राजनीति
महाराष्ट्र की राजनीति में नया वार-पलटवार, सिद्धिविनायक मंदिर मुद्दे पर शिंदे का जवाब
11 Jul, 2026 10:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा घोटाले को लेकर विपक्ष, विशेषकर शिवसेना (यूबीटी) द्वारा किए जा रहे हमलों का तीखा जवाब दिया है। विधान परिषद में मानसून सत्र के अंतिम दिन बोलते हुए मुख्यमंत्री ने अयोध्या मामले में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। साथ ही, उन्होंने पलटवार करते हुए मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में हुई कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया और विपक्षी खेमे पर गंभीर सवाल खड़े किए।
सिद्धिविनायक मंदिर और राम मंदिर का मुद्दा
एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (यूबीटी) और उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि अयोध्या मामले में रामभक्तों की भावनाओं को जो ठेस पहुंची है, उसका समर्थन कोई नहीं कर सकता और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रहते किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने साथ ही आरोप लगाया कि जो लोग आज राम मंदिर पर सवाल उठा रहे हैं, उनके कार्यकाल के दौरान सिद्धिविनायक मंदिर के दानपात्र में लूट हुई थी। उन्होंने पूछा कि तब की सरकार ने इस मामले की जांच के आदेश क्यों नहीं दिए थे, जबकि मनसे ने भी उस समय इन अनियमितताओं की ओर इशारा किया था।
आदेश बांदेकर ने दी आरोपों पर प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष और अभिनेता आदेश बांदेकर ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि यदि उन पर लगे अनियमितता के आरोप सिद्ध होते हैं, तो उन्हें मंदिर के सामने फांसी पर लटका दिया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि मंदिर के कार्यकारी अधिकारियों की नियुक्ति सरकार द्वारा की जाती है और उनके कार्यकाल को समाप्त हुए तीन साल हो चुके हैं। बांदेकर ने आशंका जताई कि पिछले तीन वर्षों में दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की गई हो सकती है।
उद्धव ठाकरे पर तंज और राजनीतिक बयानबाजी
अपने संबोधन के दौरान शिंदे ने उद्धव ठाकरे का नाम लिए बिना उन पर कटाक्ष करते हुए धार्मिक प्रतीकों और आस्था को लेकर कई तंज कसे। उन्होंने हनुमान चालीसा के पाठ और लंका दहन के संदर्भ में उद्धव ठाकरे द्वारा की गई हालिया टिप्पणियों पर सवाल उठाते हुए इसे 'नई कहानी' करार दिया। मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि पूर्व में हनुमान चालीसा पढ़ने की घोषणा करने पर सांसद नवनीत राणा और विधायक रवि राणा को जेल भेजने की कार्रवाई तत्कालीन सरकार के दौरान ही हुई थी।
तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका? सांसदों के इस्तीफों से मोहभंग की अटकलें तेज
11 Jul, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के उपरांत तृणमूल कांग्रेस के समक्ष आंतरिक और बाह्य संकट गहराता जा रहा है। कालीघाट स्थित पार्टी मुख्यालय के लिए अब संसदीय प्रभाव और संगठनात्मक नियंत्रण बनाए रखना एक कठिन चुनौती बन गया है। एक तरफ राज्यसभा में पार्टी का संख्या बल तेजी से गिर रहा है, तो दूसरी तरफ ऋतव्रत बनर्जी गुट समानांतर संगठन खड़ा करके नेतृत्व के लिए बड़ी मुसीबत पैदा कर रहा है।
राज्यसभा में बढ़ता बिखराव और इस्तीफों का दौर
हालिया राजनीतिक घटनाक्रम में टीएमसी को बड़ा झटका तब लगा जब तीन राज्यसभा सदस्यों ने इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया। इस घटना के अगले ही दिन सांसद रुक्मणी मलिक के इस्तीफे की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने ई-मेल के जरिए अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की प्रबल संभावना है कि जल्द ही कुछ और सांसद पार्टी का साथ छोड़ सकते हैं। अब तक कुल 20 सांसद पार्टी से नाता तोड़ चुके हैं, जिससे उच्च सदन में टीएमसी की स्थिति बेहद कमजोर हो गई है। यदि शेष बचे सांसदों में से भी कुछ और लोग पाला बदलते हैं, तो संसद में पार्टी का प्रभाव लगभग नगण्य हो जाएगा।
ऋतव्रत गुट की बढ़ती संगठनात्मक सक्रियता
संगठनात्मक मोर्चे पर ऋतव्रत बनर्जी गुट ने अपनी दावेदारी को मजबूती से आगे बढ़ाया है। इन्होंने ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटाकर अपनी एक नई वर्किंग कमेटी का गठन कर लिया है और इसकी जानकारी चुनाव आयोग को भी दे दी है। यह गुट अब राज्य और जिला स्तर पर समानांतर कमेटियां बनाने की तैयारी में है। तपसिया में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में पदाधिकारियों के नामों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस नए गुट ने अरूप राय को चेयरपर्सन और ऋतव्रत बनर्जी, जावेद खान एवं संदीपन साहा को महासचिव नियुक्त कर खुद को "असली तृणमूल" होने का दावा पेश किया है, जिसमें कई पूर्व विधायकों और हारे हुए प्रत्याशियों को भी शामिल किया जा रहा है।
कालीघाट नेतृत्व के सामने अस्तित्व का संकट
तृणमूल कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व के सामने इस समय कई मोर्चों पर अस्तित्व की लड़ाई है। राज्यसभा में सदस्यों की लगातार घटती संख्या से जहां राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की आवाज कमजोर हो रही है, वहीं ऋतव्रत गुट द्वारा जिला स्तर पर बनाई जा रही पकड़ से जमीनी स्तर पर भी संकट पैदा हो गया है। पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग में चल रही कानूनी खींचतान ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। यदि ऋतव्रत गुट जिला इकाइयों में अपनी पकड़ मजबूत करने में सफल रहता है, तो आने वाले समय में तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और वैधानिकता की यह जंग और भी भीषण रूप ले सकती है।
राजा वड़िंग से दूरी, चन्नी-रंधावा के करीब बघेल? पंजाब कांग्रेस में बढ़ी सियासी चर्चा
10 Jul, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस के भीतर मचे आंतरिक घमासान को शांत करने के लिए सुलह की कोशिशें तेज हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और वरिष्ठ सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा अब प्रदेश कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल के साथ बातचीत की मेज पर आने के लिए राजी हो गए हैं। शुक्रवार को होने वाली इस संभावित बैठक को लेकर सियासी हलचल बेहद तेज है, लेकिन इस मुलाकात से पहले ही चन्नी खेमे की ओर से रखी गई शर्तों ने पार्टी के भीतर के तनाव को साफ उजागर कर दिया है।
चन्नी की सख्त शर्तें: राजा वड़िंग से दूरी
अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने इस अहम बैठक के लिए कुछ बेहद कड़े नियम तय किए हैं। उनकी पहली और सबसे बड़ी शर्त यह है कि इस पूरी बातचीत में पंजाब कांग्रेस के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को शामिल नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि यह रणनीतिक मुलाकात चंडीगढ़ स्थित पार्टी मुख्यालय (कांग्रेस भवन) में न होकर, किसी निष्पक्ष या अन्य गुप्त स्थान पर आयोजित की जाएगी।
विधायक राणा गुरजीत के घर बनी रणनीति
इस बड़े फैसले से ठीक पहले, वीरवार को चंडीगढ़ में कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह के सरकारी आवास पर चन्नी समर्थकों की एक बेहद गोपनीय और मैराथन बैठक हुई। करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक परगट सिंह, बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा, पूर्व विधायक भारत भूषण आशु और बरिंदर ढिल्लों समेत लगभग दस दिग्गज नेता शामिल हुए। इसी बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि प्रभारी भूपेश बघेल के सामने अपनी बात रखी जाएगी।
चुनाव समिति की सूची पर गंभीर आपत्ति
बैठक के समापन के बाद सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और विधायक परगट सिंह ने संयुक्त रूप से बताया कि वे प्रदेश प्रभारी के सामने मुख्य रूप से हाल ही में जारी हुई चुनाव समिति की सूची को लेकर अपनी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराएंगे। नेताओं का कहना है कि पार्टी में कुछ संगठनात्मक मुद्दों पर गंभीर मतभेद हैं, जिन्हें प्रभारी के समक्ष सुलझाना जरूरी है। हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि इन मतभेदों के बावजूद कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और सबका साझा लक्ष्य साल 2027 के विधानसभा चुनावों में पंजाब की सत्ता में वापसी करना है।
बैठकों के दौर के बीच राजा वड़िंग का बयान
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने बेहद सधे हुए अंदाज में कहा कि लोकतंत्र में हर नेता को अपनी बात और राय आलाकमान के सामने रखने का पूरा अधिकार है। दूसरी तरफ, पंजाब के पांच दिवसीय दौरे पर आए प्रभारी भूपेश बघेल का चौथा दिन भी बैठकों के नाम रहा। उन्होंने विधायक तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा के आवास पर चर्चा की, जिसके बाद पंजाब भवन में यूथ कांग्रेस के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों और पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल से भी मुलाकात की। शुक्रवार को चन्नी खेमे के साथ होने वाली इस निर्णायक बैठक के बाद बघेल सीधे दिल्ली
अयोध्या में गरजे योगी आदित्यनाथ, बोले- राम मंदिर के साथ तेजी से हो रहा पूरी नगरी का कायाकल्प
10 Jul, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अयोध्या। राम नगरी के मंदिरों से चढ़ावा चोरी की घटना के बाद पंद्रह दिन में दूसरी बार अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने यहां राष्ट्रीय लोकदल के नेता स्वर्गीय मुन्ना सिंह चौहान की भव्य मूर्ति का अनावरण करने के साथ ही एक विशाल जनसभा को भी संबोधित किया। अयोध्या की बीकापुर विधानसभा क्षेत्र के सोहावल में मुख्यमंत्री ने 432 करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में भाजपा और पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल के बीच के अंतर को भी स्पष्ट रूप से रेखांकित किया।
डबल इंजन सरकार के संकल्प और विपक्ष पर प्रहार मुख्यमंत्री ने जनसभा में कहा कि जब प्रदेश में डबल इंजन की सरकार आई, तभी भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण संभव हो सका। विकास का लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे और जनकल्याणकारी नीतियां हर परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं, यही सरकार का मुख्य संकल्प है। पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यहां ऐसी भी सरकारें रहीं जो रामभक्तों पर गोलियां चलवाती थीं। समाजवादी पार्टी पर सीधा आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि सपा ने हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ाने का पाप किया था, जबकि हमारी सरकार ने अयोध्या को देश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित करने का कार्य किया है। आज अयोध्या की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है और यह तीनों लोकों से न्यारी बन गई है।
भदरसा का नाम बदलकर अब हुआ 'भरतनगर भरतकुंड' क्षेत्र के विकास और सांस्कृतिक पहचान को नया आयाम देते हुए मुख्यमंत्री ने एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि भदरसा का चेयरमैन गुस्ताखी कर रहा था, इसलिए अब अयोध्या के भदरसा क्षेत्र को 'भरतनगर भरतकुंड' के नाम से जाना जाएगा। भदरसा नगर पंचायत की नई पहचान अब इसी पवित्र नाम से होगी। उन्होंने भरत जी के त्याग को याद करते हुए कहा कि भरत जैसा भाई पूरी दुनिया में मिलना असंभव है और यह अयोध्या की ही धरती है जिसने राम, लक्ष्मण और भरत जैसे महान चरित्र संसार को दिए हैं।
अयोध्या का आधुनिक विकास और सुदृढ़ कनेक्टिविटी सोहावल में विकास परियोजनाओं की सौगात देने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि आज अयोध्या पूरी दुनिया में चमक-दमक रही है, लेकिन यही विकास विपक्ष को रास नहीं आ रहा है। जब विकास की योजनाएं समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तभी सुशासन पर जनता का विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में जो सड़कें कभी सिंगल लेन हुआ करती थीं, वे आज टू-लेन और फोर-लेन में बदल चुकी हैं। हवाई सफर, रेलवे और बस सेवा के माध्यम से अयोध्या की कनेक्टिविटी को हर दिशा से बेहतर किया गया है, जिससे यहां का प्रत्येक नागरिक अब खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करता है।
फारूक अब्दुल्ला पर बरसे गिरिराज सिंह, पुराने कश्मीर हालातों का किया जिक्र
10 Jul, 2026 12:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला को लेकर देश का सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने अब्दुल्ला परिवार पर तीखा हमला बोलते हुए एक बेहद बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि फारूक अब्दुल्ला ने अपने पिता से लेकर अपने बेटे तक की पीढ़ियों में हमेशा पाकिस्तान का ही पक्ष लिया है। केंद्रीय मंत्री ने अतीत के काले दौर का जिक्र करते हुए कहा कि जब कश्मीर घाटी में बेगुनाह हिंदुओं को गोलियों से भूना जा रहा था, तब फारूक अब्दुल्ला सत्ता के मजे लेने में व्यस्त थे।
अब्दुल्ला कुनबे पर देश विरोधी ताकतों को बढ़ावा देने का आरोप
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व और अब्दुल्ला परिवार की घेराबंदी करते हुए उन पर कश्मीर में अलगाववादियों को शह देने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस पूरे कुनबे का राजनीतिक इतिहास हमेशा से देश विरोधी ताकतों के साथ खड़े रहने और उन्हें बढ़ावा देने का रहा है। गिरिराज सिंह के इस आक्रामक बयान के बाद जम्मू-कश्मीर से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
कश्मीरी पंडितों के दर्द को लेकर साधा निशाना
अपने बयान में केंद्रीय मंत्री ने 1990 के दशक में कश्मीर से हिंदुओं के पलायन और उन पर हुए अत्याचारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सीधे तौर पर तत्कालीन सरकार और फारूक अब्दुल्ला की भूमिका पर सवाल खड़े किए। गिरिराज सिंह का कहना है कि संकट के उस दौर में कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय सत्ताधारी नेतृत्व मूकदर्शक बना रहा और अपनी राजनीतिक रोटियां सेकता रहा। इस तीखी बयानबाजी के बाद अब नेशनल कॉन्फ्रेंस और भाजपा के बीच जुबानी जंग और तेज होने के आसार हैं।
IVP का BJP में विलय, दिल्ली नगर निगम की राजनीति में बड़ा बदलाव
10 Jul, 2026 12:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम (MCD) की सियासत में एक बहुत बड़ा उलटफेर होने जा रहा है, जिससे राजधानी का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा। आम आदमी पार्टी (AAP) से बगावत कर अलग दल बनाने वाली इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (IVP) के सभी 16 पार्षद आज औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामने जा रहे हैं। इस बड़े विलय के बाद एमसीडी में भाजपा की ताकत में भारी इजाफा होगा। दिल्ली भाजपा कार्यालय में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की गरिमामयी मौजूदगी में आईवीपी का भाजपा में आधिकारिक विलय कराया जाएगा। इसके साथ ही कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा आज ही वार्ड कमेटियों के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन पद के प्रत्याशियों के नामों की भी घोषणा कर सकती है।
विलय के पीछे का बड़ा चुनावी गणित
आईवीपी के भाजपा में इस विलय के पीछे एक गहरा रणनीतिक और सियासी गणित काम कर रहा है। दिल्ली में अगले साल नगर निगम के आम चुनाव होने निर्धारित हैं, जिसे देखते हुए भाजपा अभी से जमीनी स्तर पर अपनी घेराबंदी मजबूत करने में जुट गई है। दूसरी तरफ, आईवीपी के पार्षदों को भी अपना राजनीतिक भविष्य दांव पर दिखाई दे रहा था। विश्लेषकों का मानना है कि एक नवगठित और क्षेत्रीय दल के बैनर तले दोबारा चुनाव जीतना इन पार्षदों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होता। ऐसे में देश के सबसे बड़े राजनीतिक दल का हाथ थामने से न सिर्फ उनकी जीत की राह आसान होगी, बल्कि भविष्य में टिकट मिलने की संभावना भी प्रबल हो जाएगी।
नए चेहरों को मिल सकती हैं बड़ी जिम्मेदारियां
भाजपा के कुनबे में शामिल होते ही आईवीपी के कई कद्दावर नेताओं को निगम के भीतर बड़ी प्रशासनिक और सांगठनिक जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुछ पार्षदों को वार्ड कमेटियों में चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन के पदों से नवाजा जा सकता है। इसके अलावा, विभिन्न जोन और सबसे शक्तिशाली मानी जाने वाली स्थायी समिति (Standing Committee) में भी इन्हें प्रतिनिधित्व मिलने की पूरी संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, आईवीपी के शीर्ष नेता मुकेश गोयल को एमसीडी की किसी तदर्थ या विशेष समिति की कमान सौंपी जा सकती है। वहीं, सह-प्रमुख हेमचंद्र गोयल को सेंट्रल जोन से स्थायी समिति का सदस्य बनाया जा सकता है, जबकि मनोनीत पार्षद मनोज जैन को डिप्टी चेयरमैन की कुर्सी मिल सकती है।
आम आदमी पार्टी में टूट के बाद वजूद में आई थी IVP
गौरतलब है कि फरवरी 2025 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की करारी शिकस्त के कुछ महीनों बाद ही पार्टी के भीतर एक बड़ा विस्फोट हुआ था। सत्ता से बेदखल होने के बाद 'आप' के 16 पार्षदों ने बगावत का झंडा बुलंद करते हुए पार्टी से नाता तोड़ लिया था और 'इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी' (IVP) नाम से एक नए दल का गठन किया था। इस टूट का सीधा असर एमसीडी की आंतरिक राजनीति पर पड़ा था। इसके चलते वार्ड कमेटियों और स्थायी समिति के चुनावों का पूरा गणित गड़बड़ा गया था। मेयर का पद गंवाने के बाद आम आदमी पार्टी की स्थायी समिति पर से भी पकड़ ढीली हो गई थी और उसकी दावेदारी लगभग समाप्त हो गई थी।
इन प्रमुख जोन में मजबूत होगी भाजपा की स्थिति
भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने वाले ये 16 पार्षद दिल्ली के लगभग सभी महत्वपूर्ण प्रशासनिक जोन का प्रतिनिधित्व करते हैं:
नरेला और रोहिणी जोन: नरेला से 2 और रोहिणी से 2 पार्षद शामिल हो रहे हैं।
पश्चिमी और दक्षिणी जोन: पश्चिमी जोन से 3 और साउथ जोन से भी 3 पार्षद भाजपा में आ रहे हैं।
शाहदरा साउथ: इस जोन से 2 पार्षद पाला बदल रहे हैं।
अन्य जोन: सिविल लाइंस से 1, सिटी एसपी जोन से 1, करोल बाग से 1 और सेंट्रल जोन से 1 पार्षद भाजपा का हिस्सा बनेंगे।
इन पार्षदों के आने के बाद दिल्ली नगर निगम के अधिकांश जोन में भाजपा की स्थिति पहले की तुलना में बेहद अभेद्य और मजबूत मानी जा रही है।
क्या दो बड़े मंत्रियों की होगी छुट्टी? कांग्रेस ने बीजेपी से मांगा जवाब
10 Jul, 2026 12:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार में संभावित कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं के बीच दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड और कामकाज के प्रदर्शन के आधार पर कुछ अहम विभाग वापस लिए जाने की सुगबुगाहट लंबे समय से चल रही है। अब तक नीट यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले और शैक्षणिक सुधारों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाए जाने के कयास सबसे ज्यादा लगाए जा रहे थे, लेकिन अब इस संभावित सूची में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का नाम भी प्रमुखता से जुड़ गया है।
निजी स्टाफ पर गिरी गाज, पीएमओ से कार्रवाई की चर्चा
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का नाम इस फेरबदल की रेस में तब सामने आया, जब हाल ही में पर्यावरण मंत्रालय में एक साथ तीन बड़े अधिकारियों को पद से हटा दिया गया। इसमें मंत्री के निजी सचिव (PS) को "प्रशासनिक आधार" पर हटाया गया, जबकि एक अतिरिक्त निजी सचिव की सेवाएं समाप्त कर दी गईं और दूसरे अतिरिक्त निजी सचिव को समय से पहले उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया गया। राजनीतिक हलकों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि इन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते यह सख्त कार्रवाई सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के निर्देश पर की गई है।
कांग्रेस ने याद दिलाया 'राजधर्म' और लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण
इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मोदी सरकार और भूपेंद्र यादव पर चौतरफा हमला बोल दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भारतीय राजनीति में नैतिक जिम्मेदारी का सवाल उठाते हुए कहा कि ठीक 70 साल पहले एक रेल दुर्घटना के बाद लाल बहादुर शास्त्री ने इस्तीफा देकर नैतिकता की जो मिसाल पेश की थी, आज के दौर में उसे भुला दिया गया है।
जयराम रमेश ने तीखा तंज कसते हुए कहा, “जब किसी मंत्री के सबसे करीबी सहयोगियों को भ्रष्टाचार के आरोपों में बर्खास्त कर दिया जाए, तो उन्हें खुद ही पद छोड़ देना चाहिए। अगर मंत्री को इसकी जानकारी थी तो वे भी उतने ही दोषी हैं, और अगर वे कहें कि उन्हें पता नहीं था, तो यह अक्षमता और भी गंभीर है। यह उनके राजधर्म का पालन करने का समय है।” उन्होंने भाजपा को याद दिलाया कि इस राजधर्म में नैतिक जिम्मेदारी और राजनीतिक जवाबदेही दोनों शामिल हैं।
'चंदा दो, धंधा लो' को लेकर विपक्ष का तंज
इससे पहले कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या सरकार की 'चंदा दो, धंधा लो' वाली योजना में कोई गड़बड़ी हो गई है? उन्होंने लिखा कि बिना आग के इतना धुआं नहीं उठता। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी इस मामले को उठाते हुए केंद्र सरकार से मांग की है कि पर्यावरण मंत्रालय के इन रसूखदार अधिकारियों के खिलाफ की गई इस अचानक और बड़ी कार्रवाई के पीछे के असली कारणों को देश के सामने सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
ममता बनर्जी का भावुक अंदाज, TMC को लेकर दिया बड़ा सियासी संदेश
10 Jul, 2026 12:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने सियासी इतिहास के सबसे गंभीर दौर से गुजर रही है। सांगठनिक बिखराव और अंदरूनी बगावत के बीच, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को एक वीडियो संदेश जारी कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर बेहद तीखे और गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि सत्ताधारी दल टीएमसी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बना रहा है और राज्य में पार्टी को पूरी तरह समाप्त करने की साजिश रची जा रही है।
'मुझे चुप कराने के लिए करनी होगी मेरी हत्या'
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वीडियो में बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि यदि कोई उन्हें खामोश करना चाहता है या तृणमूल कांग्रेस का वजूद मिटाना चाहता है, तो उसे पहले उनकी हत्या करनी होगी। उन्होंने भावुक और कड़े लहजे में कहा, "मुझे राजनीतिक और व्यक्तिगत रूप से खत्म करने के हर संभव प्रयास किए गए हैं, लेकिन मैं इन गीदड़भभकियों से डरने वाली नहीं हूं।" उन्होंने साफ किया कि वह आखिरी सांस तक अपनी पार्टी और कार्यकर्ताओं के लिए लड़ती रहेंगी।
वरिष्ठ नेताओं को प्रताड़ित करने का आरोप
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पार्टी के कई शीर्ष नेताओं को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उनके घरों पर हमले किए जा रहे हैं और उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है। अपने इस बयान के दौरान उन्होंने टीएमसी के कद्दावर नेताओं—अभिषेक बनर्जी, महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी के नामों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन का डर दिखाकर विपक्ष की आवाज को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है।
चौतरफा बगावत के बीच दिया बयान
टीएमसी प्रमुख का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पार्टी पूरी तरह से दो हिस्सों में विभाजित हो चुकी है। चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर ऐसा विद्रोह भड़का कि विधानसभा से लेकर संसद तक पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। विधानसभा में करीब 58 विधायकों ने रीताब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अपना अलग बागी गुट बना लिया है। वहीं, संसद में पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने बगावत का झंडा बुलंद करते हुए एनसीपीआई (NCPI) का दामन थाम लिया, जबकि तीन प्रमुख राज्यसभा सांसदों ने पहले ही अपनी सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है।
हिरासत में अमानवीय व्यवहार के संगीन आरोप
अपने वीडियो संदेश के आखिरी हिस्से में पूर्व मुख्यमंत्री ने जेल और पुलिस हिरासत में बंद टीएमसी नेताओं की स्थिति को लेकर बेहद चौंकाने वाले दावे किए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कई सहयोगियों को लॉकअप के भीतर फर्श पर सोने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ममता बनर्जी ने कहा, "कुछ नेताओं को कमर में रस्सी बांधकर और पैरों में बेड़ियां डालकर सरेआम घुमाया जा रहा है। बर्बरता की हद पार करते हुए कुछ के सिर मुंडवा दिए गए हैं, तो कुछ पर गंदी चीजें फेंकी गईं। लोकतंत्र में विपक्ष के साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार बेहद शर्मनाक और निंदनीय है।"
मोदी सरकार पर बरसे खरगे, कांग्रेस ने फिर उठाए कई बड़े मुद्दे
10 Jul, 2026 12:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करीमनगर। भारत की ऐतिहासिक धरोहरें अपनी भव्यता के साथ कई ऐसे रहस्यों को भी समेटे हुए हैं, जिनका आकर्षण आज भी शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए बना हुआ है। इन्हीं अनोखी विरासतों में से एक तेलंगाना के करीमनगर जिले में स्थित सदियों पुरानी 'दो मीनार मस्जिद' है। प्रसिद्ध एलगंदल किले से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह ऐतिहासिक इमारत केवल कुतुब शाही और आसफ जाही शासनकाल की स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण ही नहीं है, बल्कि अपनी अनूठी इंजीनियरिंग के कारण भी विशेष पहचान रखती है। चारमीनार की तरह यह इमारत भी अपने समय की बेहतरीन कारीगरी का शानदार नमूना है।
झूलती मीनारों का अनोखा रहस्य
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित इस ऐतिहासिक मस्जिद की सबसे बड़ी विशेषता इसकी दो ऊंची और आकर्षक मीनारें हैं, जिन्हें ‘झूलती मीनारें’ भी कहा जाता है। बताया जाता है कि यदि कोई व्यक्ति एक मीनार के ऊपरी हिस्से को हल्के से हिलाता है, तो कुछ ही क्षणों में दूसरी मीनार में भी कंपन होने लगता है। सबसे हैरानी की बात यह है कि दोनों मीनारों को जोड़ने वाला मुख्य ढांचा पूरी तरह स्थिर बना रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक उस दौर में भूकंप के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से विकसित की गई थी, जो प्राचीन शिल्पकारों की उच्च वैज्ञानिक समझ को दर्शाती है।
प्राचीन वास्तुकला और मनमोहक दृश्य
मस्जिद की मीनारों के अंदर बेहद संकरी और घुमावदार सीढ़ियां बनाई गई हैं, जिन्हें बड़े ही सटीक ढंग से तराशे गए पत्थरों से तैयार किया गया है। इन सीढ़ियों के सहारे ऊपर पहुंचने पर बने झरोखों से एलगंदल किले के साथ आसपास का प्राकृतिक दृश्य बेहद मनमोहक दिखाई देता है। काकतीय शासकों, कुतुब शाही सुल्तानों और हैदराबाद के निजामों के शासनकाल की साक्षी रही यह ऐतिहासिक मस्जिद आज भी इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के लिए गहन अध्ययन का विषय है।
समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
प्रशासन ने इस अद्भुत संरचना को संरक्षित स्मारक का दर्जा दिया है, ताकि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, बेजोड़ स्थापत्य कला और प्राचीन वैज्ञानिक सोच को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके। यह ऐतिहासिक धरोहर आज भी भारतीय वास्तुकला की उत्कृष्ट परंपरा और प्राचीन इंजीनियरिंग की अनूठी मिसाल के रूप में देश-विदेश से आने वाले हजारों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
बांकीपुर उपचुनाव का रण रोमांचक, दो बड़ी पार्टियों की खींचतान के बीच PK की एंट्री
10 Jul, 2026 12:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की सबसे चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। इस सीट पर पहली बार सीधे चुनावी मैदान में उतरे जन सुराज पार्टी के मुखिया प्रशांत किशोर की सफलता पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी के परंपरागत मतदाताओं को अपने पाले में लाने पर निर्भर है। उनकी रणनीति बनाने वाली टीम का भी यह मानना है कि यदि भाजपा के इस मजबूत वोट बैंक में बिखराव होता है, तो प्रशांत किशोर के लिए चुनावी राह काफी सुगम हो जाएगी। इसी योजना के तहत जन सुराज के प्रमुख रणनीतिकार लगातार भाजपा के उन कैडर वोटरों और असंतुष्ट नेताओं से तालमेल बिठा रहे हैं, जो टिकट वितरण या अन्य कारणों से नेतृत्व से खफा चल रहे हैं। वे इन नाराज चेहरों को यह समझाने में जुटे हैं कि जब तक भाजपा को इस पारंपरिक सीट पर शिकस्त नहीं मिलेगी, तब तक शीर्ष नेतृत्व नए विकल्पों या जमीनी कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं देगा।
स्थानीय समस्याओं को बनाया चुनावी हथियार
जन सुराज के कार्यकर्ता इसी बात को आम जनता के बीच जाकर पुरजोर तरीके से उठा रहे हैं। क्षेत्र की मुख्य समस्याओं जैसे जलभराव, यातायात जाम और लचर बुनियादी ढांचे को मुद्दा बनाकर पार्टी वोटरों के बीच अपनी जमीन मजबूत करने का प्रयास कर रही है। इसके साथ ही प्रशांत किशोर की टीम राष्ट्रीय जनता दल के पारंपरिक झुकाव वाले मतदाताओं को भी साधने की कोशिश में जुटी है। भाजपा के मजबूत गढ़ को भेदने के लिए जन सुराज की टोलियां लगातार घर-घर दस्तक दे रही हैं और राज्य में एक बड़े सियासी बदलाव के नाम पर लोगों से समर्थन जुटा रही हैं।
आरजेडी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में पदयात्रा
वोट बैंक की इस जंग में प्रशांत किशोर की टीम ने पटना के वार्ड संख्या 29 और 35 के अंतर्गत आने वाले करबिगहिया, चिरैयाटांड़, खासमहल और चांदमारी रोड जैसे इलाकों में सघन जनसंपर्क और पदयात्रा की है। इन क्षेत्रों में आरजेडी के समर्थक मतदाताओं की संख्या काफी अच्छी है, जिनसे टीम ने सीधा संवाद कर एक अवसर देने का आग्रह किया है। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इन खास मोहल्लों में जन सुराज का ताना-बाना बुनने में आरजेडी के ही कुछ असंतुष्ट नेता पर्दे के पीछे से सक्रीय भूमिका निभा रहे हैं। बांकीपुर के इस इलाके में जलजमाव की समस्या वर्षों से जस की तस बनी हुई है, जिसे अब चुनावी बहस के केंद्र में लाया जा रहा है।
दशकों पुराने चुनावी समीकरण बदलने की कवायद
तमाम स्थानीय जन-समस्याओं के बावजूद इस विधानसभा क्षेत्र में अब तक का राजनीतिक इतिहास मुख्य रूप से भाजपा बनाम आरजेडी के मुकाबले का ही रहा है। आरजेडी के पुराने दौर के शासनकाल को लेकर बने खास नैरेटिव के कारण यहां के आम मतदाता स्थानीय स्तर पर नाराजगी होने के बाद भी अंततः भाजपा के पक्ष में ही लामबंद होते आए हैं। हालांकि, इस बार प्रशांत किशोर के खुद मैदान में आ जाने से मतदाताओं के सामने एक नया और मजबूत विकल्प खड़ा हो गया है। जन सुराज की टीम जनहित से जुड़े बुनियादी मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर जनता को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रही है कि अब तक जो मुद्दे चुनावी राजनीति में पीछे छूट जाते थे, वही अब मुख्य प्राथमिकता हैं।
धर्म परिवर्तन और आरक्षण का मुद्दा गरमाया, अब देश की सबसे बड़ी अदालत में होगी सुनवाई
10 Jul, 2026 12:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अभिनेता से राजनेता बने विजय थलपति (Vijay Thalapathy) की पार्टी की विचारधारा के अनुरूप, तमिलनाडु सरकार धर्मांतरण के जरिए इस्लाम अपनाने वाले लोगों को भी पिछड़े वर्ग के तहत आरक्षण का लाभ देने के पक्ष में खड़ी दिखाई दे रही है। इसी कड़ी में तमिलनाडु सरकार ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस फैसले को देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में चुनौती दी है, जिसमें कहा गया था कि धर्मांतरण के बाद मुस्लिम बनने वाला कोई भी व्यक्ति 'पिछड़ा वर्ग मुस्लिम' (BC-M) के दर्जे का दावा नहीं कर सकता है। हाई कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा जारी साल 2024 के एक आदेश को असंवैधानिक करार दिया था।
हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार की अपील
तमिलनाडु सरकार के सचिव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की गई है। इस अपील में मूल याचिकाकर्ता समीर अहमद एन, जिला कलेक्टर, राजस्व मंडल अधिकारी और तहसीलदार को प्रतिवादी बनाया गया है। कानूनी लड़ाई को भांपते हुए इन प्रतिवादियों ने शीर्ष अदालत में पहले ही एक कैविएट दाखिल कर रखी है, ताकि उनका पक्ष सुने बिना अदालत कोई एकतरफा आदेश जारी न करे।
क्या है यह पूरा कानूनी विवाद?
इस विवाद की जड़ें साल 2022 में थूथुकुडी जिले के एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका से जुड़ी हैं। हिंदू परिवार में जन्मे इस व्यक्ति ने बाद में इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था और अपना नाम बदलकर समीर अहमद एन रख लिया था। साल 2015 के एक आधिकारिक प्रमाण पत्र में उनके धर्मांतरण की पुष्टि भी की गई थी। इसके बाद, उन्होंने कयातुर के तहसीलदार के पास आवेदन देकर 'मुस्लिम लेब्बाई' समुदाय का पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की, जिसे तहसीलदार ने खारिज कर दिया। इसके बाद इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
सरकार का 2024 का आदेश और हाई कोर्ट का रुख
इस मामले की पेंडेंसी के दौरान ही तमिलनाडु सरकार ने साल 2024 में एक शासनादेश जारी किया था। इसमें प्रावधान किया गया था कि यदि पिछड़ा वर्ग (BC), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (MBC), विमुक्त जनजाति (DNT) या अनुसूचित जाति (SC) से संबंधित कोई भी व्यक्ति इस्लाम अपनाता है, तो उसे आरक्षण का लाभ देने के लिए पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) माना जाना चाहिए।
मद्रास हाई कोर्ट ने सरकार के इस आदेश को पूरी तरह खारिज करते हुए बेहद तीखी टिप्पणी की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कोई व्यक्ति हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाता है, तो वह अपनी पिछली हिंदू जाति के लाभों को नए धर्म में नहीं ले जा सकता।
'इस्लाम में सामाजिक समानता' पर कोर्ट की टिप्पणी
मद्रास हाई कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा, “ईसाई मिशनरियों और इस्लामी प्रचारकों का हमेशा से यह रुख रहा है कि उनके धर्म हिंदू धर्म के विपरीत सामाजिक समानता प्रदान करते हैं। धर्मांतरण कराने के लिए ऐसा स्टैंड लेने के बाद अब यह दावा करना पूरी तरह से कपटपूर्ण है कि इस्लाम में भी जातिगत पदानुक्रम मौजूद है। कुछ संप्रदायों को पिछड़ा और शेष को अगड़ा के रूप में वर्गीकृत करना कुरान के आदेशों के विपरीत है। इस्लाम एक समतावादी समाज की वकालत करता है।”
हाई कोर्ट के इसी कड़े रुख और आदेश को पलटने के लिए अब तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जहां इस संवेदनशील और नीतिगत विषय पर अंतिम फैसला होना बाकी है।
TMC से आए नेताओं पर BJP का भरोसा, राज्यसभा के लिए तीनों को मिला टिकट
10 Jul, 2026 11:53 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है, जहां भारत निर्वाचन आयोग द्वारा खाली हुई तीन राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव के एलान के साथ ही सियासी पारा चढ़ गया है। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे रोचक पहलू यह है कि इस चुनावी प्रक्रिया के बाद भी दिल्ली के उच्च सदन में जाने वाले चेहरे बदलने की उम्मीद नहीं है, बल्कि केवल उन चेहरों के राजनीतिक दल का बैनर बदलने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी इन तीनों सीटों को अपने पाले में करने के लिए पूरी तरह आश्वस्त दिख रही है, जबकि दूसरी ओर अंदरूनी खींचतान और टूट के दौर से गुजर रही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर संसद में अपनी धमक खोने का बड़ा संकट मंडरा रहा है।
दल बदलते ही मिला चुनावी टिकट
दरअसल, यह पूरी सियासी हलचल तब शुरू हुई जब टीएमसी के तीन प्रमुख पूर्व राज्यसभा सांसदों—सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक ने विधानसभा चुनावों में पार्टी की करारी शिकस्त के बाद शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए अपने पदों और पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। इन तीनों कद्दावर नेताओं ने भाजपा का दामन थाम लिया और भगवा खेमे ने भी बिना वक्त गंवाए इन तीनों को ही आगामी उपचुनाव के लिए अपना रणबांकुरा घोषित कर दिया। संसदीय नियमावली के लिहाज से सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बड़ाइक का कार्यकाल सितंबर 2029 तक और सुष्मिता देव का कार्यकाल अप्रैल 2030 तक का बचा हुआ था, लेकिन अब आगामी 24 जुलाई को होने वाले उपचुनाव में ये तीनों नेता पुरानी सीटों पर नई पार्टी के सिंबल के साथ दोबारा किस्मत आजमाएंगे।
विधानसभा के समीकरणों में भाजपा का दबदबा
अगर बंगाल विधानसभा के मौजूदा संख्या बल पर नजर डालें, तो पूरा खेल एकतरफा रूप से भाजपा के पक्ष में खड़ा दिखाई देता है। कुल 294 सीटों वाली विधानसभा में इस समय भाजपा के पास अपने 208 विधायकों का मजबूत आधार है। राज्यसभा उपचुनाव की तय मतदान प्रणाली के अनुसार, तीन अलग-अलग सीटों के इस मुकाबले में किसी भी प्रत्याशी को फतह हासिल करने के लिए करीब 70 मतों की दरकार होगी। भाजपा के पास विधायकों का इतना बड़ा आंकड़ा मौजूद है कि वह बिना किसी बाहरी बैसाखी के अपने तीनों ही उम्मीदवारों को क्रमशः 70, 69 और 69 वोट दिलाकर आसानी से संसद भेज सकती है, जिससे उनकी जीत तय मानी जा रही है।
अंदरूनी कलह से बेबस हुई टीएमसी
भाजपा के इस मजबूत चक्रव्यूह के आगे तृणमूल कांग्रेस के पास फिलहाल कोई ठोस काट नजर नहीं आ रही है। वैसे तो टीएमसी के सिंबल पर चुनाव जीते विधायकों की संख्या अभी भी लगभग 80 के आसपास है, जो एक सीट पर कड़ी टक्कर देने के लिए काफी थी, लेकिन पार्टी के भीतर मचे घमासान ने इसे बेहद पंगु बना दिया है। टीएमसी के विधायक इस समय दो फाड़ हो चुके हैं, जिसमें से एक धड़ा ममता बनर्जी के निर्देश पर चल रहा है, तो दूसरा बड़ा बागी गुट विधानसभा में विपक्ष के नेता रीताब्रत बनर्जी के झंडे तले लामबंद है। बागी धड़े का दावा है कि उनके साथ 65 के करीब विधायक हैं, जिसके कारण दोनों गुटों में किसी भी आम सहमति की संभावना पूरी तरह खत्म हो गई है।
गद्दारी बनाम नेतृत्व पर अविश्वास की जंग
इस सियासी नुकसान पर ममता बनर्जी का वफादार खेमा डैमेज कंट्रोल में जुटा है और इसे संकट के समय की गई 'गद्दारी' करार दे रहा है। उनका तर्क है कि ये सीटें टीएमसी की संगठनात्मक ताकत की वजह से जीती गई थीं और जनता इस दलबदल को देख रही है। वहीं दूसरी तरफ, बगावती सुर अख्तियार करने वाले नेताओं का कहना है कि यह कोई सामान्य दलबदल नहीं बल्कि नेतृत्व की गलत नीतियों के खिलाफ उपजा भारी अविश्वास है। फिलहाल, टीएमसी के नाम, चुनाव चिह्न और मूल संगठन पर वर्चस्व की यह कानूनी लड़ाई चुनाव आयोग की दहलीज पर है, लेकिन अगर 24 जुलाई के चुनाव में भाजपा बाजी मार लेती है, तो राज्यसभा में एनडीए की ताकत और बढ़ जाएगी।
TMC के खातों पर छिड़ी कानूनी लड़ाई, बंगाल की सियासत में बढ़ी हलचल
10 Jul, 2026 10:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहा घमासान अब एक बड़े कानूनी मोर्चे में तब्दील हो चुका है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बैंक खातों के फ्रीज होने के बाद अब विधानसभा में विपक्ष के नेता रीताब्रत बनर्जी के बागी गुट ने कोलकाता हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाने का एलान कर दिया है। रीताब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी नीत खेमे पर पार्टी फंड में करोड़ों रुपये की वित्तीय हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग के बेहद संगीन आरोप लगाए हैं।
हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
दरअसल, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हाल ही में तृणमूल कांग्रेस को राहत देते हुए उसके तीन फ्रीज किए गए बैंक खातों को अस्थायी रूप से इस्तेमाल करने की इजाजत दी थी। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने पार्टी के रोजमर्रा के खर्चों को प्रबंधित करने के लिए हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार को 30 सितंबर 2026 तक के लिए विशेष अधिकारी नियुक्त किया है। इस व्यवस्था के तहत अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता विशेष अधिकारी की देखरेख में जरूरी खर्चों के लिए चेक के जरिए पैसे निकाल सकते हैं। रीताब्रत बनर्जी ने कहा है कि उनका गुट इस फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर करने जा रहा है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी एक पक्ष बनाया जाएगा।
खातों को फ्रीज करने के पीछे का पूरा मामला
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब रीताब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट ने बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय के साइबर अपराध थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया था कि एक निजी बैंक में मौजूद टीएमसी के तीन खातों में जमा रकम 'अपराध की कमाई' (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) है। इस एफआईआर के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए खातों पर 'डेबिट फ्रीज' लगा दिया था। वर्तमान में ईडी द्वारा टीएमसी के खातों में जमा कुल 440.42 करोड़ रुपये को फ्रीज किए जाने की बात सामने आ रही है, जिसे टीएमसी ने पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और भाजपा का केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का उदाहरण बताया है।
'नया नटवरलाल' कहकर कसा 160 करोड़ का तंज
विपक्ष के नेता रीताब्रत बनर्जी ने पार्टी खजाने में हुई गड़बड़ी पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “इस 'नये नटवरलाल' को बहुत बधाई। असली नटवरलाल ने तो ताजमहल बेचा था, लेकिन यहाँ एक कंपनी ने पार्टी के खजाने से 160 करोड़ रुपये लेकर संपत्तियां खरीद लीं और फिर पार्टी उसी कंपनी को उन संपत्तियों का किराया चुका रही है।”
पूर्व सांसदों के भाजपा में जाने पर दी प्रतिक्रिया
हाल ही में टीएमसी के तीन पूर्व राज्यसभा सांसदों—सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया था। इस दलबदल पर टिप्पणी करते हुए रीताब्रत बनर्जी ने कहा कि राजनीतिक विचारधारा अलग होने से उनके व्यक्तिगत संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सुखेंदु दा उनके मार्गदर्शक रहे हैं, सुष्मिता उनकी पुरानी मित्र हैं और प्रकाश छोटे भाई की तरह हैं; लोकतंत्र में हर किसी को अपना व्यक्तिगत राजनीतिक फैसला लेने का पूरा अधिकार है।
‘गद्दारी की राजनीति’ पर वार, शिंदे को लेकर सियासी विवाद तेज
10 Jul, 2026 09:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में पल-पल बदलते घटनाक्रमों के बीच महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने एक बार फिर अपने तीखे बयानों से राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। राउत ने कड़े लहजे में कहा कि 'विश्वासघात' करने वालों को किसी भी स्तर पर सम्मान देना जमीन पर काम करने वाले निष्ठावान कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ने जैसा है।
पीठ में छुरा घोंपने वालों का सम्मान मंजूर नहीं: संजय राउत
सांसद संजय राउत ने गठबंधन की आंतरिक स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, "हमारी नाराजगी कल जरूर थी, लेकिन आज हम नाराज नहीं हैं। शरद पवार साहब हमारे और महाविकास आघाड़ी के सर्वोच्च नेता हैं। हमने केवल अपनी स्वाभाविक भावनाएं साझा की थीं। हमारा रुख साफ है कि एकनाथ शिंदे सबसे बड़े गद्दार हैं। जब अजित पवार ने बगावत कर शरद पवार साहब की पार्टी को विभाजित किया था, तब हमें भी वैसी ही गहरी पीड़ा हुई थी।"
उन्होंने वरिष्ठ नेतृत्व के रुख पर सवालिया निशान लगाते हुए आगे कहा कि जो लोग धोखा देते हैं, उन्हें हमारे जैसे राजनीतिक नेताओं द्वारा किसी भी कीमत पर तवज्जो नहीं मिलनी चाहिए। यदि ऐसा होने लगा, तो भविष्य में कोई भी आसानी से विश्वासघात करेगा और फिर हमारे ही वरिष्ठ नेता उनके घर जाकर चाय-पानी पिएंगे। ऐसी स्थिति में पार्टी के वफादार कार्यकर्ताओं के बीच बेहद गलत संदेश जाता है।
शरद पवार और एकनाथ शिंदे की मुलाकात से बढ़ा सियासी पारा
संजय राउत की यह तल्ख टिप्पणी उस पृष्ठभूमि में आई है, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने अचानक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद से ही महाराष्ट्र की राजनीति में अटकलों का बाजार बेहद गर्म है। यह मुलाकात ऐसे संवेदनशील समय पर हुई है जब शरद पवार की पार्टी के आगामी रुख और राजनीतिक निर्णयों को लेकर पहले से ही तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
एनसीपी (शरद पवार) के विलय की सुगबुगाहट तेज
महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में इन दिनों शरद पवार की पार्टी के किसी अन्य दल में विलय को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद से यह संभावना और प्रबल मानी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एनसीपी (एसपी) का विलय या तो कांग्रेस में हो सकता है या फिर वे एनडीए (NDA) का हिस्सा बन सकते हैं। इन चर्चाओं के पीछे यह तर्क भी दिया जा रहा है कि केंद्र सरकार सदन में दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कवायद में है, जिससे क्षेत्रीय दलों के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
पूर्ण राज्य के दर्जे को लेकर केंद्र पर दबाव, सिविल सोसायटी ने पारित किया प्रस्ताव
10 Jul, 2026 08:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की सिविल सोसायटी के 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने मंगलवार को एक सुर में केंद्र सरकार से केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को अविलंब पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की है। इस संबंध में प्रतिनिधियों द्वारा सर्वसम्मति से एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किया गया है।
सिविल सोसायटी ने एकजुट होकर पारित किया प्रस्ताव
श्रीनगर में आयोजित इस विशेष बैठक में समाज के विभिन्न वर्गों, बुद्धिजीवियों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर के वर्तमान राजनीतिक व प्रशासनिक हालातों पर विस्तृत चर्चा हुई। सभी प्रतिनिधियों ने एक मत से प्रस्ताव पारित करते हुए कहा कि क्षेत्र में लोकतांत्रिक व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत करने और जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अब बिना किसी देरी के पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिया जाना चाहिए।
लोकतंत्र की मजबूती के लिए राज्य का दर्जा जरूरी
प्रस्ताव में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होने से न केवल स्थानीय शासन में सुधार होगा, बल्कि यहां के नागरिकों में सुरक्षा और विश्वास की भावना भी मजबूत होगी। प्रतिनिधियों का कहना है कि विधानसभा चुनावों के बाद अब अगला तार्किक कदम जम्मू-कश्मीर को उसका पुराना संवैधानिक स्वरूप लौटाना ही है, ताकि विकास कार्यों को और गति मिल सके।
अजोला से संवरी आजीविका : धमतरी की बिहान दीदियों ने प्राकृतिक खेती और आत्मनिर्भरता का रचा नया इतिहास
पीएम सूर्य घर योजना से राजेंद्र कुमार साहू बने ऊर्जा आत्मनिर्भर
बाघ सप्ताह के अंतर्गत वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में पॉम पेंटिग प्रतियोगिता का आयोजन
सुशासन का ‘सेवा सेतु’: नेतानार के फूलसिंह और रामबती को आवेदन के दिन ही मिला विवाह प्रमाण पत्र
डिजिटल क्रांति से जगमगाया अबूझमाड़
बाहरी आडंबरों से अलग है दादाजी धूनीवाले धाम, जहां आध्यात्मिक शक्ति का होता है अनुभव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल से समय पर उपचार ने बचाई 4 वर्षीय मासूम की जान
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल से दिव्यांग समझराम साहू को मिली बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्रायसायकल
निशातपुरा रेलवे स्टेशन से भोपाल के विकास को मिलेगी नई रफ्तार : मंत्री सारंग
