राजनीति
राज्यसभा की 11 सीटों के लिए 3 राज्यों में मुकाबला, बाकी 26 सदस्य निर्विरोध चुने गए
10 Mar, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख भी सोमवार को गुजर गई है। इसके बाद सात राज्यों की 26 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं, जबकि अब तीन राज्यों की 11 सीटों पर मतदान होना तय माना जा रहा है। इन सीटों पर 16 मार्च को वोटिंग होगी और कई जगहों पर दिलचस्प राजनीतिक मुकाबले की संभावना है।
राज्यसभा चुनाव जिन राज्यों में हो रहे हैं उनमें पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार, असम, ओडिशा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। इनमें से अधिकांश राज्यों में सीटों के बराबर उम्मीदवार होने के कारण कई सदस्य निर्विरोध चुन लिए गए। हालांकि बिहार, हरियाणा और ओडिशा में निर्धारित सीटों से अधिक उम्मीदवार मैदान में होने के कारण मुकाबला होना तय है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति भी तेज कर दी है। भारतीय जनता पार्टी ने बिहार, हरियाणा और ओडिशा में चुनाव की निगरानी के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। इससे संकेत मिलता है कि इन राज्यों में चुनाव के दौरान राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।
ओडिशा में चौथी सीट पर रोचक मुकाबला
ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों के लिए कुल पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा ने मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि दिलीप रे को समर्थन दिया है। वहीं बीजू जनता दल (बीजेडी) ने संतृप्त मिश्रा को और कांग्रेस ने डॉ. दत्तेश्वर मिश्रा को समर्थन दिया है। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार भाजपा के दो और बीजेडी के एक उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि चौथी सीट के लिए दिलीप रे और दत्तेश्वर मिश्रा के बीच मुकाबला रोचक होने की संभावना है।
बिहार में पांचवीं सीट पर मुकाबला
बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे यहां मुकाबला दिलचस्प हो गया है। भाजपा ने नितिन नवीन और शिवेश कुमार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि जनता दल (यूनाइटेड) ने नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर को मैदान में उतारा है। एनडीए की ओर से उपेंद्र कुशवाहा को भी उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अमरेंद्र धारी सिंह को मैदान में उतारकर चुनाव को और रोमांचक बना दिया है। ऐसे में पांचवीं सीट पर मुकाबला कड़ा रहने की संभावना है।
हरियाणा में भी मुकाबले की स्थिति
हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। भाजपा ने संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने कर्मवीर बौद्ध को मैदान में उतारा है। इसके अलावा सतीश नांदल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है और उन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार एक सीट पर भाजपा उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट के लिए कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध और निर्दलीय सतीश नांदल के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। राजनीतिक दलों के बीच जारी रणनीतिक गतिविधियों के बीच अब सबकी निगाहें 16 मार्च को होने वाली वोटिंग और उसके नतीजों पर टिकी हैं।
वसुंधरा राजे अपने परिवार के साथ पहुंचीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने
10 Mar, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जयपुर। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनका परिवार नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचा। इस दौरान वसुंधरा राजे के साथ उनके परिवार के सदस्य भी मौजूद थे। यह मुलाकात शिष्टाचार की रूप में देखी जा रही है, लेकिन मरुधार के राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चाएँ शुरू हो गई हैं।
मुलाकात के दौरान विशेष ध्यान विनायक प्रताप सिंह पर गया, जो अपनी दादी की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की संभावनाओं के कारण चर्चा में हैं। विनायक ने 2023 में पहली बार मतदान किया था और कुछ चुनावी कार्यक्रमों में भी दिखाई दिए थे। उनकी फिटनेस के प्रति सजगता और यूट्यूब चैनल पर फिटनेस वीडियो साझा करने के कारण युवा वर्ग में उनकी लोकप्रियता है।
इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी और विनायक के बीच मुलाकात में खास बातचीत देखी गई, जिससे यह अटकलें लग रही हैं कि विनायक राजनीति में जल्द ही कदम रख सकते हैं। वर्तमान में वह दिल्ली से कानून की पढ़ाई कर रहे हैं और जिमिंग व ओपन एक्सरसाइज पर विशेष ध्यान देते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि विनायक की पृष्ठभूमि और युवा छवि उन्हें राजनीतिक क्षेत्र में एक मजबूत उपस्थिति बनाने में मदद कर सकती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह मुलाकात वसुंधरा राजे और उनके परिवार के भविष्य की रणनीतियों का हिस्सा हो सकती है। फिटनेस और कानून की पढ़ाई के साथ विनायक अपनी दादी की विरासत को आधुनिक अंदाज में आगे बढ़ा सकते हैं। मुलाकात के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं, जिससे जनता और समर्थकों में उत्सुकता बढ़ी है। इस तरह, यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं का संकेत भी मानी जा रही है।
नीतीश के दिल्ली रवाना होने पर किचेन कैबिनेट मंत्रियों के विभागों में बदलाव की संभावना
10 Mar, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। सीएम नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा सदस्य चुने जाएंगे। इसके बाद वे दिल्ली कूच करने वाले है। बिहार की राजनीति में 20 साल बाद पहला मौका है, जब सूबे में बिना नीतीश के चेहरे की सरकार होगी।
वहीं एनडीए सरकार में पहली बार भाजपा का सीएम बनने जा रहा है। साथ ही मंत्रिमंडल में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अभी जेडीयू की ओर से नीतीश के कई बेहद करीबी नेता अहम मंत्रालयों को संभाल रहे हैं। संभव है कि नए सीएम बनने के नीतीश के किचेन कैबिनेट के मंत्रियों की जिम्मेदारी बदल दी जाएगी।
मौजूदा कैबिनेट में जेडीयू की ओर से सबसे मजबूत और ताकतवार मंत्री हैं। नीतीश के बेहद करीबी और भरोसेमंद हैं। जानकार बताते हैं कि नीतीश इनके फैसलों को ना नहीं करते। कोई बड़ा फैसला करने से पहले इनके साथ विचार कर सहमति लेते हैं। बिजेंद्र यादव की छवि ईमानदार और बिना लाग-लपेट के सीधी बात कहने वाले नेता की है। नीतीश को सीएम की कुर्सी तक पहुंचाने में इनका बड़ा योगदान है। बताया जा रहा कि बिजेंद्र यादव नई सरकार में मंत्री बने रहने से परहेज कर रहे हैं। उन्होंने नीतीश को बताया है कि जब आप नहीं तब मैं भी कैबिनेट में नहीं रहूंगा। बात दें कि बिजेंद्र के पास कई विभागों की जिम्मेदारी है। वित्त मंत्री के रूप में फरवरी 2026 में बिहार विधानसभा में 3.47 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश किया। उनके पास ऊर्जा विभाग का कार्यभार है। वह बिजली क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की जिम्मेदारी भी दी गई है।
गठबंधन की मजबूती पर सवाल, वामपंथी नेताओं ने कहा- ऐसे नहीं चलेगा गठबंधन
10 Mar, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केरल में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी का दौर अब दिल्ली के गलियारों तक पहुंच गया है। विपक्षी एकता के उद्देश्य से बने इंडिया गठबंधन के भीतर सोमवार को उस वक्त तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब एक बैठक के दौरान वामपंथी दलों ने सीधे तौर पर राहुल गांधी के हालिया बयानों पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। संसद सत्र की रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई इस बैठक में चुनावी कड़वाहट साफ तौर पर हावी दिखी, जिससे गठबंधन की एकजुटता पर सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं।
वामपंथी नेताओं के इस कड़े रुख पर बैठक में मौजूद अन्य दलों ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की। कई नेताओं का तर्क था कि यह बैठक संसद सत्र के एजेंडे पर चर्चा के लिए बुलाई गई है, इसलिए यहां दो दलों के आपसी क्षेत्रीय विवादों को उठाना उचित नहीं है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि राहुल गांधी के भाषण के एक छोटे से हिस्से को मुद्दा बनाना गलत है और इस पर विस्तार से बाद में बात की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अपना पक्ष रखने के लिए तैयार है कि आखिर उन टिप्पणियों का संदर्भ क्या था।
विवाद की मुख्य जड़ राहुल गांधी द्वारा केरल में दिया गया वह बयान है, जिसमें उन्होंने सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच कथित सीक्रेट तालमेल होने का आरोप लगाया था। वामपंथी दलों के सांसद जॉन ब्रिट्स और पी. संतोष कुमार ने बैठक में इस बात पर गहरा ऐतराज जताया कि राहुल गांधी कैसे उन पर भाजपा के साथ गठजोड़ का आरोप लगा सकते हैं। विशेष रूप से राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द कम्युनिस्ट जनता पार्टी ने वामपंथी नेताओं को सबसे ज्यादा आहत किया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि सहयोगी दलों पर इस तरह की टिप्पणियां की जाएंगी, तो गठबंधन का भविष्य संकट में पड़ सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि जब यह बहस चल रही थी, तब राहुल गांधी स्वयं बैठक में मौजूद थे। उन्होंने फिलहाल इस विवाद को टालते हुए यही कहा कि इस विषय पर उचित समय पर चर्चा की जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल में चूंकि मुख्य मुकाबला वामपंथी नेतृत्व वाले एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के बीच ही है, इसलिए वहां की स्थानीय राजनीति का असर राष्ट्रीय गठबंधन पर पड़ना लाजिमी है। केरल में जहां वामपंथी दल लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस को उम्मीद है कि वह इस बार पासा पलट देगी। यह आपसी खींचतान आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है क्योंकि चुनाव करीब हैं।
राहुल गांधी का बयान: ऐसे गंभीर विषय पर चर्चा होना अनिवार्य, लोकसभा में विरोध
10 Mar, 2026 10:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। इस कारण सदन की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्षी दलों ने कहा कि क्षेत्रीय तनाव और उससे जुड़े आर्थिक जोखिम पर तत्काल चर्चा जरूरी है, जबकि सरकार ने इसे गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करार दिया। राहुल गांधी ने कहा, ऐसे गंभीर विषय पर सदन में चर्चा होनी ही चाहिए।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सदन में सवाल उठाया कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट से भारत की अर्थव्यवस्था को कितना बड़ा नुकसान होगा। उन्होंने कहा, एक पैराडाइम शिफ्ट की लड़ाई चल रही है। इससे हमारी इकॉनमी और स्टॉक मार्केट पर बड़ा असर पड़ेगा। पीएम मोदी ने अमेरिका के साथ डील साइन की है, देश को बड़ा झटका लग सकता है। इस पर चर्चा में क्या दिक्कत है? राहुल गांधी ने कहा कि फ्यूल की कीमत और आर्थिक तबाही जैसे मुद्दे जनता के लिए अहम हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका आरोप था कि सरकार इस चर्चा से भाग रही है, क्योंकि इससे प्रधानमंत्री की नीतियों और पदाधिकारियों के बीच संभावित ब्लैकमेल की जानकारी सामने आ सकती है।
संसद में हंगामे के बीच पीठासीन सभापति जगदम्बिका पाल ने विपक्ष से सदन चलाने में मदद करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष तख्तियों और नारेबाजी के माध्यम से पहले से तय कर चुका था कि सदन में काम नहीं करने देगा। बावजूद इसके सदन में हंगामा जारी रहा जिसके बाद कार्यवाही को अपराह्न 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
वहीं दूसरी तरफ संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने कांग्रेस पर गैर-जिम्मेदार विपक्ष होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने पहले लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया और अब दूसरी चर्चा शुरू कर दी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या एक परिवार या एक व्यक्ति पूरे देश के लिए निर्णायक हैं। इस प्रकार संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत हंगामेदार रही, जिसके चलते सदन को स्थगित करना पड़ा। विपक्ष चर्चा की मांग पर अड़ा हुआ है, क्योंकि वह आमजन से जुड़े इस विशेष महत्व के मुद्दे को यूं ही नहीं जाने देना चाहता है। इसलिए आगे भी संसद में हंगामें के आसार बने हुए हैं।
सिंघवी और अठावले समेत कई नेता निर्विरोध निर्वाचित, बाकी 11 सीटों पर चुनावी टक्कर
10 Mar, 2026 09:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Rajya Sabha Election: राज्य सभा की 37 सीटों में से 26 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। दरअसल, 10 राज्यों की इन सीटों के लिए 40 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था। अब 11 सीटों पर 14 प्रत्याशी मैदान में हैं। जो प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं, उनमें अभिषेक मनु सिंघवी, शरद पवार, रामदास अठावले और राहुल सिन्हा का नाम शामिल है।
दरअसल, कई राज्यों में विपक्षी पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों का ऐलान किया था, इसलिए इन नेताओं ने निर्विरोध जीत दर्ज की है। अब बिहार, हरियाणा और ओडिशा की 11 सीटों पर चुनाव होगा।
किन राज्यों की कितनी सीटों पर होगा चुनाव?
37 में से 26 निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद अब 11 सीटों पर चुनाव होगा। इन सीटों पर 14 प्रत्याशी मैदान में हैं। बिहार की 5, ओडिशा की 4 और हरियाणा की 2 सीटों पर वोटिंग होगी। इन सीटों पर 16 मार्च को मतदान किया जाएगा।
जो सबसे ज्यादा चर्चा में है वो बिहार की पांच सीटें हैं। हालांकि बिहार से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना तय माना जा रहा है, लेकिन पांचवीं सीट के लिए किसी भी गठबंधन के पास पर्याप्त नंबर गेम नहीं है।
वहीं हरियाणा में भी कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है। इसके लिए पार्टी ने अपनी रणनीति तय कर ली है। वोटिंग के दिन तक अपने विधायकों को कांग्रेस शासित राज्य में शिफ्ट करने की तैयारी कर रही है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश शिफ्ट कर सकती है। हरियाणा में कांग्रेस का इतिहास रहा है कि क्रॉस वोटिंग के चलते उनके प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ता है।
प्रधानमंत्री का बयान: बजट का मूल उद्देश्य जनता की उम्मीदों को पूरा करना
10 Mar, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को बजट-पश्चात वेबिनार शृंखला के चौथे सत्र को संबोधित किया। इस वेबिनार की थीम “सबका साथ, सबका विकास – जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति” रही। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष के बजट का मूल उद्देश्य देशवासियों की आकांक्षाओं को पूरा करना है और सरकार उसी दिशा में काम कर रही है।
प्रधानमंत्री ने वेबिनार में शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, पर्यटन, खेल और संस्कृति जैसे क्षेत्रों को देश के समग्र विकास का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं से बजट में की गई घोषणाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए सुझाव देने का आग्रह किया। पीएम मोदी ने कहा, “जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति मात्र एक विषय नहीं है, यह इस बजट का मूल उद्देश्य और इस सरकार का संकल्प है।”
प्रधानमंत्री ने निवारक और समग्र स्वास्थ्य की परिकल्पना पर जोर देते हुए स्वास्थ्य अवसंरचना के तेजी से सुदृढ़ीकरण और योग एवं आयुर्वेद की वैश्विक लोकप्रियता का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि सैकड़ों जिलों में मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं। आयुष्मान भारत योजना और आरोग्य मंदिरों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच का विस्तार हुआ है।
विदेश नीति पर बयान को लेकर तनातनी: जयशंकर पर थरूर का सवाल
10 Mar, 2026 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को मिडिल ईस्ट के हालात पर संसद में बयान जारी किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया में बदलते हालात पर करीब से नजर रख रहे हैं। गल्फ देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं। ताजा हालात को देखकर उन्हें सुरक्षित भारत लाने का ऑपरेशन तेजी से जारी है। हालांकि, मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस जयशंकर के बयान से संतुष्ट नहीं है। पार्टी ने दो टूक कहा कि पश्चिम एशिया के मुद्दे पर वे चर्चा चाहते हैं। वहीं इस मामले पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रतिक्रिया दी है।
थरूर ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर विदेश मंत्री जयशंकर के बयान को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनका बयान सुना है, लेकिन हम इस मुद्दे पर चर्चा चाहते हैं। यह एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है। देश इससे बुरी तरह प्रभावित है। हमारी ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है।
थरूर ने कहा कि सोमवार सुबह तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई। कतर से गैस की आपूर्ति पूरी तरह से बंद कर दी गई है। फिलहाल कतर से हमारे कारखानों को भारत में गैस नहीं मिल रही है। हम पूर्वी देशों से गैस प्राप्त कर सकते हैं।
थरूर ने कहा कि परसों ही एलपीजी की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई, और निश्चित रूप से, पेट्रोल भी महंगा होगा। इसलिए यह सब हमारे देश के लिए एक गंभीर समस्या बनने वाला है। इसके बाद हमें सरकार से एक बहुत ही जिम्मेदार और सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता की उम्मीद है।
थरूर ने कहा कि सदन में बिना चर्चा के बस बयान पढ़ देना गलत है। यही वजह है कि जयशंकर के बयान पर कांग्रेस पार्टी ने नाराजगी जाहिर की है। थरूर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों को लेकर कई अहम सवाल हैं। संसद ऐसी जगह है जहां इन मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। हम ये नहीं कह रहे कि हम सरकार हैं।
बिहार की राजनीति में नया सवाल, क्या निशांत उठा पाएंगे नीतीश की विरासत
9 Mar, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली|मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जेडीयू में शामिल हो गए हैं. पार्टी में बड़े नेता जरूर हैं लेकिन अपने पिता की सियासी विरासत को निशांत कितना संभाल पाएंगे ये सबसे बड़ा सवाल है. पार्टी के युवा विधायक हों या फिर कार्यकर्ता, उन्हें निशांत पर भरोसा है. वे काफी दिनों से मांग कर रहे थे कि निशांत आएं. उनके आने से पार्टी बचेगी. अब जब वे जेडीयू में शामिल हो ही गए हैं तो उनके सामने एक दो नहीं बल्कि पांच ऐसी चुनौतियां हैं जिससे उनका सामना होगा. इसे समझिए|
1) मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुरू से अति पिछड़ा वोट बैंक को गोल बंद करने की राजनीति की. यही वजह रही कि 1994 में जैसे ही वह लालू यादव से अलग हुए तो 1995 में उन्होंने अकेले दम पर समता पार्टी से चुनाव लड़ा. एक साल में ही सात सीटों पर कब्जा जमाया था और 2000 में वह संख्या बढ़कर 37 हो गई थी. इसकी बड़ी वजह रही थी कि गैर यादव पिछड़ा और अति पिछड़ा का वोट नीतीश के पाले में जाता रहा. ऐसे में निशांत कुमार के लिए बड़ी चुनौती होगी कि जेडीयू का जो कोर वोटर है उसमें कोई बिखराव नहीं हो|
2) 2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से नीतीश कुमार ने महिला सशक्तिकरण पर विशेष फोकस किया. यही वजह रही कि हर चुनाव में महिला वोट नीतीश के पाले में जाते रहा. महिला वोटर्स के लिए उन्होंने कई तरह की योजनाओं को लागू किया. शराबबंदी जैसे बड़े फैसले लिए. ऐसे में निशांत को भी सरकार में रहकर महिलाओं से जुड़ी योजनाओं पर ज्यादा से ज्यादा फोकस करना होगा|
3) दूसरी ओर निशांत को जेडीयू के सभी बड़े नेताओं, छोटे नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का भरोसा जीतना होगा ताकि आने वाले 2030 के बिहार विधानसभा चुनाव में निशांत की अलग पहचान बन सके. इस पर उन्हें विशेष काम करना होगा. जनता के बीच जाना होगा. उनका भरोसा जीतना होगा|
4) नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद चर्चा है कि बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा. खैर नई सरकार में जो भी हो और निशांत को जो भी जिम्मेदारी मिले लेकिन उन्हें सियासत में पूर्ण रूप से एक्टिव रहने की जरूरत होगी. खुद के लिए एक तरफ जहां मेहनत की जरूरत होगी तो वहीं दूसरी ओर पार्टी के लिए अपनी ओर से क्या करते हैं यह भी देखने वाली बात होगी|
5) वहीं सबसे बड़ी बात है कि जिस तरह से वोटर्स ने नीतीश कुमार पर भरोसा किया उसी तरह निशांत पर भी करें. क्योंकि नीतीश कुमार की साफ छवि रही है. बेटे निशांत के लिए एक तरफ जहां पार्टी है तो दूसरी ओर पिता की ओर से किए गए काम को और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है. इसके लिए वे प्रचार-प्रसार करें, सभा करें, यानी जनता के सामने यह बात लानी होगी कि निशांत जो हैं वो अपने पिता की तरह ही हैं|
पश्चिम बंगाल SIR मामला संसद में गरमा सकता है, बजट सत्र में जोरदार बहस की संभावना
9 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार से शुरू हो रहा है और पहले ही दिन लोकसभा में जोरदार हंगामे के संकेत मिल रहे हैं। विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा कराने जा रहा है। इस प्रस्ताव को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और कांग्रेस के सांसदों को लेकर कुछ गलत दावे भी किए। इसी वजह से कई विपक्षी दलों के नेताओं ने उन्हें हटाने का प्रस्ताव दिया है। नियमों के अनुसार, प्रस्ताव दिए जाने के बाद ओम बिरला ने खुद को कार्यवाही से अलग कर लिया है और कहा गया है कि प्रस्ताव पर फैसला होने के बाद ही वह फिर से सदन की कार्यवाही संभालेंगे।
हालांकि संख्या बल के लिहाज से सरकार मजबूत स्थिति में है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास लोकसभा में बहुमत है, इसलिए माना जा रहा है कि यह प्रस्ताव पारित नहीं हो पाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ओम बिरला के समर्थन में सामने आए हैं और कहा है कि उन्होंने हमेशा संविधान और संसदीय लोकतंत्र की भावना के अनुसार काम किया है।
इन-इन मुद्दों के जोरदार तरीके से उठने की संभावना
सत्र के दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठने की संभावना है। अमेरिका और इस्राइल की तरफ से ईरान पर किए गए हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है, जिससे तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है और कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़ रही हैं। विपक्ष इस मामले में सरकार की विदेश नीति और रूस से तेल खरीद पर अमेरिका द्वारा दिए गए छूट को लेकर सवाल उठा सकता है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष संशोधन में करीब 60 लाख नाम हटाए जाने का मुद्दा भी संसद में गरमा सकता है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद इस मामले को जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी में हैं। वहीं भाजपा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की पश्चिम बंगाल यात्रा के दौरान प्रोटोकॉल उल्लंघन के मुद्दे को उठा सकती है।
सत्र में विधेयकों को पास कराने पर सरकार का रहेगा फोकस
सरकार इस सत्र में बिजली संशोधन विधेयक समेत कई लंबित विधेयकों को भी पास कराने की कोशिश करेगी। वहीं सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही की शुरुआत शिलांग से सांसद रहे रिक्की सिंगकोन के निधन पर श्रद्धांजलि के साथ हो सकती है, जिसके कारण प्रश्नकाल स्थगित होने की भी संभावना है।
जदयू में शामिल हुए निशांत कुमार, राजनीति में किया नया कदम
9 Mar, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जनता दल यूनाईटेड में शामिल हो चुके हैं। वीर चंद्र पटेल रोड स्थित जदयू प्रदेश कार्यालय में हजारों कार्यकर्ताओं के बीच कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने निशांत को पार्टी की सदस्यता दिलाई। जदयू में शामिल होने के बाद निशांत ने कहा कि मैं जदयू के कार्यकर्ता, नेता और बिहार की जनता को नमन करता हूं। मैं आज से पार्टी का सदस्य बन चुका हूं। एक कार्यकर्ता के रूप में मैं सेवा करता रहूंगा। मेरे पिता ने राज्यसभा जाने की घोषणा की है। यह उनका निजी फैसला है। मैं इस फैसले का आदर करता हूं और इसे स्वीकार करता हूं।
निशांत कुमार ने कहा कि मेरे पिता ने बिहार की जनता के लिए जो काम किया है, उसे मैं जनता तक बढ़ाने का काम करूंगा। आप सब ने जो विश्वास किया, उस पर खड़ा उतरने की कोशिश करूंगा। जनता के हृदय में खड़ा उतरने की कोशिश करूंगा। मेरे पिता ने जनता के लिए जो किया, वह सबको याद रहेगा। जनता को मेरे पिता पर गर्व है। वह अपना जीवन बिहार के लिए समर्पित कर दिया। आज से मैं राजनीतिक जीवन की शुरुआत कर रहा हूं। अभी मुझे बहुत कुछ सीखना है। इसके लिए मुझे जनता का आशीर्वाद चाहिए। मैं आप सभी को नमन करता हूं।
वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को किया नमन
पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने के बाद निशांत कुमार ने जदयू के वरिष्ठ नेताओं के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लिया। इसके बाद कार्यकर्तओं का धन्यवाद किया। इधर, जदयू दफ्तर में सुबह से राज्य के सभी जिलों से वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता पहुंचे। कई कार्यकर्ता घोड़ा और हाथी लेकर पहुंचे। सीएम नीतीश कुमार और निशांत के समर्थन में नारेबाजी करते रहे। जदयू कार्यकर्ताओं ने कहा कि आज हमलोगों के बहुत बड़ा दिन है। निशांत पार्टी में शामिल हुए इससे हमलोगों में काफी खुशी है। वह भी इंजीनियर हैं। नीतीश कुमार की तरह ही वह भी बिहार के विकास का काम करेंगे। इधर, जदयू कार्यकर्ताओं की भीड़ को देखते हुए जदयू कार्यालय में पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई है। समर्थकों में उत्साह है।
निशांत ने पूरे बिहार का दौरा करने का फैसला किया
जदयू के वरिष्ठ नेता और एमएलसी नीरज कुमार ने बताया कि आज पार्टी के लिए बड़ा दिन है। निशांत कुमार पार्टी में शामिल हो चुके हैं। सदस्यता ग्रहण करने के बाद उन्होंने पूरे बिहार का दौरा करने का फैसला किया है और वह जल्द ही संगठन से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। निशांत कुमार की जदयू में एंट्री का सभी विधायकों, सांसदों और विधान परिषद् सदस्यों ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह निशांत का राजनीति में शामिल होना, मास्टर स्ट्रोक है। इससे कितने लोग परेशान हो जाएंगे? यह आने वाला समय बताएगा। पार्टी सूत्रों की मानें तो निशांत कुमार को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि हमलोग चाहते हैं निशांत ही बिहार के मुख्यमंत्री बनें। नीतीश कुमार के बाद वह अच्छे तरीके से राज्य संभाल सकते हैं।
ममता बनर्जी बोलीं: ‘एक देश, एक नेता, एक पार्टी का पागलपन सवार’
9 Mar, 2026 08:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का धरना रविवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। टीएमसी सुप्रीमो ने चुनाव आयोग को वैनिश कमीशन कहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इलेक्टोरल रोल से सही वोटर्स के नाम हटाने के लिए वैनिश कमीशन का गलत इस्तेमाल कर रही है। उनका यह कमेंट ऐसे दिन आया है जब चुनाव आयोग की पूरी बेंच राज्य विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव की तैयारियों का रिव्यू करने के लिए कोलकाता आने वाली है। ममता ने कहा कि एक देश, एक नेता, एक पार्टी के पागलपन में, भाजपा ने जन-विरोधी इच्छाओं को पूरा करने के लिए हर लोकतांत्रिक संस्था और संवैधानिक पद को सिस्टमैटिक तरीके से हथियार बना लिया है।
बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा का आखिरी मकसद बाबासाहेब अंबेडकर के बनाए गए संविधान को अपने पार्टी मैनिफेस्टो से बदलना है। ममता ने राज्य में स्पेशल इंटेसिव रिविजिन में वोटर लिस्ट से नाम हटाने के विरोध में 6 मार्च दोपहर 2 बजे से कोलकाता के एस्प्लेनेड मेट्रो चैनल पर धरना शुरू किया है। ममता बनर्जी ने कहा कि सालों से उन्होंने सेंट्रल एजेंसियों, नेशनल कमीशन, एक गुलाम गोदी मीडिया और ज्यूडिशियरी के एक आज्ञाकारी हिस्से को बंगाल के खिलाफ इस्तेमाल किया है। वे वोटर्स को वोटर लिस्ट से हटाने के लिए वैनिश कमीशन का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। भाजपा लीडरशिप दिल्ली की जमींदार है। हम उन्हें बंगाल को अपने अधीन करने के मिशन में कभी कामयाब नहीं होंगे। धर्मतला में हमारा धरना हर उस बांग्ला-विरोधी (बंगाल-विरोधी) एजेंडे का जवाब है जो इस राज्य के लोगों को बेइज्जत करने, डराने और परेशान करने की कोशिश करता है। भाजपा की एकमात्र प्राथमिकता सत्ता है, लेकिन हमारी प्राथमिकता हमेशा से राज्य की जनता रही है।
बंगाल चुनाव से पहले ममता का बड़ा ऐलान, युवाओं को हर महीने मिलेगा 1500 रुपये बेरोजगारी भत्ता
8 Mar, 2026 10:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच ममता बनर्जी ने बेरोजगार युवाओं के लिए बड़ा ऐलान किया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री ने राज्य के युवाओं को हर महीने 1500 रुपये भत्ता देने की घोषणा की है।मुख्यमंत्री ममता ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य युवाओं को आर्थिक सहायता देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद करना है। ममता बनर्जी ने यह घोषणा मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में आयोजित धरना-प्रदर्शन स्थल से ही की। ममता बनर्जी ने बताया कि सरकार पहले इस योजना को 1 अप्रैल से लागू करने वाली थी, लेकिन अब इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राज्य के युवाओं को यह एक तरह का उपहार है। इसके तहत लाभार्थियों को अब अप्रैल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और भुगतान की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाएगी।
कौन होंगे योजना के पात्र
मुख्यमंत्री ने योजना की पात्रता को लेकर भी जानकारी दी। इसके तहत 21 से 40 वर्ष की आयु के युवक और युवतियां आवेदन कर सकेंगे। लाभ पाने के लिए कम से कम माध्यमिक परीक्षा (कक्षा 10वीं) पास होना अनिवार्य होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो छात्र अभी पढ़ाई कर रहे हैं और छात्रवृत्ति के अलावा किसी अन्य सरकारी योजना का लाभ नहीं ले रहे हैं, उन्हें भी इस योजना के तहत भत्ता मिल सकेगा।
रोजगार के आंकड़े भी रखे सामने
विपक्ष के आरोपों के बीच ममता बनर्जी ने अपने शासनकाल में रोजगार के क्षेत्र में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में बेरोजगारी दर में करीब 40 प्रतिशत की कमी आई है। मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य में लगभग 40 लाख लोगों को कौशल प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से करीब 10 लाख लोगों को रोजगार मिल चुका है। उन्होंने बताया कि उत्कर्ष बांग्ला के तहत प्रशिक्षित युवाओं का डेटा उद्योगपतियों की वेबसाइटों से जोड़ा गया है, जिससे उन्हें रोजगार मिलने में आसानी हुई है।
किसानों और प्रवासी मजदूरों के लिए भी राहत
ममता बनर्जी ने भूमिहीन किसानों के लिए भी 4000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पहले यह लाभ केवल सीमित जमीन वाले किसानों को मिलता था, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा प्रवासी श्रमिकों को राज्य के भीतर ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में लघु और मध्यम उद्योगों के क्षेत्र में करीब 1.5 करोड़ लोग कार्यरत हैं और इस क्षेत्र को और मजबूत किया जाएगा।
पीएम मोदी ने ममता पर साधा निशाना और कहा- राष्ट्रपति मुर्मू के अपमान को बंगाल की जनता कभी माफ नहीं करेगी
8 Mar, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित अपमान को लेकर एक बार फिर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कि पश्चिम बंगाल की प्रबुद्ध जनता टीएमसी को एक नारी के अपमान, एक आदिवासी के अपमान और देश के महामहिम राष्ट्रपति के अपमान के लिए कभी माफ नहीं करेगी। पीएम मोदी ने उल्लेख किया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संथाल आदिवासी परंपरा के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भाग लेने बंगाल गई थीं, लेकिन टीएमसी ने उस आयोजन का बहिष्कार किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश, आदिवासी समाज और नारी शक्ति भी इस अपमान को माफ नहीं करेगी। इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पूरे देश की नारी शक्ति को बधाई दी और उनके योगदान को सराहा। उन्होंने कहा कि भारत में महिला सशक्तिकरण नई ऊँचाइयों पर है और नारी शक्ति हर क्षेत्र—राजनीति, प्रशासन, खेल, विज्ञान और समाज सेवा—में अग्रणी भूमिका निभा रही है।
आप पर भी बरसे
दिल्ली में 33,500 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण के अवसर पर पीएम मोदी ने आम आदमी पार्टी (आप) पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पहले प्रोजेक्ट फाइलों में अटके रहते थे और जनता की सुविधा प्रभावित होती थी, लेकिन अब भाजपा सरकार के तहत प्रोजेक्ट जमीन पर उतरते हैं और विकास की गति तेज हुई है। पीएम मोदी ने कहा, अगर यहां आपदा सरकार न होती, तो मेट्रो फेज 4 प्रोजेक्ट बहुत पहले पूरा हो जाता। लेकिन राजनीतिक स्वार्थ के कारण आम आदमी पार्टी ने लाखों लोगों की सुविधा को नजरअंदाज किया। उन्होंने भाजपा सरकार के विकास मॉडल की तुलना पूर्व व्यवस्था से करते हुए जनता के सामने इसे सफलता का प्रतीक बताया।
बिहार में सीएम चेहरे को लेकर हलचल तेज.........शाह ने सम्राट चौधरी को दिल्ली बुलाया
8 Mar, 2026 12:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना । बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के डिप्टी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को दिल्ली बुलाया है। दोनों नेताओं के बीच बैठक होने वाली है। यह बैठक तब हो रही है, जब राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चा जारी हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन के बाद बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव हो सकता है।
दरअसल, नीतीश ने हाल ही में पटना में राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया है। इस दौरान केंद्रीय मंत्री शाह भी मौजूद थे। नीतीश ने बताया कि वे अपनी इच्छा से राज्यसभा जा रहे हैं। इसके बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्यसभा सांसद बनने के बाद वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तब बिहार में नई सरकार का गठन होगा और नए मुख्यमंत्री का चयन होगा।
सूत्रों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी ने संभावित मुख्यमंत्री के नामों पर विचार-विमर्श शुरू किया है। फिलहाल सम्राट चौधरी को इस दौड़ में प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। वे वर्तमान में बिहार सरकार में डिप्टी सीएम हैं और गृह विभाग भी संभाल रहे हैं, जो पहले नीतीश कुमार के पास था। इसके अलावा उनका संबंध पिछड़ा वर्ग की कुशवाहा जाति से है, जिससे उन्हें सामाजिक समीकरणों के लिहाज से मजबूत माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में एक और नाम केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय का भी चर्चा में है। वे भाजपा के प्रमुख यादव चेहरे माने जाते हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व किसी नए चेहरे को भी सामने ला सकता है, जैसा कि उसने हाल के वर्षों में कई राज्यों में किया है। इधर, जेडीयू की बैठक में महत्वपूर्ण फैसला हुआ है। बैठक में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में आने को लेकर भी सहमति बनी है। इससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है। बिहार में राज्यसभा की पाँच सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव होने हैं। अप्रैल में मौजूदा सांसदों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नए सदस्यों का कार्यकाल शुरू होगा। ऐसे में आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। फिलहाल अमित शाह और सम्राट चौधरी की दिल्ली बैठक को इसी राजनीतिक प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है।
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