राजनीति
चुनावी तैयारी से पहले कांग्रेस का बड़ा संगठनात्मक फैसला
13 Feb, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने संगठनात्मक ढांचे में अनुशासन और संतुलन कायम करने के उद्देश्य से बड़ा निर्णय लेते हुए छिंदवाड़ा, सागर, मऊगंज और झाबुआ जिलों की कार्यकारिणी भंग कर दी है. यह कदम अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) द्वारा जारी नई गाइडलाइन के बाद उठाया गया है, जिसमें जिलों में पदाधिकारियों की संख्या सीमित रखने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं. हालांकि, अब कांग्रेस के सामने मशक्कत ज्यादा होगी कि बाकी के जिलों में कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाए।
क्या हैं AICC के निर्देश?
AICC ने सभी राज्यों को निर्देशित किया है कि छोटे जिलों में कार्यकारिणी की अधिकतम सदस्य संख्या 31 और बड़े जिलों में 51 से अधिक नहीं होनी चाहिए।
पार्टी का मानना है कि अत्यधिक बड़े संगठनात्मक ढांचे से कार्यकुशलता प्रभावित होती है और जवाबदेही कमजोर पड़ती है।
इसी के मद्देनजर राज्यों को संतुलित और प्रभावी कार्यकारिणी बनाने के लिए कहा गया है।
दिलचस्प बात यह है कि केंद्रीय निर्देश जारी होने के दो दिन पहले ही इन चारों जिलों में नई कार्यकारिणियों की घोषणा की गई थी।
विशेष रूप से छिंदवाड़ा जिले में 250 से अधिक पदाधिकारी बनाए जाने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद संगठन के भीतर ही इस पर सवाल खड़े होने लगे।
इसे लेकर केंद्रीय नेतृत्व ने गंभीरता दिखाई और राज्य इकाई से स्पष्टीकरण मांगा।
भारी भरकम नहीं बल्कि छोटी होगी कार्यकारिणी
सूत्रों के अनुसार प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने स्थिति की समीक्षा के बाद तत्काल प्रभाव से चारों जिलों की कार्यकारिणी निरस्त कर दी. अब नई गाइडलाइन के अनुरूप सीमित, सक्रिय और जिम्मेदार टीम का गठन किया जाएगा. पार्टी का उद्देश्य है कि संगठन में केवल सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी मिले और पदों का अनावश्यक विस्तार रोका जाए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम आगामी चुनावी तैयारियों को ध्यान में रखते हुए संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने की दिशा में उठाया गया है. कांग्रेस नेतृत्व अब जमीनी स्तर पर मजबूत संरचना खड़ी करने पर जोर दे रहा है, ताकि बूथ स्तर तक प्रभावी तालमेल बनाया जा सके।
फीडबैक लेने के लिए संभागों में निकले जीतू
प्रदेश कांग्रेस जल्द ही चारों जिलों में नए सिरे से कार्यकारिणी गठन की प्रक्रिया शुरू करेगी. माना जा रहा है कि इस बार सदस्य संख्या सीमित रखते हुए कार्यक्षमता और प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी. इसके साथ ही बाकी जिलों की भी कार्यकारिणी का भी गठन किया जाएगा. PCC चीफ जीतू पटवारी फिलहाल मध्य प्रदेश के अलग-अलग संभागों में जाकर बैठक कर रहे हैं और फीडबैक ले रहे हैं।
पीएम मोदी और शाह से मिली सुनेत्रा पवार........शरद गुट के साथ विलीनीकरण का मुद्दा ठड़े बस्ते में
13 Feb, 2026 11:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र की नवनियुक्त उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। अपने पति और एनसीपी नेता अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद पदभार संभालने वाली सुनेत्रा का यह पहला दिल्ली दौरा है।
सुनेत्रा के साथ इस दौरे पर उनके दोनों बेटे, पार्थ और जय, तथा एनसीपी के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे भी मौजूद थे। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अजित पवार के निधन पर गहरा दुख जताया और सुनेत्रा पवार को उनके नए उत्तरदायित्व के लिए केंद्र के पूर्ण समर्थन का भरोसा दिया।
इन चर्चाओं के विपरीत, एनसीपी (अजित पवार गुट) के नेताओं ने स्पष्ट किया कि शरद पवार गुट के साथ विलीनीकरण का मुद्दा वर्तमान एजेंडे में शामिल नहीं है। पार्टी के कई विधायक विलीनीकरण के विचार का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
एनसीपी का अजित पवार गुट मर्जर का विरोध जारी रखे हुए है। अजित के साथ जुड़े नेताओं ने किसी भी तरह के कंसोलिडेशन के साथ जाने से मना किया है। दौरे के दौरान एनसीपी और एनसीपी (एसपी) के मर्जर के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई, और यह एजेंडा में भी नहीं था।
बात दें कि सुनेत्रा पवार ने अभी तक राज्यसभा से इस्तीफा नहीं दिया है। वह फिलहाल अपने अगले पॉलिटिकल कदम के बारे में “वेट एंड वॉच” अप्रोच अपना रही हैं। वहीं सुनेत्रा को नेशनल प्रेसिडेंट बनाने पर पार्टी में आम सहमति है।
नेशनल प्रेसिडेंट बनाने का प्रोसेस फरवरी के आखिर तक शुरू होने की उम्मीद है। इन कदमों को फॉर्मल बनाने के लिए मुंबई में नेशनल एग्जीक्यूटिव की मीटिंग होगी। वहीं खबर है कि पार्टी पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने को लेकर पॉजिटिव है।
भाजपा ने की राहुल गांधी की सांसदी रद्द करने की मांग, पेश किया मूल प्रस्ताव
13 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भाजपा ने गुरुवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने यूएस के साथ ट्रेड डील को लेकर सरकार पर झूठा आरोप लगाकर हमला किया। उन्होंने लोकसभा में कांग्रेस नेता के खिलाफ एक मूल प्रस्ताव पेश किया। यह प्रस्ताव लेजिस्लेटिव बॉडी में एक टूल है ताकि प्रस्ताव स्वीकार होने पर उस पर चर्चा और फैसला हो सके। फैसला वोटों के माध्यम से होता है। यह प्रस्ताव कोई भी सदस्य पेश कर सकता है। भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि उन्होंने नोटिस में बताया है कि राहुल गांधी सोरोस फाउंडेशन, फोर्ड फाउंडेशन और एसएआईडी के साथ जुड़े हैं और भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम और यूएस जैसे देशों की यात्रा की है।
अपने नोटिस में, बीजेपी सांसद ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने विदेशी संगठनों की मदद से बहुत चालाकी से संसद के सबसे पवित्र मंच पर कब्जा कर लिया है ताकि लोगों की भावनाएं भडक़ाई जा सकें, न केवल भारत के चुनाव आयोग बल्कि हमारे माननीय सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ भी बेबुनियाद आरोप लगाए हैं, बिना किसी ठोस सबूत के सरकार की इज्जत कम की है और कई दूसरे संस्थानों को गलत तरह से दिखाया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गलत कामों की दुनिया में चले गए हैं और ‘भारत को अंदर से अस्थिर करने वाले ठग गैंग’ का एक बड़ा हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि संसद के अंदर और बाहर उनके लगातार और सोचे-समझे काम हमारे देश के लिए नुकसानदायक हैं, जो देश के कोने-कोने में चर्चा का एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने अपने नोटिस में कहा कि अगर मैं, एक जिम्मेदार पब्लिक रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर - भले ही मेरा असर कम हो और बैकग्राउंड भी साधारण हो - यह बात आपके ध्यान में नहीं लाता, तो मैं अपने देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को बनाए रखने की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी के साथ न्याय नहीं कर पाऊंगा। इसे देखते हुए, मैं नीचे दिए गए चार गंभीर कामों को आपके ध्यान में लाना चाहता हूं।
राघव चड्ढा ने संसद में उठाया ‘राइट टू रिकॉल’ का मुद्दा” जानिए किन देशों में लागू है यह व्यवस्था?
13 Feb, 2026 09:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (MP Raghav Chadha) ने बुधवार को संसद (Parliament) में ‘राइट टू रिकॉल’ पर चर्चा कर सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने कहा कि अगर चुने हुए नेता जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप काम नहीं करते हैं, तो वोटर्स को उन्हें कार्यकाल पूरा होने से पहले हटाने का अधिकार होना चाहिए।
शून्यकाल के दौरान अपने संबोधन में चड्ढा ने कहा, “जैसे मतदाताओं को वोट डालने का अधिकार है, वैसे ही काम न करने पर उन्हें अपने जनप्रतिनिधि को हटाने का हक भी होना चाहिए। ‘राइट टू रिकॉल’ लोकतंत्र को मजबूत बनाएगा और नेताओं को जवाबदेह बनायेगा।”
राइट टू रिकॉल क्या है?
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर बताया कि राइट टू रिकॉल एक ऐसी प्रक्रिया है जो मतदाताओं को किसी चुने हुए जनप्रतिनिधि का कार्यकाल खत्म होने से पहले उन्हें पद से हटाने का अधिकार देती है। सरल शब्दों में, अगर मतदाता अपने नेता के काम से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे उसे हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
राष्ट्रपति और जज को हटाया जा सकता है, नेताओं को क्यों नहीं?
चड्ढा ने तर्क दिया कि भारत में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और न्यायाधीशों के लिए पहले ही महाभियोग की व्यवस्था है और सरकारों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जा सकता है। ऐसे में चुने हुए नेताओं के लिए भी यही अधिकार होना चाहिए।
दुरुपयोग रोकने के उपाय
सांसद ने यह स्पष्ट किया कि राइट टू रिकॉल केवल लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने का साधन है, किसी नेता के खिलाफ हथियार नहीं। इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए उन्होंने कुछ शर्तें सुझाईं:
जनप्रतिनिधि को हटाने के लिए लगभग 35–40% मतदाताओं के हस्ताक्षर आवश्यक हों।
नेता को 18 महीने का ‘परफॉर्मेंस पीरियड’ दिया जाए, ताकि वह सुधार कर सके।
ऐसा होने पर पार्टियां भी योग्य और काम करने वाले नेताओं को ही टिकट देंगी।
किन देशों में लागू है यह व्यवस्था?
चड्ढा ने बताया कि अमेरिका, स्विट्जरलैंड और कनाडा सहित दुनिया के 20 से अधिक लोकतांत्रिक देशों में राइट टू रिकॉल लागू है। भारत में कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान की ग्राम पंचायतों में भी यह प्रावधान मौजूद है। इसके अलावा, इस अधिकार से मतदाता अमेरिका, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, वेनेज़ुएला, पेरू, इक्वाडोर, जापान, ताइवान और कनाडा में अपनी सरकार को जवाबदेह बना सकते हैं।
'विशेषाधिकार' प्रस्ताव के सवाल पर मीडिया पर भड़के राहुल गांधी, लगाये गंभीर आरोप
13 Feb, 2026 08:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी गुरुवार को मीडियाकर्मियों के एक वर्ग पर अपना आपा खो बैठे, जब उन्होंने बजट सत्र के दौरान सत्ताधारी दल द्वारा उनके खिलाफ संभावित विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव (Privilege Motion) को लेकर सवाल पूछा. राहुल ने पत्रकारों पर तंज कसते हुए पूछा, "क्या आपको आज के लिए यह कोड वर्ड दिया गया है?" उन्होंने मीडिया से अपने काम में निष्पक्ष रहने और अपने पेशे की गरिमा बनाए रखने को कहा.
बुधवार 11 फरवरी 2026 को राहुल गांधी ने लोकसभा में एक भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कुछ बड़े उद्योगपतियों के बीच कथित संबंधों का जिक्र किया था. उन्होंने कुछ आरोप लगाए थे. इसको लेकर काफी विवाद हुआ. पहले यह कहा जा रहा था कि सत्ता पक्ष राहुल गांधी के खिलाफ प्रिविलेज मोशन लाएगी.
हालांकि, अभी तक इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है कि सत्तापक्ष उनके खिलाफ कोई प्रस्ताव ला रहा है या नहीं. सरकार के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि विशेषाधिकार प्रस्ताव की संभावना कम है. यह जानकारी आयी कि सरकार ने फैसला किया कि राहुल गांधी के खिलाफ प्रिविलेज मोशन नहीं लाया जाएग, बल्कि उनके भाषण के कुछ शब्दों/लाइनों को संसद की रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा, क्योंकि वे बिना प्रमाण के थे.
गुरुवार 12 फरवरी को जब राहुल संसद परिसर के बाहर अपनी कार की ओर जा रहे थे, तो पत्रकारों ने उनके खिलाफ संभावित विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव (Privilege Motion) पर उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए उन्हें घेर लिया. इस बात से वे स्पष्ट रूप से भड़क गए और पत्रकारों से पूछा, "क्या आज के लिए 'विशेषाधिकार' कोड वर्ड है? क्या आज के लिए आपको यह शब्द दिया गया है?"
पत्रकारों पर और हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, "कल शब्द 'प्रमाणीकरण' था, आज यह 'विशेषाधिकार' है. आपको कुछ निष्पक्ष काम करने की कोशिश करनी चाहिए. उन्होंने आगे कहा, "आप जिम्मेदार लोग हैं, आप मीडिया के लोग हैं, आपकी जिम्मेदारी निष्पक्ष रहने की है. आप इस देश का अहित कर रहे हैं. क्या आप इसे पहचान नहीं पा रहे हैं?"
लोकसभा में हंगामे के चलते कार्यवाही स्थगित, राज्यसभा में भी उठा दलित उत्पीड़न का मुद्दा
12 Feb, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद प्लेकार्ड लेकर वेल में पहुंच गए और जोरदार नारेबाजी करने लगे। हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
लोकसभा में आसन पर कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी विराजमान थे। कार्यवाही शुरू होने के तुरंत बाद विपक्षी सदस्य अपनी मांगों को लेकर वेल में आ गए। स्पीकर द्वारा बार-बार शांत रहने की अपील के बावजूद विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी जारी रखी। हंगामे के चलते करीब सात मिनट के बाद ही स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
वहीं, राज्यसभा की कार्यवाही की शुरुआत अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रही। शून्यकाल के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने ओडिशा में एक दलित व्यक्ति के साथ कथित अमानवीय व्यवहार का मुद्दा उठाया। उन्होंने मध्य प्रदेश में हुई एक पुरानी घटना का भी जिक्र करते हुए सरकार से जवाब मांगा। हालांकि बाद में राज्यसभा में भी इस मुद्दे को लेकर हंगामा देखने को मिला। बजट सत्र के दौरान दोनों सदनों में लगातार हो रहे हंगामे से विधायी कार्य प्रभावित हो रहा है। विपक्ष जहां विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति अपना रहा है, वहीं सरकार सुचारु रूप से सदन चलाने की अपील कर रही है।
रिजिजू ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगा स्पीकर चैंबर का वीडिया कर दिया जारी
12 Feb, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान गुरुवार 12 फरवरी को लोकसभा में एक बार फिर हंगामे के चलते प्रश्नकाल नहीं चल सका। इसी बीच संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें लोकसभा स्पीकर के चैंबर में हुए कथित हंगामे का जिक्र किया गया है। रिजिजू ने दावा किया कि विपक्षी सांसदों ने प्रियंका गांधी की मौजूदगी में स्पीकर को अपशब्द कहे। उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा।
वहीं दूसरी ओर, मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि सरकार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव ला सकती है। खुद रिजिजू ने भी राहुल गांधी द्वारा सरकार पर लगाए गए आरोपों के संदर्भ में प्रिविलेज मोशन लाने की बात कही थी।
भाजपा सांसदों के तीखे बयान
बीजेपी सांसद रेखा शर्मा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं और बिना सोचे-समझे किसी का नाम लेकर आरोप लगा देते हैं। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाना उचित कदम है। वहीं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ नोटिस देने की बात कही। दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने उनकी सदस्यता समाप्त करने और आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी की है।
प्रियंका गांधी ने आरोपों को झूठा बताया
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने रिजिजू के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी ने स्पीकर को गाली नहीं दी। उन्होंने कहा कि एक-दो सांसद भावुक हो गए थे, लेकिन उन्हें उकसाने या बढ़ावा देने का आरोप पूरी तरह झूठ है। प्रियंका ने कहा कि वह चुपचाप बैठी थीं और अंत में शांतिपूर्वक अपनी बात रखी।
राइट टू हेल्थ पर चिकित्सा मंत्री के बयान से सियासत तेज, गहलोत का तीखा पलटवार
12 Feb, 2026 05:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जयपुर। राजस्थान में राइट टू हेल्थ एक्ट को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। विधानसभा में गुरुवार को राइट टू हेल्थ को लेकर चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा चुनावी फायदे के लिए जाते जाते कांग्रेस सरकार यह बिल लाई थी। चिकित्सा मंत्री के बयान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि मंत्री का बयान न सिर्फ निंदनीय है, बल्कि गरीब लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने के समान है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक्स पर लिखा कि आज विधानसभा में चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने 'राइट टू हेल्थ' पर बयान दिया कि इसकी जरूरत ही नहीं है। उनका यह बयान न सिर्फ निंदनीय है, बल्कि बढ़ते मेडिकल खर्च से परेशान गरीब एवं मध्यम वर्ग के जख्मों पर नमक के समान है।
भाजपा सरकार राइट टू हेल्थ के नियम बनाने में विफल
उन्होंने कहा कि हमारी कांग्रेस सरकार ने यूनिवर्सल हेल्थकेयर योजनाएं जैसे चिरंजीवी योजना एवं निरोगी राजस्थान योजना लागू होने के बावजूद राइट टू हेल्थ की परिकल्पना की। जिससे किसी भी कारणवश आपातकालीन स्थिति में मरीज इलाज से वंचित न रहे। भाजपा सरकार राइट टू हेल्थ के नियम बनाने में विफल रही है और अब इस तरह की बहानेबाजी कर रही है।
मेडिकल लॉबी के सामने भाजपा सरकार का सरेंडर
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि प्रदेशवासी देख रहे हैं कि जहां कांग्रेस सरकार राइट टू हेल्थ देकर उन्हें महंगे इलाज के खर्च से बचाने का इरादा रखती थी। वहीं, भाजपा सरकार मेडिकल लॉबी के सामने सरेंडर कर राइट टू हेल्थ तक को गलत बता रही है।
लोस में हंगामा: राहुल गांधी ने बोला तीखा हमला, भारत माता को बेचने का लगाया आरोप
12 Feb, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । संसद के बजट सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा में उस समय भारी हंगामा देखने को मिला, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। केंद्रीय बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि इस समझौते के जरिए सरकार ने डेढ़ अरब भारतीयों के भविष्य को बंधक रख दिया है।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा, किसानों के हितों और कपड़ा क्षेत्र के लिए अमेरिका के समक्ष पूरी तरह से समर्पण है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, आप सदन में इस करार का बचाव कैसे कर सकते हैं? क्या आपको शर्म नहीं आती? आपने भारत को बेच दिया है, आपने हमारी माँ भारत माता को बेच दिया है।
कांग्रेस नेता ने विशेष रूप से कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि सोयाबीन, कपास, मक्का और लाल ज्वार उगाने वाले भारतीय किसानों को विशाल अमेरिकी मशीनीकृत खेतों की दया पर छोड़ दिया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि बांग्लादेश-अमेरिका व्यापार सौदे के बाद भारत का कपड़ा उद्योग पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। राहुल गांधी ने केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने देश का महत्वपूर्ण डेटा अमेरिका को सौंप दिया है। उन्होंने सवाल किया कि कोई भी प्रधानमंत्री ऐसे समझौते के लिए तब तक तैयार नहीं हो सकता, जब तक कि उन पर कोई भारी दबाव न हो। उन्होंने आरोप लगाया कि एक खास राजनीतिक वित्तीय ढांचे और विदेशी कानूनी मामलों से बचने के लिए देश के हितों की बलि दी गई है।अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने एपस्टीन मामले का जिक्र करते हुए दावा किया कि तीस लाख फाइलें अब भी बंद हैं। उन्होंने कुछ उद्योगपतियों का नाम लेते हुए पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर भी निशाना साधा। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष और आसन पर बैठे जगदंबिका पाल ने उन्हें उन लोगों के नाम लेने से रोका जो सदन के सदस्य नहीं हैं।
सरकार की ओर से तीखी प्रतिक्रिया
विपक्ष के इन तीखे हमलों पर सरकार ने भी कड़ा रुख अपनाया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने सदन में स्पष्ट किया कि भारत की संप्रभुता सर्वोपरि है और कोई भी भारत को बेच या खरीद नहीं सकता। वहीं, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बाद में एक संवाददाता सम्मेलन में राहुल गांधी के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि एपस्टीन फाइलों के संदर्भों की चुनिंदा और गलत व्याख्या की जा रही है और केवल राजनीति चमकाने के लिए बार-बार इनका इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि यह व्यापार समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक कदम है।
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने राज्यसभा में उठाया जातिगत भेदभाव का मुद्दा, बोले- सामाजिक न्याय संविधान की आत्मा
12 Feb, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में जातिगत भेदभाव का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि दलितों, वंचितों और कमजोर वर्गों के उत्थान की बातें अक्सर की जाती हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि इन्हें जमीन पर उतारने की ठोस पहल हो। सामाजिक न्याय केवल एक नारा नहीं, बल्कि संविधान की आत्मा है और इसकी रक्षा करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने ओडिशा की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि इक्कीसवीं सदी में जब हम सामाजिक विकास और एकता की बात करते हैं, तब ऐसी घटनाएं हमें आईना दिखाती हैं। उन्होंने बताया कि ओडिशा के एक आंगनवाड़ी केंद्र में पिछले तीन महीनों से बहिष्कार चल रहा है, क्योंकि वहां भोजन एक दलित महिला हेल्पर और कुक द्वारा तैयार किया जा रहा है। समुदाय विशेष के कुछ लोग अपने बच्चों को वह भोजन देने से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक महिला का अपमान नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक चेतना की परीक्षा है।
उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास की बुनियाद होते हैं। यदि वहां जातिगत पूर्वाग्रह को बढ़ावा मिलेगा, तो इसका असर बच्चों के मन और भविष्य पर पड़ेगा। छोटे बच्चों के सामने इस तरह का भेदभाव उनके भीतर विभाजन और नफरत के बीज बो सकता है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 21(क) के तहत शिक्षा के अधिकार और अनुच्छेद 47 के तहत राज्य की पोषण संबंधी जिम्मेदारी की भावना के खिलाफ बताया।
खड़गे ने कहा कि इस घटना को केवल एक सामाजिक विवाद मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इसे कार्यस्थलों पर व्यापक जाति-आधारित भेदभाव के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने मध्य प्रदेश में एक आदिवासी मजदूर के साथ हुई अमानवीय घटना, गुजरात में एक दलित सरकारी कर्मचारी की कथित उत्पीड़न के बाद आत्महत्या और चंडीगढ़ में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की मृत्यु के बाद सामने आए संस्थागत भेदभाव के आरोपों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, ये घटनाएं दर्शाती हैं कि जातिगत पूर्वाग्रह समाज के साथ-साथ संस्थागत ढांचे में भी मौजूद है।
संविधान का हो रहा उल्लंघन
उन्होंने कहा कि ऐसा व्यवहार संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 17 का स्पष्ट उल्लंघन है, जो समानता, भेदभाव निषेध और अस्पृश्यता उन्मूलन की गारंटी देते हैं। साथ ही, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम जैसे सख्त कानून भी ऐसे अपराधों को रोकने और दोषियों को दंडित करने के लिए मौजूद हैं।
ऐसे मामलों को गंभीरता से ले सरकार
खड़गे ने सरकार से मांग की कि ऐसे मामलों को अत्यंत गंभीरता से लिया जाए। जहां भी जातिगत भेदभाव की घटनाएं सामने आएं, वहां त्वरित और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए तथा पीड़ितों को सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने आंगनवाड़ी जैसे संवेदनशील संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाने की भी जरूरत बताई, ताकि बच्चों के मन में बराबरी, सम्मान और सामाजिक समरसता के संस्कार विकसित हो सकें।
हुमायूं कबीर का सीएम योगी को खुला चैलेंज, बोले- बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाएंगे
12 Feb, 2026 01:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल चुनाव (West Bengal elections) से पहले बाबरी मस्जिद (Babri Mosque) को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है। अब इस मामले में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) की भी एंट्री हो गई है। सीएम योगी के बाबरी मस्जिद संबंधी बयान के बाद पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेता और जनता उन्नयन पार्टी प्रमुख हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) ने पलटवार किया है।
मंगलवार को हुमायूं कबीर ने कहा कि वे मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नकल वाली मस्जिद जरूर बनाएंगे और इसे कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने सीधे चुनौती देते हुए कहा, “मस्जिद बनाकर रहूंगा, रोक सको तो रोक लो।”
क्या कहा हुमायूं कबीर ने?
मीडिया से बातचीत में हुमायूं ने कहा कि यह लखनऊ या अयोध्या नहीं है, यह बंगाल है और यहां ममता बनर्जी का शासन है। भारतीय संविधान के अनुसार मुसलमानों को भी मस्जिद बनाने का पूरा अधिकार है, जैसे अन्य लोग मंदिर या चर्च बनाते हैं। उन्होंने बताया कि 6 दिसंबर 2025 को बाबरी ढांचे के गिराए जाने की वर्षगांठ पर उन्होंने मस्जिद की नींव रखी थी और 11 फरवरी 2026 से निर्माण कार्य शुरू होगा।
हुमायूं ने कहा कि सुबह 10 बजे लगभग 1200 लोग कुरान पढ़ते हुए निर्माण कार्य की शुरुआत करेंगे। उन्होंने फिर से योगी को चुनौती दी कि अगर रोकना है तो रोककर दिखाएं, लेकिन वे किसी से नहीं डरते और किसी दबाव में नहीं आएंगे।
योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा था?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले कहा था कि ‘कयामत’ का दिन कभी नहीं आएगा और बाबरी ढांचा दोबारा कभी नहीं बनेगा। बाराबंकी में उन्होंने कहा, “हमने कहा था कि रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। मंदिर बन गया है। जो लोग कयामत के दिन के आने का सपना देख रहे हैं, वे ऐसे ही सड़-गल जाएंगे।”
योगी ने आगे कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण 500 वर्षों के बाद संभव हुआ। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि संकट के समय राम याद आते हैं और बाकी समय भूल जाते हैं, इसलिए अब उनका मौका कभी नहीं आएगा।
RSS कार्यक्रम में सलमान खान की मौजूदगी पर सियासत, बोले शिंदे- “वे भारतीय नागरिक हैं”
12 Feb, 2026 12:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने अभिनेता सलमान खान (Salman khan) के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने पर उठे विवाद का जवाब दिया है। शिंदे ने कहा कि किसी भारतीय नागरिक के ऐसे कार्यक्रम में जाने पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा, “सलमान खान भारतीय नागरिक हैं। वे अपने घर में भगवान गणेश की स्थापना करते हैं, हमारी संस्कृति का सम्मान करते हैं और उनका परिवार भी यही परंपरा निभाता है।” शिंदे के अनुसार, किसी सांस्कृतिक या वैचारिक कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति को राजनीतिक रंग देना सही नहीं है।
कार्यक्रम में भागवत का संबोधन सुना
सलमान खान हाल ही में मुंबई में आयोजित RSS के शताब्दी वर्ष से जुड़े एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान वे संघ प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन को ध्यानपूर्वक सुनते दिखाई दिए। इस अवसर पर फिल्मकार सुभाष घई तथा गीतकार-लेखक प्रसून जोशी भी मौजूद थे।
नेहरू सेंटर में आयोजित व्याख्यान शृंखला
वर्ली स्थित नेहरू सेंटर में “संघ की 100 साल की यात्रा: नए क्षितिज” शीर्षक से दो दिवसीय व्याख्यान शृंखला आयोजित की गई। इसका उद्देश्य RSS की स्थापना से लेकर अब तक की यात्रा, समाज में उसकी भूमिका और भविष्य की दिशा पर चर्चा करना बताया गया।
कार्यक्रम स्थल पर सलमान खान के पहुंचते ही मौजूद लोगों ने उनके साथ तस्वीरें लेने की कोशिश की। यह आयोजन संघ के व्यापक शताब्दी अभियान का हिस्सा है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से आए आमंत्रित वक्ताओं ने भाग लिया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच बयान
सलमान खान की इस उपस्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई थी, जिसके बाद शिंदे का यह बयान सामने आया। उन्होंने दोहराया कि मुंबई में रहने वाले किसी व्यक्ति का शहर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होना स्वाभाविक है और इसे विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
भाजपा ओवैसी को ‘अलादीन का चिराग’ बनाकर वोट बटोरती है: सीएम रेवंत रेड्डी
12 Feb, 2026 11:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी (Chief Minister Revanth Reddy) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी चुनावी लाभ के लिए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) का इस्तेमाल करती है। उन्होंने कहा कि भाजपा ओवैसी को मुद्दा बनाकर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश करती है।
सोमवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में रेवंत रेड्डी ने कहा कि भाजपा की राजनीति में ओवैसी एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु बन चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सार्वजनिक रूप से भगवान राम का नाम लेती है, लेकिन राजनीतिक रणनीति में ओवैसी को केंद्र में रखती है। उनके अनुसार, भाजपा बार-बार ओवैसी का उल्लेख कर ध्रुवीकरण की राजनीति करती है।
हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी (Chief Minister Revanth Reddy) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी चुनावी लाभ के लिए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) का इस्तेमाल करती है। उन्होंने कहा कि भाजपा ओवैसी को मुद्दा बनाकर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश करती है।
सोमवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में रेवंत रेड्डी ने कहा कि भाजपा की राजनीति में ओवैसी एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु बन चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सार्वजनिक रूप से भगवान राम का नाम लेती है, लेकिन राजनीतिक रणनीति में ओवैसी को केंद्र में रखती है। उनके अनुसार, भाजपा बार-बार ओवैसी का उल्लेख कर ध्रुवीकरण की राजनीति करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा हर चुनाव में ओवैसी को “अलादीन का जादुई चिराग” की तरह इस्तेमाल करती है और उनके नाम पर वोट मांगती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भाजपा ओवैसी की विचारधारा की आलोचना करती है, तो फिर उन्हें राजनीतिक मुद्दा बनाकर बार-बार क्यों उछाला जाता है।
रेवंत रेड्डी ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में AIMIM एक वैध राजनीतिक दल है, जो विभिन्न राज्यों में चुनाव लड़ता है और जहां समर्थन मिलता है वहां जीत दर्ज करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी को केवल विरोध के आधार पर राजनीतिक अस्तित्व बनाए रखने के बजाय नीतियों और विकास के मुद्दों पर जनता के बीच जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने भाजपा पर वैचारिक कमजोरी का आरोप लगाते हुए कहा कि धार्मिक भावनाओं और व्यक्तियों को केंद्र में रखकर राजनीति करना “आइडियोलॉजिकल गरीबी” को दर्शाता है। उन्होंने तेलंगाना के मतदाताओं से सोच-समझकर मतदान करने की अपील भी की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा हर चुनाव में ओवैसी को “अलादीन का जादुई चिराग” की तरह इस्तेमाल करती है और उनके नाम पर वोट मांगती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भाजपा ओवैसी की विचारधारा की आलोचना करती है, तो फिर उन्हें राजनीतिक मुद्दा बनाकर बार-बार क्यों उछाला जाता है।
रेवंत रेड्डी ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में AIMIM एक वैध राजनीतिक दल है, जो विभिन्न राज्यों में चुनाव लड़ता है और जहां समर्थन मिलता है वहां जीत दर्ज करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी को केवल विरोध के आधार पर राजनीतिक अस्तित्व बनाए रखने के बजाय नीतियों और विकास के मुद्दों पर जनता के बीच जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने भाजपा पर वैचारिक कमजोरी का आरोप लगाते हुए कहा कि धार्मिक भावनाओं और व्यक्तियों को केंद्र में रखकर राजनीति करना “आइडियोलॉजिकल गरीबी” को दर्शाता है। उन्होंने तेलंगाना के मतदाताओं से सोच-समझकर मतदान करने की अपील भी की।
ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव पर कांग्रेस को TMC से झटका, विपक्ष में एकजुटता पर सवाल
12 Feb, 2026 10:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) के खिलाफ प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही कांग्रेस को तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस सांसदों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जबकि टीएमसी (TMC) ने इससे दूरी बना ली है। इससे विपक्षी दलों की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, सोमवार शाम तक प्रस्ताव संबंधी नोटिस पर करीब 102 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), द्रमुक (डीएमके) और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने इस पहल का समर्थन किया है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के कई सांसदों के साथ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं।
हालांकि विपक्ष की एक प्रमुख सहयोगी पार्टी टीएमसी के सदस्यों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए। सूत्रों का कहना है कि यदि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का अवसर दिया जाता है तो कांग्रेस प्रस्ताव वापस लेने पर विचार कर सकती है।
संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत यह प्रस्ताव मंगलवार को लोकसभा सचिवालय को सौंपे जाने की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की टिप्पणियों पर कार्रवाई नहीं हुई तथा कांग्रेस की महिला सांसदों पर बिना साक्ष्य आरोप लगाए गए।
सोमवार को हुई विपक्षी दलों की बैठक में टीएमसी, वाम दल, डीएमके, सपा, राष्ट्रीय जनता दल, शिवसेना (उद्धव गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) सहित कई दल शामिल हुए थे। इसके बावजूद प्रस्ताव पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी।
विपक्ष का कहना है कि दो फरवरी से सदन में गतिरोध बना हुआ है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़ा मुद्दा उठाने की अनुमति नहीं दिए जाने के बाद विवाद बढ़ा। साथ ही, सदन की अवमानना के मामले में आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन ने भी तनाव को और बढ़ा दिया।
मंगलवार को भी लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही हंगामा होने लगा, जिसके चलते सदन की कार्रवाई दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। प्रश्नकाल के दौरान सपा सांसद इकरा हुसैन का सवाल भी शोर-शराबे के कारण पूरा नहीं हो सका और संबंधित मंत्री जवाब नहीं दे पाईं।
विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि उसे सदन में अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा, जबकि सत्तापक्ष को पूरी छूट दी जा रही है। संसद में जारी इस टकराव के बीच आगे की रणनीति पर सभी दलों की नजर बनी हुई है।
MP सरकार ने बजट सत्र से पहले फिर लिया 5 हजार करोड़ का कर्ज, कमलनाथ ने कसा तंज
12 Feb, 2026 09:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा (Madhya Pradesh Legislative Assembly) के बजट सत्र से ठीक पहले मोहन सरकार (Mohan Government) ने बाजार से 5 हजार करोड़ रुपये का नया कर्ज उठा लिया है। यह पिछले एक सप्ताह में लिया गया दूसरा बड़ा कर्ज है। इससे पहले 4 फरवरी को सरकार 5300 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी थी। प्रदेश में लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर विपक्ष राज्य सरकार पर हमलावर हो गई है। पूर्व सीएम कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्वीट कर मोहन सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाते कहा कि भाजपा राज्य को कर्ज के बोझ में डुबो रही है।
कमलनाथ X पर ट्वीट करते हुए लिखा कि भारतीय रिज़र्व बैंक की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश के ऊपर 5, लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो चुका है और मध्य प्रदेश के ऊपर देश के कुल कर्ज़ का 5% हिस्सा हो गया है। भाजपा की सरकार ने कितनी तेज़ी से मध्य प्रदेश को कर्ज़ के दलदल में डुबाया है, इस बात का अंदाज़ा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि 2007 में मध्यप्रदेश के ऊपर 52, हज़ार करोड़ रुपये का कर्ज़ था जो क़रीब दस गुना बढ़कर 5,00,000 करोड़ की सीमा को पार कर गया है।
भाजपा सरकार अपनी फ़िज़ूलख़र्ची और इवेंट बाज़ी पर सरकारी ख़ज़ाने को लुटा रही है। आम जनता कभी कफ सीरप में ज़हर, तो कभी विषाक्त जल पीने से बेमौत मारी जा रही है और सरकारी ख़ज़ाना बुनियादी ज़रूरतों की पूर्ति की जगह भ्रष्टाचार पर ख़र्च किया जा रहा है। मैंने पहले भी आगाह किया है और एक बार फिर दोहराता हूँ कि मध्य प्रदेश सरकार को अपनी राजकोषीय स्थिति के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए और जनहित में इसमें सुधार करने की ज़रूरत है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी साधा निशाना
उमंग सिंघार ने X पर ट्वीट करते हुए लिखा कि बजट सत्र से ठीक पहले मध्यप्रदेश सरकार द्वारा एक सप्ताह में दूसरी बार 5,000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया जाना अत्यंत गंभीर विषय है। चालू वित्त वर्ष में अब तक 67,300 करोड़ रुपये की उधारी और 36 बार कर्ज लिया जाना राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
हाल ही में जारी RBI की रिपोर्ट ने भी प्रदेश की वास्तविक आर्थिक तस्वीर उजागर की है देश के कुल कर्ज का लगभग 5% हिस्सा अकेले मध्यप्रदेश पर है। यह स्थिति चिंताजनक है और सरकार की वित्तीय दिशा पर पुनर्विचार की मांग करती है। सरकार स्पष्ट करे कि इस भारी उधारी का ठोस वित्तीय रोडमैप क्या है? आगामी बजट सत्र में बढ़ते कर्ज, ब्याज के बढ़ते बोझ और वित्तीय प्रबंधन की पारदर्शिता पर सरकार से विस्तृत जवाब मांगा जाएगा। मध्यप्रदेश को कर्ज के पहाड़ नहीं, बल्कि मजबूत, जवाबदेह और दूरदर्शी आर्थिक नीति की आवश्यकता है।
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