे और तस्वीरें खींचने के दौरान केतन का पैर फिसल गया। पुलिस ने शुरुआत में एक्सीडेंटल डेथ का मामला दर्ज किया था।
उदयपुर के पैलेस में होने वाली थी भव्य शादी
केतन और सिया की सगाई हो चुकी थी और इसी साल दोनों की शादी होने वाली थी। दोनों परिवारों ने शादी को यादगार बनाने के लिए राजस्थान के उदयपुर में एक आलीशान महल (पैलेस) भी बुक कर लिया था और तैयारियां बड़े स्तर पर चल रही थीं।
कैसे हुआ साजिश का पर्दाफाश?
पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक (एसपी) संदीप सिंह गिल ने बताया कि मौत के हालात सामान्य नहीं लग रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने वित्तीय लेन-देन और निजी रिश्तों समेत तमाम एंगल से जांच शुरू की। छानबीन में पता चला कि केतन एक अनुभवी ट्रेकर थे, ऐसे में उनका अचानक फिसलना परिवार के गले नहीं उतरा और उन्होंने शक जताया।
गहन जांच में पुलिस को सुराग मिला कि सिया गोयल का पुणे के कोंढवा निवासी 22 वर्षीय चेतन बाबूलाल चौधरी के साथ प्रेम संबंध था। सिया दरअसल केतन से शादी नहीं करना चाहती थी, क्योंकि केतन उन दोनों के रिश्ते के बीच आ रहा था।
लोहागढ़ किले पर ऐसे दिया वारदात को अंजाम
प्लानिंग: सिया और चेतन ने मिलकर केतन को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया।
बहाना: साजिश के तहत 18 जून 2026 को सिया घूमना-फिरना करने के बहाने केतन को लोहागढ़ किले लेकर पहुंची।
हमला: तय रणनीति के अनुसार प्रेमी चेतन चौधरी भी वहां पहुंच गया। मौका पाकर दोनों ने मिलकर केतन को 400 फीट नीचे खाई में धकेल दिया।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
संदेह के आधार पर स्थानीय अपराध शाखा ने सबसे पहले चेतन चौधरी को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ में जब उसने सच उगला, तो उसकी निशानदेही पर सिया गोयल को भी गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।
केतन के पिता विशाल अग्रवाल की शिकायत पर लोनावाला ग्रामीण पुलिस थाने में हत्या और आपराधिक साजिश का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब घटनाक्रम का सटीक क्रम स्थापित करने के लिए फोरेंसिक सबूत जुटा रही है और यह भी पता लगा रही है कि क्या इस खौफनाक साजिश में कोई और भी मददगार शामिल था।
बागी सांसद की बेटी पहुंची उद्धव ठाकरे के दरबार, महाराष्ट्र की सियासत में नई चर्चा
22 Jun, 2026 01:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में दल-बदल के खेल के बीच एक दिलचस्प पारिवारिक और राजनीतिक विरोधाभास सामने आया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय पाटील ने पाला बदलते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल होने का निर्णय लिया है, लेकिन उनकी इस बगावत के बीच उनकी बेटी राजूल पाटील ने बिल्कुल अलग राह चुनी है। शिवसेना (यूबीटी) से ही पार्षद राजूल पाटील ने मातोश्री पहुंचकर उद्धव ठाकरे से मुलाकात की और संगठन के प्रति अपनी अटूट निष्ठा का संकल्प दोहराया। इस मुलाकात के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पूरी वफादारी के साथ पार्टी में बनी रहेंगी और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में ही जनसेवा का कार्य करती रहेंगी।
पिता के फैसले को बताया निजी और वफादारी पर दी सफाई
बृह्नमुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) की नवनिर्वाचित पार्षद और पार्टी की युवा शाखा 'युवा सेना' की सक्रिय सदस्य राजूल पाटील ने अपने पिता संजय पाटील के बगावती रुख पर बेबाकी से अपनी राय रखी। जब उनसे पिता के इस कदम के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे पूरी तरह से उनका व्यक्तिगत निर्णय करार दिया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार में हर सदस्य को अपने राजनीतिक और व्यक्तिगत फैसले स्वतंत्र रूप से लेने की आजादी रही है। इस स्पष्टीकरण के साथ उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि पिता के राजनीतिक स्टैंड का उनके अपने स्टैंड पर कोई असर नहीं पड़ेगा और वे मजबूती से मूल संगठन के साथ खड़ी हैं।
संजय पाटील को टिकट देने पर उद्धव ठाकरे ने मांगी माफी
सांसद संजय पाटील सहित पार्टी के 6 लोकसभा सदस्यों की इस बड़ी बगावत के बाद उद्धव ठाकरे ने उनके संसदीय क्षेत्र भांडुप में स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस जनसभा में भावुक होते हुए उद्धव ठाकरे ने मतदाताओं से खुले तौर पर माफी मांगी और कहा कि उन्हें संजय पाटील को प्रत्याशी बनाने के अपने पुराने निर्णय पर गहरा अफसोस है। इसके बावजूद, उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए दो टूक लहजे में कहा कि इस तरह के संकटों से उनका और उनकी पार्टी का मनोबल बिल्कुल नहीं टूटा है और वे नए सिरे से संघर्ष करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
भाजपा पर तीखा हमला और कांग्रेस का किया बचाव
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन पर तीखा सियासी हमला बोला। उन्होंने अपने पिता और दिवंगत शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि अविभाजित शिवसेना ने कांग्रेस की नीतियों के खिलाफ लड़ने में अपने तीन दशक खपा दिए, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस ने कभी भी शिवसेना को तोड़ने, उसके सिंबल को हथियाने या पार्टी को पूरी तरह समाप्त करने की साजिश नहीं रची। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्रीय दलों को खत्म करने और उनकी पहचान चुराने का यह दमनकारी काम केवल भाजपा ही कर रही है, जिसका जवाब महाराष्ट्र की जनता आने वाले चुनावों में देगी।
पैठण तालुका में रफ्तार का कहर, एक ही परिवार के चार लोगों की जान गई
22 Jun, 2026 01:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
छत्रपति संभाजीनगर। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के अंतर्गत आने वाले पैठण तालुका से रविवार को एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली सड़क दुर्घटना की खबर सामने आई है। यहाँ के विवाहमांडवा–चौंडाला मार्ग पर एक तेज रफ्तार पिकअप गाड़ी और मोटरसाइकिल के बीच आमने-सामने की भीषण भिड़ंत हो गई। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले एक्सीडेंट में बाइक पर सवार एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और स्थानीय लोग गहरे सदमे में हैं। सूचना पाकर पुलिस प्रशासन की टीम तुरंत घटना स्थल पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित कर शवों को अपने कब्जे में लिया।
साप्ताहिक बाजार से लौटते वक्त काल का ग्रास बना पूरा परिवार
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पीड़ित चव्हाण परिवार पाचोड इलाके में लगने वाले साप्ताहिक हाट-बाजार से घरेलू सामान की खरीदारी करने के बाद अपनी मोटरसाइकिल से खंडाला स्थित पारधी बस्ती में अपने घर वापस लौट रहा था। इसी दौरान रास्ते में सामने से आ रहे एक अनियंत्रित पिकअप वाहन ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। भिड़ंत इतनी जोरदार थी कि मोटरसाइकिल के परखच्चे उड़ गए और उस पर बैठे युवक, दो महिलाओं और एक मासूम बच्ची ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस खौफनाक मंजर को देखकर राहगीरों की रूह कांप गई और देखते ही देखते वहां भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा।
मृतकों की हुई पहचान और पुलिस ने शुरू की वैधानिक कार्रवाई
हादसे की भनक लगते ही पाचोड थाने की पुलिस टीम बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से राहत कार्य शुरू किया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को रास्ते से हटवाकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवाया। छानबीन के दौरान मृतकों की शिनाख्त 30 वर्षीय सिद्धार्थ चव्हाण, उनकी 27 वर्षीय पत्नी पायल सिद्धार्थ चव्हाण, 5 साल की मासूम अंजना सिद्धार्थ चव्हाण और 22 वर्षीय संजना अभिषेक चव्हाण के रूप में की गई है। पुलिस ने परिजनों को सूचित करने के साथ ही दुर्घटना का पंचनामा तैयार कर लिया है और फरार पिकअप चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कानूनी तफ्तीश तेज कर दी है।
पिछले सप्ताह सोलापुर में भी कुएं में गिरी थी गाड़ी, हुई थी 8 की मौत
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से रफ्तार का कहर लगातार मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ रहा है। बीते सप्ताह भी सोलापुर जिले से एक ऐसा ही भीषण हादसा सामने आया था, जहां म्हसवड स्थित सिद्धनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन करने के बाद वापस लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी एक पिकअप गाड़ी अचानक बेकाबू होकर सड़क किनारे बने एक गहरे कुएं में जा गिरी थी। उस भयावह हादसे में भी 8 श्रद्धालुओं की पानी में डूबने और चोट लगने के कारण असमय मौत हो गई थी, जबकि 7 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। वे सभी मृतक भी एक ही गांव के रहने वाले थे, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में मातम छा गया था।
ऑपरेशन टाइगर पर महायुति में मतभेद? BJP MLA बोले- विधायकों को तोड़ने की क्या जरूरत
22 Jun, 2026 01:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नागपुर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर विधायक आशीष देशमुख ने सोमवार (23 जून) को एक बड़ा बयान देकर राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार को और अधिक सशक्त बनाने के लिए विपक्षी सांसदों का राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में आना स्वागत योग्य कदम है, लेकिन महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति सरकार में विपक्षी विधायकों को शामिल करने का कोई ठोस औचित्य नजर नहीं आता। आशीष देशमुख का मानना है कि सूबे की विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास पहले से ही दो-तिहाई से अधिक का प्रचंड बहुमत मौजूद है। ऐसे में विपक्षी खेमे से और विधायकों को पाले में लाने से गठबंधन के भीतर पहले से मौजूद निष्ठावान नेताओं और विधायकों की स्थिति तथा प्रभाव कमजोर हो सकता है, जिससे असंतोष पनपने की आशंका बनी रहेगी।
शिवसेना यूबीटी में बगावत और शिंदे गुट में जाने की पुष्टि
भाजपा विधायक का यह तीखा बयान ऐसे समय में सामने आया है जब शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सदस्यों में से 6 सांसदों के बगावत करने की खबरें राजनीतिक गलियारों में तैर रही हैं। इसी बीच विपक्षी खेमे के दो प्रमुख विधायकों ने भी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली वास्तविक शिवसेना में शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। इस पर टिप्पणी करते हुए आशीष देशमुख ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के सांसदों का पाला बदलना तो समझ में आता है, क्योंकि इससे राष्ट्रीय स्तर पर सरकार को मजबूती मिलती है और कई अहम बिल पास कराने में मदद मिलती है, लेकिन राज्य स्तर पर इस तरह के दल-बदल की कोई तात्कालिक आवश्यकता नहीं है।
महायुति के पास प्रचंड बहुमत और सीटों का आंतरिक गणित
नागपुर की सावनेर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले आशीष देशमुख ने आंकड़ों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा में सत्तारूढ़ महायुति के पास पहले से ही 237 विधायकों का भारी-भरकम समर्थन हासिल है। इस कुनबे में भाजपा, शिवसेना और सुनेत्रा पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के विधायक शामिल हैं। उन्होंने आगाह किया कि यदि बाहर से और अधिक विधायकों को लाकर गठबंधन में एडजस्ट किया जाता है, तो यह महायुति के मूल और पुराने विधायकों के साथ एक तरह का राजनीतिक अन्याय होगा, क्योंकि भविष्य में टिकट बंटवारे और मंत्रालयों के विभाजन में उनकी हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है।
मुख्यमंत्री के संकेत के बाद गठबंधन के भीतर अंदरूनी हलचल तेज
गौरतलब है कि हाल ही में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सार्वजनिक रूप से यह संकेत दिए थे कि विपक्ष के कई बड़े चेहरे और मौजूदा विधायक जल्द ही उनकी पार्टी का दामन थाम सकते हैं। मुख्यमंत्री के इसी बयान के बाद से ही सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर अंदरूनी खींचतान और चिंताएं बढ़ने लगी थीं, जिसे अब भाजपा विधायक ने खुलकर आवाज दे दी है। राजनीतिक गलियारों में इस बयान को अपनी ही सरकार की विस्तारवादी रणनीति के खिलाफ एक दबी हुई चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस आंतरिक विरोध के बावजूद महायुति नेतृत्व विपक्षी नेताओं के लिए अपने दरवाजे खुले रखता है या अपने पुराने साथियों के हितों को प्राथमिकता देता है।
भिवंडी में बड़ा मामला, पिज्जा खाने से 34 लोग बीमार; जांच शुरू
20 Jun, 2026 02:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भिवंडी। महाराष्ट्र के ठाणे जिले के अंतर्गत आने वाले भिवंडी इलाके में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां कथित तौर पर पिज्जा खाने के बाद एक साथ 34 लोगों के बीमार होने की खबर है। इस खाद्य जनित हादसे का शिकार होने वालों में मासूम बच्चों की संख्या काफी अधिक है। प्रभावित लोगों को पेट में असहनीय दर्द, सिर चकराने और लगातार दस्त होने जैसी गंभीर शिकायतों के बाद आनन-फानन में नजदीकी चिकित्सालय ले जाया गया। राहत और संतोष की बात यह है कि चिकित्सकों ने सभी पीड़ितों को खतरे से पूरी तरह बाहर बताया है।
अस्पताल में आधी रात तक उमड़ती रही मरीजों की भीड़
स्थानीय पुलिस प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार की शाम करीब 6 बजे से अचानक सरकारी अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में पेट दर्द, उबकाई, उल्टी और चक्कर आने की शिकायत लेकर मरीजों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ। यह स्थिति पूरी रात और शुक्रवार की सुबह तक बनी रही, जिससे अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों की विशेष टीम ने तत्परता से सभी बीमार बच्चों और बड़ों का इलाज शुरू किया और उन्हें चिकित्सीय निगरानी में रख दिया।
एक ही आउटलेट से खरीदा गया था पिज्जा और फूड पॉइजनिंग की आशंका
मामले की शुरुआती पड़ताल में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि इन सभी बीमार व्यक्तियों ने बुधवार की रात को क्षेत्र की एक ही विशिष्ट खाद्य दुकान से पिज्जा खरीदकर खाया था। पिज्जा खाने के कुछ घंटों बाद ही एक-एक कर सबकी तबीयत बिगड़ने लगी। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि पिज्जा बनाने में उपयोग किए गए कच्चे माल (जैसे चीज, सॉस या बेस) की गुणवत्ता खराब थी अथवा भोजन को पकाने और उसके भंडारण (स्टोरेज) में स्वच्छता के मानकों की अनदेखी की गई थी। प्रथम दृष्टया इसे गंभीर फूड पॉइजनिंग (भोजन विषाक्तता) का मामला माना जा रहा है, और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने जांच के लिए उक्त दुकान से खाद्य पदार्थों के नमूने जब्त कर प्रयोगशाला भेज दिए हैं।
दुकान संचालक के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज और प्रशासन की नसीहत
इस गंभीर लापरवाही को लेकर स्थानीय पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित प्रतिष्ठान के मालिक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत और दंडात्मक धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लैब से आने वाली केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट के आधार पर आरोपी संचालक के खिलाफ आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस बीच, स्थानीय नागरिक प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग ने आम जनता से पुरजोर अपील की है कि वे बाहर का फास्ट फूड या अन्य खाद्य सामग्रियां खरीदते समय दुकानों की साफ-सफाई और उनकी प्रामाणिकता की अच्छी तरह जांच कर लें, ताकि ऐसे स्वास्थ्य जोखिमों से बचा जा सके।
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यूके को मिला नया पीएम, एंडी बर्नहैम ने संभाली कमान; स्टार्मर की विदाई
