राजनीति
पीएम मोदी के बयान पर अखिलेश यादव का पलटवार, कहा – ‘उम्र और पद का मान करना हमारे संस्कारों में है’
29 Mar, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शनिवार, 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया। वहीं इस मौके पर उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) पर जमकर निशाना साधा। दरअसल पीएम मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि सपा ने इस एयरपोर्ट का काम रुकवा दिया था और पहले नोएडा को अपनी लूट का एटीएम बना रखा था। पीएम के इन आरोपों पर सपा मुखिया अखिलेश यादव की तुरंत प्रतिक्रिया सामने आई है। बता दें कि अखिलेश यादव ने कहा कि उम्र और पद का मान करना हमारे संस्कारों में है और हमेशा रहेगा। दरअसल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह में पीएम मोदी ने विपक्षी दलों पर, खासकर सपा पर, तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उत्तर प्रदेश की पिछली सरकारों ने इस एयरपोर्ट की नींव नहीं पड़ने दी। वहीं पीएम मोदी ने विस्तार से बताया कि कैसे नोएडा को अंधविश्वास की वजह से अपने हाल पर छोड़ दिया गया था।
जानिए पीएम मोदी ने क्या कहा?
दरअसल पीएम मोदी ने याद दिलाया कि पहले के सत्ताधारी कुर्सी जाने के डर से नोएडा आने से कतराते थे। प्रधानमंत्री ने एक वाकये का जिक्र किया, जब वह पीएम बनने के बाद नोएडा आए थे, तब उस समय के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव डर के मारे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए थे। वहीं उन्होंने कहा कि उन्हें भी डराने की कोशिश की गई थी कि अभी-अभी प्रधानमंत्री बने हो, नोएडा मत जाओ। यह बयान सीधे तौर पर अखिलेश यादव की पिछली सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा था, जब वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।
अखिलेश यादव का पीएम मोदी को ‘मेहमान’ कहकर जवाब
वहीं अब प्रधानमंत्री मोदी के इस कड़े बयान के तुरंत बाद, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने पलटवार किया है। दरअसल उन्होंने सीधे पीएम मोदी का नाम लिए बिना कहा कि, “हमारे प्रदेश में मेहमान बनकर आए हैं, हम उनको मेहमान मानकर ही सम्मान सहित विदा करेंगे।” यह बयान पीएम मोदी के लिए एक तरह से सम्मानजनक लेकिन तीखा हमला था, जिसमें उन्हें राज्य का अतिथि कहकर संबोधित किया गया।
दरअसल अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, “जाने वालों की बात का बुरा नहीं माना जाता है, जब हार साक्षात दिखने लगती है तो इंसान को न अपने पद का मान रहता है, न ही अपने कथन पर नियंत्रण।” बता दें कि यह टिप्पणी सीधे तौर पर पीएम मोदी के बयानों को आगामी चुनावों में हार की आशंका से जोड़ रही थी।
राज्यसभा चुनाव में हार पर दुष्यंत का हमला, बोले- भूपेंद्र हुड्डा की टीम ने साथ नहीं दिया
29 Mar, 2026 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा की राजनीति में पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व पर सीधा और तीखा हमला बोला है। दरअसल राज्यसभा चुनाव के बाद से ही कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठ रहे थे, लेकिन अब चौटाला ने इन सवालों को और गहरा कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि हुड्डा की रणनीति पूरी तरह विफल रही, खासकर तब जब उनके ही 9 साथी उनका साथ छोड़ गए। चौटाला के मुताबिक, जब एक अनुभवी नेता, जो दस साल तक मुख्यमंत्री रहा हो, उसकी अपनी ही टीम के सदस्य साथ छोड़ दें, तो यह किसी भी बड़ी विफलता से कम नहीं है। यह सीधे तौर पर दिखाता है कि संगठन के अंदर भरोसे और एकजुटता की कितनी कमी है, और नेतृत्व कितना कमजोर पड़ गया है।
दरअसल दुष्यंत चौटाला ने भूपेंद्र हुड्डा की राज्यसभा चुनाव की रणनीति को विफल बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि चार बार के राज्यसभा चुनावों में, जब हुड्डा के बेटे ने चुनाव लड़ा था, तब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था। इस बार भी बीजेपी ने एक निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन देकर उसे जीत के अंतिम चरण तक पहुंचाने का काम किया। चौटाला ने इशारों-इशारों में यह भी जताने की कोशिश की कि राजनीतिक समीकरणों का फायदा अक्सर कांग्रेस को मिलता रहा है, लेकिन हुड्डा इस बार उन मौकों को भुनाने में पूरी तरह नाकाम रहे। यह सिर्फ एक चुनावी हार-जीत का मामला नहीं, बल्कि एक बड़े नेता की रणनीतिक चूक को उजागर करता है, जो उनकी दूरदर्शिता और राजनीतिक समझ पर सवालिया निशान लगाती है।
फैसला रद्द न होता तो कांग्रेस चुनाव हार चुकी होती
वहीं दुष्यंत चौटाला ने कांग्रेस की संभावित हार पर भी बात की। उन्होंने कहा, “इस बार भी किस्मत का साथ था, अगर बीजेपी का यह फैसला रद्द न होता तो कांग्रेस चुनाव हार चुकी होती।” यह बयान कांग्रेस के लिए एक चेतावनी की तरह है, जो बताता है कि पार्टी की स्थिति कितनी नाजुक है और वह कितनी मुश्किल से जीत पाई। चौटाला ने सबसे बड़ी विफलता के तौर पर नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा के साथ हुए घटनाक्रम को गिनाया। उनका कहना था कि जो व्यक्ति दस साल तक मुख्यमंत्री रहा हो, उसके अपने ही 9 सहयोगी उसे छोड़ दें, इससे बड़ी विफलता और क्या हो सकती है। यह सिर्फ बाहरी विरोध नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर गहरी असंतोष और नियंत्रण की कमी को दर्शाता है, जहां एक अनुभवी नेता अपने ही लोगों को साथ रखने में असफल रहा है, जिससे उनकी राजनीतिक साख पर भी असर पड़ा है।
प्रभावशाली नेता की असली ताकत उसकी अपनी टीम होती है
दुष्यंत चौटाला का यह बयान सीधे तौर पर भूपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े करता है। चौटाला ने कहा कि किसी भी बड़े और प्रभावशाली नेता की असली ताकत उसकी अपनी टीम होती है, उसके सहयोगी होते हैं। जब वही सहयोगी साथ छोड़ना शुरू कर दें, तो यह स्पष्ट संकेत है कि संगठन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है और नेतृत्व पर भरोसा कम हो रहा है। यह नेतृत्व की कमजोरी को दिखाता है, जहां विश्वास और एकजुटता की कमी है, और आंतरिक कलह बढ़ रही है। ऐसे हालात में पार्टी को आंतरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जो उसकी चुनावी संभावनाओं पर सीधा असर डालती हैं। चौटाला के अनुसार, यह स्थिति भूपेंद्र हुड्डा की पार्टी पर पकड़ ढीली होने और उनके नेतृत्व में भरोसे की कमी का परिणाम है, जो लंबे समय में पार्टी के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक होने पर कार्रवाई, कन्नूर में सूचना अधिकारी पर गिरी गाज
28 Mar, 2026 05:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कन्नूर । केरल के कन्नूर जिले में शनिवार को एक सूचना अधिकारी को निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई आचार संहिता लागू होने के दौरान लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) की एक शिकायत से जुड़ी विवादास्पद प्रेस विज्ञप्ति जारी करने के मामले में हुई है। जिला सूचना कार्यालय के एक अधिकारी ने इसे जारी किया था। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इस मामले ने केरल में सियासी सरगर्मी को और बढ़ा दिया है। मामले की जड़ें उस शिकायत से जुड़ी हैं, जिसमें एलडीएफ ने आरोप लगाया था कि उनके उम्मीदवार केवी सुवेश को यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) द्वारा चरित्र हनन का शिकार बनाया जा रहा है।
कांग्रेस ने साधा निशाना
एलडीएफ के निर्वाचन क्षेत्र सचिव एम. प्रकाशक ने यूडीएफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इस शिकायत से जुड़ी जानकारी के लीक होने के बाद यह विवाद उत्पन्न हुआ। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मार्टिन जॉर्ज ने जनसंपर्क विभाग पर राजनीतिक प्रचार में शामिल होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विभाग ने सियासी रूप से पक्षपाती संचार जारी कर नियमों का उल्लंघन किया है और पार्टी इस मामले को चुनाव आयोग के समक्ष उठाएगी।
जिलाधिकारी की कार्रवाई
इस विवाद के बाद कन्नूर के जिलाधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी अरुण के. विजयन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। एक आधिकारिक बयान में संबंधित अधिकारी ने स्वीकार किया कि केरल विधानसभा चुनाव 2026 से संबंधित एक शिकायत, जिसकी जांच के लिए अग्रेषित किया गया था, उसे बिना प्राधिकार के और जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही कन्नूर के जिला सूचना कार्यालय के माध्यम से समय से पहले मीडिया को जारी कर दिया गया था।
निर्वाचन नियमों का उल्लंघन
इस बयान में यह भी कहा गया कि अधिकारी की कार्रवाई लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 134 के तहत कर्तव्य का उल्लंघन है। इसने आधिकारिक मशीनरी की तटस्थता बनाए रखने के संबंध में चुनाव आयोग के निर्देशों का भी उल्लंघन किया है।
केरल विधानसभा चुनाव 2026 कब हैं?
केरल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान 9 अप्रैल को एक ही चरण में होगा, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को निर्धारित है। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 23 मई को समाप्त हो रहा है। 2021 के विधानसभा चुनावों में, LDF ने 99 सीटों के साथ सत्ता बरकरार रखी थी, जो एक ऐतिहासिक लगातार जीत थी। UDF ने 41 सीटें जीती थीं, जबकि NDA एक भी सीट जीतने में विफल रहा।
पश्चिम एशिया संकट को लेकर भारत की कूटनीतिक और रणनीतिक तैयारी पर मंथन
28 Mar, 2026 04:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शनिवार को पश्चिम एशिया संकट पर मंत्रियों के अनौपचारिक समूह की पहली बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब केंद्र सरकार इस संघर्ष को लेकर कई बैठकें कर चुकी है और लोगों को यह भरोसा दिला रही है कि ईंधन की कोई कमी नहीं है। विदेश मंत्रालय हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए है और पश्चिम एशिया में मौजूद भारतीय नागरिकों को हरसंभव मदद देने की कोशिश कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट
'अगली सुनवाई में पेश हों': दिल्ली के संरक्षित स्मारकों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; ASI निदेशक को अवमानना नोटिस जारी | इससे पहले, शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों के साथ डिजिटल माध्यम से बैठक की थी। इस बैठक में पश्चिम एशिया की हालिया स्थिति और उसके देश पर संभावित प्रभाव को देखते हुए राज्यों की तैयारियों की समीक्षा की गई।
सतीशन पर RSS से मदद लेने का आरोप, केरल में सियासी हलचल
28 Mar, 2026 03:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम । केरल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। संघ परिवार से जुड़े नेता आरवी बाबू ने यूडीएफ चेयरमैन वीडी सतीशन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि सतीशन ने 2001 और 2006 के विधानसभा चुनाव जीतने के लिए आरएसएस से समर्थन मांगा था। इस आरोप के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।सतीशन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी आरएसएस या भाजपा से वोट नहीं मांगे। उनका कहना है कि यह आरोप राजनीतिक वजह से लगाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आरोप लगाने वाले नेता उनके खिलाफ पहले से ही पक्षपात रखते हैं।
क्या आरएसएस से समर्थन लेने का आरोप सही है?
आर वी बाबू ने कहा कि सतीशन पहले आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार करते थे, लेकिन बाद में उन्होंने इसे स्वीकार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एक बात पर सच सामने आया, तो बाकी मामलों में भी सच्चाई सामने आएगी। बाबू ने दावा किया कि चुनाव जीतने के लिए सतीशन ने आरएसएस से मदद ली थी।
क्या सतीशन ने आरोपों को पूरी तरह नकारा?
सतीशन ने साफ कहा कि यह आरोप झूठे हैं। उन्होंने कहा कि अगर आरएसएस या भाजपा के साथ कोई समझौता होता, तो उनके विरोधी उन्हें हराने की बात नहीं करते। उन्होंने इसे उनकी छवि खराब करने की साजिश बताया।
क्या सीपीआई(एम) और आरएसएस के रिश्तों पर भी उठे सवाल?
सतीशन ने पलटवार करते हुए सीपीआई(एम) और आरएसएस के संबंधों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब उनकी पार्टी को कुछ संगठनों का समर्थन मिलता है, तो सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन दूसरी तरफ के संबंधों पर चुप्पी रहती है।
क्या अन्य राजनीतिक मुद्दे भी गरमाए?
सतीशन ने सबरीमाला मामले और अन्य विवादों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सीपीआई(एम) अपने नेताओं को बचा रही है। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से एफसीआरए कानून में बदलाव के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की। इस पूरे विवाद के बाद केरल की राजनीति में तनाव और बढ़ गया है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और आने वाले चुनाव में यह मुद्दा बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है।
कांग्रेस छोड़ने पर प्रद्युत बोरदोलोई का बयान, असली कारण आया सामने
28 Mar, 2026 03:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिसपुर। हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए असम से दो बार के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पार्टी के भीतर उन्हें लगातार अपमानित किया जा रहा था और उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई जा रही थी। बता दें कि पांच दशकों तक कांग्रेस से जुड़े रहे बोरदोलोई अब भाजपा के टिकट पर दिसपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। बोरदोलोई के शनिवार को कहा कि उनके साथ भेदभाव की शुरुआत साल 2022 के संगठनात्मक चुनावों के दौरान हुई थी। उन्होंने बताया कि जब शशि थरूर ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने का फैसला किया, तो उन्होंने थरूर का समर्थन किया था। बोरदोलोई का दावा है कि थरूर का प्रस्तावक बनने और उनके लिए प्रचार करने की वजह से पार्टी के कुछ नेता उनसे नाराज हो गए। इसके बाद से ही उन्हें पार्टी में हाशिए पर धकेलने की कोशिशें शुरू हो गई थीं।
खरगे-सोनिया गांधी ने कभी भेदभाव नहीं किया
पूर्व सांसद ने बताया कि मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी ने उनके साथ कभी भेदभाव नहीं किया, लेकिन पार्टी की दूसरी पंक्ति के नेताओं ने उन्हें जानबूझकर अलग-थलग कर दिया। बोरदोलोई ने कहा कि जब भी वह लोकसभा में अपनी बात रखना चाहते थे, तो उन्हें मौका नहीं दिया जाता था। पार्टी की लिस्ट में उनका नाम सबसे नीचे रखा जाता था ताकि उन्हें बोलने के लिए सिर्फ दो मिनट मिलें या फिर समय ही खत्म हो जाए।बोरदोलोई ने एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि 2025 के पंचायत चुनावों के दौरान उन पर जानलेवा हमला हुआ था। लोहे की रॉड से उनकी कार पर हमला किया गया। शुरुआत में उन्हें लगा कि यह भाजपा की साजिश है, लेकिन बाद में पता चला कि यह हमला कांग्रेस के ही एक विधायक के करीबी ने करवाया था। जब उन्होंने इसकी शिकायत आलाकमान से की, तो उनकी बात सुनने के बजाय उसी विधायक को ज्यादा अहमियत दी गई।उन्होंने आगे कहा कि जब राज्य कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने भी इस मामले में उनका बचाव नहीं किया, तो उन्हें बहुत निराशा हुई। बोरदोलोई ने महसूस किया कि कांग्रेस में अब उनके लिए कोई जगह नहीं बची है। उन्होंने कहा कि एक सांसद होने का क्या फायदा जब वह अपने क्षेत्र की समस्याओं को संसद में ढंग से उठा ही न सकें।भाजपा में शामिल होने को लेकर उन्होंने बताया कि इस्तीफा देने के बाद मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने उनसे संपर्क किया था। बोरदोलोई ने भाजपा के सामने केवल एक ही शर्त रखी कि उन्हें पूरा सम्मान दिया जाए। भाजपा ने उन्हें डिस्पुर से उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने साफ किया कि वह बिना किसी निजी स्वार्थ के पार्टी में आए हैं और अब भाजपा के मजबूत संगठन के साथ मिलकर जनता की सेवा करेंगे।
‘नए भारत का नया इंफ्रास्ट्रक्चर’—सीएम योगी का जेवर एयरपोर्ट पर बड़ा बयान
28 Mar, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जेवर | उत्तर प्रदेश के जेवर में आज देश के एविएशन सेक्टर को नई ऊंचाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण का उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यह एयरपोर्ट ‘नए भारत’ की बदलती तस्वीर का सशक्त उदाहरण है।उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट से यूपी को नई पहचान और रफ्तार मिलेगी। उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश को वैश्विक कनेक्टिविटी के साथ विकास की नई दिशा देगा और प्रदेश को निवेश के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री ने पिछले एक दशक में केंद्र सरकार की नीतियों का जिक्र करते हुए कहा कि योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारकर परिणाम भी दिए गए।
उत्तर प्रदेश विकास की दौड़ में नई पहचान बना रहा
उन्होंने पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों और आपूर्ति को लेकर केंद्र सरकार के फैसलों को उल्लेखनीय बताते हुए कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत में कीमतों को नियंत्रित रखना और सप्लाई चेन को सुचारु बनाए रखना बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले जिन हालातों में उत्तर प्रदेश विकास की दौड़ में पिछड़ गया था, आज वही प्रदेश तेजी से आगे बढ़ते हुए नई पहचान बना रहा है।मुख्यमंत्री के अनुसार, बीते वर्षों में कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे में सुधार ने राज्य को निवेश के लिए अनुकूल बनाया है। योगी ने यह भी बताया कि इस परियोजना का शिलान्यास नवंबर 2021 में हुआ था और अब पहले चरण का उद्घाटन हो चुका है, जो ‘डबल इंजन’ सरकार की तेज कार्यशैली को दर्शाता है- जहां योजनाएं समयबद्ध तरीके से पूरी होती हैं।
केंद्र की दूरदर्शी नीतियों का परिणाम
रामनवमी के उत्सव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में जहां एक ओर सांस्कृतिक उल्लास है, वहीं वैश्विक स्तर पर कई देशों में आर्थिक चुनौतियां देखी जा रही हैं। इसके बावजूद भारत ने स्थिरता और संतुलन बनाए रखा है, जो केंद्र की दूरदर्शी नीतियों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की 25 करोड़ जनता की ओर से प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जेवर एयरपोर्ट आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के विकास की धुरी साबित होगा और रोजगार व निवेश के नए अवसर पैदा करेगा।मुख्यमंत्री ने जेवर एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश को ग्लोबल कनेक्टिविटी का एक केंद्र बनाते हुए कहा कि यमुना एक्सप्रेसवे और भविष्य में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल वे, गंगा एक्सप्रेसवे, आरआरटीएस, दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल लाइन जैसे नेटवर्क को जोड़ते हुए प्रदेश को स्केल, स्पीड के साथ विकास की एक नई ऊंचाई तक ले जाने का कार्य भी करेगा।
रोजगार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सृजित होंगे
उन्होंने कहा कि नोएडा एयरपोर्ट परियोजना के माध्यम से लाखों नौजवानों के लिए रोजगार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सृजित होंगे। योगी ने कहा कि यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा, ग्रेटर नोएडा में व्यापक निवेश की संभावनाओं ने अभी से प्रस्ताव देने प्रारंभ कर दिए हैं। अभी पिछले दिनों ही आपने इसी एयरपोर्ट के पास सेमीकंडक्टर चिप बनाने की एक यूनिट की आधारशिला रखी थी। इसके साथ ही यहां पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के निर्माण की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के अंदर जो पोटेंशियल था, उस पोटेंशियल को आज इस नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और इसके साथ जुड़ रही तमाम प्रकार की सुविधाए एक नई ऊंचाई तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका का निर्वहन करेंगी। योगी ने कहा कि सीमलेस, स्मार्ट एंड सस्टेनेबल एयरपोर्ट, एविएशन फ्यूल फॉर्म, इनलाइट किचन फैसिलिटी, एमआरओ के साथ ही आधुनिक डिजिटल और ऊर्जा संरक्षण पर केंद्रित ‘ईज़ ऑफ जर्नी’ की संकल्पना को आपके मार्गदर्शन में आज यह एयरपोर्ट साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि डेडिकेटेड मल्टी-मॉडल कार्गो हब का निर्माण होने से अब उत्तर प्रदेश लैंड लॉक्ड की लिमिटेशन से बाहर निकलकर एक लैंडमार्क ग्रोथ के साथ ग्लोबल मार्केट तक अपनी पहुंच को आसान बनाने में सफल होगा।
पीएम Narendra Modi के दौरे पर कड़ी सुरक्षा, 7000 कर्मी संभालेंगे मोर्चा
28 Mar, 2026 01:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्रेटर नोएडा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा व्यवस्था अब पांच लेयर की होगी। एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह से ठीक पहले चार लेयर सुरक्षा को बढ़ाते हुए पांच लेयर का कर दिया गया है। कार्यक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए मल्टी लेयर सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। प्रधानमंत्री की सुरक्षा में प्रदेश सरकार किसी तरह की कोताही नहीं बरत रही है और चप्पे-चप्पे की निगरानी की जा रही है। पीएम का सुरक्षा तंत्र 7000 सुरक्षा कर्मियों की निगरानी में होगा। इसमें पुलिस विभाग के 5000 राजपत्रित व अराजपत्रित अधिकारी होंगे। पुलिस के अलावा पीएसी, आरएएफ, सीआईएसएफ और एटीएस की टीम भी निगरानी करेगी। वहीं एसपीजी और एनएसजी कमांडों का सुरक्षा कवच पीएम के आसपास रहेगा।
यह होती है पांच लेयर सुरक्षा व्यवस्था
पहला घेरा: एसपीजी बॉडीगार्ड का होता है, जिसमें पीएम के सबसे करीब सादे कपड़ों और सूट में एसपीजी के चुनिंदा कमांडो होते हैं। इनके पास अत्याधुनिक पिस्टल, रिवाल्वर और असॉल्ट राइफल होती है।
दूसरा घेरा : एसपीजी की दूसरी टीम का होता है, जो पहले घेरे को कवर करती है।
तीसरा घेरा : काले कपड़ों में एनएसजी के ब्लैक कैट कमांडो, एसडीएस और विशेष कमांडो होते हैं। जो हर किसी तरह के आतंकी खतरे से निपटने में सक्षम होते हैं।
चौथा घेरा: अर्ध सैनिक बल सीआरपीएफ, सीआईएसएफ के जवान होंगे मुस्तैद।
पांचवा घेरा: स्थानीय पुलिस सबसे बाहरी घेरे में रहती है।
भीड़ को देखते हुए बढ़ाई गई पार्किंग
यातायात पुलिस की ओर से वाहनों के लिए 15 पार्किंग बनाई गई है। पहले 12 स्थानों पर पार्किंग बनाई गई थी, जिसे बढ़ा दिया गया है। जनसभा में 4000 वाहनों की व्यवस्था की गई है। वहीं सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी और आमजनों के लिए पुलिस हेल्प डेस्क भी बनाई गई है। आपातकालीन स्थिति के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और फायर सेफ्टी टीमें तैनात की गई हैं।
सोशल मीडिया की हो रही निगरानी, ड्रोन से नजर
पुलिस सोशल मीडिया पर भी निगरानी कर रही है। अफवाह या किसी तरह की भड़काऊ पोस्ट करने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। एंट्री ड्रोन टीम तैनात की गई है। पूरा कार्यक्रम स्थल नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है। डॉग स्कवाएड भी तैनात कर दिए गए हैं। जो पीएम के कार्यक्रम में पूरी चौकसी बनाकर रखेंगे।
टीम को तत्काल एक्शन लेने के निर्देश
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए पूरी तरह से चौकसी बरती जा रही है। टीम को निर्देश हैं कि जरा भी संदिग्ध स्थिति बनने पर तत्काल एक्शन लिया जाए। चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात है। सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस टीमें लगातार निगरानी कर रही है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू, 30 फ्लाइट्स के साथ नया एविएशन हब तैयार
28 Mar, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के नोएडा में स्थित इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन शनिवार (28 मार्च) को कर दिया. ये देश का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है. इसके संचालन के साथ ही शुरुआती चरण में तीन देशों समेत 30 उड़ानें शुरू होंगी. ये NCR का दूसरा इंटरनेशनल हवाई अड्डा है. इसके संचालन के बाद से दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट और गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट पर यात्री दबाव कम होगा.
‘विकसित UP, विकसित भारत’ का नया अध्याय
उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज हम ‘विकसित UP, विकसित भारत’ अभियान का एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं. आज देश का सबसे बड़ा राज्य, सबसे ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला राज्य बन गया है.उन्होंने आगे कहा कि मेरे गर्व और खुशी के दो कारण हैं, पहला यह कि आप सभी ने मुझे इस हवाई अड्डे के निर्माण की नींव रखने का सौभाग्य दिया, और आप सभी ने मुझे इस हवाई अड्डे का उद्घाटन करने का सौभाग्य भी दिया. दूसरा, जिस उत्तर प्रदेश ने मुझे अपना प्रतिनिधि चुना, जिस उत्तर प्रदेश ने मुझे अपना सांसद बनाया. उसकी पहचान के साथ-साथ उस उत्तर प्रदेश की पहचान के साथ इस शानदार हवाई अड्डे का नाम भी जुड़ गया है.
सीएम योगी ने किया संबोधित
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 11-12 सालों में ‘न्यू इंडिया’ को हर क्षेत्र में ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर ले जाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट इस यात्रा का एक अहम हिस्सा है. उत्तर प्रदेश के लोग अब वैश्विक विमानन मानचित्र पर देश को एक नई दिशा दे रहे हैं, और आपके विजन को साकार कर रहे हैं.
विपक्ष पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे दलों ने अपनी अक्षमता के कारण, देश और राज्य दोनों को ही विकास की राह में एक अवरोध (bottleneck) में फंसा दिया था. साल 2002 से 2017 तक, उत्तर प्रदेश लगातार उस अपमान को झेलता रहा और ऐसी ही ठहराव की स्थिति का शिकार बना रहा. हालांकि पिछले 12 वर्षों में देश में और पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में हमारी ‘डबल-इंजन सरकार’ के तहत हुए तीव्र विकास के कारण, हम उन अवरोधों को तोड़ रहे हैं और दुनिया के सामने एक नई पहचान प्रस्तुत कर रहे हैं.
डिजाइन और टेक्नोलॉजी में अव्वल
एयरपोर्ट पर नेट जीरो एमिशन लक्ष्य रखा गया है.पर्यावरण के अनुकूल डिजाइन किया गया है.आर्किटेक्चर में भारतीय विरासत की झलक देखने को मिलेगी.इंटीरियर में घाट और हवेलियों की झलक दिखाई देगी.मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब तैयार किया जाएगा.
कार्गो सेवा की सुविधा
इस एयरपोर्ट से कार्गो सेवा की सुविधा भी मिलेगी.यहां विमानों के रखरखाव, मरम्मत और संचालन के लिए MRO सेंटर तैयार किया जाएगा.यहां से घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों उड़ानों की सुविधा रहेगी.एयरपोर्ट के पहले चरण में 1334 हेक्टेयर में विकास कार्य किया गया है.पहले चरण में 11200 करोड़ रुपये लागत आई.
विवादों में महाराष्ट्र: सेक्स स्कैंडल के बाद सख्त कदमों की जरूरत
28 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नासिक | नासिक के अशोक खरात उर्फ भोंदू बाबा के सेक्स स्कैंडल ने महाराष्ट्र की सियासत में बवंडर खड़ा कर दिया है. लेकिन इस मामले को राजनीति से इतर देखने की भी जरूरत है. इस स्कैंडल में अब तक करीब 58 महिलाओं के साथ खरात के सेक्स टेप सोशल मीडिया पर आ चुके हैं.इन 58 महिलाओं की जिंदगी में अब सिर्फ अंधेरा ही रहेगा. उनकी जिंदगी नरक से भी बदतर होने वाली है. वीडियो देखकर आसानी से कहा जा सकता है कि इन सभी महिलाओं को हिप्नोटाइज किया गया होगा, क्योंकि सभी बाबा की श्रद्धा में डूबी हुईं हैं. यही नहीं इन महिलाओं के इतर जो भी अन्य महिलाएं इस बाबा के पास गईं ,होंगी सभी को समाज में शक की नजर से देखा जाएगा. सबसे बड़ी बात है कि इन महिलाओं के सगे संबंधी भी समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं बचेंगे. इन महिलाओं के साथ उनके बच्चे और उनके परिवार वाले भी समाज के निशाने पर होंगे. याद करिए दिल्ली के एक मशहूर स्कूल की बच्ची का वीडियो वायरल हुआ था. बच्ची के पिता ने इस घटना के बाद शर्मिंदगी के चलते सुसाइड कर लिया था. सवाल उठता है कि इन सैकड़ों परिवारों की जिंदगी नरक बनाने के लिए जिम्मेदार कौन है. इन 58 पीड़िताओं का शोषण तो खरात ने बंद कमरे में किया था पर देश की जनता इन महिलाओं का चीरहरण हर रोज सोशल मीडिया पर कर रही है.करोड़ों सीसीटीवी, अरबों मोबाइल से खरबों जीबी डाटा बन रहा है पर उस पर किसी का नियंत्रण नहीं है. हम डिजिटल इंडिया का नारा तो लगा रहे हैं पर डेटा प्रोटेक्शन पर हमारा न के बराबर नियंत्रण है. यह तो आम लोगों की बात है वीवीआईपी लोग भी डेटा के इस प्रवाह से परेशान हैं. हमारे पास कोई ऐसी व्यवस्था नहीं है कि हम फेक डाटा, फेक न्यूज आदि पर कड़ाई से नियंत्रण कर सकें. सोशल मीडिया पर आए डेटा को जब तक हम कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं वह यूनिवर्सल बन चुका होता है.हमारी सरकार को सोशल मीडिया को कंट्रोल में लेने के लिए हर कोशिश करनी होगी. देश विरोधी प्रोपेगेंडा तक को हम रोकने में नाकामयाब हैं. यह भी ध्यान देने योग्य है कि इस तरह के वीडियोज़ से अपराधी का बहुत कम नुकसान होता है. कई बार तो ऐसे तथाकथित बाबा या अपराधी इस बदनामी को भी प्रचार के रूप में इस्तेमाल कर लेते हैं. इसलिए जरूरत है बहुस्तरीय सुधार की.सबसे पहले, कानून को और सख्त तथा त्वरित बनाना होगा, ताकि इस तरह के मामलों में तुरंत कार्रवाई हो सके. दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भी अधिक जिम्मेदारी लेनी होगी. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मॉडरेशन के जरिए ऐसे कंटेंट को शुरुआती स्तर पर ही रोकना जरूरी है. समाज को भी आत्ममंथन करना होगा. जब तक लोग ऐसे विडियोज़ को देखना और साझा करना बंद नहीं करेंगे, तब तक यह समस्या खत्म नहीं होगी. यह मामला केवल एक बाबा के अपराध का नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की संवेदनहीनता, हमारी डिजिटल लापरवाही और हमारी कानूनी कमजोरियों का संयुक्त परिणाम है|
“BJP के पांच पांडव ही काफी हैं…”: ममता पर बावनकुले का करारा जवाब
27 Mar, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नागपुर : महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोला है। नागपुर में मीडिया के साथ बातचीत करते हुए बावनकुले ने ममता बनर्जी से पूछा कि वह खुद बताएं कौरव कौन हैं और पांडव कौन। उन्होंने दावा किया कि चुनाव जीतने के लिए बीजेपी के पांच पांडव ही काफी हैं, जबकि कौरवों की फौज ममता बनर्जी के पास है। यह बयान ममता बनर्जी के उस आरोप के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने बीजेपी को कौरव और अपनी पार्टी टीएमसी को पांडव बताया था।
बावनकुले ने ममता बनर्जी पर कौरवों की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने साफ कहा कि बीजेपी ऐसी राजनीति नहीं करती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में बीजेपी सच्चाई, ईमानदारी और पारदर्शी तरीके से चुनाव लड़ना चाहती है। इसके उलट, बावनकुले के मुताबिक, ममता बनर्जी कौरवों की तरह बूथ कैप्चर करके चुनाव जीतना चाहती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि पश्चिम बंगाल की जनता आगामी चुनाव में यह बताएगी कि वह किसके साथ खड़ी है।
बीजेपी की चुनावी रणनीति का जिक्र करते हुए बावनकुले ने बताया कि महाराष्ट्र बीजेपी के विधायक, सांसद, मंत्री और पार्टी पदाधिकारी केरल और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों में चुनाव प्रचार के लिए जाएंगे। यह बीजेपी की राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा है, जहां वह अलग-अलग राज्यों से अपने नेताओं को चुनावी राज्यों में भेजकर प्रचार अभियान को मजबूत करती है। यह दिखाता है कि बीजेपी पश्चिम बंगाल और केरल में अपनी पूरी ताकत झोंक रही है, जहां उसके लिए सीटें जीतना महत्वपूर्ण है।
ममता बनर्जी ने क्या कहा था, जिस पर हुआ पलटवार
दरअसल, महाराष्ट्र के मंत्री का यह बयान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गुरुवार को दिए गए संबोधन का जवाब है। ममता बनर्जी ने बर्धमान के पांडवेश्वर और बीरभूम जिले में अपने भाषण के दौरान बीजेपी और चुनाव आयोग पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने टीएमसी को पांडव और बीजेपी को कौरव बताया था। मुख्यमंत्री ने खुले तौर पर कहा था कि यह चुनाव कौरवों के साथ पांडवों की लड़ाई है। ममता बनर्जी के इस बयान ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक गर्मी को और बढ़ा दिया था, जिस पर अब बीजेपी की ओर से यह तीखा पलटवार आया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘कौरव-पांडव’ जैसी पौराणिक उपमाओं का इस्तेमाल भारतीय राजनीति में अक्सर भावनात्मक जुड़ाव और मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए किया जाता है। महाभारत की यह कहानी न्याय और अधर्म के बीच की लड़ाई के रूप में देखी जाती है, और नेता अक्सर खुद को न्याय के पक्ष में और अपने विरोधियों को अधर्म के पक्ष में चित्रित करने का प्रयास करते हैं। ममता बनर्जी ने खुद को पांडवों के पक्ष में रखकर बीजेपी पर हमला बोला था, और अब बावनकुले ने उसी उपमा का इस्तेमाल करते हुए ममता पर पलटवार किया है।
ममता बनर्जी के आरोपों का जवाब देने के लिए तैयार बीजेपी
बावनकुले के बयान से साफ है कि बीजेपी पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के हर आरोप का करारा जवाब देने की तैयारी में है। चुनाव नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी और तीखी होती जा रही है। बीजेपी का दावा है कि वह सच्चाई और पारदर्शिता के रास्ते पर है, जबकि ममता बनर्जी पर वह बूथ कैप्चरिंग और गलत तरीकों से चुनाव जीतने की कोशिश का आरोप लगा रही है। आगामी विधानसभा चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता इन आरोपों और पलटवारों को कैसे देखती है और किसे जनादेश देती है।
महाराष्ट्र के नेताओं का पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए जाना भी बीजेपी की रणनीति का एक अहम हिस्सा है। यह दर्शाता है कि पार्टी पश्चिम बंगाल को कितनी गंभीरता से ले रही है और पूरे देश से अपने संसाधनों और नेताओं को वहां जुटा रही है। यह चुनाव सिर्फ राज्य का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बीजेपी और विपक्षी दलों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है।
सरकार ने तेल कंपनियों को दी राहत, जनता के लिए कुछ नहीं: कांग्रेस
27 Mar, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण आर्थिक फैसले में पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में कटौती की घोषणा की है। इस फैसले के तहत, पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को तीन रुपये प्रति लीटर कम किया गया है, जबकि डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क को पूरी तरह से शून्य कर दिया गया है।
सरकार ने इस कदम के पीछे का कारण स्पष्ट करते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) जैसी देश की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। ये कंपनियां वेस्ट एशिया में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दबाव से जूझ रही थीं, जिससे उन्हें पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर नुकसान हो रहा था। इन कंपनियों को अपनी लागत और राजस्व के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो रहा था। इस सरकारी हस्तक्षेप का लक्ष्य कंपनियों को इस चुनौतीपूर्ण माहौल में अपनी लागतों को प्रबंधित करने में मदद करना था, ताकि वे बाजार में ईंधन की आपूर्ति और कीमतों में स्थिरता बनाए रख सकें।
आम जनता को राहत नहीं, तेल कंपनियों को फायदा: कांग्रेस
सरकार के इस फैसले पर तुरंत ही विपक्षी दल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने इस शुल्क कटौती को केवल ‘सुर्खियां बटोरने’ और ‘लोगों को मूर्ख बनाने’ की रणनीति करार दिया है। पार्टी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह वास्तविक रूप से उपभोक्ताओं को राहत देने पर ध्यान केंद्रित करे, बजाय इसके कि वह ऐसे कदम उठाए जिनका सीधा फायदा आम जनता को न मिले। कांग्रेस का आरोप है कि यह कदम सीधे तौर पर जनता की जेब को कोई राहत नहीं दे रहा है, बल्कि यह केवल तेल कंपनियों के वित्तीय बोझ को कम करने का एक तरीका है।
कांग्रेस के मीडिया सेल के प्रमुख पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर सरकार के दावों की हवा निकाल दी। खेड़ा ने अपने पोस्ट में आम जनता को आगाह करते हुए लिखा,
“अगर आपने पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम होने की सुर्खियां देखीं और सोचा कि सरकार ने आपकी जेब को राहत दी है तो आप गलत हैं। फिलहाल, डीलरों और उपभोक्ताओं के लिए कीमतें समान हैं।” (पवन खेड़ा, कांग्रेस मीडिया सेल प्रमुख)
उन्होंने स्पष्ट किया कि जमीन पर स्थिति बिल्कुल अलग है। खेड़ा के अनुसार, डीलरों और उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल ईंधन की कीमतें वही बनी हुई हैं, जो शुल्क कटौती से पहले थीं। इसका मतलब यह है कि खुदरा स्तर पर पेट्रोल और डीजल की दरों में कोई बदलाव नहीं आया है, और आम उपभोक्ता को पहले की तरह ही भुगतान करना पड़ रहा है।
खेड़ा ने आगे बताया कि असल में जिस शुल्क में कमी की गई है, वह ‘विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क’ (Special Additional Excise Duty) है। यह वह शुल्क होता है जो तेल विपणन कंपनियां सरकार को एक निश्चित दर पर भुगतान करती हैं। इस शुल्क को कम करने का सीधा अर्थ यह है कि अब तेल कंपनियों को सरकार को कम पैसा देना होगा। यह एक तरह से कंपनियों के लिए राजस्व का नुकसान कम करने या उनके मुनाफे को सहारा देने का तरीका है। लेकिन, इससे आम आदमी की जेब पर पड़ने वाले बोझ में कोई कमी नहीं आई है, क्योंकि अंतिम बिक्री मूल्य में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कांग्रेस का तर्क है कि सरकार ने कंपनियों को राहत दी है, न कि जनता को।
राहत देने में काफी देर कर दी: कांग्रेस
कांग्रेस नेता ने सरकार के इस कदम के समय पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की शुरुआत के बाद से ही तेल विपणन कंपनियां लगातार घाटे का सामना कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये के मुकाबले डॉलर की मजबूती जैसे कारकों ने इन कंपनियों के आयात बिल को काफी बढ़ा दिया था, जिससे उन्हें भारी वित्तीय नुकसान हो रहा था। खेड़ा ने कहा,
“सरकार अब सिर्फ उस बोझ का एक छोटा सा हिस्सा साझा करने पर सहमत हुई है, लेकिन विशेष अतिरिक्त शुल्क को कम कर रही है, वह भी लगभग एक महीने बाद।” (पवन खेड़ा, कांग्रेस मीडिया सेल प्रमुख)
उनके अनुसार, यह राहत देने में काफी देर कर दी गई है और इसका प्रभाव भी उतना व्यापक नहीं है जितना होना चाहिए था। कांग्रेस का मानना है कि यदि सरकार वास्तव में कंपनियों और उपभोक्ताओं दोनों को राहत देना चाहती थी, तो उसे यह कदम बहुत पहले उठाना चाहिए था।
राहत सिर्फ कहानियों में है, वास्तविकता में नहीं: पवन खेड़ा
पवन खेड़ा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उपभोक्ताओं के लिए “राहत सिर्फ कहानियों में है, वास्तविकता में नहीं।” उनका यह बयान इस बात पर जोर देता है कि सरकार द्वारा पेश की गई ‘राहत’ केवल कागजी और प्रतीकात्मक है, जिसका जमीनी स्तर पर कोई ठोस असर नहीं दिख रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स और सरकारी घोषणाओं में भले ही शुल्क कटौती को एक बड़े राहत पैकेज के तौर पर दिखाया जा रहा हो, लेकिन जब उपभोक्ता पेट्रोल पंप पर जाते हैं, तो उन्हें वही पुरानी कीमतें चुकानी पड़ती हैं। यह स्थिति आम नागरिकों में भ्रम पैदा करती है और उन्हें ठगा हुआ महसूस कराती है।
कांग्रेस की केंद्र सरकार से मांग
कांग्रेस ने केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर सीधे घेरा है और मांग की है कि वह “लोगों को बेवकूफ बनाने के बजाय उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत देने पर ध्यान केंद्रित करे।” पार्टी का कहना है कि सरकार को ऐसे प्रभावी कदम उठाने चाहिए जिससे सीधे खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी आए। इसमें केंद्रीय उत्पाद शुल्क में ऐसी कटौती शामिल हो सकती है जो सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचे, या राज्य सरकारों के साथ मिलकर वैट में कमी लाने के लिए समन्वय स्थापित करना। कांग्रेस का मानना है कि जब तक ईंधन की कीमतें सीधे कम नहीं होतीं, तब तक आम जनता महंगाई के बोझ तले दबी रहेगी और सरकार का यह कदम केवल एक राजनीतिक चाल मात्र बनकर रह जाएगा। यह मांग दर्शाती है कि कांग्रेस चाहती है कि सरकार केवल कंपनियों के बहीखातों को दुरुस्त करने के बजाय, आम आदमी के बजट में सीधा सुधार लाए।
संक्षेप में, केंद्र सरकार का यह कदम भले ही तेल विपणन कंपनियों के लिए एक राहत हो, लेकिन कांग्रेस इसे आम जनता के साथ एक ‘चाल’ मान रही है। पार्टी का स्पष्ट रुख है कि सरकार को ऐसी ‘कागजी राहत’ देने के बजाय सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में कमी लानी चाहिए। पवन खेड़ा के बयानों ने इस बहस को एक नया आयाम दिया है, जहां सवाल सिर्फ शुल्क कटौती का नहीं, बल्कि इसके वास्तविक लाभार्थियों और सरकार की मंशा का है। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच आगे भी बयानबाजी जारी रहने की उम्मीद है, क्योंकि ईंधन की कीमतें हमेशा से राजनीतिक रूप से एक संवेदनशील विषय रही हैं।
CM देवेंद्र फडणवीस का आभार जताया, पेट्रोल-डीजल में राहत के बाद नागरिकों से की ये अपील
27 Mar, 2026 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केंद्र सरकार ने एक बड़ा और बहुप्रतीक्षित फैसला लेते हुए पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर 10-10 रुपए एक्साइज ड्यूटी घटा दी है। इस महत्वपूर्ण घोषणा से देशभर के करोड़ों उपभोक्ताओं को सीधी और तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है, जो पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण लगातार महंगे होते ईंधन से जूझ रहे थे।
इस घोषणा के तुरंत बाद, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस जनहितैषी कदम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का हृदय से आभार व्यक्त किया है। उन्होंने साथ ही महाराष्ट्र की जनता को पूरी तरह आश्वस्त किया कि राज्य में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है, और लोगों से बेवजह घबराने या किसी भी तरह की अनावश्यक खरीदारी न करने की अपील की।
एक्साइज ड्यूटी में कटौती पर फडणवीस ने केंद्र का जताया आभार
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से बातचीत के दौरान भारत सरकार की नीति और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता एवं कड़े फैसले लेने की क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा, “मैं भारत सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करना चाहता हूं। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों, खासकर विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में जारी युद्ध जैसे हालात के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद, सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी की है।”
फडणवीस ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का पूरा बोझ सीधे ग्राहकों पर न पड़े। उनके अनुसार, इस कटौती से ईंधन कंपनियों को भी कुछ हद तक लागत का भार वहन करने में मदद मिलेगी, जिससे उपभोक्ताओं को महंगाई से बड़ी राहत मिल पाएगी। उन्होंने इस एक्साइज ड्यूटी कटौती को ‘प्रधानमंत्री द्वारा लोगों को दिया गया बहुत बड़ा फायदा’ करार दिया है।
पीएम मोदी के नेतृत्व में संकट में बेहतर मैनेजमेंट: देवेंद्र फडणवीस
प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक कुशलता पर प्रकाश डालते हुए देवेंद्र फडणवीस ने इसे ‘काबिल-ए-तारीफ’ बताया और भारत की स्थिति की तुलना पड़ोसी देशों से की। उन्होंने कहा, “हम लोग देख रहे हैं कि जहां हमारे आसपास के पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल और गैस संकट के कारण करीब-करीब शटडाउन की परिस्थिति आई है, दफ्तर बंद हैं, कई जगह पर संस्थान बंद हो रहे हैं।” ऐसे गंभीर और चुनौतीपूर्ण समय में, फडणवीस ने भारत के प्रभावी प्रबंधन को उत्कृष्ट बताया। उन्होंने जोर देकर कहा, “ऐसे समय में पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने संकट की स्थिति में बेहतर तरीके से मैनेजमेंट किया है। हमारे यहां पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं है। घरेलू गैस भी दिए जा रहे हैं।” उन्होंने घरेलू गैस की आपूर्ति की निरंतरता पर भी बात की और बताया कि हालांकि व्यावसायिक गैस सिलेंडर में कुछ कटौती की गई थी, लेकिन अब उसे भी 50 फीसदी आपूर्ति पर वापस लाया जा रहा है, जिससे व्यावसायिक क्षेत्र को भी आवश्यक राहत मिलेगी और कामकाज में बाधा नहीं आएगी।
पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें न लगाएं: मुख्यमंत्री की अपील
पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और किसी भी तरह की कृत्रिम कमी से बचने के लिए, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आम लोगों से एक महत्वपूर्ण अपील की है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा, “मैं विशेष रूप से आम लोगों से ये अपील करता हूं कि वे पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें न लगाएं।” फडणवीस ने स्पष्ट किया कि राज्य के पास अगले एक महीने के लिए पर्याप्त पेट्रोल और डीजल का स्टॉक पूरी तरह से मौजूद है। उन्होंने यह भी समझाया कि अगर लोग ‘शायद कमी होगी’ इस अंदेशे में पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगाएंगे और अपनी गाड़ियों या अन्य बर्तनों में अनावश्यक रूप से ईंधन भरेंगे, तो यह बाजार में सप्लाई और डिमांड के सामान्य साइकिल पर अतिरिक्त दबाव डालेगा। उनके अनुसार, यह स्थिति एक ‘आर्टिफिशियल कमी’ या कृत्रिम संकट को जन्म दे सकती है, जबकि वास्तव में ईंधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। इसलिए, उन्होंने लोगों से धैर्य रखने, अफवाहों पर ध्यान न देने और ऐसी अनावश्यक कतारों से बचने का आग्रह किया है ताकि आपूर्ति व्यवस्था सुचारु बनी रहे और सभी को आसानी से ईंधन मिल सके।
गैस सिलेंडरों की आपूर्ति के संबंध में भी सरकार की तैयारियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘हमारी सरकार ने गैस सिलेंडर के मामले में भी पूरे तरीके से एहतियात बरती है।’ उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि ‘जो हाउस होल्ड गैस है वो सभी को सही समय पर मिल रहा है।’ फडणवीस ने गैस एजेंसियों को किसी भी तरह की गलत प्रैक्टिस के खिलाफ कड़ी चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, ‘कहीं पर गैस एजेंसियां अगर गलत तरीके से पैसे मांगती है या गलत तरीके से आर्टिफिशियल कमी लाने की कोशिश करती है तो उसकी आप शिकायत करें। उनके ऊपर भी कार्रवाई की जाएगी।’ उन्होंने लोगों को सरकार पर भरोसा रखने का संदेश दिया और बताया कि भारत सरकार ने ‘अगले पूरे समय का एक बहुत अच्छा प्लान’ तैयार किया है। इसलिए, सभी लोगों को सरकार पर विश्वास करते हुए एहतियात बरतनी चाहिए और किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
रामलला के मस्तक पर 4 मिनट तक चमकी सूर्य की किरणें, अयोध्या में रामनवमी उत्सव
27 Mar, 2026 04:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अयोध्या : अयोध्या के नवनिर्मित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में रामनवमी के पावन अवसर पर शुक्रवार को रामलला का भव्य ‘सूर्य तिलक’ किया गया। यह एक ऐसा ऐतिहासिक और विस्मयकारी क्षण था जब दोपहर ठीक 12 बजे सूर्य की किरणें सीधे रामलला के मस्तक पर पड़ीं। यह अलौकिक और दिव्य दृश्य करीब चार मिनट तक कायम रहा, जिसे मंदिर के गर्भगृह और प्रांगण में मौजूद लाखों श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर देखा। इस अद्वितीय आयोजन के साथ ही अयोध्या की रामनवमी का उत्सव चिरस्मरणीय बन गया, क्योंकि देश-दुनिया के करोड़ों भक्तों ने इसका सीधा प्रसारण देखा।
भगवान राम की नगरी अयोध्या आज रामनवनी के उल्लास में पूरी तरह डूबी हुई है। चारों ओर “जय श्री राम” के उद्घोष गूंज रहे है और रामलला का जन्मोत्सव मनाने के लिए देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। भक्तों की भीड़ भोर से ही मंदिर की ओर उमड़ रही थी, सभी इस अनोखे उत्सव का हिस्सा बनना चाहते थे। भक्तों के लिए यह न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान था, बल्कि एक वैज्ञानिक चमत्कार और आस्था का जीवंत प्रमाण भी था, जिसे देखने के लिए लोग आतुर थे।
आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम
यह ‘सूर्य तिलक’ सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं था, बल्कि आधुनिक विज्ञान और प्राचीन भारतीय ज्योतिष के सिद्धांतों का अद्भुत संगम भी था। रामलला के मस्तक पर सूर्य की किरणों को सीधे और सटीक रूप से पहुंचाने के लिए देश के शीर्ष इंजीनियरों और वैज्ञानिकों ने महीनों तक अथक परिश्रम किया। उन्होंने एक विशेष ऑप्टो-मैकेनिकल सिस्टम डिजाइन किया, जिसमें उच्च गुणवत्ता वाले दर्पणों और लेंसों की एक श्रृंखला का उपयोग किया गया। इन उपकरणों को इस तरह से स्थापित किया गया था कि हर साल रामनवमी के दिन, ठीक दोपहर 12 बजे, सूर्य की किरणें गर्भगृह में प्रवेश करें और बिना किसी रुकावट के सीधे रामलला के ललाट पर केंद्रित हों। इस जटिल और अचूक व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए ‘सूर्य तिलक’ से पहले कई बार, कम से कम 2 से 3 बार, सफलतापूर्वक ट्रायल भी किए गए थे ताकि वास्तविक आयोजन के समय कोई त्रुटि न हो और किरणें बिल्कुल सही जगह पर पड़ें।
पीएम मोदी ने टेलीविजन पर देखा ‘सूर्य तिलक’ समारोह
इस अद्भुत और ऐतिहासिक नजारे को देखने वालों में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल थे। वे दिल्ली से टेलीविजन के जरिए इस पूरे ‘सूर्य तिलक’ समारोह के ऑनलाइन साक्षी बने। इस अलौकिक दृश्य को देखकर प्रधानमंत्री भाव-विभोर हो गए। वे लगातार हाथ जोड़े हुए थे और उनकी आंखों में भक्ति तथा आस्था साफ झलक रही थी। यह क्षण देश भर के करोड़ों रामभक्तों के लिए भी अत्यंत प्रेरणादायी रहा, जिन्होंने अपने घरों से टीवी या ऑनलाइन माध्यमों से इस दिव्य दर्शन को किया और स्वयं को इस ऐतिहासिक घटना का हिस्सा महसूस किया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर को एक नए भारत की आध्यात्मिक और वैज्ञानिक प्रगति का प्रतीक भी माना।
राम मंदिर ट्रस्ट की घोषणा, हर साल रामनवमी पर होगा ‘सूर्य तिलक’
राम मंदिर ट्रस्ट ने ‘सूर्य तिलक’ के भविष्य को लेकर भी महत्वपूर्ण घोषणा की है। ट्रस्ट के अनुसार, यह ‘सूर्य तिलक’ का आयोजन अगले 20 साल तक, हर रामनवमी पर, इसी प्रकार नियमित रूप से होता रहेगा। यह केवल एक बार का आयोजन नहीं है, बल्कि एक सतत परंपरा है जिसे वैज्ञानिक सटीकता के साथ कायम रखा जाएगा। इस आयोजन का धार्मिक महत्व भी अत्यंत गहरा है, क्योंकि हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम स्वयं सूर्यवंशी थे और भगवान सूर्य को उनके कुल देवता के रूप में पूजा जाता है। इस ‘सूर्य तिलक’ के माध्यम से रामलला को सीधे उनके कुलदेवता सूर्यदेव का आशीर्वाद प्राप्त हुआ, जो सनातन धर्म में एक अत्यंत पवित्र और शुभ संकेत माना जाता है। यह परंपरा भव्य राम मंदिर की प्रतिष्ठा और आध्यात्मिक गरिमा को कई गुना बढ़ाएगी और श्रद्धालुओं के मन में अटूट श्रद्धा उत्पन्न करेगी।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों को दी रामनवमी की शुभकामनाएं
इससे एक दिन पूर्व, गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामनवमी के पावन अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की थीं। अपने संदेश में उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि भगवान राम के आदर्श केवल भारत के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि अनंतकाल तक पूरी मानवता के लिए एक मार्गदर्शक शक्ति बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम के मूल्य, उनकी मर्यादाएं और उनके जीवन से मिलने वाली सीख आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी सदियों पहले थीं, और वे हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती रहेंगी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि राम का जीवन हमें कर्तव्यपरायणता और सेवा का पाठ सिखाता है।
महिला आरक्षण का बड़ा कदम: लोकसभा में सीटें बढ़ेंगी, OBC कोटा शामिल नहीं
27 Mar, 2026 10:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अगले आम चुनाव (General Elections) में महिलाओं (Women Reservation) के लिए एक तिहाई स्थान सुरक्षित करने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ा दिए हैं। इस विषय पर केवल विपक्षी दलों से ही नहीं बल्कि सत्ताधारी गठबंधन के भीतर भी गहन चर्चा की जा रही है। बुधवार को हुई बैठक में पिछड़ा वर्ग के लिए अलग कोटे जैसे कुछ प्रश्नों के बीच संविधान संशोधन विधेयक (Constitution Amendment Bill) पर सहमति बन गई है। सरकार अब कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों से अंतिम वार्ता के बाद इस विधेयक को प्रस्तुत करने का समय निर्धारित करेगी।
बैठक के दौरान गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने गठबंधन के सहयोगियों को विस्तार से बताया कि सरकार इस विषय पर इतनी सक्रिय क्यों हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के बाद होने वाली सीमा निर्धारण की प्रक्रिया 2029 तक ही पूर्ण हो पाएगी। ऐसी स्थिति में सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम को आगामी आम चुनाव में लागू करने का अपना वचन पूरा करना चाहती है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि विभिन्न क्षेत्रों में सीटों की संख्या को आनुपातिक आधार पर 50 प्रतिशत तक बढ़ाया जाएगा।
विधानसभा चुनावों पर प्रभाव नहीं
सरकार जिस योजना पर विपक्ष से संवाद कर रही है उसके अनुसार महिला आरक्षण को वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से ही लागू किया जाना है। सत्ता पक्ष की बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि वर्ष 2023 में विधेयक लाते समय इसे दो हजार उन्नतीस में प्रभावी करने का ही संकल्प लिया गया था। विपक्षी नेताओं का भी यही मानना है कि सरकार ने आगामी वर्षों में होने वाले उत्तर प्रदेश या अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में इसे लागू करने का कोई संकेत नहीं दिया है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को आगामी आम चुनाव में लागू करने का अपना वचन पूरा करना चाहती है सरकार। -अमित शाह
पिछड़ा वर्ग कोटे पर सांविधानिक स्थिति
बैठक में जब पिछड़ा वर्ग के लिए अलग आरक्षण का प्रश्न उठा तो गृह मंत्री ने कहा कि सांविधानिक रूप से ऐसा करना संभव नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि महिला आरक्षण लागू होते ही पिछड़ा वर्ग से आने वाले जनप्रतिनिधियों की संख्या स्वयं ही बढ़ जाएगी। इसका कारण यह है कि कोई भी राजनीतिक दल टिकट वितरण के समय इतने बड़े वर्ग की अनदेखी कर अपना राजनीतिक नुकसान नहीं करना चाहेगा।
जातिगत गणना की चुनौतियां
बैठक में 2027 की गणना में जातियों के आंकड़े एकत्रित करने पर भी विमर्श हुआ। एक वरिष्ठ मंत्री ने पुरानी गणना की स्मृतियां साझा करते हुए बताया कि तब लाखों की संख्या में जातियां और उपजातियां सामने आने के कारण उन आंकड़ों का उपयोग कठिन हो गया था। चूंकि जाति बताने का कोई निश्चित स्वरूप नहीं है और यह व्यक्ति की अपनी जानकारी पर आधारित है इसलिए इस बार भी यह संख्या बहुत अधिक बढ़ सकती है।
विधेयक प्रस्तुत करने की रणनीति
सरकार इस महत्वपूर्ण निर्णय पर विपक्षी दलों से संवाद के बाद ही अंतिम निर्णय लेगी। वर्तमान में दो विकल्पों पर विचार हो रहा है। पहला विकल्प वर्तमान सत्र के समापन के बाद इसी कार्य के लिए दो दिन की अतिरिक्त बैठक बुलाने का है और दूसरा विकल्प पांच राज्यों के चुनाव बाद मई माह में विशेष सत्र बुलाने का है। सरकार के सूत्रों के अनुसार प्रमुख विपक्षी दल सैद्धांतिक रूप से इस पर सहमत हैं और अन्य दलों से चर्चा बाकी है।
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