राजनीति
विरोध के जोश में ‘होश’ खो बैठी कांग्रेस, प्रदर्शन में अपनी ही पार्टी के खिलाफ लगा दिए ‘मुर्दाबाद’ के नारे
11 Dec, 2025 10:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सतना। राजनीति में जोश होना अच्छी बात है, लेकिन कभी-कभी ‘अति-उत्साह’ भारी फजीहत का कारण बन जाता है। ऐसा ही कुछ नजारा सतना में देखने को मिला है। यहां मध्यप्रदेश शासन (Madhya Pradesh Government) की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी (Minister of State Pratima Bagri) के भाई की गांजा तस्करी में गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक ऐसा ‘सेल्फ गोल’ कर दिया, जिसने पूरी पार्टी की किरकिरी करा दी है।
सतना जिले के सिविल लाइन चौराहे पर मंत्री प्रतिमा बागरी के खिलाफ प्रदर्शन करने आए कांग्रेसियों की जुबान ऐसी फिसली कि वे अपनी ही पार्टी को कोसने लगे। विरोध के फ्लो में कार्यकर्ताओं ने “कांग्रेस पार्टी मुर्दाबाद” के नारे लगा दिए। अब यह वीडियो सोशल मीडिया जमकर वायरल हो रहा है।
दरअसल, राज्यमंत्री के भाई अनिल बागरी के गांजा तस्करी में पकड़े जाने के बाद कांग्रेस आक्रामक मूड में है। मंगलवार को यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता सतना के सिविल लाइन चौराहे पर प्रदर्शन कर रहे थे। कार्यकर्ता पूरे जोश में थे और एक सुर में प्रतिमा बागरी इस्तीफा दो, भारतीय जनता पार्टी मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे थे। नारेबाजी का यह सिलसिला तेज होता गया और इसी दौरान कार्यकर्ताओं का ध्यान भटक गया। ‘मुर्दाबाद’ के फ्लो में कार्यकर्ता अचानक कांग्रेस पार्टी मुर्दाबाद चिल्लाने लगे। जब तक उन्हें अपनी इस भारी चूक का अहसास होता और वे रुकते, तब तक यह मजेदार वाकया कैमरों में कैद हो चुका था। जो अब सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है।
इस घटना के बाद कांग्रेस पार्टी खुद ही हंसी का पात्र बन गयी है। गौरतलब है कि यह प्रदर्शन एक बेहद गंभीर मुद्दे पर हो रहा था। राज्यमंत्री के सगे भाई और जीजा 46 किलो गांजा तस्करी के आरोप में जेल गए हैं, जिसे लेकर कांग्रेस मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है। लेकिन इस एक ‘वायरल वीडियो’ ने पूरे विरोध प्रदर्शन की दिशा ही बदल दी और अब चर्चा मंत्री के भाई से ज्यादा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की इस चूक की हो रही है।
राहुल गांधी की जर्मनी यात्रा पर सियासत, BJP ने बताया “पार्टी करने वाला और पर्यटन का नेता”
11 Dec, 2025 09:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र (Winter Session) के दौरान कांग्रेस (Congress) नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) जर्मनी की यात्रा (Trip to Germany) पर जाने वाले हैं। वह 15 से 20 दिसंबर तक बर्लिन में भारतीय प्रवासी कांग्रेस के एक कार्यक्रम में भाग लेंगे। वहीं संसद का शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर को खत्म हो रहा है। ऐसे में बीजेपी ने राहुल गांधी की विदेश यात्रा पर सवाल उठाए हैं और उन पर निशाना साधा है। वहीं बीजेपी की आलोचनाओं के जवाब में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने अपने भाई राहुल गांधी का बचाव किया है और बीजेपी पर पलटवार किया है।
शीतकालीन सत्र के दौरान राहुल गांधी की विदेश यात्रा की बीजेपी ने तीखी आलोचना की है और कहा है कि राहुल कर्तव्यों की उपेक्षा करते हैं। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “राहुल गांधी ने दोबारा साबित किया है कि वह LOP हैं यानी वह लीडर ऑफ पर्यटन और पार्टी करने वाले नेता हैं। राहुल गांधी एक गैर-गंभीर नेता हैं। लोग काम करने के मोड में हैं और राहुल गांधी परमानेंट छुट्टी के मोड में हैं। वह विदेश जाना पसंद करते हैं। जब बिहार में चुनाव थे तब वह जंगल सफारी में थे। वह विदेश के टूर पर थे। अब जब संसद चल रही है तो वह विदेश जा रहे हैं। उनकी प्राथमिकताएं क्लीयर हैं। मुझे नहीं पता कि वह किस रीजन से जर्मनी जा रहे हैं, लेकिन हो सकता है कि वह भारत के खिलाफ जहर उगलने के लिए वहां जा रहे हों। ये भारत बदनामी ब्रिगेड और भारत बदनामी का दौरा है। तो वो एक बार फिर छुट्टी मनाने और भारत को बदनाम करने के लिए विदेश जा रहे हैं।”
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी राहुल गांधी की यात्रा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “संसद सत्र के दौरान राहुल गांधी अपना ज्यादातर समय विदेश में बिताते हैं और बाद में कहते हैं कि उन्हें बोलने का मौका ही नहीं मिलता। बिहार चुनाव के दौरान भी वे विदेश में ही थे। वे अंशकालिक नेता हैं, गंभीर नेता नहीं हैं।”
प्रह्लाद जोशी ने कहा, “मैं राहुल गांधी से पूछता हूं कि कर्नाटक में जीत के समय आपने क्या कहा था? झारखंड में INDI गठबंधन की जीत के समय, तेलंगाना में आपकी जीत के समय आपने क्या कहा था? लेकिन हारने पर आप ईवीएम और चुनाव आयोग को दोष देते हैं। वे कहते हैं कि जब जीत होती है तो उनकी वजह से होती है, लेकिन जब हार होती है तो व्यवस्था की वजह से होती है।”
राहुल गांधी की विदेश यात्रा पर बीजेपी द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी का बयान सामने आया और उन्होंने बीजेपी पर पलटवार किया। प्रियंका गांधी ने कहा, “PM नरेंद्र मोदी अपने कार्य समय का लगभग आधा हिस्सा देश से बाहर बिताते हैं तो विपक्ष के नेता की यात्रा पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं?”
बिहार सरकार के पूर्व मंत्री विजय कृष्ण ने राजद से इस्तीफा दिया
11 Dec, 2025 08:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बाढ़ लोकसभा क्षेत्र से पूर्व सांसद और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री विजय कृष्ण ने राजद की प्राथमिक सदस्यता और सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को एक भावुक पत्र लिखा है।
अपने त्यागपत्र में विजय कृष्ण ने स्पष्ट किया कि वे अब दलगत राजनीति और सक्रिय सार्वजनिक जीवन से संन्यास ले रहे हैं। उन्होंने लिखा कि लंबे विचार-विमर्श के बाद उन्होंने राजनीतिक जीवन से पूरी तरह अलग होने का फैसला किया है और पार्टी से निवेदन किया कि उनका त्यागपत्र स्वीकार किया जाए।
विजय कृष्ण की राजनीतिक पहचान 2004 के लोकसभा चुनाव में तब मजबूत हुई जब उन्होंने बाढ़ सीट से तत्कालीन रेलमंत्री नीतीश कुमार को 37 हजार से अधिक वोटों से मात दी थी। इससे पहले वे 1996, 1998 और 1999 में नीतीश कुमार से चुनाव हार चुके थे। 2004 में जीत के बाद वे बिहार सरकार में मंत्री भी बने। अपने राजनीतिक करियर में विजय कृष्ण ने कई बार दल बदले।
कर्नाटक में टीपू जयंती पर फिर सियासी विवाद, कांग्रेस विधायक ने विधानसभा में रखा प्रस्ताव, उठाई ये मांग
11 Dec, 2025 07:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । कर्नाटक(Karnataka) में टीपू की जयंती को लेकर विवाद फिर भड़क गया है। सत्तारूढ़ कांग्रेस(Ruling Congress) के विधायक शिवानंद कशप्पनवार(Shivanand Kashappanwar) ने 18वीं सदी के मैसुरू शासक की जयंती के आयोजन को लेकर कर्नाटक विधानसभा में ध्यानार्षण प्रस्ताव पेश करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री के रूप में अपने पिछले कार्यकाल के दौरान सिद्धरमैया(Siddaramaiah) ने इस परंपरा की शुरुआत की थी। हालांकि, इस मुद्दे पर कोडागु समेत विभिन्न स्थानों पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद इस परंपरा पर विराम लगा दिया गया था। कोडागु(Kodagu) में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन में पुलिस गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। प्रदर्शनों के बाद टीपू की जयंती बेहद सादगी से मनाई गई और बाद में धीरे-धीरे इसे स्थगित कर दिया गया।
अब हुंगुंड विधायक ने एक बार फिर इसे तूल दिया है। कशप्पनवर चाहते हैं कि सरकार टीपू की जयंती को प्रायोजित करे, जिस पर विपक्षी भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा ने कहा है कि वह इसका कड़ा विरोध करेगी। कशप्पनवर ने कहा कि उन्होंने टीपू की जयंती के आयोजन को लेकर प्रस्ताव दिया है। हमें राज्य सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता बीएस येदियुरप्पा ने खुद टीपू की तरह पोशाक धारण की और जयंती समारोह में शामिल हुए।
कांग्रेस विधायक का क्या है तर्क
कांग्रेस विधायक ने कहा, ‘जब उन्हें जरूरत थी तब उन्होंने इसे मनाया, लेकिन अब वे नहीं चाहते कि टीपू जयंती को मनाया जाए, लेकिन हम चाहते हैं कि इसका आयोजन हो।’ इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने पत्रकारों से कहा, ‘वे चाहे टीपू जयंती मनाए, ओसामा बिन लादेन का जन्मदिन और पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस मनाए। यह उनकी सरकार है। जनता को पता चल जाएगा कि उनका झुकाव किसकी तरफ है।’
किस तरह की आई प्रतिक्रिया
कर्नाटक के वक्फ और आवास मंत्री बी जेड जमीर अहमद खान ने कहा कि वह टीपू जयंती का आयोजन करते रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘देश भर में टीपू अनुयायी टीपू जयंती का आयोजन करते आ रहे हैं। हमने भी पिछले महीने इसका आयोजन किया था। सिद्धारमैया इसे विधान सौध के बैंक्वेट हॉल में आयोजित किया करते थे, जिसे अब रोक दिया गया है। जब वहां इसका आयोजन बंद कर दिया गया है, क्या हमें इसे कहीं और आयोजित नहीं करना चाहिए।’
सांसद गोगोई ने कसा तंज बोले- इंडिगो के पीछे की कहानी का पर्दाफाश होना चाहिए
10 Dec, 2025 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। इंडिगो मामले को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ती जा रही है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल मंत्री के बयान दे देने से सरकार अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पूरे प्रकरण की असल कहानी सामने आनी चाहिए और सदन में विस्तार से चर्चा होना बेहद जरूरी है।
गौरव गोगोई ने मीडिया से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि पिछले दो दिनों में सरकार ने संसद के दोनों सदनों में दिए गए बयानों में पूरी जिम्मेदारी एक निजी कंपनी पर डाल दी है, जैसे उसकी खुद की कोई भूमिका ही न हो। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो नियामक संस्थाओं की कोई जिम्मेदारी ही नहीं बची। हजारों उड़ानें रद्द हुईं, यात्रियों को एयरपोर्ट पर कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा और उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा, लेकिन सरकार अपनी जवाबदेही से दूर खड़ी दिखाई देती है।
सांसद ने यह भी कहा कि पायलटों की सुविधा के लिए लाए गए नए नियमों को सरकार ने अचानक वापस ले लिया। न पायलटों को राहत मिली, न यात्रियों को और न ही सरकार ने अपनी भूमिका स्वीकार की। सिर्फ एक नोटिस जारी कर देने से सरकार की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि लोकसभा में मंत्री का बयान आने के बाद विपक्ष ने असहमति जताते हुए वॉकआउट किया, क्योंकि सरकार पूरे मामले पर ईमानदार चर्चा से बच रही है। उनका कहना था कि एक सप्ताह में कितनी उड़ानें रद्द हुईं, यह केवल आंकड़ा नहीं है, बल्कि इसके पीछे की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। गोगोई ने एविएशन इंडस्ट्री की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार भले ही तेज़ी से बढ़ते एविएशन बाजार की बात करे, लेकिन इसका क्या लाभ जब एयरपोर्ट पर बुनियादी सुविधाएं महंगी हों, टिकटों के दाम आसमान छू रहे हों, पायलटों और ग्राउंड स्टाफ की स्थितियां खराब होती जा रही हों और पूरी इंडस्ट्री कुछ निजी कंपनियों के इशारों पर चल रही हो। इसी मुद्दे पर दूसरी सांसद फौजिया खान ने भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नोटिस भेजना जरूरी है, लेकिन क्या सारी गलती सिर्फ इंडिगो की है? क्या सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती? उन्होंने सवाल किया कि जो नियम लागू किए गए थे, वे क्या सही थे और यदि नहीं, तो अचानक पूरी व्यवस्था कैसे ठप हो गई? वापस लिए गए नियमों की सच्चाई भी सामने आनी चाहिए।
वंदे मातरम से जुड़े एक अन्य विवाद पर कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे जो भी कहा जाए, उससे सच्चाई नहीं बदलती। उन्होंने कहा कि इतिहास स्पष्ट बताता है कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान किसने क्या भूमिका निभाई और आज इस विषय पर सवाल उठाने वालों का उस दौर में कोई अस्तित्व तक नहीं था।
सोनिया गांधी को नोटिस जारी किए जाने पर कांग्रेस नेता किरण कुमार चमाला ने कहा कि बार-बार सोनिया गांधी और उनके परिवार को निशाना बनाना राजनीतिक विद्वेष का संकेत है। उन्होंने बताया कि चुनाव सुधारों पर चर्चा दो सत्रों की मांग के बाद शुरू हो सकी। उनके अनुसार कई राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया का दुरुपयोग किया जा रहा है, जबकि इसके प्रावधान सीमित हैं और इसे केवल आवश्यकता पड़ने पर ही लागू किया जाना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल एविएशन सेक्टर की खामियों को उजागर किया है, बल्कि राजनीतिक माहौल को भी गर्मा दिया है। सरकार की जवाबदेही और नियामक संस्थाओं की भूमिका पर उठे सवाल अभी भी जस के तस बने हुए हैं।
अखिलेश का हमला, चुनाव जीते जाते हैं, हारे जाते हैं, लेकिन चुनाव आयोग का काम है निष्पक्ष रहना
10 Dec, 2025 10:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में समाजवादी पार्टी के प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने चुनाव सुधार पर चर्चा के दौरान कहा कि अभी बीजेपी के सदस्य यूपी के चुनाव पर भी बोल रहे थे। मैं कहना चाहूंगा कि उपचुनाव में निष्पक्ष कार्यवाही कहीं भी देखने को नहीं मिली। रामपुर उपचुनाव में मुख्यमंत्री और बीजेपी नेतृत्व ने तय किया था कि यहां से बीजेपी जीतेगी। इतना ही नहीं वोटिंग के दिन सभी ने देखा कि किस तरह से पुलिस-प्रशासन इस बात पर लगा था कि कोई वोटर घर से न निकले। पहली बार बीजेपी वहां से लोकसभा चुनाव जीती। एक-एक घटना की सूचना हमारी पार्टी ने चुनाव आयोग को दी है, लेकिन इसके बावजूद चुनाव आयोग ने किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। जब हम समझ गए कि चुनाव आयोग पूर्वाग्रह से ग्रसित है। चुनाव जीते जाते हैं, हारे जाते हैं, लेकिन चुनाव आयोग का काम है निष्पक्ष रहना। एक समय था जब कांग्रेस से लड़ते थे, आज आपसे लड़ रहे हैं। एक वक्त था जब हम पांच सांसद की पार्टी थे, आज यूपी में सबसे बड़ी पार्टी हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि सुधार की यह प्रक्रिया चुनाव आयोग से ही शुरू होना चाहिए। चंडीगढ़ जैसी वोट चोरी पर, बंदूक की नोंक पर वोट देने से रोकने पर, एफिडेविट की रसीद होने के बावजूद मिलने से इंकार पर, एक वोटर के कई वोट डालने पर, इन सभी पर रोक लगाना चाहिए। एक देश एक चुनाव के साथ मतदाता सूची एक होने पर कहूंगा कि यूपी में आधार जैसे कार्ड को मान ही नहीं रहे। ये एसआईआर नहीं है, अंदर ही अंदर एनआरसी वाला काम किया जा रहा हैं। यूपी के मुख्यमंत्री योगी कह रहे हैं कि हम डिटेंशन सेंटर बना रहे हैं। लोकतंत्र में फिर से भरोसा जगाया जाए, ईवीएम हटाकर बैलट से चुनाव कराए जाएं।
सपा सांसाद अखिलेश यादव ने सीईसी की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की कांग्रेस की मांग का समर्थन कर कहा कि बैलट से वोटिंग होनी चाहिए। जो लोग आज तकनीक की दुहाई दे रहे हैं, वे देख लें कि तकनीकी में जापान-जर्मनी जैसे देश कहां खड़े हैं और भारत कहां खड़ा है। जब जापान-जर्मनी जैसे दुनिया के आधुनिक देश बैलट से वोटिंग करा सकते हैं, तब हम क्यों नहीं कर सकते है। अखिलेश ने एसआईआर पर कहा कि यूपी में 10 लोगों की जान जा चुकी है। नौ बीएलओ की हमारे पास सूची है। इन 9 में से कुछ के नाम गिनाकर अखिलेश ने कहा, मुरादाबाद में बीएलओ सर्वेश सिंह ने फांसी लगा ली। बिजनौर में बीएलपी शोभा रानी को हार्ट अटैक आ गया था। देवरिया में बीएलओ लेखपाल आशीष की ड्यूटी के दौरान तबीयत बिगड़ी। कुछ समय बाद उनकी मृत्यु हो गई। फतेहपुर में लेखपाल सुधीर कुमार ने शादी के एक दिन पहले फांसी लगा ली।
नियम और कानून अहम हैं, लेकिन कानून लोगों पर बोझ नहीं होना चाहिए
10 Dec, 2025 09:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनावों में एनडीए की जीत के लिए मंगलवार को सत्तारूढ़ सरकार के सभी सांसदों की एक बैठक में पीएम मोदी को बधाई दी गई। बैठक की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि पीएम मोदी ने सभी सांसदों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में लोगों का जीवन आसान बनाने के लिए काम करने का निर्देश दिया ताकि लोगों को कोई परेशानी न हो। बता दें पीएम मोदी की यह टिप्पणी इंडिगो के मौजूदा परिचालन संकट के कारण लोगों को हो रही परेशानियों के बीच आई है।
बिहार चुनाव में जीत के लिए पीएम मोदी को माला पहनाकर स्वागत किया गया। उन्होंने एनडीए के सभी सांसदों को देश, अपने निर्वाचन क्षेत्रों और अपने राज्यों के लिए क्या करना चाहिए, इस बारे में दिशा-निर्देश और मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि मैं एक बात का विशेष रूप से उल्लेख करना चाहूंगा। पीएम मोदी ने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए सुधारों पर बहुत ज़ोर दिया है। रिजिजू ने कहा कि उनका आशय देश के आम लोगों के जीवन को आसान और आरामदायक बनाने के लिए सुधारों से था। हर क्षेत्र में सुधार।
रिजिजू ने कहा कि पीएम मोदी ने कहा कि सभी को यह तय करना चाहिए कि लोगों को सरकार से कोई परेशानी न हो। नियम और कानून अहम हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल लोगों के लिए परेशानी पैदा करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून लोगों पर बोझ नहीं होना चाहिए। इंडिगो एयरलाइन के परिचालन में लगातार हो रही देरी और रद्दीकरण का सिलसिला जारी है, जबकि संकट आठवें दिन भी जारी है। मंगलवार को भी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु के हवाई अड्डों पर उड़ानें रद्द कर दी गईं। इस बीच, सरकारी प्रतिनिधि और डीजीसीए के अधिकारी इंडिगो के सीईओ से मिलकर स्थिति पर चर्चा करने वाले हैं।
सीएम रेखा गुप्ता को आप पार्टी ने बीजेपी का पप्पू सीएम कहा
10 Dec, 2025 08:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को बीजेपी की पप्पू सीएम कहा है। आप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रेखा गुप्ता के बयानों के छोटे-छोटे वीडियो क्लिप जारी कर लिखा, बीजेपी की पप्पू सीएम का कोई मुकाबला नहीं है।
दरअसल, रेखा ने हाल ही में इंटरव्यू में कहा था कि एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) एक टेंपरेचर है, जिसे किसी भी इंस्ट्रूमेंट से मापा जा सकता है। इस टिप्पणी को लेकर सीएम रेखा की आलोचना का सामना कर रही हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। केजरीवाल ने पोस्ट में दिल्ली की सीएम का इंटरव्यू का वीडियो पोस्ट कर लिखा- ये नया विज्ञान कब आया कि एक्यूआई अब टेंपरेचर बन गया?
इंडिगो संकट पर प्रधानमंत्री मोदी का बड़ा बयान, जानें नियम को लेकर क्या कहा…
9 Dec, 2025 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (airline indigo) की उड़ानों में यात्रियों की दुश्वारियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. आज आठवें दिन यह संकट जारी है. हालांकि एयरलाइन धीरे-धीरे अपने शेड्यूल को स्थिर करने की कोशिश कर रही है. वहीं, इंडिगो संकट को देखते हुए अब सरकार (Government) पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है. इंडिगो की चल रही ऑपरेशनल दिक्कतों को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है. मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी, डायरेक्टर और ज्वाइंट सेक्रेटरी जैसे बड़े अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे जल्द ही देश के बड़े एयरपोर्ट पर जाकर जमीनी हकीकत का जायजा लें. ये अधिकारी मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, पुणे, गुवाहाटी, गोवा और तिरुवनंतपुरम जैसे एयरपोर्ट्स का दौरा करेंगे.
IndiGo संकट पर PM मोदी का बड़ा बयान- नियम कानून सिस्टम को ठीक करने के लिए
इंडिगो संकट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि नियम कानून सिस्टम को ठीक करने के लिए हैं. नियम-कानून लोगों को परेशान करने के लिए नहीं होते.
दिल्ली एयरपोर्ट पर 152 फ्लाइट्स कैंसिल
इंडिगो की फ्लाइट में कैसिलेशन का दौर आज भी जारी है. दिल्ली एयरपोर्ट पर आज इंडिगो की आने वाली 76 और जाने वाली 76 फ्लाइट्स कैंसिल हुई है. इस तरह अब तक 152 फ्लाइट्स कैंसिल हो चुकी है.
इंडिगो संकट पर राम मोहन नायडू आज देंगे जवाब
इंडिगो फ्लाइट्स में देरी और कैंसिलेशन से शुरू हुआ संकट अब संसद तक पहुंच गया है. मंगलवार (9 दिसंबर) को दोपहर 12 बजे सिविल एविएशन मिनिस्टर राम मोहन नायडू लोकसभा में इस मुद्दे पर बयान देंगे. इससे पहले उन्होंने राज्यसभा में कल (8 दिसंबर) को कहा था कि समस्या किसी तकनीकी सिस्टम की नहीं, बल्कि इंडिगो की क्रू रोस्टरिंग और उनकी ऑपरेशनल प्लानिंग की वजह से हुई है.
60% रूट पर इंडिगो की ‘मोनोपोली’
देश में पिछले एक हफ्ते से इंडिगो (IndiGo) की बड़ी संख्या में फ्लाइट्स कैंसिल होने से हवाई सफर पूरी तरह गड़बड़ा गया है. इसकी सबसे बड़ी वजह भारतीय एविएशन सेक्टर पर इंडिगो का दबदबा माना जा रहा है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, देश में उड़ने वाले हर 10 यात्रियों में से 6 इंडिगो से सफर करते हैं. भारत में कुल लगभग 1,200 घरेलू रूट हैं और इनमें से 950 से ज्यादा पर इंडिगो उड़ान भरता है. चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से करीब 600 रूट (60% से ज्यादा) ऐसे हैं जहां इंडिगो का पूरी तरह एकाधिकार यानी (Monopoly) है यानी यहां सिर्फ वही एयरलाइन चलती है.
IndiGo की फ्लाइट में हो सकती है 5 फीसदी कटौती
टीओआई के मुताबिक, इंडिगो की फ्लाइट्स शेड्यूल में पहले चरण में 5 फीसदी की कटौती तय मानी जा रही है, जिसका मतलब है कि इंडिगो से रोजाना करीब 110 उड़ानें छिन सकती हैं. यही नहीं, हालात नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में एक और 5 फीसदी की अतिरिक्त कटौती भी की जा सकती है.
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का दावा- चुनाव आयोग को एसआईआर करने का नैतिक अधिकार नहीं
9 Dec, 2025 09:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। संसद में शीतकालीन सत्र के दौरान चुनाव सुधारों पर मंगलवार को गरमागरम बहस चल रही है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के नेतृत्व में विपक्ष ने चुनाव आयोग (ईसीआई) पर तीखा हमला कर मतदाता सूचियों के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के संचालन के लिए उसकी निष्पक्षता और उसके कानूनी अधिकार, दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सदन को संबोधित कांग्रेस नेता तिवारी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यहाँ कई सदस्यों को चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने पड़ रहे हैं।
कांग्रेस नेता तिवारी ने सुझाव दिया कि पहला सुधार चुनाव आयोग के सदस्यों के चयन से जुड़े कानून में संशोधन होना चाहिए। मेरा सुझाव है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को चुनाव आयोग की समिति में शामिल करना चाहिए। कांग्रेस सांसद ने विभिन्न राज्यों में चल रही व्यवस्थित आंतरिक सुधार (एसआईआर) प्रक्रिया की भी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन भारत के चुनाव आयोग के पास एसआईआर आयोजित करने का कोई कानूनी औचित्य नहीं है। उन्होंने आयोग के इसतरह के सुधारों को लागू करने के अधिकार पर भी सवाल उठा दिया। संसद के निचले सदन ने चुनाव सुधारों पर चर्चा शुरू की है, जिसमें विभिन्न राज्यों में चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई एसआईआर प्रक्रिया भी शामिल है। विपक्षी दल महीनों से एसआईआर पर बहस की मांग कर रहे हैं, कांग्रेस मतदाता सूची में विसंगतियों का आरोप लगा रही है।
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता (एलओपी) चर्चा में हस्तक्षेप कर सकते हैं। एलओपी एसआईआर के मुखर आलोचक रहे हैं और उनका आरोप है कि केंद्र सरकार प्रक्रिया का इस्तेमाल असली मतदाताओं को हटाने के लिए कर रही है। केसी वेणुगोपाल चुनाव सुधारों पर बहस में भाग लेने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं में से एक हैं। अन्य नेताओं में मनीष तिवारी, वर्षा गायकवाड़, मोहम्मद जावेद, उज्ज्वल रमन सिंह, ईसा खान, रवि मल्लू, इमरान मसूद, गोवाल पदवी और एस ज्योतिमणि शामिल हैं। राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा एसआईआर पर चर्चा शुरू करने की संभावना है।
बात दें कि विपक्ष लगातार एसआईआर को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर है। एसआईआर के काम में लगे बीएलओ की मौतों का मुद्दा भी उठ सकता है। आरोप है अधिक दबाव के कारण बीएलओ खुदकुशी कर रहे हैं या उनकी मौत हो रही है। इधर बिहार चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए की रिकॉर्ड जीत के बाद विपक्ष एक बार फिर वोट चोरी का मुद्दा उठा सकता है।
देशभक्ति का संबंध दिल की सच्चाई और अमल से है, न कि नारेबाजी से : मौलाना मदनी
9 Dec, 2025 07:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को 150 वर्ष पूरे होने पर संसद में चल रही बहस के बीच जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा है कि मुसलमानों को मर जाना स्वीकार है लेकिन शिर्क नहीं। उन्होंने कहा कि किसी के वंदे मातरम् पढ़ने या गाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इबादत में किसी दूसरे को शरीक नहीं कर सकता।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मदनी ने कहा कि वंदे मातरम् की कविता की कुछ पंक्तियां ऐसे धार्मिक विचारों पर आधारित हैं जो इस्लामी आस्था के खिलाफ हैं। विशेष रूप से इसके चार अंतरों में देश को दुर्गा माता जैसी देवी के रूप में प्रस्तुत किया है और उसकी पूजा के शब्द प्रयोग किए गए हैं, जो किसी मुसलमान की बुनियादी आस्था के खिलाफ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी देता है। इन अधिकारों के मुताबिक किसी भी नागरिक को उसके धार्मिक विश्वास के विरुद्ध किसी नारे, गीत या विचार को अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
मदनी ने कहा कि वतन से मोहब्बत करना अलग बात है और उसकी पूजा करना अलग। मुसलमानों को इस देश से कितनी मोहब्बत है इसके लिए उन्हें किसी के प्रमाण-पत्र की जरूरत नहीं है। आजादी की लड़ाई में मुसलमानों और जमीयत उलमा-ए-हिंद के बुजुर्गों की कुर्बानियां और विशेष रूप से देश के बंटवारे के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद की कोशिशें दिन की रोशनी की तरह साफ हैं। आजादी के बाद भी देश की एकता और अखंडता के लिए उनकी कोशिशें भुलाई नहीं जा सकतीं। हम हमेशा कहते आए हैं कि देशभक्ति का संबंध दिल की सच्चाई और अमल से है, न कि नारेबाजी से।
मदनी ने कहा कि वंदे मातरम् बंकिम चंद्र चटर्जी के उपन्यास आनंद मठ से लिया गया एक अंश है। इसकी कई पंक्तियां इस्लाम के धार्मिक सिद्धांतों के खिलाफ हैं, इसलिए मुसलमान इस गीत को गाने से परहेज करते हैं। वंदे मातरम् का पूरा अर्थ है- मां, मैं तेरी पूजा करता हूं। यह शब्द स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि यह गीत हिंदू देवी दुर्गा की प्रशंसा में लिखा गया था, न कि भारत माता के लिए। वंदे मातरम् गीत मां के सामने झुकने और उसकी पूजा करने की बात करता है, जबकि इस्लाम अल्लाह के अलावा किसी के सामने झुकने और पूजा करने की अनुमति नहीं देता। हम एक ईश्वर को मानने वाले हैं, हम उसके अलावा किसी को भी न अपना पूज्य मानते हैं और न ही किसी के सामने सजदा करते हैं। इसलिए हम इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं कर सकते। मर जाना स्वीकार है, लेकिन शिर्क स्वीकार नहीं है। मरेंगे तो इस्लाम पर और जिएंगे तो इस्लाम पर।
आदित्य ठाकरे का दावा, एकनाथ शिंदे के 22 विधायक पाला बदलने को तैयार, जाने क्या बोले देवेंद्र फडणवीस?
9 Dec, 2025 05:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । शिवसेना (UBT) विधायक आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) ने सोमवार को दावा किया कि महायुति (Grand Alliance) के एक सहयोगी दल के 22 विधायक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस Chief Minister Devendra Fadnavis() के ‘करीबी’ हो गए हैं और पाला बदलने को तैयार हैं। उनका परोक्ष तौर पर इशारा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Deputy Chief Minister Eknath Shinde) नीत शिवसेना की ओर था। हालांकि, सीएम ने इस दावे से इनकार कर दिया है। साथ ही कहा है कि शिंदे सेना सहयोगी दल है।
जून 2022 में, शिंदे के नेतृत्व में विधायकों के विद्रोह के बाद शिवसेना विभाजित हो गई थी, जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में, जनवरी 2024 में, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा था कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला गुट ‘असली’ शिवसेना है, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उपमुख्यमंत्री अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के साथ राज्य में सत्तारूढ़ महायुति का एक घटक है।
आदित्य ठाकरे ने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का नाम लिए बिना दावा किया, ‘सत्ता पक्ष की एक पार्टी है और दो गुट हैं। एक गुट के 22 विधायक मुख्यमंत्री के करीबी हो गए हैं। उनके पास अच्छा धन है और वे मुख्यमंत्री के इशारों पर नाचने लगे हैं।’ उन्होंने विधान भवन परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए दावा किया कि 22 विधायक ‘पाला बदलने को तैयार हैं।’
वर्ली से विधायक ठाकरे ने कहा कि इन 22 विधायकों में से एक खुद को ‘उप-कप्तान’ कहता है। उनका परोक्ष तौर पर इशारा उद्योग मंत्री उदय सामंत की ओर था। अतीत में, शिवसेना (UBT) ने दावा किया था कि शिंदे और अजित पवार के साथ सामंत राज्य के तीसरे मुख्यमंत्री हो सकते हैं। राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों में विपक्ष के नेताओं की नियुक्ति को लेकर निष्क्रियता के मुद्दे पर, आदित्य ठाकरे ने सवाल किया कि सरकार विपक्ष के नेताओं से क्यों डरती है।
फडणवीस ने कहा, ‘अगर कोई ऐसा कहता है, तो कल कोई और दावा कर सकता है कि आदित्य ठाकरे के 20 विधायक भी भाजपा के साथ हैं। सिर्फ कह देने से कुछ नहीं होता।’ उन्होंने साफ किया है कि भाजपा को उनके विधायक लेने की कोई जरूरत नहीं है।
शिवसेना (UBT) नेता भास्कर जाधव को उनकी पार्टी ने विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद के लिए नामित किया है, लेकिन विधानसभाध्यक्ष द्वारा कैबिनेट स्तर की इस नियुक्ति पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। शिवसेना (UBT) 20 विधायकों के साथ निचले सदन में सबसे बड़ा विपक्षी दल है।
पूर्व में, जाधव ने राज्य विधानमंडल को पत्र लिखकर जानना चाहा था कि क्या ऐसा कोई नियम है जो यह अनिवार्य करता हो कि विपक्ष के नेता के पद पर दावा करने के लिए किसी विपक्षी दल के पास विधानसभा की कुल संख्या का 10 प्रतिशत (288 में से 29 सीट) होना चाहिए।
पिछले साल राज्य विधानसभा चुनाव में विपक्ष की करारी हार के बाद, कोई भी पार्टी कुल 288 सीट में से 10 प्रतिशत सीट नहीं जीत सकी।
शिवसेना (UBT) के पूर्व विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) अंबादास दानवे का विधान परिषद में विपक्ष के नेता के तौर पर कार्यकाल अगस्त में समाप्त हो गया था। कांग्रेस ने अपने एमएलसी सतेज पाटिल को उच्च सदन में विपक्ष के नेता के रूप में नियुक्त करने के लिए नामित किया है।
राज्य विधान परिषद के सभापति राम शिंदे ने रविवार को कहा कि उनके कार्यालय को विपक्ष के नेता की नियुक्ति का प्रस्ताव मिला है और हितधारकों के साथ बातचीत के बाद निर्णय लिया जाएगा।
जिन लोगों ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया, वे हमें देशभक्ति का पाठ पढ़ा रहे
9 Dec, 2025 05:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। राज्यसभा में वंदे मातरम् पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री अमित शाह पर पलटवार किया है। खड़गे ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा है कि जिन लोगों ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया, वे आज देशभक्ति का पाठ पढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् को आजादी का नारा बनाने का काम कांग्रेस पार्टी ने ही किया है। वहीं पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू के सदन में जिक्र को लेकर खड़गे ने कहा कि जवाहरलाल नेहरु को बदनाम करने की सभी कोशिशें व्यर्थ हो जाएंगी और बीजेपी इसमें कभी कामयाब नहीं होगी।
इससे पहले राज्यसभा में खड़गे ने अपने संबोधन की शुरुआत वंदे मातरम् के नारों से की। उन्होंने बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे खुद कई सालों से वंदे मातरम् गीत गा रहे हैं लेकिन वंदे मातरम् को पहले नहीं गाने वालों ने इसे अब गाना शुरू कर दिया है। इसके बाद खड़गे ने अमित शाह पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् गीत भारत के सार्वजनिक जीवन में तब प्रवेश करता है, जब गुरूदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में इसे पहली बार गाया था, जिसका जिक्र हमारे गृह मंत्री अमित शाह ने किया, लेकिन इसका बैकग्राउंड क्या था, ये उन्होंने नहीं बताया। जो चीज उनको अच्छी लगती है और हमारे लीडर्स का अपमान करने के लिए जो बोलना है, वे उतना ही बोलते हैं, आगे नहीं बोलते।
खड़गे ने कहा कि इस तरह वंदे मातरम् को आजादी का नारा बनाने का काम कांग्रेस पार्टी ने किया। कांग्रेस ने अपने अधिवेशनों और कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के नियमित गायन की परम्परा शुरू की थी। क्या बीजेपी ने ऐसा किया? खड़गे ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि इतिहास ये है कि आप लोग हमेशा आजादी के और आजादी की लड़ाई के खिलाफ थे। खड़गे ने कहा कि महात्मा गांधी ने जब 1921 में असहयोग आंदोलन शुरू किया, तब लाखों कांग्रेसी स्वतंत्रता सेनानी भारत माता की जय, महात्मा गांधी की जय और वंदे मातरम् का नारा लगाते हुए जेल जा रहे थे। और आप क्या कर रहे थे और अंग्रेजों के पास नौकरी। और आप हमें देशभक्ति सिखाते हो? आप देशभक्ति के नाम से भी डरते थे और अंग्रेजों की सेवा करते थे।
बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर TMC को देंगे सीधी चुनौती, 135 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान
9 Dec, 2025 11:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल (West Bengal) के मुर्शिदाबाद (Murshidabad) में बाबरी मस्जिद (Babri Mosque) की नींव रख चुके विधायक हुमायूं कबीर (MLA Humayun Kabir) अब TMC को सीधी चुनौती देते नजर आ रहे हैं। एक ओर जहां उन्होंने नई पार्टी बनाने का ऐलान किया है। वहीं, 135 सीटों पर चुनाव लड़ने के साथ गठबंधन जैसी योजनाएं भी बता दी हैं। 2 दशक से ज्यादा लंबे राजनीतिक करियर वाले कबीर करोड़पति हैं। वह टीएमसी और भारतीय जनता पार्टी समेत कई दलों में रह चुके हैं।
कितनी है हुमायूं कबीर की संपत्ति
ADR यानी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट के अनुसार, कबीर के पास कुल 3 करोड़ 7 लाख 42 हजार 300 रुपये की संपत्ति है। इनमें 96 लाख 75 हजार 930 रुपये की चल संपत्ति है। जबकि, अचल संपत्ति 2 करोड़ 10 लाख 66 हजार 370 रुपये है। ये आंकड़े पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में दाखिल हलफनामे से लिए गए हैं।
चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में उन्होंने एक टाटा स्टॉर्म सफारी कार, 3 लाख 95 हजार रुपये के 80 ग्राम सोने की जानकारी दी थी। इसके अलावा उनके पास कृषि भूमि भी है।
कौन हैं हुमायूं कबीर
कभी कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के करीबी माने जाने वाले हुमायूं कबीर की राजनीतिक पारी की शुरुआत कांग्रेस से ही हुई थी। कांग्रेस में रहने के दौरान उन्होंने पंचायत चुनाव लड़ा था। लेकिन 20 नवंबर 2012 में उन्होंने अलग होकर टीएमसी के साथ जाने का फैसला किया।
कांग्रेस में रहने के दौरान उन्होंने पंचायत चुनाव लड़ा। वहीं, 2011 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। कांग्रेस के बाद टीएमसी में आते ही उन्हें मंत्री बना दिया गया था, लेकिन रेजिनानगर विधानसभा उपचुनाव हारने के बाद वह पद पर बने नहीं रह सके।
खास बात है कि साल 2015 में उन्होंने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी पर भी सवाल उठा दिए थे। उन्होंने आरोप लगाए थे कि वह अपने भतीजे को ‘राजा’ बनाने की कोशिश कर रहीं हैं। इसके बाद पार्टी ने 6 साल के लिए उन्हें बाहर कर दिया था। इसके बाद वह कुछ समय के लिए समाजवादी पार्टी में रहे और 2016 में निर्दलीय विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। हार के बाद उन्हें कांग्रेस का दाम थामा, लेकिन कुछ समय बाद ही 2018 में भाजपा में शामिल हो गए थे। साल 2020 में उन्होंने दोबारा टीएमसी का रुख किया था।
दलों का मांगा समर्थन
पिछले एक महीने में, उन्होंने एक नए धर्मनिरपेक्ष गठबंधन की बात की थी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) तथा ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के साथ ‘सकारात्मक बातचीत’ के संकेत दिए हैं। उन्होंने साथ ही मुर्शिदाबाद, मालदा, नदिया और 24 परगना जिलों में हेलीकॉप्टर दौरे की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने बंगाल की 135 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारने की बात कही है।
मीडिया से बातचीत में कबीर ने कहा था कि वह 22 दिसंबर को अपनी पार्टी बनाएंगे। साथ ही कहा था कि AIMIM के साथ गठबंधन की कोशिश करेंगे। उन्होंने दावा किया है कि राज्य की 135 सीटों पर उम्मीदवारों को उतारने का उनका फैसला गेम चेंजर साबित होगा। उन्होंने कहा था, ‘मैं नई पार्टी बनाऊंगा, जो मुसलमानों के लिए काम करेगी। मैं 135 सीटों पर उम्मदवार उतारूंगा। मैं बंगाल चुनाव में गेम चेंजर बनूंगा। मैं AIMIM के साथ संपर्क में हूं और उनके साथ चुनाव लड़ूंगा। मेरी ओवैसी से बात हुई है।’ हालांकि, अब तक AIMIM ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
ममता बनर्जी को सीधी चुनौती
गुरुवार को कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सीधी चुनौती दे दी थी। उन्होंने कहा था कि अगले विधानसभा चुनाव में वह सीएम नहीं बन पाएंगी। कबीर ने कहा था, ‘मुख्यमंत्री को पूर्व मुख्यमंत्री बनना है। 2026 में मुख्यमंत्री फिर मुख्यमंत्री नहीं रहेंगी। वह शपथ नहीं लेंगी और पूर्व मुख्यमंत्री कहलाएंगी।’ उस दौरान ही उन्होंने टीएमसी से इस्तीफा देने की बात कही थी।
केशव प्रसाद मौर्य ने राजद, कांग्रेस और सपा पर मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाया
9 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) पर मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि यह राजनीतिक दल घुसपैठियों को अपना वोट बैंक मानते हैं। डिप्टी सीएम ने कहा कि चाहे समाजवादी पार्टी हो, कांग्रेस हो, राष्ट्रीय जनता दल हो, या टीएमसी हो-ये सभी घुसपैठियों को अपना वोट बैंक मानते हैं और मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं। हम घुसपैठियों को वोट बैंक नहीं मानते हैं, और न ही तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं।
घुसपैठ का आगे जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में घुसपैठियों के खिलाफ भारत छोड़ो अभियान चल रहा है। मुझे पूरा भरोसा है कि भेष बदलकर रहने वाले घुसपैठिए जल्द ही देश से बाहर किए जाएंगे। तेजी से घुसपैठियों को चिन्हित करने का काम किया जा रहा है; वह दिन दूर नहीं जब सभी घुसपैठियों को भारत से खदेड़ दिया जाएगा।
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