राजनीति
पार्टी में मतभेदों के बीच खडग़े-राहुल से मिले , कहा- सब साथ मिलकर कर रहे काम
30 Jan, 2026 04:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस में पार्टी हाईकमान से मतभेद की खबरों के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े और राहुल गांधी से मुलाकात की। तीनों के बीच बैठक संसद में खडग़े के कार्यालय में हुई। मुलाकात के बाद थरूर ने कहा कि मेरी पार्टी के दोनों नेताओं से बातचीत हुई। सब ठीक है। हम सब एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। मैंने हमेशा पार्टी के लिए प्रचार किया है।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई, जब थरूर और पार्टी लीडरशिप के बीच कुछ मतभेद सामने आए थे। हाल ही में केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर एआईसीसी की एक बैठक हुई थी, जिसमें थरूर शामिल नहीं हुए थे। वहीं केरल का सीएम बनने के सवाल पर थरूर ने कहा कि मेरी इस बारे में कभी बात नहीं हुई। मुझे किसी भी चीज के लिए उम्मीदवार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है।
राहुल गांधी और कनिमोझी के बीच चली घंटे भर बैठक पर गठबंधन के लिए नहीं बन सकी सहमति
30 Jan, 2026 03:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस और डीएमके के बीच गठबंधन को लेकर चल रही असहजता के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी और डीएमके सांसद कनिमोझी के बीच एक अहम बैठक हुई। दिल्ली में बुधवार को हुई यह मुलाकात करीब एक घंटे तक चली, लेकिन गठबंधन की कार्ययोजना या सीटों के बंटवारे को लेकर कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी।
सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक डीएमके की पहल पर हुई थी, ताकि अपने पुराने सहयोगी कांग्रेस के साथ तालमेल को लेकर बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके। हालांकि, बैठक के दौरान किसी भी तरह के आंकड़ों या फार्मूले पर चर्चा नहीं हुई। राहुल गांधी ने कनिमोझी से आग्रह किया कि इस विषय पर कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा गठित नेताओं की समिति के साथ बातचीत की जाए और उसी मंच पर गठबंधन से जुड़े मुद्दों को अंतिम रूप दिया जाए। कांग्रेस सूत्र बता रहे हैं, कि बैठक का माहौल सौहार्दपूर्ण रहा, लेकिन निर्णय आगे की बातचीत पर छोड़ दिया गया। बताया जा रहा है कि तमिलनाडु में करीब दो दशक पुराने इस गठबंधन में इस बार तनाव की स्थिति है। इसकी मुख्य वजह कांग्रेस की राज्य इकाई की ओर से सरकार में हिस्सेदारी की मांग बताई जा रही है, जिसे डीएमके ने स्वीकार नहीं किया है। कांग्रेस के भीतर कुछ नेताओं ने झारखंड मॉडल की तर्ज पर तमिलनाडु में भी सत्ता में भागीदारी की मांग उठाई है। इसी पृष्ठभूमि में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) नेतृत्व ने सभी प्रमुख राज्य नेताओं की बैठक बुलाकर उनके विचार सुने। बैठक के बाद यह तय किया गया कि अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व करेगा।
तमिलनाडु में डीएमके के साथ गठबंधन को लेकर कांग्रेस के राज्य प्रभारी गिरीश चोडंकर ने एक बातचीत के दौरान कहा, कि गठबंधन वार्ता अभी औपचारिक रूप से शुरू नहीं हुई है और कांग्रेस डीएमके की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है। उन्होंने कहा, हम पिछले दो महीनों से इंतजार कर रहे हैं। हमारा विपक्ष काफी आक्रामक तरीके से काम कर रहा है। नवंबर में हमने गठबंधन समिति का गठन किया था और अनुरोध किया था कि 15 दिसंबर तक बातचीत पूरी कर ली जाए, लेकिन अभी तक देरी हो रही है।
ये घटनाक्रम ऐसे समय सामने आए हैं, जब तमिलनाडु में इस साल के पहले छह महीनों में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है, हालांकि भारतीय चुनाव आयोग ने अभी आधिकारिक कार्यक्रम घोषित नहीं किया है। 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में 2021 के चुनावों में डीएमके ने 133 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को 18 सीटें मिली थीं, जबकि पीएमके ने 5, वीसीके ने 4 और अन्य दलों ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस और डीएमके के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत तेज हो सकती है, क्योंकि दोनों दल चुनाव से पहले किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहेंगे।
महाराष्ट्र में होने वाला था बड़ा राजनीतिक बदलाव, 8 फरवरी को NCP गुटों का विलय का था प्लान
30 Jan, 2026 02:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में जल्द बड़ी उठा पटक के आसार हैं। खबर है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुट फरवरी में फिर से एक होने की घोषणा करने वाले थे, लेकिन अजित पवार (Ajit Pawar) के निधन के कारण इसे टाल दिया गया है। एक गुट की अगुवाई अजित के पास थी। जबकि, दूसरे गुट एनसीपी एसपी के प्रमुख वरिष्ठ नेता शरद पवार (Sharad Pawar) थे। हाल ही में चाचा और भतीजे पुणे स्थानीय निकाय चुनाव के लिए एक हुए थे, जिसके बाद एनसीपी के एक होने की अटकलें तेज हो गईं थीं।
8 फरवरी को होने वाली थी घोषणा
एक रिपोर्ट के अनुसार, एनसीपी के दोनों गुट 8 फरवरी को साथ आने का ऐलान करने वाले थे। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि विलय को लेकर चर्चाएं काफी आगे बढ़ गई थीं और नेता जिला परिषद चुनाव के बाद औपचारिक ऐलान करने वाले थे। एनसीपी नेताओं के अनुसार, डिप्टी सीएम के निधन के बाद अनिश्चितताएं आ गईं हैं, लेकिन राजनीतिक प्रक्रिया जारी है।
रिपोर्ट के मुतबाकि, बारामती पहुंचे एनसीपी नेताओं ने बुधवार रात बैठक भी की थी। सूत्रों ने बताया है कि दोनों गुटों के एक होना शरद पवार की एनसीपी एसपी का ‘सरकार में शामिल होने’ की ओर एक कदम होगा। एनसीपी एसपी महाविकास अघाड़ी का हिस्सा है। जबकि, अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी सत्तारूढ़ महायुति में शामिल है।
हो रही थीं बैठकें
मीडिया से बातचीत में एनसीपी एसपी विधायक जयंत पाटिल और एनसीपी एसपी नेता शशिकांत शिंदे ने गुटों के एक होने की बात की चर्चा की पुषअटि की है। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्र बताते हैं कि बात इतने आगे बढ़ गई थी कि संभावित कैबिनेट फेरबदल और नए लोगों को शामिल करने को लेकर अनौपचारिक रूप से बातें हो रही थीं।
पाटिल ने अजित पवार के निधन को बड़ा नुकसान बताया है। अखबार से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘हाल के समय में हम लगातार मिल रहे थे। 16 जनवरी को हम मेरे आवास पर मिले थे, ताकि चुनाव साथ लड़ने को लेकर अंतिम दौर की बात हो सके। 17 जनवरी को शरद पवार जी के घर पर बैठक हुई थी।’
क्या था प्लान
शिंदे ने बताया कि मर्ज होने की बात दोनों पार्टियों के बीच सहमति से पहले की तरह हो रही हैं। उन्होंने कहा, ‘अब सच बोलना जरूरी है। अजित पवार ने कहा था कि हम निकाय चुनावों के बाद साथ आ जाएंगे। इस संबंध में बैठकें भी हुई थीं। अजित दादा ने यह शरद पवार की ओर देखते हुए कहा था। अब हम उस दिशा में प्रगति करेंगे।’
पद को लेकर बीजेपी–शिवसेना गठबंधन में टकराव, बाल ठाकरे की सियासी विरासत का भी है मामला
30 Jan, 2026 02:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव चार साल की देरी के बाद संपन्न हो चुके हैं, लेकिन मेयर पद को लेकर महायुति गठबंधन में तनाव गहरा गया है। भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच इस पद को लेकर मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं। विवाद केवल सत्ता के पद तक सीमित नहीं है, बल्कि शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की राजनीतिक विरासत को लेकर भी बहस का केंद्र बन गया है।
शिंदे गुट का कहना है कि बीएमसी मेयर पद को रोटेशन के आधार पर बांटा जाना चाहिए और पांच साल के कार्यकाल में पहले ढाई साल तक शिवसेना का मेयर होना चाहिए। उनका तर्क है कि 2026 बाल ठाकरे का जन्म शताब्दी वर्ष है और इस मौके पर मुंबई का मेयर एक शिवसैनिक होना बालासाहेब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। शिंदे खुद मुख्यमंत्री पद गंवाने के बाद सत्ता में हाशिये पर महसूस कर रहे हैं, जिससे यह मांग और भी संवेदनशील बन गई है।
बीएमसी चुनावों में 227 सदस्यीय सदन में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं। दोनों मिलकर 118 सीटों के साथ बहुमत के आंकड़े से ऊपर हैं। विपक्षी शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटें जीतकर मजबूत उपस्थिति दर्ज की है। बावजूद इसके, महायुति गठबंधन अब तक बीएमसी के लिए औपचारिक नेतृत्व तय नहीं कर पाई है।
गठबंधन में विवाद तब खुलकर सामने आया, जब शिंदे गुट ने अचानक अपने 29 पार्षदों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। इसके बाद डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ प्रस्तावित बैठक और अहम कैबिनेट मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया। शिंदे का अपने पैतृक गांव लौटना और उनके समर्थक मंत्रियों का बैठक से दूरी बनाना नाराजगी का संकेत माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा शिंदे शिवसेना को ठाणे नगर निगम और बीएमसी की स्थायी समिति जैसे अहम निकायों में भूमिका देने का विकल्प सोच रही है, ताकि मेयर पद पर सहमति बनाई जा सके। हालांकि, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने सार्वजनिक तौर पर मतभेदों से इनकार किया और कहा कि जल्द ही महायुति का मेयर आम सहमति से चुना जाएगा।
इस पूरे विवाद के बीच बाल ठाकरे की विरासत राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। शिंदे गुट इसे “असली शिवसेना” की पहचान के साथ जोड़कर देख रहा है, जबकि उद्धव ठाकरे गुट आरोप लगाता है कि बालासाहेब की विरासत के नाम पर दिल्ली के सामने झुककर फैसले लिए जा रहे हैं। स्पष्ट है कि बीएमसी मेयर का फैसला केवल मुंबई की नगर राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महाराष्ट्र की सत्ता और शिवसेना की पहचान तय करने वाला साबित हो सकता है।
विमान हादसे से पहले भावुक थे अजित बोले- मैं अब थक चुका हूं, मुझे अब कुछ नहीं चाहिए
30 Jan, 2026 10:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति के दादा कहे जाने वाले उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बारामती में एक दर्दनाक विमान हादसे में निधन हो गया है। यह न केवल उनकी पार्टी एनसीपी के लिए एक अपूरणीय क्षति है, बल्कि राज्य की राजनीति के एक युग का अंत भी है। पिछले कुछ वर्षों में विवादों, राजनीतिक उतार-चढ़ाव और चुनावी चुनौतियों का सामना करने वाले अजित पवार अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले अंदरूनी तौर पर काफी व्यथित और थके हुए महसूस कर रहे थे। उनके सबसे करीबी मित्र और बारामती विद्या प्रतिष्ठान के ट्रस्टी किरण गूजर ने उनके अंतिम दिनों की उन भावुक यादों को साझा किया है, जो एक कठोर नेता के भीतर छिपे संवेदनशील इंसान को उजागर करती हैं।
किरण गूजर, जिन्होंने 1984 में अजित पवार को राजनीति के पहले चुनाव के लिए मनाया था, बताते हैं कि पिछले कुछ समय से अजित पवार का राजनीति से मोहभंग होने लगा था। कुछ दिन पहले ही उन्होंने गूजर से अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा था, अब मुझे यह सब नहीं चाहिए, मैं थक चुका हूँ। गूजर के अनुसार, अजित पवार अपनी कड़ी मेहनत के बावजूद मिलने वाली आलोचनाओं और राजनीतिक झटकों से आहत थे। उन्होंने बेहद भावुक होकर अपने मित्र से पूछा था, मैं दिन-रात इतनी मेहनत कर रहा हूँ, फिर भी मुझे यह सब (विरोध और आलोचना) क्यों सहना पड़ रहा है? लोकसभा चुनाव के परिणामों के बाद तो वे इतने टूट गए थे कि विधानसभा चुनाव लड़ने के पक्ष में भी नहीं थे, लेकिन करीबी साथियों के समझाने पर वे दोबारा सक्रिय हुए थे।
अजित पवार के व्यक्तित्व में आए बदलावों पर चर्चा करते हुए किरण गूजर बताते हैं कि शुरुआती दिनों में वे अध्यात्म और मंदिर जाने के सख्त खिलाफ थे। बचपन में पिता को खोने और परिवार की विषम परिस्थितियों के कारण उनके मन में ईश्वर की अवधारणा को लेकर एक अलग सोच थी। वे अक्सर कहते थे कि भगवान ने उनके साथ अच्छा नहीं किया, इसलिए वे वहां क्यों जाएं? हालांकि, उम्र और अनुभव के साथ उनके व्यवहार में नरमी आई थी। वे भगवान पर भरोसा तो करने लगे थे, लेकिन कभी अंधविश्वासी नहीं रहे और न ही उन्होंने कभी धर्म का इस्तेमाल राजनीति के लिए किया।
अपनी आखिरी मुलाकात को याद करते हुए गूजर भावुक हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि मौत से महज पांच दिन पहले अजित पवार ने उनसे कहा था कि वे ऊब रहे हैं और उन्हें कहीं बाहर जाना चाहिए। दोनों ने साथ में आधा दिन बिताया और रात का खाना खाया। वह अजित पवार के साथ उनका आखिरी भोजन था। उस समय भी अजित पवार ने अपनी थकान और राजनीति से दूर रहने की इच्छा जाहिर की थी, जिसे सुनकर उनके मित्र भी हैरान थे कि आखिर दादा के मन में क्या चल रहा है। हादसे वाले दिन की दास्तां बयां करते हुए किरण गूजर ने बताया कि विमान में सवार होने से ठीक पहले अजित पवार ने उन्हें फोन किया था। वे उन्हें लेने खुद हवाई अड्डे पहुंचे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उनकी आंखों के सामने ही वह विमान क्रैश हो गया। गूजर ने बताया कि मलबे से जब अजित पवार का पार्थिव शरीर निकाला गया और उसे कार में रखा गया, तो उन्होंने ही अपने प्रिय दादा की पहचान की। वे कहते हैं कि यह सब एक बुरे सपने जैसा लगता है, जिस पर विश्वास करना नामुमकिन है कि बारामती के लोगों के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाला नेता अब हमारे बीच नहीं रहा। 1984 में छत्रपति कारखाना चुनाव से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर, 2026 की इस दुखद दोपहर में हमेशा के लिए थम गया।
अजित पवार के निधन पर राज ठाकरे का विवादित बयान, बोले- राजनीति में सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ती है
30 Jan, 2026 09:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। राज ठाकरे(Raj Thackeray) ने लिखा है कि महाराष्ट्र की राजनीति(Maharashtra politics) ने एक बेहतरीन नेता खो दिया है। अजित पवार(Ajit Pawar) और मैंने लगभग एक ही समय में राजनीति(politics) में कदम रखा था, हालांकि हमारी जान-पहचान बहुत बाद में हुई।
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री(Deputy Chief Minister) अजित पवार(Ajit Pawar) के असामयिक निधन पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना(Maharashtra Navnirman Sena (MNS) president) (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अजित पवार(Ajit Pawar) को अपना दोस्त बताते हुए सोशल मीडिया एक्स पर एक लंबा पोस्ट लिखकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी(Expressing his profound grief) है। राज ठाकरे(Raj Thackeray) ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए लिखा है कि ऐसे समय में, जब प्रशासन को सत्ता से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है, महाराष्ट्र ने एक असाधारण नेता खो दिया है। इसके साथ ही उन्होंने इस ट्वीट में एक बड़ी बात कही है। उन्होंने लिखा, “राजनीति में स्पष्ट बोलने की कीमत(speaking frankly in politics) चुकानी होती है, पता नहीं अजीत पवार (Ajit Pawar)को कितनी चुकानी पड़ी होगी।”
कम समय में शिखर तक पहुंचे
अजित पवार(Ajit Pawar) के विमान हादसे की खबर सामने आने के कुछ ही घंटों बाद राज ठाकरे ने सोशल मीडिया X पर मराठी में एक लंबा श्रद्धांजलि संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने अजित पवार के व्यक्तित्व, कार्यशैली और राजनीति में उनकी भूमिका को याद किया। उन्होंने लिखा, “महाराष्ट्र ने एक बेबाक और सक्षम नेता खो दिया।” राज ठाकरे ने आगे लिखा, “मेरे मित्र और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र की राजनीति ने एक उत्कृष्ट नेता खो दिया है। हम दोनों ने लगभग एक ही समय राजनीति में प्रवेश किया था। हालांकि हमारी निकटता बाद में हुई, लेकिन राजनीति के प्रति उनके जुनून ने उन्हें बहुत कम समय में शिखर तक पहुंचाया।”
राजनीति में बदलाव की थी गहरी समझ
उन्होंने कहा कि अजित पवार(Ajit Pawar) भले ही पवार साहेब की राजनीतिक परंपरा से आए हों, लेकिन उन्होंने समय के साथ अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई और उसे पूरे महाराष्ट्र में स्थापित किया। राज ठाकरे ने 1990 के दशक का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में महाराष्ट्र में तेजी से शहरीकरण हुआ। ग्रामीण क्षेत्र अर्ध-शहरी बनने लगे, लेकिन राजनीति का स्वर ग्रामीण ही बना रहा, जबकि समस्याएं शहरी होती चली गईं। उन्होंने लिखा, “अजित पवार(Ajit Pawar) को इस बदलाव की गहरी समझ थी और वे इस तरह की राजनीति को संभालने में माहिर थे। पिंपरी-चिंचवड़ और बारामती इसके जीवंत उदाहरण हैं। इन दोनों क्षेत्रों का जिस तरह उन्होंने विकास किया, उसे उनके राजनीतिक विरोधी भी स्वीकार करते हैं।”
पवार की प्रशासन पर मजबूत पकड़ थी
राज ठाकरे ने कहा कि अजित पवार(Ajit Pawar) की प्रशासन पर असाधारण पकड़ थी। उन्होंने लिखा, “वे जानते थे कि अटकी हुई फाइलों को कैसे आगे बढ़ाया जाए। आज के दौर में जब प्रशासन को सत्ता से ऊपर उठकर काम करना चाहिए, ऐसे नेता का जाना बेहद दुखद है। राज ठाकरे ने अजित पवार(Ajit Pawar) की बेबाकी और स्पष्टवादिता को उनकी सबसे बड़ी पहचान बताया। उन्होंने कहा, “अगर कोई काम नहीं हो सकता था, तो अजित पवार सामने से मना कर देते थे। और अगर हो सकता था, तो उसे पूरा करने में अपनी पूरी ताकत झोंक देते थे। लोगों को झूठे वादों से बहलाना या भीड़ जुटाकर राजनीति करना उनका तरीका नहीं था।”
साफगोई और ईमानदारी की कीमत चुकानी पड़ती है
इसी संदर्भ में उन्होंने लिखा, “राजनीति में साफगोई और ईमानदारी की कीमत चुकानी पड़ती है। यह बात मैं अपने अनुभव से जानता हूं और अंदाजा लगाया जा सकता है कि अजित पवार ने इसके लिए कितनी बड़ी कीमत चुकाई होगी।” राज ठाकरे ने अजित पवार को जातिवाद से मुक्त राजनीति करने वाला नेता बताया। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में ऐसे नेता कम होते जा रहे हैं, जो बिना जातिगत गणनाओं के काम करने का साहस रखते हों और अजित पवार उनमें सबसे आगे थे।
असम में अमित शाह का दो दिवसीय दौरा, देंगे तमाम सौगातें
30 Jan, 2026 09:19 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डिब्रूगढ़: गृह मंत्री अमित शाह दो दिन के असम दौरे पर गुरुवार देर रात डिब्रूगढ़ पहुंचे. जानकारी के मुताबिक गृह मंत्री को लेकर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) का स्पेशल प्लेन रात करीब 12 बजे डिब्रूगढ़ के मोहनबाड़ी में डॉ. भूपेन हजारिका एयरपोर्ट पर उतरा. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने एयरपोर्ट पर अमित शाह का स्वागत किया.
गृह मंत्री आज शनिवार को डिब्रूगढ़ में असम विधानसभा भवन और वाइल्डलाइफ रिसर्च इंस्टीट्यूट की आधारशिला रखेंगे. नया विधानसभा परिसर आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा. जानकारी के मुताबिक जिस वाइल्डलाइफ रिसर्च इंस्टीट्यूट की नींव रखी जाएगी, वह असम की रिच बायोडायवर्सिटी के साइंटिफिक रिसर्च, कंजर्वेशन और सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा. गृह मंत्री दक्षिणी असम में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए खानिकर स्टेडियम प्रोजेक्ट के पहले फेज़ का भी उद्घाटन करेंगे. यह इवेंट आज सुबह डिब्रूगढ़ के खानिकर में होगा.
इसके बाद अमित शाह करेंग चापोरी में होने वाले 10वें मिसिंग कल्चरल फेस्टिवल में शामिल होने के लिए धेमाजी के लिए रवाना होंगे. बता दें, यह फेस्टिवल हर साल मिसिंग समुदाय द्वारा आयोजित किया जाता है और पारंपरिक डांस, संगीत, कला, कॉस्ट्यूम और देसी खाने के जरिए जनजाति की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाता है. शाह शाम को गुवाहाटी के लिए निकलेंगे और फिर राज्य BJP हेडक्वार्टर पहुंचेंगे. ऑफिस पहुंचने के बाद वह पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मिलेंगे। चर्चा में संगठनात्मक मुद्दों, आने वाले राजनीतिक एजेंडे और राज्य में जमीनी स्तर पर पहुंच मजबूत करने पर फोकस रहने की उम्मीद है.
बता दें, असम में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं. जिसको लेकर भारतीय जनता पार्टी लगातार तैयारियों में जुटी है. वहीं, सीएम हिमंत बिस्वा सरमा भी दोबारा सरकार पर काबिज होने को कमर कस रहे हैं. उनका कहना है कि राज्य से अवैध बांग्लादेशियों को हर कीमत में बाहर निकाल कर रहेंगे. वहीं, वे विपक्षी दल कांग्रेस पर भी तीखे हमले बोल रहे हैं.
क्या सुनेत्रा पवार बनेंगी महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री? अजित पवार के निधन के बाद अटकलें तेज
30 Jan, 2026 08:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Maharashtra Deputy Chief Minister Ajit Pawar) के निधन के बाद राजनीतिक घटनाक्रम में तेजी आ गई है. अजित पवार के निधन से उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री (Deputy Chief Minister and Finance Minister) के पद रिक्त हो गए हैं. ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) को इन पदों पर नियुक्त किया जाएगा. इस बीच एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल ने सुनेत्रा पवार से मुलाकात की. उसके बाद यह अटकलें और भी तेज हो गई हैं.
सूत्रों का कहना है कि एनसीपी नेता यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि सुनेत्रा पवार एनसीपी का नेतृत्व संभालें और उपमुख्यमंत्री का पद भी ग्रहण करें. इस बीच, अजित पवार के समर्थकों ने मांग की है कि अजित पवार के बाद सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया जाए. अजित पवार के पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार के बाद, बारामती में अजित पवार के समर्थकों ने ये मांग की.
सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने की मांग तेज
उनका कहना है कि अगर सुनेत्रा पवार उपमुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो उपमुख्यमंत्री के रूप में सुनेत्रा अजित पवार का नाम ही रह जाएगा. कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि पवार परिवार को मिलकर दोनों राष्ट्रवादियों (एनसीपी) के विलय पर फैसला लेना चाहिए. हालांकि, इन कार्यकर्ताओं का यह भी मानना है कि अब परिवार को मिलकर नेतृत्व पर विचार-विमर्श करना चाहिए और फैसला लेना चाहिए.
दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषक संजीव उन्हाले का कहना है कि अजित पवार राष्ट्रीय स्तर पर अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री, वित्त मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे थे. सुनेत्रा पवार के लिए इन सभी पदों को संभालना संभव नहीं है. इसलिए, वह राष्ट्रवादी पार्टी की अध्यक्ष या उपमुख्यमंत्री बन सकती हैं.
अजित पवार के निधन के बाद अटकलें तेज
हालांकि, संजीव उन्हाले ने यह भी अनुमान लगाया कि यह सब भाजपा के नेतृत्व में होगा. यदि अजित पवार की विचारधारा को कायम रखना है, तो सुनेत्रा पवार, पार्थ पवार और जय पवार को मौका दिया जाना चाहिए. अगर उन्हें यह मौका मिलता है, तो पार्टी पर अजित पवार की छाप बनी रहेगी. हर किसी की महत्वाकांक्षा होती है. ऐसा नहीं है कि सांसद सुनील तटकरे की महत्वाकांक्षा नहीं है.
उन्होंने यह भी अनुमान लगाया कि राष्ट्रवादी पार्टी के कई नेता उपमुख्यमंत्री पद के लिए उत्सुक हो सकते हैं, क्योंकि छगन भुजबल समेत कई नेताओं ने अजित पवार के साथ काम किया है. अजित पवार की बुधवार को बारामती हवाई अड्डे के पास एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई थी. गुरुवार की सुबह बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, गृह मंत्री अमित शाह और कई अन्य प्रमुख नेता इस अवसर पर उपस्थित थे.
सब कुछ ठीक, सब एक साथ- राहुल और खरगे से मुलाकात के बाद बोले शशि थरूर
29 Jan, 2026 05:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर (Shashi Tharoor) की लंबे समय से पार्टी के प्रति नाराजगी के कयास लगाए जाते रहे हैं. नाराजगी की खबरों के बीच थरूर ने आज गुरुवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की. देर तक चली मुलाकात के बाद थरूर ने कहा कि सब कुछ ठीक है और सब एक साथ हैं.
संसद भवन स्थित मल्लिकार्जुन खरगे के ऑफिस में यह मुलाकात हुई. केरल के तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद थरूर ने इस मुलाकात को बहुत अच्छी, सार्थक और सकारात्मक करार दिया. शीर्ष नेताओं के साथ मुलाकात के बाद उन्होंने कहा, “सब कुछ ठीक है और हम सब एक साथ आगे बढ़ रहे हैं.”
थरूर ने कहा, “मेरी पार्टी के 2 नेताओं, नेता प्रतिपक्ष (राहुल गांधी) और कांग्रेस अध्यक्ष (खरगे) के साथ हमारी बातचीत हुई. हमारी बहुत अच्छी, रचनात्मक, सकारात्मक बातचीत हुई. अब सब ठीक है और हम सब एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं. मैं और क्या कह सकता हूं? मैंने हमेशा पार्टी के लिए प्रचार किया है, मैंने कहां प्रचार नहीं किया है?”
अगले कुछ महीने में केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान प्रचार की संभावना को लेकर शशि थरूर ने कहा, “मैंने हमेशा प्रचार किया है, आगे भी प्रचार करता रहूंगा.”
उन्होंने केरल में मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी से इनकार करते हुए कहा कि यह उनके लिए कभी मुद्दा ही नहीं रहा. क्या केरल के मुख्यमंत्री के बारे में बात हुई के सवाल पर उन्होंने कहा, “नहीं, इस बारे में कभी बात नहीं हुई. मुझे किसी भी चीज के लिए उम्मीदवार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है. मैं पहले से ही सांसद हूं और तिरुवनंतपुरम के मेरे वोटर्स का मुझ पर भरोसा है. मुझे संसद में उनके हितों का ध्यान रखना है, यही मेरा काम है.” उनका कहना है कि मैं मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं हूं, मैं पहले से सांसद हूं.
शशि थरूर की नाराजगी को लेकर लंबे समय से कयास लगाए जा रहे हैं. इससे पहले पिछले दिनों कांग्रेस सांसद थरूर ने उन खबरों पर टिप्पणी करने से मना कर दिया, जिनमें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPM) की ओर उनके झुकाव की अटकलें लगाई जा रही थीं.
अटकलें तब से लगाई जाने लगी हैं जब से उन्होंने कांग्रेस की कई बैठकों से दूरी बनाकर रखी. पिछले दिनों एक अहम बैठक में नहीं आने पर सफाई में कहा कि उनके पास न्योता इतनी देर से आया कि उनके पास अपने पहले से तय कार्यक्रम को बदलने का कोई विकल्प नहीं था. यह बैठक पिछले दिनों सोनिया गांधी के आवास पर आयोजित की गई थी.
अजित ‘दादा’ का अंतिम संस्कार, दोनों बेटों ने निभाया फर्ज
29 Jan, 2026 01:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बारामती। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का बुधवार को विमान हादसे में निधन हो गया था. वे चुनाव प्रचार के लिए मुंबई से बारामती जा रहे थे. लैंडिंग के वक्त उनका विमान क्रैश हो गया, जिसमें डिप्टी सीएम समेत विमान में सवार सभी 5 लोगों की जान चली गई थी. अजित पवार को श्रद्धांजलि देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन और महाराष्ट्र सरकार के सीएम, डिप्टी सीएम समेत कई दिग्गज पहुंचे थे. आज गुरुवार को अजित पवार का अंतिम संस्कार किया गया. उनके दोनों बेटों जय पवार और पार्थ पवार ने मुखाग्नि दी।
ममता ने इतने साल शासन के बाद भी युवाओं के लिए कुछ भी नहीं किया: अग्निमित्रा पॉल
29 Jan, 2026 12:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुर्गापुर। बंगाल से भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इतने सालों के शासनकाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज तक जनता के कल्याण के लिए कोई काम नहीं किया। उन्होंने कहा कि 2008 में जब टाटा का नैनो प्रोजेक्ट बंगाल के सिंगूर में आया था, तब उस कंपनी को वापस भेज दिया था। तब ममता बनर्जी ने कहा था कि हम प्रदेश के युवाओं को बड़ी संख्या में रोजगार दूंगी। लेकिन, इतने सालों के शासनकाल में उनकी सरकार ने युवाओं के लिए कुछ नहीं किया। भाजपा विधायक ने कहा कि इन लोगों ने सत्ता में रहते हुए युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था। लेकिन, इतने सालों के शासनकाल में इन लोगों ने आज तक किसी भी युवा को रोजगार देने का फैसला नहीं किया। अगर दिया होता, आज की तारीख में युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ता। ममता बनर्जी ने सिर्फ प्रदेश के लोगों के साथ छलावा किया है।
उन्होंने कहा कि ममता ने लगातार प्रदेश में निवेश से संबंधित कई तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया। इन कार्यक्रमों में दावा किया गया है कि हम प्रदेश में निवेश को लाने का मार्ग प्रशस्त कर रहे है। लेकिन, आज तक प्रदेश में किसी भी प्रकार के निवेश को नहीं लाया गया। लेकिन, स्थिति ऐसी बनी हुई है कि युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की शरण लेनी पड़ रही है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस दिशा में पूरी तरह से उदासीन बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री मोदी हमारे बंगाल में आए। उन्होंने हमसे वादा किया है कि आगामी दिनों में पश्चिम बंगाल को उत्पादन का केंद्र बनाया जाएगा। इससे अन्य लोगों को रोजगार मिलेगा। हमारे राज्य में प्रचुर मात्रा में संसाधन है, जिनका इस्तेमाल किया जाएगा। लेकिन, अफसोस की बात है कि ममता बनर्जी को प्रदेश की जनता ने मौका दिया। आज तक उन्होंने प्रदेश की जनता के हित के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
अजित पवार के बाद राकांपा का क्या होगा: शरद गुट से होगी सुलह या नया रास्ता अपनाएगी पार्टी
29 Jan, 2026 10:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मुखिया और महाराष्ट्र के छह बार के उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) का बुधवार सुबह एक विमान हादसे (plane crash) में निधन हो गया। सियासत में अजित पवार की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे महाराष्ट्र (Maharashtra) में सबसे लंबे समय तक उपमुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं। हालांकि, उनके निधन के बाद अब उनके नेतृत्व वाली राकांपा के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
राकांपा का आगे क्या होगा? क्या अजित पवार के बिना संभल सकती है राकांपा? अजित और शरद पवार के बीच चल रही सुलह की कोशिशों का क्या होगा? राकांपा का नया चेहरा कौन होगा? राकांपा की तरफ से डिप्टी सीएम कौन हो सकता है? आइये जानते हैं…
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का आगे क्या होगा?
विमान हादसे में राकांपा प्रमुख के असामयिक निधन के बाद राकांपा का भविष्य अनिश्चितता और राजनीतिक संकट के दौर में है।
1. नेतृत्व और उत्तराधिकार को लेकर क्या चुनौती
अजीत पवार के गुट (जिसे चुनाव आयोग ने आधिकारिक राकांपा माना है) के पास महाराष्ट्र विधानसभा में मौजूदा समय में 41 विधायक हैं। इसके अलावा पार्टी का लोकसभा में एक सांसद भी है। ऐसे में उनके उत्तराधिकारी को लेकर कई संभावनाएं हैं…
उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार (राज्यसभा सांसद) या उनके बेटों- पार्थ और जय पवार को उनकी विरासत संभालने के लिए आगे लाया जा सकता है। हालांकि, पार्थ पवार पहले चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें चुनाव में हार मिली थी। इसके बाद से ही वे महाराष्ट्र की राजनीति में उतने सक्रिय नहीं रहे हैं, ऐसे में उनमें अपने पिता जैसी राजनीतिक कुशलता और जमीनी पकड़ जैसे कौशलों को लेकर अभी कुछ अनसुलझे सवाल हैं।
2. जो राकांपा टूटकर अलग हुई, उसके विलय की क्या संभावना
अजित पवार के निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों- राकांपा और राकांपा (एसपी) के विलय की अटकलें तेज हो गई हैं।
हाल ही में इसके संकेत भी मिले हैं। कुछ दिन पहले ही दोनों गुटों ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निकाय चुनावों के लिए गठबंधन कर चुनाव लड़ा था।
माना जा रहा है कि शरद पवार अपने पोते (पार्थ और जय) और अजित गुट के नेताओं को फिर से साथ लाकर पार्टी को एकजुट करने का प्रयास कर सकते हैं।
सूत्रों का दावा है कि दोनों गुटों को साथ लाने की कोशिश जारी थी। इसे लेकर अजित और शरद पवार के बीच चर्चा भी हुई थी। यहां तक कि शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने भी हाल ही में दोनों दलों के साथ आने का दावा किया था।
3. क्या शरद पवार निभाएंगे भतीजे की राकांपा में कोई भूमिका?
मूल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, जिसके बाद में दो हिस्से हुए, उसकी स्थापना शरद पवार की ओर से की गई थी। मौजूदा समय में अजित पवार की राकांपा में जो चेहरे हैं, वे भी कभी शरद पवार के करीबी और उनकी पार्टी के नेता रहे हैं। ऐसे में शरद पवार, जिन्होंने 2026 के अंत तक राजनीति से अलग होने का संकेत दिया था, वह अब अपनी योजना में बदलाव पर विचार कर सकते हैं। खासकर पवार साम्राज्य को स्थिरता देने और सुप्रिया सुले और परिवार की अगली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए वे दोनों गुटों को एक करने की कोशिश कर सकते हैं।
महाराष्ट्र का डिप्टी CM कौन बनेगा? सुनेत्रा पवार के नाम पर सियासी चर्चा तेज, जाने भाजपा का क्या है मूड?
29 Jan, 2026 10:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में बीते काफी समय से संतुलन की धुरी माने जाने वाले एनसीपी नेता अजित पवार (Ajit Pawar) के आकस्मिक निधन ने न केवल एनसीपी (NCP) के भीतर बल्कि राज्य की राजनीति के सामने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य में सत्तारूढ़ महायुति के अभिन्न अंग एनसीपी आगे भी साथ में रहेगी। भाजपा (BJP) ने संकेत दिए हैं कि उपमुख्यमंत्री पद एनसीपी के पास ही रहेगा।
बीते 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा, शिवसेना शिंदे एवं एनसीपी (अजित पवार) की महायुति ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए 288 सीटों में से 230 सीटें जीती थी। इनमें भाजपा ने 132, शिवसेना ने 57 एवं एनसीपी ने 41 सीटें हासिल की थी। हाल में निकाय चुनावों में एनसीपी को बड़ा झटका लगा था। दोनों गुटों अजित पवार व शरद पवार को मिलाकर भी परिणाम उत्साहजनक नहीं रहा। इसके बाद दोनों गुटों में एकता की चर्चा भी चली थी, लेकिन अब हालात बदल गए हैं।
क्या शरद पवार के साथ जाएंगे नेता?
पवार नाम के साथ चलने वाली एनसीपी में अब शरद पवार ही शीर्ष नेता हैं। अजित पवार के न रहने पर उनके साथ जुड़े तमाम नेताओं की निष्ठा एक बार फिर शरद पवार के साथ हो सकती है, लेकिन सियासी राजनीति में फिलहाल वह शरद पवार के साथ शायद ही जाएं और अजित पवार के परिवार से नेतृत्व को खड़ा कर ही आगे बढ़ें। अजित पवार की पत्नी एवं राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार या उनका बेटा पार्थ पवार (लोकसभा चुनाव हार गए थे) कमान संभाल सकते हैं। अन्य बड़े नेताओं प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल एवं सुनील तटकरे के भी उनके साथ ही रहने के आसार हैं।
NCP के पास ही रहेगा डिप्टी सीएम पद
भाजपा नेताओं ने संकेत दिए हैं कि अजित पवार के परिजनों एवं उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को आगे का फैसला लेना है। हालांकि, महायुति में एक उपमुख्यमंत्री एनसीपी के लिए था, वह उसी के पास रहेगा। राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने के ज्यादा आसार हैं, जबकि बेटा राज्यसभा में जा सकता है। भाजपा के लिए भी अभी यह मुफीद है। रही बात शरद पवार की तो राजनीति के माहिर शरद पवार शायद ही अभी दोनों की एकता पर जोर दें। वह भी आगामी राजनीति की दिशा देखकर ही इस बारे में फैसला करेंगे। पर, यह लगभग तय है कि वह भाजपा विरोधी राजनीति करते रहेंगे।
अजित पवार की मौत के बाद कौन संभालेगा NCP की कमान… इन चार नेताओं पर नजरें!
29 Jan, 2026 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुम्बई। महाराष्ट्र (Maharashtra) के उप मुख्यमंत्री (Deputy Chief Minister) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Nationalist Congress Party- NCP) के मुखिया अजित पवार (Ajit Pawar) की विमान हादसे में दर्दनाक मौत ने न सिर्फ राज्य की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है बल्कि उनकी पार्टी एक ऐसे असमंजस भरे मोड़ पर आ खड़ी हुई है, जिसके भविष्य पर अटकलों का बाजार गर्म हो चुका है। राजनीतिक विश्लेषकों का भी इस पर अलग-अलग मत है। कुछ का मानना है कि पार्टी का देर-सबेर शरद पवार (Sharad Pawar) गुट वाले NCP में विलय हो सकता है क्योंकि खुद अजित पवार इसकी अगुवाई कर रहे थे, तो दूसरी तरफ कुछ जानकारों का कहना है कि फिलहाल पार्टी महायुति गठबंधन का हिस्सा ही बनी रहेगी।
पार्टी की अगुवाई कौन करेगा, इस पर भी संशय के बादल हैं। हालांकि, कमोबेश सभी विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी की कमान पवार परिवार के पास ही रहेगा। चेहरा भले ही सुनेत्रा पवार हों या पार्थ पवार या फिर कोई और पवार लेकिन पर्दे के पीछे पार्टी के कुछ नेता सभी अहम फैसले कर सकते हैं। राजनीतिक जानकार ये भी कह रहे हैं कि NCP के सामने फिलहाल दो रास्ते हैं, पहला, परिवार और सहानुभूति आधारित नेतृत्व का और दूसरा अनुभव और संगठनात्मक मजबूती पर आधारित फैसला। उनके मुताबिक, डिप्टी सीएम पद केवल सम्मान का सवाल नहीं, बल्कि महायुति सरकार की स्थिरता और 2029 की चुनावी रणनीति से भी जुड़ा है।
चार चेहरे कौन?
ऐसे में अंतिम फैसला सिर्फ NCP के भीतर नहीं, बल्कि भाजपा नेतृत्व और गठबंधन समीकरणों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा। दरअसल, अजित पवार की राजनीतिक विरासत भारी है और उसी विरासत को संभालने के लिए NCP को अब भावना और व्यवहारिक राजनीति के बीच संतुलन साधना होगा। इन सबके बीच पार्टी के चार चेहरों का जिक्र होने लगा है, जो संकटमोचक बनकर उभर सकते हैं। अजित पवार गुट के पास इस वक्त 41 विधायक हैं। स्पष्ट उत्तराधिकारी न होने की स्थिति में पार्टी किसी अनुभवी नेता को आगे कर सकती है। इस कड़ी में चार बड़े नाम सामने हैं:
प्रफुल्ल पटेल
प्रफुल्ल पटेल NCP के सबसे वरिष्ठ और कद्दावर नेताओं में गिने जाने जाते हैं। पार्टी विभाजन के समय प्रफुल्ल पटेल अजित पवार के साथ मजबूती से खड़े रहे। उनके पास केंद्र और राज्य दोनों स्तरों का अनुभव है। उनकी एक राष्ट्रीय पहचान है और महायुति में भी स्वीकार्यता है। इसलिए वह एक संतुलित विकल्प बनकर उभर सकते हैं। 1957 में जन्मे, पटेल को पूर्व केंद्रीय मंत्री के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने यूपीए सरकार में नागरिक उड्डयन और भारी उद्योग जैसे महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला है। वे शरद और अजित पवार के करीबी माने जाते रहे हैं। एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष और पार्टी में दूसरे नंबर की हैसियत के साथ वह महाराष्ट्र के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय रहे हैं। छह बार सांसद रहे हैं।
छगन भुजबल
ओबीसी (माली) समुदाय से आने वाले छगन भुजबल के पास करीब 40 वर्षों का राजनीतिक अनुभव है। उनके पास मजबूत ओबीसी आधार है। वह मराठी राजनीति में पिछड़ा वर्ग की प्रभावी आवाज और NCP के सबसे अनुभवी चेहरों में एक हैं। अजित पवार के साथ उनके खड़े रहने से यह संकेत भी मिलता है कि पार्टी उन्हें भरोसेमंद मानती है। वह दो बार डिप्टी सीएम भी रह चुके हैं। मौजूदा फडणवीस सरकार में वह मंत्री हैं। उन्होंने 1960 के दशक में शिवसेना के साथ सियासी सफर की शुरुआत की, मुंबई के मेयर रहे, और बाद में एनसीपी में शामिल हो गए।
धनंजय मुंडे
मराठवाड़ा और बीड क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाले धनंजय मुंडे संगठन और गठबंधन दोनों में संतुलन साधने की क्षमता रखते हैं। भाजपा नेतृत्व से उनकी नजदीकी और महायुति में उनकी भूमिका उन्हें पावर ब्रिज के रूप में स्थापित करती है। वह दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे के भतीजे हैं, जिन्होंने अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया है। वे महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता, सामाजिक न्याय मंत्री, और बीड जिले के पालक मंत्री (Guardian Minister) रह चुके हैं। एक सरपंच की हत्या के मामले में नाम आने के बाद पिछले साल मार्च 2025 में उन्होंने महाराष्ट्र सरकार में मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।
सुनील तटकरे
सुनील तटकरे फिलहाल NCP के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष हैं और लोकसभा में पार्टी के इकलौते सांसद हैं। तटकरे संगठनात्मक दृष्टि से बेहद मजबूत माने जाते हैं। कोकण क्षेत्र में उनकी पकड़ और विधानसभा–लोकसभा दोनों में अनुभव उन्हें पार्टी का स्थिर चेहरा बना सकता है। वह वे राज्य सरकार में वित्त, जल संसाधन और ऊर्जा जैसे कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाल चुके हैं।
अजित पवार का निधन मेरे और पूरे महाराष्ट्र के लिए एक दर्दनाक घटना है – उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे
29 Jan, 2026 08:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Deputy Chief Minister Eknath Shinde) ने कहा कि अजित पवार का निधन (Ajit Pawar’s Demise) मेरे और पूरे महाराष्ट्र के लिए एक दर्दनाक घटना है (Is a painful incident for Me and the Entire Maharashtra) । महाराष्ट्र के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और यह सुनिश्चित करने के लिए इसकी जांच होनी चाहिए कि ऐसी दुर्घटनाएं दोबारा न हों। जांच जरूर होगी। जैसा कि मैंने बताया, जब मैं मुख्यमंत्री था, तो हमने समाज के हित में कई फैसले लिए थे और उस समय अजित पवार वित्त मंत्री थे। उन्होंने उन फैसलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया था, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।” उन्होंने आगे कहा कि यह महाराष्ट्र के लिए एक दुखद दिन है। यह मेरे और पूरे महाराष्ट्र के लिए एक दर्दनाक घटना है। अजित दादा अपनी बात के पक्के थे। जब मैं सीएम था और वह डिप्टी सीएम थे, तो हमने एक टीम के तौर पर काम किया था। टीम के तौर पर हमने लाडली बहन योजना शुरू की थी, और अजित दादा ने इसमें अहम भूमिका निभाई थी।
शिवसेना नेता शायना एनसी ने कहा, “अजित पवार, उनके परिवार, उनके साथियों और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के प्रति गहरी संवेदना। कभी-कभी ऐसे नुकसान को जाहिर करने के लिए सही शब्द मिलना मुश्किल होता है। उन्होंने 50 साल के राजनीतिक करियर में लगातार प्रशासन और शासन में काम किया, वित्त मंत्री, सिंचाई मंत्री या उपमुख्यमंत्री के तौर पर कार्य किया, जो कोई छोटी उपलब्धि नहीं है।” उन्होंने कहा कि विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार का दुखद निधन हुआ है। उनके परिवार के साथ इस वक्त जो दुखद समय है, हम उनके साथ में हैं। महाराष्ट्र के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उनकी बड़ी मजबूत पकड़ थी, जिससे सिर्फ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को नहीं, महाराष्ट्र को बड़ा नुकसान हुआ है। अजित पवार काफी लंबे समय तक आपकी सरकार में रहकर भी जो है, उन्होंने मिलकर काम किया।
शायना एनसी ने कहा कि अजित पवार के साथ हमने काफी लंबे समय तक काम किया। अजित पवार की एक सबसे अच्छी बात थी कि वे कभी भेदभाव नहीं करते थे। उन्होंने कभी किसी पार्टी के साथ भेदभाव नहीं किया। वे साथ में काम करते थे, खासकर जब कोई छोटा सा छोटा कार्यकर्ता उनके पास जाता था, किसी भी पार्टी का, तो वे उनका काम करते थे। ये उनका बहुत ही बड़ा व्यक्तित्व था। वे सभी को साथ में लेकर चलने वाले आदमी थे और कभी भी कोई व्यक्ति या कार्यकर्ता उनके पास जाता था तो वे खुद सामने से उसका काम करके देते थे। महाराष्ट्र को उनके देहांत से एक बहुत बड़ा झटका पहुंचा है।
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा, “अजित पवार बहुत वरिष्ठ और एक्टिव नेता थे। वह विकास कार्यों से जुड़े हुए थे। अजित पवार जिला परिषद चुनाव प्रचार के लिए बारामती जा रहे थे, तभी प्लेन क्रैश हुआ। यह हमारे लिए बहुत बड़ा नुकसान है, महाराष्ट्र ने एक बहुत एक्टिव नेता खो दिया है।”
भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने कहा, “जहां तक सुरक्षा की बात है, उन सभी बातों का ध्यान रखा जाता है। इसके बावजूद ऐसा क्यों हुआ, यह जांच से पता चलेगा। और यह बंगाल नहीं है, जहां सिर्फ जांच के नाम पर जांच होती है और बाद में कोई रिपोर्ट नहीं आती।” भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा, “महाराष्ट्र अजित पवार को एक विकास-उन्मुख नेता के तौर पर याद रखेगा, खासकर ग्रामीण इलाकों में उद्योग लाने और किसानों को उनमें शामिल करने की उनकी कोशिशों के लिए। उनके अचानक चले जाने से निश्चित रूप से राज्य को झटका लगेगा, जो तेजी से तरक्की कर रहा था।”
एक्टिविस्ट मनोज जरांगे पाटील ने कहा, “मुझे अजित दादा के निधन की दुखद खबर मिली है, और मेरा दिल इसे मान नहीं पा रहा है। यह यकीन करना मुश्किल है कि उनका इतने अचानक निधन हो गया। उनके जैसा नेता शायद फिर कभी नहीं आएगा।”
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