राजनीति
चुनाव प्रचार के दौरान हिंसा: अधीर रंजन चौधरी पर हमले से सियासत गरमाई
4 Apr, 2026 11:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बहरामपुर | कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर हमला करने का आरोप लगाया। मुर्शिदाबाद जिले की बहरामपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार चौधरी ने दावा किया कि चुनाव प्रचार के दौरान उन पर हमला किया गया। इस घटना ने पश्चिम बंगाल में चल रहे चुनावी माहौल में तनाव को और बढ़ा दिया है।न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक कांग्रेस नेता के साथ यह घटना तब हुई, जब अधीर रंजन चौधरी बहरामपुर विधानसभा क्षेत्र में एक जनसंपर्क अभियान में भाग ले रहे थे। आरोप है कि टीएमसी के कुछ कार्यकर्ताओं ने अचानक अभियान में बाधा डाली और चौधरी समेत उनके समर्थकों पर हमला किया। इस दौरान कुछ वाहनों को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।
अधीर रंजन चौधरी ने टीएमसी पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यह हमला सुनियोजित था और टीएमसी अपने कार्यकर्ताओं के जरिए विपक्षी आवाजों को दबाने की कोशिश कर रही है।
केरल की सत्ता पर संकट के संकेत: 40 सीटों पर मछुआरों का गुस्सा बन सकता है निर्णायक
4 Apr, 2026 10:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | केरल की 140 विधानसभा सीटों में से लगभग 40 सीटें समुद्र तट से सटी हुई हैं। राज्य में 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले मछुआरा समुदाय का मिजाज इस बार बदला हुआ है। यह समाज सरकार की कुछ बुनियादी नीतियों और भूमि विवादों से इतना खफा है कि तटीय क्षेत्रों के चुनावी समीकरण पलट सकते हैं।सरकार ने समुद्र के बढ़ते जलस्तर और कटाव से मछुआरों को राहत देने के लिए पुनर्गेहम नाम की महत्वाकांक्षी पुनर्वास योजना शुरू की है। इसके तहत समुद्र तट से 50 मीटर के दायरे में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर फ्लैट या घर दिए जा रहे हैं। सुनने में यह योजना भले कल्याणकारी लगे, लेकिन कुछ मछुआरे पुनर्वास योजना के तहत नए फ्लैटों को समुद्र से दूर बता रहे हैं और उन्हें यह चिंता है कि इससे उनकी मछली पकड़ने के काम पर असर पड़ सकता है। हालांकि जमीनी शिकायतों के विपरीत सरकार का दावा है कि उसने मछुआरों के लिए रिकॉर्ड मुआवजा दिया है।
विझिंजम बंदरगाह
तिरुवनंतपुरम के विझिंजम में अंतरराष्ट्रीय डीप वॉटर पोर्ट का स्थानीय मछुआरे विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पोर्ट निर्माण के कारण समुद्री कटाव बढ़ने से तटीय गांवों में घरों और आजीविका पर संकट आया है। इसके अलावा, पुनर्वास, मुआवजा और सुरक्षा उपायों को लेकर भी असंतोष बना हुआ है। उधर सरकार इस परियोजना को राज्य के विकास और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अहम बता रही है। मछुआरों की मांग है कि बंदरगाह से होने वाली आय का एक हिस्सा तटीय समुदायों के विकास और सुरक्षा पर खर्च किया जाए।
मुनंबम भूमि विवाद
एर्नाकुलम के मुनंबम क्षेत्र में रहने वाले करीब 600 मछुआरा परिवार अपनी जमीन बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। साल 2019 में केरल वक्फ बोर्ड ने मछुआरों की जमीन पर दावा ठोकते हुए इसको बतौर वक्फ संपत्ति पंजीकृत कर लिया। इसके बाद इन परिवारों पर विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है। मछुआरों का कहना है कि उन्होंने यह जमीन खरीदी थी, जबकि वक्फ बोर्ड का दावा है कि यह दान की गई धार्मिक संपत्ति है जिसे बेचा नहीं जा सकता था। मछुआरे इसे अपनी पुश्तैनी कमाई पर डाका मान रहे हैं। कैथोलिक चर्च और मछुआरा संगठन एकजुट होकर सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। यह मुद्दा केरल में धार्मिक ध्रुवीकरण और भूमि अधिकार की बहस को जन्म दे रहा है।
किसे लगेगा झटका?
यह सभी मुद्दे मौजूदा एलडीएफ सरकार के कार्यकाल की नीतियों से जुड़े हैं, लिहाजा सत्ता-विरोधी लहर का सबसे ज्यादा असर वामपंथी गठबंधन पर पड़ सकता है। मछुआरों का पारंपरिक गुस्सा एलडीएफ का वोट कम कर सकता है। मुनंबम विवाद और चर्च के समर्थन के कारण पिछली बार छिटका ईसाई वोट बैंक वापस यूडीएफ की ओर मुड़ सकता है। इधर भाजपा भी मुनंबम पर आक्रामक रुख अपना रही है और वक्फ संशोधन बिल के जरिए मछुआरा समाज में अपनी पैठ बना रही है। अगर यह मुद्दे तटीय क्षेत्रों में 5 से 10 प्रतिशत वोट भी काटते हैं, तो नुकसान एलडीएफ को होगा।
CEC ज्ञानेश कुमार का आदेश: पश्चिम बंगाल में पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करें
4 Apr, 2026 09:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ मिलकर मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, कोलकाता पुलिस आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में निर्देशित किया है।
सभी स्तरों पर निर्देश लागू
यह निर्देश मंडल आयुक्तों, एडीजीपी, आईजी, जिलाधिकारियों, पुलिस आयुक्तों, एसएसपी और एसपी सहित सभी स्तर के अधिकारियों पर लागू होंगे। चुनाव आयोग ने इस बात पर जोर दिया है कि चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह से भय, हिंसा, धमकी, प्रलोभन, बूथ कैप्चरिंग, बूथ जैमिंग और मतदान में किसी भी प्रकार की बाधा से मुक्त होनी चाहिए।
क्या मालदा की घटना बनी निर्देशों की वजह?
यह निर्देश मालदा जिले में हाल ही में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद आए हैं, जहां एक अप्रैल को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने तीन महिलाओं समेत सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया था।
सियासी सरगर्मी और आरोप-प्रत्यारोप
पश्चिम बंगाल में एसआईआर की घोषणा के बाद से ही राजनीति गरमा गई थी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया का पुरजोर विरोध करते हुए चुनाव आयोग पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था। वहीं, भाजपा ने इसे घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर पेश किया था।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
एनआईए से प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल, 2026 को निर्धारित है, जिसमें संबंधित अधिकारियों को ऑनलाइन उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को न्याय प्रशासन में बाधा डालने का एक बेशर्म और जानबूझकर किया गया प्रयास बताया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस बात पर चिंता व्यक्त की थी कि पूर्व सूचना के बावजूद राज्य के अधिकारी समय पर सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहे, जिससे अधिकारी घंटों तक बिना भोजन या पानी के रहे। अदालत ने मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक सहित वरिष्ठ राज्य अधिकारियों को उनके निष्क्रियता के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए थे।
पार्टी में उठे सवाल: हरीश रावत के ‘अवकाश’ पर हरक सिंह रावत का बड़ा बयान
3 Apr, 2026 11:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून: इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राजनीतिक कार्यक्रमों व मीडिया से दूरी बनाई हुए हैं. उनकी इस घोषणा के बाद से ही कांग्रेस पार्टी असहज है. ऐसे में कुछ लोग उनके राजनीति अवकाश को नाराजगी से जोड़कर देख रहे हैं. वहीं उनकी ही पार्टी के नेता उन पर तंजात्मक टिप्पणी करने से बाज नहीं आ रहे हैं.
पार्टी में एक बार फिर से गुटबाजी दिखाई दे रही है. हरीश रावत के करीबी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल पहले ही इस बात को कह चुके कि हरीश रावत किसी ना किसी बात से नाराज हैं. वहीं उनके खेमे के माने जाने वाले धारचूला विधायक हरीश धामी ने चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत के बयान को निंदनीय बताते हुए हरीश रावत के समर्थन में सामूहिक इस्तीफा देने की सोशल मीडिया में चेतावनी दे डाली. इन सबके बीच हरक सिंह रावत का एक बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने पार्टी प्रदेश मुख्यालय में कहा कि मैं कभी भी दो-चार दिन आराम पर जाने के लिए विज्ञप्ति जारी नहीं करता हूं. लेकिन हर व्यक्ति की अपने काम करने की शैली अलग होती है. हम कभी इस बात का खुलासा नहीं करते हैं कि हमने 5-6 दिन के लिए व्रत ले लिया है.
कई बार उनके जीवन में ऐसा हुआ है कि जब कभी भी उन्होंने नॉनवेज खाना शुरू किया, दो-चार दिन खाने के बाद अगर किसी पशु के साथ हो रही हिंसा को सोशल मीडिया में देखता हूं तब उसके बाद मेरा मन नॉनवेज खाने का नहीं करता है. उसके बाद मन ही मन वह कसम खा लेते हैं कि वह कभी मांसाहार का सेवन नहीं करेंगे. पिछले दो-तीन साल उन्होंने नॉनवेज खाना छोड़ रखा था. उसके बाद एक बार फिर से उन्होंने नॉनवेज खाना शुरू किया, उन्हें फिर से वही हालात दिखने लगे, उसके बाद उन्होंने फिर से एक बार नॉनवेज छोड़ दिया.
उन्होंने इसकी विज्ञप्ति सोशल मीडिया पर कभी जारी नहीं की. लेकिन मीडिया के माध्यम से अब यह विज्ञप्ति भी जारी हो गई, कि मैंने मांसाहार छोड़ दिया है. उन्होंने कहा कि हरीश रावत उनके बड़े भाई के समान हैं, उनकी उम्र भी काफी हो गई है. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में बहुत मेहनत की है. आज उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचकर कोई इतनी मेहनत नहीं कर सकता है, जितना हरीश रावत करते हैं. उन्होंने कांग्रेस के विरुद्ध एक भी शब्द अभी तक नहीं बोला है. उनकी तरफ से अभी तक कांग्रेस की कोई आलोचना नहीं की गई है. हरक सिंह रावत का कहना है कि वह पहले से ही इस बात को कहते आए हैं कि अगर आयु बढ़ानी है तो अपने राजनीतिक जीवन काल में चुनाव लड़ते रहना चाहिए.
हरीश रावत ने तोड़ी चुप्पी: राजनीति पर दिया बड़ा संदेश
3 Apr, 2026 10:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इन दिनों सभी राजनीतिक कार्यक्रमों से दूरी बनाई हुई हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लिये गए राजनीतिक अवकाश को अपना अधिकार बताया है. उन्होंने कहा कि 59 वर्ष से अधिक समय से परिणय सूत्र में बंधन के इस लंबे अंतराल में मै निरंतर कर्तव्यरत रहने के दौरान मैं एक छोटा अर्जित अवकाश लेना अपना स्वाभाविक अधिकार समझता हूं. इस अटूट बंधन के दौरान कभी-कभी कुछ ऐसे क्षण भी आ सकते हैं, जब आप थोड़ी असहजता का अनुभव कर सकते हैं. बड़े परिपेक्ष में स्थितियों को समझना पड़ता है.
उन्होंने विनती पूर्ण तरीके से कहा है कि उनके इस अर्जित अवकाश को लेकर पक्ष विपक्ष नहीं बनाया जाए. उन्होंने कहा कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल से उनका मानसिक भावनात्मक रिश्ता रहा है, इसलिए उनके शब्द स्वाभाविक हैं. फिर भी मैं इसके लिए माफी मांगता हूं. उन्होंने कहा कि इन 59 वर्षों की अथक यात्रा के दौरान उन्हें इस बात का स्मरण रहा है कि वह एक पार्टी कार्यकर्ता है. अंतिम रूप से पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व का निर्णय ही उन्होंने हमेशा शिरोधार्य माना है. कभी उन्होंने थोड़ी विनती कर दी होगी, मगर आखिर में शीर्ष के नेतृत्व को ही शिरोधार्य किया है.
इतने लंबे व्रत जो संकल्प का रूप ले चुका है, वह अब नहीं टूटेगा और ना ही बदलेगा. हरीश रावत का कहना है कि जिन नौजवानों को 2027 में अपने लिए संभावनाएं दिखाई दे रही हैं, वह उनसे कहना चाहते हैं कि महर्षि दधीचि की तरह अगर उन्हें मेरी हड्डियों की जरूरत होगी तो उनके भविष्य को संवारने के लिए मेरी हड्डियां हमेशा उपलब्ध रहेंगी. उनका कहना है की अवकाश के दौरान भी वह सक्रिय हैं, और लगातार अपनी हड्डियां घिस रहे हैं. इस लंबे अंतराल के दौरान मेरा कई लोगों समूह क्षेत्र मान्यताओं व जन अपेक्षाओं के साथ जुड़ाव रहा है. इसलिए जीवन के इस मोड़ पर मुझे उनके परामर्श की भी जरूरत है. उनसे अपने जुड़ाव को दोहराने के लिए उनके बीच जाने की आवश्यकता को वह महसूस कर रहे हैं. मुझको लेकर उत्सुकता रखने वाले समीक्षकों का मैं आभारी हूं.
दिल्ली की पूर्व सीएम आतिशी का बड़ा हमला: राघव चड्ढा पर लगाए गंभीर आरोप
3 Apr, 2026 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी नेता आतिशी ने आप सांसद राघव चड्ढा पर कई गंभीप आरोप लगाए हैं.उन्होंने एक वीडियो जारी करते हुए कहा, "मैं राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा से सवाल पूछना चाहती हूं कि आप बीजेपी से इतना डरते क्यों हो. आप मोदी से सवाल उठाने से इतना डरते क्यों हैं.आज हमारी आंखों के सामने इलेक्शन कमीशन का मिसयूज़ करके पश्चिम बंगाल का चुनाव चुराया जा रहा है, लेकिन आप उस पर सवाल नहीं उठा रहे हैं."
आतिशी का कहना है कि जब इलेक्शन कमीशन के विरोध में साइन करने की बात आई तो राघव चड्ढा ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया. उन्होंने कहा, "क्या आपने एक बार भी संसद में इन मुद्दों पर सवाल उठाया?"दिल्ली की पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि 'एलपीजी मुद्दे' पर जब राघव चड्ढा को संसद में बोलने के लिए कहा गया तब वह चुप रहे.उन्होंने कहा, "जब अरविंद केजरीवाल जी गिरफ़्तार हुए तब हम सब सड़कों पर खड़े होकर लड़ रहे थे. आप (राघव चड्ढा) तब लंदन में थे. लेकिन आज मेरे मन में भी सवाल आ रहा है कि क्या आप डर कर लंदन भाग गए."
इससे पहले शुक्रवार को राघव चड्ढा ने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को कहा है कि उनके राज्यसभा में बोलने पर रोक लगा दी जाए.उन्होंने कहा, "ख़ामोश करवाया गया हूँ, हारा नहीं हूँ."दरअसल आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में पार्टी के डिप्टी लीडर की ज़िम्मेदारी राघव चड्ढा की जगह अशोक कुमार मित्तल को दे दी है.
ममता बनर्जी का बड़ा बयान: मालदा में बाहरी तत्वों की गुंडागर्दी
3 Apr, 2026 08:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
West Bengal Chunav Update: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मालदा के कालियाचक में वोटर लिस्ट संशोधन (SIR) के दौरान हुई हिंसा पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि “बीजेपी बाहर से गुंडे बुलाकर गुंडागर्दी करवा रही है. यह साजिश चुनाव बाधित करने और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगवाने की है.”ममता ने चुनाव आयोग पर भी आरोप लगाया कि उसने प्रशासनिक बदलाव कर कानून-व्यवस्था को उनके हाथ से निकाल लिया है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे उकसावे में न आएं और शांतिपूर्वक विरोध करें.सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को “प्री-प्लांड” बताते हुए राज्य सरकार की कड़ी निंदा की है और NIA को जांच सौंप दी गई है.
AIMIM ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. इसी कड़ी में AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है. पार्टी ने इस चरण में कुल 12 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं. AIMIM की ओर से जारी सूची में राज्य के विभिन्न हिस्सों से उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया है. पार्टी ने रघुनाथगंज से इमरान सोआंकी, आसनसोल उत्तर से दानिश अज़ीज़ और कांडी से मिसबाहुल इस्लाम खान को टिकट दिया है. सुजापुर से रेजाउल करीम, मोथाबाड़ी से एडवोकेट मोहम्मद मोस्ताहिद हक, नलहाटी से हाजी अंसार एसके साब और मोरारी से तासिर एसके साहब को उम्मीदवार बनाया गया है.इसके अलावा, बारासात से मोनाएम सरदार, करंदीघी से मेहबूब आलम, सूती से असादुल एसके, बसिरहाट दक्षिण से शबाना परवीन और हाबरा से असिक राज मंडल को टिकट दिया गया है.
बंगाल चुनाव के मालदा उपद्रव मामले में मुख्य आरोपी मोफक्करुल इस्लाम गिरफ्तार
पश्चिम बंगाल चुनाव में मालदा के कालियाचक में नाकाबंदी, विरोध प्रदर्शन और न्यायिक अधिकारियों को हिरासत में लेने के मामले में मुख्य आरोपी मोफक्करुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया गया. चुनाव आयोग के अनुसार, भागने की कोशिश कर रहे मोफक्करुल को बागडोगरा एयरपोर्ट से पकड़ा गया. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था और पुलिस उनकी तलाश में जुटी थी.
मोफक्करुल पेशे से वकील हैं और पहले रायगंज जिला अदालत तथा बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट में प्रैक्टिस कर चुके हैं. वह 2021 विधानसभा चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM में शामिल हुए थे, लेकिन इटाहार सीट से चुनाव में उन्हें केवल 831 वोट मिले थे.
ममता ने BJP को बंगाल के बाद दिल्ली से उखाड़ने का लिया संकल्प
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. चुनाव के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा के खिलाफ बड़ा राजनीतिक संकल्प लिया है. तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने जनसभा में ऐलान किया कि वह भाजपा को न सिर्फ बंगाल से बाहर करेंगी, बल्कि दिल्ली की सत्ता से भी हटाकर रहेंगी.मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंच से जनता को गवाह बनाते हुए कहा कि बीजेपी का अंत अब करीब है. उन्होंने कहा, ‘यह मेरा वादा है पहले बंगाल से भाजपा को हटाऊंगी और फिर दिल्ली की कुर्सी से भी उन्हें उतार फेंकूंगी.’ मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग (ECI) और केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं का इस्तेमाल विपक्ष को दबाने के लिए किया जा रहा है. ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा, ‘मोदी और शाह देश को बर्बादी की ओर ले जा रहे हैं’. उन्होंने जनता से बीजेपी को सबक सिखाने की अपील की. ममता का यह बयान केवल राज्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इसे राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ते हुए भाजपा के खिलाफ व्यापक लड़ाई का संकेत दिया. उनके इस तेवर को आगामी चुनावी रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है.
दिलीप घोष का हमला- बंगाल की कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच कानून-व्यवस्था को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. खड़गपुर सदर सीट से भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष ने शुक्रवार को राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब न्यायिक अधिकारियों को ही घेरा जा रहा है और उनके काम में बाधा डाली जा रही है, तो प्रदेश में कानून का राज सवालों के घेरे में है.
चाय बागानों के मजदूरों के मुद्दे पर हेमंत सोरेन ने BJP को घेरा
3 Apr, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
झारखंड। के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी, विधायक कल्पना सोरेन, ने हाल ही में असम चुनाव से पहले राज्य के महत्वपूर्ण चाय बागान क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान, उन्होंने सीधे चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासी मजदूरों से मुलाकात की, उनकी समस्याओं को गहराई से समझा और उनसे सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने अपने राज्य झारखंड में चल रही विभिन्न लोक कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए असम में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार की नीतियों पर तीखा निशाना साधा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने आधिकारिक एक्स (पहले ट्विटर) हैंडल पर एक भावुक पोस्ट लिखकर चाय बागानों में रहने वाले आदिवासी समाज की दशकों पुरानी दुर्दशा पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अपने पोस्ट में इस समाज के योगदान और वर्तमान स्थिति के बीच के विरोधाभास को स्पष्ट किया। सोरेन ने लिखा, यह सिर्फ एक ट्वीट नहीं, बल्कि एक ऐसे समुदाय की आवाज़ थी जिसे लंबे समय से अनदेखा किया गया है।
सोरेन ने अपनी बातचीत और सोशल मीडिया पोस्ट में इस बात पर ज़ोर दिया कि आदिवासी समाज को आज भी उनके मूलभूत अधिकारों से वंचित रखा गया है। उन्होंने बताया कि उन्हें न तो अपनी ज़मीन पर मालिकाना हक़ मिलता है, न शिक्षा के क्षेत्र में बराबरी का अवसर दिया जाता है, और न ही उन्हें समाज में उचित सम्मान प्राप्त है। इससे भी अधिक अपमानजनक बात यह है कि उन्हें ‘टी ट्राइब’ कहकर एक सीमित पहचान में बांध दिया गया है, उनके अधिकारों को नकारा जाता है और आज भी उन्हें ‘कुली’ जैसे शब्दों से संबोधित कर नीचा दिखाया जाता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ये शब्द केवल उपाधियाँ नहीं हैं, बल्कि ये सदियों के शोषण, उपेक्षा और गहरी जड़ें जमा चुकी भेदभावपूर्ण मानसिकता का प्रतीक हैं।
अंग्रेजी राज से आजादी के बाद तक, शोषण की कहानी
सोरेन ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि अंग्रेज़ों के औपनिवेशिक शासनकाल के दौरान, भारत के विभिन्न हिस्सों से आदिवासी समाज के लोगों को उनके मूल घरों और जीवनशैली से दूर कर असम के इन चाय बागानों में काम करने के लिए जबरन लाया गया था। उन्हें अमानवीय परिस्थितियों में काम करने और जीने को मजबूर किया गया, जहाँ उनकी पीढ़ियों ने अपनी पूरी ज़िंदगी खपा दी। यह अत्यंत दुखद है कि देश को स्वतंत्रता मिलने के इतने दशकों बाद भी, इन मेहनतकश समुदायों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में कोई मूलभूत या सार्थक बदलाव नहीं आया है। उनकी मूलभूत आवश्यकताएं आज भी पूरी नहीं हो पाती हैं। यह स्थिति हमारे लोकतंत्र और न्याय प्रणाली पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि क्या यह स्वीकार्य है कि जिन लोगों ने अपने श्रम और समर्पण से इस धरती की अर्थव्यवस्था को खड़ा किया, उन्हें आज भी अपने अस्तित्व, अपनी पहचान और बुनियादी मानवीय अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़े? यह दर्शाता है कि एक बड़े वर्ग को अभी भी सामाजिक और आर्थिक न्याय से वंचित रखा गया है, जबकि वे देश के विकास में महत्वपूर्ण भागीदार रहे हैं।
आदिवासी पहचान और अधिकारों की बहाली पर जोर
हेमंत सोरेन ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यह संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं है। यह उससे कहीं बढ़कर, आदिवासी समाज के सम्मान की लड़ाई है, उनकी खोई हुई पहचान को वापस दिलाने की लड़ाई है, और उन्हें ऐतिहासिक न्याय दिलाने का संघर्ष है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह समय आ गया है जब आदिवासी समाज को उनके पूरे अधिकार मिलें। इसमें उनकी सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा, सामाजिक सम्मान की बहाली और भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त सभी संवैधानिक हक़ों की सुनिश्चितता शामिल है। सोरेन ने अपनी बात समाप्त करते हुए एक सशक्त संदेश दिया, ‘अब चुप्पी नहीं चलेगी। इतिहास के इस अन्याय को हम सबको मिलकर ठीक करना होगा।’ उनका यह बयान दर्शाता है कि आदिवासी अधिकारों का मुद्दा अब और नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। यह सभी राजनीतिक दलों, समाज और सरकार के लिए एक स्पष्ट आह्वान है कि वे इस गंभीर समस्या का समाधान करें।
असम में आगामी चुनाव और केंद्र में बीजेपी की सरकार के रहते, मुख्यमंत्री सोरेन का यह दौरा और उनका मुखर बयान सीधे तौर पर भाजपा को आदिवासी समुदाय के मुद्दों पर जवाबदेही तय करने की चुनौती देता है। चाय बागान क्षेत्रों में आदिवासी मतदाताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए, उनके मुद्दे निश्चित रूप से चुनावी समीकरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। हेमंत सोरेन का यह कदम झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी हितों के चैम्पियन के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करने की रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है। यह संघर्ष केवल चुनावी लाभ से परे, भारत के एक बड़े और महत्वपूर्ण समुदाय के लिए न्याय और समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।।
भाजपा ने जारी की 27 प्रत्याशियों की सूची, पूर्व अध्यक्ष अन्नामलाई को नहीं मिला टिकट
3 Apr, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए शुक्रवार को अपने 27 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस सूची में राज्य के अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से पार्टी के कई प्रमुख नेताओं को टिकट मिला है। भाजपा ने इस बार पांच महिला उम्मीदवारों पर भी दांव लगाया है, जो पार्टी की महिला सशक्तिकरण की नीति को दर्शाता है। यह घोषणा आगामी चुनावों के लिए भाजपा की रणनीति और जमीनी तैयारियों को दर्शाती है।
प्रमुख उम्मीदवारों में पूर्व राज्यपाल और भाजपा की वरिष्ठ नेता तमिलिसाई सुंदरराजन शामिल हैं, जिन्हें मायलापुर निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में उतारा गया है। उनका राजनीतिक अनुभव और राज्य में लोकप्रियता पार्टी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन को सत्तूर सीट से टिकट दिया गया है, जो उनकी नेतृत्व क्षमता और स्थानीय पकड़ को दर्शाता है।
राष्ट्रीय महिला मोर्चा की अध्यक्ष वनथी श्रीनिवासन को कोयंबटूर उत्तर से चुनाव लड़ने का मौका मिला है। वह इस सीट से मौजूदा भाजपा विधायक हैं और अपनी सीट बरकरार रखने की कोशिश करेंगी। केंद्रीय राज्य मंत्री एल. मुरुगन अविनाशी के आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे। उनका चुनाव लड़ना राज्य में पार्टी के लिए केंद्रीय नेतृत्व के महत्व को दर्शाता है। भाजपा तमिलनाडु में मुख्य रूप से ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है, जो राज्य में एक मजबूत गठबंधन है।
अन्नामलाई का नाम सूची से बाहर
इस बार की सूची में एक बड़ा नाम गायब है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अन्नामलाई का नाम इस सूची में शामिल नहीं किया गया है। काफी समय से यह कयास लगाए जा रहे थे कि पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई को इस बार चुनाव मैदान में उतारा जाएगा। बताया जा रहा था कि वह कोयंबटूर (नॉर्थ) सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे, जो फिलहाल भाजपा की मौजूदा विधायक वनथी श्रीनिवासन के पास है। अन्नामलाई का नाम न होना कई तरह की अटकलों को जन्म दे रहा है, हालांकि पार्टी ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
एनडीए गठबंधन में भाजपा और एआईएडीएमके के अलावा अन्य घटक दल भी शामिल हैं। इनमें क्षेत्रीय पार्टियां जैसे पट्टाली मक्कल काची (पीएमके), तमिल मनीला कांग्रेस और अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) प्रमुख हैं। यह गठबंधन इस बार चुनाव में मजबूत दावेदारी पेश कर रहा है। इस चुनाव में एनडीए बनाम डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के बीच कड़ी टक्कर होने की उम्मीद है। दोनों ही गठबंधन राज्य में सत्ता हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं।
पीएम मोदी करेंगे चुनाव प्रचार तेज़
चुनावी माहौल को गरमाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार से तमिलनाडु में पार्टी और एनडीए गठबंधन के प्रत्याशियों के लिए चुनाव प्रचार तेज़ करेंगे। प्रधानमंत्री का प्रचार अभियान गठबंधन के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन साबित होगा। उनके दौरे से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और मतदाताओं के बीच एक मजबूत संदेश जाएगा। शनिवार को प्रधानमंत्री चेन्नई में लगभग 100 पार्टी पदाधिकारियों, जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और प्रमुख हितधारकों के साथ एक बैठक भी करेंगे। इस बैठक का उद्देश्य चुनावी रणनीति पर चर्चा करना और जमीनी स्तर पर पार्टी की पहुंच को मजबूत करना है।
तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा के लिए 23 अप्रैल को मतदान होगा। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 6 अप्रैल तय की गई है, जबकि 9 अप्रैल तक नामांकन वापस लिया जा सकता है। विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा 4 मई को की जाएगी। भारतीय निर्वाचन आयोग ने चुनाव की पूरी प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद तमिलनाडु में इस बार कुल 5,67,74,436 मतदाता अपने मत का इस्तेमाल करेंगे। इनमें 12,51,749 मतदाता ऐसे हैं जो पहली बार वोट डालेंगे, जो युवा मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। राज्य में 85 साल से अधिक उम्र के मतदाताओं की संख्या भी काफी है, जिनकी कुल संख्या 3,99,668 है। भारतीय निर्वाचन आयोग ने राज्य में चुनाव के लिए कुल 75,032 मतदान केंद्र बनाए हैं, ताकि सभी मतदाताओं को आसानी से अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अवसर मिल सके।
PM मोदी बोले- जनता चाहती है बदलाव, केरल में कांग्रेस पर बड़ा वार
3 Apr, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को केरल में बीजेपी के बूथ कार्यकर्ताओं से वर्चुअल संवाद करते हुए कांग्रेस और वाम दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि राज्य में इस बार बीजेपी-एनडीए के पक्ष में माहौल बन रहा है और जनता बदलाव चाहती है। पीएम मोदी ने कहा कि तिरुवनंतपुरम स्थानीय निकाय चुनाव में बीजेपी की सफलता इस बात का संकेत है कि आगामी नौ अप्रैल के विधानसभा चुनाव में पार्टी को व्यापक समर्थन मिल सकता है। उन्होंने कहा कि इस बार केरलम सिर्फ नई सरकार नहीं, बल्कि नई व्यवस्था चुनने जा रहा है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि गांधी की कांग्रेस अब खत्म हो चुकी है, अब यह ‘माओवादी मुस्लिम लीग कांग्रेस’ बन गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब यूडीएफ और एलडीएफ एक-दूसरे से लडऩे के बजाय बीजेपी पर ही हमला कर रहे हैं, क्योंकि जनता दोनों से नाराज है। प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबे समय से केरल में यूडीएफ और एलडीएफ के बीच सत्ता बदलती रही, लेकिन तिरुवनंतपुरम के नतीजों ने इस धारणा को तोड़ दिया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे हर घर तक पहुंच बनाएं और मतदान के दिन ज्यादा मेहनत करें। इस दौरान मोदी ने क्रिकेटर संजू सैमसन का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे एक अच्छा खिलाड़ी बड़े मैच में बेहतर प्रदर्शन करता है, वैसे ही कार्यकर्ताओं को भी चुनाव के दिन पूरी ताकत झोंकनी चाहिए।
वायनाड की सांसद से बेहतर हैं आप
संवाद के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया, जब पीएम मोदी ने एक बूथ कार्यकर्ता के समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि यदि उस कार्यकर्ता और वायनाड की सांसद (प्रियंका गांधी) के बीच बहस हो जाए, तो कार्यकर्ता की जीत निश्चित है। प्रधानमंत्री ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे मतदान के दिन तक हर घर से जुडऩे के लिए अतिरिक्त समय दें।
AAP नेता राघव चड्ढा बोले, खामोशी के बावजूद नहीं मानी हार
3 Apr, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़. आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने राज्यसभा (Rajya Sabha) सांसद (MP) राघव चड्ढा (Raghav Chadha) को गुरुवार को बड़ा झटका देते हुए उन्हें उच्च सदन में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया था। साथ ही उन्हें सदन में बोलने के लिए समय आवंटित न करने का भी आग्रह किया था। अब इस फैसले पर राघव चड्ढा ने प्रतिक्रिया दी है। चड्ढा ने एक्स पर लिखा-खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं।
आखिर मेरे बोलने से किसी को क्या दिक्कत
राघव चड्ढा ने कहा कि मुझे जब भी राज्यसभा में बोलने का माैका मिलता है तो मैंने आम आदमी से जुड़े मुद्दों को ही उठाया है। क्या मैं गलत करता हूं। कोई मेरे बोलने पर रोक क्यों लगाना चाहता है। आखिर इन मुद्दों को उठाने से आम आदमी पार्टी का क्या नुकसान हुआ? आखिर क्यों कोई मुझे बोलने से रोकना चाहेगा। आम आदमी को मेरा साथ देने के लिए शुक्रिया। मैं आप से हूं और आपके लिए हूं। जिन्होंने मुझे बोलने से रोका है उन्हें मेरा संदेश है-मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।
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क्या है मामला
आम आदमी पार्टी ने सांसद राघव चड्ढा की जगह अब अशोक मित्तल को राज्यसभा में उपनेता नियुक्त किया है। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को सूचित किया है कि चड्ढा को संसद में बोलने के लिए समय न दिया जाए।
इसके कुछ समय बाद राघव चड्ढा ने एक्स पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में उच्च सदन में उनके हस्तक्षेप थे, जिसे “बुरी नजर” कैप्शन दिया गया।
राजनीति भी गरमाई
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाए जाने के मुद्दे पर दिल्ली भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस फैसले को पार्टी के अंदरूनी संकट और नेतृत्व की कमजोरी का संकेत बताया है। सचदेवा ने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि वह एक कमजोर नेता हैं, जिनमें न तो विपक्ष का सामना करने का साहस है और न ही अपनी पार्टी के भीतर उठ रहे असंतोष से निपटने की क्षमता है।
सचदेवा ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को अपने संसदीय दल का नेता चुनने का अधिकार है, लेकिन जिस तरह राघव चड्ढा को न केवल राज्यसभा में उपनेता पद से हटाया गया, बल्कि उन्हें सदन में बोलने का समय न देने का अनुरोध भी किया गया, यह असामान्य और चिंताजनक है। यह कदम इस बात की ओर इशारा करता है कि चड्ढा ने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व से दूरी बना ली है। उन्होंने कहा कि पहले स्वाति मालीवाल और अब राघव चड्ढा जैसे प्रमुख नेता केजरीवाल से दूरी बना चुके हैं, जो पार्टी के लिए गंभीर संकेत है।
AIMIM की पहली लिस्ट सामने: 12 उम्मीदवारों के नाम और सीटें तय
3 Apr, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Bengal Elections 2026: बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। पहली लिस्ट में 12 उम्मीदवारों का नाम है। इस चुनाव में हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी के साथ AIMIM का गठबंधन है। विधानसभा चुनाव को लेकर ओवैसी और कबीर ने चुनाव प्रचार भी तेज कर दिया है।
किसे कहां से दिया टिकट
AIMIM ने आसनसोल से दानिश अजीज, सुरजापुर से रेजाउल करीम, रघुनाथगंज से इमरान सोआंकी, कांडी से मिसबाहुल इस्लाम खान, मोथाबाड़ी से मोहम्मद मोस्ताहिद हक, नलहाटी से हाजी अंसार एसके साब, मोरारी से तासिर एसके साहब, बारासात से मोनाएम सरदार, करंदीघी से मेहबूब आलम, सूती से असादुल एसके, बसिरहाट दक्षिण से शबाना परवीन और हाबरा से असिक राज मंडल को प्रत्याशी बनाया है।
चुनाव प्रचार किया तेज
विधानसभा चुनाव को लेकर AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी और जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है। उन्होंने मुर्शिदाबाद में एक चुनावी रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सीएम ममता बनर्जी और बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने ममता पर मुस्लिमों का वोट लेने का भी आरोप लगाया।
BJP-ममता एक सिक्के के दो पहलू
रैली को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि बीजेपी और ममता बनर्जी एक ही सिक्के के दो पहलू है। प्रदेश में ममता बनर्जी ने मुसलमानों को वोट बैंक के लिए इस्तेमाल किया है, लेकिन विकास कुछ नहीं किया। इस दौरान ओवैसी ने यह भी दावा किया कि पिछले 50 वर्षों में मुस्लिम समुदाय ने कांग्रेस, वाममोर्चा और तृणमूल कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
हुमायूं ने भी साधा निशाना
गुरुवार को चुनावी रैली के दौरान मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का निर्माण कराने वाले हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मुसलमानों का वोट ममता बनर्जी को जाता है और तीन बार सीएम बनने के बाद मंदिर बनवा रही है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि राजारहाट में ममता बनर्जी मुसलमानों की जमीन लेकर दुर्गा मंदिर का निर्माण करा रही है।
दो चरणों में होगा मतदान
प्रदेश की 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान होगा। पहले चरण के लिए 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। वोटों की गिनती 4 मई को होगी। इस बार टीएमसी और बीजेपी के बीच मुकाबला माना जा रहा है, लेकिन कांग्रेस, लेफ्ट और हुमायूं-ओवैसी के गठबंधन से मुकाबला रोमांचक हो गया है।
बंगाल की राजनीति में नया सियासी खेल: घुसपैठियों के मुद्दे पर BJP-ममता टकराव
3 Apr, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
West Bengal Elections 2026: देश के 5 राज्यों में अगले कुछ दिनों के भीतर विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. हालांकि सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल में इन दिनों सियासी पारा हाई है. तमाम राजनीतिक दलों की तरफ से जमकर बयानबाजी देखने को मिल रही है. बीजेपी आरोप लगा रही है कि बांग्लादेश में घुसपैठियों का कब्जा है. यहां बड़ी संख्या में घुसपैठिए मौजूद हैं. चुनाव के बीच एक्टर और बीजेपी नेता मिथुन चक्रवर्ती ने कहा ने कहा ‘जब तक मेरे बदन में एक बूंद खून रहेगा तब तक कोई माई का लाल पश्चिम बंगाल को बांग्लादेश नहीं बना सकता.’ बीजेपी बंगाल में घुसपैठ वाले मामले को चुनावी मुद्दा बनाने में लगी हुई है.
मिथुन चक्रवर्ती ने कहा कि सीमापार से होने वाला अवैध आवागमन स्थानीय रोजगार के मौकों पर सीधे तरह से असर डालता है. उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में सीमित संसाधन हैं, वहां भी अचानक से आबादी बढ़ रही है. इसका सीधा असर वहां के स्थानीय लोगों पर पड़ता है. उनको नौकरियां और दैनिक मजदूरी के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है.
बंगाल की राजनीति में एक्टिव हुए मिथुन
विशेष गहन पुनरावृति (SIR) को लेकर बंगाल में शुरुआत से ही जमकर बवाल देखने को मिल रहा है. सीएम ममता आरोप लगाती रहीं हैं कि बीजेपी और चुनाव आयोग ने मिलकर राज्य में बड़ी संख्या में लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए हैं. हालांकि बीजेपी हमेशा ही ममता पर राजनीति करने के आरोप लगाती रही है.
SIR को लेकर TMC की तरफ से उठाए जा रहे सवाल पर मिथुन ने कहा कि बीजेपी वोटरों के नाम भी बड़ी संख्या में काटे गए हैं. जिस तरह के आरोप टीएमसी की तरफ से लगाए जा रहे हैं कि यह पूरी तरह से गलत हैं. उन्होंने सीएम ममता पर मदरसों को पैसा देने का आरोप भी लगाया है. मिथुन ने कहा कि बंगाल में इतनी गन्दगी फैल चुकी है कि झाड़ू लेकर साफ़ करना पड़ेगा. इस बार शैतान जाग उठा है. इस बार परिवर्तन होना चाहिए और अगर नहीं हुआ तो आप भी जायेंगे और में भी जाऊंगा.
घुसपैठ को मुद्दा बना रही बीजेपी
भारतीय जनता पार्टी शुरुआत से ही सीएम ममता पर घुसपैठियों को पनाह देने का आरोप लगाती रही है. प्रदेश के स्थानीय नेता हों या फिर दिल्ली में बैठे नेता, सबका घुसपैठ के मुद्दे पर एक ही रुख है. हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बीजेपी की तरफ से पश्चिम बंगाल में TMC के 15 साल के शासन पर 35 पन्नों का ‘श्वेत पत्र’ जारी किया. इसके में कुल मिलाकर पांच मुद्दों को उठाया गया था. श्वेत पत्र’ में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच 2,216.7 किमी लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा में से 569 किमी हिस्सा अभी भी बिना बाड़ के है. जिससे घुसपैठ को बढ़ावा मिला.
बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया था कि राज्य सरकार वोट बैंक बनाने के लिए घुसपैठियों को फर्जी पहचान पत्र लेने में मदद कर रही है. जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसंख्या संतुलन पर असर पड़ा.बीजेपी लगातार इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना रही है, जबकि टीएमसी इन आरोपों को खारिज करती रही है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तेज होने के आसार हैं.
बंगाल चुनाव में कांटे की टक्कर
बंगाल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और टीएमसी के बीच ही मुख्य मुकाबला है. इस चुनाव के जरिए बीजेपी अपना आखिरी किला जीतने की कोशिश में लगी है. साल 2021 के विधानसभा चुनावों में भले ही बीजेपी को बंगाल से अच्छा रिस्पांस मिला हो, लेकिन लोकसभा चुनाव में कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाई थी. उस समय बीजेपी ने महज 12 सीटों जीतीं थीं. हालांकि पार्टी वहां लंबे समय से एक्टिवा बनी हुई है. ऐसे में इस बार के चुनाव नतीजों में देखना होगा कि बीजेपी बंगाल के लोगों का दिल जीत पाती है या फिर लोग एक बार फिर अपना भरोसा सीएम ममता पर ही दिखाते हैं.
सरकार का बड़ा कदम या विवाद? महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष का विरोध जारी
3 Apr, 2026 12:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Women’s Reservation Bill: देश में इन दिनों संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक महिला आरक्षण कानून की चर्चा हो रही है. इस चर्चा के पीछे की वजह इसमें होने वाला संशोधन है. साल 2023 में महिला आरक्षण कानून संविधान के 106 वें संशोधन के रूप में पास हुआ था. उस समय ये तय हुआ था कि इस बिल को नई जनगणना पूरी होने के बाद लागू किया जाएगा. हालांकि अब सरकार का प्रस्ताव है कि इसे 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन किया जाए.
देश की संसद और सभी राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने वाला यह बिल अप्रैल के महीने में ही लाया जा सकता है. हालांकि विपक्षी पार्टियों का कहना है कि इस बिल को लाने से पहले ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई जाए. इसके साथ ही यह भी मांग की थी कि यह बैठक बंगाल चुनाव के बाद ही जाए. लेकिन, सरकार ने चुनाव से पहले ही इस बिल को लाने की तैयारी कर ली है.
क्या है सरकार की इस बिल को लेकर तैयारी?
केंद्र सरकार लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने के लिए एक संशोधन विधेयक लाने की योजना बना रही है. जिसमें से 273 (लगभग एक तिहाई) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. सरकार की पूरी तैयारी है कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन किया जाए. इसके साथ ही महिलाओं के लिए कोटा तय किया जाए. केंद्र सरकार की तरफ से नारी शक्ति वंदन अधिनियम साल 2023 में पारित किया गया था.
बिल को लेकर विपक्ष का क्या है रुख?
महिला आरक्षण को लेकर भले ही तमाम राजनीतिक दलों का एक ही तरह का रुख है. लेकिन एक सवाल भी उठता रहा है कि जब विधेयक को लागू होने में कई वर्ष लगेंगे तो संसद का विशेष सत्र बुलाकर सरकार ने इसे पारित क्यों कराया? सपा सांसद राम गोपाल यादव ने CAPF संशोधन बिल पर कहा कि यह सरकार अपनी संख्या के दम पर सब कुछ गलत कर रही है.इसका खामियाजा जनता भुगत रही है. विपक्षी खेमे से विशेष रूप से कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चुनावों से पहले यह विधेयक लाकर सरकार श्रेय लेना चाहती है.
जयराम ने आपत्ति जताते हुए चुनावों के बाद यानी 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है. इसके साथ यह भी कहा है कि उससे पहले महिला आरक्षण विधेयक लाया गया तो यह चुनाव आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन होगा. विपक्ष का आरोप है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे चुनावी राज्यों के संदर्भ में इस समय विधेयक लाना राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है.
पांच राज्यों में होने वाले हैं चुनाव
सरकार की तरफ से सर्वदलीय बैठक बुलाने के विपक्ष के सुझाव को भी खारिज कर दिया है. इससे यह भी साफ हो गया है कि सरकार की पूरी तैयारी है कि विधेयक को जल्द से जल्द कानूनी रूप देने की तैयारी में है. इसी महीने बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव हैं. इन सभी राज्यों के चुनाव के नतीजे 4 मई को जारी किए जाएंगे.
चुनावों में होगा बिल का असर?
अगले कुछ दिनों में असम, पश्चिम बंगाल, केरल, जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इसके पहले सरकार इस बिल में संशोधन की तैयारी कर रही है. इसके जरिए महिला मतदाताओं में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार पैकेज के तौर पर महिलाओं के सामने इस तरह की योजनाओं को पेश करेगी. उन पर असर पड़ सकता है. विपक्ष इसी बात का विरोध कर रही है कि चुनाव के बाद ही इस बिल को लाया जाए.
बीजेपी की पश्चिम बंगाल यात्रा: सियासी उठापटक और चुनौतियों की कहानी
3 Apr, 2026 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अब करीब है। चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होना है। वहीं वोटों की गिनती 4 मई को होगी। इस विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ दल टीएमसी और बीजेपी के बीच है। वहीं राज्य में अन्य पार्टियां इस तीव्र मुकाबले के कारण हाशिए पर हैं। बीजेपी की स्थापना साल 1980 में हुई थी। यह भारत की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी है। साल 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना पूर्व केंद्रीय मंत्री और स्वतंत्रता सेनानी श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी। पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सियासी रूप से उतार-चढ़ाव की कहानी काफी दिलचस्प है।
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्य के 42 सीटों में से 18 सीटों पर जीत हासिल की, लेकिन साल 2021 के विधानसभा चुनाव में जबरदस्त माहौल बनाने के बाद भी बीजेपी टीएमसी से हरा गई, जिसके बाद से राज्य की सियासी कहानी फिर बदल गई और राज्य में बीजेपी को कई झटके लगे। एक ओर साल 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन काफी खराब रहा, तो वहीं हालिया विधानसभा उपचुनाव में भी सत्तारूढ़ पार्टी ने सभी 4 सीटों पर अपना कब्जा जमाया।
बता दें बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग रणनीति का सबसे अहम पहलू हिंदू एकजुटता को माना जाता है। पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों की आबादी करीब 30फीसदी है। बीजेपी को उम्मीद जताई थी कि पार्टी को हिंदू एकजुटता के अलावा मुस्लिम वोटों का भी फायदा मिलेगा, लेकिन मध्य और दक्षिण बंगाल में वोटों का कोई खास विभाजन नहीं हुआ। यहां पर मुसलमानों ने टीएमसी का समर्थन किया। साल 2019 में बीजेपी की राजनीतिक बढ़त को बड़े पैमाने पर मतुआ-नामसुद्र, राजबंशी और जंगलमहल के आदिवासी समूहों जैसे दलित समूहों के समर्थन से मदद मिली थी। वहीं साल 2024 के नतीजे पूरी तरह से बीजेपी के लिए निराशाजनक नहीं रहे। वहीं पश्चिम बंगाल में कभी सत्ता में न आने वाली बीजेपी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कमर कस चुकी है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या राज्य में बीजेपी की रणनीति सफल होगी।
साल 1977 के चुनावों में जनसंघ ने जनता पार्टी के घटक के रूप में 29 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। इस तरह से हरिपाड़ा भारती बंगाल इकाई के पहले अध्यक्ष बने। फिर साल 1982 में बीजेपी ने पहला विधानसभा चुनाव लड़ा। 1984 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 9 सीटों पर चुनाव लड़ा और 0.4फीसदी वोट हासिल किए। 1991 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 291 सीटों पर चुनाव लड़ा। इस दौरान मत 0.51फीसदी से बढ़ाकर 11.34फीसदी तक पहुंचा। साल 1998 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने दम पर लोकसभा सीट जीती, जोकि पार्टी की राज्य में पहली जीत थी। फिर साल 2014, 2019 और 2024 के चुनावों में पार्टी ने खुद को राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के मुख्य प्रतिद्वंदी के रूप में खुद को स्थापित किया है।
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