राजनीति
12 साल का बकाया महंगाई भत्ता मिलेगा, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देशित किया
5 Feb, 2026 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज गुरुवार को पश्चिम बंगाल के करीब 20 लाख से ज्यादा राज्य सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि 2008 से 2019 तक की अवधि का DA बकाया भुगतान किया जाना चाहिए. इसके साथ ही कहा कि, अपने पहले के अंतरिम आदेश के अनुसार, बकाया राशि का कम से कम 25% 6 मार्च तक जारी किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय करोल और पीके मिश्रा की बेंच ने कहा कि ROPA के तहत परिलब्धियों की गणना के लिए DA जरूरी है. बंगाल सरकार ने DA के खिलाफ वित्तीय क्षमता का हवाला देते हुए याचिका दायर की थी, उस दलील को कोर्ट ने खारिज कर दिया।
SC के आदेश पर कमेटी का गठन
सुप्रीम कोर्ट ने DA भुगतान प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए शीर्ष अदालत की पूर्व जज इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता मे कमेटी का गठन किया है. इस कमेटी में जस्टिस इंदु मलहोत्रा के साथ ही 2 जस्टिस और CAG के अधिकारी शामिल होंगे. कमेटी के सभी सदस्य मिलकर तय करेंगे कि किस तरह से बकाया DA का भुगतान किया जाएगा. इसकी रिपोर्ट 16 मई तक तैयार कर सुप्रीम कोर्ट को देनी होगी. रिपोर्ट के बाद ही अगली सुनवाई की जाएगी।
12 साल का रुका डीए मिलेगा
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ‘मनमाना’ और ‘सनकी’ बताया है. जबकि कोर्ट ने माना कि नियमों में बदलाव से कर्मचारियों के अंदर वैद्य अपेक्षा पैदा हुई थी और राज्य सरकार ने बिना किसी ठोस सिद्धांतों के इसका उल्लंघन किया है. हालांकि कोर्ट ने भी यह माना है कि साल में 2 बार डीए नहीं दिया जा सकता है. वहीं महंगाई भत्ते को मौलिक अधिकार मानने वाले सवाल पर कोर्ट ने बाद के लिए छोड़ दिया है. फिलहाल, आज का दिन राज्य कर्मचारियों के लिए बेहद शानदार रहा है. क्योंकि 12 साल का रुका हुआ डीए अब 6 मार्च से पहले 25 प्रतिशत मिल जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष ने किया स्वागत
पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “यह बहुत लंबे समय से लंबित मुद्दा था, जिस पर आज निर्णय आ गया है. हम इसका स्वागत करते हैं. DA सही मांग है, इसके लिए हमने कर्मचारियों का समर्थन किया. 6 मार्च तक ममता बनर्जी की सरकार को 10,400 रुपए देने पड़ेंगे. DA की मांग सही है, यह आज सुप्रीम कोर्ट के आदेश से स्थापित हो गया है.अप्रैल के बाद यहां घुसपैठियों का सरंक्षण करने वाली सरकार नहीं रहेगी।
CM मोहन यादव ने बाबा रामदेव के साथ योग कर दिया स्वस्थ जीवन का संदेश
5 Feb, 2026 10:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरिद्वार। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव हरिद्वार में पतंजलि योगपीठ के कन्या गुरुकुल में हवन में शामिल हुए. इसमें बाबा रामदेव भी मौजूद थे. इस दौरान मुख्यमंत्री ने बाबा रामदेव के साथ योग किया. दोनों की एक साथ योग करने की तस्वीर भी सामने आई है।
स्वागत के लिए पतंजलि परिवार का हृदय से आभार
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव बुधवार को हरिद्वार पहुंचे. यहां वे पतंजलि योगपीठ के कन्या गुरुकुल पहुंचे. इस दौरान उन्होंने बाबा रामदेव समेत पतंजलि योगपीठ से जुड़े अन्य लोगों से मुलाकात की साथ ही वे कन्या गुरुकुल में हवन में भी शामिल हुए. इसको लेकर मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर भी जानकारी दी है. मुख्यमंत्री ने लिखा, ‘पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार में प्रसिद्ध योग गुरु स्वामी रामदेव जी से आत्मीय भेंट हुई. इस अवसर पर स्वागत के लिए पतंजलि परिवार के सभी सदस्यों का हृदय से आभार।
दिल्ली के दौरे पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव
मुख्यमंत्री इस समय उत्तराखंड के दौरे पर हैं. आज सुबह 11:00 बजे हरिद्वार में स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे. फिर कार्यक्रम में शामिल होने के बाद वे देहरादून जाएंगे. देहरादून से दोपहर 3 बजे वे देहरादून से दिल्ली पहुंचेंगे और दिल्ली में स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे. दिल्ली से वे गाजियाबाद जाएंगे और यहां शाम करीब साढ़े 6 बजे गाजियााद के वसुंधरा में एक स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे. रात 10 बजे वे दिल्ली से भोपाल के लिए रवाना होंगे. फिर रात 11 बजे सीएम हाउस पहुंचेंगे।
अजित पवार की अंतिम बातचीत पर सबकी नजर, किसे किया फोन?
4 Feb, 2026 01:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का बारामती में विमान हादसे में निधन हो गया था. अब कथित रूप से उनका एक ऑडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि उन्होंने अंतिम बार विमान के अंदर से ही अपने भतीजे श्रीजीत पवार को फोन किया था. जिसमें उन्होंने महाराष्ट्र जिला परिषद के चुनाव का जिक्र करते हुए बातचीत की थी।
क्या हुई बातचीत?
सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो, जिसमें दावा किया जा रहा है कि अजित पवार और उनके भतीजे श्रीजीत पवार के बीच की बातचीत है. फोन पर अजित पवार कहते हैं, “Hello अरे बाबा दिगंबर दुर्गाडे कई वर्षों से माली समाज के व्यक्ति है, जिन्हें जिला बैंक का चेयरमैन मैंने बनाया है. पूरे जिला बैंक का. ये बैंक तो छोटी सी है आपको कोई जानकारी नहीं होती कुछ नहीं होता.” इस दौरान भतीजे श्रीजीत पवार बोले, “नहीं, मुझे जो जानकारी थी वो मैंने कहा दादा.” तब अजित पवार कहते हैं, “हम भी सभी जाति धर्म को साथ लेकर जाते हैं बेटा. यह ठीक है, लेकिन मैंने सुपे ग्रुप से माली समाज को जिला परिषद की उम्मीदवारी दी है, OBC रिजर्वेशन था. जबकि किसी और ने ऐसा नहीं किया.” इस दौरान भतीजे श्रीजीत ने कहा कि दादा, जो भी फैसला आप लेगें, वही फाइनल होगा. इसके बाद फोन रख दिए. फिलहाल, इस वायरल ऑडियो की पुष्टि नहीं करते हैं।
28 जनवरी को विमान हादसे में गई जान
अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेता थे. वे महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मुखिया थे. अजित पवार का 28 जनवरी को मुंबई से बारामती जाते समय विमान हादसे में निधन हो गया था. अब उनके अंतिम पलों में भतीजे से बात करने का एक ऑडियो वायरल हुआ है. इस दौरान भी वे सभी जातियों और समुदायों को एक साथ जोड़ने की बात कह रहे हैं. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अजित पवार अपने प्रदेश के लोगों को लेकर कितने चिंतित रहते थे. अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाया गया है. सुनेत्रा राज्यसभा सांसद थीं. अब उनके डिप्टी सीएम बनने के बाद राज्यसभा की सीट खाली हो गई है. माना जा रहा है कि बड़े बेटे पार्थ को राज्यसभा भेजा जाएगा. पार्थ पवार एक बार लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
राहुल गांधी के ‘गद्दार दोस्त’ बयान पर पलटवार, बिट्टू बोले— ‘देश का दुश्मन’
4 Feb, 2026 01:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। संसद पहुंचे कांग्रेस नेता राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू आपस में ही भिड़ गए. जहां राहुल गांधी ने रवनीत सिंह बिट्टू को ‘गद्दार दोस्त’ कहा तो वहीं रवनीत ने राहुल पर पलटवार करते हुए कहा कि ‘देश के दुश्मनों’ से कोई लेना-देना नहीं है. यह बातचीत उस दौरान हुई, जब राहुल गांधी समेत कई कांग्रेसी सांसद हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. इसी बीच बगल से रवनीत सिंह बिट्टू निकल रहे थे. राहुल गांधी ने उनसे हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़ाया लेकिन रवनीत ने हाथ नहीं मिलाया. इस दौरान दोनों के बीच जुबानी जंग देखने को मिली. अब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें साफ दिखाई दे रहा है कि प्रदर्शन के दौरान बगल से निकल रहे केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू से हाथ मिलाने के लिए राहुल गांधी आगे बढ़ाते हैं. लेकिन रवनीत ने हाथ नहीं मिलाया. इस दौरान राहुल गांधी ने कांग्रेस सांसदों की तारीफ करते हुए रवनीत बिट्टू को ‘गद्दार दोस्त’ बोल दिया. यह सुनकर रवनीत बिट्टू ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ‘देश के दुश्मनों’ से कोई लेना-देना नहीं है. हालांकि यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी और रवनीत बिट्टू के बीच जुबानी जंग देखने को मिली है. इससे पहले भी कई बार दोनों के बीच कहासुनी हो चुकी है।
कांग्रेसी सांसद क्यों कर रहे प्रदर्शन?
संसद में कार्यवाही के दौरान कुछ सांसदों ने स्पीकर पर पेपर उछाल दिए. इस दौरान स्पीकर ने विपक्ष के 8 सांसदों को सदन से निलंबित कर दिया. निलंबन के विरोध में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्ष के सांसदों ने संसद के बाहर विरोध करना शुरू कर दिया. स्पीकर ने कांग्रेस के सांसद हिबी ईडन, मणिक्कम टैगोर, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, गुरजीत सिंह औजला, किरण कुमार रेड्डी, प्रशांत पाडोले, एस. वेंकटेशन और डीन कुरियाकोस को निलंबित किया है।
कौन हैं रवनीत सिंह बिट्टू?
रवनीत सिंह बिट्टू वर्तमान में केंद्रीय मंत्री हैं. बिट्टू कांग्रेस पार्टी से भी 3 बार सांसद रह चुके हैं, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ज्वाइन कर लिया. हालांकि उन्हें इस चुनाव में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग से करारी हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इसके बावजूद भाजपा ने उन्हें केंद्रीय मंत्री बना दिया. बिट्टू के पास रेल तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री की जिम्मेदारी है।
जम्बो कार्यकारिणी खत्म करने की तैयारी, एमपी कांग्रेस में उथल-पुथल
4 Feb, 2026 10:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस संगठन के राष्ट्रीय स्तर से आए ताज़ा निर्देशों ने मध्य प्रदेश कांग्रेस की सियासत में खलबली मचा दी है. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल द्वारा जिला कार्यकारिणी के गठन को लेकर जारी सख्त गाइडलाइन ने प्रदेश नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. वर्षों से गुटों के संतुलन और राजनीतिक समायोजन के लिए जम्बो जिला कार्यकारिणी बनाने की परंपरा पर अब राष्ट्रीय संगठन ने स्पष्ट रूप से रोक लगा दी है, जिससे पार्टी के भीतर असमंजस और तनाव की स्थिति बन गई है।
सीमित आकार में गठित होगी कार्यकारिणी
केसी वेणुगोपाल ने सभी राज्यों की इकाइयों और जिला अध्यक्षों को पत्र लिखकर साफ कर दिया है कि अब जिलों की कार्यकारिणी सीमित आकार में ही गठित होगी. नई व्यवस्था के तहत बड़े जिलों में अधिकतम 55 और छोटे जिलों में केवल 35 सदस्यों की ही कार्यकारिणी बनाई जाएगी. इससे अधिक पदाधिकारी या सदस्य बनाए जाने पर पूरी कार्यकारिणी पर ही सवाल खड़े हो सकते हैं. संगठन का तर्क है कि छोटी, चुस्त और जवाबदेह कार्यकारिणी से पार्टी की जमीनी मजबूती बढ़ेगी और संगठनात्मक अनुशासन कायम होगा।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में लिया गया फैसला
यह अहम निर्णय एआईसीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में हुई बैठक में लिया गया. बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि सभी राज्यों में 15 दिन के भीतर जिला कार्यकारिणी का गठन नई गाइडलाइन के अनुसार पूरा किया जाए. इस समय-सीमा ने मध्यप्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की चिंता और बढ़ा दी है, क्योंकि प्रदेश में पहले ही कई जिलों की कार्यकारिणियां घोषित या अंतिम चरण में हैं।
बड़े जिलों में बनाई बड़ी टीम
मध्य प्रदेश कांग्रेस में गुटीय संतुलन साधना हमेशा से बड़ी चुनौती रहा है. अलग-अलग खेमों को साधने के लिए बड़ी संख्या में पद बांटने की रणनीति अपनाई जाती रही है. इसी परंपरा के तहत 30 जनवरी को प्रदेश कांग्रेस ने तीन जिलों की जिला कार्यकारिणी जारी की, लेकिन इनमें नई गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया. छिंदवाड़ा जिले में करीब 240 सदस्य बनाए गए, सागर जिले में 150 से ज्यादा पदाधिकारी नियुक्त हुए, जबकि छोटे जिले मऊगंज में भी 40 पदाधिकारी बना दिए गए।
भोपाल में भी केंद्र की गाइडलाइन बेअसर
भोपाल में भी स्थिति अलग नहीं है. भोपाल शहर जिला कांग्रेस की 106 सदस्यीय और भोपाल ग्रामीण की 85 सदस्यीय सूची पहले से तैयार बताई जा रही है. अब राष्ट्रीय स्तर से आए नए निर्देशों के बाद इन सूचियों को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है. पार्टी के भीतर चर्चा है कि क्या पहले से घोषित कार्यकारिणियों को भंग कर नए सिरे से गठन होगा या फिर राष्ट्रीय नेतृत्व किसी तरह का अपवाद देगा. फिलहाल, संगठन के इस सख्त फैसले ने मध्यप्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में नई बेचैनी जरूर पैदा कर दी है।
भाजपा प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने मंत्रि-परिषद के फैसलों को बताया ऐतिहासिक
4 Feb, 2026 08:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने मध्य प्रदेश मंत्रि-परिषद द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताया है. उन्होंने कहा कि मंत्रि-परिषद द्वारा लिए गए निर्णयों से विंध्य और महाकौशल क्षेत्र में सिंचाई के रकबे में बढ़ोतरी होगी, जिससे किसानों को जल आपूर्ति में सुधार होगा और उनका आर्थिक स्तर बेहतर होगा. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापितों को आवंटित आवासीय भूखंडों का पंजीयन निशुल्क करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिससे विस्थापित परिवारों को राहत मिलेगी।
मैहर और कटनी जिले की सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति
भाजपा के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने कहा कि मंत्रि-परिषद ने मैहर और कटनी जिले की दो सिंचाई परियोजनाओं के लिए 620 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति दी है, जिससे इन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधाएं बढ़ेंगी और लगभग 15 से अधिक किसान लाभान्वित होंगे. मंत्रि-परिषद ने सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापितों को आवंटित भूखंडों का पंजीयन निशुल्क कराने का निर्णय लिया है. इस निर्णय से 25,600 परिवारों को लाभ मिलेगा और राज्य सरकार पर 600 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा. उन्होंने कहा कि इन निर्णयों से राज्य के किसानों, विस्थापितों और समाज के कमजोर वर्गों और प्रदेश में खुशहाली आएगी. भारतीय जनता पार्टी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश के सभी वर्गों के लिए समृद्धि और विकास की दिशा में निरंतर काम कर रही है।
6 विभागों की 10 योजनाओं की निरंतरता के लिए 15,009 करोड़ रुपये की स्वीकृति
भाजपा के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने कहा कि मंत्रि-परिषद ने विभिन्न योजनाओं की निरंतरता के लिए 15,009 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति दी है, जिनमें श्रम विभाग की मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल 2.0) योजना, पशुपालन विभाग की डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना और महिला एवं बाल विकास विभाग की किशोर कल्याण निधि योजना शामिल हैं. मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश राज्य समाज कल्याण बोर्ड को भंग कर उसके कर्मचारियों का संविलयन महिला बाल विकास विभाग में करने की स्वीकृति दी है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने इन निर्णयों के माध्यम से प्रदेश के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है।
बैठक में टकराव: चुनाव आयोग के आरोपों के बाद ममता बनर्जी ने छोड़ी मीटिंग
3 Feb, 2026 09:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची (Voter list) के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और चुनाव आयोग के बीच विवाद बढ़ गया है। ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ‘अहंकारी’ और ‘झूठा’ होने का आरोप लगाया, लेकिन चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
चुनाव आयोग का दावा:
बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने झूठे आरोप लगाए, दुर्व्यवहार किया, मेज़ पर हाथ पटका और बीच में बैठक छोड़ दी।
आयोग ने कहा कि कानून का राज सर्वोपरि है और कोई भी कानून को अपने हाथ में लेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
टीएमसी नेता और विधायक चुनाव अधिकारियों को निशाना बना रहे हैं, ईआरओ कार्यालयों में तोड़फोड़ की घटनाएं हुई हैं।
व्यक्तिगत खामियां:
मतदाता सूची संशोधन में लगे अधिकारियों को बिना दबाव के काम करने दिया जाना चाहिए।
बीएलओ का मानदेय पूरी तरह नहीं मिला; 18,000 रुपये में से केवल 7,000 रुपये दिए गए।
राज्य में नियुक्त रिटर्निंग ऑफिसरों की रैंक अपेक्षित नहीं थी।
पश्चिम बंगाल सरकार ने तीन मतदाता सूची पर्यवेक्षकों का तबादला आयोग से बिना परामर्श किया।
ममता बनर्जी का बयान:
उन्होंने आयोग पर बंगाल को चुनिंदा रूप से निशाना बनाने का आरोप लगाया।
कहा कि 58 लाख लोगों के नाम हटाए गए और उन्हें अपना बचाव करने का मौका नहीं मिला।
बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को ‘अहंकारी और झूठा’ बताया और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
NCP विलय की गुत्थी फिर उलझी: अजित पवार की भूमिका से बढ़ी राजनीतिक अटकलें
3 Feb, 2026 08:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में एक नई असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जब अजित पवार (Ajit Pawar) के आकस्मिक निधन ने एनसीपी (NCP) के दोनों गुटों के विलय की संभावना को लेकर विरोधाभासी दावे सामने ला दिए हैं। शरद पवार (Sharad Pawar) ने यह संकेत दिया कि अजित पवार के साथ विलय को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत चल रही थी, जबकि देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) और अजित पवार के गुट के अन्य वरिष्ठ नेता इस दावे से पूरी तरह इनकार कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन दावों की वैधता पर सवाल उठाया और कहा कि अजित पवार उनके साथ लगातार संपर्क में थे, लेकिन उन्होंने कभी भी विलय का विषय उठाया नहीं। फडणवीस ने यह भी कहा कि महायुति सरकार में अजित पवार की स्थिति मजबूत थी, और ऐसे में पार्टी छोड़ने या विलय की संभावना बेहद कम थी।
एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल ने भी यह स्पष्ट किया कि 2023 में एनडीए में शामिल होने का फैसला अंतिम था और शरद पवार के साथ विलय पर कोई बातचीत नहीं हुई थी। तटकरे ने यह भी कहा कि अब एनसीपी (अजित पवार गुट) एनडीए का हिस्सा है, और शरद पवार पर निर्भर है कि वे अपनी पार्टी को सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल करना चाहते हैं या नहीं।
शरद पवार का बयान: बंद दरवाजे की बातचीत
इस बीच, शरद पवार ने इन दावों का जवाब देते हुए कहा कि विलय की चर्चा ‘बंद दरवाजे’ में हुई थी, जिसमें केवल अजित पवार, जयंत पाटिल, सुप्रिया सुले और रोहित पवार शामिल थे। उनका कहना था कि देवेंद्र फडणवीस और सुनील तटकरे जैसे लोग इस मामले से बाहर थे, और इसलिए उनके पास इस पर कोई सही जानकारी नहीं थी। इसके साथ ही, अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में नेतृत्व संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रफुल पटेल और पार्टी के अन्य कार्यकर्ता अब सुनेत्रा पवार को उनके दिवंगत पति के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
पार्थ पवार को कम प्रोफाइल रखने की सलाह
सुनेत्रा पवार को पार्टी के विधायक दल का नेता चुना गया है और उन्होंने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ भी ली है। शरद पवार ने इस स्थिति के बारे में भी कोई जानकारी नहीं होने की बात कही, जिससे पार्टी और परिवार के बीच तनाव और गहरा गया। खासतौर पर तब, जब भाजपा ने पार्थ पवार को हालिया विवादों के मद्देनजर लो प्रोफाइल बनाए रखने की सलाह दी। यह चर्चा भी उठी कि एनसीपी पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने पर विचार कर रही है, क्योंकि यह सीट उनकी मां सुनेत्रा के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई है।
वहीं, पार्थ पवार और शरद पवार एक बंद कमरे में अपने पिता के मेमोरियल पर चर्चा कर रहे थे, जबकि उनकी मां सुनेत्रा पवार राज्य की उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले रही थीं। इस समय, भाजपा शरद पवार गुट को महायुति में शामिल करने को लेकर संकोच कर रही है, जिससे दोनों गुटों के विलय की संभावनाओं पर ब्रेक लग रहा है।
एनसीपी का भविष्य और राजनीति की जटिलता
इस स्थिति के चलते एनसीपी का भविष्य अब अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, क्योंकि दोनों गुट सत्ता पर नियंत्रण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भाजपा पर्दे के पीछे राज्य के बदलते राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर रही है, जिससे एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की प्रक्रिया रुक गई है।
प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में बिहार में रेल बजट 09 गुना बढ़ा
3 Feb, 2026 10:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हाजीपुर। रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, भारत सरकार अश्विनी वैष्णव ने 02 फरवरी को बजट 2026-27 हेतु बिहार में रेल परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने हेतु रिकार्ड बजट आवंटन हेतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भारतीय रेलवे हेतु रिकॉर्ड धनराशि रूपये 2,78,000 करोड़ आवंटित की गयी है। दीर्घकालिक विजन के तहत, सरकार ने पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ यात्री परिवहन को बढ़ावा देने के लिए शहरों के बीच सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोरों को ‘ग्रोथ कनेक्टर्स’ के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। इनमें मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी शामिल हैं। इन प्रस्तावित कॉरिडोरों से शहरों के बीच यात्रा के समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और यात्रियों के लिए बिना किसी रुकावट के बहु-माध्यमीय आवाजाही आसान हो जाएगा। उत्तरी और पूर्वी भारत में, वाराणसी से पटना होते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक हाई स्पीड रेल कॉरिडोर से वाराणसी-सिलीगुड़ी की यात्रा लगभग 2 घंटे 55 मिनट में पूरी की जा सकेगी। इसके अतिरिक्त, दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड कॉरिडोर के माध्यम से यात्रा लगभग 3 घंटे 50 मिनट में पूरी होगी। यह कनेक्टिविटी पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली को जोड़ते हुए एक नया आर्थिक कॉरिडोर विकसित करेगी, जिससे क्षेत्रीय विकास और आर्थिक गतिविधियों को काफी बढ़ावा मिलेगा। इसी कड़ी में उन्होंने बिहार राज्य के लिए रेलवे हेतु आवंटित धनराशि का जिक्र करते हुए बताया कि 2009 से 2014 में बिहार में रेलवे के विकास के लिए प्रतिवर्ष औसतन 1,132 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में बढ़ाकर इस वर्ष 10 हजार 379 करोड़ रूपये कर दिया गया है, जो कि पिछली सरकार की तुलना में 09 गुना ज्यादा है। रेल मंत्री ने कहा कि बिहार में 01,09,158 करोड़ रूपये की लागत से आधारभूत संरचनाओं के परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। साथ ही 3287 करोड़ की लागत से बिहार में 98 अमृत भारत स्टेशनों का पुनर्विकास कार्य चल रहा है। इनमें से बिहार के दो स्टेशन - थावे और पीरपैंती रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास का कार्य पूरा हो चुका है। बिहार में 14 जोड़ी वंदे भारत एवं 21 जोड़ी अमृत भारत ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है तथा पटना और जयनगर के मध्य नमो भारत एक्सप्रेस का भी परिचालन किया जा रहा है। विदित हो कि बिहार में 2014 से 2000 किमी नई लाईन का निर्माण किया जा चुका है जो लगभग मलेशिया के कुल रेल नेटवर्क के बराबर है। बिहार में 2014 से 3330 किमी रेलवे ट्रैक का विद्युतीकरण किया जा चुका है तथा बिहार में रेलवे का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका है। साथ ही 568 फ्लाई ओवर एवं अंडरपास का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। रेल मंत्री के प्रेस कॉन्फ्रेंस के पश्चात पूर्व मध्य रेल के महाप्रबन्धक छत्रसाल सिंह ने भी उपस्थित संवाददाओं को बजट में रेलवे हेतु किये गये प्रावधानों से उन्हें अवगत कराया। इस अवसर पर अपर महाप्रबंधक अमरेन्द्र कुमार सहित सभी विभागाध्यक्षगण उपस्थित थे।
सीएम ममता पहुंचीं दिल्ली और बोलीं- बंगाल के लोगों के साथ देश की राजधानी में बहुत अत्याचार हो रहा
3 Feb, 2026 09:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राजधानी दिल्ली में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। दिल्ली दौरे पर पहुंचीं ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय राजधानी में बंगाल के लोगों के साथ अत्याचार और बहुत दुर्व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) से जुड़े मुद्दों को लेकर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि वे इन चिंताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करेंगी।
दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि वह बंगाल भवन जा रही हैं ताकि वहां मौजूद अपने लोगों से मिल सकें और दिल्ली पुलिस के कथित अत्याचारों को खुद देख सकें। उन्होंने कहा, जब गृहमंत्री बंगाल आते हैं, तो हम उन्हें रेड कार्पेट देते हैं, लेकिन जब हम दिल्ली आते हैं तो हमें ब्लैक कार्पेट दिया जाता है। कृपया बंगाल के लोगों पर हो रहे अत्याचारों को रोकिए, जिन्होंने अपनी जान तक गंवाई है।
दिल्ली के हेली रोड स्थित बंगाल भवन पहुंचने के बाद ममता बनर्जी ने एक बार फिर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि एसआईआर से जुड़ी शिकायतें बेहद गंभीर हैं और इसी मुद्दे पर वह मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के चलते बंगाल के कई परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। सीएम ममता ने दावा किया कि दिल्ली में रह रहे बंगाल के लोगों को दिल्ली पुलिस बार-बार परेशान कर रही है और बंगाल भवन के आसपास कड़ी निगरानी रखी गई है। उन्होंने कहा, अगर इस देश में कोई नहीं लड़ेगा, तो मैं लड़ूंगी, हमारी पार्टी लड़ेगी। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि अगले दिन मंगलवार दोपहर 3 बजे बंगाल भवन में एक अहम बैठक और मीडिया के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी।
टीवीके चीफ विजय का दावा- डीएमके को हराने की ताकत सिर्फ उनके पास
3 Feb, 2026 08:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई। अभिनेता से नेता बने तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के प्रमुख विजय ने सत्तारूढ़ डीएमके पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि तमिलनाडु में डीएमके को हराने की हिम्मत और ताकत सिर्फ उनकी पार्टी में ही है। उन्होंने दावा किया कि अन्याय, बुराई और भ्रष्टाचार की ताकतों को आने वाले विधानसभा चुनावों में टीवीके के चुनाव चिन्ह ‘सीटी’ की आवाज से ही तितर-बितर कर दिया जाएगा।
पनायूर स्थित पार्टी मुख्यालय में पार्टी की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विजय ने यह बयान दिया। इस मौके पर उन्होंने अंजलाई अम्मल, वेलु नाचियार, कामराज, पेरियार और डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्तियों पर पुष्पांजलि अर्पित की और पार्टी का झंडा फहराया। इसके बाद उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति और हर विधानसभा क्षेत्र में किए जाने वाले कार्यों पर विस्तार से चर्चा की।
विजय ने अपने भाषण में एमजीआर का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह कभी एमजीआर की राजनीति में एंट्री पर सवाल उठाए गए थे, ठीक उसी तरह आज उनकी आलोचना की जा रही है। उन्होंने कहा कि जून 1977 में एमजीआर ने रेडियो पर कहा था कि उन्हें यह सोचकर दुख होता है कि जिन कुर्सियों पर कभी अन्नादुरै बैठे थे, वहां अब ऐसे लोग बैठ गए हैं। विजय ने कहा कि आज 2017 और 2021 के बाद तमिलनाडु की स्थिति देखकर लोगों की आंखों में आंसू हैं, क्योंकि कामराज, अन्ना और एमजीआर जैसे नेताओं की जगह अब ऐसे लोग सत्ता में हैं, जो जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर रहे।
टीवीके प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी लोगों के आंसू पोंछने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए बनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष उनकी राजनीति में एंट्री को लेकर सवाल उठा रहा है और कह रहा है कि उनके पास अनुभव नहीं है। विजय ने कहा कि जब एमजीआर ने पार्टी बनाई थी, तब भी यही कहा गया था कि एक अभिनेता राजनीति में आ गया है, लेकिन तमिलनाडु की जनता ने चुनाव में उन्हें जिताकर जवाब दिया। तीन-तरफा और चार-तरफा मुकाबले पर बोलते हुए विजय ने कहा कि एक तरफ उनकी पार्टी एक बड़ी जनशक्ति के रूप में खड़ी है, दूसरी तरफ डीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन है और तीसरी तरफ भाजपा तथा अन्य दल हैं। उन्होंने दावा किया कि इस समीकरण में केवल टीवीके ही डीएमके को हराने की क्षमता रखती है। विपक्ष पर तंज कसते हुए विजय ने कहा कि वे बार-बार कहते हैं कि “विजय घर से बाहर आओ”, लेकिन सच्चाई यह है कि विजय हर घर में है। उन्होंने कहा कि मतदान के दिन हर घर का “विजय और विजी” सुबह-सुबह पोलिंग बूथ पर पहुंचेगा, तब सबको सच्चाई समझ में आ जाएगी।
दिल्ली में अब ये होगा BJP अध्यक्ष नितिन नबीन का पता, यहां मिल गया सरकारी आवास
2 Feb, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के नए नवेले राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को नई दिल्ली में बंगला अलॉट कर दिया गया है. उन्हें नई दिल्ली स्थित 1 मोतीलाल नेहरू मार्ग पर सरकारी बंगला आवंटित किया गया है. उनको टाइप-8 का सरकारी आवास दिया गया है. अब एक बार यह बंगला एक बार फिर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है.
नितिन नबीन को बंगला दिए जाने से पहले यह बंगला झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो नेता शिबू सोरेन को आवंटित था. हालांकि अब उनकी जगह पर बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन को यह सरकारी आवास दिया गया है. बीजेपी अध्यक्ष का यह बंगला देश की राजधानी के प्रमुख वीआईपी इलाकों में से स्थित है. इसके साथ ही सुरक्षा व प्रशासनिक दृष्टि से भी बेहद खास माना जा रहा है.
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन को इससे पहले 9 सुनहरी बाग लेन स्थित बंगला आवंटित करने का विकल्प दिया गया था. हालांकि यह बंगला उन्हें पसंद नहीं आया था. यही वजह है कि अन्य विकल्पों की तलाश की जा रही थी. जिसके बाद 1 मोतीलाल नेहरू मार्ग का बंगला उन्हें आवंटित किया गया.
किसी भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर पहले से ही कई तरह के नियम हैं. डायरेक्टरेट ऑफ़ एस्टेट (Directorate of Estates) के नियमों के अनुसार, किसी राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, यदि वह केंद्रीय मंत्री, लोकसभा सांसद या राज्यसभा सांसद नहीं है, तो उसे टाइप-8 श्रेणी का सरकारी बंगला आवंटित करने का प्रावधान है. नितिन नबीन भी इसी श्रेणी में आते हैं. यही वजह है कि उन्हें ये ऑप्शन दिया गया है.
कुल मिलाकर, नितिन नबीन को मिले इस नए सरकारी आवास को बीजेपी के संगठनात्मक महत्व और पार्टी अध्यक्ष के पद की गरिमा से जोड़कर देखा जा रहा है. बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष जे.पी. नड्डा का सरकारी/आधिकारिक आवास नई दिल्ली में 7-B, मोतीलाल नेहरू मार्ग (Motilal Nehru Marg) पर ही मौजूद है.
बंग भवन के पास दिल्ली पुलिस से भिड़ गईं ममता, SIR पीड़ितों के प्रति ‘संवेदनशीलता’ की मांग
2 Feb, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को दिल्ली के बंगा भवन के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों का सामना किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह राष्ट्रीय राजधानी में किसी आंदोलन के लिए नहीं आई हैं। उनका मकसद चुनावी सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाना है। ममता बनर्जी रविवार को दिल्ली पहुंची थीं। इसके बाद वो बंगा भवन गईं, जो दिल्ली में पश्चिम बंगाल सरकार का गेस्ट हाउस है। वहां वे परिवार ठहरे हुए हैं जो बंगाल में चुनावी सूची की जांच प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं। इमारत के बाहर भारी पुलिस बल तैनात देखकर मुख्यमंत्री नाराज हो गईं।
उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से कहा कि वे बंगाल के लोगों के साथ संवेदनशीलता से पेश आएं। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बंगा भवन में बंगाल के लोगों को डराया जा रहा है। उन्होंने मीडिया से कहा, “हमारा मामला सुप्रीम कोर्ट में है और हमारी चुनाव आयोग के साथ बैठक तय है। लोग परेशान हैं, क्या उनके परिवार मीडिया से बात भी नहीं कर सकते?” मुख्यमंत्री ने कहा, जहां भी एसआईआर से प्रभावित परिवार ठहरे हैं, वहां दिल्ली पुलिस तैनात है। जब दिल्ली में धमाका होता है तो दिल्ली पुलिस कहां होती है?
मुख्यमंत्री ने कहा मैं दिल्ली पुलिस को दोष नहीं देती, मैं उन लोगों को दोष देती हूं जो शीर्ष पर हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोग देश की रक्षा करने में नाकाम हैं और आम लोगों पर एसआईआर के नाम पर अत्याचार कर रहे हैं। उन्होंने दिल्ली की तुलना एक जमींदारी से की, जहां गरीबों के लिए कोई जगह नहीं है।
ममता बनर्जी ने पुलिसकर्मियों से कहा, “मैं यहां किसी आंदोलन के लिए नहीं हूं। अगर मैं आंदोलन करने पर आती, तो आप अपना होश खो देते।” उन्होंने मांग की कि दिल्ली पुलिस इन परिवारों को परेशान करना बंद करे। ममता बनर्जी इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से भी मुलाकात करेंगी। उन्होंने इस प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की है।
ठाणे-कल्याण-डोंबिवली-उल्हासनगर में मेयर पद पर शिवसेना का दावा, महिला प्रत्याशी नामित
2 Feb, 2026 05:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और उल्हासनगर नगर निगमों में मेयर पद के लिए महिला उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। इन पदों पर कोई आरक्षण नहीं है, फिर भी पार्टी ने महिलाओं पर भरोसा जताया है। एकनाथ शिंदे ने सोमवार को इसकी जानकारी दी।
एकनाथ शिंदे के कार्यालय से जारी एक बयान में बताया गया कि ठाणे नगर निगम में शर्मिला पिंपोलकर-गायकवाड को मेयर पद के लिए नामित किया जाएगा। वहीं, कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में हर्षाली थाविल चौधरी और उल्हासनगर नगर निगम में अश्विनी निकम को यह जिम्मेदारी दी जाएगी। यह इन नगर निगमों के इतिहास में पहली बार होगा जब बिना आरक्षण के कोई महिला मेयर का पद संभालेगी।
पार्टी ने कहा कि यह फैसला सोच-समझकर लिया गया है, ताकि अनिवार्य कोटे से आगे बढ़कर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जा सके। बयान में कहा गया, “महिलाओं को आरक्षण का इंतजार किए बिना उनकी क्षमता और नेतृत्व के आधार पर अवसर मिलने चाहिए।” शिवसेना ने यह भी कहा कि जब इन पदों पर किसी तरह का आरक्षण नहीं था, तो पुरुष मेयर चुने जाने की अटकलें थीं, लेकिन पार्टी ने अपनी बहनों पर भरोसा जताया है।
बयान के अनुसार, कल्याण से शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने इस बात की वकालत की थी कि सक्षम महिला पार्षदों को शीर्ष नागरिक पद के लिए मौका दिया जाना चाहिए। उनके प्रस्ताव को एकनाथ शिंदे ने मंजूरी दी। पार्टी ने यह भी बताया कि बृहन्मुंबई नगर पालिका में शिवसेना के 29 पार्षदों में से 19 महिलाएं हैं। बीएमसी चुनाव में उतारे गए 90 उम्मीदवारों में से 63 महिलाएं थीं।
संसद में हंगामा: नियम 349 को लेकर राहुल गांधी विवाद में
2 Feb, 2026 04:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सोमवार (2 फरवरी) को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोद मुकुंद नरवणे के एक संस्मरण के मसौदे के कुछ अंश का जिक्र किया तो सदन में हंगामा मच गया। सत्ता पक्ष ने इसका जमकर विरोध किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने भी नरवणे के संस्मरण का उल्लेख करने का विरोध किया। इसके बाद सदन में सत्तापक्ष और कांग्रेस के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक एवं हंगामा देखने को मिला। सदन में गतिरोध बने रहने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपराह्न दो बजकर नौ मिनट पर सभा की बैठक अपराह्न तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोबारा जब कार्यवाही शुरू हुई तो राहुल गांधी ने फिर से जनरल नरवणे की बात कहनी शुरू कर दी। इसके बाद फिर सदन में हंगामा हुआ। इसे देखते हुए स्पीकर बिरला ने सदन की कार्यवाही शाम 4 बजे तक स्थगित कर दी।लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकसभा के नियम संख्या 349 का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता से कई बार यह अपील की कि वह पुस्तक या किसी पत्रिका को सदन में उद्धृत नहीं कर सकते, हालांकि राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख का हवाला देते हुए चीन के साथ भारत के सैन्य तनाव का विषय उठाने का प्रयास किया और दावा किया कि पूर्व सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के चरित्र के बारे में भी बताया है। इस दौरान राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। लोकसभा में गतिरोध के समय प्रधानमंत्री मोदी भी मौजूद थे। अब सवाल उठता है कि नियम 349 क्या है, जो राहुल गांधी को जनरल नरवणे का संस्मरण पढ़ने से रोक रहा है।
चीन पर राहुल गांधी के दावे से लोकसभा में हंगामा, राजनाथ सिंह ने कर दिया चैलेंज
क्या है लोकसभा का नियम 349?
लोकसभा की नियम पुस्तिका (Rulebook) का नियम 349 सदन के भीतर सदस्यों के आचरण और मर्यादा से संबंधित है। यह नियम उन शिष्टाचारों को निर्धारित करता है जिनका पालन प्रत्येक सांसद को सदन की कार्यवाही के दौरान करना अनिवार्य होता है। यह नियम कहता है कि सदस्य सदन में नारे नहीं लगा सकते और न ही किसी तरह का प्रदर्शन कर सकते हैं। इस नियम की उपधारा एक में कहा गया है कि कोई भी सदस्य किसी अखबार की क्लिपिंग या मैगजीन में प्रकाशित अंश, कोई पुस्तक के अंश सदन में नहीं पढ़ सकते। इसके अलावा सदन के भीतर झंडे, प्रतीक चिन्ह, पोस्टर, तख्तियां या धार्मिक चित्र दिखाना वर्जित है।
स्पीकर का निर्देश मानना बाध्यकारी
लोकसभा का नियम 349 यह भी कहता है कि सदस्य सदन में जोर-जोर से बात नहीं कर सकते, हंस नहीं सकते और न ही ऐसी कोई हरकत कर सकते हैं जिससे कार्यवाही में बाधा आए। इसके अलावा जब कोई अन्य सदस्य बोल रहा हो, तो उसे टोकना या उसके भाषण के बीच में बाधा डालना नियम का उल्लंघन माना जाता है। नियम कहता है कि सदस्यों को लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) की बातों और निर्देशों का पालन करना होता है और उनकी अनुमति के बिना कोई भी मुद्दा नहीं उठा सकता।
मैं आपका सलाहकार नहीं हूं; राहुल गांधी के तंज पर भड़के लोकसभा स्पीकर ओम बिरला
तेजस्वी सूर्या के बयान पर पलटवार
बता दें कि राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए अपने भाषण की शुरुआत में ही भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए पलटवार करने का प्रयास किया। उनका कहना था कि सूर्या ने कांग्रेस की देशभक्ति और चरित्र पर सवाल खड़े किए हैं, इसलिए वह एक पूर्व सेना प्रमुख के उस संस्मरण के अंश को पढ़ना चाहते हैं जो एक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। उन्होंने जैसे ही इसे पढ़ने का प्रयास किया तो राजनाथ सिंह ने सवाल उठाया कि नेता प्रतिपक्ष को बताना चाहिए कि वह जिस पुस्तक का उल्लेख कर रहे हैं, वो प्रकाशित हुई है या नहीं।
पहले तीन, फिर 4 बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित
गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि सदन में पुस्तक और पत्रिका में प्रकाशित बातों को नहीं रखा जा सकता और नेता प्रतिपक्ष को व्यवस्था का पालन करना चाहिए। बिरला ने राहुल गांधी से कई बार कहा कि वह राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपनी बात रखें। जब राहुल गांधी इस संस्मरण के कुछ अंश सदन के पटल पर रखने पर अड़े रहे तो बिरला ने कहा, ''आप लगातार आसन की वमानना कर रहे हैं...।'' राहुल गांधी ने कहा कि वह आसन को चुनौती नहीं दे रहे हैं, बल्कि चीन के साथ भारत के रिश्ते के बारे में बात रखना चाहते हैं। सदन में लगातार गतिरोध बने रहने पर बिरला ने लोकसभा की बैठक पहले तीन बजे तक फिर 4 बजे तक स्थगित कर दी।
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