राजनीति
बेबस फडणवीस? HC की कड़ी फटकार, मंत्री पर सवाल उठाने पर भी चुप रहने की चेतावनी
23 Jan, 2026 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। न्यायमूर्ति माधव जामदार(Justice Madhav Jamdar) ने कहा कि क्या राज्य के मुख्यमंत्री (state’s Chief Minister)इतने बेबस(helpless) हैं कि वह किसी भी मंत्री के खिलाफ कुछ नहीं बोलते(he cannot speak out against any minister)? मंत्रियों के बच्चे अपराध करते हैं(Ministers’ children commit crimes), खुलेआम घूमते हैं(roam around freely), अपने माता-पिता के संपर्क में रहते हैं, लेकिन पुलिस उन्हें ढूंढ नहीं पाती(police are unable to find them)?
बॉम्बे हाई कोर्ट(Bombay High Court) ने महाराष्ट्र सरकार(Maharashtra government) को गुरुवार(Thursday,) को कड़ी फटकार लगाते हुए सवाल किया(On Thursday, they issued a strong reprimand and asked questions) कि क्या राज्य में कोई कानून व्यवस्था है(Is there any law and order in the state?)? अदालत ने साथ ही कहा कि(The court also said that) मंत्रियों के बच्चे अपराध करते हैं और खुलेआम घूमते हैं लेकिन पुलिस उन्हें ढूंढ नहीं पाती। अदालत (Court) ने टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या मुख्यमंत्री (फडणवीस) इतने बेबस हैं कि वह उस मंत्री के खिलाफ कुछ नहीं कह सकते जिसका बेटा आपराधिक मामले में नाम आने के बाद फरार हो गया है।
न्यायमूर्ति माधव जामदार(Justice Madhav Jamdar) ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि मंत्रियों के बच्चे ‘अपराध करते हैं और खुलेआम घूमते हैं’ लेकिन पुलिस उन्हें ढूंढ नहीं पाती। हाई कोर्ट ने शिवसेना के नेता एवं महाराष्ट्र सरकार में मंत्री भरत गोगावले के बेटे विकास गोगावले की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।
महाड नगर परिषद चुनाव(Mahad Municipal Council Elections) के दौरान प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प(Violent clashes occurred between rival factions) से संबंधित एक मामले में विकास को आरोपी(Vikas is the accused) बनाया गया है। अदालत की फटकार के बाद सरकार ने आश्वासन दिया है कि मंत्री गोगावले यह सुनिश्चित करेंगे कि उनका बेटा एक दिन के भीतर आत्मसमर्पण कर दे। विकास गोगावले ने सत्र न्यायालय द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद उच्च न्यायालय का रुख किया है, लेकिन वह अभी भी फरार है।
न्यायमूर्ति माधव जामदार(Justice Madhav Jamdar) ने कहा, ‘‘क्या राज्य के मुख्यमंत्री इतने बेबस हैं कि वह किसी भी मंत्री के खिलाफ कुछ नहीं बोलते? मंत्रियों के बच्चे अपराध करते हैं, खुलेआम घूमते हैं, अपने माता-पिता के संपर्क में रहते हैं, लेकिन पुलिस उन्हें ढूंढ नहीं पाती?’’ न्यायाधीश ने यह भी पूछा कि क्या राज्य में कानून व्यवस्था और कानून का शासन कायम है। राज्य के महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने अदालत में कहा कि मंत्री गोगावले अपने बेटे से बात करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि वह शुक्रवार को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दे।
उच्च न्यायालय ने महाधिवक्ता साठे(High Court appointed Advocate General Sathe) से कहा, ‘उसे (विकास गोगावले) कल की सुनवाई से पहले आत्मसमर्पण करने के लिए कहो।’’ इससे पहले अदालत ने चेतावनी दी थी कि अगर पुलिस विकास गोगावले को गिरफ्तार करने में विफल रहती है तो उसे आदेश पारित करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। न्यायमूर्ति जामदार ने कहा, ‘‘आप पर (पुलिस पर) दबाव हो सकता है, अदालत पर नहीं।’’
महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले(Raigad district of Maharashtra) के महाड में दो दिसंबर को हुए नगर निकाय चुनाव के दौरान एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजीत पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के समर्थकों के बीच झड़पें हुईं। शिंदे और पवार दोनों ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
BJP ने कांग्रेस से पूछा, थरूर को अब मिलेगा ‘फतवा’? गौतम गंभीर की प्रशंसा पर बवाल
23 Jan, 2026 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। क्रिकेट के शौकीन(Cricket enthusiast) थरूर(Tharoor) ने नागपुर(Nagpur) में न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच(T20 International match against New Zealand) से पहले गंभीर के साथ एक सेल्फी साझा की और पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज(Former Indian opening batsman) की लगातार आलोचनाओं के बावजूद(Despite constant criticism) अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उनकी तारीफ की। कांग्रेस सांसद शशि थरूर(Congress MP Shashi Tharoor) ने भारतीय क्रिकेट कोच गौतम गंभीर(Indian cricket coach Gautam Gambhir) की तारीफ कर दी। नागपुर में हुई इस मुलाकात को लेकर(Regarding this meeting that took place in Nagpur) अब
भारतीय जनता पार्टी(Bharatiya Janata Party) ने कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं। भाजपा का कहना है कि अब कांग्रेस इसके चलते थरूर के खिलाफ फतवा जारी कर सकती है। कांग्रेस सांसद ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद गंभीर के पास सबसे मुश्किल काम है।
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने लिखा, ‘पता नहीं कांग्रेस को कौन सी बात ज्यादा गुस्सा दिलाएगी। थरूर का नागपुर जाना, थरूर का गौतम गंभीर से मिलना और उनकी तारीफ करना या थरूर का इस बात को मानना की भारत में पीएम मोदी के पास सबसे मुश्किल काम है। यह देखते हुए कि भारत के हितों से पहले परिवार के हितों को रखने वाला विपक्ष उनपर सवाल उठाता है।’पूनावाला ने लिखा, ‘ऐसा लगता है कि यह तीसरा पॉइंट हो सकता है। क्या थरूर के खिलाफ एक और कांग्रेस फतवा जारी होने वाला है?’
थरूर ने की थी गंभीर की तारीफ
क्रिकेट के शौकीन थरूर ने नागपुर में न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच से पहले गंभीर के साथ एक सेल्फी साझा की और पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज की लगातार आलोचनाओं के बावजूद अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उनकी तारीफ की।
उन्होंने लिखा था, ‘नागपुर में पुराने दोस्त गौतम गंभीर के साथ खुलकर और अच्छी बात हुई, जो भारत के प्रधानमंत्री के बाद सबसे मुश्किल काम करने वाले इंसान हैं। लाखों लोग रोज उनके फैसलों पर सवाल उठाते हैं, लेकिन वह शांत रहते हैं और बगैर डरे आगे बढ़ते हैं। उनकी शांत दृढ़ता और नेतृत्व तारीफ के काबिल हैं। उन्हें सभी सफलताओं के लिए शुभकामनाएं।’
गंभीर ने इस पर देर रात जवाब दिया और उन कुछ चर्चाओं का जिक्र किया जो उनके कार्यकाल में हावी रही हैं। गंभीर ने एक्स पर लिखा, ‘डॉ शशि थरूर आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। जब मामला शांत हो जाएगा तब कोच के कथित ‘असीमित अधिकार’ को लेकर सच्चाई और तर्क स्पष्ट हो जाएंगे। तब तक मुझे खुद के खिलाफ खड़ा देखकर हंसी आ रही है।’
पीएम मोदी का दक्षिण भारत दौरा आज से, तमिलनाडु में रैली को करेंगे संबोधित
23 Jan, 2026 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: इस साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव 2026 होने वाले हैं. इसको लेकर राजनीतिक दल कमर कस रहे हैं. इसी सिलसिले में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) भी जोरशोर से तैयारियों में जुट गया है. वहीं, दक्षिण भारत राज्यों में एनडीए की सरकार बनाने के लिए पीएम मोदी भी रैली करने जा रहे हैं. ताजा जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी आज शुक्रवार को तमिलनाडु के दौरे पर हैं.
यहां के मदुरंतकम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आज एक हाई-प्रोफाइल रैली होने जा रही है. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर इसे बहुत अहम माना जा रहा है. पीएम मोदी की यह रैली चेन्नई-तिंडीवनम हाईवे पर होगी. यह तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए (NDA) की पहली बड़ी पब्लिक रैली है और इसमें पूरे राज्य से बड़ी भीड़ और कार्यकर्ताओं के जुटने की उम्मीद जताई जा रही है. इस रैली में एनडीए के घटक दलों, जिनमें ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, भारतीय जनता पार्टी, पट्टाली मक्कल काची, तमिल मनीला कांग्रेस और अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम शामिल होंगे.
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता नैनार नागेंथ्रन ने इस संबंध में जानकारी दी कि शुक्रवार 23 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मदुरंतकम से चुनावी अभियान शुरू करेंगे. वह तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके (DMK) सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए एक मीटिंग में हिस्सा लेंगे. उन्होंने आगे बताया कि प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान सभी दलों के नेता मंच पर मौजूद रहेंगे. नागेंथ्रन ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बीच चुनावी वादों की 'कॉपी' के आरोपों पर चल रही बहस का भी जवाब दिया.
एआईएडीएमके (AIADMK) के घोषणापत्र के प्रस्तावों का बचाव करते हुए, उन्होंने बताया कि पार्टी नेता एडप्पादी के पलानीस्वामी ने पिछले चुनाव में महिलाओं के लिए 1,500 रुपये महीने की मदद का वादा किया था, जिसे अब बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि इसे सिर्फ इसलिए कॉपी नहीं कहा जा सकता क्योंकि ऐसी ही एक स्कीम मौजूद है और कहा कि 'लोगों के मन में एक बड़ा बदलाव होने वाला है.'
मनरेगा बचाओ सम्मेलन में राहुल गांधी ने पीएम और भाजपा पर निशाना साधा, कहा- गरीबों से काम का अधिकार छीनना चाहती है भाजपा
23 Jan, 2026 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर निशाना साधा है। मनरेगा बचाओ मोर्चा अभियान में उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत गरीब लोगों को काम करने का अधिकार मिला था, लेकिन अब भाजपा इस योजना को खत्म करना चाहती है। राहुल गांधी ने मनरेगा के मुद्दे पर सरकार की तुलना कृषि कानूनों से की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को कहा कि वे वीबी-जीराम-जी बिल के बारे में नहीं जानते। उन्होंने कहा कि वीबी-जीराम-जी जुमला है,गरीबों के हक पर हमला है। राहुल ने गरीबों से अपील की कि वे इस नए बिल के विरोध में एकजुट हों।
राहुल रचनात्मक कांग्रेस के राष्ट्रीय मनरेगा श्रमिक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में राहुल और खडग़े ने सिर पर गमछा बांधा, कंधे पर कुदाल रखी और देशभर से मजदूरों की लाई मिट्टी पौधों में डाली। सम्मेलन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने गुरुवार को आरोप लगाया कि सरकार का मनरेगा को निरस्त करना महात्मा गांधी के नाम को लोगों की स्मृति से मिटाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी संसद के आगामी बजट सत्र में इस मुद्दे को मजबूती से उठाएगी।
मनरेगा में गरीबों को काम करने का अधिकार था
राहुल ने कहा कि मनरेगा गरीबों को अधिकार देने के लिए लाई गई योजना थी। इसका उद्देश्य जरूरतमंदों को काम देना था। यह योजना सरकार के तीसरे स्तर यानी पंचायती राज के माध्यम से चलाई जानी थी। अधिकार शब्द महत्वपूर्ण था। सभी गरीब लोगों को मनरेगा के तहत काम करने का अधिकार था। पीएम मोदी-भाजपा उस कन्सेप्ट को खत्म करना चाहती है।
वे चाहते हैं राजा ही सब कुछ तय करे
राहुल ने कहा कि कुछ साल पहले सरकार तीन काले कृषि कानून लाई थी। लेकिन हम सभी के एकजुट होकर दबाव बनाया और कानूनों को रद्द करवा दिया। नए कानून मेंं केंद्र सरकार काम और पैसा देने का फैसला करेगी और भाजपा शासित सरकारों को हमेशा प्राथमिकता मिलेगी। पहले जो मजदूरों को मिलता था, वह अब ठेकेदारों और अफसरों को दिया जाएगा। भाजपा चाहती है कि संपत्ति कुछ ही हाथों में रहे ताकि गरीब लोग अडानी-अंबानी पर निर्भर रहें, यही उनका भारत का आदर्श है। वे ऐसा भारत चाहते हैं जहां राजा ही सब कुछ तय करे।
राहुल बोले भाजपा डरपोक
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आगे कहा कि भाजपा चाहती है कि देश से लोकतंत्र, संविधान और एक व्यक्ति-एक वोट का अवधारणा खत्म हो जाए। ये लोग आजादी से पहले वाला हिंदुस्तान फिर से लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा भाजपा वाले डरपोक लोग हैं, इन्हें रोकने के लिए हमें एक साथ खड़ा होना होगा। जिस दिन हम सभी साथ आ गए, उस दिन नरेंद्र मोदी को पीछे हटना पड़ेगा और मनरेगा फिर से बहाल हो जाएगा।
RSS के हिंदू कार्यक्रम में शामिल होने पर बुरे फंसे MP के कांग्रेस विधायक, AICC तक पहुंचा मामला, मांगा गया जवाब
23 Jan, 2026 10:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह (Congress MLA Abhijit Shah) का आरएसएस के हिंदू कार्यक्रम (RSS’s Hindu program) में शामिल होना अब उनके लिए गले की फांस बनता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक मामला AICC तक पहुंच गया है। जिसके बाद उनसे इस मामले पर जवाब मांगा गया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी को मामले की पूरी रिपोर्ट सौंप दी है और उनसे जवाब मांगा गया है।
बता दें कि अभिजीत शाह हरदा जिले के टिमरनी से विधायक हैं। बीते दिनों टिमरनी विधानसभा के रहटगांव तहसील मुख्यालय पर आरएसएस का कार्यक्रम हुआ था, जिसमें कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह शामिल हुए थे। कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर हरदा जिले के नेताओं ने आपत्ति जताई है।
उद्धव को राज ठाकरे देने जा रहे बड़ा झटका? शिंदे सेना का समर्थन करेगी MNS
23 Jan, 2026 09:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत (Maharashtra politics) से एक चौंकाने वाली खबर आ रही है। खबर है कि उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व वाली शिवसेना कथित तौर पर कल्याण डोंबिवली नगर निगम में राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नव निर्वाचित पार्षदों के साथ गठबंधन करने की योजना बना रही है। यह पहल तब हो रही है, जब महीने भर पहले ही राज ठाकरे और उनके चचेरे भाई और शिवसेना (UBT) के चीफ उद्धव ठाकरे करीब बीस सालों बाद एक हुए हैं और दोनों ने मिलकर बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव लड़ा है।
आंकड़ों का खेल
107 वार्डों वाली कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में शिंदे गुट की शिवसेना के पास 53 सीटें हैं। भाजपा के पास 50 सीटें हैं, जबकि MNS के पास 5 सीटें हैं। शिवसेना (UBT) की 11, एनसीपी (SP) की 1 सीट और कांग्रेस की 2 सीटें हैं। नगर निगम में बहुमत का आंकड़ा 62 है। भाजपा और शिंदे सेना दोनों मिलकर बहुमत से काफी आगे हैं, लेकिन मेयर पद को लेकर दोनों सहयोगियों के बीच खींचतान की खबरें हैं। ऐसे में MNS के पांच नगरसेवक अहम भूमिका निभा सकते हैं।
यदि शिंदे सेना को MNS का समर्थन मिलता है, तो उसका आंकड़ा 58 तक पहुंच जाएगा, जो बहुमत से सिर्फ 4 कम है। यहीं पर MNS के पांच पार्षद बहुमत जुगाड़ के काम आ सकते हैं। NDTV के मुताबिक, इसी बहुमत के जुगाड़ के लिए शिंदे सेना MNS के इन पांचों पार्षदों के साथ गठबंधन करना चाह रही है।
MNS कोई AIMIM नहीं है
रिपोर्ट में कहा गया है कि शिवसेना के एकनाथ शिंदे और नरेश म्हस्के, और MNS नेता राजू पाटिल के बीच हुई एक बैठक ने चुनाव बाद इस समर्थन की चर्चा को हवा दी है। हालांकि, म्हास्के ने इन दावों को खारिज कर दिया कि यह राजनीतिक बदलाव महायुति में फूट की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा, “हमने कल्याण डोंबिवली नगर निगम चुनाव शिवसेना-BJP महायुति के तौर पर लड़ा था और हम महायुति के तौर पर ही सत्ता संभालेंगे।” MNS से संभावित गठजोड़ पर उन्होंने कहा, “अगर विकास के लिए सभी साथ आना चाहते हैं तो हमें कोई आपत्ति नहीं है। MNS कोई AIMIM नहीं है। यह शहर स्तर की विकास की राजनीति है।”
MNS का पक्ष: ‘स्थिरता के लिए समर्थन’
दूसरी तरफ, MNS नेता राजू पाटिल ने कहा कि उनकी पार्टी का यह रुख नगर निगम में स्थिरता बनाए रखने के लिए है। उन्होंने कहा, “भाजपा और शिवसेना साथ मिलकर लड़ रहे हैं। उन्हें समर्थन देकर हम भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अगर यह व्यवस्था बनती है तो एक साझा न्यूनतम कार्यक्रम भी तैयार किया जाएगा।” पाटिल ने यह भी स्पष्ट किया कि राज ठाकरे ने स्थानीय नेतृत्व को क्षेत्रीय राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने की छूट दी है।
संजय राउत का तीखा हमला
इस पूरे घटनाक्रम पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा, “जो महाराष्ट्र से गद्दारी करते हैं, वे गद्दार हैं और जो उनका साथ देते हैं, वे भी उसी श्रेणी में आते हैं। सिर्फ सत्ता न मिलने पर इस तरह का बेईमान व्यवहार महाराष्ट्र माफ नहीं करेगा।” राउत ने दावा किया कि इस मुद्दे को लेकर उद्धव ठाकरे नाराज़ हैं और उन्होंने राज ठाकरे से इस पर बात भी की है। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “जो लोग इस तरह पार्टियां बदलते हैं, वे राजनीतिक मनोरोगी हैं।”
बढ़ता सियासी तनाव
कल्याण-डोंबिवली का यह घटनाक्रम न सिर्फ स्थानीय राजनीति बल्कि ठाकरे परिवार के हालिया मेल-मिलाप पर भी सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि MNS नेतृत्व इस मुद्दे पर क्या अंतिम रुख अपनाता है और इसका असर महाराष्ट्र की व्यापक राजनीति पर कितना पड़ता है।
मोहाली में पंजाब के लोगों को ‘मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना’ समर्पित की मुख्यमंत्री भगवंत मान ने
23 Jan, 2026 08:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़ । मुख्यमंत्री भगवंत मान (Chief Minister Bhagwant Mann) ने मोहाली में पंजाब के लोगों को (To the People of Punjab in Mohali) ‘मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना’ समर्पित की (Dedicated the ‘Chief Minister Health Insurance Scheme’) । इस मौके पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी कार्यक्रम में मौजूद रहे ।
योजना के तहत पंजाब के हर परिवार को 10 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाएगी। इसके लिए हर परिवार को एक हेल्थ कार्ड जारी किया जाएगा, जिसके जरिए सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज कराया जा सकेगा। सरकार के मुताबिक इस योजना से राज्य के करीब 65 लाख परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि पंजाब भर में 800 से ज्यादा निजी अस्पताल इस योजना के तहत सूचीबद्ध किए गए हैं। इसके अलावा सभी सरकारी अस्पतालों में इलाज पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगा यानी अब पैसों की कमी की वजह से किसी को इलाज से वंचित नहीं रहना पड़ेगा।
योजना को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए सरकार ने खास तैयारी की है। यूथ क्लब के वॉलंटियर घर-घर जाकर लोगों को टोकन बांटेंगे। इन टोकन के जरिए लोग अपने हेल्थ कार्ड मुफ्त में बनवा सकेंगे। कार्ड बनवाने के लिए नागरिकों को सिर्फ आधार कार्ड और वोटर आईडी लेकर तय किए गए सेंटर पर जाना होगा। सरकार ने साफ कहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी तरह की फीस नहीं ली जाएगी।
पिछले सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने पार्टी ऑफिस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस योजना की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना 22 तारीख को आधिकारिक रूप से लॉन्च की जाएगी और इसके तहत 10 लाख रुपए तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह योजना मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल के उस वादे को पूरा करती है, जिसमें हर नागरिक को बिना किसी आर्थिक बोझ के बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने की बात कही गई थी।
डॉ. बलबीर सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि हेल्थ कार्ड बनाने से लेकर इलाज तक का पूरा खर्च पंजाब सरकार उठाएगी। किसी भी व्यक्ति, एजेंसी या अस्पताल को किसी भी स्तर पर एक रुपया भी वसूलने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि वेलफेयर स्कीम के नाम पर अगर कोई लोगों को ठगने या गुमराह करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बीएमसी में महिला मेयर तय, भाजपा-शिवसेना मिलकर चुनेंगी उम्मीदवार
22 Jan, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्मुबई। बीएमसी में मेयर पद महिला को ही मिलेगा। ये साफ हो चुका है। महाराष्ट्र में निकाय चुनाव से जुड़े इस बड़े अपडेट के मुताबिक भाजपा-शिवसेना मिलकर महापौर का नाम तय करेंगे। बीएमसी के अलावा नवी मुंबई में भी महापौर पद महिला को मिलेगा, जबकि ठाणे में मेयर अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग से बनेगा। शहरी विकास विभाग ने गुरुवार को लॉटरी के जरिए आरक्षण तय किया, जिसके आधार पर बीएमसी मेयर पद पर महिला की ताजपोशी होगी।
क्या है लॉटरी सिस्टम?
महाराष्ट्र सरकार के शहरी विकास विभाग ने गुरुवार को एक लॉटरी व्यवस्था के तहत विभिन्न नगर पालिकाओं के लिए आरक्षण व्यवस्था तय की। शहरी निकाय के नियमों के तहत बीएमसी समेत सभी नगर पालिकाओं में मेयर पद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं को रोटेशन प्रणाली के आधार पर दिया जाता है। हालांकि यह आरक्षण व्यवस्था पहले से तय नहीं होती और इसके लिए लॉटरी सिस्टम बनाया गया है। जब तक यह लॉटरी नहीं निकाली जाती, तब तक राजनीतिक पार्टियां मेयर पद के लिए उम्मीदवारों को नाम का एलान नहीं कर सकतीं। संविधान के 74वें संशोधन के बाद नगर निकाय में नेतृत्व के लिए सामाजिक प्रतिनिधित्व का उल्लेख किया गया है। यह लॉटरी व्यवस्था मेयर चुनाव की प्रक्रिया को निष्पक्ष रखने के लिए की गई है।
महाराष्ट्र की अन्य महानगरपालिकाओं में महापौर यानी मेयर पद को लेकर क्या फैसला लिया गया है? जानिए तमाम सवालों के जवाब नीचे दी गई सूची से
अ.क्र. महानगरपालिका का नाम आरक्षित श्रेणी
1 बृहन्मुंबई (BMC) ओपन (महिला)
2 ठाणे अनुसूचित जाति (एससी)
3 कल्याण-डोंबिवली अनुसूचित जनजाति (एसटी)
4 नवी मुंबई ओपन (महिला)
5 वसई-विरार ओपन
6 भिवंडी-निजामपुर सर्वसाधारण (महिला)
7 मीरा-भाईंदर ओपन (महिला)
8 उल्हासनगर ओबीसी
9 पुणे ओपन
10 पिंपरी-चिंचवड ओपन
11 नागपुर ओपन (महिला)
12 अहिल्यानगर ओबीसी (महिला)
13 नाशिक ओपन
14 छत्रपति संभाजीनगर ओपन
15 अकोला ओबीसी (महिला)
16 अमरावती ओपन
17 लातूर अनुसूचित जाति (एससी)
18 नांदेड़-वाघाला ओपन (महिला)
19 चंद्रपुर ओबीसी (महिला)
20 धुले ओपन (महिला)
21 जलगांव ओबीसी (महिला)
22 मालेगांव ओपन
23 कोल्हापुर ओबीसी
24 सांगली-मीरज-कुपवाड़ ओपन
25 सोलापुर ओपन
26 इचलकरंजी ओबीसी
राजनीतिक पार्टियों में किस वर्ग के कितने पार्षद?
ओपन कैटेगरी में भाजपा के पास 31 पार्षद हैं, जबकि शिवसेना यूबीटी के 20 पार्षद ओपन कैटेगरी के हैं। वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना में इनका आंकड़ा 11 है। महिलाओं की बात करें तो भाजपा की 25 महिला पार्षद हैं। शिवसेना यूबीटी में 18 और शिंदे शिवसेना की 9 महिला पार्षद हैं।
अन्य पिछड़ा वर्ग में भाजपा के पास 17 पार्षद हैं। शिवसेना यूबीटी में 11 और शिवसेना में तीन पार्षद अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं। ओबीसी वर्ग में महिला पार्षदों की बात करें तो भाजपा में 13, शिवसेना यूबीटी में सात और शिंदे शिवसेना में 3 महिला ओबीसी पार्षद हैं।
अनुसूचित जाति वर्ग की बात करें तो भाजपा के दो, शिंदे शिवसेना के एक और शिवसेना यूबीटी के तीन पार्षद अनुसूचित जाति के हैं। अनुसूचित जाति महिला वर्ग में शिवसेना यूबीटी की चार पार्षद, शिंदे शिवसेना की दो और भाजपा की एक पार्षद हैं।
अनुसूचित जनजाति वर्ग में शिवसेना यूबीटी का ही एक पार्षद है, जबकि भाजपा और शिंदे शिवसेना का एक भी पार्षद इस वर्ग से नहीं है।
राहुल गांधी को मिला दादा फिरोज गांधी का ऐतिहासिक दस्तावेज, मां सोनिया को भेजा
22 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रायबरेली । उत्तर प्रदेश के रायबरेली (Raebareli, Uttar Pradesh) के दो दिवसीय दौरे पर आए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के लिए मंगलवार का दिन बेहद खास रहा। उन्हें उनके दादा और पूर्व सांसद फिरोज गांधी (Feroze Gandhi) का दशकों पुराना ड्राइविंग लाइसेंस भेंट किया गया, जो वर्षों से गुमनाम था। रायबरेली प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान आयोजन समिति के सदस्य विकास सिंह ने राहुल गांधी को यह ऐतिहासिक दस्तावेज सौंपा।
विकास सिंह ने बताया कि उनके ससुर को यह लाइसेंस कई साल पहले एक कार्यक्रम के दौरान मिला था। उनके निधन के बाद उनकी सास ने इसे एक अमानत की तरह सुरक्षित रखा था।
विकास सिंह ने कहा, “हमें लगा कि यह गांधी परिवार की धरोहर है और राहुल जी के रायबरेली दौरे के दौरान इसे उन्हें सौंपना हमारा कर्तव्य है।”
जैसे ही राहुल गांधी को यह लाइसेंस मंच पर सौंपा गया, उन्होंने इसे बहुत ध्यान से देखा। पुरानी यादों से जुड़ा यह दस्तावेज देखकर राहुल गांधी काफी प्रभावित नजर आए। उन्होंने तुरंत अपने मोबाइल से लाइसेंस की फोटो खींची और व्हाट्सऐप के जरिए अपनी मां सोनिया गांधी को भेज दी।
आपको बता दें कि फिरोज गांधी का जन्म दिसंबर 1912 में हुआ था। उन्होंने 1952 में भारत के पहले आम चुनाव में रायबरेली सीट का प्रतिनिधित्व किया था। 7 सितंबर 1960 को उनका निधन हो गया था। आपको बता दें कि रायबरेली न केवल राहुल गांधी का वर्तमान निर्वाचन क्षेत्र है, बल्कि उनके दादा फिरोज गांधी और मां सोनिया गांधी का भी कार्यक्षेत्र रहा है।
ट्रंप के दावे को लेकर कांग्रेस का PM मोदी पर तंज, कहा-70 बार मजाक उडा… फिर भी चुप्पी
22 Jan, 2026 10:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान (India and Pakistan) के बीच पिछले साल हुए तनाव को खत्म करने का श्रेय एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने लिया है। ट्रंप के इस ताजा दावे के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) पर हमला तेज कर दिया है। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि ट्रंप अब तक 70 बार इस तरह का दावा कर चुके हैं, लेकिन भारत सरकार की ओर से इस पर कोई कड़ा रुख नहीं दिख रहा। वाइट हाउस में अपने दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष की उपलब्धियां गिनाते हुए ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने दुनिया की 8 अंतहीन लड़ाइयां रुकवाई हैं।
भारत-पाक के संदर्भ में उन्होंने कहा, “पाकिस्तान और भारत एक-दूसरे पर हमला कर रहे थे। आठ विमान मार गिराए गए थे। मेरी राय में दोनों देश परमाणु युद्ध की ओर बढ़ रहे थे। अगर मैं हस्तक्षेप नहीं करता, तो करोड़ों लोग मारे जाते।” ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने 10 महीनों में कंबोडिया-थाईलैंड, कोसोवो-सर्बिया और इजरायल-ईरान जैसे आठ बड़े संघर्षों को शांत कराया है।
जयराम रमेश का तीखा हमला
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की दोस्ती पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “कल से पहले यह संख्या 68 थी। लेकिन कल ही यह आंकड़ा 69 नहीं, बल्कि सीधे 70 पर पहुंच गया। एक बार व्हाइट हाउस की प्रेस कॉन्फ़्रेंस के अपने शुरुआती बयान में और बाद में सवाल-जवाब के दौरान। यही वह संख्या है, जितनी बार प्रधानमंत्री के ‘अच्छे दोस्त’ और जिन्हें कई बार पीएम की जबरन झप्पी मिल चुकी है- ने यह दावा किया है कि 10 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर के अचानक और अप्रत्याशित रूप से रुकने के लिए वही जिम्मेदार थे।”
नोबेल शांति पुरस्कार की चाहत
ट्रंप ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी मलाल जताया कि इन युद्धों को रुकवाने के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकने से कम से कम 1.5 से 2 करोड़ लोगों की जान बची है, जो उनके लिए नोबेल से बड़ी बात है।
गौरतलब है कि भारत सरकार हमेशा से यह कहती रही है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है। हालांकि, 10 मई 2025 को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि वाशिंगटन की मध्यस्थता के बाद दोनों देश पूर्ण युद्धविराम पर सहमत हुए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि ट्रंप के बार-बार इस तरह के दावे करना भारतीय संप्रभुता और प्रधानमंत्री के दावों पर सवाल खड़ा करता है।
कहां किसे मिलेगी मेयर की कुर्सी, 11 बजे उठेगा पर्दा, शिंदे की लॉटरी से खुलेगी किस्मत
22 Jan, 2026 09:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली .महाराष्ट्र (Maharashtra) में मुंबई की बीएमसी (BMC) सहित 29 नगर महापालिका (Nagar Municipal Corporation) में अब बारी मेयर (mayor) के चुनाव की है, जिस पर सभी की निगाहें लगी हुई है. किस शहर में महिला मेयर होगी और किस शहर में ओबीसी, सामान्य वर्ग या फिर अनुसूचित जाति से होगा. गुरुवार को सुबह 11 बजे इससे पर्दा उठ जाएगा, क्योंकि शहरी विकास विभाग आरक्षण की प्रक्रिया के जरिए तय कर देगा.
बीएमसी सहित सभी महानगरपालिका में नए मेयर का चुनाव निगम सदन में पार्षदों के मतदान के जरिए किया जाएगा. अलग-अलग शहरों में नवनिर्वाचित पार्षदों की बुलाई जाने वाली विशेष बैठक में मेयर का चुनाव होगा, लेकिन उससे पहले मेयर किस जाति और किस वर्ग का होगा, ये फॉर्मूला एकनाथ शिंदे के मंत्रालय के द्वारा ‘लॉटरी सिस्टम’ से तय किया जाना है.
महाराष्ट्र में किस नगर महापालिका का मेयर किस जाति और किस वर्ग से होगा, इसका फैसला राज्य के अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट यानि शहरी विकास विभाग के द्वारा तय किया जाता है. राज्य के शहरी विकास विभाग का जिम्मा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास है. ऐसे में मेयर पद के आरक्षण के लिए शहरी विकास विभाग गुरुवार को लाटरी के जरिए तय करेगा.
मेयर आरक्षण 11 बजे लाटरी से होगा तय
मुंबई बीएमसी समेत महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिका में मेयर पद के लिए नगर विकास विभाग आज आरक्षण लॉटरी निकालेगा. शहरी विकास मंत्रालय में सुबह 11 बजे से लॉटरी प्रक्रिया शुरू होगी. कार्यक्रम के अनुसार 29 नगर निगमों की लॉटरी शहरी विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसल की अध्यक्षता में निकलेगी. लॉटरी निकले के बाद ही तय होगी किस मुंबई सहित 29 शहरों के मेयर महिला और पुरुष में किस वर्ग का होगा. इसके अलावा सामान्य वर्ग, ओबीसी, अनुसूचति जाति या अनुसूचित जनजाति में किस कैटेगरी से होगा.
रोटेशन के आधार पर तय होगा आरक्षण
महाराष्ट्र में मेयर का पद रोटेशन के आधार पर सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षित होता है.कि मुंबई के बीएमसी में पिछली बार मेयर का पद सामान्य के निकला थाा. ऐसे में सामान्य को लॉटरी में नहीं रखा जाएगा. इसी तरह से महाराष्ट्र के बाकी 28 नगर महापालिका में पिछला मेयर जिस वर्ग और जिस कैटेगरी का था, उसे इस बार के लॉटरी सिस्टम में शामिल नहीं किया जाएगा. इस तरह से सभी की निगाहें आरक्षण की लाटरी सिस्टम पर ही टिकी हुई है.
महाराष्ट्र में कैसे होगा मेयर पद का चुनाव
मेयर पद पर आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 29 महानगरपालिका के नए मेयर का चुनाव होगा. इस तरह से महाराष्ट्र के मुंबई को आखिरकार चार साल बाद मेयर मिलने जा रहा है. मुंबई के मेयर का पद संभालने वाली आखिरी शख्स शिवसेना की किशोरी पेडनेकर थीं, जो इस बार भी जीतकर आईं है, लेकिन उद्धव की सेना को बहुमत का नंबर नहीं मिल सका है. इसके चलते उनका मेयर बनने की राह काफी मुश्किल है.
मुंबई के बीएमसी में अलग-अलग वॉर्डों से कुल 227 पार्षद चुनाव जीतकर आए हैं, जिन्हें मुंबई में नगर सेवक या फिर कॉरपोरेटर कहा जाता है. ऐसे में जिस पार्टी का बहुमत होता है, उसी पार्टी का मेयर चुना जाता है. बीएमसी सहित सभी नगर महापालिका चुनाव जीतकर आने वाले पार्षद अपने-अपने निगम में मेयर का चुनाव करते हैं.
28 जनवरी को मेयर और उपमेयर का चुनाव?
मेयर का कार्यकाल ढाई साल का होता है, वहीं पार्षद 5 साल के लिए चुने जाते हैं. एक मेयर का कार्यकाल पूरा होने के बाद दूसरे मेयर का चुनाव होता है. ऐसे में प्रशासन नवनिर्वाचित निगम पार्षदों की विशेष बैठक बुलाएगा, जिसमें मेयर और उपमेयर का चुनाव होगा. 28 जनवरी को नगर प्रशासन पार्षदों की विशेष बैठक बुला सकता है. बैठक में मेयर पद के लिए सभी निर्वाचित पार्षद मतदान करेंगे और जिसे सबसे अधिक वोट मिलेंगे, वही मेयर चुना जाएगा.
हालांकि. यह जरूरी नहीं है कि सबसे ज्यादा पार्षदों वाली पार्टी का उम्मीदवार ही मेयर बने, लेकिन बीते वर्षों के चुनावी अनुभव बताते हैं कि आमतौर पर बहुमत या मजबूत गठबंधन वाली पार्टी इस पद पर काबिज होती रही है. माना जा रहा है कि बीजेपी पहली बार मुंबई में अपने मेयर बना सकती है. इसी तरह से जिस शहर में जिस पार्टी के सबसे ज्यादा पार्षद चुनकर आए हैं, उस पार्टी का मेयर चुनाव जा सकता है.
भाजपा की ‘नवीन’ टीम में भी होगा पीढ़ी परिवर्तन, 55 होगी औसत उम्र; जानें आगामी चुनाव के लिए क्या है रणनीति
22 Jan, 2026 08:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. भाजपा (BJP) में राष्ट्रीय अध्यक्ष (National President) के बाद अब राष्ट्रीय संगठन की नई टीम (‘new’ team) में भी पीढ़ी परिवर्तन की धमक सुनाई देगी। अब तक के सबसे युवा अध्यक्ष नितिन नवीन (Nitin Naveen) की नई टीम में युवा और अनुभव के बीच सामंजस्य बैठाते हुए नई पीढ़ी के कई युवाओं को मौका मिलेगा।
कोशिश नई टीम की औसत उम्र 55 वर्ष करने की है और इसके लिए माथापच्ची भी शुरू हो गई है। इस बीच अध्यक्ष बनने के अगले ही दिन नितिन ने पार्टी मुख्यालय में मैराथन बैठक कर एक-एक राज्य की ताजा राजनीतिक स्थिति की विस्तार से जानकारी ली है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक चूंकि आगामी लोकसभा चुनाव नितिन नवीन और उनकी नई टीम की अगुवाई में ही लड़ी जानी है। इसलिए नई टीम में ऐसे युवाओं को जगह मिलेगी, जिनके अंदर आने वाले दिनों में सांगठनिक कौशल दिखाने की क्षमता हो।
नाम तय होते ही शुरू हो गया था मंथन
अध्यक्ष पद के लिए नितिन का नाम तय होते ही पार्टी में शीर्ष स्तर पर नई टीम पर मंथन शुरू हो गया था। इसके लिए अलग-अलग राज्यों के युवा नेताओं की सूची तैयार की गई थी। पार्टी सूत्र ने कहा कि युवा टीम बनाने में अड़चन इसलिए भी नहीं है कि पहले की तरह केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नेता भी संगठन को अपने अनुभव का लाभ देते रहेंगे।
चुनावी तैयारियों की समीक्षा- बूथ स्तर की जिम्मेदारियां संभालने के दिए निर्देश
पार्टी अध्यक्ष ने पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुद्दुचेरी में पार्टी की चुनाव तैयारियों की समीक्षा की और प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। बैठक के दौरान, नबीन ने कहा कि पार्टी पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु में सरकार बनाने को लेकर आश्वस्त है और केरल में भी मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद करती है। बैठक में महाराष्ट्र सहित स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी की सफलता पर भी चर्चा हुई। नितिन नबीन ने भाजपा की बूथ और मंडल इकाइयों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया और पदाधिकारियों को संगठनात्मक मामलों पर मार्गदर्शन प्रदान किया।
कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति पर हुई चर्चा
इस बैठक में देश में विकसित भारत और वीबी जी राम-जी अधिनियम जैसे विकास कार्यक्रमों के खिलाफ कांग्रेस पार्टी की ओर से अपनाई जा रही नकारात्मक राजनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। इस संबंध में नबीन और निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मार्गदर्शन दिया।
आवारा कुत्तों पर मेनका गांधी की बात पर नाराज हुए CJI, जानिए पूरा मामला
21 Jan, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (SC) ने पशु अधिकार कार्यकर्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी (Maneka Gandhi) को आज कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने एक पॉडकास्ट के दौरान आवारा कुत्तों के मामले में कोर्ट की टिप्पणियों पर उनकी “बॉडी लैंग्वेज” और बयानों पर भी सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश और देश के भावी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजनिया की पीठ ने कहा कि यह अदालत की “दरियादिली” है कि मेनका गांधी के खिलाफ अवमानना (कंटेम्प्ट) की कार्रवाई नहीं की जा रही है।
कोर्ट ने साफ किया कि जब उन्होंने (मेनका गांधी ने) अपने पॉडकास्ट में आवारा कुत्तों के हमलों के लिए कुत्तों को खाना खिलाने वालों को जिम्मेदार बनाने की बात कही थी, तो वह गंभीर टिप्पणी थी, कोई मज़ाक नहीं कर रही थीं। कोर्ट ने गांधी के वकील राजू रामचंद्रन से कहा, “कुछ देर पहले, आप कोर्ट से कह रहे थे कि हमें सावधान रहना चाहिए। क्या आपने पता लगाया कि आपकी क्लाइंट किस तरह की टिप्पणियां कर रही हैं? आपकी क्लाइंट ने अवमानना की है। हम उस पर संज्ञान नहीं ले रहे हैं। यह हमारी महानता है। क्या आपने उनका पॉडकास्ट सुना है? उनकी बॉडी लैंग्वेज कैसी है? वह क्या कहती हैं और कैसे कहती हैं।”
बार एंड बेंच के मुताबिक, बेंच ने कहा, “आपने टिप्पणी की कि कोर्ट को सावधान रहना चाहिए। दूसरी ओर, आपकी क्लाइंट जिसे चाहे और जिस पर चाहे, हर तरह की टिप्पणियां कर रही हैं।” पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस विक्रम नाथ ने साफ शब्दों में कहा कि मेनका गांधी की टिप्पणियाँ अदालत की अवमानना के दायरे में आती हैं, लेकिन कोर्ट ने इस पर कार्रवाई नहीं की। इस पर रामचंद्रन ने कहा कि यह अवमानना की सुनवाई नहीं है, इसलिए वह टिप्पणी नहीं करेंगे। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह 26/11 के आतंकवादी अजमल कसाब के लिए भी पेश हुए थे। इस पर जस्टिस नाथ और भड़क गए। उन्होंने तपाक से कहा, “कसाब ने अवमानना नहीं की थी।”
बजट और जिम्मेदारी पर सवाल
कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब मेनका गांधी एक पशु अधिकार कार्यकर्ता और पूर्व कैबिनेट मंत्री रही हैं, तो आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने बजट और योजनाओं में क्या योगदान दिया? इस बीच, वकील ने रेबीज नियंत्रण उपायों, टीकों की उपलब्धता और आवारा कुत्तों के हमलों से निपटने के लिए पेशेवरों की क्षमता निर्माण के बारे में बात करना जारी रखा।
कुत्तों की नसबंदी पर बहस
याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि नसबंदी (स्टेरिलाइजेशन) से आवारा कुत्तों की आक्रामकता कम होती है, लेकिन ज्यादातर शहरों में इसे ठीक से लागू नहीं किया जा रहा। उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट की कुछ टिप्पणियों के कारण डॉग फीडर्स पर हमले हो रहे हैं। इस पर जस्टिस नाथ ने दोहराया कि अदालत की बात व्यंग्य नहीं बल्कि गंभीर थी।
पहले क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने?
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर आवारा कुत्तों के हमले में बच्चों या बुजुर्गों की मौत या चोट होती है, तो राज्य सरकारों से भारी मुआवजा दिलाया जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा था कि जो लोग कुत्तों को खाना खिलाते हैं, उनकी जिम्मेदारी और जवाबदेही भी तय की जा सकती है, और सवाल उठाया था कि अगर लोग जानवरों से इतना प्रेम करते हैं तो उन्हें अपने घर क्यों नहीं रखते। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि आवारा कुत्तों का मुद्दा गंभीर जन सुरक्षा से जुड़ा विषय है, और इस पर की गई टिप्पणियों को हल्के या मज़ाक के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि सार्वजनिक मंचों पर अदालत के खिलाफ बयान देते समय जिम्मेदारी और मर्यादा जरूरी है।
नितिन नबीन की सफलता के पीछे डॉ. दीपमाला श्रीवास्तव की भूमिका
21 Jan, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार बीजेपी के प्रमुख नेता और नीतीश सरकार में मंत्री रहे नितिन नबीन को हाल ही में बीजेपी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। नितिन नबीन सबसे कम उम्र में बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने वाले नेता हैं। राजनीतिक जीवन में ज़मीनी स्तर पर संगठन के लिए काम करने वाले शांत स्वभाव के नितिन नबीन अपनी पर्सनल लाइफ में काफी भावुक इंसान हैं। पांच बार के विधायक रहे नितिन नबीन की पत्नी का नाम डॉ. दीपमाला श्रीवास्तव है, जो पेशे से एक बैंक अधिकारी हैं। नितिन नवीन को अमित शाह तो दीपमाला को पीएम मोदी एक नेता के रूप में पसंद हैं।
नितिन नवीन की है अरेंज मैरिज
डॉ. दीपमाला श्रीवास्तव और नितिन नबीन की शादी अरेंज मैरिज थी। दोनों के माता-पिता ने यह रिश्ता तय किया था और शादी के बाद ही दोनों एक-दूसरे को ठीक से जान पाए। दीपमाला ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि नितिन स्वभाव से बेहद शांत, सुलझे हुए और संवेदनशील इंसान हैं।पति के राजनीतिक सफर पर बात करते हुए दीपमाला कहती हैं कि नितिन पहले विधायक बने, फिर मंत्री और अब पार्टी में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पहले जहां एक शहर की जिम्मेदारी थी, वहीं बाद में पूरे राज्य और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में प्रभारी की भूमिका निभाई। नितिन नबीन बढ़ती जिम्मेदारियों के बावजूद परिवार और बच्चों के लिए समय निकालते हैं।
15 साल में बनी दोनों के बीच बनी खास समझ: दीपमाला
दीपमाला बताती हैं कि 15 साल की शादी के बाद अब दोनों को एक-दूसरे से ज्यादा कहने की जरूरत नहीं पड़ती। बिना बोले ही वे समझ जाते हैं कि सामने वाले को क्या चाहिए। मुस्कराते हुए वह कहती हैं कि नितिन कभी झगड़ा नहीं करते, क्योंकि झगड़े के लिए दो लोगों की जरूरत होती है और यह आदत उनमें नहीं है।
ये चुनाव है या बिग बॉस का खेल…नितिन नवीन के भाजपा अध्यक्ष बनने पर कांग्रेस का तंज
21 Jan, 2026 10:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भाजपा (BJP) द्वारा नितिन नवीन (Nitin Naveen) को पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष (New National President) घोषित किए जाने के बाद सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भाजपा ने पहले अध्यक्ष घोषित कर दिया और बाद में चुनाव की औपचारिकता की बात कही। कांग्रेस का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और यह आंतरिक लोकतंत्र के दावों पर सवाल खड़े करती है।
कांग्रेस का हमला क्यों?
कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि अगर यह चुनाव था तो प्रक्रिया कहां हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि पहले नाम तय करना और फिर चुनाव की बात करना किस तरह का लोकतांत्रिक तरीका है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा में संगठनात्मक चुनाव सिर्फ दिखावा बनकर रह गए हैं और असली फैसले पहले ही बंद कमरों में हो जाते हैं।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी घसीट लिया। पवन खेड़ा ने व्यंग्य करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में चुनाव आयोग की कोई भूमिका ही नहीं रही, इसलिए उन्हें “छेड़छाड़” का मौका भी नहीं मिला। कांग्रेस पहले से ही चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाती रही है और इस बयान के जरिए उसने अपने हमले को और तेज कर दिया।
‘बॉस-बॉस’ की राजनीति पर कटाक्ष
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर भी तंज कसा, जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी मामलों में नितिन नवीन उनके बॉस हैं। पवन खेड़ा ने कहा कि भाजपा में कभी कोई किसी का बॉस बन जाता है और कभी कोई और। उन्होंने इसे ‘बॉस-बॉस’ का खेल बताते हुए कहा कि देश और जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है।
कांग्रेस ने हाल ही में गंगा में स्नान को लेकर साधु-संतों से जुड़े विवाद का भी जिक्र किया। पवन खेड़ा ने कहा कि एक तरफ हिंदू धर्म के बड़े संत आहत हैं और दूसरी तरफ भाजपा सत्ता के खेल में व्यस्त है। इसी संदर्भ में उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह राजनीति नहीं बल्कि ‘बिग बॉस’ जैसा शो बन गया है, जहां हर दिन नया ड्रामा दिखाया जाता है।
शहरी नक्सल वाले बयान पर भी कांग्रेस हमलावर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शहरी नक्सल चुनौती का जिक्र किए जाने के बाद कांग्रेस ने उन पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने संसद में केंद्र सरकार के पुराने जवाब का हवाला देते हुए पूछा कि क्या प्रधानमंत्री मानते हैं कि जो भी उनके विरोध में बोले, उसे शहरी नक्सल मान लिया जाए। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि 2020 में गृह मंत्रालय ने राज्यसभा में साफ किया था कि अर्बन नक्सल शब्द सरकारी शब्दावली का हिस्सा नहीं है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री बार-बार इस शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो विरोध की आवाजों को बदनाम करने जैसा है।
कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया उस भाषण के बाद आई है, जिसमें प्रधानमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में पार्टी के नए अध्यक्ष के चुनाव के बाद ‘शहरी नक्सलों’ को देश के लिए खतरा बताया। मोदी ने कहा कि ये लोग सरकार या उनके पक्ष में बोलने वालों को भी निशाना बनाते हैं और उन्हें सामाजिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश करते हैं। कांग्रेस का कहना है कि जाति जनगणना या आर्थिक असमानता पर सवाल उठाने वालों को भी ‘शहरी नक्सल सोच’ से जोड़ना लोकतांत्रिक बहस को कमजोर करता है। पार्टी ने प्रधानमंत्री से स्पष्ट जवाब मांगा है कि क्या हर असहमति को इसी नजर से देखा जाएगा।
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