राजनीति
कांग्रेस ने सरदार पटेल को इतिहास से मिटाने की कोशिश की
2 Dec, 2025 08:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने सरदार पटेल को इतिहास से मिटाने की कोशिश की और यहां तक कि कांग्रेस ने मोदी सरकार द्वारा सरदार पटेल के स्मारक के रूप में निर्मित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ की लागत और जरुरत पर भी सवाल उठाया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नड्डा ने अटलदरा गांव में ‘सरदार एट द रेट ऑफ 150 यूनिटी मार्च’ के दौरान सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस नहीं चाहती थी कि सरदार पटेल को याद किया जाए। उन्होंने कहा कि देश के प्रथम पीएम जवाहरलाल नेहरू ने अपनी नीतियों से कश्मीर मुद्दे को बिगड़ने दिया, जबकि सरदार पटेल ने आजादी के बाद 562 रियासतों का सफलतापूर्वक देश में विलय किया।
नड्डा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने यह सुनिश्चित करने के लिए काम किया कि भारत के लौह पुरुष का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज न हो। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का निधन 1950 में हुआ था, लेकिन उन्हें 1991 में ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने सरदार पटेल को सच्चे अर्थों में याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी, लेकिन जब मोदी ने पटेल को श्रद्धांजलि स्वरूप गुजरात के नर्मदा जिले में दुनिया की सबसे ऊंची ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ बनाने का फैसला किया, तो कांग्रेस ने इसकी लागत पर सवाल उठाए।
नड्डा ने कहा कि कांग्रेस ने पूछा कि इतना पैसा क्यों खर्च किया जा रहा है और जब सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई, तो कांग्रेस ने सवाल उठाया कि इससे क्या हासिल होगा। नडडा ने कहा कि सरदार पटेल ने 562 रियासतों का एकीकरण किया था, जबकि तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि वह जम्मू-कश्मीर पर फैसला लेंगे। नड्डा ने कहा कि और नेहरूजी ने क्या फैसला किया? अनुच्छेद 370 देश की एकता और अखंडता के लिए एक बड़ा संकट बन गया।
PM मोदी ने नाम तो विपक्ष का लिया पर ‘टारगेट’ बिहार में ‘अपनों’ को भी किया
2 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: बिहार विधानसभा चुनावों के बाद जहां एनडीए ने ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया है, वहीं महागठबंधन इतिहास की सबसे कमजोर स्थिति में पहुंच गया है. लेकिन जीत की यह लहर अब राजनीतिक व्यवहार में संयम और संतुलन की मांग कर रही है. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में बिहार के नेताओं को साफ इशारा किया है कि लोकतंत्र प्रतिस्पर्धा का मंच है, लेकिन अहंकार का नहीं. अवसर संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का था. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में विपक्ष से सदन की कार्यवाही को लेकर सकारात्मक रूप अपनाने अपील की. उन्होंने कहा कि विपक्ष को पराजय की निराशा से बाहर निकलना चाहिए. इसके साथ ही पीएम मोदी ने अपने संबोधन में परोक्ष रूप से बिहार के नेताओं को भी संदेश दिया कि जीत का अभिमान न रखें.
राजनीति के जानकार कहते हैं कि ऐसा लगता है कि उनका यह संदेश सीधे बिहार के उन नेताओं के लिए है जो हाल की चुनावी जीत के बाद अति उत्साह में व्यावहारिक उग्रता दिखा रहे हैं. बता दें कि बिहार विधानसभा चुनावों में NDA ने 243 सीटों में से 202 पर कब्जा जमाकर महागठबंधन को महज 35 पर सिमेट दिया था. रिकॉर्ड वोटर टर्नआउट और महिलाओं की भारी भागीदारी ने लोकतंत्र की ताकत दिखाई, लेकिन अब पीएम का यह संदेश बिहार की सियासत को नई दिशा दे रहा है. दरअसल, दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण, लेकिन संदेश सीधा पटना की राजनीति के उन गलियारों तक पहुंचा जहां जीत का उत्साह और हार की तल्खी अभी तक हवा में तैर रही है. पीएम मोदी ने विपक्ष को “निराशा से बाहर आने” और सत्ता पक्ष को “विजय के अहंकार से बचने” की सलाह दी, उसे राजनीतिक जानकार बिहार की मौजूदा सियासी स्थिति से जोड़कर पढ़ रहे हैं.
कर्नाटक संकट को हल कर रही कांग्रेस, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार कल फिर ब्रेकफास्ट पर मिलेंगे
1 Dec, 2025 11:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु: कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर कांग्रेस के अंदर विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. कर्नाटक के डिप्टी चीफ मिनिस्टर डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को अपने घर ब्रेकफास्ट मीटिंग के लिए बुलाया है. इससे पहले कांग्रेस हाईकमान की तरफ से बुलाई गई मीटिंग में एकता दिखाने के लिए सिद्धारमैया और शिवकुमार ने 29 नवंबर को सिद्धारमैया के घर कावेरी में ब्रेकफास्ट मीटिंग की थी.
ऐसी अटकलें हैं कि राज्य के टॉप पोस्ट को लेकर दोनों के बीच पावर की खींचतान जारी है, जिसको सुलझाने के लिए ब्रेकफास्ट मीटिंग का राउंड-2 हो रहा है. इससे पहले चर्चाएं थी कि दिल्ली से दोनों के बीच मतभेद को सुलझाया जाएगा, लेकिन ऐसी बैठकों से यह दिखाने की कोशिश हो रही है कि पार्टी में सब ठीक है और बेंगलुरु में ही विवादों का समाधान हो जाएगा.
सिद्धारमैया के घर पर हुई पहली ब्रेकफास्ट मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा था कि उनके और शिवकुमार के बीच अब कोई मतभेद नहीं है और भविष्य में भी कोई मतभेद नहीं होगा.
सिद्धारमैया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमारा एजेंडा 2028 के चुनाव हैं. लोकल बॉडी चुनाव जरूरी हैं, हमने उन पर चर्चा की. हमने 2028 के चुनावों में कांग्रेस को वापस लाने पर भी चर्चा की. हमने चर्चा की कि हम साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे. हमारे बीच कोई मतभेद नहीं हैं और भविष्य में भी कोई मतभेद नहीं होंगे.” उन्होंने यह भी दोहराया कि वह इस मुद्दे पर कांग्रेस हाईकमान के फैसले का पालन करेंगे.
खबरों के मुताबिक शिवकुमार का समर्थन करने वाले विधायकों का एक ग्रुप हाल ही में मिड-टर्म लीडरशिप शिफ्ट के लिए दिल्ली गया था, जबकि सिद्धारमैया के समर्थकों ने ऐसे किसी भी अरेंजमेंट से साफ इनकार किया है. खबर है कि कांग्रेस के टॉप लीडर तनाव कम करने और सरकार को स्टेबल करने के लिए कैबिनेट में फेरबदल और कर्नाटक कांग्रेस यूनिट में ऑर्गेनाइजेशनल बदलाव जैसे कई कदमों पर विचार कर रहे हैं.
SIR के मुद्दे पर भाजपा को घेरने की तैयारी, चुनावी मोड में धड़ाधड़ रैलियां कर रहीं ममता बनर्जी
1 Dec, 2025 10:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। बंगाल में जारी एसआईआर का ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी द्वारा विरोध किया जा रहा है। हालांकि विरोध के बावजूद एसआईआर की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। ऐसे में अब ममता बनर्जी ने एसआईआर की धार को कुंद करने के लिए जनमत जुटाने का फैसला किया है। इसी के तहत ममता बनर्जी चुनावी मोड में लगातार रैलियां करने जा रही हैं। इस हफ्ते ममता बनर्जी मालदा और मुर्शिदाबाद में विशाल रैलियां करेंगी और फिर अगले हफ्ते कूच बिहार में एक बड़ी रैली को संबोधित कर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश करेंगी।
गौरतलब है कि इससे पहले ममता बनर्जी ने बीते हफ्ते बोनगांव में एसआईआर के खिलाफ रैली की थी। यह रैली मतुआ समुदाय के प्रभाव वाले इलाके में की गई, जो एसआईआर को लेकर डरे हुए हैं। रैली के दौरान ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि एसआईआर का इस्तेमाल परिवारों को डराने के लिए किया जा रहा है। टीएमसी ने जिला स्तर पर भी एसआईआर के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। टीएमसी नेताओं ने बताया कि ममता बनर्जी 3 और 4 दिसंबर को मालदा और मुर्शिदाबाद में रैलियों को संबोधित करेंगी। वहीं 9 दिसंबर को कूच बिहार में रैली करेंगी।
ये तीनों ही जिले सीमावर्ती है और यहां पर बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय, प्रवासी और विस्थापित लोग रहते हैं। इन समुदायों में एसआईआर को लेकर ज्यादा आशंकाएं हैं। यही वजह है कि टीएमसी लोगों के इस डर और आशंका को भुनाने और 2026 के विधानसभा चुनाव में फायदा लेने की कोशिश कर रही है। इन रैलियों को टीएमसी के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
मालदा की रैली गजोले में और मुर्शिदाबाद की बेहरामपुर स्टेडियम में होनी है। वहीं 9 दिसंबर को ऐतिहासिक रास मेला मैदान में होने वाली कूच बिहार रैली को ममता बनर्जी की सबसे बड़ी लामबंदी के तौर पर पेश किया जा रहा है। तैयारियों की घोषणा करते हुए, जिला टीएमसी अध्यक्ष अभिजीत डे भौमिक ने बताया कि 1 दिसंबर को ब्लॉक अध्यक्षों के साथ एक आपात बैठक होगी, जिसके बाद 2 दिसंबर को रवींद्र भवन में जिला स्तर पर तैयारी का सत्र आयोजित होगा, जिसमें मंत्री, पार्टी सांसद और विधायकों के साथ ही पार्षद और पंचायत अधिकारी मुख्यमंत्री की रैली की योजना पर चर्चा की जाएगी।
‘प्रधानमंत्री सबसे बड़े ड्रामेबाज’, मोदी के बयान पर कांग्रेस का पलटवार- असल मुद्दों पर चर्चा करें
1 Dec, 2025 09:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए उन निशाना साधा है और प्रधानमंत्री को सबसे बड़े ड्रामेबाज तक कह दिया। कांग्रेस का यह बयान तब आया है, जब संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले मीडिया से बात करते हुए पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि विपक्ष संसद में ड्रामा कर रहा है। प्रधानमंत्री ने विपक्ष से पराजय की बौखलाहट को भुलाकर संसद में सार्थक चर्चा करने की अपील की।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा एक पोस्ट में आरोप लगाया कि लोगों के असल मुद्दों को सुलझाने के बजाय प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर ड्रामेबाजी की है। खरगे ने कहा कि ‘सरकार बीते 11 वर्षों से लगातार संसदीय मर्यादा और व्यवस्था को रौंद रही है और ऐसी घटनाओं की लंबी फेहरिस्त मौजूद है।’ खरगे ने लिखा, ‘भाजपा को अब लोगों का ध्यान भटकाने वाले इस ड्रामे को खत्म करके संसद में असल मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए और लोगों का सामना करना चाहिए।’
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘आम आदमी बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक असमानता और देश के संसाधनों की लूट से जूझ रहा है। जो लोग सत्ता में हैं, वे ड्रामेबाजी का खेल खेल रहे हैं और सत्ता के अहंकार से भरे हैं।’ खरगे ने कहा, ‘एसआईआर प्रक्रिया में काम के बोझ के कारण बीएलओ लगातार जान दे रहे हैं। विपक्ष, वोट चोरी सहित अन्य मुद्दों को प्राथमिकता देना चाहता है और संसद में हम इसे लगातार उठाएंगे।’
शशि थरूर कांग्रेस की बैठक में क्यों शामिल नहीं हुए, कैमरे के सामने खुद किया खुलासा
1 Dec, 2025 06:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर अक्सर सुर्खियों में बने रहते हैं. वे इस बार कांग्रेस की बैठक में शामिल न होने की वजह से चर्चा में हैं. हालांकि अब उन्होंने इसका कारण भी बता दिया है. थरूर ने सोमवार (1 दिसंबर) को खुद ही बताया कि कांग्रेस की अहम रणनीतिक बैठक में क्यों शामिल नहीं हुए. कांग्रेस की इस रणनीतिक बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और जयराम रमेश समेत कई बड़े नेता शामिल हुए थे.
थरूर सोमवार को शीतकालीन सत्र के लिए संसद पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए कैमरे के सामने कहा, ”मैंने बैठक जानबूझकर नहीं छोड़ी, मैं फ्लाइट में था. केरल से लौट रहा था.” कांग्रेस रविवार (30 नवंबर) को अहम रणनीतिक बैठक रखी थी, जिसकी अध्यक्षता खुद सोनिया गांधी ने की थी, लेकिन थरूर मीटिंग में शामिल नहीं हो पाए थे. अहम बात यह भी है कि वे पहले भी कांग्रेस की बैठक से गायब हो चुके हैं.
संसद भवन परिसर में कुत्ता लेकर पहुंच गईं सांसद, कहा- ‘असली काटने वाले पार्लियामेंट में बैठे हैं’
1 Dec, 2025 04:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। संसद में शीतकालीन सत्र के पहले दिन जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन और वायु प्रदूषण और अन्य मुद्दों पर जमकर हंगामा किया। वहीं, कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी अपनी कार में एक कुत्ता लेकर संसद भवन परिसर के अंदर पहुंच गईं। उनके कुत्ता ले जाने पर बवाल हुआ तो उन्होंने कहा कि वह कार के अंदर था और ऐसी ही कार चली गई। इसमें जबरन का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।
पार्लियामेंट में कुत्ता लाने पर हुए विवाद पर कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा, “कोई कानून है क्या? मैं जा रही थी। एक स्कूटर एक कार से टकरा गया। यह छोटा सा पपी सड़क पर घूम रहा था। मुझे लगा कि इसे टक्कर लग जाएगी। तो मैंने इसे उठाया, कार में रखा, पार्लियामेंट आई और वापस भेज दिया। कार चली गई, और कुत्ता भी। तो इस चर्चा का क्या मतलब है?”
सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “असली काटने वाले तो पार्लियामेंट में बैठे हैं। वे सरकार चलाते हैं। हम एक बेजुबान जानवर की देखभाल करते हैं, और यह एक बड़ा मुद्दा और चर्चा का टॉपिक बन गया है। क्या सरकार के पास और कुछ करने को नहीं है? मैंने कुत्ते को घर भेज दिया और उनसे कहा कि इसे घर पर ही रखो। हम उन लोगों के बारे में बात नहीं करते जो पार्लियामेंट में बैठकर हमें रोज काटते हैं।”
हरियाणा में लगातार बिगड़ती जा रही है स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति – कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा
1 Dec, 2025 12:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़ । कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा (Congress MP Kumari Sailja) ने कहा कि हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति (Condition of Health services in Haryana) लगातार बिगड़ती जा रही है (Is continuously Deteriorating) ।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कभी निजी चिकित्सकों की हड़ताल, तो कभी सरकारी डॉक्टरों की पेन-डाउन स्ट्राइक ने आम जनता को गंभीर संकट में डाल दिया है। अस्पतालों में मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से न तो संवेदनशीलता दिख रही है और न ही ठोस समाधान की कोई कोशिश नजऱ आ रही है। सरकार को तुरंत स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी तय करते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए। जनता का जीवन सर्वोपरि है और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवाओं की अनदेखी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
मीडिया को जारी बयान में सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि हाल ही में आई रिपोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग की खामियों को साफ उजागर किया है। कोविड-काल में मिले 727 वेंटिलेटरों में से करीब 30 प्रतिशत खराब पड़े हैं। कई जिलों में 15 महीने से एक भी मरीज को वेंटिलेटर सुविधा नहीं मिल सकी। करोड़ों रुपये खर्च कर मशीनें खरीद ली गईं, लेकिन न तो उनका रख-रखाव हुआ और न ही विशेषज्ञ स्टाफ नियुक्त किया गया । यह सरकार की लापरवाही का गंभीर उदाहरण है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। सरकार को तुरंत डॉक्टरों से वार्ता कर हड़ताल की स्थिति को समाप्त करना चाहिए, ताकि इमरजेंसी और सामान्य दोनों तरह की सेवाएं सही ढंग से बहाल हो सकें। वेंटिलेटरों की खराब स्थिति पर तत्काल तकनीकी जांच जरूरी है और जो मशीनें अनुपयोगी पड़ी है, उनका त्वरित मेंटेनेंस सुनिश्चित किया जाए।
कुमारी सैलजा ने कहा कि कई जिलों में मशीनें मौजूद हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए प्रशिक्षित तकनीशियन उपलब्ध नहीं हैं। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप हैं, जिससे गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जनता इलाज के लिए तरस रही है, जबकि सरकार केवल दावे करने में व्यस्त है। कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार को तुरंत स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी तय करते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए। जनता का जीवन सर्वोपरि है और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवाओं की अनदेखी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जा सकती। यदि सरकार समय रहते नहीं जागी तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
मोदी-शाह की जोड़ी राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति कर रही है – कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश
1 Dec, 2025 11:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश (Congress General Secretary Jairam Ramesh) ने कहा कि मोदी-शाह की जोड़ी (Modi-Shah duo) राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति कर रही है (Is pursuing the politics of Political Vendetta) ।
पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर लिखा, ‘मोदी-शाह की जोड़ी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ लगातार डराने-धमकाने और राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति कर रही है। जो खुद असुरक्षित और भयभीत होते हैं, वही दूसरों को डराने की कोशिश करते हैं। नेशनल हेराल्ड मामला पूरी तरह से झूठा और निराधार है। अंततः न्याय की ही जीत होगी। सत्यमेव जयते!’
कांग्रेस ने नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर दर्ज हुई एफआईआर का कड़ा विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह मिलकर कांग्रेस के टॉप नेताओं को लगातार निशाने पर ले रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार विपक्ष को डराने-धमकाने और दबाने की राजनीति कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि यह सब राजनीति से प्रेरित कार्रवाई है, जिसका मकसद विपक्ष को कमजोर करना है।
दरअसल, दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज कर दी है। इस केस में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एफआईआर में कुल नौ आरोपी हैं, जिनमें छह लोग और तीन कंपनियां शामिल हैं। यह कार्रवाई ईडी की 3 अक्टूबर 2025 को दी गई शिकायत के आधार पर हुई है।
आरोप है कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की करीब 2,000 करोड़ की संपत्तियों पर गलत तरीके से कब्जा करने की साजिश रची गई। एजेएल वही कंपनी है जो नेशनल हेराल्ड अखबार चलाती थी और 2008 में वित्तीय दिक्कतों के कारण बंद हो गई थी। उस समय एजेएल पर 90 करोड़ रुपए से ज्यादा का ब्याजरहित कर्ज था।
2010 में बनी कंपनी यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने एजेएल की 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियों को मात्र 50 लाख रुपए में खरीद लिया। इस कंपनी में सोनिया और राहुल गांधी का 76 प्रतिशत शेयर है, जिससे वे इसके प्रमुख मालिक बन गए। आरोप यह भी है कि सार्वजनिक धन को निजी फायदे में बदलने के लिए यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाई गई थी। इसके अलावा, कोलकाता की एक कथित शेल कंपनी डॉटेक्स द्वारा यंग इंडिया को 1 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने को भी साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है।
वोट चोरी रोकने में चुनाव आयोग की भूमिका संदेहास्पद – कांग्रेस के महासचिव सचिन पायलट
1 Dec, 2025 10:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोंक । कांग्रेस के महासचिव सचिन पायलट (Congress General Secretary Sachin Pilot) ने कहा कि वोट चोरी रोकने में (In preventing Vote Theft) चुनाव आयोग की भूमिका संदेहास्पद है (Role of Election Commission is Questionable) ।
कांग्रेस के महासचिव, पूर्व डिप्टी सी एम, टोंक विधाधक सचिन पायलट ने कहा कि निर्वाचन आयोग का काम नागरिकता तय करना नहीं है, उसका काम है 18 साल के हो चुके नागरिक को वोट दिलाने की सुनिश्चितता करना । आयोग नेता, पार्टी , सरकार के दबाव के काम नहीं करे। सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद देना चाहता हूं कि उसने आधार कार्ड से वोट देने की बात कही है। वरना सरकार तो घुसपैठियों को निकलने के नाम पर गरीब, असहाय, दलित, अशिक्षित, आदिवासियों के वोट काटने पर लगी हुई है। वोट चोरी रोकने के मामले में चुनाव आयोग की भूमिका संदेह के घेरे में है। यह बात टोंक दौरे पर आए सचिन पायलट ने मीडिया से बातचीत में कही।
पायलट ने कहा में कहा कि चुनाव नजदीक आते ही घुसपैठियों को निकालने के नाम पाने फायदे के हिसाब से वोट का है। सरकार बताए कि 11 साल में कितने घुसपैठियों को निकाला हैं। कोई चुनाव आते ही एसआईआर याद आती है, पहले बिहार ओर राजस्थान में ही दिखे लीजिए कितने बीएलओ की मौत हो गई । उन पर बहुत ज्यादा दबाव बनाया जा रहा है। सचिन पायलट ने राज्य सरकार पर भी निशाना साधा है। सचिन पायलट ने कहा आप बदलाव कितना कर रहे हैं। लेकिन परिणाम तो जनता में विश्वास पैदा नहीं कर रहा है। आप देख रहे हैं प्रदेश में कितना खींचतान चल रही है, कभी चीफ सेक्रेटरी बदल रहे हैं। कभी अफसर बदल रहे हैं। मंत्रिमंडल पूरा बना नहीं है। उपचुनाव आप हार रहे हैं। आपसी इतनी खींचतान है,कि सरकार दिल्ली के आदेशों पर चल रही है।
भाजपा ने जो वादे किए थे। सरकार में आने से पहले वो 2 सालों में कितने वादे पूरे हुए। चार लाख नौकरी की बात की थी, कितनी नौकरी दी है। यह सारी बातें जनता भी देख रही है। जानबूझकर आप चुनाव से डर रहे हो। नगर निकाय के चुनाव, पंचायत राज के चुनाव बार-बार आप पोसपोंड कर रहे हो। क्यों कर रहे हो किसके डर से कर रहे हो। यह सारी बातें जनता देख रही है। मुझे लगता है कि सरकार दिशाहीन है। आपस में जो विश्वास होना चाहिए वह कायम नहीं कर पा रही है। 2 साल बहुत होते हैं।उन्होंने 2 साल में पब्लिक का कॉन्फिडेंस खो दिया है। विधायक सचिन पायलट ने किसानों के मुआवजे को लेकर कहा कि किसानों को मुआवजा मिलना चाहिए ।हमारी सरकार ने एक अच्छा पैकेज बनाया था लेकिन वर्तमान में भी किसानों को अच्छा पैकेज मिलना चाहिए किसानों को राहत मिलनी चाहिए। किसानों की आने वाली पीढियां का भविष्य सुरक्षित होना चाहिए।
इस अवसर पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष सउद सईदी, पूर्व विधायक कमल बैरवा निवर्तमान जिलाध्यक्ष हरि प्रसाद बैरवा, रामलाल संडीला, दिनेश चौरासिया, देवकरण गुर्जर,हरि, हंसराज फागणा, रामराय भड़ाना, कैलाशी देवी मीणा, इरशाद बेग खान, शब्बीर अहमद, जरार खान, देवलाल, रूप नारायण जाट, राजेश गुजर एडवोकेट, यूसुफ यूनिवर्सल, राहुल सैनी,फोजूराम मीणा सहित काफी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार लाएगी 14 बड़े बिल, कांग्रेस उठाएगी ये मुद्दे
1 Dec, 2025 09:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: संसद का शीतकालीन सत्र (Winter session of Parliament) 1 दिंसबर यानी सोमवार से शुरू हो रहा है. यह शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा. इससे पहले मोदी सरकार (Modi government) ने लोकसभा और राज्यसभा के लिए 14 विधेयकों को पेश करने के लिए लिस्ट तैयार की है. केंद्र और विपक्ष (Centre and opposition) के बीच इन विधेयकों सहित कई मुद्दों पर हंगामा छिड़ने के पूरे आसार हैं.
इसी को देखते हुए शीतकालीन सत्र से पहले रविवार को केंद्रीय केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में जेपी नड्डा, किरेन रिजिजू समेत कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, गौरव गोगोई और अन्य नेता शामिल हुए. वहीं विपक्ष से कांग्रेस के प्रमोद तिवारी, कोडिकुनिल सुरेश, तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन, समावादी पार्टी के राम गोपाल यादव, द्रमुक के तिरुचित शिवा और कई अन्य दलों के नेता शामिल हुए. इस दौरान शीतकालीन सत्र को लेकर विचार-विमर्श हुआ.
संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक जारी रहेगा. इस अवधि में कुल 15 कार्यदिवस निर्धारित किए गए हैं. विपक्ष ने सत्र को अपेक्षाकृत छोटा बताते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत और गहन चर्चा की मांग की है. सामान्य परिस्थितियों में शीतकालीन सत्र में लगभग 20 बैठकें आयोजित की जाती हैं. विपक्ष ने रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में इस मुद्दे को उठाया है. इस पर केंद्र सरकार की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. माना जा रहा है कि शीतकालीन सत्र के 15 कार्यदिवस ही रहेंगे.
1. जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2025 2. इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (संशोधन) विधेयक, 2025 (IBC) 3. मणिपुर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2025- अध्यादेश बदलने के लिए 4. रीपीलिंग एंड अमेंडिंग बिल, 2025 5. नेशनल हाइवेज (संशोधन) विधेयक, 2025 6. एटॉमिक एनर्जी बिल, 2025 7. कॉरपोरेट लॉज (संशोधन) बिल, 2025 8. सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड बिल (SMC), 2025 9. इंश्योरेंस लॉज (संशोधन) बिल, 2025 10. आर्बिट्रेशन एंड कंसिलिएशन (संशोधन) बिल, 2025 11. हायर एजुकेशन कमिशन ऑफ इंडिया बिल, 2025 12. सेंट्रल एक्साइज (संशोधन) बिल, 2025 13. हेल्थ सिक्योरिटी सेस/नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल, 2025 14. वर्ष 2025-26 के लिए प्रथम पूरक अनुदान मांगें (फाइनेंशियल बिजनेस)
शीतकालीन सत्र में कांग्रेस वोट चोरी का मुद्दा उठाएगी. कांग्रेस इस मुद्दे को किसी भी हालत में छोड़ना नहीं चाहती है. साथ ही कांग्रेस एसआईआर और बीएलओ की मौतों से जुड़े मामलों को भी संसद में उठाएगी. कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी का कहना है कि कथित तौर पर वोट चोरी किए जाने का मुद्दा संसद में उठाया जाएगा. उन्होंने कहा कि जब लोकतंत्र की हत्या की जा रही हो और सिर्फ वोट चोरी नहीं, बल्कि वोट डकैती की जा रही हो, तो यह एक मुद्दा अहम होगा. उनका कहना था, जब लाल किले के पास विस्फोट हो रहा है, तो यह एक मुद्दा है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विदेश नीति विफल हो गई है.
हर पीड़ित की शिकायत का प्रभावी निस्तारण कराया जाएगा। – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
1 Dec, 2025 08:53 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गोरखपुर । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने कहा कि हर पीड़ित की शिकायत का (Every Victim’s Complaint) प्रभावी निस्तारण कराया जाएगा (Will be effectively Resolved) ।
गोरखपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लगातार दूसरे दिन रविवार सुबह जनता दर्शन कार्यक्रम में लोगों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने लोगों से बातकर उनकी समस्याएं सुनीं और कहा, “घबराइए मत, हर समस्या का समाधान सुनिश्चित कराएंगे। हर पीड़ित की शिकायत का प्रभावी निस्तारण कराया जाएगा।” जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और उसका समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण व पारदर्शी निस्तारण कराएं। इससे पहले शनिवार को भी सीएम ने जनता दर्शन में लोगों की समस्याएं सुनीं थीं।
रविवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में आयोजित जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनका समाधान करने के निर्देश दिए। जनता दर्शन में महिलाओं की संख्या अधिक रही। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे और उनकी समस्याएं सुनीं। सीएम ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कराएंगे। किसी को भी चिंता करने या परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। प्रार्थना पत्रों को उन्होंने अधिकारियों को हस्तगत करते हुए निर्देश दिया कि हर समस्या का त्वरित और पारदर्शी निस्तारण कराया जाए।
जनता दर्शन में कुछ लोगों द्वारा जमीन कब्जाने की शिकायत पर सीएम योगी ने कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी गरीब की जमीन पर यदि कोई कब्जा करने की कोशिश करे तो उसे ठीक से सबक सिखाया जाए। गरीब की जमीनों पर दबंग या माफिया का कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अफसरों को यह निर्देश दिए कि यदि किसी प्रकरण में पीड़ित को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ा है तो इसकी भी जांच कर जवाबदेही तय की जाए। जनता दर्शन में अंबेडकरनगर से आई एक महिला ने बाजार गए अपने बच्चे के साइकिल सहित गायब होने की पीड़ा बताई। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि इस प्रकरण को संवेदनशीलता से लिया जाए और बच्चे का पता लगाने को जरूरी कदम उठाए जाएं।
जनता दर्शन में इस बार भी कुछ लोग गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें मदद का भरोसा दिया और अधिकारियों को निर्देशित किया कि इलाज में अस्पताल के इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी। एक महिला द्वारा किडनी के इलाज में डायलिसिस कराने की जरूरत और उसके लिए धनराशि न होने की बात कहने पर मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अफसरों को निर्देशित किया कि डायलिसिस के लिए पैसे की व्यवस्था कराई जाए। उन्होंने महिला को यह कहते हुए भरपूर आत्मीय संबल दिया, ‘घबराओ मत उपचार की पूरी व्यवस्था कराई जाएगी।’ मुख्यमंत्री योगी ने जनता दर्शन में परिजनों के साथ बच्चों पर खूब प्यार-दुलार बरसाया। उन्होंने इन बच्चों को चॉकलेट के साथ आशीर्वाद दिया।
योगी आदित्यनाथ ऑफिस के आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल से जनता दर्शन की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, “प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं, अपेक्षाओं और अधिकारों की पूर्ति ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाराज के सुशासन का आधार है। लोक-कल्याण हेतु दृढ़ संकल्पित महाराज जी ने आज गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित ‘जनता दर्शन’ में विभिन्न जनपदों से आए लोगों की समस्याएं सुनीं एवं अधिकारियों को जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए।”
जनेश्वर मिश्र पार्क को इवेंटबाजी के हवाले कर रही है योगी सरकार – सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव
1 Dec, 2025 08:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ । सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (SP President Akhilesh Yadav) ने कहा कि योगी सरकार (Yogi Government) जनेश्वर मिश्र पार्क (Janeshwar Mishra Park) को इवेंटबाजी के हवाले कर रही है (Is using for Event Purposes) । अखिलेश यादव ने रविवार को लखनऊ के सबसे बड़े जनेश्वर मिश्र पार्क को बचाने के लिए बड़ा नागरिक आंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया है ।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर रविवार को पोस्ट करके भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पैसे के लालच में लखनऊ के ‘हरित हृदय’ कहे जाने वाले जनेश्वर मिश्र पार्क को इवेंटबाजी के हवाले कर रही है। अखिलेश ने कहा कि अगर सपा अकेले इसका विरोध करेगी तो भाजपा इसे राजनीतिक करार देगी। उन्होंने लिखा, “हम सबको मिलकर एक नागरिक आंदोलन की तरह इसका पुरजोर विरोध करना चाहिए। यदि हम अकेले ये करेंगे तो इसे राजनीतिक आंदोलन घोषित करके भाजपा सरकार अपना उल्लू सीधा कर लेगी।”
उन्होंने बुजुर्गों, परिवारवालों और हेल्थ व फिटनेस से जुड़े लोगों से इस विषय पर आगे आने और हरियाली बचाने की अपील करते हुए लिखा, “इसलिए हमारी हर लखनऊवासी, हर पर्यावरण प्रेमी-एक्टिविस्ट, पार्कों का सदुपयोग करने वाले हर बुजुर्ग, हर परिवारवाले और हर हेल्थ व फिटनेस कॉन्शियस युवक-युवती से अपील है कि वो आगे आएं और लखनऊ की हरियाली को बचाएं।” अखिलेश ने लिखा, “ये तो भाजपा और उनके संगी-साथियों के लालच की शुरुआत है। आज एक पार्क इसका शिकार हो रहा है, कल को लखनऊ और उत्तर प्रदेश के हर मोहल्ले-कॉलोनी के पार्क पर भाजपाई ठेकेदारों का कब्जा हो जाएगा।”
सपा प्रमुख ने इवेंट के बाद लखनऊवासियों के हिस्सों में गंदगी आने की बात कही। अखिलेश यादव ने कहा कि स्थानीय निवासियों के हिस्से इन इवेंटों के बाद जमा हुए कूड़े-करकट, गंदगी और जूठन की दुर्गंध के सिवा कुछ नहीं आएगा। समय रहते नहीं जागे तो लखनऊवासियों का सांस लेना दूभर हो जाएगा। भाजपा पार्क को पार्किंग न बनाए। भाजपा जाए तो सांस आए।”
कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता हस्तांतरण को लेकर तनाव जारी, डीके शिवकुमार याद दिला रहे ढाई-ढाई साल का वादा
30 Nov, 2025 10:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । कर्नाटक (Karnataka) में कांग्रेस (Congress) के लिए संकट अभी टला नहीं है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Chief Minister Siddaramaiah) और उनके डिप्टी डीके शिवकुमार (Deputy DK Shivakumar) के बीच सत्ता हस्तांतरण को लेकर दबाव की राजनीति जारी है। इस बीच कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया और शिवकुमार को नई दिल्ली तलब किया है। यह कदम राज्य में गहराते नेतृत्व संकट को समाप्त करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सूत्रों के कहना है कि 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद जब मुख्यमंत्री चुनने की बारी आई तो सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच एक डील हुई थी। डील में ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला दिया गया है। अब जब सिद्धारमैया की मियाद पूरी हो चुकी है तो वह कुर्सी छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। इसे देखते हुए शिवकुमार ने कांग्रेस आलाकमान को उनको दिया गया वादा याद दिलाया है।
कई वरिष्ठ कांग्रेस पदाधिकारियों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच एक मौखिक सहमति बनी थी जिसके तहत सिद्धारमैया ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद पर रहेंगे और शेष अवधि के लिए शिवकुमार बागडोर संभालेंगे। हालांकि इस व्यवस्था को आधिकारिक तौर पर कभी स्वीकार नहीं किया गया, लेकिन शिवकुमार द्वारा हाल ही में यह खुलासा किए जाने के बाद तनाव बढ़ गया कि 5-6 शीर्ष नेताओं के बीच एक समझ बनी थी।
घटनाक्रम से परिचित एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, “यह आपसी एक समझ थी। कोर कमेटी में हर कोई जानता था कि सत्ता-साझेदारी फॉर्मूले पर चर्चा हुई थी। हाईकमान को अब यह स्पष्ट करना होगा कि क्या इसे औपचारिक रूप दिया गया था या यह एक मौखिक वादे के रूप में छोड़ दिया गया था।” इस मुद्दे को जल्दी न सुलझा पाने के कारण संदेह और दबाव की रणनीति के लिए जगह बन गई है।
डीके शिवकुमार ने दबाव की राजनीति तेज कर दी है। उन्होंने हाल ही में एक पोस्ट के जरिए सिद्धारमैया और कांग्रेस आलाकमान को परोक्ष रूप से वचन निभाने की बात याद दिलाई। शिवकुमार यह चाहते हैं कि इस मुद्दे पर कांग्रेस हाईकमान कोई न कोई जवाब दे।
शिवकुमार के प्रति सहानुभूति रखने वाले नेताओं का कहना है कि यह मुद्दा अब केवल व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से परे है। एक वरिष्ठ कांग्रेस पदाधिकारी ने कहा, “यदि पार्टी कोई वचन देती है, तो उसे उस पर कायम रहना चाहिए। यह केवल एक नेता या एक पद की बात नहीं है। यह विश्वसनीयता की बात है।” वहीं, सिद्धारमैया खेमे के एक पदाधिकारी ने अभी भी यही रुख बनाए रखा है कि कोई बाध्यकारी व्यवस्था नहीं थी।
इस सबके बीच कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने इस संकट को सुलझाने का फैसला किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने इसकी कोशिशें तेज कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार, नेतृत्व के मुद्दे को सुलझाने के लिए 29 या 30 नवंबर को नई दिल्ली में एक बैठक होने की संभावना है, जिसमें सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों को बुलाया गया है। एक नेता ने कहा कि उनका उद्देश्य गुस्सा शांत करना और राजनीतिक रूप से टिकाऊ व्यवस्था खोजना है, क्योंकि अब शिवकुमार की उपेक्षा करना कोई विकल्प नहीं रहा।
हाईकमान ने पहले दोनों नेताओं को आपस में मिलकर बात करने का निर्देश दिया है, जिसके बाद दिल्ली में अंतिम फैसला होगा। इसके अनुसार मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शनिवार को उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को नाश्ते पर आमंत्रित किया है।
नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार बोले- हम साथ-साथ हैं…
30 Nov, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बंगलूरू. कर्नाटक (Karnataka) में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच सीएम (CM) सिद्धारमैया (Siddaramaiah ) और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) ने एकजुटता का संदेश दिया है। करीब एक घंटे चले नाश्ते के बाद दोनों नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी एकजुट है और पार्टी आलाकमान जो भी तय करेगा, दोनों नेता उसका पालन करेंगे।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया बोले- हमारे बीच कोई मतभेद नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘कल से कोई असमंजस नहीं रहेगा। अभी भी कोई असमंजस नहीं है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स से गलतफहमी पैदा हुई। हमने तय किया है कि पार्टी आलाकमान जो भी तय करेगा, हम उसका पालन करेंगे।’ सिद्धारमैया ने कहा कि ‘हमारा एजेंडा 2028 का विधानसभा चुनाव है। निकाय चुनाव भी अहम है। हमने उन पर चर्चा की। हमने 2028 में कांग्रेस को फिर से सत्ता में लाने पर भी चर्चा की। हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है और भविष्य में भी कोई मतभेद नहीं होंगे।’
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विपक्षी पार्टियों भाजपा और जेडीएस पर निशाना साधा और दोनों पार्टियों पर फर्जी अफवाह फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा ‘भाजपा और जेडीएस को झूठे आरोप लगाने की आदत है। इन दलों ने बयान दिया है कि वे अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे। उनके पास सिर्फ 60 विधायक हैं, और जेडीएस के पास 18 हैं। वे हमारी संख्या का मुकाबला नहीं कर सकते। हमारे पास 140 विधायक हैं। यह एक बेकार की कोशिश है। हम उनके झूठे आरोपों का सामना करेंगे।’
क्या बोले डीके शिवकुमार?
कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने इस प्रेस वार्ता में कहा, ‘राज्य के लोग अपना पूरा समर्थन दे रहे हैं। हम अपने वादे के मुताबिक काम कर रहे हैं। हमें लोगों की इच्छाएं पूरी करनी हैं। हम उस दिशा में काम कर रहे हैं। हाईकमान जो भी कहेगा, हम उसे मानेंगे। पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है। अभी भी हम मिलकर काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने जो भी कहा, मैं उनके साथ हूं। हम मिलकर काम कर रहे हैं।’
उन्होंने आगे कहा, ‘जहां तक नेतृत्व की बात है, हम अपनी पार्टी हाईकमान को मानते हैं। वे जो भी कहते हैं, वो ही हमारा फैसला है। हम पार्टी के वफादार सिपाही रहे हैं। हम जानते हैं कि हमारे देश में पार्टी मुश्किल दौर से गुजर रही है। लेकिन हमें भरोसा है कि कर्नाटक एक बड़ी भूमिका निभाएगा, हम 2028 में सरकार दोहराएंगे और मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के नेतृत्व में 2029 में भी आगे बढ़ेंगे।’
क्यों शुरू हुई नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा?
2023 के विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद ही सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सीएम पद को लेकर रस्साकसी शुरू हो गई थी। दोनों सीएम पद पर अपनी दावेदारी जता रहे थे। बात इतनी बढ़ी कि दोनों नेताओं को पार्टी आलाकमान ने दिल्ली बुलाया। दिल्ली में समझौते के बाद तय हुआ कि सिद्धारमैया कर्नाटक सरकार की कमान संभालेंगे और शिवकुमार डिप्टी सीएम का पद संभालेंगे। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई साल के लिए सीएम पद संभालने का समझौता हुआ। हालांकि दोनों ही नेताओं और पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इस रोटेशन फार्मूले की बात को कभी स्वीकार नहीं किया। हालांकि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार दो खेमों में बंटी नजर आई। कई विधायकों और मंत्रियों ने सिद्धारमैया का समर्थन किया तो कई ने शिवकुमार के समर्थन में आवाज बुलंद की। अब जब नवंबर में सिद्धारमैया सीएम पद पर ढाई साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं तो एक बार फिर से नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा ने जोर पकड़ लिया।
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