राजनीति
मुस्लिम वोट बैंक पर टकराव: असम और केरल में सियासी समीकरण बदल रहे हैं
8 Apr, 2026 10:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। असम (Assam), केरल (Kerala) और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव (Puducherry Assembly Elections) के लिए प्रचार थम चुका है और 9 अप्रैल को मतदान (Voting) होना है। इन चुनावों में जहां असम में बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) के बीच सीधा मुकाबला है, वहीं केरल में वाम मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के बीच टक्कर है। दोनों राज्यों में मुस्लिम मतदाता (Muslim Voters) निर्णायक भूमिका में हैं, जिसके चलते मुस्लिम राजनीति से जुड़े दलों की भी असली परीक्षा मानी जा रही है। देश में मुस्लिम आबादी भले 14-15 प्रतिशत के आसपास हो, लेकिन केरल में यह करीब 27 प्रतिशत और असम में 34-35 प्रतिशत तक है। यही वजह है कि इन राज्यों में मुस्लिम वोट बैंक चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
असम में बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) और केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की सियासी पकड़ इस चुनाव में कसौटी पर है। केरल में मुस्लिम लीग कांग्रेस के साथ गठबंधन में है, जबकि असम में AIUDF और कांग्रेस अलग-अलग मैदान में हैं।
असम में अजमल की चुनौती
असम की 126 विधानसभा सीटों पर 722 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन बदरुद्दीन अजमल की पार्टी केवल 27 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी मुख्य रूप से निचले असम के उन इलाकों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जहां मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में हैं और कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
2021 के चुनाव में कांग्रेस और AIUDF साथ थे, लेकिन इस बार दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में अजमल को बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस से भी सीधी टक्कर मिल रही है। धुबरी, बारपेटा और गोलपाड़ा जैसे इलाकों में मुकाबला खास तौर पर दिलचस्प है। पिछली बार AIUDF ने 16 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार परिस्थितियां बदली हुई हैं।अजमल ने 2005 में AIUDF की स्थापना की थी और मुस्लिम अल्पसंख्यकों के मुद्दों को लेकर अपनी राजनीति मजबूत की। 2006 में 10 सीटों से शुरू हुई पार्टी 2021 तक 16 सीटों तक पहुंची, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में अजमल की हार ने पार्टी को झटका दिया। अब 2026 का चुनाव उनके लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
मुस्लिम वोट किसके साथ?
असम में परिसीमन के बाद मुस्लिम प्रभाव वाली सीटों की संख्या घटकर 32 से 22 रह गई है। ऐसे में मुस्लिम वोटों के बंटवारे का सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ेगा। कांग्रेस और AIUDF दोनों की नजर इस वोट बैंक पर टिकी है। 2024 लोकसभा चुनाव के संकेत बताते हैं कि मुस्लिम मतदाता का रुझान बदल रहा है, जिससे मुकाबला और रोचक हो गया है।
केरल में मुस्लिम लीग की स्थिति
केरल में मुस्लिम राजनीति मुख्य रूप से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के इर्द-गिर्द घूमती है। यह पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन का अहम हिस्सा है और 140 में से 26 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
मलप्पुरम, कोझिकोड और कासरगोड जैसे जिलों में मुस्लिम मतदाता चुनावी समीकरण तय करते हैं। IUML का इन क्षेत्रों में मजबूत जनाधार रहा है और मलप्पुरम को उसका गढ़ माना जाता है।
केरल विधानसभा में 32 मुस्लिम विधायक हैं, जिनमें सबसे ज्यादा IUML के हैं। राज्य की 43 सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। पिछले कई दशकों से IUML ने मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी पकड़ बनाए रखी है, खासकर कांग्रेस के साथ गठबंधन के कारण वोटों का बिखराव नहीं होता।
इस बार केरल में यूडीएफ और एलडीएफ के बीच मुकाबले में यूडीएफ का पलड़ा थोड़ा भारी माना जा रहा है, जिससे मुस्लिम लीग को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, असम और केरल दोनों ही राज्यों में मुस्लिम वोट बैंक चुनावी नतीजों की दिशा तय कर सकता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि असम में बदरुद्दीन अजमल अपनी पकड़ बरकरार रख पाते हैं या नहीं, और केरल में मुस्लिम लीग अपना वर्चस्व कायम रखती है या नहीं।
बिहार मॉडल पर रणनीति, अमित शाह की बंगाल योजना: अगले 15 दिन में होने वाले अहम कदम
8 Apr, 2026 09:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल (west bengal) की सत्ता पर काबिज होने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के रणनीतिकार अमित शाह (Amit Shah) ने पिछले सप्ताह भवानीपुर में एक बड़ी चुनावी रैली के दौरान घोषणा की कि वे आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान लगातार 15 दिनों तक बंगाल में ही प्रवास करेंगे। वहीं, शुभेंदु अधिकारी की नामांकन रैली के दौरान शाह ने हुंकार भरते हुए कहा कि भाजपा इस बार 294 सीटों वाली विधानसभा में 175 से अधिक सीटें जीतकर एक ऐतिहासिक बदलाव लाएगी।
अमित शाह का यह ऐलान भवानीपुर की धरती से आया, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अपना निर्वाचन क्षेत्र है। भाजपा ने यहां ममता बनर्जी के कट्टर प्रतिद्वंद्वी शुभेंदु अधिकारी को मैदान में उतारा है। शाह ने इस मुकाबले को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, “अगर भवानीपुर की जनता भाजपा को यहां जीत दिलाती है, तो बंगाल में सत्ता परिवर्तन अपने आप हो जाएगा। यह ममता दीदी की विदाई का सबसे छोटा रास्ता (शॉर्टकट) होगा।”
गौरतलब है कि शुभेंदु अधिकारी ने पिछले चुनाव में नंदीग्राम से ममता बनर्जी को पराजित किया था। इस बार भाजपा ने उन्हें नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों ही हाई-प्रोफाइल सीटों से मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
कैसा होगा अमित शाह का 15 दिनों का कैंप प्लान?
सूत्रों के अनुसार, अमित शाह का यह 15 दिवसीय प्रवास केवल रैलियों तक सीमित नहीं रहेगा। वे माइक्रो-मैनेजमेंट के तहत राज्य के अलग-अलग हिस्सों में रातें बिताएंगे और वॉर रूम से चुनावी कमान संभालेंगे। अमित शाह सिलीगुड़ी और बालुरघाट जैसे क्षेत्रों में रुकेंगे, जहां 2019 के बाद से भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा है। वे हुगली, खड़गपुर और दुर्गापुर जैसे इलाकों में भी डेरा डालेंगे। यहां मुख्य ध्यान उन 40 सीटों पर होगा जहां 2021 के चुनाव में भाजपा 5% से भी कम अंतर से हार गई थी।
देर रात तक बैठकें
शाह की रणनीति का मुख्य हिस्सा रात 2 बजे तक चलने वाली संगठनात्मक बैठकें होंगी। इनमें वे बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेंगे, नाराज नेताओं को मनाएंगे और टिकट वितरण से उपजे असंतोष को दूर करेंगे।
MP, महाराष्ट्र और बिहार का फॉर्मूला
अमित शाह की यह कार्यशैली नई नहीं है। इससे पहले उन्होंने मध्य प्रदेश (2023), महाराष्ट्र (2024) और बिहार (2025) के विधानसभा चुनावों में भी इसी तरह का गहन प्रवास किया था। बिहार में भाजपा के ऐतिहासिक प्रदर्शन और पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने की सफलता के पीछे शाह की क्लस्टर रणनीति को ही श्रेय दिया जाता है। बंगाल में भी वे राज्य को विभिन्न सांगठनिक क्लस्टरों में बांटकर खुद निगरानी करेंगे।
2021 के चुनावों में भाजपा ने 3 से सीधे 77 सीटों पर छलांग लगाई थी और उसका वोट शेयर करीब 38% तक पहुंच गया था। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने वापसी की और भाजपा की सीटों की संख्या 18 से घटकर 12 रह गई। अब अमित शाह का पूरा जोर उन सीटों पर है जिन्हें भाजपा जीतते-जीतते हार गई थी। जलपाईगुड़ी, राजगंज और मेखलीगंज जैसे क्षेत्रों में शाह खुद रणनीति बनाएंगे ताकि पिछली गलतियों को न दोहराया जाए।
खरगे का बड़ा बयान: BJP और TMC के विवादों के बीच कांग्रेस है तीसरा विकल्प
8 Apr, 2026 08:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal) में आगामी विधानसभा चुनाव (assembly elections) को लेकर राजनीतिक माहौल तेज हो गया है। इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष (Congress President) मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) ने प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा हमला करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ‘नफरत और समाज में बंटवारे की राजनीति’ करते हैं और पश्चिम बंगाल में भी इसी आधार पर सत्ता हासिल करना चाहते हैं।
कांग्रेस ने जारी किया चुनावी घोषणापत्र
मंगलवार को कांग्रेस का चुनावी घोषणापत्र जारी करते हुए खरगे ने कहा कि बंगाल के लोगों के सामने अब तीन विकल्प हैं। पहला, ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी सरकार, जिस पर उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। दूसरा, भाजपा, जिस पर उन्होंने नफरत और ध्रुवीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। और तीसरा, कांग्रेस, जो विकास, रोजगार और सुधार की बात कर रही है।
टीएमसी पर खरगे ने साधा निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि राज्य में पिछले 15 साल से टीएमसी की सरकार होने के बावजूद विकास के क्षेत्र में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा है। वहीं केंद्र की भाजपा सरकार पर भी उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि वह सिर्फ बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन बंगाल की अर्थव्यवस्था, उद्योग और युवाओं के रोजगार को लेकर कोई ठोस योजना नहीं देती। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति ‘डर, नफरत और अलगाव’ पर आधारित है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकारी एजेंसियों जैसे ईडी, आयकर विभाग और अन्य संस्थाओं का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को डराने और अपनी पार्टी में शामिल करने के लिए करती है। उन्होंने इसे डराने-धमकाने की राजनीति बताया।
कांग्रेस के घोषणापत्र में क्या-क्या?
घोषणापत्र में कांग्रेस ने कई बड़े वादे किए हैं। पार्टी ने महिलाओं को हर महीने 2000 रुपये देने, किसानों को सालाना 15,000 रुपये की सहायता, हर परिवार को 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने का वादा किया है। इसके अलावा हर जिले में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) ट्रेनिंग सेंटर खोलने की भी बात कही गई है।
अपने दम पर मैदान में कांग्रेस- जयराम रमेश
वहीं कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी लगभग दो दशक बाद बंगाल में अकेले चुनाव लड़ रही है और यह पार्टी के लिए नई ऊर्जा जैसा है। उन्होंने इसे फिल्म बीस साल बाद से जोड़ते हुए कहा कि कांग्रेस अब अपने दम पर मैदान में उतरकर नई शुरुआत कर रही है। रमेश ने भाजपा पर सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर भी हमला बोला और आरोप लगाया कि वह रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसे महान व्यक्तित्व का अपमान करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का तीसरा विकल्प बंगाल को नफरत की राजनीति और मौजूदा सरकार की कमियों दोनों से बाहर निकाल सकता है।
UP में बड़ा दांव! Chirag Paswan की एंट्री, सभी सीटों पर उतरने की तैयारी
7 Apr, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। बिहार की राजनीति के बाद अब लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मुखिया और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने उत्तर प्रदेश की सियासी जमीन पर अपनी दावेदारी मजबूत कर दी है। पार्टी ने आगामी 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में राज्य की सभी 403 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। इस फैसले ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है, क्योंकि चिराग की नजर अब यूपी के दलित और युवा वोट बैंक पर टिक गई है। लोकसभा चुनाव में 100 प्रतिशत स्ट्राइक रेट के साथ बिहार में अपनी ताकत साबित करने वाले चिराग पासवान अब पार्टी के राष्ट्रीय विस्तार की योजना पर काम कर रहे हैं।
पार्टी के पूर्वी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष राजीव पासवान ने स्पष्ट किया कि केंद्र में भले ही उनका गठबंधन भाजपा के साथ है, लेकिन उत्तर प्रदेश में फिलहाल किसी दल से गठबंधन नहीं है। पार्टी यहाँ यूपी फर्स्ट और यूपी वाले फर्स्ट के संकल्प के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। चिराग का मानना है कि उनके पिता स्वर्गीय रामविलास पासवान का उत्तर प्रदेश में एक समय बड़ा आधार रहा है, जिसे फिर से संगठित कर पार्टी को एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित किया जा सकता है। हालांकि चिराग भाजपा के भरोसेमंद सहयोगी हैं, लेकिन सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने का बयान एक रणनीतिक संकेत माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि भाजपा के साथ सीटों पर सम्मानजनक समझौता नहीं हुआ, तो पार्टी अकेले ही ताकत दिखाएगी। फिलहाल, संगठन ने जिला स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं और आने वाले महीनों में राज्य के प्रमुख शहरों में बड़ी रैलियों के जरिए शक्ति प्रदर्शन करने की योजना बनाई गई है।
बदलेंगे दलित राजनीति के समीकरण
उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के गिरते ग्राफ और चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी के उभार के बीच चिराग की एंट्री बेहद अहम मानी जा रही है। चिराग का लक्ष्य उन क्षेत्रों पर है जहाँ पासवान और अन्य दलित उपजातियों की संख्या प्रभावी है। उनका युवा चेहरा और ओजस्वी भाषण शैली युवाओं को आकर्षित करने की क्षमता रखती है, जो मायावती के पारंपरिक वोट बैंक और चंद्रशेखर की सक्रियता के लिए चुनौती बन सकती है।
‘अपमान का बदला ले जनता’: SIR विवाद पर Mamata Banerjee का बड़ा बयान
7 Apr, 2026 09:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दीदी के बयान से चुनावी पारा चढ़ा
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया में चुनाव आयोग द्वारा जो गड़बड़ियां की जा रही हैं। उससे पश्चिम बंगाल में भारी नाराजी देखने को मिल रहीहै। चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उसके बाद भी एसआईआर की कार्रवाई पूरी नहीं हुई है। मतदाता सूची अभी भी तैयार हो रही है। लाखों वोटर के नाम मतदाता सूची में नहीं जोड़े गए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रत्येक जनसभा में जनता से आह्वान कर रही हैं। एसआईआर के माध्यम से जो अपमान चुनाव आयोग द्वारा मतदाताओं का किया जा रहा है। ममता दीदी ने कहा इसका बदला लिया जाना चाहिए। वोट के जरिए मतदाता अपने अपमान का बदला ले।
ममता दीदी लगातार चुनावी रैली को संबोधित कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और कांग्रेस के साथ भारतीय जनता पार्टी का गुप्त समझौता है।
संविधान के चित्रकार के पोते और पत्नी का नाम कटा
पश्चिम बंगाल में फिर में संविधान की चित्रकार नंदलाल बोस के पोते सुप्रभद्र सेन जिनकी उम्र 88 वर्ष है तथा उनकी पत्नी का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है उनका नाम अभी भी पेंडिंग सूची में डाल कर रखा गया है जिसके कारण वह अपने मतदान के अधिकार से वंचित हो जाएंगे सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश में उन्हें टर्मिनल में जाने का सुझाव दिया गया है इसी तरह से कांग्रेस की उम्मीदवार अरशद अली का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है।
ममता बनर्जी और टीएमसी का कहना है चुनाव को प्रभावित करने के लिए चुन चुन कर टीएमसी के वोटो का नाम मतदाता सूची से गायब किया गया है सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोई अंतिम तारीख तय नहीं की गई है इस बीच में चुनाव चल रहे हैं जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में नहीं जुड़ेंगे वह मतदान नहीं कर पाएंगे चुनाव के बाद यदि उनके नाम जुड़ भी गए तो इसका सीधा नुकसान टीएमसी को होने जा रहा है जिसके कारण पश्चिम बंगाल का चुनावी पारा बहुत बढ़ा हुआ है लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर हो जाने के कारण जगह पर भारी विरोध होने की संभावना जताई जा रही है जिसके कारण कानून व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित होगी
विपक्षी दलों के 196 सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव प्रस्तुत किया था इसे संसद के दोनों सदनों ने खारिज कर दिया है जिसके कारण सियासी पारा दिन प्रतिदिन चढ़ता जा रहा है।
पश्चिम बंगाल में सियासी घमासान तेज, Indian National Congress ने झोंकी स्टार प्रचारकों की फौज
7 Apr, 2026 07:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है। कांग्रेस पार्टी ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकते हुए 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसे शीर्ष नाम शामिल हैं। इनके अलावा हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, अशोक गहलोत, शशि थरूर, के.सी. वेणुगोपाल और कन्हैया कुमार जैसे दिग्गज नेता भी बंगाल के चुनावी मैदान में पार्टी के लिए वोट मांगेंगे। राज्य इकाई से अधीर रंजन चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार कमान संभालेंगे। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह इस बार अपने दम पर चुनाव लड़ रही है और उसका लक्ष्य पहले चरण की सभी सीटों पर प्रभावी मौजूदगी दर्ज कराना है। राज्य में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है।
चुनावी गहमागहमी के बीच प्रशासनिक सख्ती भी देखने को मिल रही है। उत्तर 24 परगना जिले के नैहाटी थाना प्रभारी को चुनाव आयोग ने तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। उन पर नामांकन प्रक्रिया के दौरान एक सत्तारूढ़ दल के नेता की मदद करने और पक्षपातपूर्ण भूमिका निभाने का गंभीर आरोप है। भाजपा नेता अर्जुन सिंह द्वारा साझा किए गए एक वीडियो के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। आयोग ने साफ कर दिया है कि निष्पक्ष चुनाव में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इससे पहले भी कानून-व्यवस्था में ढिलाई बरतने पर कोलकाता पुलिस के चार अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है।
दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने मालदा जिले में मतदाता सूची संशोधन (सर) के दौरान न्यायिक अधिकारियों की घेराबंदी के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने इस घटना को पूर्व-नियोजित करार देते हुए इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी है। अदालत ने राज्य प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर गहरी नाराजगी जताई और मुख्य सचिव को कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का फोन न उठाने पर फटकार लगाते हुए माफी मांगने का निर्देश दिया है। इस बीच, तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है। सिलीगुड़ी की एक रैली में अभिषेक बनर्जी ने भाजपा विधायक शंकर घोष के चोटिल होने के दावे पर तंज कसते हुए इसे राजनीतिक नौटंकी करार दिया। उन्होंने वायरल तस्वीरों का हवाला देते हुए भाजपा की ईमानदारी पर सवाल उठाए। कुल मिलाकर, बंगाल का चुनावी माहौल हर बीतते दिन के साथ और अधिक गरमाता जा रहा है।
नवजोत कौर सिद्धू का सियासी कदम: कांग्रेस छोड़, नई पार्टी का ऐलान
7 Apr, 2026 05:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़. पूर्व क्रिकेटर (Former cricketer) और कांग्रेसी नेता नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) की पूर्व विधायक पत्नी नवजोत कौर (Navjot Kaur) ने अपने नए सियासी संगठन ‘ भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी’ (Bharatiya Rashtravadi Party) का एलान कर दिया है। कांग्रेस से निकाले जाने के बाद नवजोत कौर सिद्धू की यह नई सियासी पारी है। हालांकि उनके पति नवजोत सिंह सिद्धू अभी औपचारिक रूप से कांग्रेस में ही हैं। नवजोत कौर सिद्धू अमृतसर ईस्ट से विधायक रहीं ।
उस वक्त कांग्रेस नेतृत्व के निशाने पर आईं थी जब उन्होंने कांग्रेस पार्टी में मुख्यमंत्री पद के दावेदार के लिए 500 करोड़ रुपए दिए जाने का दावा किया था। उनके इस बयान के बाद असहज हुए कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें पहले पार्टी से निलंबित किया और फिर निष्कासित कर दिया था।
उसके बाद नवजोत कौर ने भारतीय जनता पार्टी से नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश की मगर भाजपा ने भी उन्हें कोई तरजीह नहीं दी। उनके पति नवजोत सिद्धू ने भी राहुल गांधी से मिलने के लिए कई बार समय मांगा मगर उन्हें भी समय नहीं मिल पाया। अंततः अब नवजोत कौर सिद्धू ने अपनी अलग पार्टी बनाने का फैसला कर लिया है। सोमवार देर रात्रि उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर अपनी नई सियासी पार्टी की घोषणा की।
नए दल की घोषणा करते हुए नवजोत कौर ने कहा कि उन्होंने मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व के कामकाज का गहराई से मूल्यांकन करने के बाद एक राष्ट्रीय स्तर पर नया विकल्प तैयार करने की दिशा में काम किया गया है। उनका उद्देश्य देश और लोगों की सेवा करना है व जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना है। उन्होंने अपने संदेश में आध्यात्मिक सोच और ‘सत्य व प्रेम’ के मार्ग पर चलने की बात कही। साथ ही यह भी कहा कि समान विचारधारा वाले लोगों के साथ मिलकर हर राज्य में न्याय, शांति और सेवा के लक्ष्य के साथ काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी राज्य को उसकी ‘पुरानी पहचान’ दिलाने के लिए काम करेगी, जहां प्रेम, साझा संस्कृति, न्याय और स्वतंत्रता की भावना हो। उन्होंने जनता की, जनता के लिए और जनता द्वारा सरकार देने की बात भी दोहराई।
सुनेत्रा पवार का बयान: अजित पवार के विकास एजेंडे को आगे ले जाएंगे, बारामती में मुकाबला तेज
7 Apr, 2026 04:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे। महाराष्ट्र (Maharashtra) के पुणे जिले की बारामती विधानसभा सीट (Baramati assembly seat) पर होने वाले उपचुनाव (By-election) को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस बीच राज्य की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार (Deputy Chief Minister Sunetra Pawar) ने सोमवार को नामांकन दाखिल करते हुए साफ किया कि वह अपने दिवंगत पति अजित पवार द्वारा किए गए विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
नामांकन के दौरान एनसीपी के कई वरिष्ठ नेता उनके साथ मौजूद रहे, जिनमें सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, धनंजय मुंडे और हसन मुश्रीफ शामिल थे। इसके अलावा शिवसेना के नेता और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले भी उनके समर्थन में नजर आए। ये सभी महायुति गठबंधन का हिस्सा हैं, जो वर्तमान में राज्य की सत्ता में है।
जनता से भावुक अपील
नामांकन के बाद सुनेत्रा पवार ने बारामती की जनता से भावुक अपील करते हुए कहा कि जिस तरह उन्होंने वर्षों तक अजित पवार का साथ दिया, उसी तरह उन्हें भी समर्थन दें। उन्होंने कहा कि अजित पवार का जाना सिर्फ उनके परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि क्षेत्र का विकास प्रभावित नहीं होगा, किसानों को पानी मिलता रहेगा और महिलाओं की सुरक्षा सहित शहर के विकास कार्य जारी रहेंगे।
परिवार और विरासत का जिक्र, कांग्रेस भी मैदान में
सुनेत्रा पवार ने अपने ससुर और वरिष्ठ नेता शरद पवार का उल्लेख करते हुए कहा कि वह एक मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि से आती हैं और बारामती की जिम्मेदारी संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस सीट से आकाश मोरे को उम्मीदवार बनाया है। सत्ताधारी गठबंधन चाहता था कि चुनाव निर्विरोध हो, लेकिन कांग्रेस ने चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है और इसे अपना अधिकार बताया है।
बयानबाजी से बढ़ा सियासी तापमान
चुनाव को लेकर दोनों पक्षों में तीखी बयानबाजी भी देखने को मिल रही है। एनसीपी नेता पार्थ पवार ने कहा कि कांग्रेस को इस फैसले का परिणाम भुगतना पड़ेगा। इस पर शरद पवार ने नाराजगी जताते हुए कहा कि राजनीति में ऐसे बयान देने के लिए परिपक्वता जरूरी है और कांग्रेस को चुनाव लड़ने का पूरा अधिकार है। कांग्रेस ने भी पलटवार करते हुए पार्थ पवार पर निशाना साधा और उन्हें ‘अकृतज्ञ बेटा’ तक कह दिया।
हादसे के बाद बना उपचुनाव का कारण
दरअसल, 28 जनवरी को एक विमान हादसे में अजित पवार का निधन हो गया था, जिसके चलते यह उपचुनाव कराया जा रहा है। इसके बाद 31 जनवरी को सुनेत्रा पवार को राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनाया गया। अब वह इसी सीट से चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।
कोलकाता पर हमले की धमकी पर भारत का पलटवार, Rajnath Singh बोले—‘परिणाम भुगतने होंगे’
7 Apr, 2026 03:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत और पाकिस्तान के बीच बयानबाजी का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। हाल के दिनों में दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच तीखी टिप्पणियों ने माहौल को और गर्म कर दिया है। इसी क्रम में भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान की धमकी पर कड़ा जवाब देते हुए 1971 युद्ध की याद दिलाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की चुनौती को हल्के में नहीं लेगा और जरूरत पड़ने पर निर्णायक कार्रवाई करेगा।
ख्वाजा आसिफ ने कोलकाता पर हमले की दी थी धमकी
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में बयान दिया था कि अगर भारत कोई फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन करता है तो पाकिस्तान कोलकाता तक जवाब देगा। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राजनाथ सिंह ने सार्वजनिक मंच से कहा कि पाकिस्तान को ऐसे उकसावे वाले बयान देने से बचना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर भारत के खिलाफ कोई भी गलत कदम उठाया गया तो उसके गंभीर परिणाम होंगे। उनका यह बयान पश्चिम बंगाल में चुनावी रैली के दौरान आया, जहां उन्होंने सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की बात कही।
1971 भारत पाकिस्तान युद्ध की दिलाई याद
राजनाथ सिंह ने अपने बयान में 1971 भारत पाकिस्तान युद्ध का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को इतिहास याद दिलाया। उन्होंने कहा कि 55 साल पहले पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा था, जब उसका विभाजन हुआ और बांग्लादेश का गठन हुआ। सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान ने फिर से बंगाल की ओर नजर उठाई, तो इस बार परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं। यह बयान स्पष्ट संकेत देता है कि भारत किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए तैयार है और उसकी नीति अब अधिक आक्रामक और निर्णायक हो गई है।
राज्यसभा सीट और पार्टी बदलाव: राघव चड्ढा को लेकर बढ़ी सियासी अटकलें
7 Apr, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। राघव चड्ढा (Raghav Chaddha) और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच बढ़ती खींचतान के बीच उनकी राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया है और आरोप लगाया है कि वह संसद में नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार के खिलाफ मुखर नहीं हो रहे। साथ ही पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से यह भी कहा है कि उन्हें पार्टी कोटे से बोलने का समय न दिया जाए। इसी बीच उनके भारतीय जनता पार्टी में जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मोदी विरोधी पोस्ट हटाने का दावा
दिल्ली AAP प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि राघव चड्ढा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी की आलोचना वाले पुराने पोस्ट हटा दिए हैं। इसके बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर सवाल और गहरे हो गए।
क्या बीजेपी में शामिल होंगे?
इस पूरे विवाद के बाद दो बड़े सवाल उठ रहे हैं—क्या राघव चड्ढा बीजेपी में जाएंगे और यदि ऐसा होता है तो उनकी राज्यसभा सदस्यता पर क्या असर पड़ेगा? फिलहाल दोनों सवालों पर कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अपना राजनीतिक भविष्य तय करना राघव चड्ढा के हाथ में है। इसे बीजेपी की ओर से “दरवाजे खुले” रखने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि पार्टी ने औपचारिक तौर पर कोई प्रस्ताव नहीं दिया है।
क्या सुरक्षित है राज्यसभा सीट?
राघव चड्ढा का राज्यसभा कार्यकाल 2028 तक है। ऐसे में पार्टी उन्हें सीधे तौर पर सांसद पद से नहीं हटा सकती। पार्टी केवल संगठनात्मक पदों से हटाने का अधिकार रखती है, जो किया जा चुका है।
कब जा सकती है सदस्यता?
संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत किसी सांसद की सदस्यता दो स्थितियों में जा सकती है— यदि वह स्वेच्छा से पार्टी छोड़ दे।
यदि वह सदन में पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करे।अदालतों ने यह भी माना है कि केवल औपचारिक इस्तीफा जरूरी नहीं होता, बल्कि किसी दूसरी पार्टी के समर्थन में सार्वजनिक गतिविधियां भी “स्वेच्छा से पार्टी छोड़ने” का संकेत मानी जा सकती हैं।
पहले भी हो चुका है ऐसा मामला
2017 में शरद यादव और अली अनवर को राज्यसभा से अयोग्य घोषित किया गया था। जनता दल (यूनाइटेड) ने उनके विपक्षी कार्यक्रमों में शामिल होने को दल-बदल का आधार बनाया था।
अंतिम फैसला किसके पास?
किसी सांसद की सदस्यता खत्म करने का अधिकार राज्यसभा के सभापति के पास होता है, जो देश के उपराष्ट्रपति होते हैं। वर्तमान में यह पद सी.पी. राधाकृष्णन के पास है।
सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा
सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में कहा था कि दल-बदल से जुड़े मामलों का निपटारा आदर्श रूप से तीन महीने में होना चाहिए, हालांकि इसके लिए कोई कानूनी समयसीमा तय नहीं है। कुल मिलाकर, राघव चड्ढा की राज्यसभा सदस्यता फिलहाल सुरक्षित मानी जा रही है। लेकिन यदि वह पार्टी छोड़ते हैं या विरोधी दल के साथ सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो दल-बदल कानून के तहत उनकी सीट पर खतरा बन सकता है।
चुनावी सभा में तृणमूल नेता की धमकी, विपक्ष ने किया विरोध और कड़ा ऐतराज
7 Apr, 2026 11:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता:पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक युवा नेता ने विवादास्पद बयान दिया। दक्षिण 24 परगना जिला के मोगराहाट में इमरान हसन मोल्ला ने चुनावी सभा में लोगों को खुलेआम धमकी दी। उन्होंने कहा कि अगर तृणमूल कांग्रेस को वोट नहीं दिया गया, तो इलाके में रहने नहीं दिया जाएगा। यह घटना सोमवार को हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इससे पहले भी बहरामपुर क्षेत्र में टीएमसी नेताओं के इसी तरह के बयान सामने आए थे, जिससे चुनावी माहौल में तनाव बढ़ गया है। इमरान हसन मोल्ला ने चेतावनी देते हुए कहा कि तृणमूल को वोट न देने पर पीठ फूलकर तकिया हो जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि तृणमूल के अलावा किसी अन्य पार्टी को वोट पडऩे पर इलाके में रहने की इजाजत नहीं दी जाएगी। तृणमूल नेता ने 2021 के चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि उस समय बेईमानी करने वालों को माफ कर दिया गया था, लेकिन 2026 में कोई माफी नहीं मिलेगी। विपक्षी दलों ने इसकी तीखी निंदा की है। भाजपा नेता सजल घोष ने कहा कि ऐसे नेता टीएमसी की संपत्ति हैं और चुनाव के बाद इन्हें ऐसा सबक सिखाया जाएगा कि वे सीधे खड़े भी न हो सकें। उन्होंने चेतावनी दी कि चुनाव के बाद ये नेता खुद इलाका छोडक़र भागेंगे।
राजनीति की गुप्त चाल: प्रियंका गांधी ने एलडीएफ-भाजपा सीक्रेट डील को लेकर जताई चिंता
7 Apr, 2026 10:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कन्नूर (केरल): कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को आरोप लगाया कि माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नीत वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने केरल में नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा के साथ गुप्त समझौता किया है। उन्होंने राज्य और केंद्र, दोनों पर असहमति की आवाज को दबाने और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का भी आरोप लगाया। वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा केरल के उत्तरी कन्नूर जिले के पेरावूर में विधानसभा चुनाव प्रचार के तहत एक नुक्कड़ सभा को संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने दावा किया कि एलडीएफ ने भाजपा के साथ समझौता किया है, जो अल्पसंख्यकों, खासकर ईसाई समुदाय और उनकी नन को परेशान करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि और अब, जब चुनाव में कुछ ही दिन बचे हैं, तो यह काफी स्पष्ट है कि एलडीएफ और भाजपा के बीच एक गुप्त समझौता हुआ है। प्रियंका ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शबरिमला में हुई बड़ी चोरी के बावजूद उस पर एक भी शब्द नहीं कहा है। उन्होंने कहा कि जब कभी प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई बोलता है, तो उसके खिलाफ सीबीआई, ईडी या आयकर विभाग के मामले दर्ज हो जाते हैं, लेकिन केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के खिलाफ ऐसा एक भी मामला नहीं है।
कोलकाता धमकी पर सियासी तूफान: ममता बनर्जी भड़कीं, पीएम मोदी से मांगा इस्तीफा
7 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता:टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को सवाल किया कि पाकिस्तान द्वारा कोलकाता पर हमले की धमकी दिए जाने का मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक दिन पहले इस राज्य में अपनी चुनावी रैलियों के दौरान क्यों नहीं उठाया। मुख्यमंत्री बनर्जी ने नदिया जिला में एक चुनावी रैली में प्रधानमंत्री पर भडक़ते हुए कहा कि आप (पीएम) चुनावी रैलियों में बंगाल को निशाना बनाते हैं, लेकिन जब पाकिस्तान बंगाल पर हमले की बात करता है, तो आप एक शब्द भी नहीं कहते। आपको इस्तीफा दे देना चाहिए।
उन्होंने पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में मोदी द्वारा एक चुनावी रैली को संबोधित किए जाने के एक दिन बाद कहा, प्रधानमंत्री ने बंगाल में अपनी रैली के दौरान इस मुद्दे को क्यों नहीं उठाया? बता दें पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने शनिवार को भारत को चेतावनी दी थी कि वह भविष्य में किसी भी प्रकार के दुस्साहस की कोशिश का जवाब कोलकाता पर हमले के रूप में देंगे। उन्होंने कहा कि हम इस धमकी को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
मां, माटी और मानुष को वोट की अपील
ममता बनर्जी ने ए क अन्य जनसभा में बंगाली जनमानस से ईवीएम को बचाने के लिए हर संभव सावधानी बरतने का आग्रह किया और आरोप लगाया कि भाजपा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दिन किसी भी हद तक जा सकती है और सबसे गंदी चाल चल सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे खुद को और बंगाल को बचाने के लिए तृणमूल कांग्रेस को वोट दें। खुद को और अपने परिवार को बचाने के लिए मां, माटी, मानुष को वोट दें। हमारे राज्य को बचाने के लिए वोट दें, क्योंकि अगर भाजपा सत्ता में आई, तो वे हमारी संस्कृति और परंपरा को नष्ट कर देंगे।
तमिलनाडु के चुनावी दंगल में चार हजार से ज्यादा प्रत्याशी
चेन्नई। तमिलनाडु में चुनावी सरगर्मी तेज होने के साथ ही 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया सोमवार को समाप्त हो गयी। अब तक 4,000 से अधिक उम्मीदवार अपने पर्चे दाखिल कर चुके हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, अंतिम दिन 1,000 से अधिक उम्मीदवारों ने अपने कागजात दाखिल किए, जिससे कुल संख्या 4,350 तक पहुंच गयी है। अधिकारी सभी सीटों से विवरण जुटा रहे हैं, जिसके बाद अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
नक्सलवाद के बाद अब विकास की बारी: बस्तर पर दिल्ली में हाईलेवल मीटिंग, पीएम मोदी के सामने सीएम साय की बड़ी योजना
7 Apr, 2026 08:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
CG News: छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद के खत्म होने के बाद अब क्षेत्र के विकास को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर अहम पहल होने जा रही है. जिसके लिए CM विष्णुदेव साय सोमवार की देर रात नई दिल्ली पहुंचें. आज वे पीएम मोदी और गृह मंत्री के साथ महत्वपूर्ण बैठकें करेंगे. इस दौरे को बस्तर के विकास के लिए निर्णायक माना जा रहा है.
पीएम मोदी और गृह मंत्री से मुलाकात करेंगें CM साय
CM विष्णु देव साय आज सुबह 11 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे. इसके साथ ही वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी भेंट करेंगे. इन बैठकों में बस्तर के विकास से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है. इस दौरान मुख्यमंत्री साय प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के समक्ष बस्तर के विकास का एक व्यापक ब्लूप्रिंट प्रस्तुत करेंगे. इसमें क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक योजनाओं और प्राथमिकताओं को शामिल किया गया है, जिससे बस्तर को तेजी से विकास की मुख्यधारा में लाया जा सके.
नक्सलवाद के बाद के हालात पर रहेगा फोकस
इस बार की बैठक का मुख्य एजेंडा “पोस्टमाओइस्ट सीनारियो” रहेगा, यानी माओवाद के प्रभाव में कमी आने के बाद बस्तर के समग्र विकास की दिशा तय करना. दरअसल, सुरक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव के बाद अब सरकार का फोकस विकास कार्यों को गति देने पर है.
‘ऐसा शासन दोबारा नहीं झेलना पड़ेगा’, जयराम ठाकुर का कांग्रेस पर बड़ा बयान
6 Apr, 2026 06:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मंडी। भारतीय जनता पार्टी के 47वें स्थापना दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने द्रंग विधानसभा क्षेत्र के त्रयाम्बली बूथ पर आयोजित भव्य समारोह में शिरकत करते हुए पार्टी का ध्वज फहराने के पश्चात कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। जयराम ठाकुर ने प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि इस बार चुनाव में कांग्रेस पार्टी के 'बीज' को ही जड़ से समाप्त कर दिया जाएगा, ताकि भविष्य में हिमाचल की जनता को कभी भी ऐसी जनविरोधी सरकार का शासन न झेलना पड़े।
मंडी संसदीय क्षेत्र में पूरी होगी रही कसर
उन्होंने स्पष्ट किया कि मंडी संसदीय क्षेत्र में तो पिछली बार ही कांग्रेस का आधार लगभग खत्म हो गया था, लेकिन जो थोड़ी-बहुत कसर शेष रह गई है, उसे इस बार धरातल पर एकजुटता से काम करके पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।
संगठन के सिद्धांत और केंद्र की नीतियां सब तक पहुंचाने के संकल्प का दिन
जयराम ठाकुर ने भाजपा के गौरवशाली इतिहास, संघर्ष और समर्पण को याद करते हुए कहा कि आज भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में 'देश प्रथम' की भावना के साथ विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी है, जिसका मूल मंत्र जनसेवा, सुशासन, पारदर्शिता और समग्र विकास है। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि यह स्थापना दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि संगठन के सिद्धांतों और केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के संकल्प का दिन है।
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