मध्य प्रदेश
सुहागरात के बाद छिड़ा विवाद, दुल्हन के आरोपों पर युवक ने मेडिकल जांच की दी चुनौती
4 Jul, 2026 02:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्वालियर। वैवाहिक रिश्तों में धोखाधड़ी, मंगेतर या पत्नियों द्वारा पतियों को नुकसान पहुंचाने की हालिया वैश्विक घटनाओं के बीच मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक पीड़ित पति ने अपनी सुरक्षा और इंसाफ के लिए पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई है। पीड़ित युवक के अनुसार, उसकी शादी के महज दूसरे ही दिन उसकी नवविवाहिता पत्नी घर की दूसरी मंजिल के छज्जे से रहस्यमयी तरीके से कूदकर ससुराल से फरार हो गई। काफी खोजबीन के बाद जब वह नहीं मिली, तो पता चला कि युवती वापस अपने मायके पहुंच चुकी है। इसके बाद पीड़ित ने विश्वविद्यालय पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
थाने में दोनों पक्षों के बीच हाई-वोल्टेज ड्रामा, दूल्हे ने कहा— बदनामी हो चुकी, अब साथ रखना मुमकिन नहीं
यह पूरा सनसनीखेज मामला ग्वालियर के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र का है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते 28 जून को जितेंद्र जोशी नामक युवक का विवाह नम्रता नाम की युवती के साथ हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ था। लेकिन शादी की अगली ही सुबह दुल्हन घर की दूसरी मंजिल से छलांग लगाकर भाग निकली। पति की लिखित शिकायत के बाद पुलिस के दखल देने पर युवती के पिता और भाई उसे समझा-बुझाकर थाने लेकर पहुंचे।
थाने में काउंसलिंग के दौरान पीड़ित युवक ने अपनी पत्नी को दोबारा साथ रखने से साफ इनकार कर दिया। युवक का कहना है कि इस अजीबोगरीब घटना के बाद समाज में उसकी और उसके परिवार की भारी बदनामी हो चुकी है।
दुल्हन ने लगाया नपुंसकता का आरोप, दूल्हे की दोटूक— 'मेडिकल टेस्ट को तैयार, पर इस औरत को घर नहीं लाऊंगा'
थाने में जब विवाद बढ़ा, तो खुद को फंसता देख नवविवाहिता ने अपने बचाव में दूल्हे पर नपुंसकता (Impotency) का गंभीर आरोप लगा दिया। इस पर पलटवार करते हुए पीड़ित पति जितेंद्र ने पुलिस के सामने कहा कि यह आरोप पूरी तरह निराधार, झूठा और युवती द्वारा अपने गुनाह व घर से भागने की असली वजह को छिपाने के लिए बुना गया एक पैंतरा है। युवक ने पुलिस अधिकारियों के सामने दोटूक कहा, "मैं किसी भी प्रकार के मेडिकल टेस्ट (चिकित्सकीय जांच) के लिए पूरी तरह तैयार हूं, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके, लेकिन इस गंभीर धोखे के बाद मैं इस महिला को किसी भी कीमत पर अपने साथ नहीं रखूंगा।"
घर से नकदी और जेवरात समेटने का दावा, पति को सता रहा है जान का खतरा
पीड़ित पति ने पुलिस को दिए अपने बयान में कई गंभीर आशंकाएं और आरोप दर्ज कराए हैं:
चोरी और अफेयर का शक: युवक का आरोप है कि शादी के दूसरे दिन जब उसकी पत्नी छज्जे से कूदी, तो वह घर में रखे कीमती जेवरात और नकदी भी अपने साथ समेटकर ले गई। युवक को अंदेशा है कि युवती का किसी अन्य पुरुष के साथ प्रेम प्रसंग (Affair) चल रहा है, जिसके चलते उसने इस शादी को ढाल बनाया।
खौफनाक साजिश का डर: पीड़ित ने देश में हाल ही में घटित हुई 'नीले ड्रम' (जिसमें पति की हत्या कर शव को ड्रम में छुपा दिया गया था) जैसी वीभत्स आपराधिक घटना का हवाला देते हुए कहा कि उसे डर है कि उसकी पत्नी और ससुराल वाले उसके साथ भी ऐसी किसी बड़ी अनहोनी या जानलेवा वारदात को अंजाम दे सकते हैं।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, ससुराल पक्ष से मिल रही धमकियां
पीड़ित युवक जितेंद्र ने विश्वविद्यालय थाना पुलिस पर ढुलमुल रवैया अपनाने और समय पर उचित वैधानिक कार्रवाई न करने का भी खुला आरोप लगाया है। युवक का कहना है कि उसने घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और अन्य पुख्ता तकनीकी सबूत पुलिस को सौंप दिए हैं, इसके बावजूद विभाग मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है। पीड़ित ने आरोप लगाया कि युवती और उसके मायके वाले अब पेशेवर अपराधियों की तरह उसे और उसके परिवार को देख लेने की धमकियां दे रहे हैं, जिससे उसकी जान को सीधे तौर पर खतरा बना हुआ है। पुलिस अधिकारियों ने फिलहाल दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर मामले की प्राथमिक जांच शुरू कर दी है।
दो साल पुराने पुल की खुली पोल, मुरैना में सड़क धंसने से बढ़ी चिंता
4 Jul, 2026 11:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुरैना। मध्य प्रदेश के चंबल अंचल के मुरैना जिले में बुनियादी विकास कार्यों और निर्माण की गुणवत्ता एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। जिले के बिंडवा गांव में क्वारी नदी पर महज दो वर्ष पूर्व निर्मित हुआ करोड़ों की लागत का पुल भरभरा कर ढहने की कगार पर पहुंच गया है। पुल के मुख्य ढांचे में गहरी और खतरनाक दरारें उभर आई हैं, जबकि पुल को जोड़ने वाली मुख्य एप्रोच रोड (संपर्क मार्ग) भी कई महत्वपूर्ण स्थानों पर बुरी तरह धंस चुकी है। वर्तमान में स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि यहाँ से गुजरने वाले हजारों राहगीरों, ग्रामीणों और भारी वाहन चालकों की जान हर वक्त दांव पर लगी रहती है।
पहली बारिश में ही उखड़ी ठेकेदार के डामर की परत, भ्रष्टाचार छिपाने की कोशिश नाकाम
स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी और ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुल निर्माण के एक साल के भीतर ही इसकी गुणवत्ता की पोल खुलने लगी थी और दीवारों में कट्स दिखने लगे थे। सड़क धंसने की शिकायत जब की गई, तो विभाग ने तकनीकी सुधार करने के बजाय ठेकेदार से सांठगांठ कर आनन-फानन में क्षतिग्रस्त सीसी सड़क के ऊपर डामर (एस्फाल्ट) की एक पतली परत बिछाकर लीपापोती कर दी। हालांकि, चालू मानसूनी सीजन की पहली ही तेज बारिश ने भ्रष्टाचार के इस डामर को पूरी तरह उखाड़ फेंका है, जिससे पूरी सड़क पर अब जानलेवा और गहरे गड्ढे उभर आए हैं।
सुरक्षा दीवारों में आई दरारों को सीमेंट से भरने का खेल, पलपुरा रपटे की दीवार भी ढही
भ्रष्टाचार का यह खेल यहीं नहीं थमा; पुल की सुरक्षा के लिए बनाई गई एप्रोच रोड की कंक्रीट की दीवारों में भी बड़ी-बड़ी और चौड़ी दरारें साफ देखी जा सकती हैं। इन तकनीकी खामियों को तकनीकी रूप से दुरुस्त करने के बजाय मजदूरों के जरिए सीमेंट और रेत का लेप लगाकर दरारों को छिपाने का नाकाम प्रयास किया गया है। ग्रामीणों को पुख्ता आशंका है कि लगातार हो रही बारिश के कारण यह सुरक्षा दीवार किसी भी दिन जमींदोज हो सकती है। इसके साथ ही, पास के पलपुरा गांव में स्थित क्वारी नदी के रपटे (कॉजवे) की स्थिति भी अत्यंत जर्जर हो चुकी है, जिसकी एक सुरक्षात्मक दीवार पूरी तरह ढह चुकी है।
रेलिंग विहीन रपटे पर बढ़ा जलस्तर, जिम्मेदार विभाग की लापरवाही से कभी भी हो सकती है बड़ी दुर्घटना
बरसात के इस मौसम में क्वारी नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी अक्सर रपटे के ऊपर से बहने लगता है, जिससे जलभराव के कारण सड़क के गड्ढे दिखाई नहीं देते। सबसे बड़ी प्रशासनिक लापरवाही यह है कि इस खतरनाक रपटे के दोनों किनारों पर कोई सुरक्षा रेलिंग या बैरियर नहीं लगाया गया है। ऐसी स्थिति में यदि कोई वाहन असंतुलित होता है या कोई चालक ओवरटेक करने की कोशिश करता है, तो वाहन सीधे उफनती नदी में समा सकता है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जिले में लोक निर्माण विभाग (PWD) और सेतु निगम के अधीन ऐसे कई क्षतिग्रस्त पुल-पुलिया मौजूद हैं, लेकिन जिम्मेदार अफसर किसी बड़े हादसे के इंतजार में मूकदर्शक बने बैठे हैं।
पीडब्ल्यूडी (PWD) की टीम करेगी तकनीकी जांच, दोषी पाए जाने पर ठेकेदार पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
इस संवेदनशील और गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए मुरैना के जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) कमलेश कुमार भार्गव ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बिंडवा पुल और संपर्क मार्ग की वर्तमान जर्जर स्थिति की तकनीकी जांच के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के वरिष्ठ अभियंताओं (इंजीनियर्स) की एक विशेष टीम को तुरंत मौके पर भेजा जा रहा है। सीईओ ने आश्वस्त किया कि यदि जांच रिपोर्ट में निर्माण कार्य गुणवत्ताहीन या एस्टीमेट के विपरीत पाया जाता है, तो न केवल संबंधित निर्माण ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग और लापरवाही के मामले में नियमानुसार कड़ी दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
मध्य प्रदेश में IPS अधिकारियों का फेरबदल, 9 अफसरों के तबादले; शाजापुर-शहडोल के SP बदले
4 Jul, 2026 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल करते हुए भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 9 वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण आदेश जारी किए हैं। गृह विभाग द्वारा जारी की गई इस नवीन सूची के तहत दो प्रमुख जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) के कार्यक्षेत्र बदले गए हैं, जबकि कई अन्य आईपीएस अधिकारियों को नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इसके साथ ही, कुछ चुनिंदा अधिकारियों को उनके वर्तमान कर्तव्यों के साथ-साथ अतिरिक्त प्रभार भी सौंपे गए हैं ताकि प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।
वरिष्ठ पुलिस कप्तानों और जोन प्रभारियों के दायित्वों में बदलाव
इस प्रशासनिक फेरबदल के अंतर्गत वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हरिनारायण चारी मिश्र को पुलिस मुख्यालय (SCRB) से हटाकर अब पुलिस मुख्यालय (PHQ) भोपाल में पुलिस महानिरीक्षक (प्रशासन) की कमान सौंपी गई है। उनके स्थान पर रूचिवर्धन मिश्र को पुलिस महानिरीक्षक (प्रशासन) PHQ से स्थानांतरित करते हुए भोपाल (ग्रामीण) जोन का नया पुलिस महानिरीक्षक (IG) नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, चंद्रशेखर सोलंकी को इंदौर रेंज विसबल से हटाकर नर्मदापुरम जोन का आईजी बनाया गया है, जबकि सुश्री सिमाला प्रसाद को भोपाल मुख्यालय से स्थानांतरित कर खरगोन रेंज की नई उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG) नियुक्त किया गया है।
शाजापुर और शहडोल जिलों को मिले नए पुलिस कप्तान
कानून व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के उद्देश्य से गृह विभाग ने जिला स्तर पर भी बड़े बदलाव किए हैं। अब तक शाजापुर के पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यरत रामजी श्रीवास्तव को इंदौर में एसपी (रेल) के पद पर तैनात किया गया है, और उनके स्थान पर प्रियंका शुक्ला को भोपाल से स्थानांतरित कर शाजापुर का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। वहीं, शहडोल के एसपी यशपाल सिंह राजपूत को भोपाल मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (AIG) के पद पर भेजा गया है, और उनकी जगह संजय कुमार को पुलिस अकादमी भौंरी से हटाकर शहडोल जिले का नया पुलिस कप्तान नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, मिथलेश शुक्ला को अब पूर्ण रूप से सागर जोन का महानिरीक्षक बनाया गया है।
प्रशासनिक सुगमता के लिए अतिरिक्त प्रभार की घोषणा
अधिकारियों के स्थानांतरण के साथ-साथ शासन ने कुछ वरिष्ठ पदों का अतिरिक्त जिम्मा भी सौंपा है। जारी आदेश के तहत विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशासन) आदर्श कटियार को उनके वर्तमान कार्यों के साथ-साथ भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय में पुलिस महानिरीक्षक दूरसंचार का अतिरिक्त दायित्व भी संभालना होगा। इसी क्रम में, इंदौर (ग्रामीण) जोन के पुलिस महानिरीक्षक अनुराग को उनकी वर्तमान व्यस्तताओं के साथ ही इंदौर रेंज विसबल के पुलिस महानिरीक्षक तथा आरएपीटीसी इंदौर के पद का भी अतिरिक्त प्रभार सौंपकर कानून व्यवस्था की निगरानी का दायरा बढ़ाया गया है।
शिक्षा क्षेत्र को बड़ी सौगात, 70 सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण; CM ने दिए खास निर्देश
4 Jul, 2026 10:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को राज्य में नवविकसित किए गए सभी सांदीपनि विद्यालयों के निर्माण कार्यों की उच्च स्तरीय समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के आलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि आगामी 15 जुलाई तक हर हाल में जिलों के प्रभारी मंत्रियों व स्थानीय जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में नवविर्निमित 70 सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण संपन्न कराया जाए। इनमें स्कूल शिक्षा विभाग के 46 और जनजातीय कार्य विभाग के 24 स्कूल शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इन स्कूलों का उद्घाटन महज एक औपचारिक सरकारी कार्यक्रम न होकर शिक्षा, समृद्ध संस्कृति और जनभागीदारी का एक अनूठा सामाजिक उत्सव बनना चाहिए।
गुरु पूर्णिमा पर सजेगा उत्सव और एआई का प्रदर्शन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह नए शैक्षणिक भवनों का उद्घाटन होने के साथ-साथ हमारे प्रदेश के बच्चों के सुनहरे भविष्य और उच्च स्तरीय शिक्षा के एक नए युग का आगाज है। उन्होंने निर्देश दिए कि आने वाली 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रदेश के प्रत्येक जिले के एक सांदीपनि विद्यालय में प्रभारी मंत्री की अगुवाई में विशेष 'गुरु पूर्णिमा उत्सव' का आयोजन किया जाए। इस भव्य समारोह के अंतर्गत विज्ञान प्रदर्शनियां लगाई जाएं, श्रेष्ठ गुरुजनों का आदर-सत्कार हो, शिक्षकों व छात्रों के नए अनुसंधानों की प्रस्तुतियां दी जाएं और साथ ही छात्र-छात्राओं द्वारा डिजिटल व कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीकों का लाइव प्रदर्शन किया जाए।
सांदीपनि के जीवन दर्शन से प्रेरणा लेंगे विद्यार्थी
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्राचीन ज्ञान परंपरा को रेखांकित करते हुए कहा कि महान गुरु सांदीपनि प्राचीन काल में सामाजिक समरसता के बहुत बड़े संवाहक थे। उन्होंने अपने आश्रम में जाति, वर्ग या अमीर-गरीब का कोई भेदभाव किए बिना राजपरिवार के बालकों से लेकर साधारण गरीब किसानों के बच्चों को एक समान शिक्षा-दीक्षा दी थी। आज की युवा पीढ़ी और विशेषकर विद्यार्थियों को उनके प्रेरणादायी व्यक्तित्व व आदर्श कृतित्व से परिचित कराना बेहद जरूरी है। इससे छात्रों को भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा और उच्च नैतिक मूल्यों की सीख मिलेगी। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गुरु सांदीपनि के जीवन चरित्र पर आधारित एक लघु पुस्तिका (पॉकेट बुक) छपवाकर सभी बच्चों के बीच बांटी जाए।
प्रवेशोत्सव और यादगार सांस्कृतिक आयोजन के निर्देश
डॉ. यादव ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि जिन सांदीपनि विद्यालयों का उद्घाटन पहले ही पूरा किया जा चुका है, वहां बहुत ही उत्साह के साथ 'प्रवेशोत्सव' मनाया जाए ताकि जनसमुदाय और बच्चों का स्कूलों के प्रति स्वाभाविक जुड़ाव बढ़ सके। उन्होंने सभी तैयारियों को तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक सांदीपनि स्कूल राज्य में संस्कारयुक्त, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का रोल मॉडल बनना चाहिए। इन कार्यक्रमों को बच्चों के लिए यादगार बनाने के उद्देश्य से स्कूलों में विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं, रचनात्मक खेलकूद आयोजित करने तथा समारोह के अंत में सभी छात्र-छात्राओं को स्वल्पाहार व मिठाइयां बांटने के भी निर्देश दिए गए हैं।
VIP संस्कृति से दूरी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बेटे की शादी को रखा सादगीपूर्ण
4 Jul, 2026 10:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। आधुनिक दौर में जहां रसूखदार राजनीतिक और सामाजिक घरानों की शादियां आलीशान इंतजामात, वीआईपी हस्तियों की मौजूदगी और भारी-भरकम खर्चों के लिए सुर्खियों में रहती हैं, वहीं मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने सुपुत्र वरद खंडेलवाल और कुमारी आशी के विवाह संस्कार को अत्यधिक सादगी, उच्च पारिवारिक आदर्शों और पारंपरिक मूल्यों के साथ संपन्न कराकर समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
बिना किसी वीआईपी जमावड़े के बेहद सादा समारोह
बीते 3 जुलाई को उदयपुर में आयोजित हुए इस वैवाहिक कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि इसमें किसी भी बड़े राजनेता, मंत्री, जनप्रतिनिधि, नौकरशाह या उद्योगपति को न्यौता नहीं दिया गया था। अमूमन सत्ताधारी दल के बड़े पदों पर बैठे चेहरों के पारिवारिक आयोजनों में दिखने वाली सियासी भीड़भाड़ से इतर यह शादी पूरी तरह से गैर-राजनीतिक रही। पूरे मांगलिक कार्यक्रम को बेहद शांत और शालीन माहौल में सिर्फ दोनों पक्षों के पारिवारिक सदस्यों और कुछ बेहद करीबी रिश्तेदारों की उपस्थिति में ही पूरा किया गया।
मात्र 50 करीबियों के बीच व्यक्तिगत आमंत्रण से शादी
सामने आई जानकारियों के मुताबिक, इस पूरे मांगलिक उत्सव में दोनों पक्षों की तरफ से कुल मिलाकर सिर्फ 50 चुनिंदा मेहमान ही शामिल हुए। इस विवाह की सादगी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इसके लिए पारंपरिक रूप से भारी संख्या में कोई भव्य निमंत्रण पत्र (कार्ड) भी नहीं छपवाए गए थे और न ही किसी तरह का कोई आडंबर या दिखावा किया गया था। केवल बेहद नजदीकी रिश्तेदारों को व्यक्तिगत रूप से सूचित कर इस मिलन का गवाह बनने के लिए बुलाया गया था।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सराहा हेमंत खंडेलवाल का निर्णय
सत्ता और संगठन के शीर्ष पायदान पर होने के बावजूद हेमंत खंडेलवाल द्वारा लिए गए इस फैसले की राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में जमकर तारीफ हो रही है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी एक विशेष वीडियो जारी कर नवविवाहित जोड़े को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं और इस सादगीपूर्ण कदम की खुलकर सराहना की है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने अपने हालिया कुकरू दौरे के दौरान एक चौपाल कार्यक्रम में खुद इस बात का जिक्र करते हुए कहा था कि प्रदेश अध्यक्ष अपने बेटे का विवाह महज 50 लोगों की उपस्थिति में कर रहे हैं और इसमें वे खुद भी शामिल नहीं होंगे, जिसका वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी देखा जा रहा है।
किसानों के साथ धोखाधड़ी? खाद गोदाम पर तय कीमत से ज्यादा वसूली के आरोप
4 Jul, 2026 10:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुरैना। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को सुचारू रूप से और तय दामों पर उर्वरक मुहैया कराने के उद्देश्य से शुरू की गई ई-टोकन व्यवस्था पर अब सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। मुरैना जिले के कृषकों ने इस पूरी व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का सीधा आरोप है कि खाद गोदाम के प्रभारी अभिषेक शर्मा ई-टोकन प्रणाली लागू होने के बाद भी तय सरकारी रेट से ज्यादा पैसों की मांग कर रहे हैं। पीड़ितों के मुताबिक, जिस खाद की शासकीय कीमत 3,700 रुपये तय की गई है, उसके बदले उनसे जबरन 3,800 रुपये वसूले जा रहे हैं।
लंबी लाइनों में खड़े रहने को मजबूर अन्नदाता
उर्वरक की किल्लत और वितरण व्यवस्था में खामियों के चलते आज भी बड़ी तादाद में काश्तकारों को कड़कड़ाती धूप और उमस के बीच घंटों लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि सरकार ने ई-टोकन व्यवस्था की शुरुआत इसलिए की थी ताकि वितरण केंद्रों पर भीड़भाड़ नियंत्रित हो सके और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आए, परंतु जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है और उन्हें पहले की तरह ही दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सोशल मीडिया पर शिकायत और जांच की मांग
इस अवैध वसूली और प्रशासनिक अव्यवस्था से तंग आकर एक जागरूक किसान ने सोशल मीडिया के जरिए सीधे मुरैना कलेक्टर को पूरे मामले से अवगत कराया है। अपनी ऑनलाइन शिकायत में किसान ने उच्च अधिकारियों से इस पूरे घपले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की गुहार लगाई है, साथ ही तय दाम से अधिक राशि वसूलने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
कालाबाजारी और आर्थिक शोषण की आशंका
यदि किसानों द्वारा लगाए गए ये आरोप जांच में सच साबित होते हैं, तो यह न केवल सरकारी नियमों और पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था की सरेआम धज्जियां उड़ाने जैसा होगा, बल्कि खाद की कालाबाजारी और भोले-भाले किसानों के आर्थिक शोषण का एक बड़ा मामला भी बन जाएगा। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम के बाद हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हैं और दोषियों पर क्या एक्शन लिया जाता है।
बामोर में प्रदूषण का संकट गहराया, जहरीले धुएं से लोगों की सेहत पर मंडराया खतरा
4 Jul, 2026 09:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बामोर। नेशनल हाईवे-44 के समीप संचालित एक औद्योगिक इकाई से उत्सर्जित हो रहे कथित रूप से हानिकारक धुएं के कारण स्थानीय नागरिकों में गहरा असंतोष व्याप्त है। क्षेत्रीय निवासियों का दावा है कि इस कारखाने की चिमनियों से चौबीसों घंटे निकलने वाले धुएं ने समूचे वातावरण को दूषित कर दिया है। इसके दुष्प्रभाव से स्थानीय लोगों को सांस लेने में कठिनाई, निरंतर खांसी, आंखों में तेज चुभन और सेहत से जुड़ी अन्य गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
शिकायतों के बाद भी जस की तस बनी है स्थिति
इलाके के लोगों का कहना है कि इस गंभीर पर्यावरणीय समस्या को लेकर वे कई बार आवाज उठा चुके हैं और लिखित शिकायतें भी दे चुके हैं, परंतु धरातल पर अब तक कोई बदलाव नहीं आया है। नागरिकों ने रोष जताते हुए कहा कि संबंधित उत्तरदायी विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी इस विषय पर मूकदर्शक बने हुए हैं और कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं, जिससे आम जनता का गुस्सा दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है।
उत्सर्जन की जांच और कार्रवाई की उठी मांग
बामोर क्षेत्र के ग्रामीणों और प्रभावित परिवारों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि कारखाने से निकलने वाले धुएं और अन्य उत्सर्जनों की तुरंत तकनीकी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि उद्योग द्वारा पर्यावरण सुरक्षा के निर्धारित नियमों और मानकों की अनदेखी पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कानून के दायरे में कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि आमजन को एक स्वच्छ और सुरक्षित परिवेश मिल सके।
प्रबंधन के रुख और आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार
इस पूरे विवाद को लेकर फिलहाल संबंधित फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या पक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है। स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम द्वारा की जाने वाली निष्पक्ष जांच और उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति साफ हो पाएगी कि प्रदूषण फैलाने के ये आरोप तकनीकी रूप से कितने सही हैं।
एग्जाम से पहले RGPV में पेपर लीक जैसा बवाल! प्रश्नपत्र चोरी के बाद 200 छात्रों की परीक्षा टली
4 Jul, 2026 09:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी में स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) में बीटेक चौथे सेमेस्टर के प्रश्नपत्र चोरी होने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय परिसर से सीलबंद लिफाफों में सुरक्षित रखे गए नौ क्वेश्चन पेपर अचानक गायब हो गए, जिसकी वजह से शुक्रवार सुबह होने वाली परीक्षा को ऐन वक्त पर टालना पड़ा। इस अप्रत्याशित घटना ने विश्वविद्यालय के सुरक्षा प्रबंधों और गोपनीयता व्यवस्था की कलई खोलकर रख दी है।
विश्वविद्यालय प्रशासन सख्त, परीक्षा नियंत्रक को नोटिस
पेपर गायब होने की भनक लगते ही आरजीपीवी प्रबंधन में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलगुरु डॉ. आलोक शर्मा ने तत्काल कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट (UTD) की परीक्षा नियंत्रक डॉ. अर्चना तिवारी को एक कारण बताओ नोटिस थमाते हुए पांच दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है। इसके साथ ही, इस पूरे सुरक्षा चूक मामले की एक विस्तृत जांच रिपोर्ट भी मांगी गई है ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके।
पुलिस जांच शुरू और छात्रों में भारी असंतोष
इस घटनाक्रम को लेकर पुलिस में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। जांच दल इस बात का पता लगा रहा है कि कड़े पहरे के बीच से सीलबंद लिफाफे कैसे गायब हुए और क्या इसमें संस्थान के ही किसी कर्मचारी की संलिप्तता है। दूसरी ओर, ऐन वक्त पर परीक्षा निरस्त होने के कारण केंद्र पर पहुंचे करीब 200 विद्यार्थियों को बिना परीक्षा दिए ही वापस लौटना पड़ा, जिससे छात्रों और उनके अभिभावकों में भारी नाराजगी है।
मामले पर सियासी घमासान और सरकार की घेराबंदी
शिक्षा से जुड़े इस गंभीर मामले ने अब राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में इस तरह की घटनाएं लगातार पैर पसार रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब शैक्षणिक संस्थानों में प्रश्नपत्र ही सुरक्षित नहीं हैं, तो पूरी शिक्षा प्रणाली और उसकी शुचिता पर उंगलियां उठना स्वाभाविक है।
MP कांग्रेस में अब नहीं चलेगी बयानबाजी, विवादित नेताओं पर हाईकमान की नजर
4 Jul, 2026 09:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में नेताओं की अनियंत्रित बयानबाजी पर अब कड़ा रुख अपनाने की तैयारी कर ली गई है। लगातार आ रहे ऐसे बयानों, जिनसे संगठन को सियासी तौर पर नुकसान उठाना पड़ा और विपक्षी दल को घेरने का अवसर मिला, के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी अब ऐसे नेताओं का लेखा-जोखा तैयार कर रही है। इस सूची को शीघ्र ही केंद्रीय नेतृत्व (हाईकमान) को प्रेषित किया जाएगा, ताकि अनुशासनहीनता करने वालों पर सख्त कदम उठाए जा सकें।
विवादित बयान देने वाले नेताओं की बनेगी सूची
पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रादेशिक नेतृत्व का यह स्पष्ट मानना है कि सार्वजनिक मंचों से नेताओं द्वारा की जाने वाली व्यक्तिगत टीका-टिप्पणी और आंतरिक खींचतान से संगठन की साख प्रभावित हो रही है। इसी वजह से अब उन चेहरों को चिह्नित किया जा रहा है, जो बार-बार अपने बयानों से दल के लिए असहज स्थिति पैदा करते हैं। आने वाले समय में ऐसे नेताओं को न केवल कड़ी चेतावनी दी जाएगी, बल्कि उनके खिलाफ दंडात्मक अनुशासनात्मक कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है।
वरिष्ठ नेताओं की बयानबाजी से बढ़ी असहजता
हालिया घटनाक्रमों में मध्य प्रदेश कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ चेहरों की टिप्पणियां काफी सुर्खियों में रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास 12 विभागों के होने पर उठाए गए सवालों ने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि किसी भी विफलता की सीधी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की होगी। इस तरह के बयानों के साथ-साथ पार्टी के भीतर भी आपसी मतभेद उभरकर सामने आए हैं, जिससे केंद्रीय दखल की मांग उठने लगी है। पहले भी कई मौकों पर नेताओं के बयानों के कारण पार्टी को रक्षात्मक रुख अपनाना पड़ा है।
अनुशासन और एकजुटता पर कांग्रेस का ध्यान
कांग्रेस रणनीतिकारों का मानना है कि सत्तारूढ़ दल के खिलाफ राजनीतिक मुकाबला केवल एक मजबूत, अनुशासित और एकजुट संगठन के बल पर ही जीता जा सकता है। इसी सोच के तहत अब यह साफ संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि मर्यादा से बाहर जाकर की गई बयानबाजी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में नेताओं की हर सार्वजनिक गतिविधि और वक्तव्य पर पैनी नजर रखी जाएगी और उल्लंघन होने पर तुरंत उचित कार्रवाई की जाएगी।
बारिश से तरबतर होगा MP! 72 घंटे तक भारी वर्षा के आसार, IMD का रेड अलर्ट
4 Jul, 2026 07:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून ने अब पूरी रफ्तार पकड़ ली है। पिछले दो दिनों से राज्य के विभिन्न हिस्सों में मूसलाधार बरसात का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को राजधानी भोपाल और इंदौर सहित 26 से अधिक जिलों में भारी वर्षा रिकॉर्ड की गई, जिससे कई निचले इलाकों में पानी भर गया और नदी-नाले उफान पर आ गए। मौसम केंद्र ने आगामी 72 घंटों के लिए प्रदेश में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
बड़वानी और खंडवा में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी
मौसम वैज्ञानिकों ने शनिवार को भी राज्य के कई हिस्सों में तेज बारिश की आशंका जताई है। इंदौर और उज्जैन सहित करीब 19 जिलों में व्यापक बरसात की संभावना बनी हुई है, जिनमें से बड़वानी और खंडवा के लिए विशेष रूप से रेड अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में बहुत तेज बारिश होने के आसार हैं, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग ने नागरिकों को सतर्क रहने को कहा है। इसके साथ ही, खराब मौसम और आकाशीय बिजली के खतरे को देखते हुए लोगों को खेतों में काम न करने तथा पेड़ों के नीचे शरण न लेने की सख्त हिदायत दी गई है।
धार और खरगोन समेत 19 जिलों में ऑरेंज अलर्ट
प्रदेश के 19 अन्य जिलों में मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट लागू किया है। इसके तहत धार, बड़वानी, खरगोन, देवास, बुरहानपुर और बैतूल में अत्यधिक वर्षा होने की संभावना व्यक्त की गई है। इनके अलावा रतलाम, उज्जैन, राजगढ़, रायसेन, नर्मदापुरम, सागर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी और अनूपपुर में भी गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने और बिजली गिरने की आशंका है। इन सभी क्षेत्रों में लोगों को आवाजाही के दौरान विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
ग्वालियर और रीवा संभाग में कम रहेगा असर
मौसम के इस बदले मिजाज के बीच बुंदेलखंड, बघेलखंड और चंबल संभाग के कुछ हिस्सों में मानसून की सक्रियता फिलहाल थोड़ी कम देखी जाएगी। ग्वालियर, मुरैना, रीवा और सतना जैसे जिलों में बहुत भारी बारिश के आसार नहीं हैं। इन इलाकों में मौसम सामान्य तौर पर बादलों से घिरा रहेगा और केवल कुछ ही स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी या छिटपुट बौछारें पड़ने की उम्मीद जताई गई है, जिससे यहां के तापमान में हल्की गिरावट आ सकती है।
मध्यप्रदेश के लिए रूपए 5,00,856 करोड़ की वार्षिक ऋण योजना 2026-27 जारी
3 Jul, 2026 11:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्य सचिव अनुराग जैन ने मंत्रालय में शुक्रवार को वित्त विभाग के अधिकारियों और राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी के समन्वयक से कहा है कि वे जिलों से प्राप्त जिला स्तरीय क्रेडिट प्लान का हर हाल में क्रियान्वयन कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और सुदृढ़ बनाएं। मुख्य सचिव जैन ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति द्वारा प्रस्तुत वार्षिक साख योजना 2026-27 का विमोचन कर जारी की। विमोचन के दौरान अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, आयुक्त संस्थागत वित्त सुसोनिया मीना, क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय रिजर्व बैंक सुसुजाता लाल, उपमहाप्रबंधक नाबार्ड विजेंद्र सिंह, उपमहाप्रबंधक राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति पवन कुमार अग्रवाल, भारतीय स्टेट बैंक के महाप्रबंधक निशंका रॉय सहित अन्य बैंक के अधिकारी उपस्थित हुये।
जारी क्रेडिट प्लान के अनुसार कुल वार्षिक ऋण योजना रुपए 5,00,856 करोड़ निर्धारित की गई है। जो गत वर्ष के लक्ष्य 4,19,110 करोड़ रूपए का 119.50 प्रतिशत है। कृषि क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए फार्म क्रेडिट के लिए 1,28,866 करोड़ रुपए का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जो गत वर्ष के लक्ष्य का 106.56 प्रतिशत तथा उपलब्धि का 120.56 प्रतिशत अधिक है।
फसल ऋण (Crop Loan) का लक्ष्य रुपए 88,638 करोड़ रूपये रखा गया है, जो गत वर्ष के लक्ष्य का 101.22 प्रतिशत तथा उपलब्धि का 122.36 प्रतिशत है। कुल कृषि क्षेत्र के लिए रुपए 1,65,117 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जो गत वर्ष के लक्ष्य से 113.07 तथा उपलब्धि का 121.85 प्रतिशत है।
मध्यप्रदेश शासन की उद्योगोन्मुखी नीतियों को देखते हुए एमएसएमई क्षेत्र के लिए 1,62,967 करोड़ रुपए का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है जो पिछले वर्ष के लक्ष्य का 121.64 प्रतिशत तथा उपलब्धि का 120.90 प्रतिशत है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई है। इस क्षेत्र का लक्ष्य गत वर्ष के लक्ष्य की तुलना में 731.11 प्रतिशत तथा उपलब्धि की तुलना में 167.70 प्रतिशत बढ़ाया गया है। प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र के लिए कुल 3,45,915 करोड़ रुपए का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो कुल वार्षिक ऋण योजना का लगभग 69 प्रतिशत है तथा गत वर्ष के लक्ष्य का 117.76 प्रतिशत एवं उपलब्धि का 121.58 प्रतिशत है।
बैठक में विश्वास व्यक्त किया गया कि समस्त बैंकों के साथ ही राज्य शासन के विभागों, भारतीय रिज़र्व बैंक, नाबार्ड तथा सभी संबंधित एजेंसियों के समन्वित प्रयास से वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान राज्य में समयबद्ध ऋण प्रवाह सुनिश्चित करते हुए निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति की जाएगी।
किसानों से सीधे संवाद के लिए राजधानी से लेकर मैदानी स्तर तक किये जाये कार्यक्रम आयोजित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
3 Jul, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों का कल्याण राज्य सरकार का कर्तव्य है। खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए गतिविधियों को प्राथमिकता पर लिया जाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया गया है। कृषकों के हित संवर्धन के लिए लागू कार्यक्रमों और योजनाओं का क्रियान्वयन मिशन मोड में किया जाए। किसानों से सीधे संवाद के लिए राजधानी से लेकर मैदानी स्तर तक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। दुग्ध उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने के लिए विशेष रूप से सहायक है। किसानों को उन्नत नस्ल की गाय उपलब्ध कराने में निजी संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाए। ग्रामीण स्तर पर इस तरह के केन्द्रों का अधिक से अधिक विस्तार हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत अब तक हुए कार्यक्रमों की मंत्रालय में समीक्षा कर रहे थे। बैठक में आगामी प्रस्तावित कार्यक्रमों के संबंध में भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, मुख्य सचिव अनुराग जैन तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
सहकारी समितियों की प्रक्रियाओं का डिजिटलाइजेशन हो
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को कम पानी और अल्प अवधि की फसलों के लिए जागरूक किया जाए। फसल चक्र में परिवर्तन और प्राकृतिक व जैविक खेती के प्रोत्साहन के लिए वातावरण बनाना आवश्यक है। खेती-किसानी से जुड़े स्थानीय पर्व और त्यौहारों तथा फसल चक्र के अनुसार किसानों से संवाद स्थापित किया जाए। सुगमता और सरलता सुनिश्चित करते हुए सहकारी समितियों की प्रक्रियाओं का डिजिटलाइजेशन किया जाए।
सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव और संभागीय मुख्यालयों पर होंगे फूड फेस्टिवल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में जानकारी दी गई कि ऑनलाईन किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल और किसानों के लिए ई-पासबुक सुविधा का शुभारंभ जुलाई माह में ही किया जाएगा। राज्य स्तरीय सहकारिता सम्मेलन का आयोजन भी होगा। उत्कृष्ट कार्य करने वाले मैदानी कार्यकर्ताओं तथा पशुपालकों को पुरस्कृत और सम्मानित करने के लिए उज्जैन में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन होगा। प्रदेश के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जाएंगे और सभी संभागीय मुख्यालयों पर फूड फेस्टिवल होंगे।
इंदौर में होगा सब्जी महोत्सव और एक्वाकल्चर मार्केटिंग सिम्पोजियम
बैठक में बताया गया कि खरगौन में राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन और कपास एवं मिर्च महोत्सव के आयोजन की योजना है। अन्तर्देशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि पर जबलपुर में कार्यक्रम होगा। इसी प्रकार जबलपुर में ही कुक्कुट पालकों और उद्यमियों का सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा। बुरहानपुर में केला महोत्सव, उज्जैन में हाईटेक नर्सरी और संरक्षित खेती पर कार्यशाला, सागर और रतलाम में कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) का राज्य स्तरीय सम्मेलन, नीमच में उद्यानिकी में आधुनिक तकनीक पर कार्यशाला, इंदौर में सब्जी महोत्सव तथा एक्वाकल्चर मार्केटिंग सिम्पोजियम और भोपाल पराली प्रबंधन पर कार्यशाला के साथ ही नरसिंहपुर में गन्ना महोत्सव के अंतर्गत राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन भी प्रस्तावित है।
बैठक में अपर मुख्य सचिव के.सी गुप्ता, नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव डी.पी. आहूजा, उमाकांत उमराव, आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह उपस्थित थे।
विद्यार्थी हित, गुणवत्ता और पारदर्शिता पर आधारित कार्य संस्कृति विकसित करें विश्वविद्यालय : मंत्री परमार
3 Jul, 2026 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं, बल्कि ऐसे ज्ञान केंद्र हैं, जहाँ समाज की समस्याओं का समाधान करने वाले श्रेष्ठ, संवेदनशील, नैतिक एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों का निर्माण होता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल रोजगार के योग्य बनाना नहीं, बल्कि उन्हें समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं के अनुरूप सक्षम, उत्तरदायी एवं नवाचारी बनाना है। विश्वविद्यालयों को इसी लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना होगा। मंत्री परमार बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल में आयोजित "शिक्षा संवाद" कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मंत्री परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य सभी विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध, नवाचार, सुशासन एवं विद्यार्थी-केंद्रित व्यवस्था के आदर्श मॉडल के रूप में विकसित करना है। विश्वविद्यालयों की कार्य संस्कृति ऐसी होनी चाहिए, जिसमें प्रत्येक निर्णय विद्यार्थी हित, गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लिया जाए।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित न रहें, बल्कि समाज को दिशा देने वाले सशक्त शैक्षणिक संस्थान बनें।
मंत्री परमार ने कहा कि आदर्श विश्वविद्यालय वही है, जहाँ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, समयबद्ध शैक्षणिक गतिविधियाँ, अनुशासित व्यवस्था, शोध की सशक्त संस्कृति, नवाचार तथा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। विश्वविद्यालयों को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहाँ विद्यार्थी केवल डिग्री प्राप्त न करें, बल्कि समाज एवं राष्ट्र की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करने वाले सक्षम नागरिक बनकर निकलें।
मंत्री परमार ने कहा कि प्राध्यापकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए 'सार्थक ऐप' का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है, जिससे शिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों की उपस्थिति भी 'सार्थक ऐप' के माध्यम से दर्ज की जायेगी, जिससे नियमित उपस्थिति, अनुशासन, कक्षाओं में सहभागिता तथा शिक्षण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
मंत्री परमार ने कहा कि समय पर प्रवेश, समय पर परीक्षा और समय पर परिणाम, गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की आधारशिला हैं। परीक्षा प्रणाली को पूर्णतः पारदर्शी, तकनीक आधारित एवं त्रुटिरहित बनाने के लिए डिजिटल मूल्यांकन, ऑनलाइन परीक्षा प्रबंधन तथा आधुनिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग किया जाए। विद्यार्थियों के शैक्षणिक हित सर्वोपरि हैं और उनसे किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मंत्री परमार ने विश्वविद्यालयों में शोध एवं नवाचार की सशक्त संस्कृति विकसित करने पर विशेष बल देते हुए कहा कि अनुसंधान केवल अकादमिक उपलब्धि तक सीमित न रहे, बल्कि समाज, उद्योग, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं स्थानीय समस्याओं के समाधान से जुड़ा हो। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बहुविषयक शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय भाषाओं, कौशल आधारित शिक्षा, स्टार्टअप, नवाचार तथा उद्योगों के साथ समन्वय को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता, नवाचार, अनुसंधान की प्रवृत्ति एवं राष्ट्रभावना का विकास करना है। विश्वविद्यालयों को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहाँ से निकलने वाला प्रत्येक विद्यार्थी समाज की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करने में सक्षम हो।
मंत्री परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता, शोध, नवाचार, सुशासन एवं विद्यार्थी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय सहित प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को ऐसे आदर्श संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ से ज्ञान, कौशल, संस्कार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व से परिपूर्ण विद्यार्थी निकलकर राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएँ।
मंत्री परमार ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कहा कि परिसर में स्वच्छ, सुरक्षित, अनुशासित एवं विद्यार्थी-अनुकूल वातावरण सुनिश्चित किया जाए। पुस्तकालय, प्रयोगशालाएँ, खेल सुविधाएँ, डिजिटल संसाधन, शोध अवसंरचना, प्लेसमेंट गतिविधियाँ एवं कौशल विकास कार्यक्रमों को और अधिक सशक्त बनाया जाए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्तापूर्ण शोध, उद्योगों से समन्वय, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा रोजगारोन्मुखी शिक्षा को विश्वविद्यालयों की प्राथमिकता बनाने पर बल दिया।
विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों से किया संवाद
मंत्री परमार ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने परीक्षा, शोध, छात्रवृत्ति, छात्रावास, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, डिजिटल सुविधाओं, प्लेसमेंट, खेल गतिविधियों एवं अन्य शैक्षणिक विषयों से जुड़े सुझाव और समस्याएँ गंभीरता से सुनीं।
मंत्री परमार ने संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जहाँ विद्यार्थियों की प्रत्येक समस्या का संवेदनशीलता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ समाधान हो तथा संवाद की संस्कृति निरंतर सशक्त होती रहे।
गर्ल्स एवं बॉयज हॉस्टल का किया निरीक्षण
मंत्री परमार ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय परिसर स्थित गर्ल्स एवं बॉयज हॉस्टल का निरीक्षण किया। उन्होंने छात्रावासों में स्वच्छता, सुरक्षा, भोजन व्यवस्था, पेयजल, विद्युत, अध्ययन कक्ष, स्वच्छ शौचालय एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का अवलोकन किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि छात्र-छात्राओं को सुरक्षित, स्वच्छ, गुणवत्तापूर्ण एवं सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त आवासीय वातावरण उपलब्ध कराया जाए। छात्रावासों में आवश्यक मरम्मत एवं आधारभूत सुविधाओं के उन्नयन का कार्य प्राथमिकता से पूर्ण किया जाए, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर वातावरण मिल सके।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलगुरु प्रो. विवेक शर्मा, समाजसेवी चेतस सुखाड़िया, विश्वविद्यालय के कुलसचिव, अधिकारी, प्राध्यापक, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।
सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण बने आनंदोत्सव, हर विद्यार्थी की हो सहभागिता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
3 Jul, 2026 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय प्रदेश के सभी नवनिर्मित सांदीपनि विद्यालयों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन विद्यालयों का लोकार्पण औपचारिक कार्यक्रम न होकर शिक्षा, संस्कृति और जनभागीदारी का सामाजिक उत्सव बने। उन्होंने कहा कि वर्तमान में संचालित 'स्कूल चलें अभियान' के दौरान आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय नागरिकों की व्यापक सहभागिता सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण आनंद के उत्सव के रूप में मनाया जाए। यह नए भवनों के उद्घाटन के साथ हमारे नौनिहालों के उज्ज्वल भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए अध्याय का शुभारंभ है। उन्होंने निर्देश दिए कि कार्यक्रमों को यादगार बनाने के लिए बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम, विभिन्न प्रतियोगिताएँ तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की जाएँ। साथ ही सभी विद्यार्थियों को स्वल्पाहार एवं मिष्ठान्न वितरित किया जाए, जिससे यह अवसर उनके लिए अविस्मरणीय बन सके।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरु सांदीपनि के प्रेरणादायी जीवन पर आधारित एक लघु पुस्तिका (पॉकेट बुक) प्रकाशित कर विद्यार्थियों में वितरित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुरु सांदीपनि तत्समय सामाजिक समरसता के सबसे बड़े पैरोकार थे। उन्होंने जाति, वर्ग, रंग का भेद न करके अमीर-गरीब से लेकर राज परिवार के बच्चों सहित गरीबों और किसानों के बच्चों को शिक्षा-दीक्षा दी। सभी को समान रूप से दीक्षित किया। उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व के बारे में हम सबके विशेषकर विद्यार्थियों को जानना जरूरी है। इससे विद्यार्थियों को प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु-शिष्य संबंधों और नैतिक मूल्यों के बारे में जानकारी और प्रेरणा मिलेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण पहले ही हो चुका है, वहाँ प्रवेशोत्सव उत्साहपूर्वक आयोजित किया जाए, जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थियों का विद्यालयों से जुड़ाव बढ़े। उन्होंने अधिकारियों से सभी तैयारियाँ समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक सांदीपनि विद्यालय प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण, संस्कारयुक्त और आधुनिक शिक्षा का आदर्श केंद्र बने। बैठक में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह तथा स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने वर्चुअली सहभागिता की।
बैठक में सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल ने बताया कि वर्तमान में 70 सांदीपनि विद्यालय भवनों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसमें स्कूल शिक्षा विभाग के 46 एवं जनजातीय कार्य विभाग के 24 (कुल 70) सांदीपनि विद्यालय लोकार्पण के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिलों के प्रभारी मंत्री एवं अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में इनका लोकार्पण कराया जाये। उन्होंने कहा कि आने वाली गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई) के दिन हर जिले के एक सांदीपनि विद्यालय में प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाया जाये। इसमें विज्ञान प्रदर्शनी आयोजन, गुरुजनों का सम्मान, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा किए गए नवाचारों की जानकारी प्रदाय, विद्यार्थियों द्वारा डिजिटल एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रदर्शन सहित स्कूल के मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान जैसे आयोजन किये जायें।
बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य श्री गुलशन बामरा सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
खिवनी अभयारण्य से लाए गए घायल बाघ "युवराज" का वन विहार में हो रहा उपचार
3 Jul, 2026 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : खिवनी अभयारण्य, देवास में आपसी संघर्ष में गंभीर रूप से घायल हुए नर बाघ 'युवराज' का वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल के रेस्क्यू सेंटर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार किया जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बाघ को 27 जून 2026 को रेस्क्यू कर वन विहार लाया गया था। शुक्रवार को उसकी स्थिति का विस्तृत चिकित्सकीय परीक्षण राज्य पशु चिकित्सालय, जहांगीराबाद के वरिष्ठ वेटरिनरी सर्जन डॉ. एस.के. तुमड़िया, वन विहार के वरिष्ठ वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अतुल गुप्ता तथा वन विहार के पशु चिकित्सक डॉ. विनीत द्वारा किया गया।
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि बाघ के आगे के दोनों पैर और पिछले बाएं पैर में गहरे घाव हैं। एक्स-रे परीक्षण से आगे के दोनों पंजों में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई है। उसके पिछले बाएं पैर में गहरा घाव होने के कारण छह टांके लगाए गए हैं। उपचार के दौरान बाघ की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और स्वास्थ्य स्थिति के अनुरूप आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल की जा रही है। डॉ. अतुल गुप्ता घायल बाघ की स्थिति की निरंतर निगरानी कर रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान वन विहार के संचालक विजय कुमार, सहायक संचालक डॉ. रूही हक तथा सफारी प्रभारी सीता काकोड़िया भी उपस्थित रहीं।
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