राजनीति
सुनेत्रा पवार ने ली डिप्टी सीएम पद की शपथ, अजित पवार अमर रहे के लगे नारे
1 Feb, 2026 08:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की वरिष्ठ नेता और दिवंगत अजित की पत्नी सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) ने आधिकारिक तौर पर महाराष्ट्र (Maharashtra) के उपमुख्यमंत्री (Deputy Chief Minister) के रूप में शपथ ग्रहण कर ली है. लोकभवन में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान राज्यपाल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. अपने पति और पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत अजित पवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए, सुनेत्रा पवार ने न केवल सत्ता की कमान संभाली है.
सूत्रों की मानें तो वित्त एवं योजना विभाग को छोड़कर अजित पवार के पास रहे सभी विभाग सुनेत्रा पवार को सौंपे जाएंगे.अजित पवार के पास वित्त एवं योजना, राज्य उत्पाद शुल्क, खेल एवं अल्पसंख्यक मामलों के विभाग थे. वित्त एवं योजना विभाग को छोड़कर बाकी सभी विभाग सुनेत्रा पवार को दिए जाएंगे.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति का नेतृत्व करने वाली भारतीय जनता पार्टी दिवंगत अजित पवार के परिवार और उनकी पार्टी द्वारा लिए गए हर फैसले का समर्थन करेगी. फडणवीस ने नागपुर में मीडिया कहा, ‘राकांपा उपमुख्यमंत्री पद के लिए जो भी फैसला लेगी, सरकार और भाजपा उस फैसले का समर्थन करेंगे. मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि हम अजित दादा के परिवार और राकांपा के साथ खड़े हैं.’
सुनेत्रा पवार 2024 के लोकसभा चुनाव तक सुर्खियों से दूर रहीं. उसी वर्ष हुए आम चुनाव में उन्होंने अपने पति की पार्टी की उम्मीदवार के रूप में बारामती लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा लेकिन प्रतिष्ठा की लड़ाई में अपनी ननद एवं राकांपा (शरदचंद्र पवार) उम्मीदवार सुप्रिया सुले से हार गईं. इसके बाद सुनेत्रा पवार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुईं.
सरकार ने ऐसी नीतियों पर ध्यान केंद्रित किया जिनका जमीनी स्तर पर खास असर नहीं
1 Feb, 2026 12:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने केंद्रीय बजट से पहले केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार ने ऐसी नीतियों पर ध्यान केंद्रित किया है जिनका जमीनी स्तर पर कोई खास असर नहीं है। उन्होंने गरीबों, किसानों, युवाओं और मध्यम वर्ग को राहत देने वाले उपायों की भी मांग की।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पायलट ने कहा कि पिछले कई सालों से हमने देखा है कि बजट सरकार के इरादों को व्यक्त करने का एक जरिया बन गया है...सालों से सत्ता में होने के बावजूद, मुझे लगता है कि बीजेपी सरकार ने उन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया है जिनका जमीनी स्तर पर कोई खास असर नहीं है। सरकार ने एमजीएनआरईजीए को करीब खत्म करने के लिए एक नया कानून बनाया। वे कहते हैं कि वे इसमें सुधार कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि देश में औसतन 35 दिनों तक एमजीएनआरईजीए का इस्तेमाल हो रहा है। वे 125 दिनों का वादा कर रहे हैं।
पहले जो फैसले गांवों में पंचायतों में लिए जाते थे, जहां सरपंच और जन प्रतिनिधि पैसों की मांग करते थे और बजट की कोई कमी नहीं होती थी। अब सरकार बजट तय कर लेती है और काम दिल्ली थोप देती है। इस तरह यह सरकार गरीबों की आर्थिक सुरक्षा छीनने की कोशिश कर रही है। उन्होंने तीन काले कानून भी उसी हठधर्मिता से बनाए हैं...हम चाहते हैं कि आने वाले वित्तीय वर्ष में वे गरीबों, किसानों, युवाओं और मध्यम वर्ग को राहत दें।
इस बीच केंद्रीय बजट पेश होने से पहले, विपक्षी नेताओं ने संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने केंद्रीय बजट पर शक व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले बजटों से केवल लोगों के एक छोटे से वर्ग को ही लाभ हुआ है और उन्होंने सरकार से यह मूल्यांकन करने का आग्रह किया कि क्या उसने अपने वादों को पूरा किया है।
परमहंस आचार्य का दावा, ट्रंप ने पीएम मोदी पर कराया था वशीकरण, हमने वैदिक मंत्रों से कराया मुक्त
31 Jan, 2026 05:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लेकर चल रहा विवाद गुरुवार को उस समय थम गया, जब सुप्रीम कोर्ट (SC) ने इन नियमों पर रोक लगाते हुए सरकार और यूजीसी (UGC) को नए सिरे से नियम बनाने और इसके लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दिया। इसी बीच अयोध्या के परमहंस आचार्य का एक बयान चर्चा में आ गया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
परमहंस आचार्य ने दावा किया है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंत्र‑मंत्र के जरिए वशीकरण कराया था। उनके मुताबिक, इसी वशीकरण का असर था कि यूजीसी ने ऐसे नियम बनाए। आचार्य ने कहा कि उन्होंने वैदिक मंत्रों के माध्यम से प्रधानमंत्री को इस प्रभाव से मुक्त करा दिया है।
मीडिया से बातचीत में परमहंस आचार्य ने कहा, “हमें यह समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसा कैसे हो गया। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को देखते हुए जरूर किसी ने तंत्र‑मंत्र के जरिए वशीकरण किया होगा। जब मैंने ध्यान किया तो पता चला कि डोनाल्ड ट्रंप ने यह कराया था। अब हमने वैदिक मंत्रों का पाठ कर उन्हें मुक्त कर दिया है। अब मोदी जी पर किसी भी तंत्र‑मंत्र का असर नहीं रहेगा।”
उन्होंने आगे कहा कि उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री अब ऐसा कोई कानून नहीं बनाएंगे जिससे देश का विकास बाधित हो। “देश को उनसे बहुत अपेक्षाएं हैं। हम अयोध्या से उनकी कुशलता के लिए लगातार पूजा‑पाठ करते रहेंगे।
गौरतलब है कि परमहंस आचार्य यूजीसी के नए नियमों को लेकर पहले से ही बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए थे। उन्होंने इन नियमों का विरोध करते हुए सरकार से इन्हें वापस लेने की मांग की थी और यहां तक कहा था कि यदि नियम वापस नहीं लिए गए तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए।
आचार्य ने दावा किया था कि इन नियमों से देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन सकती है, हिंदू समाज बंटेगा और भाजपा का पूरे देश से सफाया हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसे नियमों से देश में अराजकता फैलेगी, महिलाओं की सुरक्षा पर असर पड़ेगा और सामाजिक टकराव बढ़ेगा।
परमहंस आचार्य का कहना था कि यदि यह नियम पहले लागू होता तो बिहार में भी भाजपा को चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ता। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि नियम वापस नहीं लिए गए तो वह अपनी जान देने तक को तैयार हैं।
शशि थरूर ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की जमकर की तारीफ, कहा
31 Jan, 2026 05:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पार्टी के नेता राहुल गांधी की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें एक ईमानदार नेता बताया, जो देश में सांप्रदायिकता जैसे विभिन्न मुद्दों पर सशक्त आवाज हैं। थरूर ने कहा कि राहुल गांधी को हर कोई पसंद करता है, क्योंकि वह देश में सांप्रदायिकता, नफरत और विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ लगातार बोलते रहते हैं।
तिरुवनंतपुरम के सांसद ने यहां पत्रकारों से कहा, इस बारे में मेरी कोई अलग राय नहीं है। थरूर ने यह भी कहा कि उन्होंने राहुल के खिलाफ किसी भी गलत टिप्पणी से कभी सहमति नहीं जताई और कहा, वह (राहुल) एक ईमानदार नेता हैं। उनकी यह टिप्पणी अपनी शिकायतों के निवारण के लिए पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से हुई मुलाकात के एक दिन बाद आई है। इस मुलाकात के बाद उन्होंने कहा था कि सब ठीक है और हम साथ-साथ हैं। थरूर कोच्चि में हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में उनके साथ हुए व्यवहार और केरल में कुछ नेताओं द्वारा उन्हें दरकिनार करने के प्रयासों से नाराज बताए जा रहे थे। थरूर ने शुक्रवार को यह भी कहा कि कुछ मुद्दों पर उनके रुख को मीडिया ने शायद बीजेपी समर्थक माना हो, लेकिन उन्होंने इसे सिर्फ सरकार समर्थक या भारत समर्थक के तौर पर देखा है। थरूर ने कहा कि उन्होंने पहले भी यह साफ किया है कि कुछ इंटरनेशनल मामलों पर, उन्हें राजनीति के बारे में बात करना पसंद नहीं है और इसके बजाय वे देश के बारे में बात करना पसंद करते हैं।
आज हो जाएं आम चुनाव..........पूर्ण बहुमत से चौथी बार लौटेगी मोदी सरकार
31 Jan, 2026 04:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में आज अगर लोकसभा चुनाव हो जाएं, तब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सीटें बढ़कर 352 होगी। इतना ही नहीं बीजेपी की सीटें भी बढ़कर 287 होगी। इसतरह बीजेपी अपने दम पर बहुमत हासिल करती दिख रही है। एक ताजा सर्वे में ये नतीजे निकलकर आए हैं। वोट प्रतिशत के अुनसार मौजूदा समय में चुनाव होने पर एनडीए को 47 फीसदी का फायदा होता दिख रहा है। इंडिया ब्लॉक को 39 फीसदी, और अन्य को 14 फीसदी वोट मिलते दिख रहे है।
ये सर्वे 8 दिसंबर 2025 से 21 जनवरी 2026 के बीच कराया गया है। हर आयु वर्ग जाति, धर्म, लिंग वाले 36 हजार 265 लोग इस सर्वें में शामिल हुए। सर्वे में पूछा गया कि अगर आज लोकसभा चुनाव हो जाएं तब किस गठबंधन को कितनी सीटें मिलेंगी? सर्वे में सामने आया कि एनडीए को 352 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि इंडिया ब्लॉक को 182 सीटें मिल सकती हैं, जबकि अन्य के खाते में 9 सीटें जा सकती हैं। हालांकि 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में एनडीए को 293 सीटें मिली थीं, जबकि इंडिया ब्लॉक के खाते में 234 सीटें आई थीं। अगस्त 2025 में सर्वे किया गया था, जिसमें एनडीए को 324 सीटें और इंडिया ब्लॉक को 208 सीटें मिलने का अनुमान था।
गठबंधन के हिसाब से वोट शेयर की बात करें तब सर्वे के मुताबिक एनडीए गठबंधन को 47 प्रतिशत, इंडिया ब्लॉक को 39 प्रतिशत और अन्य को 14 प्रतिशत वोट शेयर मिल सकता है। 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में एनडीए को 43 प्रतिशत वोट शेयर मिला था, जबकि इंडिया ब्लॉक को 40 प्रतिशत वोट मिला था। वहीं अगस्त में हुए सर्वे में एनडीए को 47 प्रतिशत और इंडिया ब्लॉक को 41 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान था।
सर्वे में पूछा गया कि अगर आज लोकसभा चुनाव होने पर किस पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी। सर्वे में सामने आया कि बीजेपी को 287, कांग्रेस 80 और अन्य को 176 सीटें मिलने का अनुमान है। 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 240 सीटें, कांग्रेस 99 सीटें मिली थीं। अगस्त में हुए सर्वे में बीजेपी को 260 सीटें और कांग्रेस को 97 सीटें मिलने का अनुमान था। सर्वे के मुताबिक अगर आज चुनाव होते हैं, तब बीजेपी के खाते में 41 प्रतिशत, कांग्रेस के खाते में 20 प्रतिशत और अन्य के खाते में 39 प्रतिशत वोट जा सकते हैं।
वहीं सर्वे में लोगों से पूछा गया कि अगले प्रधानमंत्री के तौर पर सबसे बेहतर चेहरा कौन सा होगा? इस पर 55 फीसदी लोगों ने नरेंद्र मोदी को चुना। जबकि 27 फीसदी ने राहुल गांधी को पीएम पद का दावेदार बताया। इससे पहले अगस्त 2025 में सर्वे में 52 फीसदी लोगों ने नरेंद्र मोदी को, और 25 फीसदी लोगों ने राहुल गांधी को पसंद बताया था। सर्वे में लोगों से पूछा गया कि देश का अब तक का सबसे बेहतर प्रधानमंत्री कौन है। इस सवाल के जबाव में 50 फीसदी लोगों ने पीएम मोदी को अपनी पसंद बताया। जबकि 12 फीसदी लोगों ने इंदिरा गांधी को देश की अब तक की सबसे बेहतर प्रधानमंत्री और अटल बिहारी वाजपेयी को भी 12 फीसदी लोगों ने अब तक का सबसे बेहतर पीएम बताया।
नबीन की नई रणनीति: विस चुनावों के प्रदर्शन से तय होगा पार्टी का भविष्य और सांगठनिक ढांचा
31 Jan, 2026 03:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन द्वारा कार्यभार संभालने के साथ ही संगठन में व्यापक फेरबदल और भविष्य की तैयारियों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, आगामी समय में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनाव न केवल पार्टी के लिए राजनीतिक परीक्षा होंगे, बल्कि कई नेताओं के भविष्य का फैसला भी करेंगे। इन चुनावों में नेताओं के जमीनी प्रदर्शन के आधार पर ही नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम में उन्हें जगह दी जाएगी।
पार्टी ने विशेष रूप से असम के लिए एक सशक्त रणनीतिक टीम तैनात की है। चुनाव प्रभारी बैजयंत जय पांडा के मार्गदर्शन में काम कर रही इस टीम में दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज, प्रवेश वर्मा, विधायक अनिल शर्मा और पवन शर्मा जैसे प्रमुख चेहरों को शामिल किया गया है। इनके साथ राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश और राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर जैसे अनुभवी नेताओं को भी जोड़ा गया है। यह टीम भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और दिल्ली स्थित केंद्रीय नेतृत्व के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में कार्य करेगी। इन नेताओं की जिम्मेदारी केवल चुनावी सभाओं और प्रचार तक सीमित नहीं है। उन्हें सूक्ष्म चुनावी प्रबंधन का जिम्मा सौंपा गया है, जिसमें हर नेता को एक से दो लोकसभा क्षेत्रों के भीतर बूथ स्तर की रणनीति बनाने और जनसांख्यिकीय आंकड़ों के गहन विश्लेषण का कार्य दिया गया है। टिकट वितरण और मतदाताओं के बीच पार्टी की सकारात्मक छवि बनाने में भी इनकी भूमिका निर्णायक होगी। नेताओं के चयन में उनकी वैचारिक पृष्ठभूमि, विशेषकर आरएसएस, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और युवा मोर्चा के साथ उनके पुराने जुड़ाव को प्राथमिकता दी गई है।
45 वर्षीय नितिन नवीन की नियुक्ति को भाजपा में एक महत्वपूर्ण पीढ़ीगत बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। उनकी टीम में ऊर्जावान नए चेहरों और अनुभवी दिग्गजों के मिश्रण की उम्मीद है। चूंकि इस वर्ष कई वरिष्ठ नेता राज्यसभा से सेवानिवृत्त हो रहे हैं और केंद्र सरकार के कार्यकाल का आधा समय भी पूरा होने वाला है, ऐसे में पार्टी संगठन के साथ-साथ कैबिनेट में भी फेरबदल की संभावनाएं प्रबल हैं। जो नेता इन राज्यों में शानदार प्रदर्शन करेंगे, उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारियां मिलना लगभग तय है। नितिन नवीन के नेतृत्व की पहली बड़ी परीक्षा असम और पश्चिम बंगाल के 2026 विधानसभा चुनाव होंगे। असम में भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने यानी हैट्रिक के लक्ष्य के साथ मैदान में है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में पार्टी घुसपैठ और जनसांख्यिकीय परिवर्तन जैसे मुद्दों पर ध्रुवीकरण की रणनीति अपना रही है। नवीन ने राज्य में बूथों की संख्या 28,000 से बढ़ाकर 31,400 करने का लक्ष्य रखा है, ताकि माइक्रो-मैनेजमेंट को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को जिम्मेदारी सौंपकर विपक्षी एकजुटता के जरिए भाजपा के किले में सेंध लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।
पश्चिम बंगाल में चुनौती और भी कठिन है, जहां भाजपा 14 वर्षों के ममता बनर्जी के शासन को चुनौती दे रही है। बंगाल में किसी बड़े स्थानीय मास लीडर के अभाव में पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे और विकास के मॉडल पर निर्भर है। भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था को मुख्य मुद्दा बनाते हुए पार्टी ने राज्य को अलग-अलग जोन में बांटकर क्षेत्रीय वॉर-रूम तैयार किए हैं। नितिन नवीन ने खुद बंगाल का दौरा कर जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का रोडमैप तैयार किया है। इन राज्यों के नतीजे यह तय करेंगे कि भाजपा का नया सांगठनिक ढांचा कितना मजबूत और प्रभावी साबित होता है।
जब अजित पवार बने चाचा की ढाल: कैसे बची शरद पवार की रक्षा मंत्री की कुर्सी, बारामती सीट स्वैपिंग की पूरी कहानी
31 Jan, 2026 12:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । बात 1991 की है। देश में लोकसभा के चुनाव हो रहे थे। इसी बीच पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की लिट्टे उग्रवादियों ने एक आत्मघाती बम विस्फोट में हत्या कर दी। देश का राजनीतिक मिजाज बदल गया और उन चुनावों में कांग्रेस पार्टी की जीत हुई। पीवी नरसिम्हा राव (P.V. Narasimha Rao) को प्रधानमंत्री बनाया गया। उस समय प्रधानमंत्री राव ने क्षेत्रीय छत्रपों का संतुलन बिठाते हुए कई दिग्गजों को अपने मंत्रिमंडल में जगह दी थी। उन्हीं में एक थे शरद पवार (Sharad Pawar), जिन्हें रक्षा मंत्री बनाया गया था लेकिन जब उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई थी, तब वह संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे।
शरद पवार उस समय महाराष्ट्र विधानसभा में बारामती से विधायक थे, जबकि उनके भतीजे अजित पवार पहली बार बारामती संसदीय सीट से चुनकर सांसद बने थे। संविधान के नियमानुसार छह महीने के अंदर शरद पवार को संसद के किसी भी सदन का सदस्य बनना था। अन्यथा रक्षा मंत्री की कुर्सी खतरे में थी। ऐसे में भतीजे अजित पवार ने अपनी सांसदी छोड़ दी। उधर, शरद पवार ने भी अपनी विधायकी छोड़ दी। इसके बाद बारामती में सांसद और विधायक दोनों के लिए नवंबर 1991 में उप चुनाव हुए। शरद पवार भतीजे की छोड़ी सीट पर सांसद बन गए और अजित पवार चाचा द्वारा छोड़ी गई MLA की सीट पर जीतकर पहली बार महाराष्ट्र विधानसभा पहुंचे।
अजित मुंबई तो शरद पवार दिल्ली में जमे
महाराष्ट्र की राजनीति में 1991 का बारामती सीट स्वैप आज भी एक अनोखे और निर्णायक अध्याय के रूप में याद किया जाता है। यह वही दौर था, जब एक युवा नेता अजित पवार ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत में ही ऐसा फैसला लिया, जिसने उनके चाचा शरद पवार को देश का रक्षा मंत्री बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। दिल्ली की राजनीति में बने रहने के लिए शरद पवार का सांसद बनना अनिवार्य था। इस तरह, अजित पवार विधानसभा में पहुंचे और शरद पवार ने दिल्ली में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी।
अजित पवार: राजनीति में शुरुआती त्याग
बारामती दशकों से पवार परिवार का गढ़ रहा है। ऐसे में सीट बदलने का फैसला जोखिम भरा नहीं था। बड़ी बात यह है कि 1991 में अजित पवार महज 32 साल के थे। उन्होंने उसी साल लोकसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार को भारी मतों से हराया था। लेकिन चाचा के राजनीतिक भविष्य और पारिवारिक विश्वास के चलते उन्होंने बिना हिचक अपनी सीट छोड़ दी। सीट स्वैपिंग के बाद विधायक बने अजित पवार को तब महाराष्ट्र सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया था और यहीं से उनका लंबा और प्रभावशाली राजनीतिक सफर शुरू हुआ।
दंगा, दिल्ली और वापसी
1992-93 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद मुंबई में भयानक दंगे हुए। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक हालात बिगड़ने पर शरद पवार को दिल्ली छोड़कर फिर से महाराष्ट्र की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाली, जबकि अजित पवार बारामती से लगातार मजबूत होते चले गए।
बारामती और अजित पवार: अटूट रिश्ता
1991 के बाद से बारामती विधानसभा सीट से अजित पवार कभी भी चुनाव नहीं हारे। वह यहीं से विधायक बनकर वित्त मंत्री, उपमुख्यमंत्री जैसे बड़े पदों पर रहे। उनकी पूरी राजनीति बारामती से जुड़ी रही और संयोग ऐसा कि उनकी मौत भी बारामती में ही हुई। उस अदला-बदली के लगभग 35 साल बाद, अजित पवार की बुधवार को बारामती में एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई। लेकिन वह अब 1991 की तरह राजनीतिक नौसिखिया नहीं थे। अजीत पवार अपने आप में महाराष्ट्र के शक्तिशाली नेताओं में से एक थे।
अजित पवार की मृत्यु ने उनके राजनीतिक जीवन के 1991 के दिलचस्प अध्याय पर ध्यान खींचा है। सीटों की अदला-बदली ने महाराष्ट्र की राजनीति और अजित पवार के करियर को आकार दिया। अजित पवार के जुलाई 2023 में चाचा शरद से अलग होने और NCP के टूटने की ताज़ा यादों को देखते हुए, आज कई लोगों को 1991 की बारामती सीट की अदला-बदली दिलचस्प लग सकती है।
अजित की चाह पर बोले शरद पवार—फैसला तय था, 12 फरवरी को होनी थी घोषणा
31 Jan, 2026 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बारामती. महाराष्ट्र (Maharashtra) के पूर्व डिप्टी सीएम (Former Deputy CM) अजित पवार (Ajit Pawar) की पत्नी सुनेत्रा पवार के उप मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण की खबरों के बीच एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। बारामती में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शरद पवार ने कहा कि उन्हें शपथ ग्रहण के बारे में मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला। बता दें कि, दोनों नेताओं (शरद पवार और अजित पवार) 17 जनवरी को गोविंदबाग में एक बैठक की थी।
अजित की इच्छा पूरी होनी चाहिए- शरद पवार
वरिष्ठ नेता ने आगे दावा किया कि दोनों गुटों को एकजुट करना उनके दिवंगत भतीजे अजित पवार की इच्छा थी, और वे इस बारे में आशावादी थे। उन्होंने कहा, ‘अब हमें लगता है कि उनकी इच्छा पूरी होनी चाहिए। अजित पवार, शशिकांत शिंदे और जयंत पाटिल ने दोनों गुटों के विलय के बारे में बातचीत शुरू की थी। विलय की तारीख भी तय हो गई थी – यह 12 तारीख (फरवरी) को तय था। दुर्भाग्य से, अजित उससे पहले ही हमें छोड़कर चले गए।’
‘मुझे शपथ ग्रहण के बारे में कोई जानकारी नहीं’
वहीं जब उनसे पूछा गया कि क्या पवार परिवार से कोई इस समारोह में शामिल होगा, तो उन्होंने कहा, ‘हमें शपथ ग्रहण के बारे में नहीं पता। हमें इसके बारे में खबरों से पता चला। मुझे शपथ ग्रहण के बारे में कोई जानकारी नहीं है।’ उन्होंने कहा कि यह फैसला एनसीपी ने लिया होगा। उन्होंने आगे कहा, ‘प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे कुछ लोगों ने पहल की। इन लोगों ने शायद कुछ तय किया होगा।’
‘दोनों दलों के साथ मिलकर काम करने पर होना था फैसला’
वहीं प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे द्वारा ‘जल्दबाजी में लिए गए फैसलों’ के बारे में पूछे जाने पर, एनसीपी-एससीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा, ‘मुझे जो पता है वह यह है कि हमारी पार्टी (एनसीपी-एससीपी) और अजित पवार की पार्टी (एनसीपी) के साथ मिलकर काम करने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी और इस पर जल्द ही फैसला लिया जाना था। हालांकि, यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना (अजित पवार का निधन) घटित हो गई।’
क्या एनडीए का हिस्सा बनेंगे शरद पवार?
वहीं शरद पवार से जब मीडियाकर्मियों ने पूछा कि क्या एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की स्थिति में वह एनडीए का हिस्सा बनने पर विचार करेंगे, तो शरद पवार ने साफ कहा कि, ‘यह सब आपकी तरफ (मीडिया) चल रहा है, यहां ऐसा कुछ भी नहीं है।’
भतीजे अजित पवार को लेकर हुए भावुक
इसी दौरान शरद पवार ने दिवंगत नेता अजित पवार को याद करते हुए भावुक हो गए, उन्होंने कहा कि अजित पवार एक सक्षम और समर्पित नेता थे, जो लोगों की समस्याओं को गहराई से समझते थे और हमेशा न्याय दिलाने के लिए काम करते थे। शरद पवार के मुताबिक, बारामती की जनता ने हमेशा अजित पवार का साथ दिया और वे अपनी जिम्मेदारियों में कभी पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा कि उनके निधन से सभी को गहरा सदमा लगा है, लेकिन अब जो स्थिति बनी है, उसमें मजबूती से आगे बढ़ना जरूरी है।
नई पीढ़ी उनकी विरासत को आगे बढ़ाएगी- शरद पवार
शरद पवार ने आगे कहा कि, ‘हमें लोगों के दुख-दर्द को कम करने के लिए काम करना होगा और उन्हीं मूल्यों को आगे बढ़ाना होगा, जिनके साथ उन्होंने सेवा की।’ उन्होंने भरोसा जताया कि उनके परिवार की नई पीढ़ी जरूर उनकी विरासत और कार्यशैली को आगे बढ़ाएगी।
BJP में संगठनात्मक सर्जरी की तैयारी, प्रदर्शन के आधार पर नवीन की नई टीम का गठन
31 Jan, 2026 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भाजपा (BJP) के नए अध्यक्ष नितिन नवीन (New President Nitin Naveen) के कार्यभार संभालने के बाद पार्टी में बड़े बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों (Assemblies Elections) के लिए देश भर से चुने गए भाजपा नेताओं (BJP leaders) के प्रदर्शन के आधार पर ही उन्हें नवीन की नई राष्ट्रीय टीम (New National Team) में जगह मिलने की संभावना है।
असम के लिए विशेष टीम की तैनाती
भाजपा ने असम के लिए लगभग एक दर्जन राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की सूची तैयार की गई है। इस पूरी टीम का मार्गदर्शन राज्य के चुनाव प्रभारी बैजयंत ‘जय’ पांडा कर रहे हैं। इस टीम में दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज, प्रवेश वर्मा, विधायक अनिल शर्मा और पवन शर्मा जैसे नाम शामिल हैं। राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश और राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर जैसे ‘परखे हुए’ नेताओं को भी इस मिशन में जोड़ा गया है। यह टीम राज्य में भाजपा, आरएसएस और नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करेगी।
नेताओं की जिम्मेदारियां और कार्य
एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन नेताओं को केवल प्रचार तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर के ठोस काम सौंपे गए हैं। जैसे हर नेता को एक से दो लोकसभा सीटों के भीतर चुनावी प्रबंधन का जिम्मा दिया गया है। जनसांख्यिकीय आंकड़ों का विश्लेषण और बूथ स्तर की रणनीति बनाना का काम भी दिया गया है। इसके अलावा, चुनाव करीब आने पर ये नेता टिकटों के बंटवारे से जुड़े फैसलों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वे मतदाताओं के बीच पार्टी की छवि को मजबूत करेंगे।
चयन का आधार क्या है?
इन नेताओं के चयन में उनकी आरएसएस पृष्ठभूमि, ABVP और युवा मोर्चा के साथ उनके पुराने जुड़ाव को प्राथमिकता दी गई है। हालांकि भाजपा पहले भी अन्य राज्यों के नेताओं को चुनावी ड्यूटी पर लगाती रही है, लेकिन इस बार का उद्देश्य नए अध्यक्ष के तहत ‘संगठनात्मक निरंतरता’ बनाए रखना है। चुनाव परिणामों के बाद किए जाने वाले विश्लेषण में जिन नेताओं का प्रदर्शन शानदार रहेगा, उन्हें नितिन नवीन की टीम में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
पीढ़ीगत बदलाव के संकेत
45 वर्षीय नितिन नवीन की नियुक्ति को भाजपा में एक पीढ़ीगत बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर चर्चा है कि नबीन की टीम में नए चेहरों और अनुभवी दिग्गजों का मिश्रण होगा। चूंकि इस साल कई बड़े नेता राज्यसभा से रिटायर हो रहे हैं और एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल का आधा समय पूरा होने वाला है, ऐसे में कैबिनेट फेरबदल की भी संभावनाएं हैं। वर्तमान में असम के लिए जो टीम बनाई गई है, वैसी ही टीमें जल्द ही पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के लिए भी घोषित की जाएंगी। इन नेताओं के लिए यह चुनाव केवल जीत-हार का सवाल नहीं है, बल्कि भाजपा के नए सांगठनिक ढांचे में अपने भविष्य को सुरक्षित करने का एक मौका है।
नितिन नवीन की पहली परीक्षा
असम और पश्चिम बंगाल के आगामी 2026 विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। नए अध्यक्ष नितिन नबीन के लिए ये चुनाव उनकी नेतृत्व क्षमता की पहली बड़ी परीक्षा होंगे। असम में भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में आने (हैट्रिक) के लक्ष्य के साथ मैदान में है। भाजपा का पूरा जोर ‘घुसपैठ’ और ‘जनसांख्यिकीय परिवर्तन’ जैसे मुद्दों पर है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लगातार ‘मियां’ वोटर्स और बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे को उठाकर हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहे हैं।
नितिन नवीन ने असम में बूथों की संख्या को 28,000 से बढ़ाकर 31,400 करने का लक्ष्य रखा है, ताकि माइक्रो-मैनेजमेंट को मजबूत किया जा सके। कांग्रेस ने इस बार प्रियंका गांधी को असम के लिए बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। कांग्रेस विपक्षी एकजुटता के जरिए भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। भाजपा अपने पुराने सहयोगियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि गठबंधन लगभग 103 सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ने की स्थिति में है।
हालांकि असम के मुकाबले बंगाल में भाजपा के लिए चुनौती थोड़ी कठिन है क्योंकि यहां वह 14 साल के ममता बनर्जी के शासन को चुनौती दे रही है। भाजपा के पास बंगाल में ममता बनर्जी के कद का कोई एक ‘मास लीडर’ नहीं है। इसलिए पार्टी एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे और ‘विकास’ के मॉडल पर निर्भर है। भाजपा ने बंगाल को अलग-अलग जोन में बांटकर ‘क्षेत्रीय वॉर-रूम’ बनाए हैं। हर जोन के लिए राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को तैनात किया गया है। पार्टी भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण और कानून-व्यवस्था को मुख्य चुनावी मुद्दा बना रही है। साथ ही, केंद्रीय योजनाओं के लाभ को सीधे जनता तक पहुँचाने का वादा किया जा रहा है। नितिन नवीन ने पद संभालते ही बंगाल का दौरा शुरू कर दिया है। उन्होंने दुर्गापुर में कोर टीम के साथ बैठक कर जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का ‘रोडमैप’ तैयार किया है।
इस साल 5 राज्यों में होंगे विधानसभा चुनाव….. असम से बंगाल तक विपक्षी गठबंधन तक अकेले घेरेगी BJP
31 Jan, 2026 09:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। इस साल होने वाले पांच विधानसभाओं के चुनावों (Five Legislative Assemblies Elections) के लिए भाजपा (BJP) के अधिकांश हमलों के निशाने पर कांग्रेस ही रहेगी, भले ही उसका मुकाबला विपक्ष के किसी भी दल के साथ क्यू न हो। दरअसल, भाजपा का मानना है कि देशभर में उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस (Congress) है और वही विपक्ष के गठबंधन (Opposition Alliance) की धुरी भी। इन चुनावों में असम में भाजपा का सीधा मुकाबला कांग्रेस से है, जबकि केरल में उसे कांग्रेस और वामपंथी दलों के गठबंधनों से जूझना है। तमिलनाडु में कांग्रेस सत्तारूढ़ गठबंधन का अहम हिस्सा है। केवल पश्चिम बंगाल ही ऐसा है, जहां भाजपा व तृणमूल कांग्रेस में सीधा संघर्ष है।
भाजपा के चुनाव रणनीतिकारों का मानना है कि विपक्ष के केंद्र में कांग्रेस है इसलिए भाजपा का निशाना भी कांग्रेस ही रहेगी। वैसे भी बीते 75 वर्षों में अधिकांश समय कांग्रेस के सत्ता में रहने से भाजपा को उस पर हमला करने के लिए काफी मुद्दे रहते हैं। पार्टी के एक प्रमुख नेता ने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को देखें तो भाजपा कांग्रेस को हराकर ही केंद्र व अधिकांश राज्यों में सत्ता में है और भाजपा का बड़ा समर्थक वर्ग भी वही है, जो कभी कांग्रेस का हुआ करता था। ऐसे में बड़े स्तर पर उसके लिए चुनौती भी कांग्रेस ही बन सकती है।
सूत्रों के मुताबिक रणनीति के अनुसार भाजपा के केंद्रीय चुनाव प्रचारक सभी जगहों पर कांग्रेस को केंद्र में रखकर हमलावर रहेंगे। राज्य के नेता स्थानीय समीकरणों के अनुसार राज्य के विरोधी खेमे पर निशाना साध रहे हैं। गठबंधन की राजनीति में भाजपा अपने सहयोगी दलों की रणनीति का भी अनुसरण कर अपना ऐजेंडा भी उसी तरह से आगे बढ़ाएगी। चूंकि भाजपा राष्ट्रीय दल है इसलिए वह कई मुद्दों पर क्षेत्रीय दलों के स्तर पर नहीं जा सकती है।
कांग्रेस ने भाजपा पर लगाया फॉर्म 7 के दुरुपयोग का आरोप…ECI को पत्र लिखकर की जांच की मांग
31 Jan, 2026 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress- AICC) ने भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission of India- ECI) को पत्र लिखकर भाजपा (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का दावा है कि वर्तमान में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (Special Intensive Revision of Electoral Rolls- SIR) के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से अवैध रूप से हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि इससे संबंधित सभी संदिग्ध मामलों की प्रक्रिया रोकी जाए तथा स्वतंत्र जांच कराई जाए।
मुख्य आरोप: फॉर्म-7 का दुरुपयोग
पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर दावा किया कि फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि फॉर्म-7 से संबंधित संपूर्ण आंकड़े सार्वजनिक किए जाने चाहिए। वेणुगोपाल ने पत्र में कहा- हम इस आयोग का ध्यान एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक विषय की ओर आकृष्ट करना चाहते हैं, जो विशेष गहन पुनरीक्षण के अंतर्गत दावा एवं आपत्तियां दर्ज कराने के चरण में योग्य मतदाताओं के नामों को गलत तरीके से हटाए जाने से संबंधित है।
फॉर्म-7 क्या है और कब और क्यों भरते हैं?
– फॉर्म-7 किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसका नाम सूची से हटवाने या किसी नाम पर वैध आपत्ति दर्ज करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
– कब और क्यों भरते हैं- यदि मतदाता सूची में किसी का नाम गलत तरीके से शामिल हो गया हो- जैसे मृत व्यक्ति का नाम अभी भी सूची में है, या कोई व्यक्ति उस क्षेत्र से स्थायी रूप से जा चुका है, या डुप्लिकेट एंट्री है)।
– अपना नाम हटवाने के लिए- यदि कोई व्यक्ति स्वयं अपना नाम मतदाता सूची से हटवाना चाहता है (जैसे स्थान परिवर्तन या अन्य कारण से)।
– कांग्रेस का कहना है कि इस फॉर्म का इस्तेमाल जीवित और पात्र मतदाताओं को सूची से बाहर करने के लिए एक हथियार के रूप में किया जा रहा है ताकि चुनावी लाभ लिया जा सके।
हाशिए पर रहने वाले समुदायों को निशाना बनाने का दावा
वेणुगोपाल ने अपने पत्र में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जो बात अत्यंत चिंताजनक है और जिस पर आयोग का तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है, वह यह है कि मीडिया की खबरों एवं पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा ऐसे व्यक्तियों की पहचान की गई है जो भाजपा से जुड़े हैं और निर्वाचन आयोग के ही दस्तावेज़ ‘फॉर्म-7’ का दुरुपयोग कर योग्य मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची से हटवा रहे हैं।
कांग्रेस नेता का कहना है कि यदि इन कार्रवाइयों को रोका नहीं गया और आयोग द्वारा संज्ञान नहीं लिया गया, तो इससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अनुचित चुनावी लाभ प्राप्त करने का दुस्साहस मिलेगा तथा लाखों मतदाता विशेषकर पिछड़े, हाशिए पर रहने वाले समुदायों से संबंधित लोग अपने मताधिकार से वंचित हो जाएंगे।
उनका कहना है कि दावों एवं आपत्तियों की अवधि में प्रमाण प्रस्तुत करने का दायित्व फॉर्म-7 भरने वाले व्यक्ति पर ही होता है तथा झूठी जानकारी देने पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के अंतर्गत दंड का प्रावधान है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर जो कुछ हो रहा है, वह अत्यंत चौंकाने वाला है और इस पर तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है।
वेणुगोपाल ने दावा किया- फॉर्म-7 के ‘प्री-प्रिंटेड’ आवेदन बड़ी संख्या में किसी केंद्रीकृत प्रणाली से तैयार किए जा रहे हैं। इनका उपयोग अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यकों एवं 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। इन फॉर्म को संगठित ढंग से विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में बीएलओ को सौंपा जा रहा है।
उनके अनुसार, इन फॉर्म में आपत्तिकर्ता की पहचान से जुड़ी आवश्यक जानकारियां नहीं होती। कांग्रेस नेता के अनुसार, कई मामलों में जिन लोगों के नाम से फॉर्म-7 भरे गए, उन्होंने सार्वजनिक रूप से इनकार किया कि उन्होंने ऐसा कोई फॉर्म भरा था। उनका कहना है कि राजस्थान और असम में यह दुरुपयोग स्पष्ट रूप से दिख रहा है।
कांग्रेस नेता ने कहा- बिना वैध पहचान व प्रमाण वाले सभी संदिग्ध फॉर्म-7 की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए। बीएलओ एवं ईआरओ को निर्देश दिया जाए कि व्यक्तिगत सत्यापन के बिना कोई भी नाम न हटाया जाए। ऐसे सभी व्यक्तियों/संगठनों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए जो फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर रहे हैं। इस पूरे मामले की तत्काल और स्वतंत्र जांच कराई जाए। उन्होंने आयोग से यह आग्रह भी किया- 12 राज्यों में फॉर्म-7 से संबंधित संपूर्ण आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं।’
कांग्रेस का कहना है कि यदि चुनाव आयोग ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो लाखों मतदाता मताधिकार से वंचित हो जाएंगे, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित होगी।
अजित पवार परिवार की सियासी ताकत बढ़ी, पत्नी सुनेत्रा बनेंगी उपमुख्यमंत्री
30 Jan, 2026 09:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र के बारामती में 28 जनवरी को विमान क्रैश हुआ था. इस दुर्घटना में डिप्टी CM अजित पवार समेत 5 लोगों की मौत हो गई थी. महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार के निधन के बाद खाली हुए इस पद और NCP अजित पवार गुट के मुखिया को लेकर हलचल जारी है. इस बीच अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार उपमुख्यमंत्री का पद स्वीकार कर लिया है. जानकारी के मुताबिक वह 31 जनवरी की शाम 5 बजे शपथ ले सकती हैं. शनिवार सुबह 11 बजे NCP विधायक दल की बैठक होगी, जिसके बाद इसकी आधिकारीक घोषणा होगी।
NCP नेताओं ने दिया था डिप्टी CM का प्रस्ताव
30 जनवरी को NCP नेताओं की बैठक में सुनेत्रा पवार को डिप्टी CM बनाए जाने का प्रस्ताव दिया गया था. जानकारी के मुताबिक सुनेत्रा पवार ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है. बता दें कि अजित पवार के पास महाराष्ट्र सरकार में तीन बड़े मंत्रालय थे. इनमें वित्त, आबकारी और खेल मंत्रालय शामिल हैं।
कौन हैं सुनेत्रा पवार?
सुनेत्रा पवार का जन्म 18 अक्टूबर 1963 को हुआ था।
1985 में अजित पवार और सुनेत्रा की शादी हुई।
साल 2024 में सुनेत्रा पवार ने बारामती सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन इस सीट पर उनकी ननद सुप्रिया सुले विपक्ष की तरफ से थी और सुनेत्रा को चुनाव में हराया।
इसके बाद सुनेत्रा पवार को NCP ने राज्यसभा भेज दिया।
तब से सुनेत्रा पवार बतौर राज्यसभा सांसद हैं।
साथ ही केंद्र की राजनीति में सक्रिय हैं।
प्लेन क्रैश में अजित पवार का निधन
बता दें कि 28 जनवरी की सुबह महाराष्ट्र के बारामती एयरपोर्ट में लैंडिंग के दौरान अजित पवार का प्लेन क्रैश हो गया. इस दुर्घटना में अजित पवार समेत 5 विमान में सवार 5 लोगों की मौत हो गई थी. 29 जनवरी को अजित पवार के अंतिम संस्कार के बाद से ही उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाने की मांग उठने लगी थी. इसे लेकर NCP नेता प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, धनंजय मुंडे और सुनील तटकरे ने सुनेत्रा पवार से मुलाकात भी की थी. वहीं, 30 जनवरी को NCP नेताओं ने सुनेत्रा के सामने उपमुख्यमंत्री पद का प्रस्ताव रखा था.
‘संघ-हिंदू महासभा पर नजर रख रहे थे नेहरू और पटेल’, महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर बोले जयराम रमेश
30 Jan, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। शुक्रवार को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के मौके पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और मीडिया प्रभारी जयराम रमेश ने वर्ष 1948 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखे गए जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल के दो पत्र सार्वजनिक किए। इन दोनों ही पत्रों में दोनों दिग्गज नेताओं ने हिंदू महासभा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गतिविधियों की कड़ी आलोचना की गई थी।
दोनों नेताओं के पत्र को सार्वजनिक करते हुए जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘महात्मा गांधी की हत्या से दो दिन पहले जवाहरलाल नेहरू ने मुखर्जी को पत्र लिखा था, जबकि कुछ महीने बाद 18 जुलाई 1948 को सरदार पटेल ने भी उन्हें पत्र भेजा था। दोनों पत्रों में स्वयं को राष्ट्रवाद का संरक्षक बताने वालों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाया गया था। इस दौरान जयराम रमेश ने 30 जनवरी 1948 की रात महात्मा गांधी की हत्या के बाद ऑल इंडिया रेडियो पर दिए गए जवाहरलाल नेहरू के संबोधन का लिंक भी शेयर किया।
जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में यह लिखा कि नेहरू ने मुखर्जी को लिखे पत्र में आरोप लगाया था कि हिंदू महासभा ने पुणे, अहमदनगर और दिल्ली में प्रतिबंध आदेशों की अवहेलना करते हुए बैठकें की थीं। इन बैठकों के दौरान कुछ भाषणों में महात्मा गांधी को ‘देश के लिए बाधा’ बताया गया और उनके शीघ्र निधन की बात कही गई थी। इसके साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में आरएसएस की गतिविधियों को और भी अधिक आपत्तिजनक बताया और कहा कि सरकार के पास संगठन से जुड़ी गंभीर जानकारी उपलब्ध है। इसके अलावा रमेश ने सरदार पटेल के पत्र का एक स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसमें उन्होंने आरएसएस और हिंदू महासभा की गतिविधियों की आलोचना की थी।
‘जो लोग मरे वे ममता के वोटबैंक नहीं थे’, आनंदपुर अग्निकांड में 21 मानव अवशेष मिलने पर सुवेंदु अधिकारी का बयान
30 Jan, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आनंदपुर। पश्चिम बंगाल में कोलकाता के बाहरी इलाके आनंदपुर में आगजनी की घटना को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई। इसको लेकर जहां नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने प्रदर्शन किया तो वहीं गवर्नर सीवी बोस ने बयान जारी किया। बता दें कि पुलिस ने शुक्रवार को मोमो मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और 2 गोदामों में लगी आग के मामले में 2 और लोगों को अरेस्ट किया है। इसमें कंपनी के प्रबंधक मनोरंजन शीट और उप प्रबंधक राजा चक्रवर्ती का नाम शामिल है।
BJP नेता सुवेंदु अधिकारी ने आनंदपुर में आज (शुक्रवार को) विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा, ‘BJP जनता की आवाज उठा रही है। अभी तक इस घटना में मरने वाले या लापता लोग हिंदू हैं, वे ममता बनर्जी के वोट बैंक नहीं हैं।’
अधिकारियों ने बताया कि अब तक आनंदपुर में घटनास्थल से आंशिक तौर पर जले और कंकाल के अवशेषों समेत 21 मानव अंग बरामद किए गए हैं। जो एक या अलग-अलग व्यक्तियों के हो सकते हैं। हम अभी मृतकों की सही संख्या की पुष्टि नहीं कर पा रहे हैं। डीएनए टेस्ट के बाद ही इसकी पुष्टि हो पाएगी।
पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपियों को नरेंद्रपुर पुलिस ने पकड़ा है। इन दोनों को आज (शनिवार को) बरुइपुर की अदालत में पेश किया जाएगा। इससे पहले बीते मंगलवार को परिसर और डेकोरेटर फर्म के मालिक गंगाधर दास को अरेस्ट किया गया था। उन्हें बुधवार को बरुइपुर कोर्ट में पेश किया गया, जहा से उन्हें पुलिस की हिरासत में भेज दिया गया। उन्हें 4 फरवरी को दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा।
‘राहुल ने असम का किया अपमान’, अमित शाह ने कांग्रेस पर साधा निशाना; चाय को लेकर कही बड़ी बात
30 Jan, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डिब्रूगढ़: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार (30 जनवरी) को कांग्रेस को एक बार फिर आड़े हाथों लिया. उन्होंने असम के डिब्रूगढ़ में कहा कि राहुल गांधी की नॉर्थ-ईस्ट के साथ भला क्या दुश्मन है, उन्होंने असम का गमछा नहीं पहना था. अमित शाह ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित हुए ‘एट होम’ कार्यक्रम का जिक्र किया. गृहमंत्री ने राहुल को असम विरोधी करार दे दिया. वे असम की नई विधानसभा भवन की आधारशिला के कार्यक्रम में पहुंचे थे.
अमित शाह ने कहा, ‘इसी भूमि से पूरी दुनिया में चाय का जायका पहुंचता है, जिसने भारत को एक वैश्विक पहचान दी है. आज महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है. बापू ने आंदोलन कर हमें स्वराज्य दिलाया था. मैं उनको प्रणाम करता हूं. हमने पहले की कांग्रेस की भी सरकार देखी है, जिसमें सिर्फ घोषमाएं घोषणा बनकर रह जाती थी, आज डिब्रूगढ़ को दूसरी राजधानी बनने पर बधाई.’
केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, ‘राहुल गांधी ने असम को गोलियां, बम धमाके और युवाओं की मौत दिया. वहीं यह हमारे प्रधानमंत्री ने जो दिया वह सबके सामने हैं. आज भूपेन दा का संगीत पूरे विश्व में पहुंच रहा है. भूपेन हजारिका को भारत रत्न देने का काम भाजपा की सरकार ने किया. दुनिया में असम की छवि बिगाड़ने का काम कांग्रेस ने किया था.’
उन्होंने कहा, ‘आज पूरे विश्व में असम और नॉर्थ-ईस्ट का गमछा सम्मान का प्रतीक है. राष्ट्रपति भवन में ‘एट होम’ कार्यक्रम में सभी ने गमछा पहना, एक ही व्यक्ति है जिसने असम का गमछा नहीं डाला, उसका नाम था राहुल गांधी. भला आपकी क्या दुश्मनी है, इतना अन्याय क्यों करते हो नॉर्थ-ईस्ट के साथ.’
अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने असम में घुसपैठ को सत्ता हथियाने का हथियार बनाया था. उन्होंने कहा, ‘हमारी सरकार ने यह काम बंद करा दिया है. हिमंता बिस्वा सरमा जी के नेतृत्व में तीसरी बार भाजपा सरकार बना दो एक-एक घुसपैठियों को चुन-चुनकर असम के बाहर निकाल देंगे.’
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