महाराष्ट्र
BJP के संभावित मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर कांग्रेस का तंज
8 May, 2026 04:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद देश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए बंगाल के चुनाव परिणामों और सत्ता के समीकरणों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने जिस तरह के नतीजों को देखा है, उसे स्वीकार करना उनके लिए मुश्किल है और वर्तमान परिस्थितियों को संभालना सत्ता पक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
"विपक्ष को एकजुट होकर लड़ना होगा बड़ा आंदोलन"
बीजेपी की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए हुसैन दलवई ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के दम पर पूरे देश पर कब्जा करने का सपना कभी सच नहीं होगा। उन्होंने ममता बनर्जी और राहुल गांधी के स्टैंड का समर्थन करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब सभी विपक्षी दलों को संगठित होना चाहिए। दलवई ने जोर देकर कहा कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे को बचाने के लिए एक बड़े जन-आंदोलन की जरूरत है।
बंगाल की कमान और शुभेंदु अधिकारी का बढ़ता कद
बंगाल में मिली जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा शुभेंदु अधिकारी को राज्य की कमान सौंप सकती है। शुभेंदु ने इस चुनाव में अपनी ताकत का लोहा मनवाते हुए दो सीटों पर जीत दर्ज की है। विशेष रूप से भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को मात देकर उन्होंने अपनी राजनीतिक हैसियत को और मजबूत कर लिया है। 1995 में कांग्रेस से पार्षद के रूप में करियर शुरू करने वाले शुभेंदु अब बंगाल बीजेपी के सबसे बड़े चेहरों में शुमार हो चुके हैं।
मराठी अनिवार्यता के मुद्दे पर भी घेरा
महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने के फैसले पर भी हुसैन दलवई ने अपनी राय रखी। उन्होंने इस फैसले को तर्कहीन बताते हुए कहा कि यह भेदभावपूर्ण है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नियमों की सख्ती केवल छोटे तबके के रिक्शा चालकों के लिए ही है? अगर अधिकारियों को मराठी नहीं आती तो क्या उन पर भी इसी तरह की पाबंदी लागू होगी? दलवई के मुताबिक, इस तरह के फैसले व्यवहारिक नहीं हैं।
प्यार में तकरार ने लिया खौफनाक मोड़, युवती गंभीर घायल
8 May, 2026 01:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे। शहर के चंदननगर इलाके से एक रूहँआटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई है, जहाँ प्रेम प्रसंग के विवाद में एक 22 वर्षीय युवती पर जानलेवा हमला किया गया। एक सिरफिरे युवक ने घर में घुसकर युवती के गले पर ब्लेड से ताबड़तोड़ वार किए और उसे मरणासन्न स्थिति में छोड़कर फरार हो गया। फिलहाल युवती की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है और वह निजी अस्पताल के आईसीयू (ICU) में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है।
अकेलेपन का फायदा उठाकर घर में घुसा हमलावर
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, 22 वर्षीय पीड़िता उजालादेवी और आरोपी दिलीप राठौड़ एक ही मॉल में साथ काम करते थे। दोनों के बीच प्रेम संबंध थे, लेकिन पिछले कुछ समय से अनबन चल रही थी। वारदात वाले दिन जब युवती घर में अकेली थी और उसका भाई-भाभी काम पर गए हुए थे, तभी दिलीप पठारेवस्ती स्थित उसके घर पहुँचा। मौका पाकर उसने युवती पर ब्लेड से हमला कर दिया और उसका गला रेतने की कोशिश की।
खून से लथपथ हालत में भाई को किया वीडियो कॉल
गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद युवती ने गजब का साहस दिखाया। उसने तुरंत अपने भाई को फोन किया, लेकिन गला कटा होने के कारण उसकी आवाज नहीं निकल पा रही थी। इसके बाद उसने भाई को वीडियो कॉल किया, जिसमें उसकी हालत देखकर भाई के पैरों तले जमीन खिसक गई। सूचना मिलते ही परिजन और पड़ोसी मौके पर पहुँचे और उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।
बोल नहीं पाई तो कागज पर लिखकर बताया कातिल का नाम
अस्पताल पहुँची पुलिस जब युवती का बयान लेने की कोशिश कर रही थी, तब वह बोलने की स्थिति में बिल्कुल नहीं थी। हिम्मत जुटाकर उसने इशारों में कागज और पेन माँगा और उस पर 'दिलीप राठौड़' लिख दिया। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। चंदननगर पुलिस स्टेशन में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर आगे की तफ्तीश शुरू कर दी गई है। इस सनसनीखेज वारदात से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
सरकार गठन को लेकर विपक्ष ने BJP की भूमिका पर उठाए सवाल
8 May, 2026 09:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य में जारी राजनीतिक गतिरोध अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। सरकार गठन में हो रही देरी को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) ने केंद्र और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। शरद पवार गुट ने सवाल उठाया है कि क्या बीजेपी तमिलनाडु में अपनी करारी हार को स्वीकार नहीं कर पा रही है और सत्ता के लिए संवैधानिक शक्तियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
"सबसे बड़े दल को मिले सरकार बनाने का न्योता"
एनसीपी-एसपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने एक आधिकारिक बयान जारी कर राज्यपाल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) 238 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। विजय के नेतृत्व वाली टीवीके को कांग्रेस की 5 सीटों का समर्थन भी हासिल है और वे अन्य दलों के साथ गठबंधन की प्रक्रिया में हैं। क्रास्टो के अनुसार, राज्यपाल को निष्पक्षता दिखाते हुए सबसे बड़े दल के नेता विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए।
कर्नाटक और महाराष्ट्र पैटर्न की याद दिलाई
पार्टी के महासचिव रोहित पवार ने इस स्थिति की तुलना साल 2018 के कर्नाटक घटनाक्रम से की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि कर्नाटक में बहुमत न होने के बावजूद बीजेपी को 'सबसे बड़ा दल' होने के नाते सरकार बनाने का मौका दिया गया था, लेकिन तमिलनाडु में टीवीके के साथ वैसा व्यवहार नहीं हो रहा है। उन्होंने अंदेशा जताया कि क्या तमिलनाडु में भी महाराष्ट्र, गोवा या दिल्ली की तरह सत्ता के समीकरणों को प्रभावित करने वाला 'पैटर्न' अपनाने की कोशिश की जा रही है।
क्या है तमिलनाडु का मौजूदा समीकरण?
4 मई को आए चुनावी नतीजों ने राज्य में एक दिलचस्प स्थिति पैदा कर दी है:
टीवीके (TVK): 108 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी)
बहुमत का आंकड़ा: 118 सीटें
समर्थन: कांग्रेस (5 सीटें) पहले ही समर्थन का ऐलान कर चुकी है।
प्रकाश आंबेडकर ने राज्यपाल की भूमिका पर खड़े किए संवैधानिक सवाल
7 May, 2026 02:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई: तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता के समीकरणों को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) राज्य में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, लेकिन 234 सीटों वाली विधानसभा में वह बहुमत के लिए आवश्यक 118 के जादुई आंकड़े से थोड़ा पीछे रह गई है। इस बीच, विजय ने अन्य राजनीतिक संगठनों से सहयोग की अपील करते हुए कार्यवाहक राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से भेंट कर सरकार बनाने की मंशा जताई है, हालांकि राज्यपाल की ओर से अभी तक उन्हें शपथ ग्रहण के लिए न्योता नहीं दिया गया है, जिसने राज्य में एक नए संवैधानिक विवाद को जन्म दे दिया है।
सबसे बड़े दल के अधिकार और संवैधानिक मर्यादा
तमिलनाडु की वर्तमान स्थिति पर अपनी राय रखते हुए वंचित बहुजन आघाड़ी के नेता प्रकाश आंबेडकर ने विजय के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुसार राज्यपाल को सबसे बड़ी पार्टी के नेता के रूप में विजय को ही मुख्यमंत्री बनने के लिए आमंत्रित करना चाहिए। आंबेडकर का तर्क है कि राज्यपाल केवल बहुमत के संदेह के आधार पर सबसे बड़े दल के दावे को खारिज नहीं कर सकते, बल्कि संविधान की गरिमा को ध्यान में रखते हुए उन्हें पहली प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि वे सदन के पटल पर अपनी शक्ति का परीक्षण कर सकें।
ऐतिहासिक उदाहरणों के माध्यम से शक्ति परीक्षण की वकालत
प्रकाश आंबेडकर ने अपने पक्ष को मजबूती देने के लिए भारतीय लोकतंत्र के दो प्रमुख ऐतिहासिक वाक्यों का उल्लेख किया है। उन्होंने 1989 के आम चुनावों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे राष्ट्रपति ने बहुमत न होने के बावजूद सबसे बड़े दल कांग्रेस को पहले आमंत्रित किया था और बाद में वीपी सिंह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसी प्रकार, उन्होंने 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी के उस कार्यकाल का भी जिक्र किया जब भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते सरकार बनाने का मौका मिला था, भले ही वह सरकार केवल तेरह दिनों तक चली थी, लेकिन संसदीय प्रक्रियाओं का पालन करते हुए उन्हें अवसर दिया गया था।
बहुमत साबित करने की जिम्मेदारी और भविष्य की राह
संविधान के अनुच्छेद 164 (2) का हवाला देते हुए यह बात जोर-शोर से उठाई जा रही है कि बहुमत का फैसला राजभवन के कमरों में नहीं बल्कि विधानसभा के भीतर होना चाहिए। प्रकाश आंबेडकर ने पुरजोर तरीके से कहा है कि राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर को विजय को मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के लिए विधिवत न्योता देना चाहिए, जिसके बाद विजय का यह उत्तरदायित्व होगा कि वे सदन के भीतर अपनी संख्या बल और अन्य दलों के समर्थन का प्रमाण प्रस्तुत करें। अब सबकी नजरें राजभवन के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वहां से विजय को अपना बहुमत सिद्ध करने का मौका मिलता है या राज्य किसी और राजनीतिक दिशा की ओर मुड़ता है।
जयपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह पर शिकंजा
7 May, 2026 02:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जयपुर: राजस्थान की राजधानी में साइबर अपराधियों के विरुद्ध पुलिस प्रशासन ने एक निर्णायक प्रहार करते हुए ठगों के एक व्यापक नेटवर्क को ध्वस्त करने में सफलता प्राप्त की है। पुलिस कमिश्नरेट के वेस्टर्न जोन में संचालित 'म्यूल हंटर अभियान' के अंतर्गत विभिन्न थाना क्षेत्रों में एक साथ छापेमारी की गई, जिसके परिणामस्वरूप कुल तेईस शातिर अपराधियों को दबोचा गया है। इसके अतिरिक्त पांच अन्य संदिग्धों को भी बीएनएस की सुसंगत धाराओं के तहत हिरासत में लिया गया है, जो इस संगठित अपराध तंत्र का हिस्सा बनकर आम जनता की गाढ़ी कमाई को निशाना बना रहे थे।
फर्जी खातों का मकड़जाल और ठगी के आधुनिक तरीके
पुलिस की गहन जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि अपराधी फर्जी बैंक खातों, जिन्हें म्यूल अकाउंट्स कहा जाता है, के माध्यम से करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन को अंजाम दे रहे थे। यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी विज्ञापनों का सहारा लेकर लोगों को अपने झांसे में लेता था और ऑनलाइन सट्टा ऐप्स के माध्यम से युवाओं को भारी मुनाफे का लालच देकर निवेश कराता था। इसके साथ ही ओएलएक्स और फेसबुक जैसे लोकप्रिय डिजिटल मंचों पर सामान बेचने के बहाने लोगों से अग्रिम भुगतान लेने के बाद ये अपराधी अपने मोबाइल नंबर बंद कर देते थे, जिससे पीड़ितों के पास शिकायत का कोई सीधा जरिया नहीं बचता था।
एस्कॉर्ट सर्विस और डिजिटल सेवाओं के नाम पर धोखाधड़ी
जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि इस नेटवर्क के सदस्य केवल सामान बेचने तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे ई-मित्र एजेंसी दिलाने और एस्कॉर्ट सर्विस जैसी भ्रामक सेवाओं के नाम पर भी भोले-भले लोगों को अपना शिकार बना रहे थे। ऑपरेशन म्यूल हंटर का मुख्य उद्देश्य उन बैंक खातों की पहचान कर उन्हें बंद करना था जिनका उपयोग ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जा रहा था। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने अपराधियों के कब्जे से पचास मोबाइल फोन, सिम कार्ड, कई एटीएम कार्ड और बैंक पासबुक सहित भारी मात्रा में तकनीकी उपकरण और नकदी बरामद की है, जो इस गिरोह की सक्रियता के पुख्ता प्रमाण हैं।
साइबर सेल की बड़ी उपलब्धि और पीड़ितों को राहत
साइबर सेल और वेस्टर्न जोन पुलिस ने पिछले दो महीनों के दौरान तकनीकी कुशलता का परिचय देते हुए दो सौ से अधिक चोरी या गुम हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों तक पहुंचाए हैं, जिनकी बाजार में कीमत लगभग चालीस लाख रुपये आंकी गई है। जनवरी से लेकर अब तक की गई कार्रवाई में पुलिस ने साइबर ठगी के करीब पौने चार करोड़ रुपये अपराधियों के खातों में फ्रीज करवाए हैं और एक करोड़ पैंतीस लाख रुपये की राशि पीड़ितों को वापस दिलाने में सफलता हासिल की है। फिलहाल पुलिस की टीमें इस गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों और उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की तलाश में जुटी हुई हैं ताकि साइबर अपराध की इस जड़ को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके।
महाराष्ट्र में विवाहिता की मौत ने उठाए कई सवाल, ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप
7 May, 2026 01:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नासिक: महाराष्ट्र के नासिक जिले के जेल रोड क्षेत्र में दहेज लोभ और घरेलू प्रताड़ना का एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहाँ आशा प्रवीण घोटेकर नामक एक विवाहिता ने ससुराल पक्ष के दुर्व्यवहार से तंग आकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है और पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। मृतका के भाई द्वारा दर्ज कराई गई आधिकारिक शिकायत के आधार पर उपनगर पुलिस स्टेशन ने पति सहित दो मुख्य आरोपियों को हिरासत में ले लिया है और घटना के पीछे के सभी संभावित पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है।
दहेज की अंतहीन मांग और शारीरिक प्रताड़ना
शादी के शुरुआती दिनों से ही आशा को आर्थिक मांगों के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा था। ससुराल पक्ष की ओर से नया फ्लैट और लग्जरी कार खरीदने के बहाने पच्चीस लाख रुपये की भारी-भरकम राशि की मांग की गई थी। बहन के सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए उसके भाई ने अपनी माता के नाम की पुश्तैनी जमीन तक बेच दी थी ताकि ससुराल वालों की आर्थिक लालसा शांत हो सके। इसके अतिरिक्त विवाह के समय इक्कीस तोला सोना भी उपहार स्वरूप दिया गया था, परंतु इतनी बड़ी धनराशि और आभूषण मिलने के बावजूद ससुराल वालों का लालच कम नहीं हुआ और आशा पर जुल्मों का सिलसिला निरंतर जारी रहा।
पति के विवाहेत्तर संबंध और जादू-टोने की धमकियां
पुलिस में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में मृतका के भाई ने कई सनसनीखेज आरोप लगाए हैं, जिसमें पति के किसी अन्य महिला के साथ अनैतिक संबंधों की बात भी सामने आई है। इन्हीं संबंधों के कारण आशा को अक्सर विरोध करने पर अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ता था। मानसिक रूप से तोड़ने के लिए ससुराल पक्ष के लोग उसे अक्सर डराते थे कि वे जादू-टोने के जरिए उसे जान से मार डालेंगे। निरंतर मिल रही इन धमकियों और असहनीय प्रताड़ना के कारण आशा अत्यंत तनाव में रहने लगी थी और अंततः इसी मानसिक दबाव से हारकर उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।
पुलिस की कानूनी कार्रवाई और आगामी जांच
उपनगर पुलिस ने घटना स्थल का निरीक्षण करने के बाद साक्ष्यों को एकत्रित किया है और पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि इस प्रताड़ना के खेल में परिवार के अन्य सदस्य या बाहरी लोग भी संलिप्त थे या नहीं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी धाराएं लगाई जा रही हैं ताकि भविष्य में ऐसी कुप्रथाओं पर लगाम कसी जा सके। फिलहाल शव का पोस्टमार्टम कराकर उसे अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया गया है और पूरे गांव में इस दुखद अंत को लेकर गहरा रोष व्याप्त है।
संजय राउत का बयान- ममता बनर्जी को इस्तीफा देने की जरूरत नहीं
6 May, 2026 03:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: ममता बनर्जी का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार, इंडिया गठबंधन और संजय राउत ने जताया खुला समर्थन
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद राज्य में राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट शब्दों में मुख्यमंत्री पद का त्याग करने से मना कर दिया है, उनका तर्क है कि जब उन्होंने हार स्वीकार ही नहीं की है, तो पद छोड़ने का कोई औचित्य नहीं बनता। इस बयान ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। इसी बीच, उद्धव ठाकरे गुट के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने ममता बनर्जी के इस फैसले का पुरजोर समर्थन किया है। राउत ने ममता बनर्जी के रुख को पूरी तरह न्यायसंगत बताते हुए कहा है कि विपरीत परिस्थितियों में भी संवैधानिक पद पर बने रहना लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवश्यक है।
पूर्व सीजेआई के फैसले का हवाला देते हुए फैसले को बताया तर्कसंगत
संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट का उदाहरण पेश करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ द्वारा उद्धव ठाकरे बनाम महाराष्ट्र सरकार मामले में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय का उल्लेख किया। राउत ने समझाया कि उस समय अदालत उद्धव ठाकरे को उनके पद पर वापस इसलिए बहाल नहीं कर पाई थी क्योंकि उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया था। इसी अनुभव को आधार बनाते हुए उन्होंने ममता बनर्जी को सलाह दी है कि वे जल्दबाजी में इस्तीफा न दें, क्योंकि संवैधानिक प्रक्रियाओं में पद पर बने रहने का अपना महत्व होता है।
इंडिया गठबंधन की एकजुटता और ममता बनर्जी को शीर्ष नेताओं का साथ
विपक्षी एकता का परिचय देते हुए संजय राउत ने प्रेस वार्ता में साफ किया कि पूरा इंडिया गठबंधन इस समय ममता बनर्जी के साथ चट्टान की तरह खड़ा है। उन्होंने जानकारी दी कि उद्धव ठाकरे और राहुल गांधी जैसे बड़े नेताओं ने व्यक्तिगत रूप से ममता बनर्जी से संवाद कर उन्हें अपना समर्थन दिया है। राउत के अनुसार, राहुल गांधी ने भी इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इसे केवल एक नेता की हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह लोकतंत्र के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय है। गठबंधन के नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे आने वाले समय में किसी भी संघर्ष के लिए तैयार हैं और ममता बनर्जी को अलग-थलग नहीं पड़ने दिया जाएगा।
तमिलनाडु के चुनावी समीकरण और टीवीके के प्रभाव पर गठबंधन का रुख
तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने डीएमके और टीवीके के बीच चल रही चर्चाओं पर भी अपनी राय रखी। उनका मानना है कि जब भी किसी क्षेत्रीय राजनीति में किसी तीसरी शक्ति का उदय होता है, तो पारंपरिक मतदाता आधार में बिखराव आना स्वाभाविक है। उन्होंने स्वीकार किया कि तमिलनाडु में कांग्रेस और अन्य सहयोगियों के बीच मतों का जो ध्रुवीकरण हुआ, वह एक नई लहर का परिणाम था। राउत ने कहा कि चुनावी राजनीति में इस तरह के उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और गठबंधन इन सभी चुनौतियों का विश्लेषण कर भविष्य की रणनीति तैयार कर रहा है।
लोकतंत्र की रक्षा और भविष्य की कठिन सियासी राह
संजय राउत ने अपने संबोधन के अंत में इस बात पर जोर दिया कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को बचाए रखने के लिए संघर्ष अब और भी तेज होगा। गठबंधन का मानना है कि ममता बनर्जी के खिलाफ चल रही लहर को केवल चुनावी आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसके पीछे की बड़ी साजिशों को समझना होगा। विपक्ष अब एकजुट होकर जनता के बीच जाने की योजना बना रहा है ताकि यह संदेश दिया जा सके कि वे झुकने वाले नहीं हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब बंगाल के अगले घटनाक्रमों पर टिकी है क्योंकि मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख ने भविष्य के बड़े संवैधानिक टकराव की ओर इशारा कर दिया है।
NCP नेता अमोल मिटकरी का बयान, अजित पवार मामले में CBI जांच जरूरी
6 May, 2026 03:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़: रणदीप सुरजेवाला ने पंचकूला नगर निगम में फर्जी वोटिंग का लगाया आरोप, कहा—लोकतंत्र में सेंध लगाने की हो रही है बड़ी साजिश
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने पंचकूला नगर निगम चुनाव की मतदाता सूची में भारी अनियमितताओं का दावा करते हुए सत्तारूढ़ भाजपा पर तीखा हमला बोला है। चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान सुरजेवाला ने सरकार पर 'वोट चोरी' का मॉडल अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन की मिलीभगत से चुनावी प्रक्रिया को दूषित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मतदाता सूची में हजारों की संख्या में ऐसी प्रविष्टियां मिली हैं जो दोहराव का शिकार हैं, जिससे निष्पक्ष चुनाव की संभावनाओं पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा कि इतनी बड़ी संख्या में त्रुटियां कोई मानवीय भूल नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीतिक साजिश का हिस्सा प्रतीत होती हैं।
हजारों मतदाताओं की डुप्लीकेट एंट्री और चुनावी शुचिता पर गंभीर सवाल
सुरजेवाला ने विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि जांच के दौरान 8545 ऐसे लोग पाए गए हैं जिनकी मतदाता सूची में कुल 17,086 बार प्रविष्टियां की गई हैं। यह कुल मतदाताओं का 8 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा है, जो चुनावी परिणामों को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखता है। कांग्रेस सांसद ने स्पष्ट किया कि यदि यह संख्या महज दो-चार होती तो इसे सामान्य लिपिकीय त्रुटि माना जा सकता था, परंतु 17 हजार से अधिक फर्जी प्रविष्टियां यह दर्शाती हैं कि पूरी वोटर लिस्ट इस समय अशुद्ध और संदिग्ध है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ बताते हुए मांग की है कि इसे तुरंत दुरुस्त किया जाए ताकि वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा हो सके।
हरियाणा के अन्य नगर निगमों में भी व्यापक फर्जीवाड़े की आशंका
हरियाणा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र ने इस मुद्दे को और विस्तार देते हुए कहा कि दिल्ली में राहुल गांधी ने जिस तरह फर्जी वोटों का भंडाफोड़ किया था, उसी तर्ज पर हरियाणा में भी कांग्रेस इस भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने अंदेशा जताया कि केवल पंचकूला ही नहीं बल्कि सोनीपत और अंबाला जैसे अन्य नगर निगमों में भी इसी तरह का बड़ा चुनावी फर्जीवाड़ा होने की पूरी संभावना है। प्रदेशाध्यक्ष ने बताया कि उनकी टीम ने पिछले एक महीने की कड़ी मेहनत के बाद इस पूरे गोरखधंधे को उजागर किया है। कांग्रेस का मानना है कि यह केवल एक शहर की समस्या नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने की एक विस्तृत योजना का हिस्सा हो सकता है।
चुनाव आयोग को सौंपे गए साक्ष्य और तत्काल कार्रवाई की पुरजोर मांग
प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी भी दी गई कि कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर उन्हें इस फर्जीवाड़े से जुड़े तमाम दस्तावेजी सबूत सौंप दिए हैं। सुरजेवाला ने कहा कि अब यह मामला केवल जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि साक्ष्यों के आधार पर सीधे तौर पर कठोर कार्रवाई करने का समय आ गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि चुनाव आयोग साक्ष्यों की गंभीरता को समझते हुए उचित कदम उठाएगा और लोकतंत्र की गरिमा को बहाल करेगा। कांग्रेस पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में त्वरित एक्शन नहीं लिया गया तो वे जनता के बीच जाकर इस 'वोट चोर' सरकार की असलियत को और भी बड़े स्तर पर बेनकाब करेंगे।
मुंबई में 54 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’, दिल्ली ब्लास्ट में फंसाने की धमकी
6 May, 2026 11:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: रिटायर बैंक मैनेजर के साथ 40.90 लाख की डिजिटल ठगी, एटीएस अधिकारी बनकर ठगों ने 54 दिनों तक घर में रखा कैद
मुंबई के भांडुप क्षेत्र में साइबर अपराधियों ने दुस्साहस की सारी हदें पार करते हुए एक सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर को अपने जाल में फंसाकर लाखों रुपये की चपत लगाई है। ठगों ने स्वयं को एटीएस और एनआईए का वरिष्ठ अधिकारी बताकर पीड़ित को दिल्ली में हुए बम धमाकों और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी दी। इस गिरोह ने पीड़ित को मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया कि उन्हें पूरे 54 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया, जिसका अर्थ है कि उन्हें घर के एक कमरे में कैद रहकर हर पल कैमरे के सामने अपनी मौजूदगी दर्ज करानी पड़ती थी। इस लंबी अवधि के दौरान ठगों ने किस्तों में पीड़ित से कुल 40.90 लाख रुपये ऐंठ लिए, जिसके बाद अब मुंबई की साइबर सेल ने इस जटिल मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है।
फर्जी जांच और सुप्रीम कोर्ट के जाली दस्तावेजों से पैदा किया खौफ
ठगी के शिकार 61 वर्षीय राजेंद्र तुकाराम सुर्वे को मार्च माह में एक कॉल आया था, जिसमें सामने वाले व्यक्ति ने खुद को दिल्ली पुलिस का सब-इंस्पेक्टर बताया। जालसाजों ने पीड़ित को यह विश्वास दिला दिया कि उनके पहचान पत्रों का दुरुपयोग कर कर्नाटक में एक संदिग्ध बैंक खाता खोला गया है, जिसके जरिए करोड़ों का अवैध लेन-देन हुआ है। सुर्वे को डराने के लिए ठगों ने न केवल पुलिसिया वर्दी का इस्तेमाल किया, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेशों की प्रति भी दिखाई, जिससे एक बैंक मैनेजर के रूप में कार्य कर चुके सुर्वे भी झांसे में आ गए। उन्हें मजबूर किया गया कि वे किसी भी बाहरी व्यक्ति या परिवार के सदस्य से इस 'गोपनीय जांच' के बारे में चर्चा न करें, वरना उन्हें तुरंत जेल भेज दिया जाएगा।
शेयर बेचकर और पत्नी के नाम पर लोन लेकर चुकाई ठगी की रकम
ठगों की मांगें समय के साथ बढ़ती गईं और उन्होंने पीड़ित को मानसिक रूप से इस कदर विवश कर दिया कि सुर्वे ने अपने जीवन भर की जमा पूंजी उनके हवाले कर दी। पहले चरण में करीब तीन लाख रुपये लेने के बाद ठगों ने उन पर शेयर बाजार में निवेश किए गए अपने 29 लाख रुपये के शेयर बेचने का दबाव बनाया, जिसकी पूरी राशि अपराधियों के बताए खातों में हस्तांतरित कर दी गई। क्रूरता की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब ठगों ने जमानत की सुरक्षा निधि के नाम पर 10 लाख रुपये और मांगे, जिसे चुकाने के लिए पीड़ित की पत्नी को बैंक से कर्ज लेना पड़ा। ठगों ने यह झूठा आश्वासन दिया था कि जांच प्रक्रिया पूर्ण होते ही उनकी पूरी राशि ससम्मान वापस कर दी जाएगी।
संपर्क टूटने पर हुआ धोखाधड़ी का अहसास और पुलिस की कार्रवाई
जैसे ही ठगों के पास बड़ी रकम पहुँच गई, उन्होंने सुर्वे के साथ सभी संचार माध्यमों को बंद कर दिया और उनके नंबर ब्लॉक कर दिए। कई दिनों के इंतजार के बाद जब कोई पैसा वापस नहीं आया, तब पीड़ित को समझ आया कि वे एक सोची-समझी साजिश का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने मई माह में औपचारिक रूप से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर अब साइबर सेल उन बैंक खातों और डिजिटल हस्ताक्षरों की पड़ताल कर रही है जिनका उपयोग इस ठगी में हुआ है। पुलिस ने नागरिकों को सचेत किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन कॉल के जरिए किसी को 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है, इसलिए ऐसे संदिग्ध कॉल्स आने पर तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करना चाहिए।
ममता बनर्जी पर संजय राउत का तीखा हमला, सियासत गरमाई
5 May, 2026 04:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: पश्चिम बंगाल के हालिया चुनावी परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एक बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने ममता बनर्जी के फैसलों पर सवाल उठाए हैं। संजय राउत के अनुसार, ममता बनर्जी द्वारा राहुल गांधी के सुझावों को नजरअंदाज करना एक बड़ी भूल साबित हुई। उन्होंने तर्क दिया कि यदि ममता बनर्जी और राहुल गांधी मिलकर चुनावी रणनीति पर चर्चा करते और साथ आते, तो बंगाल के चुनावी नतीजे निश्चित रूप से अलग हो सकते थे। राउत ने राहुल गांधी की दूरदर्शिता की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके द्वारा की गई भविष्यवाणियां सच साबित हुई हैं।
चुनावी निष्पक्षता और विपक्षी एकजुटता पर सवाल
संजय राउत ने बंगाल और तमिलनाडु के चुनावी परिणामों पर अपनी असहमति जताते हुए यह गंभीर आरोप लगाया कि इन चुनावों को 'चुराया' गया है। उन्होंने राहुल गांधी को एक विजनरी नेता बताते हुए कहा कि उनके पास देश के भविष्य को लेकर स्पष्ट सोच है। इसके साथ ही उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए इंदिरा गांधी के दौर का जिक्र किया और कहा कि जिस तरह एक समय पूरे देश में सत्ता होने के बावजूद जनता ने इंदिरा गांधी को हरा दिया था, वैसा ही भविष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी का भी होने वाला है।
सत्ता के अहंकार और भाजपा के भविष्य पर कटाक्ष
भाजपा के बढ़ते प्रभाव पर प्रहार करते हुए शिवसेना नेता ने कहा कि वर्तमान में सत्ता पक्ष को यह भ्रम हो गया है कि वे पूरे देश के 'चक्रवर्ती सम्राट' बन चुके हैं। उन्होंने एक रूपक का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जब दीया बुझने वाला होता है, तो उसकी लौ एक बार तेजी से बढ़ती है और फिर वह शांत हो जाता है, भाजपा की स्थिति भी वर्तमान में ऐसी ही दिखाई दे रही है। उनके अनुसार, भाजपा की यह सत्ता अब ढलान की ओर है और आगामी समय में राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
बंगाल में सत्ता परिवर्तन और नतीजों का विश्लेषण
पश्चिम बंगाल के चुनावी आंकड़ों की बात करें तो भाजपा ने इस पूर्वी राज्य में एक दशक से चले आ रहे ममता बनर्जी के गढ़ में सेंध लगाते हुए प्रचंड जीत हासिल की है। भाजपा ने 206 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत के साथ इतिहास रचा है, जिससे टीएमसी के 15 वर्षों के शासन का समापन हो गया है। इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को केवल 80 सीटों पर ही सफलता मिली है, जबकि कांग्रेस और वामपंथी दल जैसे अन्य विपक्षी दल दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सके और केवल दो-दो सीटों तक ही सिमट कर रह गए।
बंगाल चुनाव परिणामों पर Supriya Sule की प्रतिक्रिया चर्चा में
5 May, 2026 02:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ममता बनर्जी के व्यक्तित्व की सराहना की है। उन्होंने ममता बनर्जी को एक अत्यंत उत्तरदायी और साहसी महिला बताते हुए कहा कि वे इस हार को एक नई चुनौती की तरह स्वीकार करेंगी और मजबूती से आगे बढ़ेंगी। सुप्रिया सुले ने जानकारी दी कि उनकी पार्टी की तृणमूल कांग्रेस और डीएमके के नेताओं के साथ चर्चा हुई है और आगामी एक-दो दिनों में चुनावी आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण जनता के सामने रखा जाएगा। उन्होंने जीवन में हार-जीत की तुलना सिनेमा जगत से करते हुए कहा कि जिस तरह एक फिल्म के फ्लॉप होने पर कोई अभिनेता काम करना नहीं छोड़ता, वैसे ही राजनीति में भी उतार-चढ़ाव आते रहते हैं।
बंगाल में भाजपा का ऐतिहासिक उदय और प्रचंड बहुमत
पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने अभूतपूर्व सफलता प्राप्त करते हुए सत्ता की बागडोर अपने हाथ में ली है। दो चरणों में संपन्न हुए इस मतदान के बाद सोमवार को घोषित नतीजों ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। भाजपा ने 293 सीटों के परिणामों में से 207 सीटों पर कब्जा जमाकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है, जबकि पिछले 15 वर्षों से सत्ता पर काबिज तृणमूल कांग्रेस मात्र 80 सीटों पर सिमट गई। इस चुनाव में अन्य विपक्षी दलों की स्थिति भी काफी दयनीय रही, जहां कांग्रेस को केवल 2 सीटें मिलीं और आम जनता उन्नयन पार्टी ने भी 2 सीटों पर जीत दर्ज की, वहीं वामपंथी दलों को केवल एक-एक सीट से ही संतोष करना पड़ा।
ममता बनर्जी की व्यक्तिगत हार और मत प्रतिशत का गणित
भवानीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीट पर ममता बनर्जी को अपनी साख बचाने में असफलता मिली है, जहां भाजपा के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें 15 हजार से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया। मत प्रतिशत के लिहाज से भी भाजपा ने बंगाल में बड़ी बढ़त हासिल की है, जहां उसे कुल 45.84 प्रतिशत वोट मिले, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 40.80 प्रतिशत वोट शेयर प्राप्त हुआ है। कांग्रेस का प्रदर्शन वोट प्रतिशत के मामले में भी काफी कमजोर रहा और वह केवल 2.97 प्रतिशत वोट ही जुटा सकी। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल ममता बनर्जी की यह हार राज्य की राजनीति में एक बड़े सत्ता परिवर्तन का प्रतीक बन गई है।
शुभेंदु अधिकारी का दोहरा प्रदर्शन और नंदीग्राम की जीत
भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस चुनाव में अपनी राजनीतिक क्षमता का लोहा मनवाते हुए दो महत्वपूर्ण सीटों पर जीत का परचम लहराया है। उन्होंने नंदीग्राम में तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी पवित्र कर को करीब 9 हजार 665 वोटों के अंतर से मात दी, जहां उन्हें 1 लाख 27 हजार से अधिक वोट प्राप्त हुए। दिलचस्प बात यह है कि शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराने के साथ-साथ नंदीग्राम में भी अपनी धाक जमाए रखी है। वर्ष 2021 के चुनाव में भी उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को शिकस्त दी थी और इस बार भी दोहरी जीत हासिल कर उन्होंने बंगाल में भाजपा की सरकार बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका सिद्ध कर दी है।
नतीजों के बाद प्रियंका चतुर्वेदी ने विपक्षी गठबंधन पर उठाए सवाल
5 May, 2026 01:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: शिवसेना (यूबीटी) की फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने विपक्षी खेमे के भीतर पनप रहे विरोधाभासों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध एकजुटता का आह्वान किया है। उन्होंने गठबंधन के कुछ सहयोगी दलों के व्यवहार पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस और डीएमके जैसे महत्वपूर्ण दलों की चुनावी हार पर जश्न मनाना या अहंकार प्रदर्शित करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रियंका के अनुसार, इस प्रकार की आंतरिक खींचतान न केवल गठबंधन की छवि को धूमिल करती है बल्कि विपक्षी एकता की नींव को भी कमजोर करने का काम करती है।
विपक्षी दलों के भीतर बढ़ती दूरियां और पुराने उदाहरण
प्रियंका चतुर्वेदी ने विपक्षी एकता के इतिहास को याद दिलाते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है जब सहयोगियों ने एक-दूसरे की हार पर नकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पूर्व के घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए बताया कि अरविंद केजरीवाल और तेजस्वी यादव की चुनावी असफलताओं के दौरान भी कुछ विपक्षी दलों का रवैया ऐसा ही उपेक्षापूर्ण रहा था। उन्होंने हाल के दिनों में आम आदमी पार्टी के भीतर चले अंतर्विरोधों का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि यदि सहयोगी दल एक-दूसरे का सम्मान करना नहीं सीखेंगे, तो गठबंधन का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। उनका मानना है कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों को देखते हुए अखिलेश यादव को जिस तरह निशाना बनाया जा रहा है, वह विपक्षी एकता के लिए एक खतरनाक संकेत है।
आंतरिक कलह से सत्तापक्ष को मिलने वाली बढ़त
विपक्षी रणनीतियों का विश्लेषण करते हुए शिवसेना नेता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इंडिया गठबंधन के भीतर उठने वाले इन मतभेदों का सीधा और सबसे बड़ा लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिलता है। जब जनता विपक्ष को बिखरा हुआ और आपस में ही लड़ता हुआ देखती है, तो मतदाताओं का विश्वास डगमगाने लगता है, जिसके कारण मजबूत विकल्प होने के बावजूद विपक्ष पिछड़ जाता है। प्रियंका का कहना है कि गठबंधन की शक्ति किसी एक व्यक्ति या विशेष दल के वर्चस्व में नहीं, बल्कि सभी दलों के साझा संघर्ष में निहित है। उन्होंने आगाह किया कि अगर आपसी बयानबाजी और अहंकार को नियंत्रित नहीं किया गया, तो चुनावी मैदान में सत्ताधारी दल को चुनौती देना और भी कठिन हो जाएगा।
गठबंधन के मूल उद्देश्यों को याद रखने की अपील
प्रियंका चतुर्वेदी ने वर्ष 2024 के आम चुनाव के दौर की याद दिलाते हुए सभी सहयोगी दलों से यह आत्ममंथन करने की अपील की है कि आखिर इस बड़े गठबंधन का निर्माण किन लक्ष्यों के साथ किया गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि गठबंधन की ताकत सामूहिक प्रयासों से बनी थी और इसे बनाए रखने की जिम्मेदारी भी साझा है। उन्होंने विपक्षी दलों को अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और मतभेदों को हाशिए पर रखकर एकजुट होने की सलाह दी ताकि एक सशक्त विकल्प के रूप में जनता के सामने पेश आया जा सके। प्रियंका के मुताबिक, केवल सामूहिक एकता के बल पर ही लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जा सकती है और वर्तमान सत्ता के एकाधिकार को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
नतीजों के बाद प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं, कांग्रेस की जीत पर दिया बयान
4 May, 2026 02:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र। राज्यसभा की पूर्व सांसद और शिवसेना (UBT) की कद्दावर नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी के चुनाव परिणामों पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इन नतीजों को भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत बताया है।
केरल में कांग्रेस की वापसी पर टिप्पणी
प्रियंका चतुर्वेदी ने न्यूज़ चैनलों के रुझानों का हवाला देते हुए लिखा कि केरल में वामपंथी पार्टी का लंबा वर्चस्व अब समाप्त हो गया है। उन्होंने इसे कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण जीत करार दिया।
तमिलनाडु: विजय (Vijay) और उनकी पार्टी TVK का उदय
तमिलनाडु के नतीजों पर हैरानी और खुशी जताते हुए उन्होंने लिखा कि राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है।
नई शक्ति: उन्होंने अभिनेता विजय की पार्टी TVK के विजेता बनकर उभरने को एक 'शानदार जीत' बताया और उन्हें इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के लिए बधाई दी।
पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में भाजपा का प्रदर्शन
शिवसेना नेता ने पश्चिम बंगाल के नतीजों को राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा उलटफेर बताया।
बंगाल: उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा को स्पष्ट जनादेश मिलना एक जबरदस्त बदलाव है।
असम और पुडुचेरी: उन्होंने असम और पुडुचेरी में भाजपा और उसके सहयोगियों की जीत की सराहना करते हुए कहा कि पार्टी ने सत्ता-विरोधी लहर (Anti-incumbency) को सफलतापूर्वक मात देकर अपनी पकड़ बनाए रखी है।
चुनावी रुझानों के ताज़ा आंकड़े
समाचार लिखे जाने तक विभिन्न राज्यों की स्थिति कुछ इस प्रकार थी:
राज्य
अग्रणी दल/गठबंधन (सीटें)
अन्य प्रमुख दल (सीटें)
पश्चिम बंगाल
बीजेपी: 193
टीएमसी: 94
तमिलनाडु
TVK: 110
AIADMK: 62, DMK: 52
केरल
कांग्रेस गठबंधन: 100
वामपंथी गठबंधन: 38
असम
बीजेपी गठबंधन: 97
कांग्रेस गठबंधन: 25
पुडुचेरी
बीजेपी गठबंधन: 22
कांग्रेस: 06
BJP के प्रदर्शन पर मेघा बोर्डिंकर का बयान, ममता बनर्जी पर कसा तंज
4 May, 2026 01:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र। पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनाव परिणामों के लिए सोमवार (4 मई) सुबह से जारी मतगणना के बीच राजनीतिक गहमागहमी तेज हो गई है। शुरुआती रुझानों में बंगाल और असम में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को स्पष्ट बहुमत मिलता नजर आ रहा है, जिसे लेकर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो चुका है।
ममता बनर्जी पर बरसीं मंत्री मेघा बोर्डिंकर
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री मेघा बोर्डिंकर ने चुनाव रुझानों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला बोला।
डर का माहौल: उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में ममता बनर्जी ने इस कदर खौफ फैला रखा था कि महाराष्ट्र से गए बीजेपी कार्यकर्ताओं को वहां होटल तक में कमरे नहीं दिए जाते थे।
जनता की जीत: बोर्डिंकर ने कहा कि यह रुझान बीजेपी की जमीनी मेहनत का परिणाम हैं और बंगाल के लोगों ने भय के ऊपर लोकतंत्र को चुना है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का भरोसा
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने भी रुझानों पर प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि असम और बंगाल दोनों ही राज्यों में भाजपा की सरकार बनना तय है। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की "निरंकुश सरकार" को उखाड़ फेंकने का मन बना लिया है और रुझान इसी दिशा में इशारा कर रहे हैं।
भवानीपुर सीट की स्थिति
भले ही पूरे राज्य में टीएमसी पिछड़ती दिख रही हो, लेकिन भवानीपुर विधानसभा सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी बढ़त मजबूत कर ली है।
मतों का अंतर: छठे दौर की मतगणना के बाद ममता बनर्जी अपने प्रतिद्वंद्वी और भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी से 19,393 मतों से आगे चल रही हैं।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, ममता बनर्जी को अब तक 30,548 वोट मिले हैं, जबकि अधिकारी को 11,155 वोट प्राप्त हुए हैं।
बंगाल और असम के रुझान: एक नजर में
मतगणना के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बीजेपी दोनों ही राज्यों में सत्ता की ओर मजबूती से बढ़ रही है।
राज्य
बीजेपी (अग्रणी)
टीएमसी/अन्य (अग्रणी)
कुल सीटें
पश्चिम बंगाल
194
91 (TMC), 06 (अन्य)
294
असम
बहुमत के करीब
विपक्षी गठबंधन पिछड़ा
126
बारामती में आगे चल रहीं सुनेत्रा पवार, जनता से संयम की अपील
4 May, 2026 12:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र। बारामती विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के परिणामों के बीच उप मुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने जनता के प्रति आभार व्यक्त किया है। जीत की ओर बढ़ते हुए उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक भावुक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने दिवंगत पति और पूर्व दिग्गज नेता अजित पवार को याद किया।
अजित पवार की स्मृतियों को समर्पित जीत
सुनेत्रा पवार ने बारामती की जनता द्वारा दिखाए गए भरोसे को दिवंगत अजित पवार को समर्पित करते हुए लिखा:
भावुक क्षण: उन्होंने कहा कि आज जब परिणाम सामने आ रहे हैं, तो 'अजितदादा' की यादें ताजा हो गई हैं, जिससे पूरा परिवार और समर्थक भावुक हैं।
अपूर्ण सपनों को पूरा करने का संकल्प: उन्होंने बारामतीवासियों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि यह जीत दादा के सपनों की 'नई बारामती' बनाने के संघर्ष की एक शुरुआत है।
कार्यकर्ताओं से संयम की अपील
अपनी जीत को गरिमापूर्ण बनाए रखने के लिए सुनेत्रा पवार ने समर्थकों और एनसीपी कार्यकर्ताओं से एक विशेष आग्रह किया है:
जुलूस पर रोक: उन्होंने निवेदन किया कि जीत की खुशी में कोई भी विजय जुलूस न निकाला जाए और न ही गुलाल उड़ाया जाए।
शालीन आचरण: उन्होंने समर्थकों से संयम बनाए रखने और अजित पवार के विचारों व आदर्शों के अनुरूप आचरण करने की अपील की।
नई बारामती का विजन
सुनेत्रा पवार ने स्पष्ट किया कि यह उपचुनाव उनके लिए केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने लिखा, "यह अंत नहीं है, बल्कि एक नए संकल्प और संघर्ष का आरंभ है।"
राशिफल 21 मई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
लाल आतंक से विकास की ओर बढ़ता दारेली
सीएचसी पलारी के लैब में जांच सुचारू रूप से संचालित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से की भेंट
ग्रामीण विकास में रोजगार सहायकों की महत्वपूर्ण भूमिका, राज्य सरकार इनके हित की चिंता करेगी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
जहाँ राशन और जरूरतों के लिए भी तय करना पड़ता है 40 किलोमीटर का सफर… वहाँ पहुँची उपचार की दस्तक
