राजनीति
‘मोदी को धर्म की परवाह नहीं?’ केरल से राहुल गांधी का तीखा बयान
31 Mar, 2026 09:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता (Rahul Gandhi) ने केरल में आयोजित जनसभा के दौरान भाजपा (BJP) और सत्ताधारी वाम मोर्चा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने शबरीमाला मंदिर से कथित सोना चोरी मामले का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की चुप्पी पर सवाल उठाए और कहा कि प्रधानमंत्री मंदिरों की बात तो करते हैं, लेकिन इस मुद्दे पर बोलना भूल गए।
केरल के अडूर में जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने भगवान अयप्पा के मंदिर से सोना चोरी के आरोपों को लेकर एक स्थानीय गीत भी गाया। उन्होंने ‘स्वर्णम कट्टथु आरप्पा’ (अयप्पा का सोना किसने चुराया) पंक्ति दोहराई, जिसे पहले यूडीएफ ने स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान वामपंथी दलों के खिलाफ इस्तेमाल किया था। सभा में मौजूद समर्थकों ने इस दौरान उनका उत्साह बढ़ाया।
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री जहां भी जाते हैं, वहां मंदिरों और धर्म की बात करते हैं, लेकिन पलक्कड़ यात्रा के दौरान उन्होंने शबरीमाला मुद्दे का उल्लेख नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वाम मोर्चा नेताओं ने अयप्पा मंदिर से सोना हटाकर उसकी जगह पीतल चढ़ा दिया, और प्रधानमंत्री ने इस पर चुप्पी साधकर उन्हें बचाने का काम किया।
उन्होंने आगे कहा कि इससे दो बातें स्पष्ट होती हैं—पहली, भाजपा और वाम मोर्चा मिलकर काम कर रहे हैं, और दूसरी, प्रधानमंत्री को धर्म या मंदिरों की वास्तविक चिंता नहीं है। राहुल के अनुसार, जब वोट मिलते हैं तो मंदिरों की बात की जाती है और जब राजनीतिक हित होते हैं तो मुद्दों पर चुप्पी साध ली जाती है।
दरअसल, यह मामला केरल के प्रसिद्ध शबरीमाला मंदिर से जुड़ा है, जहां पूर्व प्रशासन पर मंदिर की दीवारों और दरवाजों पर चढ़े सोने को हटाकर उसकी जगह पीतल लगाने का आरोप लगा था। साथ ही, मंदिर में उपलब्ध सोने की मात्रा को लेकर भी सवाल उठे थे। इस विवाद में कुछ वामपंथी नेताओं के नाम सामने आने की भी चर्चा रही है।
BJP की नई सूची जारी: बंगाल चुनाव में उम्मीदवारों में फेरबदल
31 Mar, 2026 06:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल (West Bengal) विधानसभा चुनाव (Elections) के लिए भाजपा (BJP) ने अपने उम्मीदवारों (Candidates) की एक और सूची जारी कर दी है। इस चौथी सूची में 13 उम्मीदवारों का नाम शामिल है। वहीं दूसरी सूची में घोषित एक उम्मीदवार का नाम बदला भी गया है। सूची के अनुसार, दूसरी सूची में घोषित मयनागुड़ी (अनुसूचित जाति) सीट से अब दालिम रॉय भाजपा उम्मीदवार होंगे।
नई सूची के अनुसार, सिताई सीट से आशुतोष वर्मा नाटाबाड़ी से गिरिजा शंकर रॉय, बागदा से सोमा ठाकुर, मगराहाट पूर्व से उत्तम कुमार बनिक और फालटा से देबांगशु पांडा को टिकट दिया गया है। वहीं सोनारपुर उत्तर से देबाशीष पाठक, हावड़ा दक्षिण से श्यामल हाती, पंचला सीट से रंजन कुमार पॉल, चंडीपुर से पीयूष कांति दास, गारबेटा से प्रदीप लोढ़ा, मेमारी से मानव गुहा और बाराबनी सीट से अरिजीत रॉय भाजपा उम्मीदवार होंगे।
सियासी बयानबाज़ी तेज: अमित शाह ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
31 Mar, 2026 05:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) ने सोमवार को लोकसभा (Lok Sabha) में कांग्रेस और सदन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) पर करार प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि नक्सलियों के साथ रहते-रहते एक पार्टी के नेता खुद नक्सलवादी बन गए। शाह ने देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त किए जाने के मुद्दे पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए राहुल गांधी पर नक्सलियों का समर्थन करने का आरोप लगाया। गृह मंत्री ने कहाकि राहुल गांधी जी अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई बार नक्सलियों और उनके हमर्ददों के साथ देखे गए हैं। भारत जोड़ो यात्रा में कई नक्सल फ्रंटल संगठन ने हिस्सा लिया, जिसका रिकॉर्ड भी है।
राहुल गांधी कैसे बच सकते हैं
अमित शाह ने दावा किया कि 2010 में ओडिशा में लाडो शिकोका के साथ राहुल ने मंच साझा किया। शिकोका ने उसी मंच से भड़काऊ भाषण दिया और उन्हें माला भी पहनाई। उन्होंने यह भी दावा किया कि 2018 में हैदराबाद में, राहुल ने जीवी राव से मुलाकात की, जो (नक्सल) विचाराधारा के करीब थे। मई 2025 में शांति समन्वय समिति (सीसीपी) के सदस्यों से मुलाकात की। विपक्षी सदस्यों के शोरगुल के बीच शाह ने कहाकि 172 जवानों को मारने वाला (माड़वी) हिडमा जब मारा गया, तो इंडिया गेट पर नारे लगे कि कितने हिडमा मारेगो, हर घर से हिडमा निकलेगा। उन्होंने कहा कि इससे संबंधित वीडियो को राहुल गांधी ने स्वयं ट्वीट किया था और ऐसे में वह कैसे बच सकते हैं।
कांग्रेस की वामपंथी विचारधारा दोषी
शाह ने कांगेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्होंने 1970 से लेकर मार्च 2026 तक नक्सलाद और नरसंहार का समर्थन किया है। उन्होंने कहाकि जो 20 हजार लोग मारे गए, उसका कोई दोषी है तो वह कांग्रेस की वामपंथी विचारधारा है…। गृह मंत्री ने राहुल पर निशाना साधते हुए कहाकि नक्सलियों के साथ रहते-रहते एक पार्टी और उसके नेता खुद नक्सलवादी बन गए। इसका जवाब इस देश की जनता को उन्हें चुनाव में देना पड़ेगा। यह बात रुकेगी नहीं। जनता की अदालत में उन्हें जवाब देना पड़ेगा। उन्होंने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि मनमोहन सिंह सरकार के दौरान राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) का गठन किया गया और इस तरह एक संविधानेत्तर मंच बनाया गया, जिसकी अध्यक्ष सोनिया गांधी थीं।
जयराम रमेश पर भी आरोप
शाह ने यह दावा भी किया कि कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने महेश राउत नाम के एक नक्सली की रिहाई के लिए अपनी पार्टी शासित एक राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। उन्होंने सवाल किया कि जब केंद्र सरकार का एक संविधानेत्तर प्राधिकरण, जो प्रधानमंत्री से भी ऊपर था, के सदस्य यदि नक्सलवाद के समर्थक हों तो किस तरह से नक्सलियों का हौसला टूटेगा? और यह कांग्रेस पार्टी ने किया था। उन्होंने यह दावा भी किया कि 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जब प्रधानमंत्री ग्रामीण विकास फेलोशिप शुरू की, तो उसका एक लाभार्थी नक्सलवादी बना।
शाह ने कांग्रेस नेता पी चिदंबरम पर भी प्रहार करते हुए दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ के 76 जवानों के मारे जाने के बाद कांग्रेस नेता ने कहा था कि हम आपसे हथियार डालने को नहीं कह सकते। हम जानते हैं कि आप ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि आप हथियारबंद आजादी की लड़ाई में विश्वास करते हैं।
चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक दांव: लिएंडर पेस ने थामा बीजेपी का दामन
31 Mar, 2026 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. भारतीय टेनिस (Indian Tennis) के दिग्गज खिलाड़ी लिएंडर पेस (Leander Paes ) ने भाजपा (BJP) का दामन थाम लिया है। पश्चिम बंगाल (West Bengal) विधानसभा चुनाव (assembly elections) से पहले उनका यह कदम राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा का विषय बन गया है। पेस, जो भारत के सबसे सफल टेनिस खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा नेता सुकांता मजुमादर भी मौजूद रहे। पेस का पार्टी में शामिल होना पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। फिलहाल पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गर्म होता जा रहा है और सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं।
किरण रिजिजू ने लिएंडर को लेकर क्या कहा?
इस मौके पर रिजिजू ने कहा, ‘लिएंडर पेस का भाजपा परिवार में शामिल होना ऐतिहासिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 वर्षों में खेल और खिलाड़ियों को लगातार बढ़ावा दिया है।’ वहीं लिएंडर ने इसे अपने जीवन का सबसे खास दिन बताया। उन्होंने कहा, ‘यह मेरे जीवन का बहुत बड़ा दिन है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह जी और नितिन नबीन जी का धन्यवाद करना चाहता हूं। यह मेरे लिए खेल और युवाओं की सेवा करने का बड़ा अवसर है।’
‘अब युवाओं के लिए काम करूंगा’
लिएंडर पेस ने भारत के लिए ओलंपिक पदक और कई ग्रैंड स्लैम जीते हैं और अब राजनीति के मैदान में अपनी नई पारी खेलने जा रहे हैं। उनका भाजपा से जुड़ना यह दिखाता है कि पार्टी खेल जगत के बड़े चेहरों को अपने साथ जोड़कर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। पेस ने अपने करियर को याद करते हुए कहा कि अब वह नई जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंने 40 साल देश के लिए खेला है, अब समय है युवाओं की सेवा करने का।’ लिएंडर पेस ने केंद्र सरकार की खेल योजनाओं की भी सराहना की। उन्होंने कहा, ‘खेलो इंडिया मूवमेंट और टॉप्स स्कीम बहुत शानदार पहल हैं। मैंने देखा है कि किरेन रिजिजू जी ने टोक्यो ओलंपिक में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के लिए कितनी मेहनत की। प्रधानमंत्री जी ने उन्हें जो रोल दिया था, उसे बखूबी निभाया।’
बंगाल में खेल सुविधाओं की कमी पर बोले पेस
पेस ने बंगाल में खेल सुविधाओं की कमी पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा, ‘ भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। हमें अगले 20-25 वर्षों में स्पोर्ट्स एजुकेशन पर ध्यान देना चाहिए। 1986 में पश्चिम बंगाल में खेल का ज्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था। आज भी बंगाल में इंडोर टेनिस कोर्ट की कमी है। बंगाल, तमिलनाडु और बिहार बेहतर कर सकते हैं, लेकिन हमें युवाओं को खेल शिक्षा के जरिए प्रेरित और सशक्त बनाने पर ध्यान देना होगा। मेरा सपना है कि भारत में महिला सशक्तिकरण के लिए बराबरी के अवसर वाली स्कॉलरशिप प्रोग्राम शुरू किया जाए।’
बंगाल चुनाव से पहले बड़ा संदेश
भाजपा को उम्मीद है कि पेस की लोकप्रियता से खासकर युवा और खेल प्रेमी वोटर्स पर सकारात्मक असर पड़ेगा। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि पेस चुनाव लड़ेंगे या नहीं, लेकिन यह तय माना जा रहा है कि वह चुनाव प्रचार में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनकी छवि और अनुभव पार्टी के लिए एक मजबूत चेहरा साबित हो सकते हैं।
लिएंडर के पिता का पिछले साल हुआ था निधन
लिएंडर पेस का जन्म 17 जून 1973 को कोलकाता में हुआ था। उनके दिवंगत पिता वेस पेस ने 1972 म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था और उनकी मां जेनिफर पेस ने 1980 एशियन बास्केटबॉल टीम की अगुआई कर अपना लोहा मनवाया था। लिएंडर के पिता वेस पेस का पिछले साल ही 80 साल की उम्र में निधन हुआ था।
अटलांटा ओलंपिक में लिएंडर ने जीता था कांस्य
लिएंडर ने 1996 में अटलांटा ओलंपिक में पुरुष टेनिस के एकल वर्ग में ब्राजील के फर्नांडो मेलिगेनी को मात देकर कांस्य पदक अपने नाम किया था। साथ ही वह केडी जाधव के बाद पहले भारतीय खिलाड़ी बने, जिन्होंने व्यक्तिगत ओलंपिक मेडल जीता। उनकी सफलताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उन्हें 1996-97 में खेल रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया था। इसके अलावा वह 1990 में अर्जुन अवॉर्ड, 2001 में पद्म श्री अवॉर्ड और जनवरी 2014 में पद्म भूषण अवॉर्ड से भी नवाजे जा चुके हैं।
पुरुष और मिक्स्ड डबल्स के महारथी हैं लिएंडर
वैसे तो पेस ने पुरुष एकल में कोई ग्रैंडस्लैम नहीं जीता, लेकिन पुरुष युगल में उनके नाम आठ ग्रैंडस्लैम ट्रॉफीज हैं। लिएंडर ने 2012 में एकमात्र ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब जीता था। इसके अलावा वह 1999, 2001 और 2009 में फ्रेंच ओपन, 1999 में विंबलडन और 2006, 2009 और 2013 में यूएस ओपन का खिताब भी जीत चुके हैं। वह मिक्स्ड डबल्स में 10 ग्रैंडस्लैम खिताब जीत चुके हैं। इनमें तीन ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब (2003, 2010, 2015), एक फ्रेंच ओपन खिताब (2016), चार विंबलडन खिताब (1999, 2003, 2010 और 2015) और दो यूएस ओपन खिताब (2008 और 2015) शामिल हैं।
भवानीपुर में सियासी जंग: बंगाल चुनाव में बीजेपी का रणनीतिक कदम
31 Mar, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी-बीजेपी के कड़ा मुकाबला है। इस बीच सीएम ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट ही सबसे हॉट सीट मानी जा रही है। बीजेपी ने ऐसा चक्रव्यूह रचा है कि इस सीट पर ममता बुरी तरह घिरती नजर आ रही हैं। हालांकि यह उनकी पारंपरिक सीट है और वह यहां से कई बार जीत चुकी हैं, लेकिन इस बार के चुनाव में परिस्थितियां कुछ अलग नजर आ रही हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण कोलकाता की इस सीट पर बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी मैदान में हैं। टीएमसी अपने संगठनात्मक ताकत और भावनात्मक जुड़ाव के सहारे इस गढ़ को बचाने की कोशिश कर रही है। यह मुकाबला 2021 के विधानसभा चुनाव की याद दिलाता है, जब ममता बनर्जी ने अपने पूर्व सहयोगी और अब बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ उनके गृह क्षेत्र नंदीग्राम में चुनाव लड़ा था। उस समय ममता हार गई थीं, हालांकि बीजेपी को पूरे राज्य में हार का सामना करना पड़ा था। बाद में ममता ने भवानीपुर उपचुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचीं। अब मैदान बदला है, नतीजा भी बदलेगा या नहीं, यह तो वक्त ही बताएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक टीएमसी भवानीपुर में ‘घर की बेटी’ का भावनात्मक प्रचार कर रही हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बक्शी की अध्यक्षता में हुई रणनीति बैठक में काउंसलरों को निर्देश दिया गया कि वे स्लोगन को घर-घर पहुंचाएं। संदेश साफ है- भवानीपुर सिर्फ सीएम चुन नहीं रहा, बल्कि अपनी बेटी के साथ खड़ा हो रहा है। पार्टी ने आक्रामकता के बजाय भावनात्मक, जुड़ाव और विकास कार्यों पर फोकस करने का फैसला किया है। काउंसलरों को घर-घर जाकर पर्चे बांटने और ममता बनर्जी के विकास कार्यों को हाइलाइट करने को कहा गया है। पूरे क्षेत्र में फोटो कॉर्नर सेट किए गए हैं, जहां लोग ममता बनर्जी के लाइफ-साइज कटआउट के साथ फोटो खिंचवा सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक वॉर्ड 73 के मुक्तदल मोड़ पर पहला ऐसा बूथ है, जहां ममता रहती हैं। यहां अपील की गई है- ममता बनर्जी के साथ खड़े होइए, फोटो खींचिए, बंगाल के लिए बोलिए। एक वरिष्ठ टीएमसी नेता ने कहा कि हम इस चुनाव को आक्रामकता से नहीं, बल्कि भावनात्मक, कनेक्ट और ममताजी के भवानीपुर में किए गए काम को लेकर लड़ रहे हैं।
वहीं बीजेपी का मानना है कि जमीन बदली है। भवानीपुर को ‘मिनी इंडिया’ कहा जाता है, जहां बंगाली भद्रलोक, मारवाड़ी-गुजराती व्यापारी, सिख-जैन परिवार और अच्छी-खासी मुस्लिम आबादी है। करीब 42 फीसदी मतदाता बंगाली हिंदू, 34 फीसदी गैर-बंगाली हिंदू और 24 फीसदी मुस्लिम हैं। बीजेपी ने महीनों से बूथ-बूथ और समुदाय-समुदाय स्तर पर मैपिंग की है। पार्टी के मुताबिक यहां कायस्थ 26.2 फीसदी, मुस्लिम 24.5 फीसदी, पूर्वी भारतीय प्रवासी समुदाय 14.9 फीसदी, मारवाड़ी 10.4 फीसदी और ब्राह्मण 7.6 फीसदी हैं। भवानीपुर की लड़ाई एक नारे से नहीं लड़ी जा सकती। इसे बूथ दर बूथ और समुदाय दर समुदाय लड़ना होगा।
इसी रणनीति के तहत सुवेंदु अधिकारी ने हाल ही में भवानीपुर से गुजरने वाली राम नवमी शोभायात्रा में हिस्सा लिया यानी ठीक ममता बनर्जी के घर के पास। अधिकारी ने कहा कि राज्य अब राम राज्य चाहता है। लोग तुष्टिकरण की राजनीति से थक चुके हैं। वे अच्छे शासन चाहते हैं।
राजनीतिक विश्लेषक बिस्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं कि बीजेपी हिंदू वोटों को बंगाली और गैर-बंगाली समुदायों में काटते हुए एकजुट करने की कोशिश कर रही है और साथ ही ममता को अल्पसंख्यक राजनीति पर घेर रही है। चुनावी रोल की विशेष गहन समीक्षा ने मुकाबले में नया आयाम जोड़ दिया है।
2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने भवानीपुर में अपनी उपस्थिति दर्ज की थी। 2014 में तो बीजेपी ने ममता के वॉर्ड 73 में भी जीत हासिल की थी। 2024 लोकसभा चुनाव में भवानीपुर सेगमेंट में टीएमसी की बढ़त महज 8,297 वोट रह गई, जबकि 2021 उपचुनाव में यह 58,832 थी। आठ वॉर्डों में से पांच में बीजेपी आगे रही, टीएमसी सिर्फ तीन में। ये आंकड़े बताते हैं कि भवानीपुर अब अजेय नहीं रहा। टीएमसी के लिए यह याद दिलाता है कि ममता बनर्जी की सबसे सुरक्षित सीट को अब सबसे मजबूत बचाव की जरूरत है। 2026 के विधानसभा चुनाव में भवानीपुर में 29 अप्रैल को मतदान होगा। यह मुकाबला न सिर्फ व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता का है, बल्कि टीएमसी की भावनात्मक राजनीति और बीजेपी की जातीय-सामाजिक इंजीनियरिंग के बीच विचारधारा की लड़ाई भी है।
मुस्लिम-दलित वोट को साधने का बड़ा दांव, बंगाल में राजनीतिक खेल बदल सकता है
31 Mar, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Mamata Banerjee TMC vs Congress: पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने भी ‘एकला चलो’ की रणनीति अपनाई है। प्रदेश की 294 विधानसभा सीटों में से 284 पर अपने प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर दी है। पहली सूची में कांग्रेस ने कई वरिष्ठ नेताओं को टिकट दिया है। पार्टी ने बहरामपुर से अधीर रंजन चौधरी को टिकट दिया है। दरअसल, इस बार कांग्रेस ने गठबंधन से दूरी बनाते हुए अपने दम पर खोई हुई सियासी जमीन वापस पाने पर फोकस किया है।
कांग्रेस ने 64 मुसलमानों को दिया टिकट
कांग्रेस की रणनीति का सबसे अहम हिस्सा सोशल इंजीनियरिंग है। पार्टी ने पहली लिस्ट में 64 मुस्लिम, 68 दलित, 16 अनुसूचित जनजाति और 42 महिला प्रत्याशियों को टिकट दिया है। पहली सूची के मुताबिक कांग्रेस ने मुस्लिम और दलित वोट बैंक पर फोकस किया है, यह ममता बनर्जी की टीएमसी और बीजेपी के लिए भी मुसीबत बन सकता है।
कांग्रेस ने मुस्लिम बाहुल इलाके की सीट मालदा और मुर्शिदाबाद में भी प्रत्याशी उतारे हैं। पार्टी को उम्मीद है कि मुस्लिम बहुल सीटों में से कुछ सीटों पर जीतकर वापसी की अपनी नींव रख सकती है। हालांकि, यहां मुकाबला आसान नहीं है, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस के अलावा असदुद्दीन ओवैसी और अन्य दल भी मैदान में हैं, जिससे मुस्लिम वोटों का बंटवारा संभव है।
TMC का बिगड़ सकता खेल
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक पिछले चुनाव में ममता बनर्जी ने मुस्लिम वोट बैंक से ही सत्ता में वापसी की थी। वहीं इस बार कांग्रेस का उतरना भी मुश्किल खड़ा कर सकता है। वहीं हुमायूं कबीर की पार्टी भी इस बार चुनावी मैदान में है। ऐसे में मुस्लिम वोट बैंक का बिखराव होना ममता के लिए परेशानी का सबब बन सकता है।
अरविंद केजरीवाल की नसीहत: सत्ता में बैठे लोगों के लिए चेतावनी या कटाक्ष?
31 Mar, 2026 01:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिल्ली : आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी एक रहस्यमयी पोस्ट से सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। अक्सर विरोधियों पर सीधा हमला बोलने वाले केजरीवाल ने इस बार बिना किसी का नाम लिए एक सांकेतिक लेकिन तीखी चेतावनी दी है।
केजरीवाल के इस अंदाज के अब कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यह संदेश सीधे तौर पर उन शक्तियों के लिए है जिनके साथ उनका लंबे समय से टकराव चल रहा है। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता और वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता और आने वाले समय में 'हिसाब' बराबर किया जाएगा। यह पोस्ट एक तरह से उन 'जुल्मों' की ओर इशारा करती है, जिनका सामना उन्होंने और उनकी पार्टी ने हाल के दिनों में किया है।
BJP ने असम चुनाव के लिए जारी किया ‘संकल्प पत्र’, जानें सभी बड़े वादे
31 Mar, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Assam BJP Manifesto: असम में विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने मंगलवार को संकल्प पत्र जारी किया है। इस मौके पर सीएम हिमंत बिस्व सरमा, केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया समेत कई बड़े नेता शामिल थे। इस दौरान बीजेपी ने लोगों से किए वादे किए। सीएम सरमा ने संकल्प पत्र जारी करते हुए कांग्रेस नेता गौरव गोगोई पर भी निशाना साधा है।
पार्टी ने क्या-क्या किए वादे
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने का वादा, लेकिन यह छठी अनुसूची और आदिवासी इलाकों में लागू नहीं होगा।
ओरुनोदई योजना के तहत महिलाओं को मिलने वाली राशि 1250 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह करने का वादा।
लखपति दीदी योजना के तहत 40 लाख महिलाओं को ₹25,000 देने का लक्ष्य।
अगले 5 साल में 2 लाख नौकरियां देने का वादा।
हर जिले में मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी और इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की योजना।
बाढ़ से राहत के लिए पहले दो साल में ₹18,000 करोड़ खर्च करने की घोषणा।
कथित लव जिहाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात।
गौरव गोगोई पर साधा निशाना
संकल्प पत्र जारी करते हुए सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने कांग्रेस नेता गौरव गोगोई पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मेरा साफ़ आरोप है कि गौरव गोगोई को पाकिस्तान, ब्रिटेन में प्रॉपर्टी की जानकारी और बैंक अकाउंट की जानकारी ECI को देनी चाहिए।साथ ही उन्होंने कहा कि हम एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज, एक यूनिवर्सिटी, एक इंजीनियरिंग कॉलेज बनाना चाहते हैं।
निर्मला सीतारमण ने क्या कहा
इस दौरान केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 77 बार असम आए हैं, जबकि एक प्रधानमंत्री, जो असम से कांग्रेस के सांसद थे, उन्होंने राज्य का 10 बार से ज़्यादा दौरा नहीं किया। उन्होंने आगे कहा कि असम में आज शांति है। 2007 में, कांग्रेस के राज में हमले की 474 घटनाएं हुईं, 287 आम लोग मारे गए। BJP सरकार आने के बाद यह हर साल 128 मौतों से घटकर सिर्फ़ 99 हो गई। वेलफेयर अपने लेवल पर है। आज, असम के 81.65% घर जल जीवन मिशन के पीने के पानी के प्रोग्राम के तहत आते हैं।
कांग्रेस ने भी गारंटी का किया ऐलान
बता दें कि इससे पहले कांग्रेस ने भी असम की जनता को पांच गारंटी दी हैं..
हर महिला को मासिक नकद सहायता
बुजुर्गों को 1250 रुपये पेंशन
हर परिवार को 25 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज
गायक जुबीन गर्ग को 100 दिनों में न्याय
10 लाख लोगों को जमीन के अधिकार
TMC छोड़ BJP में जाएंगे लिएंडर पेस? चुनाव से पहले बड़ा सियासी दांव
31 Mar, 2026 11:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले बीजेपी एक बड़े मास्टर स्ट्रोक की तैयारी में है। खबर है कि पूर्व टेनिस स्टार लिएंडर पेस आज बीजेपी में शामिल होंगे। लिएंडर पेस ने इससे पहले टीएमसी में थे, 2021 में उन्होंने गोवा में टीएमसी की सदस्यता ली थी, लेकिन पार्टी में उन्हें सक्रिय भूमिका नहीं मिली थी, जिसके बाद हाल के दिनों में उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन से भी मुलाकात की थी।
भारत के महान टेनिस खिलाड़ी रहे हैं लिएंडर पेस
लिएंडर पेस भारत के सबसे सफल और चर्चित टेनिस खिलाड़ियों में से एक रहे हैं। उनका जन्म 17 जून 1973 को कोलकाता में हुआ था। खेल उनके परिवार में ही था-उनके पिता वीसे पेस 1972 ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहे थे, जबकि उनकी मां जेनिफर पेस राष्ट्रीय स्तर की बास्केटबॉल खिलाड़ी थीं। लिएंडर पेस ने टेनिस में बहुत कम उम्र से ही अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी। 1990 के दशक में वे भारतीय टेनिस के सबसे बड़े सितारों में शामिल हो गए। उन्होंने 1996 केअटलांटा ओलंपिक्स में पुरुष एकल (Singles) में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। यह उस समय भारत के लिए व्यक्तिगत स्पर्धा में लगभग 44 साल बाद आया ओलंपिक पदक था, जिससे उनकी लोकप्रियता पूरे देश में तेजी से बढ़ गई। खेल के अलावा लिएंडर पेस समय-समय पर सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में भी सक्रिय रहे हैं। हाल के वर्षों में उन्होंने राजनीति में भी रुचि दिखाई और 2021 में All India Trinamool Congress से जुड़े थे।
दो चरणों में विधानसभा चुनाव
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में आयोजित किए जाएंगे। राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना और नतीजों की घोषणा 4 मई को की जाएगी।
तेल खरीद पर सियासत: राहुल बोले—ट्रंप की अनुमति के बिना फैसला नहीं, पीएम पर निशाना
31 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी एक कंप्रोमाइज्ड प्रधानमंत्री हैं। केरल में जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल ने आरोप लगाया कि अमरीका-भारत समझौते के डिटेल देखने पर साफ हो जाएगा कि कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री इसे तब तक नहीं साइन कर सकता, जब तक वह कंप्रोमाइज्ड न हो। राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र को अमरीकी किसानों के लिए खोल दिया है, साथ ही देश की ऊर्जा सुरक्षा को अमरीकियों के हवाले कर दिया है। आज भारत अपनी मर्जी से तेल नहीं खरीद सकता, बल्कि उसे इजाजत लेनी पड़ती है। राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी केरल में यूडीएफ सरकार नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी जानते हैं कि भ्रष्टाचार के कारण वे एलडीएफ सरकार को नियंत्रित कर सकते हैं और एलडीएफ कभी भी दिल्ली में उनको चुनौती नहीं दे सकता। इसलिए वह समझते हैं कि केवल कांग्रेस ही उन्हें दिल्ली और पूरे देश में हरा सकती है, इसी वजह से मोदी केरल में एलडीएफ को मजबूत करना चाहते हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी केरल दौरे के दौरान सबरीमाला मुद्दे पर चुप रहे, जो साफ संकेत है कि भाजपा और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा साथ काम कर रहे हैं।
आरएसएस को ही मिलेगा विदेशी फंड
भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ हमारी वैचारिक लड़ाई है। उन्होंने कोट्टायम में कहा कि विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) में संशोधन विधेयक लाया जाना है, जिससे गंभीर बात है, क्योंकि इसके तहत केवल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ही विदेशी फंड प्राप्त कर सकेगा, जबकि अन्य संगठनों पर रोक लगा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि आरएसएस में ऐसी क्या खास बात है कि उनके लिए अलग नियम हैं? वे नफरत फैलाते हैं और लोगों को बांटते हैं। भाजपा इसी तरह काम करती है।
बिहार राजनीति में हलचल: नीतीश का इस्तीफा, अशोक चौधरी रोए, तेजस्वी का बड़ा आरोप
31 Mar, 2026 10:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना:बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने सोमवार को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा विजय चौधरी और एमएलसी संजय गांधी लेकर विधान परिषद पहुंचे। मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री जी राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित हो चुके हैं। यह तो संवैधानिक प्रक्रिया है। उनका त्यागपत्र एमएलसी संजय गांधी ने विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह सौंप दिया है। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद मंत्री अशोक चौधरी भावुक नजर आए। वह फफक कर रोते दिखे।
वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि बीजेपी ने मुख्यमंत्री से दबाव में इस्तीफा दिलवाया है। उधर, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का इस्तीफा बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय सरावगी ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार को सौंप दिया है। बता दें मुख्यमंत्री नीतीश 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। उनके साथ एनडीए के चार अन्य सदस्य भी चुने गए थे, जिनमें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी शामिल हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई सदस्य दूसरे सदन के लिए चुना जाता है, तो उसे 14 दिन के भीतर दोनों सदनों में से किसी एक से इस्तीफा देना जरूरी होता है।
मां के लिए नितिन नवीन की भावुक पोस्ट
इस्तीफे के बीच बीजेपी अध्यक्ष ने मां को लेकर एक भावुक पोस्ट किया। सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि मां की परछाई तो नहीं है, पर मां का एहसास आज भी उसी तरह जीवंत है। पिछले 5 सालों में कई मुकाम और प्रतिष्ठा मिली, पर उन सब के बीच में कुछ खालीपन का एहसास हमेशा दिल को कचोटता भी है। मेरे मंत्री बनने के कुछ दिन बाद मां हम सब को छोडक़र चली गई, लगता है जैसे वो उसी दिन के इंतजार में थी। मुझे आशीर्वाद दिया फिर अपनी अंतिम यात्रा पर चली गईं। मां के होने और न होने का अंतर शायद वही लोग समझ सकते हैं, जिन्होंने मां को खोया हो।
चुनावी संग्राम तेज: ममता की EC से शिकायत, BJP पर प्रक्रिया प्रभावित करने के आरोप
31 Mar, 2026 09:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नयी दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को चुनाव आयोग से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने और मतदाताओं को धमकाने का आरोप लगाया है। इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और किरेन रिजिजू के नेतृत्व में भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग पहुंचकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। भाजपा प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, किरण रिजिजू और सुकांत मजूमदार के साथ-साथ अनिल बलूनी और पार्टी के कई नेता शामिल थे। नेताओं ने आयोग को एक ज्ञापन सौंपकर राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग की। श्री रिजिजू ने मीडिया से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर लोगों के घरों में जाकर धमकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने प्रशासन और पुलिस की मदद से पूरे चुनाव को हाईजैक कर लिया है।
भाजपा नेताओं का दावा है कि पिछले चुनावों में भी सत्ताधारी दल ने दबाव और दादागिरी के जरिए जीत हासिल की थी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदान प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और इसे किसी भी तरह से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। भाजपा ने चुनाव आयोग से अपील की कि वह पश्चिम बंगाल के प्रशासन और पुलिस तंत्र को अपने नियंत्रण में लेकर निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करे। वहीं, भाजपा का यह भी दावा है कि राज्य में जनता तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ है और इसी वजह से सत्ताधारी दल घबराकर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। चुनाव आयोग ने आश्वासन दिया है कि सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
बगावत बर्दाश्त नहीं’ – टिकट विवाद पर Mamata Banerjee सख्त
30 Mar, 2026 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए तृणमूल कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर चल रही आंतरिक कलह के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विद्रोहियों को कड़ा संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने सोमवार को नारायणगढ़ में एक चुनावी रैली के दौरान कहा, “पार्टी टिकट न मिलने का मतलब विद्रोह नहीं होना चाहिए। टिकट न मिलने का यह अर्थ नहीं है कि किसी को पार्टी का विरोध करना चाहिए।” ममता बनर्जी ने कहा कि अनुशासन पार्टी का मुख्य स्तंभ है और इससे किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। नेताओं को एकजुट रहना चाहिए और जनसेवा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जो लोग जनता से जुड़े रहते हैं और उनके लिए काम करते हैं, उन्हीं के नाम पर टिकट के लिए विचार किया जाएगा। यदि उनका चयन नहीं होता है, तो नाराजगी का कोई कारण नहीं है।मुख्यमंत्री की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब तृणमूल कांग्रेस द्वारा उम्मीदवारों की सूची घोषित किए जाने के कुछ हफ्तों बाद भी आंतरिक कलह सामने आ रही है। कई निवर्तमान विधायकों ने सार्वजनिक रूप से असंतोष व्यक्त किया है, जिससे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की चिंता बढ़ गई है। इससे पहले कुछ दिन पहले ही पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने विद्रोहियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी थी कि जो लोग आधिकारिक उम्मीदवारों को नुकसान पहुँचायेंगे या पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होंगे, उन्हें ‘रेड कार्ड’ दिखाकर स्थायी रूप से बाहर कर दिया जाएगा। उन्होंने जोर दिया था कि किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पार्टी तथा ममता बनर्जी के प्रति वफादारी ही प्राथमिकता होगी।
तृणमूल कांग्रेस ने आगामी चुनावों के लिए अपनी उम्मीदवार सूची में बड़े बदलाव किए हैं, जिसमें 74 मौजूदा विधायकों और चार मंत्रियों के टिकट काट दिए गए हैं। इन सभी ने हालांकि प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन कई नेताओं ने खुलकर निराशा जताई है और कुछ ने राजनीति से संन्यास लेने तक का संकेत दिया है। ममता बनर्जी ने जोर देकर कहा कि चयन प्रक्रिया में किसी का अपमान नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, “हमें एक बार टिकट मिल सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि हर बार मिले। हमारा लक्ष्य लोगों के साथ खड़े होना और मिलकर काम करना होना चाहिए।”मुख्यमंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि असंतोष का सार्वजनिक प्रदर्शन मतदाताओं को पसंद नहीं आता और पार्टी नेतृत्व इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। ये बयान संकेत देते हैं कि चुनावों की तैयारी के बीच पार्टी नेतृत्व गुटबाजी के खिलाफ सख्त रुख अपना रहा है और अपने रैंकों के भीतर अनुशासनहीनता के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रहा है।
बिहार को बनाएंगे देश का नंबर-1 प्रदेश – Nishant Kumar की पहली प्रतिक्रिया
30 Mar, 2026 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार की राजनीतिक गलियारों में सोमवार, 30 मार्च, 2026 को एक महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज किया गया। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद (एमएलसी) के सदस्य पद से अपना इस्तीफा दे दिया है। यह कदम उनकी राज्यसभा में नई भूमिका के लिए निर्वाचित होने के बाद उठाया गया है। उनके इस फैसले के तुरंत बाद, नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें उन्होंने बिहार को और अधिक सशक्त बनाने और अपने पिता के दशकों पुराने सपनों को साकार करने की बात कही है। नीतीश कुमार के इस इस्तीफे के बाद, उनके मुख्यमंत्री पद से भी जल्द ही इस्तीफा देने की अटकलें तेज हो गई हैं, जिसके चलते बिहार की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है।
नीतीश कुमार के MLC पद से इस्तीफे पर निशांत कुमार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री के एमएलसी पद छोड़ने की खबर आते ही निशांत कुमार ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से एक पोस्ट साझा की। इस पोस्ट में उन्होंने बिहार के पिछले दो दशकों की प्रगति को रेखांकित किया। निशांत ने लिखा, “आज जो बिहार आप विभिन्न क्षेत्रों में विकास की नई ऊंचाइयों को छूता देख रहे हैं, वह निसंदेह नीतीश जी के दो दशकों की सतत सेवा, समर्पण और दूरदृष्टि का ही प्रतिफल है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पिता के अथक प्रयासों ने राज्य को एक नई दिशा दी है।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए निशांत कुमार ने बिहार के भविष्य के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, “विकास की यह अनवरत यात्रा और अधिक गति से आगे बढ़े। हमारा प्रदेश हर क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान प्राप्त करे।” इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्होंने सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया। निशांत ने आह्वान किया, “इसी दृढ़ संकल्प के साथ आएं, हम सभी एकजुट हों। मिलकर बिहार को भारत का सर्वोत्तम प्रदेश बनाएं, जो हर मायने में मिसाल कायम करे।” यह बयान नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाने की उनकी मंशा को दर्शाता है।
निशांत कुमार ने आगे ‘हम सब मिलकर यह प्रण लें’ शीर्षक से अपनी बात रखी, जिसमें उन्होंने भावनात्मक अपील की। उन्होंने कहा, “बिहार का कण-कण उस असाधारण विकास यात्रा का जीवंत साक्षी है, जिसे पिताजी ने पिछले दो दशकों की अपनी निरंतर सेवा और कठोर परिश्रम से सींचा है।” निशांत ने यह भी जोड़ा कि मुख्यमंत्री की ‘संकल्प साधना’ की इस मशाल को सिर्फ जलाए रखना ही नहीं, बल्कि उसे और भी अधिक सेवा भावना और समर्पण के साथ आगे ले जाना है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “आएं, हम सब मिलकर यह प्रण लें कि नीतीश जी के सपनों के बिहार को हम न सिर्फ और अधिक संवारेंगे, बल्कि उसे हर क्षेत्र में सशक्त और आत्मनिर्भर बनाएंगे।”
नीतीश कुमार का एमएलसी पद से इस्तीफा देना एक संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है। दरअसल, उन्हें हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित किया गया है, और इस वजह से उन्हें अपनी विधान परिषद सदस्यता छोड़नी पड़ी। नियमों के अनुसार, एक व्यक्ति एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं रह सकता। यह घटनाक्रम बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है, क्योंकि अब यह तय माना जा रहा है कि आने वाले समय में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद की कुर्सी भी छोड़ देंगे, जिसके बाद बिहार को एक नया मुख्यमंत्री मिलेगा।
निशांत कुमार को बिहार मुख्यमंत्री बनाने की मांग
नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने की संभावनाओं के बीच, उनके बेटे निशांत कुमार को राज्य का अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग अब खुलकर सामने आ रही है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विभिन्न कार्यकर्ता और नेता लगातार यह मांग उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि निशांत कुमार अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार हैं और उनके पास राज्य के विकास के लिए एक स्पष्ट दृष्टिकोण है। जेडीयू के भीतर यह चर्चा तेज है कि नीतीश के बाद निशांत ही पार्टी का चेहरा और सरकार का नेतृत्व संभालें।
निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की यह मांग सिर्फ जेडीयू तक ही सीमित नहीं है। राज्य के अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों और नेताओं ने भी इस विचार का समर्थन किया है। इनमें सबसे प्रमुख नाम सांसद पप्पू यादव का है। पप्पू यादव ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री जनता दल यूनाइटेड से ही होना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से निशांत कुमार के नाम का उल्लेख करते हुए कहा है कि उन्हें ही राज्य के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए। पप्पू यादव ने भाजपा से कोई मुख्यमंत्री न होने की बात पर भी जोर दिया है, जो एनडीए गठबंधन के भीतर संभावित शक्ति संतुलन और भविष्य की रणनीतियों को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत है।
एनडीए गठबंधन की अगली रणनीति पर टिकी सभी की निगाहें
अब जब नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना तय है और उनके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की संभावना प्रबल है, तो बिहार की सियासत में सबकी निगाहें एनडीए गठबंधन की अगली रणनीति पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि गठबंधन इस बड़े बदलाव को कैसे संभालता है और अगले मुख्यमंत्री के नाम पर कैसे सहमति बनती है। फिलहाल, बिहार की राजनीति में एक ‘नई तस्वीर’ जरूर दिखने वाली है, जैसा कि स्रोत में बताया गया है। यह नई तस्वीर संभवतः युवा नेतृत्व, गठबंधन की आंतरिक गतिशीलता और राज्य के भविष्य की दिशा को लेकर कई नए सवाल और संभावनाएं पैदा करेगी। क्या निशांत कुमार अपने पिता की राजनीतिक विरासत के स्वाभाविक उत्तराधिकारी के रूप में उभरेंगे, या एनडीए कोई और विकल्प तलाशेगा, यह आने वाले कुछ हफ्तों में स्पष्ट हो जाएगा।
नक्सलवाद पर संसद में गरजे Amit Shah, कहा– ‘गोली का जवाब गोली से
30 Mar, 2026 07:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Parliament Session: नक्सलवाद के मुद्दे पर गृहमंत्री अमित शाह लोकसभा में बयान दे रहे हैं. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है. हर गांव में स्कूल बनाने की मुहिम चली, राशन की दुकान खोलनी की मुहिम चली. गैसे के चूल्हे वितरित हो रहे हैं. मेरा सवाल उन लोगों से है जो नक्सलवाद की वकालत कर रहे थे ये अब तक क्यों नहीं हुआ.
लाल आंतक की परछाई खत्म हो चुकी है-अमित शाह
उन्होंने कहा ‘बस्तर पर लाल आंतक की परछाई थी जो अब लगभग हट चुकी है. अब जिले में स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं. बीस हजार युवा मारे गए कई दिव्यांग हो गए. क्या इसे देश की सबसे बड़ी पंचायत ने इस पर चिंतन नहीं करना चाहिए. वामपंथी विचारधारा ही नक्सलवाद का कारण थी.’ उन्होंने आगे कहा ‘ नक्सलवाद का मूल कारण विकास की मांग नहीं है बल्कि एक विचारधारा है. जिसे राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के लिए 1970 से इंदिरा जी ने स्वीकार कर लिया. जिससे ये फैलता चला गया.’
आज वामपंथ उग्रवाद समाप्त हो रहा है- अमित शाह
गृह मंत्री ने कहा कि आज वामपंथ उग्रवाद समाप्त हो रहा है, उसमें जनता का भी साथ है और जो जवान शहीद हुए. जिन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबकुछ बलिदान कर दिया. उन्हें याद करना चाहता हूं. इस विचारधारा का विकास से कोई ताल्लुक नहीं. जब हम आजाद हुए हमने कहा सत्यमेव जयते. इनका कहना है कि सत्ता बंदूक की नोंक से निकलती है.
गृहमंत्री ने बताया अभी तक क्यों नहीं हुआ आदिवारियों का विकास?
कांग्रेस पर हमला बोलते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि मैं आज जो ये कांग्रेसी हमेशा कहते रहते हैं कि आदिवासियों का विकास क्यों नहीं हुआ तो मैं एक सवाल पूछना चाहता हूं कि 60 साल तो ये पार्टी सत्ता में थी, फिर आदिवासियों का विकास क्यों नहीं किया. असम में विकास को वामपंथी उग्रवादियों ने सालों तक नहीं पहुंचने दिया जो अब मोदी सरकार में हर जगह जा रहा है. नक्सलवाद की वजह से यहां सालों तक गरीबी रही. इसकी जड़े गरीबी से जुड़ी नहीं है बल्कि वैचारिक है.
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"अब विकास में बाधा नहीं सहेगा बंगाल": भाजपा के समर्थन में बोले डॉ. मोहन यादव
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डायमंड सिटी को जाम से मिलेगी मुक्ति; सूरत मेट्रो के 8.5 किमी लंबे रूट पर टेस्टिंग जारी।
देवघर और हजारीबाग में नए चेहरों की एंट्री; झारखंड सरकार ने प्रशासनिक अमले में किया बड़ा उलटफेर।
