राजनीति
चुनावी खर्च में बीजेपी सबसे आगे, बिहार में कांग्रेस से चार गुना ज्यादा रकम खर्च
13 Mar, 2026 08:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में सत्ता परिवर्तन की खबरों के बीच विधायकों की कीमत की जोरदार चर्चा रहती है। बातें चाहे महाराष्ट्र की हो, मध्य प्रदेश की या फिर कर्नाटक की, हर जगह से मिलती जुलती ही खबरें सुनने को मिलती रही हैं। 2025 के बिहार चुनाव में हुए खर्च का हिसाब ज्यादातर राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग में जमा कर दिया है। मालूम होता है कि सबसे ज्यादा खर्च बीजेपी ने किया है, लेकिन जेडीयू और आरजेडी के बैलेंसशीट जमा न करने के कारण उनके खर्च के आंकड़े उपलब्ध नहीं हो पाए हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सबसे ज्यादा खर्च बीजेपी ने किया। अगर कांग्रेस के चुनाव खर्च से तुलना करें तो चार गुणा से भी ज्यादा। कांग्रेस ने अपनी कुल जमा पूंजी का 28 फीसदी खर्च किया, जबकि बीजेपी ने सिर्फ 2 फीसदी। बीजेपी ने बिहार चुनाव कैंपेन पर कुल 146.71 करोड़ खर्च किए हैं। सबसे ज्यादा खर्च करने का एक फायदा तो यही है कि बीजेपी बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। चुनाव आयोग को दी गई रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादातर खर्च ट्रैवल पर हुआ है, जिसमें स्टार प्रचारकों के आने जाने और मीडिया में दिए गए विज्ञापन शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस ने चुनाव खर्च का जो हिसाब आयोग को दिया है, उसके मुताबिक बिहार विधानसभा कैंपेन में 35.07 करोड़ खर्च हुए हैं। ये खर्च कांग्रेस उम्मीदवारों के प्रचार, स्टार प्रचारकों के ट्रैवल और बाकी चुनावी मुहिम में हुआ है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के चुनाव कैंपेन का खर्च 26.75 लाख आया है। बहुजन समाजवादी पार्टी ने बिहार चुनाव पर 6.01 करोड़ खर्च किए।
बता दें बिहार चुनाव बीजेपी 101 विधानसभा सीटों पर लड़ी थी और एनडीए के बैनर तले बीजेपी के सबसे ज्यादा 89 विधायक चुने गए। चुनाव प्रचार के दौरान विज्ञापन पर बीजेपी के खर्च की सबसे बड़ी रकम गूगल इंडिया को दी गई, जो 14.27 करोड़ रुपए थी। बीजेपी ने उम्मीदवारों पर 29.71 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, जो चुनाव लड़ने के लिए आर्थिक मदद के तौर पर देखा जाता है। देखें तो बीजेपी ने 146.71 करोड़ रुपए चुनावों में खर्च करके 89 विधायक हासिल किए और इस हिसाब से एक विधायक पर खर्च की गई रकम हुई करीब 1.65 करोड़ रुपए।
कांग्रेस ने चुनाव प्रचार पर जो 35.07 करोड़ खर्च किए उसमें 12.83 करोड़ स्टार प्रचारकों की आवाजाही पर खर्च हो गए और 11.24 करोड़ सोशल मीडिया कैंपेन पर। चुनाव की घोषणा होने से पहले जो खर्च हुए होंगे उसका तो सिर्फ अंदाजा भर लगाया जा सकता है और, यह बात सभी राजनीतिक दलों पर लागू होती है। बिहार चुनाव में कांग्रेस ने 61 उम्मीदवार उतारे थे महज 6 सीटों पर ही जीत हासिल हो सकी। चुनाव से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में वोटर अधिकार यात्रा भी निकाली गई थी, खर्च तो उसमें भी हुए ही होंगे।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को महागठबंधन में 4 सीटें मिली थीं, लेकिन जीत सीपीआई (एम) को एक ही सीट पर मिली। चुनाव खर्च की बात करें, तो सीपीआई (एम) ने बिहार चुनाव पर 26.75 लाख खर्च किए थे। इतना खर्च करके एक विधायक हासिल किया। वहीं मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने तो बिहार चुनाव में 181 उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन जीत सिर्फ एक हो ही मिल पाई। और, बिहार चुनाव कैंपेन पर बीएसपी के खर्च हुए 6.01 करोड़ रुपए। चुनाव खर्चों की तुलना करें तो सबसे महंगा विधायक पड़ा है मायवती की बीएसपी को, और सबसे सस्ता एमएलए सीपीआई (एम) को।
सोनिया गांधी केस में कोर्ट ने सुनवाई टाली, 30 मार्च तय नई तारीख
13 Mar, 2026 05:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ मतदाता सूची में कथित जालसाजी को लेकर शुक्रवार को सुनवाई होनी थी। लेकिन मामले में दायर रिवीजन पिटीशन पर शुक्रवार दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में होने वाली ये सुनवाई टल गई है। अब मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी।
शुक्रवार की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट से सुनवाई टालने की मांग की गई थी। इसके बाद अदालत ने नई तारीख दी। ये याचिका वकील विकास त्रिपाठी की तरफ से दायर की गई है। सोनिया गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग वाली याचिका को सितंबर में खारिज किया था। मजिस्ट्रेट कोर्ट के इसी फैसले को त्रिपाठी ने चुनौती दी है।
दरअसल सोनिया गांधी के खिलाफ याचिका में नागरिकता और मतदाता सूची को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता हासिल की थी। आरोप है कि नागरिकता मिलने से 3 साल पहले, यानी 1980 की मतदाता सूची में उनका नाम नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र में शामिल था।
इस पर याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है कि जब सोनिया गांधी के पास 1983 तक नागरिकता नहीं थी, तब 1980 में किस आधार पर और किन दस्तावेजों के सहारे मतदाता सूची में नाम जोड़ा गया? क्या इसके लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया? याचिका में ये भी पूछा गया है कि 1982 में उनका नाम मतदाता सूची से क्यों हटाया गया था?
पिछली सुनवाई के दौरान सोनिया गांधी की ओर से अदालत में जवाब दाखिल किया गया है। उनके वकीलों ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। सोनिया गांधी ने याचिका को पूरी तरह से तथ्यहीन और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। इसके पहले इसी मामले में सोनिया गांधी के खिलाफ जांच और मुकदमा दर्ज कराने की मांग वाली याचिका को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बीते साल सितंबर में खारिज किया था। कोर्ट ने तब याचिका में पर्याप्त आधार नहीं पाए थे। अब रिवीजन पिटीशन के जरिए ऊपरी अदालत में मामले को फिर से उठाने की कोशिश की जा रही है।
LPG संकट पर कंगना का बयान: कांग्रेस पर लगाया जनता को भ्रमित करने का आरोप
13 Mar, 2026 10:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में एलपीजी संकट को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रानोत ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधकर कहा कि जनता को गुमराह करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में महंगाई बढ़ रही है, लेकिन भारत में लगातार नई परियोजनाएं शुरू हो रही हैं। रनौत ने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को कथित एलपीजी संकट से उसी तरह बाहर निकलने वाले हैं, जैसे उन्होंने कोविड महामारी के दौरान देश का नेतृत्व किया था।
मंडी से सांसद कंगना रनौत ने कहा कि एलपीजी की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार ने पूर्ण आश्वासन दिया है, लेकिन विपक्ष दहशत फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि जनता को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर विश्वास रखना चाहिए, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत लगातार प्रगति कर रहा है।
वहीं दूसरी ओर, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेताओं ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन जारी रखा। विपक्ष का आरोप है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण देश में एलपीजी की कमी की स्थिति पैदा हो रही है और इस पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।
रमाई घरकुल योजना में फर्जीवाड़ा उजागर: फडणवीस-शिंदे के नाम पर बनाए गए नकली आधार व जाति प्रमाणपत्र
13 Mar, 2026 09:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र की रमाई घरकुल योजना (Ramai Awas Gharkul Yojana) में बड़ा घोटाला होने का दावा एआईएमआईएम (AIMIM) नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने किया है। इम्तियाज जलील ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका में पिछले कई वर्षों से इस योजना के नाम पर करोड़ों रुपये की धांधली की जा रही है। AIMIM नेता जलील के अनुसार इस कथित घोटाले की गंभीरता इतनी ज्यादा है कि राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नाम पर फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड और जाति प्रमाणपत्र तक बनाए गए और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर घरकुल योजना का पैसा हड़पा गया।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के नाम पर बने फर्जी दस्तावेज
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इम्तियाज जलील ने कई दस्तावेज मीडिया के सामने पेश किए। उन्होंने दावा किया कि इन कागजात में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नाम पर ‘महार’ जाति का प्रमाणपत्र तक जारी किया गया है।इतना ही नहीं, जलील के मुताबिक एकनाथ शिंदे के नाम से फर्जी राशन कार्ड भी बनाया गया है, जिसमें उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी जोड़े गए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर नकली आधार कार्ड तैयार कर रमाई घरकुल योजना के तहत आवेदन दाखिल किए गए और सरकारी पैसे की हेराफेरी की गई।
भाजपा नेताओं पर साधा निशाना
इम्तियाज जलील ने आरोप लगाया कि शहर के कुछ बड़े नेता दलालों के साथ मिलकर इसी तरह से कई वर्षों से गरीबों के हक का पैसा लूट रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रियों के दबाव में महानगरपालिका के आयुक्त से करोड़ों रुपये की फाइलों पर हस्ताक्षर कराए गए।
2010 से चल रहा पूरा खेल?
पूर्व सांसद ने आंकड़ों के साथ दावा किया कि इस पूरे सिंडिकेट में कुछ बड़े रसूखदार चेहरे शामिल हैं जो गरीबों के हक का पैसा डकार रहे हैं। इस पूरे मामले में कुछ प्रभावशाली नेताओं ने संबंधित विभाग के प्रमुख अधिकारियों पर फाइलों पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया था।उन्होंने आरोप लगाया कि 2010 से अब तक जिन हजारों घरों का वितरण दिखाया गया है, उनमें से कई जमीन पर अस्तित्व में ही नहीं हैं। योजना का लाभ वास्तविक गरीबों तक नहीं पहुंच रहा है।
हाईकोर्ट में जाने की तैयारी
इम्तियाज जलील ने कहा कि जब प्रशासन के कुछ बड़े अधिकारी ही इस मामले में शामिल नजर आ रहे हैं तो केवल शिकायतों से न्याय मिलना मुश्किल है। इसलिए वह सभी दस्तावेज और सबूतों के साथ जल्द ही बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि निष्पक्ष जांच होती है तो रमाई घरकुल योजना में हुए कथित घोटाले की सच्चाई सामने आ सकती है।
Gujarat में नई स्वास्थ्य सुविधा: कर्मचारियों के आश्रित भाई-बहनों को भी मुफ्त इलाज
13 Mar, 2026 09:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुजरात सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों के हित में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और राहत भरा निर्णय लिया गया है। 'गुजरात राज्य सेवा (चिकित्सा उपचार) नियम, 2002' के तहत 'परिवार' की परिभाषा में बड़ा संशोधन किया गया है। इस सुधार के माध्यम से अब सरकारी कर्मचारियों पर आर्थिक रूप से निर्भर अन्य सदस्यों को भी मुफ्त चिकित्सा उपचार का लाभ मिल सकेगा।
'परिवार' की परिभाषा का विस्तार पिछले नियमों के अनुसार, चिकित्सा लाभ केवल कर्मचारी के पति या पत्नी, बच्चों और माता-पिता तक ही सीमित थे। लेकिन, सरकार ने इस पुरानी परिभाषा को रद्द कर इसे अधिक व्यापक बना दिया है। नई परिभाषा के अनुसार, अब कर्मचारी पर निर्भर भाई-बहन और दत्तक (गोद ली गई) संतानों को भी इस चिकित्सा उपचार योजना के तहत शामिल किया गया है, ताकि वे भी उचित इलाज प्राप्त कर सकें।
लाभ के लिए मुख्य शर्तें और आय सीमा इस लाभ को प्राप्त करने के लिए सरकार ने कुछ शर्तें और आर्थिक निर्भरता की सीमा स्पष्ट की है। पहली शर्त यह है कि संबंधित सदस्य कर्मचारी के साथ ही रहते होने चाहिए। दूसरी शर्त के अनुसार, यदि परिवार के उस सदस्य की पेंशन सहित सभी स्रोतों से होने वाली कुल मासिक आय 500 रुपए से अधिक नहीं है, तभी उन्हें कर्मचारी पर 'पूर्णतः आश्रित' माना जाएगा और योजना का लाभ दिया जाएगा।
तत्काल प्रभाव से कार्यान्वयन स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस संबंध में आधिकारिक परिपत्र (Circular) जारी कर दिया गया है और ये नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। सरकार के इस कदम से लाभार्थियों की सूची में अधिक स्पष्टता आएगी और पात्र आश्रित सदस्य बिना किसी बाधा के चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।मध्यम वर्ग को बड़ी आर्थिक राहत राज्य सरकार के इस निर्णय से मध्यम वर्गीय सरकारी परिवारों को बहुत बड़ा फायदा होगा। बीमारी के समय जब मेडिकल खर्चे बढ़ जाते हैं, तब आर्थिक रूप से निर्भर भाई-बहन या अन्य सदस्यों के इलाज का बोझ अब काफी कम हो जाएगा। यह निर्णय सरकारी कर्मचारियों की चिंता दूर करने और उनके परिवार को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने में अत्यंत उपयोगी साबित होगा।
केजरीवाल का आरोप: आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं को झूठे मामलों में फंसाया गया
13 Mar, 2026 09:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमृतसर। दिल्ली के शराब घोटाला मामले में कोर्ट से बरी होने पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल अपनी पत्नी के साथ दरबार साहिब में मत्था टेक कर आशीर्वाद लिया। पंजाब के सीएम भगवंत मान और उनकी पत्नी समेत अन्य गणमान्यों ने भी मत्था टेका। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमने दरबार साहिब में नमतस्तक होकर वाहेगुरु जी का शुक्रिया अदा किया। आम आदमी पार्टी के सभी बड़े-बड़े नेताओं के ऊपर झूठे आरोप लगाए गए थे। कीचड़ फेंका गया था और झूठे आरोपों पर षड्यंत्र करके हमारे पांच सबसे बड़े नेताओं को उठाकर जेल में डाल दिया गया था। एक सिटिंग मुख्यमंत्री को रात के अंधेरे में उसके घर से घसीटकर जेल में डाल दिया गया था।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पंजाब में हमारी 4 साल से बहुत अच्छी सरकार चल रही है। लोगों के स्कूलों, अस्पतालों, स्वास्थ्य और अब महिलाओं के लिए काम किए गए हैं। लोगों का आशीर्वाद मिलता है, तभी हम जैसे मामूली लोग भी कुछ कर पाते हैं। अन्यथा इतने बड़े-बड़े लोगों के सामने हम जैसे मामूली लोगों की तो कोई औकात ही नहीं है। हम इसलिए टिके हुए हैं, क्योंकि वाहेगुरु जी का आशीर्वाद हमारे साथ है और हम सच के रास्ते पर चल रहे हैं।
जेडीयू में तेज हुई चर्चा: निशांत कुमार को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग
13 Mar, 2026 08:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में जदयू की ओर से निशांत कुमार को प्रदेश का अगला सीएम बनाने की वकालत तेज हो गई है। हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने प्रदेश के लोगों को चौंका दिया। जब नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने की इच्छा जाहिर की, तो जदयू कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। कार्यालय में तोड़फोड़ हुई। सड़कों पर नीतीश कुमार के समर्थन में कार्यकर्ता जमा हुए। हालांकि, सीएम ने वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक में कार्यकर्ताओं के गुस्से को शांत करने का प्रयास करते हुए कहा कि वे भले ही दिल्ली जाएंगे, लेकिन बिहार के विकास कार्यों में हमेशा योगदान देते रहेंगे, इसीलिए किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, फिर भी कार्यकर्ता संतुष्ट नहीं थे। इसके बाद जो लंबे समय से मांग थी, वह थी निशांत कुमार को पार्टी में लाया जाए। आखिरकार, निशांत कुमार ने जदयू के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में पार्टी का दामन थाम लिया। जदयू में शामिल होने के बाद मीडिया ने कई बार उनसे सीएम बनने को लेकर सवाल किया, लेकिन उन्होंने हर बार सवाल को टाल दिया। गुरुवार को निशांत कुमार अपने पैतृक गांव कल्याण विगहा पहुंचे थे, जहां सीएम बनने वाले सवाल को निशांत कुमार ने टाल दिया। इस बीच जदयू विधायक रुहैल रंजन और चेतन आनंद ने दावा किया कि ग्रामीणों की जो इच्छा है, उसे पूरा किया जाएगा। निशांत कुमार को बिहार का अगला सीएम बनाएंगे।
राज्यसभा चुनाव से पहले एमपी की सियासत गरम, कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग की चिंता
12 Mar, 2026 07:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्यप्रदेश में 19 जून को राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होने जा रहा है। इनमें दो सीटें भाजपा के पास हैं, जिन पर डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन सांसद हैं। वहीं एक सीट कांग्रेस के खाते की है, जिस पर फिलहाल दिग्विजय सिंह सांसद हैं। दिग्विजय सिंह पहले ही राज्यसभा जाने से इनकार कर चुके हैं, जिसके बाद कांग्रेस में इस सीट के लिए कई दावेदार सामने आ गए हैं।
कांग्रेस में बढ़ी दावेदारी
दिग्विजय सिंह के इनकार के बाद कांग्रेस के भीतर इस सीट के लिए कई नेताओं ने दावा ठोक दिया है। इनमें प्रमुख नाम हैं:
जीतू पटवारी – प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
मीनाक्षी नटराजन – पूर्व सांसद
कमलनाथ – पूर्व मुख्यमंत्री
अरुण यादव – पूर्व केंद्रीय मंत्री
कमलेश्वर पटेल – पूर्व मंत्री, विंध्य क्षेत्र का बड़ा चेहरा
सज्जन सिंह वर्मा और प्रदीप अहिरवार – दलित वर्ग के नेता
दलित वर्ग से किसी नेता को राज्यसभा भेजने की मांग भी उठ रही है। इस संबंध में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने पत्र लिखकर मांग की है।
कांग्रेस को क्यों है खतरा
कांग्रेस के भीतर सबसे बड़ा डर क्रॉस वोटिंग का है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक यदि 5–6 विधायक भी इधर-उधर हो गए तो कांग्रेस की सीट खतरे में पड़ सकती है। बताया जा रहा है कि भाजपा की ओर से विधायकों को अगले चुनाव में टिकट और अन्य ऑफर देने की चर्चा भी पार्टी के अंदर चल रही है।
विधानसभा के आंकड़े
मध्यप्रदेश विधानसभा में फिलहाल भाजपा के पास 164 विधायक हैं। यदि भाजपा को एक-दो अतिरिक्त समर्थन मिल जाता है तो उसके लिए समीकरण और मजबूत हो सकते हैं। कांग्रेस को आशंका है कि उसके कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं।
पहले भी हो चुकी है क्रॉस वोटिंग
2022 के राष्ट्रपति चुनाव में भी मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग देखने को मिली थी। उस समय विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को अपेक्षा से काफी कम वोट मिले थे। अनुमान था कि उन्हें करीब 103 वोट मिलेंगे, लेकिन उन्हें केवल 79 वोट ही मिले। माना गया कि लगभग 19–20 विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया था।
विपक्ष और भाजपा के बयान
इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा हमेशा तोड़फोड़ की राजनीति करती है, लेकिन कांग्रेस के विधायक मजबूत हैं और राज्यसभा सीट कांग्रेस की ही रहेगी। वहीं भाजपा विधायक अभिलाष पांडे का कहना है कि भाजपा के पास पर्याप्त विधायक हैं और पार्टी अपने संगठन और काम पर भरोसा करती है।
जीत का गणित
इस बार राज्यसभा चुनाव 230 विधायकों के गणित पर होगा। एक उम्मीदवार को जीतने के लिए लगभग 58 वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में थोड़ी सी भी क्रॉस वोटिंग पूरे चुनाव का समीकरण बदल सकती है।
निष्कर्ष:
मध्यप्रदेश की इस राज्यसभा सीट पर चुनाव से पहले ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के भीतर कई दावेदार हैं, वहीं क्रॉस वोटिंग की आशंका ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर 19 जून को होने वाले मतदान पर टिकी हुई है।
चुनाव खर्च में बीजेपी सबसे आगे, 146.71 करोड़ खर्च कर 89 सीटों पर मिली जीत
12 Mar, 2026 07:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जीतने के लिए बीजेपी ने सभी पार्टियों से ज्यादा खर्च किया है। बीजेपी ने 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। वहीं कांग्रेस ने कुल 35.07 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। बीजेपी ने जमा पूंजी का 2 फीसदी खर्च किया, जबकि कांग्रेस ने अपनी कुल जमा पूंजी का 28 फीसदी पैसा खर्च किया है। बीजेपी ने बीते बिहार विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार ज्यादा पैसा खर्च किया। 2020 में बीजेपी ने करीब 54 करोड़ खर्च किए थे, लेकिन इस बार 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
बिहार में बीजेपी को पैसा खर्च करने का फल भी मिला। राज्य में 89 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस ने बीजेपी की तुलना में भले ही पैसा कम खर्च किया हो, लेकिन अपनी जमा पूंजी का बहुत बड़ा हिस्सा बिहार में खर्च किया।
चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद अपने खर्च की हिसाब देती हैं। इसके तहत बिहार चुनाव में खर्च किए पैसे का लेखा-जोखा सियासी दलों ने चुनाव आयोग को दिया हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी ने बिहार चुनाव खर्च की रिपोर्ट 10 फरवरी को चुनाव आयोग को सौंपी है, जिसमें पार्टी ने बताया है कि उसने 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। वहीं, बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कुल 35 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, तब सीपीआई (एम) ने महज 26.75 लाख रुपये खर्च किए हैं। बहुजन समाज पार्टी ने बिहार चुनाव में सिर्फ 9.01 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। आरजेडी और जेडीयू सहित दूसरे दलों के खर्च का लेखा-जोखा अभी चुनाव आयोग को उपलब्ध नहीं कराया हैं।
बीजेपी ने चुनाव प्रचार के विज्ञापन पर खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा गूगल इंडिया लिमिटेड पर किया, जिसे पार्टी ने 14.27 करोड़ रुपये दिए। इसके अलावा बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों पर 29.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जिसमें पार्टी ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए आर्थिक मदद के तौर पर दिया है। कांग्रेस ने बिहार चुनाव में खर्च किए गए 35 करोड़ रुपये में से 12.83 करोड़ रुपये स्टार कैंपेनर्स की यात्रा पर दिए। इसके अलावा कांग्रेस ने सोशल मीडिया कैंपने के लिए 11.24 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके अलावा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की बिहार में निकाली गई वोटर अधिकार यात्रा पर भी खर्च किए।
रिपोर्ट से पता चलता है कि बीते साल नवंबर में बिहार चुनाव खत्म होने पर बीजेपी का क्लोजिंग बैलेंस 7,088.58 करोड़ रुपये था। इसके मुताबिक चुनाव से पूर्व बीजेपी के पास 7235.26 करोड़ रुपये था, जिसमें से 146.71 करोड़ खर्च किया। इसके बाद 7,088.58 करोड़ रुपये बचे थे। इस तरह बीजेपी ने अपनी जमापूंजी का करीब 2 फीसदी पैसा ही बिहार चुनाव में खर्च किया है।
वहीं, कांग्रेस के पास बिहार चुनाव के बाद कुल 89.13 करोड़ रुपये बचे थे। कांग्रेस ने चुनाव में 35.07 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस लिहाज से कांग्रेस के चुनाव से पहले 124.2 करोड़ रुपये था, जिसमें से 35.07 करोड़ रुपये खर्च करने का मतलब साफ है कि पार्टी ने अपनी जमापूंजी का 28.23 फीसदी पैसा बिहार चुनाव में खर्च किया।
बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सबसे ज्यादा 89 विधायक जीतने में सफल रही, जबकि कांग्रेस को महज 6 सीटें मिली हैं। बिहार चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के द्वारा खर्च किए गए पैसे को विधायकों की संख्या के लिहाज से बीजेपी को एक विधायक 1 करोड़ 64 लाख का पड़ा। वहीं कांग्रेस के सिर्फ 6 विधायक जीते हैं, इसके बाद कांग्रेस को एक विधायक 5 करोड़ 83 लाख का पड़ा।
‘घबराने की जरूरत नहीं’, लोकसभा में भरोसा दिलाया हरदीप पुरी ने
12 Mar, 2026 06:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। लोकसभा में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और उसके कारण तेल-गैस आपूर्ति पर पड़ रहे असर को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि दुनिया के ऊर्जा इतिहास में शायद ही कभी ऐसी स्थिति देखने को मिली हो जैसी अभी पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण बन रही है। यह संकट वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए गंभीर माना जा रहा है। मंत्री ने संसद में कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि देश के लगभग 33 करोड़ परिवारों की रसोई में ईंधन की कोई कमी न हो। उन्होंने साफ किया कि भारत में फिलहाल पेट्रोल, डीजल, गैस या एलपीजी की कमी नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई: हरदीप पुरी
हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली जहाजों की आवाजाही करीब 20 प्रतिशत तक प्रभावित हुई है। यह दुनिया का एक बहुत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल दूसरे देशों तक पहुंचता है। मंत्री के अनुसार भारत अपनी जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल अन्य देशों से भी प्राप्त कर रहा है, इसलिए सप्लाई को लेकर स्थिति फिलहाल सुरक्षित है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में सीएनजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और एलएनजी के जहाज लगातार देश में पहुंच रहे हैं। गैस सिलेंडर को लेकर जो कमी की अफवाहें फैल रही हैं, वे सही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अफवाहों के कारण लोगों में घबराहट बढ़ती है और जरूरत से ज्यादा खरीदारी होने लगती है, जिससे मांग अचानक बढ़ जाती है।
एलपीजी उत्पादन में 28 प्रतिशत की वृद्धि की: पेट्रोलियम मंत्री
मंत्री ने जानकारी दी कि देश में एलपीजी उत्पादन में लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, ताकि किसी भी संभावित संकट से निपटा जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि भारत अभी भी कनाडा, नॉर्वे और रूस जैसे देशों से तेल आयात कर रहा है। साथ ही सरकार ने गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। पुरी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद होने जैसी स्थिति बन गई है। दर्ज इतिहास में यह पहली बार है जब यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग व्यावसायिक जहाजों के लिए लगभग ठप जैसा हो गया है। इसी रास्ते से दुनिया के कई देशों तक कच्चे तेल की बड़ी आपूर्ति होती है।
सरकार लगातार हालात पर नजर रख रही, जरूरी कदम उठाएंगे
उन्होंने संसद में कहा कि भारत इस संघर्ष का हिस्सा नहीं है, लेकिन वैश्विक बाजार से जुड़े होने के कारण इसके प्रभाव से पूरी तरह बच पाना संभव नहीं है। इसलिए सरकार को बहुत सावधानी के साथ आगे बढ़ना होगा। सरकार लगातार हालात पर नजर रख रही है और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि आम लोगों पर इसका असर कम से कम पड़े।
चुनाव आयोग संभालेगा सुरक्षा का नियंत्रण, ममता सरकार को सिर्फ निगरानी का अधिकार
12 Mar, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल बजने के साथ ही निर्वाचन आयोग ने एक ऐसा दांव खेला है जिसने राज्य की राजनीति और पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है। इस बार बंगाल चुनाव में सुरक्षा बलों की तैनाती का रिमोट कंट्रोल ममता सरकार के एसपी या जिलाधिकारियों के हाथ में नहीं, बल्कि सीधे चुनाव आयोग के पुलिस ऑब्जर्वर्स के पास होगा। आयोग का यह फैसला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के लिए झटके से कम नहीं है।
अब तक के नियमों के मुताबिक चुनाव के दौरान सेंट्रल फोर्सेस की तैनाती का फैसला जिला मजिस्ट्रेट और स्थानीय पुलिस कप्तान मिलकर करते थे, लेकिन बंगाल के हिंसक चुनावी इतिहास और विपक्षी दलों की शिकायतों को देखते हुए आयोग ने इस ‘विशेषाधिकार’ को छीन लिया है। अब आयोग द्वारा नियुक्त सेंट्रल पुलिस ऑब्जर्वर्स ही यह तय करेंगे कि केंद्रीय बल और राज्य पुलिस के जवान किस इलाके में, कितनी संख्या में और कब तैनात होंगे।
चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक कोलकाता में हुई बैठकों में कई राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया था कि राज्य प्रशासन बल का दुरुपयोग करता है। आरोप था कि संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बल नहीं भेजे जाते, जिससे सत्ता पक्ष के कार्यकर्ताओं को खुली छूट मिल जाती है। सुरक्षा बलों को उन जगहों पर तैनात कर दिया जाता है जहां उनकी जरूरत नहीं होती। स्थानीय पुलिस और प्रशासन पर सत्ताधारी दल के कैडर की तरह काम करने के आरोप लगते रहे हैं। इन्हीं शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साफ कर दिया है कि चुनाव में हिंसा को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।
फारूक अब्दुल्ला पर हमला: उमर ने साझा की सुरक्षा की जानकारी
12 Mar, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जम्मू। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला पर बुधवार देर रात गोलिया बरसाई गईं। इस घटना में वह बाल-बाल बच गए। उनके बेटे और सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अल्लाह रहमदिल है। मेरे पिता बहुत बड़े खतरे से बचे हैं। अभी पूरी जानकारी नहीं मिली है लेकिन इतना पता चला है कि एक शख्स ने बहुत करीब से फारुक अब्दुल्ला पर गोलिया चलाई। क्लोज प्रोटेक्शन टीम की सतर्कता की वजह से गोली का रुख मोड़ दिया गया और हत्या की कोशिश नाकाम हो गई। वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने ओरापी कमल सिंह जम्वाल तुरंत पकड़ लिया।
उन्होंने कहा कि इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि जेड प्लस और एनएसजी सुरक्षा में रहने वाले पूर्व सीएम के इतने करीब कोई व्यक्ति आखिर कैसे पहुंचा। बता दें फारूक अब्दुल्ला बुधवार रात को जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में स्थित होटल रॉयल पार्क में एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। इस समारोह में जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी समेत कई नेता मौजूद थे। इसी दौरान एक व्यक्ति फारूक अब्दुल्ला के बहुत करीब जाकर गोली चला दी, लेकिन गनीमत रही कि वह इस हमले में बाल-बाल बच गए। गोलीबारी में उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी को भी छर्रे लगे उन्हें मामूली चोटें आई हैं। इस घटना से हड़कंप मच गया। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने हमलावर को तुरंत पकड़ लिया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस अब इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है। घटना से जुड़े तथ्यों जानकारी के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी कमल सिंह जम्वाल खनन के कारोबार से जुड़ा हुआ है। हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर में खनन गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई की गई है, जिससे नाराज होकर उसने इस घटना को अंजाम दिया।
हरदीप पुरी का पलटवार – राहुल गांधी के सवालों पर मंत्री ने स्पष्ट किया, स्ट्रेट पर कोई संकट नहीं।
12 Mar, 2026 04:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Loksabha Session: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुधवार को खारिज कर दिया गया. इस पर सदन में भारी बहस और हंगामे देखने को मिले, लेकिन ध्वनि मत (Voice Vote) से खारिज कर दिया गया. पिछले चार दशकों में यह पहली बार था जब किसी स्पीकर को पद से हटाने के लिए ऐसा प्रस्ताव लाया गया. गुरुवार यानी कि 12 मार्च को ओम बिरला फिर से सदन में लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान हुए. हालांकि, सदन की शुरु होते ही हंगामे की वजह से दिन के बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया.
Parliament Session Update:-
‘भारत को इजाज़त की ज़रूरत क्यों है?’ राहुल का केंद्र पर हमला
लोकसभा के LoP ने आगे कहा कि, “हर देश की नींव उसकी एनर्जी सिक्योरिटी होती है; अलग-अलग तेल सप्लायर के साथ हमारे रिश्ते तय करने के अधिकार की अदला-बदली की गई है.”
राहुल गांधी ने लोकसभा में ईरान विवाद का मुद्दा उठाया
राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जंग चल रही है; इस जंग के दूरगामी नतीजे होंगे. राहुल ने मिडिल ईस्ट संकट पर बात करते हुए होर्मुज स्ट्रेट का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा, “होर्मुज स्ट्रेट, वह सेंट्रल रास्ता जहां से दुनिया का 20% तेल बहता है, बंद है; इसके बहुत बुरे नतीजे होंगे.”
एलपीजी के दाम पर विरोध
संसद में लोकसभा के अंदर विपक्षी सांसदों की तरफ़ से, जहां वो बैठते हैं वहां से बर्तन बजाने की आवाज़ सुनाई दी है. विपक्षी सांसद बढ़े हुए एलपीजी के दाम को लेकर लोकसभा सदन में विरोध कर रहे थे. सदन के भीतर प्लेट बजाने की आवाज़ सुनाई दी दोपहर 2.25 बजे. उस वक्त स्पीकर चेयर पर बैठी संध्या राय ने विपक्षी सांसदों को टोकते हुए कहा कि ये ठीक नहीं.
चुप्पी डिप्लोमेसी नहीं है: वेस्ट एशिया विवाद पर कांग्रेस के परम्बिल
केरल के INC के शफील परम्बिल ने कहा कि ट्रेजरी बेंच ने आज सुबह तक सप्लीमेंट्री ग्रांट की डिटेल्ड मांगों को सर्कुलेट नहीं किया, जो प्रोसीजर के नियमों के खिलाफ है. उन्होंने कहा, ‘प्रोसीजर के नियम सिर्फ विपक्ष पर लागू नहीं होते. हमारी करेंसी एशिया में सबसे खराब परफॉर्म करने वाली करेंसी है.’ उन्होंने विवाद की वजह से वेस्ट एशिया में फंसे भारतीयों की मदद करने में सरकार के शामिल होने पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, ‘इस संकट में, चुप्पी डिप्लोमेसी नहीं; यह पूरी तरह सरेंडर है. सरकार को इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार में बिज़ी हैं.’
ईरान संकट के गहराते साये के बीच भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है, जिसके मद्देनजर अब चार मंत्रालयों की महत्वपूर्ण जॉइंट ब्रीफिंग शाम 5:30 बजे आयोजित की जाएगी. इस पूरे संकट पर गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में गठित एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय मंत्री समूह पैनी नजर बनाए हुए है, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी भी शामिल हैं. यह पावरफुल समूह अब तक कई दौर की रणनीतिक बैठकें कर चुका है. आने वाले समय में ये तीनों मंत्रालय अन्य संबंधित विभागों और राज्य सरकारों के साथ मिलकर देश की सुरक्षा एवं ऊर्जा हितों की रक्षा के लिए समन्वय स्थापित करेंगे.
लंच के बाद पार्लियामेंट फिर से शुरू हुई. ब्रेक के बाद लोकसभा और राज्यसभा फिर से शुरू हुईं. राज्यसभा में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSCs), टूरिज्म और आर्कियोलॉजी, और कम्युनिकेशन कनेक्टिविटी पर चर्चा होनी है. लोकसभा में वोटिंग से पहले ग्रांट की सप्लीमेंट्री डिमांड पर चर्चा हुई.
सदन का नेता हो या विपक्ष का नेता या कोई भी मंत्री, नियम से चलना होगा- ओम बिरला
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि चाहे सदन का नेता हो या विपक्ष का नेता या कोई भी मंत्री, सभी को नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार सदन में बोलने का अधिकार है. कुछ लोगों का मानना था कि विपक्ष का नेता हमेशा बाकियों से ऊपर रहा है और किसी भी विषय पर बोल सकता है; किसी को यह विशेष अधिकार नहीं है.
‘किसी भी माइक को चालू या बंद करने के लिए चेयर के पास कोई बटन नहीं है’: स्पीकर ओम बिरला
स्पीकर ओम बिरला ने अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि मेंबर के माइक को अपनी मर्ज़ी से कंट्रोल करने और अपोज़िशन के माइक बंद करने के आरोपों पर बात करते हुए कहा कि चेयर के पास माइक को कंट्रोल करने के लिए कोई बटन नहीं है. उन्होंने कहा कि मेंबर तभी बोल सकते हैं जब उनकी बारी हो. अपोज़िशन की महिला MPs के विरोध के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह फैसला संसद की गरिमा की रक्षा के लिए किया, जब MPs प्लेकार्ड लेकर ट्रेजरी बेंच पर चढ़ गए.
स्पीकर ओम बिरला ने कल अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बात की. उन्होंने 10 मार्च, 2026 को अपने खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बात करते हुए कहा कि वह पार्लियामेंट के सभी सदस्यों के आभारी हैं कि उन्होंने उनके काम में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दे उठाए. उन्होंने कहा कि वह पार्लियामेंट में संवैधानिक गरिमा बनाए रखेंगे. इस आरोप का जवाब देते हुए कि स्पीकर ने विपक्ष को बोलने नहीं दिया, उन्होंने कहा कि सदन नियमों और कानूनों का पालन करता है जिसके तहत बोलने से पहले स्पीकर की इजाजत लेना जरूरी है. बिरला ने कहा कि पार्लियामेंट में पेश करने से पहले सभी तस्वीरों, प्रिंटेड चीजों, कोट्स और डॉक्यूमेंट्स को स्पीकर की मंजूरी लेनी होगी. उन्होंने इशारा किया कि विपक्ष ने इस नियम का पालन नहीं किया, जिससे उन्हें मुश्किल फैसले लेने पड़े.
Budget Session 2026: राहुल गांधी ने उठाए पीएम मोदी पर सवाल, LPG संकट पर मांगी जवाबदेही
12 Mar, 2026 04:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों पर लोकसभा में चर्चा. राज्यसभा में भी सामान्य रूप से चर्चा जारी.भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद जगदंबिका पाल ने वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों को वर्तमान वैश्विक परिस्थिति में एक समाधान करार देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार ने इसके तहत करीब एक लाख करोड़ रुपये की एक आर्थिक स्थिरीकरण निधि बनाई है.वर्ष 2025-26 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांग के दूसरे बैच पर चर्चा की शुरूआत करते हुए पाल ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट (इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध) के कारण पूरे विश्व में अनिश्चितता की स्थिति है.उन्होंने कहा कि होरमुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति श्रृंखला टूट जाने का असर कच्चा तेल की ढुलाई पर पड़ा है. उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन केवल भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जिसे ईरान ने उस समुद्री मार्ग से तेल की ढुलाई की अनुमति दी है.’’भाजपा सांसद ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चा तेल के दाम बढ़े हैं और यह 88 अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 119 डॉलर हो गया है, जिसका सीधा असर गैस, उर्वरक और परिवहन क्षेत्र पर पड़ेगा. पूरे विश्व में इसका असर पड़ने जा रहा है.पाल ने कहा, ‘‘इन परिस्थितियों में और इस तरह की वैश्विक चुनौती को ध्यान में रखते हुए यह केवल अनुपूरक मांग नहीं है, बल्कि दुनिया के समक्ष उत्पन्न हुए संकट का एक समाधान है.’’भाजपा सांसद ने कहा कि अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच का कुल आकार 2.81 लाख करोड़ रुपये है और इसमें दो लाख करोड़ रुपये नया नकद व्यय है जो दर्शाता है कि विकास कार्यों को गति दी जाएगी.उन्होंने उल्लेख किया कि इसमें एक लाख करोड़ रुपये ‘टेक्निकल सप्लीमेंट्री टोकन’ प्रावधान के लिए है.
पाल ने कहा, ‘‘अनुपरक मांगों के दूसरे बैच में, वैश्विक चुनौतियों का मुकाबला व समाधान करने के लिए भारत सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक स्थिरीकरण निधि बनाया है, जो मौजूदा संकट को दूर करेगा. यह भविष्य में आने वाले किसी भी संकट के लिए एक ढाल का काम करेगा.’’उन्होंने कहा कि यह निधि नये वित्त वर्ष के बजट के लिए एक मजबूत नींव रखेगा. यह वित्त वर्ष 2026-27 के बजट के लिए एक बफर का काम करेगा, ताकि किसी भी वैश्विक संकट का भारत पर असर न पड़े.
विपक्षी सदस्यों के शोरगुल के बीच, पाल ने कहा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 2013-14 में 304 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो बढ़कर वर्तमान में 686 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है.उन्होंने यह उल्लेख भी किया कि संप्रग के शासनकाल के दौरान विदेशी निवेश देश से निकाला जा रहा था और यह 308 अरब अमेरिकी डॉलर था, लेकिन वर्तमान में 748 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है, जिसपर विपक्ष के सदस्यों ने कड़ा विरोध जताया.विपक्षी सदस्यों का शोरगुल नहीं थमने पर, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि वर्तमान में, विश्व में जिस तरह की समस्या है उसे ध्यान में रखते हुए सबको एकजुट होकर उसका समाधान करना होगा.
उन्होंने कहा, ‘‘जब कभी देश में संकट आए तो पूरे देश को एकजुट होकर उसका समाधान करना चाहिए, राजनीति नहीं करनी चाहिए.’’इसके बाद, पाल ने कहा कि देश के किसानों के लिए उर्वरक की आपूर्ति बनाये रखने के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांग के दूसरे बैच में 19,230 करोड़ रुपये उर्वरक सब्सिडी के लिए प्रावधान किया गया है क्योंकि आयात किये जाने वाले प्राकृतिक गैस की लागत दोगुनी हो गई है.
देश में कहीं भी एलपीजी या पेट्रोल की कमी नहीं है: जेडीयू सांसद संजय कुमार
जेडीयू सांसद संजय कुमार झा ने कहा, '140 करोड़ लोग प्रधानमंत्री पर भरोसा करते हैं. जनता प्रधानमंत्री की कही बातों पर भरोसा करती है. दुनिया ने देखा कि उन्होंने कोविड के दौरान देश को संकट से कैसे निकाला. इतनी बड़ी लड़ाई चल रही है. यह भारत के कंट्रोल में नहीं है और कोई नहीं जानता कि यह कब तक चलेगी. देश में कहीं भी एलपीजी या पेट्रोल की कमी नहीं है. लोग लाइन में लग रहे हैं और घर में 4-4 सिलेंडर रख रहे हैं, इसी से दिक्कत हो रही है.'
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, ये कहा
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, 'ऐसा लगता है कि वह (राहुल गांधी) चाहते हैं कि प्रधानमंत्री सुबह डोनाल्ड ट्रंप, दोपहर में व्लादिमीर पुतिन और शाम को शी जिनपिंग को गाली दें. अगर प्रधानमंत्री तीनों का अपमान करेंगे, तो राहुल गांधी की आत्मा को शांति मिलेगी. जब रूस, अमेरिका और चीन मिलकर भारत का बॉयकॉट करेंगे या हमला भी करेंगे, तो उन्हें खुशी होगी क्योंकि जॉर्ज सोरोस का भारत को कमजोर करने का एजेंडा सफल हो जाएगा.'
विपक्ष का नया हमला: रसोई गैस और ऊर्जा संकट पर केंद्र सरकार पर दबाव
12 Mar, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। संसद में लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाया गया विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव भले ही गिर गया हो, लेकिन विपक्षी दलों ने अब सरकार को घेरने के लिए एक नई और आक्रामक रणनीति तैयार कर ली है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल अब पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से उपजे ईंधन संकट और देश में रसोई गैस (एलपीजी) की भारी किल्लत को लेकर सरकार पर हमलावर होने जा रहे हैं। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे भीषण संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर अब भारतीय रसोई और आम आदमी की जेब पर दिखने लगा है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक में स्पष्ट किया कि अब पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की विदेश नीति तथा ऊर्जा सुरक्षा की विफलता को प्रमुखता से उठाएगी। राहुल गांधी का तर्क है कि यह संकट सीधे तौर पर आम जनता से जुड़ा है, क्योंकि युद्ध के कारण न केवल रसोई गैस की कमी हुई है, बल्कि ईंधन संकट के चलते महंगाई और हवाई किराए में भी अप्रत्याशित उछाल आया है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका के दबाव में झुक रही है और अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने में नाकाम रही है। गौरतलब है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है और वहां जारी युद्ध ने कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को बाधित कर दिया है।
संसद के भीतर इस मुद्दे पर घमासान पहले ही शुरू हो चुका है। सोमवार और मंगलवार को विपक्ष ने एलपीजी संकट को लेकर सदन में भारी हंगामा किया, जिसके चलते कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। विपक्षी सांसदों ने सदन में स्लोगन लिखे थे। कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने मांग की है कि सरकार को अन्य सभी मुद्दों को छोड़कर सबसे पहले रसोई गैस की कीमतें कम करने और आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर से घटकर 90 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं, तो सरकार के भीतर इतनी घबराहट क्यों है? वहीं, सीपीआई(एम) नेता जॉन ब्रिट्टास ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार पर्याप्त स्टॉक होने का झूठा दावा कर रही है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को युद्ध रोकने के लिए प्रभावी कूटनीतिक प्रयास करने चाहिए थे, लेकिन वह केवल मूकदर्शक बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि सरकार संसद में विपक्ष के इन तीखे सवालों का क्या जवाब देती है।
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