राजनीति
भारत-जर्मनी वार्ता: जयशंकर ने व्यापार समझौते के लिए बढ़ाया हाथ
4 Sep, 2025 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने जर्मन समकक्ष योहान वेडफुल के साथ नई दिल्ली में एक प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक की। बैठक भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। बता दें कि यह जर्मन विदेश मंत्री की इस साल चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है।
बातचीत के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने जर्मनी से यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वार्ता को तेज करने के लिए समर्थन मांगा। उन्होंने कहा, हम जर्मनी के समर्थन पर भरोसा करते हैं ताकि यूरोपीय संघ के साथ हमारा रिश्ता और गहरा हो सके। भारत और जर्मनी का बहुपक्षीय सहयोग का एक मजबूत इतिहास रहा है, और मुझे विश्वास है कि आज की हमारी बातचीत इस रिश्ते को और मजबूती देगी। विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत-जर्मनी संबंधों के महत्व पर वेडफुल की बेंगलुरु यात्रा की सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, हम इस बात से सहमत हैं कि यह आपकी यूरोप के बाहर शुरुआती यात्राओं में से एक है और हम आपके भारत आने की बहुत सराहना करते हैं। हम 25 साल की रणनीतिक साझेदारी, 50 साल के वैज्ञानिक सहयोग, और करीब 60 साल के सांस्कृतिक समझौतों का जश्न मना रहे हैं। जैसा कि आपने बेंगलुरु में देखा, एक सदी से अधिक समय से व्यापारिक संबंध भी हैं। मुझे खुशी है कि आपको बेंगलुरु जाने का मौका मिला, जहां आपने तकनीकी सहयोग की अपार संभावनाओं को देखा।
वहीं जर्मन विदेश मंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने के लिए अपने देश के पूर्ण समर्थन की बात कही है। उन्होंने कहा कि जर्मनी समझौते के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इस समझौते को आगे बढ़ाने के लिए यूरोपीय आयोग के साथ अपने प्रभाव का उपयोग करेगा। मंत्री ने कहा, जर्मनी समझौते को जल्द से जल्द लागू करने के लिए पूर्ण समर्थन में है। हम एक मुक्त व्यापार राष्ट्र हैं और भारत के साथ यह समझौता हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है। जर्मनी के विदेश मंत्री ने कहा, एक उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति, दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश और सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में, भारत का सामरिक महत्व बहुत ज्यादा है। अगर हमें अपने सहयोग को और आगे बढ़ाना है, तो हमारी अर्थव्यवस्थाओं को विशेष रूप से बहुत कुछ हासिल करना होगा। मैं कल बेंगलुरु में था, मैंने खुद देखा कि भारत कितना इनोवेशन महाशक्ति और टेक्नोलॉजी का केंद्र बन गया है।
पार्टी से किनारा: के. कविता का फैसला चर्चा में
4 Sep, 2025 08:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बीआरएस से निलंबित किया जाने के एक दिन बाद के कविता ने बुधवार को एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया है। अपने इस्तीफे के साथ कविता ने अपने पिता और बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) के खिलाफ साजिशों का आरोप लगाते हुए परिवार और पार्टी के अंदर की सियासी खींचतान को उजागर किया है। इस्तीफे के बाद कविता ने मीडिया से बातचीत में कई सनसनीखेज दावे किए जो पार्टी में गहरे मतभेदों को दर्शाते हैं। इस्तीफे के बाद कविता ने कहा, मेरा पिता मेरी प्रेरणा हैं, मैं उनके हाथ पकडक़र बड़ी हुई हूं। कविता ने अपनी निलंबन के बाद पांच महिला नेताओं के एकत्र होने और चर्चा करने खुशी जताया और कहा कि महिलाओं को आगे आकर नेतृत्व करना चाहिए, लेकिन जो लोग पार्टी का इस्तेमाल स्वार्थ और अपने फायदे के लिए करना चाहते हैं। वही हमारे परिवार को बांटने की साजिश रच रहे हैं।
मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर बोले सीएम फडणवीस- सरकार ने मराठा समुदाय के हित में निकाला समाधान
3 Sep, 2025 05:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई,। मराठा आरक्षण की मांग को लेकर चल रहा अनशन मंगलवार को खत्म हो गया। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने 5 दिन बाद अपना अनशन तोड़ दिया। महाराष्ट्र सरकार द्वारा उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। जरांगे के इस कदम का सीएम फडणवीस ने स्वागत किया है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अनशन पर बैठे मनोज जरांगे के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा, हमारी सरकार ने मराठा समुदाय के हित में समाधान निकाला है। यह निर्णय समुदाय के लिए नई शुरुआत और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने वाला साबित होगा। प्रदेश सरकार ने जरांगे की प्रमुख मांग, पात्र मराठों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करने को मंजूरी दी है। इस प्रमाण पत्र के आधार पर मराठा समुदाय को ओबीसी वर्ग के तहत आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।
यहां बताते चलें कि मनोज जरांगे ने 29 अगस्त को दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में भूख हड़ताल शुरू की थी। आंदोलन खत्म होने के बाद मराठा समाज में राहत और खुशी का माहौल है, हालांकि कुछ संगठन अभी भी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
शून्य से शिखर की प्रेरक गाथा है संपतिया उइके का राजनीतिक सफर : कृष्णमोहन झा
3 Sep, 2025 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कृष्णमोहन झा लेखक राजनैतिक विश्लेषक
देश में जनजातीय समुदायों की बहुलता वाले राज्यों में मध्यप्रदेश का नंबर सबसे ऊपर है । मध्यप्रदेश की लगभग साढ़े सात करोड़ आबादी का पांचवां हिस्सा आदिवासियों का है और मध्यप्रदेश के जिन जिलों में आदिवासी समुदायों की बहुलता है उनमें मंडला को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। पुण्य सलिला नर्मदा के तट पर बसे मंडला की धरती पर ऐसी अनेक विभूतियों ने जन्म लिया है जिन्होंने आदिवासी समाज के सामाजिक आर्थिक उत्थान के लिए अपने सराहनीय योगदान से न केवल मंडला जिले अपितु संपूर्ण मध्यप्रदेश को गौरवान्वित किया है। इन यशस्वी विभूतियों में संपतिया उइके का नाम प्रमुखता से लिया जाता है जो लगभग डेढ़ वर्षों से मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालय का कार्य भार दक्षता पूर्वक रही हैं। अत्यंत सहज , सरल और विनम्रता की प्रतिमूर्ति संपतिया उइके ने अपने सार्वजनिक जीवन में जो यश अर्जित किया है वह उनके चार दशकों के कठिन संघर्ष , त्याग और तपस्या का प्रतिफल है। संपतिया उइके हमेशा से ही प्रदेश में भाजपा के उन जुझारू नेताओं की अग्रिम पंक्ति में शामिल रही हैं जिन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी। अपने लगभग चार दशक के राजनीतिक सफर में संपतिया उइके ने बड़ी से बड़ी चुनौती को भी हंसकर स्वीकार किया और उस पर जीत हासिल की। यूं तो संपतिया उइके के ऐसे विरोधियों की संख्या भी कभी कम नहीं रही जिनने इस जीवट आदिवासी महिला नेता के पथ में अवरोध खड़े करने में कोई कसर नहीं छोड़ी परंतु अंततः उनके विरोधियों को मुंह की खानी पड़ी। मैं संपतिया उइके के राजनीतिक सफर का साक्षी रहा हूं और यह बात दावे के साथ कह सकता हूं कि संपतिया उइके ने अपनी अद्भुत सहन शक्ति, साहस और सूझबूझ से हमेशा अपने विरोधियों को आश्चर्यचकित किया है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी संपतिया उइके के इन गुणों के कायल हैं और यही कारण है कि संपतिया उइके की गणना मुख्यमंत्री यादव के विश्वासपात्र निकटतम मंत्रिमंडलीय सहयोगियों में की जाती है । संपतिया उइके की सराहनीय कार्यशैली और कर्मठता ने मुख्यमंत्री के इस विश्वास को विगत डेढ़ वर्षों में निरंतर मजबूत किया है। संपतिया उइके के बारे में अक्सर यह कहा जाता है कि वे अन्याय के आगे सिर नहीं झुकाती और बड़े से बड़ा प्रलोभन भी उन्हें उनके कर्तव्य पथ से विचलित नहीं कर सकता। यूं तो संपतिया उइके ने अपने सुदीर्घ राजनीतिक जीवन में अनेकों उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं परन्तु 4 सितंबर 1967 को मंडला जिले के एक छोटे से गांव में जन्मी इस यशस्वी आदिवासी नेता का बचपन अभावों से संघर्ष करते हुए बीता। थोड़ी बड़ी हुई तो पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन के लिए अनिवार्य अर्थोपार्जन हेतु उन्होंने मजदूरी करने से भी परहेज़ नहीं किया। शिक्षार्जन के पश्चात् उन्होंने शिक्षकीय व्यवसाय को अपनी आजीविका का माध्यम बनाया और अल्पकाल में ही विद्यार्थियों की चहेती शिक्षिका के रूप में उनकी ख्याति आसपास के क्षेत्रों तक फैल गई परंतु उनके भाग्य में तो विधाता ने पहले से ही समाज सेवा का क्षेत्र चुन रखा था। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत मंडला जिले के टिकरवारा ग्राम पंचायत के सरपंच का चुनाव जीत कर की । यहां से शुरू हुए अपने राजनीतिक सफर में इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे तीन बार जिला पंचायत की सदस्य निर्वाचित हुईं। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की पुनीत भावना से संपतिया उइके ने महिला स्व-सहायता समूहों के गठन की जो पहल की उसके लिए उन्हें पर्याप्त सराहना मिली। कालांतर में मध्यप्रदेश के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद अनिल माधव दवे के आकस्मिक निधन से रिक्त हुई सीट के लिए भाजपा ने संपतिया उइके का चयन किया । 2023 में संपन्न विधानसभा चुनावों में उन्होंने जब मंडला से राज्य विधानसभा में प्रवेश किया तो मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी। तब से वे मोहन यादव सरकार की महत्वपूर्ण सदस्य बनीं हुईं। राज्य सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों में भी उनकी राय की अपनी अहमियत होती है। संपतिया उइके का राजनीतिक सफर शून्य से शिखर की प्रेरक गाथा से कम नहीं है। उनके राजनीतिक सफर में अभी और कई महत्वपूर्ण पड़ाव आना बाकी हैं। मैं उनके जन्म दिवस के अवसर पर इस लेख के माध्यम से उन्हें हार्दिक बधाई और अनंत शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं।
सीएम योगी के फैसले से गदगद हुई बहन मायावती बोलीं- धन्यवाद
3 Sep, 2025 04:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कानपुर। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कानपुर के प्रसिद्ध बुद्धा पार्क में शिवालय पार्क बनाने के विवादित प्रस्ताव को रद्द करने की खबर का स्वागत किया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार को इस फैसले के लिए धन्यवाद दिया और उम्मीद जताई कि भविष्य में सरकार इस तरह के विवादास्पद कदमों को रोकने के लिए सख्ती बरतेगी। मायावती ने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम सामाजिक शांति, भाईचारा और सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
मायावती ने अपने बयान में कहा, भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां विभिन्न धर्मों और जातियों के लोग अपने-अपने पूजा स्थलों के साथ सह-अस्तित्व में रहते हैं। बुद्धा पार्क बौद्ध धर्म और अम्बेडकरवादी विचारधारा के लिए महत्वपूर्ण है। इस पवित्र स्थल पर किसी अन्य धर्म के पूजा स्थल का निर्माण प्रस्तावित करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह सामाजिक अशांति और घृणा को बढ़ावा दे सकता है। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने बयान में कहा कि यूपी सरकार ने बुद्धा पार्क में शिवालय पार्क बनाने के प्रस्ताव को रद्द कर दिया है, जिसका वह स्वागत करती हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि भविष्य में इस तरह के षड्यंत्रों को गंभीरता से लिया जाए और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। मायावती ने कहा, “मैं उम्मीद करती हूं कि सरकार आगे भी इस तरह के विवादों को रोकने के लिए तत्पर रहेगी ताकि समाज में शांति, व्यवस्था और भाईचारा कायम रहे। मायावती ने अपने बयान में भारत के संविधान का हवाला देते हुए कहा कि देश की धर्मनिरपेक्षता विभिन्न धर्मों और जातियों के सह-अस्तित्व पर आधारित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बुद्धा पार्क जैसे स्थल बौद्ध धर्म और अम्बेडकरवादी विचारधारा के लिए पवित्र हैं, और इनका सम्मान करना हर सरकार का कर्तव्य है। उन्होंने सरकार से तत्काल इस तरह के प्रस्तावों को रोकने की मांग की थी, जिसके बाद सरकार ने यह कदम उठाया।
5 से 7 सितंबर तक होगी अखिल भारतीय समन्वय बैठक, शामिल होंगे जेपी नड्डा
3 Sep, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जोधपुर:
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बुधवार सुबह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत से जोधपुर में मुलाकात की। यह मुलाकात लाल सागर स्थित आदर्श डिफेंस एंड स्पोर्ट्स एकेडमी में हुई, जहां भागवत ठहरे हुए हैं। दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई, जिसने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाओं को हवा दे दी है।
हालांकि मुलाकात का आधिकारिक ब्यौरा सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें राजस्थान भाजपा संगठन में संभावित बदलाव और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
जोधपुर में RSS की बड़ी बैठक
मोहन भागवत 1 सितंबर से जोधपुर में हैं और 10 सितंबर तक यहीं ठहरेंगे। इस दौरान वे 5 से 7 सितंबर तक होने वाली RSS की अखिल भारतीय समन्वय बैठक में हिस्सा लेंगे। इसमें संघ परिवार से जुड़े 32 संगठनों के शीर्ष नेता शामिल होंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी इस बैठक में मौजूद रहेंगे।
मंगलवार को संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले, सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, सी.आर. मुकुंदा, अरुण कुमार, रामदत्त चक्रधर, आलोक कुमार, अतुल लिमये और कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मनमोहन वैध सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी जोधपुर पहुंचे।
वसुंधरा की सक्रियता और बयान
वसुंधरा राजे सोमवार को जोधपुर आई थीं और मंगलवार को जैसलमेर के मोहनगढ़ में पूर्व सांसद कर्नल सोनाराम को श्रद्धांजलि देने पहुंची थीं। उनकी मोहन भागवत से मुलाकात को लेकर अब भाजपा में उनकी भूमिका और भविष्य पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में वसुंधरा राजे ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी, जिसे उनकी राजनीतिक सक्रियता का संकेत माना गया। इसके अलावा धौलपुर में एक धार्मिक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था—
“वनवास सभी के जीवन में कभी न कभी आता है, लेकिन यह भी सच है कि वनवास आता है तो जाता भी है।”
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा नए विवाद में फंसे, चुनाव आयोग ने भेजा नोटिस
3 Sep, 2025 03:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मतदाता सूची पर सवाल खड़े करने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता पवन खेड़ा एक नए विवाद में घिरते नजर आ रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने दो अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करवाया है, यानी उनके पास दो वोटर आईडी नंबर हैं। इस मामले को लेकर अब चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
दिल्ली के जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि पवन खेड़ा को एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकरण करने के मामले में अपना पक्ष रखना होगा। इसके लिए उन्हें 8 सितंबर सुबह 11 बजे तक का समय दिया गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी की तरफ से खेड़ा को भेजे गए नोटिस में कहा गया मेरे संज्ञान में लाया गया है कि आपने एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराया है। यह कार्य जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा के तहत दंडनीय अपराध है। अतः आपको कारण बताना होगा कि आपके विरुद्ध कार्रवाई क्यों न की जाए।
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर पवन खेड़ा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पवन खेड़ा ने दो विधानसभा क्षेत्रों में वोटर आईडी बनवा रखी है एक जंगपुरा विधानसभा क्षेत्र (पूर्वी दिल्ली) में और दूसरा नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र (नई दिल्ली लोकसभा) में। मालवीय ने दावा किया कि यह न केवल कानूनी उल्लंघन है, बल्कि इससे वोट की चोरी और दोहरे मतदान की आशंका भी पैदा होती है। उन्होंने चुनाव आयोग से तुरंत कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कांग्रेस बड़ी वोट चोर है। खेड़ा के पास दो सक्रिय ईपीआईसी नंबर कैसे हैं? क्या उन्होंने दो बार वोट डाला? इसकी जांच होनी चाहिए।
आवेदन के बाद भी आयोग ने नाम नहीं हटाया: पवन खेड़ा
भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए पवन खेड़ा ने कहा कि यह सब उन्हें भी अमित मालवीय की पोस्ट से ही पता चला। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने 2016-17 में ही एक मतदाता सूची से नाम हटवाने के लिए आवेदन किया था लेकिन चुनाव आयोग ने वह नाम अभी तक नहीं हटाया। खेड़ा ने कहा मैंने वर्षों पहले पुराने वोट को हटाने के लिए कहा था। अब यदि वह अभी तक नहीं हटा तो इसमें मेरी गलती नहीं बल्कि चुनाव आयोग की लापरवाही है। खेड़ा ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा, चुनाव आयोग को बदनाम कर रही है। मालवीय ने जिस तरह से सुबह-सुबह यह स्टंट किया, उससे उन्होंने खुद ही चुनाव आयोग की निष्पक्षता और उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर दिया।
बिहार चुनाव 2025: अमित शाह ने बुलाई अहम बैठक सीट बंटवारे को लेकर हलचल तेज
3 Sep, 2025 12:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में बीजेपी के शीर्ष नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। यह बैठक 3 सितंबर यानी आज को होगी, जिसमें बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्रियों सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा सहित कई वरिष्ठ नेता मिल होंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनावी रणनीति, सीट बंटवारे और विपक्ष की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ का जवाब तैयार करना है, नीतीश कुमार की कथित नाराजगी और NDA गठबंधन की एकता को मजबूत करने पर भी चर्चा होने की संभावना है।
चुनावी रणनीति पर शाह हुए फोकस
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों के लिए 3 सितंबर को दिल्ली में एक अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, नित्यानंद राय, बिहार प्रभारी विनोद तावड़े और सह-प्रभारी दीपक प्रकाश सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगें।आज की इस अहम बैठक में बीजेपी के विधायकों के प्रदर्शन का रिपोर्ट कार्ड पेश किया जाएगा और स्थानीय स्तर पर उनके प्रति जनता की राय पर विचार-विमर्श होगा। इसके अलावा, विपक्ष के ‘वोट चोरी’ जैसे मुद्दों का जवाब देने के लिए सनातन जैसे भावनात्मक मुद्दों को उठाने की रणनीति पर भी चर्चा हो सकती है।
नीतीश की भूमिका
बिहार में NDA गठबंधन की एकता को प्रदर्शित करना इस बैठक का एक प्रमुख उद्देश्य है। हाल ही में नीतीश कुमार की नाराजगी की खबरों के बीच, अमित शाह इस बैठक के जरिए गठबंधन के अंदरूनी मतभेदों को दूर करने की कोशिश कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार के नेतृत्व को मजबूती देने और गठबंधन की एकजुटता का संदेश देने पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा, शाह बिहार में गैर-पारंपरिक बीजेपी वोटरों को लुभाने के लिए ‘महाराष्ट्र मॉडल’ को लागू करने की सलाह दे सकते हैं, जैसा कि उन्होंने अपने पिछले बिहार दौरे में सुझाया था।
सीट बंटवारे पर मंथन
बिहार विधानसभा चुनाव में NDA के घटक दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर भी चर्चा होगी। सूत्रों के मुताबिक, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 20 से अधिक सीटें मिलने की संभावना कम है, जबकि जीतन राम मांझी की HUM और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को 10-10 सीटें दी जा सकती हैं। सीट बंटवारे पर सहमति बनाने के लिए शाह विभिन्न नेताओं से फीडबैक लेंगे और औपचारिक ऐलान से पहले रणनीति को अंतिम रूप दे सकते हैं।
वोटर अधिकार यात्रा का जवाब
विपक्षी गठबंधन, खासकर RJD और कांग्रेस, ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के जरिए बीजेपी पर हमलावर है। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की सक्रियता से विपक्ष अपनी जमीन मजबूत करने में जुटा है। इस बैठक में बीजेपी विपक्ष के इस नैरेटिव को काटने और बूथ-स्तर पर संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम करेगी। इसके लिए डिजिटल कैंपेन, प्रचार रथ और जनसभाओं के जरिए मतदाताओं को लुभाने की योजना बनाई जा सकती है।
पीएम मोदी का बिहार दौरा
बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी बिहार दौरे जो 17 सितंबर को होनी है, उसकी तैयारियों पर भी चर्चा होगी। जिसमें वे कई परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे. इसे चुनावी माहौल को गरमाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा, बीजेपी ने अपने विधायकों के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर का आकलन करने के लिए सर्वे रिपोर्ट तैयार की है, जिस पर भी इस बैठक में विचार-विमर्श होगा।
बिहार बंद का ऐलान
NDA ने 4 सितंबर को बिहार बंद का ऐलान किया है, जिसका उद्देश्य विपक्ष के मुद्दों को कमजोर करना और जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराना है। इस बंद के सियासी प्रभाव पर भी बैठक में विचार हो सकता है।
दो वोटर आईडी पर घेरे पवन खेड़ा, भाजपा ने बोला हमला, चुनाव आयोग ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब
3 Sep, 2025 10:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: कथित वोट चोरी पर नेता विपक्ष राहुल गांधी द्वारा संसद से सडक़ तक मचाए जा रहे हो हल्ला और हंगामे के बीच भाजपा ने कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। भाजपा नेता अमित मालवीय ने दावा किया है कि कांग्रेस परिवार का नजदीकी बने रहने में कभी भी पीछे नहीं रहने वाले पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा के पास दिल्ली में दो वोटर आईडी कार्ड हैं। सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि पवन खेड़ा के पास दो सक्रिय मतदाता पहचान पत्र हैं, जो जंगपुरा और नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्रों में हैं। ये क्रमश: पूर्वी दिल्ली और नई दिल्ली लोकसभा सीटों के अंतर्गत आते हैं। उन्होंने लिखा है कि अब चुनाव आयोग को यह जांच करनी है कि पवन खेड़ा के पास दो मतदाता पहचान पत्र कैसे आए और क्या उन्होंने कई बार मतदान किए हैं, जो चुनावी कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है।
उधर, दिल्ली निर्वाचन कार्यालय ने प्रवक्ता पवन खेड़ा को नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब मांगा है। उन्हें यह नोटिस एक से ज्यादा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में अपना पंजीकरण कराने के लिए जारी किया गया है और उनसे छह दिन के अंदर जवाब देने के लिए कहा गया है। वहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा है कि वोटर सूची में अगर दो जगह उनका नाम है, तो इसमें चुनाव आयोग की गलती है और आयोग को ये बताना चाहिए कि उनके नाम पर किससे वोट दिलवाया जा रहा है।
कांग्रेस-राजद ने मेरी मरी मां को दी गाली, बिहार दे जवाब
3 Sep, 2025 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: बिहार के दरभंगा में कांग्रेस के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को कथित रूप से गाली देने के मामले में मंगलवार को पीएम मोदी ने खुद अपनी पीड़ा बिहार की जनता के सामने रखी। प्रधानमंत्री ने दिल्ली से बिहार की जनता को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि बिहार में कुछ दिन पहले जो कुछ हुआ, उसकी मैंने कल्पना नहीं की थी। मेरी उस मां को राजद-कांग्रेस के मंच से भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं, जिसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है, जिसका शरीर भी अब नहीं है। यह बहुत ही दुख, कष्ट और पीड़ा देने वाला है। उस मां का क्या गुनाह है कि उसे भद्दी गालियां सुना दी गईं। एक गरीब मां की तपस्या, उसके बेटे की पीड़ा ये शाही खानदानों में पैदा हुए युवराज नहीं समझ सकते।
ये गालियां सिर्फ मेरी मां का अपमान नहीं, ये देश की हर मां-बहन, बेटी का अपमान है। इस घटना की जितनी पीड़ा मेरे दिल में है, उतनी ही तकलीफ मेरे बिहार के लोगों के दिल में भी है। 20 दिन बाद नवरात्र शुरू होगी इसके बाद छठ मइया की पूजा होगा। छठ का पर्व मनाया जाएगा। भारत की धरती ने मां का अपमान कभी बर्दाश्त नहीं किया है। मैं बिहार के लोगों से भी कहूंगा, इस अपमान की भरपाई बिहार के हर बेटे की जिम्मेदारी है। राजद और कांग्रेस के नेता जहां भी जाएं, जिस गली में भी जाएं। उन्हें चारों तरफ विरोध की आवाज आनी चाहिए।
लालू की राह पर केसीआर.....बेटी के कविता को पार्टी से किया बाहर
2 Sep, 2025 11:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हैदराबाद। तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने अपनी बेटी के कविता के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। केसीआर ने मंगलवार को उन्हें बीआरएस यानी भारत राष्ट्र समिति से निलंबित किया है। खबर है कि पार्टी के खिलाफ बयानबाजी के चलते उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। कुछ दिनों पहले ही कविता ने बीआरएस नेताओं पर ही केसीआर की छवि खराब करने के आरोप लगा दिए थे।
बीआरएस का कहना है कि कविता का मौजूदा व्यवहार और उनकी ओर से की जा रहीं गतिविधियां पार्टी की छवि को खराब कर रही थीं, इसकारण पार्टी अध्यक्ष और पूर्व सीएम केसीआर ने तत्काल प्रभाव से कविता को निलंबित करने का फैसला किया है।
खास बात है कि 22 अगस्त को विदेश यात्रा के दौरान भी बीआरएस ने कविता के खिलाफ कार्रवाई की थी। उस दौरान उन्हें टीबीजीकेएस यानी तेलंगाना बोग्गु गनी कर्मिका संगम के अध्यक्ष पद से अचानक हटा दिया गया था। उन्होंने पार्टी के नेताओं पर उनके खिलाफ साजिश करने के आरोप लगाए थे। साथ ही कहा था कि पद से हटाया जाना राजनीति से प्रेरित कदम था।
उन्होंने आरोप लगाए थे कि उनकी जानकारी के बिना पार्टी ऑफिस में चुनाव हुआ, जो संभावित रूप से श्रम कानून का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा था, पार्टी के अंदर जिस तरह से काम हो रहा था, उसपर सवाल खड़ा करने के चलते मेरे खिलाफ द्वेष रखा गया। हालांकि, उन्होंने तब किसी भी नेता का नाम खुलकर नहीं लिया था।
बिहार में सत्ताधारी दल के नेता भ्रष्टाचार में लिप्त : दिग्विजय सिंह
2 Sep, 2025 10:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की गठबंधन सरकार पर भ्रष्टाचार में भागीदार होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जहाँ भी डबल इंजन की सरकार है, वहाँ भ्रष्टाचार एक व्यापार की तरह फल-फूल रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार में सत्ताधारी दल के नेता भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। कांग्रेस नेता का यह बयान उस समय में आया है जब बिहार में विधानसभा चुनाव इस साल अक्टूबर या नवंबर में होने की संभावना है।
पत्रकारों के द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी की हाइड्रोजन बम वाली टिप्पणी के बारे में पूछने पर, दिग्विजय सिंह ने कहा कि हाइड्रोजन बम का इंतजार कीजिए। राहुल गांधी ने हाल ही में दावा किया था कि वह जल्द ही बीजेपी के खिलाफ वोट चोरी के आरोपों पर एक बड़ा खुलासा करुंगा। उन्होंने कहा था कि महादेवपुरा से जुड़ा जो खुलासा हुआ, वह सिर्फ एक परमाणु बम था।
बिहार में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में बीजेपी, जेडीयू और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) शामिल हैं। यह गठबंधन एक बार फिर अपनी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश करेगा। वहीं, विपक्षी इंडिया ब्लॉक, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), कांग्रेस और वामपंथी दल शामिल हैं, नीतीश कुमार को सत्ता से हटाने का प्रयास करेगा।
मौजूदा विधानसभा की स्थिति: बिहार विधानसभा में कुल 243 सदस्य हैं। एडीए के पास 131 सदस्य (भाजपा के 80, जदयू के 45, हम(एस) के 4 और 2 निर्दलीय) शामिल है। वहीं इंडिया ब्लॉक के पास 111 सदस्य (आरजेडी के 77, कांग्रेस के 19, सीपीआई (एमएल) के 11, सीपीआई (एम) के 2 और सीपीआई के 2) सदस्य शामिल है। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने अभी तक चुनाव की आधिकारिक तारीखों की घोषणा नहीं की है।
अप्पू और पप्पू पूरी तरह ड्रामेबाज....जनता उन्हें सबक सिखाएगी:उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा का हमला
2 Sep, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बिहार के नेता तेजस्वी यादव पर परोक्ष रूप से हमला कर उन्हें अप्पू और पप्पू बताया। सिन्हा ने दोनों विपक्षी नेताओं पर सनातनी संस्कृति को नुकसान पहुँचाने और लोकतंत्र को नष्ट करने का आरोप लगाया। बिहार के उपमुख्यमंत्री सिन्हा ने कहा कि सोने का चम्मच लेकर पैदा हुए अप्पू और पप्पू दोनों ही करुणा की राजनीति में लिप्त हैं। वे बिहार को गाली देने वालों का सम्मान करते हैं। वे लोकतंत्र के विध्वंसक हैं। वे हमारी सनातनी संस्कृति को भी नुकसान पहुँचाते हैं। वे सबसे बड़े डाकू हैं। हालाँकि, जनता उन्हें सबक सिखाएगी।
डिप्टी सीएम सिन्हा ने कहा कि राहुल गांधी तमाशा करना चाहते हैं। जो भ्रष्टाचार की माँ की गोद में पला-बढ़ा हो, जिसने उग्रवाद, अपराध, भ्रष्टाचार को पाला हो, वहां 140 करोड़ जनता को अपना परिवार मानकर उनकी सेवा करने वाले देशभक्त के बारे में कुछ भी कहे, जनता विश्वास नहीं करेगी। ये दोनों, अप्पू और पप्पू, पूरी तरह से ड्रामा पर उतर आए हैं, अपने पद की गरिमा गिरा रहे हैं... संवैधानिक संस्था को बदनाम कर रहे हैं।
भाजपा पर वोट चोरी के आरोपों और भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा संशोधित मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को उजागर करने के लिए राहुल गांधी द्वारा शुरू की गई 16 दिवसीय यात्रा पटना में संपन्न हुई। यह रैली 18 अगस्त को सासाराम में राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव के साथ शुरू हुई थी। वहाँ से, यह रैली 25 जिलों से होते हुए औरंगाबाद, गयाजी, सीवान और अन्य जिलों तक पहुँची।
राहुल गांधी पर पप्पू यादव का भरोसा: देश, जनता और संविधान की गारंटी
2 Sep, 2025 01:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने हाल ही में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि जब तक राहुल गांधी हैं, तब तक देश में संविधान, लोकतंत्र और जनता सुरक्षित हैं। पप्पू यादव ने यह बात पटना में राहुल गांधी की 16 दिवसीय मतदाता अधिकार यात्रा के समापन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि बिहार में बदलाव की गूंज सुनाई दे रही है और लोग राहुल गांधी पर पूरा भरोसा करते हैं क्योंकि उन्होंने लोगों के अधिकारों की रक्षा का जिम्मा उठाया है। यह यात्रा राहुल गांधी द्वारा शुरू की गई थी जिसका उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा कथित वोट चोरी और भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को उजागर करना था। यह यात्रा 18 अगस्त को सासाराम से शुरू हुई थी, जिसमें राहुल गांधी के साथ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव भी मौजूद थे। यात्रा बिहार के 25 से अधिक जिलों से होकर गुजरी। इस यात्रा में केवल बिहार के ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के कई बड़े नेता शामिल हुए। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के यूसुफ पठान और ललितेश पति त्रिपाठी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, सीपीआई (एमएल) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का नाम शामिल है। पप्पू यादव ने कहा कि बिहार के युवा और गरीब पूरी तरह से राहुल गांधी के साथ खड़े हैं। यह यात्रा इंडिया गठबंधन के नेताओं और युवाओं के बीच एक नई उम्मीद जगाने का काम कर रही है।
राहुल गांधी को राहत या रुकावट? सिखों पर टिप्पणी को लेकर याचिका पर सुनवाई कल
2 Sep, 2025 12:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रयागराज। लोकसभा में विपक्ष के नेता एवं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की अर्जी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई अब तीन सितंबर को होगी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ कर रही है। सोमवार को सुनवाई शुरू होने के बाद एक पीठ ने सुनवाई को स्थगित करते हुए तीन सितंबर की डेट लगा दी है। अमेरिका में कथित तौर पर सिखों पर टिप्पणी करने के मामले में वाराणसी के नागेश्वर मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए वाराणसी के एमपी-एमएलए कोर्ट में अर्जी दी है। जिसे सुनवाई के लिए कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इसके खिलाफ राहुल गांधी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राहुल गांधी ने आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दाखिल की है।
यह मामला सितंबर 2024 का है। राहुल गांधी ने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर कहा था कि भारत में सिखों के लिए माहौल अच्छा नहीं है, क्या सिख पगड़ी पहन सकते हैं, कड़ा रख सकते हैं और गुरुद्वारे जा सकते हैं? उनके इस बयान को भड़काऊ और समाज में विभाजनकारी बताते हुए विरोध हुआ था। वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा ने इस बयान के खिलाफ सारनाथ थाने में एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की लेकिन सफलता न मिलने पर उन्होंने अदालत का रुख किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट (द्वितीय) ने 28 नवंबर 2024 को यह कहते हुए वाद खारिज कर दिया कि मामला अमेरिका में दिए गए भाषण से जुड़ा है और यह उनके क्षेत्राधिकार से बाहर है। इसके बाद नागेश्वर मिश्रा ने सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका दाखिल की जिसे 21 जुलाई 2025 को विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए) की अदालत ने स्वीकार कर लिया। अब इस फैसले के खिलाफ राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की है। दलील दी गई है कि वाराणसी अदालत का आदेश गलत, अवैध और अधिकार क्षेत्र से बाहर है। लिहाजा जब तक यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है तब वाराणसी अदालत के आदेश पर रोक लगाई जाए।
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