राजनीति
CM हाउस में नरोत्तम मिश्रा की देर रात मुलाकात, दतिया की राजनीति में नया मोड़?
12 Jul, 2026 10:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर जारी भारी सियासी घमासान के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। बीजेपी द्वारा टिकट काटे जाने से नाराज समर्थकों के भारी विरोध प्रदर्शन और बगावत की सुगबुगाहट के बीच, पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा शनिवार देर शाम अपने गृह नगर डबरा से सीधे राजधानी भोपाल पहुंचे। वहां उन्होंने मुख्यमंत्री निवास (CM हाउस) में मुख्यमंत्री मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण 'डैमेज कंट्रोल' बैठक की। इस बैठक के बाद दतिया में उपजे बगावती सुर पूरी तरह शांत होते दिखाई दे रहे हैं।
"दतिया हम जीत रहे हैं, कार्यकर्ता धैर्य रखें"
मुख्यमंत्री निवास में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक से बाहर निकलने के बाद नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया से सकारात्मक बातचीत की। उन्होंने बगावत की सभी अटकलों को खारिज करते हुए कहा, ”नेताओं के बीच बेहद सारगर्भित और बहुत अच्छी बातचीत हुई है। हमारा एकमात्र लक्ष्य दतिया उपचुनाव जीतना है और दतिया हम निश्चित रूप से जीत रहे हैं। मैं अपने सभी साथियों और कार्यकर्ताओं से अपील करना चाहता हूं कि वे धैर्य और शांति का परिचय दें। धीरे-धीरे स्थितियां सामान्य हो रही हैं। 13 तारीख यानी सोमवार को पार्टी उम्मीदवार के नामांकन दाखिले के कार्यक्रम में मैं निश्चित रूप से शामिल रहूंगा।”
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा- 'किसी का इस्तीफा स्वीकार नहीं'
नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों द्वारा सामूहिक इस्तीफे दिए जाने की खबरों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा, ”दतिया उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने आशुतोष तिवारी को अपना अधिकृत और मजबूत प्रत्याशी घोषित किया है। मीडिया के माध्यम से मेरे संज्ञान में आया है कि कुछ कार्यकर्ताओं ने भावावेश में आकर इस्तीफे की घोषणा की थी, हालांकि मुझे अभी तक ऐसा कोई लिखित इस्तीफा प्राप्त नहीं हुआ है। लेकिन हमारे शीर्ष नेतृत्व का निर्णय स्पष्ट है—सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरना है, इसलिए किसी भी कार्यकर्ता का इस्तीफा स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता।” उन्होंने आगे जोड़ा कि नरोत्तम मिश्रा पार्टी के बेहद वरिष्ठ और कद्दावर नेता हैं, और पार्टी दतिया का यह चुनाव उन्हीं के मार्गदर्शन और नेतृत्व में लड़कर ऐतिहासिक बहुमत से जीतेगी।
डैमेज कंट्रोल के बाद एकजुटता का संदेश
बीजेपी के मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल ने इस सौजन्य भेंट की पुष्टि करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री निवास में हुई संगठनात्मक चर्चा में यह पूरी तरह साफ हो गया कि पार्टी का फैसला सर्वोपरि है। दतिया उपचुनाव में पार्टी के सभी कार्यकर्ता पूरी प्रतिबद्धता, उत्साह और अटूट समर्पण के साथ आधिकारिक प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को प्रचंड मतों से विजयी बनाने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे। बीजेपी इस उपचुनाव में एक नया रिकॉर्ड बनाने जा रही है।
क्या है दतिया उपचुनाव का पूरा समीकरण?
मुख्य बिंदु
विवरण
चुनाव एवं मतगणना तिथि
मतदान 30 जुलाई को होगा और वोटों की गिनती 3 अगस्त को की जाएगी।
सीट खाली होने की वजह
साल 2023 के चुनाव में विजयी रहे कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की एक विशेष अदालत ने बैंक धोखाधड़ी के मामले में 3 साल की सजा सुनाई, जिसके बाद वे अयोग्य घोषित हो गए।
बीजेपी का दांव
पार्टी ने कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर नए और सक्रिय चेहरे आशुतोष तिवारी (पूर्व हाउसिंग बोर्ड चेयरमैन) को मैदान में उतारा है।
कांग्रेस की चुनौती
कांग्रेस ने दतिया राजघराने से ताल्लुक रखने वाले घनश्याम सिंह को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है।
शुक्रवार को बीजेपी द्वारा टिकट की घोषणा के बाद दतिया में नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने नेशनल हाईवे-44 को करीब 11 घंटे तक जाम कर भारी आक्रोश जताया था और पुलिस के साथ झड़पें भी हुई थीं। इस अंदरूनी कलह का फायदा उठाने के लिए शिवसेना (UBT) ने भी नरोत्तम मिश्रा को अपनी पार्टी से चुनाव लड़ने का खुला न्योता दे दिया था। लेकिन, शनिवार रात को मुख्यमंत्री मोहन यादव और संगठन के आला नेताओं के साथ हुई इस रणनीतिक बैठक के बाद, नरोत्तम मिश्रा ने खुद आगे आकर इन सभी कयासों पर पूर्ण विराम लगा दिया है।
कथित एथेनॉल घोटाले पर कांग्रेस का हमला, खरगे ने बीजेपी सरकार पर साधा निशाना
11 Jul, 2026 05:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । मध्य प्रदेश में कथित एथेनॉल घोटाले को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भाजपा सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए प्रदेश को भ्रष्टाचार और लूट का केंद्र करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में एक घोटाले के उजागर होने का सिलसिला थमता नहीं कि दूसरा नया घोटाला सामने आ जाता है, जो भाजपा के सुशासन के दावों की पोल खोलता है।
पोषण आहार के चावल में 1200 करोड़ का घोटाला
खरगे ने सोशल मीडिया के माध्यम से दावा किया कि एथेनॉल के नाम पर 1200 करोड़ रुपये का बड़ा चावल घोटाला हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों के लिए आवंटित लगभग 5 लाख मेट्रिक टन चावल को राइस मिलरों और एथेनॉल माफियाओं ने मिलकर हड़प लिया। कांग्रेस अध्यक्ष के अनुसार, सरकार के संरक्षण में जनता के हक के इस अनाज का उपयोग मुनाफे के खेल में किया गया, जो अत्यंत गंभीर और संवेदनहीन मामला है।
जमीन घोटाले से लेकर व्यापम तक का काला अध्याय
एथेनॉल घोटाले के अलावा, खरगे ने राज्य में हुए भूमि घोटालों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उज्जैन में उन स्थानों पर जमीनों का अवैध अधिग्रहण और विस्तार हुआ जहाँ सरकारी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और हाईवे कॉरिडोर प्रस्तावित थे। इन मामलों में सीधे तौर पर मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि व्यापम से शुरू होकर पेपर लीक और भ्रष्टाचार के अनगिनत मामलों तक, भाजपा के पूरे शासनकाल में सरकारी खजाने को लूटने और अपनी जेबें भरने का ही खेल चलता रहा है।
भाजपा का ‘भ्रष्टाचार मॉडल’ और केंद्रीय नेतृत्व की चुप्पी
कांग्रेस अध्यक्ष ने तीखे शब्दों में कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश को ‘भ्रष्टाचार का मॉडल’ बना दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही के सिद्धांतों को दरकिनार कर दिया गया है। खरगे ने आरोप लगाया कि मोदी-शाह के नेतृत्व में सत्ता के अहंकार के तले ईमानदारी को रौंदा जा रहा है और राज्य की जनता के संसाधनों पर भाजपा नेताओं द्वारा लगातार डाका डाला जा रहा है, जिस पर केंद्र सरकार मौन साधे बैठी है।
RPP-NPF विलय से नगालैंड की राजनीति में नया मोड़, CM रियो ने दिया एकता का संदेश
11 Jul, 2026 05:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोहिमा । नागालैंड की राजनीति में एक बड़ा फेरबदल करते हुए राइजिंग पीपुल्स पार्टी (आरपीपी) का सत्तारूढ़ नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) में औपचारिक विलय हो गया है। कोहिमा में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री और एनपीएफ अध्यक्ष नेफ्यू रियो ने आरपीपी के नेताओं का पार्टी में गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल दो राजनीतिक दलों का संगम नहीं है, बल्कि यह विचारों, अनुभवों और लोगों की आकांक्षाओं का मिलन है, जो आने वाले समय में नागा समाज की सामूहिक आवाज को और अधिक सशक्त बनाएगा।
नागा राजनीतिक समाधान और एकता की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नागा राजनीतिक मुद्दे का सम्मानजनक और जल्द समाधान उनकी सरकार और एनपीएफ की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने राज्य में 'विपक्ष रहित सरकार' के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों का लक्ष्य दशकों पुराने विवाद का स्थायी समाधान निकालना है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक और भौगोलिक सीमाएं नागाओं को अलग कर सकती हैं, लेकिन उनकी साझा पहचान और इतिहास को नहीं मिटा सकतीं। उन्होंने सभी नागाओं से आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आने का आह्वान किया ताकि एक समावेशी राजनीतिक समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।
साझा भविष्य और मणिपुर के लिए अपील
नेफ्यू रियो ने नागा समुदाय की भावनात्मक एकता पर बल देते हुए कहा कि यद्यपि नागालैंड, मणिपुर, असम, अरुणाचल और म्यांमार में फैले सभी नागाओं का एक प्रशासनिक ढांचे में आना वर्तमान में चुनौतीपूर्ण है, लेकिन आपसी भाईचारा और संपर्क को मजबूत करना अनिवार्य है। उन्होंने मणिपुर के नागाओं से अपील की कि वे आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर एनपीएफ को मजबूती प्रदान करें, ताकि नागा हितों की रक्षा के लिए एक साझा राजनीतिक मंच तैयार हो सके। उन्होंने राजनीति को केवल टकराव का साधन न मानकर उसे विश्वास और सुलह का माध्यम बनाने पर जोर दिया।
विकास का संकल्प और आरपीपी का विलय
सरकार की भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए सीएम रियो ने कहा कि राज्य का लक्ष्य शांति के साथ-साथ विकास की गति को तेज करना है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और ग्रामीण आजीविका के साथ-साथ युवाओं और महिलाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गौरतलब है कि 2020 में अस्तित्व में आई आरपीपी ने चुनावी सुधारों का एजेंडा रखा था, लेकिन अब यह पार्टी एनपीएफ में विलीन हो गई है। विलय के बाद आरपीपी के पूर्व नेताओं को एनपीएफ के केंद्रीय संगठन में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जिससे पार्टी का ढांचा और अधिक विस्तार पाएगा।
यूपी में नए राजनीतिक संकेत, मायावती के संदेश और संगीत सोम के समर्थन के क्या हैं मायने?
11 Jul, 2026 04:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। राज्य में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक पारा चढ़ने लगा है। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोशल मीडिया के माध्यम से विपक्षी दलों और उनसे जुड़े संगठनों पर तीखा प्रहार किया है। मायावती ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी हिंसा, तोड़फोड़ या सड़क जाम जैसी गतिविधियों में विश्वास नहीं रखती है। इस बयान के बाद भाजपा नेता संगीत सोम का समर्थन मिलने से राज्य की सियासत में नई बहस छिड़ गई है।
बसपा का स्पष्ट स्टैंड और ‘सर्वजन हिताय’ का मंत्र
मायावती ने पार्टी की विचारधारा को ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ बताते हुए कहा कि बसपा अंबेडकरवादी सिद्धांतों पर चलने वाली एकमात्र सच्ची पार्टी है। उन्होंने अपने चार बार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि बसपा के शासनकाल में उत्तर प्रदेश में अपराध नियंत्रण और कानून का राज स्थापित था। मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी चुनावी स्वार्थ के लिए किसी भी हिंसक या अनैतिक मार्ग का अनुसरण नहीं करती, क्योंकि उनका मुख्य ध्येय समाज के शोषित और उपेक्षित वर्गों का उत्थान करना है।
विपक्ष की रणनीतियों पर मायावती का प्रहार
आगामी चुनावों को देखते हुए मायावती ने विपक्षी दलों पर ‘गिरगिट’ जैसी राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि चुनाव करीब आते ही विरोधी दल बसपा को कमजोर करने के लिए दलित संगठनों और स्वार्थी तत्वों का सहारा ले रहे हैं। बसपा सुप्रीमो ने चेतावनी दी कि विरोधी दल समाज के युवाओं और गरीब परिवारों को भड़काकर उन्हें मुकदमों में फंसाना चाहते हैं ताकि उनका भविष्य बर्बाद हो सके। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि वे विपक्ष की ‘गुलाम मानसिकता’ और उनकी विभाजनकारी चालों के प्रति बेहद सचेत रहें।
संगीत सोम का समर्थन और सपा पर निशाना
इस प्रकरण के बीच भाजपा के फायरब्रांड नेता संगीत सोम ने मायावती के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने समाज को एक सही दिशा दिखाई है। संगीत सोम ने जनता को किसी भी प्रकार के दलालों के बहकावे में न आने की सलाह दी। साथ ही, उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा। संगीत सोम ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव सनातनियों को बांटने की राजनीति कर रहे हैं, लेकिन जनता उनके इरादों को अच्छी तरह समझ चुकी है और उनकी यह विभाजनकारी नीति कभी सफल नहीं होगी।
उपचुनाव से मिशन बिहार की शुरुआत, प्रशांत किशोर की रणनीति के पीछे क्या है बड़ा प्लान?
11 Jul, 2026 04:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए एक खास सियासी बिसात बिछाई है। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव से दूर रहने के बाद अब प्रशांत किशोर का बांकीपुर सीट पर ध्यान केंद्रित करना उनके गहरे राजनीतिक गणित को दर्शाता है। वे स्थानीय मुद्दों जैसे नीट पेपर लीक, छात्रा की कथित हत्या और भरत तिवारी एनकाउंटर को आधार बनाकर सत्ता पक्ष को घेरने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन उनकी असली ताकत उन मतदाताओं को साधने में निहित है जो पारंपरिक रूप से बड़े दलों से दूर रहते हैं।
उदासीन मतदाताओं को लुभाने की रणनीति
प्रशांत किशोर की प्राथमिकता उन लगभग 60 प्रतिशत मतदाताओं को अपने पक्ष में करना है, जिन्होंने पिछले चुनाव में मतदान ही नहीं किया था। आंकड़ों के अनुसार, बांकीपुर विधानसभा सीट पर पिछले चुनाव में करीब 1.75 लाख लोगों ने वोट नहीं डाला था, जो कुल मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा है। प्रशांत किशोर का मानना है कि जो वोटर न तो एनडीए और न ही महागठबंधन के प्रति उत्साह दिखाते हैं, उन्हें सक्रिय करके बाजी पलटी जा सकती है। वे इन्हीं गैर-मतदाताओं को बूथ तक लाने के लिए एक विशेष योजना पर काम कर रहे हैं।
सवर्ण वोटों पर प्रशांत किशोर का दांव
रणनीतिकार प्रशांत किशोर का मुख्य लक्ष्य सवर्ण वर्ग के मतदाता हैं, जिनमें ब्राह्मण, भूमिहार और राजपूत समुदायों की अच्छी खासी संख्या है। बांकीपुर में लगभग 7 प्रतिशत ब्राह्मण, 7 प्रतिशत भूमिहार और 5 प्रतिशत राजपूत मतदाता हैं, जो कुल मिलाकर करीब 63,000 वोटों का आधार बनाते हैं। हालिया घटनाओं जैसे नीट परीक्षा धांधली और एनकाउंटर मामले को उठाकर वे इन समुदायों के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इन मुद्दों के जरिए वे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर सवर्णों को अपने पाले में करने का प्रयास कर रहे हैं।
मुस्लिम मतदाताओं को जोड़ने का प्रयास
सवर्णों के साथ-साथ प्रशांत किशोर की नजर बांकीपुर के 10 प्रतिशत मुस्लिम वोट बैंक पर भी है। वे इन मतदाताओं को विश्वास दिलाने के लिए राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने और भविष्य की लाभकारी योजनाओं का वादा कर रहे हैं। हालांकि, बांकीपुर को भाजपा का गढ़ माना जाता है, जहाँ विधायक नितिन नवीन का मजबूत जनाधार और कार्यकर्ताओं की एक विशाल फौज मौजूद है। इस स्थिति में, प्रशांत किशोर के लिए इस किले को भेदना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसके लिए वे पूरी तरह से नई रणनीति और जमीनी समीकरणों पर निर्भर हैं।
टिकट विवाद के बीच कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा संदेश, 'पार्टी का फैसला सभी को स्वीकार करना चाहिए'
11 Jul, 2026 03:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए बीजेपी द्वारा आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी में आंतरिक विरोध के सुर तेज हो गए हैं। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सड़कों पर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इस राजनीतिक गहमागहमी के बीच राज्य के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि पार्टी में टिकट की घोषणा के बाद उसे बदलने की कोई परंपरा नहीं है और आशुतोष तिवारी ही चुनाव लड़ेंगे।
कार्यकर्ताओं की नाराजगी पर पार्टी का रुख
कैलाश विजयवर्गीय ने प्रदर्शन कर रहे समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि बीजेपी एक लोकतांत्रिक दल है जहाँ कार्यकर्ताओं को अपनी बात रखने का पूरा हक है, लेकिन पार्टी का निर्णय सर्वोपरि होता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने नरोत्तम मिश्रा से संपर्क करने का प्रयास किया है और उन्हें भरोसा है कि वे पार्टी के एक वरिष्ठ और अनुशासित कार्यकर्ता के रूप में शीर्ष नेतृत्व के फैसले का सम्मान करेंगे। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी हर कदम सोच-समझकर उठाती है और आशुतोष तिवारी की उम्मीदवारी के बाद अब पीछे हटने का प्रश्न ही नहीं उठता।
जीत के प्रति आश्वस्त और कांग्रेस पर कटाक्ष
कैलाश विजयवर्गीय ने विश्वास जताया कि आशुतोष तिवारी भारी मतों के अंतर से दतिया का चुनाव जीतेंगे। उन्होंने कहा कि टिकट न मिलने पर कार्यकर्ताओं में थोड़ी निराशा स्वाभाविक है, जिसे बातचीत के माध्यम से जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर भी जोरदार निशाना साधा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की साइकिल यात्रा को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि जब राहुल गांधी की बड़ी यात्राओं का देश की राजनीति पर कोई असर नहीं पड़ा, तो इनकी साइकिल यात्रा से भी कोई बदलाव नहीं आने वाला।
परिवार पर टिप्पणी को लेकर जीतू पटवारी को नसीहत
जीतू पटवारी के भाई से जुड़े मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए विजयवर्गीय ने कांग्रेस अध्यक्ष को नसीहत दी कि वे दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने घर की स्थिति देखें। उन्होंने कहा कि पटवारी के भाई का स्वयं ड्रग्स और शराब के सेवन को स्वीकार करना कांग्रेस के लिए शर्मनाक है, इसलिए उन्हें इस तरह की ऊँची बातें शोभा नहीं देतीं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि बीजेपी का पूरा ध्यान आगामी उपचुनावों में जीत सुनिश्चित करने और अपने संगठन को और अधिक अनुशासित तरीके से सक्रिय करने पर है।
UP Politics: चुनाव से पहले अखिलेश यादव के नए तेवर, विपक्ष और बीजेपी दोनों की नजर
11 Jul, 2026 02:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव इन दिनों एक नए और बदले हुए अवतार में नजर आ रहे हैं। राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले पर उनका सधा हुआ रुख और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के प्रति उनकी श्रद्धा ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। सपा कार्यालय में 'सनातन ही समाजवाद है' के पोस्टर लगना उनके इस नए चुनावी एजेंडे को स्पष्ट कर रहा है। हालांकि, पार्टी के भीतर और बाहर उनके इस 'सॉफ्ट हिंदुत्व' के प्रयोग को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि पार्टी का एक बड़ा आधार अब तक पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की राजनीति से प्रेरित रहा है।
चुनावी रणनीति और अतीत की चुनौतियां
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में भी सपा ने भगवान परशुराम की प्रतिमा स्थापित कर ब्राह्मण समुदाय को लुभाने का प्रयास किया था, लेकिन आंकड़ों के मुताबिक ब्राह्मण वोटों का एक बड़ा हिस्सा भाजपा के साथ ही रहा। अब एक बार फिर चुनावी साल में अपना रुख बदलते हुए अखिलेश यादव को डर है कि कहीं सवर्णों को रिझाने की कोशिश में वे अपने पारंपरिक ओबीसी और दलित वोट बैंक को नाराज न कर बैठें। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हिंदुत्व के मूल मुद्दे पर भाजपा के मजबूत और स्पष्ट ब्रांड के सामने अखिलेश यादव का यह नया प्रयोग एक बड़ी राजनीतिक चुनौती हो सकता है।
हिंदुत्व की पिच पर भाजपा का दबदबा
राजनीतिक जानकारों का तर्क है कि जब मतदाताओं के पास भाजपा के रूप में हिंदुत्व का 'असली वर्जन' मौजूद है, तो वे किसी अन्य दल के सॉफ्ट हिंदुत्व को क्यों चुनेंगे। योगी आदित्यनाथ का भगवा चेहरा और गोरक्षपीठ के महंत के रूप में उनकी पहचान उन्हें हिंदुत्व का स्वतः ब्रांड एंबेसडर बनाती है। ऐसी स्थिति में सपा प्रमुख के लिए भाजपा की पिच पर खेलना जोखिम भरा हो सकता है। यह आशंका भी जताई जा रही है कि यदि वे अपने मूल पीडीए नारे से भटकते हैं, तो उनके कोर वोट बैंक का ध्रुवीकरण कमजोर पड़ सकता है, जबकि सवर्ण वोटों का अनुपात उनकी उम्मीदों से कम रह सकता है।
नेतृत्व की कमी और दिल्ली-लखनऊ की दूरी
अखिलेश यादव की वर्तमान राजनीति में एक और बड़ा संकट दिल्ली और लखनऊ के बीच की बढ़ती दूरी है। सांसद के तौर पर दिल्ली में अधिक समय बिताने के कारण राज्य की राजधानी में उनकी सक्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्होंने माता प्रसाद पांडेय जैसे बुजुर्ग नेता को जिम्मेदारी तो दी है, लेकिन उनके कम मुखर होने से पार्टी में एक रिक्तता महसूस की जा रही है। सवर्णों के बीच भाजपा से जुड़ी कुछ नाराजगी के बावजूद, विपक्षी दल के रूप में अखिलेश यादव उसे वोटों में कितनी तब्दील कर पाएंगे, यह आगामी विधानसभा चुनावों में ही स्पष्ट हो पाएगा।
लगातार भूकंप के झटकों पर महाराष्ट्र में सियासत, उद्धव गुट ने सरकार को घेरा
11 Jul, 2026 02:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। मराठवाड़ा क्षेत्र में पिछले कुछ समय से लगातार महसूस किए जा रहे भूकंप के झटकों के मद्देनजर शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार मुंबई में अपने प्रचार और जनसंपर्क अभियानों में पूरी तरह व्यस्त है, जबकि मराठवाड़ा के विभिन्न हिस्सों में मंडरा रहे भूकंप के खतरे को नजरअंदाज किया जा रहा है। विशेष रूप से हिंगोली, परभणी और नांदेड़ जिलों में बार-बार आ रहे इन झटकों के प्रति सरकारी उदासीनता पर पार्टी ने गहरा आक्रोश जताया है।
प्रशासनिक लापरवाही पर तीखा हमला
शिवसेना (यूबीटी) ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार ने संकट की इस घड़ी में अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लिया है। पार्टी का आरोप है कि भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में आम लोगों के बीच बढ़ते डर और असुरक्षा की भावना के बावजूद प्रशासन ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं। उन्होंने जोर दिया कि सरकार को अपनी प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करना चाहिए और इन संवेदनशील क्षेत्रों के निवासियों की सुरक्षा के लिए ठोस सुरक्षात्मक योजनाएं तत्काल लागू करनी चाहिए।
भूकंपीय खतरे की अनदेखी का आरोप
पार्टी ने स्पष्ट किया कि लगातार आ रहे भूकंप के झटके आने वाले किसी बड़े प्राकृतिक संकट का संकेत हो सकते हैं, जिसे लेकर सरकार का सुस्त रवैया खतरनाक है। पार्टी ने मांग की है कि भू-वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम को इन जिलों में तैनात किया जाए ताकि भूकंप के कारणों का सटीक पता लगाकर सुरक्षा के उपाय किए जा सकें। सरकार की वर्तमान कार्यप्रणाली को 'अदूरदर्शी' बताते हुए पार्टी ने इसे मराठवाड़ा के निवासियों के प्रति गंभीर प्रशासनिक लापरवाही करार दिया है।
सुरक्षा व्यवस्था और जनता का असंतोष
मराठवाड़ा के निवासियों में बढ़ता असंतोष और दहशत इस बात का प्रमाण है कि सरकारी आश्वासन धरातल पर कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज नहीं की गईं, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। पार्टी ने सरकार से अपील की है कि वे राजनीतिक विज्ञापनों और प्रचार से परे हटकर राज्य के उन हिस्सों पर ध्यान केंद्रित करें जो इस समय प्राकृतिक आपदा के सीधे प्रभाव में हैं।
बिहार की सियासत में नए संकेत! NDA बैठक में नीतीश के बयान से सम्राट चौधरी पर चर्चाएं तेज
11 Jul, 2026 01:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की राजधानी में आयोजित एनडीए की एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व की खुलकर प्रशंसा की है। गठबंधन के नेताओं को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि सम्राट चौधरी राज्य में जारी विकास कार्यों को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि एनडीए सरकार एकजुट होकर बिहार को प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दौरान वे अपने पुराने संघर्षों को याद कर भावुक भी हुए और पुरानी यादें साझा कीं।
बिहार के विकास यात्रा और संघर्षों का स्मरण
बैठक के दौरान नीतीश कुमार ने साल 2005 के बाद से राज्य में आए व्यापक बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सड़क, बिजली, कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में हमने विपरीत परिस्थितियों के बीच बिहार को संवारा है। उन्होंने सभी गठबंधन सहयोगियों को सचेत किया कि विकास की जो रफ्तार हमने सालों की मेहनत से हासिल की है, उसे नई सरकार के दौरान भी निरंतर बनाए रखना होगा। यह उनकी ओर से नई टीम को दी गई एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार की उपलब्धियों और भविष्य की कार्ययोजना
बैठक में सम्राट चौधरी सरकार के शुरुआती 100 दिनों के कार्यकाल की समीक्षा की गई। नीतीश कुमार ने केंद्र की तर्ज पर राज्य में नीति आयोग के गठन और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी योजनाओं को सराहते हुए कहा कि सम्राट चौधरी ने गठबंधन के भरोसे को सार्थक किया है। उन्होंने आगामी रणनीतियों पर चर्चा करते हुए सभी जन प्रतिनिधियों का आह्वान किया कि वे सुशासन के एजेंडे को जन-जन तक पहुंचाएं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अब राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर विकास कार्यों की जमीनी हकीकत की समीक्षा करेंगे।
विपक्ष को एकजुटता का स्पष्ट संदेश
नीतीश कुमार द्वारा सम्राट चौधरी की कार्यशैली की प्रशंसा करना विपक्ष के उन दावों को खारिज करने के लिए पर्याप्त है, जिनमें एनडीए के भीतर किसी भी तरह के मतभेद की बात कही जा रही थी। हालांकि नीतीश कुमार अब सक्रिय राजनीति में राज्यसभा सांसद के तौर पर केंद्र में भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि बिहार के विकास और गठबंधन की स्थिरता के लिए उनका मार्गदर्शन और समर्थन हमेशा बना रहेगा। इस बैठक ने आगामी चुनौतियों से निपटने के लिए सत्ता पक्ष को एक नई मजबूती दी है।
ममता बनर्जी को लग सकता है बड़ा झटका, अनुब्रत मंडल के पाला बदलने की अटकलें तेज
11 Jul, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है, जहाँ ममता बनर्जी के अत्यंत विश्वसनीय सहयोगी माने जाने वाले अनुब्रत मंडल के अब उनके खेमे को छोड़कर ऋतब्रत बनर्जी के गुट में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों का दावा है कि दोनों पक्षों के बीच इस राजनीतिक बदलाव को लेकर सारी बातचीत अंतिम चरण में है और शनिवार को इसकी औपचारिक घोषणा की जा सकती है। यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ते आंतरिक असंतोष को उजागर करता है।
विधायक से फोन पर चर्चा के बाद बनी सहमति
मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को विधानसभा में हुई राजनीतिक हलचलों के बाद ऋतब्रत खेमे के एक विधायक ने अनुब्रत मंडल से दूरभाष पर संपर्क किया था। इसी संवाद के दौरान अनुब्रत मंडल ने नए खेमे में शामिल होने पर अपनी सहमति व्यक्त की है। बताया जा रहा है कि इस राजनीतिक जुड़ाव के पीछे एक बड़ा प्रस्ताव है, जिसके तहत उन्हें ऋतब्रत समर्थित तृणमूल का बीरभूम जिला अध्यक्ष नियुक्त करने का आश्वासन दिया गया है और अनुब्रत ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।
शनिवार को नई जिम्मेदारी की औपचारिक घोषणा
ऋतब्रत बनर्जी के समर्थकों द्वारा शनिवार को एक कार्यसमिति की बैठक बुलाई गई है। ऐसी प्रबल संभावना है कि बैठक के तुरंत बाद आयोजित होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में अनुब्रत मंडल को नई संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपे जाने की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी। यह कदम ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि अनुब्रत मंडल न केवल बीरभूम में पार्टी की मजबूत धुरी रहे हैं, बल्कि हर संकट की घड़ी में ममता बनर्जी के सबसे प्रमुख रक्षक के रूप में देखे जाते थे।
ममता से बढ़ती दूरियां और राजनीतिक भविष्य
लंबे समय तक ममता बनर्जी के प्रति पूर्ण निष्ठा रखने वाले अनुब्रत मंडल के रुख में विधानसभा चुनाव के बाद से ही बदलाव के संकेत मिलने लगे थे। राजनीतिक और कानूनी विवादों के दौरान जब मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन किया था, तब तक सब कुछ सामान्य था, लेकिन अब उनके बदलते तेवर भविष्य के नए गठबंधन की ओर इशारा कर रहे हैं। अनुब्रत मंडल का यह संभावित कदम तृणमूल कांग्रेस के मूल ढांचे में एक बड़ी दरार को स्पष्ट करता है, जिसके परिणाम आगामी स्थानीय और राज्य स्तरीय राजनीति में देखने को मिल सकते हैं।
'तेल कितना और धार कितनी', चन्नी के बयान से बैठक से पहले गरमाई कांग्रेस की सियासत
11 Jul, 2026 12:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के भीतर चल रही आपसी खींचतान एक बार फिर चरम पर है। पार्टी की आंतरिक कलह को शांत करने के उद्देश्य से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल आज राज्य के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक कर रहे हैं। इस बैठक के केंद्र में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनका समर्थक गुट है, जो पार्टी नेतृत्व के फैसलों को लेकर अपनी नाराजगी और चिंताएं खुलकर साझा करने की तैयारी में है।
चन्नी के तीखे तेवर और नेतृत्व पर सवाल
बैठक से पूर्व चरणजीत सिंह चन्नी ने अपनी नाराजगी के संकेत देते हुए स्पष्ट किया है कि वे प्रभारी के समक्ष अपनी बात मजबूती से रखेंगे। उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा कि 'तेल और तेल की धार' का पता बैठक के बाद चलेगा, जो संकेत देता है कि कांग्रेस के भीतर का यह विवाद सुलझने के बजाय और उलझ सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री और उनके समर्थक नेताओं का मुख्य विरोध अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले को लेकर है, जिसे चन्नी गुट पुनर्विचार के दायरे में लाना चाहता है।
बागी गुट की लामबंदी और रणनीतिक बैठक
राणा गुरजीत सिंह के चंडीगढ़ स्थित आवास पर आयोजित इस बैठक में सुखजिंदर सिंह रंधावा, त्रिपत राजिंदर सिंह बाजवा और गुरकीरत कोटली जैसे दिग्गज नेता शामिल हुए हैं। हालांकि बैठक में शामिल नेताओं ने इसे केवल आगामी चुनाव की तैयारियों से जुड़ी चर्चा बताया है, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष की अनुपस्थिति और बागी धड़े की सक्रियता से साफ है कि यह शक्ति प्रदर्शन का एक जरिया है। सूत्रों के अनुसार, करीब 70 से 80 नेता इस समूह का हिस्सा हैं, जिनमें से पांच प्रमुख नेता प्रभारी भूपेश बघेल के साथ सीधे संवाद करेंगे।
हाईकमान का रुख और चुनावी चुनौतियां
कांग्रेस हाईकमान ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि राजा वड़िंग के अध्यक्ष पद पर बने रहने का निर्णय अंतिम है और इसमें बदलाव की कोई संभावना नहीं है। एक जुलाई को लिए गए इस निर्णय के बाद चन्नी को चुनाव अभियान समिति की जिम्मेदारी सौंपकर उन्हें साधने की कोशिश की गई थी, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष पद न मिल पाने से उपजी उनकी नाराजगी कम होने का नाम नहीं ले रही है। भूपेश बघेल के सामने अब बड़ी चुनौती यह है कि वे किस प्रकार पार्टी को एकजुट कर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में एक मजबूत चेहरा पेश कर पाते हैं, अन्यथा यह अंतर्कलह पार्टी के लिए भारी पड़ सकती है।
'विजय, स्टालिन और राहुल एक मंच पर आएं' VCK चीफ की अपील से गठबंधन की अटकलें तेज
11 Jul, 2026 12:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में एक बेहद अप्रत्याशित गठबंधन की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। केंद्र में विपक्षी एकता को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य के दो प्रमुख धुर विरोधी दल, डीएमके (DMK) और टीवीके (TVK), एक ही मंच पर आ सकते हैं। यह राजनीतिक समीकरण तब सामने आया जब वीसीके प्रमुख और सांसद थिरुमावलवन ने प्रस्ताव दिया कि हालांकि ये दोनों दल तमिलनाडु में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का मुकाबला करने के लिए 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक के अंतर्गत एक साथ आ सकते हैं।
विपक्षी एकता और राष्ट्रीय हितों पर जोर
इस प्रस्ताव को कांग्रेस का भी समर्थन मिला है। कांग्रेस सांसद जोथिमणि सेन्नीमलाई का कहना है कि यह मुद्दा संकीर्ण दलीय राजनीति से ऊपर उठकर देश के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने जोर दिया कि लोकतंत्र के समक्ष खड़ी चुनौतियों और संस्थाओं की स्वायत्तता को बचाने के लिए विपक्षी दलों का एकजुट होना अनिवार्य है। उनके अनुसार, निजी राजनीतिक हितों को दरकिनार कर व्यापक विपक्षी एकता का निर्माण करना ही देशहित में एकमात्र विकल्प है, जो भाजपा के बढ़ते प्रभाव को रोकने में सक्षम हो सकता है।
बदलते राजनीतिक समीकरण और चुनावी इतिहास
तमिलनाडु के चुनावी परिदृश्य का इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन था, लेकिन टीवीके की निर्णायक जीत के बाद कांग्रेस ने पाला बदलकर विजय के नेतृत्व वाले गठबंधन का हाथ थाम लिया था। अब सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि केंद्र की राजनीति में डीएमके और टीवीके का एक साथ आना भविष्य की एक बड़ी रणनीति हो सकती है। हालांकि डीएमके ने अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई औपचारिक रुख स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष को एकजुट रखने की कवायद में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
लोकतंत्र की खूबसूरती है वैचारिक स्वतंत्रता
टीवीके के मंत्री राज मोहन ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'लोकतंत्र की खूबसूरती' करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीवीके अपने सहयोगियों पर कोई दबाव नहीं डालती और उनके सहयोगी दल अपनी राय रखने के लिए स्वतंत्र हैं। राज मोहन ने दोहराया कि भाजपा उनकी वैचारिक विरोधी है, जिसके चलते राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के साथ जाने के विकल्प पूरी तरह खुले हुए हैं। यदि डीएमके और टीवीके भाजपा के खिलाफ एक ही राष्ट्रीय मंच साझा करते हैं, तो यह दक्षिण भारतीय राजनीति का एक नया और अप्रत्याशित अध्याय होगा।
महाराष्ट्र में नई सियासी हलचल, उद्धव गुट के बाद शरद पवार की पार्टी में भी बढ़ी बेचैनी
11 Jul, 2026 11:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना द्वारा कथित तौर पर 'ऑपरेशन टाइगर-3' शुरू करने की चर्चाएं जोरों पर हैं। राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि इस गुप्त अभियान के जरिए उद्धव ठाकरे गुट और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को आगामी समय में एक और बड़ा झटका दिया जा सकता है। राज्य में लगातार बदल रहे समीकरणों के बीच इस नई मुहिम ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।
सांगठनिक स्तर पर ठाकरे गुट को मिल रहे झटके
हाल के दिनों में ठाकरे गुट से लगातार नेताओं और पदाधिकारियों का पाला बदलकर शिंदे गुट में शामिल होना चर्चा का विषय बना हुआ है। इसने महाराष्ट्र की राजनीतिक तस्वीर को काफी हद तक बदल दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह सिलसिला इसी तरह जारी रहता है, तो ठाकरे गुट के लिए अपनी सांगठनिक संरचना को बचाए रखना एक बड़ी चुनौती साबित होगा। 'ऑपरेशन टाइगर-3' की खबरें इसी कड़ी में एक नए राजनीतिक अध्याय के रूप में देखी जा रही हैं।
10 विधायकों के पाला बदलने की चर्चा
शिंदे गुट के रणनीतिकारों का दावा है कि उद्धव ठाकरे गुट के करीब 10 विधायक उनके संपर्क में हैं। सूत्रों के अनुसार, इन विधायकों के साथ पिछले कुछ दिनों में कई गोपनीय बैठकें हुई हैं, जिनमें उन्हें शिंदे गुट में शामिल होने के लिए राजी करने का प्रयास किया गया है। दावा किया जा रहा है कि इन बैठकों में सफलता भी हाथ लगी है, जिससे ठाकरे गुट के खेमे में हड़कंप की स्थिति पैदा हो गई है। विधायकों के इस कथित असंतोष ने गठबंधन की स्थिरता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ता सियासी तनाव
इस घटनाक्रम ने राज्य में सत्ताधारी और विपक्षी खेमों के बीच तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है। जहां एक ओर शिंदे गुट अपने विस्तार की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ठाकरे और पवार गुट अपनी एकता बनाए रखने की जद्दोजहद में जुटे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 'ऑपरेशन टाइगर-3' के दावे कितने सच साबित होते हैं और क्या ये विधायक वाकई पाला बदलते हैं, क्योंकि यह कदम महाराष्ट्र के आगामी चुनावों के नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
तृणमूल में जारी सियासी उथल-पुथल, क्या एक और सांसद को दिखाया जाएगा बाहर का रास्ता?
11 Jul, 2026 11:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सामने राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। पार्टी न केवल आंतरिक टूट का सामना कर रही है, बल्कि संगठन और संसदीय मोर्चों पर भी दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। विधानसभा चुनावों के बाद से जारी उठापटक के बीच पार्टी के राज्यसभा में घटते प्रभाव और समानांतर संगठन के उदय ने नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर दी है। यह स्थिति न केवल पार्टी की एकता पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि राज्य की राजनीति में टीएमसी के भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता पैदा कर रही है।
राज्यसभा में घटता संख्या बल और बढ़ती चुनौती
तृणमूल कांग्रेस के लिए उच्च सदन में अपनी स्थिति बचाए रखना कठिन होता जा रहा है। हाल ही में तीन सांसदों के इस्तीफे और भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। चर्चाएं हैं कि रुक्मणी मलिक समेत कुछ अन्य सांसद भी पार्टी छोड़ने की कगार पर हैं। यदि आने वाले दिनों में और इस्तीफे होते हैं, तो राज्यसभा में टीएमसी का संख्या बल काफी कम हो जाएगा, जिससे संसद में पार्टी का प्रभाव सीमित होना तय है। अब तक लगभग 20 सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं, जो नेतृत्व के प्रति बढ़ते असंतोष को दर्शाता है।
ऋतव्रत बनर्जी गुट का समानांतर संगठन
पार्टी के भीतर संगठनात्मक स्तर पर दो धड़े बन गए हैं। ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट खुद को 'असली तृणमूल' घोषित करते हुए तेजी से अपनी जड़ें जमा रहा है। इस गुट ने न केवल अपनी वर्किंग कमेटी बनाई है, बल्कि चुनाव आयोग को भी इसकी औपचारिक जानकारी दे दी है। तपासिया में हुई बैठकों के माध्यम से यह गुट अब जिला और ब्लॉक स्तर पर नई नियुक्तियां कर अपनी समानांतर सत्ता खड़ी करने में जुटा है। विधायक अरूप राय को चेयरपर्सन बनाकर इस खेमे ने ममता बनर्जी के नेतृत्व को सीधी चुनौती दे दी है।
चुनाव आयोग में नाम और चुनाव चिह्न की जंग
संगठनात्मक ढांचे के बाद अब यह लड़ाई चुनाव आयोग की दहलीज तक पहुँच गई है। पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर मालिकाना हक को लेकर दोनों गुटों के बीच कानूनी खींचतान जारी है। जहाँ एक तरफ कालीघाट गुट पार्टी के पुराने ढांचे को बचाने की जद्दोजहद में लगा है, वहीं बागी गुट कानूनी और सांगठनिक दोनों स्तरों पर घेरने की रणनीति अपना रहा है। यदि यह गतिरोध बना रहता है, तो आगामी दिनों में टीएमसी के भीतर नेतृत्व और वैधता की यह लड़ाई राज्य की राजनीति की दिशा पूरी तरह बदल सकती है।
बांकीपुर सीट पर बीजेपी का बिगुल, 13 जुलाई को पर्चा दाखिल करेंगे नीरज सिन्हा
11 Jul, 2026 11:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है। अभिषेक कुमार 'बंटी' द्वारा अपना नामांकन वापस लेने के बाद पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है। नीरज कुमार सिन्हा 13 जुलाई को अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे, जो कि पर्चा भरने की अंतिम तिथि है। इसके बाद 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी और 16 जुलाई तक नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी।
नीरज सिन्हा का लंबा राजनीतिक सफर
नीरज कुमार सिन्हा का संगठन में लंबा अनुभव रहा है, वे वर्ष 2006 से भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय सदस्य हैं। उन्होंने बूथ अध्यक्ष से लेकर मंडल अध्यक्ष तक की विभिन्न जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है। वर्तमान में वे नरेंद्र भारती मंडल के अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनका परिवार जनसंघ काल से ही विचारधारा के प्रति समर्पित रहा है; उनके चाचा नरेंद्र भारती स्वयं एक निष्ठावान कार्यकर्ता थे, जिनके सम्मान में ही उक्त मंडल का नाम रखा गया था।
सीट खाली होने की पृष्ठभूमि और नई उम्मीदवारी
यह विधानसभा सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने और विधायक पद से इस्तीफा देने के कारण रिक्त हुई है। इससे पहले अभिषेक कुमार ने 9 जुलाई को अपना नामांकन भरा था, लेकिन पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने चुनाव मैदान से हटने का निर्णय लिया। अब पार्टी ने नीरज सिन्हा पर दांव लगाया है, जिन्होंने नेतृत्व के भरोसे को अपना सम्मान बताया है। उन्होंने विश्वास जताया कि नितिन नवीन के कुशल मार्गदर्शन में वे सभी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर इस चुनाव में जीत दर्ज करेंगे।
उपचुनाव का चुनावी कार्यक्रम
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया 30 जुलाई को निर्धारित की गई है। इस चुनाव के परिणाम 3 अगस्त को घोषित किए जाएंगे। भाजपा द्वारा प्रत्याशी बदलने के बाद अब राजनीतिक सरगर्मियां और तेज हो गई हैं। नीरज सिन्हा के नामांकन के बाद चुनावी प्रचार अभियान को नई गति मिलने की संभावना है, क्योंकि वे बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं के बीच अपनी मजबूत पकड़ रखते हैं। भाजपा के लिए यह सीट अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
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