मध्य प्रदेश
पीवीटीजी के 7.84 लाख परिवारों के हर घर में नल और हर नल से जल
12 Jun, 2025 10:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : पीएम जनमन योजना के अंतर्गत (पीवीटीजी) विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह के परिवारों को मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दृष्टि से अन्य योजनाओं के साथ पेयजल आपूर्ति के लिये 360 पीवीटीजी गांवों के 7 लाख 84 हजार 327 घरों में नल कनेक्शन जारी किये गये है। प्रधानमंत्री जनमन आदिवासी न्याय महाअभियान के अंतर्गत केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा जनजाति संवर्ग के उत्थान के लिये इस योजना के तहत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंशा के अनुरूप नल-जल योजना भी विभिन्न क्षेत्रों दी जा रही सुविधाओं में से एक है।
मध्यप्रदेश में 4197 पीवीटीजी गांव है। इसके अंतर्गत 11 लाख 67 हजार 373 परिवार इस योजना के तहत लाभांवित हुए है। वर्ष 2027 तक अधिकांश गांवों को सतही जल योजना के माध्यम से कवर कर लिया जाएगा। हर घर में नल हर नल में जल योजना के तहत 6019.95 लाख रूपये की राशि स्वीकृत की गई है। 432 बसाहटों में से 192 बसाहटों कार्यपूर्ण किया जा चुका है। शेष 240 बसाहटों को कार्य 30 जून 2025 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है।
60 गांव हुए नल - जल युक्त
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के माध्यम से प्रदेश के 400 स्वीकृत पीवीटीजी गांवों में से 60 गांवों में के हर घर में नल जल संचालित है। अभी 340 गांवों में कार्य प्रगति पर है। कार्य पूर्ण हो चुके गांव में 61 प्रतिशत के साथ दतिया प्रथम स्थान पर है इसके पश्चात 58 प्रतिशत सैचुरेरडे गांव के साथ ग्वालियर के 134 गांव में से 78 गांव में नल जल योजना का कार्य पूरा हो चुका है। शिवपुरी में सर्वाधिक स्वीकृत 592 गांव में से 97 गांव में नल जल योजना का काम पूरा हो चुका है। 495 गांवों कार्य प्रगति पर है। दूसरे नबंर पर शहडोल के 431 स्वीकृत गांवों में से 208 गांव में नल जल का कार्य पूर्ण हो चुका है शेष 223 गांव में कार्य प्रगति पर है।
पीएम जनमन योजन के अंतर्गत जनजाति बसाहट वाले गांवों में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के माध्यम से सामुदायिक जल आपूर्ति का काम प्रचलन में है। आगामी दो वर्षो में इस योजना के अंतरित लक्ष्य प्राप्ति प्रस्तावित है।
बीड़ी एवं खदान श्रमिकों के बच्चों को एक हजार से पच्चीस हजार रुपये तक की छात्रवृत्ति
12 Jun, 2025 10:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : केंद्र सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा संचालित "शिक्षा के लिये वित्तीय सहायता योजना" के अंतर्गत प्रदेश राज्य के बीड़ी, चूना पत्थर एवं डोलोमाईट, लौह-मैग्नीज-क्रोम अयस्क खदान श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में प्रोत्साहन प्रदान करने के लिये छात्रवृत्ति दी जाएगी। इस योजना के तहत मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में कक्षा पहली से लेकर उच्च शिक्षा तक अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को एक हजार रुपये से पच्चीस हजार रुपये तक छात्रवृत्ति की स्वीकृत दी गई है।
शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए आवेदन की प्रक्रिया प्रारंभ
उप कल्याण आयुक्त श्रम कल्याण संगठन जबलपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 2 जून से प्रारंभ हो गई है। इच्छुक छात्र-छात्राएं नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (https://scholarships.gov.in) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2025 तथा पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2025 नियत की गई है।
आवेदन प्रक्रिया एवं आवश्यकताएं
छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करते समय आवेदकों को ओटीआर (वन टाइम रजिस्ट्रेशन) करना अनिवार्य है। इसके साथ ही फेस ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया को भी पूरा करना आवश्यक होगा। आवेदन करते समय सभी आवश्यक दस्तावेजों की स्कैन प्रतियां पोर्टल पर अपलोड करें, जो कि स्पष्ट और पठनीय हो। आवेदन की पात्रता एवं अन्य संबंधित जानकारी/ शर्ते नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर उपलब्ध है। आवेदन जमा करने के बाद छात्रों को अपने शिक्षण संस्थान से संपर्क कर आवेदन का सत्यापन भी स्कॉलरशिप पोर्टल के माध्यम से करवाना अनिवार्य है। शिक्षण संस्थान द्वारा सत्यापित नहीं किए गए आवेदनों पर विचार नहीं किया जायेगा।
अन्य छात्रवृत्तियों के लिए पात्रता
उप कल्याण आयुक्त ने यह जानकारी दी कि यदि पोर्टल पर उपलब्ध अन्य किसी विभाग की ऐसी छात्रवृत्ति योजना प्रदर्शित होती है, जिसमें अधिक राशि प्रदान की जाती है और आवेदक उसकी पात्रता रखते हैं, तो ऐसे आवेदक संबंधित विभाग की छात्रवृत्ति योजना के लिए भी आवेदन कर सकते हैं।
संपर्क एवं सहायता
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया अथवा योजना से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए छात्र-छात्राएं श्रम कल्याण संगठन, जबलपुर मुख्यालय के दूरभाष क्रमांक 0761-4039511, 4039510 पर संपर्क कर सकते हैं। साथ ही ईमेल के माध्यम से wc.jabalpur@rediffmail.com तथा wcjab@mp.gov.in पर जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसके अलावा इंदौर स्थित कल्याण प्रशासक कार्यालय के दूरभाष क्रमांक 0731-2703530 या ईमेल waind@mp.gov.in पर भी संपर्क किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, मध्यप्रदेश परिक्षेत्र में संचालित निकटतम औषधालयों एवं सागर स्थित केंद्रीय चिकित्सालय में जाकर व्यक्तिगत रूप से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
पीएमएफएमई योजना अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला 13 जून को
12 Jun, 2025 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना अंतर्गत एक दिवसीय डीआरपी-बैंकर्स संवाद कार्यशाला का आयोजन 13 जून को सुबह 10 बजे से आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधन आकदमी भोपाल में आयोजित की जायेगी। उद्यानिकी तथा खाद्य प्र-संस्करण मंत्री नारायन सिंह कुशवाह कार्यशाला की अध्यक्षता करेंगे। कार्यशाला में योजना के शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति के लिये जिला रिसोर्स पर्सन, समस्त बैंक प्रतिनिधियों के साथ साझा मंच पर संवाद किया जायेगा।
बिजली उपभोक्ताओं के घर पहुंचकर ऊर्जा मंत्री ने सुनी समस्याएं
12 Jun, 2025 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर गुरुवार सुबह 4 बजे भोपाल एक्सप्रेस से ग्वालियर पहुंचते ही एक्शन में नजर आए। उन्होंने रेलवे स्टेशन से महाराजपुरा विद्युत वितरण केन्द्र पहुंचकर निरीक्षण किया तथा एफओसी के तहत दर्ज विद्युत शिकायतों का, उपभोक्ताओं से सीधे फोन पर बात कर निराकरण किया। तोमर ने सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी परिस्थिति में बेवजह का विद्युत अवरोध नहीं होना चाहिए। यथासंभव उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। ऊर्जा मंत्री तोमर के साथ मुख्य अभियंता अमित श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता नितिन मांगलिक, कार्यपालन अभियंता श्रीनिवास यादव के अलावा अन्य अधिकारी तथा जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने महाराजपुरा विद्युत वितरण केन्द्र का निरीक्षण करने के उपरांत ग्वालियर के गोवर्धन कॉलोनी, सैनिक कॉलोनी, दीनदयाल नगर, शताब्दीपुरम सहित कई इलाकों में जाकर नागरिकों से प्रत्यक्ष संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और सुधार के लिये तत्काल निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी तकनीकी खामियां समयबद्ध रूप से दुरुस्त की जाएँ, ताकि नागरिकों को निर्बाध व गुणवत्तापूर्ण विद्युत सेवा उपलब्ध हो सके। ऊर्जा मंत्री तोमर ने इस दौरान उपभोक्ताओं के घर-घर जाकर विद्युत समस्याओं को सुना और उनका त्वरित निराकरण किया। उन्होंने कहा कि गर्मी के दिनों में पंखे कूलर और एसी का उपयोग आवश्यक है, लेकिन ऐसा कोई कार्य ना करेंजिससे बिजली आपूर्ति में कोई व्यवधान आए। ऊर्जा मंत्री ने उपभोक्ताओं से कहा कि वह ऊर्जा विभाग का सहयोग करें। सामने आ रही बिजली की समस्या के निदान के लिए यह सेवक और पूरा ऊर्जा विभाग मैदान में है। बिजली की खपत बढ़ने से ट्रांसफार्मर पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार से बचने का तरीका यह है कि उपभोक्ता अपनी घरेलू बिजली का लोड बढ़वाएं तथा वैध विद्युत कनेक्शन लेकर ही बिजली का उपयोग करें।
ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि मध्य प्रदेश में बिजली की कोई कमी नहीं है, मध्यप्रदेश में बिजली सरप्लस है, लेकिन तकनीकी समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने अपील की कि अगर हम बिजली कंपनी का सहयोग करें, तो तकनीकी समस्याओं को दूर करने में काफी हद तक निजात पाई जा सकती है।
विद्युत आपूर्ति व्यवस्था का निरीक्षण करने के उपरांत ऊर्जा मंत्री तोमर सीधे न्यू कॉलोनी कांच मील स्थित नवीन पार्क पहुंचे तथा यहां सफाई दूतों के साथ स्वर्गीय देवेन्द्र सिंह तोमर मार्ग पर झाड़ू लगाकर सफाई अभियान में हिस्सा लिया।
यकृत स्वस्थ तो जीवन स्वस्थ, यकृत की देखभाल को बनाएं प्राथमिकता : उपमुख्यमंत्री शुक्ल
12 Jun, 2025 09:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : विकसित भारत के साथ-साथ स्वस्थ भारत का निर्माण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। यकृत स्वस्थ रहेगा, तो जीवन भी स्वस्थ रहेगा और जब जीवन स्वस्थ होगा, तब परिवार, समाज और पूरा प्रदेश भी स्वस्थ और सशक्त बनेगा। उक्त विचार उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने ‘ग्लोबल फैटी लीवर दिवस’ पर सागर से वीडियो कॉन्फ्रेंस से प्रदेश के सभी जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों एवं आशा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। पद्म भूषण डॉ. शिव कुमार सरीन, निदेशक, इंस्टीटयूट ऑफ लीवर एंड बिलियरी साइंसेज, नई दिल्ली भी वी.सी. में जुड़े।
उप मुख्यमंत्री एवं सागर जिले के प्रभारी मंत्री शुक्ल ने कहा कि ‘ग्लोबल फैटी लीवर डे’ केवल एक दिवस नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति हमारी प्रतिबद्धता, जागरूकता और स्वस्थ भविष्य की दिशा में सामूहिक संकल्प का संदेश है। उन्होंने कहा कि यकृत (लीवर) हमारे शरीर का सबसे मौन किंतु अत्यंत कार्यशील अंग है। यह अंग ऊर्जा उत्पादन, विषहरण, प्रतिरक्षा और पाचन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं की आधारशिला है। जब यकृत प्रभावित होता है, तो उसके लक्षण बहुत देर से प्रकट होते हैं और तब तक शरीर को गंभीर हानि पहुँच चुकी होती है ऐसे में आवश्यक है कि हम समय रहते यकृत की देखभाल को अपनी प्राथमिकता बनाएं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मोटापा, मधुमेह, असंतुलित आहार, शारीरिक निष्क्रियता और मानसिक तनाव एनएएफएलडी के प्रमुख कारण हैं ये सभी कारक जीवनशैली से जुड़े हुए हैं। उन्होंने आह्वान किया कि नागरिक अपने और परिवार की जाँच अवश्य कराएं। संतुलित आहार अपनाएं, जंक फूड से बचें, और रोजाना कम से कम 30 मिनट तक शारीरिक गतिविधि को अपने जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि ‘स्वस्थ यकृत मिशन’ को और भी सशक्त बनाया जाएगा। स्क्रीनिंग से लेकर उपचार तक हर स्तर पर सरकार आपके साथ है। स्वास्थ्य संस्थाओं में आवश्यक उपकरण, प्रशिक्षित मानव संसाधन और बेहतर उपचार सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि 21 मई 2025 को राज्यपाल मंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने "स्वस्थ यकृत मिशन" का शुभारंभ किया। यह एक समर्पित जनस्वास्थ्य पहल है, जो केवल उपचार तक सीमित नहीं, बल्कि रोकथाम, जनजागरूकता, स्क्रीनिंग, रेफरल तथा फॉलोअप के प्रत्येक चरण को एकीकृत रूप में सम्मिलित करती है। उन्होंने बताया कि 2 जून 2025 से लेकर आज तक हम लगभग 10 लाख नागरिकों की एनएएफएलडी स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इनमें से 1.27 लाख लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 23 से अधिक पाया गया। 1 लाख 24 हज़ार 131 (24 प्रतिशत) महिलाओं की कमर की माप 80 सेंटीमीटर से अधिक और 93 हज़ार 738 (19 प्रतिशत) पुरुषों की कमर की माप 90 सेंटीमीटर से अधिक पाई गई। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि ये आंकड़े मात्र संख्याएँ नहीं हैं ये एक गंभीर चेतावनी हैं। यह संकेत है कि हम सचेत हो जाएँ और भविष्य की चुनौती के प्रति सजग रहें।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि पूरे प्रदेश में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों तथा शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में एनएएफएलडी स्क्रीनिंग शिविर आयोजित किए गए हैं। इन शिविरों में 30 से 65 वर्ष आयु वर्ग के नागरिकों की जाँच की जा रही है। संदिग्ध मामलों को जिला अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है और उनका नियमित फॉलोअप भी सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभियान में आशा कार्यकर्ता, एएनएम, सीएचओ, मेडिकल ऑफिसर, स्वास्थ्य प्रबंधक और पंचायत प्रतिनिधि हमारी सशक्त रीढ़ के रूप में कार्य कर रहे हैं। ये सभी जमीनी स्तर पर सक्रिय होकर घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं, उन्हें प्रेरित कर रहे हैं तथा समय रहते स्क्रीनिंग के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
जल ही जीवन है : जल की एक-एक बूंद बचाना सबकी जिम्मेदारी : उपमुख्यमंत्री शुक्ल
12 Jun, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : उप मुख्यमंत्री एवं सागर ज़िले के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि ऐतिहासिक मंदिरों के आस-पास नदी, तालाब, बावड़ी, कुआँ, आदि स्थापित जलस्रोत को संरक्षित करना हमारा कर्तव्य है। आज इनमें से कई जल स्रोत लगभग विलुप्त होने की कगार पर हैं और अत्यधिक प्रदूषित भी हैं। जल जीवन का अभिन्न घटक है और इसकी प्रत्येक बूंद को बचाना हमारी आवश्यकता और जिम्मेदारी है। हर तरह के जल स्रोत का संरक्षण हम सबको करना चाहिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जल गंगा संवर्धन अभियान में सागर के भूतेश्वर मंदिर प्रांगण में जनप्रतिनिधियों के साथ प्राचीन जलस्रोत की साफ-सफाई कार्य में सहभागिता की।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने भूतेश्वर मंदिर में बने प्राचीन बावड़ी कुआँ से कचरा निकाल कर सफाई एवं जीर्णोद्धार अभियान प्रारम्भ किया। उन्होंने प्रांगण के विकास कार्यों की जानकारी ली और कहा कि प्राचीन सिद्ध स्थलों व मंदिरों का संरक्षण महत्वपूर्ण है। बताय ा गया कि भूतेश्वर महादेव मंदिर सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर पत्थरों से निर्मित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत नगर पालिक निगम सागर द्वारा लगभग 100 कुओं की साफ-सफाई कर इन्हें पुनः उपयोगी बनाया जा रहा है इनके जल को पीने योग्य बनाने के लिये किये जा रहे सफाई व जीर्णोद्धार कार्य और ऐतिहासिक जलस्रोतों के संरक्षण का यह कार्य सराहनीय है। विधायक शैलेन्द्र जैन, महापौर श्रीमती संगीता सुशील तिवारी, निगमाध्यक्ष वृंदावन अहिरवार सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि विभागीय अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे।
जल संरक्षण की दिशा में जल गंगा संवर्धन अभियान मध्यप्रदेश सरकार की महत्त्वपूर्ण पहल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
12 Jun, 2025 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल संरक्षण की दिशा में जल गंगा संवर्धन अभियान मध्यप्रदेश सरकार की महत्त्वपूर्ण पहल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में यह अभियान 30 मार्च से 30 जून तक संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नदियों, जल स्त्रोतों और वेटलैण्ड्स का संरक्षण व पुनर्जीवन है। शासन और समाज के समन्वित प्रयासों से इस अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
घोड़ा पछाड़ नदी पुनर्जीवित, अन्य सहायक नदियाँ भी प्रवहमान
खण्डवा जिले में आम नागरिकों और प्रशासन के सहयोग से नर्मदा की सहायक घोड़ा पछाड़ नदी को पुनर्जीवित किया गया है। अंधाधुंध भू-जल दोहन के कारण यह नदी और आसपास की कई छोटी नदियाँ सूख चुकी थीं, जिससे खेती-किसानी प्रभावित हो रही थी। रिज टू वैली सिद्धांत पर आधारित जल संरचनाओं के निर्माण से लगभग 33 किलोमीटर क्षेत्र में जल संचय किया गया। परिणामस्वरूप घोड़ा पछाड़ नदी में फिर से जल प्रवाह शुरू हो गया है, जिससे वर्ष भर इन नदियों के प्रवहमान रहने की संभावनाएं बनी हैं।
राज्य की नदियों का सर्वेक्षण और जल शोधन संयंत्रों की स्थापना
मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नर्मदा, चंबल, क्षिप्रा, बेतवा, सोन, टोंस, ताप्ती, कान्ह, माही, सिंध, और बेनगंगा सहित प्रमुख नदियों का सर्वेक्षण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि 158 नालों से प्रतिदिन लगभग 450 मिलियन लीटर घरेलू अपशिष्ट जल सीधे इन नदियों में बहाया जा रहा है। इस स्थिति में सुधार के लिए नगरीय विकास विभाग द्वारा 869 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) की स्थापना की जा रही है।
वेटलैण्ड संरक्षण में मध्यप्रदेश की अग्रणी भूमिका
वर्ष 2002 में जहां मध्यप्रदेश में केवल एक रामसर साइट थी, वहीं आज यह संख्या बढ़कर पाँच हो चुकी है। साथ ही इंदौर को देश का पहला वेटलैण्ड सिटी घोषित किया जाना राज्य के लिए गौरव की बात है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के पालन में राज्य वेटलैण्ड प्राधिकरण ने 2.25 हैक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाले 13,565 वेटलैण्ड्स का भौतिक सत्यापन और सीमांकन समय-सीमा में पूर्ण किया है।
इंदौर नगर निगम एवं एप्को ने मिलकर शहर के 330 पारंपरिक कुएं और बावड़ियों का संरक्षण कार्य किया है। यह पहल शहर की जल-परंपरा को पुनर्जीवित करने में सहायक सिद्ध हो रही है।
प्रकृति के संरक्षण के लिये साझा जिम्मेदारी
प्रकृति में पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए समाज की सहभागिता आवश्यक है। नदियाँ, पेड़, पहाड़ और मानव – सब एक-दूसरे पर आश्रित हैं। जल गंगा अभियान इसी पारस्परिक जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा है, जिससे जल, जीवन और प्रकृति की यह अमूल्य विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रहे।
लाड़ली बहनों को तोहफा! जानिए कब से बढ़ेगी योजना की किस्त
12 Jun, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: लाड़ली बहनों के लिए खुशखबरी है. दरअसल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव शुक्रवार को जबलपुर के बरगी में रहेंगे. इस अवसर पर सीएम मोहन यादव बरगी से ही प्रदेश की 1.27 करोड़ महिलाओं के खाते में लाड़ली बहना की 25वीं किस्त हस्तांतरित करेंगे. इसकी अधिकारिक सूचना महिला बाल विकास विभाग ने अपने एक्स हैंडल पर दी है. बता दें कि लाड़ली बहनों की सम्मान निधि के साथ सीएम डॉ मोहन यादव बरगी में उज्जवला योजना के तहत मिलने वाले सिलेंडरों की सब्सिडी राशि भी महिलाओं के खातों में ट्रांसफर करेंगे.
अब हर महीने इन तारीखों में ट्रांसफर होगी राशि
बता दें कि मार्च 2025 तक लाड़ली बहना योजना की किस्त हर महीने की 10 तारीख से पहले महिलाओं के खातों में हस्तांतरित कर दी जाती थी. लेकिन अप्रैल महीने में 16 तारीख को लाड़ली बहनों के खातों में 1250 रुपये की राशि हस्तांतरित की गई थी. इसके बाद मई महीने में 15 तारीख को लाड़ली बहना की 24वीं किस्त भेजी गई थी. अब यह तीसरा मौका है जब लाड़ली बहनों को 1250 रुपये की राशि 10 तारीख के बाद यानि 13 जून 2025 को हस्तांतरित की जााएगी. हालांकि वित्त विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब हर महीने लाड़ली बहनों को 10 से 16 तारीख के बीच राशि हस्तांतरित की जाएगी.
संबल योजना के 150 करोड़ रुपए करेंगे हस्तांतरित
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को जबलपुर के बरगी में होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम में लाड़ली बहनों के खातों में कुल 1552 करोड़ रुपये हस्तांतरित करेंगे. इसके साथ ही 26 लाख महिलाओं के खातों में गैस सिलेंडर रिफिलिंग के पैसे भी भेजे जाएंगे. वहीं बरगी में ही सीएम संबल योजना अंतर्गत अनुग्रह सहायता के 6821 प्रकरणों में 150 करोड़ रुपए सिंगल क्लिक से अंतरित करेंगे. संबल योजना के उन लाभार्थियों के लिए ये राहत भरी खबर है जो संबल योजना की राशि का इंतजार कर रहे थे.
इस महीने बढ़ सकती है लाड़ली बहना की राशि
राज्य सरकार इस राशि को बढ़ाकर 3 हजार रुपए तक करने का दावा करती रही है. मुख्यमंत्री ने हाल ही में फिर इस राशि में जल्द बढ़ोत्तरी करने का आश्वासन दिया है. राज्य सरकार इस साल रक्षाबंधन के मौके पर लाड़ली बहनों को यह तोहफा दे सकती है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि 1250 रुपए के अलावा 250 रुपए की राशि केवल रक्षाबंधन पर ही मिलेगी या फिर हर महीने अब लाड़ली बहना को 250 रुपये बढ़कर मिलेंगे. यदि सरकार हर महीने के लिए 250 रुपये बढ़ाती है तो लाड़ली बहनों को अब 1500 रुपए की राशि मिलने लगेगी.
भाई-बहन से प्रेमी तक: सोनम और राज की चौंकाने वाली लव स्टोरी
12 Jun, 2025 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इंदौर : इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी के मर्डर की आरोपी नई नवेली पत्नी सोनम रघुवंशी के बारे में नित नए खुलासे हो रहे हैं. शादी के 12 दिन बाद ही हनीमून ट्रिप के नाम पर मेघालय के शिलांग में ले जाकर राजा की निर्मम तरीके से हत्या कराने की आरोपी सोनम रघुवंशी के स्वाभाव के बारे में परिचितों ने अब उसकी एक-एक गतिविधि का आकलन करना शुरू कर दिया है. सभी लोग इस बात को लेकर आहत हैं कि सोनम की हरकतें बहुत कुछ बयां कर रही थी कि लेकिन कई बार बातें मन में खटकने के बाद भी कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि सोनम इतना वीभत्स कांड भी कर सकती है. सोनम अपने प्रेमी राज कुशवाहा पर इतनी फिदा कैसे और क्यों हुई, ये भी एक पहेली है लेकिन अब धीरे-धीरे सब कुछ सामने आने लगा.
शुरू में सोनम ने राज को मुंहबोला भाई माना
दरअसल, सोनम के भाई गोविंद रघुवंशी ने बुधवार को ये जाहिर किया था कि राज कुशवाहा का उसके घर पर बेधड़क आना-जाना था. गोविंद रघुवंशी के कारोबार को वह समर्पण भाव से कर रहा था. बताया जाता है कि राज कुशवाहा 16-16 घंटे काम करता था. सोनम भी गोविंद रघुवंशी की फैक्ट्री में पहुंचकर भाई का पूरा कामकाज संभालती थी. गोविंद रघुवंशी के अनुसार सोनम उसके साथ ही राज को राखी बांधती थी. राज भी सोनम को दीदी कहकर बुलाता था. सोनम को दीदी मानने की बात राज की बहनों व उसकी मां ने भी कही. फिर सवाल उठता है कि भाई-बहन का रिश्ता प्रेमी-प्रेमिका के रूप में कैसे तब्दील हो गया. इसकी भी एक कहानी है.
राज की ईमानदारी देख प्रभावित होने लगी सोनम
दरअसल, गोविंद रघुवंशी के कारोबार में राज कुशवाहा अहम किरदार था. वह पैसों का लेन-देन भी पूरी ईमानदारी से करता था. इसके साथ ही कारोबार में सोनम भी पूरी तरह से लिप्त थी. फैक्ट्री में काम करने के दौरान सोनम और राज धीरे-धीरे निकट आते गए. जब सोनम ने देखा कि राज बहुत समर्पण से काम करता है और पैसों के मामले में भी पूरा ईमानदार है. ये देखकर सोनम के दिल में धीरे-धीरे राज के प्रति प्रेम उमड़ने लगा. सोनम राज को पहले भाई की तरह प्रेम करती थी लेकिन धीरे-धीरे ये रिश्ता आगे बढ़कर आशिकी में तब्दील हो गया.
हवाला कारोबार से जुड़े सोनम व राज
बताया जाता है कि सोनम ने अपने रिश्ते के एक भाई के साथ हवाला कारोबार का काम शुरू कर दिया. इसमें काफी रकम आने लगी. इसको देखते हुए सोनम ने मोटी रकम राज के खातों में ट्रांसफर करनी शुरू कर दी. इस दौरान भी राज पूरी तरह से ईमानदारी से फंड को सोनम के अनुसार मैनेज करता रहा. जब सोनम ने राज की ये ईमानदारी देखी तो इसके बाद वह राज के और निकट चली गई. फैक्ट्री में एक दिन ऐसा दिन आया जब सोनम ने अपने दिल की बात राज से बयां कर दी. इधर, कुछ दिनों से राज भी सोनम के हाव-भाव को लेकर उस पर मरने लगा था. राज को ये पता था कि सोनम की आर्थिक स्थिति अच्छी है जबकि वह बहुत कमजोर स्थिति में है. इसके साथ ही राज के दिल में सोनम के प्रति भी प्रेम उमड़ने लगा. जब एक दिन फैक्ट्री में दोनों को एकांत समय मिला तो एक-दूसरे से मोहब्बत का इजहार कर दिया. इसके बाद इश्क की गाड़ी दौड़ने लगी.
राज के अलावा किसी और शादी को तैयार नहीं थी सोनम
इसके बाद राज और सोनम के बीच इश्क की गाड़ी पूरी रफ्तार से दौड़ने लगी. इधर, सोनम के लिए उसके पिता कोई अच्छा रिश्ता तलाश रहे थे. जब सोनम ने राज से कहा कि मैं शादी तो तुम्ही से करूंगी तो राज ने भी कुछ इसी अंदाज में अपने मोहब्बत का संकल्प दोहराया. एक दिन ऐसा भी आया जब सोनम की शादी परिजनों ने राजा रघुवंशी से तय कर दी. शादी तय होने के बाद सोनम ने राज से मिलकर ये तय कर लिया था कि वह पिता की खुशी की खातिर ये शादी तो कर लेगी लेकिन वह अपने होने वाले पति को मारकर विधवा बनेगी और फिर राज से शादी कर लेगी.
पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा कर परीक्षा देने वाले 22 अभ्यर्थियों के विरुद्ध 21 प्रकरण पंजीबद्ध
12 Jun, 2025 07:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुख्यमंत्री महोदय के निर्देशानुसार भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता करने वाले अभ्यर्थियों पर की जा रही सख्त कार्रवाई
भोपाल,। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देशानुसार भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता करने वाले अभ्यर्थियों पर सख्त कार्रवाही की जा रही है। इसी तारतम्य में आज पुलिस मुख्यालय के पुराने कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित प्रेस वार्ता में पुलिस महानिरीक्षक कानून व्यवस्था श्री अंशुमान सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस आरक्षक जीडी तथा रेडियो में रिक्त पदों की पूर्ति के लिए वर्ष 2023 में Online लिखित परीक्षा मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मण्डल द्वारा आयोजित की गई थी, जिसमें 6,52,057 उम्मीदवारों ने भाग लिया था। प्रक्रिया के द्वितीय चरण में लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवार 55,220 अभ्यर्थियों की शारीरिक दक्षता परीक्षा चयन शाखा, मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 16 अक्टूबर से 20 नवम्बर के मध्य आयोजित की थी। संपूर्ण प्रक्रिया के उपरांत कुल 6423 अभ्यर्थी (5090 पुरूष एवं 1333 महिला) का चयन किया गया था। द्वितीय चरण के शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान नवम्बर 2024 में परीक्षा केन्द्र मुरैना में 05 अभ्यर्थियों द्वारा अपने स्थान पर किसी अन्य व्यक्तियों को परीक्षा में शामिल होने हेतु भेजा गया, जिन्हें संदिग्ध पाते हुए, परीक्षा में शामिल न कर उक्त उम्मीदवारों पर प्रकरण पंजीबद्ध किया जाकर विधिसम्मत कार्यवाही की गई थी। इस अनुभव के आधार पर पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा अंतिम परिणाम जारी होने के उपरांत सभी सफल अभ्यर्थियों का चरित्र सत्यापन एवं नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान उनकी आवंटित इकाईयों से बायोमेट्रिक एवं आधार हिस्ट्री की जांच पुनः कराये जाने हेतु दिनांक 21-04-2025 को निर्देश जारी किये गये।
अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच में कुछ जिले में संदिग्ध रूप से भिन्नता पाये जाने पर बारीकी से जांच कराई गई, जिसमें यह पाया गया कि कुछ अभ्यर्थियों द्वारा लिखित परीक्षा के पूर्व अपना आधार कार्ड का बायोमेट्रिक संशोधन कराया गया था तथा लिखित परीक्षा के ठीक बाद उनके द्वारा पुनः आधार कार्ड का बायोमेट्रिक संशोधन कराया गया। ऐसे अभ्यर्थियों पर संदेह के आधार पर इनकी जांच कराई गई, जिसमें इनके हस्ताक्षर नूमना, हस्तलिपि, फिंगर प्रिंट लिये गये। साथ ही परीक्षा के दौरान इनके द्वारा दिये गये फिंगर प्रिंट, हस्तलिपि, के नमूने को प्राप्त कर उनकी जांच कराई गई। अभ्यर्थियों की वास्तविक लोकेशन के संबंध में तकनीकी रूप से भी जांच कराई गई, जिसमें भिन्नता पाये जाने पर प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रकरण पंजीबद्ध किये गये। अभी तक कुल 21 प्रकरण 22 अभ्यर्थियों के विरूद्ध पंजीबद्ध किये जा चुके है, जिसमें मुरैना में 07, शिवपुरी-06, श्योपुर-02 तथा इंदौर, दतिया, ग्वालियर, अलीराजपुर, राजगढ तथा शहडोल में 01-01 प्रकरण पंजीबद्ध किये गये हैं। विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आये हैं कि कुछ आधार कार्ड बेण्डरों द्वारा अतिरिक्त लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से अभ्यर्थियों के आधार कार्ड को बिना पूरी तरह जांच किये संसोधन के लिए अपने सिस्टम में अपलोड किया गया था। आरोपियों द्वारा इस प्रक्रिया का लाभ उठाते हुए अपराध कारित किया गया है। पुलिस मुख्यालय स्तर पर पुलिस महानिदेशक, मध्यप्रदेश के निर्देशन में चयन शाखा तथा अन्य शाखाओं के द्वारा इन सभी प्रकरणों में लगातार निगाह रखी जाकर मैदानी इकाईयों को आवश्यक मार्गदर्शन दिये जा रहे हैं। माननीय मुख्यमंत्री महोदय, म०प्र० शासन द्वारा इसमें सख्त से सख्त कार्यवाही किये जाने हेतु निर्देशित किया गया है।
सिंहस्थ महाकुंभ-2028 की तैयारी तेज़, डीजीपी ने की वृहद समीक्षा बैठक
12 Jun, 2025 07:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अत्याधुनिक तकनीकों के साथ होगा सिंहस्थ का संचालन, प्रयागराज कुंभ-2025 के अनुभवों से ली जा रही प्रेरणा
भोपाल, उज्जैन में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ के शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित संचालन के लिए मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। इसी क्रम में दिनांक 12 जून 2025 को पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा की अध्यक्षता में पुलिस मुख्यालय, भोपाल के कांफ्रेंस हॉल में वृहद समीक्षा बैठक आयोजित की गई। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर आयोजित इस वृहद बैठक में पुलिस मुख्यालय, भोपाल के वरिष्ठ अधिकारीगण जैसे अतिरिक्त महानिदेशक गुप्तवार्ता/सायबर, दूरसंचार, रेल, प्रशिक्षण, योजना/प्रबंध, PTRI तथा विसबल, IG भोपाल ग्रामीण, IG का.व्य. एवं सुरक्षा, DIG SDRF, DIG एएनओ/नोडल अधिकारी सिंहस्थ, पुलिस आयुक्त भोपाल, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त भोपाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे। साथ ही, वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से ADG उज्जैन जोन, पुलिस आयुक्त इंदौर, IG व DIG इंदौर ग्रामीण, DIG उज्जैन रेंज तथा उज्जैन, खण्डवा, खरगौन, देवास, शाजापुर, धार, रतलाम, सीहोर एवं आगर-मालवा के पुलिस अधीक्षक बैठक से वर्चुअल रूप से जुड़े। बैठक का एक प्रमुख आकर्षण रहे उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी श्री प्रेम कुमार गौतम, भा.पु.से., वर्तमान में पुलिस महानिरीक्षक, एटीएस, उत्तर प्रदेश, द्वारा वर्ष 2025 में आयोजित प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान अपनाए गए उत्कृष्ट प्रबंधन उपायों का प्रेजेंटेशन के माध्यम से विस्तारपूर्वक साझा किया गया, जो आगामी सिंहस्थ महाकुंभ-2028 के आयोजन के लिए अत्यंत प्रेरणादायी एवं मार्गदर्शक सिद्ध होगा। प्रस्तुत प्रजेंटेशन में इन प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया:
1. स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण:
• AI-Enabled ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर की स्थापना से Intelligent Traffic System (ITS) द्वारा रीयल-टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग सुनिश्चित की गई।
• प्रयागराज नगर को जोनल ट्रैफिक डिवीजन में विभाजित कर यातायात का सुगठित प्रबंधन किया गया।
• ड्रोन आधारित निगरानी के माध्यम से प्रमुख मार्गों और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में सटीक पर्यवेक्षण किया गया।
• श्रद्धालुओं की सहायता हेतु रूट डायवर्जन मोबाइल ऐप विकसित कर लाइव ट्रैफिक अपडेट उपलब्ध कराए गए।
• पैदल यात्रियों के लिए अस्थायी फ्लाईओवर एवं वॉकवे गलियारे बनाए गए जिससे सुरक्षित व निर्बाध आवागमन संभव हुआ।
2. आतंकवाद-रोधी उपाय और समन्वित सुरक्षा:
• NIA, IB, और ATS जैसी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त कोऑर्डिनेशन यूनिट गठित कर सूचनाओं का समन्वय किया गया।
• डॉग स्क्वाड, बम डिस्पोजल यूनिट और एंटी-स्नाइपर टीमों की पूर्व नियोजित तैनाती से सुरक्षा चाक-चौबंद रखी गई।
• डार्क वेब मॉनिटरिंग द्वारा संभावित साइबर खतरों का पूर्वानुमान लगाकर कार्रवाई की गई।
• फेशियल रिकग्निशन ट्रैकिंग सिस्टम से संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी गई।
3. मास सर्विलांस और रियल-टाइम मॉनिटरिंग:
• मेले के क्षेत्र में स AI-आधारित CCTV कैमरों की स्थापना की गई, जिनमें फाइट डिटेक्शन, फॉल डिटेक्शन जैसी आधुनिक क्षमताएं थीं।
• ड्रोन फीड को मुख्य कंट्रोल रूम में लाइव मॉनिटर किया गया।
• Face Recognition & Behavior Analytics तकनीक के माध्यम से भीड़ में संदिग्ध चेहरों और गतिविधियों की पहचान संभव हुई।
• प्रत्येक क्षेत्र में पुलिस की QRT (Quick Response Teams) तैनात की गईं, जिससे त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सकी।
4. वीआईपी मूवमेंट और विशेष प्रबंधन:
• वीआईपी आगंतुकों के लिए अलग ट्रैफिक रूट, जियो-फेंसिंग, स्कैनिंग ज़ोन और ब्लू-ग्रीन लेन के प्रोटोकॉल अपनाए गए।
• फेस रिकग्निशन एवं बायोमेट्रिक एंट्री सिस्टम से विशिष्ट व्यक्तियों की पहचान सुनिश्चित की गई।
• हेलीकॉप्टर लैंडिंग ज़ोन और वॉचटावर जैसी व्यवस्थाएं बनाई गईं, जिससे उच्चस्तरीय पर्यवेक्षण संभव हुआ।
5. श्रद्धालु सुविधा और सार्वजनिक परिवहन समाधान:
• GPS ट्रैकिंग युक्त शटल बस सेवा, ई-रिक्शा और मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब (रेल+बस+ई-मोबिलिटी) का संचालन किया गया।
• श्रद्धालुओं की सहायता हेतु Seva Kendras, Lost & Found Booths और Digital Maps की व्यवस्था की गई।
• ऑनलाइन रूट प्लानर ऐप और QR कोड आधारित पंजीकरण प्रणाली विकसित की गई।
• Face Recognition Surveillance System (FRSS) के माध्यम से लाखों चेहरों की पहचान, Missing Person Identification System और VIP चेहरों की प्री-लोडेड सूची के माध्यम से निगरानी सुनिश्चित की गई।
एडीजी गुप्तवर्ता साईं मनोहर ने IG गौतम का जीवन परिचय दिया। डीजीपी मकवाणा ने बैठक के अंत में कहा कि उनके अनुभवों का हमें लाभ मिलेगा तथा सिंहस्थ महाकुंभ-2028 मध्यप्रदेश की गरिमा और प्रशासनिक क्षमता का परिचायक होगा, जिसमें मध्यप्रदेश पुलिस अपनी दक्षता और प्रौद्योगिकीय नवाचार से एक मिसाल कायम करेगी।
स्टोन क्रेशर की हड़ताल का बाजार पर बड़ा असर
12 Jun, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गिट्टी, चूरी की सप्लाई बंद हुई तो सीमेंट, सरिया, बालू रेती की बिक्री भी रुक गई
भोपाल। स्टोन क्रेशर के संचालकों द्वारा की गई हड़ताल का बाजार पर बड़ा असर पडऩे लगा है। इस हड़ताल के कारण बाजार में गिट्टी और चूरी की सप्लाई बंद हो गई है। इसके परिणामस्वरूप अब बाजार में सीमेंट, सरिया और बालू रेती का धंधा भी रुक गया है।
द स्टोन क्रेशर आनर्स एसोसिएशन के आह्वान पर प्रदेश के 2000 से ज्यादा स्टोन क्रेशर संचालकों द्वारा हड़ताल कर दी गई है। यह हड़ताल उनकी मांगों को सरकार द्वारा स्वीकार नहीं किए जाने के कारण की गई है। भोपाल, इंदौर और उसके आसपास के क्षेत्र में आज हड़ताल दसवें दिन में प्रवेश कर गई। इसके साथ ही शेष बचे हुए प्रदेश में भी कल से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो गई है। इस हड़ताल में ग्वालियर के 2 जोन में से एक जोन में मंगलवार से हड़ताल शुरू हो गई है, जबकि दूसरे जोन में आज से हड़ताल शुरू होगी। पूरे प्रदेश में तो यह हड़ताल कल से ही शुरू हुई है, लेकिन भोपाल, इंदौर क्षेत्र में जहां यह हड़ताल दूसरे हफ्ते में प्रवेश कर गई है, वहां पर हड़ताल का व्यापक प्रभाव नजर आ रहा है। इस हड़ताल के कारण अधोसंरचना विकास के कार्य रुक गए हैं। बिल्डर, कॉलोनाइजर द्वारा किए जा रहे निर्माण पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। स्टोन क्रेशर की हड़ताल के कारण बाजार में गिट्टी और चूरी के सप्लाई बंद हो गई है। किसी भी निर्माण कार्य को आकार देने के लिए सीमेंट, सरिया, बालू रेती के साथ में गिट्टी और चूरी भी जरूरी होती है। अब जब बाजार में गिट्टी और चूरी उपलब्ध नहीं है तो ऐसे में सीमेंट, सरिया और बालू रेती के कारोबार पर भी बुरा असर पड़ा है। इन वस्तुओं के कारोबार में अचानक मंदी की स्थिति बन गई है। द स्टोन क्रेशर आनर्स एसोसिएशन के मध्यप्रदेश के उपाध्यक्ष हरित पाल होरा ने बताया कि इस समय सीमेंट और सरिया का कारोबार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। इस कारोबार में लगे कारोबारी अब स्टोन क्रेशर संचालकों से संवाद करके यह जानना चाहते हैं कि उनकी हड़ताल कितनी लंबी चलेगी। इससे इन कारोबारियों को इस बात का अंदाजा लग जाएगा कि उनके कारोबार में कितने दिन तक मंदी रहेगी।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के इंतजार में स्टोन क्रेशर संचालक
अपनी मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे स्टोन क्रेशर संचालक प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के इंतजार में हैं। मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल में मंत्रियों को दिए गए विभाग में खनिज विभाग मुख्यमंत्री के ही पास में है। ऐसे में स्टोन क्रेशर संचालकों को उम्मीद है कि यदि मुख्यमंत्री के साथ उनकी मीटिंग हो जाती है तो उनकी बहुत सारी समस्याओं का त्वरित रूप से समाधान हो सकेगा। संगठन के प्रदेश के महामंत्री आलोक गोस्वामी और अन्य पदाधिकारी चाहते हैं कि जल्द से जल्द मुख्यमंत्री के साथ बैठक हो।
प्रमुख सचिव के साथ चर्चा का नहीं निकला कोई परिणाम
आंदोलन कर रहे स्टोन क्रेशर संचालकों के एक प्रतिनिधिमंडल की खनिज विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव के साथ बैठक हो चुकी है। इस बैठक में इन संचालकों द्वारा अपनी समस्याओं को सरकार के सामने रखा गया। इन संचालकों की बात को तो प्रमुख सचिव ने ध्यान से सुना, लेकिन उनका समाधान करने की दिशा में कोई पहल नहीं हो सकी है।
पचमढ़ी में मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की ट्रेनिंग की तैयारियां शुरू
12 Jun, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पब्लिक डीलिंग से लेकर पार्टी रीति-नीति तक सिखाए जाएंगे गुर
भोपाल । मप्र के भाजपा विधायकों, सांसदों और मंत्रियों की तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला 14 जून से पचमढ़ी में शुरू होने जा रही है। यह प्रशिक्षण 16 जून तक चलेगा। कार्यशाला में नेताओं को पब्लिक डीलिंग, मोबाइल और टाइम मैनेजमेंट, पार्टी की रीति-नीति, सांगठनिक कार्यशैली और जनसंघ से भाजपा तक की विकास यात्रा जैसे विषयों पर अलग-अलग सत्रों में जानकारी दी जाएगी।कार्यशाला का उद्घाटन 14 जून को दोपहर 12 बजे होगा। इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के शामिल होने की संभावना है। उनके साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी मंच पर मौजूद रह सकते हैं। अमित शाह जनसंघ से लेकर भाजपा तक की यात्रा और पार्टी की विचारधारा पर व्याख्यान दे सकते हैं। शाह के आगमन को लेकर पचमढ़ी में तैयारियां तेज हो गई हैं।
ग्लेन व्यू होटल में आयोजन, 200 लोगों की बैठक क्षमता
प्रशिक्षण का आयोजन पचमढ़ी के ग्लेन व्यू होटल परिसर में किया जा रहा है। यहां दो बड़े डोम टेंट लगाए जा रहे हैं—एक प्रशिक्षण सत्रों के लिए और दूसरा भोजन के लिए। डोम में करीब 200 लोगों के बैठने की व्यवस्था के साथ एक मंच भी तैयार किया जा रहा है। कार्यशाला में भाग लेने वाले सभी विधायक, सांसद और मंत्री 13 जून की रात तक पचमढ़ी पहुंच जाएंगे। उनके ठहरने के लिए एमपी टूरिज्म के रिसॉर्ट और निजी होटलों को 13 जून से 16 जून तक के लिए बुक कर लिया गया है।
सुबह योग और प्रार्थना के साथ होगी शुरुआत
प्रशिक्षण के दौरान अनुशासन और दिनचर्या पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। सभी नेताओं को सुबह 6 बजे जागना होगा। इसके बाद सुबह 7 से 8 बजे तक योग और प्रार्थना सत्र आयोजित किया जाएगा।
10 दिनों से मुंबई में ठिठका मानसून
12 Jun, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तीन दिनों तक बरकरार रहेंगे सूरज के तेवर, सताएगी गर्मी
भोपाल। मानसून पिछले 10 दिनों से मुंबई में ठिठका हुआ है। सूरज के तेवर तल्ख होने लगे हैं। इसके चलते मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी पडऩे लगी है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, तीन दिनों तक गर्मी के तेवर इसी तरह बने रह सकते हैं। हालांकि इस दौरान जबलपुर, इंदौर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं राहत की बौछारें पडऩे की भी संभावना है। 14 जून से मानसून के एक बार फिर सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के विज्ञानी पीके रायकवार ने बताया कि वर्तमान में हरियाणा, पाकिस्तान एवं उत्तर प्रदेश पर बने चक्रवात के कारण लगातार गर्म हवाएं आ रही हैं। इस वजह से प्रदेश में भीषण गर्मी पड़ रही है। इस तरह की स्थिति अभी तीन दिन तक बनी रह सकती है। इस दौरान उत्तरी मध्य प्रदेश में लू का प्रभाव भी बना रह सकता है।
ये मौसम प्रणालियां हैं सक्रिय
मानसून की उत्तरी सीमा मुंबई, अहिल्यानगर, आदिलाबाद, भवानीपटना, पुरी, बालुरघाट से होकर ही गुजर रही है। उत्तरी छत्तीसगढ़ और उसके आसपास हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात बना हुआ है। उत्तरी हरियाणा और उसके आसपास हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात बना है। उत्तरी पाकिस्तान और उससे लगे पंजाब पर हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात है। दक्षिणी उत्तर प्रदेश के मध्य में भी हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात मौजूद है। उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश से उत्तरी मध्य प्रदेश, दक्षिणी छत्तीसगढ़, मध्य ओडिशा से लेकर बंगाल की खाड़ी तक एक द्रोणिका बनी हुई है।
मानसून के पुन: सक्रिय होने के संकेत
मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने बताया कि वर्तमान में बंगाल की खाड़ी में हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात बन गया है। इसके अलावा तमिलनाडु पर शियर जोन (विपरीत दिशा की हवाओं का सम्मिलन) बना है। इन दो मौसम प्रणालियों के असर से सुस्त पड़े मानसून के सक्रिय होने की संभावना बढ़ गई है। 14 जून से मानसून के एक बार फिर आगे बढऩे के आसार हैं।
प्रभारी सीएमओ के भरोसे शहर सरकारें, मप्र में स्थाई सीएमओ का टोटा
12 Jun, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । नगर विकास की जिम्मेदारी मुख्य नगरपालिका अधिकारी यानी सीएमओ पर रहती है। लेकिन विडंबना यह है कि मप्र में स्थाई सीएमओ का टोटा है। स्थाई सीएमओ नहीं होने से जहां प्रभारी मुख्य नगरपालिका अधिकारी कामकाज संभाल रहे हैं, वहीं कई जगह तो दागदारों को ही सीएमओ बनाने की मजबूरी है। हालांकि दागदारों को सीएमओ बनाने पर सवाल भी उठ रहे हैं, लेकिन सरकार के सामने ऐसा करने की मजबूरी भी है।
मप्र में नगर विकास की जिम्मेदारी संभालने के लिए मुख्य नगरपालिका अधिकारी का टोटा होने का असर यह देखने को मिल रहा है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अपने पसंद के नगर पालिका/नगर पंचायत कर्मियों को सीएमओ का चार्ज दिलवा रखा है। खासबात यह है कि राजनीतिक दवाब के चलते लिपिक, स्वास्थ्य व राजस्व निरीक्षक, अकाउंटेंट सहित तृतीय श्रेणी के कर्मचारी प्रभारी सीएमओ बने हुए हैं। इसका सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ रहा है। ऐसी कई नगर पालिका और नगर परिषद हैं, जहां प्रभारी सीएमओ अध्यक्ष के प्रभार में फैसले लेते हैं। सीएमओ की इस कमी का राजनीतिक और प्रशासनिक पकड़ रखने वाले कर्मचारी खूब फायदा उठा रहे हैं। यानी कई निकायों में तो ऐसे कर्मचारियों को प्रभारी सीएमओ बना दिया गया है, जिनके ऊपर पूर्व में भी प्रभारी रहते हुए वित्तीय अनियमितता, पद के दुरुपयोग अथवा लापरवाही के आरोप लग चुके हैं।
दागियों को बना दिया प्रभारी सीएमओ
प्रदेश में 413 नगरीय निकायों में से सिर्फ 129 में स्थायी मुख्य नगर पालिका अधिकारी हैं। जबकि 173 निकायों में प्रभारी सीएमओ कुर्सी पर काबिज हैं। इनमें भी कई निकायों में तो ऐसे भी कर्मचारियों को प्रभारी बना दिया गया हैं, जिन पर भ्रष्टाचार के केस दर्ज हैं। बता दें कि प्रदेश में सीएमओ के कुल 458 पद हैं, जिसमें 187 सीधी भर्ती और 271 पदोन्नति के हैं। पिछले करीब 9 साल से पदोन्नति की कार्रवाई न होने से 70 प्रतिशत सीएमओ के पद रिक्त हो गए हैं। स्थाई सीएमओ के कारण दागियों को सीएमओ बनाया गया है। जैसे भिंड नपा में 3.40 करोड़ रु. के गबन में आरोपी को अब गोहद का प्रभार है। दरअसल, 2019 से जून 2022 तक प्रभारी रहे सुरेंद्र शर्मा के कार्यकाल में भवन संनिर्माण मंडल और संबल योजना में करीब 3.40 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया। अक्टूबर 2024 में वर्तमान सीएमओ यशवंत वर्मा की शिकायत पर उनके समेत छह लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई। इसके बावजूद 6 फरवरी 2025 को शर्मा को फिर से गोहद नगरपालिका का प्रभारी सीएमओ बना दिया गया। वहीं भ्रष्टाचार के मामले में ईओडब्ल्यू के आरोपी पर अब दो निकायों का प्रभार है। दरअसल, 2020 से 2022 तक नगर परिषद कैलारस के स्टोर में हुई खरीदी की सामग्री के बिलों एवं भुगतान वाउचरों की जांच में 180 भुगतान वाउचर संदिग्ध पाए गए, जिससे एक करोड़ 41 लाख फर्जी भुगतान हुआ। इस मामले में ईओडब्ल्यू ने कैलारस के तत्कालीन पांच सीएमओ, दो लेखापाल, स्टोर कीपर समेत संतोष सिहारे को भी आरोपी बनाया है, जो अभी भिंड जिले की फूप और रौन नगर परिषद में सीएमओ का प्रभार संभाले हुए हैं। वहीं शिवपुरी नगर पालिका परिषद के राजस्व निरीक्षक सौरभ गौड़ काफी समय से नगर परिषद बदरवास के सीएमओ का प्रभार संभालेहुए हैं। शासन ने उनकी सेवा समाप्त की तो वे न्यायालय से चले गए। स्थगन आदेश ले आए। बदरवास के प्रभारी सीएमओ रहते हुए 2019 में गौड़ पर कॉलोनाइजर को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे। मामला विधानसभा में उठा तो उनके विरुद्ध दो वेतनवृद्धी भी रोकने की कार्रवाई की गई। वहीं जिसे नरसिंहपुर में घपले के आरोप में हटाया, अब वह रामपुर बघेलान में सीएमओ हैं। दरअसल, सतना जिले की रामपुर बघेलान के प्रभारी सीएमओ अरुण श्रीवास्तव को हाल ही में ये जिम्मेदारी मिली है। 2022-23 में नरसिंहपुर जिले की चीचली नगर परिषद के प्रभारी सीएमओ थे। तब उन पर आरोप लगा कि उन्होंने बाजार मूल्य से अधिक दर पर ट्रेक्टर और हाइड्रोलिक ट्रॉली 11.95 लाख रुपए में खरीदी। जांच में साबित हुआ कि ट्रेक्टर और हाइड्रोलिक ट्रॉली की कीमत 8.41 लाख रुपए जीएसटी सहित थी। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भौंडवे का कहना है कि सीएमओ की कमी है, इसलिए कई जगह चार्ज देकर किसी तरह से काम चला रहे हैं। यदि किसी पर प्रभारी रहते वित्तीय अनियमितता, पद के दुरुपयोग और लापरवाही जैसे आरोप लग चुके हैं, उन्हें फिर किसी दूसरी जगह प्रभार दिया गया है तो यह गलत है। परीक्षण कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
बड़े प्रोजेक्ट पर पड़ रहा असर
राज्य सरकार ने वॉटर सप्लाई, सीवरेज, स्वच्छ भारत मिशन के साथ ही एक लाख की आबादी वाले निकायों के लिए अमृत योजना और हाउसिंग फॉर ऑल जैसे प्रोजेक्ट मंजूर किए हैं। ऐसे में निकायों में प्रभारी सीएमओ होने से इन प्रोजेक्ट्स की मॉनीटरिंग नहीं हो पा रही हैं। लेकिन स्थाई सीएमओ की पदस्थापना होने से विकास कार्यों तेजी से हो सकेंगे। तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों पर कार्रवाई करने का अधिकार सीएमओ के पास होता है, जबकि स्वास्थ्य निरीक्षक, राजस्व निरीक्षक, मुख्य लिपिक, लेखापाल व उप यंत्री पर कार्रवाई करने का अधिकार संचालक को होता है। लेकिन स्थिति यह है कि कुछ नगर पालिकाओं व नगर पंचायतों में तो तृतीय श्रेणी कर्मचारी या दैनिक वेतन भोगी तक प्रभारी सीएमओ बनाए गए हैं। ऐसे कर्मचारियों को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है। इसलिए संचालक, प्रभारी सीएमओ के खिलाफ कार्रवाई करने से बचते हैं।
2020 में यह दिया गया था निर्देश
गौरतलब है कि 2020 में नगरीय निकायों में क्लर्क और स्वच्छता निरीक्षकों को मुख्य नगर पालिका अधिकारी-सीएमओ नहीं बनाया जाएगा। यह निर्देश सरकार ने जारी कर दिए थे और इन पदों पर उसी संवर्ग के अधिकारी पदस्थ होंगे। इसी के चलते सरकार ने क्लर्क और स्वच्छता निरीक्षकों से 50 निकायों का प्रभार वापस ले लिया था। सीएमओ के पद पर उसी संवर्ग के अधिकारियों की नियुक्ति के आदेश दिए थे, लेकिन फिर दो साल बाद वापस प्रभारी सीएमओ के भरोसे नगरपरिषद चल रही है।
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