राजनीति
अजित पवार का कल होगा अंतिम संस्कार, महाराष्ट्र में 3 दिन का राजकीय शोक घोषित
28 Jan, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र के बारामती जिले में बहुत बड़ा हादसा हुआ है। यहां राज्य के डिप्टी CM और NCP के प्रमुख अजित पवार का विमान क्रैश हो गया है। इस विमान क्रैश में अजित पवार का निधन हो गया है। DGCA ने इस विमान क्रैश में सभी 5 लोगों की मौत की पुष्टि की है। इस घटना ने महाराष्ट्र की सियासत में हड़कंप मचा दिया है। घटना से अजित पवार के समर्थकों में उदासी छा गई है।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत, सीएम फडणवीस और एकनाथ शिंदे बारामती पहुंचे
महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बारामती एयरपोर्ट पहुंचे। वे बारामती में अजित पवार को श्रद्धांजलि देंगे और परिजनों से मुलाकात करेंगे। आज सुबह बारामती में एक चार्टर प्लेन की क्रैश लैंडिंग में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया।
अजित पवार के पार्थिव शरीर को विद्या प्रतिष्ठान ग्राउंड ले जाया जा रहा
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के पार्थिव शरीर को विद्या प्रतिष्ठान ग्राउंड ले जाया जा रहा है, ताकि लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सकें। उनका अंतिम संस्कार कल सुबह 11 बजे किया जाएगा।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने हादसे की जांच की मांग की
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने इस हादसे की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा, “हम इस हादसे की जांच की मांग करते हैं। यह बहुत दुखद घटना है। अजीत पवार की असमय मौत हो गई। एक मेहनती इंसान के चले जाने से हम सब सदमे में हैं। दुख की इस घड़ी में हम उनके परिवार के साथ हैं।”
पीएम मोदी ने शरद पवार से बात की, निधन पर जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शरद पवार से बात की। अजित पवार के निधन पर जताया गहरा शोक। पीएम मोदी कल अजित पवार के अंतिम संस्कार में शामिल होने बारामती आएंगे। आज सुबह बारामती में एक विमान हादसे में अजित पवार का निधन हो गया।
कल सुबह होगा अजित पवार का अंतिम संस्कार
एनसीपी नेता अजित पवार का अंतिम संस्कार कल सुबह 11 बजे बारामती के विद्या प्रतिष्ठान में होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी अंतिम संस्कार में शामिल होंगे।
“शरद पवार की पार्टी में वापस लौटने वाले थे अजित पवार”, CM ममता बनर्जी के बयान से मची खलबली
28 Jan, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। प्लेन क्रैश में डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “अजित पवार, शरद पवार की पार्टी में वापस लौटने वाले थे। प्लेन हादसे की जांच कराई जाए। एजेंसियां बिकी हुई हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच हो।”
ममता बनर्जी ने कहा, “कुछ दिनों में अजित पावर अपने पुराने गुट में लौटने वाले थे। उससे पहले ही यह दुर्घटना घटी। देश में लोगों की कोई सुरक्षा नहीं हैं। पहले अहमदाबाद में इतने लोगों की जान गई और अब इस हादसे में अजित पवार की जान गई। देश के मुख्यमंत्री समय कम होने की वजह से चार्टर्ड फ्लाइट में सफर करते हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा का क्या? हम इस हादसे से बड़ा परेशान हैं। शब्द नहीं हैं हमारे पास। सुप्रीम कोर्ट के सुपरविजन पर जांच होनी चाहिए।”
हालांकि ममता बनर्जी ने ये बयान अजित पवार के निधन के बाद फौरन नहीं दिया। बल्कि सबसे पहले उन्होंने ये बयान दिया, “अजित पवार के अचानक निधन से मैं अत्यंत स्तब्ध हूं! महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और उनके सहयात्रियों की आज सुबह बारामती में एक भयावह विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई है, और मुझे गहरा शोक का अनुभव हो रहा है। उनके परिवार, उनके चाचा शरद पवार जी सहित, और स्वर्गीय अजित जी के सभी मित्रों और अनुयायियों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। इस घटना की उचित जांच होनी चाहिए।”
इस बयान को देने के कुछ घंटों बाद ममता ने इस मामले में दूसरा बयान दिया, जिसने सियासत में हड़कंप मचा दिया। इस बयान के मुताबिक, ममता ने कहा कि अजित पवार, शरद पवार की पार्टी में वापस लौटने वाले थे। प्लेन क्रैश मामले की जांच होनी चाहिए।
संसद में राष्ट्रपति का संबोधन, सरकार की उपलब्धियों का लेखा-जोखा
28 Jan, 2026 03:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बुधवार को संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन किया। इस दौरान उन्होंने देश की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा, "संसद के इस सत्र को संबोधित करते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। पिछला वर्ष भारत की तीव्र प्रगति और विरासत के उत्सव के रूप में यादगार रहा। पूरे देश में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया जा रहा है। नागरिक बंकिम चंद्र चटर्जी को उनकी इस महान प्रेरणा के लिए नमन कर रहे हैं। मैं सभी सांसदों को बधाई देती हूं कि संसद में इस विषय पर विशेष चर्चा हुई।"
ऑपरेशन सिंदूर से दुनिया ने भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता देखी- राष्ट्रपति मुर्मू
इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, "देश ने श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस मनाया। वहीं, बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर पूरे देश ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके साथ ही आदिवासी समुदाय के प्रति उनके योगदान को याद किया। सरदार पटेल की 150वीं जयंती से संबंधित कार्यक्रमों ने 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की भावना को और मजबूत किया। पूरे देश ने देखा कि भारत रत्न भूपेन हजारिका की जयंती समारोह ने देश को संगीत और एकता की भावना से भर दिया। जब देश अपने पूर्वजों के योगदान को याद करता है, तो नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है, जिससे 'विकसित भारत' की ओर हमारा सफर और भी तेज हो जाता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, "श्री गुरु तेग बहादुर जी ने हमें सिखाया है 'भय कहूं को देत नेहन नेहन भय मानत आन'। इसका अर्थ है कि हमें न तो किसी को डराना चाहिए और न ही किसी से डरना चाहिए। इसी निडर मन और भावना के साथ हम देश की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। भारत ने सिद्ध किया है कि शक्ति का प्रयोग जिम्मेदारी और बुद्धिमत्ता के साथ किया जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से दुनिया ने भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता देखी। अपने संसाधनों से हमारे देश ने आतंकवाद के गढ़ों को नष्ट किया। मेरी सरकार ने यह कड़ा संदेश दिया है कि भारत पर होने वाले सभी हमलों का जवाब मजबूत और निर्णायक होगा। सिंधु जल संधि को स्थगित रखा गया है। यह आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई का एक हिस्सा है। देश की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र पर भी काम चल रहा है।
देश शताब्दी के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, "वर्ष 2026 के साथ हमारा देश इस शताब्दी के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। भारत के लिए, इस शताब्दी के पहले 25 वर्षों का अंत कई सफलताओं, गौरवपूर्ण उपलब्धियों और असाधारण अनुभवों से भरा रहा है। पिछले 10-11 वर्षों में, भारत ने हर क्षेत्र में अपनी नींव मजबूत की है। यह वर्ष विकसित भारत की ओर हमारी यात्रा का एक महत्वपूर्ण आधार है।" राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, "ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और विकास के लिए विकसित भारत-ग्राम विकास कानून बनाया गया है। इस नए सुधार से गांवों में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी होगी। " इस दौरान एनडीए-भाजपा सांसदों ने तालियां बजाकर अपनी सराहना व्यक्त की। वहीं विपक्षी सांसद खड़े होकर विरोध जताते हुए कानून को वापस लेने की मांग करने लगे।
एनडीए से महिला कैडेटों का पहला बैच उत्तीर्ण हुआ
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, "मेरी सरकार की प्रगतिशील सोच और नीतियों के फलस्वरूप, देश के हर महत्वाकांक्षी क्षेत्र में महिलाओं ने तेजी से प्रगति की है। इसी दिशा में कुछ महीने पहले देश ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जब राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) से महिला कैडेटों का पहला बैच उत्तीर्ण हुआ। इससे यह विश्वास और भी मजबूत हुआ है कि देश के विकास और सशक्तिकरण में 'नारी शक्ति' सर्वोपरि है।"
बारामती में प्लेन क्रैश, अजित पवार समेत सभी सवारों की मौत
28 Jan, 2026 11:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार नहीं रहे. महाराष्ट्र के बारामती में विमान हादसे में मौत हुई. हादसे में अजित पवार समेत विमान सवार सभी 5 लोगों की मौत हो गई.अजित पवार चुनाव प्रचार के लिए मुंबई से बारामती जा रहे थे. लो विजिबिलिटी की वजह से लैंडिंग के वक्त प्लेन क्रैश हुआ. बारामती में सुबह 8:45 बजे हादसा हुआ. अजित पवार का परिवार दिल्ली से बारामती के लिए रवाना हुआ. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के असमय निधन के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ. अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में, वे महाराष्ट्र के विकास और समृद्धि के लिए समर्पित रहे. वे लोगों के प्रति अपनी करुणा और सार्वजनिक सेवा के प्रति अपने अटूट समर्पण के लिए जाने जाते थे. मैं उनके परिवार, शुभचिंतकों और प्रशंसकों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं. आपको बता दें कि महाराष्ट्र के बारामती में बड़ा विमान हादसा हुआ. महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की विमान हादसे में मौत हो गई. लैंडिंग के समय अजित पवार का विमान क्रैश हुआ था. DGCA के मुताबिक अजित पवार सहित विमान में सवार सभी 5 लोगों की मौत हो गई. इससे पहले महाराष्ट्र के बारामती में बड़ा विमान हादसे की खबर सामने आई थी. लैंडिंग के वक्त डिप्टी सीएम अजित पवार का विमान क्रैश हुआ था. डिप्टी सीएम अजित पवार क्रैश हुए विमान में सवार थे.अजित पवार मुंबई से बारामती जा रहे थे. हादसे में अजित पवार गंभीर रूप से घायल होने की सूचना मिली थी.घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया. तकनीकी खराबी के चलते विमान हादसा होने की सूचना मिली.आपको बता दें कि मुंबई से बारामती जा रहा चार्टर प्लेन आज सुबह 8.45 बजे महाराष्ट्र के बारामती में क्रैश लैंड हो गया. उपमुख्यमंत्री अजीत पवार प्लेन में सवार थे।
चाचा शरद पवार की छाया से निकलकर अजित पवार बने महाराष्ट्र की सियासत के बेताज बादशाह
28 Jan, 2026 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. महाराष्ट्र (Maharashtra) के बारामती (Baramati) के पास एनसीपी नेता और डिप्टी सीएम अजित पवार (Ajit Pawar) का निजी विमान दुर्घटना में मौत हो गई है. लैंडिंग के दौरान विमान हादसा हुआ, जिसमें अजित पवार सहित विमान में सवार सभी लोगों की जान चली गई.
सियासत के बेताज बादशाह (uncrowned king) कहे जाने वाले अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की उंगली पकड़कर राजनीति में कदम रखा. वो अपनी राजनीतिक कौशल के जरिए पार्टी को महाराष्ट्र में मजबूत बनाया. पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर एनसीपी को एक बड़ा जनाधार तैयार करने में अहम रोल अदा किया, लेकिन 2022 में शरद पवार से अलग अपनी राजनीतिक लकीर खींची और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई.
अजित पवार के पिता फिल्म जगत से जुड़े
22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में अपने दादा के घर जन्मे अजित पवार, शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवरा के बेटे हैं. उनके पिता फिल्म जगत से जुड़े हुए थे. अनंतराव ने मुंबई में मौजूद वी. शांताराम के राजकमल स्टूडियो में काम किया. अजित पवार की शादी सुनेत्रा पवार से हुई और उनके दो बच्चे हैं, जिनका नाम पार्थ पवार और जय पवार है,
महाराष्ट्र एजुकेशन सोसायटी हाई स्कूल बारामती से अजित पवार ने प्राथमिक शिक्षा हासिल की, हालांकि, जब वो कॉलेज में थे तो उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी. इसके बाद सियासत में कदम रखा.
शरद पवार की उंगली पकड़कर राजनीति में आए
अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की उंगली पकड़कर साल 1982 में राजनीति में कदम रखा. अजित पवार प्राथमिक शिक्षा की पढ़ाई कर रहे थे, तो उस दौरान उनके चाचा यानी शरद पवार एक दिग्गज सियासी नेता बन चुके थे. राजनीति में कदम रखने के बाद सबसे पहले उन्होंने एक सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड के लिए चुने लड़ा. वो पुणे सहकारी बैंक के अध्यक्ष के रूप में चुने गए, वो16 सालों तक इस पद पर काबिज रहे.
साल 1991 में पहली बार बारामती संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुने गए, लेकिन बाद में उन्होंने यह सीट अपने चाचा शरद पवार के लिए खाली कर दी. इसके बाद शरद पवार केंद्र में पीवी नरसिम्हा राव सरकार में रक्षा मंत्री बने. यहीं से शरद पवार केंद्र की राजनीति में खुद को सक्रिय कर लिया तो अजित पवार महाराष्ट्र की सियासत की कमान अपने हाथ में ले ली.
शरद पवार के सियासी वारिस बनकर उभरे
अजित पवार ने अपनी मेहनत और लगन के बाद खुद को शरद पवार के सियासी वारिस के तौर पर महाराष्ट्र में स्थापित किया. महाराष्ट्र की राजनीति पर अपनी पकड़ मजबूत बना ली, इसके बाद साल 1995 में वो पहली बार पुणे जिले में बारामती विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक बने. इसके बाद से वो लगातार इस निर्वाचन क्षेत्र के विधायक चुने जाते रहे, उन्होंने साल 1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में विधायक बने. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में खुद को स्थापित ही नहीं किया बल्कि अपनी पकड़ भी बनाई.
विधायक से डिप्टी सीएम तक का सियासी सफर
अजित पवार ने अपने 45 साल के सियासी सफर में एक बार सांसद और सात बार विधायक रहे. उन्होंने खुद को महाराष्ट्र के राजनीति तक सीमित रखा. सरकार में रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्री पद संभालने का तजुर्बा है, उन्होंने राज्य सरकार में कृषि, ऊर्जा और योजना राज्य मंत्री के रूप में काम किया, उन्होंने सुधाकर नाइक की सरकार में कृषि और बिजली राज्य मंत्री के रूप में काम किया, इसके बाद जब उनके चाचा शरद पवार 1992 और 1993 में मुख्यमंत्री बने तो उन्हें मंत्री बनाया गया.
साल 1999 में जब कांग्रेस और एनसीपी सत्ता में आई तो उन्हों विलासराव देशमुख की सरकार सिंचाई मंत्री का कार्यभार सौंपा गया. वहीं, साल 2003-2004 में सुशील कुमार शिंदे की सरकार में उन्हें ग्रामीण विकास का अतिरिक्त प्रभार दिया गया. इसके बाद उपमुख्यमंत्री बने.
एक साल में दो बार अजित पवार बने डिप्टी सीएम
साल 2019 के बाद अजित पवार की राजनीतिक करियर काफी दिलचस्प रही. उन्होंने 2019 में दो अलग-अलग मुख्यमंत्री के अधीन उपमुख्यमंत्री की शपथ ली. 23 नवंबर की सुबह उन्होंने देवेंद्र फडनवीस के साथ उपमुख्यमंत्री की शपथ ली. लेकिन, सदन में फडनवीस बहुमत साबित करने में नाकाम रहे। इसके बाद उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री की शपथ ली तो उन्हें एक बार फिर उपमुख्यमंत्री बनाया गया। अब साल 2023 में वो एक बार फिर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने हैं. वो अबतक छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बन चुके हैं.
अजित पवार पहली बार साल 2010 के नवंबर महीने में उपमुख्मंत्री बने, इसके बाद साल 2010 में वो दूसरी बार उपमुख्यमंत्री बने. 2019 में फडणवीस के साथ डिप्टीसीएम बने और फिर उद्धव ठाकरे के अगुवाई में महाविकास अघाड़ी की सरकार बनी तो उसमें भी डिप्टीसीएम रहे. इसके बाद 2023 में शरद पवार के बगावत कर शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में डिप्टीसीएम बने. 2024 में छठी बार डिप्टीसीएम बने.
2022 में अजित पवार ने किया चाचा से बगावत
अजित पवार जिस चाचा शरद पवार की उंगली पकड़कर राजनीति सीखा, लेकिन शरद पवार ने अपने सियासी वारिस के तौर पर बेटी सुप्रिया सुले को आगे बढ़ाने लगे तो फिर अजित पवार ने अपनी अलग सियासी राह चुन ली. एनसीपी के तमाम नेताओं को लेकर बीजेपी के अगुवाई वाली महायुति सरकार में शामिल हो गए. 2023 में अजित पवार ने पूरी तरह से एनसीपी पर कब्जा जमा लिया. 2024 में खुद को स्थापित करने में भी सफल रहे.
बजट सत्र हंगामेदार होने के संकेत, कांग्रेस मनरेगा, SIR और विदेश नीति को बनाएगी मुख्य मुद्दा
28 Jan, 2026 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । बुधवार से शुरु हो रहे संसद (Parliament) का बजट सत्र (Budget Session) भी हंगामेदार रह सकता है। सत्र शुरू होने से ठीक पहले कांग्रेस (Congress) ने सरकार के खिलाफ तीखे टकराव के संकेत देते हुए साफ कर दिया है कि वह मनरेगा (MGNREGA), विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), विदेश नीति और अर्थव्यवस्था से जुड़े अहम मुद्दों को संसद में जोरशोर से उठाएगी, भले ही सरकार ने इन पर दोबारा चर्चा से इनकार कर दिया हो। यह फैसला मंगलवार को कांग्रेस संसदीय रणनीति समूह की बैठक में लिया गया, जो कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर हुई। बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
कांग्रेस के राज्यसभा में पार्टी नेता और मुख्य सचेतक नसीर हुसैन ने बैठक के बाद बताया कि बुधवार सुबह 10 बजे संसद भवन में मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में विपक्षी दलों की बैठक होगी, जिसमें बजट सत्र के दौरान साझा रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
मनरेगा सबसे बड़ा मुद्दा
नसीर हुसैन ने कहा कि बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा मनरेगा का रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के दौर में लागू इस योजना को हटाकर लाई गई ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (VB-G RAM G)’ पर सरकार जवाब देने से बच रही है। उन्होंने कहा, “मनरेगा को लेकर विस्तृत चर्चा हुई है और इसे बजट सत्र के पहले हिस्से में मजबूती से उठाया जाएगा।”
SIR को लेकर ‘भ्रम और अराजकता’ का आरोप
कांग्रेस ने SIR (Special Intensive Revision) को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा है। हुसैन के अनुसार, जमीनी रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस प्रक्रिया के कारण भ्रम और अव्यवस्था फैली है। उन्होंने इसे ‘वोट चोरी’ से जोड़ते हुए कहा, “यह बहुत गंभीर मुद्दा है। यदि SIR गलत तरीके से लागू किया गया तो 2003 के बाद हुए चुनावों की वैधता पर ही सवाल खड़े हो सकते हैं। इसलिए हम इसकी वापसी की मांग करेंगे।”
पर्यावरण और संघीय मुद्दे भी एजेंडे में
कांग्रेस ने बताया कि बजट सत्र में अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा, ग्रेट निकोबार परियोजना, जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने, इंदौर और अहमदाबाद में दूषित पानी से हुई मौतों जैसे मुद्दे भी संसद में उठाए जाएंगे। नसीर हुसैन ने कहा कि मौजूदा समय में सबसे गंभीर चिंता का विषय भारत की विदेश नीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका भारत को रूसी तेल खरीदने पर धमका रहा है, और भारत पर शुल्क (टैरिफ) लगाए जा रहे हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि रुपये के गिरते मूल्य से MSME सेक्टर समेत कई आर्थिक क्षेत्र संकट में हैं।
सरकार का पलटवार
वहीं, सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष की मांगों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि “जब कोई कानून बन चुका है, तो उसे वापस नहीं लिया जा सकता।” SIR पर उन्होंने कहा कि पिछली संसद सत्र में चुनावी सुधारों पर लंबी बहस हो चुकी है और दोबारा चर्चा की मांग अनावश्यक है। UGC के समता विनियमों पर पूछे गए सवाल पर नसीर हुसैन ने कहा कि कांग्रेस जाति जनगणना की मांग कर रही है और ऐसे सभी मुद्दों का समाधान उसी के माध्यम से संभव है।
कौन-कौन रहे बैठक में शामिल
रणनीति बैठक में प्रमोद तिवारी, जयराम रमेश, पी. चिदंबरम, मणिकम टैगोर, तारीक अनवर, रजनी पाटिल, मनीष तिवारी और के. सुरेश शामिल हुए। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेता शशि थरूर दुबई से लौट रहे होने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके, जिसकी जानकारी उन्होंने पहले ही पार्टी को दे दी थी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस और विपक्ष की यह आक्रामक रणनीति आने वाले बजट सत्र को हंगामेदार और टकरावपूर्ण बना सकती है। बता दें कि संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू हो रहा है। 1 फरवरी को बजट पेश होना है। सत्र का पहला चरण 13 फरवरी को समाप्त होगा और दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल तक चलेगा।
दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली किस कमेटी ने की थी UGC रूल्स की सिफारिश
28 Jan, 2026 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी की है, जिसके मुताबिक सभी यूनिवर्सिटीज, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने संस्थानों के अंदर एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी। ये कमेटी उस संस्थान के अंदर SC/ST या OBC कैटगरी के छात्रों, शिक्षकों या गैर शिक्षण कर्मियों के साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी शिकायतें सुनेंगी और तय समय-सीमा में उसका निपटारा करेगी। देश भर का सवर्ण समाज UGC के इस नियम का विरोध कर रहा है। बड़ी बात यह है कि जिस संसदीय समिति की सिफारिश पर UGC ने यह कानून बनाया है, उसके अध्यक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह है। उनके साथ इस समिति में कुल 30 सदस्य हैं जो संसद के दोनों सदनों के सदस्य हैं। इनमें कई भाजपा के सांसद हैं और सवर्ण समाज से आते हैं।
दरअसल, यह सिफारिश शिक्षा, महि्ला, बच्चों, युवा और खेल पर संसद की स्थाई समिति ने की है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह इस समिति के अध्यक्ष हैं। इस समिति में 21 लोकसभा और 9 राज्यसभा के सांसद हैं। कुछ नाम तो चौंकाने वाले हैं। दलगत संख्या और प्रतिनिधित्व की बात करें तो इस समिति में भाजपा के 16, कांग्रेस के 4, समाजवादी पार्टी के 3, तृणमूल के 2, सीपीएम के 1, डीएमके के 1, एनसीपी (अजीत गुट) के 1, एनसीपी (शरद गुट) के 1 और आम आदमी पार्टी की 1 पूर्व सदस्य हैं। इसे यूं कहें तो इस समिति में सत्ताधारी भाजपा के सदस्यों की संख्या 50 फीसदी से अधिक है।
समिति के सदस्यों में कौन-कौन?
संसद की वेबसाइट पर उपलब्ध नामों के मुताबिक इस समिति में राज्यसभा से दिग्विजय सिंह के अलावा भीम सिंह (भाजपा नेता, बिहार से राज्यसभा के सांसद) बिकास रंजन भट्टाचार्य (CPM नेता और पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सांसद), घनश्याम तिवाड़ी(भाजपा नेता, राजस्थान कोटे से राज्यसभा सांसद), रेखा शर्मा (भाजपा नेता और हरियाणा से राज्यसभा सांसद और महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष), सी. सदानंदन मास्टर (केरल भाजपा के उपाध्यक्ष और केरल से राज्यसभा सांसद), सिकंदर कुमार (भाजपा नेता, हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद), सुनेत्रा पवार (एनसीपी नेता और अजीत पवार की पत्नी, महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद) और स्वाती मालीवाल (AAP की पूर्व नेता और दिल्ली से राज्यसभा सांसद) हैं।
लोकसभा से 21 चेहरे कौन-कौन?
इस समिति में लोकसभा सांसदों में कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज अभिजित गंगोपाध्याय (भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल से सांसद), पूर्व केंद्रीय मंत्री और पटना साहिब से सांसद और भाजपा के कद्दावर नेता रविशंकर प्रसाद, भाजपा नेता, प्रवक्ता और ओडिशा की पुरी सीट से सांसद संबित पात्रा भी हैं। इनके अलावा बांसुरी स्वराज (भाजपा नेता और नई दिल्ली सीट से सांसदष, अमर शरदराव काले (एनसीपी (शरद पवार गुट) नेता), अंगोमचा बिमोल अकोईजाम (कांग्रेस पार्टी के नेता और मणिपुर से सांसद), बृजमोहन अग्रवाल (छत्तीसगढ़ से भाजपा के नेता और रायपुर लोकसभा सीट से सांसद), दग्गुबाती पूरनदेश्वरी(आंध्र प्रदेश में भाजपा की कद्दावर नेता और राजमुंद्र सीट से सांसद) दर्शन सिंह चौधरी (भाजपा नेता और मध्य प्रदेश की होशंगाबाद सीट से सांसद) के नाम भी शामिल हैं।
अन्य चेहरों का हाल
इनके अलावा अन्य सांसदों में डीएन कुरियाकोसे(कांग्रेस नेता और केरल की इडुक्की सीट से सांसद) वर्षा एकनाथ गायकवाड़ (कांग्रेस नेता और मुंबई की उत्तर-मध्य सीट से सांसद), हेमांग जोशी (भाजपा नेता और गुजरात की वडोदरा सीट से सांसद), जितेंद्र कुमार दोहरे (समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश की इटावा सीट से सांसद), जियाउर्रहमान बर्क (समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश की संभल सीट से सांसद), राजीव राय( समाजवादी पार्टी के नेता, यूपी की घोसी सीट से सांसद), कालिपाड़ा सरेन खेरवाल (तृणमूल कांग्रेस नेता और पश्चिम बंगाल की झारग्राम सीट से सांसद), कामाख्या प्रसाद तासा (भाजपा नेता और असम की काजीरंगा सीट से सांसद), करण भूषण सिंह (भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश की कैसरगंज सीट से सांसद), रचना बनर्जी (TMC नेता और पूर्व अभिनेत्री, पश्चिम बंगाल की हुगली सीट से सांसद), शोभनाबेन महेंद्रसिंह बरैया (भाजपा नेता, गुजरात की साबरकांठा सीट से सांसद) और थमिझाची थंगापांडियन उर्फ टी. सुमथि. (तमिलनाडु में डीएमके नेता और चेन्नई दक्षिण सीट से सांसद) के नाम शामिल हैं।
आज से संसद का बजट सत्र शुरू, राष्ट्रपति के अभिभाषण से होगी औपचारिक शुरुआत
28 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. संसद (Parliament) का बजट सत्र (budget session) बुधवार, 28 जनवरी यानी आज से राष्ट्रपति (President) द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में अभिभाषण के साथ शुरू हो रहा है. यह सत्र दो चरणों में होगा, जो 2 अप्रैल तक चलेगा, इसमें कुल 30 बैठकें होंगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी. सत्र का पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा और दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल को खत्म होगा.
बजट सत्र के लिए रणनीति बनाने के लिए आज सुबह 10 बजे विपक्षी पार्टियों की बैठक होगी. सत्र के बेहतर ढंग से संचालन के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई है.
वहीं, कांग्रेस पार्टी ने सोनिया गांधी की अध्यक्षता में अपनी संसदीय रणनीति समूह की बैठक कर मनरेगा, विशेष गहन संशोधन (SIR) और पर्यावरणीय मुद्दों को उठाने का फैसला लिया है. इस बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी भी शामिल हुए.
दो चरणों में चलेगा 30 बैठकों का सत्र
बजट सत्र की रूपरेखा काफी लंबी है. पहले चरण में 13 फरवरी तक राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और बजट पर चर्चा की जाएगी. इसके बाद एक अंतराल (ब्रेक) होगा. सदन की कार्यवाही दोबारा 9 मार्च को शुरू होगी और 2 अप्रैल तक चलेगी. रविवार होने के बावजूद 1 फरवरी को बजट पेश करने की स्पेशल तैयारी की गई है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं.
विपक्ष ने तैयार किया मुद्दों का पिटारा
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सरकार को विभिन्न मोर्चों पर घेरने की तैयारी में हैं. सोनिया गांधी के आवास पर हुई बैठक के बाद सांसद सैयद नसीर हुसैन ने बताया कि उनके लिए मनरेगा (MGNREGA) सबसे बड़ा मुद्दा है. इसके अलावा विपक्ष लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, विदेश नीति और राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार विधेयक से जुड़े मामलों पर चर्चा की मांग करेगा. विशेष गहन संशोधन (SIR) की कवायद और पर्यावरण से जुड़े संकट भी सदन में गूंजेंगे.
सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक
सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की. इसमें संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कांग्रेस नेता जयराम रमेश सहित कई दलों के नेता मौजूद रहे. सरकार की कोशिश है कि दोनों सदनों की कार्यवाही बिना किसी बड़े गतिरोध के चले. विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए मल्लिकार्जुन खरगे ने भी बुधवार सुबह एक अलग मीटिंग बुलाई है, जिससे सदन के अंदर एक संयुक्त रणनीति के तहत सरकार को चुनौती दी जा सके.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में उतरीं उमा भारती, बोलीं– प्रशासन ने अधिकारों का उल्लंघन किया
27 Jan, 2026 03:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब भारतीय जनता पार्टी की सीनियर नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व सीएम उमा भारती ने शंकराचार्य का समर्थन किया है. उन्होंने प्रशासन पर गलत व्यवहार करने का आरोप लगाया है।
बीजेपी नेता उमा भारती ने क्या कहा?
सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट करके बीजेपी की फायरब्रांड नेता उमा भारती ने लिखा कि मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा किंतु प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांगना, यह प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन किया है, यह अधिकार तो सिर्फ शंकराचार्यों का एवं विद्वत परिषद का है।
‘स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर NSA लगना चाहिए’
वहीं, अयोध्या के छावनी धाम के परमहंस महाराज ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और सतुआ बाबा ने माघ मेले को बदनाम कर दिया है. दोनों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा देना चाहिए. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA लगना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेला का आयोजन किया जा रहा है।
18 जनवरी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी से गंगा स्नान के लिए जा रहे थे. पुलिस ने उन्हें पालकी के स्थान पर पैदल संगम नोज तक जाने के लिए कहा।
इस बात पर पुलिस और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों में झड़प हो गई. बीच-बचाव के बाद किसी तरह मामला सुलझा।
माघ मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दो नोटिस दिए. पहला नोटिस दिया गया, जिसमें पूछा गया था कि आप शंकराचार्य हैं इसका प्रमाण दीजिए. वहीं , दूसरा नोटिस मौनी अमावस्या के दिन हंगामा को लेकर दिया गया था।
इसके साथ ही प्रशासन ने चेतावनी देते हुए कहा था कि उन्हें माघ मेला से प्रतिबंधित किया जा सकता है. शंकराचार्य की ओर से दोनों नोटिस का जवाब दिया गया था।
संजय टाइगर रिजर्व में लक्ष्मी की मस्तानी चाल, मॉर्निंग सफारी करने निकले पर्यटक रोमांचित
27 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सीधी : संजय टाइगर रिजर्व में मंगलवार सुबह T17 लक्ष्मी बाघिन की झलक देख पर्यटकों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. अपनी पसंदीदा बाघिन को देख सफारी करने पहुंचे पर्यटक रोमांच से भर उठे. टाइगर रिजर्व की दूरी रेंज में रहने वाली T17 लक्ष्मी बाघिन पहली बार पर्यटकों को खुले में दिखाई दी.
T17 लक्ष्मी बाघिन आमतौर पर अपनी टेरिटरी से बाहर नहीं निकलती और न ही लोगों को आसानी से दिखाई देती है. वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए यह किसी सपने से कम नहीं था, क्योंकि अब तक यह बाघिन बेहद कम दिखाई देती रही है. लेकिन मंगलवार के दिन मॉर्निंग सफारी के दौरान यह ऐतिहासिक पल देखने को मिला. मॉर्निंग सफारी में करीब 26 पर्यटकों की बुकिंग थी, जो अलग-अलग रूट और क्षेत्रों में भ्रमण कर रहे थे.
स्वाभाव से बहुत शालीन है बाघिन लक्ष्मी
इसी दौरान पर्यटक अनीस सिंह और उनके साथियों की गाड़ी के सामने अचानक T17 लक्ष्मी बाघिन दिखाई दी. शांत और धीमी चाल से चलते हुए वह पानी के स्रोत की ओर बढ़ रही थी. उसकी चाल में न तो आक्रामकता थी और न ही घबराहट. बस जंगल की रानी की स्वाभाविक शालीनता झलक रही थी.
पर्यटकों ने बताया कि बाघिन को सामने देखकर कुछ पल के लिए सभी स्तब्ध रह गए, लेकिन फिर कैमरे चालू हो गए. यह दृश्य इतना दुर्लभ था कि हर कोई इसे हमेशा के लिए सहेज लेना चाहता था.
बाघिन लक्ष्मी पर्यटकों को देख दिशा बदल लेती है
इस संबंध में संजय टाइगर रिजर्व के सीसीएफ अमित दुबे ने बताया "T17 लक्ष्मी बाघिन स्वभाव से काफी शांत है और सामान्यतः लोगों को कम दिखाई देती है. अब वह पूरी तरह से वयस्क हो चुकी है और अपने शावकों की देखभाल तथा शिकार की तलाश में कभी-कभी इधर-उधर भ्रमण करती है. यह बाघिन हिंसक नहीं है और जब भी किसी मानव गतिविधि के सामने आती है तो शांतिपूर्वक दूसरी दिशा में चली जाती है."
कर्नाटक की सिद्दारमैया ने दलित-OBC मठ को दी 255 करोड़ की जमीन
27 Jan, 2026 09:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार (Siddaramaiah government) ने एक बड़ा फैसला लिया है. उसने बेंगलुरू (Bengaluru) में दलित और पिछड़े वर्गों के 22 मठों को लगभग 255 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन आवंटित करने की मंजूरी दे दी है. यह फैसला वित्त और कानून विभाग की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए लिया गया है. इन विभागों ने चेतावनी दी थी कि इससे कानूनी चुनौतियां आ सकती हैं, क्योंकि यह गोमाला भूमि और शहर सीमा के भीतर की संरक्षित जमीन है. बेंगलुरु उत्तर के रावुट्टनहल्ली और दासनापुरा इलाकों में कुल लगभग 52 एकड़ जमीन का आवंटन किया गया है. प्रत्येक मठ को उसके आकार, अनुयायियों और सामाजिक कार्य के आधार पर 20 गुंटा से चार एकड़ तक जमीन मिलेगी. वित्त विभाग ने जमीन की बाजार कीमत को प्रति एकड़ एक करोड़ रुपये बताया, जबकि रूपांतरण के बाद यह 1.8 करोड़ और विकसित होने पर 4.8 करोड़ तक पहुंच सकती है. कुल मूल्यांकन करीब 255 करोड़ रुपये का है.
गोमाला भूमि पशुचारण और पर्यावरण संरक्षण के लिए आरक्षित होती है. सुप्रीम कोर्ट ने जगपाल सिंह बनाम पंजाब राज्य (2011), हिंच लाल तिवारी बनाम कमल देवी (2001) और संबंधित मामलों में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऐसी भूमि जल निकायों को सार्वजनिक उपयोग के लिए संरक्षित रखा जाए. इन फैसलों में राज्यों को निजी या सरकारी परियोजनाओं के लिए इनका उपयोग न करने की हिदायत दी गई है. कानून और संसदीय मामलों के अधिकारियों ने भी कर्नाटक भूमि अनुदान नियम, 1969 का हवाला देते हुए कहा कि शहर सीमा के भीतर निजी संस्थाओं को सरकारी जमीन नहीं दी जा सकती और इसे सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आरक्षित रखना चाहिए. प्रस्तावित जमीन पूर्व बीबीएमपी मुख्यालय से 18 किमी के दायरे में आती है, इसलिए नियमों के अनुसार अनुदान संभव नहीं है.
पिछले सप्ताह आवंटन को मंजूरी
फिर भी, कांग्रेस सरकार ने पिछले सप्ताह इस आवंटन को मंजूरी दे दी. राजस्व मंत्री कृष्णा बायरेगौड़ा ने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि विभागों की नकारात्मक राय सामान्य होती है. उन्होंने सामाजिक न्याय और समानता के आधार पर इसे उचित ठहराया. मंत्री ने पूछा कि जब प्रमुख समुदायों के मठों को एकड़ों में जमीन दी गई, तो नियम और विनियम केवल कमजोर और वंचित समुदायों के मठों पर ही क्यों लागू हों?
उन्होंने इसे ऐतिहासिक असमानता को सुधारने का कदम बताया. यह फैसला 2025 की शुरुआत में दलित और पिछड़े वर्गों के मठाधीशों की अपील के बाद आया है. पिछड़े और दलित मठाधीशारा ओक्कुटा ने बेंगलुरु में 22 मठों के लिए जमीन और सहायता मांगी थी, ताकि वे परोपकारी संस्थाएं चला सकें. हालांकि, राजस्व अधिकारियों ने कुछ मठों की हालिया स्थापना और परोपकारी कार्यों के प्रमाण की कमी पर सवाल उठाए थे.
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति की भी नहीं मानी बात, ‘एट होम’ कार्यक्रम में नहीं पहना असम का पटका, BJP का आरोप
27 Jan, 2026 08:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । 77वें गणतंत्र दिवस समारोह (Republic Day celebrations) में कर्तव्य पथ पर सीट को लेकर उपजे विवाद के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के साथ एक और विवाद जुड़ गया है। आरोप है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) द्वारा राष्ट्रपति भवन में दिए गए पारंपरिक ‘ऐट होम’ स्वागत समारोह में राहुल गांधी ने नॉर्थ-ईस्ट का पारंपरिक पटका नहीं पहना, जबकि राष्ट्रपति ने उस कार्यक्रम में सभी अतिथियों से असम का पटका पहनने का अनुरोध किया था। राष्ट्रपति भवन ने अतिथियों का स्वागत विशेष रूप से तैयार किए गए एरी रेशम के शॉल (पटका) से किया था। एरी रेशम, जिसे आम तौर पर ‘शांति रेशम’ कहा जाता है, पूर्वोत्तर भारत की वस्त्र परंपरा और अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस बार स्वागत समारोह की मेजबानी पूर्वोत्तर राज्यों की संस्कृति, कला और व्यंजनों की थीम पर केंद्रित थी।
राहुल गांधी द्वारा असम का पटका नहीं पहनने को बीजेपी ने पूरे पूर्वोत्तर के लोगों का अपमान बताया है और इसे बेहद असंवेदनशील क्या करार दिया है। भाजपा के आईटी सेल की चीफ अमित मालवीय ने सोशल मीडिया X पर दावा किया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में ‘एट होम रिसेप्शन’ में राहुल गांधी को पटका पहनने के लिए दो बार याद दिलाया, फिर भी उन्होंने उनकी बात नहीं मानी। मालवीय ने ट्वीट किया, “प्रधानमंत्री से लेकर EU नेताओं और विदेशी दूतों तक, सभी मेहमानों ने सम्मान और समावेश के प्रतीक के तौर पर पारंपरिक उत्तर-पूर्वी पटका पहना।”
राष्ट्रपति ने दो बार किया अनुरोध, भाजपा का दावा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक, सभी की पटका पहने हुए तस्वीरें शेयर करते हुए मालवीय ने राहुल गांधी की भी एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें वह उस सभा में बिना पटका पहने खड़े थे और लिखा: “आज राष्ट्रपति भवन में ‘एट-होम रिसेप्शन’ में, सभी ने गर्व से नॉर्थ-ईस्ट थीम का जश्न मनाया। प्रधानमंत्री से लेकर EU नेताओं और विदेशी राजदूतों तक, सभी मेहमानों ने सम्मान और समावेश के प्रतीक के तौर पर पारंपरिक नॉर्थ-ईस्टर्न पटका पहना लेकिन वहां राहुल गांधी ही ऐसे अकेले शख्स थे जिन्होंने असम का पटका नहीं पहना, जबकि राष्ट्रपति ने दो बार अनुरोध किया।”
हिमंत सरमा भी बिफरे
राहुल गांधी की इस हरकत पर नाराजगी जाहिर करते असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट के प्रति यह “बार-बार की असंवेदनशीलता” बताती है कि हाल के सालों में कांग्रेस इस क्षेत्र में अपनी जमीन क्यों खो रही है। असम के लोगों से बिना शर्त माफी की मांग करते हुए, सरमा ने लिखा, “समय बदल सकता है, लेकिन कांग्रेस पार्टी के असल मुखिया, राहुल गांधी का रवैया, दुख की बात है कि बदला हुआ नहीं लगता। एक ऐसे काम में जो पूरे नॉर्थ-ईस्ट के लोगों के लिए बहुत असंवेदनशील और अपमानजनक था, गांधी ने आज शाम भारत की माननीय राष्ट्रपति द्वारा आयोजित रिसेप्शन में पारंपरिक पटका नहीं पहनने का फैसला किया, जो इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।”
अन्य भाजपा नेता भी बोल रहे हमला
इन दो नेताओं के अलावा भाजपा के दूसरे अन्य नेताओं ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधा है। भाजपा नेता शहजाद पुनावाला ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि ये बेहद शर्मनाक है! राहुल गांधी ने ना सिर्फ पूर्वोत्तर का अपमान किया है बल्कि उन्होंने माननीय राष्ट्रपति का भी सम्मान नहीं रखा। वहीं वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने लिखा कि राहुल गांधी की यह शर्मनाक हरकत समझ से परे है। उन्होंने लिखा कि समय बदलता है, लेकिन गलत जगह की शाही सोच शायद नहीं बदलती। इस विवाद में बड़ी बात ये है कि यह मामला ऐसे वक्त में उठाया जा रहा है जब असम में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।
कांग्रेस का पलटवार
भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस ने भी पलटवार किया है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने ट्वीट कर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का फोटो शेयर किया है। सिंह भी उस कार्यक्रम में पटका पहने नजर नहीं आ रहे हैं। खेड़ा ने हिमंता सरमा के ट्वीट पर पलटवार करते हुए लिखा है कि क्या आप राजनाथ सिंह जी की तरकफ से माफी मांगेंगे? या आपकी पूरी चुनावी राजनीति एंटी इनकम्बेंसी को इसी तरह के बेकार मुद्दों में उलझाकर रखने की है।
नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने से भाजपा के पुराने नेताओं में बढ़ने लगी बेचैनी?
26 Jan, 2026 08:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। नितिन नवीन (Nitin Naveen) के भाजपा (BJP) अध्यक्ष बनने के बाद अब नई टीम को लेकर विमर्श चल रहा है। इसमें युवाओं व महिलाओं को तरजीह देने की बात चल रही है। इससे संगठन में काम कर रहे कई मौजूदा और पुराने नेताओं व भावी दावेदारों में बेचैनी है। कई नेताओं को उम्र के आड़े आने का डर भी सता रहा है। हाल में विभिन्न नेताओं को दी गई खास चुनावी जिम्मेदारियों से हाशिए पर रहे नेताओं में उम्मीद तो जगी है, लेकिन जब पूरी टीम बनेगी, तब कौन कहां होगा इसे लेकर ऊहापोह बरकरार है।
अगले माह के मध्य में भाजपा की नई टीम आने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, इसे लेकर काफी चर्चा हो चुकी है और अब उचित समय पर केवल अंतिम रूप दिया जाना है। पूरी केंद्रीय टीम यानी उपाध्यक्ष, महासचिव व सचिवों में बड़े बदलाव की संभावना है। तीनों स्तरों पर लगभग आधे-आधे नए चेहरे होंगे। कुछ नेताओं को ही टीम में इधर से उधर किया जाएगा, लेकिन बाकी को बदला जाना तय है। इसकी बड़ी वजह नए नेतृत्व को सामने लाना है। युवा नेताओं के टीम में होने से पार्टी के नए अध्यक्ष नई ऊर्जा का बेहतर ढंग से संचालन कर सकेंगे।
टीम में महिलाओं की बढ़ेगी संख्या
आने वाले समय में लोकसभा व विधानसभाओं में अब महिलाओं को आरक्षण दिया जाना है, ऐसे में भाजपा की नई टीम में पिछली टीम से ज्यादा महिलाएं होंगी। हालांकि, भाजपा के संविधान में केंद्रीय पदाधिकारियों को एक तिहाई पद देने की व्यवस्था है, लेकिन उसका पालल इस बार भी हो पाने की संभावना कम है। पार्टी के व्यापक विस्तार को देखते हुए केंद्रीय टीम में राज्यों में काम कर रहे कई चेहरे आ सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि राज्यों के प्रभारी व सह प्रभारियों की नियुक्ति में केंद्रीय पदाधिकारी को ही जगह दी जाए, यह जरूरी नहीं है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों को भी यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। चूंकि प्रभारियों का काम अनुभव के लिहाज से काफी अहम होता है इसलिए इसमें वरिष्ठ नेताओं को ज्यादा जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
'देश हिंदू राष्ट्र ही है' मोहन भागवत बोले- 'हिंदुओं को 3 बच्चे पैदा करने से किसने रोका है'
26 Jan, 2026 08:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुजफ्फरपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रविवार को मुजफ्फरपुर में एक महत्वपूर्ण सामाजिक सद्भाव विचार गोष्ठी सह संवाद को संबोधित किया. उन्होंने समाज में एकता और सद्भाव पर जोर देते हुए कहा कि जब हर जाति और बिरादरी उन्नत होगी, तभी समाज और देश वास्तविक प्रगति कर पाएगा.
जनसंख्या नियंत्रण और हिंदू राष्ट्र पर विचार: जनसंख्या नियंत्रण से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को तीन बच्चे पैदा करने से किसी ने नहीं रोका है, जबकि सरकार 2-1 बच्चों की नीति की बात करती है. हिंदू राष्ट्र के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह पहले से ही हिंदू राष्ट्र है. भारत में विविधता है, अलगाव नहीं. अंग्रेजों ने अलगाव बढ़ाकर शासन किया, अब उस अलगाव को समाप्त कर समाज को एकजुट करना है.
"हिंदू समाज को तीन बच्चे पैदा करने से किसी ने नहीं रोका है. सरकार भी 2-1 बच्चों की बात करती है. देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह हिंदू राष्ट्र है ही. भारत में विविधता है, अलगाव नहीं."-मोहन भागवत, आरएसएस प्रमुख
विदेशी शक्तियों की चिंता और भारत की प्रगति: डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि आज भारत के आगे बढ़ने की अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं. कुछ विदेशी शक्तियां भारत की प्रगति नहीं चाहतीं, क्योंकि उन्हें अपनी 'दुकान' बंद होने का डर है. इसी कारण वे भारत के विकास के मार्ग में बाधाएं खड़ी करने का प्रयास कर रही हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि डर और कमजोरी को दूर करने के लिए आत्मनिर्भरता आवश्यक है, जो समस्याओं का स्थायी समाधान प्रदान कर सकती है.
सद्भाव की आवश्यकता और ऐतिहासिक सबक: सरसंघचालक ने विश्व स्तर पर सद्भाव की कमी पर चिंता जताई और कहा कि यदि सद्भाव नहीं रहा तो लोग आपस में लड़कर नष्ट हो जाएंगे. उन्होंने इतिहास का उदाहरण देते हुए बताया कि कोई विदेशी शक्ति ने अपनी ताकत से भारत को पराधीन नहीं बनाया, बल्कि हमारी आपसी फूट का फायदा उठाकर शासन किया. यदि समाज में सद्भाव बना रहेगा तो लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में भागीदार बनेंगे और समस्याएं स्वतः हल होती जाएंगी.
समाज की जागृति और स्थानीय स्तर पर समाधान: डॉ. भागवत ने कहा कि समाज अब जाग रहा है और देश तेजी से आगे बढ़ रहा है. यदि खंड या प्रखंड स्तर पर समाज अपनी समस्याओं पर बैठकर विचार-विमर्श करे तो लोगों को किसी नेता पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने विभिन्न जातियों और बिरदरियों के उत्थान के साथ अन्य समाजों की समस्याओं के समाधान के प्रयासों की जानकारी भी ली. कार्यक्रम में क्षेत्र कार्यवाह मोहन सिंह ने विषय प्रवेश कराया, जबकि क्षेत्र संघचालक देवव्रत पाहन, उत्तर बिहार प्रांत संघचालक गौरीशंकर प्रसाद सहित कई वरिष्ठ स्वयंसेवक उपस्थित रहे.
प्रश्नोत्तर सत्र में सज्जन शक्ति पर जोर: दूसरे सत्र में प्रश्नोत्तर के दौरान सरसंघचालक ने कहा कि केवल समस्या बताने के बजाय उसका समाधान भी सुझाना चाहिए. आज देश सज्जन शक्ति के भरोसे आगे बढ़ रहा है, जहां लोग अपने स्तर पर समाज की समस्याएं दूर कर रहे हैं. लेकिन इस प्रयास को और नीचे तक ले जाना जरूरी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल व्यवस्था से समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि समाज के लोग आपस में चिंतन करेंगे तभी स्थायी हल निकलेगा.
जाति संगठनों की भूमिका और सेवा भाव: डॉ. भागवत ने कहा कि प्रखंड स्तर पर समाज और जाति के संगठनों को भौतिक तथा नैतिक उत्थान पर गंभीरता से विचार करना होगा. उन्होंने जोर दिया कि केवल संपन्न लोग ही समाज सेवा कर सकते हैं, ऐसा नहीं है. जिसके मन में सद्भाव होगा, वही पीड़ितों और जरूरतमंदों की सेवा कर सकता है. कई गांवों के उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि समाज ने बिना सरकारी मदद के भी अपनी समस्याओं का समाधान किया है.
विभिन्न संगठनों के सामाजिक कार्य: गोष्ठी में विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने कार्यों की जानकारी दी. तैलिक साहू समाज ने कोरोना काल में मुजफ्फरपुर के छोटी कल्याणी क्षेत्र में कोरोना वॉरियर्स की सेवा का उल्लेख किया. एक संगठन ने समाज की लड़कियों के सामूहिक विवाह कराने की बात बताई, जबकि सहरसा में रोटी बैंक चलाने वाले संगठन ने दिव्यांग और जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने तथा सेवा के विस्तार की जानकारी साझा की. यह कार्यक्रम संघ के शताब्दी वर्ष में सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ.
होमवर्क करके सदन में आए सांसद... बजट सत्र पर BJP का फोकस! विपक्ष को साधने की तैयारी
25 Jan, 2026 10:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) नए बदलाव के साथ ही पार्टी को चुनावी और संसदीय मोड में पूरी तरह शिफ्ट करने का संकेत दे रही है. जनवरी के अंत में आगामी बजट सत्र जो 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा, इसे लेकर पार्टी विशेष तैयारियां कर रही है.
पार्टी सूत्रों की माने तो भाजपा में नए अध्यक्ष नितिन नबीन ने 20-21 जनवरी को भाजपा मुख्यालय में वरिष्ठ पदाधिकारियों, प्रदेश प्रभारियों, राज्य अध्यक्षों और अन्य नेताओं के साथ लंबी बैठकें कीं, जो लगभग 8 घंटे तक चली.
इन बैठकों के दौरान ही पार्टी के प्रवक्ताओं की भी बैठक हुई और इन बैठकों का फोकस मुख्य रूप से आगामी विधानसभा चुनावों (पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु आदि) पर था, लेकिन संसद सत्र की तैयारियों पर भी चर्चा हुई. इसमें विपक्ष की तरफ से सरकार पर आरोप प्रत्यारोप लगाए जाने वाले संभावित विषयों पर भी पूरी तैयारी के साथ मीडिया में जाने की नेताओं को सलाह दी गई.
बैठक में सांसदों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि संसद में लाइव डिबेट, जीरो ऑवर, प्रश्नकाल, मीडिया बाइट्स या किसी भी सार्वजनिक इंटरैक्शन से पहले पूर्ण होमवर्क जो तथ्य-आधारित तैयारी हो जरूर करके जाएं. ना सिर्फ प्रवक्ताओं को बल्कि हर सांसद को विशिष्ट ब्रिफिंग मटेरियल प्रदान किया जा रहा है, जिसमें सरकार की प्रमुख उपलब्धियां जैसे आर्थिक सुधार, योजनाओं का प्रभाव, बजट से जुड़े पॉइंट्स आदि, विपक्ष के संभावित हमलों के काउंटर पॉइंट्स, आंकड़े, और पार्टी लाइन शामिल हैं.
सूत्रों के मुताबिक नए अध्यक्ष नितिन नबीन ने जोर दिया कि कोई भी बयान या जवाब अनुशासित, तथ्यपूर्ण और आक्रामक रक्षा वाला होना चाहिए, ताकि विपक्ष के घेराव में सरकार मजबूत दिखे. विपक्ष (खासकर INDIA गठबंधन) इस सत्र में महंगाई, बेरोजगारी, किसान मुद्दे, आर्थिक असमानता, आरक्षण, मणिपुर/अन्य हिंसा जैसे कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की योजना बना रहा है.
पार्टी सूत्रों की माने तो भाजपा ने सांसदों को इन सभी मुद्दों पर डिटेल्ड रिस्पॉन्स तैयार करने को कहा है, जिसमें सरकार की उपलब्धियां जैसे डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत,और हालिया योजनाओं का डेटा प्रमुखता से पेश किया जाए.
संसद सत्र से पहले 27 जनवरी 2026 को सर्वदलीय बैठक हो रही है, जहां सत्र की रूपरेखा पर चर्चा होगी. साथ ही भाजपा के नेताओं को स्पष्ट निर्देश हैं कि यहां भी वो मजबूत तैयारी के साथ जाएं. सूत्री की माने तो पार्टी का लक्ष्य है कि सत्र के दौरान सरकार की छवि मजबूत रहे और कोई कमजोरी न दिखे, खासकर मीडिया कवरेज में.
हालांकि, इस मुद्दे पर पर पार्टी के नेताओं को बोलने से मना किया गया है. नाम न लेने की शर्त पर एक राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी में बैठक होती रहती है और जहां तक बात बजट सेशन की है विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है. पश्चिम बंगाल और कई राज्यों के चुनाव हैं.
उन्होंने कहा कि, खासतौर पर कांग्रेस और टीएमसी एसआईआर से लेकर तमाम ऐसे मुद्दे पर हंगामा कर रही है, ताकि वो चुनावी मैदान में जनता को दिखा सके कि वो उनके लिए काम कर रही है. मगर अब जनता समझ गई है और इन पार्टियों की साजिश नाकाम होने वाली है.
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