राजनीति
अमित शाह का दावा: दस साल में 1.25 लाख एकड़ भूमि घुसपैठियों से मुक्त, बिगड़े हालात की जिम्मेदारी कांग्रेस पर
30 Mar, 2026 03:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुवाहाटी: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को असम के धेकियाजुली विधानसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार अशोक सिंघल के समर्थन में प्रचार किया। उन्होंने मतदाताओं से आग्रह किया कि आगामी असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी को समर्थन दें, ताकि राज्य को घुसपैठियों से मुक्त किया जा सके और स्थायी शांति व विकास सुनिश्चित हो सके। सोनितपुर में रैली को संबोधित करते हुए शाह ने पिछले दशक में असम में भाजपा की उपलब्धियों का जिक्र किया और आगामी विधानसभा चुनाव में समर्थन की अपील की। अमित शाह ने कहा कि असम में 11 दिनों में चुनाव होने वाले हैं। आपको यह नहीं सोचना है कि आप हिमंता बिस्वा को एक बार फिर मुख्यमंत्री बनाने के लिए वोट दे रहे हैं।
आपको असम को घुसपैठियों से मुक्त करने के लिए वोट देना है। आपको शांतिपूर्ण और विकसित असम बनाने के लिए वोट देना है। इस चुनाव में एक तरफ भाजपा है, जिसने 10 वर्षों में असम को आतंकवाद मुक्त बनाया है। यही वह असम है, जहां कांग्रेस के शासन में गोलीबारी और बम विस्फोट होते थे और सैकड़ों युवा मारे जाते थे। अमित शाह ने बताया कि भाजपा ने अपने 10 वर्ष के शासनकाल में असम में घुसपैठियों से एक लाख 25 हजार एकड़ भूमि मुक्त कराई है। तीसरी बार कमल की सरकार बनाइए। अगले पांच वर्षों में हम असम से घुसपैठियों को चुन-चुनकर निकालेंगे। हमारी भाजपा सरकार ने घुसपैठियों से 1 लाख 25 हजार एकड़ भूमि मुक्त कराई है। हमने उनके अतिक्रमण को तोड़ा है।
समिति से इस्तीफा देकर BJD सांसद ने जताई नाराजगी, निशिकांत दुबे बने चर्चा का केंद्र
30 Mar, 2026 02:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बीजू जनता दल (Biju Janata Dal.- BJD) सांसद सस्मित पात्रा (MP Sasmit Patra.) ने रविवार को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (BJP MP Nishikant Dubey) की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक (Biju Patnaik) पर दुबे की टिप्पणी के विरोध में दिया गया। दुबे ने 27 मार्च को एक बयान में दावा किया था कि 1960 के दशक में बीजू पटनायक पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के बीच कड़ी थे।
ओडिशा के अपमान के आरोप
इस टिप्पणी के विरोध में पात्रा ने दुबे की अध्यक्षता वाली संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी समिति से इस्तीफा दे दिया, जबकि पार्टी के तीन अन्य सांसदों मानस मंगराज, सुभाशीष खुंटिया और मुजीबुल्ला खान (मुन्ना खान) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद की आलोचना करते हुए उन पर ‘ओडिशा के गौरव का अपमान’ करने का आरोप लगाया।वर्ष 1997 में बीजू पटनायक के निधन के बाद उनके बेटे नवीन पटनायक ने बीजू जनता दल (बीजद) की स्थापना की। वह 1961 से 1963 तक और 1990 से 1995 तक, दो बार ओडिशा के मुख्यमंत्री रहे।
माफी की मांग
बीजद ने दुबे के बयान को खारिज करते हुए उनसे माफी मांगने की मांग की। बीजद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देबी प्रसाद मिश्रा ने कहा कि दुबे का बयान ‘अशोभनीय, शरारतपूर्ण और एक देशभक्त का अपमान’ था। मिश्रा ने ‘कहा, ‘एक राजनीतिक दल के रूप में, हम उनके बयान की कड़ी निंदा करते हैं और उनसे माफी मांगने की मांग करते हैं।’राज्यसभा के सभापति को 28 मार्च को लिखे पत्र में पात्रा ने कहा, ‘विरोध में और सैद्धांतिक तौर पर, मैं श्री निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसद की स्थायी समिति से इस्तीफा दे रहा हूं। मैं ऐसे व्यक्ति के अधीन काम नहीं कर सकता जो दिवंगत श्री बीजू पटनायक जी के बारे में इस तरह की अपमानजनक टिप्पणी सार्वजनिक रूप से करे।’ पात्रा ने राज्यसभा के सभापति से अपना इस्तीफा स्वीकार करने और उसे लोकसभा अध्यक्ष को भेजने का भी अनुरोध किया, क्योंकि यह समिति लोकसभा के अधीन है।
निशिकांत दुबे का दावा
मीडिया को दिए अपने बयान में दुबे ने कहा था, ‘अमेरिका ने तिब्बत पर चीन के कब्जे के डर से वहां अपनी सेना और सीआईए एजेंट भेजे थे। दलाई लामा और उनके भाई अमेरिकी सरकार के लगातार संपर्क में थे। नेहरू ने चीन से 1962 का पूरा युद्ध अमेरिकी धन और सीआईए एजेंटों के सहयोग से लड़ा था। ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीजू पटनायक अमेरिकी सरकार, सीआईए और नेहरू के बीच कड़ी का काम करते थे।’ दुबे ने यह भी कहा था कि ओडिशा का चारबतिया हवाई अड्डा, जिसमें बीजू पटनायक की महत्वपूर्ण भूमिका थी, यू2 विमानों का अड्डा था और इस हवाई अड्डे पर 1963 से 1979 तक अमेरिकी सेना तैनात थी।
खडगे का हमला: असम में कांग्रेस ने डबल इंजन सरकार पर उठाया भ्रष्टाचार का मुद्दा
30 Mar, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुवाहाटी: असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने रविवार को नाओबोइचा से औपचारिक अभियान की शुरुआत की। कांग्रेस ने असम विधानसभा चुनावों के लिए घोषणापत्र भी जारी कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राज्य की भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए मतदाताओं से बदलाव की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस बार असम की जनता को ‘अली बाबा और 40 चोरों’ को रोकना होगा। खडग़े ने बताया कि अली बाबा दिल्ली में बैठा है और उसके 40 चोर जगह-जगह फैले हुए हैं, जिन्हें जनता अपने वोट से रोकेगी। मल्लिकार्जुन खडग़े ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर कुशासन और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ‘डबल इंजन’ का वादा करने वाली सरकार अब ‘डबल धोखा’ और ‘डबल भ्रष्टाचार’ की सरकार बन चुकी है। हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सरकार ने असम को कुशासन और भ्रष्टाचार की ओर धकेल दिया।
मल्लिकार्जुन खडग़े ने जनता से सवाल किया कि क्या वे ऐसे इनसान को वोट देंगे, जो धोखा देता है, झूठ बोलता है, जमीनें चोरी करता है, दूसरों का पैसा हड़पता है और जिसका परिवार क्रप्शन में लिप्त है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ऐसे शख्स के लिए यहां आकर वोट मांगते हैं। खडग़े ने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने असम में भ्रष्टाचार का जाल फैला दिया है, जहां हर जगह केवल रिश्वतखोरी की शिकायतें सामने आ रही हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी कहती है, असम में डबल इंजन की सरकार है, लेकिन असलियत में यह डबल लूट की सरकार है। मल्लिकार्जुन खडग़े ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने असम और नॉर्थ ईस्ट के लिए बहुत काम किया है, लेकिन नरेंद्र मोदी और हिमंता ने जनता के लिएकाम नहीं किया, जनता से विश्वासघात किया।
प्रधानमंत्री मोदी बोले- विकास की राह में शांति है पहली शर्त, असम में पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद
30 Mar, 2026 01:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को 'मेरा बूथ सबसे मजबूत संवाद' नामक जनसंपर्क कार्यक्रम के तहत नमो ऐप के माध्यम से असम के पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत की। इस बातचीत में पीएम मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं के विचार जाने और उन्हें चुनाव में जीत के लिए कड़ी मेहनत का गुरुमंत्र दिया। इस दौरान पीएम मोदी ने बीते एक दशक में असम में तेज विकास होने की बात भी कही।
एनडीए सरकार की उपलब्धियों पर की बात
असम में भाजपा के बूथ कार्यकर्ताओं से संवाद के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राज्य के विकास के लिए सबसे पहली शर्त शांति है। उन्होंने कहा कि राज्य लंबे समय तक अस्थिता से जूझा है, लेकिन पिछले दशक में चीजें बदल गई हैं। प्रधानमंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि उन्होंने पहली बार वोट करने जा रहे मतदाताओं को पूर्व की कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल को याद दिलाने की जरूरत है और एक छोटी सी गलती राज्य को पीछे धकेल सकती है। पीएम मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से भाजपा-एनडीए की सरकार की जीत की हैट्रिक के लिए कड़ी मेहनत करने की अपील की। उन्होंने कहा 'असम में भाजपा का तगड़ा जनाधार है, लेकिन मैं आपके भी इस पर विचार जानना चाहता हूं।'
शशि थरूर बोले- एक ही इलाके में प्रचार के चलते हुई देरी, पीएम मोदी के काफिले से जाम
30 Mar, 2026 01:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव (Assembly elections) के बीच केरल में चुनावी सरगर्मी तेज है। इसी दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने कहा कि वह प्रधानमंत्री पीएम मोदी (Narendra Modi) के काफिले के कारण ट्रैफिक जाम में फंस गए और रैली में देर से पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि एक ही इलाके में कई बड़े नेताओं के प्रचार के अपने खतरे होते हैं।केरल में चुनाव प्रचार के दौरान Shashi Tharoor और Narendra Modi दोनों का कार्यक्रम एक ही क्षेत्र में था। थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि प्रधानमंत्री के काफिले की वजह से मुख्य सड़कों पर जाम लग गया, जिसके चलते उन्हें देर हो गई। उन्होंने कहा, “एक ही इलाके में चुनाव प्रचार करने के अपने ही खतरे हैं।”
इससे पहले थरूर ने बताया था कि Palakkad जिले में कई उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने जा रहे हैं और संयोग से उसी दिन प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan भी वहां कार्यक्रम में मौजूद थे। उन्होंने लिखा कि मौसम के साथ-साथ चुनावी प्रतिस्पर्धा भी तेज हो रही है।
चुनावी मुकाबला तेज
केरल में कांग्रेस-नीत United Democratic Front (यूडीएफ), वामपंथी Left Democratic Front (एलडीएफ) और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। चुनाव के लिए सभी दल जोर-शोर से प्रचार में जुटे हैं।
एलडीएफ सरकार पर साधा निशाना
इससे पहले थरूर ने एलडीएफ सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था विदेश से आने वाले पैसे, लॉटरी और शराब पर निर्भर हो गई है। उन्होंने दावा किया कि यह मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है। थरूर ने यूडीएफ के एजेंडे को सकारात्मक बताते हुए कहा कि गठबंधन सत्ता में वापसी के लिए जनता के सामने नया विजन पेश कर रहा है। केरल में चुनावी प्रचार के बीच नेताओं के कार्यक्रम एक ही इलाके में होने से ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था चुनौती बन रही है। थरूर का यह बयान भी इसी स्थिति को लेकर चर्चा में है।
चुनावी बिगुल फूंका PM मोदी ने: केरल में विपक्ष पर सीधे निशाना
30 Mar, 2026 12:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार से केरल में भाजपा के चुनाव प्रचार की शुरुआत की। पलक्कड़ में रैली के बाद पीएम त्रिशूर पहुंचे हैं। यहां उनका रोड शो 34 मिनट तक चला। सडक़ के दोनों ओर लोगों की भीड़ मौजूद रही। इससे पहले पलक्कड़ में रैली को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा था कि दशकों से केरल मतलबी पॉलिटिक्स के दो मुखौटों के बीच फंसा हुआ है। एक तरफ एलडीएफ, दूसरी तरफ यूडीएफ, एक तरफ कम्युनिस्ट, दूसरी कांग्रेस। एक क्रप्ट, दूसरा महा-क्रप्ट। एक कम्युनल, दूसरा महा-कम्युनल।
एलडीएफ और यूडीएफ की सारी पॉलिसी सिर्फ वोट-बैंक पॉलिटिक्स के लिए है। पीएम ने कहा कि इन भ्रष्टाचारी पार्टियों को बीजेपी से डर लगता है। अगर हम सत्ता में आ गए तो इनके सारे काले कारनामों की पोल खुल जाएगी। कांग्रेस और कम्युनिस्टों के डबल गेम पर चुटकी लेते हुए प्रधानमंत्री ने जनता को आगाह किया। उन्होंने कहा कि आजकल ये दोनों दल एक नया प्रोपेगेंडा चला रहे है। कम्युनिस्ट कहते हैं कि कांग्रेस बीजेपी की बी टीम है, वहीं कांग्रेस कहती है कि कम्युनिस्ट बीजेपी की बी टीम है। इसका सीधा मतलब तो यही हुआ कि दोनों ने खुद ही मान लिया है कि केरल में असली और इकलौती टीम सिर्फ बीजेपी ही है।
मिडल ईस्ट पर कांग्रेस की टिप्पणी खतरनाक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनकी सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का भारत पर कम से कम प्रभाव पड़े। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक फायदे के लिए भारतीयों के जीवन को खतरे में डालने वाली खतरनाक टिप्पणियां करने का आरोप लगाया। मोदी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की रैली को संबोधित करते हुए कहा कि केरल के कई लोग संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में काम कर रहे हैं और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पीएम मोदी ने कहा कि इस समय सभी का ध्यान पश्चिम एशिया में जारी युद्ध पर केंद्रित है। हमारी सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है कि भारत पर इसका कम से कम प्रभाव पड़े। जारी राजनयिक प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए मोदी ने कहा कि युद्ध की शुरुआत से ही मैं इन सभी देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ लगातार संपर्क में हूं। सभी राष्ट्र संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: क्या वजह है कि यह दूसरे राज्यों के चुनाव से अलग है?
30 Mar, 2026 12:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Bengal Election 2026: देश के चार राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और एक केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में अप्रैल में वोटिंग होगी। इन सभी जगहों पर राजनीतिक दलों ने तैयारी तेज कर दी है। पार्टियों द्वारा अपने प्रत्याशियों की लिस्ट भी जारी की जा रही है। पांच में से सबसे ज्यादा जो चर्चा हो रही है, वह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर है। इस बार पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान होगा। पहले चरण के लिए वोटिंग 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान होगा। वोटों की गिनती 4 मई को होगी। दरअसल, पिछले कुछ सालों में बंगाल में चुनाव करीब 6,7 या 8 चरणों में हुए थे। लेकिन इस बार महज दो ही चरणों में मतदान हो रहा है।भले ही देश में पांच जगहों पर विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। इनमें से बंगाल का चुनाव सबसे अलग है। बंगाल में चुनावी हिंसा एक गंभीर समस्या बनी हुई है। प्रदेश में सरपंच से लेकर लोकसभा चुनाव में खून-खराबा होना आम बात है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चुनाव के दौरान राजनीतिक हमलों में सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल में लोगों की मौत होती है। इस बार भी चुनाव से पहले हिंसा दिखने को मिल गई है। दरअसल, मुर्शिदाबाद में रामनवमी जुलूस के दौरान दो समुदाय के बीच हिंसा हो गई। इस दौरान दुकानों में आग लगा दी गई और तोड़फोड़ व लूटपात भी की। इस हिंसा में कई लोग घायल हो गए।
बीजेपी के लिए अभेद किला
दरअसल, बीजेपी के लिए बंगाल अभी तक अभेद किला है। 2014 के बाद नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में बीजेपी ने कई राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत बनाई है और सत्ता हासिल की। लेकिन बंगाल का किले में सेंध नहीं लगा पाई। नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में सरकार बनाई। वहीं दूसरी तरफ हरियाणा और बिहार में अपनी पकड़ मजबूत की। 2021 के चुनाव में बीजेपी ने बंगाल में 200 से ज्यादा सीटें जीतने के लक्ष्य से चुनाव लड़ा। लेकिन पार्टी को महज 77 सीटें मिली। भले ही पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सरकार नहीं बनाई, लेकिन प्रदेश में अच्छा प्रदर्शन किया था। पिछले चुनाव में कांग्रेस और लेफ्ट प्रदर्शन खराब रहा। जहां प्रदेश में कभी दबदबा रखने वाली पार्टी लेफ्ट एक भी सीट नहीं जीत पाई। इस बार भी बीजेपी सत्ता पर काबिज होने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
SIR को लेकर हुआ विवाद
चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) को लेकर जमकर विवाद हुआ। सीएम ममता बनर्जी ने एसआईआर को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर जमकर निशाना साधा। एसआईआर के विरोध में सीएम बनर्जी ने सड़क पर जमकर प्रदर्शन किया। इतना ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने खुद दलीलें दी।
अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर सियासत तेज, कांग्रेस बनाम केंद्र आमने-सामने
30 Mar, 2026 11:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने संसद में पेश किए गए विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह विधेयक अल्पसंख्यक समुदायों और सामाजिक-धार्मिक संगठनों को निशाना बनाने की कोशिश है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में वेणुगोपाल ने कहा कि यह कानून अल्पसंख्यकों के सिर पर तलवार की तरह लटका हुआ है और विशेष रूप से ईसाई समुदाय को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लाया गया है। उनका आरोप है कि प्रस्तावित संशोधन गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और चैरिटेबल संस्थाओं के कामकाज को सीमित करेगा और केंद्र सरकार को अधिक हस्तक्षेप की शक्ति देगा।
संसद में पेश होने के बाद विवाद शुरू
यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य विदेशी फंडिंग के जरिए जबरन धर्मांतरण जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।हालांकि कांग्रेस का आरोप है कि विधेयक बिना पर्याप्त सूचना के पेश किया गया, जब कई सांसद चुनावी राज्यों में प्रचार में व्यस्त थे। वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने विधेयक की खामियों की ओर ध्यान दिलाया था, बावजूद इसके इसे पेश कर दिया गया।
केंद्र को मिलेगा संगठनों पर कब्जे का अधिकार
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि प्रस्तावित प्रावधानों के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार मिल जाएगा कि वह FCRA लाइसेंस रद्द होने पर किसी भी संस्था खासतौर पर अल्पसंख्यक संगठनों का प्रशासन अपने हाथ में ले सके और उनके लिए प्रशासक नियुक्त कर सके। उन्होंने इसे दमनकारी बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की और कहा कि कांग्रेस इस बिल का संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह विरोध करेगी।
केरल चुनाव के बीच आरोप-प्रत्यारोप
आगामी 9 अप्रैल को होने वाले केरल चुनाव के बीच इस मुद्दे ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि देशभर में अल्पसंख्यकों के खिलाफ घटनाएं बढ़ रही हैं और इसे एक पैटर्न के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि केरल में चुनावी रैलियों के दौरान वे स्पष्ट करें कि यह विधेयक आखिर किसे निशाना बना रहा है।
सबरीमला और AIIMS मुद्दा भी उठाया
वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने पालक्काड की रैली में सबरीमला गोल्ड लॉस केस पर चुप्पी साधे रखी। उन्होंने कहा कि बीजेपी, जो खुद को श्रद्धालुओं की पार्टी बताती है, अब इस मुद्दे पर क्यों नहीं बोल रही। साथ ही, उन्होंने केरल को AIIMS देने के वादे पर भी सवाल उठाए और कहा कि अन्य राज्यों में संस्थान स्वीकृत होने के बावजूद केरल को अब तक इसका लाभ नहीं मिला।
यूडीएफ के वादे और दावा
कांग्रेस नेता ने कहा कि कांग्रेस-नेतृत्व वाला यूडीएफ अपने पांच प्रमुख वादों को पूरा करेगा और उन्हें विश्वास है कि आगामी चुनाव में गठबंधन को स्पष्ट जनादेश मिलेगा।
बिहार राजनीति में हलचल: सीएम नीतीश कुमार ने छोड़ा MLC पद
30 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज (30 मार्च) आधिकारिक तौर पर विधान परिषद की अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। राज्य सभा के लिए चुने जाने के बाद संवैधानिक अनिवार्यता का पालन करते हुए उन्होंने आज यह कदम उठाया। खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने अपना इस्तीफा व्यक्तिगत रूप से जमा नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने इसे अपने भरोसेमंद मंत्री विजय कुमार चौधरी और MLC संजय गांधी के माध्यम से विधान परिषद सचिवालय भेजा।
सीएम हाउस में हुई इस्तीफे की प्रक्रिया
सोमवार की सुबह से ही मुख्यमंत्री आवास (1, अणे मार्ग) में हलचल तेज थी। सुबह 9 बजे ही जदयू के दिग्गज नेता ललन सिंह, संजय झा और विजय चौधरी सीएम हाउस पहुंच गए थे। काफी देर तक चली मंत्रणा के बाद नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा तैयार किया। पहले चर्चा थी कि परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह खुद सीएम हाउस आएंगे, लेकिन बाद में नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा पत्र मंत्री विजय चौधरी को सौंपा।
विधान परिषद पहुंचे विजय चौधरी
मुख्यमंत्री का इस्तीफा लेकर संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी और MLC संजय गांधी खुद विधान परिषद पहुंचे। उन्होंने सभापति अवधेश नारायण सिंह को नीतीश कुमार का त्यागपत्र सौंपा। सभापति द्वारा इस्तीफा स्वीकार किए जाने के साथ ही बिहार विधान परिषद में नीतीश कुमार का 20 साल लंबा सफर आज समाप्त हो गया। वह 2006 से लगातार इस सदन के सदस्य थे।
नीतीश कुमार का अनोखा रिकॉर्ड
इस इस्तीफे के साथ ही नीतीश कुमार ने भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ उपलब्धि हासिल कर ली है। वह अब देश के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं जिन्होंने संसद और राज्य विधानमंडल के चारों सदनों (लोकसभा, राज्य सभा, विधानसभा और विधान परिषद) की सदस्यता ग्रहण की है।
नितिन नवीन ने भी छोड़ी विधायकी
इधर, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी अपनी बांकीपुर विधानसभा सीट से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्याग पत्र भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को रविवार को ही दे दिया था, जो संजय सरावगी आज विधानसभा में जमा कराएंगे। नितिन नवीन ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि वह अब राज्य सभा में नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। उनके इस्तीफे के साथ ही बांकीपुर सीट अब रिक्त हो गई है, जहां जल्द ही उपचुनाव कराए जाएंगे।
अखिलेश यादव सक्रिय: दादरी में गुर्जर वोट बैंक को साधा, प्रतिमा स्थापना का किया ऐलान
30 Mar, 2026 10:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ:गुर्जर प्रतिहार वंश के 9वीं शताब्दी के शासक मिहिर भोज ने उत्तर भारत के एक बड़े हिस्से में शासन किया। वे भगवान विष्णु के प्रति अपनी भक्ति के लिए भी इतिहास में दर्ज हैं। भाजपा नेता प्राय: अखिलेश यादव पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाते हैं। शायद यही वजह रही कि दादरी की रैली की शुरुआत अखिलेश ने गुर्जर-प्रतिहार वंश के राजा मिहिर भोज की प्रतिमा पर गंगा जल चढ़ाकर की।
कुछ लोग सम्राट मिहिर भोज की विरासत छीन लेना चाहते थे
अखिलेश ने समाजवादी सरकार बनने पर महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपये दिए जाने की बात दोहराकर आधी आबादी को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया। साथ ही कहा कि कुछ लोग हमारे सम्राट (मिहिर भोज) की विरासत भी छीन लेना चाहते थे। यहां बता दें कि दादरी और आसपास के क्षेत्रों में मिहिर भोज की विरासत होने का दावा गुर्जर और राजपूत दोनों ही जातियां करती रही हैं। सपा अध्यक्ष ने याद दिलाया कि समाजवादी सरकार में मिहिर भोज के नाम से बड़ा पार्क बनाया था। 1857 की जंग में कोतवाल धन सिंह गुर्जर के योगदान को याद करके सजातीय समाज को लुभाने की कोशिश की।
80-90 सीटों पर गुर्जर समाज का अच्छा दखल माना जाता है
बताते चलें कि पश्चिम यूपी की कैराना, सहारनपुर, बिजनौर, मेरठ, गौतमबुद्धनगर, बागपत, बिजनौर व अमरोहा में कभी न कभी गुर्जर समाज से सांसद रह चुके हैं। पश्चिमी यूपी की 80-90 सीटों पर इस समाज का अच्छा दखल माना जाता है। यह यूं ही नहीं है कि आजाद समाज पार्टी के नेता और नगीना से सांसद चंद्रशेखर भी संसद में गुर्जर रेजीमेंट बनाने की मांग उठा चुके हैं। अब दादरी की रैली के सहारे गुर्जर कार्ड का फल पाने में अखिलेश यादव कितना सफल होते हैं, यह तो 2027 के परिणाम ही बताएंगे।उधर, बीते लोकसभा चुनाव में सपा के लिए ट्रंप कार्ड बना संविधान का मुद्दा भी अखिलेश ने जोरशोर से उठाकर संदेश दिया कि इस मुद्दे को आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान भी ठंडा नहीं पड़ने दिया जाएगा।
तेलंगाना में नया प्रस्ताव: माता-पिता का ख्याल न रखने पर कटेगी सैलेरी
30 Mar, 2026 09:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बदलती जीवनशैली में परिवार के बुजुर्गों की बढ़ती उपेक्षा के बीच तेलंगाना सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। विधानसभा में रविवार को पेश ‘तेलंगाना कर्मचारी जवाबदेही और माता-पिता सहायता विधेयक-2026’ कानून के तहत अब माता-पिता की देखभाल न करने वाले कर्मचारियों की जिम्मेदारी सीधे उनकी सैलरी से तय होगी। विधेयक के दायरे में सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के साथ-साथ विधायक, सांसद और स्थानीय निकायों के जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं। दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के वेतन से अधिकतम 15 प्रतिशत या 10,000 रुपए (जो भी कम हो) तक की कटौती की जा सकेगी। यह प्रावधान जैविक और सौतेले दोनों तरह के माता-पिता पर लागू होगा।
कानून की जरूरत क्यों?
सरकार का तर्क है कि भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के बावजूद प्रभावी अमल में कमी रही है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कहा कि माता-पिता के अधिकारों को केवल नैतिक जिम्मेदारी के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। बदलते सामाजिक ढांचे में कानूनी हस्तक्षेप जरूरी हो गया है।
BRS के 24 विधायक दो दिन के लिए निलंबित
तेलंगाना विधानसभा में हंगामा के आरोप में भारत राष्ट्र समिति के 24 विधायकों को दो दिन के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया है। विधायकों को निलंबित करने का प्रस्ताव विधायी मामलों के मंत्री डी श्रीधर बाबू ने पेश किया था। जिसे ध्वनि मत से स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष गड्डम प्रसाद कुमार ने 24 बीआरएस विधायकों को सदन से दो दिन के लिए निलंबित कर दिया।
क्यों किया गया निलंबित?
दरअल भारत राष्ट्र समिति (BRS) के सदस्य राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी पर लगे भ्रष्टाचार और अवैध खनन के मामलों की जांच विधानसभा की समिति से कराए जाने की मांग कर रहे थे। इसी मांग को लेकर उन्होंने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही BRS विधायकों ने समिति गठित किए जाने की मांग शुरू कर दी है।
राजनीतिक वार: गहलोत ने बेटे दूर रखा, जोगाराम पटेल ने दिया तीखा जवाब
30 Mar, 2026 08:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जोधपुर : पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के एक बयान ने राजस्थान की राजनीति में नया उबाल ला दिया है। नेताओं के बेटों को सियासत से दूर रखने की उनकी सलाह पर विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने तीखा पलटवार किया है। दरअसल जोधपुर दौरे पर आए पटेल ने गहलोत पर तंज कसते हुए कहा, “जिनके घर शीशे के होते हैं, वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते।” यह बयान जोधपुर से उठकर अब पूरे प्रदेश की राजनीति में आग लगाता दिख रहा है। अशोक गहलोत ने हाल ही में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों को सलाह दी थी कि वे अपने बेटों को सरकार से दूर रखें। गहलोत के मुताबिक, ऐसा न करने पर सरकार की बदनामी होती है। दरअसल उन्होंने कहा था, “जब चाहिए सरकार बनी है, कई तरह के आरोप लग रहे हैं, पता नहीं सरकार में बेटों को क्यों शामिल किया जा रहा है।” गहलोत का यह बयान मौजूदा सरकार में कथित परिवारवाद और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों के बीच आया है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।
जोगाराम पटेल ने गहलोत पर साधा निशाना
वहीं विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने गहलोत के इस बयान को सीधे उन पर ही लौटा दिया। “कांच के घर” वाली टिप्पणी कर पटेल ने साफ संकेत दिए कि गहलोत खुद ऐसे मुद्दों पर बोलने की स्थिति में नहीं हैं। पटेल ने सीधे तौर पर गहलोत पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने पुत्र वैभव गहलोत के राजनीतिक करियर को आगे बढ़ाने के लिए कई अन्य लोगों के हक छीन लिए। यह आरोप सिर्फ चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहा। पटेल ने अपनी बात रखते हुए कहा कि गहलोत ने अपने बेटे के लिए न केवल जोधपुर संसदीय क्षेत्र, बल्कि जालौर-सिरोही जैसे अहम इलाकों में भी सियासी दांवपेंच खेले, जहां कई अन्य नेताओं की दावेदारी बनती थी। इतना ही नहीं, उन्होंने क्रिकेट प्रशासन में भी राजनीतिक दखल का जिक्र किया, जहां वैभव गहलोत की भूमिका अक्सर चर्चा में रही है। पटेल के इस बयान ने राजस्थान में परिवारवाद के मुद्दे को एक बार फिर से गरमा दिया है और विपक्ष को गहलोत पर निशाना साधने का नया मौका दे दिया है।
फिर भी वो हमारे हैं : जोगाराम पटेल
हालांकि, अपने तीखे हमले के बीच जोगाराम पटेल ने यह भी कहा, “फिर भी वो हमारे हैं।” राजस्थान की राजनीति में प्रतिद्वंद्वी नेताओं के बीच इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणियों के साथ-साथ एक-दूसरे के प्रति सम्मान का भाव भी अक्सर देखने को मिलता रहा है, जो इस बयान में भी झलका। यह सियासी चिंगारी अब केवल जोधपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राजस्थान की राजनीति में आग की तरह फैल रही है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच यह जुबानी जंग और तीखी होने के संकेत साफ हैं। प्रदेश की तपती गर्मी के बीच राजनीतिक पारा भी लगातार उबाल पर है, और यह बयानबाजी आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले सियासी माहौल को और गर्म करेगी।
जनता के मुद्दे पर भी बोले विधि मंत्री
दरअसल राजनीतिक हमलों के अलावा विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने जनता से जुड़े मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने मारवाड़ में पेयजल संकट को लेकर गंभीर चिंता जताई। पटेल ने स्वीकार किया कि हर साल की तरह इस बार भी मारवाड़ के कई इलाकों में पानी की किल्लत रहेगी। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी हैं, ताकि जनता को कम से कम परेशानी हो।
केरल चुनाव में PM मोदी की हुंकार, कहा- LDF, UDF भ्रष्टाचारी पार्टियां, कांग्रेस जहां जाती है, सब चौपट कर देती है
29 Mar, 2026 08:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केरलम की 140 विधानसभा सीटों के लिए एक चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा और 4 मई को वोटों की गिनती होगी। वोटों की गिनती के बाद चुनाव परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। केरलम के चुनावी माहौल में राजनीतिक दलों के नेताओं में जुबानी जंग तेज हो गई है। इसी क्रम में PM मोदी ने आज केरलम के पलक्कड़ में चुनावी रैली को संबोधित किया। रैली में PM मोदी ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर जमकर भड़ास निकाली।
LDF-UDF भ्रष्टाचारी पार्टियां, ये दोनों BJP से डरी हुई हैं
PM मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि केरलम में LDF-UDF दोनों ही बीजेपी पर निशाना साथ रही हैं। ये दोनों ही भ्रष्टाचारी पार्टियां भाजपा से डरी हुई हैं। इन्हें भाजपा का डर इसलिए है, क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर भाजपा यहां सरकार में आ गई तो इनके सारे काले कारनामों का सच सामने आ जाएगा। दशकों से LDF-UDF ने यहां बड़े घोटाले किए हैं, लेकिन इन दलों की सरकारें कभी भी एक-दूसरे पर कार्रवाई नहीं करती हैं। LDF-UDF के लोग आपके सामने सिर्फ झूठे बयान देते हैं। अगर भाजपा की सरकार आई तो इनकी जांच कराएगी, इसलिए ये डर रहे हैं।
PM मोदी ने जनसभा में कांग्रेस और कम्युनिस्ट (लेफ्ट) दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव में पर्दे के पीछे कौन किसकी B टीम है, इसकी सच्चाई हम जनता के सामने रखने वाल हैं। PM ने आगे कहा- कांग्रेस और कम्युनिस्ट पूरे देश में एक-दूसरे से गठबंधन करते हैं। बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश से लेकर मणिपुर, असम तक इनका गठबंधन होता है। INDI गठबंधन में सब साथ हैं। तमिलनाडु में भी दोनों एक साथ हैं, लेकिन यहां केरलम में ये एक-दूसरे को झूठी गालियां देते हैं।
केरल की जनता को सावधान रहना होगा
केरल की जनता को LDF-UDF और इनके सहयोगियों से सावधान रहना होगा। कांग्रेस और लेफ्ट जहां सत्ता में आते हैं, वहां सब चौपट करके जाते हैं। बंगाल और त्रिपुरा में लेफ्ट ने क्या किया? यह पूरा देश जानता है। कांग्रेस ने पूरे देश में क्या किया? यह भी सबने देखा है। इनके उसी कुचक्र में केरलम भी पिसता रहा है। यहां सरकारी कर्मचारियों के वेतन में देरी की खबरें आती रहती हैं। PM मोदी ने केरलम में बदलाव की बात करते हुए कहा कि राज्य में इस बार अलग माहौल है और NDA के पक्ष में बढ़ता समर्थन साफ दिख रहा है।
IPL टिकट विवाद का समाधान: कर्नाटक के हर विधायक को मिलेगा दो मुफ्त पास
29 Mar, 2026 10:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कर्नाटक (Karnataka) में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) टिकट को लेकर चल रहा विवाद अब थम गया है। उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार (DK Shivakumar) ने घोषणा की है कि राज्य के सभी विधायकों को दो-दो फ्री टिकट दिए जाएंगे। साथ ही उनके लिए स्टेडियम में अलग बैठने की व्यवस्था भी की जाएगी।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस विधायक विजयानंद कशप्पनवर ने विधानसभा में सभी विधायकों के लिए चार-चार टिकट की मांग की और Karnataka State Cricket Association पर जनप्रतिनिधियों के अनादर का आरोप लगाया। उन्होंने कहा था कि जनप्रतिनिधि “वीआईपी” होते हैं और उन्हें लाइन में नहीं लगना चाहिए।
दो टिकट देने पर बनी सहमति
बढ़ते विवाद के बीच हुई बैठक में Venkatesh Prasad, मुख्यमंत्री Siddaramaiah और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार शामिल हुए। बैठक में तय हुआ कि पहले मैच के लिए सभी विधायकों को दो टिकट दिए जाएंगे और उनके लिए अलग स्टैंड भी उपलब्ध कराया जाएगा।
बताया जा रहा है कि आईपीएल के पहले मुकाबले में डिफेंडिंग चैंपियन Royal Challengers Bangalore और Sunrisers Hyderabad आमने-सामने होंगे।
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि चार टिकट देना संभव नहीं है। फिलहाल पहले मैच के लिए दो टिकट दिए जाएंगे, जबकि आगे के मैचों को लेकर बाद में निर्णय लिया जाएगा।
JDU ने टालने का इशारा, बिहार में MP-राजस्थान मॉडल लागू करने से इनकार, नीतीश के उत्तराधिकारी पर मंथन
29 Mar, 2026 09:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की राजनीति (Politics of Bihar) में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) के संभावित इस्तीफे को लेकर अटकलें जारी हैं। भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party- BJP) को उम्मीद थी कि 26 मार्च को उनकी “समृद्धि यात्रा” समाप्त होने के बाद वह पद छोड़ देंगे, लेकिन जनता दल (यूनाइटेड) (Janata Dal (United) ने इस प्रक्रिया को लेकर जल्दबाजी नहीं दिखाई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, जेडीयू इस समय को रणनीतिक रूप से इस्तेमाल कर रही है और यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मुख्यमंत्री के उत्तराधिकारी के चयन में उसे पूरी तरह विश्वास में लिया जाए। पार्टी ने साफ संकेत दिए हैं कि वह भाजपा द्वारा मध्य प्रदेश और राजस्थान की तरह अचानक किसी कम चर्चित नेता को मुख्यमंत्री बनाए जाने जैसे प्रयोग नहीं चाहती है।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और बिहार प्रभारी विनोद तावड़े पटना में मौजूद हैं और राज्य के नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं। इसे सत्ता परिवर्तन की तैयारियों के रूप में देखा जा रहा है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति संसद के उच्च सदन यानी कि राज्यसभा के लिए निर्वाचित होता है तो उसे 14 दिनों के भीतर राज्य विधानसभा की सदस्यता छोड़नी होती है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो उसकी राज्यसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो सकती है।
नीतीश कब तक देंगे इस्तीफा?
बिहार सरकार में मंत्री श्रवण कुमार ने संकेत दिया है कि नीतीश कुमार 8 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। वहीं जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और नीतीश कुमार के करीबी संजय झा ने कहा है कि 14 दिन के नियम का पूरी तरह पालन किया जाएगा। नीतीश कुमार के 13 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने की संभावना है।
कौन होगा नीतीश का उत्तराधिकारी?
एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री पद के उत्तराधिकारी को लेकर बीजेपी में कई नामों पर चर्चा हो रही है, लेकिन जेडीयू ने स्पष्ट कर दिया है कि अगला मुख्यमंत्री वही होना चाहिए, जो नीतीश कुमार की पसंद का हो। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि नया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाला होना चाहिए और उनकी राजनीति की शैली को बनाए रखना जरूरी है।
जेडीयू ने भाजपा के सामने रखी शर्तें
जेडीयू ने यह भी जोर दिया है कि सरकार की सामाजिक संरचना में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। साथ ही पार्टी चाहती है कि नया नेता नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को भी विश्वास में लेकर चले, जो अब राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि बिहार की राजनीतिक परिस्थिति मध्य प्रदेश या राजस्थान से अलग है, जहां बीजेपी ने अचानक मुख्यमंत्री के नाम घोषित कर सभी को चौंका दिया था। बिहार में समाजवादी विचारधारा की गहरी जड़ें हैं और एनडीए के सहयोगी दलों को भी पूरी तरह विश्वास में लेना जरूरी है।
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