मध्य प्रदेश
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की निवेश संवर्धन पहल का परिणाम
5 Sep, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवेश संवर्धन प्रयासों के फलस्वरुप ऊर्जा क्षेत्र और ज्यादा मजबूत हो रहा है। ऊर्जा सुरक्षा बढ़ रही है। मध्यप्रदेश पॉवर सरप्लस राज्य के रूप में पहचान बना चुका है। ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से अब इस क्षेत्र में नया निवेश आ रहा है। टोरेंट पॉवर और अडानी पॉवर जैसी बड़ी कंपनियों ने अब ऊर्जा उत्पादन के लिए प्रदेश में काम करना शुरू कर दिया है। टोरेंट पॉवर कंपनी 22 हजार करोड़ और अडानी पॉवर कंपनी 10 हजार 500 करोड़ रूपये का निवेश करेगी। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार 17,000 को रोजगार मिलेगा।
टोरेंट पॉवर 1600 मेगावॉट थर्मल प्रोजेक्ट के लिए प्रदेश में 22 हजार करोड़ रूपये का निवेश करेगी। टोरेंट पॉवर लिमिटेड को एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) से 1,600 मेगावॉट के कोयला आधारित बिजली संयंत्र की स्थापना के लिए "लेटर ऑफ अवार्ड (LoA)" दे दिया है। यह अहमदाबाद-स्थित समूह द्वारा बिजली क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है।
यह परियोजना ग्रीनफील्ड 2x800 मेगावॉट की अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित होगी और इसे डिज़ाइन, निर्माण, वित्तपोषण, स्वामित्व और संचालन (DBFOO) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। टोरेंट इस संयंत्र की पूरी क्षमता MPPMCL को 25 साल की पॉवर परचेज एग्रीमेंट पॉवर परचेस एग्रीमेंट के तहत 5.829 रूपये प्रति यूनिट की दर से आपूर्ति करेगा। यह परियोजना PPA पर हस्ताक्षर होने के 72 महीनों के भीतर चालू होनी है। परियोजना लागत का लगभग 70% ऋण के माध्यम से पूरा किया जाएगा।
इस संयंत्र के लिए कोयले का आवंटन MPPMCL द्वारा केंद्र सरकार की SHAKTI नीति के अंतर्गत किया जाएगा। यह परियोजना अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित होगी, जिससे पारंपरिक थर्मल यूनिट्स की तुलना में बेहतर दक्षता और कम उत्सर्जन मिलेगा। टोरेंट पॉवर का यह निवेश केंद्र सरकार के 2032 तक 80 गीगावॉट अतिरिक्त कोयला आधारित क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे ग्रिड को स्थिर करने के लिए आवश्यक बेसलोड क्षमता जुड़ेगी। इस परियोजना के निर्माण के दौरान 10 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।
अडानी पॉवर मध्यप्रदेश में 800 मेगावॉट का ताप विद्युत संयंत्र 10 हजार 500 करोड़ रुपये की लागत से विकसित कर मध्यप्रदेश को बिजली आपूर्ति करेगी। इस परियोजना के तहत 800 मेगावॉट की क्षमता वाला एक नया ताप विद्युत संयंत्र स्थापित किया जाएगा। यह संयंत्र अनूपपुर ज़िले में स्थित होगा। संयंत्र को 54 महीनों में चालू किया जाएगा। यह कदम प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करेगा।
एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र विकसित करने और उससे बिजली आपूर्ति के लिए लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) दे चुकी है। यह संयंत्र डिज़ाइन, निर्माण, वित्त, स्वामित्व और संचालन (DBFOO) मॉडल के तहत स्थापित किया जाएगा।
जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है, देश की बिजली की मांग, विशेष रूप से बेस लोड पॉवर की मांग, लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ऊर्जा अधोसंरचना में निवेश अत्यंत आवश्यक है, जिससे बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। अनूपपुर संयंत्र विश्वसनीय, सस्ती और प्रतिस्पर्धात्मक दरों पर बिजली उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह न केवल भारत बल्कि मध्यप्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा और राज्य के सतत विकास को गति देगा।
इस संयंत्र के लिए कोयले की आपूर्ति भारत सरकार की 'शक्ति योजना' (SHAKTI Policy) के तहत मध्यप्रदेश को आवंटित की गई है। परियोजना निर्माण चरण में 7,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा और चालू होने के बाद इसमें लगभग एक हजार स्थायी कर्मचारी कार्यरत होंगे।
कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री टेटवाल ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिलने पर मालवीय को बधाई और शुभकामनाएं दीं
5 Sep, 2025 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिल्ली में शिक्षक दिवस पर शासकीय संभागीय आईटीआई भोपाल के प्रशिक्षण अधिकारी राजेन्द्र मालवीय को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें दीर्घ अवधि इंजीनियरिंग ट्रेड श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ कौशल प्रशिक्षक के रूप में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया।
कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मालवीय ने अपनी मेहनत और प्रतिबद्धता से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि प्रदेश के सभी प्रशिक्षकों और प्रशिक्षण संस्थानों के लिए प्रेरणादायी है, जो कौशल शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ हासिल करने का मार्ग प्रशस्त करेगी। यह राष्ट्रीय स्तर का प्रतिष्ठित सम्मान कौशल विकास क्षेत्र में मालवीय की निरंतर मेहनत और प्रशिक्षणार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति उनके समर्पण को प्रमाणित करता है। उनकी उपलब्धि से प्रदेश की आईटीआई संस्थाओं की गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण परंपरा और प्रशिक्षकों की प्रतिबद्धता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। कौशल विकास संचालनालय ने भी मालवीय की इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएँ दी हैं।
सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए शिक्षक आगे आयें : राज्यपाल पटेल
5 Sep, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षक दिवस पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया। साथ ही शासकीय विद्यालयों में कक्षा एक से 8 तक के 55 लाख विद्यार्थियों के खातों में शाला गणवेश की 330 करोड़ की राशि अंतरित की। आर.सी.व्ही.पी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शैक्षणिक संवर्ग के सहायक शिक्षक, उच्च श्रेणी तथा नवीन शैक्षणिक संवर्ग के प्राथमिक शिक्षक एवं माध्यमिक शिक्षकों को क्रमोन्नत योजना प्रभावशील होने से चतुर्थ समयमान वेतनमान के लाभ के समरूप चतुर्थ क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ दिये जाने की घोषणा की।
राज्यपाल पटेल ने कहा है कि समय की जरूरत है कि सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए शिक्षक आगे आयें और परिवार एवं समाज का मार्गदर्शन करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने युवाओं के साथ विवेकानंद जयंती पर संवाद कर इस दिशा में पहल की है। गुरूजन के सम्मान और गुरू शिष्य परम्परा की महत्ता भारत की गौरवशाली संस्कृति की धरोहर है। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण युग की गुरू शिष्य परम्परा से प्रेरणा लेकर बच्चों को संस्कारित करना होगा।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि देश और समाज के निर्माता शिक्षक होते हैं, वह भावी पीढ़ी को संस्कार, ज्ञान और कौशल प्रदान करते हैं। व्यक्तित्व का विकास और चरित्र निर्माण करते हैं। भावी जीवन की सफलताओं के लिए तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार का भाव सारे जीवन बना रहे, इसके लिए शिक्षकों और पालकों को आगे आना होगा। उन्होंने आधुनिक समाज में बच्चों की आत्म हत्या की बढ़ती चुनौती के प्रति चिंता व्यक्त की। पटेल ने कहा कि समारोह का आयोजन राष्ट्र निर्माता शिक्षकों के देश, समाज के निर्माण में उनके समर्पण और निष्ठा के प्रति देशवासियों का आभार प्रदर्शन है। शिक्षा वह शक्ति और साधन है जो राष्ट्र को ज्ञान, कौशल और जीवन के मूल्यों से संस्कारित करती है। राष्ट्र को सामाजिक, आर्थिक विकास के लिए सक्षम बनाती है।
राज्यपाल पटेल ने गर्व के साथ कहा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को नया आयाम प्रदान किया है। उन्होंने देश की स्थानीय, वैश्विक जरूरतों और भारत को दुनिया की ज्ञान की महाशक्ति बनाने के लिए दूरगामी छात्र केंद्रित राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार कराई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति संभवतः आजादी के बाद शिक्षा के क्षेत्र में सबसे अभिनव प्रयास और राष्ट्र की जन भावनाओं का जीवंत दस्तावेज है। शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में राज्य के प्रथम नागरिक के रूप में राज्यपाल ने सभी शिक्षकों का अभिनंदन किया और सम्मानित शिक्षकों को बधाई दी। राष्ट्र के स्वतंत्रता आंदोलन के सेनानी, भारतीय संस्कृति के प्रबल पोषक, चिंतक और संवाहक डॉ. राधाकृष्णन की जयंती पर नमन भी किया।
एक लाख 50 हजार शिक्षकों को मिलेगा चतुर्थ समयमान वेतनमान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की प्रदेश के शैक्षणिक संवर्ग के सहायक शिक्षक, उच्च शिक्षक, नवीन शैक्षणिक संवर्ग के प्राथमिक शिक्षक, माध्यमिक शिक्षकों को चतुर्थ समयमान वेतनमान दिया जाएगा। इससे प्रदेश के 1 लाख 50 हजार शिक्षक लाभान्वित होंगे। इसके लिए जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा। सभी पात्र शिक्षकों को चौथे वेतनमान की सौगात वित्त वर्ष 2025-26 से मिलेगी। इससे सरकार पर करीब 117 करोड़ रुपए का अतिरिक्त व्यय भार आएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के मान-सम्मान और उन्हें सुविधा सम्पन्न बनाने के लिए हमारी सरकार हर जरूरी कदम उठायेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि भारतीय परंपरा में अनंत काल से ध्यान का आधार गुरु का स्वरूप, पूजा का आधार गुरु के चरण, मंत्र का आधार गुरु के वचन और मोक्ष का आधार गुरु की कृपा है। प्राचीन काल में गुरु ही भविष्य के लिए शासक तैयार करते थे, जिस प्रकार महर्षि विश्वामित्र भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ ले गए और उन्हें शस्त्र और शास्त्रों का ज्ञान देकर राक्षसों का नाश कराया। उसी प्रकार कंस का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण उज्जैन में महर्षि सांदीपनि आश्रम पहुंचे और अनेक लीलाएं कीं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि ज्ञान पाना और ज्ञान देना दोनों सुसंस्कृत समाज के निर्माण के लिए जरूरी है। ज्ञान का दान समाज की सेवा भी और अपने नैतिक मूल्यों के प्रति समर्पण भी है। हमारे गुरुजन बड़े प्रभावी तरीके से इस भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। गुरु के बिना जीवन तमस में होता है। गुरु ही अपने ज्ञान से सबके जीवन को ज्योतिर्मय बनाते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि शिक्षा ही व्यक्ति को सुसंस्कृत और संस्कारवान इंसान बनाती है। दशरथनंदन श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाने का श्रेय आचार्य विश्वामित्र को जाता है, वहीं गुरु सांदीपनि ने कान्हा को वह शिक्षा दी, जिसने उन्हें भगवत गीता का ज्ञान देने वाला श्रीकृष्ण बनाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुजन सदैव पूजनीय हैं, क्योंकि वे अपने ज्ञान और परिश्रम से शिक्षा के मंदिरों को प्रकाशित करते हैं। प्रदेश सरकार शिक्षकों के मान-सम्मान के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने सम्मानित सभी शिक्षकों का अभिवादन कर प्रदेश के विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में उनके योगदान की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को आदरांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे एक महान दार्शनिक और विद्वान थे, जिन्होंने राष्ट्रपति पद की गरिमा को अपनी प्रतिभा से गौरवान्वित किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। दुश्मन से रक्षा के लिए हमारे वैज्ञानिकों ने आधुनिक सुदर्शन चक्र विकसित कर सेना को सौंपा है। भारत ने हमेशा वसुधैव कुटुम्बकम, जियो और जीने का संदेश दुनिया को दिया है। भारत ने विश्व गुरु रहते हुए शिक्षा के माध्यम से संस्कार दिए हैं। एआई के युग में अच्छी से अच्छी मशीनें तो बना सकते हैं, लेकिन संस्कार केवल गुरु ही दे सकते हैं। गुरूजनों ने हजारों सालों से भारतीय संस्कृति ने संस्कारों के माध्यम से समाज को दिशा प्रदान की है। शिक्षा के क्षेत्र में तक्षशिला और नालंदा की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत रत्न श्रद्धेय सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपने जन्मदिवस को शिक्षक दिवस और उनके सम्मान के रूप में मनाने की बात कही थी, तब से देश में 5 सितंबर को शिक्षकों का सम्मान किया जाता है। आदि शंकराचार्य का जीवन भी मध्यप्रदेश आकर ही बदला था। ओंकारेश्वर की धरती ने उन्हें शंकराचार्य बनाया। मध्यप्रदेश की पावन धरा ही ऐसी है, कि यहां आकर सबका जीवन बदल जाता है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के 55 लाख बच्चों को 330 करोड़ राशि गणवेश के लिए दी गई है। प्रदेश में सांदीपनि विद्यालय खोले जा रहे हैं। हमारे सरकारी स्कूलों का परिणाम निजी स्कूलों से बेहतर रहा है, जो 15 साल में सबसे अच्छा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि के लिए सभी शिक्षकों सहित शिक्षा विभाग के पूरे अमले को बधाई और शुभकामनाएं दीं।
स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि देश दुनिया में भारत का मान बढ़ाने में हमारे गुरूजनों का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। यह शिक्षकों के आशीर्वाद और समर्पण का ही प्रतिफल है कि दुनिया के किसी भी देश में अच्छे शिक्षक की बात होती है, तो उसमें भारतीय भी होते हैं। उन्होंने कहा कि आज जीवन के हर क्षेत्र में सक्रिय व्यक्तियों का सामर्थ्य शिक्षकों और माता-पिता के आशीर्वाद और समर्पण का प्रतिफल है। उनके प्रति आदरांजलि देना समाज का परम कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस का कार्यक्रम हम सभी को गौरव प्रदान करता है। अपने ज्ञान और कौशल से दूसरों के विकास में सहयोग की प्रेरणा देता है।
समारोह में अतिथियों को सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल, आयुक्त लोक शिक्षण शिल्पा गुप्ता और संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र हरजिन्द्र सिंह ने प्रदेश के राज्य वृक्ष बरगद की कलाकृति का स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। आयुक्त, जनजातीय कार्य शुक्ला ने आभार माना। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण, सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विमुक्त घुमन्तु और अर्द्धघुमन्तु कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर, महापौर मालती राय, विधायक रामेश्वर शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक अशोक कड़ेल मंचासीन थे। कार्यक्रम में सम्मानित शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं।
बइरबी–सायरंग रेल परियोजना से मिजोरम को पहली बार राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य संपन्न
5 Sep, 2025 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। भारतीय रेलवे के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। 10 जून 2025 को हरतकी से सायरंग तक अंतिम रेल खंड के चालू होने के साथ ही बइरबी–सायरंग नई रेल परियोजना पूर्ण हो गई। इसके साथ ही मिज़ोरम की राजधानी आइज़ोल पहली बार भारतीय रेल नेटवर्क से जुड़ गया।
यह महत्वाकांक्षी परियोजना 29 नवम्बर 2014 को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखी गई आधारशिला से आरंभ हुई थी। वर्ष 2016 में बइरबी तक मालगाड़ी पहुँचने के बाद, अब 51.38 किलोमीटर लंबी पूरी लाइन को चालू कर दिया गया है। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 8071 करोड़ रुपये रही।
परियोजना की तकनीकी विशेषताएँ
* यह रेल मार्ग कोलासिब और आइज़ोल जिलों से होकर गुजरती है और 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति क्षमता के अनुरूप तैयार किया गया है।
* इसमें कुल चार स्टेशन हरतकी, कॉनपुई, मुअलखांग एवं सायरंग निर्माण किए गए हैं।
* इस रेल मार्ग में 153 पुलों का निर्माण किया गया है। जिनमें 55 बड़े पुल, 88 छोटे पुल और 10 आरओबी/आरयूबी शामिल है। साथ ही 45 सुरंगें बनाई गई हैं।
* कुल 11.78 किलोमीटर लंबाई पुलों से और 15.885 किलोमीटर लंबाई सुरंगों से होकर गुजरती है।
* सबसे लंबी सुरंग 1.868 किलोमीटर की है और सभी सुरंगों में आधुनिक बलास्ट रहित पटरियाँ बिछाई गई हैं।
* सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध बनाने हेतु सुरंगों की दीवारों पर मिज़ोरम की लोक संस्कृति, पहनावे, त्यौहारों और जैव विविधता को दर्शाते भित्तिचित्र बनाए गए हैं।
चुनौतियों पर विजय
यह परियोजना कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम के बावजूद पूरी की गई। अप्रैल से अक्टूबर तक चलने वाले भारी मानसून, बार-बार होने वाले भूस्खलन और निर्माण सामग्री की दूर-दराज़ से आपूर्ति जैसी चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया गया। कठिन पहाड़ी इलाकों और कमजोर चट्टानों के बीच 65 मीटर तक गहरी कटाई करके सुरक्षित ट्रैक बिछाया गया।
परियोजना से लाभ
* इस परियोजना से मिज़ोरम की राजधानी आइज़ोल सहित पूरे क्षेत्र को अनेक लाभ होंगे।
* सड़क मार्ग की तुलना में यात्रा समय सात घंटे से घटकर मात्र तीन घंटे हो जाएगा।
* शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुँच आसान होगी।
* माल परिवहन की लागत में कमी से आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में गिरावट आएगी और स्थानीय बाजारों को गति मिलेगी।
* वन आधारित उत्पादों, हस्तशिल्प और बागवानी के सामान को देश के अन्य हिस्सों तक पहुँचाना सरल होगा।
* प्रमुख स्टेशनों पर बने गुड्स शेड क्षेत्र में व्यापार और रोज़गार के अवसर बढ़ाएँगे।
पर्यटन को बढ़ावा
आईआरसीटीसी ने अगस्त 2025 में मिज़ोरम सरकार के साथ पर्यटन संवर्धन हेतु दो वर्षीय समझौता किया है। इसके तहत “गुवाहाटी से आगे पूर्वोत्तर की खोज” विशेष पर्यटक ट्रेन में आइज़ोल को एक प्रमुख गंतव्य बनाया जाएगा। इससे स्थानीय आतिथ्य, गाइडिंग, होटल उद्योग, हस्तशिल्प और वस्त्र व्यवसायों को नई ऊर्जा मिलेगी।
बइरबी–सायरंग रेल परियोजना केवल एक रेल लाइन नहीं, बल्कि मिज़ोरम के सामाजिक-आर्थिक विकास की नई जीवनरेखा है। यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत को मुख्यधारा के साथ और मजबूती से जोड़ते हुए क्षेत्रीय संतुलन और राष्ट्रीय एकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
पोस्टमार्टम हाउस में रिश्वतखोरी का सनसनीखेज मामला, 500 रुपए में मिला शव; परिजन ने सीएम तक पहुंचाई शिकायत
5 Sep, 2025 06:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्वालियर: मध्य प्रदेश के इंदौर में चूहों के काटने से बच्चों की मौत का मामला अभी शांत नहीं हुआ था कि अब ग्वालियर के हजार बिस्तर वाले सरकारी अस्पताल से अमानवीयता का एक मामला सामने आ गया है। बीजेपी नेता ने एक पोस्ट के जरिए बताया है कि एक युवक की मौत के बाद पोस्टमार्टम हाउस में परिजनों से कफन के लिए 500 रुपए लिए गए।
सड़क हादसे में घायल हुआ युवक
दरअसल, पूरा मामला मुरैना का है। यहां एक कृष्णा श्रीवास नाम का युवक अपनी चाची को बाइक पर लेकर कहीं जा रहा था। तभी रास्ते में किसी गाड़ी ने उसे टक्कर मार दिया। जिससे कृष्णा के पैर में फ्रैक्चर हो गया। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। चाची ने 1 सितंबर को दम तोड़ दिया। युवक को ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में रेफर किया गया। जहां पर 3 सितंबर को उसकी भी मौत हो गई।
मृतक के मामा ने लगाया गंभीर आरोप
मृतक कृष्णा के मामा पवन सेन बीजेपी पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी हैं। उन्होंने भांजे की मौत का जिम्मेदार अस्पताल को ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि डॉक्टरों ने दो दिन बाद भी पैर में प्लास्टर नहीं चढ़ाया। बार-बार कहने के बाद भी कोई सीनियर डॉक्टर देखने नहीं आया। उसका सारा इलाज जूनियर डॉक्टरों ने की। उन्होंने कहा कि अस्पताल के अधीक्षक डॉ सुधीर सक्सेना के इस बात की जानकारी दी गई। उनसे कहा कि यदि इलाज संभव नहीं है तो प्राइवेट अस्पताल रेफर कर दें। लेकिन उन्होंने बेहतर इलाज का भरोसा दिया। डॉक्टरों की लापरवाही से कृष्णा की मौत हो गई।
फेसबुक पोस्ट से सीएम को बताई सच्चाई
भांजे की मौत पर बीजेपी नेता पवन सेन ने फेसबुक पर अपना दुख प्रकट किया। उन्होंने पोस्ट के माध्यम से मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा कि ग्वालियर ट्रामा सेंटर का भगवान मालिक है। मुख्यमंत्री मोहन यादव जी होटल, फैक्ट्री से पहले अस्पताल अच्छे बनाने पर ध्यान दीजिए।
नीली पन्नी वाले कफन के 500 रुपए
उन्होंने अगले पोस्ट में लिखा कि सरकारी डॉक्टरों के बंगले पर दुकान बंद करवाइए मुख्यमंत्री मोहन यादव जी। सड़क दुर्घटना में मृतक से कफन के पैसे मत मांगो सरकार। मुख्यमंत्री मोहन यादव जी ध्यान दीजिए। परिजनों का दर्द तब और बढ़ गया जब पोस्टमार्टम हाउस में कर्मचारियों ने नीली पन्नी वाले कफन के लिए 500 रुपये मांगे। परिजनों ने अधीक्षक से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार 500 रुपए देकर शव घर ले जाया गया।
अस्पताल अधीक्षक ने क्या कहा?
वहीं, जेएएच अधीक्षक डॉ. सुधीर सक्सेना ने कहा कि इलाज में लापरवाही और कफन के पैसे मांगने के आरोपों पर विभाग प्रमुखों से जवाब मांगा गया है. लिखित जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस पर विपक्ष का हमला: ‘सिर तन से जुदा’ के नारे वाले जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई हो
5 Sep, 2025 05:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सागर: मध्य प्रदेश में एक बार फिर ईद मिलाद उन नबी की वाहन रैली में खुलेआम ' सिर तन से जुदा ' जैसे भड़काऊ नारे लगाकर सांप्रदायिक माहौल खराब करने का प्रयास किया गया है। दरअसल सागर में कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व में निकली रैली में मुस्लिम युवकों ने कोतवाली थाने के पास ही 'गुस्ताख ए रसूल की एक ही सजा, सिर तन से जुदा, सिर तन से जुदा' के नारे लगाए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शहर में आक्रोश का माहौल है।
सागर में गणेशोत्सव के दौरान शहर के मुख्य स्थल गौरमूर्ति चौराहे पर ईद-मिलाद-उन-नबी की वाहन रैली में मुस्लिम युवकों द्वारा धार्मिक नारेबाजी की गई। इसमें "गुस्ताख ए रसूल की एक ही सजा, सिर तन से जुदा, सिर तन से जुदा" जैसी खुलेआम नारेबाजी कर शहर के सौहार्दपूर्ण महौल को खराब करने का प्रयास किया गया है। जहां पर नारेबाजी की गई वहां से चंद कदम की दूरी पर प्रसिद्ध हनुमान मंदिर और गणेश जी की झांकी विराजी हैं। जानकारी अनुसार कांग्रेस नेता पम्मा कुरैशी और फिरदौश कुरैशी के नेतृत्व में बीते रोज शहर में गाजे-बाजे के साथ ईद मिलाद उन नबी के पूर्व जुलूस निकाला गया था। इसमें वाहन रैली के रुप में मुस्लिम समाज के काफी युवक अलग-अलग झंडे लिए थे। जुलूस जैसे ही शहर के प्रमुख स्थल तीनबत्ती पर पहुंचा तो यहां वाहन रोककर जमकर नारेबाजी की गई। इसमें ' नारा ए तकबीर , अल्लाह हो अकबर' और 'गुस्ताख ए रसूल की एक ही सजा, सिर तन से जुदा, सिर तन से जुदा' जैसे भड़काऊ नारे खुलेआम लगाए गए हैं।
कोतवाली थाने के पास ही लगे नारे
बता दें कि सागर में गौर मूर्ति-तीनबत्ती का इलाका कोतवाली थाना और ट्रैफिक पुलिस थाना के बीच में पड़ता है। कोतवाली के निकट हनुमान मंदिर और गणेश पंडाल के सामने इस तरह का धार्मिक उन्माद और समुदाय विशेष की भड़काऊ व सौहार्द बिगाड़ने वाली नारेबाजी को लेकर अभी तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
हिन्दू जागरण मंच ने जताया विरोध, FIR की मांग
हिन्दू जागरण मंच के उमेश सराफ ने धार्मिक रैली में उन्मादी और भड़काउ नारेबाजी को लेकर कोतवाली थाने में आवेदन देकर नारे लगाने वाले और रैली का नेतृत्व करने वाले पम्मा कुरैशी और फिरदौश कुरैशी पर एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। उमेश ने कहा है कि ऐसी हरकतों और नारों से धार्मिक भावनाएं भड़काने और वैमनुष्यता फैलाने का काम किया जा रहा है। दूसरे धर्मो की भावनाएं भी आहत होती हैं। यह हरकत शहर का माहौल खराब करने और नफरत फैलाने का प्रयास है। पुलिस ने इस मामले को संज्ञान में लेकर पड़ताल शुरू कर दी है।
शिक्षकों के लिए सम्मान, छात्रों के लिए राहत – एमपी सरकार ने टीचर्स डे पर दिया बड़ा उपहार
5 Sep, 2025 05:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: सीएम मोहन यादव ने शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों को बड़ी सौगात दी है। साथ ही गणावेश के लिए बच्चों के खाते में राशि हस्तांरित की है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में अनंत काल से ध्यान का आधार गुरु का स्वरूप, पूजा का आधार गुरु के चरण, मंत्र का आधार गुरु के वचन और मोक्ष का आधार गुरु की कृपा है। प्रचीन काल में गुरु ही भविष्य के लिए शासक तैयार करते थे। जिस प्रकार महर्षि विश्वामित्र, भगवान श्री राम और लक्षमण को अपने साथ ले गए और उन्हें शस्त्र और शास्त्रों का ज्ञान देकर राक्षसों का नाश कराया।
खाते में राशि ट्रांसफर किए
वहीं, कार्यक्रम में सीएम यादव ने सरकारी स्कूलों के कक्षा 1 से 8 तक के 55 लाख विद्यार्थियों के खातों में स्कूल यूनिफॉर्म के लिए 330 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए। इस मौके पर सीएम ने शिक्षकों को चौथे वेतनमान की सौगात भी दी। कार्यक्रम में प्रदेश के शिक्षकों का सम्मान भी किया गया।
बच्चों को बड़ी भूमिका के लिए करें तैयार
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में पारिवारिक माहौल भी बदल रहा है। ऐसे में बच्चों को अनुशासित रखना आवश्यक है। शिक्षक स्कूल में और अभिभावक घर में अनुशासन का ध्यान रखें। इससे बच्चों के मन में बड़ों के प्रति आदर का भाव आएगा। समाज में शिक्षकों का सम्मान होना चाहिए।
स्कूली बच्चों-शिक्षकों के खिले चेहरे
मध्यप्रदेश सरकार ने आज 55 लाख बच्चों को स्कूल यूनिफॉर्म के लिए 330 करोड़ रुपए दिए। मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालय खोले जा रहे हैं। हमारे सरकारी स्कूलों का परिणाम निजी स्कूलों से बेहतर रहा है। यह परिणाम 15 साल में सबसे अच्छा रहा है।
शिक्षकों को चौथे वेतनमान की सौगात
मुख्यमंत्री यादव ने शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों को चौथे वेतनमान की सौगात देते हुए कहा कि सरकार शैक्षणिक संवर्ग के सहायक शिक्षक, उच्च शिक्षक, नवीन शैक्षणिक संवर्ग के प्राथमिक शिक्षक, माध्यमिक शिक्षकों को चतुर्थ कार्यमान वेतनमान दिया जाएगा। इससे प्रदेश के 1 लाख 50 हजार शिक्षक लाभान्वित होंगे। इसके लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा और 2025-26 से शिक्षकों को चौथे वेतनमान की सौगात मिलेगी। इससे सरकार पर 117 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आएगा।
मोबाइल की मांग पूरी न होने पर हैरान करने वाला कदम – पति को धक्का देकर घायल किया, अब पुलिस में मामला
5 Sep, 2025 04:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्वालियरः जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां मोबाइल फोन को लेकर हुए विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया। जिद ने शादीशुदा रिश्ते की नींव को हिलाकर रख दिया। गुस्से में पत्नी ने पति के साथ मारपीट कर उसे छत से नीचे धक्का दे दिया। इस घटना में पति गंभीर रूप से घायल हो गया और उसका पैर टूट गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। मामला ग्वालियर के चार शहर का नाका इलाके का है। पुलिस के मुताबिक टीकमगढ़ निवासी 22 वर्षीय शिवम वंशकार की शादी दो साल पहले झांसी निवासी साधना से हुई थी। शादी के बाद दोनों ग्वालियर में रह रहे थे। शिवम प्राइवेट जॉब करता है। बताया जा रहा है कि साधना लंबे समय से नया मोबाइल फोन दिलाने की जिद कर रही थी। बुधवार को भी उसने पति से नया मोबाइल खरीदकर देने की बात कही। इस पर शिवम ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए मोबाइल बाद में दिलाने की बात कही। इसी बात पर पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ गया
मोबाइल के लिए पति को छत से धक्का
विवाद इतना बढ़ा कि साधना ने गुस्से में पहले पति को गालियां दीं। फिर उसके साथ मारपीट कर दी। इतने पर भी मन नहीं भरा तो छत से धक्का दे दिया। गनीमत रही कि छत से नीचे गिरने के कारण शिवम की मौत नहीं हुई। हालांकि उसके पैर में फ्रैक्चर हो गया। घायल शिवम को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। शिवम ने पुलिस को यह भी बताया कि साधना ने उसे जान से मारने की धमकी दी है। घटना के बाद शिवम ने ग्वालियर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी पत्नी के खिलाफ मारपीट, जानलेवा हमला और धमकी देने सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। मामले की जांच सीएसपी रोबिन जैन के निर्देशन में की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विधायक से तकरार के बाद कलेक्टर का तलवार लहराना बना चर्चा का विषय
5 Sep, 2025 03:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भिंड। भिंड जिले में कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव और विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मामला 27 अगस्त से शुरू हुआ था जब विधायक अपने समर्थक किसानों के साथ कलेक्टर बंगले पहुंचे थे। किसानों ने खाद की समस्या रखी लेकिन बातचीत बिगड़ गई। समर्थकों ने कलेक्टर के खिलाफ नारे लगाए और विवाद बढ़ा।आरोप है कि विधायक ने कलेक्टर पर हाथ उठाने की कोशिश की जिसे सुरक्षा कर्मियों ने रोक लिया, इसके बाद विधायक ने बंगले के बाहर धरना भी दिया जो वरिष्ठ नेताओं की दखल के बाद खत्म हुआ।
कलेक्टर के समर्थन और विरोध में उतरे लोग
घटना के बाद प्रशासन और राजनीति के बीच खींचतान साफ दिखने लगी। राजस्व अधिकारियों ने कलेक्टर के समर्थन में कामकाज बंद कर दिया और काली पट्टी बांधकर विरोध जताया, उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए विधायक पर कार्रवाई की मांग की। दूसरी ओर किसान संघ के लोग कलेक्टर के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए और “कलेक्टर हटाओ” जैसे नारे लगाए. जिले का माहौल दो धड़ों में बंटता नजर आने लगा।
तलवार और पगड़ी से बढ़ा विवाद
इस पूरे घटनाक्रम के बीच क्षत्रिय महासभा और सर्व समाज के प्रतिनिधि कलेक्टर के समर्थन में सामने आए। उन्होंने कार्यालय पहुंचकर फूलमालाएं पहनाईं, पारंपरिक पगड़ी बांधी और मंत्रोच्चारण के बीच तलवार भेंट की, कलेक्टर ने भी इस तलवार को म्यान से निकालकर हाथ में लिया और वापस रख दिया। समर्थकों ने इसे सम्मान की परंपरा बताया लेकिन कलेक्टर के विरोधियों ने इसे शक्ति प्रदर्शन मानते हुए सवाल उठाए. इस घटना ने प्रशासन की निष्पक्षता पर भी बहस छेड़ दी है।
विधायक से हुआ था विवाद
भिंड में विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह ने जिले में चल रही खाद की परेशानी को लेकर कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव के निवास के बाहर धरना प्रदर्शन किया था। यह विवाद तब और बढ़ गया जब कलेक्टर घर से बाहर आए, इसके बाद विधायक और कलेक्टर में बहस शुरू हो गई। बहस इतनी बढ़ गई कि विधायक ने कलेक्टर से अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए मुक्का दिखा दिया और समर्थकों को कलेक्टर निवास में घुसा देने की धमकी दे दी, वहीं विधायक के समर्थकों ने कलेक्टर को चोर कहते हुए हंगामा शुरू कर दिया इसके बाद जिले के आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर विधायक को शांत कराया और धरना खत्म करवाया।
जल जंगल जमीन का महापर्व, ऐसी पूजा जिसे करने एकजूट हुए देश भर के आदिवासी
5 Sep, 2025 01:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
छिंदवाड़ा: दशहरा मैदान में पेड़ों की दो बड़ी-बड़ी शाखाएं, गोंडी संस्कृति से सजा मंच, धोती कुर्ते में पुरुष और पारंपरिक साड़ियों में हजारों की संख्या में महिलाएं पूजा के बाद खुशियां मनाते हुए नाच गाना कर रहे हैं. देश भर के अलग-अलग प्रदेशों से लोग यहां करमडार पूजा महोत्सव में शामिल होने आए थे. आदिवासियों की यह खास पूजा होती है, जिसे मनाने का तरीका भी बेहद खास होता है.
करम के पेड़ की शाखाओं की होती है पूजा
गोंडी धर्म संस्कृति मंच के प्रदेश संयोजक दिलीप सिंह सैयाम ने बताया, ''हम जनजाति समूह के लोग प्रकृति के पुजारी हैं, इसलिए करम के पेड़ जिसे हल्दू भी कहा जाता है, हम उसकी दो शाखाओं को लाकर उसकी पूजा करते हैं. यह आदिवासी समुदायों के लिए एक महत्वपूर्ण फसल उत्सव है. जो भूमि, जल और जंगलों के प्रति आभार व्यक्त करने का मौका देता है. यह परंपरा हजारों साल पुरानी है जिसे हम लोग आगे बढ़ा रहे हैं. प्रकृति ही हमारी पूजा का माध्यम है. जल, जंगल, जमीन, हवा इनकी हम पूजा करते हैं. ना तो इसे किसी ने बनाया है और ना ही इन्हें कोई मिटा सकता है.''
भादो की उजियारी ग्यारस में होती है पूजा
करमडार पूजा हर साल हिंदी महीने की भादो की एकादशी के दिन मनाई जाती है. इस पूजा को मनाने का तरीका भी बेहद खास होता है, इसे कर्मा पूजा भी कहा जाता है. इसके बाद करम के पेड़ों की शाखों के साथ ही गेहूं के जवारे बोए जाते हैं और फिर उनकी भी पूजा कर सभी लोग अपने आराध्य प्रकृति की पूजा करते हैं. हर व्यक्ति को पारंपरिक पोशाक यानी कि अगर पुरुष है तो धोती कुर्ता और महिलाओं को साड़ी पहनकर ही इस पूजा पंडाल में जाने की अनुमति होती है.
एक ही जगह 3 साल तक लगातार होती है पूजा
करमडार की पूजा करने के लिए लोग नंबर लगाते हैं. जिस भी जिले को पूजा करने की मेजबानी मिलती है उस जगह पर 3 साल लगातार पूजा की जाती है. फिर दूसरी जगह इस पूजा को किया जाता है. आयोजकों ने बताया कि, इस पूजा को करने के लिए लोग कई सालों पहले नंबर लगाते हैं. इस पूजा में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा जैसे कई राज्यों से जनजाति समूह के लोग पहुंचते हैं.
एक ही झटके में तोड़ी जाती है पेड़ की शाखा
रामकुमार कुंजाम ने बताया कि, ''पूजा करने के 1 दिन पहले करम के पेड़ के पास जाकर न्यौता दिया जाता है और फिर पांच कुंवारी कन्याएं एक ही झटके में इसकी शाखाएं तोड़ कर लाती हैं, जिस ज्वारे को बोया जाता है उसे लाकर करम के पेड़ों के साथ पूजा की जाती है, फिर इसी के बाद से पूरे देश में करमा सुआ और ददरिया जैसे पारंपरिक गीत संगीत की शुरुआत हो जाती है.''
क्या है गोंड जनजाति, कितनी है आबादी
गोंड भारत की सबसे बड़ी जनजातियों में से एक हैं, और उनकी आबादी लगभग 1.3 करोड़ है. गोंड जनजाति भारत के दक्कन प्रायद्वीप में निवास करती है. गोंड वर्तमान में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उड़ीसा और झारखंड में फैले हुए हैं. गोंड पहाड़ी क्षेत्र से आए हैं और वे खुद को कोइतुर या कोई कहते हैं. मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में बड़ी संख्या में गोंड लोग रहते हैं. इसके अलावा शहडोल में भी बड़ी तादाद में गोंड समुदाय के लोग निवास करते हैं. अन्य सभी आदिवासी समुदायों की तरह, गोंड भी अपने अनोखे त्यौहारों को अनोखे तरीके से मनाते हैं.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शिक्षकों के लिए बढ़ाई खुशियाँ, वेतनमान में किया इजाफा
5 Sep, 2025 01:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश के शिक्षकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। टीचर्स डे के मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें बड़ा तोहफा दिया है, शिक्षक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में CM डॉ. मोहन यादव ने राज्य के 1.50 लाख पात्र शिक्षकों को चतुर्थ क्रमोन्नति/वेतनमान देने की घोषणा की है।
MP के टीचर्स की बल्ले-बल्ले
मध्य प्रदेश के शिक्षकों की बल्ले हो गई है। CM मोहन यादव ने भोपाल में शिक्षक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में घोषणा की कि प्रदेश के 1.5 लाख शैक्षणिक संवर्ग के सहायक शिक्षक, उच्च शिक्षक, नवीन शैक्षणिक संवर्ग के प्राथमिक शिक्षक और माध्यमिक शिक्षकों को चतुर्थ क्रमोन्नति वेतनमान दिया जाएगा।
शिक्षकों पर 117 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार
CM मोहन यादव द्वारा शिक्षकों के लिए बड़े ऐलान से प्रदेश के डेढ़ लाख शिक्षकों को लाभ होगा। सभी शिक्षकों पर सरकार 117 करोड़ रुपए खर्च करेगी।
इंदौर में बच्चों की मौत दुर्घटना नहीं, हत्या है, राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा सरकार चलाने का क्या हक है?
5 Sep, 2025 12:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित महाराजा यशवंतराव अस्पताल के एनआईसीयू में 2 नवजात बच्चों को चूहों द्वारा कुतरने और बाद में दोनों बच्चों की मौत को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हत्या कहा है. राहुल गांधी ने इंदौर की घटना को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्वीट किया. राहुल गांधी ने लिखा कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि सीधी-सीधी हत्या है. यह इतनी भयावय, अमानवीय और असंवेदनशील है कि इसके बारे में सुनकर ही रूह भी कांप जाए.
'नवजात की सुरक्षा तक नहीं, फिर सरकार का क्या काम'?
राहुल गांधी ने लिखा कि एक मां की गोद से उसका बच्चा छिन गया, सिर्फ इसलिए क्योंकि सरकार ने अपनी सबसे बुनियादी जिम्मेदारी नहीं निभाई. हेल्थ सेक्टर को जानबूझकर प्राइवेट हाथों में सौंपा गया. जहां इलाज अब सिर्फ अमीरों के लिए रह गया है और गरीबों के लिए सरकारी अस्पताल अब जीवनदायी नहीं, मौत के अड्डे बन चुके हैं. प्रशासन हर बात की तरह कहता है जांच होगी, लेकिन सवाल यह है कि जब आप नवजात बच्चों की सुरक्षा तक नहीं कर सकते, तो सरकार चलाने का क्या हक है?
राहुल गांधी ने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को शर्म से सिर झुका लेना चाहिए. आपकी सरकार ने देश के करोड़ों गरीबों के स्वास्थ्य का अधिकार छीन लिया है. अब मां की गोद से बच्चे तक छिनने लगे हैं.
बाल आयोग ने मांगा 3 दिन में जवाब
इंदौर की इस घटना को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है. आयोग ने इंदौर कलेक्टर से 3 दिन में जवाब मांगा है. उधर घटना को लेकर चिकित्सा शिक्षा विभाग आयुक्त तरुण राठी इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज पहुंचे और अधिकारियों के साथ बैठक की. उन्होंने हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक यूनिट का भी दौरा किया. उधर मानव अधिकार आयोग ने भी मामले में संज्ञान लिया है. आयोग ने भी अस्पताल अधीक्षक को जांच के निर्देश दिए हैं और एक माह में रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है.
1 सितंबर को चूहे ने कुतरे थे 2 नवजातों के हाथ
बता दे कि सोमवार शाम यानि 1 सितंबर को इंदौर के एमवाय अस्पताल के एनआईसीयू में भर्ती 2 नवजातों के हाथ को एक चूहे ने कुतर दिया था. जिसका वीडियो भी सामने आया था. इस घटना के बाद मंगलवार को 1 नवजात की मौत हो गई थी. इसके बाद प्रशासन ने उसकी मौत की वजह निमोनिया सीवियर सेप्टिसीमिया होना बताया. इधर बुधवार को दूसरे नवजात की भी मौत हो गई है. इस मामले में डॉक्टर जितेंद्र का कहना है कि बच्ची के इंडेक्स फिंगर में मामूली रेट बाइट भी था लेकिन बच्ची की मौत कंजेटियल डिसीज और सेप्टीसीमिया की वजह से हुई है.
हाईकोर्ट ने ग्वालियर शहर में पानी निकासी सुधारने के लिए आदेश दिए
5 Sep, 2025 12:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में जोरदार बारिश ने लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जगह-जगह जलभराव, खराब-जर्जर सड़कें,सीवर समस्या और शहर की बदहाली के लेकर एक याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका पर MP हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने संज्ञान लिया है। इस मामले में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट बेंच ने ग्वालियर नगर निगम कमिश्नर को सीवेज लाइन डालकर पानी निकासी के निर्देश दिए हैं।
प्रहलाद पटेल ने नदियों के महत्व पर दिया जोर
5 Sep, 2025 12:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश को ‘नदियों का मायका’ कहा जाता है. नर्मदा, ताप्ती, गोदावरी समेत करीब 207 छोटी-बड़ी नदियां का उद्गम मध्य प्रदेश से ही हुआ है। अब जलवायु परिवर्तन और जल संकट की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नदियों के संरक्षण के लिए MP के पंचायत, ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल 101वीं नदी के उद्गम स्थल पर पहुंचे।
नदियों के संरक्षण के लिए अनूठा अभियान
MP के श्रम, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने जलवायु परिवर्तन और जल संकट की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नदियों के संरक्षण के लिए एक अनूठा अभियान प्रारंभ किया हुआ है।इसका मुख्य उद्देश्य जनजागरण के माध्यम से लोगों को प्रकृति और नदियों से जोड़ना है।
101वीं नदी के उद्गम स्थल पहुंचे मंत्री प्रहलाद पटेल
राज्य शासन के ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ से प्रेरित होकर मंत्री पटेल ने नदियों के उद्गम स्थल की यात्रा शुरू की। अब तक वे 101 नदियों के उद्गम स्थल तक पहुंच चुके हैं, नर्मदा परिक्रमावासी होने के नाते उन्होंने यह संकल्प लिया है कि वे अपनी यह यात्रा मां नर्मदा जी के चरणों में अर्पित करेंगे। उनका लक्ष्य 108 नदियों के उद्गम स्थल तक पहुंचने का है. नर्मदा जी के उद्गम स्थल पर नमन करके उन्होंने 101वां पड़ाव पूर्ण किया।
नदी है, तो सदी है
मंत्री पटेल का स्पष्ट संदेश है- ‘नदी है, तो सदी है.’ उनका मानना है कि मध्य प्रदेश की पहचान उसकी नदियों से है और जब तक सहायक नदियां सुरक्षित नहीं होंगी, तब तक नर्मदा जैसी वृहद नदियां भी जीवित नहीं रह पाएंगी। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में हमें सामूहिक प्रयास करने होंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ स्वच्छ, हरित और निर्मल वातावरण में सांस ले सकें।
गांव-जंगल-पहाड़ होकर पैदल उद्गम स्थल तक पहुंच रहे
इस अभियान की विशेषता यह है कि मंत्री स्वयं पैदल गांव, जंगल और पहाड़ियों से गुजरकर उद्गम स्थल तक पहुंच रहे हैं। वे स्थानीय समुदायों को जलधाराओं से जोड़ते हैं और उन्हें नदी संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं। साथ ही अफसरों को आवश्यक सुधार के दिशा-निर्देश देकर नदी संरक्षण को सुनिश्चित करते हैं। यह प्रयास धीरे-धीरे जनता में नदी संरक्षण को एक आंदोलन का रूप दे रहा है। सरकारी प्रयासों से आगे बढ़कर यह पहल अब जनभागीदारी आधारित मॉडल बन रही है, जो न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए जल संरक्षण का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करती है।
नर्मदापुरम में खाद का काला कारोबार, यूरिया और डीएपी जब्त कर दुकान सील
5 Sep, 2025 11:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नर्मदापुरम: प्रदेश में लगातार किसानों को यूरिया और डीएपी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है. खास बात ये कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में समय पर खाद नहीं मिल पा रही है. ऐसे ही नर्मदापुरम के धनावड़ गांव से एक मामला सामने आया जहां एक व्यापारी ने अवैध रूप से यूरिया एवं डीएपी बेचने के लिए स्टॉक कर रखा था. कई किसानो को महंगे दामों में खाद बेच रहा था. किसानों की सूचना पर एसडीम नीता कोरी के निर्देश पर तहसीलदार ने छापामार कार्रवाई की.
अवैध रूप से खाद बेच रहे दुकानदार के यहां छापा
नर्मदापुरम के ग्राम धनावड़ में एक दुकानदार अवैध रूप से महंगे दामों पर यूरिया और डीएपी बेच रहा था. किसानों की शिकायत के बाद जिला प्रशासन की टीम में शामिल तहसीलदार, पटवारी और प्रशासनिक आमले ने मौके पर पहुंचकर छानबीन की. यहां दुकानदार के स्टॉक में करीब 170 बोरियां यूरिया और डीएपी पाई गई जो कि अवैध रूप से बेची जा रही थी. जिसका ना तो कोई बिल था ना ही कोई पत्र. इस पर कारवाई करते हुए पंचनामा बनाकर दुकान को सील कर दिया गया.
एसडीएम के निर्देश पर हुई कार्रवाई
तहसीलदार दिव्यांशु नामदेव ने बताया कि "धनावड़ गांव में अवैध रूप से यूरिया और डीएपी विक्रय करने की सूचना प्राप्त हुई थी. इसके बाद एसडीएम के निर्देश पर कार्रवाई की गई है. मौके पर पाया गया कि किसानों को यूरिया और डीएपी वितरित की जा रही थी. जब जांच पड़ताल की गई तो बिल प्रस्तुत करने के लिए कहा गया. यूरिया और डीएपी का स्टॉक परचेस किया है उसके बिल भी नहीं मिले हैं. मौके पर एक बोरी पर जो 266 रुपए का ऊपर रेट लिखा हुआ है जब यहां किसानों से पूछा गया तो उन्होंने 300 रुपए रेट के हिसाब से लेना बताया गया."
पंचनामा बनाकर दुकान सील की
तहसीलदार दिव्यांशु नामदेव ने बताया कि "जब कार्रवाई करने के दौरान दुकान संचालक से खाद बेचने के लाइसेंस के बारे में जानकारी मांगी गई तो इनके पास कोई ना तो लाइसेंस मिला और ना ही कोई इस संबंध में पत्र पेश किया गया. इसके बाद वैधानिक रूप से कार्रवाई करते हुए जांच की जा रही है. मौके पर जो यहां वितरण कर रहे थे वह भी उपस्थित थे. ग्रामीणों के सामने ही मौके पर पंचनामा बनाया गया और दुकान को सील कर दिया गया है. मौके पर करीबन 78 बोरी यूरिया और 90 बोरी डीएपी पाई गई है."
'5 से 7 किसानों की खाद'
दुकान संचालक ने बताया कि "280 की बोरी 300 के हिसाब से किसान को दी गई थीं. मेरे पास 53 एकड़ जमीन है. सिकमी पर काम करता हूं. यूरिया और डीएपी मिलता मिलता नहीं है. 1300 की बोरी 2000 रुपए में मिलती है. ऐसे में एक महीने पहले यह स्टॉक किया गया था. एनपीए नहीं मिल रहा है ऐसी कोई जानकारी नहीं है. यह स्टॉक 5 से 7 किसानों का ही है. जिन्होंने मिलकर यहां पर यह स्टॉक रखा हुआ था. एसडीएम के सामने बिल प्रस्तुत कर दिए जाएंगे."
भक्ति में डूबा केदारनाथ: कपाट खुलते ही फूलों की बारिश, CM धामी ने कराई विशेष पूजा
डीएम का सख्त आदेश: कक्षा 8 तक के सभी निजी और सरकारी स्कूल सुबह 7:30 से खुलेंगे।
बीजेपी का मिशन 2026: तावड़े की 'सीक्रेट' मीटिंग और कार्यकर्ताओं को वैचारिक धार।
सुरक्षा चाक-चौबंद: चारधाम यात्रा में 7000 पुलिसकर्मी और हाईटेक सर्विलांस
आज का पंचांग
मृत्यु के बाद भी नहीं मिलती मुक्ति! गरुड़ पुराण में बताए गए भयावह दंड
