राजनीति
JPC ने सुझाया नया प्रावधान, PM-CM की बर्खास्तगी नहीं बल्कि निलंबन हो
13 Jul, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के न्यायिक हिरासत में जाने की स्थिति से निपटने के लिए तैयार किए जा रहे 130वें संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने कई अहम सिफारिशें की हैं। समिति ने अपनी मसौदा रिपोर्ट में यह दृष्टिकोण अपनाया है कि केवल हिरासत में होने के कारण किसी निर्वाचित प्रतिनिधि को हमेशा के लिए पद से बेदखल करने के बजाय उनका 'निलंबन' किया जाना संवैधानिक रूप से ज्यादा सही कदम होगा। समिति का तर्क है कि अदालत का आखिरी फैसला आने से पहले किसी जनप्रतिनिधि को स्थायी रूप से हटाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
पद से हटाने की जगह अस्थायी निलंबन की वकालत
भ्रष्टाचार निरोधक प्रावधानों से जुड़े इस विधेयक की समीक्षा करते हुए जेपीसी ने सुझाव दिया है कि मसौदे में इस्तेमाल किए गए ‘पद से हटाने’ (Removal) शब्द की जगह ‘निलंबन’ (Suspension) शब्द को शामिल किया जाए। समिति के मुताबिक, यदि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों या मुख्यमंत्रियों पर गंभीर आरोप लगते हैं, तो मुकदमों का अंतिम फैसला आने तक उन्हें सिर्फ अस्थायी रूप से निलंबित किया जाना चाहिए। इससे जहां एक तरफ उच्च संवैधानिक पदों की मर्यादा सुरक्षित रहेगी, वहीं दूसरी तरफ न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक संबंधित व्यक्ति के कानूनी अधिकार भी प्रभावित नहीं होंगे।
30 दिनों की अनिवार्य हिरासत वाले नियम का विरोध
इस विधेयक में पहले यह प्रस्ताव था कि यदि कोई प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो 31वें दिन उसका पद स्वतः ही समाप्त मान लिया जाएगा। जेपीसी की मसौदा रिपोर्ट के अनुसार, इस नियम पर अधिकतर पक्षों ने असहमति जताई है। समिति का मानना है कि महज हिरासत को आधार बनाकर पद छीन लेना असंवैधानिक हो सकता है, क्योंकि किसी भी व्यक्ति का दोषी या बेगुनाह होना केवल अदालत के अंतिम फैसले से ही साबित होता है।
कानूनी स्पष्टता के लिए 'गंभीर अपराध' का दायरा
विधेयक के संभावित दुरुपयोग को रोकने और इसे अधिक स्पष्ट बनाने के लिए जेपीसी ने ‘गंभीर अपराध’ को परिभाषित करने की भी सलाह दी है। समिति का प्रस्ताव है कि इस कानून के तहत केवल उन्हीं मामलों को शामिल किया जाना चाहिए जिनमें कम से कम पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो। इससे कानून के इस्तेमाल को लेकर किसी भी तरह का भ्रम बाकी नहीं रहेगा।
दोषमुक्त होने पर पद की बहाली और त्वरित सुनवाई
समिति ने यह सिफारिश भी की है कि यदि आरोपी जनप्रतिनिधि अदालत से ससम्मान बरी हो जाता है, या फिर तय समय सीमा के भीतर कानूनी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती है, तो उसका निलंबन बिना किसी देरी के स्वतः ही खत्म हो जाना चाहिए। इसके साथ ही, जेपीसी ने यह भी कहा है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों जैसे शीर्ष पदों से जुड़े मामलों की अनिश्चितता को जल्द खत्म करने के लिए इनकी सुनवाई फास्ट ट्रैक या विशेष अदालतों में समयबद्ध तरीके से की जानी चाहिए। हालांकि, ये सभी सुझाव अभी केवल मसौदा रिपोर्ट का हिस्सा हैं और अंतिम फैसला संसद में रिपोर्ट पेश होने तथा सरकार की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।
BJP छोड़ने के बाद अन्नामलाई के नए सियासी संकेत, बयान बना चर्चा का विषय
13 Jul, 2026 03:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने अपने नए सामाजिक-राजनीतिक संगठन ‘वी द लीडर्स’ (We the Leaders) के जरिए भविष्य के इरादे साफ कर दिए हैं। पोल्लाची में आयोजित इस फाउंडेशन के पहले बड़े सम्मेलन में उन्होंने साफ संकेत दिए कि यह मुहिम आने वाले समय में एक नए राजनीतिक दल की शक्ल अख्तियार कर सकती है। अपने संबोधन में अन्नामलाई ने जाति और धर्म से ऊपर उठकर समानता, राष्ट्रवाद और जनकल्याण पर आधारित राजनीति की पुरजोर वकालत की।
धर्म और राजनीति पर व्यक्तिगत दृष्टिकोण
सम्मेलन के दौरान अन्नामलाई ने अपने व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन के अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से हिंदू हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में कदम रखते ही वह जाति और धर्म की पहचान को पीछे छोड़ देते हैं। उनका मानना है कि हर जगह धर्म का प्रदर्शन करना जरूरी नहीं है। उन्होंने वास्तविक हिंदू दर्शन का हवाला देते हुए कहा कि यह विचार समाज में सभी को समान दर्जा देता है और किसी भी तरह के भेदभाव या ऊंच-नीच को खारिज करता है।
तमिल अस्मिता और राष्ट्रवाद का अनूठा संगम
अन्नामलाई ने अपने भाषण में क्षेत्रीय पहचान और राष्ट्रवाद के बीच संतुलन बनाने की बात कही। उन्होंने गर्व से कहा कि वह जितने बड़े भारतीय हैं, उतने ही समर्पित तमिल भी हैं। उनके मुताबिक, तमिल संस्कृति और भारतीय राष्ट्रवाद एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे को पूरा करते हैं। उन्होंने एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया जो समाज में बिखराव पैदा करने के बजाय लोगों को एकजुट करने का काम करे।
क्षेत्रीय दलों के प्रति बदला रुख
इस मौके पर अन्नामलाई के बयानों में तमिलनाडु के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य, विशेषकर तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) को लेकर एक नरम रुख देखने को मिला। उन्होंने युवा वर्ग की तारीफ करते हुए कहा कि राज्य की सियासी दिशा तय करने में युवाओं की भूमिका सबसे अहम होने वाली है। हालांकि, उन्होंने किसी भी दल या मुख्यमंत्री सी. विजय के साथ औपचारिक गठबंधन की खबरों को जल्दबाजी करार दिया, लेकिन उनके इस बदले रुख को भविष्य की नई राजनीतिक संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
नशामुक्ति और सामाजिक सुधारों का संकल्प
भाजपा से अलग होने के बाद अपने इस पहले बड़े शक्ति प्रदर्शन में अन्नामलाई ने आगामी छह महीनों का रोडमैप भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उनका संगठन पर्यावरण और नशामुक्त समाज जैसे छह मुख्य मुद्दों पर काम करेगा। इस सम्मेलन में मादक पदार्थों के खिलाफ कई अहम प्रस्ताव भी पास किए गए। इसके साथ ही, समाज को नशे की लत से बचाने के लिए हर साल जुलाई महीने को ‘व्हाइट बैंड मंथ’ के तौर पर मनाने का फैसला किया गया है, जिसके तहत लोगों को जागरूक किया जाएगा।
राहुल गांधी की विदेश यात्रा बनी सियासी मुद्दा, BJP ने मांगा स्पष्टीकरण
13 Jul, 2026 03:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के आगाज से ऐन पहले कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक बार फिर भाजपा के निशाने पर आ गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राहुल गांधी के हालिया विदेश दौरे को लेकर चौतरफा हमला बोलते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सत्तारूढ़ दल का स्पष्ट कहना है कि देश की जनता को यह जानने का पूरा हक है कि विपक्ष के नेता 22 जून से 13 जुलाई के बीच किस देश की यात्रा पर थे, वहां उन्होंने किन-किन लोगों से मुलाकातें कीं और इस पूरे दौरे का वित्तीय खर्च किसने वहन किया।
भाजपा नेताओं के मुताबिक, नेता प्रतिपक्ष का संवैधानिक पद संभालने के बाद राहुल गांधी की विदेश यात्राओं में पारदर्शिता होना अनिवार्य है, क्योंकि बाहरी मुल्कों में होने वाली ऐसी मुलाकातों का सीधा असर भारत के राजनीतिक और रणनीतिक हितों पर पड़ सकता है।
भाजपा का तीखा सवाल- राहुल गांधी का विदेश दौरा रहस्य क्यों?
भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस मुद्दे को उठाते हुए राहुल गांधी के करीब तीन हफ्ते लंबे विदेश प्रवास को एक बड़ा रहस्य करार दिया। उन्होंने मांग की कि कांग्रेस नेता को खुद सामने आकर अपने इस दौरे के मकसद और वहां हुई बैठकों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए। भाजपा का आरोप है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टिकोण से देश की जनता को यह स्पष्ट पता होना चाहिए कि विपक्ष के इतने बड़े नेता विदेश में किन ताकतों के संपर्क में हैं।
वायनाड भूस्खलन को लेकर भाई-बहन पर साधा निशाना
विदेश दौरे के साथ-साथ भाजपा ने केरल के वायनाड में हुई प्राकृतिक आपदा को लेकर भी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को आड़े हाथों लिया। भाजपा ने आरोप लगाया कि 7 जुलाई को अनक्कमपोयिल-मेप्पाडी ट्विन ट्यूब टनल परियोजना क्षेत्र में हुए भीषण भूस्खलन के कारण आठ लोगों की जान चली गई, लेकिन इसके बावजूद वायनाड के पूर्व सांसद राहुल गांधी और वर्तमान सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा पीड़ित परिवारों की सुध लेने या प्रभावित इलाके का दौरा करने नहीं पहुंचे।
राहुल की गैर-मौजूदगी से टला कांग्रेस का छात्र आंदोलन?
भाजपा ने कांग्रेस के आगामी छात्र संपर्क अभियान 'छात्रों की गूंज' के अचानक स्थगित होने के पीछे भी राहुल गांधी की अनुपस्थिति को ही मुख्य वजह बताया है। पार्टी का दावा है कि प्रयागराज, पटना और देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाले इन महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को सिर्फ इसलिए आगे बढ़ाना पड़ा क्योंकि राहुल गांधी ने अपना विदेश दौरा लंबा कर दिया है और उनके अब 17 जुलाई के आसपास स्वदेश लौटने की उम्मीद है। दूसरी तरफ, इन तमाम सियासी हमलों के बीच कांग्रेस पार्टी की ओर से राहुल गांधी के इस दौरे को लेकर फिलहाल कोई भी आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान सामने नहीं आया है।
BJP पर गंभीर आरोप लगाकर फंसे उमर अब्दुल्ला, कानूनी कार्रवाई शुरू
13 Jul, 2026 02:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों की खरीद-फरोख्त और सरकार को अस्थिर करने के दावों को लेकर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला कानूनी पचड़े में फंसते नजर आ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल शर्मा ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए उच्च न्यायालय के अधिवक्ता परिमोक्ष सेठ के माध्यम से मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को एक कानूनी नोटिस तामील कराया है।
यह पूरा विवाद मुख्यमंत्री द्वारा पार्टी कार्यकर्ताओं की एक बैठक के दौरान दिए गए उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा नेताओं ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों को पाला बदलने के लिए 20 से 30 करोड़ रुपये और कैबिनेट मंत्री पद का प्रलोभन दिया था।
कानूनी नोटिस में लगाए गए गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री को भेजे गए इस नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि 11 जुलाई को श्रीनगर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भाजपा के खिलाफ बिना किसी सबूत के बेहद आपत्तिजनक और मानहानिकारक टिप्पणियां की थीं। नोटिस के अनुसार, उमर अब्दुल्ला ने सार्वजनिक मंच से दावा किया था कि भाजपा के पदाधिकारियों ने जम्मू संभाग के नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायकों से संपर्क साधकर उन्हें मोटी रकम और सत्ता का लालच दिया। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप मढ़ा था कि इस कथित सौदेबाजी में देश की सर्वोच्च अदालत के एक वरिष्ठ अधिवक्ता और भाजपा पदाधिकारी भी शामिल हैं, जिन्होंने विधायकों को रिश्वत देने का प्रयास किया।
भाजपा द्वारा आरोपों का पुरजोर खंडन
नोटिस के जरिए भाजपा ने मुख्यमंत्री के इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार और साक्ष्यविहीन करार दिया है। पार्टी का कहना है कि यह बयान विशुद्ध रूप से राजनीतिक द्वेष और दुर्भावना से प्रेरित होकर दिया गया है, जिसका एकमात्र उद्देश्य सार्वजनिक रूप से भाजपा की छवि और साख को बट्टा लगाना है। नोटिस में यह भी रेखांकित किया गया है कि किसी प्रतिष्ठित राजनीतिक दल पर इस तरह के झूठे लांछन लगाना कानूनन अपराध है। मुख्यमंत्री के इस कृत्य को मानहानि की श्रेणी में रखते हुए भाजपा ने उनके खिलाफ दीवानी (Civil) और आपराधिक (Criminal) दोनों तरह की विधिक कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
माफी न मांगने पर 100 करोड़ के मुकदमे की चेतावनी
इस कानूनी नोटिस के माध्यम से भाजपा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सामने कड़ी शर्तें रखी हैं। पार्टी ने मांग की है कि मुख्यमंत्री तुरंत अपने इन विवादित बयानों को वापस लें और नोटिस मिलने के अगले 7 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से बिना किसी शर्त के माफी मांगें। इसके साथ ही उन्हें भविष्य में इस प्रकार के झूठे आरोप न दोहराने की हिदायत भी दी गई है। भाजपा ने दो टूक शब्दों में सचेत किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर मुख्यमंत्री माफी नहीं मांगते हैं, तो उनके खिलाफ 100 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।
तेजप्रताप यादव के करीबी उम्मीदवार पर कार्रवाई, नामांकन के बाद हुई गिरफ्तारी
13 Jul, 2026 02:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां चरम पर हैं, जहां सभी राजनीतिक दलों के उम्मीदवार एक-एक कर अपना पर्चा भर रहे हैं। इसी कड़ी में तेज प्रताप यादव की पार्टी 'जनशक्ति जनता दल' (जेजेडी) की प्रत्याशी वीणा मानवी ने भी अपना नामांकन दाखिल किया। हालांकि, चुनावी हलचल के बीच उस समय नाटकीय मोड़ आ गया जब नामांकन की प्रक्रिया पूरी होते ही पुलिस ने वीणा मानवी को हिरासत में ले लिया। इस अचानक हुई कार्रवाई के कारण पटना जिलाधिकारी (डीएम) कार्यालय के बाहर काफी देर तक अफरा-तफरी और हंगामे का माहौल बना रहा।
गिरफ्तारी के दौरान महिला प्रत्याशी का हाई-वोल्टेज ड्रामा
पुलिस जब वीणा मानवी को हिरासत में लेने पहुंची, तो समाहरणालय परिसर में भारी ड्रामा देखने को मिला। जेजेडी प्रत्याशी पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध करते हुए जोर-जोर से रोने और चिल्लाने लगीं। खुद को घिरता देख उन्होंने वहां मौजूद एक दरवाजे को लगातार पीटना शुरू कर दिया और पुलिस से बचने की कोशिश की। हालांकि, वहां तैनात महिला पुलिसकर्मियों और सुरक्षाबलों ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें नियंत्रित किया और सुरक्षा घेरे में लेते हुए पुलिस वाहन में बैठा दिया।
आंसुओं के बीच जनता के सामने जोड़े हाथ
शुरुआती विरोध और तीखी नोकझोंक के बाद जब पुलिस प्रशासन उन्हें गाड़ी में बैठाकर ले जाने लगा, तो वीणा मानवी का एक अलग रूप देखने को मिला। पुलिस वैन की खिड़की से बाहर देखते हुए उन्होंने वहां मौजूद समर्थकों और मीडिया कर्मियों की तरफ अपने हाथ जोड़े और रोते हुए सबको प्रणाम किया। फिलहाल पुलिस इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है, लेकिन इस घटनाक्रम ने बांकीपुर उपचुनाव के सियासी पारे को और ज्यादा गरमा दिया है।
बांकीपुर की जंग हुई दिलचस्प, आज नामांकन से गरमाएगा सियासी माहौल
13 Jul, 2026 11:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया का आज अंतिम दिन है। इस निर्वाचन क्षेत्र में आगामी 30 जुलाई को वोट डाले जाएंगे, जबकि 3 अगस्त को होने वाली मतगणना के बाद चुनावी नतीजों का ऐलान किया जाएगा। बीते शनिवार तक इस सीट के लिए कुल 11 उम्मीदवारों ने अपने पर्चे दाखिल किए थे। वहीं आज, यानी सोमवार को भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा और जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर अपना नामांकन पत्र दाखिल करने जा रहे हैं। दोनों ही दलों की ओर से आज होने वाले इस नामांकन को चुनाव से पहले अपनी जमीनी ताकत दिखाने के एक बड़े मौके के रूप में देखा जा रहा है।
नामांकन से पहले प्रशांत किशोर ने हरिहरनाथ मंदिर में की पूजा
चुनावी समर में उतरने से ठीक पहले जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पटना के पास सोनपुर में स्थित सुप्रसिद्ध बाबा हरिहरनाथ मंदिर का रुख किया। वहां उन्होंने विशेष पूजा-अर्चना कर जीत का आशीर्वाद लिया। इससे पहले, पार्टी प्रत्याशी के रूप में नाम सामने आने के बाद उन्होंने पटना जंक्शन के प्रसिद्ध महावीर मंदिर में भी माथा टेका था और उसी दिन शाम को बोरिंग रोड स्थित शिवालय में रुद्राभिषेक संपन्न कराया था। सूत्रों के मुताबिक, प्रशांत किशोर के इस नामांकन जुलूस में जन सुराज के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं के अलावा बड़ी संख्या में आम लोगों को भी आमंत्रित किया गया है, ताकि इस आयोजन को एक भव्य शक्ति प्रदर्शन का रूप दिया जा सके।
बीजेपी प्रत्याशी के नामांकन में शामिल होंगे एनडीए के दिग्गज नेता
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने नए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के नामांकन को बेहद प्रभावशाली बनाने के लिए कमर कस ली है। दल से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इस दौरान बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, राज्य सरकार के कई कैबिनेट मंत्री और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के शीर्ष नेता मौजूद रहेंगे। नीरज कुमार सिन्हा बीजेपी के प्रदेश मुख्यालय से एक विशाल रोड शो के शक्ल में रवाना होकर अपना पर्चा दाखिल करने पहुंचेंगे।
अंतिम समय में बीजेपी ने बदला अपना उम्मीदवार
आपको बता दें कि इस सीट के लिए बीजेपी ने शुरुआत में अभिषेक कुमार 'बंटी' को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया था, जिन्होंने तय समय पर अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया था। हालांकि, बाद में उनके द्वारा नाम वापस लिए जाने के कारण पार्टी ने रणनीति बदलते हुए नीरज कुमार सिन्हा को चुनावी मैदान में उतारा है। अब बीजेपी इस बड़े आयोजन और रोड शो के जरिए कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने और अपनी पूरी एकजुटता प्रदर्शित करने की पुरजोर कोशिश कर रही है।
रामदास आठवले का शरद पवार को खुला न्योता, 'अब भी NDA में आइए'
13 Jul, 2026 11:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने राष्ट्रवादी कांग्रेस के कद्दावर नेता शरद पवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में आने का खुला न्योता दिया है। आठवले ने जोर देकर कहा कि पवार के पास दशकों लंबा राजनीतिक अनुभव है, जिसका सकारात्मक लाभ देश के साथ-साथ महाराष्ट्र की सियासत को भी मिल सकता है।
शरद पवार के अनुभव की सराहना
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने शरद पवार की तारीफ करते हुए उन्हें देश के सबसे वरिष्ठ और तजुर्बेकार राजनेताओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि पवार ने कई सालों तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में अहम विभागों की कमान संभालते हुए राष्ट्रीय राजनीति में एक अमिट छाप छोड़ी है।
NDA और देश के विकास में फायदे का दावा
आठवले ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि यदि शरद पवार एनडीए के कुनबे में शामिल होने का फैसला करते हैं, तो उनके इस कदम से न केवल केंद्र सरकार को मजबूती मिलेगी बल्कि देश में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों को भी नई गति दी जा सकेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि पवार इस प्रस्ताव पर विचार करेंगे।
बंगाल का नया गुंडा कानून लागू, अपराधियों की संपत्ति पर भी चलेगा बुलडोजर
13 Jul, 2026 10:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार ने राज्य से आपराधिक तत्वों और उपद्रवियों का सफाया करने के लिए एक बेहद सख्त कानून को अमलीजामा पहना दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के कार्यकाल का इसे अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा फैसला माना जा रहा है। इस नए कानून के तहत पुलिस प्रशासन को असाधारण शक्तियां दी गई हैं, जिससे वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी औपचारिक मुकदमे के एक साल तक हिरासत में रख सकेंगे। इसके साथ ही, दंगों और अराजकता में शामिल असामाजिक तत्वों की अवैध व अनधिकृत संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने का प्रावधान भी किया गया है। सूबे की सरकार ने इस कानून को 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक 2026' का नाम दिया है।
विधानसभा से पारित हुए दो कड़े कानून
बीती 29 जून को राज्य विधानसभा ने इस संबंध में दो महत्वपूर्ण विधेयकों को अपनी मंजूरी दी थी। इनमें 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026' और 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने (संशोधन) अधिनियम, 2026' शामिल हैं। इन कानूनों को सदन में पारित कराने के दौरान मुख्यमंत्री ने एक विस्तृत वक्तव्य दिया था, जिसमें उन्होंने राज्य की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए इन कड़े कदमों को बेहद जरूरी बताया था।
कानून के कड़े और सख्त प्रावधान
इस कानून के लागू होने के बाद, प्रशासन द्वारा चिन्हित किए गए गुंडों और उपद्रवियों को 12 महीने तक के लिए सीधे सलाखों के पीछे भेजा जा सकेगा। गंभीर अपराधों के मामलों में ऐसे आरोपियों को अपनी पसंद का निजी वकील रखने का अधिकार भी नहीं होगा, बल्कि उन्हें केवल सरकारी कानूनी सहायता सेवा के माध्यम से ही विधिक मदद दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, यदि कोई उपद्रवी सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो उसकी भरपाई उसी से की जाएगी। इसके लिए एक 'क्लेम्स कमीशन' का गठन किया जाएगा, जो नुकसान का आकलन कर हर्जाने की राशि तय करेगा। पुलिस को यह भी अधिकार होगा कि वह आदतन अपराधियों को किसी विशेष क्षेत्र या पूरे जिले की सीमा से बाहर (तड़ीपार) कर सके। साथ ही, किसी भी संभावित हिंसा को रोकने के लिए पुलिस महज शक के आधार पर भी एहतियातन गिरफ्तारी कर सकेगी, और अपराधियों को शरण देने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।
बीजेपी सांसद ने पूर्ववर्ती सरकार को घेरा
इस नए कानून के लागू होने पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी के सांसद राजू बिस्ता ने कहा कि पिछली ममता बनर्जी सरकार के दौरान राज्य में बड़े पैमाने पर अराजकता का माहौल था। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही अपराधियों में खौफ पैदा हुआ है और गुंडागर्दी पर लगाम लगी है। सांसद ने साफ किया कि जिन लोगों ने जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया है, अब वह सारा पैसा वापस लाकर सरकारी खजाने में जमा किया जाएगा, ताकि उसका सीधा लाभ आम जनता के विकास कार्यों में मिल सके।
पूर्व PM पीवी नरसिम्हा राव की समाधि को लेकर सियासी घमासान
13 Jul, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश की राजधानी में महात्मा गांधी के स्मारक राजघाट के समीप नई समाधियों के निर्माण को लेकर एक बड़ा ऐतिहासिक फैसला लिया गया था। साल 1999 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा के अंतिम संस्कार स्थल को 'कर्मभूमि' के रूप में विकसित करने के बाद, इस पूरे क्षेत्र में नई समाधियों के निर्माण पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई थी। उस दौरान आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट किया गया था कि अतिविशिष्ट हस्तियों (वीवीआईपी) की समाधियों के निर्माण के लिए एक तय प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है और उस व्यवस्था के तहत अब राजघाट परिसर में अतिरिक्त समाधि बनाने के लिए बिल्कुल भी भूमि शेष नहीं रह गई है।
पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहा राव की समाधि पर रोक
इस कड़े नीतिगत फैसले का असर वर्ष 2004 में देश के पूर्व प्रधानमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पीवी नरसिंहा राव के निधन के समय देखने को मिला। उनके निधन के बाद उनके परिवार के सदस्यों और राजनीतिक समर्थकों द्वारा राजघाट पर उनकी समाधि बनाने की पुरजोर वकालत की गई थी। हालांकि, राजघाट पर नई समाधियों के निर्माण पर लगी रोक और जगह की कमी के चलते उनके पार्थिव शरीर के लिए वहां समाधि स्थल नहीं बनाया जा सका।
पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह, राहुल गांधी के सामने सुलझेगा विवाद?
13 Jul, 2026 08:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस के भीतर लीडरशिप को बदलने के लिए मची रार अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का रुख कर सकती है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के धड़े ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यदि उनके द्वारा उठाई गई मांगों पर तुरंत फैसला नहीं लिया गया, तो वे दिल्ली कूच कर वहां अपनी ताकत दिखाएंगे। चन्नी गुट दिल्ली में कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व के समक्ष ठीक वैसा ही विरोध प्रदर्शन करने की रणनीति बना रहा है, जैसा बीते शनिवार को पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल के सामने किया गया था। इस समय चन्नी गुट मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पद से हटाने की जिद पर अड़ा हुआ है।
हाईकमान के हस्तक्षेप की उम्मीद और दिल्ली कूच की तैयारी
पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने यह साफ कर दिया है कि मौजूदा व्यवस्था में कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा, हालांकि उन्होंने नेताओं को आश्वस्त किया कि वह उनकी बात आलाकमान तक जरूर पहुंचाएंगे। इसके बावजूद चन्नी गुट को पूरा भरोसा है कि बड़ी संख्या में विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के समर्थन को देखते हुए कांग्रेस हाईकमान को बीच-बचाव करना ही पड़ेगा। शनिवार को हुई बैठक में चन्नी खेमे के 92 विधानसभा क्षेत्रों के वर्तमान व पूर्व विधायकों और पूर्व प्रत्याशियों ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में अपना टिकट सुरक्षित करने के लिए दिल्ली में होने वाले इस शक्ति प्रदर्शन में शामिल होने की हामी भर दी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के विदेश दौरे से लौटने के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि भूपेश बघेल से जमीनी फीडबैक लेने के बाद, वह इसी हफ्ते पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, ओपी सोनी और परगट सिंह जैसे बड़े चेहरों को चर्चा के लिए दिल्ली बुला सकते हैं।
वरिष्ठ नेताओं की चेतावनी और नेतृत्व के सामने असमंजस
प्रभारी बघेल की उपस्थिति में वरिष्ठ नेता राणा गुरजीत सिंह के आवास पर एकजुट हुए चन्नी गुट के नेताओं ने दोटूक कहा है कि यदि जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं और नेताओं की अनदेखी की गई, तो आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का सत्ता में वापसी का ख्वाब अधूरा रह सकता है। बैठक के दौरान सभी नेताओं ने दो बार हाथ उठाकर नेतृत्व को बदलने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई थी। इस बगावत ने कांग्रेस हाईकमान को बड़ी दुविधा में डाल दिया है, क्योंकि मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने संगठन को मजबूत करने और उसके विस्तार के लिए जमीन पर काफी पसीना बहाया है, जिसे अनदेखा करना पार्टी के लिए आसान नहीं है।
पुरानी गुटबाजी से सबक लेने की जरूरत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि इस आंतरिक कलह को वक्त रहते नहीं सुलझाया गया, तो 2027 के चुनावी समर में पार्टी को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। पंजाब कांग्रेस में इस तरह की गुटबाजी का इतिहास पुराना है। साल 2022 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले नवजोत सिंह सिद्धू की अगुवाई में मचे ऐसे ही घमासान के कारण कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी थी। उससे भी पहले राजिंदर कौर भट्ठल द्वारा कैप्टन अमरिंदर के खिलाफ की गई खेमेबंदी के कारण पार्टी को बड़ा राजनीतिक खमियाजा भुगतना पड़ा था।
हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, वकीलों के लिए आधुनिक चैंबर होंगे तैयार
13 Jul, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बादशाहपुर (गुरुग्राम): शहर में नवनिर्मित 'टावर ऑफ जस्टिस' के उद्घाटन समारोह के दौरान अधिवक्ताओं को एक बड़ी सौगात मिली है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस ऐतिहासिक मौके पर घोषणा की है कि वकीलों के लिए जल्द ही आधुनिक चैंबरों का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए पुराने न्यायालय परिसर के एक हिस्से को समर्पित करने की योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद से ही वकीलों की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने की उम्मीदें एक बार फिर जाग उठी हैं।
केंद्रीय मंत्री ने उठाई मांग, मुख्यमंत्री ने दिया भरोसा
समारोह के दौरान स्थानीय सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने अधिवक्ताओं की इस दीर्घकालिक समस्या को मंच से प्रमुखता के साथ उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री से टावर ऑफ जस्टिस के समीप ही वकीलों के लिए चैंबर बनवाने का आग्रह किया। इस पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री सैनी ने मंच से ही एलान किया कि अधिवक्ताओं की इस मांग का तकनीकी और प्रशासनिक परीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि चैंबर निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार जल्द ही ठोस कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री के इस आश्वासन के बाद पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
बार एसोसिएशन और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने जताया आभार
सरकार के इस फैसले का बार काउंसिल और जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने पुरजोर स्वागत किया है। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सीके शर्मा और सचिव राहुल धनखड़ ने हाई कोर्ट की सिफारिश और मुख्यमंत्री के भरोसे के लिए आभार जताते हुए उम्मीद जताई कि जमीन आवंटन की प्रक्रिया जल्द पूरी होगी। वहीं, पूर्व अध्यक्ष कुलभूषण भारद्वाज और पूर्व सचिव विनोद राव का मानना है कि इस कदम से वरिष्ठ और युवा दोनों ही वर्ग के अधिवक्ताओं को काम करने के लिए एक बेहतर और आधुनिक माहौल मिल सकेगा।
न्यायिक व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
महिला अधिवक्ता रेखा राठी और पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के सदस्य प्रवेश यादव व अजय चौधरी ने इस घोषणा को वकीलों के लिए एक बेहतरीन उपहार बताया है। पूर्व सचिव संदीप सहरावत सहित अन्य कानूनी जानकारों का कहना है कि टावर ऑफ जस्टिस के शुरू होने के बाद यदि अधिवक्ताओं को नजदीक ही चैंबर मिल जाते हैं, तो इससे न केवल वकीलों की परेशानियां दूर होंगी बल्कि पूरी न्यायिक कार्यप्रणाली को और अधिक गति व मजबूती मिलेगी।
उम्मीदवार बदला, फिर बायोडाटा पर बवाल; बांकीपुर उपचुनाव में गरमाई राजनीति
13 Jul, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: बिहार की सबसे हाईप्रोफाइल और सियासी तौर पर बेहद चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए रविवार (13 जुलाई) को नामांकन का आखिरी दिन है। चुनावी समर के इस अंतिम दिन भाजपा के नए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा और जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर अपने-अपने पर्चे दाखिल करेंगे। हालांकि, इस महत्वपूर्ण दिन से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी दो बड़े विवादों में घिर गई है, जिसके चलते विपक्षी दल उस पर लगातार हमलावर हैं। पार्टी को पहले अपना प्रत्याशी बदलना पड़ा और उसके बाद नए उम्मीदवार के जीवन-वृत्त (बायोडाटा) में बदलाव करने की नौबत आ गई।
उम्मीदवार बदलने से बैकफुट पर आई भाजपा
भाजपा का अभेद्य किला मानी जाने वाली बांकीपुर सीट पर पार्टी ने शुरुआत में अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ बंटी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया था। लेकिन नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने से ठीक पहले उन्होंने पारिवारिक वजहों का हवाला देते हुए चुनाव न लड़ने का एलान कर दिया। इसके बाद आनंद-फानन में भाजपा ने उनकी जगह नीरज कुमार सिन्हा को अपना नया प्रत्याशी बनाया। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा आम है कि अभिषेक बंटी के पीछे हटने की असली वजह उनके पिता रविंद्र प्रसाद का नाम बहुचर्चित करोड़ों रुपये के चारा घोटाले से जुड़ा होना है। हालांकि, इन अटकलों को खारिज करते हुए रविंद्र प्रसाद ने सफाई दी कि उनके बेटे ने केवल अपने माता-पिता के मान-सम्मान की खातिर यह चुनाव न लड़ने का फैसला किया है।
नए प्रत्याशी के बायोडाटा पर गहराया विवाद
अभी टिकट बदलने का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि भाजपा के सामने एक नया विवाद खड़ा हो गया। विपक्षी दलों ने नए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के बायोडाटा में दी गई जानकारियों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। दरअसल, पहले जारी किए गए बायोडाटा में नीरज की जन्मतिथि 3 जुलाई 1994 लिखी हुई थी, जबकि उसी दस्तावेज में यह भी दावा किया गया था कि उन्होंने साल 2006 में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता ली थी। इस विसंगति को पकड़ते हुए विपक्ष ने तीखा सवाल दागा है कि अगर जन्मतिथि सही है, तो नीरज महज 12 साल की उम्र में पार्टी के प्राथमिक सदस्य कैसे बन सकते हैं। विपक्षी नेताओं ने इसे नियमों का उल्लंघन बताते हुए भाजपा पर सच छिपाने का गंभीर आरोप लगाया है।
राज्य के दर्जे को लेकर उमर अब्दुल्ला का केंद्र पर दबाव, बोले- सब्र की परीक्षा न लें
12 Jul, 2026 03:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जम्मू। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए एक बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर उनके और प्रदेश की जनता के "सब्र" को केंद्र सरकार उनकी कमजोरी समझने की भूल न करे। हजरतबल में अपने दादा-दादी (शेख अब्दुल्ला और बेगम अकबर जहां) की मजार पर पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उमर अब्दुल्ला ने केंद्र से तीखा सवाल पूछा कि आखिर राज्य का दर्जा वापस देने का वह "उपयुक्त समय" कब आएगा और इसकी स्थिति कब साफ होगी?
लद्दाख से बात, तो जम्मू-कश्मीर से परहेज क्यों?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र की दोहरी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा, "यदि केंद्र सरकार लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल और वहां के लोगों से बातचीत की मेज पर बैठने को तैयार है, तो फिर जम्मू-कश्मीर के आवाम और यहां की चुनी हुई सरकार से संवाद करने में क्या हिचकिचाहट है?" अपनी दादी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा धैर्य रखने की सीख ली है, लेकिन सब्र का मतलब चुपचाप बैठना या अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आवाज न उठाना कतई नहीं है। उन्होंने साफ किया कि संयम ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और यही अंततः कामयाबी का जरिया बनेगा।
सत्ता में होने के बावजूद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन क्यों?
सीएम उमर ने केंद्र सरकार को आत्ममंथन (Introspection) करने की नसीहत दी। उन्होंने सवाल उठाया कि जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार को सत्ता में आए डेढ़ साल से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी, आगामी 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर जाकर विरोध प्रदर्शन करने की नौबत क्यों आ रही है?
उमर अब्दुल्ला ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य और साख को दांव पर लगाकर हमेशा बंदूक या हिंसा के बजाय लोकतांत्रिक बातचीत का रास्ता चुना, जबकि वे जानते थे कि घाटी के संवेदनशील माहौल में यह फैसला उनके राजनीतिक करियर के लिए बेहद जोखिम भरा साबित हो सकता है।
"हम भारत के ताज हैं, पैर की जूती नहीं" — फारूक अब्दुल्ला
इस दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने 24 जून 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में दिल्ली में हुई सर्वदलीय बैठक का जिक्र किया। फारूक अब्दुल्ला ने याद दिलाया, "उस बैठक में पीएम मोदी ने 'दिल्ली की दूरी और दिल की दूरी' को मिटाने तथा विश्वास की कमी को दूर करने का वादा किया था। आज मैं पूछता हूं कि क्या वाकई वह दूरी कम हो सकी है?" उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों का अपना आत्मसम्मान है, "वे भारत के सिर का ताज हैं, किसी के पैर की जूती नहीं।"
उपचुनाव और स्थानीय निकाय चुनावों पर दो टूक
फारूक अब्दुल्ला ने बीजेपी नीत केंद्र सरकार पर उपराज्यपाल (LG) कार्यालय के जरिए जम्मू-कश्मीर की लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था को पंगु बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर राजभवन के माध्यम से ही लोगों को प्रताड़ित करना था, स्थानीय युवाओं को नौकरियों से निकालना था और बुलडोजर संस्कृति चलानी थी, तो फिर प्रदेश में विधानसभा चुनाव कराने का नाटक क्यों किया गया?
उमर अब्दुल्ला ने भी पिता के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि केंद्र को पहले ही साफ कर देना चाहिए था कि वे एक ऐसी सरकार का गठन चाहते हैं जिसके हाथ पीछे बंधे हों और जिसे ऐसे नौकरशाह सौंपे जाएं जो चुनी हुई सरकार के फैसलों को लागू ही न करें। स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "हम भी सूबे में चुनाव चाहते हैं, लेकिन इन चुनावों को कराने का सबसे उपयुक्त समय क्या होगा, इसका फैसला दिल्ली में बैठी सरकार नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर की चुनी हुई लोकप्रिय सरकार ही करेगी।"
आमिर खान की तीसरी शादी बनी राजनीतिक मुद्दा, नितेश राणे के बयान पर मचा घमासान
12 Jul, 2026 02:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता आमिर खान (Aamir Khan) की तीसरी शादी को लेकर अचानक एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुखर नेता नितेश राणे (Nitesh Rane) ने अभिनेता पर बेहद तीखा हमला बोलते हुए उन्हें "लव जिहाद का ब्रांड एंबेसडर" करार दिया है। भाजपा नेता के इस विवादित बयान के बाद देश के राजनीतिक गलियारों से लेकर सामाजिक स्तर तक एक नई बहस छिड़ गई है और इस पर विभिन्न पक्षों की ओर से लगातार तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
निजी जीवन पर भारी पड़ा सियासी वार
भाजपा नेता नितेश राणे ने अपने बयान को सही ठहराते हुए तर्क दिया कि यह मामला केवल किसी फिल्म स्टार के निजी जीवन या व्यक्तिगत विवाह तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक सामाजिक असर और पहलुओं पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आमिर खान की तीसरी शादी के बहाने कई अन्य ज्वलंत राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को भी हवा दी। राणे की इस तल्ख टिप्पणी के बाद यह पूरा घटनाक्रम महज मनोरंजन जगत की गॉसिप से बाहर निकलकर मुख्यधारा की राजनीति और टीवी बहसों का मुख्य केंद्र बन गया है।
तीसरी शादी के बाद पहली बार इतनी बड़ी सियासी घेराबंदी
गौरतलब है कि अभिनेता आमिर खान ने हाल ही में तीसरी बार विवाह सूत्र में बंधने का फैसला किया है। इससे पहले भी उनकी दो शादियां और तलाक हो चुके हैं, जिन्हें लेकर फैंस और मीडिया के बीच अक्सर चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि, यह पहली बार है जब उनकी शादी पर इस तरह की गंभीर राजनीतिक और सांप्रदायिक रंग वाली प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसने इस मामले को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। इस पूरे विवाद और गंभीर आरोपों पर फिलहाल अभिनेता आमिर खान या उनकी टीम की तरफ से कोई भी आधिकारिक सफाई या बयान जारी नहीं किया गया है।
सोशल मीडिया पर बंटा जनमानस
नितेश राणे के इस बयान के बाद इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी यूजर्स दो धड़ों में बंट गए हैं। जहां एक वर्ग भाजपा नेता की टिप्पणी को समाज के आईने से सही ठहराते हुए उनका पुरजोर समर्थन कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ एक बड़ा वर्ग इसे किसी भी नागरिक के निजी जीवन और मौलिक अधिकारों पर अनावश्यक, ओछी और राजनीतिक लाभ के लिए की गई टिप्पणी बताकर इसकी कड़ी निंदा कर रहा है।
मनोरंजन से राष्ट्रीय विमर्श तक का सफर
राजनैतिक विश्लेषकों और समाजशास्त्रियों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सार्वजनिक जीवन और प्रभाव रखने वाली बड़ी हस्तियों के व्यक्तिगत फैसले अक्सर राजनीतिक दलों के राडार पर आ जाते हैं। आमिर खान न केवल एक शीर्ष अभिनेता हैं, बल्कि वे लंबे समय से अपने टीवी शो 'सत्यमेव जयते' और विभिन्न अभियानों के जरिए देश के सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यही वजह है कि उनके निजी जीवन में होने वाली हलचल इतनी तेजी से राजनीतिक और वैचारिक रूप ले लेती है और समाज में विभिन्न विचारधाराओं के टकराव को सामने लाती है।
रेवंत रेड्डी पर BJP विधायक का तीखा वार, कहा- जनता से किए वादे भूल गए
12 Jul, 2026 11:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हैदराबाद। तेलंगाना की सियासत में इन दिनों जुबानी जंग तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के फायरब्रांड विधायक कटिपल्ली वेंकटरमना रेड्डी ने सत्ताधारी कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (BRS) पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी विधायक ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी पिछली सरकार के नेताओं को 'चोर' बताकर सत्ता की कुर्सी तक पहुंचे थे, लेकिन मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद से वे जनता की उम्मीदों पर पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि तेलंगाना में केवल हुकूमत के चेहरे बदले हैं, लेकिन जनता को लूटने का पुराना सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है।
पिछली सरकार के ढर्रे पर चल रही कांग्रेस
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को आड़े हाथों लेते हुए कटिपल्ली वेंकटरमना रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस सिर्फ दावों की राजनीति कर रही है। चुनाव से पहले जिन लोगों को भ्रष्ट बताकर वोट मांगे गए थे, आज उन्हीं के नक्शेकदम पर मौजूदा सरकार चल रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब कांग्रेस सरकार के इस दोहरे रवैये और वादों से थक चुकी है। कांग्रेस भले ही अगले चुनाव में दोबारा वापसी के सपने देख रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जनता के बीच उनका जनाधार तेजी से खिसक रहा है।
केसीआर की नीतियों पर भी उठाए सवाल
बीजेपी विधायक ने बीआरएस (पूर्व में टीआरएस) के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तेलंगाना की जनता ने केसीआर की पार्टी को लगातार दो बार सत्ता की चाबी सौंपी थी। लोगों ने संघर्ष करके अलग राज्य तो हासिल कर लिया, लेकिन सत्ता में बैठने के बाद बीआरएस नेताओं ने सिर्फ प्रदेश के संसाधनों को लूटने का काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अलग राज्य के आंदोलन की भावनाओं का सियासी फायदा उठाया गया, पर आम जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिला।
गठबंधन के दावों के बीच बीजेपी की तैयारी
वेंकटरमना रेड्डी ने दावा किया कि तेलंगाना में अगली सरकार शत-प्रतिशत भारतीय जनता पार्टी की ही बनेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना के विकास और संगठन को मजबूत करने के लिए विशेष प्रयास किए हैं, जिससे अब प्रदेश का आम नागरिक बीजेपी को एक मजबूत विकल्प के रूप में देख रहा है।
इसी कड़ी में बीजेपी के एक अन्य विधायक पलवई हरीश ने भी कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है। चाहे किसानों का कल्याण हो, महिलाओं की सुरक्षा हो, छात्रों का भविष्य हो या रोजगार का मुद्दा— कांग्रेस पूरी तरह फेल साबित हुई है। उन्होंने परिसीमन (डिलिमिटेशन) के मुद्दे को सिर्फ एक सियासी हथकंडा बताया और कहा कि सरकार अपनी नाकामियों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे भ्रामक बयान दे रही है।
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