राजनीति
‘लोकतंत्र में आवाज दबाने नहीं देंगे’: ममता बनर्जी ने केंद्र व भारतीय चुनाव आयोग को घेर
17 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता । बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर तीखे प्रहार किए हैं। एक बांग्ला समाचार चैनल को दिए एक विशेष साक्षात्कार में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बंगाल की अस्मिता और जनता के अधिकारों के लिए वह सडक़ से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। ममता बनर्जी ने एसआइआर और मतदाता सूची से जुड़े विवादों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि राच्य के लगभग 58 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची के ड्राफ्ट से हटाए जाने की साजिश रची गई है।
लोकतंत्र है, तानाशाही नहीं
मुख्यमंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या एक संवैधानिक संस्था को महिलाओं और गरीबों को इस तरह अपमानित करने का अधिकार है? यह लोकतंत्र है, तानाशाही नहीं। उन्होंने इसे बंगाल को वंचित करने की गहरी साजिश करार दिया। ममता ने कहा कि वह मतदाता सूची और अन्य संवैधानिक मुद्दों को लेकर खुद सुप्रीम कोर्ट जाएंगी और दिखाएंगी कि जमीनी स्तर पर क्या चल रहा है। केंद्र की भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कि यह सिर्फ आम लोगों को परेशान करती है। बंगाल से सौतेला व्यवहार करती है।
देवेगौड़ा व वीपी सिंह की प्रशंसा की
साक्षात्कार के दौरान बंगाल की मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, वीपी सिंह व राजीव गांधी की भूरि भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वीपी सिंह व राजीव गांधी उन्हें काफी प्यार करते थे। मैं भी दोनों का काफी सम्मान करती थी। पड़ोसी देश बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक उथल-पुथल पर ममता ने साफ किया कि बंगाल की सीमाओं की सुरक्षा और राज्य के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।
राहुल गांधी को संसद के कामकाज में कोई रुचि नहीं........वे काम को बाधित करते
16 Feb, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मोदी सरकार में संसदीय कार्य मंत्री किरन रीजिजू ने दावा किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को संसद के कामकाज में कोई रुचि नहीं है, वे केवल सदन के काम को बाधित करते हैं। केंद्रीय मंत्री रीजिजू ने कहा कि कुछ गैर सरकारी संगठनों ने राहुल गांधी को यह सिखाया है कि उनकी पार्टी के “अच्छे दिन” आएंगे, इसलिए वह केवल मुद्दे बनाने में ही व्यस्त हैं। केंद्रीय मंत्री रीजीजू ने कहा, राहुल गांधी को सदन की कार्यवाही में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्हें सिर्फ मुद्दे बनाने में दिलचस्पी है। उनके समय की संभावना नहीं है, और अगले चुनाव में उनकी सीटें और कम होगी। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन ने विपक्ष से स्थिति को शांत करने के कई प्रयास किए, लेकिन कांग्रेस को मनाने के लिए अब कोई अतिरिक्त कदम नहीं उठाया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस हताश है, क्योंकि पार्टी लगातार चुनाव हार रही है और वह स्थिति बदलने के लिए बेताब है। उन्होंने दावा किया कि छोटी पार्टियां राहुल गांधी से नाखुश हैं और कुछ ने अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव पर हस्ताक्षर तक नहीं किए है। रीजिजू ने कहा, पूरा विपक्ष कांग्रेस के साथ नहीं है। छोटी पार्टियां अपने समय का सदुपयोग नहीं कर पा रही हैं और वे चाहते हैं कि सदन का कामकाज जारी रहे।
लोकसभा में बजट सत्र के पहले भाग में लगातार व्यवधान और स्थगन की स्थिति रही। दरअसल, राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण पर आधारित लेख का हवाला देना चाहते थे, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें इसका उल्लेख करने से रोक दिया। इसके बाद सदन में अनुशासनहीनता के लिए विपक्ष के आठ सदस्यों को शेष सत्र के लिए निलंबित किया गया।
इसके बाद विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी पेश कर पक्षपातपूर्ण आचरण का आरोप लगाया। लोकसभा अध्यक्ष ने इसके कुछ घंटों बाद सदन की अध्यक्षता से स्वयं को अलग कर लिया। संसद का बजट सत्र 28 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन के साथ शुरू हुआ था, और बजट 2026 1 फरवरी को पेश किया गया। सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल तक चलेगा।
टीपू और शिवाजी की तुलना पर बवाल: भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं में हिंसक झड़प, नौ घायल
16 Feb, 2026 08:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में रविवार को उस समय भारी तनाव फैल गया जब विपक्षी दल के कार्यालय के बाहर भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। विवाद की जड़ कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल की वह टिप्पणी है, जिसमें उन्होंने मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से की थी। इस टिप्पणी के विरोध में आयोजित प्रदर्शन ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया और दोनों ओर से जमकर पथराव हुआ। संयुक्त पुलिस आयुक्त रंजन कुमार शर्मा के अनुसार, इस झड़प में दो पुलिसकर्मियों, दो मीडियाकर्मियों सहित तीन कांग्रेस और दो भाजपा कार्यकर्ता मामूली रूप से घायल हुए हैं।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब मालेगांव महानगरपालिका में टीपू सुल्तान का चित्र लगाए जाने पर हो रहे विरोध के बीच हर्षवर्धन सपकाल ने एक बयान दिया। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वराज के विचार और वीरता का जिक्र करते हुए दावा किया कि टीपू सुल्तान द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध का आह्वान शिवाजी महाराज के आदर्शों की तर्ज पर ही था। इस तुलना को भाजपा ने हिंदुओं की भावनाओं और मराठा साम्राज्य के गौरव का अपमान करार दिया। भाजपा की पुणे इकाई के अध्यक्ष धीरज घाटे ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर सपकाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
रविवार को जब भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस भवन के पास विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे, तो वहां स्थिति अनियंत्रित हो गई। पुलिस के मुताबिक, दोनों दलों के कार्यकर्ता दीवारों पर चढ़ गए और एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पत्थरबाजी शुरू कर दी। स्थिति को संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, लेकिन इसके बावजूद टकराव को पूरी तरह रोका नहीं जा सका। कांग्रेस की पुणे इकाई के अध्यक्ष अरविंद शिंदे ने भाजपा पदाधिकारियों पर हमला करने का आरोप लगाते हुए महापौर मंजुषा नागपुरे और धीरज घाटे समेत अन्य के खिलाफ पुलिस में लिखित शिकायत दी है। शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन में दोनों पक्षों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
इस राजनीतिक घमासान के बीच कांग्रेस के प्रदेश नेता सचिन सावंत ने भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने और ध्रुवीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है। सावंत ने दावा किया कि भाजपा अतीत में खुद टीपू सुल्तान की प्रशंसा करती रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 2012 में अकोला महानगरपालिका में भाजपा ने एक हॉल का नाम टीपू सुल्तान के नाम पर रखने का प्रस्ताव दिया था और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने भी उनकी मजार पर जाकर प्रशंसा की थी। सावंत ने आरोप लगाया कि अब चुनाव और ध्रुवीकरण के एजेंडे के तहत भाजपा टीपू सुल्तान को नकारात्मक रूप में पेश कर रही है।
इतिहास में टीपू सुल्तान एक विवादास्पद हस्ती रहे हैं, जहाँ एक पक्ष उन्हें अंग्रेजों से लड़ने वाला वीर योद्धा मानता है, वहीं दूसरा पक्ष उन पर दक्षिण भारत में हिंदुओं के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाता है। इसके विपरीत, छत्रपति शिवाजी महाराज को उनकी सैन्य प्रतिभा और लोक-कल्याणकारी प्रशासन के लिए सर्वसम्मति से श्रद्धा और सम्मान प्राप्त है। फिलहाल, पुणे में पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रण में किया है, लेकिन इस मुद्दे को लेकर राज्य की राजनीति में गर्मी बरकरार है।
मणिशंकर ने किया दावा, कहा- विजयन ही रहेंगे मुख्यमंत्री, इससे केरल में आ गया सियासी भूचाल
16 Feb, 2026 07:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुआनंतपुरम। केरल विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। एक ओर जहां कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सत्ता में वापसी के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है, वहीं उनकी अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेता ने वामपंथी मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के पद पर बने रहने का भरोसा जताकर सबको चौंका दिया है। रविवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अय्यर ने न केवल विजयन की कार्यप्रणाली की सराहना की, बल्कि उन्हें प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सपनों को पूरा करने वाला जननायक भी करार दिया।
यह वाकया विजन 2031: विकास और लोकतंत्र कार्यक्रम के दौरान हुआ, जिसका उद्घाटन स्वयं मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने किया था। इस मंच से बोलते हुए मणिशंकर अय्यर ने महात्मा गांधी के भारत संबंधी दृष्टिकोण को याद किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता ने एक ऐसे देश की परिकल्पना की थी जहां गरीब से गरीब व्यक्ति भी राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका महसूस कर सके। अय्यर ने तर्क दिया कि यह विडंबना ही है कि इस लक्ष्य की दिशा में सबसे सराहनीय प्रगति करने वाला राज्य केरल है, जहां वर्तमान में मार्क्सवादी-लेनिनवादी विचारधारा वाली पार्टी का शासन है। उन्होंने केरल को पंचायती राज के मामले में देश का अग्रणी राज्य बताया और कहा कि केरल ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की अपेक्षाओं को किसी भी अन्य राज्य की तुलना में कहीं अधिक बेहतर ढंग से धरातल पर उतारा है।
अपने संबोधन के दौरान अय्यर ने व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें इस बात का पूरा विश्वास है कि पिनराई विजयन मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधा निवेदन करते हुए कहा कि जो जिम्मेदारी कांग्रेस ने छोड़ी है, उसे अब विजयन संभालें और केरल को समृद्ध बनाने की दिशा में काम जारी रखें। उन्होंने केरल के पंचायती राज कानून में और सुधार की वकालत करते हुए थॉमस आइजैक की अंतर्दृष्टि और अपनी अध्यक्षता वाली पांच खंडों की रिपोर्ट के आधार पर संशोधन करने की अपील भी की। कार्यक्रम में अपने ही दल के सहयोगियों की अनुपस्थिति पर उन्होंने अफसोस जताते हुए इसे एक राष्ट्रीय अवसर बताया।
मणिशंकर अय्यर के इस रुख ने कांग्रेस आलाकमान को असहज कर दिया है। जैसे ही यह बयान सुर्खियों में आया, कांग्रेस ने तुरंत इससे किनारा कर लिया। पार्टी ने स्पष्ट रूप से कहा कि अय्यर पिछले कुछ वर्षों से सक्रिय रूप से पार्टी के सांगठनिक निर्णयों से नहीं जुड़े हैं और यह उनकी पूरी तरह से व्यक्तिगत राय है। कांग्रेस ने दावा किया कि केरल की जनता मौजूदा शासन से ऊब चुकी है और वह अधिक जवाबदेह शासन के लिए यूडीएफ को फिर से सत्ता में लाएगी। पार्टी नेताओं का तर्क है कि अय्यर का बयान चुनावी माहौल में कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित करने वाला है, जिसका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है।केरल की राजनीति में अमूमन हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन का रिवाज रहा है, लेकिन अय्यर की इस भविष्यवाणी ने एलडीएफ (वाम लोकतांत्रिक मोर्चा) को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस अपने इस वरिष्ठ नेता के बयानों से होने वाले नुकसान की भरपाई कर पाती है या फिर विजयन के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा इस प्रशंसा को चुनावी रण में ढाल बनाकर इस्तेमाल करेगा।
सियासत के नए संकेत: क्या फिर साथ आएंगे ‘बुआ-बबुआ’?
16 Feb, 2026 05:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर संभावित सामाजिक समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने हालिया सार्वजनिक कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच रिश्तों के “गहरे होने” के संकेत देकर सियासी हलचल बढ़ा दी है। बसपा से जुड़े रहे वरिष्ठ नेता के सपा में शामिल होने और मायावती पर नरम रुख अपनाने को राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अखिलेश यादव का ‘पीडीए’ पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूला अब केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सामाजिक समीकरण के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह प्रयास बसपा के पारंपरिक दलित वोट बैंक में विश्वास पैदा करने और साझा सामाजिक एजेंडा गढ़ने की कोशिश है। सपा नेतृत्व अब समावेशी छवि के साथ खुद को व्यापक सामाजिक गठबंधन के केंद्र में स्थापित करना चाहता है।
सपा-बसपा संबंधों का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 1993 में मुलायम सिंह यादव और कांशीराम के गठबंधन ने सत्ता समीकरण बदल दिए थे, लेकिन 1995 की घटनाओं ने दोनों दलों के बीच गहरी दूरी पैदा कर दी। 2019 में पुनः साथ आने के बावजूद गठबंधन टिक नहीं सका। इसलिए मौजूदा संकेतों को लेकर राजनीतिक वर्ग में उत्सुकता के साथ सावधानी भी दिखाई दे रही है।
हाल के चुनावी अनुभवों ने सपा नेतृत्व को दलित प्रतिनिधित्व के महत्व का एहसास कराया है। पार्टी अब वैचारिक समन्वय, प्रतीकात्मक सम्मान और संगठनात्मक साझेदारी के माध्यम से भरोसा मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। यदि यह प्रयोग सफल हुआ तो राज्य की सामाजिक संरचना आधारित राजनीति का नया मॉडल सामने आ सकता है। इसी बीच योगी आदित्यनाथ सरकार पर विपक्ष के हमले भी तेज हुए हैं। परंपरा, प्रतिनिधित्व और सामाजिक सम्मान जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाज़ी ने माहौल को और गर्म कर दिया है।
फिलहाल औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन बदले हुए सुर, नए सामाजिक समीकरण और साझा राजनीतिक संदेश इस संभावना को जीवित रखते हैं कि 2027 के चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा पुनर्संयोजन देखने को मिल सकता है। यदि संवाद आगे बढ़ता है, तो राज्य की चुनावी बिसात पर समीकरण निर्णायक रूप से बदल सकते हैं।
पंजाब में बीजेपी को बड़ा झटका, उपाध्यक्ष खन्ना पार्टी छोड़ एसएडी में हुए शामिल
16 Feb, 2026 04:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
खन्ना बोले- राजनीतिक करियर की शुरुआत एसएडी से की थी अब की घर वापसी
चंडीगढ़। पंजाब में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। पंजाब इकाई के उपाध्यक्ष अरविंद खन्ना शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए हैं। पंजाब में साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य में आम आदमी पार्टी सरकार है। शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने रविवार को संगरूर में खन्ना के घर पहुंचे, जहां उन्होंने पूर्व विधायक को एसएडी में शामिल किया। बादल ने कहा कि उन्हें अपने मित्र का एसएडी में स्वागत करते हुए और उन्हें संगरूर विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी नियुक्त करते हुए खुशी हो रही है। खन्ना जनवरी 2022 में बीजेपी में शामिल हुए थे। वह 2002 में संगरूर विधानसभा क्षेत्र से और 2012 में धुरी सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे। खन्ना ने 2022 के विधानसभा चुनाव में संगरूर सीट से और 2024 के लोकसभा चुनाव में संगरूर संसदीय क्षेत्र से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे।
शिरोमणि अकाली दल में शामिल होने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए खन्ना ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत एसएडी से की थी और पार्टी में दोबारा शामिल होने को उन्होंने घर वापसी की है। संगरूर सीट से आप विधायक नरिंदर कौर भरज ने गुरुवार को दावा किया था कि बीजेपी ने उन्हें टिकट देने की पेशकश की है। उन्होंने हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी का नाम लिया था। हालांकि, सैनी ने आरोपों का खंडन किया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जब पत्रकारों ने भरज के दावों पर टिप्पणी के लिए सैनी से संपर्क किया, तो सैनी ने कहा कि मैं उन्हें नहीं जानता, न ही उनके निर्वाचन क्षेत्र को जानता हूं जिसका वह प्रतिनिधित्व करती हैं। इससे पहले भरज ने दावा किया कि बीजेपी के ऑपरेशन लोटस के तहत सैनी ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की और कुछ दिन पहले उनसे बात भी की थी। उन्होंने दावा किया कि सैनी ने बंद कमरे में एक बैठक का प्रस्ताव रखा।
ममता बनर्जी ने तारिक भाई को भेजा फूल और मिठाइयां, रमजान की अग्रिम मुबारकबाद
16 Feb, 2026 11:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। बांग्लादेश की राजनीति में बड़े बदलाव के तौर पर तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने 13वें संसदीय चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। पार्टी को दो-तिहाई बहुमत मिलने के बाद तारिक रहमान 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। उनके शपथ ग्रहण समारोह के लिए विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों को निमंत्रण भेजे जा रहे हैं। इसी बीच पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भाई रहमान को वधाई देने के साथ ही फूलों का गुलदस्ता और मिठाइयां भेजकर अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।
तारिक रहमान को मिली शानदार जीत के बाद पड़ोसी भारत समेत अनेक देशों ने उन्हें बधाई प्रेषित की है। यहां पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तारिक रहमान को फूलों का गुलदस्ता और मिठाइयाँ भेजकर अपनी शुभकामनाएँ दी हैं। बीएनपी चेयरमैन के राजनीतिक कार्यालय की ओर से जारी बयान में बताया गया, कि शनिवार को गुलशन स्थित कार्यालय में बीएनपी मीडिया सेल सदस्य अतिउर रहमान रुमन ने सीएम ममता बनर्जी की ओर से भेजे गए उपहार को प्राप्त किया।
इससे एक दिन पहले ही ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर तारिक रहमान को ‘तारिक भाई’ संबोधित करते हुए चुनावी जीत की बधाई दी थी। उन्होंने अपने संदेश में बांग्लादेश की जनता को शुभकामनाएँ देते हुए अग्रिम रमजान की मुबारकबाद भी दी। ममता बनर्जी ने लिखा कि यह जीत लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत है और इससे क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा मिलेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह कदम केवल औपचारिक बधाई नहीं, बल्कि भारत और बांग्लादेश के बीच सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और भौगोलिक रिश्तों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव रहा है, ऐसे में यह पहल द्विपक्षीय संबंधों में नई गर्माहट ला सकती है।
गौरतलब है कि तारिक रहमान दिसंबर 2025 में 17 वर्षों के निर्वासन के बाद लंदन से स्वदेश लौटे थे। उनकी वापसी और अब चुनावी विजय को उनके राजनीतिक जीवन का बड़ा उलटफेर माना जा रहा है। चुनाव परिणामों के बाद अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस समेत कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने भी उन्हें बधाई दी है। अब सबकी नजरें 17 फरवरी को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं, जिसे बांग्लादेश की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
महात्मा मंदिर में अमित शाह का बड़ा ऐलान, अब राशन वितरण होगा पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी
16 Feb, 2026 11:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गांधीनगर| यहां के महात्मा मंदिर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गुजरात दौरे के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाले कई प्रकल्पों का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में ‘सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी’ (सीबीडीसी) आधारित आधुनिक वितरण प्रणाली और पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ‘अनाज एटीएम’ की शुरुआत की गई। इस नई व्यवस्था के तहत राशन के पूरे स्टॉक की रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी, यहां तक कि विदेश से भी इसकी निगरानी की जा सकेगी। सरकार का दावा है कि इससे वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल और भ्रष्टाचारमुक्त बनेगी।
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि पहले दिल्ली से भेजे गए 5 किलो अनाज में से बीच रास्ते में चोरी हो जाती थी, लेकिन अब तकनीक और डिजिटल राशन कार्ड के जरिए एक दाना भी गायब नहीं होगा। उन्होंने कहा कि गुजरात में तैयार इस नई मशीन के जरिए गरीबों की सुरक्षा की नई शुरुआत की गई है। उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि राहुल गांधी झूठ बोलते हैं और भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ता किसी भी मंच पर उनसे बहस करने को तैयार हैं। शाह ने कहा कि देश की जनता ने 2014 में ही कांग्रेस को ‘टाटा-बाय बाय’ कह दिया था। कांग्रेस ने केवल ‘गरीबी हटाओ’ के नारे दिए, जबकि भाजपा सरकार ने पिछले 10 वर्षों में 60 करोड़ गरीबों का जीवन स्तर सुधारा और 27 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला।
किसानों के मुद्दे पर बोलते हुए शाह ने कहा कि अमेरिका के साथ संभावित ट्रेड डील से भारतीय किसान सुरक्षित हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों की सुरक्षा के लिए दृढ़ता से खड़े हैं। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के समय कृषि बजट 26 हजार करोड़ रुपये था, जिसे भाजपा सरकार ने बढ़ाकर 1 लाख 26 हजार करोड़ रुपये कर दिया। साथ ही किसानों के खातों में सीधे 6 हजार रुपये ट्रांसफर किए जा रहे हैं, जिससे उन्हें कर्ज लेने की जरूरत कम हुई है। डेयरी और मत्स्य उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
डिजिटल इंडिया की चर्चा करते हुए शाह ने कहा कि 11 साल पहले किसी ने कल्पना नहीं की थी कि भारत डिजिटल लेनदेन में दुनिया में अग्रणी बनेगा, लेकिन आज सबसे अधिक डिजिटल ट्रांजैक्शन भारत में हो रहे हैं। अब राशन वितरण प्रणाली भी डिजिटल युग में प्रवेश कर चुकी है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और सरकार का हर निर्णय गरीबों और जरूरतमंदों को ध्यान में रखकर लिया जाता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भारत की परिकल्पना अब साकार हो चुकी है। छोटे व्यापारी भी डिजिटल भुगतान स्वीकार कर रहे हैं और तकनीक गांव-गांव तक पहुंच चुकी है। उन्होंने बताया कि 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए हैं और 1 लाख से अधिक गांव डिजिटल हो चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत आने वाले दिनों में ‘अनाज एटीएम’ पूरी तरह कार्यरत हो जाएंगे, जिससे लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा में पारदर्शी तरीके से अनाज मिल सकेगा।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सीबीडीसी कोई नई तकनीक नहीं है, बल्कि यह लोगों को उनका हक दिलाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने बताया कि देश में 80 करोड़ से अधिक लोगों को अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है और यह दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा योजना है। सीबीडीसी के क्रियान्वयन को बड़ी चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के निर्देश पर छोटे जिलों और ब्लॉकों तक जाकर कमियों की पहचान की गई। 100 प्रतिशत राशन कार्ड को डिजिटल करने का लक्ष्य रखा गया था और 2 से 3 करोड़ ‘साइलेंट’ राशन कार्ड रद्द किए जाएंगे, जिससे वास्तविक लाभार्थियों को फायदा मिलेगा। जोशी ने पूर्व प्रधानमंत्री के उस बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले एक रुपये में से केवल 15 पैसे ही लाभार्थी तक पहुंचते थे, लेकिन अब डिजिटल प्रणाली में पूरा एक रुपया सीधे खाते में जाता है।
सीबीडीसी व्यवस्था के तहत लाभार्थी को आरबीआई के माध्यम से डिजिटल फूड कूपन मिलेगा, जिसे वह दुकान पर स्कैन कर अनाज प्राप्त कर सकेगा। जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है, वे ओटीपी के जरिए भी अनाज ले सकेंगे। अब लाभार्थी अपने मोबाइल पर देख सकेगा कि उसे कौन सा अनाज और कितनी मात्रा में मिलना है। कार्यक्रम के अंत में जोशी ने कहा कि आज गुजरात की धरती से अनाज वितरण प्रणाली में ‘डिजिटल सत्याग्रह’ की शुरुआत की जा रही है। उन्होंने कहा कि जब अमित शाह किसी योजना का शुभारंभ करते हैं, तो अन्य राज्य भी उसे तेजी से लागू करते हैं।
सरकार का दावा है कि सीबीडीसी आधारित यह नई व्यवस्था भ्रष्टाचार के खिलाफ तीसरी आंख साबित होगी और देश के करोड़ों गरीबों को पारदर्शी एवं समयबद्ध खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद 7 साल से खाली, कांग्रेस सांसद ने उठाए सवाल
16 Feb, 2026 10:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में लोकसभा डिप्टी स्पीकर का पद सात साल से खाली रहने पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रक्रियात्मक चूक नहीं, बल्कि संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ किया जा रहा कार्य है।
सांसद टैगोर ने संविधान के अनुच्छेद 93 का हवाला देते हुए कहा कि सदन को एक स्पीकर और एक डिप्टी स्पीकर का चुनाव करना अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसमें “शेल” शब्द का प्रयोग किया गया है, जो बाध्यता दर्शाता है, न कि विकल्प। इसी के साथ ही कांग्रेस सांसद ने कहा कि संसदीय परंपरा के अनुसार डिप्टी स्पीकर का पद आमतौर पर विपक्ष को दिया जाता है, ताकि सदन की कार्यवाही में संतुलन, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के संदर्भ में भी सवाल उठाए। टैगोर ने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर डिप्टी स्पीकर का पद खाली रखा है। उनका कहना था, जब स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन लाया गया है, तब डिप्टी स्पीकर का न होना इस खालीपन को और स्पष्ट करता है। क्या यह जवाबदेही से बचने का प्रयास है?
सांसद टैगोर ने कहा कि विपक्ष को उसकी संवैधानिक और परंपरागत भूमिका से दूर रखना लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र किसी एक व्यक्ति या पार्टी के बारे में नहीं, बल्कि संविधान के सम्मान के बारे में है।
UP चुनाव से पहले बसपा को बड़ा झटका, समर्थकों के साथ सपा में शामिल हुआ ये दिग्गज नेता
16 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। यूपी में अगले साल यानी 2027 में विधानसभा चुनाव (assembly elections) होने हैं। इसको लेकर राजनीतिक उठापटक शुरू हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) की सरकार में कद्दावर मंत्री रहे नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी (Naseemuddin Siddiqui) ने आज सपा का दामन थाम लिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सिद्दीकी को औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई। साथ में तीन बार के विधायक अनीस अहमद खान समेत कई पूर्व विधायक सपा में शामिल हो गए।
इसके अलावा अपना दल (S) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार पाल ने भी सपा में शामिल होकर राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी का सपा में आना प्रदेश की सियासत में बड़ा संदेश माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आगामी चुनावों को देखते हुए यह सपा के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त साबित हो सकती है।
सपा में शामिल होने पर नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि 15718 लोग आज बसपा से इस्तीफा देकर यहां (सपा) आये हैं। अखिलेश यादव ने इस मौके पर कहा कि आज जब हम लोग एक साथ हैं तो कहना चाहता हूं कि बहुजन समाज का रिश्ता सपा से और गहरा होता जा रहा है। पीडीए परिवार मजबूत हो रहा है। कहा कि इस बार होली मिलन से पहले हमारा पीडीए का होली मिलन हो रहा है। कहा कि बाबा साहब और लोहिया जी ने कोशिश की थी कि एक साथ आकर समाज को आगे ले जाये वक्त ने उन्हें मौका नहीं दिया। फूल बाबू के आने से किसी का फूल मुरझा रहा है।
प्रयागराज प्रकरण पर बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि कुछ लोग तो पूजनीय शंकराचार्य को भी अपमानित कर रहे हैं, जो पीड़ित हैं वो पीडीए है। इसलिए हम उनके साथ हैं। बिना नाम लिए यूपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जो दूसरों से सर्टिफिकेट मांग रहे हैं उनका सर्टिफिकेट कहां है। कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि सीएम का मतलब करप्ट माउथ भी हो सकता है। तंज कसते हुए कहा कि लखनऊ वाले कह रहे हैं कि दिल्ली की हवा खराब है, असल में दोनों की हवा खराब है।
PM मोदी ने US ट्रेड डील को बताया अहम… पूर्ववर्ती UPA सरकार पर जमकर साधा निशाना
16 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार (UPA Government) पर निशाना साधा। उन्होंने कहाकि यूपीए सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन के कारण भारत व्यापार वार्ताओं (India Trade Negotiations) में मजबूती से अपना पक्ष नहीं रख सका। इस वजह से एक भी बातचीत निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी।‘एक इंटरव्यू में मोदी ने कहाकि भारत ने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका के साथ जो व्यापार समझौते किए हैं, उनसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए, खास तौर पर श्रम-प्रधान क्षेत्रों में, इन देशों में लगभग शून्य शुल्क या अन्य देशों की तुलना में काफी कम शुल्क पर वस्तुओं के निर्यात के रास्ते खुल गए हैं।
प्रधानमंत्री कहाकि इन व्यापार समझौतों पर भले ही हाल ही में मुहर लगी हो, लेकिन ये अधिक प्रतिस्पर्धी घरेलू उद्योग, आत्मविश्वास से भरपूर दृष्टिकोण और खुले विचारों का नतीजा हैं। ये आज की दुनिया में पाए जाने वाले दुर्लभ गुण हैं। हाल के वर्षों में भारत की ओर से किए गए व्यापार समझौतों की बात करने से पहले यह याद करना अहम है कि हम एक दशक पहले कहां खड़े थे। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने अपने शासनकाल में कछ व्यापार समझौते करने की कोशिश की, लेकिन यह यात्रा अनिश्चितता और अस्थिरता से भरी रही।
मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए कहाकि मुख्यतः उनके आर्थिक कुप्रबंधन के कारण भारत मजबूती के साथ अपना पक्ष नहीं रख सका। उन्होंने बातचीत को निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए अनुकूल माहौल नहीं बनाया। बातचीत शुरू होती और फिर ठप पड़ जाती। अंत में लंबी बातचीत के बावजूद कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल पाता था।
उन्होंने कहा कि लेकिन सत्ता में आने के बाद हमने नीति-आधारित शासन के जरिये आर्थिक पुनरुत्थान का नेतृत्व किया, हमारे आर्थिक ढांचे को मजबूत किया और एक नियम-आधारित प्रणाली का निर्माण किया। जब हमने राजनीतिक स्थिरता, नीतिगत पूर्वानुमान और सुधार-केंद्रित दृष्टिकोण सुनिश्चित किया, तो दुनिया भारत में निवेश करने के लिए इच्छुक हो गई।
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार की ओर से किए गए सुधारों से भारत के विनिर्माण और सेवा जैसे दोनों क्षेत्रों को मदद हासिल हुई तथा एमएसएमई के बीच उत्पादकता एवं प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिला। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास से भरपूर, प्रतिस्पर्धी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत के उभार के कारण कई देशों को नई दिल्ली के साथ व्यापार समझौते पर आगे बढ़ने में फायदा दिखा।
मोदी ने लिखित साक्षात्कार में कहाकि पूर्व की सरकार के रुख और हमारे दृष्टिकोण में मौजूद अंतर को समझने के लिए यूरोपीय संघ के साथ हुए व्यापार समझौते पर गौर करें। पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में भी इस पर चर्चा और बातचीत हुई थी। लेकिन अंततः हमारी सरकार में दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी समझौते पर मुहर लगी। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उनकी सरकार ने मुक्त व्यापार समझौतों का एक रणनीतिक और उद्देश्यपूर्ण नेटवर्क बनाया है।
महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख ने शिवाजी महाराज से की टीपू सुल्तान की तुलना, भाजपा और हिंदूवादी संगठन भड़क उठे
15 Feb, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र में कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल (Harshvardhan Sapkal) द्वारा मैसूर के 18वीं सदी के शासक टीपू सुल्तान (Tipu Sultan) को छत्रपति शिवाजी महाराज (Shivaji Maharaj) के “समकक्ष” बताने पर राजनीतिक तूफ़ान मच गया है। इस बयान के बाद पुणे में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने भी इस टिप्पणी को निंदनीय करार देते हुए कहा कि कांग्रेस नेता को अपने इस बयान पर शर्म आनी चाहिए।
विवाद की शुरुआत
महाराष्ट्र में टीपू सुल्तान का नाम तब चर्चा में आया था जब मालेगांव के डिप्टी मेयर निहाल अहमद ने अपने कार्यालय में उनकी तस्वीर लगाई थी। इस तस्वीर पर स्थानीय हिंदूवादी संगठनों और शिवसेना पार्षदों ने विरोध जताया। मीडिया द्वारा प्रतिक्रिया मांगने पर हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़कर छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों की तर्ज पर स्वराज और वीरता की मिसाल पेश की।
सपकाल ने अपने बयान में कहा, “टीपू सुल्तान एक योद्धा और भारत के भूमि पुत्र के रूप में उभरे। उन्होंने कभी भी जहरीली विचारधाराओं को अपनाया नहीं। हमें टीपू सुल्तान को वीरता के प्रतीक के रूप में शिवाजी महाराज के समकक्ष मानना चाहिए।”
भाजपा की प्रतिक्रिया
सपकाल के इस बयान के बाद राज्य में राजनीतिक विवाद भड़क उठा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “महाराष्ट्र इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। सपकाल को छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना टीपू सुल्तान से करने के लिए माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस को मामले का संज्ञान लेना चाहिए और सहयोगी दलों को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।”
सपकाल की सफाई
विवाद बढ़ने पर हर्षवर्धन सपकाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से सफाई दी। उन्होंने लिखा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता अतुलनीय है, वहीं टीपू सुल्तान भी वीर और स्वराज प्रेमी थे। उन्होंने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज को आदर्श मानकर ही टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।”
सपकाल ने भाजपा और अन्य हिंदूवादी संगठनों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब टीपू सुल्तान विदेशी शासकों से लड़ रहे थे, तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की विचारधारा अपनाने वाले लोग अंग्रेजों के पक्ष में काम कर रहे थे।
उन्होंने आगे कहा, “इसलिए देवेंद्र फडणवीस को इतिहास पढ़ाने का दिखावा नहीं करना चाहिए। महाराष्ट्र के लोग नहीं भूले हैं कि भाजपा-आरएसएस और अन्य नेताओं ने छत्रपति शिवाजी महाराज के खिलाफ क्या बोला और कैसे उनका अपमान किया।” सपकाल ने कहा कि संविधान की मूल प्रति पर शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान दोनों की तस्वीरें मौजूद हैं।
इतिहास की वास्तविकता
टीपू सुल्तान इतिहास में विवादास्पद हस्ती माने जाते हैं। एक वर्ग उनकी अंग्रेजों के खिलाफ वीरता की सराहना करता है, वहीं दूसरा वर्ग दक्षिण भारत में उनके द्वारा हिंदुओं के साथ किए गए कथित दुराचार के लिए आलोचना करता है। इसके विपरीत, छत्रपति शिवाजी महाराज को उनकी सैन्य क्षमता, परोपकार और प्रशासनिक कौशल के लिए व्यापक रूप से सराहा जाता है।
कांग्रेस और जहरीली हो गई, सावधान रहना होगा…गुवाहाटी में बोले PM मोदी
15 Feb, 2026 12:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुवाहाटी: प्रधानमंत्री मोदी (Prime Minister Modi) ने असम के गुवाहाटी (Guwahati, Assam) में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि नॉर्थ ईस्ट हमारे लिए अष्टलक्ष्मी है. इस साल का बजट अष्टलक्ष्मी के लिए बीजेपी-एनडीए के विजन को और मजबूती देने वाला है. बजट के बाद असम का और नॉर्थ ईस्ट का मेरा ये पहला दौरा है. जिस नॉर्थ ईस्ट को कांग्रेस ने हमेशा नजरअंदाज किया, हम उस नॉर्थ ईस्ट की भक्तिभाव से सेवा कर रहे हैं. कांग्रेस सत्ता से बाहर होने के चलते और जहरीली हो गई है. असम को सावधान रहना होगा.
पीएम मोदी ने कहा, बजट में बहुत ज़्यादा फोकस नॉर्थ ईस्ट को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर है. इस बार असम को टैक्स की जगहों के रूप में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये मिलने वाले हैं. कांग्रेस के समय असम को कैसे पाई-पाई के लिए तरसा कर रखा जाता था. वो आपको अच्छी तरह याद होगा. कांग्रेस के समय असम को टैक्स के हिस्से के रूप में सिर्फ 10 हज़ार करोड़ रुपये मिलते थे.
पहले लोगों को खराब इंफ्रास्ट्रक्चर की याद आती थी
उन्होंने कहा, अब भाजपा सरकार में असम को कांग्रेस सरकार के मुकाबले 5 गुना ज़्यादा रुपये मिल रहे हैं. अगर पिछले 11 साल की बात करें तो असम को तमाम विकास परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से 5.50 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा मिले हैं. पहले जब भी नॉर्थ ईस्ट का जिक्र होता था तब लोगों को खराब इंफ्रास्ट्रक्चर की याद आती थी. आज यहां ऐसे हाईवे बन रहे हैं जहां ना सिर्फ गाड़ियां चलती हैं, बल्कि हवाई जहाज भी उतर सकते हैं.
नीतियों में बढ़ोतरी होती है तो रोजगार के अवसर बढ़ते हैं
पीएम मोदी ने कहा, यह गर्व का पल है. यह असम की बदलती भावना है. इस साल के बजट में नॉर्थ ईस्ट की नीतियों को और ज़्यादा बढ़ाने देने का काम किया गया है. नीतियों में बढ़ोतरी होती है तो रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं. इसलिए हाईवे और दूसरी रोड प्रोजेक्ट्स के लिए असम को हजारों करोड़ रुपये देने का फैसला लिया गया है.
आज पुलवामा हमले की बरसी है
प्रधानमंत्री ने कहा, आज पुलवामा हमले की बरसी है. मैं इस हमले में जान गंवाने वाले मां भारती के वीर सपूतों को नमन करता हूं. इस आतंकी हमले के बाद भारत ने जिस तरह आतंकियों को सजा दी, वो पूरी दुनिया ने देखा है. आपने भारत की ये शक्ति ऑपरेशन सिंदूर में भी देखी है. मैं आपसे जानना चाहता हूं कि क्या कभी कांग्रेस में देशहित के लिए इतनी हिम्मत के साथ फैसले करने की ताकत थी क्या?कांग्रेस के नेता ज्यादा से ज्यादा बयान दे सकते हैं.
कांग्रेस कभी भारत का भला नहीं कर सकती
कांग्रेस पर और हमला करते हुए पीएम ने कहा,जो कांग्रेस भारत को राष्ट्र मानने से भी इनकार करती हो, जो सवाल करते हैं कि मां भारती क्या होती है, जो मां भारती के नाम तक से परहेज करती हो, जो मां भारती के प्रति जरा सा सम्मान तक नहीं दिखाते, वो कांग्रेस कभी भारत का भला नहीं कर सकती.
MMC बनकर फिर देश को बांटने में लग गई कांग्रेस
आज की कांग्रेस हर उस विचार, हर उस आतंकी को कंधे पर बिठाती है, जो देश का बुरा सोचता है. जो लोग देश के टुकड़े-टुकड़े करने का सपना देखते हैं, जो लोग नॉर्थ ईस्ट को भारत से अलग करने के नारे लगाते हैं वो कांग्रेस के लिए पूजनीय बन चुके हैं. आजादी के समय मुस्लिम लीग ने देश का बंटवारा कराया. अब आज की कांग्रेस, मुस्लिम लीगी माओवादी कांग्रेस यानी MMC बनकर फिर देश को बांटने में लग गई है.
पीएम ने कहा, आपको कांग्रेस से सावधान रहना है और असम की जनता को भी सावधान करना है. कांग्रेस के समय में 3G और 4G टेक्नोलॉजी आई, 2G के घोटाले भी आए लेकिन नार्थ-ईस्ट तक, असम तक उसे तेजी से पहुंचाने के लिए कांग्रेस ने मेहनत ही नहीं की. जब भाजपा सरकार में 5G टेक्नोलॉजी आई तो हमने इस टेक्नोलॉजी को असम सहित पूरे नार्थ-ईस्ट के गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए काम किया.
जो जैसा बोलेगा, वैसा ही खुल जाएगा – अखिलेश यादव
15 Feb, 2026 11:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ । सपा प्रमुख अखिलेश यादव (SP chief Akhilesh Yadav) ने कहा कि पहन ले कोई जैसे भी ‘चोले’, (Someone may wear any kind of ‘Chola’) पर उसकी वाणी पोल खोले (But his words should Expose Him) । उन्होंने कहा कि शंकराचार्य के बारे में घोर अपमानजनक अपशब्द बोलना शाब्दिक हिंसा है। ऐसा कहने वाले के साथ-साथ उनको भी पाप पड़ेगा, जिन्होंने चापलूसी में मेजें थपथपाईं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता’ वाले बयान पर अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पहन ले कोई जैसे भी ‘चोले’, पर उसकी वाणी पोल खोले।” उन्होंने कहा, “शंकराचार्य के बारे में घोर अपमानजनक अपशब्द बोलना शाब्दिक हिंसा है और पाप भी। ऐसा कहनेवाले के साथ-साथ उनको भी पाप पड़ेगा जिन्होंने चापलूसी में मेजें थपथपाई हैं। जब भाजपा के विधायक सदन के बाहर जाएंगे और जनता का सामना करेंगे तो जनता सड़क पर उनका सदन लगा देगी।”
महाकुंभ की घटना का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने लिखा, “जो महाकुंभ की मौतों पर सच्चे आंकड़े नहीं बताते हैं, कैश में मुआवजा देकर उसमें भी भ्रष्टाचार का रास्ता निकाल लेते हैं। जिन तक मुआवजा नहीं पहुंचा, उनका पैसा कहां गया, ये नहीं बताते हैं। अपने ऊपर लगे मुकदमे हटवाते हैं। वो किसी और के ‘धर्म-पद’ पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं रखते हैं।”
सीएम योगी पर बिना नाम लिए हमला बोलते हुए सपा प्रमुख ने कहा, “अपने बयान में उन्होंने (सीएम योगी) ‘कानून का शासन’ बोल दिया, जैसे ही इस बात पर उनका ध्यान जाएगा वो ‘विधि का शासन’ बोलने के लिए क्या दुबारा सदन बुलाएंगे या इसके लिए एक टांग पर खड़े होकर ‘लड़खड़ाता प्रायश्चित’ करेंगे।” उन्होंने कहा कि जब इंसान नहीं, अहंकार बोलता है तो यही होता है। अहंकार संस्कार को विकार में बदल देता है। वो व्यक्ति समाज में मान-सम्मान खो देता है, जिसके बारे में ये कहावत प्रचलित हो जाती है कि ‘जब मुंह खोला, तब बुरा बोला।
अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “हाता नहीं भाता का ये विस्तारित रूप है, यही सच्ची सच्चाई है। जिस समाज के खिलाफ रहकर उन्होंने हमेशा अपनी नफरत की राजनीति की है, उसे धर्म के मामले में भी अपमानित-पराजित करने का ये उनका अंहकार है। इनका बस चले तो जो विवादित फिल्म आई है, उसका नाम बदले बिना ही रिलीज भी कर दें और टैक्स फ्री भी कर दें। अगले चुनाव में वो समाज एक-एक वोट उनके खिलाफ डालकर अपने अपमान और उनके प्रदेश अध्यक्ष के नोटिस का सही जवाब देगा। उनकी सरकार हटाकर नई सरकार बनाएगा। फिर इत्मीनान-आराम से मिलजुलकर बेधड़क दाल-बाटी खाएगा।” सपा प्रमुख ने कहा कि शंकराचार्य जी पर दिया गया अभद्र बयान सदन में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है। उनके इस बयान को हम निंदनीय कहें तो निंदनीय शब्द को भी निंदनीय महसूस होगा।
न्याय और पारदर्शिता सर्वोपरि: योगी आदित्यनाथ ने दिए सख्त निर्देश
15 Feb, 2026 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गोरखपुर । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने कहा कि निष्पक्ष जांच करके ही (Only after an Impartial Investigation) हर मामले का निस्तारण होना चाहिए (Every Case should be Resolved) । उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी मामले में जांच के दौरान यदि गलत रिपोर्ट लगाई जाती है तो संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए। किसी भी प्रकरण में लापरवाही या शिथिलता अक्षम्य होगी।
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी ने शनिवार को गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन के दौरान लोगों की समस्याएं सुनते हुए ये निर्देश प्रशासन व पुलिस के अफसरों को दिए। मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 150 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने सभी को आश्वस्त किया कि किसी को भी घबराने की आवश्यकता नहीं है। हर समस्या का वह प्रभावी निस्तारण कराएंगे। उन्होंने प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों को मौके पर ही निर्देश दिए कि जनता की समस्याओं का समयबद्ध, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करें। जनता दर्शन में कुछ मामले ऐसे भी आए थे, जिनमें यह शिकायत की गई कि प्रकरण में गलत रिपोर्ट लगा दी गई है।
इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि पता लगाकर गलत रिपोर्ट लगाने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों की मदद में शिथिलता या लापरवाही कतई नहीं होनी चाहिए। जनता की समस्याओं के समाधान में किसी तरह की हीलाहवाली हुई तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी तय है। किसी पीड़ित की समस्या के समाधान में अगर कहीं भी कोई दिक्कत आ रही है तो उसका पता लगाकर निराकरण कराया जाए और किसी स्तर पर जानबूझ कर प्रकरण को लंबित रखा गया है तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने जमीन कब्जाने की शिकायतों पर विधिसम्मत कठोर कदम उठाने का निर्देश दिया। इस बार भी जनता दर्शन में कुछ लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। इस पर सीएम योगी ने अधिकारियों से कहा कि जल्द से जल्द अस्पताल के इस्टीमेट की प्रक्रिया पूर्ण कराकर शासन को उपलब्ध करा दें। इलाज के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पर्याप्त मदद की जाएगी। जनता दर्शन में परिजनों के साथ आए बच्चों पर सीएम योगी ने अपना स्नेह बरसाया। मुख्यमंत्री ने बच्चों को दुलारा, उन्हें चॉकलेट दी और खूब पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने तथा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा समक्ष शीश झुकाने के बाद वह मंदिर परिसर के भ्रमण पर निकले। मंदिर की गौशाला में पहुंचकर उन्होंने गोसेवा की। गायों और गोवंश को स्नेहिल भाव से अपने हाथों से गुड़ खिलाया।
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