राजनीति
कांग्रेस का मिशन संगठन, प्रभारी संजय दत्त पांच जिलों में करेंगे कार्यकर्ताओं से संवाद
16 Jul, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़: हरियाणा में अपने सांगठनिक ढांचे को जमीनी और बूथ स्तर पर धार देने के लिए कांग्रेस ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी संजय दत्त आगामी 19 जुलाई से राज्य के पांच दिवसीय संगठनात्मक दौरे पर निकल रहे हैं। इस अभियान की कमान संभालते हुए वे विभिन्न जिलों का रुख करेंगे और जमीनी स्तर पर पार्टी की स्थिति को मजबूत करने के लिए नेताओं व कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क साधेंगे। इस महत्वपूर्ण दौरे को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह की ओर से सभी संबंधित पदाधिकारियों और नेताओं को विस्तृत कार्यक्रम भी जारी कर दिया गया है।
पंचकूला से होगी शुरुआत, पहले चरण में पांच जिलों को मथेंगे प्रभारी
प्रदेश प्रभारी संजय दत्त अपने इस पांच दिवसीय दौरे के पहले चरण में उत्तर हरियाणा के पांच प्रमुख जिलों को कवर करेंगे। उनके इस कार्यक्रम की शुरुआत पंचकूला से होगी, जिसके बाद वे क्रमशः यमुनानगर, अंबाला, कुरुक्षेत्र और अंत में करनाल का दौरा करेंगे। इन सभी जिलों में वे स्थानीय नेताओं, जनप्रतिनिधियों और पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ आमने-सामने संवाद करेंगे, ताकि संगठन के भीतर नई ऊर्जा का संचार किया जा सके।
सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ होगा मंथन का दौर
इस विशेष दौरे के दौरान जिला स्तर पर बैठकों का एक लंबा दौर चलेगा। संजय दत्त जिला कांग्रेस कमेटियों के समस्त पदाधिकारियों के अलावा क्षेत्र के मौजूदा सांसदों, विधायकों, पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों और लोकसभा व विधानसभा चुनाव में पार्टी के टिकट पर भाग्य आजमा चुके प्रत्याशियों के साथ अलग-अलग बैठकें करेंगे। इन बैठकों में अग्रिम संगठनों के प्रतिनिधि और वरिष्ठ कार्यकर्ता भी शामिल होंगे, जिनसे जमीनी हकीकत को समझने का प्रयास किया जाएगा।
स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और आगामी रणनीति पर लिया जाएगा फीडबैक
इन सभी मैराथन बैठकों का मुख्य उद्देश्य जिलेवार राजनीतिक परिस्थितियों का सटीक आकलन करना है। प्रभारी संजय दत्त कार्यकर्ताओं से सीधे मिलकर इस बात का फीडबैक लेंगे कि संगठन को और अधिक मजबूत कैसे बनाया जाए और जनता से जुड़े किन अहम मुद्दों को आने वाले समय में प्रमुखता से उठाया जाना चाहिए। इन बैठकों से मिलने वाले इनपुट और जमीनी सुझावों के आधार पर ही कांग्रेस राज्य में अपनी आगामी राजनीतिक दिशा, रणनीति और आंदोलनों की रूपरेखा तैयार करेगी।
प्रदेश अध्यक्ष ने की कार्यकर्ताओं से बढ़-चढ़कर जुटने की अपील
संगठनात्मक मजबूती के इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने पूरी ताकत झोंक दी है। उन्होंने पार्टी के सभी पदाधिकारियों, स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे तय कार्यक्रम के अनुसार भारी से भारी संख्या में इन बैठकों में हिस्सा लें। पार्टी आलाकमान का स्पष्ट मानना है कि जमीनी कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक के सहारे ही संगठन को हर वर्ग के बीच लोकप्रिय बनाया जा सकता है और आगामी चुनौतियों का मजबूती से सामना किया जा सकता है।
वोटर लिस्ट अपडेट में 10 विधानसभा सीटें सबसे ज्यादा प्रभावित, भाजपा-कांग्रेस दोनों को झटका
16 Jul, 2026 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून: उत्तराखंड में मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान एक बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य के जिन 10 विधानसभा क्षेत्रों में सबसे ज्यादा मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, उनमें से छह सीटें सत्ताधारी भाजपा और चार सीटें मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के कब्जे वाली हैं। चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए इन ताजा आंकड़ों से साफ है कि नाम हटाए जाने और डेटा प्रविष्टि (डेटा एंट्री) की गड़बड़ियों के मामले में देहरादून की धर्मपुर विधानसभा सीट पूरे प्रदेश में पहले पायदान पर पहुंच गई है। आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात भी सामने आई है कि मतदाता सूची में छंटनी और संशोधन का सबसे बड़ा काम देहरादून और ऊधम सिंह नगर जिलों में ही केंद्रित रहा है।
वोटर लिस्ट से नाम हटने में धर्मपुर और काशीपुर सबसे आगे
पूरे उत्तराखंड में सबसे ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाने के मामले में देहरादून की धर्मपुर सीट शीर्ष पर है, जहां कुल 1,46,861 मतदाताओं में से 29,251 वोट काट दिए गए हैं। इस सीट पर फिलहाल भाजपा का कब्जा है। नाम कटने के मामले में दूसरे नंबर पर भी भाजपा के ही कब्जे वाली ऊधम सिंह नगर की काशीपुर सीट है, जहां 28,701 वोट हटाए गए हैं। इसके ठीक बाद कांग्रेस की बाजपुर सीट का नंबर आता है, जहां 28,520 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। ऋषिकेश (27,120) और किच्छा (27,068) क्रमश: चौथे और पांचवें स्थान पर हैं। शीर्ष 10 की इस सूची में रायपुर (25,992), हल्द्वानी (20,867), रुद्रपुर (20,642), चकराता (20,623) और भेल रानीपुर (19,038) सीटें भी शामिल हैं।
त्रुटियों और डेटा की लापरवाही में भी देहरादून के क्षेत्रों का दबदबा
अगर मतदाता सूची में विसंगतियों यानी गलतियों की बात करें, तो टॉप-10 विधानसभा क्षेत्रों में से अकेले पांच सीटें देहरादून जिले की हैं। इनमें धर्मपुर, सहसपुर, रायपुर, डोईवाला और ऋषिकेश शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक, धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र सबसे ज्यादा 53,883 त्रुटिपूर्ण मतदाताओं के साथ पूरे राज्य में शीर्ष पर बना हुआ है। इसके बाद सहसपुर में 51,339 और रुद्रपुर में 48,363 मतदाताओं के डेटा में कमियां पाई गई हैं। इस सूची में शामिल सभी 10 सीटें पूरी तरह से मैदानी या अर्ध-शहरी इलाकों की हैं, जहां आबादी और मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है। इन क्षेत्रों के आंकड़ों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि यहां डेटा प्रविष्टि के स्तर पर सबसे ज्यादा लापरवाही बरती गई है।
रायपुर विधानसभा क्षेत्र में प्रतिशत के हिसाब से सबसे बड़ी गड़बड़ी
भले ही कुल संख्या के आधार पर देहरादून की रायपुर विधानसभा सीट विसंगतियों की सूची में चौथे स्थान पर आती है, लेकिन अगर कुल मतदाताओं की तुलना में प्रतिशत निकाला जाए, तो यहां की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। रायपुर सीट पर कुल 1,36,724 मतदाता हैं, जिनमें से 47,396 यानी करीब 35 प्रतिशत आबादी के डेटा में गड़बड़ी पाई गई है। प्रतिशत का यह आंकड़ा सूची में सबसे ऊपर मौजूद शुरुआती तीनों सीटों की तुलना में भी काफी ज्यादा है। इसके अलावा प्रदेश की अन्य प्रमुख विसंगति वाली सीटों में डोईवाला (44,662), ऋषिकेश (42,344), भेल रानीपुर (42,228), खानपुर (42,179) और गदरपुर (41,089) शामिल हैं, जहां बड़े पैमाने पर सुधार की जरूरत है।
कुल्लू जिला परिषद में भाजपा का कमाल, ठाकुर दास अध्यक्ष और नीना उपाध्यक्ष निर्वाचित
16 Jul, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुल्लू: हिमाचल प्रदेश की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर जिला परिषद कुल्लू के चुनावों से आ रही है। वीरवार को हुए जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ऐतिहासिक पलटवार करते हुए दोनों ही प्रमुख पदों पर अपना कब्जा जमा लिया है। इस शानदार जीत के साथ ही भाजपा ने जिला परिषद कुल्लू में पूरे 23 साल के लंबे सूखे को खत्म कर दिया है। चुनाव नतीजों के अनुसार, अध्यक्ष पद पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी ठाकुर दास ने प्रचंड जीत हासिल की है, वहीं उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भी भाजपा की नीना देवी विजयी घोषित हुई हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2003 के बाद यह पहला मौका है जब कुल्लू जिला परिषद के सर्वोच्च पद पर भाजपा का कोई नेता आसीन होने जा रहा है।
कुल्लू जिला परिषद में टूटा कांग्रेस का दो दशकों का एकछत्र राज
इस चुनावी नतीजे को जिले की राजनीति में एक युगांतकारी बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पिछले लगभग 23 वर्षों से जिला परिषद अध्यक्ष की यह प्रतिष्ठित कुर्सी पूरी तरह से कांग्रेस पार्टी के गढ़ के रूप में तब्दील हो चुकी थी। तमाम राजनीतिक समीकरणों और जोड़-तोड़ के बावजूद कांग्रेस इस बार अपने इस किले को बचाने में नाकाम रही। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनावी जनादेश ने न केवल जिले की राजनीतिक दिशा बदल दी है, बल्कि आगामी चुनावों के लिए भी भाजपा कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंक दिया है।
भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में एकतरफा वोटिंग, चारों खाने चित हुआ विपक्ष
अध्यक्ष पद पर ठाकुर दास का जलवा: जिला परिषद के अध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने ठाकुर दास को अपना चेहरा बनाया था, जिनके सामने कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार प्रवीण ठाकुर मैदान में थे। जब मतों की गिनती हुई, तो मुकाबला पूरी तरह एकतरफा नजर आया। कुल 14 पार्षदों में से ठाकुर दास के पक्ष में 10 भारी मत पड़े, जबकि कांग्रेस के प्रवीण ठाकुर को महज 4 वोटों से ही संतोष करना पड़ा।
उपाध्यक्ष पद पर नीना देवी की बड़ी जीत: इसी तरह का समीकरण उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भी देखने को मिला। भाजपा की तरफ से ब्रो वार्ड की जुझारू नेता नीना देवी चुनावी मैदान में थीं, जिन्हें चुनौती देने के लिए कांग्रेस समर्थित सुनील ठाकुर खड़े थे। मतदान के दौरान नीना देवी ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 वोट हासिल किए और अपनी जीत पर मुहर लगाई, जबकि सुनील ठाकुर के खाते में सिर्फ 4 मत ही आ सके।
जीत के बाद जश्न का माहौल और आगामी रणनीतियां
इस ऐतिहासिक जीत की घोषणा होते ही कुल्लू में भाजपा खेमे में जश्न का माहौल बन गया। ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के बीच नवनिर्वाचित अध्यक्ष ठाकुर दास और उपाध्यक्ष नीना देवी का जोरदार स्वागत किया गया। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह जीत क्षेत्र के विकास और जनता के विश्वास की जीत है। नई टीम ने कार्यभार संभालते ही जिला परिषद क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में लंबित पड़े विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा करने का संकल्प लिया है। वहीं दूसरी ओर, इस करारी हार के बाद कांग्रेस खेमे में भीतरघात और चुनावी रणनीति को लेकर आत्ममंथन का दौर शुरू हो गया है।
अठावले का दावा- मानसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को मिलेगी मंजिल
16 Jul, 2026 11:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली / मुंबई: केंद्र सरकार में सहयोगी और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई-ए) के प्रमुख रामदास अठावले ने आगामी विधायी सत्र को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान दिया है। केंद्रीय मंत्री ने पूरा भरोसा जताया है कि देश की राजनीति की दिशा बदलने वाले दो बेहद महत्वपूर्ण कानून—महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक—संसद के इसी मानसून सत्र के दौरान हर हाल में पारित हो जाएंगे। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए याद दिलाया कि संसद के पिछले सत्र में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और समाजवादी पार्टी (सपा) की एकजुटता के चलते ये महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक गिर गए थे, लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है।
बहुमत के नए समीकरणों के सहारे एनडीए
महाराष्ट्र की राजनीति के कद्दावर नेता रामदास अठावले ने बुधवार को मीडिया से रूबरू होते हुए दावा किया कि अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास दोनों सदनों में स्थिति बेहद मजबूत और अनुकूल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी सत्र में महिला आरक्षण विधेयक को दोबारा पटल पर रखा जाएगा, ताकि साल 2029 के लोकसभा चुनावों से ही देश की महिलाओं को उनका विधायी हक (आरक्षण) मिलना सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही उन्होंने परिसीमन की वकालत करते हुए कहा कि देश में हर 30-35 वर्षों में सीटों का पुनर्गठन बेहद जरूरी प्रक्रिया है, इसलिए परिसीमन विधेयक भी समय की मांग है। केंद्रीय मंत्री ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस सहित तमाम अन्य राजनीतिक दलों से इन दोनों ऐतिहासिक विधेयकों को पारित कराने में राष्ट्रहित में सहयोग देने की भावुक अपील भी की।
विपक्षी खेमे में सेंधमारी और बिखराव का दावा
राजनीतिक रणनीतियों की चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा भी किया। उन्होंने संकेत दिए कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और शिवसेना (यूबीटी) के कुछ असंतुष्ट सांसद इस बार संसद के भीतर सरकार के इन विधेयकों का परोक्ष या अपरोक्ष रूप से समर्थन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के कांग्रेस नीत गठबंधन से अलग रुख अपनाने की संभावना भी जताई। अठावले ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि इन नए समीकरणों के चलते सरकार के पास दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा आसानी से उपलब्ध हो जाएगा, जिससे इन विधेयकों के पारित होने का रास्ता पूरी तरह साफ है।
पिछले सत्र की नाकामी को धोएगी सरकार
गौरतलब है कि बीती 17 अप्रैल को संसद के विस्तारित सत्र के दौरान मोदी सरकार को उस वक्त एक बड़ा सियासी झटका लगा था, जब विधानसभाओं में साल 2029 से महिला आरक्षण प्रभावी करने और देश में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने (परिसीमन) के उद्देश्य से लाया गया महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण गिर गया था। उस ऐतिहासिक मतदान के दौरान सदन में मौजूद कुल 528 सांसदों में से 298 सदस्यों ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने इसके विरोध में अपना मत दिया था। संवैधानिक नियमों के तहत दो-तिहाई विशेष बहुमत के लिए सरकार को न्यूनतम 352 वोटों की दरकार थी, जिससे सत्ता पक्ष महज 54 वोट दूर रह गया था। अब सरकार उसी अधूरी कसर को इस मानसून सत्र में पूरा करने के लिए पूरी ताकत झोंकने जा रही है।
सोनिया गांधी के आवास पर कांग्रेस की बड़ी बैठक, संसद में सरकार को घेरने की तैयारी
16 Jul, 2026 11:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: आगामी संसद सत्र के मद्देनजर देश के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की प्रमुख सोनिया गांधी के दिल्ली स्थित निवास स्थान पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस उच्च स्तरीय बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल सहित कांग्रेस के तमाम बड़े रणनीतिकार और वरिष्ठ नेता एक साथ बैठकर आगामी रणनीति को अंतिम रूप देंगे।
सदन के भीतर सरकार को घेरने का बनेगा चक्रव्यूह
इस रणनीतिक बैठक के मुख्य एजेंडे की बात करें तो कांग्रेस पार्टी आगामी सत्र के दौरान केंद्र सरकार को अलग-अलग मोर्चों पर घेरने की पुख्ता रूपरेखा तैयार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में न केवल जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर व्यापक चर्चा होगी, बल्कि संसद के भीतर और बाहर विपक्षी एकजुटता को बनाए रखने तथा सहयोगी दलों के साथ मजबूत समन्वय स्थापित करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। पार्टी इस बात का खाका तैयार करेगी कि किन संवेदनशील मुद्दों को प्राथमिकता देकर सदन में सरकार पर दबाव बनाया जाए।
20 जुलाई से शुरू हो रहा विधायी महामंथन
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, संसद का यह बहुप्रतीक्षित मानसून सत्र आगामी 20 जुलाई से प्रारंभ होकर 13 अगस्त तक संचालित किया जाएगा। लगभग तीन सप्ताह से अधिक चलने वाले इस सत्र के दौरान दोनों सदनों में कुल 19 बैठकें होना तय हुआ है, जिसमें देश से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा, तीखी बहस और कई जरूरी विधायी कार्य निपटाए जाएंगे। हालांकि, विपक्ष की आक्रामक तैयारियों को देखते हुए सत्र के काफी सरगर्म रहने की उम्मीद है।
परिसीमन और 'एक देश, एक चुनाव' पर मचेगा रार
मोदी सरकार इस सत्र में कई बड़े और ऐतिहासिक विधेयकों को पटल पर रखने या उन्हें आगे बढ़ाने की तैयारी में है। राजनीतिक हलकों में इस बात की सबसे ज्यादा चर्चा है कि सरकार देश में लोकसभा सीटों के पुनर्गठन से जुड़े परिसीमन विधेयक, महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक बदलावों और 'वन नेशन, वन इलेक्शन' यानी एक देश-एक चुनाव के अहम प्रस्तावों को सदन के सामने ला सकती है। इसके अलावा कुछ अन्य लंबित संवैधानिक संशोधनों पर भी सत्ता पक्ष तेजी से आगे बढ़ सकता है।
सीटों के पुनर्गठन पर विपक्षी एकजुटता की परीक्षा
सोनिया गांधी के आवास पर होने वाली इस बैठक में प्रस्तावित परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक को लेकर कांग्रेस एक विशेष रणनीति बनाने की फिराक में है। चूंकि यह मुद्दा राज्यों के प्रतिनिधित्व से सीधे तौर पर जुड़ा है, इसलिए पार्टी इस विषय पर अपना नजरिया पूरी तरह साफ करेगी। कांग्रेस का प्रयास रहेगा कि संसद के भीतर इस संवेदनशील मसले पर पूरे विपक्ष को एक मंच पर लाया जाए ताकि सरकार की एकतरफा नीतियों के खिलाफ एक साझा और बेहद मजबूत फ्रंट खड़ा किया जा सके।
भारत जोड़ो यात्रा को 'ट्रैवल व्लॉग' बताने वाला अभिजीत दीपके का पोस्ट फिर हुआ वायरल
16 Jul, 2026 11:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: साल 2022 में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अगुवाई में निकली 'भारत जोड़ो यात्रा' एक बार फिर देश के सियासी और सोशल मीडिया गलियारों में अचानक सुर्खियों में आ गई है। कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकाली गई इस व्यापक यात्रा का मुख्य उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों में जनसंपर्क बढ़ाना और राजनीतिक संवाद को जमीनी स्तर पर मजबूत करना था। कई सालों बाद इस यात्रा के दोबारा चर्चा में आने की मुख्य वजह कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके का करीब चार साल पुराना एक सोशल मीडिया पोस्ट है, जिसमें उन्होंने इस पूरी मुहिम पर तंज कसा था।
दरअसल, 8 सितंबर 2022 को अभिजीत दीपके ने माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म 'एक्स' (ट्विटर) पर एक पत्रकार के ट्वीट का जवाब देते हुए राहुल गांधी की इस यात्रा की आलोचना की थी। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा था कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा आखिरकार एक साधारण ट्रैवल व्लॉग से ज्यादा कुछ नहीं बन पाएगी। हाल के दिनों में उनका यह पुराना बयान इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है, क्योंकि कभी राहुल गांधी की मुहिम का मजाक उड़ाने वाले दीपके आज खुद घिर गए हैं। उन्होंने हाल ही में राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई बड़े नेताओं को दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे अपने प्रदर्शन में शामिल होने और समर्थन देने की गुहार लगाई है। इस बड़े विरोधाभास ने सोशल मीडिया पर एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
यूज़र्स ने दीपके को याद दिलाया पुराना रवैया
अभिजीत दीपके की पुरानी टिप्पणी जैसे ही दोबारा सतह पर आई, सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया और इंटरनेट पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि एसी कमरों में बैठकर किसी के जमीनी संघर्ष की आलोचना करना बहुत आसान होता है, लेकिन जब खुद पर बात आती है तो नजरिया बदल जाता है। वहीं एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की कि जब राहुल गांधी देश को समझने के लिए 3750 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहे थे, तब उनका उपहास उड़ाने वाले लोग आज किस मुंह से उनसे समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यदि कांग्रेस नेता इस प्रदर्शन का हिस्सा नहीं बनते हैं, तो इसके लिए उन्हें दोष देना पूरी तरह अनुचित होगा। इन तीखी प्रतिक्रियाओं ने इस पूरे मामले को और ज्यादा गरमा दिया है।
सोनम वांगचुक के समर्थन में सीजेपी का प्रदर्शन तेज
इस पूरे सोशल मीडिया विवाद के बीच, राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में हुई कथित धांधलियों और अनियमितताओं के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का धरना प्रदर्शन अब 26वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इसी आंदोलन के समानांतर प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आमरण अनशन भी 19वें दिन लगातार जारी है। वांगचुक की सेहत को लेकर संगठन द्वारा जारी मेडिकल बुलेटिन में बताया गया है कि शारीरिक रूप से वे बेहद कमजोर हो चुके हैं और डॉक्टरों की एक विशेष टीम चौबीसों घंटे उनकी सेहत पर पैनी नजर रख रही है।
20 जुलाई को 'चलो संसद' मार्च की तैयारी
आगामी 20 जुलाई को प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च को सफल बनाने के लिए सीजेपी ने एक दिवसीय सामूहिक उपवास रखने का भी देशव्यापी आह्वान किया है। इस बीच देश के विपक्षी कुनबे में भी हलचल तेज है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल सहित कई दिग्गज नेताओं ने सोनम वांगचुक से अपना अनशन तोड़ने की भावुक अपील की है। सूत्रों के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल ने व्यक्तिगत रूप से उनसे मुलाकात कर आंदोलन के प्रति अपनी एकजुटता भी प्रकट की है।
मानसून सत्र को लेकर NDA अलर्ट, बैठक में एजेंडे और रणनीति पर होगा विचार
16 Jul, 2026 08:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: आगामी संसद सत्र को लेकर देश की राजनीतिक राजधानी में रणनीतिक तैयारियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपने सभी सांसदों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आगामी 21 जुलाई को आमंत्रित की है। यह उच्च स्तरीय बैठक संसद के बजट व मानसून सत्र के औपचारिक आगाज के ठीक एक दिन बाद आयोजित होने जा रही है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सत्र के दौरान विपक्षी दलों के हमलों का जवाब देने और सरकार के विधायी कार्यों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए साझा रणनीति तैयार करना है।
राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, यह महत्वपूर्ण बैठक 21 जुलाई को सुबह ठीक 9:30 बजे संसद पुस्तकालय भवन परिसर में बने प्रसिद्ध जीएमसी बालयोगी ऑडिटोरियम में शुरू होगी। इस महामंथन में लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदनों में एनडीए गठबंधन का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी सांसद अनिवार्य रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। गौरतलब है कि संसद का यह अत्यंत महत्वपूर्ण सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, जिसकी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
सदन के भीतर मजबूत तालमेल बनाने पर रहेगा जोर
सत्र की शुरुआत के तुरंत बाद बुलाई गई इस बैठक की अहमियत काफी ज्यादा है, क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री सहित गठबंधन के तमाम शीर्ष नेता शामिल होंगे। बैठक के दौरान दोनों सदनों में सरकार के पक्ष को मजबूती से रखने और विभिन्न विधेयकों को पारित कराने के लिए फ्लोर मैनेजमेंट यानी सदन के भीतर आपसी समन्वय को बेहतर बनाने पर विस्तृत चर्चा होगी। शीर्ष नेतृत्व द्वारा सभी सांसदों को सत्र के दौरान पूरे समय सदन में उपस्थित रहने और जनहित के मुद्दों पर सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने रखने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।
विपक्ष के तीखे तेवरों से निपटने की बनेगी रणनीति
संसद के इस सत्र के काफी हंगामेदार रहने के आसार जताए जा रहे हैं, जिसे देखते हुए सत्ता पक्ष पहले से ही सतर्क है। देश के विभिन्न समसामयिक मुद्दों, आर्थिक नीतियों और अन्य जरूरी विषयों पर विपक्षी खेमा सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर रहा है। ऐसे में विपक्ष के हर आक्रामक सवाल का तथ्यात्मक और तार्किक जवाब देने के लिए एनडीए के कुनबे को एकजुट करना और सभी सहयोगी दलों के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित करना ही इस बैठक का मुख्य एजेंडा रहने वाला है।
शहीद दिवस कार्यक्रम पर सियासत, ममता को बुलाया, मगर शर्तों के साथ
15 Jul, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बयानों की गरमाहट बढ़ गई है। आगामी 21 जुलाई को आयोजित होने वाले एक विशेष राजनीतिक कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को खुला निमंत्रण भेजा है। हालांकि, इस आमंत्रण के साथ ही बंगाल कांग्रेस ने ममता बनर्जी पर तीखा राजनीतिक तंज भी कसा है। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि मुख्यमंत्री को अब सार्वजनिक तौर पर यह स्वीकार कर लेना चाहिए कि लगभग तीन दशक पहले कांग्रेस पार्टी से अलग होकर अपनी नई राह चुनने का उनका निर्णय एक बड़ी भूल थी। यह कड़ा संदेश बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्ष शुभांकर सरकार की ओर से जारी किया गया है।
शहीद दिवस कार्यक्रम की तैयारियों के बीच दी नसीहत
दरअसल, पश्चिम बंगाल कांग्रेस आगामी 21 जुलाई को 'शहीद दिवस' के रूप में मनाने की रूपरेखा तैयार कर रही है। प्रदेश अध्यक्ष शुभांकर सरकार इसी प्रस्तावित कार्यक्रम की प्रशासनिक और सांगठनिक तैयारियों की समीक्षा करने पहुंचे थे। कार्यक्रम स्थल का जायजा लेने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने तृणमूल सुप्रीमो पर निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इतिहास गवाह है कि अतीत में ममता बनर्जी द्वारा लिया गया वह राजनीतिक फैसला गलत था, और आज के समय में उन्हें अपनी उस पुरानी गलती को मान लेने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए।
इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश न करने की दी चुनौती
राजनैतिक गलियारों में हलचल मचाने वाले अपने इस बयान में शुभांकर सरकार ने ममता बनर्जी को इतिहास का सम्मान करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई 1993 को हुए ऐतिहासिक युवा कांग्रेस आंदोलन के महत्व को उसी रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए, न कि उसकी विरासत को अपने हिसाब से बदलने या नया रंग देने की कोशिश होनी चाहिए। उन्होंने तृणमूल नेतृत्व को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें सच में नैतिक साहस है, तो उन्हें इतिहास के तथ्यों को विकृत नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि शहीद मीनार पर कांग्रेस द्वारा आयोजित होने वाले इस मुख्य कार्यक्रम में आकर शहीदों को नमन करने के लिए मुख्यमंत्री का स्वागत है।
ममता बनर्जी को लगातार झटके, मदन मित्र ने पार्टी पदों से किया किनारा
15 Jul, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के राजनैतिक हलकों में बुधवार को उस समय भारी खलबली मच गई, जब 'कालीघाट तृणमूल' के कद्दावर चेहरे और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद विश्वस्त माने जाने वाले नेता मदन मित्र ने अचानक अपनी ही पार्टी के सभी सांगठनिक पदों को छोड़ने की आधिकारिक घोषणा कर दी। कमरहटी विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के विधायक मदन मित्र ने अपनी ही पुरानी पार्टी के खिलाफ बगावती रुख अख्तियार करते हुए विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी का हाथ थाम लिया है। इस अप्रत्याशित राजनैतिक उलटफेर के बाद बंगाल की चुनावी और सांगठनिक सियासत में जबरदस्त सरगर्मी पैदा हो गई है।
विधानसभा में सीधे पहुंचे विपक्ष के नेता के कक्ष में
बुधवार दोपहर को कोलकाता के राजनैतिक गलियारों में उस समय एक अनोखा नजारा देखने को मिला, जब आंखों पर अपना पारंपरिक काला चश्मा लगाए और सफेद बंगाली पंजाबी पहने मदन मित्र सीधे विधानसभा भवन पहुंचे। वे बिना किसी झिझक के सीधे नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के सरकारी कक्ष में दाखिल हुए और उनके ठीक बगल वाली कुर्सी पर जाकर बैठ गए। इसी बैठक के दौरान उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कालीघाट तृणमूल के सभी महत्वपूर्ण पदों से अलग होने का ऐलान कर दिया, जिसने तृणमूल नेतृत्व को भी हैरान कर दिया है।
ममता बनर्जी के लिए बड़ा राजनैतिक आघात
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में चल रही सियासी खींचतान के बीच मदन मित्र जैसे वरिष्ठ और जनाधार वाले नेता का इस तरह पाला बदलना तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। मदन मित्र न केवल पार्टी के जमीनी संगठन पर मजबूत पकड़ रखते हैं, बल्कि उन्हें ममता बनर्जी के सबसे पुराने सहयोगियों में गिना जाता रहा है। ऐसे में उनका विपक्ष के खेमे में जाकर बैठना और पदों से त्यागपत्र देना आगामी दिनों में बंगाल की राजनीति को एक नया मोड़ दे सकता है।
शरद पवार का समर्थन मिला, फिर भी परिसीमन बिल पर क्यों फंसा है गणित?
15 Jul, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार ने विपक्षी खेमे को एक तगड़ा झटका देने के संकेत दिए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आगामी मानसून सत्र के दौरान शरद पवार की अगुवाई वाला गुट केंद्र की मोदी सरकार के दो बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक विधेयकों—महिला आरक्षण बिल और परिसीमन (डिलिमिटेशन) बिल का समर्थन कर सकता है। पार्टी इन दोनों विधेयकों के पक्ष में संसद के भीतर मतदान करने की रणनीति बना रही है।
फिलहाल एनडीए में शामिल होने की योजना नहीं
राजनैतिक गलियारों में इस फैसले के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या शरद पवार का गुट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा बनने जा रहा है। हालांकि, अंदरूनी सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि पार्टी का यह रुख केवल मुद्दों पर आधारित है। शरद पवार गुट फिलहाल एनडीए में शामिल होने के पक्ष में बिल्कुल नहीं है, बल्कि वह संसद में केवल इन विधेयकों की जरूरत को देखते हुए सरकार का साथ देगा। लोकसभा में पवार गुट के पास कुल 8 सांसद हैं, जिनका समर्थन मिलने से केंद्र सरकार को इन अहम कानूनों को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत राजनीतिक बल मिलेगा।
समर्थन के बाद भी दो-तिहाई बहुमत की चुनौती
यदि शरद पवार का गुट निचले सदन में सरकार के पक्ष में खड़ा भी हो जाता है, तब भी एनडीए के लिए दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा पार करना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा। वर्तमान में लोकसभा के भीतर एनडीए के पास कुल 319 सांसदों का संख्या बल है। उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों के शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल होने से पहले यह संख्या 313 थी। अब शरद पवार के आठ सांसदों का साथ मिलने के बाद एनडीए का कुल आंकड़ा बढ़कर 327 तक पहुंच जाएगा। इसके बावजूद, लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत साबित करने के लिए आवश्यक 362 सीटों के मुकाबले सरकार 35 सीटें पीछे रह जाएगी।
2029 के चुनावों से पहले परिसीमन लागू करना मुख्य लक्ष्य
भले ही सदन में सरकार दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से थोड़ी दूर रह जाए, लेकिन आगामी लोकसभा चुनाव 2029 से पहले देश में परिसीमन प्रक्रिया को लागू करना भारतीय जनता पार्टी का सबसे बड़ा राजनीतिक एजेंडा माना जा रहा है। मोदी सरकार इस विधेयक को पहले भी संसद के पटल पर रख चुकी है, लेकिन आवश्यक बहुमत न होने के कारण इसे वापस लेना पड़ा था। अब विपक्षी दलों के सांसदों द्वारा मिल रहे इस संभावित समर्थन के बाद एक बार फिर सरकार द्वारा इस बिल को सदन में दोबारा पेश करने की सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
20 जुलाई से शुरू होने वाले सत्र में पेश हो सकता है विधेयक
संसद का आगामी मानसून सत्र आगामी 20 जुलाई से प्रारंभ होने जा रहा है, जिसमें इस बार भारी हंगामे के आसार हैं। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार इस सत्र के दौरान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को संसद के सामने प्रस्तुत करने की पूरी तैयारी में है। इस नए विधेयक के माध्यम से देश में लोकसभा की कुल सीटों की संख्या को बढ़ाकर 850 करने और पूरे भारत में नए सिरे से परिसीमन की प्रक्रिया को हरी झंडी देने का बड़ा प्रस्ताव लाया जा सकता है।
'चोरी की संपत्ति की मंजूरी चाहिए', शिंदे पर संजय राउत के विवादित बोल
15 Jul, 2026 03:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में एक बार फिर बयानों के तीखे तीर चलने शुरू हो गए हैं। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर हमला बोलते हुए एक बड़ा विवादित बयान दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री शिंदे पर तंज कसते हुए आरोप लगाया कि वे 'चोरी की जागीर' लेकर देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों पर घूम रहे हैं। राउत का यह तीखा हमला उस वक्त सामने आया है, जब एकनाथ शिंदे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करने के लिए दिल्ली के दौरे पर हैं।
कानून-व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान संजय राउत देश की मौजूदा कानून व्यवस्था पर जमकर बरसे। उन्होंने एकनाथ शिंदे गुट को 'चोरी का कुनबा' करार देते हुए सवाल उठाया कि क्या वाकई देश में संविधान और कानून का राज बचा है। राउत ने कहा कि शिंदे मुंबई से इस 'चोरी की मिल्कियत' को लेकर गृह मंत्री के दरबार में पहुंचे हैं और वहां इसे वैध बनाने की गुहार लगा रहे हैं। राउत का यह आक्रोश हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसदों के पाला बदलकर शिंदे गुट में शामिल होने के बाद फूटा है। इस बड़ी टूट के बाद अब लोकसभा में उद्धव ठाकरे के पास केवल तीन सांसद ही शेष रह गए हैं, जिसे पार्टी के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।
राम मंदिर चंदे और प्रार्थना पर छिड़ी नई जंग
भारतीय जनता पार्टी द्वारा उद्धव ठाकरे से 'राम रक्षा' का पाठ करने की मांग किए जाने पर भी संजय राउत ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि वे नागपुर के मंदिर में नहीं, बल्कि सड़क पर उतरकर जनता के बीच 'राम रक्षा' का पाठ करेंगे क्योंकि वे जमीन से जुड़े लोग हैं। भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर के दानपात्र से जुड़े 5,500 करोड़ रुपये के कथित घपले पर बात करने के बजाय सत्तापक्ष के लोग प्रार्थना और पाठ की दुहाई देकर मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।
गठबंधन में दरार की खबरों को बताया भ्रामक अफवाह
महाविकास अघाड़ी (एमवीए) में फूट और परिसीमन विधेयक को लेकर सुप्रिया सुले के रुख पर चल रही खबरों को राउत ने पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने इसे विपक्षी खेमे की साजिश करार देते हुए कहा कि सुप्रिया सुले खुद ऐसी भ्रामक खबरों से हैरान हैं और गठबंधन में कोई दरार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राकांपा (एसपी) नेता जयंत पाटिल की मुख्यमंत्री से मुलाकात केवल उनके क्षेत्र के स्थानीय मुद्दे को लेकर थी, जिसे गलत राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य पर जताई गहरी चिंता
नीट पेपर लीक मामले के विरोध में पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा किए जा रहे अनशन पर भी संजय राउत ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील और राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा है, जिस पर केंद्र सरकार को बिना किसी देरी के तुरंत ध्यान देना चाहिए और उनकी मांगों पर विचार करना चाहिए।
सरकार को मिलेगा शरद पवार की पार्टी का साथ? सुप्रिया सुले के बयान से बढ़ी सियासी हलचल
15 Jul, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: देश की राजनीति में चर्चा का विषय बने विवादित परिसीमन विधेयक को लेकर एक बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आ रहा है। यह वही विधेयक है जिसे केंद्र सरकार बीते अप्रैल महीने में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत की कमी के चलते संसद में पारित कराने में विफल रही थी। अब इस मुद्दे पर शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के रुख में नरमी के संकेत मिल रहे हैं, जिससे इस बिल को लेकर नए समीकरण बनते दिख रहे हैं।
सुप्रिया सुले ने दिए रुख बदलने के संकेत
पार्टी की वरिष्ठ नेता और सांसद सुप्रिया सुले ने बुधवार को इस बात का इशारा किया है कि यदि केंद्र सरकार इस विधेयक में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करने के लिए तैयार होती है, तो उनकी पार्टी इस पर सकारात्मक विचार कर सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार विभिन्न राज्यों में लोकसभा और विधानसभा की सीटों में 50 फीसदी तक की वृद्धि करने संबंधी कोई बड़ा संशोधन बिल में शामिल करती है, तो एनसीपी (शरद पवार) इस कानून को पारित कराने में सरकार को अपना सहयोग दे सकती है।
संसद में गिर चुके विधेयक को लेकर नई सुगबुगाहट
गौरतलब है कि पिछली बार विपक्षी दलों के कड़े विरोध और आवश्यक संख्या बल न होने के कारण यह परिसीमन बिल कानून का रूप नहीं ले सका था। लेकिन सुप्रिया सुले के इस ताजा बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात की सुगबुगाहट तेज हो गई है कि क्या सरकार विपक्षी दलों की मांगों को ध्यान में रखकर बिल का नया प्रारूप तैयार करेगी। यदि ऐसा होता है, तो आगामी सत्रों में इस बिल को लेकर संसद में एक नया मोड़ देखने को मिल सकता है।
बांकीपुर उपचुनाव से पहले BJP का बड़ा दांव, प्रो. केसी सिन्हा समेत कई नेताओं की एंट्री
15 Jul, 2026 02:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: बिहार में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की सरगर्मियों के बीच प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (JSP) को एक तगड़ा सियासी झटका लगा है। चुनावी बिगुल फुंकने के ठीक पहले पार्टी के कई दिग्गज और नामचीन चेहरों ने सामूहिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया है। बुधवार को आयोजित एक विशेष मिलन समारोह के दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने इन सभी नेताओं को अंगवस्त्र पहनाकर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण करवाई।
बीजेपी खेमे में शामिल हुए जन सुराज के कद्दावर नेता
जन सुराज को अलविदा कहकर भाजपा में शामिल होने वाले प्रमुख नामों में देश के विख्यात गणितज्ञ और बिहार के शैक्षणिक गलियारों की प्रतिष्ठित शख्सियत प्रो. केसी सिन्हा सबसे आगे हैं। उनके साथ ही दीघा विधानसभा क्षेत्र से पूर्व में चुनावी किस्मत आजमा चुके बिट्टू सिंह और मनेर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व उम्मीदवार गोपाल सिंह ने भी कमल का दामन थाम लिया है। राजनीतिक गलियारों में इन सभी वरिष्ठ नेताओं का एक साथ पार्टी छोड़ना जन सुराज के लिए एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है।
प्रशांत किशोर की नई पार्टी के सामने खड़ी हुई बड़ी चुनौती
राजनैतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि बांकीपुर उपचुनाव के इस नाजुक मोड़ पर जन सुराज के मुख्य रणनीतिकारों और चेहरों का भाजपा की तरफ रुख करना प्रशांत किशोर की उम्मीदों को प्रभावित कर सकता है। पार्टी जिस समय इस उपचुनाव के जरिए प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने और खुद को एक बड़े विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रही है, ठीक उसी समय इतने महत्वपूर्ण नेताओं का साथ छूटना उसके चुनावी सफर को चुनौतीपूर्ण बना सकता है।
शिक्षा और गणित जगत का बड़ा गौरव हैं प्रो. केसी सिन्हा
भाजपा में शामिल होने वाले प्रो. केसी सिन्हा का कद शिक्षा के क्षेत्र में बेहद सम्मानित है। भोजपुर जिले की माटी में जन्मे प्रो. सिन्हा ने अपनी शुरुआती तालीम पूरी करने के बाद स्नातक (बीएससी) और स्नातकोत्तर (एमएससी) की डिग्रियों में सर्वोच्च स्थान पाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किए थे। इसके बाद उन्होंने पटना साइंस कॉलेज में गणित के प्रोफेसर के रूप में लंबे समय तक छात्रों का मार्गदर्शन किया। अध्यापन के अलावा उन्होंने लेखन में भी अमिट छाप छोड़ी है और उनकी लिखी 70 से अधिक गणित की पुस्तकें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले देश के लाखों छात्र-छात्राओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
लीडरशिप चेंज की चर्चाओं के बीच भूपेश बघेल ने किया स्थिति साफ
15 Jul, 2026 12:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी कलह थमती नजर नहीं आ रही है। इस सियासी खींचतान को सुलझाने और जमीनी हकीकत का आकलन करने के बाद पंजाब कांग्रेस के प्रभारी व छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी रिपोर्ट आलाकमान को सौंप दी है। भूपेश बघेल और पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने दिल्ली में कांग्रेस संगठन महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल के आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की और राज्य के ताजा घटनाक्रम से अवगत कराया।
नेतृत्व बदलने के सवाल पर भड़के भूपेश बघेल
केसी वेणुगोपाल से मुलाकात के बाद जब मीडिया ने भूपेश बघेल से पंजाब में लीडरशिप (प्रदेश अध्यक्ष) बदलने को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने तीखा रुख अपनाया। बघेल ने कहा, "मैंने पंजाब का छह दिवसीय दौरा किया है, जहाँ मैंने सभी गुटों के नेताओं से मुलाकात की। पंजाब कांग्रेस कमेटी की सामूहिक बैठक के साथ-साथ नेताओं से वन-टू-वन (अकेले में) चर्चा भी हुई है। मैंने अपनी विस्तृत रिपोर्ट केसी वेणुगोपाल को सौंप दी है।" जब पत्रकारों ने रिपोर्ट के नतीजों पर सवाल किया तो उन्होंने दोटूक लहजे में कहा, "मैं आपको रिपोर्ट की बातें क्यों बताऊं? यह कोई बच्चों का खेल नहीं है।"
चन्नी बनाम वड़िंग: क्या है विवाद की मुख्य वजह?
पंजाब कांग्रेस में जारी इस घमासान के केंद्र में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग हैं।
चन्नी गुट की मांग: चरणजीत सिंह चन्नी आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रदेश कांग्रेस की कमान अपने हाथों में लेना चाहते हैं। उनका गुट लगातार राजा वड़िंग को हटाने के लिए हाईकमान पर दबाव बना रहा है।
हाईकमान का फैसला: कांग्रेस आलाकमान ने पिछले दिनों सांगठनिक नियुक्तियों की एक सूची जारी कर अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा, जबकि चन्नी को केवल चुनाव प्रचार समिति (कैंपेन कमेटी) का अध्यक्ष बनाकर संतुष्ट करने की कोशिश की। इसके बावजूद दोनों गुटों में तकरार कम नहीं हो रही है।
2022 की गलती से सबक, राजा वड़िंग पर भरोसा
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान इस बार चुनाव से ठीक पहले नेतृत्व बदलकर कोई बड़ा जोखिम (रिस्क) लेने के मूड में नहीं है। पार्टी को साल 2022 के विधानसभा चुनाव का कड़वा अनुभव है, जब ऐन वक्त पर कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया था। पार्टी का वह दांव उलटा पड़ा था और कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था।
इसके अलावा, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को हटाने न जाने के पीछे उनका हालिया प्रदर्शन भी है। साल 2022 की हार के बाद वड़िंग ने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के लिए कड़ी मेहनत की। इसी का नतीजा था कि राज्य की 13 लोकसभा सीटों में से 7 सीटों पर कांग्रेस ने शानदार जीत दर्ज की, जिसके कारण फिलहाल आलाकमान का पूरा समर्थन राजा वड़िंग के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।
लोकसभा में बदलेगी बैठने की व्यवस्था, TMC बागियों को नई सीटें मिलने के संकेत
15 Jul, 2026 11:19 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। आगामी 20 जुलाई से शुरू होने जा रहे संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा के भीतर राजनीतिक और बैठने का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जल्द ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को सदन में नई सीटें आवंटित कर सकते हैं। इन सांसदों ने खुद को मूल पार्टी से अलग करते हुए 'नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में विलय का दावा किया है। इस नए गुट की वरिष्ठ नेता और बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार को लोकसभा में NCPI का मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) बनाया जा सकता है। दस्तीदार के मुताबिक, स्पीकर ने उन्हें नई सीटें, संसद भवन में कार्यालय और 19 जुलाई की सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का आश्वासन दिया है।
पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद TMC में दोफाड़
यह पूरा सियासी घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद शुरू हुआ। चुनाव परिणामों के बाद पार्टी विधानसभा और संसद दोनों जगह दो धड़ों में बंट गई।
विधानसभा: टीएमसी के टिकट पर जीते 60 विधायकों ने अपना एक अलग गुट बना लिया है।
लोकसभा: निचले सदन में टीएमसी के कुल 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने बगावत करते हुए NCPI में विलय का दावा किया और खुद को सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जोड़ लिया।
राज्यसभा: उच्च सदन में भी टीएमसी के तीन सांसदों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है, जिन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है।
NDA की बढ़ेगी ताकत, NCPI बनेगी सबसे बड़ी सहयोगी
सूत्रों के अनुसार, 20 जुलाई से पहले स्पीकर ओम बिरला इस लंबित विलय पर अपना आधिकारिक फैसला सुना सकते हैं। यदि इस विलय को औपचारिक मंजूरी मिल जाती है, तो सदन में अब तक शून्य सीट वाली NCPI एकाएक भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बनकर उभरेगी। इस फेरबदल से लोकसभा में एनडीए (NDA) का आंकड़ा दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच जाएगा, हालांकि किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए गठबंधन को अब भी करीब 40 अतिरिक्त सांसदों के समर्थन की जरूरत बनी रहेगी।
शिवसेना (UBT) ने खड़ा किया कानूनी मोड़
जहां एक तरफ टीएमसी के बागी नई व्यवस्था को अंतिम रूप देने के लिए दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी खेमे ने इसे कानूनी चुनौती देने की तैयारी कर ली है। शिवसेना (UBT) के नेता अरविंद सावंत ने इस तरह के विलय पर गंभीर संवैधानिक सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपनी ही पार्टी के छह बागी सांसदों का उदाहरण देते हुए कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत सांसदों का कोई भी समूह स्वतंत्र रूप से किसी अन्य दल में विलय नहीं कर सकता, जब तक कि मूल राजनीतिक दल इसके लिए अपनी आधिकारिक सहमति न दे। इस संबंध में उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को एक विरोध पत्र भी सौंपा है।
डिजिटल क्रांति से जगमगाया अबूझमाड़
बाहरी आडंबरों से अलग है दादाजी धूनीवाले धाम, जहां आध्यात्मिक शक्ति का होता है अनुभव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल से समय पर उपचार ने बचाई 4 वर्षीय मासूम की जान
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल से दिव्यांग समझराम साहू को मिली बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्रायसायकल
निशातपुरा रेलवे स्टेशन से भोपाल के विकास को मिलेगी नई रफ्तार : मंत्री सारंग
जौहर यूनिवर्सिटी को राहत, ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक से टली कार्रवाई
पेपर लीक पर संसद में होगी बहस? सरकार-विपक्ष के बीच बनी सहमति के संकेत
इंडिगो विमान की राजकोट एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग, यात्रियों में मची हलचल
भाजपा पर बरसे केजरीवाल, बोले- हमने पंजाब को शिक्षा में 27वें से पहले स्थान पर पहुंचाया
