राजनीति
केरल निकाय चुनाव में कांग्रेस की धमक, बीजेपी का चौंकाने वाला रिजल्ट
14 Dec, 2025 10:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केरल (Kerala) में सत्ता का सेमिफाइनल (Semi-finals) माने जा रहे अहम स्थानीय निकाय चुनावों (elections) के नतीजे अब धीरे-धीरे साफ होने लगे हैं. राज्य के 244 केंद्रों और 14 जिला कलेक्ट्रेट में वोटों की गिनती चल रही है, जहां कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ (UDF), और वाम दलों के गठबंधन एलडीएफ (LDF) के बीच कड़ी टक्कर दिख रही है. वहीं शुरुआती नतीजों में शानदार प्रदर्शन के बावजूद बीजेपी की उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा है. यहां सभी की नजरें इन नतीजों पर हैं, क्योंकि इससे 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर जनता का रुझान पता चलेगा.
केरल के 6 नगर निगम, 14 जिला पंचायत, 87 नगर पालिका, 152 ब्लॉक पंचायत और 941 ग्राम पंचायत के लिए चुनाव हुए थे. राज्य चुनाव आयुक्त ए शाहजहां ने गुरुवार को घोषणा की थी कि केरल में इस साल के स्थानीय निकाय चुनावों में 1995 के बाद से सबसे ज्यादा मतदान हुआ है.
राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, दो चरणों में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में दूसरे चरण में 76.08 प्रतिशत मतदान हुआ. वहीं 9 दिसंबर को हुई पहले चरण की वोटिंग में 70.91 प्रतिशत मतदान हुआ था. इस हिसाब से निकाय चुनावों में कुल 73.69 प्रतिशत मतदान रिकॉर्ड हुआ.
जिला पंचायतों की बात करें तो अब तक आई 14 सीटों के नतीजों में से यूडीएफ और एलडीएफ ने 7-7 सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले में जेल में बंद सीपीएम नेता ए पद्मकुमार के वार्ड में भाजपा ने जीत हासिल की. अरनमूला पंचायत के सातवें वार्ड से भाजपा उम्मीदवार उषा आर नायर विजयी रहीं. वहीं तिरुवनंतपुरम नगर निगम के कोडुंगनूर डिवीजन से भाजपा उम्मीदवार वीवी राजेश ने जीत हासिल की है. राजेश भाजपा के महापौर पद के संभावित उम्मीदवार माने जा रहे नेता हैं.
केरल निकाय चुनाव में 152 ब्लॉक पंजायतों के नतीजें अब तक साफ हो चके हैं. इसमें यूडीएफ 70 सीटों के साथ सबसे आगे चल रही है. वहीं 66 सीटें जीतकर एलडीएफ दूसरे स्थान पर, जबिक एनडीए को 2 सीटों पर जीत मिली है. वहीं 11 पंचायतों में मुकाबला टाई रहा है.
अब तक आए 941 ग्राम पंचायत के रिजल्ट में से कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ ने 360 सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं 350 सीटों पर सीपीएम की अगुवाई वाले एलडीएफ को 350 सीटें, बीजेपी नीत एनडीए को 32, जबकि 18 सीटों पर अन्य को जीत मिली है.
इससे पहले 2020 के स्थानीय निकाय चुनावों में सत्ताधारी एलडीएफ को भारी जीत मिली थी. एलडीएफ ने राज्य के 5 निगम, 43 नगरपालिकाएं, 11 जिला पंचायतें और 514 ग्राम पंचायतें अपने नाम की थीं. वहीं यूडीएफ ने कन्नूर नगर निगम के अलावा 41 नगरपालिकाओं, 3 जिला पंचायतों और 321 ग्राम पंचायतों में जीत हासिल की थी. दूसरी तरफ एनडीए ने 3 नगरपालिकाओं और 19 ग्राम पंचायतों में सत्ता हासिल की. कासरगोड और वायनाड जिला पंचायतों में एलडीएफ और यूडीएफ के बीच मुकाबला टाई रहा था, जिसे लॉटरी निकालकर सुलझाया गया. इसमें कासरगोड एलडीएफ को और वायनाड यूडीएफ को मिला.
रिपोर्ट्स के अनुसार, LDF को भरोसा है कि वह त्रिशूर को छोड़कर उन सभी कॉर्पोरेशनों पर अपना कब्जा बनाए रखेगी. उसे उम्मीद है कि वह मलप्पुरम, वायनाड और एर्नाकुलम को छोड़कर सभी जिला पंचायतों पर भी कब्जा कर लेगी.
वहीं, UDF ने तीन कॉर्पोरेशन एर्नाकुलम, त्रिशूर और कन्नूर के अलावा छह जिला पंचायतों और 500 से ज्यादा ग्राम पंचायतें जीतने लक्ष्य रखा है. इनमें एर्नाकुलम, पठानमथिट्टा, वायनाड और मलप्पुरम की जिला पंचायतें शामिल हैं.
BJP के लिए ये निकाय चुनाव राज्य की जमीनी राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. भगवा दल से जुड़े सूत्रों ने बताया कि उसे उम्मीद है कि वह तिरुवनंतपुरम और त्रिशूर कॉर्पोरेशनों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी. लोकसभा चुनावों में त्रिशूर जीतने के भरोसे के साथ, BJP पूरे राज्य की नगर पालिकाओं में अपनी उपस्थिति का महत्वपूर्ण विस्तार करने पर नजर गड़ाए हुए है.
अमरिंदर सिंह का बयान, कहा- भाजपा में मुझसे सलाह नहीं ली जाती, लेकिन कांग्रेस में लौटने का सवाल ही नहीं
14 Dec, 2025 09:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । पंजाब(Punjab) के पूर्व मुख्यमंत्री (Chief Minister)और भारतीय जनता पार्टी(Bharatiya Janata Party) के नेता अमरिंदर सिंह(Amarinder Singh) ने शुक्रवार को बड़ा बयान दिया। भाजपा के कामकाज की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विपरीत, पार्टी उनसे परामर्श नहीं कर रही है। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस में लौटने की संभावना को पूरी तरह खारिज किया।
मीडिया को दिए इंटरव्यू में अमरिंदर सिंह ने कहा कि कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्हें जिस तरह से मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था, उससे वह अब भी आहत हैं, इसलिए कांग्रेस में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि भाजपा में सभी निर्णय दिल्ली में लिए जाते हैं और जमीनी नेताओं से परामर्श नहीं किया जाता। उन्होंने कहा, ‘मेरे पास 60 साल का राजनीतिक अनुभव है, लेकिन मैं खुद को उन पर थोप नहीं सकता।’
हालांकि, अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मोदी का पंजाब के लिए विशेष स्नेह है और वह राज्य के लिए कुछ भी करेंगे। नवजोत कौर सिद्धू के इस बयान पर कि पंजाब में 500 करोड़ रुपये का सूटकेस देने वाला मुख्यमंत्री बनता है, सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी को अस्थिर बताया और सिद्धू को राजनीति छोड़कर क्रिकेट कमेंट्री पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। सिंह ने कहा कि भाजपा पंजाब में तभी मजबूत हो सकती है जब वह शिरोमणि अकाली दल के साथ हाथ मिलाए। उन्होंने दावा किया कि दोनों दल अंततः एक साथ आएंगे, क्योंकि पंजाब में गठबंधन के बिना कोई सरकार नहीं बन सकती।
मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तंज कसा
वर्तमान आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पंजाब आतंकवाद के वर्षों के बाद सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तंज कसते हुए कहा कि वह केवल टीवी पर आते हैं और चुटकुले सुनाते हैं। सिंह ने आरोप लगाया कि मुफ्त की योजनाओं के कारण पंजाब भिखारी राज्य बन गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मान केवल नाममात्र के मुखिया हैं, जबकि पंजाब के असली फैसले अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ले रहे हैं। सिंह ने लोगों से स्थिरता के लिए भाजपा पर विचार करने का आग्रह किया, क्योंकि भारत की सुरक्षा पंजाब के हितों से जुड़ी हुई है।
भविष्य में तकनीकी ही तय करेगी युद्ध की दिशा और दशा: जनरल वीपी मलिक
14 Dec, 2025 08:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इंदौर: न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के एनएसआईकॉन 2025 के चौथे दिन राष्ट्रीय सेमिनार में रिटायर्ड जनरल वेद प्रकाश मलिक पहुंचे, जहां उन्होंने कारगिल युद्ध से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक भारतीय युद्ध तकनीकी और सेना के जज्बे का जिक्र किया. इस दौरान उन्होंने भारतीय सैन्य क्षमता और तकनीकी रूप से विकसित होती देश की सामरिक स्थिति पर भी चर्चा की.
जवान का जज्बा और जुनून विजयी बनाता है
जनरल वी पी मलिक ने सैनिकों के साहस और जीतने के जज्बे के बारे में बात करते हुए कहा कि "कारगिल युद्ध में जवानों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन देश के जवान चुनौतियों के सामने घुटने नहीं टेके. चाहे उसके पास लड़ने के लिए कोई संसाधन मौजूद ना हो, लेकिन जवानों के जीतने का जज्बा और जुनून ही उसे मैदान में विजयी बनाता है. इसी जज्बे से हम कारगिल युद्ध जीते."
कारगिल युद्ध में हथियार और तकनीक विदेशों से मांगनी पड़ी
जनरल मलिक ने आगे कहा कि "कारगिल के दौर में हमें कई महत्वपूर्ण हथियार और तकनीक विदेशों से मंगानी पड़ती थी, जबकि आज भारत रक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय आत्मनिर्भरता हासिल कर चुका है. कारगिल युद्ध के ऑपरेशन विजय के दौरान हजारों घायल सैनिकों को भर्ती किया गया था, जिनमें से केवल 10-15 की मृत्यु हुई थी. यह आंकड़ा सैन्य चिकित्सा की दक्षता और समर्पण का परिचायक है. ऑपरेशन सिंदूर में भी उसी जज्बे से हम लड़े, लेकिन इस बार सबसे ज्यादा टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने से हमें विजय मिली, क्योंकि समय के साथ हमें अपने जीवन में नई-नई टेक्नोलॉजी को अपनाना भी जरूरी है."
200 से अधिक शोध पत्रों पर हुई चर्चा
गौरतलब है कि आयोजन के चौथे दिन 200 से अधिक शोध पत्रों पर चर्चा हुई. इस बार की थीम ब्रेन और स्पाइन देखभाल में चुनौतियों पर विजय और इसी को ध्यान में रखते हुए आयोजन में न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरोसर्जन को प्रोत्साहित करने के लिए जनरल वी.पी मलिक को आमंत्रित किया गया था.
विशेषज्ञों ने ब्रेन इंजरी और ट्रॉमा मैनेजमेंट पर अनुभव साझा किया
राष्ट्रीय सेमिनार में शुरू के 3 दिनों तक वैज्ञानिक सत्रों में स्कल बेस सर्जरी से जुड़े नवीन शोध प्रस्तुत किए गए. विशेषज्ञों ने बताया कि कम चीरे वाली सर्जरी और तेज रिकवरी अब आधुनिक न्यूरो सर्जरी की पहचान है. भारतीय सशस्त्र बलों के न्यूरोसर्जनों ने युद्धकालीन परिस्थितियों में ब्रेन इंजरी और ट्रॉमा मैनेजमेंट पर अपने अनुभव साझा किए. जो सैन्य और नागरिक चिकित्सा के बढ़ते सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बना.
ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. वसंत डाकवाले ने कहा कि "आज के स्पेशल वक्ता जनरल वी.पी मलिक ने सभी डॉक्टरों को प्रोत्साहित किया और सभी डॉक्टरों को भी सैनिकों की तरह ही जीतने का जज्बा रखना चाहिए. कभी भी चुनौतियों से नहीं हारना चाहिए और समय के साथ टेक्नोलॉजी को अपनाना चाहिए. न्यूरोसर्जरी अब सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि विज्ञान, अनुभव और संवेदना का संतुलित समन्वय है."
छग के वरिष्ठ BJP नेता ने ताड़का’ और ‘सुरसा’ से की बंगाल की CM ममता बनर्जी की तुलना
14 Dec, 2025 08:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) (Bharatiya Janata Party -BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर (Ajay Chandrakar) ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) पर की गई टिप्पणी के लिए आलोचना की। उन्होंने बनर्जी की तुलना रामायण में वर्णित राक्षसी ‘ताड़का’ और ‘सुरसा’ से करते हुए कहा कि उनका राजनीतिक अंत निश्चित है। चंद्राकर ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि बनर्जी को भाजपा या उसके नेतृत्व के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
जब उनसे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की ओर से शाह पर की गई टिप्पणी के बारे में पूछा गया, तब उन्होंने कहा, ‘वह बंगाल के लिए ताड़का और सुरसा हैं। किसी देश के गृह मंत्री पर टिप्पणी करने से पहले सोचना चाहिए। बंगाल को उन्होंने (ममता ने) क्या दिया-यह सोचना चाहिए। माननीय गृह मंत्री ने कहा है कि घुसपैठिये इस देश का प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तय नहीं कर सकते। ममता जी धमकी नहीं दे सकतीं। वह जमाना लद गया। वह कांग्रेस को धमकी दे सकती हैं कि ‘इंडिया’ गठबंधन का नेतृत्व मैं करुंगी। भाजपा या भाजपा नेतृत्व को किसी तरह के अपशब्द कहने का उनको कोई अधिकार नहीं है। वह खुद ‘ताड़का’ और ‘सुरसा’ जैसी हैं, जिसका (राजनीतिक) वध निश्चित है।’
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 में होने वाले हैं। गुरुवार को पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के कृष्णानगर में एक रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया था कि शाह मतदाता सूचियों से ‘डेढ़ करोड़ नाम’ हटाने की कोशिशों को सीधे तौर पर निर्देशित कर रहे हैं। ममता ने चेतावनी दी कि अगर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान एक भी पात्र मतदाता का नाम हटाया गया, तो वह अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगी।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा था, ‘देश का गृहमंत्री खतरनाक है। उनकी आंखों में यह साफ दिखता है। एक आंख में ‘दुर्योधन’ दिखता है, और दूसरी में ‘दु:शासन’।’ बनर्जी ने आरोप लगाया कि 2026 के विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले एसआईआर का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘वे वोटों के लिए इतने भूखे हैं कि उन्होंने अब एसआईआर शुरू कर दिया है। अगर किसी पात्र व्यक्ति का नाम कट गया, तो मैं तब तक धरना दूंगी, जब तक नाम जुड़ नहीं जाता। पश्चिम बंगाल में कोई निरुद्ध केंद्र नहीं बनेगा।’
कर्नाटक में सीएम पद विवाद फिर गरमाया,यतींद्र के बयान से बढ़ी खींचतान
12 Dec, 2025 09:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु। कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस पार्टी के भीतर विवाद फिर उभर गया है। यह विवाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया के बयान से शुरू हुआ। यतींद्र ने कहा कि हाई कमान ने स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री पद में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने पहले भी कहा था कि जो लोग नेतृत्व परिवर्तन की उम्मीद कर रहे हैं, वे सपने देख रहे हैं लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व पहले ही इस मुद्दे को सुलझा चुका है। उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने यतींद्र के बयान पर सीधे टिप्पणी नहीं की और कहा कि मुख्यमंत्री खुद ही इसका जवाब देंगे। हालांकि उनके समर्थक नाराज हो गए। कांग्रेस विधायक इकबाल हुसैन ने यतींद्र की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है और हाई कमान से ऊपर कोई नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री के करीबी नेताओं ने यतींद्र का समर्थन किया। शहरी विकास मंत्री बायरथी सुरेश ने कहा कि नेतृत्व परिवर्तन के बारे में हाई कमान का निर्देश स्पष्ट है और मुख्यमंत्री उसी का पालन करेंगे।
सीएम ममता बनर्जी ने नहीं भरा एसआईआर फॉर्म, बोलीं- इससे बेहतर है जमीन पर नाक रगड़ना
12 Dec, 2025 08:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। चुनावों से पहले मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर बंगाल की राजनीति अपने चरम पर है। इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा बयान देते हुए खुलासा किया कि उन्होंने अब तक एसआईआर फॉर्म नहीं भरा है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने की जरूरत नहीं है और ऐसा करना अपमानजनक है। बनर्जी ने कहा, मैंने अभी तक फॉर्म फिलअप नहीं किया है। क्यों करूं? मैं तीन बार की केंद्रीय मंत्री रही हूं, सात बार सांसद रही हूं और आपके आशीर्वाद से तीन बार मुख्यमंत्री बनी हूं। अब मुझे प्रमाणित करना होगा कि मैं नागरिक हूं या नहीं। इससे तो जमीन पर नाक रगड़ना बेहतर है।
इससे पहले नादिया जिले के कृष्णनगर में रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने तीखे शब्दों में आरोप लगाया कि भाजपा और केंद्र सरकार बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, अमित शाह सीधे तौर पर मतदाताओं की सूची से 1.5 करोड़ नाम हटाने की कोशिशों को गाइड कर रहे हैं। अगर एसआईआर प्रक्रिया के दौरान एक भी योग्य मतदाता को बाहर किया गया तो वह अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने उन रिपोर्टों का हवाला दिया कि जिन लोगों ने अपने दस्तावेज़ों के हिस्से के रूप में दादा-दादी के नाम जमा किए थे, उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा और उनके नाम रोल से हटाए जाने का खतरा होगा। उन्होंने कहा, अब हम सुनते हैं कि जिन्होंने अपने दादा-दादी के नाम दिए हैं, उन्हें बुलाया जाएगा और योजना है कि इन सुनवाइयों से सीधे नाम हटा दिए जाएं। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री सहित संवैधानिक पदाधिकारियों को ‘मार्क्ड इलेक्टर’ श्रेणी में रखा जाता है, इसलिए उन्हें सामान्य नागरिकों की तरह फॉर्म भरने की बाध्यता नहीं है। इस श्रेणी में प्रधानमंत्री, सभी मुख्यमंत्री और अन्य संवैधानिक पद धारक शामिल हैं और कानूनी तौर पर उन्हें जनगणना फॉर्म जमा करने की आवश्यकता नहीं है। बंगाल में एसआईआर का पहला चरण आज गुरुवार को खत्म हो रहा है, जिसमें ड्राफ्ट रोल 16 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे और सुनवाई और सत्यापन दिसंबर और जनवरी के मध्य तक जारी रहेंगे। अंतिम मतदाता सूची फरवरी के मध्य में प्रकाशित होने वाली है।
यूपी BJP अध्यक्ष का नाम फाइनल? रेस में OBC चेहरा सबसे आगे! जानें कब और कैसे लगेगी मुहर
12 Dec, 2025 07:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
BJP UP Chief Announcement: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का नया अध्यक्ष कौन होगा, इसके लिए 14 दिसंबर को आधिकारिक रूप से ऐलान किया जाएगा. इसकी जानकारी गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और संगठन चुनाव अधिकारी डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने दी. हालांकि पार्टी प्रदेश अध्यक्ष किसे बनाती है, अभी तक इसको लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है. अंतिम मुहर के लिए 14 दिसंबर का इंतजार करना होगा.
पिछले 1 साल पहले ही भाजपा के यूपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का कार्यकाल खत्म हो चुका है. तब से प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर संशय बना हुआ है. लेकिन अब जल्द ही प्रदेश को नया अध्यक्ष मिलने वाला है. यूपी भाजपा के संगठन चुनाव अधिकारी पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने बताया कि 13 दिसंबर को प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए दोपहर 1 से बजे तक पार्टी के लखनऊ मुख्यालय पर नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे. इस दौरान राष्ट्रीय महामंत्री एवं केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक विनोद तावड़े द्वारा नामांकन पत्र जमा किया जाएगा. वहीं, प्रदेश अध्यक्ष के लिए केंद्रीय चुनाव अधिकारी पीयूष गोयल द्वारा 14 दिसंबर को चुनाव की प्रक्रिया पूर्ण कराकर प्रदेश अध्यक्ष का निर्वाचन सम्मपन्न कराया जाएगा.
दौड़ में ये नाम शामिल
माना जा रहा है कि यूपी में भाजपा इस बार अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी किसी ओबीसी नेता को सौंप सकती है. हालांकि पार्टी की ओर से चयन की पूरी तैयारियां संगठन स्तर पर कर ली गई हैं. अध्यक्ष पद की रेस में केंद्रीय मंत्री बी. एल. वर्मा और मंत्री धर्मपाल सिंह का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है. इसके अलावा केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी, पूर्व मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति, के साथ ही स्वतंत्र देव सिंह, दिनेश शर्मा, रमाशंकर कठेरिया के नाम की भी चर्चा है. चर्चा है कि ओबीसी नेता में भी गैर-यादव को अध्यक्ष बनाया जा सकता है.
14 दिसंबर को मिलेगा नया अध्यक्ष
भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष जो भी बने. यह 14 दिसंबर को तय हो जाएगा. प्रदेश अध्यक्ष आने वाले 2027 विधानसभा चुनाव और पंचायत चुनाव को देखते हुए बनाया जाएगा. ताकि अध्यक्ष के नेतृव्य में चुनाव लड़ा जा सके. अध्यक्ष के चुनाव में जातीय समीकरण से लेकर कई पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा.
कांग्रेस सांसदों की बैठक से शशि थरूर रहे गैरहाज़िर, लगातार दूसरी रणनीतिक मीटिंग से दूरी
12 Dec, 2025 07:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। शीतकालीन सत्र के बीच कांग्रेस ने शुक्रवार सुबह संसद भवन के एनेक्स एक्सटेंशन बिल्डिंग में अपने सांसदों की बैठक बुलाई थी, जिसमें पार्टी नेता राहुल गांधी भी मौजूद रहे। बैठक में सत्र के दौरान कांग्रेस सांसदों के प्रदर्शन की समीक्षा की गई और आगामी रणनीति पर चर्चा हुई। खास बात यह रही कि इस बैठक में शशि थरुर नहीं पहुंचे।
जानकारी अनुसार इस महत्वपूर्ण बैठक में केरल से कांग्रेस सांसद शशि थरूर शामिल नहीं हुए। यह लगातार दूसरी बार है जबकि शशि थरूर पार्टी की रणनीतिक मीटिंग से अनुपस्थित रहे। इससे पहले 30 नवंबर को भी एक अहम बैठक में उनकी गैरहाज़िरी चर्चा में रही थी। पिछली बैठक के दौरान उठे सवालों पर थरूर ने सफाई दी थी कि वे अपनी 90 वर्षीय मां के साथ फ्लाइट में थे, जिस कारण वे बैठक में नहीं पहुंच पाए। इस बार उनकी अनुपस्थिति को लेकर पार्टी के भीतर फिर से चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, इस बैठक में गैरहाज़िरी को लेकर थरूर की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
शरद पवार ने मनाया 84वां जन्मदिन, कहलाते हैं राजनीति के भीष्म पितामह
12 Dec, 2025 06:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र में एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने शुक्रवार को अपना 84वां जन्मदिन मनाया। उन्होंने 6 दशकों से ज्यादा महाराष्ट्र से लेकर केंद्र तक की राजनीतिक पारी खेली। शरद पवार ने कांग्रेस से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। वह चार बार महाराष्ट्र के सीएम बने। पवार ने लंबे सियासी करियर में महाराष्ट्र की कृषि नीतियों और सहकारी आंदोलनों को अहम रूप से आकार दिया है
बता दें शरद पवार का जन्म 12 दिसंबर 1940 को हुआ था। इनके पिता का नाम गोविंद राव था। वह नीरा कैनाल कोऑपरेटिव सोसाइटी में एक वरिष्ठ अधिकारी थे। वहीं शरद पवार की मां का नाम शारदा बाई था, जोकि वामपंथी विचारों वाली तेज तर्रार राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता थीं। शारदा बाई पुणे लोकल बोर्ड में निर्वाचित होने वाली पहली महिला थीं। शरद पवार बचपन से ही राजनीति में सक्रिय थे। स्कूल और कॉलेज के दिनों में शरद पवार ने कई छोटे-मोटे आंदोलन में हिस्सा लिया। 1960 में पवार के भाई वसंतराव पवार ने किसान एवं मजदूर पार्टी से चुनाव लड़ा था। जबकि शरद पवार को कांग्रेस के लिए प्रचार करना पड़ा था। भले ही उनके भाई चुनाव में हार गए, लेकिन शरद पवार की छवि एक समर्पित और निष्ठावान कांग्रेसी कार्यकर्ता के रूप में स्थापित हुई थी।
1962 में शरद पवार पुणे जिला युवा कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वहीं 27 साल की उम्र में साल 1967 में शरद पवार ने बारामती से महाराष्ट्र विधानसभा की सीट पर जीत हासिल की। उस दौरान वह अविभाजित कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। शरद पवार ने 40 विधायकों के साथ मिलकर कांग्रेस का विभाजित करने का फैसला लिया। वहीं जनता पार्टी और किसान एवं मजदूर पार्टी के साथ गठबंधन करके प्रगतिशील लोकतांत्रिक मोर्चा का गठन किया।
यह घटना 1978 में घटी और इस दौरान शरद पवार की उम्र 38 साल थी। कांग्रेस सरकार के पतन के बाद शरद पवार महाराष्ट्र के सीएम बने। इस समय वह सीएम पद संभालने वाले सबसे युवा व्यक्ति थे। शरद पवार का कार्यकाल अल्पकालिक रहा, क्योंकि फरवरी 1980 में पवार की सरकार को सत्ता से बर्खास्त कर दिया गया। फिर वह साल 1988, 1990 और 1993 में महाराष्ट्र के सीएम पद पर कार्यरत रहे।
साल 1999 में शरद पवार ने एनसीपी की स्थापना की। इस पार्टी की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय मुद्दों का समाधान करना था। हालांकि कांग्रेस के साथ इस पार्टी के कुछ वैचारिक संबंध भी रहे होंगे। महाराष्ट्र में यह नवगठित पार्टी काफी लोकप्रिय हुई। क्योंकि इस पार्टी ने स्थानीय शासन पर ध्यान केंद्रित किया और सामाजिक न्याय के मुद्दों को उठाया। हालांकि इसी साल एनसीपी और कांग्रेस ने गठबंधन की सरकार बनाई, क्योंकि दोनों में से कोई भी पार्टी स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर सकी थीं। साल 2004 में पीएम मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में शरद पवार को कृषि मंत्री बनाया। वहीं साल 2009 के आम चुनावों में जीत हासिल कर वह केंद्रीय मंत्रिमंडल बने।
साल 2023 आते-आते पवार के परिवार में विरासत की लड़ाई शुरू हो गई। इसी बीच उनके भतीजे अजित पवार ने बगावत कर दी और वह कुछ विधायकों के साथ महायुति सरकार में शामिल हो गए। फिर शरद पवार से पार्टी का सिंबल और नाम भी छिन लिया और वह भतीजे अजित पवार गुट को मिल गया। चाचा-भतीजा दोनों एनसीपी के अलग-अलग गुटों का नेतृत्व कर एक-दूसरे के आमने-सामने हैं।
राज्यसभा में नहीं पहुंचा एक भी केंद्रीय मंत्री, सभापति ने की 10 मिनट कार्यवाही स्थगित
12 Dec, 2025 05:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कार्यवाही शुरु होते ही विपक्षी सांसदों ने इस ओर दिलाया ध्यान, रिजिजू ने जताया खेद
नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र जारी है। इस बीच कैबिनेट मंत्रियों की अनुपस्थिति के चलते शुक्रवार को राज्यसभा की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। यह स्थिति उस समय पैदा हुई जब सदन ने 13 दिसंबर 2001 के संसद हमले में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद कामकाज शुरू किया। जैसे ही कार्यवाही आगे बढ़ी विपक्षी सांसदों ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि सदन में कोई भी कैबिनेट मंत्री मौजूद नहीं है।
इस पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि वह इस मुद्दे को सरकार के सामने उठाएंगे और एक जूनियर मंत्री को कैबिनेट मंत्री को बुलाने का अनुरोध करने को कहा। उन्होंने कहा कि मैं प्रक्रिया को समझता हूं। मैंने मंत्री से अनुरोध किया है। एक कैबिनेट मंत्री को आना चाहिए, लेकिन विपक्ष इससे संतुष्ट नहीं हुआ। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह सदन का अपमान है। जब तक कोई कैबिनेट मंत्री नहीं आता, सदन को स्थगित करना होगा करीब पांच मिनट इंतजार करने के बाद सभापति ने कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया।
सदन शुरु होने पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कैबिनेट मंत्रियों की अनुपस्थिति के लिए खेद जताया। उन्होंने बताया कि उन्हें लोकसभा में पूर्व स्पीकर और पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल के निधन पर श्रद्धांजलि देने के लिए जाना पड़ा था। उन्होंने यह भी बताया कि नेता सदन जेपी नड्डा के नाम से लोकसभा में प्रश्न लगे थे, जिसके कारण वे भी वहां मौजूद थे। रिजिजू ने कहा कि मुझे खेद है कि सदन में कोई कैबिनेट मंत्री मौजूद नहीं था।
वहीं कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि पाटिल राज्यसभा के भी पूर्व सदस्य रहे हैं, इसलिए यहां भी श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए। इस पर रिजिजू ने कहा कि औपचारिक प्रक्रिया के चलते थोड़ा समय लग रहा है और राज्यसभा में भी उचित श्रद्धांजलि दी जाएगी। सदन के पुनर्गठन के बाद निर्मला सीतारमण, किरन रिजिजू और जेपी नड्डा समेत अन्य मंत्री मौजूद थे।
वोट चोरी का सच उजागर : गुजरात कांग्रेस का चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप
12 Dec, 2025 11:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
* एसआईआर में 74 लाख मतदाता संदिग्ध, लोकतंत्र बचाने ‘वोट चोर, गादी छोड़’ महाअभियान को देशव्यापी समर्थन
* लोकतंत्र बचाने उठी कांग्रेस की निर्णायक हुंकार, 14 दिसंबर को दिल्ली में ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ महारैली
अहमदाबाद | गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने राजीव गांधी भवन में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि देश के संविधान ने प्रत्येक नागरिक को ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ का अधिकार दिया है। यह केवल मतदान का अधिकार नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा की जिम्मेदारी भी है। कई वर्षों से चुनाव आयोग की निष्पक्षता, तटस्थता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। अनेक प्रमाण सामने आने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
राहुल गांधी ने देशभर में चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी शंकाओं को प्रमाणों के साथ उजागर किया और वोट चोरी के नेक्सस का भंडाफोड़ किया, जो लोकतंत्र के लिए ऐतिहासिक क्षण है। 7 अगस्त 2025 की अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कर्नाटक में हुई वोट चोरी के तथ्य पेश किए, लेकिन चुनाव आयोग मौन रहा। दूसरी ओर सरकार और भाजपा नेता गलत आरोपों से लोगों को भ्रमित करने की कोशिश करते रहे।
5 नवंबर 2025 की दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरियाणा की मतदाता सूची में एक विदेशी अभिनेत्री की तस्वीर के साथ 22 बार नाम दर्ज होने तथा हजारों फर्जी मतदाताओं का खुलासा हुआ-यह पूरे देश में ‘हाइड्रोजन बम’ जैसा साबित हुआ, फिर भी चुनाव आयोग ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
गुजरात में भी वोट चोरी को लेकर प्रदेश कांग्रेस समिति ने गंभीर कार्य किया। नवसारी लोकसभा (जहाँ से चुने गए सी.आर. पाटिल आज केंद्र में मंत्री हैं) की चोर्यास़ी विधानसभा क्षेत्र में 40% मतदाताओं की जांच में 12% मतदाता फर्जी या संदिग्ध पाए गए। इसी औसत से पूरे राज्य में 60 लाख से अधिक फर्जी मतदाता होने की 30 अगस्त 2025 की हमारी रिपोर्ट को भाजपा और चुनाव आयोग लगातार नकारते रहे।
लेकिन अब स्वयं चुनाव आयोग ने स्वीकार किया है कि एसआईआर प्रक्रिया में कुल 5,08,43,436 मतदाताओं में से 14.61% यानी 74 लाख से अधिक मतदाता मृत, अनुपस्थित, डुप्लिकेट या स्थानांतरित हैं। इससे हमारे आरोप सिद्ध होते हैं कि 2002 से अब तक गुजरात में भाजपा की हर जीत में लगभग 14% वोट चोरी शामिल रही है।
एसआईआर प्रक्रिया में तैयारी के अभाव, बीएलओ पर राजनीतिक दबाव और मानसिक तनाव के कारण राज्य में 9 बीएलओ की दुखद मौतें हुईं। इसके बावजूद चुनाव आयोग अपनी गलतियों को छिपाने में जुटा है। वहीं विदेश में रहने वाले या नागरिकता बदल चुके कई लोगों के नाम मतदाता सूची में यथावत हैं-जिनके फॉर्म किसी और द्वारा जमा कराए जाने के भी प्रमाण मौजूद हैं। डुप्लिकेट वोटरों की सूची अभी भी सार्वजनिक नहीं की गई है।
देश की संसद में भी चुनाव आयोग की पारदर्शिता और कानूनी सुरक्षा पर गंभीर चर्चा हुई, परंतु सरकार कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। जनता पूछ रही है कि आखिर मुख्य न्यायाधीश को चुनाव आयुक्त चयन समिति से क्यों हटाया गया? चुनाव आयोग को अत्यधिक कानूनी सुरक्षा क्यों दी गई? सीसीटीवी फुटेज 45 दिनों में क्यों डिलीट किए जाते हैं? ये आज के सबसे बड़े राजनीतिक और लोकतांत्रिक प्रश्न हैं।
वोट चोरी के इस नेक्सस के खिलाफ पूरे देश में एक ही नारा गूंज रहा है-“वोट चोर, गद्दी छोड़।” इस लोकआंदोलन को और मजबूत करने के लिए कांग्रेस द्वारा शुरू किए गए “वोट चोर, गद्दी छोड़” हस्ताक्षर अभियान को देशभर में व्यापक समर्थन मिला है। केवल गुजरात से ही 10 लाख से अधिक लोगों ने लोकतंत्र बचाने की मांग में इस अभियान को समर्थन दिया है। देशभर से करोड़ों हस्ताक्षर एकत्र हुए हैं, जिन्हें 14 दिसंबर को दिल्ली में आयोजित ऐतिहासिक “वोट चोर, गद्दी छोड़” महारैली में चुनाव आयोग को सौंपा जाएगा।
दिल्ली के रामलीला मैदान में 14 दिसंबर, रविवार को दोपहर 1 बजे होने वाली इस महारैली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, देशभर में वोट चोरी का भंडाफोड़ करने वाले राहुल गांधी, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल तथा सभी वरिष्ठ नेता उपस्थित रहेंगे। गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति सभी से अपील करती है कि लोकतंत्र बचाने, वोट के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करने और वोट चोरी के इस गठजोड़ के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के लिए 14 दिसंबर को बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचे और इस संकल्प को समर्थन दें कि वोट चोरों को उजागर कर लोकतंत्र की रक्षा की जाएगी।
रैली को संबोधित करते हुए सीएम ममता बनर्जी ने बोला हमला,महिलाओं से कहा- एसआईआर में नाम कटे तो आपके खाना बनाने के बर्तन हैं, उनसे लड़ो
12 Dec, 2025 10:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को खतरनाक करार दिया है। ममता ने गुरुवार को कृष्णानगर की रैली में कहा कि शाह की आंखों में दहशत है। उनकी एक आंख में आपको दुर्योधन तो दूसरी आंख में दुशासन दिखाई देगा। ममता ने स्पेशल इंटेसिव रिवीजन को लेकर महिलाओं से कहा कि वे (केंद्र सरकार) एसआईआर के नाम पर मांओं-बहनों के अधिकार छीन लेंगे। वे चुनाव के दौरान दिल्ली से पुलिस बुलाएंगे।
ममता के मुताबिक माताओ-बहनों, अगर आपके नाम काटे गए तो आपके पास किचन के बर्तन हैं, इनसे लडि़ए। अपने नाम को लिस्ट कटने मत देना। महिलाएं आगे आकर लड़ेगी, पुरुष इनके पीछे रहेंगे। ममता ने आरोप लगाया कि 2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एसआईआर को राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है। अमित शाह वोटों के इतने भूखे हैं कि चुनाव से दो महीने पहले ही यह प्रक्रिया चला रहे हैं।
एसआईआर बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए हो रहा
ममता ने रैली में ये भी कहा कि अक्टूबर से 12 राज्यों में एसआईआर चल रहा है। इस प्रक्रिया का मकसद गलत मतदाता का नाम हटाना और नए मतदाता जोडऩा है। यह बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए हो रहा है। ममता ने केंद्र पर बंगालियों को बांग्लादेशी बताकर डिटेंशन कैंप भेजने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली से बीजेपी समर्थक अफसर भेजे जा रहे हैं, जो जिलाधिकारियों की निगरानी कर रहे हैं। अगर किसी को बाहर निकाला गया, तो हम वापस लाएंगे। बंगाल का मामला अलग है।
शाह को वोट चोरी की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए, डीके का केंद्र सरकार पर हमला
12 Dec, 2025 09:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जवाहरलाल नेहरू के समय में वोट चोरी के दावे का खंडन कर कहा कि केंद्रीय मंत्री शाह को इस विषय की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उस समय मतपत्र होते थे, इसलिए वोटों की चोरी या हेराफेरी जैसी कोई घटना संभव ही नहीं थी। डीके ने कहा कि केंद्रीय मंत्री शाह को वोट चोरी की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए। तब मतपत्र होते थे, और अब नहीं हैं। इसके पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शाह पर अपना हमला जारी रखा। राहुल गांधी ने कहा कि गृह मंत्री ने उनके किसी भी प्रश्न का सीधा उत्तर नहीं दिया। उन्होंने दावा किया कि कल शाह बहुत घबराए हुए थे। उन्होंने गलत भाषा का प्रयोग किया, उनके हाथ कांप रहे थे...वे अत्यधिक मानसिक दबाव में हैं। मैंने उनसे जो पूछा, उन्होंने उसका सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने कोई सबूत नहीं दिया। मैंने उन्हें सीधे चुनौती दी है कि वे मैदान में आएं और संसद में मेरी सभी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर चर्चा करें। मुझे कोई जवाब नहीं मिला।
लोकसभा में तनाव तब बढ़ गया जब शाह और राहुल गांधी के बीच “वोट चोरी” के आरोपों पर तीखी बहस हुई। गांधी ने शाह को बार-बार प्रेसवार्ता में उठाए गए मुद्दों पर बहस करने की चुनौती दी, जिसमें मतदाता सूची में अनियमितताओं के दावे भी शामिल थे। शाह ने दृढ़ता से जवाब देकर कहा कि संसद उनकी मर्जी से नहीं चलेगी और कहा कि वे सभी सवालों का जवाब अपने क्रम में देने वाले है।
राहुल गांधी ने शाह पर किया तीखा हमला: वो घबराए हुए थे, हाथ कांप रहे थे…
12 Dec, 2025 08:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली! चुनाव सुधारों पर लोकसभा में हुई चर्चा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के अगले दिन विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शाह पर निशाना साधा और यहां तक कह दिया कि वे काफी घबराए हुए थे। राहुल गांधी ने कहा, कि अमित शाह ने उनके किसी भी सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, कि अमित शाह जी कल बहुत घबराए हुए थे। उन्होंने गलत भाषा का उपयोग किया। उनके हाथ कांप रहे थे… वे बहुत मानसिक दबाव में हैं। यह सबने देखा। मैंने उनसे जो भी पूछा, उन्होंने उसका सीधा जवाब नहीं दिया। न कोई सबूत दिया। राहुल गांधी ने यहां बताया, कि उन्होंने गृह मंत्री को चुनौती दी कि संसद में उनकी सभी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर चर्चा की जाए, लेकिन शाह ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया का समर्थन
कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने भी राहुल गांधी का समर्थन करते हुए कहा कि गृहमंत्री ने हरियाणा में चुनावी घटनाओं से जुड़े असल सवालों का जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता की उम्मीद थी, लेकिन कांग्रेस पर आरोप लगाकर बात को भटका दिया गया।
भाजपा ने किया पलटवार
भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए जवाबी हमला बोला।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, राहुल गांधी ‘हिट एंड रन’ का फॉर्मूला अपनाते हैं। जब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बोलते हैं, तो वे बाहर चले जाते हैं। उनमें सच सुनने की हिम्मत नहीं है।
आरजेडी के बागियों पर ‘तलवार’ चलाएंगे लालू और तेजस्वी यादव
11 Dec, 2025 11:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar assembly elections) में करारी हार की समीक्षा के बाद राजद अब बगियों पर कार्रवाई की तैयारी में है। उम्मीदवारों और पार्टी पदाधिकारियों ने ऐसे बगियों की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल को दी है। पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद (Lalu Prasad) और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejashwi Prasad Yadav) के निर्देश पर दर्जनों नेताओं पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
मंगलवार को समीक्षा बैठक के अंतिम दिन पटना प्रमंडल के जिला अध्यक्ष, प्रधान महासचिव, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद एवं पार्टी के पदाधिकारियो का जुटान हुआ। बैठक में कार्यकर्ताओं ने जोरदार तरीके से यह मामला उठाया कि तेजस्वी यादव को अपने घर का दरवाजा कार्यकर्ताओं के लिए खोल देना चाहिए और उनकी बातों को सुनकर समझकर संगठन का काम करना चाहिए।
पार्टी के समर्पित एवं पुराने कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन में चलकर ही पार्टी सत्ता प्राप्त कर सकती है। बैठक में नेताओं ने कहा कि तेजस्वी के एटूजेड की परिकल्पना को नकार दिया गया। जब तक 90 फीसदी की बात नहीं करेंगे एवं अतिपिछड़ों, अल्पसंख्यको के सुख-दुख में राजद नेता खास कर तेजस्वी नहीं जाएंगे, तब तक पार्टी मजबूती नहीं होगी।
आरजेडी कार्यकर्ताओं ने मंगनी लाल मंडल से पूछा कि बताएं कि गरीब कार्यकर्ता कैसे चुनाव लड़ेंगे। क्या पार्टी अपने पैसे से 10 गरीब कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़वा सकती है।
पटना के लोगों ने महानगर में पार्टी संगठन की कमजोरी पर चर्चा की और कहा कि पटना में संगठन को कभी मजबूत करने का प्रयास ही नहीं किया गया। लोगों ने चुनाव हार के एक प्रमुख कारण जातीय हिंसा वाले गानों को भी बताया। हरियाणा के लोगों की पार्टी में सक्रियता पर भी सवाल उठाए।
मृत्यु के बाद भी नहीं मिलती मुक्ति! गरुड़ पुराण में बताए गए भयावह दंड
खाने की ये आदतें लाती हैं दरिद्रता! शास्त्रों की चेतावनी
हाथ से कलावा हटाते ही न करें ये 1 काम, वरना बिगड़ सकता है भाग्य
प्रधानमंत्री आवास योजना से स्वयं के पक्के मकान का सपना हुआ साकार
केदारनाथ मंदिर में नए नियम लागू, मोबाइल इस्तेमाल पर पूरी तरह बैन
मनरेगा की ‘डबरी’ और ‘बिहान’ के सहयोग से सविता बनीं आत्मनिर्भर
दिलीप घोष बोले- बंगाल में खिलेगा कमल, BJP की जीत का भरोसा
