राजनीति
शामली और बिजनौर में योगी की हुंकार, 'दंगा नहीं, विकास और गन्ना हमारी पहचान'
17 Jul, 2026 03:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिजनौर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज बिजनौर का दौरा किया. बिजनौर पहुंचते ही मुख्यमंत्री ने वहां के सुहावने मौसम, मां गंगा के सान्निध्य और जिले की बदली हुई सकारात्मक तस्वीर पर खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा कि जो बिजनौर कभी गंदगी और बदहाली के लिए जाना जाता था, आज वह विकास की एक नई और चमकती हुई मिसाल बन चुका है.
अपने संबोधन में सीएम योगी ने कहा कि किसी भी क्षेत्र के विकास का पैमाना लखनऊ में बैठकर तय नहीं होता, बल्कि उसे जनता के द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि (सांसद, विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष) जमीन पर तय करते हैं. जनप्रतिनिधि ही क्षेत्र की जरूरतों के हिसाब से सड़क और पुल जैसी विकास योजनाओं का खाका खींचते हैं और हमारी सरकार उसके लिए बजट जारी करती है. बिजनौर की असली ताकत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस जिले की पहचान यहां के मेहनती किसान, युवा, व्यापारी और स्थानीय कारीगर हैं, जिनकी बदौलत आज बिजनौर को पूरे प्रदेश में एक अलग पहचान मिली है.
बिजनौर और चांदपुर को ₹1000 करोड़ की सौगात
मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा विदुर की यह पावन धरती लगातार तरक्की की नई राह पर आगे बढ़ रही है. इसी कड़ी में आज बिजनौर और चांदपुर विधानसभा क्षेत्रों के लिए करीब 1,000 करोड़ रुपये की बड़ी विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया है.
इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार बिजनौर के विकास को और तेज करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके तहत अब गंगा एक्सप्रेसवे का विस्तार सीधे हरिद्वार तक किया जाएगा. इस एक्सप्रेसवे के हरिद्वार से जुड़ने के बाद बिजनौर के लोगों को बेहतरीन कनेक्टिविटी का सीधा फायदा मिलेगा. इसके अलावा, जिले में बन रहे मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ अब एक अत्याधुनिक नर्सिंग कॉलेज का निर्माण भी तेजी से कराया जा रहा है. इससे क्षेत्र की बेटियों को नर्सिंग की पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों में नहीं भटकना पड़ेगा और उन्हें घर के पास ही उत्कृष्ट शिक्षा व रोजगार के अवसर मिल सकेंगे.
विस्थापित परिवारों को मिला मालिकाना हक
देश के विभाजन की त्रासदी का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बंटवारे का दर्द कई पीढ़ियों और परिवारों ने झेला है. विस्थापित परिवारों की समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार बेहद संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है. अपने पिछले दौरे को याद करते हुए सीएम योगी ने बताया कि उन्हें पड़ापुर क्षेत्र में पाकिस्तान और बांग्लादेश से विस्थापित होकर आए करीब 3,000 जरूरतमंद लोगों को जमीन के पट्टे आवंटित करने का सौभाग्य मिला, जो पिछले काफी लंबे समय से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे थे.
'उन्हें जिन्ना पसंद है, हमें गन्ना पसंद है'
वर्ष 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले यहां अपराध और माफियाओं का राज था. कुछ लोग चाहते थे कि बिजनौर हमेशा गुंडों और अपराधियों के चंगुल में फंसा रहे, ताकि वे समाज को बांटने की अपनी गंदी राजनीति चमका सकें. ऐसे लोगों पर तंज कसते हुए सीएम ने कहा, "दंगा कराने वालों को जिन्ना पसंद है, जबकि हमें गन्ना पसंद है".
आज प्रदेश सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के कारण बिजनौर पूरी तरह सुरक्षित और भयमुक्त हो चुका है. सरकार की प्राथमिकता में हमेशा से अन्नदाता किसान रहे हैं. यही वजह है कि जनप्रतिनिधियों की मांग पर गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है. पहले की सरकारों में किसानों को अपने ही गन्ने के भुगतान के लिए सालों तक तरसना पड़ता था, लेकिन आज हमारी सरकार किसानों के हितों को सर्वोपरि रखकर काम कर रही है.
2017 से पहले की सरकारों पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने पुरानी सरकारों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि साल 2017 से पहले बिजनौर को लेकर यह अंधविश्वास फैलाया जाता था कि कोई मुख्यमंत्री यहां नहीं आता. लेकिन आज की सरकार ने उस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है और बिजनौर अब राज्य में विकास और प्रगति का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर उभरा है.
समाज को बांटने वाली ताकतों से रहें सावधान
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता को आगाह करते हुए कहा कि समाज को जातियों और अलग-अलग वर्गों के नाम पर बांटने की राजनीति करने वाले तत्वों से हमेशा सावधान रहने की जरूरत है. उन्होंने साफ किया कि हमारी सरकार का उद्देश्य समाज में खाई पैदा करना नहीं, बल्कि आपसी भाईचारा, सामाजिक समरसता और एकता को मजबूत करना है. बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग को साथ लेकर विकास की राह पर आगे बढ़ना ही हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है.
इस प्रेरणादायक उद्बोधन के साथ ही मुख्यमंत्री ने अपना भाषण समाप्त किया और इसके बाद वे सीधे मुरादनगर के लिए रवाना हो गए.
सियासी विवाद का केंद्र रहा बंगला अब बनेगा आय का जरिया, सरकार ने तैयार किया प्लान
17 Jul, 2026 12:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। दिल्ली की सियासत में लंबे समय तक तीखी बहस और विवादों की वजह रहा सिविल लाइंस स्थित 6, फ्लैग स्टाफ रोड का वीवीआईपी बंगला अब नए अवतार में दिखने जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक निवास के रूप में चर्चित रही इस करोड़ों की संपत्ति का कायाकल्प करने की तैयारी कर ली गई है। दिल्ली सरकार इस विशाल परिसर को खाली छोड़कर सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ाने के बजाय इसका व्यावसायिक इस्तेमाल कर राजस्व जुटाने की बड़ी योजना पर काम कर रही है।
आलीशान होटल चेन को मिल सकती है बंगले की बागडोर
दिल्ली का लोक निर्माण विभाग (PWD) इस बेशकीमती सरकारी संपत्ति को किसी स्थापित और बड़े लग्जरी हॉस्पिटैलिटी ब्रांड या होटल चेन को लीज पर सौंपने की तैयारी कर रहा है। विभाग का मानना है कि इस भव्य परिसर की सुरक्षा और सामान्य रख-रखाव पर हर महीने लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। यदि इसे एक सुव्यवस्थित व्यावसायिक मॉडल के तहत किसी अनुभवी प्राइवेट एजेंसी को सौंप दिया जाता है, तो रख-रखाव का सरकारी खर्च पूरी तरह खत्म हो जाएगा और बदले में सरकार को मोटी सालाना आमदनी भी होने लगेगी।
'शीश महल' के नाम से चर्चित विवादित बंगले का नया सफर
यह वही बंगला है जो आम आदमी पार्टी और विपक्ष के बीच घमासान का मुख्य मुद्दा बना रहा था। अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री रहते हुए इस बंगले में किए गए भव्य रेनोवेशन और आधुनिक साजो-सामान की खरीद पर विपक्ष ने भारी घोटाले का आरोप लगाते हुए इसे 'शीश महल' का नाम दिया था। वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी ने इसे पूरी तरह राजनीतिक प्रपंच बताया था। अब सरकार इस बंगले के राजनीतिक दाग धोने के लिए इसे एक पब्लिक-प्राइवेट हाइब्रिड मॉडल में बदलने जा रही है, जिसके तहत प्राथमिक तौर पर इस परिसर का उपयोग सरकारी बैठकों, सेमिनारों और वीआईपी कार्यक्रमों के लिए किया जाएगा और खाली दिनों में इसे शादियों व कॉर्पोरेट आयोजनों जैसी निजी बुकिंग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
करोड़ों की लागत से बने परिसर को काम में लाने की कवायद
इस संपत्ति के भविष्य को लेकर पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार के पास मौजूद अनुपयोगी या भारी भरकम संपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी प्रोफेशनल एजेंसी के आने से इस पूरे परिसर का मैनेजमेंट सुधरेगा। गौरतलब है कि साल 2021-22 के दौरान इस बंगले के साथ एक भव्य कैंप ऑफिस और अतिरिक्त कमरों का निर्माण कार्य शुरू किया गया था, लेकिन विवादों और जांच के चक्रव्यूह में फंसने के बाद इसे रोक दिया गया था। उस समय इस अधूरे प्रोजेक्ट पर करीब 25 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया था। अब इस विवादित इतिहास को पीछे छोड़ते हुए सरकार इसे दिल्ली के एक नए लैंडमार्क और शानदार बिजनेस मॉडल के रूप में पेश करने की ओर कदम बढ़ा चुकी है।
CM विजय की सरकार पर संकट? TVK विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों से गरमाई सियासत
17 Jul, 2026 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई। तमिलनाडु की सियासत में भूचाल लाने वाले कथित 'प्रोजेक्ट मेघालय' (Project Meghalaya) मामले में चेन्नई पुलिस ने अपनी तफ्तीश बेहद तेज कर दी है। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) की सरकार को अस्थिर करने की इस कथित साजिश के सिलसिले में पुलिस अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। आरोप है कि टीवीके के 15 विधायकों को पाला बदलने और सरकार गिराने में मदद के लिए 35-35 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वत की पेशकश की गई थी।
विधायक की शिकायत पर खुली साजिश की परतें
इस हाई-प्रोफाइल मामले का खुलासा तब हुआ जब उथंगराई विधानसभा क्षेत्र से टीवीके (TVK) विधायक एन. एलैयाराजा ने पुलिस में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। एलैयाराजा का आरोप है कि ओपिनियन पोलिंग ग्रुप IDPS चलाने वाले यूट्यूबर थिरुनावुक्कारासु और उसके सहयोगियों ने विधानसभा में अपनी ही पार्टी के व्हिप के खिलाफ वोटिंग करने के लिए उन्हें 35 करोड़ रुपये का लालच दिया था।
विधायक ने पुलिस को बताया कि जब उन्होंने इस अनैतिक ऑफर को ठुकरा दिया, तो उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी जाने लगीं। पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, 'प्रोजेक्ट मेघालय' नामक एक गुप्त ऑपरेशन के तहत टीवीके के लगभग 15 विधायकों को टारगेट कर उन्हें भारी कैश का प्रलोभन देकर पार्टी से बगावत कराने की साजिश रची जा रही थी।
वरिष्ठ पत्रकार से पूछताछ, प्रेस क्लब ने उठाए सवाल
मामले की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस ने इस सप्ताह तमिल के क्षेत्रीय समाचार चैनल 'पुथिया थलाइमुराई' के वरिष्ठ पत्रकार विजयन से सघन पूछताछ की है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि उनके पास ऐसे डिजिटल सबूत हैं जो दर्शाते हैं कि विजयन मुख्य आरोपी थिरुनावुक्कारासु के लगातार संपर्क में थे और दोनों के बीच संदेशों (Messages) का आदान-प्रदान भी हुआ था। 15 और 16 जुलाई को हुई लंबी पूछताछ के बाद पुलिस ने वैज्ञानिक जांच के लिए विजयन का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है।
दूसरी तरफ, चेन्नई प्रेस क्लब ने पुलिस की इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। प्रेस क्लब का आरोप है कि एक पत्रकार से देर रात तक पूछताछ करना, बिना किसी उचित कानूनी प्रक्रिया के उनका फोन जब्त कर लेना और लगातार प्रताड़ित करना सीधे तौर पर प्रेस की आजादी पर हमला है। हालांकि, चेन्नई पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर की जा रही है।
डीएमके नेताओं पर शिकंजा और राजनीतिक घमासान
इस राजनीतिक साजिश की आंच अब राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके (DMK) तक भी पहुंच गई है। पुलिस ने इस मामले में पूछताछ के लिए डीएमके के पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक को तलब किया है।
इस बीच, डीएमके ने खुद पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि विजय की पार्टी 'टीवीके' केवल राजनीतिक लाभ और सहानुभूति बटोरने के लिए इस तरह के झूठे और बेबुनियाद आरोप मढ़ रही है। डीएमके ने साफ किया है कि वह इन आरोपों का अदालत में कानूनी रूप से जवाब देगी। फिलहाल, पुलिस इस कथित 'प्रोजेक्ट मेघालय' के पीछे सक्रिय पूरे सिंडिकेट और इसके पीछे लगी बेनामी फंडिंग के स्रोतों का पता लगाने में जुटी हुई है।
केजरीवाल का बड़ा बयान, शिक्षा मंत्रालय की कमान सोनम वांगचुक को सौंपने की मांग
17 Jul, 2026 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। नीट-यूजी 2026 परीक्षा को लेकर उपजा विवाद अब महज छात्रों के गुस्से तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर अब बड़े राजनीतिक घमासान का केंद्र बन चुका है। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की पुरजोर मांग की है। इसके साथ ही, केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ऐसा अनूठा सियासी सुझाव दिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।
केजरीवाल ने केंद्र सरकार को दी 2014 जैसी चेतावनी
नीट-यूजी 2026 परीक्षा में पेपर लीक और कथित गड़बड़ियों को लेकर युवाओं का गुस्सा जंतर-मंतर पर फूट रहा है। इस आंदोलन और वहां आमरण अनशन पर बैठे पर्यावरणविद व शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को समर्थन देने गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे। केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए चेतावनी दी कि यदि देश के युवाओं की जायज मांग और इस जनांदोलन को दबाने की कोशिश की गई, तो आगामी चुनावों में सरकार को इसकी बहुत बड़ी सियासी कीमत चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते छात्रों की चिंताओं को दूर नहीं किया गया, तो मौजूदा सरकार का भी वही हश्र हो सकता है जो साल 2014 के चुनावों में तत्कालीन सरकार का हुआ था।
सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाने का अनोखा सुझाव
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने एक बेहद चौंकाने वाला राजनीतिक प्रस्ताव रखा। उन्होंने मांग की कि देश की परीक्षा प्रणाली को बेपटरी करने के जिम्मेदार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल उनके पद से बर्खास्त कर देना चाहिए। केजरीवाल ने सुझाव दिया कि शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल सुधार करने और पारदर्शिता लाने के लिए धर्मेंद्र प्रधान की जगह विख्यात शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को देश का नया शिक्षा मंत्री नियुक्त किया जाना चाहिए।
वांगचुक के अनशन का 19वां दिन और बिगड़ती सेहत
दूसरी तरफ, जंतर-मंतर पर परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और कड़े सुधारों की मांग को लेकर बैठे सोनम वांगचुक का आमरण अनशन गुरुवार को 19वें दिन में दाखिल हो गया है। वांगचुक अपनी मांग पर पूरी तरह अड़े हुए हैं कि जब तक परीक्षा तंत्र में पूरी पारदर्शिता नहीं आ जाती और दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई नहीं होती, वे अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे। लगातार अनशन के चलते उनके गिरते स्वास्थ्य ने प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त
इसी बीच, सोनम वांगचुक की तेजी से बिगड़ती सेहत को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका पर गुरुवार को बेहद अहम सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि देश के हर नागरिक का जीवन बेहद अनमोल है और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है। अदालत ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए कि जंतर-मंतर पर रोजाना डॉक्टरों की टीम द्वारा वांगचुक के स्वास्थ्य की क्लीनिकल मॉनिटरिंग की जाए और जरूरत पड़ने पर बिना किसी देरी के उन्हें हर जरूरी इलाज मुहैया कराया जाए।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने माननीय अदालत को आश्वस्त किया कि चिकित्सा विशेषज्ञों की एक विशेष टीम पहले से ही प्रतिदिन वांगचुक के स्वास्थ्य की जांच कर रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त मेडिकल टीमें भी तैनात की जा रही हैं। सरकार के इस पुख्ता आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षाओं की साख और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
बांकीपुर उपचुनाव से पहले RJD में घमासान, इस्तीफे की वजह बनी चर्चा का विषय
17 Jul, 2026 11:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की सियासत और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के भीतर उस वक्त एक बड़ा भूचाल आ गया, जब पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने गुरुवार को अपने सभी सांगठनिक पदों से अचानक इस्तीफा दे दिया। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के ठीक पहले आए इस फैसले को राजद के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। लंबे समय से लालू प्रसाद यादव के विश्वसनीय सहयोगियों में शुमार रहे मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर प्रवक्ता पद सहित अपनी तमाम जिम्मेदारियां सौंप दी हैं।
क्यों नाराज होकर तिवारी ने छोड़ दिए सारे पद
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, मृत्युंजय तिवारी के इस बड़े कदम के पीछे राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव के साथ चल रहा उनका पुराना मनमुटाव है। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच कई मौकों पर पार्टी दफ्तर के भीतर ही तीखी बहस और नोकझोंक हुई थी। तिवारी ने इस आंतरिक कलह और मनमुटाव की शिकायत कई बार नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से भी की थी, लेकिन नेतृत्व की तरफ से कोई ठोस एक्शन न लिए जाने से वे काफी आहत थे।
आरोप यह भी है कि इस विवाद के बाद उन्हें संगठन में किनारे किया जाने लगा था। टीवी चैनलों की बहसों (डिबेट) में उनकी जगह दूसरे चेहरों को तरजीह दी जाने लगी और धीरे-धीरे उनकी सांगठनिक ताकत को भी कम कर दिया गया, जिससे बेहद असहज महसूस कर रहे मृत्युंजय तिवारी ने आखिरकार नाता तोड़ने का मन बना लिया।
लालू यादव ने सुलह के लिए आज बुलाया, मुख्य प्रवक्ता पर भी तने सुर
मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे की खबर फैलते ही राजद खेमे में हड़कंप मच गया, जिसके बाद खुद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने मामले को संभालने की कमान संभाली है। उन्होंने तिवारी को आज यानी शुक्रवार को मुलाकात के लिए तलब किया है, जहाँ वे उन्हें मनाने और पार्टी में रोकने की आखिरी कोशिश करेंगे। हालांकि, अंदरखाने से जुड़े लोगों का दावा है कि तिवारी अब मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव के रहते आगे काम करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।
इसी खींचतान के बीच, पार्टी के कुछ असंतुष्ट नेताओं ने मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव की संपत्ति को लेकर भी अंदरूनी मोर्चा खोल दिया है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि साल 2015 के चुनावी हलफनामे में जो घोषित संपत्ति लगभग 70 लाख रुपये थी, वह साल 2025 तक आते-आते करीब 11 करोड़ रुपये के भारी-भरकम आंकड़े तक कैसे पहुंच गई। चर्चा है कि बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे आने के बाद इस गंभीर मुद्दे पर शक्ति यादव को घेरने की तैयारी की जा रही है।
सांसद अभय कुशवाहा के पाला बदलने की अटकलें तेज
राजद की मुश्किलें सिर्फ यहीं खत्म नहीं हो रही हैं, बल्कि औरंगाबाद से पार्टी के मौजूदा सांसद अभय कुशवाहा को लेकर भी सियासी गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। राजनीतिक हल्कों में यह चर्चा बेहद गर्म है कि कुशवाहा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के तौर-तरीकों से गंभीर रूप से नाराज हैं और वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं के सीधे संपर्क में बने हुए हैं।
इतना ही नहीं, कयास तो यह भी हैं कि बांकीपुर विधानसभा के उपचुनाव खत्म होते ही राजद के कुछ और बड़े व कद्दावर नेता भी सामूहिक रूप से लालटेन का साथ छोड़ सकते हैं। हालांकि, सांसद अभय कुशवाहा अथवा भाजपा खेमे की ओर से इस संभावित दलबदल को लेकर अभी तक कोई भी औपचारिक बयान या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
परिसीमन ने बढ़ाई पंचायत चुनाव की राह, बिहार में अब 2027 में होंगे चुनाव
17 Jul, 2026 09:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार के ग्रामीण इलाकों में नई सरकार के गठन का इंतजार कर रहे लोगों के लिए एक बड़ी खबर है। राज्य में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब अपने तय कार्यक्रम यानी अक्टूबर-नवंबर 2026 के बजाय जुलाई-अगस्त 2027 में खिसकने के आसार बन रहे हैं। इस चुनाव प्रक्रिया के तहत ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद तीनों ही स्तरों के लिए मतदान होना है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं की सीमाओं के पुनर्निर्धारण का निर्णय लिए जाने की वजह से मतदान की तारीखों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
छत्तीस वर्षों के लंबे इंतजार के बाद सीमाओं का पुनर्निर्धारण
बिहार में लगभग 36 साल के एक लंबे अंतराल के बाद पंचायत क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन कराया जाएगा। सरकार ने राज्य भर में आबादी के अनुसार संतुलित और सही प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाकर परिसीमन करने का फैसला किया है। शासन का मानना है कि इस कदम से पंचायतों के भीतर भौगोलिक और सामाजिक संतुलन स्थापित होने के साथ-साथ एकरूपता आएगी।
इस पूरे विषय पर पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने साफ किया कि परिसीमन और कुछ अन्य जरूरी तकनीकी वजहों से अब पंचायत चुनाव अगले साल होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि विभाग की पूरी मंशा समय पर ही चुनाव कराने की थी, लेकिन प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं की अनिवार्यता के कारण इस कार्य में कुछ वक्त लग सकता है।
आगामी अगस्त महीने से शुरू हो सकती है लंबी प्रक्रिया
विभागीय सूत्रों के अनुसार, पंचायत क्षेत्रों के परिसीमन की यह महत्वपूर्ण कवायद इसी साल अगस्त 2026 से शुरू की जा सकती है, जिसे अप्रैल 2027 तक पूरा करने का एक समयबद्ध लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद, पंचायती राज व्यवस्था के भीतर पिछड़े वर्गों की समुचित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष समर्पित (डेडिकेटेड) आयोग का गठन किया जाएगा। यह आयोग करीब दो से तीन महीने में अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपेगा, जिसके बाद ही चुनाव की वास्तविक प्रक्रिया जमीन पर उतर पाएगी।
चर्चा यह भी है कि यदि चुनावों में यह संभावित देरी होती है, तो वर्तमान में काम कर रहे पंचायत प्रतिनिधियों को ही अगले 9 से 10 महीनों के लिए कामकाज संभालने की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जा सकती है। इससे पहले साल 2021 में भी वैश्विक महामारी कोरोना के कारण चुनाव टालने पड़े थे, तब पंचायतों का काम चलाने के लिए विशेष परामर्शी समितियां बनाई गई थीं और उस वक्त वर्तमान मुख्यमंत्री ही विभाग के मंत्री थे।
ग्रामीण क्षेत्रों में नई सरकार के गठन में होगा थोड़ा विलंब
चुनाव कार्यक्रम के करीब एक साल आगे बढ़ जाने के कारण गांवों में नई पंचायत सरकारों के शपथ ग्रहण और गठन में भी देरी होना तय माना जा रहा है। ऐसी स्थिति में, वर्तमान में पदस्थ मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य अगले 9 से 10 महीने तक अपने-अपने पदों पर बने रहकर नियमित दायित्वों और विकास कार्यों का संचालन करते रह सकते हैं, जब तक कि नए सिरे से चुनाव संपन्न होकर नई पंचायतों का विधिवत कार्यभार शुरू नहीं हो जाता।
कुर्सी की लड़ाई या जातीय राजनीति? प्रतिमा बागरी के बयान से मचा हंगामा
17 Jul, 2026 08:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश में एक मंत्री द्वारा अपनी कुर्सी और जाति प्रमाण पत्र को बचाने के लिए छुआछूत जैसी सामाजिक कुप्रथा का सहारा लेने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने खुद को अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग का साबित करने के लिए दावा किया है कि आज भी समाज में ब्राह्मण, ठाकुर और राजपूत जैसी उच्च जातियां बागरी समाज के साथ भेदभाव करती हैं और उनके घरों में भोजन तक नहीं करतीं। मंत्री के मुताबिक, यह भेदभाव ही इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि बागरी समाज किसी राजपूत या ठाकुर उप-जाति का हिस्सा नहीं है, बल्कि पूरी तरह अनुसूचित जाति वर्ग के अंतर्गत आता है।
जाति छानबीन समिति के सामने पेश किया दावा
मंत्री प्रतिमा बागरी ने यह विवादित दलील जाति प्रमाण पत्र की सत्यता जांचने वाली उच्च स्तरीय (अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र) छानबीन समिति के समक्ष दी। उन्होंने अपने पक्ष में करीब 110 साल पुराने ऐतिहासिक दस्तावेज और 20 से अधिक विभिन्न तर्क प्रस्तुत किए। समिति ने इन दलीलों और साक्ष्यों को आधार मानते हुए मंत्री को क्लीन चिट दे दी और उन्हें एससी वर्ग का पात्र माना है। समिति ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि नागौद के अनुविभागीय अधिकारी द्वारा 7 फरवरी 2004 को जारी किया गया एससी जाति प्रमाण पत्र पूरी तरह वैध है। इसके साथ ही समिति ने शिकायतकर्ता व कांग्रेस अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार के दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसके बाद अहिरवार ने अब इस फैसले को अदालत में चुनौती देने की बात कही है।
कैबिनेट में साथ बैठने और छुआछूत के दावे पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मंत्री बागरी के छुआछूत वाले दावे पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार के एक जिम्मेदार पद पर रहते हुए, जहाँ उन पर समाज से छुआछूत जैसी कुरीतियों को खत्म करने की नैतिक जिम्मेदारी है, वहीं खुद को साबित करने के लिए ऐसी दलील देना चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि वे हर मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री सहित ठाकुर और ब्राह्मण समाज के कई अन्य मंत्रियों के साथ बैठती हैं। इसके अलावा, उनकी अपनी रैगांव विधानसभा सीट के स्थानीय लोगों का भी कहना है कि मंत्री लगातार क्षेत्र में होने वाले शादी-विवाह और सामाजिक कार्यक्रमों में सभी जातियों के लोगों के घर आती-जाती रही हैं।
प्रयागराज के पंडों की वंशावली और पुराने दस्तावेज आए काम
समिति के सामने खुद को सही साबित करने के लिए प्रतिमा बागरी ने वर्ष 2004 में जारी अपने मूल हस्तलिखित और डिजिटल जाति प्रमाण पत्र के साथ-साथ वंशावली और पूर्वजों के राजस्व रिकॉर्ड पेश किए। उन्होंने अपने परदादा रामगोपाल बागरी के समय के वर्ष 1916 के पुराने सरकारी दस्तावेज और प्रयागराज (इलाहाबाद) के पंडों के पास सुरक्षित वंशावली के रिकॉर्ड भी सौंपे। समिति ने इस मामले में सतना कलेक्टर और एसपी स्तर पर जांच कराने के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के पुराने फैसलों और आदिम जाति अनुसंधान संस्थान मध्य प्रदेश के अध्ययनों का भी हवाला दिया। अंततः यह माना गया कि बागरी जाति का राजपूत वर्ग के साथ कोई रोटी-बेटी का संबंध नहीं है।
राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू
समिति का फैसला आने के बाद इस मामले पर सियासत भी गरमा गई है। क्लीन चिट मिलने पर राहत जताते हुए राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा कि उन्हें कुछ राजनीतिक लोगों द्वारा जानबूझकर फंसाने की साजिश रची गई थी, जबकि सबको पता है कि सतना जिले में बागरी समाज कभी राजपूत वर्ग का हिस्सा नहीं रहा। अब समिति के फैसले से पूरी तरह दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है। दूसरी तरफ, शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार ने सीधे तौर पर सरकार पर पक्षपात के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने समिति को सरकार द्वारा ही पूर्व में जारी आदेशों की प्रतियां सौंपी थीं, लेकिन शासन ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर मंत्री बागरी को इस मामले में बचा लिया है।
सरकार के एजेंडे में बड़े सुधार, मानसून सत्र में पेश होंगे कई महत्वपूर्ण बिल
17 Jul, 2026 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार 18वीं लोकसभा के आगामी आठवें सत्र में कई बड़े और दूरगामी नीतिगत बदलावों को अमलीजामा पहनाने की तैयारी कर चुकी है। इस सत्र के दौरान सरकार पांच नए अहम विधेयकों को संसद के पटल पर रख सकती है, जबकि पहले से लंबित पड़े दो विधेयकों को भी चर्चा और पारित कराने के लिए कार्यसूची में शामिल किया गया है। इन कानूनी प्रस्तावों का सीधा संबंध देश की कर प्रणाली, न्यायपालिका, नागरिक पंजीकरण, राष्ट्रीय गौरव और लघु उद्योगों (MSMEs) के विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से है।
अध्यादेशों की जगह लेंगे ये दो नए बड़े विधेयक
संसद के इस सत्र में सरकार दो अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने जा रही है, जो पूर्व में जारी किए गए अध्यादेशों का स्थान लेंगे। इसमें सबसे पहला इनकम-टैक्स (संशोधन) विधेयक, 2026 है, जिसके माध्यम से देश की कर प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने और कर संबंधी कुछ अहम प्रावधानों में जरूरी सुधार करने की तैयारी है। वहीं दूसरा सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 है, जिसका उद्देश्य देश की सर्वोच्च अदालत में लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए जजों की संख्या बढ़ाने संबंधी अध्यादेश को स्थाई रूप से कानूनी जामा पहनाना है।
नागरिक डेटा और राष्ट्रीय सम्मान को लेकर होंगे कड़े प्रावधान
आम जनता और राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़े कानूनों को समय के अनुकूल बनाने के लिए सरकार दो विशेष संशोधन विधेयक ला रही है। इसके तहत जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 लाया जा रहा है, जो देश के नागरिक पंजीकरण डेटा को पूरी तरह डिजिटल, आधुनिक और पारदर्शी बनाएगा और इससे रिकॉर्ड्स का रखरखाव बेहद सुरक्षित हो जाएगा। इसके साथ ही राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए देश के राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति आदर भाव सुनिश्चित करने के लिए पुराने कानूनों को पहले से ज्यादा सख्त और प्रभावी बनाया जाएगा।
MSME क्षेत्र के सशक्तिकरण पर भी रहेगा विशेष ध्यान
देश की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने वाली है। इस प्रस्तावित कानून के लागू होने से लघु उद्योगों के लिए वित्तीय मदद पाने के रास्ते आसान होंगे। इसके अलावा यह बिल छोटे कारोबारियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की ताकत देगा और देश में व्यापार करने की सुगमता यानी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
इन दो पुराने लंबित विधेयकों पर भी रहेगी संसद की नजर
नए कानूनों के प्रस्तावों के साथ-साथ पहले से संसद में लंबित चल रहे दो अन्य विधेयकों पर भी इस सत्र में चर्चा आगे बढ़ सकती है। इनमें विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 शामिल है, जिसे इसी साल 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था और इसका मुख्य उद्देश्य देश में आने वाली विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को कड़ा बनाना है। वहीं दूसरा विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 है, जिसे पिछले साल 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किए जाने के बाद संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास जांच के लिए भेजा गया था, जिस पर अब समिति की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर विपक्ष सक्रिय, राहुल गांधी के करीबी नेता पहुंचे मिलने
17 Jul, 2026 08:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। नीट (NEET) पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक का आमरण अनशन आज 20वें दिन में प्रवेश कर गया है। इसी बीच शुक्रवार सुबह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा जंतर-मंतर पहुंचे और उन्होंने अनशन पर बैठे वांगचुक व उनके साथ डटे छात्रों के बिगड़ते स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की।
असंवेदनशील सरकार के सामने विरोध का तरीका बदलना जरूरी: पवन खेड़ा
सोनम वांगचुक से मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मीडिया से बातचीत में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश इस समय एक बेहद असंवेदनशील सत्ता से जूझ रहा है जो लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण विरोध की भाषा को समझने में पूरी तरह नाकाम रही है।
खेड़ा ने आंदोलनकारियों की सेहत को लेकर चिंता जताते हुए कहा:
"हम सभी सोनम वांगचुक और उनके साथ अनशन पर बैठे युवाओं की गिरती सेहत को लेकर बेहद परेशान हैं। ऐसी कठोर सरकार के सामने हमें अपने विरोध के तरीकों में बदलाव करते रहना चाहिए। अपनी जान को दांव पर लगाकर इस हुकूमत से कुछ भी हासिल करना मुमकिन नहीं है, क्योंकि इन्हें किसी के जीवन की परवाह नहीं है।"
कांग्रेस नेता ने आगे बताया कि उनकी पार्टी लंबे समय से 'छात्रों की गूंज' नामक राष्ट्रव्यापी अभियान चला रही है। इसके तहत कांग्रेस के कार्यकर्ता हर गली-मोहल्ले और कॉलेज कैंपस में जाकर परीक्षाओं में धांधली के मुद्दों को मुखरता से उठा रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि विपक्ष केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर ही नहीं अड़ा है, बल्कि पूरे देश की परीक्षा प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता लाने की मांग कर रहा है।
"20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा, फिर संसद मार्च करेंगे": सोनम वांगचुक
लगातार 20 दिनों से भूखे रहने के बावजूद सोनम वांगचुक का हौसला और उनका अनूठा अंदाज बरकरार है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपने एक वीडियो संदेश में उन्होंने बेहद चुटीले लेकिन कड़े लहजे में सरकार को चुनौती दी है।
वांगचुक ने कहा:
"मैं किसी भी परिस्थिति में आगामी 20 जुलाई तक खुद को जीवित रखूंगा, ताकि मैं आप सभी युवाओं और देशवासियों के साथ मिलकर संसद भवन तक प्रस्तावित मार्च का नेतृत्व कर सकूं। लेकिन याद रखिए, अगर 20 जुलाई को हमारा यह संसद मार्च किसी वजह से सफल नहीं हो पाया, तो फिर मैं आप सबके हक के लिए भूत बनकर वापस लौटूंगा।"
सोनम वांगचुक के इस वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए विभिन्न नागरिक संगठनों और राजनीतिक विश्लेषकों ने उनके जज्बे की तारीफ की है। लोगों का कहना है कि जीवन के इतने कठिन और शारीरिक रूप से कमजोर कर देने वाले समय में भी वांगचुक ने अपना 'सेंस ऑफ ह्यूमर' (हास्यबोध) नहीं खोया है, जो उनके फौलादी इरादों को दर्शाता है। फिलहाल, 20 जुलाई को होने वाले संसद मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और संसद के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया है।
मेडिकल कॉलेज को मिली 50 सीटें, पूर्व विधायक बोले- कांग्रेस के समय शुरू हुआ था सपना
16 Jul, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मनेंद्रगढ़: मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आई है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने मनेन्द्रगढ़ मेडिकल कॉलेज को 50 एमबीबीएस (MBBS) सीटों की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस बड़ी उपलब्धि पर क्षेत्र के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी जिलावासियों को बधाई दी है। साथ ही उन्होंने इस सफलता के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री और स्थानीय सांसद ज्योत्सना महंत के प्रति आभार जताया है।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के योजनाबद्ध प्रयासों का नतीजा
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने इस सफलता के पीछे की पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि वर्षों की योजनाबद्ध प्रक्रिया और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समर्पित प्रयासों का ही परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनेन्द्रगढ़ में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की परिकल्पना तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में साकार हुई थी। वर्ष 2023-24 के राज्य बजट में इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किया गया था। इसके साथ ही कॉलेज के लिए उपयुक्त भूमि का चयन, प्रारंभिक प्रशासनिक स्वीकृतियां, बुनियादी ढांचे का विकास और अन्य सभी आवश्यक औपचारिक कार्य कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही तेजी से पूरे किए गए थे।
डॉ. चरणदास महंत के प्रयासों और क्षेत्रीय विकास पर पड़ा प्रभाव
परियोजना को गति देने में वरिष्ठ नेताओं के योगदान की सराहना करते हुए कमरो ने कहा कि तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति के लिए लगातार पैरवी की थी। उन्होंने केंद्र और राज्य दोनों ही स्तरों पर इस संवेदनशील विषय को बेहद गंभीरता से उठाया था। पूर्व विधायक ने जोर देकर कहा कि यह मेडिकल कॉलेज केवल एक कंक्रीट की इमारत नहीं है, बल्कि यह पूरे एमसीबी जिले के भविष्य और तरक्की से जुड़ी एक दूरगामी पहल है।
विद्यार्थियों का पलायन रुकेगा, स्वास्थ्य सेवाओं में आएगा क्रांतिकारी बदलाव
इस कॉलेज के शुरू होने से क्षेत्र में होने वाले बड़े बदलावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब स्थानीय विद्यार्थियों को डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा और वे अपने ही जिले में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा, मेडिकल कॉलेज खुलने से क्षेत्र में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या में भारी इजाफा होगा, जिससे स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर काफी सुधरेगा। 50 एमबीबीएस सीटों की यह मंजूरी नियमित शैक्षणिक सत्र शुरू करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी, जिससे आने वाले समय में यह संस्थान पूरे सरगुजा संभाग के लिए चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का एक मुख्य केंद्र बनकर उभरेगा।
विकास कार्यों में निरंतरता और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद
राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर विकास की बात करते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि यह परियोजना भले ही कांग्रेस सरकार के दूरदर्शी फैसलों का नतीजा है, लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार इसे आगे बढ़ाने का सराहनीय कार्य कर रही है। जनहित के कामों में ऐसी निरंतरता बेहद जरूरी है ताकि आम जनता को योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके। उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि इस मेडिकल कॉलेज के पूर्ण रूप से संचालित होने के बाद एमसीबी जिले में चिकित्सा शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और समग्र क्षेत्रीय विकास के एक नए और स्वर्णिम युग की शुरुआत होगी।
परिसीमन बिल पास कराने की रणनीति, किन क्षेत्रीय दलों पर टिकी हैं बीजेपी की नजरें?
16 Jul, 2026 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: आगामी लोकसभा चुनाव 2029 को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार परिसीमन के मुद्दे पर एक बड़ी और नई रणनीतिक तैयारी में जुट गई है। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि सरकार आगामी मानसून सत्र में एक संशोधित परिसीमन विधेयक पेश कर सकती है। इस नए विधेयक में देश के सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का स्पष्ट प्रावधान शामिल किया जा सकता है। सरकार का यह कदम द्रमुक (DMK) और राकांपा (शरद पवार गुट) जैसे प्रमुख विपक्षी दलों की चिंताओं को दूर करने और इस ऐतिहासिक विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत का समर्थन जुटाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस रणनीति को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सीटों के पुनर्वितरण और दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंता का मुख्य विवाद
इस पूरे मामले की जड़ें अप्रैल में आयोजित संसद के विशेष सत्र से जुड़ी हैं, जब सरकार महिला आरक्षण के साथ परिसीमन विधेयक लेकर आई थी। उस समय लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण के फॉर्मूले को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया था। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके सहित दक्षिण भारत के कई दलों का तर्क है कि उनके राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के मोर्चे पर शानदार काम किया है। ऐसे में यदि सीटों का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया, तो संसद में दक्षिण भारत की हिस्सेदारी घट जाएगी और उत्तर भारत के अधिक आबादी वाले राज्यों का प्रतिनिधित्व बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा। इसी असमानता के डर से दक्षिण के क्षेत्रीय दल इस नीति का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
संसद में अमित शाह का आश्वासन और विपक्ष की कानूनी गारंटी की मांग
इस विवाद के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले संसद के पटल पर विपक्षी दलों को भरोसा दिया था कि परिसीमन के बाद किसी भी राज्य की वर्तमान सीटों की संख्या में कोई कमी नहीं की जाएगी, बल्कि सभी राज्यों में समान रूप से सीटों को 50 फीसदी तक बढ़ाया जाएगा। हालांकि, विपक्ष ने इसे केवल एक राजनीतिक बयानबाजी करार देते हुए मांग की थी कि इस आश्वासन को लिखित रूप में विधेयक का कानूनी हिस्सा बनाया जाना चाहिए। विपक्ष की इसी मांग पर बहस के दौरान गृह मंत्री ने एक घंटे के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करने का अनुरोध किया था और एक संशोधित विधेयक लाने का वादा किया था।
शरद पवार गुट का रुख और किरेन रिजिजू के पुराने प्रस्ताव का हवाला
इस नए घटनाक्रम के बीच यह भी खबरें आ रही हैं कि बदले हुए प्रावधानों के बाद शरद पवार की राकांपा (NCP-SP) भी संसद में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के इस कदम का समर्थन कर सकती है। इस मुद्दे पर पार्टी की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले ने रुख साफ करते हुए कहा कि एक बार नया विधेयक पटल पर आ जाए, तो पार्टी अगले 24 घंटे के भीतर अपने फैसले की घोषणा कर देगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले परिसीमन विधेयक से ठीक पहले बजट सत्र के दौरान तत्कालीन केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी नेताओं को बैठक में बुलाकर आश्वस्त किया था कि देश के सभी राज्यों में 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाई जाएंगी।
संविधान संशोधन के लिए सदन की स्थिति और जरूरी जादुई आंकड़ा
संसद के मौजूदा ढांचे और संविधान संशोधन के लिए आवश्यक विधायी शर्तों का विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट किया गया है:
विवरण
संख्या / आवश्यक शर्त
लोकसभा के कुल वर्तमान सांसद
540 (कुल 543 सीटों में से 3 रिक्त)
संविधान संशोधन के लिए जरूरी समर्थन
सदन में उपस्थित सदस्यों का दो-तिहाई (2/3) बहुमत तथा कुल संख्या का 360
सदन में एनडीए का वर्तमान संख्या बल और संभावित समीकरण
वर्तमान में सरकार के पास मौजूद सांसदों और उनका साथ दे रहे सहयोगी दलों की स्थिति इस प्रकार है:
दल / राजनीतिक गुट
सांसदों की संख्या
एनडीए (मूल घटक दल)
292
तृणमूल कांग्रेस (TMC)
+ 20
शिवसेना (यूबीटी से अलग हुआ गुट)
+ 6
कुल संभावित संख्या
318
विधेयक पास कराने के लिए भाजपा की नजर में शामिल अन्य क्षेत्रीय दल
जादुई आंकड़े (360) को छूने के लिए भाजपा की नजर संसद के उन 41 सांसदों पर टिकी है, जो फिलहाल विपक्ष या तटस्थ भूमिका में हैं। इन दलों का विवरण नीचे दिया गया है:
डीएमके (DMK): 22 सांसद (सबसे महत्वपूर्ण भूमिका में)
एनसीपी - शरद पवार (NCP - SP): 08 सांसद
वाईएसआर कांग्रेस (YSRCP): 04 सांसद
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM): 03 सांसद
वीसीके (VCK): 02 सांसद
आरएलपी (RLP): 01 सांसद
शिरोमणि अकाली दल: 01 सांसद
निर्दलीय व अन्य: (शेष आवश्यक संख्या इसमें शामिल है)
यदि ये क्षेत्रीय दल या इनके बड़े हिस्से संशोधित विधेयक के पक्ष में मतदान करते हैं, तो सरकार आसानी से लोकसभा में दो-तिहाई का आंकड़ा पार कर इस कानून को अमलीजामा पहना देगी।
नरोत्तम मिश्रा का तीखा बयान, बोले- दोस्ती निभाता हूं, दुश्मनी भी नहीं भूलता
16 Jul, 2026 04:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दतिया: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहे आगामी उपचुनाव को लेकर राजनीतिक पारा पूरी तरह चढ़ चुका है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार आशुतोष तिवारी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी चुनावी गहमा-गहमी के बीच आयोजित एक विशाल जनसभा में उस समय हड़कंप मच गया, जब सूबे के पूर्व गृह मंत्री और दिग्गज भाजपा नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने मंच से ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमे के आला अधिकारियों को बेहद कड़े शब्दों में आड़े हाथों लिया।
पूर्व गृह मंत्री ने सीधे पुलिस कप्तान (SP) को दी सख्त हिदायत
मंच से जनता को संबोधित करते हुए डॉ. नरोत्तम मिश्रा के कड़े तेवर देखने को मिले। उन्होंने चुनावी सभा की सुरक्षा और निगरानी में तैनात पुलिस बल को टोकते हुए सीधे जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पर निशाना साधा। पूर्व गृह मंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस समय सभा में लाउडस्पीकर और कैमरों के जरिए जो भी रिकॉर्डिंग की जा रही है, उसे ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी बहुत ध्यान से सुन लें और विशेष रूप से इस क्षेत्र के एसपी साहब तक यह बात पहुंचा दी जाए।
'मैं सब याद रखता हूँ' के बयान पर समर्थकों ने बजाईं तालियां
अधिकारियों को चेताते हुए डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने आगे कहा, "मैं कोई बातें भूलने वाला इंसान नहीं हूँ, बल्कि हर एक चीज को अपने जेहन में बिल्कुल साफ और याद रखता हूँ।" पूर्व गृह मंत्री के मुंह से प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ इस तरह की सीधी और सख्त टिप्पणी सुनते ही पंडाल में मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों का उत्साह दोगुना हो गया। नरोत्तम मिश्रा के इस आक्रामक बयान के तुरंत बाद जनसभा में मौजूद भारी भीड़ ने उनके समर्थन में जमकर नारेबाजी की और देर तक तालियां बजाकर अपनी सहमति जताई। इस घटनाक्रम के बाद से ही जिले के प्रशासनिक और राजनीतिक हल्कों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
तृणमूल की नेता कोयल मल्लिक का इस्तीफा, बंगाल में नए राजनीतिक समीकरण के संकेत
16 Jul, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: टॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेता कोयल मल्लिक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। कोयल ने जून के महीने में ही ईमेल के जरिए संसद के उच्च सदन से हटने की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन तकनीकी कारणों से उस समय उनके इस्तीफे पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका था। इस बार किसी ईमेल का सहारा लेने के बजाय अभिनेत्री ने खुद दिल्ली पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इस दौरान उनके पति और मशहूर फिल्म निर्माता निशपाल सिंह भी उनके साथ मौजूद रहे। इस औचक इस्तीफे के बाद से ही कोयल मल्लिक के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की अटकलें बेहद तेज हो गई हैं, हालांकि अभी तक न तो भाजपा और न ही अभिनेत्री की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।
तृणमूल के टिकट पर तय किया था संसद तक का सफर
कोयल मल्लिक ने इसी साल 6 अप्रैल को देश की राजधानी दिल्ली में राज्यसभा सांसद के तौर पर गोपनीयता की शपथ ली थी। संसद सदस्य के रूप में अपने नए सफर की शुरुआत करने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने पूरे परिवार के साथ एक भावुक तस्वीर साझा की थी। उन्होंने लिखा था कि वह बंगाल की जनता की सेवा करने का अवसर पाकर बेहद सम्मानित महसूस कर रही हैं। उस समय मीडिया से बात करते हुए कोयल ने खुद को देश और समाज के प्रति समर्पित करने का संकल्प भी जताया था। इसके बाद वे पार्टी के लिए चुनाव प्रचार में भी काफी सक्रिय नजर आईं, लेकिन हालिया चुनावी नतीजों में उम्मीद के मुताबिक परिणाम न मिलने के बाद से उन्होंने राजनीतिक मुद्दों पर पूरी तरह चुप्पी साध ली थी।
विदेश यात्रा से वापस आते ही खुद सौंपना पड़ा त्यागपत्र
सांसदी छोड़ने का यह घटनाक्रम अचानक जून की शुरुआत में तब शुरू हुआ, जब कोयल ने डिजिटल माध्यम से अपना इस्तीफा भेजने की कोशिश की। उस समय राज्यसभा सचिवालय की ओर से उन्हें स्पष्ट कर दिया गया था कि नियमों के मुताबिक ईमेल के जरिए भेजे गए इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया जा सकता और इसके लिए व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य है। इसी बीच कुछ बेहद निजी कारणों के चलते कोयल मल्लिक को देश से बाहर जाना पड़ा, जिसकी वजह से उनके इस्तीफे की प्रक्रिया अधर में लटक गई थी। अब विदेश दौरे से वापस लौटते ही कोयल ने बिना वक्त गंवाए बुधवार को खुद उपस्थित होकर आधिकारिक तौर पर अपना त्यागपत्र दे दिया है, जिसने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे दिया है।
गुपचुप मुलाकात से महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई, फडणवीस और NCP नेता की बैठक चर्चा में
16 Jul, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के शीर्ष नेताओं और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच मुख्यमंत्री आवास 'वर्षा' पर हुई एक गुप्त बैठक ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद एनसीपी के भीतर अंदरूनी कलह और मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आधी रात को हुई इस बेहद संवेदनशील बैठक की भनक एनसीपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार और उनके सांसद बेटे पार्थ पवार तक को नहीं थी, जिससे पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
मुख्यमंत्री आवास पर आधी रात को जुटे विरोधी गुटों के दिग्गज नेता
मंगलवार की देर रात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आधिकारिक निवास 'वर्षा' पर एक बेहद महत्वपूर्ण और गोपनीय बैठक का आयोजन हुआ। इस बैठक की खास बात यह थी कि इसमें शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता जयंत पाटील के साथ-साथ एनसीपी (सुनेत्रा पवार गुट) के दिग्गज नेता प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे भी एक साथ मौजूद थे। जैसे ही इस गुप्त बैठक की खबर राजनीतिक गलियारों और मीडिया में लीक हुई, वैसे ही दोनों एनसीपी गुटों के फिर से एक होने या शरद पवार गुट द्वारा संसद में एनडीए (NDA) को समर्थन देने की अटकलों का बाजार गर्म हो गया।
अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने 'देवगिरी' पर बुलाई आपात बैठक, प्रदेश अध्यक्ष से मांगा जवाब
इस गोपनीय बैठक की जानकारी मीडिया के जरिए मिलने के बाद एनसीपी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने नाराजगी जाहिर करते हुए बुधवार को मुंबई स्थित अपने निवास 'देवगिरी' पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक आपात बैठक बुलाई। इस बैठक में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार के अलावा छगन भुजबल, अनिल पाटिल और खुद प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान सुनेत्रा पवार ने तटकरे से सीधे तौर पर 'वर्षा' बंगले में हुई मुलाकात को लेकर जवाब मांगा। इस पर सफाई देते हुए तटकरे ने कहा कि उन्हें और प्रफुल्ल पटेल को खुद मुख्यमंत्री ने आमंत्रित किया था, ताकि आगामी मानसून सत्र में आने वाले परिसीमन विधेयक को लेकर किसी भी प्रकार की राजनीतिक गलतफहमी को दूर किया जा सके। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री ने एनसीपी (सुनेत्रा पवार) के हितों की रक्षा का आश्वासन दिया है। हालांकि, इस सफाई के बाद भी राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि अगर मुख्यमंत्री को कोई संदेश देना ही था, तो उन्होंने सीधे उपमुख्यमंत्री और पार्टी मुखिया सुनेत्रा पवार से संपर्क क्यों नहीं किया।
सांसद सुप्रिया सुले ने अटकलों को नकारा, कहा- विधेयक के अध्ययन के बाद लेंगे फैसला
दूसरी तरफ, शरद पवार गुट की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने परिसीमन विधेयक को लेकर चल रही तमाम अटकलों और दावों पर विराम लगाने का प्रयास किया। बुधवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी ने इस विषय पर अभी तक कोई भी आधिकारिक या अंतिम निर्णय नहीं लिया है। सुप्रिया सुले ने कहा कि मीडिया में चल रही खबरें केवल सूत्रों पर आधारित हैं और एनसीपी (शरद पवार) ने इस संबंध में कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है। उन्होंने यह भी बताया कि पैदा हुई गलतफहमियों को दूर करने के लिए उन्होंने महाविकास आघाड़ी (MVA) के प्रमुख सहयोगियों से भी बातचीत की है। सुले ने साफ किया कि जब संविधान संशोधन विधेयक की प्रति पार्टी को मिल जाएगी, तब उसका विस्तृत अध्ययन करने के बाद 24 घंटे के भीतर पार्टी अपनी आधिकारिक रणनीति और रुख की घोषणा करेगी।
सोनम वांगचुक की सेहत बिगड़ने पर सियासत तेज, राज ठाकरे ने सरकार को घेरा
16 Jul, 2026 03:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली:लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के आमरण अनशन का आज 19वां दिन है। लगातार जारी भूख हड़ताल के कारण उनका वजन 9 किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है, जिससे उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। वांगचुक की तेजी से बिगड़ती सेहत पर चिंता जताते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली यह सरकार न केवल सोनम वांगचुक के जीवन को खतरे में डाल रही है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक आंदोलनों का भी गला घोंटना चाहती है।
राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर जताया गहरा दुख, सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि सोनम वांगचुक के अनशन को 19 दिन बीत चुके हैं और उनकी सेहत से जुड़ी जो तस्वीरें व खबरें सामने आ रही हैं, वे दिल दहला देने वाली हैं। ठाकरे ने दुख जताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने न सिर्फ वांगचुक की, बल्कि देश में बचे-खुचे जन-आंदोलनों की भी बलि देने का पूरा मन बना लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं और आंदोलनों के प्रति पूरी तरह संवेदनहीन हो चुकी है।
मीडिया की भूमिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रभाव पर जताई चिंता
अपने बयान में राज ठाकरे ने देश की निष्पक्ष संस्थाओं और मीडिया की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिन संस्थाओं को बिना किसी पक्षपात के काम करना चाहिए था, वे आज पूरी तरह सरकार के प्रभाव में नजर आ रही हैं। इसके साथ ही, उन्होंने मुख्यधारा के मीडिया के एक बड़े हिस्से पर भी सरकार के पक्ष में माहौल बनाने का आरोप लगाया। ठाकरे ने कहा कि वर्तमान दौर में सरकार से सवाल पूछने वाली आवाजों को दबाया जा रहा है, जिससे सत्ता के लिए किसी भी जनहित के आंदोलन को कुचलना और प्रदर्शनकारियों को प्रताड़ित करना बेहद आसान हो गया है।
वांगचुक की मांगों का किया समर्थन, पिछली परीक्षा गड़बड़ियों का दिया हवाला
राज ठाकरे ने सोनम वांगचुक द्वारा उठाई जा रही मांगों को देशहित में और पूरी तरह जायज ठहराया। उन्होंने कहा कि नीट (NEET) परीक्षा में पूरी पारदर्शिता लाने, पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने और इस नाकामी के लिए जिम्मेदार विभागीय मंत्री को पद से हटाने की मांग में कुछ भी अनुचित नहीं है। भाजपा शासन पर निशाना साधते हुए उन्होंने याद दिलाया कि व्यापमं से लेकर नीट और हालिया शिक्षक भर्ती परीक्षाओं तक, कई प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली सामने आ चुकी है, लेकिन सरकार ने कभी भी इन मामलों को गंभीरता से नहीं लिया।
प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग और मनसे का पूर्ण समर्थन
लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य का हवाला देते हुए मनसे प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस संवेदनशील मामले में व्यक्तिगत रूप से दखल देने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस संकट को राजनीति के चश्मे से देखने के बजाय सामाजिक दृष्टिकोण से हल किया जाना चाहिए, तभी दीर्घकालिक सत्ता का असली महत्व साबित होगा। अंत में, उन्होंने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना इस आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ी है। ठाकरे ने आम जनता से भी आह्वान किया कि वे केवल सोशल मीडिया तक सीमित न रहकर लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरें, क्योंकि समाज की चुप्पी भविष्य में जनआंदोलनों की आवाज को हमेशा के लिए दबा देगी।
जून से जारी है नीट धांधली के खिलाफ यह अनशन
उल्लेखनीय है कि सोनम वांगचुक यह अनशन दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के समर्थन में कर रहे हैं। दिपके दिल्ली के जंतर-मंतर पर बैठकर मई में हुई नीट परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वांगचुक शुरुआत से ही इस प्रदर्शन से जुड़े रहे हैं। उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि सरकार ने 27 जून तक कोई कदम नहीं उठाया, तो वे भूख हड़ताल पर बैठेंगे। केंद्र की ओर से कोई प्रतिक्रिया न मिलने के बाद उन्होंने 28 जून से अपना अनशन शुरू किया था।
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