राजनीति
बिहार: नीतीश कुमार को Z+ सुरक्षा जारी, CM पद त्यागने के बावजूद सुरक्षा कवच बरकरार
2 Apr, 2026 10:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: बिहार के मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के बाद नीतीश कुमार को जेड प्लस सुरक्षा मिलती रहेगी. इस संबंध में मंगलवार को गृह विभाग की विशेष शाखा की ओर से आदेश जारी किया गया है. ऐसे में राज्य सभा सदस्य बनने पर भी नीतीश कुमार की सुरक्षा बरकरार रहेगी.
नीतीश कुमार को जेड प्लस सुरक्षा : गृह विभाग के आदेश से यह भी साफ हो गया है कि नीतीश कुमार जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और राज्य सभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे. वर्तमान में नीतीश कुमार राज्य सभा के लिए निवार्चित हुए हैं. इसी कड़ी में नीतीश कुमार को जेड प्लस सुरक्षा प्रदान की गई है.
गृह विभाग के आदेश में क्या है? : पुलिस महानिदेशक व डीजी विशेष शाखा को निर्णय के आधार पर जेड सुरक्षा देने का निर्देश दिया गया है. गृह विभाग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि, ''बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट- 2000 के तहत सुरक्षा दी जाएगी. नीतीश कुमार वर्तमान में राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए हैं और निकट भविष्य में बिहार विधान परिषद की सदस्यता व मुख्यमंत्री पद से त्याग-पत्र देकर राज्य सभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे."
आदेश में आगे कहा गया है कि ''नीतीश कुमार की सुरक्षा की समीक्षा के दौरान जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया जाता है. ऐसे में इन्हें राज्य सरकार के निर्णय के आलोक में सुरक्षा प्रदान की जाय."
क्या होती है जेड प्लस सुरक्षा? : जेड प्लस सबसे हाई लेवल की सुरक्षा मानी जाती है. यह सुरक्षा वीआईपी या किसी बड़ी हस्ती को प्रदान की जाती है. यह सुरक्षा देश के विशिष्ट लोग जैसे प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, केन्द्रीय गृहमंत्री समेत कई राजनेताओं को मिली हुई है.
Z प्लस में कितने जवान होते हैं तैनात : इस सुरक्षा में 55 हर समय सुरक्षा में तैनात हैं, जिसमें 24 जवान, 6 PSO, 10 आर्म्ड स्टैटिक गार्ड, 2 एस्कॉर्ट, 5 वॉचर्स और एक इंस्पेक्टर शामिल है. सभी जवान 24 घंटे शिफ्ट के हिसाब से ड्यूटी करते है. इस सुरक्षा में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान भी शामिल होते हैं. सुरक्षा घेरे बुलेटप्रूफ गाड़ियां और एस्कॉर्ट वाहन की तैनाती रहती हैं.
10 अप्रैल को शपथ ग्रहण? : ऐसी चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा की सदस्यता लेंगे. 16 मार्च को राज्यसभा के लिए नीतीश कुमार चुने गए थे. 30 मार्च को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था और अब जो जानकारी मिल रही है 10 अप्रैल को राज्यसभा की सदस्यता ले लेंगे. 14 अप्रैल तक खरमास है तो खरमास के बाद फिर बिहार में नई सरकार बनाने की हलचल तेज होगी.
7 सर्कुलर रोड में फिर हो सकते हैं शिफ्ट : इसी कड़ी शनिवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 7 सर्किल रोड स्थित बंगला को भी जाकर देखा था. मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सात सर्कुलर रोड बंगाल में ही मुख्यमंत्री रहेंगे. नीतीश कुमार पहले भी इस बंगले में रह चुके हैं.
विधान परिषद की सदस्यता से त्यागपत्र दे चुके हैं : इससे पहले जीतन नाम मांझी को हटाकर इसी बंगले से मुख्यमंत्री के पद पर नीतीश कुमार ने वापसी की थी और इसी बंगले से 2015 का विधानसभा चुनाव भी जीता था. सात सर्कुलर रोड बंगला के बगल में बिहार विकास मिशन का भी कार्यालय है. मुख्यमंत्री इसमें भी आकर बैठते रहे हैं और सुशासन के कार्यक्रमों की जानकारी लेते रहे हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी किसी तरह की कोई परेशानी ना हो इसकी तैयारी शुरू हो गई है.
हेमा मालिनी ने उठाया मुद्दा: पश्चिम बंगाल में कार्यक्रम स्थल बदलाव को बताया सरकार की लापरवाही
2 Apr, 2026 09:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: लोकसभा सांसद और प्रसिद्ध अभिनेत्री हेमा मालिनी ने आज संसद के जीरो ऑवर (शून्यकाल) में पश्चिम बंगाल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से उनकी सांस्कृतिक कार्यक्रमों के स्थल बार-बार बदले जा रहे हैं. इस मुद्दे पर ईटीवी भारत से बात करते हुए सांसद हेमा मालिनी ने कहा कि ये राजनीतिक प्रतिशोध है.
उन्होंने आगे कहा कि बंगाल कला-संस्कृति का राज्य है, वहां महिला मुख्यमंत्री हैं, फिर भी उन्हें केवल भाजपा सांसद होने के कारण परेशान किया जा रहा है. हेमा मालिनी ने आगे कहा कि , “बंगाल कला और संस्कृति की भूमि है. यहां की परंपरा में नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का विशेष सम्मान है. लेकिन दुर्भाग्य से पिछले कई सालों से मेरे कार्यक्रमों का स्थल राज्य सरकार द्वारा बार-बार बदला जा रहा है.
हेमा मालिनी ने कहा, "मैंने कई बार स्थानीय प्रशासन से संपर्क किया, लेकिन हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर स्थल बदल दिया जाता है." उन्होंने आगे कहा, "महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद जब एक महिला भाजपा सांसद को इस तरह परेशान किया जाता है तो यह चिंताजनक है.
उन्होंने सवाल किया कि, क्या भाजपा सांसद होने का यही मतलब है कि उनके सांस्कृतिक कार्यक्रमों को रोका जाएगा. उन्होंने कहा कि, बंगाल की जनता कला प्रेमी है, लेकिन सरकार की यह राजनीतिक संकुचितता कला को भी प्रभावित कर रही है.
सांसद ने यह भी उल्लेख किया कि यह समस्या केवल एक-दो बार नहीं, बल्कि वर्षों से चल रही है. उन्होंने सदन से भी अपील की कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर संज्ञान ले और पश्चिम बंगाल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में राजनीतिक हस्तक्षेप को रोका जाए.
यह घटना ऐसे समय में आई है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल पहले से ही तनावपूर्ण हैं. भाजपा सांसदों और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार विपक्षी दलों के कार्यक्रमों और सांस्कृतिक आयोजनों को जानबूझकर बाधित करती है.
हेमा मालिनी, जो उत्तर प्रदेश से लोकसभा सांसद हैं, लंबे समय से सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से देशभर में भारतीय कला को बढ़ावा देती रही हैं. उन्होंने सदन में कहा कि बंगाल जैसा राज्य, जहां रवींद्र संगीत, नृत्य और साहित्य की समृद्ध परंपरा है, वहां ऐसी राजनीतिक संकीर्णता कला के सम्मान के खिलाफ है. अभी तक पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. संसद में जीरो ऑवर में उठाए गए इस मुद्दे पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है.
Kerala चुनाव 2026: Revanth Reddy का बड़ा आरोप, BJP–CPI(M) के बीच ‘सीक्रेट डील’
2 Apr, 2026 08:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम: तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने केरल में चुनाव प्रचार तेज कर दिया है. उन्होंने भाजपा (BJP) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीआई-एम) के बीच 'गुप्त समझौते' का आरोप लगाया है और वोटरों को वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) का समर्थन न करने की चेतावनी दी है.
वट्टियूरकावु में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) उम्मीदवार के लिए प्रचार करते हुए रेड्डी ने दीपा दास मुंशी और कांग्रेस उम्मीदवार केएस सबरीनाथन के साथ एक रोड शो में हिस्सा लिया.
उन्होंने दावा किया कि भाजपा और आरएसएस, सीपीआई (एम) और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का इस्तेमाल करके केरल में पैर जमाने की कोशिश कर रहे हैं.
रेड्डी ने आरोप लगाया कि "पिनाराई विजयन और नरेंद्र मोदी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.", और कहा कि एलडीएफ को वोट देने से राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा को फायदा होगा.
'लक्ष्मण रेखा' का उदाहरण देते हुए रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस और यूडीएफ ने पहले भी भाजपा को केरल में आने से रोका है, लेकिन चेतावनी दी कि अब राजनीतिक व्यवस्था के जरिए उस रुकावट को 'तोड़ने' की कोशिश की जा रही है.
उन्होंने वोटरों से यूडीएफ का साथ देने की अपील की और कहा कि इससे निवेश आएगा, रोजगार पैदा होगा और युवाओं की चिंताओं का समाधान होगा.
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के असर पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों मलयाली परेशान हैं और उन्हें वापस लौटने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. उन्होंने केरल में बेहतर नौकरी के मौकों की जरूरत पर जोर दिया.
रेड्डी ने कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर भरोसा जताते हुए कहा कि उनका नेतृत्व केरल में विकास और स्थिरता पक्का करेगा.
उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ने की कम से कम उम्र 25 से घटाकर 21 करने के राहुल गांधी के प्रस्ताव का भी समर्थन किया और कहा कि युवा नेताओं को ज़्यादा राजनीतिक मौके मिलने चाहिए. उन्होंने कहा, "अगर 21 साल के आईएएस अधिकारी जिलों पर राज कर सकते हैं, तो उन्हें विधानसभाओं में भी जगह मिलनी चाहिए."
पिनाराई विजयन की केरल सरकार की आलोचना करते हुए रेड्डी ने उस पर रोजगार पैदा करने और निवेश लाने में नाकाम रहने का आरोप लगाया. उन्होंने इसकी तुलना तेलंगाना में विकास की कोशिशों से करते हुए दावा किया कि कांग्रेस की सरकार ने वहां विकास को बढ़ावा दिया है.
उन्होंने आगे आने वाले केरल विधानसभा चुनाव 2026 को एक अहम राजनीतिक लड़ाई बताया, जो 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले देश के राजनीतिक माहौल पर असर डालेगी.
अपने भाषण को हल्के-फुल्के अंदाज में खत्म करते हुए, उन्होंने एक मशहूर मलयालम फिल्म का डायलॉग 'नी पो मोने दिनेशा, नी पो मोने विजयन...' (चले जाओ, बेटा) बोला, जिससे भीड़ में खुशी की लहर दौड़ गई, और ऐलान किया कि केरल में "यूडीएफ का दौर" शुरू होने वाला है. केरल विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल, 2026 को एक ही फेज में होने वाला है.
मायावती की चुनावी शुरुआत लखनऊ से, बीजेपी और सपा के बीच BSP के लिए चुनौतीपूर्ण रास्ता
1 Apr, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को भले ही अभी 1 साल से ज्यादा का समय बचा हुआ है, लेकिन सभी दलों ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी है. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने हाल ही में नोयडा के दादरी से ही पश्चिम सियासत में हलचल पैदा कर दी है. यहीं से चुनावी अभियान की शुरुआत भी मानी जा रही है. यूपी की सत्ता से कई सालों से दूर रहने वाली मायावती की पार्टी भी अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए रणभूमि में उतरने की कोशिश कर रही हैं. मायावती 14 अप्रैल को लखनऊ से चुनावी हुंकार की शुरुआत करेंगी. विपक्षी दलों के साथ ही सीएम योगी और पीएम मोदी भी तैयारियों में जुट गए हैं. यानी चुनाव के लिए भले ही अभी काफी समय बचा है लेकिन सभी दलों ने यूपी की सियासत में चुनावी रंग घोल दिया है.
इस बार का मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) के लिए काफी अहम रहने वाला है. क्योंकि मायावती अपनी खोई हुई जमीन को वापस लाने के प्रयास में हैं. मायावती इस साल मिशन-2027 के आगाज के लिए अपना प्लान तैयार कर लिया है. आने वाले 14 अप्रैल को डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर लखनऊ में भव्य कार्यक्रम आयोजित होने वाला है. यहां पर लाखों की तादात में लोगों के जुटने की उम्मीद है. मायावती यहीं से अपनी सियासी ताकत का एहसास भी कराना चाहती हैं.
14 अप्रैल को लखनऊ से मिशन-2027 का आगाज
मायावती का रिकॉर्ड रहा है कि वे हर साल विधानसभा चुनाव से करीब 1 साल पहले चुनावी तैयारियों में जुट जाती हैं. ऐसे में 14 अप्रैल को होने वाले कार्यक्रम को मिशन-2027 का आगाज माना जा रहा है. यूपी की सियासत में मायावती की सक्रियता कम होने का सभी पार्टियों ने खूब फायदा उठाया. इसको देखते हुए मायावती ने अपने खिसकते वोटरों को मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है. अगर मायावती अपने कोर वोटरों को साधने में सफल नहीं हुईं, तो उनके लिए काफी नुकसान होगा. हालांकि, मायावती के वोटरों पर भाजपा, कांग्रेस से लेकर समाजवादी पार्टी तक की निगाहें टिकी हुई हैं.
अकेले चुनाव लड़ेंगी मायावती
हालांकि मायावती ने साफ किया है कि वे किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगी. यानी वे आने वाले विधानसभा चुनाव में अकेले ही मैदान में उतरेंगी. मायावती का सबसे ज्यादा फोकस पश्चिमी यूपी है. उनका मानना है कि अगर इन इलाकों में दलित और मुसलमान के वोटों पर अगर कांग्रेस और सपा में से किसी ने सेंध लगा दिया, तो बसपा के लिए काफी बड़ा झटका होगा. क्योंकि काफी समय से सपा और कांग्रेस ने मुसलमानों और दलितों पर अपना विशेष फोकस रखा है. दोनों पार्टियों की रैलियों में भी जय भीम के नारे लगाते सुनाई देते हैं. फिलहाल, यूपी की सियासत में अखिलेश यादव के चुनावी बिगुल बजते ही मायावती भी एक्टिव हो गई हैं. अब देखना यह होगा कि आखिर अब मायावती अपनी साख बचाने के लिए क्या रणनीति अपनाती हैं.
बिहार CM के चयन पर मंथन, मनोज तिवारी ने सस्पेंस खत्म होने की तारीख बताई
1 Apr, 2026 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Bihar Politics मनोज तिवारी ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सब कुछ सामान्य है और 10 अप्रैल तक राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला कर लिया जाएगा। वहीं, नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। वे 10 अप्रैल को राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे।मंगलवार देर रात मनोज तिवारी औरंगाबाद से लौटते हुए रोहतास जिले के डेहरी पहुंचे, जहां एनडीए कार्यकर्ताओं ने उन्हें पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र देकर स्वागत किया। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों के चलते वे अभी नए मुख्यमंत्री का नाम सार्वजनिक नहीं कर सकते। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि 10 अप्रैल तक इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।
नीतीश का बदल जायेगा पता!
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है और अब वे 1 अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास भी छोड़ने की तैयारी में हैं। इसी बीच चर्चा है कि पद छोड़ने पर उनका आवासीय पता भी बदल जाएगा। नीतीश कुमार 1 अणे मार्ग स्थित सरकारी आवास छोड़कर 7 सर्कुलर रोड स्थित नए आवास में शिफ्ट होंगे। मंगलवार को उन्होंने अपने संभावित नए आवास का निरीक्षण भी किया। सूत्रों के अनुसार, इस आवास से नीतीश कुमार का भावनात्मक जुड़ाव भी है। वे अक्सर सुबह यहां आते रहे हैं और परिसर में लगे बोधि वृक्ष को नमन करते हैं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री आवास खाली करने के बाद वे दोबारा 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट होना चाहते हैं।
नीतीश का ‘लकी’ आवास 7 सर्कुलर रोड
7 सर्कुलर रोड का आवास राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जाता है। 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान नीतीश कुमार इसी आवास में रह रहे थे। उस समय उन्होंने महागठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और बाद में गठबंधन के सहयोग से बिहार में सरकार बनाई। उस जीत के बाद उनकी राजनीतिक वापसी को भी इसी आवास से जोड़ा जाता है, जिससे इस पते का उनके लिए खास महत्व माना जाता है।
कौन बनेगा अगला मुख्यमंत्री?
बिहार में नीतीश कुमार के बाद अगले मुख्यमंत्री को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर बीजेपी के भीतर मंथन जारी है। एनडीए सूत्रों के अनुसार, अगला मुख्यमंत्री ऐसा होगा जो नीतीश कुमार की पसंद का हो। र्टी सूत्रों का कहना है कि बीजेपी अपनी परंपरा के अनुसार इस बार भी किसी नए चेहरे पर दांव लगा सकती है। हालांकि, संभावित नामों में बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार और दीघा विधायक संजीव चौरसिया के नामों पर चर्चा हो रही है।
सीट बढ़ोतरी का असर: उत्तर भारत को फायदा, दक्षिण राज्यों में चिंता
1 Apr, 2026 06:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। लोकसभा की कुल सीटों की संख्या में 50 फीसदी तक की वृद्धि करने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस ने इस कदम को अन्यायपूर्ण और दक्षिण भारत के हितों के खिलाफ बताया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर दावा किया है कि मोदी सरकार महिला आरक्षण को लागू करने की पृष्ठभूमि में लोकसभा का आकार बढ़ाने के लिए एक विधेयक लाने की तैयारी कर रही है।
मीडियचा रिपोर्ट के मुताबिक जयराम रमेश ने कहा कि प्रस्ताव के तहत लोकसभा की कुल सीटों में 50फीसदी की वृद्धि की जाएगी, जिसका सीधा असर हर राज्य को आवंटित सीटों पर पड़ेगा। कांग्रेस का तर्क है कि इससे उत्तरी राज्यों को तो भारी फायदा होगा, लेकिन दक्षिणी, पश्चिमी और पूर्वोत्तर के छोटे राज्यों का संख्याबल कमजोर हो जाएगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि अनुपात फिलहाल नहीं बदल सकता है लेकिन इसके गहरे निहितार्थ हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
रमेश ने कहा कि लोकसभा में कई राज्यों के मौजूदा संख्याबल के अंतर में किसी भी तरह की वृद्धि से दक्षिण भारतीय राज्यों को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 80 सीट हैं और तमिलनाडु में 39 सीट हैं। प्रस्तावित विधेयक के साथ यूपी की लोकसभा सीट की संख्या बढ़कर 120 हो जाएगी जबकि तमिलनाडु में अधिकतम 59 सीट हो पाएंगी। इसी तरह केरल में लोकसभा की 20 सीट बढ़कर 30 हो जाएंगी, जबकि बिहार में 40 से बढ़कर 60 सीट हो जाएंगी। कुल मिलाकर दक्षिणी राज्यों को 66 सीट का फायदा होगा जबकि उत्तरी राज्यों को 200 सीट का फायदा होगा। रमेश ने दावा किया कि पीएम मोदी एकतरफा कानून तैयार कर रहे हैं जिससे दक्षिण, पूर्वोत्तर और पश्चिम के छोटे राज्यों को नुकसान होगा।
गृह मंत्री शाह का ममता सरकार पर बड़ा हमला, 14 आरोपों के साथ जारी की चार्जशीट
1 Apr, 2026 05:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम बंगाल में होने जा रहे चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल में काफी गर्मागर्मी देखने को मिल रही है। केंद्र सरकार और ममता सरकार के बीच राज्य की सत्ता पाने को लेकर लगातार टकराव जारी है। इसी कड़ी में अब गृह मंत्री अमित शाह ने टीएमसी पर नया हमला किया है। शाह ने ममता सरकार के खिलाफ एक चार्जशीट जारी कर दी है जिसमें 14 आरोप शामिल है। इसमें भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था बिगाड़ने से जुड़े आरोपों के अलावा महिला सुरक्षा से जुड़ी चितांए और अन्य कई आरोप शामिल है।
बंगाल सीमा के जरिए देश में घुसते है घुसपैठिए - शाह
कोलकाता में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां से घुसपैठिए भारत में प्रवेश करके पूरे देश में अशांति फैला रहे है। शाह ने बंगाल की सीमा के जरिए देश में हो रही घुसपैठ को राष्ट्रिय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बताया है। शाह ने कहा कि देश की सुरक्षा इन चुनावों के नतीजों से जुड़ी है। घुसपैठियों को देश में घुसने से रोकने का सिर्फ यह एक ही रास्ता बचा है। गृह मंत्री ने आगे कहा कि बीजेपी ने टीएमसी की खिलाफ जनता की शिकायतों को आवाज देने का फैसला लिया है। शाह ने अपने कार्यक्रम का एजेंडा ममता सरकार के 15 साल के शासन के खिलाफ चार्जशीट पेश करना बताया।
टीएमसी के 15 साल के काले कारनामों का संकलन यह चार्जशीट
गृह मंत्री ने चार्जशीट के बारे में बात करते हुए कहा कि यह टीएमसी द्वारा पिछले 15 साल में किए गए काले कारनामों का एक संकलन है। यह एक ऐसे शासन की कहानी है जिसने सोनार बांग्ला का वादा करके सिंडिकेट राज स्थापित किया और इसके जरिए राज्य की जनता का शोषण किया। शाह ने आगे कहा कि ऊपर से नीचे तक यह सिंडिकेट अपराधी जनता को परेशान कर रहे है। गृह मंत्री ने आगे कहा बंगाल को अब प्रगति और विकास की उस तेज रफ्तार से कदम से कदम मिलाना होगा जो इस समय पूरे देश में छाई हुई है, एक ऐसी यात्रा जिसकी पहचान भय के आतंक से मुक्ति है। शाह ने कहा कि यह चुनाव उस निर्णायक चुनाव का अवसर है।
बंगाल में घुसपैठियों को सक्रिय रूप से संरक्षण
गृह मंत्री ने ममता सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बंगाल अब एक ऐसी जगह बन गया है जहां घुसपैठियों को सक्रिय रूप से संरक्षण दिया जाता है। सरकार ने राजनीतिक तुष्टीकरण को अपना मुख्य उद्देश्य बना लिया है। शाह ने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल ने कई सालों तक कम्युनिस्ट शासन का कहर झेलने के बाद सोनार बांग्ला के सपने से प्रेरित होकर इस सरकार को वोट दिया था। लेकिन आज वही लोग कह रहे है कि कम्युनिस्ट शासन इससे बेहतर था।
केरल में सियासी वार: भाजपा अध्यक्ष ने राहुल गांधी पर लगाया ‘मैच फिक्सिंग’ का आरोप
1 Apr, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केरल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। सभी प्रमुख दल जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने विपक्षी दलों पर मिलीभगत और जनता के लिए काम न करने का आरोप लगाया, जिससे राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।
रोडशो के दौरान नितिन नवीन ने राहुल गांधी पर लगाए आरोप
कन्नूर में आयोजित रोडशो के दौरान नितिन नवीन ने राहुल गांधी के उस आरोप को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि बीजेपी और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के बीच समझौता है। नवीन ने पलटवार करते हुए कहा कि असल में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल ही मैच फिक्सिंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले से ही चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश की जाती रही है और यह प्रवृत्ति यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (UPA) सरकार के समय भी देखी गई थी। उनके अनुसार, इन दलों ने केरल के लोगों के लिए कोई ठोस काम नहीं किया और केवल राजनीतिक लाभ के लिए काम किया है।
सबरीमला मंदिर विवाद को लेकर साधा निशाना
सबरीमला मंदिर विवाद को लेकर भी बीजेपी नेता ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी सहित कांग्रेस नेतृत्व ने इस संवेदनशील धार्मिक मुद्दे का राजनीतिकरण किया। नवीन ने कहा कि इस पूरे मामले के लिए कांग्रेस और राज्य की पूर्व सरकारें जिम्मेदार हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि बीजेपी सत्ता में आने पर इस मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से समयबद्ध जांच कराएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। इस बयान ने धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बहस को और तेज कर दिया है।
केरल की जनता अब बदलाव के लिए तैयार - नवीन
अपने संबोधन में नितिन नवीन ने यह भी कहा कि केरल की जनता अब बदलाव के लिए तैयार है और बीजेपी को एक मजबूत विकल्प के रूप में देख रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक एलडीएफ और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने राज्य के विकास को बाधित किया और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। नवीन ने कहा कि पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र भी इन सरकारों की नीतियों के कारण प्रभावित हुए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य में नई विकास यात्रा शुरू हो सकती है और जनता अब इस बदलाव को अपनाने के लिए तैयार है।
केरल चुनाव: CM रेखा गुप्ता ने अल्पुझा और वायकॉम में किया रोड शो
1 Apr, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मंगलवार को केरल विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए पहुंची. इस दौरान उन्होंने वायकॉम और अल्पुज्जा विधानसभा क्षेत्रों से पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में वोट की अपील की.उन्होंने कहा कि मोदी जी के विकसित भारत का रास्ता विकसित केरलम से होकर गुज़रता है, जब अलाप्पुझा के किसान और मछुआरे समृद्ध होंगे, जब युवा आत्मनिर्भर बनेंगे और जब हर परिवार सुरक्षित महसूस करेगा तभी विकास का असली मतलब सामने आएगा. केरलम की मौजूदा हालत सालों से चली आ रही नीतिगत पंगुता, कमज़ोर शासन और राजनीतिक अवसरवादिता का नतीजा है. सच्चाई साफ़ है, यूडीएफ और एलडीएफ ने केरलम को कर्ज़ के ऐसे बोझ तले दबा दिया है, जिसका भारी असर हर घर पर पड़ रहा है.मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि केरलम को अब एक नई दिशा की ज़रूरत है एक ऐसी दिशा जो 'सेवा' के प्रति समर्पित हो, 'सुशासन' से निर्देशित हो और विकास के लिए कटिबद्ध हो. मैं आप सभी से विकसित केरलम के इस मिशन में शामिल होने का आग्रह करती हूँ. कमल का बटन दबाएँ और एम. जे. जॉब जी को निर्णायक जीत का आशीर्वाद दें.
वायकॉम की जनसभा में सीएम ने दिया दिल्ली का उदाहरण
यह धरती एकता, साहस और बदलाव की प्रतीक है और आज यह एक नई दिशा का आह्वान करती ह, हर परिवार के लिए विकास, अवसर और गरिमा. दिल्ली का उदाहरण देते हुए सीएम रेखा गुप्ता ने केरल की जनसभा में कहा कि फ़र्क देखिए, 27 सालों तक, दिल्ली भ्रष्टाचार, देरी और राजनीतिक ड्रामे में फँसी रही. महज़ एक साल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, दिशा बदल गई है. काम दिखाई दे रहा है, बुनियादी ढाँचा बढ़ रहा है, सार्वजनिक परिवहन बेहतर हो रहा है और शासन पारदर्शी तथा जवाबदेह बन रहा है. यह फ़र्क है बिना जवाबदेही वाली राजनीति और प्रतिबद्धता के साथ परिणाम देने वाले शासन के बीच.
केरलम अब इंतजार नहीं कर सकता: सीएम रेखा गुप्ता
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि केरलम अब उसी मोड़ पर खड़ा है. यह इंतज़ार नहीं कर सकता. यह देरी का एक और दौर बर्दाश्त नहीं कर सकता. इसे सेवा, सुशासन और विकास की ज़रूरत है. विकसित केरलम के लिए एनडीए का घोषणापत्र एक स्पष्ट मार्ग प्रस्तुत करता है.वास्तविक विकास और निवेश, युवाओं के लिए रोज़गार और कौशल के अवसर, एक सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य, किफायती जीवन और जीवन की बेहतर गुणवत्ता, आधुनिक बुनियादी ढाँचा और हर मलयाली के लिए समृद्धि की बात करता है.इसलिए आप लोग कमल का बटन दबाएँ और के. अजित को अपना आशीर्वाद दें और वाइकोम को विकसित केरलम की ओर ले जाने वाली यात्रा का नेतृत्व करने दें.
राहुल गांधी के नेतृत्व में केरल में कांग्रेस का चुनाव अभियान तेज
1 Apr, 2026 01:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Kerala Election 2026: कांग्रेस का पूरा फोकस केरल विधानसभा चुनाव पर है। इसका कारण यह है कि गांधी परिवार की प्रतिष्ठा सीधे तौर पर इस चुनाव से जुड़ी हुई है। इसके चलते लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव संगठन के.सी. वेणुगोपाल व वरिष्ठ पर्यवेक्षक सचिन पायलट ने केरल में डेरा डाल रखा है, जबकि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी बुधवार को असम में तीन सभाएं करेंगी।
दरअसल, केरल के वायनाड से कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी सांसद हैं। इससे पहले इसी सीट से राहुल गांधी भी सांसद रह चुके हैं। दोनों नेताओं के केरल से जुड़ाव होने के चलते गांधी परिवार की साख इन चुनावों में दांव पर लगी हुई है। यही वजह है कि राहुल गांधी पिछले दो दिन से केरल के दौरे पर हैं। वेणुगोपाल और सचिन पायलट ने भी केरल में डेरा डाल रखा है। इनके अलावा कई अन्य वरिष्ठ नेता लगातार केरल का दौरा कर रहे हैं। गौरतलब है कि केरल में कांग्रेस को एलडीएफ के नेतृत्व वाली पिनाराई विजयन सरकार के दस साल की एंटी-इंकबेंसी पर भरोसा है।
मुस्लिम-इसाई समुदाय की निर्णायक भूमिका
केरल में वैसे तो करीब 50 फीसदी से ज्यादा हिंदू वोटर हैं, पर मुस्लिम और इसाई मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं। राज्य में मुस्लिम समुदाय करीब 25 फीसदी तो इसाई समुदाय करीब 15 फीसदी से अधिक तक बताया जाता है। इन दोनों समुदाय के वोटर्स करीब 40 फीसदी से ज्यादा हैं। यही वजह है कि कांग्रेस का यहां इंडियन मुस्लिम लीग से गठबंधन होता है, जिसके चलते कांग्रेस को मुस्लिम समुदाय के वोट मिलते रहे हैं। वहीं एलडीएफ और भाजपा की रणनीति में इसाई समुदाय के वोटर्स में सेंध लगाना शामिल है।
केरल में राहुल गांधी का एलडीएफ पर हमला
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को केरल में सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि लेफ्ट और भारतीय जनता पार्टी के बीच एक असामान्य गठजोड़ बन गया है। उनके मुताबिक, इस बार का विधानसभा चुनाव सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि विचारधाराओं की सीधी टक्कर है।
यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के प्रमुख प्रचारक के रूप में कन्नूर पहुंचे गांधी ने दिन की शुरुआत स्थानीय नेताओं के साथ नाश्ते पर चर्चा से की। इसके बाद उन्होंने जिले के विभिन्न इलाकों से आए उम्मीदवारों और समर्थकों को संबोधित करते हुए पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की।
असम चुनाव 2026: पीएम मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
1 Apr, 2026 01:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
PM Modi in Assam: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान के तहत बुधवार को असम पहुंचें। वहां उन्होंने धेमाजी के गोगामुख में एक रैली को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि असम के चुनाव की घोषणा के बाद ये मेरी पहली जनसभा है। ये जो सामने जनसमुद्र है, युवाओं का ये उत्साह, बहनों-बेटियों का ये आशीर्वाद, ये प्यार इस बात की खुली घोषणा है कि इस बार हैट्रिक पक्की है। पीएम मोदी ने कहा, 'आप सबके आशीर्वाद से मुझे प्रधानमंत्री के रूप में हैट्रिक बनाने का अवसर मिला। आप सबके आशीर्वाद से इस मैदान में भी हैट्रिक लगाने का अवसर मिला है, मैं यहां तीसरी बार आया हूं। और आपके आशीर्वाद से असम में सरकार भी हैट्रिक बनाने वाली है।'
कांग्रेस पर पीएम मोदी का हमला
पीएम ने कहा कि असम चुनाव एक विकसित असम के साथ एक विकसित भारत बनाने के बारे में है। उन्होंने कहा कि BJP-NDA सरकार की हैट्रिक पक्की है। कांग्रेस की हार की हैट्रिक पक्की है। मोदी ने कहा कि कांग्रेस के राजकुमार चुनाव में हार का शतक बनाएंगे। पीएम ने कहा कि बाढ़-मुक्त असम के लिए, BJP ने ₹18,000 करोड़ से ज्यादा की लागत से 'बाढ़ मुक्त असम मिशन' शुरू किया। युवाओं ने सिर्फ BJP के सुशासन को देखा है, न कि उस अंधेरे को जिसे असम को कांग्रेस के शासन में झेलना पड़ा था, जब चर्चा का विषय सिर्फ बम और हिंसा हुआ करते थे। BJP के शासन में, हजारों युवाओं ने हथियार और उग्रवाद छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की। अब असम से आने वाली खबरें प्रगति और विकास से भरी होती हैं।उन्होंने कहा कि असम को प्रकृति ने बहुत कुछ दिया है, असम के पास संसाधनों की कभी कमी नहीं रही है। लेकिन कांग्रेस ने सत्ता के लिए असम के समाज को भी बांटा और ब्रह्मपुत्र के दो किनारों को भी कभी जुड़ने नहीं दिया। कांग्रेस ने 60-65 साल में ब्रह्मपुत्र पर सिर्फ 3 ही पुल बनाए। पुलों के अभाव में कितने ही लोगों को हमें खोना पड़ा। डबल इंजन सरकार ने इस परेशानी को समझा और 10-11 वर्षों में ही ब्रह्मपुत्र पर 5 बड़े ब्रिज पूरे किए।
कांग्रेस के लिए परिवार पहले
पीएम मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा, 'कांग्रेस के लिए हमेशा पावर की राजनीति और अपना परिवार ही पहले रहा है। दिल्ली में एक परिवार और एक परिवार यहां भी है। कांग्रेस के लिए इन्हीं परिवारों का हित सर्वोपरि है। कांग्रेस ने दशकों तक सरकारें चलाई हैं, लेकिन आप लोगों के स्वास्थ्य पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। 6-7 दशक में असम में सिर्फ 6 मेडिकल कॉलेज बन पाए थे। आज असम में 14 मेडिकल कॉलेज हैं और 10 मेडिकल कॉलेज पर काम चल रहा है।'
UCC असम के लिए जरूरी
पीएम मोदी ने कहा, 'असम में Uniform Civil Code लागू करना और हमारे आदिवासी समाज, Sixth Schedule Area की संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखना, असम की संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखना...ये असम की पहचान बचाने के लिए बहुत बड़ी घोषणाएं हैं।'
'एक समय था जब चाय की होती थी चर्चा'
मोदी ने कहा कि एक समय था, जब दुनिया में असम की चर्चा चाय के लिए होती थी। अब असम को दुनिया, चाय के साथ-साथ चिप से भी पहचानेगी। वो दिन दूर नहीं, जब असम के सेमीकंडक्टर प्लांट से चिप का उत्पादन शुरू हो जाएगा। ये असम को आधुनिक टेक्नोलॉजी के एक बहुत बड़े हब के रूप में विकसित करेगा।
'आपको मोदी की गारंटी'
पीएम ने कहा, 'आने वाले समय में फोन हों, गाड़ियां हों, टीवी, फ्रिज हों, ये सभी सामान असम की चिप से ही चलने वाले हैं। यही विकसित असम का हमारा रोडमैप है। मैं आपको भरोसा देता हूं कि आप यहां फिर से BJP सरकार बनाइए, असम का और तेजी से विकास होगा। और ये आपको मोदी की गारंटी है!' उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस असम में विदेशियों को बसाना चाहती है और यहां की मूल संतानों को अल्पसंख्यक बनाना चाहती है। BJP-NDA सरकार... किसानों, आदिवासियों और हमारे जंगल की जमीन को घुसपैठियों के कब्जे में नहीं रहने देगी। अवैध कब्जे के खिलाफ, BJP-NDA सरकार की कार्रवाई जारी रहेगी। असमिया शान और पहचान बनी रहेगी... ये मोदी की गारंटी है।
असम की जनता को क्या मिला?
पीएम ने कहा, 'लखपति दीदी अभियान से असम की बहनों को बहुत लाभ हुआ है। अभी तक असम की करीब 3 लाख बहनें लखपति बैदेउ बन चुकी हैं। कल असम भाजपा ने ऐलान किया है कि अब डबल इंजन सरकार 40 लाख बहनों को लखपति बैदेउ बनाने का प्रयास करेगी।' इसके अलावा पीएम ने कहा कि पहले, 22 लाख से ज्यादा परिवारों को पक्के घर मिले। BJP के घोषणापत्र में कहा गया है कि जिन लोगों को PM आवास योजना के तहत घर नहीं मिला, उन्हें पक्का घर जरूर मिलेगा। भविष्य में, 15 लाख और परिवारों को पक्के घरों की गारंटी दी जाएगी। पीएम ने कहा कि गरीब परिवारों को KG से लेकर PG तक मुफ्त शिक्षा मिलेगी।
ADR रिपोर्ट का खुलासा, असम के विधायक हुए अमीर—संपत्ति में भारी उछाल
1 Apr, 2026 12:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Assam Adr Report: असम में 126 विधानसभा सीटों पर एक चरण में 9 अप्रैल को वोटिंग होगी। 4 मई को वोटों की गिनती होगी। इससे पहले एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दोबारा चुनाव लड़ रहे विधायकों की संपत्ति को लेकर खुलासा किया गया है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के मुताबिक पिछले पांच सालों में दोबारा चुनाव लड़ रहे विधायकों की संपत्ति में भारी वृद्धि हुई है।
83 विधायक दोबारा लड़ रहे चुनाव
एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 83 विधायक दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं। 2021 में इन विधायकों की औसत संपत्ति 4.17 करोड़ रुपये थी, जो कि 2026 तक यह बढ़कर 7.52 करोड़ रुपये हो गई है। दोबारा चुनाव लड़ रहे विधायकों की संपत्ति में 80 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
यूपीपीएल के विधायक की बढ़ी सबसे ज्यादा संपत्ति
यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) का एक विधायक दोबारा चुनाव लड़ रहा है। इस विधायक की संपत्ति में सबसे तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है, जो कि 222.8 प्रतिशत है। दरअसल, पिछले चुनाव में यह पार्टी एनडीए का हिस्सा थी, लेकिन इस बार अकेले चुनाव लड़ रही है।
यूपीपीएल का अलग होना एनडीए के लिए झटका माना जा रहा है। पार्टी ने पिछले चुनाव में 7 सीटें जीती थीं और एजीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, क्योंकि भाजपा के पास अकेले दम पर बहुमत नहीं था।
राजधानी में सियासी हलचल, देवेन्द्र यादव ने एलजी संधू से की भेंट
1 Apr, 2026 11:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू से मुलाकात की। इस दौरान यादव ने दिल्ली के विकास, किसानों के लिए कृषि भूमि के सर्किल रेट बढ़ाने, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, कानून व्यवस्था, प्रदूषण, जल संकट और झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों को उजाड़ने जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चिंता व्यक्त की। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने मंगलवार (31 मार्च) को दिल्ली के नवनियुक्त उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू से औपचारिक मुलाकात की। इस दौरान यादव ने उन्हें पर्यावरण का प्रतीक पौधा भेट कर उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकताएं अलग हो सकती हैं लेकिन एलजी को दिल्ली के विकास कार्य करने चाहिए। यादव ने उम्मीद जताई कि भविष्य में राजधानी को विकसित दिल्ली बनाने के लिए नवनियुक्त एलजी अग्रणी भूमिका निभाएंगे। देवेन्द्र यादव ने उपराज्यपाल से मुलाकात के दौरान दिल्ली और यहां के लोगों की परेशानियों को लेकर चर्चा भी की।उन्होंने कांग्रेस का दिल्ली की सत्ता संभालने और राजधानी को विकसित बनाने के अनुभव के तहत दिल्ली की बदहाली को दूर करके खुशहाल बनाने के लिए सकारात्मक सुझाव भी दिए। उपराज्यपाल ने भविष्य में दिल्ली के नागरिकों के हितों के संरक्षण और दिल्ली के विकास को ध्यान में रखकर यहां की विकास योजनाओं पर काम करने का आश्वासन दिया। कांग्रेस नेता ने उपराज्यपाल से चर्चा करते हुए मांग की कि कृषि भूमि के सर्किल रेट को 55 लाख रुपए से 10 करोड़ रुपए बढ़ाकर किसानों को दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण गांवों के किसानों के पास जमीन एकमात्र आजीविका का सहारा होता है, और जमीन अधिग्रहण के बाद ग्रामीणों के रोजगार भी खत्म हो जाते हैं। देवेन्द्र यादव ने एलजी से दिल्ली में बेरोजगारी और महंगाई पर भी बात की। इसके साथ ही दिल्ली में बदहाल कानून व्यवस्था, महिलाओं के साथ बढ़ते अपराध, खुलेआम गोलीबारी, किडनेपिंग और बढ़ते नशे के कारोबार पर भी चिंता जताई। उन्होंने इनके समाधान के लिए तुरंत कार्यवाही करने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि दिल्ली में महिलाओं और लड़कियों के साथ हर दिन हो रहे बलात्कार, यौन शोषण और अपहरण की घटनाएं दशहत फैला रही हैं, जिस पर नियंत्रण पाने में पुलिस लगभग नाकाम साबित हो रही है। इसके साथ ही कांग्रेस नेता ने उपराज्यपाल से दिल्ली में जल संकट, वायु प्रदूषण, जहरीली यमुना की सफाई न होना, नालों की गाद निकालने, जल भराव, ध्वस्त सड़क और दिल्ली के लिए अपर्याप्त डीटीसी बसें जैसी ज्वलंत समस्याओं के समाधान के लिए भी चर्चा की। उन्होंने कहा पिछले एक दशक में सरकारों की नाकामियों के कारण दिल्ली बदहाल हो चुकी है।
कांग्रेस ने उठाई चर्चा की मांग, कहा—पश्चिम एशिया संकट का हल निकले
1 Apr, 2026 11:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध से भारत पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर संसद में भारी हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार से लोकसभा में चर्चा की मांग की, लेकिन सरकार की ओर कांग्रेस को कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला।संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस मुद्दे पर संसद में प्रधानमंत्री और संबंधित मंत्रियों द्वारा पहले ही इस विषय पर विस्तृत बयान दिए जा चुके हैं और वे निरंतर विपक्ष के साथ संवाद के लिए तैयार हैं।
मनीष तिवारी ने की चर्चा की मांग
दरअसल, दोपहर में शून्यकाल शुरू होते ही संसद में कांग्रेस की ओर से यह मुद्दा उठाया गया, जिसमें कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा स्पीकर से मिडिल ईस्ट पर चर्चा करने की अनुमति का आग्रह किया।मनीष तिवारी ने कहा, "व्यापार सलाहकार समिति ने इस मुद्दे पर चर्चा की थी। पश्चिम एशिया की स्थिति और एलपीजी, कच्चे तेल और उर्वरकों से संबंधित संकट पर चर्चा होनी चाहिए।"
संक्षिप्त रूप से स्थगित हुई सदन की कार्यवाही
विपक्षी सदस्यों ने अपनी मांग को दोहराया, जिससे लोकसभा में हंगामेदार दृश्य उत्पन्न हो गए, जिसके कारण सदन की कार्यवाही को संक्षिप्त रूप से स्थगित करना पड़ा।
सरकार बातचीत के लिए तैयारी लेकिन...
वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार उनसे बातचीत करने के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मोदी के अलावा विदेश मंत्री एस जयशंकर और तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी दोनों सदनों में इस मुद्दे पर बयान दिए हैं।रिजिजू ने कहा, "जब भी कोई संकट आता है, हम सब एक साथ होते हैं, और इसमें कोई राजनीति नहीं होती।" उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने चिंताओं को दूर करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई थी।
प्रियंका गांधी ने बताया क्यों जरुरी है चर्चा?
वहीं, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस संकट को राजनीति से ऊपर उठकर एकजुटता से सुलझाने की बात कही। प्रियंका गांधी ने लोकसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट संकट पर चर्चा आवश्यक है क्योंकि आने वाले दिनों में संकट और भी गंभीर हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरा देश इस मसले पर एकजुट है, लेकिन पश्चिम एशिया संकट पर राजनीति नहीं, समस्या का समाधान ढूंढना जरूरी है। इसके लिए संसद में चर्चा होनी चाहिए ताकि सुझाव दिए जा सकें और समाधान निकाला जा सके।
किरण रिजिजू का राहुल गांधी पर हमला, बोले—उग्रवाद से जुड़े लोगों के साथ दिखते हैं मंच पर
1 Apr, 2026 10:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने नक्सलवाद, एफसीआरए संशोधन बिल विवाद और प्रधानमंत्री के बयान को लेकर कहा कि कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी को अपने रुख पर आत्ममंथन करना चाहिए। किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी अक्सर उन लोगों के साथ मंच साझा करते नजर आते हैं, जिन पर वामपंथी उग्रवाद फैलाने के आरोप लगते रहे हैं। उनका उठना-बैठना उग्रवाद फैलाने वाले लोगों के साथ होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब खुद कांग्रेस के कई कार्यकर्ता नक्सलवाद और वामपंथी उग्रवाद की हिंसा में मारे गए हैं, तो पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख क्यों नहीं अपनाता?
उन्होंने कहा, अब समय आ गया है कि कांग्रेस के कार्यकर्ता खुद राहुल गांधी और सोनिया गांधी से सवाल पूछें कि आखिर वे ऐसे लोगों के साथ क्यों खड़े दिखाई देते हैं, जिनका संबंध उग्रवाद से जोड़ा जाता है।
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस के उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा है कि सरकार के पास कोई काम नहीं है और अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, रुपए या अर्थव्यवस्था से ज्यादा कांग्रेस और राहुल गांधी की साख गिर रही है।
किरेन रिजिजू ने कहा कि देश की छवि को नुकसान नहीं हो रहा है, क्योंकि भारत के पास मजबूत नेतृत्व है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि कई चुनौतियों के बावजूद देश को नियंत्रण में रखा गया है।
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