राजनीति
लोकसभा में लौटते ही ओम बिरला ने नियमों पर दिया जोर
12 Mar, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ओम बिरला। लोकसभा में अध्यक्ष पद दोबारा संभालने के बाद ओम बिरला ने कहा कि चाहे सदन के नेता हों, या प्रतिपक्ष के नेता सभी को नियमों के तहत बोलने का अधिकार है. प्रतिपक्ष के नेता सदन से ऊपर नहीं हैं. सदन नियमों से चलता है. ये नियम सरकार या विपक्ष ने नहीं बनाए, मुझे विरासत में मिले हैं. लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि अध्यक्ष के निर्णय से कोई भी सदस्य सहमत-असहमत हो सकता है, क्योंकि सदन की मर्यादा बनाए रखने के लिए मुझे कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं. भेदभाव के आरोपों पर ओम बिड़ला ने कहा कि आसन के पास कभी माइक ऑन-ऑफ करने का बटन नहीं होता, जो सदस्य नियम के तहत बोलते हैं, उन्हीं का माइक ऑन रहता है।
अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज बनने का प्रयास
ओम बिड़ला ने कहा कि यह सदन भारत के 140 करोड़ नागरिकों की संप्रभु इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है. यहां पर हर सांसद अपने क्षेत्र की समस्याओं को बड़ी ही उम्मीदों के साथ लेकर आता है. ऐसे में हमारी कोशिश रहती है, कि सभी सदस्य नियमों के तहत अपने विचार रखें. हमारा प्रयास रहा है कि लोकसभा समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज बन सकें।
पीएम को भी लेनी होती है अनुमति: ओम बिड़ला
ओम बिड़ला ने भेदभाव के आरोपों पर कहा कि सदन के नेता, नेता प्रतिपक्ष, मंत्री या अन्य सदस्य सभी को सदन के नियमों और प्रक्रिया के तहत बोलने का अधिकार है. सभी के लिए समान नियम लागू होते हैं, कोई भी सदस्य नियम से ऊपर नहीं है. स्पीकर ने पीएम का जिक्र करते हुए कहा कि चाहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही क्यों ना हों. अगर उनको भी वक्तव्य देना है, तो अध्यक्ष से अनुमति लेनी होती है।
गैस सिलेंडर की कमी पर विधानसभा में हंगामा
12 Mar, 2026 01:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
छत्तीसगढ़। विधानसभा के बजट सत्र का आज 9वां दिन है. वहीं विपक्ष ने शून्यकाल के दौरान LPG सिलेंडर की किल्लत को लेकर जमकर हंगामा मचाया. आसंदी ने स्थिति को देखते हुए सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी।
LPG सिलेंडर की कमी को लेकर विपक्ष का हंगामा
शून्यकाल में चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने युद्ध के कारण गैस की कमी नहीं होने का आश्वासन दिया था, लेकिन गैस की क़िल्लत शुरू हो गई है. होटल बंद हो रहे है प्रदेश में शादियों का सीजन चल रहा है. छत्तीसगढ़ परेशान है कालाबाजारी ना हो इसकी व्यवस्था कराओ. स्थगन को स्वीकार करके चर्चा होनी चाहिए. वहीं विपक्ष के स्थगन पर सत्ता पक्ष ने फिर आपत्ति जताई. भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा – परेशानी हो रही है यह सही है, लेकिन विधानसभा में यह विषय लाना सही प्लेटफार्म नही है।
यह हर घर से जुड़ा मामला – भूपेश बघेल
पूर्व सीएम भुपेश बघेल ने कहा – वैश्विक स्तर पर यह परेशानी है. युद्ध चल रहा है इसमें छत्तीसगढ़ का कोई हाथ नही है. केंद्र सरकार राज्य सरकार इसमें चिंता कर रही है. इसके बाद भी परेशानी हो रही है. शादियां है , कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई बंद है जिससे होटल बंद हो रहे है. यह हर घर से जुड़ा हुआ मामला है. यह मामला हर घर से जुड़ा हुआ है. यह प्रदेश में चिंता का विषय है इसलिए स्थगन पर चर्चा होनी चाहिए इसको ग्राह्य किया जाए।
विपक्ष ने सदन से किया वॉकआउट
इस पर सभा पति ने स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार किया. आसंदी ने कहा यह केंद्र का विषय है इसलिए इस विषय पर चर्चा नही की जा सकती हैं. इसके बाद विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए वॉकआउट कर दिया।
संसद में गूंजा मोबाइल रिचार्ज का मुद्दा, यूजर्स को क्यों देना पड़ता है ज्यादा पैसा
12 Mar, 2026 12:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। संसद में मोबाइल रिचार्ज प्लान को लेकर बड़ा मुद्दा उठाया गया। Raghav Chadha ने राज्यसभा में कहा कि देश में मोबाइल यूजर्स को साल में 12 महीने के बजाय 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है, जो आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है।
संसद में उठी मोबाइल यूजर्स की समस्या
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि भारत में लगभग 125 करोड़ मोबाइल यूजर्स हैं और इनमें से करीब 90% लोग प्रीपेड कनेक्शन इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने इन यूजर्स की दो बड़ी समस्याएं संसद में उठाईं।पहली समस्या यह है कि रिचार्ज खत्म होते ही कई कंपनियां आउटगोइंग के साथ-साथ इनकमिंग कॉल भी बंद कर देती हैं, जिससे लोगों को परेशानी होती है। दूसरी समस्या 28 दिन वाले रिचार्ज प्लान की है।
12 महीने में 13 बार रिचार्ज क्यों?
भारत की ज्यादातर टेलीकॉम कंपनियां प्रीपेड प्लान 28 दिन की वैधता के साथ देती हैं।
अगर 28 दिन के हिसाब से गणित लगाएं:
28 × 13 = 364 दिन
आम आदमी पार्टी के सांसद ने कहा कि मैंने 28 दिन के रिचार्ज “मंथली” प्लान्स का भी मुद्दा उठाया। अगर किसी चीज़ को मंथली कहा जाता है तो उसे 30-31 दिनों के कैलेंडर महीने के हिसाब से होना चाहिए। 28 दिन के साइकल की वजह से कंज्यूमर को असल में एक साल में 13 रिचार्ज के लिए पेमेंट करना पड़ता है। (28 दिन × 13 रिचार्ज = 364 दिन) इसका मतलब है कि पूरे साल मोबाइल चलाने के लिए यूजर्स को 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है, जबकि साल में केवल 12 महीने होते हैं।
कंपनियों की रणनीति पर सवाल
राघव चड्ढा ने कहा कि दुनिया में ज्यादातर बिलिंग 30 या 31 दिन के कैलेंडर महीने के हिसाब से होती है, जैसे सैलरी, किराया, बिजली और पानी का बिल। लेकिन टेलीकॉम कंपनियां 28 दिन का प्लान देकर साल में एक अतिरिक्त रिचार्ज करवाती हैं। उन्होंने इसे आम उपभोक्ताओं के साथ “छुपी हुई लूट” बताया और कहा कि अगर प्लान को मासिक कहा जाता है तो उसकी वैधता भी 30 या 31 दिन होनी चाहिए।
इनकमिंग कॉल बंद होने पर भी उठाया सवाल
सांसद ने यह भी कहा कि रिचार्ज खत्म होने पर आउटगोइंग कॉल बंद होना समझ में आता है, लेकिन कई मामलों में इनकमिंग कॉल और SMS भी बंद हो जाते हैं। इससे लोगों को बैंकिंग OTP, सरकारी सेवाओं और जरूरी कॉल मिलने में दिक्कत होती है।
सरकार से की ये मांग
राघव चड्ढा ने सरकार और टेलीकॉम कंपनियों से अपील की कि मोबाइल रिचार्ज प्लान कैलेंडर महीने (30-31 दिन) के हिसाब से हों यूजर्स के लिए प्लान ज्यादा पारदर्शी और उपभोक्ता-हितैषी बनाए जाएं रिचार्ज खत्म होने पर भी इनकमिंग कॉल कुछ समय तक जारी रहे।
क्यों अहम है यह मुद्दा
आज के समय में मोबाइल फोन केवल बातचीत का साधन नहीं बल्कि बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, OTP, सरकारी सेवाओं और नौकरी से जुड़ी जानकारी के लिए जरूरी हो चुका है। इसलिए रिचार्ज और कॉल सेवाओं से जुड़ा यह मुद्दा सीधे करोड़ों लोगों को प्रभावित करता है।
CEC पर घिरा विवाद: संसद में आज महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देने की तैयारी
12 Mar, 2026 12:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। संसद (Parliament) में लोकसभा स्पीकर पद (Lok Sabha Speaker’s post) से हटाने संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner (CEC) Gyanesh Kumar) के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। संभावना है कि तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट विपक्ष (Opposition) गुरुवार को सीईसी के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देगा। नोटिस पर लोकसभा के 120 और राज्यसभा के 60 सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। तृणमूल की रणनीति मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को प. बंगाल विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाने की है।
सीईसी के खिलाफ टीएमसी को मिला कांग्रेस-सपा का साथ
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस मुहिम पर बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चैंबर में हुई बैठक में सहमति बनी। बैठक में राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तृणमूल के प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद नोटिस देने के लिए जरूरी सांसदों के हस्ताक्षर कराए गए। योजना दोनों सदनों में नोटिस देने की है। दरअसल, महाभियोग की प्रक्रिया के लिए लोकसभा में 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर की जरूरत पड़ती है। सीईसी को हटाने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट के जजों को हटाने की तरह ही प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है।
जल्दबाजी में क्यों हैं तृणमूल
दरअसल पार्टी चाहती है कि अप्रैल-मई में बंगाल विधानसभा चुनाव में एसआईआर को बड़ा मुद्दा बनाने के लिए इसी सत्र में महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा हो। प्रक्रिया शुरू करने और मुख्य रूप से चर्चा के लिए 14 दिन पहले नोटिस देना जरूरी है। यदि बृहस्पतिवार को नोटिस दिया गया तो इसी सत्र में प्रस्ताव पर चर्चा हो जाएगी। नोटिस में सीईसी पर सरकार के इशारे पर एसआईआर के बहाने जानबूझकर उचित मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने का आरोप लगाया गया है।
क्या है महाभियोग की प्रक्रिया?
मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही होती है। इसके लिए ‘साबित दुर्व्यवहार’ या ‘अक्षमता’ को आधार बनाना होता है। यह प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में लाया जा सकता है। इसे पास कराने के लिए सदन के कुल सदस्यों के बहुमत और मौजूद व वोट देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।
अमित शाह बोले- हिम्मत है तो पीएम के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाओ, स्पीकर हटाने की प्रक्रिया भी बताई
12 Mar, 2026 11:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने संसद (Parliament) में विपक्ष (Opposition) द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर जवाब देते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री (Prime Minister) को हटाने का प्रस्ताव लाना है तो लाएँ। उन्होंने स्पीकर के खिलाफ उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए लोकतंत्र और विधायी चेतना पर जोर दिया। शाह ने कहा कि स्पीकर विधायी न्यायशास्त्र के सर्वोच्च अधिकारी हैं और उनके खिलाफ गलत तरीके से सवाल उठाना संविधान की गरिमा पर सवाल उठाने के समान है।
उन्होंने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा, “लाएँ न प्रधानमंत्री जी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव। कोई विरोध नहीं कर रहा। मुद्दों पर चर्चा करेंगे।” शाह ने बताया कि संविधान में ऐसी परिस्थितियों के लिए अलग-अलग प्रावधान बनाए गए हैं।
स्पीकर को हटाने का नियम
शाह ने कहा कि लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए 94(सी) के तहत प्रभावी बहुमत की आवश्यकता होती है। यह प्रावधान असाधारण परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जाता है और रोजमर्रा के लिए नहीं है। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि संविधान ने विभिन्न पदों के लिए अलग-अलग बहुमत तय किया है।
प्रधानमंत्री को हटाने के लिए बहुमत
अमित शाह ने संसद में तीन प्रकार की बहुमत की व्याख्या दी:-
साधारण बहुमत (Simple Majority)
सदन में उस दिन उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के 50 प्रतिशत से अधिक का समर्थन। प्रधानमंत्री को हटाने के लिए यही बहुमत चाहिए। उदाहरण के लिए, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 240 सीटें मिली थीं, और वह अन्य गठबंधन दलों के साथ सरकार चला रही है।
प्रभावी बहुमत (Effective Majority)
सदन की कुल क्षमता में से खाली सीटों को घटाने के बाद बची संख्या का 50 प्रतिशत से अधिक। स्पीकर को हटाने के लिए यही बहुमत जरूरी होता है।
विशेष बहुमत (Special Majority)
इसमें दो शर्तें पूरी होनी चाहिए: सदन की कुल सदस्य संख्या का 50 प्रतिशत से अधिक समर्थन और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का कम से कम दो तिहाई बहुमत। यह संविधान संशोधन विधेयक, सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने या राष्ट्रीय आपातकाल के अनुमोदन के लिए जरूरी होता है।
सेहत योजना के तहत मोहाली महिला का हृदय इलाज सफल, करोड़ों की बचत
11 Mar, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। जब मोहाली की एक महिला को अचानक दिल से जुड़ी गंभीर परेशानी हुई, तब तुरंत इलाज जरूरी था। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत उनका इलाज बिना किसी आर्थिक देरी के कराया गया। इससे परिवार को ऐसे मुश्किल समय में लगभग ₹४ लाख के संभावित खर्च से राहत मिली। माणिकपुर गांव की रहने वाली सुखविंदर कौर को तेज सीने में दर्द और मधुमेह से जुड़ी दिक्कतों के बाद एक निजी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि दिल में गंभीर समस्या है और तुरंत स्टेंट डालना जरूरी है। इलाज और अस्पताल में भर्ती का खर्च लगभग ₹3 से ₹4 लाख तक आ सकता था, इतनी बड़ी राशि का इंतजाम परिवार के लिए इतनी जल्दी करना आसान नहीं था।
योजना के तहत उनकी पात्रता की पुष्टि होते ही जरूरी प्रक्रिया जल्दी पूरी की गई और उनका इलाज योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध अस्पताल में किया गया। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को सालाना ₹10 लाख तक का इलाज कवर मिलता है। एक हफ्ते तक निगरानी में रखने के बाद उन्हें स्थिर हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। परिवार ने कहा, “हमारी सबसे बड़ी चिंता उनकी सेहत थी। इतनी बड़ी रकम का तुरंत इंतजाम करना बहुत मुश्किल होता। इस योजना की वजह से हम पैसों की चिंता छोड़कर उनके ठीक होने पर ध्यान दे सके।”यह मामला मुख्यमंत्री सेहत योजना की बढ़ती पहुंच को भी दिखाता है। पूरे पंजाब में अब तक 9 लाख से अधिक सेहत कार्ड जारी किए जा चुके हैं। राज्य के अधिकारियों के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में 70% से ज्यादा मरीजों को इस योजना के तहत मुफ्त इलाज मिल रहा है। पंजाब सरकार ने दावों का समय पर भुगतान और बिना रुकावट कैशलेस इलाज जारी रखने के लिए बीमा कंपनी को ₹500 करोड़ जारी किए हैं। इस योजना के तहत सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में दिल की सर्जरी, कैंसर का इलाज और किडनी से जुड़ी बीमारियों समेत कई बड़े इलाज कवर किए जाते हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना का मकसद साफ है – कोई भी पात्र परिवार पैसों की कमी की वजह से जरूरी इलाज में देरी न करे। सरकार की लगातार आर्थिक मदद से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बड़े इलाज तक कैशलेस पहुंच लोगों के लिए एक भरोसा बन सके।”
स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर अमित शाह का तीखा जवाब
11 Mar, 2026 06:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Parliament Budget Session 2026:आज संसद के सत्र में कई मुद्दों पर चर्चा हुई. विपक्ष द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा जारी के बीच पीएम मोदी पर राहुल गांधी और बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद के बीच हॉट टॉक देखने को मिली, वहीं लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सदन आपसी विश्वास से चलता है। पक्ष-विपक्ष दोनों के लिए सदन के स्पीकर अभिरक्षक होते हैं, उन्हें लोकसभा कैसे चलानी है, इसके लिए इसी लोकसभा ने कुछ नियम बनाए हैं।
ये नियम नेहरू जी के समय से चले आ रहे हैं-अमित शाह
गृह मंत्री ने आगे कहा ‘सदन के अंदर नियमों के अनुसार बोलना होता है और जिसकी अनुमति नियम नहीं देते उस हिसाब से किसी को भी बोलने का अधिकार नहीं हैं, चाहे वह कोई भी हो. जब भी आप नियमों को नजरअंदाज करोंगे तो फिर स्पीकर का दायित्व है कि वह उसे रोके, टोके फिर फि न माने तो निकालकर बाहर करें. ये नियम हमने नहीं बनाएं हैं ये नेहरु जी के समय से चले आ रहे हैं।’
उन्होंने कहा ‘सदन कोई मेला नहीं है जहां जो मन किया वो किया. सदन नियम के अनुसार चलता है और आपको भी नियम के हिसाब से चलना होगा।’
असंसदीय टिप्पणियां संसदीय रिकॉर्ड में नहीं होने चाहिए-अमित शाह
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा ‘ स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दुखद हैं. पीएम के खिसाफ अविश्वास प्रस्ताव लाइए, उसका स्वागत है. स्पीकर को असंसदीय शब्दों को हटाने का पूरा अधिकार है. स्पीकर के फैसले पर SC भी सवाल नहीं कर सकता. बीजेपी ने स्पीकर पर आज तक सवाल नहीं उठाए. सदस्यों को अधिकार है, विशेषाधिकार नहीं, कुछ लोग विशेषाधिकार की गलतफहमी में जीते हैं. स्पीकर का पद लोकतंत्र की गरीमा का प्रतीकअसंसदीय टिप्पणियाँ संसदीय रिकॉर्ड में नहीं होने चाहिए।’
जो नियमों के अनुसार नहीं चलेगा उसका माइक बंद होगा- अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा “कुछ सदस्यों ने कहा कि यह(अविश्वास प्रस्ताव) माइक के कारण आया है, माइक बंद होता है. अभी गिरिराज सिंह भी खड़े होकर पप्पू यादव के खिलाफ बोल रहे थे तो उनका माइक बंद कर दिया गया. मंत्री होने के बावजूद भी माइक बंद होता है. यह सदन नियमों से चलता है, जो नियमों, अनुशासन से नहीं चलेगा उसका माइक बंद होगा और बंद हो ही जाना चाहिए।”
संसद में घमासान: अनुराग ठाकुर का राहुल गांधी पर तीखा हमला
11 Mar, 2026 05:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिमाचल डेस्क। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष (एलओपी) के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा’ बताया। अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेशों में भारत और भारतीय लोकतंत्र की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं और सदन के नियमों का भी पालन नहीं करते। सदन में बोलते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि कुछ लोग इस सदन में माइनस ट्रिपल सी के साथ आते हैं- न सिविक सेंस, न कॉमन सेंस और न ही कॉन्स्टिट्यूशनल सेंस। जब हम लोकसभा के सदस्य बने थे, तब हमें बताया गया था कि सदन के अंदर कैसे व्यवहार करना चाहिए। लेकिन एक व्यक्ति है जो इन सभी नियमों को तोड़ता है, और वह है प्रोपेगेंडा का लीडर। उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्हें ‘फोमो गांधी’ भी कहा। अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह फोमो गांधी हैं। इन्हें डर रहता है कि कहीं वे सुर्खियों से बाहर न हो जाएं।
अनुराग ठाकुर ने यह बयान उस दौरान दिया जब वे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव के खिलाफ बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सदन के लगभग सभी दलों के सांसदों ने ओम बिरला के कार्यों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि ओम बिरला इस सदन के प्रधान हैं और वे बने रहेंगे। हर पार्टी के सदस्य ने उनके पक्ष में बात कही है। भाजपा सांसद ने आगे कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के रूप में ओम बिरला ने सभी दलों को बराबर बोलने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि चाहे कांग्रेस हो या समाजवादी पार्टी, ओम बिरला ने सभी को बोलने का मौका दिया। यहां तक कि जिन सांसदों को अपनी ही पार्टी से कम अवसर मिला, उन्हें भी ओम बिरला ने बोलने का मौका दिया। इसलिए प्रत्येक सदस्य उनकी प्रशंसा कर रहा है और उनके समर्थन में बोल रहा है। इसके अलावा अनुराग ठाकुर ने रक्षा और सुरक्षा के मुद्दे पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सशस्त्र बलों को पूरी छूट दी थी। प्रधानमंत्री मोदी ने सेना से कहा था, ‘जो उचित है, वह करो।
पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह की बढ़ीं मुश्किलें, सुप्रीम कोर्ट ने जांच के दिए आदेश
11 Mar, 2026 12:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सागर। सागर जिले के बहुत चर्चित दलित महिला अंजना हत्याकांड में उच्चतम न्यायालय की युगल खंडपीठ ने राज्य सरकार के पुरजोर विरोध के बाद इस दलित महिला हत्याकांड में सीबीआई के आदेश उच्चतम न्यायालय ने जारी किए सूत्रों अनुसार इस प्रकरण में पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह हत्या के इस आरोप में षड्यंत्रकारी बताए जाते हैं। राजनीतिक क्षेत्र में अब भूपेंद्र सिंह की मुश्किल है और अधिक बढ़ गई है। पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह को लेकर मामला कोर्ट तक पहुंच गया है और सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला
पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ कुछ गंभीर आरोपों को लेकर एक याचिका अदालत में दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि मामले की स्थानीय स्तर पर सही और निष्पक्ष जांच नहीं हो रही और इसमें बड़े लोगों की भूमिका हो सकती है। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच जरूरी है। इसलिए अदालत ने CBI को पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
अदालत ने कहा कि अगर किसी मामले में निष्पक्ष जांच पर सवाल उठते हैं या आरोप गंभीर और प्रभावशाली लोगों से जुड़े हों तो ऐसी स्थिति में केंद्रीय एजेंसी से जांच कराना जरूरी हो सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने CBI को पूरे मामले की जांच शुरू करने को कहा।
अब आगे क्या होगा
CBI जांच के बाद इन कदमों की संभावना रहती है:
संबंधित लोगों से पूछताछ
दस्तावेज़ और सबूतों की जांच
जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज
सबूत मिलने पर गिरफ्तारी या चार्जशीट
यानि अब पूरा मामला CBI के हाथ में होगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई होगी।
राजनीतिक मायने:
राजनीति में इसे पूर्व मंत्री के लिए बड़ी मुश्किल माना जा रहा है, क्योंकि CBI जांच शुरू होने के बाद मामला और गंभीर हो सकता है।
गुजरात विधानसभा में भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने, हंगामे से गूंजा सदन
11 Mar, 2026 11:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद| गुजरात विधानसभा के चल रहे सत्र के दौरान एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। खास तौर पर मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता जीतू वाघाणी तथा कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक शैलेष परमार के बीच हुई तीखी बहस से सदन का माहौल काफी गरमा गया।
चर्चा की शुरुआत में जीतू वाघाणी ने आक्रामक अंदाज में कहा कि भाजपा पहले ही सात विधानसभा सीटें जीत चुकी है और आने वाली आठवीं सीट भी भाजपा के खाते में ही जाएगी। उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जनता ने उन्हें पूरी तरह नकार दिया है। हालांकि विवाद उस समय बढ़ गया जब वाघाणी ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर व्यक्तिगत टिप्पणी करनी शुरू कर दी। सदन में बोलते हुए उन्होंने कई बार सोनिया गांधी का नाम लेते हुए कटाक्ष किया। उन्होंने विदेशी मूल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता “इम्पोर्ट होकर आए हैं”, जबकि देश को नरेंद्र मोदी जैसे स्वदेशी नेता की जरूरत है।
वाघाणी द्वारा सोनिया गांधी को “इम्पोर्टेड नेता” कहने पर विपक्षी बेंचों पर बैठे कांग्रेस विधायकों ने कड़ा विरोध जताया और सदन में शोरगुल शुरू हो गया। वाघाणी के इन तीखे बयानों के जवाब में कांग्रेस विधायक शैलेष परमार ने मोर्चा संभालते हुए उन्हें कड़ी चेतावनी दी। परमार ने कहा, “आप अपनी सीमा में रहें। यदि आप मर्यादा पार करेंगे तो मुझे पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाना पड़ेगा।” उन्होंने आगे कहा कि यदि पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया गया तो पूरी टिप्पणी सदन के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज होगी, जिससे भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
मांगों पर चर्चा के दौरान जब शैलेष परमार ने इस तरह का कड़ा रुख अपनाया तो कुछ देर के लिए सदन में सन्नाटा छा गया। परमार ने स्पष्ट कहा कि बार-बार सोनिया गांधी और विदेशी मूल का मुद्दा उठाना सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं है। इस दौरान दोनों पक्षों के विधायकों के बीच जोरदार नारेबाजी और तीखी बहस भी देखने को मिली, जिससे विधानसभा का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।
दक्षिण में पीएम मोदी की सक्रियता, आज केरल-तमिलनाडु का दौरा
11 Mar, 2026 10:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 मार्च 2026 को केरलम और तमिलनाडु का दौरा करने वाले हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी केरलम में करीब 10,800 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे और कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इस दौरे से पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि एनडीए का सुशासन एजेंडा केरलम में एलडीएफ और यूडीएफ की नीतियों से अलग है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तमिलनाडु में डीएमके अब एनडीए की बढ़ती लोकप्रियता से चिंतित है। उन्होंने आगे बताया कि वो बुधवार को केरलम के एर्नाकुलम और तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में होने वाले कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए उत्सुक हैं। केरलम पहुंचने पर प्रधानमंत्री अखिल केरल धीवरा सभा के गोल्डन जुबली समारोह में भी भाग लेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स पर कहा कि, मछुआरों के कल्याण के लिए इस संस्था का काम सराहनीय है।
प्रधानमंत्री मोदी कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। ये परियोजनाएं ऊर्जा, हाईवे, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, रेलवे समेत कई क्षेत्रों से जुड़ी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एर्नाकुलम में लगभग 10,800 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी भारत पेट्रोलियम निगम लिमिटेड की कोच्चि रिफाइनरी में पॉलीप्रोपाइलीन यूनिट की आधारशिला रखेंगे और दो प्रमुख राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे।
तिरुचिरापल्ली में प्रधानमंत्री मोदी लगभग 5,650 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नीलगिरी और इरोड जिलों में बीपीसीएल के सिटी गैस वितरण नेटवर्क की आधारशिला रखेंगे और चेन्नई में आईओसीएल के ल्यूब ब्लेंडिंग प्लांट को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकसित 3 रेलवे स्टेशनों शोरनूर जंक्शन, कुट्टिप्पुरम और चंगनाश्शेरी का उद्घाटन करेंगे। इन स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया गया है, जहां यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं मिल सकेगी।
पवार की राज्यसभा उम्मीदवारी पर ठाकरे परिवार ने जताई आपत्ति
11 Mar, 2026 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। शरद पवार को राज्यसभा भेजने के मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि शिवसेना (उद्धव ठाकरे) निर्णय से खुश नहीं। ठाकरे परिवार ने पहले ही शरद पवार का समर्थन नहीं करने का मन बनाया था, हालांकि आधिकारिक तौर पर इस बारे में नहीं कहा गया। इसकी वजह हैं कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के बीच विलय की अटकलें चल रही हैं, और अब शिवसेना यूबीटी को लगता है कि एनसीपी भरोसेमंद सहयोगी नहीं है। इसलिए ठाकरे परिवार पवार को राज्यसभा में भेजने को लेकर खुश नहीं था।
एक अखबार से बात करते हुए शिवसेना यूबीटी के नेताओं ने कहा कि वर्तमान में एनसीपी को महाविकास अघाड़ी में भरोसा नहीं किया जा सकता। सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल ने उद्धव से पवार की उम्मीदवारी के समर्थन के लिए मुलाकात की, लेकिन चर्चा के बावजूद ठाकरे ने यह स्पष्ट किया कि वह पवार का सम्मान करते हैं, पर शिवसेना यूबीटी अपना उम्मीदवार ही राज्यसभा भेजेगी। इतना ही नहीं आदित्य ठाकरे ने संकेत दिए कि केवल शिवसेना यूबीटी और कांग्रेस ही केंद्र में भाजपा सरकार के खिलाफ खड़ी हैं और गठबंधन में शामिल कुछ दल गुप्त बैठकों में मोदी सरकार से संपर्क कर रहे हैं, इसलिए उनका समर्थन नहीं होना चाहिए।
लेकिन कांग्रेस ने पवार की उम्मीदवारी का समर्थन किया। लोकसभा सांसद सुले ने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की थी। शिवसेना यूबीटी के अनुसार, कांग्रेस के समर्थन से उन्हें पवार का विरोध करना मुश्किल हो गया क्योंकि न वे खुद उम्मीदवार चुन सकते थे और न कांग्रेस से अलग जा सकते थे। ठाकरे परिवार के नाराज होने का संकेत आदित्य के बयान से मिलता है, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें अपने हक के लिए लड़ना पड़ रहा है और उन्हें 2028 तक अपने उम्मीदवार को चुनाव में उतारने का मौका नहीं मिलेगा। राज्यसभा के चुनाव में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, भाजपा महासचिव विनोद तावड़े, रामराव वडुकुटे, माया इवनाते और शिवसेना की ज्योति वाघमारे भी निर्वाचित हुईं। एनसीपी से पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार भी राज्यसभा पहुंचे। सात सीटों के लिए केवल सात उम्मीदवार होने के कारण मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी। इस पूरी प्रक्रिया ने महाराष्ट्र की राजनीतिक तस्वीर को जटिल बना दिया है, जहां गठबंधन में भरोसे और रणनीति को लेकर सत्ताधारी दलों के बीच मतभेद उजागर हुए हैं।
राज्यसभा की 26 सीटों पर निर्विरोध जीत, हरियाणा और बिहार में होगा चुनाव
11 Mar, 2026 08:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा में फिर बीजेपी कर सकती हैं खेला
नई दिल्ली। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले सहित 26 उम्मीदवार सोमवार को राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए। नाम वापसी की आखिरी तारीख बीत जाने के बाद, अब उच्च सदन की 11 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होगा। बिहार में पांच, ओडिशा में चार और हरियाणा में दो सीटे हैं जहां चुनाव होना है। इन द्विवार्षिक चुनावों में बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा के लिए चुनने की पूरी संभावना है। 10 राज्यों में खाली हुई 37 सीटों के लिए कुल 40 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया था। नाम वापसी के बाद, अब बिहार, ओडिशा और हरियाणा में एक-एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। 11 सीटों के लिए अब कुल 14 उम्मीदवार चुनावी मैदान में बचे हैं।
भाजपा ने नियुक्त किए केंद्रीय पर्यवेक्षक
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को बिहार, हरियाणा और ओडिशा में राज्यसभा चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की एक अधिसूचना जारी की। इसमें बिहार से केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, हरियाणा से गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी और ओडिशा के लिए महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले का नाम शामिल है।
बिहार (5 सीटें)-बिहार में एक सीट के लिए दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा क्योंकि राजद (राजद) ने कारोबारी से राजनेता बने अपने मौजूदा सांसद अमरेंद्र धारी सिंह को फिर से उम्मीदवार बनाया है। वहीं एनडीए की ओर से केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर (हैट्रिक की कोशिश में), रालोमो (आरएलएम) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (लगातार दूसरे कार्यकाल की उम्मीद में) और भाजपा के प्रदेश महासचिव शिवेश कुमार अपना संसदीय पदार्पण कर रहे हैं।जहां राजद के पास 25 विधायक हैं और कांग्रेस-वाम दलों सहित महागठबंधन के 10 अन्य विधायकों का समर्थन है। पार्टी एआईएमआईएम और बसपा की मदद से छह वोटों की अपनी कमी को पूरा करने की उम्मीद कर रही है। बिहार विधानसभा सचिव ख्याति सिंह के अनुसार, छह उम्मीदवारों में से किसी ने भी अपना नामांकन वापस नहीं लिया, जिसके कारण राज्य में एक दशक से अधिक समय में पहली बार मतदान की आवश्यकता पड़ रही है।
ओडिशा से भाजपा उम्मीदवार प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार। वहीं बीजद ने संतरूप मिश्रा और प्रख्यात यूरोलॉजिस्ट डॉ. दातेश्वर को प्रत्याशी बनाया है। भाजपा के समर्थन से दिलीप रे ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा है, जिससे यहां क्रॉस-वोटिंग की संभावना बढ़ गई है। हरियाणा में भी एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला होना है, जहां पहले भी क्रॉस-वोटिंग का इतिहास रहा है। कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं और एक सीट जीतने के लिए विपक्षी पार्टी को केवल 31 पहली पसंद वाले वोटों की आवश्यकता है। उम्मीदवार में भाजपा से संजय भाटिया, कांग्रेस से करमवीर सिंह बौद्ध और निर्दलीय सतीश नांदल। नांदल ने 2019 में भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था और अब वह मैदान में तीसरे उम्मीदवार के रूप में उतरे हैं।
विभिन्न राज्यों से निर्विरोध चुने गए उम्मीदवार
चुनावों के इस दौर के बाद राज्यसभा में भाजपा की सीटें बढ़ने की उम्मीद है और वह उच्च सदन में सबसे अधिक सीटों वाली पार्टी बनी रहेगी। लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष एम. थंबीदुरई और कांग्रेस के जाने-माने वकील अभिषेक मनु सिंघवी भी उन नेताओं में शामिल हैं जो उच्च सदन के लिए निर्विरोध चुने गए हैं।महाराष्ट्र से 7 सीटों पर सभी सात उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। इनमें सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के छह और विपक्षी महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवार शरद पवार शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, भाजपा नेता विनोद तावड़े, रामराव वडकुटे (भाजपा), नागपुर की पूर्व मेयर माया इवनाते (भाजपा), एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की ज्योति वाघमारे और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार निर्विरोध निर्वाचित हुए।
पश्चिम बंगाल की पांच सीटों पर सत्तारूढ़ टीएमसी (टीएमसी) के चार उम्मीदवार बाबुल सुप्रियो, पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी और अभिनेत्री कोयल मल्लिक निर्विरोध चुने गए। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा भी निर्विरोध जीते।असम की 3 सीटों पर सत्तारूढ़ एनडीए के तीन उम्मीदवार जोगेन मोहन और तेरश गोवाला के साथ-साथ यूपीपीएल (यूपीपीएल) के प्रमोद बोरो निर्विरोध निर्वाचित हुए। तेलंगाना की 2 सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक सिंघवी और वेम नरेन्दर रेड्डी निर्विरोध चुने गए।
तमिलनाडु की 6 सीटों सभी छह उम्मीदवार निर्विरोध जीते। अन्नाद्रमुक के मौजूदा सांसद एम. थंबीदुरई, पीएमके नेता अंबुमणि रामदास, सत्तारूढ़ द्रमुक (यूपीपीएल) के तिरुची शिवा और जे कॉन्स्टेंटाइन रवींद्रन, कांग्रेस के एम क्रिस्टोफर तिलक और डीएमडीके के कोषाध्यक्ष एल.के. सुधीश निर्वाचित हुए।छत्तीसगढ़ की 2 सीटों पर भाजपा की लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की फूलो देवी नेताम निर्विरोध जीतीं, क्योंकि दो सीटों के लिए केवल यही दो उम्मीदवार मैदान में थीं। वहीं हिमाचल प्रदेश की 1 सीट पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी विश्वासपात्र कांग्रेस उम्मीदवार अनुराग शर्मा निर्विरोध निर्वाचित हुए।
विधायकों का जोर: "निशांत भैया को मुख्यमंत्री बनाएं"
10 Mar, 2026 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत मिलते दिख रहे हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के युवा विधायकों ने अब स्पष्ट रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को राज्य की कमान सौंपने की मांग बुलंद कर दी है। हाल ही में विधायक रूहेल रंजन के आवास पर पार्टी के 14 युवा विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें खुद को टीम निशांत बताते हुए इन नेताओं ने घोषणा की कि वे भविष्य में निशांत कुमार के नेतृत्व में ही काम करना चाहते हैं।
बैठक में शामिल विधायकों ने दावा किया कि वर्ष 2030 का विधानसभा चुनाव निशांत कुमार के नेतृत्व में ही लड़ा जाना चाहिए। विधायकों का तर्क है कि 2025 के चुनाव में जनता ने नीतीश कुमार के चेहरे पर भरोसा जताते हुए एनडीए को भारी बहुमत दिया है, लेकिन अब समय आ गया है कि विकास की इस विरासत को निशांत कुमार आगे बढ़ाएं। विधायक रूहेल रंजन ने खुलकर कहा कि निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए, जबकि शुभानंद मुकेश ने उन्हें नीतीश कुमार का वर्जन टू करार दिया। वहीं, समृद्ध वर्मा और चेतन आनंद जैसे युवा नेताओं का मानना है कि निशांत ही बिहार की वर्तमान जरूरतों और उम्मीदों पर खरे उतर सकते हैं। विधायक नचिकेता और विशाल ने खुलासा किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष अपनी यह मांग मजबूती से रखी है। उन्होंने निशांत कुमार से भी सीधा संवाद कर उन्हें बताया है कि अब राजनीति में आने या न आने का विकल्प उनके पास नहीं बचा है, बल्कि यह बिहार की जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारी बन चुकी है। विधायकों के अनुसार, बिहार की युवा पीढ़ी निशांत में अपना भविष्य देख रही है। इन चर्चाओं के बीच, निशांत कुमार ने खुद भी सक्रिय राजनीति की ओर कदम बढ़ाने के संकेत दिए हैं। सोमवार को पटना के कंकड़बाग स्थित एक पार्क में अपनी माता स्वर्गीय मंजू सिन्हा को श्रद्धांजलि देने पहुंचे निशांत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वे जल्द ही पूरे बिहार के दौरे पर निकलेंगे। उन्होंने बताया कि वे राज्य के सभी 38 जिलों का भ्रमण कर आम लोगों से सीधा संवाद करना चाहते हैं ताकि जमीनी हकीकत और जनता की समस्याओं को करीब से समझ सकें। निशांत कुमार ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें अपनी मां की बहुत याद आती है और आज के हालातों को देखकर वे बेहद प्रसन्न होतीं। हालांकि, जब पत्रकारों ने उनसे युवा विधायकों द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग पर सवाल पूछा, तो वे कुछ भी बोलने के बजाय केवल मुस्कुराकर रह गए। राजनीतिक गलियारों में निशांत कुमार के चंपारण से अपनी यात्रा शुरू करने की संभावना जताई जा रही है, जिसे जेडीयू के भविष्य के संगठनात्मक विस्तार और नेतृत्व परिवर्तन के नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ओम बिरला पर अविश्वास प्रस्ताव लाया गया लोकसभा में
10 Mar, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव के समर्थन में 50 से अधिक सांसदों ने वोट किया, जिसके बाद पीठासीन अधिकारी ने इसे सदन में पेश करने की अनुमति दे दी। प्रस्ताव पर लोकसभा में 10 घंटे तक चर्चा होना संभावित है।
विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला पर सदन की कार्यवाही के संचालन में पक्षपात करने का आरोप लगाया है। विपक्षी दलों का कहना है कि स्पीकर की भूमिका निष्पक्ष होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा नहीं दिख रहा है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने यह अविश्वास प्रस्ताव लाया है। चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार और नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश का नेतृत्व कमजोर और बुजदिल साबित हो रहा है। गोगोई ने यह भी सवाल उठाया कि जब स्पीकर अनुपस्थित हों तो डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में पीठासीन सदस्य जगदंबिका पाल किस अधिकार से सदन की कार्यवाही चला रहे हैं।
दरअसल, लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद लंबे समय से खाली है। परंपरा के अनुसार यह पद आमतौर पर विपक्ष को दिया जाता रहा है। 16वीं लोकसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के दौरान सहयोगी दल अन्नाद्रमुक के एम. थंबीदुरई को डिप्टी स्पीकर बनाया गया था। हालांकि 17वीं और 18वीं लोकसभा में अब तक इस पद पर किसी की नियुक्ति नहीं की गई है, जिसे लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है।
सदन की कार्यवाही के दौरान एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नियमों का हवाला देते हुए पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया। उन्होंने कहा कि जब स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही हो, तब स्पीकर स्वयं कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि अभी तक डिप्टी स्पीकर नियुक्त नहीं किया गया है और चेयर पर बैठे सदस्य भी स्पीकर की अनुमति से ही आए हैं, इसलिए उन्हें इस प्रस्ताव पर कार्यवाही चलाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। ओवैसी ने मांग की कि बहस शुरू होने से पहले सदन की सहमति से तय किया जाए कि कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा।
इस पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि नियमों के अनुसार चेयर पर बैठा कोई भी सदस्य स्पीकर की तरह कार्यवाही संचालित करने की शक्ति रखता है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस तर्क का समर्थन किया। वहीं कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति न होने को लेकर सरकार की आलोचना की और कहा कि बहस शुरू करने से पहले सदन की सहमति जरूरी है। अंत में चेयर पर बैठे जगदंबिका पाल ने स्पष्ट किया कि स्पीकर का पद खाली नहीं है, इसलिए उन्हें कार्यवाही संचालित करने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि जो सदस्य पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाना चाहते हैं, उन्हें बाद में बोलने का अवसर दिया जाएगा।
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