राजनीति
गौरव गोगोई का पलटवार: पाक एजेंट के आरोप बेबुनियाद, बोले— दबाया गया तो बोलूंगा
10 Feb, 2026 11:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुवाहाटी। असम में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस नेता गौरव गोगोई पर लगाए गए ‘पाकिस्तान कनेक्शन’ के आरोपों पर अब गोगोई ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान को न सिर्फ अस्वीकार्य बताया, बल्कि इसे राजनीतिक शिष्टाचार की सभी सीमाओं को पार करने वाला करार दिया। उन्होंने कहा कि मुझे मजबूर किया तो फिर मैं चुप नहीं रहूंगा।
दरअसल, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गौरव गोगोई की वर्ष 2013 की पाकिस्तान यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उनके वीजा में लाहौर, कराची और इस्लामाबाद जाने की अनुमति थी, जबकि उन्होंने तक्षशिला का दौरा किया, जो पंजाब के रावलपिंडी जिले में स्थित है। मुख्यमंत्री सरमा ने यह भी कहा कि रावलपिंडी एक हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र है, जहां पाकिस्तानी सेना का जनरल हेडक्वार्टर (जीएचक्यू) मौजूद है और वहां आम नागरिकों का प्रवेश आसान नहीं होता। ऐसे में यह दौरा किसी संस्थागत व्यवस्था के बिना संभव नहीं हो सकता। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया।
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जिस एसआईटी रिपोर्ट का हवाला दिया था, उसे छह महीने तक दबाकर रखा गया, क्योंकि सरकार उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश करने में असफल रही। गोगोई ने सवाल किया कि यदि यह मामला वास्तव में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा था, तो मुख्यमंत्री इतने समय तक चुप क्यों बैठे रहे। गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि असम में कांग्रेस की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, जब हमने मुख्यमंत्री के परिवार के पास कथित रूप से 12 हजार बीघा जमीन होने का मुद्दा उठाया, तभी से यह पूरा नाटक शुरू हुआ। उन्होंने पाकिस्तान से किसी भी तरह के संबंधों के दावों को सिरे से खारिज किया।
मुख्यमंत्री द्वारा उनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न और पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख के साथ संबंधों के आरोप पर भी गोगोई ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी काम के सिलसिले में पाकिस्तान गई थीं और वह 2013 में 10 दिन की सामान्य यात्रा पर उनके साथ गए थे, जिसमें कुछ भी गुप्त या गैरकानूनी नहीं था। गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री पर उनके नाबालिग बच्चों को राजनीति में घसीटने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लड़ाई नेताओं के बीच होनी चाहिए, बच्चों को इसमें शामिल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, मुझे ऐसी स्थिति में मजबूर न करें, जहां मुझे जवाब देना पड़े। गोगोई ने यह भी कहा कि यह मामला इतना गंभीर है कि सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।
सलमान खान की मौजूदगी पर संजय राउत का कटाक्ष, RSS समारोह को लेकर कसा तंज
10 Feb, 2026 10:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मुंबई में आयोजित शताब्दी समारोह के दौरान सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस कार्यक्रम को लेकर भाजपा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस नेतृत्व पर जमकर हमला बोला। खासतौर पर बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की मौजूदगी को लेकर राउत ने तीखे सवाल खड़े किए।
संजय राउत ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि आरएसएस के कार्यक्रम में सलमान खान को बुलाया गया, लेकिन सवाल यह है कि सलमान खान कब से संघ के स्वयंसेवक बन गए। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि संघ के शताब्दी समारोह में ऐसे लोगों को क्यों आमंत्रित किया गया, जिनका संघ से कोई वैचारिक या संगठनात्मक संबंध नहीं रहा है। राउत ने कटाक्ष करते हुए कहा कि मोदी के आने के बाद अब लोग कहते हैं— चले जाओ, झंझट क्यों लेना।
राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी के शासनकाल में भारत अमेरिका का गुलाम बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने देश को अमेरिका के हाथों गिरवी रख दिया है और इसकी जिम्मेदारी संघ प्रमुख मोहन भागवत और आरएसएस को भी लेनी चाहिए। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि सरकार अब तक वीर सावरकर को भारत रत्न क्यों नहीं दे रही है और मोहन भागवत को इस मुद्दे पर सरकार को स्पष्ट रूप से कहना चाहिए।
शिवसेना (यूबीटी) नेता ने यह भी दावा किया कि इस कार्यक्रम में गायक अदनान सामी भी मौजूद थे, जो पाकिस्तान से भारत आए हैं। राउत ने आरोप लगाया कि अदनान सामी के पिता पाकिस्तान वायुसेना में थे और उन्होंने भारत के खिलाफ युद्ध लड़ा था। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि समारोह में ऐसे लोग भी शामिल थे, जो कभी पोर्न इंडस्ट्री से जुड़े रहे हैं, हालांकि उन्होंने किसी का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया। इसी के साथ ही संजय राउत ने समारोह में कुछ प्रमुख हस्तियों की गैरमौजूदगी पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वह कार्यक्रम में शाहरुख खान को ढूंढ रहे थे, लेकिन वह वहां नजर नहीं आए। राउत ने पूछा कि क्या शाहरुख खान देशभक्त नहीं हैं। इसके अलावा उन्होंने प्रसिद्ध गीतकार और लेखक जावेद अख्तर की अनुपस्थिति का भी जिक्र किया और कहा कि जावेद अख्तर का परिवार देश के लिए बलिदान दे चुका है, फिर भी उन्हें कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया।
सीएम सरमा पर भड़के औवेसी, आपराधिक मामला दर्ज करने की उठाई मांग
10 Feb, 2026 09:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हैदराबाद। एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग कर हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर को औपचारिक शिकायत दी। औवेसी ने यह शिकायत एक कथित विवादित और अब डिलीट हो चुके वीडियो को लेकर की गई है, जिसमें सीएम सरमा को मुसलमानों पर गोली चलाते हुए दिख रहे है। पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में ओवैसी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सरमा पिछले कई वर्षों से सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, सार्वजनिक भाषणों और अन्य मंचों के माध्यम से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बयान दे रहे हैं, जिसमें से कई बयान अब भी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं।
हाल के महीनों में मुख्यमंत्री सरमा ने जानबूझकर अपने नफरत भरे भाषणों को और तेज किया है, जिसका साफ और सचेत इरादा मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना और हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दुश्मनी और नफरत को बढ़ाना है। ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन अब्दुल्ला बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य के मामले में साफ तौर पर कहा है कि मौलिक अधिकारों की रक्षा करना, संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखना और राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक चरित्र, विशेष रूप से कानून के शासन की रक्षा करना राज्य और कानून लागू करने वाली एजेंसियों का संवैधानिक कर्तव्य है। सुप्रीम कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि पुलिस को औपचारिक शिकायत के अभाव में भी नफरत भरे भाषणों के मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा, मैं यह बताना चाहता हूं कि असम भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक एक्स अकाउंट द्वारा 7 फरवरी को पोस्ट किया गया हालिया वीडियो, जिस वीडियो को एक दिन बाद हटा दिया गया था लेकिन अभी भी सोशल मीडिया पर उपलब्ध है, उसमें सरमा को हथियार से लैस दिखाया गया है और वे उन लोगों को निशाना बना रहे हैं जिन्हें साफ तौर पर मुसलमान दिखाया गया है और उन्हें गोली मार रहे हैं। उक्त पोस्ट और वीडियो, उसमें इस्तेमाल की गई तस्वीरों और पॉइंट ब्लैंक शॉट और कोई दया नहीं जैसे बयानों के साथ, मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, धार्मिक समुदायों के बीच नफरत और दुर्भावना को बढ़ावा देने और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के इरादे से किया गया एक जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य है।
भागवत के साथ अदनान सामी की मुलाकात पर भड़की कांग्रेस..........राष्ट्र-विरोधी कृत्य करार दिया
10 Feb, 2026 08:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मुंबई में आयोजित कार्यक्रम ने महाराष्ट्र में नया राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और मशहूर गायक अदनान सामी की मुलाकात और साथ में भोजन करने पर महाराष्ट्र कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जाहिर कर दी है। कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को राष्ट्र-विरोधी कृत्य करार देकर आरएसएस की विचारधारा पर सवाल उठाए हैं।
महाराष्ट्र कांग्रेस ने एक पोस्ट में कहा कि सामी के पिता ने पाकिस्तान वायुसेना में पायलट के रूप में सेवा दी थी और वहां पठानकोट हवाई अड्डे पर हमले सहित 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में शामिल थे। सामी उन हस्तियों में शामिल हैं, जिन्होंने आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में सप्ताहांत में मुंबई में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में भाग लिया था।
कांग्रेस ने लिखा, सामी के पिता अरशद सामी खान पाकिस्तान वायु सेना में पायलट थे जिन्होंने 1965 के युद्ध के दौरान पठानकोट हवाई अड्डे को नष्ट किया था। आज भागवत उनके साथ भोजन का आनंद ले रहे हैं। आरएसएस (का यह कदम) राष्ट्रविरोधी है। मशहूर सिंगर सामी ने अपने फेसबुक अंकाउट पर संघ प्रमुख भागवत के साथ अपनी तस्वीरें साझा की थीं और आरएसएस प्रमुख की प्रशंसा की थी।
पद्म श्री से सम्मानित सामी ने लिखा था, ‘‘आरएसएस के महान सरसंघचालक भागवत के साथ एक बेहतरीन दोपहर बिताई है। उन्हें सुनना आनंददायक था और उन्होंने बड़ी कुशलता से कई मिथकों एवं गलतफहमियों को दूर किया। एक अत्यंत सज्जन और बेहतरीन व्यक्ति।
मुंबई में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था, जिसमें कला, खेल और उद्योग जगत की कई हस्तियों ने शिरकत की थी। सामी इसी कार्यक्रम में आमंत्रित विशिष्ट अतिथियों में से एक थे।
असम CM के वीडियो पर कांग्रेस का हमला, कहा—हिंसा भड़काने वाला कृत्य; कार्रवाई की मांग
9 Feb, 2026 07:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भाजपा (BJP) की असम इकाई (Assam Unit) द्वारा एक्स पर पोस्ट वीडियो को कांग्रेस (Congress) ने नरसंहार का खुला आह्वान बताया है। कांग्रेस ने दावा किया कि इसमें ‘अल्पसंख्यकों की लक्षित हत्या’ दिखाई गई है, जो बेहद गंभीर है। साथ ही कहा कि न्यायपालिका को इसमें किसी भी तरह की नरमी बरते बिना कार्रवाई करनी चाहिए। अब हटाए जा चुके इस वीडियो में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) कथित तौर पर राइफल से दो लोगों पर निशाना साधकर गोली चलाते दिखाए गए थे। इनमें से एक व्यक्ति ने टोपी पहन रखी है, जबकि दूसरे की दाढ़ी है। वीडियो के कैप्शन में ‘पॉइंट ब्लैंक शॉट’ लिखा गया था।
कांग्रेस महासचिव ने क्या लिखा
कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने इस मुद्दे पर भाजपा की कड़ी आलोचना करते हुए एक्स पर एक पोस्ट लिखी है। इसमें उन्होंने कहाकि भाजपा के एक आधिकारिक खाते से अल्पसंख्यकों की लक्षित और बहुत करीब से (पॉइंट ब्लैंक) हत्या दिखाने वाला वीडियो पोस्ट किया गया। यह नरसंहार का खुला आह्वान है-एक ऐसा सपना जिसे यह फासीवादी शासन दशकों से देखता रहा है। वेणुगोपाल ने कहा कि इसे सामान्य ‘ट्रोल’ सामग्री मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, बल्कि यह शीर्ष स्तर से फैलाया गया जहर है। इसके लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहाकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से इसकी निंदा किये जाने या कोई कार्रवाई की उम्मीद नहीं है, लेकिन न्यायपालिका को जरूर कदम उठाना चाहिए और किसी तरह की नरमी नहीं बरतनी चाहिए।
क्या अदालतें सो रही हैं
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री शर्मा को मुस्लिम पुरुषों पर गोली चलाते हुए दिखाने वाले वीडियो को केवल हटाना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहाकि यही असली भाजपा है। यह नफरत, जहर और हिंसा आपकी दी हुई है, मोदी। क्या अदालतें और अन्य संस्थाएं सो रही हैं? कांग्रेस की प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने भी एक्स पर कहाकि नरेन्द्र मोदी जी, आप ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात करते हैं। लेकिन आपके नेता हिमंता बिस्वा सरमा का मुसलमानों को गोली मारते दिखाने वाला वीडियो भाजपा की असम इकाई के आधिकारिक खाते से पोस्ट किया गया। उन्होंने कहाकि यह भारतीय संविधान पर हमला है। मुझे यह देखकर आश्चर्य होता है कि उच्चतम न्यायालय मूकदर्शक बना हुआ है। न्यायालय की चुप्पी और स्वतः संज्ञान न लेने से उसकी भूमिका पर सवाल उठते हैं।
क्या बोलीं प्रियंका चतुर्वेदी
शिवसेना (उबाठा) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी भाजपा की आलोचना की। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहाकि भाजपा की असम इकाई के एक्स अकाउंट पर ‘पॉइंट ब्लैंक शॉट’ शीर्षक से नफरत और लक्षित हिंसा से भरा वीडियो पोस्ट किया। विरोध के बाद इसे हटा दिया गया, लेकिन तब तक कई लोग इसे डाउनलोड कर आगे फैला चुके थे। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ‘बेशर्मी’ से नफरत फैलाने वाले और राजनीतिक रूप से लक्षित करने के इस सबसे घृणित रूप को नजरअंदाज करेगा जो भाजपा के सामने असल में असहाय और बेकार है। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से जारी पोस्ट में कहाकि भाजपा की असम इकाई के आधिकारिक हैंडल से एक वीडियो पोस्ट किया गया है जो अल्पसंख्यकों की लक्षित, प्रत्यक्ष हत्या का महिमामंडन करता प्रतीत होता है।
घृणित और परेशान करने वाला
विपक्षी दल ने कहाकि यह बेहद घृणित और परेशान करने वाला है और इसे सामान्य ट्रोल सामग्री कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। यह सामूहिक हिंसा और नरसंहार का आह्वान है। इसमें कहा गया कि यह इस फासीवादी शासन के असली चेहरे का प्रतिबिंब है, जिसने दशकों से इस नफरत को पाला है और पिछले 11 वर्षों में इसे सामान्य बनाने की कोशिश की है। कांग्रेस ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए, समाज में अशांति और जहर फैलाने के इस कृत्य के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस ने एक अन्य पोस्ट में कहाकि नरेन्द्र मोदी ने अपने नेताओं को नफरत फैलाने की खुली छूट दे रखी है। भाजपा की असम इकाई के आधिकारिक हैंडल से किया गया पोस्ट इसका सबूत है- जिसमें मुख्यमंत्री हिमंता विश्व सरमा ‘पॉइंट-ब्लैंक’ पर अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं। ये बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला है।
इसमें आगे कहा गया है कि भाजपा सत्ता के लिए समाज में जहर घोल रही है, लोगों को हिंसा के लिए भड़का रही है। उसकी इस शर्मनाक करतूत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इससे पहले भी मोदी के लाडले हिमंता ने मुसलमानों के खिलाफ खुलेआम बयान देकर, उन्हें परेशान करने की बात कही थी। कांग्रेस ने कहाकि नफरत भाजपा के डीएनए में हैं। ऐसी विचारधारा देश के लिए जहर है, जिसे परोसने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
मोदी सरकार पर ओवैसी का हमला—पेट्रोलियम फैसलों में विदेश का असर बता साधा निशाना
9 Feb, 2026 11:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका ने फिर दी रुस से तेल खरीदी पर धमकी
हैदराबाद । ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिका के धमकी भरे बयान पर केंद्र की मोदी सरकार पर कड़ा हमला किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि यदि भारत रूस से तेल खरीदेगा, तब उस पर 25 प्रतिशत टैक्स लगेगा। करीमनगर में जनसभा को संबोधित कर एआईएमआईएम सांसद ओवैसी ने सीधे सवाल उठाया कि भारत का पेट्रोलियम मंत्री डोनाल्ड ट्रंप हैं या हरदीप सिंह पुरी।
सांसद ओवैसी ने कहा कि अमेरिका में बैठे एक “गोरी चमड़ी वाले इंसान” भारत को धमकी दे रहे हैं, जबकि देश में केंद्रीय मंत्री मौजूद हैं। उन्होंने मोदी सरकार और बीजेपी पर कटाक्ष कर कहा कि यह देशभक्ति नहीं बल्कि जनता के लिए परेशानी पैदा करने वाला राष्ट्रवाद है। उन्होंने आर्थिक पहलू पर भी ध्यान दिलाया कि अगर भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा, तब इसका फायदा चीन को मिलेगा, जो सस्ता तेल खरीद लेगा।
सांसद ओवैसी ने रूसी कंपनी ‘नयारा’ का उदाहरण देकर पूछा कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप इस पर भी टैक्स लगाएंगे। उन्होंने बीजेपी नेताओं के पाखंडी स्वरूप का उल्लेख कर कहा कि चेहरा दाढ़ी वाला, सिर पर टोपी और शरीर पर शेरवानी हो, लेकिन उनके फैसले आम जनता के लिए परेशानी खड़ी करते हैं।
इतना ही नहीं उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के बयान को भारत की संप्रभुता पर हमला बताकर केंद्र सरकार को विदेशियों के दबाव में देश की नीतियों को प्रभावित करने वाला करार दिया। ओवैसी ने कहा कि इसतरह के केंद्रीय मंत्री हैं जो ट्रंप से डरते हैं, लेकिन रोज़ाना उनके खिलाफ गाली देते हैं। उन्होंने करीमनगर की जनता से अपील की कि वे उन नेताओं को पहचानें जो विदेशी दबाव में देश की मजबूरी पर समझौता करने को तैयार हैं। इस संबोधन में ओवैसी ने न केवल अमेरिका की धमकी को नकारा बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों और आर्थिक फैसलों पर भी सवाल खड़े किए। उनका संदेश स्पष्ट था—देश की संप्रभुता और आम जनता के हित की रक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।
अजीत पवार की मौत पर नया विवाद: अमोल मिटकरी बोले—यह एक सोची-समझी साज़िश
9 Feb, 2026 10:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की 28 जनवरी, 2026 को बारामती एयरपोर्ट के पास एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई। एनसीपी विधायक अमोल मिटकरी ने शक जताया है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि एक साज़िश थी। उनका कहना है कि अजीत दादा इतने आम नेता नहीं थे कि उनकी मौत को इतनी आसानी से मान लिया जाए। इसलिए, वह इस घटना की पूरी जांच की ज़ोरदार मांग कर रहे हैं। उन्होंने एयरलाइन कंपनी पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने कहा, उन्हें शक है कि अजीत पवार की हत्या के लिए विमान में एक आत्मघाती हमलावर को बिठाया गया होगा। उन्होंने राजीव गांधी की हत्या और मुंबई में अजमल कसाब मामले जैसी घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि इस तरह की दुर्घटनाएं की जा सकती है। उनके इस दावे से राजनीतिक गलियारों में हलचल मची है।
विमान और पायलट को लेकर शक
मिटकरी ने एयरलाइन कंपनी (वीएसआर) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि जिस विमान को तकनीकी खराबी के कारण एक साल से ग्राउंडेड किया गया था, उसे फिर भी अजीत पवार की उड़ान के लिए दिया गया। पायलटों को दो बार बदला गया। उन्हें शक है कि आखिरी पायलट को मार दिया गया होगा और उसे 50 करोड़ रुपये की बड़ी बीमा राशि का लालच दिया गया होगा। क्योंकि उन्हें पता चला है कि वीएसआर कंपनी ने दिसंबर 2025 में अपने हर एयरलाइन पायलट का 50 करोड़ रुपये का बीमा कराया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इमरजेंसी के दौरान मेडे कॉल क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद दस्तावेज़ नहीं जले, लेकिन शव जल गए। अजीत पवार की घड़ी गायब हो गई। बताया गया था कि विमान में 6 लोग सवार थे, लेकिन सिर्फ 5 शव मिले। मिटकरी मांग करते हैं कि मुंबई एयरपोर्ट का सीसीटीवी फुटेज तुरंत जारी किया जाए। उनका कहना है कि ब्लैक बॉक्स रिपोर्ट जारी होने से पहले इस सबूत की ज़रूरत है। उन्होंने आगे कहा, मैं अपने इस विश्वास पर कायम हूं कि यह अजीत पवार से जुड़ी एक साज़िश थी। विमान खराब था। इसे एक साल से ग्राउंडेड किया गया था। वीएसआर एयरक्राफ्ट के पायलट को आखिरी मिनट में बदल दिया गया था। पहले दिन, उन्हें सड़क के रास्ते पुणे जाना था। इस मामले में सीआईडी जांच चल रही है। वीएसआर कंपनी ने पायलट के लिए 50 करोड़ रुपये की इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। वीएसआर कंपनी ने दिसंबर 2025 में अपने हर एयरलाइन पायलट का 50 करोड़ रुपये का इंश्योरेंस कराया था। क्या पायलटों को कंपनी से कहा गया था कि परिवार की चिंता न करें, वे सब कुछ संभाल लेंगे? इसकी जांच होनी चाहिए। इसकी जांच होनी चाहिए कि क्या इस कंपनी के पायलटों को अजमल कसाब की तरह हिप्नोटाइज किया गया था। मिटकरी ने कहा कि इस दुर्घटना में वीएसआर कंपनी की बड़ी भूमिका होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
रेल परियोजनाओं पर अटका पैसा: मुख्यमंत्री स्टालिन ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र
9 Feb, 2026 09:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर रेल मंत्रालय को राज्य में स्वीकृत रेलवे परियोजनाओं के लिए जरुरी धनराशि जल्द जारी करने और लंबित परियोजनाओं को फिर शुरु करने का आग्रह किया है।
सीएम स्टालिन ने अपने पत्र में कहा, ‘‘रेल मंत्रालय से धनराशि जारी करने में हो रही देरी’’ और विभिन्न परियोजनाओं के लिए टुकड़ों में निधि आवंटित होने की व्यवस्था के कारण कई महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाओं की प्रगति प्रभावित हो रही है। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि राज्य सरकार ने विभिन्न रेलवे परियोजनाओं के लिए 2,500.61 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण करने की मंजूरी दे दी है, लेकिन रेलवे विभाग ने अब तक 931.52 हेक्टेयर भूमि के लिए धनराशि आवंटित नहीं की है। सीएम स्टालिन ने कहा, ‘‘निधि जारी करने में देरी और टुकड़ों में आवंटन ने तमिलनाडु में रेलवे परियोजनाओं की प्रगति में बाधा डाली है।
इससे प्रभावित भूमि मालिकों के लिए लंबे समय तक अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।’’ उन्होंने बताया कि 19 प्रमुख परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य 94 प्रतिशत पूरा हो चुका है और 1,198.02 हेक्टेयर भूमि रेलवे को सौंप दी गई है। स्टालिन ने विशेष रूप से ‘तिरुवनंतपुरम-कन्याकुमारी दोहरीकरण’ परियोजना का उल्लेख कर कहा कि रेलवे द्वारा मुआवजे के लिए आवश्यक 289.78 करोड़ रुपये जारी न करने के कारण 16.86 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण अब रुका हुआ है। सीएम स्टालिन ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि स्वीकृत परियोजनाओं के लिए ‘‘संपूर्ण धनराशि और इस प्राथमिकता के आधार पर’’ जारी किया जाए, ताकि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी की जा सके।
उन्होंने तूत्तिकोरिन–मदुरै और तिण्डिवनम–तिरुवण्णायलै रेल लाइन सहित वर्तमान में लंबित प्रमुख परियोजनाओं पर पुनर्विचार कर उन्हें फिर से शुरू करने का अनुरोध किया।
‘संघ सर्वोपरि है’ : मोहन भागवत बोले, संगठन के आदेश पर पद त्यागने में नहीं हिचक
9 Feb, 2026 08:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि यदि संघ उनसे पद छोडऩे को कहेगा, तो वे तुरंत ऐसा करेंगे। आमतौर पर 75 साल की उम्र के बाद किसी पद पर नहीं रहने की परंपरा की बात कही जाती है।आरएसएस प्रमुख ने कहा कि सरसंघचालक बनने के लिए क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र या ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है। जो हिंदू संगठन के लिए काम करता है। वही सरसंघचालक बनता है। भागवत रविवार को मुंबई में आरएसएस के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि वीर सावरकर को भारत रत्न दिया गया तो इससे पुरस्कार की गरिमा और बढ़ेगी।
भागवत ने कहा कि समान नागरिक संहिता सभी को विश्वास में लेकर बनाई जानी चाहिए और इससे समाज में मतभेद नहीं बढऩे चाहिए। उम्मीद है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारत के हितों को ध्यान में रखकर किया गया होगा और देश को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा। घुसपैठ के मुद्दे पर सरकार को बहुत काम करना है। पहचान कर निष्कासन की प्रक्रिया होनी चाहिए। यह पहले नहीं हो पा रहा था, लेकिन अब धीरे-धीरे शुरू हुआ है और आगे बढ़ेगा।
भागवत ने कहा कि आरएसएस का काम प्रचार करना नहीं, बल्कि समाज में संस्कार विकसित करना है। जरूरत से ज्यादा प्रचार से दिखावा और फिर अहंकार आता है। प्रचार बारिश की तरह होना चाहिए। सही समय पर और सीमित मात्रा में। संघ अपने स्वयंसेवकों से आखिरी बूंद तक काम लेता है। संघ के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई, जब किसी को जबरन रिटायर करना पड़ा हो। संघ की कार्यप्रणाली में अंग्रेजी कभी मुख्य भाषा नहीं बनेगी, क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। जहां जरूरत होती है, वहां अंग्रेजी का इस्तेमाल किया जाता है। हमें अंग्रेजी सीखनी चाहिए, लेकिन मातृभाषा को नहीं भूलना चाहिए।
काई भी हिंदू बन सकता हैं सरसंघचालक
मोहन भागवत ने कहा कि संघ प्रमुख की जिम्मेदारी संभालने के लिए किसी खास जाति का होना जरूरी नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्राह्मण ही नहीं, बल्कि क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र या एससी-एसटी समाज का कोई भी व्यक्ति सरसंघचालक बन सकता है।कार्यक्रम में बातचीत के दौरान भागवत ने एक सवाल के जवाब में कहा कि संघ में इस आधार पर कार्यकर्ता नियुक्त नहीं होते कि उनकी जाति क्या है। जो हिंदू है, वह सरसंघचालक बन सकता है। हमारे यहाँ काम करने वाले को जिम्मेदारी मिलती है। एससी/एसटी वर्ग का व्यक्ति भी इस पद पर पहुँच सकता है। सिर्फ ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है और किसी अन्य जाति का होना कोई अयोग्यता नहीं।
ब्राह्मणों का संघ वाली छवि पर दी सफाई
संघ की पुरानी छवि पर चर्चा करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि जब संघ की शुरुआत हुई थी, तब वह एक छोटी सी ब्राह्मण बस्ती से शुरू हुआ था। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआती दौर में संघ छोटा था और एक ब्राह्मण बहुल बस्ती में सक्रिय था, इसलिए स्वाभाविक रूप से पदाधिकारी ब्राह्मण थे। इसी वजह से लोग कहने लगे कि संघ ब्राह्मणों का है और कुछ लोग आज भी यही कहते हैं, क्योंकि वे केवल जाति देखते हैं। लेकिन वास्तविकता इससे अलग है।
राहुल गांधी की सोच सड़ी हुई है… कंगना रनौत ने ‘माल’ और ‘कबाब’ वाले बयान पर दी तीखी प्रतिक्रिया
8 Feb, 2026 12:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। संसद परिसर में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) द्वारा एपस्टीन फाइल्स (Epstein Files) को लेकर दिए गए विवादित बयान पर भाजपा सांसद कंगना रनौत (BJP MP Kangana Ranaut) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कंगना ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi.) की भाषा और शब्द चयन को निशाना बनाते हुए कहा कि उनकी टिप्पणियां उनकी मानसिकता को स्पष्ट रूप से दिखाती हैं।
कंगना का हमला
हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा से सांसद कंगना रनौत ने कहा, “उनके शब्दों की पसंद देख लीजिए। जिस तरह उन्होंने एपस्टीन फाइल्स के संदर्भ में कहा कि उसमें और ‘माल’ और ‘कबाब’ है, ऐसी सड़ी हुई और भ्रष्ट मानसिकता वाले व्यक्ति से और क्या उम्मीद की जा सकती है?” उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक जीवन में बैठे नेताओं को हमेशा जिम्मेदारी और मर्यादा के साथ बोलना चाहिए। कंगना ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार ऐसे बयान देते हैं, जो राजनीतिक स्तर को गिराते हैं।
कांग्रेस का पलटवार
वहीं, कांग्रेस पार्टी ने लगातार आरोप लगाया है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने से रोका जा रहा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “पिछले तीन दिनों से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया जा रहा है और उन्हें अपना भाषण पूरा करने का अवसर नहीं मिला।” रमेश ने आगे बताया कि ऐसा जानबूझकर किया जा रहा है क्योंकि राहुल गांधी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे उठाते हैं।
पीएम मोदी पर आरोप और संसद में बहस
कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी आरोप लगाया कि चीनी घुसपैठ के नाजुक समय में उन्होंने राजनीतिक जिम्मेदारी से हाथ खड़े कर सेना को अकेला छोड़ दिया। राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की पुस्तक का हवाला देते हुए यह आरोप संसद में उठाए। इसके बावजूद कहा जा रहा है कि संसद में उन्हें अपनी बात पूरी तरह रखने नहीं दिया गया। यह मामला राजनीतिक बहस और सोशल मीडिया पर भी गहरी चर्चा का विषय बन गया है, जहां विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं जारी की हैं।
इस CM का राज्य के प्रबुद्धजन ही कर रहे विरोध… Ex IAS, डॉक्टरों और लेखकों ने चीफ जस्टिस से लगाई ये गुहार?
8 Feb, 2026 11:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा (Assam Chief Minister Himanta Biswa Sarma) के खिलाफ राज्य के 40 से अधिक रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों (Retired IAS officers), डॉक्टरों, शिक्षाविदों, लेखकों, पत्रकारों और अन्य प्रसिद्ध नागरिकों ने खुलकर विरोध जताया है। इन प्रबुद्ध नागरिकों ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री के कथित “नफरती भाषण” और एक विशेष समुदाय के खिलाफ दिए गए विवादित बयानों पर स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। उनका कहना है कि संवैधानिक उल्लंघनों के प्रति चुप्पी या निष्क्रियता संविधान की नैतिक शक्ति को कमजोर कर सकती है।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ( Chief Minister Himanta Biswa Sarma) ने कई सार्वजनिक मंचों पर ऐसे बयान दिए हैं जो प्रथम दृष्टया नफरती भाषण, सरकारी धमकी और एक खास समुदाय को बदनाम करने जैसे प्रतीत होते हैं। चिट्ठी में विशेष रूप से मुख्यमंत्री के ‘मियां’ (बांग्ला भाषी मुसलमानों) के खिलाफ दिए गए टिप्पणियों का उल्लेख किया गया है। इन लोगों ने चीफ जस्टिस से मांग की है कि वह इस मामले में संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करें।
CM के बयान को संविधान विरोधी बताया
पत्र में कहा गया है कि बांग्ला भाषी मुसलमान असम के समाज का हिस्सा बन चुके हैं, और मुख्यमंत्री के बयान अमानवीय, सामूहिक बदनामी और राज्य प्रायोजित उत्पीड़न की धमकियों जैसे हैं। यह टिप्पणी संविधान की भावना के खिलाफ मानी जा रही है। यहाँ यह भी महत्वपूर्ण है कि ‘मियां’ शब्द असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए अपमानजनक रूप से इस्तेमाल होता है। गैर-बांग्ला भाषी लोग इन्हें अक्सर बांग्लादेशी प्रवासी मानते हैं, जिससे समुदाय पर सामाजिक और राजनीतिक दबाव बढ़ता है।
पत्र पर साइन करने वालों में कौन-कौन?
गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखी इस चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वालों में कई प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं। इनमें विद्वान डॉ. हिरेन गोहेन, असम के पूर्व DGP हरेकृष्ण डेका, गुवाहाटी के पूर्व आर्कबिशप थॉमस मेनमपारामपिल, राज्यसभा सांसद अजीत कुमार भुइयां, रिटायर्ड IAS अधिकारी, वरिष्ठ पत्रकार, शिक्षाविद, कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। ज्ञापन में हस्ताक्षर करने वालों ने कहा है कि वे मौलिक अधिकारों के संरक्षक के रूप में गुवाहाटी हाई कोर्ट की संवैधानिक भूमिका में पूर्ण विश्वास रखते हैं और इसी विश्वास के साथ अदालत से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
हाई कोर्ट से क्या मांग की गई?
पत्र में हाई कोर्ट से कई महत्वपूर्ण निर्देशों की मांग की गई है, जिनमें शामिल हैं:
उचित मामले दर्ज करने के निर्देश
प्रभावित समुदाय की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय
सार्वजनिक पद धारकों के लिए संवैधानिक अनुशासन की पुष्टि
धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखने का निर्देश
विशेष रूप से, यह मांग की गई है कि गुवाहाटी हाई कोर्ट संविधान की मूल संरचना के हिस्से के रूप में धर्मनिरपेक्षता की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाए। यह ज्ञापन असम में बढ़ते सामाजिक तनाव और भाषणों के संभावित प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता का संकेत है, और इससे राज्य में संवैधानिक मूल्यों और साम्प्रदायिक सौहार्द की रक्षा के मुद्दे फिर से सामने आए हैं।
आरएसएस प्रमुख प्रमुख मोहन भागवत ने कहा -हिंदू शब्द विदेश से आया, देश में चार तरह के हिंदू... हम विश्व गुरु बनेंगे. लेकिन सिर्फ भाषणों से नहीं बल्कि उदाहरणों के जरिए।
8 Feb, 2026 11:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरएसएस के 100 वर्ष पूरा होने के अवसर पर मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि संघ ने पहले से तय किया कि संपूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ को और कोई दूसरा काम नहीं करना है।
भागवत ने कहा कि हम विश्व गुरु बनेंगे. लेकिन सिर्फ भाषणों से नहीं बल्कि उदाहरणों के जरिए। अगर आप भारतीय हैं तो ये हुनर आपको विरासत में मिला है। भारत के मुस्लिम और ईसाई भारत के हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में चार तरह के हिंदू हैं. पहले वो जो गर्व से कहते हैं कि हम हिंदू हैं. दूसरे वो जो कहते हैं कि हम हिंदू हैं तो क्या? इसमें गर्व करने वाली क्या बात है. तीसरे, वो जो कहते हैं कि धीरे से बोलो कि हम हिंदू हैं। अगर आप हमसे घर में पूछेंगे तो हम आपको बताएंगे कि हम हिंदू हैं और चौथे, वो जो भूल गए हैं कि हम हिंदू हैं। या फिर जिन्हें भूलने को विवश किया गया है कि वे हिंदू हैं।
भागवत ने हेडगेवार का जिक्र करते हुए कहा कि संघ ने पहले से तय किया है कि संपूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ को और कोई दूसरा काम नहीं करना है. बहुत कठिन परिस्थितियों में भी डॉ. हेडगेवार ने दो बातों को कभी नहीं छोड़ा. एक, अपनी पढ़ाई में हमेशा फर्स्ट क्लास आना; दूसरा, देश के लिए जो कुछ चल रहा था उसमें सक्रिय भाग लेना। ये उनके जीवन के स्थायी कार्य थे। संघ को लोकप्रियता नहीं चाहिए. संघ को पावर नहीं चाहिए. जितने भी भले काम देश में हो रहे हैं, वे ठीक से हो जाएं, उन्हें करने के लिए संघ है।
उन्होंने कहा कि हिंदू संज्ञा नहीं, विशेषण है, भारत में रहने वाले सभी हिंदू ही हैं। धर्मनिरपेक्षता गलत शब्द है. उसे पंथनिरपेक्षता कहना चाहिए क्योंकि धर्म जीवन का आधार है।
अमरावती में क्वांटम वैली का शिलान्यास, CM नायडू बोले- देश के लिए गेम-चेंजर साबित होगी
8 Feb, 2026 09:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमरावती (आंध्र प्रदेश): अमरावती ने भारत में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के भविष्य को आकार देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है. आंध्र प्रदेश को क्वांटम टेक्नोलॉजी में ग्लोबल लीडर बनाने के उद्देश्य से, शनिवार को 'अमरावती क्वांटम वैली' बिल्डिंग की नींव रखी गई. इस पहल से राज्य को भारत की क्वांटम क्रांति को लीड करने का मौका मिलने की उम्मीद है.
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ टुल्लुरु मंडल में अमरावती क्वांटम वैली का शिलान्यास किया. राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 50 एकड़ जमीन दी है. केंद्रीय राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर, राज्य मंत्री नारा लोकेश, कंडुला दुर्गेश और अन्य लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए.
ग्लोबल टेक्नोलॉजी की बड़ी कंपनियां IBM, TCS और L&T भारत का पहला 133-qubit क्वांटम कंप्यूटर अमरावती लाने में अहम भूमिका निभा रही हैं. क्वांटम वैली क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सिक्योरिटी, डिफेंस, हेल्थकेयर और फाइनेंस जैसे जरूरी सेक्टर में रिसर्च, इनोवेशन और स्किल डेवलपमेंट के लिए एक हब के तौर पर काम करेगी.
अमरावती को दुनिया के सबसे एडवांस्ड क्वांटम हब के साथ लाने के विजन के साथ, सीएम चंद्रबाबू नायडू ने इस बड़े प्रोजेक्ट का आइडिया दिया है. क्वांटम वैली से वर्ल्ड-क्लास रिसर्च इंस्टीट्यूशन, ग्लोबल टेक्नोलॉजी इन्वेस्टमेंट, स्टार्टअप इकोसिस्टम का विस्तार, युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर स्किल ट्रेनिंग और रोजगार के बड़े मौके मिलने की उम्मीद है.
राज्य सरकार की योजना इस साल अगस्त तक क्वांटम वैली बिल्डिंग को पूरा करने और दिसंबर तक क्वांटम कंप्यूटर लगाने की है. इस सुविधा का मकसद बोस्टन, सिंगापुर और शंघाई जैसे ग्लोबल क्वांटम सेंटर्स के बराबर खड़ा होना है.
अमरावती क्वांटम वैली देश के लिए गेम-चेंजर: सीएम चंद्रबाबू
कार्यक्रम में बोलते हुए, सीएम चंद्रबाबू ने कहा कि अमरावती क्वांटम कंप्यूटिंग सेंटर पूरे देश के लिए गेम-चेंजर साबित होगा. उन्होंने कहा, "राज्य का भविष्य छात्रों पर निर्भर करता है. मेरी उम्मीदें पूरी तरह से उन पर हैं. चाहे इतिहास लिखना हो या उसे फिर से लिखना हो, युवा ही यह कर सकते हैं. हमारे युवा टेक्नोलॉजी सेक्टर में क्वांटम स्पीड से आगे बढ़ रहे हैं. आज, हमने क्वांटम प्रोजेक्ट की नींव रखी है. भविष्य में, प्रोडक्शन और सप्लाई यहीं से होगी."
उन्होंने कहा, "हाईटेक सिटी (HITEC City) हैदराबाद के लिए गेम-चेंजर बन गया. लेकिन यह क्वांटम कंप्यूटिंग सेंटर देश के लिए गेम-चेंजर होगा. यहीं से दुनिया को नए इनोवेशन देने के मौके मिलेंगे. हमने यह सब अगले 40 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर प्लान किया है."
पीएम मोदी की तारीफ करते हुए चंद्रबाबू ने कहा कि देश को सही समय पर सही प्रधानमंत्री मिला है और उन्होंने नेशनल क्वांटम मिशन से आंध्र प्रदेश से अपनी एक्टिविटी शुरू करने का अनुरोध किया है. उन्होंने कहा कि TCS, IBM और L&T के साथ बातचीत हुई है और कंपनियों से कुछ महीनों में एग्रीमेंट पूरे करने को कहा गया है.
सीएम चंद्रबाबू नायडू ने कहा, "मैंने इस साल के आखिर तक पहला क्वांटम कंप्यूटर आने को कहा है. 14 अप्रैल को हम यहां दो और क्वांटम सेंटर बनाएंगे. 2030 तक देश को 2.5 लाख क्वांटम प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी. भारत में हर 100 आईटी प्रोफेशनल्स में से 35 तेलुगु हैं."
नायडू ने कहा, "क्वांटम कंप्यूटिंग और ग्रीन हाइड्रोजन वैली आंध्र प्रदेश के लिए गेम-चेंजर साबित होंगी. क्वांटम वैली की नींव रखने का यह दिन इतिहास में हमेशा रहेगा. अमरावती हमेशा जितेंद्र सिंह को याद रखेगा. आईटी मंत्री लोकेश आईटी डिपार्टमेंट को अच्छे से संभाल रहे हैं. इस महीने की 16 तारीख को बिल गेट्स अमरावती आएंगे."
संचार में बड़े बदलाव लाएगी क्वांटम कंप्यूटिंग
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार नेशनल क्वांटम मिशन को पूरा समर्थन दे रही है. उन्होंने कहा, "यह शिलान्यास देश के क्वांटम मिशन की नींव बनेगा. आंध्र प्रदेश तेजी से एडवांस्ड टेक्नोलॉजी अपना रहा है. हमने डीप सी मिशन को भी जल्दी मंजूरी दी. 2024 से, 'क्वांटम टेक्नोलॉजी' शब्द हर जगह सुनाई दे रहा है.
सिंह ने कहा, "क्वांटम कंप्यूटिंग मेडिकल सेक्टर में बड़े बदलाव लाएगा. क्वांटम मिशन सभी फील्ड में बहुत जरूरी होगा. इसीलिए हमने नेशनल क्वांटम मिशन के लिए 6,000 करोड़ रुपये दिए हैं. इनोवेशन के समय सब कुछ छोटा लगता है. बाद में ही उन इनोवेशन की असली कीमत पता चलती है. क्वांटम कंप्यूटिंग संचार के फील्ड में भी बड़े बदलाव लाएगा."
सोनिया गांधी का वोटर लिस्ट केस में कोर्ट को जवाब पेश, कहा-वोटर लिस्ट-नागरिकता सरकार के मसले
8 Feb, 2026 08:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । सोनिया गांधी ने नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में नाम जोड़े जाने के केस में अपना जवाब दाखिल किया है। शनिवार को राउज एवेन्यू कोर्ट को दिए जवाब में कहा उनके खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका गलत और अनुमानित तथ्यों पर आधारित है। यह याचिका ओछी राजनीति से प्रेरित और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। स्पेशल जज विशाल गोगने की कोर्ट में वकील के जरिए दायर जवाब में सोनिया ने भारतीय नागरिकता हासिल करने से पहले वोटर लिस्ट में शामिल होने से जुड़े आरोपों का खंडन किया। साथ ही पुनर्विचार याचिका को खारिज करने की मांग की है। मामले की सुनवाई अब 21 फरवरी को होगी।
सोनिया ने कोर्ट को जवाब देते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने ऑथेंटिक रिकॉर्ड की जगह अनुमानों, मीडिया रिपोर्टों और व्यक्तिगत धारणाओं के आधार पर लापरवाही से गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोपों में किसी भी खास दस्तावेज को जाली या गलत साबित नहीं किया गया है और जरूरी विवरण की कमी है। नागरिकता से जुड़े मामले केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जबकि वोटर लिस्ट तैयार करना और उसका रखरखाव चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। नागरिकता से जुड़े मामले पूरी तरह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। मतदाता सूची (इलेक्टोरल रोल) बनाना और उसे अपडेट रखना चुनाव आयोग की कानूनी जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में आपराधिक अदालतें अगर किसी व्यक्ति की निजी शिकायत पर दखल देती हैं, तो यह सही नहीं है। क्योंकि ऐसा करना चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप माना जाएगा।
इस बार विधानसभा चुनाव जीतकर ममता सीएम बनी तो तोड़ देंगी शीला दीक्षित का रिकॉर्ड
7 Feb, 2026 09:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में इस साल अप्रैल में विधानसभा चुनाव होना है। सीएम ममता बनर्जी अगर अगले कार्यकाल में भी सीएम बनती हैं तो वे दिल्ली की भूतपूर्व सीएम शीला दीक्षित का रिकार्ड तोड़ देंगी। शीला दीक्षित 15 साल 25 दिन तक सीएम रही थीं। बंगाल में फिलहाल ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस एकमात्र पार्टी है, जो बीजेपी से लोहा लेती रही हैं। ममता ने अपने दम पर साढ़े 3 दशक से ज्यादा समय तक बंगाल में शासन करने वाले वामपंथी दलों के ग्रुप- लेफ्ट फ्रंट को सत्ताच्यूत करने में पहली बार 2011 में सफलता पाई थी। तब से वे बंगाल पर एकछत्र राज कर रही हैं। देश में बीजेपी के उभार और पीएम मोदी की लहर के बावजूद ममता ने टीएमसी को अभी तक मजबूत बनाए रखा है। बंगाल के पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इस बार की तरह ही पूरी ताकत झोंक दी थी। पीएम मोदी से लेकर बीजेपी के तमाम छोटे-बड़े नेताओं ने बंगाल के तूफानी दौरे किए थे। नतीजे आए बीजेपी की सीटें विधानसभा में 2 से बढ़ कर 77 हो गईं। टीएमसी की सीटें भी घटीं, लेकिन ममता तीसरी बार सरकार बनाने में सफल रही।
विश्लेषकों ने इसे उनका करिश्मा नहीं, बल्कि मुस्लिम वोटों का ममता के पक्ष में इकतरफा ध्रुवीकरण माना। बंगाल में तकरीबन 30 फीसदी मुस्लिम आबादी है। टीएमसी को 2021 में 49 फीसदी वोट मिले थे। बीजेपी टीएमसी से 10 फीसदी वोट लाकर दूसरे नंबर पर रही। बीजेपी के प्रबल विरोध के बावजूद अपनी जीत से उत्साहित ममता ने पीएम बनने के सपने भी देखने शुरू कर दिए थे।
रिपोर्ट के मुताबिक शीला दीक्षित सबसे लंबे समय तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। वे 3 दिसंबर 1998 से 28 दिसंबर 2013 तक दिल्ली की सीएम रहीं। उनका कुल कार्यकाल 15 साल 25 दिन का रहा। उनके नाम एक और रिकार्ड है। दिल्ली में पुरुष और महिला मुख्यमंत्रियों में उनका नाम सर्वाधिक समय तक सीएम रहने वालों में सबसे ऊपर है। सीएम के रूप में उन्होंने दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर बनाने में अहम योगदान दिया। शीला दीक्षित के बाद महिला मुख्यमंत्रियों में सर्वाधिक समय का रिकार्ड ममता बनर्जी ने बना लिया है। ममता ने करीब 14 साल से अधिक का रिकार्ड बना लिया है, जो शीला दीक्षित से कुछ ही महीने कम है। लंबे समय तक सीएम रहने वाली तीसरी सीएम रहीं जे जयललिता वे 14 साल और 124 दिन तक तमिलनाडु की सीएम रही थीं।
बता दें देश में अब तक कुल 18 महिला मुख्यमंत्री बनी हैं। पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में सुचेता कृपलानी का नाम आता है। वे 1963 में यूपी की सीएम बनीं। दूसरी सीएम रहीं शीला दीक्षित। वे दिल्ली 15 साल से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहीं। पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी 2011 से अब तक सीएम पद पर हैं। अन्य महिला मुख्यमंत्रियों में सुचेता कृपलानी, नंदिनी सत्पथी (ओडिशा), शशिकला काकोडकर (गोवा), सैयदा अनवरा तैमूर (असम), वीए जानकी रामचंद्रन (तमिलनाडु), जे जयललिता (तमिलनाडु), मायावती (उत्तर प्रदेश), राजिंदर कौर भट्टल (पंजाब), राबड़ी देवी (बिहार), सुषमा स्वराज (दिल्ली), उमा भारती (मध्य प्रदेश), वसुंधरा राजे (राजस्थान), आनंदीबेन पटेल (गुजरात), मेहबूबा मुफ्ती (जम्मू-कश्मीर), आतिशी (दिल्ली) और रेखा गुप्ता (दिल्ली)।
ममता बनर्जी की मूल पार्टी कांग्रेस रही है। बाद में उन्होंने अपनी पार्टी- टीएमसी बनाई। वामपंथी शासन से लगातार लडती रहीं। आखिरकार उन्हें 2011 में वामपंथी शासन को खत्म करने में सफलता मिली। तब से उन्होंने दो अहम काम किए हैं। आधी आबादी के रूप में ख्यात महिला शक्ति को अपने साथ जोड़े रखने के लिए उन्होंने उनके लिए गर्भावस्था से लेकर बुढ़ापे तक के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाईं। उनकी लक्खी भंडार योजना बमाल की महिलाओं में सबसे पापुलर है। इसके अलावा भी उन्होंने कई योजनाएं युवाओं के लिए भी चलाई हैं। नतीजा यह कि मौजूदा विधानसभा में बीजेपी को छोड़ कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों के साथ दूसरी विरोधी भी शून्य पर हैं।
ममता बनर्जी यह भी समझ रही हैं कि बीजेपी से मुकाबला इस बार पहले के मुकाबले थोड़ा कठिन है। इसकी वजह यह है कि पिछली बार उन्हें जो 49 फीसदी वोट मिले थे, उसमें 30 फीसदी तो अकेले मुस्लिम थे। बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए मुसलमानों ने कांग्रेस और वामपंथियों का मोह त्याग कर एकमुश्त टीएमसी को वोट किया था यानी 70 फीसदी हिन्दुओं में सिर्फ 19 फीसदी वोट ही उन्हें मिले थे1 इस बार टीएमसी से निष्कासित नेता हुमायू कबीर के अलग पार्टी बना लेने से मुस्लिम वोटों में विभाजन का खतरा पैदा हो गया है। ओवैसी ने भी हुमायू कबीर से हाथ मिला लिया है1 यह मुस्लिम मतों में विभाजन का स्पष्ट संकेत है। तीसरा खतरा बन कर उभरी हैं ईडी और सीबीआई जैसी केंद्री जांच एजेंसियां उनसे ममता लगातार पंगा लेती रही हैं, लेकिन आई-पैक रेड मामले में उनकी परेशानी बढ़ सकती है।
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